Short Story. अपने बच्चों से प्यार करने वाले मातापिता चाहते हैं कि उन्हें हर खुशी, हर सुविधा, दुनिया की हर नेमत मिले. इस के लिए वे पूरा प्रयास भी करते हैं. कई मांबाप तो बच्चों की इच्छा पूरी करने के लिए अपनी औकात के बाहर तक चले जाते हैं. लेकिन ऐसा शायद कोई विरला ही होगा जो बेटी की खुशी के लिए अलग सल्तनत खड़ी कर दे.
अगर किसी की बेटी की चाहत हो तो वह ज्यादा से ज्यादा उस के लिए राजकुमारियों जैसे कपड़े बनवा सकता है, महंगे से महंगे जेवर खरीद कर दे सकता है, हीरेजवाहरात का ताज पहना सकता है. पर बेटी के लिए पूरी सल्तनत खड़ी कर देना संभव नहीं लगता, वह भी आज के जमाने में. लेकिन अमेरिका के वर्जीनिया प्रांत के एबिंगडन क्षेत्र के रहने वाले जेरेमिया हीटन ने अपनी 7 वर्षीय बेटी एमिली के लिए ऐसा कर दिखाया है.
जेरेमिया हीटन ने अपनी बेटी के लिए मिस्र और सूडान के बीच एक नया राज्य बनाया है. दरअसल कुछ समय पहले एमिली ने बातोंबातों में अपने पिता से पूछा था कि क्या वह वास्तविक जीवन में कभी राजकुमारी बन पाएगी.
यह बात सीधे जेरेमिया के दिल में उतर गई. इस के बाद उन्होंने बेटी को वास्तविक जीवन में राजकुमारी बनाने का निश्चय कर लिया. इस के लिए वह किसी ऐसी जगह की खोज में लग गए, जिस पर किसी का मालिकाना हक न हो.
आखिर काफी लंबी खोज के बाद उन्हें मिस्र और सूडान के बीच 800 वर्गमील का एक विवादित क्षेत्र बिर तालिब मिल गया. यह ऐसी जगह थी जिस पर न सूडान दावा करता था और न मिस्र. जेरेमिया हीटन ने इसी जगह अपनी बेटी के लिए नई सल्तनत खड़ी करने का फैसला कर लिया.
इस क्षेत्र को देखने के बाद हीटन ने अपने बच्चों से कह दिया कि नई सल्तनत के लिए अपना झंडा तैयार किया जाए. बच्चों ने खुद ही झंडा डिजाइन किया, जिस पर लिखा गया हीटन किंगडम. हीटन ने बिर तालिब जा कर वह झंडा फहरा दिया और घर लौट कर घोषणा कर दी कि अब उन की बेटी को प्रिंसेस एमिली कहा जाए. पति और बेटी को उत्साहित देख कर हीटन की पत्नी एमिली के लिए ताज खरीद लाई ताकि उसे अहसास हो कि वह वाकई राजकुमारी बन गई है.
अब हीटन का कहना है कि वह अफ्रीकी देशों से अपनी नई सल्तनत को मान्यता देने के लिए बात करेंगे. मिस्र और सूडान के दूतावासों ने हीटन के दावे पर कोई टिप्पणी नहीं की है यानी दोनों देशों को उन की सल्तनत पर कोई आपत्ति नहीं है. Short Story






