Love Affair Crime. शादीशुदा हसीना और अनवर ने अपनेअपने जीवनसाथियों से विश्वासघात कर के अवैध संबंध तो बना लिए लेकिन इन्हीं संबंधों की वजह से वह ऐसा अपराध कर बैठे, जिस के बारे में उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था. कोर्ट में चल रहे उस अपराध से निपटने के लिए उन्होंने एक ऐसी चाल चली कि…  

18 मार्च, 2014 की रात 9 बजे खाना खाने के बाद फिरोज अहमद पत्नी फरजाना के साथ बिस्तर पर लेटा ही था कि उस के मोबाइल फोन की घंटी बजी.

मोबाइल की स्क्रीन को उस ने गौर से देखा, उस पर नाम की जगह नंबर था. वह भी उस की जानपहचान वालों में से किसी का  नहीं था. फिर भी उस ने फोन रिसीव कर के जैसे ही ‘हैलो’ कहा. दूसरी ओर से किसी ने रौबदार आवाज में कहा, ‘‘फिरोज बोल रहे हो न?’’

‘‘जी, मगर आप कौन?’’

‘‘मेरी बात गौर से सुन. कोर्टकचहरी का चक्कर छोड़ और मुकदमे से अपना हाथ पीछे खींच ले. क्योंकि अगर अनवर को सजा हुई तो उसी तरह तेरी भी हत्या कर दी जाएगी, जैसे 4 साल पहले तेरे दोनों बेटों की कर दी गई थी. उन्हीं की लाशों की तरह तेरी लाश का भी पता नहीं चलेगा.’’

इस के बाद फोन कट गया. फिरोज ने उसी नंबर पर पलट कर फोन किया तो पता चला कि फोन बंद कर दिया गया है.

करीब 4 साल पहले फिरोज के 4 और 6 साल के 2 बेटे घर के बाहर खेलते हुए रहस्यमय तरीके से गायब हो गए थे, जिन का आज तक पता नहीं चल सका था. फोन पर बात होने के बाद फिरोज को लगा कि उन्हीं लोगों ने उस के बच्चों को गायब किया है.

बच्चों की हत्या की बात सुन कर फिरोज सन्न रह गया था. मोबाइल से आ रही आवाज बगल में लेटी फरजाना ने भी सुन ली थी. बेचैन हो कर वह उठ बैठी थी. फिरोज भी परेशान था. उसे इसी तरह फोन किया जा रहा था. फोन करने वाला हसीना और अनवर का नाम ले कर मुकदमा वापस लेने की बात कर रहा था.

फिरोज के पास इस से पहले जो फोन किए गए थे, उन में सिर्फ मुकदमा वापस लेने को कहा गया था, लेकिन इस बार तो उसे जान से मारने की धमकी दी गई थी. इसलिए फोन पर बात होने के बाद फिरोज और उस की पत्नी परेशान हो उठी थी.

सुबह होते ही फिरोज पत्नी को साथ ले कर थाना गोरखनाथ पहुंच गया था. थानाप्रभारी वृजेंद्र कुमार सिंह को उस ने सारी बात बताई तो उन्होंने फिरोज को मिल रही धमकियों को गंभीरता से लिया. उन्होंने अनवर अली और हसीना के खिलाफ भादंवि की धारा 504, 506, 116 के तहत रिपोर्ट दर्ज करा कर जांच शुरू कर दी.

हसीना और अनवर अली प्रेमीप्रेमिका थे. फोन पर दी गई धमकियों से साफ था कि उन्हीं दोनों ने फिरोज के बेटों जाहिद और वाहिद का अपहरण किया था. उन्होंने फिरोज के बेटों का अपहरण क्यों किया, यह जानने के लिए हमें 4 साल पीछे जाना होगा, जब मानवता को शर्मसार करने वाली इस कहानी ने जन्म लिया था.

45 वर्षीया हसीना उत्तर प्रदेश के जिला गोरखपुर के चिलुआताल के रहने वाले शौकत अली की 4 बेटियों में सब से बड़ी थी. मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मी हसीना अपने नाम की ही तरह हसीन थी. उस की तीनों बहनें भी उस से कम नहीं थीं. शौकत अली के पास भले ही दौलत नहीं थी, मगर बेटियां खूबसूरती की दौलत से लबरेज थीं.

उन की खूबसूरती ने शौकत अली की नींद उड़ा दी थी. यही वजह थी कि हसीना के सयानी होते ही उस के लिए लड़का देखने लगे थे.

अपनी इज्जत बचाने के लिए उस ने पड़ोस के ही मोहल्ले घोसीपुरवा में रहने वाले इकबाल अहमद उर्फ अरबी से हसीना का निकाह कर दिया. हसीना के मुकाबले अरबी की उम्र बेशक ज्यादा थी, लेकिन वह काफी पैसे वाला था. उस की पहली बीवी की मौत बरसों पहले हो चुकी थी. उस से एक बेटा और एक बेटी थी. कमसिन और खूबसूरत बीवी पा कर जहां अरबी खुश था, वहीं हसीना के अरमानों पर पानी फिर गया था.

उम्र में लंबा फासला होने की वजह से हसीना इस निकाह से जरा भी खुश नहीं थी. उस ने अपनी जिंदगी को ले कर जो हसीन सपने बुने थे, अधेड़ से विवाह होने पर वे बिखर गए थे. खेलने खाने की उम्र में ही उस पर 2-2 बच्चों के परवरिश की जिम्मेदारी आ गई थी.

हसीना ने इसे अपना मुकद्दर माना और अरबी के साथ रहने लगी. करीब साल भर बाद हसीना एक बेटे की मां बनी, जिस का नाम समीर उर्फ सैफुल्ला रखा गया. प्यार से सभी उसे सलमान खान कहते थे.

अरबी के पड़ोस में अनवर अली उर्फ बड़े रहता था. पड़ोसी होने की वजह से दोनों में पटती भी खूब थी. शादीशुदा अनवर कसरती बदन का गबरू जवान था. पड़ोसी और दोस्त होने की वजह से वह अरबी के घर भी आताजाता था. उस ने हसीना को देखा तो उस पर उस का दिल आ गया. पति का दोस्त था, इसलिए जल्दी ही हसीना उस से खुल गई और उस से खूब बतियाने लगी.

बातचीत में ही हसीना ने अनवर की आंखों से उस की चाहत को समझ लिया था. वह अधेड़ पति से असंतुष्ट तो थी ही, इसलिए उस का भी झुकाव अनवर की तरफ हो गया. इस का नतीजा यह निकला कि जल्दी ही दोनों के बीच शारीरिक संबंध बन गए.

सभी जानते थे कि हसीना जवान है और उस का पति अधेड़, ऐसे पति की गैरमौजूदगी में जवान अनवर का आनाजाना चर्चा का विषय बन गया. जब यह बात अरबी के कानों तक पहुंची तो दोस्त की गद्दारी से उसे बहुत दुख हुआ.

लेकिन अरबी ने अनवर से शिकायत करने के बजाय उसी के अंदाज में उसे जवाब देने का निश्चय किया. अनवर से बदला लेने के लिए अरबी भी अनवर के घर आनेजाने लगा. पैसों के बल पर उस ने उस की बीवी को फांस लिया और अवैध संबंध बना लिए.

जब इस बात की जानकारी अनवर को हुई तो उस ने अरबी से कुछ कहने के बजाय अपनी पत्नी को तलाक दे दिया. पत्नी दोनों बच्चों को ले कर मायके चली गई. पत्नी के जाने के बाद अनवर घर में अकेला रह गया.

अनवर हसीना के प्यार में इस कदर डूबा था कि पत्नी और बच्चों के चले जाने से उस पर तनिक भी असर नहीं पड़ा. हसीना भी अनवर को ले कर पति से बगावत पर उतर आई. वह खुलेआम अनवर के साथ गुलछर्रे उड़ाने लगी.

लोग हसीना और अनवर को ले कर अरबी को ताने देने लगे तो परेशान हो कर अरबी हसीना की पिटाई करने लगा. यह अनवर को अच्छा नहीं लगता था, इसलिए वह हसीना को भगा ले गया. यह 6-7 साल पहले की बात है.

अनवर हसीना को ले कर नेपाल चला गया था. हसीना अपने बेटे समीर को भी साथ ले गई थी. पत्नी के भाग जाने से मोहल्ले में अरबी की बड़ी बदनामी हुई थी. उस ने गोरखनाथ थाने में अनवर के खिलाफ पत्नी को भगा ले जाने की शिकायत करनी चाही तो थानाप्रभारी ने उसे महिला थाने भेज दिया. क्योंकि उस का मामला महिला से संबंधित था.

महिला थाने की प्रभारी शिवा शुक्ला ने इस मामले को गंभीरता से लिया. उन्होंने रिपोर्ट दर्ज कर अनवर की तलाश शुरू कर दी. अनवर तो पुलिस के चंगुल में फंस गया, लेकिन पुलिस को उस से हसीना के बारे में कुछ पता नहीं चला.

कुछ दिनों बाद मुखबिर से पुलिस को पता चला कि हसीना जाफरा बाजार स्थित अपने घर में छिपी है. पुलिस वहां पहुंची तो वह वहां नहीं मिली. वहां मिला उस का बहनोई, जिसे पुलिस थाने ले आई. बहनोई ने बताया कि हसीना का कुछ दिनों पहले फोन आया था कि वह नेपाल में है.

इस के बाद एक पुलिस टीम नेपाल भेजी गई, लेकिन वहां भी हसीना नहीं मिली. जब पुलिस ने उस के बहनोई पर दबाव बनाया तो जानकारी पा कर हसीना आ कर थाने में हाजिर हो गई.

हसीना ने थानाप्रभारी को पति द्वारा प्रताडि़त करने की बात बता कर अपने बदन पर पिटाई के निशान दिखाए तो थानाप्रभारी शिवा शुक्ला ने अरबी को थाने बुला कर जम कर लताड़ा. इस के बाद समझाबुझा कर हसीना को उस के साथ भेज दिया.

हसीना पति के साथ चली जरूर गई, लेकिन वह अनवर को किसी भी कीमत पर छोड़ने को तैयार नहीं थी. यह बात उस ने पति को बता भी दी. पत्नी की जिद को देखते हुए अगले दिन अरबी ने घोसीपुरवा बगीचे में एक पंचायत बुलाई, जिस में मोहल्ले वालों के अलावा अपने रिश्तेदारों को भी बुलाया था. उन्हीं में उस का एक रिश्तेदार फिरोज अहमद भी आया था. वह अनवर का भी भांजा लगता था.

पंचायत में भी हसीना ने कह दिया कि वह अनवर को बिलकुल नहीं छोड़ेगी. हसीना की इस जिद पर पंचायत ने फैसला सुनाया कि हसीना को जहां रहना हो, रहे. लेकिन बेटा अरबी के पास रहेगा.

समीर हसीना की कोख से जन्मा था. इसलिए बेटे की जुदाई की बात सोच कर उस का कलेजा कांप उठा. उस ने बच्चे को सीने से चिपका कर कहा कि वह अपने बेटे को किसी को नहीं देगी.

फिरोज हसीना के पास ही खड़ा था. उस ने जबरन उस के बेटे को छीन कर अरबी को सौंप दिया. हसीना ने पति से बेटे को लेने की कोशिश करने के साथ पंचों से भी बेटा दिलाने की गुहार लगाई, लेकिन बेटा उसे नहीं मिला. यह बात हसीना के दिल को चुभ गई. अनवर भी तमतमा कर रह गया.

इस के बाद अनवर ने गोरखनाथ के मोहल्ला जमुनहिया बाग में किराए का एक कमरा लिया. यह कमरा उसे फिरोज ने ही दिलवाया था. उसी मकान में फिरोज भी अपने परिवार के साथ रहता था. अब हसीना अनवर के साथ ही रहने लगी थी.

वे वहां रहने क्यों आए थे, इस बारे में किसी को कुछ पता नहीं था. दोनों ने तय किया कि जिस तरह फिरोज ने उस के बेटे को छीन कर अरबी को सौंप कर तड़पाया है, उसी तरह फिरोज के भी बेटे गायब कर के उसे भी तड़पाया जाएगा. उसे भी खून के आंसू रुलाया जाएगा. इस के लिए वे मौके का इंतजार करने लगे.

45 वर्षीय फिरोज अहमद उत्तर प्रदेश के जिला गोरखपुर के गोरखनाथ के जमुनहिया का निवासी था. उस के परिवार में पत्नी कुतुबुन्निसा उर्फ फरजाना के अलावा 4 बेटे थे. फिरोज अहमद की आटाचक्की थी. उस से उसे इतनी कमाई हो जाती थी कि परिवार का खर्च आसानी से चल जाता था.

इस के अलावा उस के पास काफी पैतृक संपत्ति भी थी. लेकिन समय ने करवट बदला और सारा कुछ बर्बाद हो गया. उस का सब कुछ बिक गया था, यहां तक कि अपना मकान भी. हालात यहां तक पहुंच गए कि उसे किराए पर रहने के लिए मजबूर होना पड़ा. उसी मकान में उस ने रिश्ते के मामू अनवर को भी एक कमरा किराए पर दिला दिया था.

आटाचक्की बिक जाने के बाद फिरोज के पास कमाई का कोई साधन नहीं रह गया था. वह सऊदी अरब जाने की तैयारी करने लगा. मकान और आटाचक्की बेच कर उसे जो पैसे मिले थे, उसी से उस ने पासपोर्ट और वीजा तैयार कराया और जुलाई, 2010 में सऊदी अरब चला गया.

फिरोज को सऊदी अरब गए अभी 15-20 दिन ही हुए थे कि उस के परिवार के साथ एक दुखद घटना घट गई.

5 अगस्त, 2010 की शाम को उस के बेटे जाहिद (4 साल) और वाहिद (6 साल) मक्का मसजिद के सामने खेल रहे थे, तभी वे अचानक वहां से गायब हो गए. फरजाना उन्हें ढूंढने निकली तो पता चला कि वे रिश्ते के दादा अनवर के साथ गए हैं. चूंकि अनवर फिरोज का मामू था, इसलिए बच्चे उसे दादा कहते थे.

फरजाना ने बच्चों के बारे में जानने के लिए अनवर को फोन किया तो उस का फोन बंद मिला. वह परेशान हो गई. उस की समझ नहीं आ रहा था कि आखिर ससुरजी बच्चों को ले कर कहां चले गए. कमरे पर जा कर देखा तो पता चला कि उस ने बिना बताए कमरा पहले ही छोड़ दिया था.

मोहल्ले वालों को फिरोज के दोनों बच्चों, जाहिद और वाहिद के लापता होने की जानकारी हुई तो वे फरजाना की मदद के लिए आ गए. फरजाना के कुछ नजदीकी रिश्तेदार भी आ गए.

सभी ने बच्चों की खूब तलाश की. लेकिन उन का कुछ पता नहीं चला. बच्चों के साथ अनवर का भी कुछ अतापता नहीं था. आपाधापी में वह रात बीत गई. समय के साथ फरजाना की हालत खराब होती जा रही थी.

अगले दिन यानी 6 अगस्त की सुबह फरजाना ने अपने ननदोई तालिब अली को फोन कर के बुला लिया. चूंकि बच्चों को सभी जगह देख लिया गया था और कहीं से उन के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली, इसलिए तालिब अली ने फरजाना को थाने ले जा कर थानाप्रभारी आनंद कुमार शाही को एक तहरीर दिला दी.

आनंद कुमार शाही ने तहरीर ले कर जांच कराई और फिर 8 अगस्त, 2010 को भादंवि की धारा 364 के तहत रिपोर्ट दर्ज करा कर इस मामले की जांच सबइंसपेक्टर भोलानाथ चौधरी को सौंप दी.

सऊदी अरब गए फिरोज को जब अपने 2 बेटों के गायब होने की सूचना मिली तो वह वापस आ गया. बच्चों के गायब होने से फरजाना का रोरो कर बुरा हाल था. बच्चों के साथ अनवर और हसीना गायब थे, इसलिए सभी को आशंका थी कि बच्चों को उन्हीं दोनों ने गायब किया है. पुलिस उन की भी तलाश कर रही थी.

घटना के 5 दिनों बाद यानी 11 अगस्त को फिरोज के भाई सोनू के मोबाइल पर एक फोन आया. फोन करने वाले ने कहा था कि फिरोज के दोनों बेटे जाहिद और वाहिद उस के पास हैं. अगर वह अपने दोनों बेटों को वापस चाहता है तो 2 लाख रुपए दे जाए और बच्चों को ले जाए. अगर पैसे नहीं दिए तो बच्चों की हत्या कर दी जाएगी.

इस फोन ने फिरोज और उस के परिजनों की नींद हराम कर दी. उस ने यह बात थानाप्रभारी आनंद कुमार शाही को बताई तो उन्होंने फिरौती मांगने की यह सूचना उच्चाधिकारियों को दे दी.

मामला 2 मासूमों की जिंदगी का था, इसलिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक असीम अरुण ने अपहर्त्ताओं पर शिकंजा कसने के लिए थानाप्रभारी को कुछ निर्देश दिए. उन्हीं निर्देशों के आधार पर पुलिस ने सोनू के मोबाइल पर आए नंबर के बारे में पता किया.

पता चला कि वह नंबर फरेंदा गांव के एक पीसीओ का था. फरेंदा जिला महाराजगंज में था. पुलिस उसी दिन शाम को वहां पहुंची तो पता चला कि वह पीसीओ अनवर का था. वह वहीं मिल गया. पुलिस अनवर को हिरासत में ले कर गोरखपुर आ गई. पुलिस ने उस से काफी पूछताछ की, लेकिन उस ने जाहिद और वाहिद के बारे में कुछ नहीं बताया. पुलिस ने उसे अदालत में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया.

पुलिस अनवर से पूछताछ कर ही रही थी कि 15 अगस्त, 2010 को थानाप्रभारी आनंद कुमार शाही के मोबाइल फोन पर एक महिला ने फोन कर के कहा, ‘‘मैं हसीना बोल रही हूं. फिरोज अहमद के दोनों बेटे जाहिद और वाहिद मेरे कब्जे में हैं. दोनों बच्चे अभी सहीसलामत हैं. फिरोज अपने बच्चों के लिए उसी तरह तड़पेगा, जिस तरह मैं अपने बच्चे के लिए तड़प रही हूं. फिरोज ने जिस तरह मेरे बेटे को मुझ से अलग किया है, उसी तरह उसे सबक सिखाने के लिए मैं ने भी उस के बेटों को गायब किया है.’’

हसीना के इस फोन ने थानाप्रभारी को उलझन में डाल दिया. इस फोन के बारे में उन्होंने एसएसपी को बताया तो वह भी हैरान रह गए. उन्होंने तुरंत उस फोन को सर्विलांस पर लगाने के आदेश दिए.

जिस नंबर से हसीना ने बात की थी, वह नंबर इंटरनेट का निकला. इसलिए वह टे्रस नहीं हो सका. इस के बाद पुलिस हसीना की तलाश में जुट गई. पुलिस हसीना की तलाश में लगातार छापे मार रही थी. इस दबाव का नतीजा यह निकला कि हसीना ने 3 सितंबर, 2010 को अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया.

पुलिस ने हसीना को रिमांड पर ले कर फिरोज के दोनों बच्चों के बारे में पूछताछ की, लेकिन उस ने बच्चों के बारे में कुछ नहीं बताया. अगले दिन फिर पुलिस ने उसे कोर्ट में पेश कर 48 घंटे के पुलिस रिमांड पर लिया.

रिमांड अवधि में की गई पूछताछ में हसीना ने बताया कि वह बच्चों को नेपाल के बुटवल स्थित एक चाय की दुकान पर छोड़ आई थी. पुलिस हसीना को ले कर नेपाल पहुंची तो वहां बच्चे नहीं मिले. पुलिस खाली हाथ लौट आई. अगले दिन पुलिस ने हसीना को कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया.

अनवर और हसीना दोनों जेल में बंद थे. कुछ महीने बाद अनवर जमानत पर जेल से बाहर आ गया. जाहिदवाहिद कांड लगातार समाचारपत्रों की सुर्खियां बना रहा. तब अनवर ने फिरोज के पास किसी से संदेश भिजवाया कि अगर वह बच्चों को जिंदा रहने देना चाहता है तो मीडिया में जो खबरें आ रही हैं, उन्हें बंद करा दे. बच्चों के मिलने की लालसा में फिरोज ने मीडिया वालों से संपर्क कर के बेटों से मुतल्लिक खबर न छापने का अनुरोध किया.

शातिर अनवर अपनी पहली चाल में कामयाब हो गया. इस के बाद उस ने फिरोज के सामने शर्त रखी कि वह हसीना को जमानत दिला कर मुकदमा वापस ले ले और 1 लाख रुपए नकद उसे दे दे तो उस के दोनों बच्चे उस के घर पहुंचा दिए जाएंगे.

बेटों के मोह में अंधा फिरोज वह सब करता गया, जो अनवर कहता रहा. फिरोज ने हसीना को जेल से निकलवाने के लिए खुद उस की जमानत ली. जेल से बाहर आते ही हसीना फरार हो गई. उस के बाद अनवर भी फरार हो गया. तब फिरोज को अपने किए पर बहुत पछतावा हुआ. अब उस के मुकदमे में कोई दम नहीं रह गया था.

सूत्रों से पता चला है कि अनवर ने दोनों बच्चों को नेपाल में रहने वाले अपने मामू इशहाक अली के यहां पहुंचा दिया था. कहा जाता है कि जब वह उन से बच्चों को लेने गया तो उस ने बच्चों को लौटाने के लिए उस से 10 लाख रुपए मांगे. मामू की इस मांग पर अनवर पसीनापसीना हो गया और गोरखपुर वापस आ गया. इशहाक ने अनवर से पैसे क्यों मांगे, इस की भी वजह थी.

अनवर अली के 3 मामा थे, इस्लाम अली, उस्मान अली और इशहाक अली. तीनों ही गोरखपुर के शाहपुर के घोसीपुरवा में रहते थे. इस्लाम अली सेना में सिपाही था. उस्मान और इशहाक घर पर ही रहते थे. दोनों ही अपराधी प्रवृत्ति के थे. यह 35-40 साल पहले की बात है.

उस्मान के ऊपर कई मुकदमे दर्ज थे. उन्हीं दिनों थाना शाहपुर के एक सबइंसपेक्टर ने चोरी के एक मामले में उस्मान को गिरफ्तार किया. वह सबइंसपेक्टर उस्मान को कोर्ट में पेश करने ले जा रहा था, तभी भाई को छुड़ाने के लिए इशहाक ने सबइंसपेक्टर पर चाकू से हमला कर दिया.

उस ने सरेआम सबइंसपेक्टर की चाकू से गोद कर हत्या कर दी और हथकड़ी सहित भाई को ले कर नेपाल भाग गया. इस के बाद शादी कर के वहीं बस गया.

पुलिस ने उस्मान और इशहाक के खिलाफ सबइंसपेक्टर की हत्या का मुकदमा दर्ज कर उस्मान और इशहाक को भारत और नेपाल में काफी तलाशा, लेकिन वे नहीं मिले. इस के बाद पुलिस ने सीआरपीसी की धारा 82/83 की काररवाई की, फिर भी वे दोनों हाजिर नहीं हुए. इस के बाद पुलिस ने इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया.

उसी बीच उस्मान और इशहाक का बड़ा भाई इस्लाम अली भी सेना की बंदूक चुरा कर भाग गया. उस ने नेपाल में रह रहे अपने भाइयों से संपर्क साधा और वहीं जा कर भाइयों के साथ रहने लगा.

यह तब की बात है, जब अनवर की उम्र 9-10 साल थी. बड़ा हुआ तो अनवर अपने मामुओं के नक्शे कदम पर चल पड़ा. वह कई अनैतिक धंधों के साथ प्रौपर्टी डीलिंग का भी काम करता था. उस ने अपने मामू के हिस्से की करोड़ों की जमीन बेच कर सारी रकम अकेले हजम कर गया.

इशहाक को जब इस बात का पता चला तो उस ने अनवर से पैसे मांगे, लेकिन अनवर ने उन्हें एक धेला नहीं दिया. अब इशहाक मौके की तलाश में लग गया कि अनवर फंसे तो वह बदला ले.

अनवर को नेपाल में अपने मामुओं के ठिकाने का पता था. जब अनवर और हसीना ने फिरोज के दोनों बेटों का अपहरण किया तो अनवर ने उन्हें नेपाल में इशहाक के यहां पहुंचा दिया. इशहाक ने इस मौके का फायदा उठाया और उस से 10 लाख रुपए मांग लिए. अनवर ने जो एक लाख रुपए फिरोज से लिए थे, उसे इशहाक को दे दिए.

इस के बाद भी इशहाक ने उसे बच्चे नहीं लौटाए. तब अनवर ने फिरोज से 10 लाख रुपए मांगे. लेकिन उस ने रुपए देने से इनकार कर दिया. बात नहीं बनी तो अनवर नेपाल से भारत चला आया.

हसीना और अनवर ने फिरोज को धोखा दिया था. उसे रुपए जाने का गम नहीं था. गम इस बात का था कि उसे एक बार फिर धोखा दिया गया था. इसी बात से नाराज फिरोज ने हसीना की जमानत वापस ले ली.

जमानत वापस होते ही पुलिस हसीना के पीछे पड़ गई. 6 महीने बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया. जेल जाने के बाद हसीना को अपने किए पर बहुत दुख हुआ. उस ने फिरोज के अपहृत बच्चों को लौटाने के लिए अनवर पर दबाव डाला तो अनवर इस के लिए तैयार नहीं हुआ. क्योंकि बच्चे उस के मामू के पास थे, जिन्हें वह लौटा नहीं रहा था.

हसीना को यह बात बड़ी नागवार लगी और अनवर का साथ छोड़ने का निश्चय कर लिया. किसी तरह से उस ने अरबी के पास खबर पहुंचाई कि अब वह उस के साथ रहना चाहती है. अरबी ने जेल जा कर हसीना से मुलाकात की और उस की जमानत ले कर उसे जेल से निकलवाया. जेल से बाहर आने के बाद हसीना अरबी के साथ रहने लगी.

अनवर को हसीना का यह कदम नागवार गुजरा. कल तक जो अनवर उस पर जान छिड़कता था, अब उसे उस से नफरत हो गई. इश्क का भूत दोनों के सिर से उतर चुका था. अब दोनों एकदूसरे के दुश्मन हो गए. अनवर ने हसीना को सबक सिखाने के लिए उस के खिलाफ हत्या की कोशिश का झूठा मुकदमा दर्ज करा दिया. इस के बाद हसीना ने अनवर के खिलाफ दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज करा दिया. इस तरह 2 प्रेमियों की प्रेम कहानी जंग बन गई.

जाहिदवाहिद अपहरण कांड का मुकदमा न्यायिक मजिस्ट्रेट-3 पूर्णेंदु कुमार श्रीवास्तव की अदालत में चल रहा है. अब तक 6 गवाहों की गवाही हो चुकी है. गवाहों ने अदालत में जो बयान दिया है, उस से अनवर को डर लग रहा है कि कहीं उसे सजा न हो जाए. इसी डर से वह अज्ञात लोगों से फिरोज को फोन करा कर मुकदमे से हाथ खींचने और जान से मारने की धमकी दिलवा रहा था.

धमकी मिलने के बाद फिरोज ने अनवर अली और हसीना के खिलाफ थाना गोरखनाथ में रिपोर्ट दर्ज करा दी थी. कथा संकलन तक पुलिस दोनों में से एक को भी गिरफ्तार नहीं कर सकी थी.

जाहिद और वाहिद को घर से गायब हुए करीब 4 साल हो चुके हैं, लेकिन अभी तक यह भी पता नहीं चला है कि वे जिंदा हैं या इन दरिंदों ने उन्हें मार दिया है. फिरोज के परिवार वाले आज भी उन मासूमों के लौटने के इंतजार में पलकें बिछाए बैठे हैं. अदालत में केस की जिरह बदस्तूर जारी है.      Love Affair Crime

—कथा परिजनों और केस के गवाहों के बयानों पर आधारित

— 2014 में प्रकाशित

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