Jaunpur Love Revenge Case. शादी टूटने के बाद अनुपम रेनू से कह रहा था कि वह उस के साथ भाग चले. जबकि रेनू इस के लिए तैयार नहीं थी. अनुपम को रेनू की यह जिद इतनी बुरी लगी कि उस ने उसे मार दिया. 

बेबी उर्फ सुनीता ने पड़ोस में रहने वाली अपनी सहेली रेनू से कहा, ‘‘मेरी शादी वाले दिन तुम जरा जल्दी आ जाना और विवाह होने तक मेरे साथ रहना.’’

‘‘संयोग देखो बेबी, मैं तो तुम्हारी शादी में तुम्हारे साथ रहूंगी, लेकिन तू मेरी शादी में नहीं आ पाएगी.’’ रेनू ने कहा.

‘‘मैं तेरी शादी में रहना तो चाहती थी, लेकिन घर वालों ने तारीख ही ऐसी रख दी कि चाह कर भी मैं तेरी शादी में नहीं आ सकती. 4 जून को मेरी विदाई है और 5 जून को तेरी शादी. 2-4 दिनों का भी अंतर होता तो मैं तेरी शादी में जरूर आती.’’

‘‘चल कोई बात नहीं, इस का मुझे कोई मलाल नहीं है. मैं तेरी शादी में आऊंगी भी और शादी तक तेरे साथ रहूंगी भी.’’ रेनू ने बेबी को भरोसा दिलाया तो वह लौट गई.

उत्तर प्रदेश के जिला जौनपुर के थाना बक्सा का एक गांव है बढ़ौना. इसी गांव में रहते थे लालता गौतम. उन के घर से जुड़ा घर था फौजदार गौतम का, इसलिए दोनों परिवारों में काफी मेलजोल था. लालता गौतम की बेटी बेबी और फौजदार की बेटी रेनू हमउम्र थीं, इसलिए दोनों में गहरी दोस्ती थी.

2 भाई और 3 बहनों में 20 वर्षीया रेनू फौजदार की दूसरे नंबर की बेटी थी. उस से बड़ी बहन की शादी हो चुकी थी. फौजदार गांव में ही रहते थे और खेतीकिसानी से गुजरबसर करते थे.

रेनू की सहेली बेबी की शादी 3 जून, 2014 को थी. उस की बारात जिला जौनपुर के थाना बदलापुर के गांव कठार से आने वाली थी. नियत समय पर बारात आ गई थी. बारात आने से ले कर जयमाल तक रेनू बेबी के साथ रही.

जयमाल के बाद दूल्हादुलहन खाना खाने लगे तो रेनू भी उन्हीं के साथ खाने बैठ गई. घर के बाकी लोग पहले ही खा चुके थे, इसलिए वे घर चले गए थे. रेनू ने पिता से कहा था कि वह शादी तक वहीं रुकेगी. इसलिए वह उस की ओर से निश्चिंत हो गए थे.

लेकिन अगले दिन यानी 4 जून की सुबह जब राजनाथ यादव के पुराने ईंट भट्ठे में रेनू की लाश मिली तो सब हैरान रह गए. फौजदार के घर तो कोहराम मच गया. अगले ही दिन उस की बारात आने वाली थी. किसी ने इस बात की सूचना थाना बक्सा पुलिस को दी तो थानाप्रभारी रविंद्र श्रीवास्तव, सिपाही राहुल सिंह, जय सिंह, रमेश यादव और राजेंद्र यादव को साथ ले कर गांव बढ़ौना पहुंच गए.

थाने से रवाना होने से पहले उन्होंने इस बात की सूचना पुलिस अधीक्षक हैप्पी गुप्तन और क्षेत्राधिकारी अलका भटनाकर को भी दे दी थी.

थानाप्रभारी रविंद्र श्रीवास्तव घटनास्थल पर पहुंचे तो वहां काफी भीड़ जमा थी. लाश औंधे मुंह पड़ी थी. किसी तेज धार वाले हथियार से बड़ी ही बेरहमी से उस का गला रेता गया था. उस के शरीर पर कई जगह खरोंच के भी निशान थे. इस से लगता था कि उस के साथ जबरदस्ती की गई थी. वह लाश का निरीक्षण कर ही रहे थे कि थाना सिकरारा के थानाप्रभारी प्रमोद यादव भी पुलिस बल के साथ वहां आ पहुंचे.

बाद में पता चला कि पुलिस अधीक्षक हैप्पी गुप्तन ने उन्हें वहां पहुंचने का आदेश दिया था. प्रमोद यादव के पहुंचने के थोड़ी देर बाद ही पुलिस अधीक्षक हैप्पी गुप्तन और क्षेत्राधिकारी अलका भटनागर भी वहां पहुंच गईं. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ने फोरेंसिक एक्सपर्ट के साथ डौग स्क्वायड को भी बुलवा लिया था.

क्षेत्राधिकारी के कहने पर एक सिपाही ने औंधे मुंह पड़ी लाश को सीधा किया तो उस के नीचे से एक मोबाइल फोन मिला. पुलिस ने उस मोबाइल के बारे में फौजदार से पूछा तो उस ने कहा कि यह मोबाइल फोन रेनू का ही है. पुलिस ने मोबाइल फोन का काल लौग चैक किया तो अंतिम फोन पौने 12 बजे रात किसी अनुपम का आया था और 5 मिनट के आसपास बात भी हुई थी.

क्षेत्राधिकारी अलका भटनागर ने फौजदार से अनुपम के बारे में पूछा तो उस ने बताया कि अनुपम से उस की शादी की बात चली थी, लेकिन किसी वजह से बात आगे नहीं बढ़ पाई थी. वह उस का दूर का रिश्तेदार था.

अनुपम का फोन आने और बात करने से पुलिस अधीक्षक हैप्पी गुप्तन को यह मामला प्रेमप्रसंग का लगा. खोजी कुत्ता लाश सूंघ कर लगभग 100 मीटर दूर स्थित ट्यूबवेल तक गया और चक्कर लगा कर लौट आया. इसे अंदाजा लगाया गया कि हत्यारे ने वहां जा कर हाथपैर धोया था.

फोरेंसिक टीम ने अपना काम कर लिया तो सभी औपचारिकताएं पूरी कर लाश को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवा दिया गया.

इस के बाद थाना बक्सा में मृतका रेनू की हत्या का मुकदमा उस के छोटे भाई प्रवीन द्वारा दी गई तहरीर के आधार पर थाना बदलापुर के गांव डोमनपुर कठार के रहने वाले अनुपम के खिलाफ नामजद दर्ज कर लिया गया.

इस मामले की जांच थानाप्रभारी रविंद्र श्रीवास्तव ने स्वयं संभाली. इस के अलावा पुलिस अधीक्षक हैप्पी गुप्तन ने हत्या के इस मामले के खुलासे के लिए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीण प्रद्युम्न सिंह के नेतृत्व में एक टीम गठित की, जिस में थाना सिकरारा के थानाप्रभारी प्रमोद यादव और क्षेत्राधिकारी अलका भटनागर को भी शामिल किया गया था.

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीण प्रद्युम्न सिंह ने सर्विलांस के माध्यम से पता कराया कि रेनू की हत्या के समय अनुपम के मोबाइल फोन की लोकेशन कहां थी? सर्विलांस के माध्यम से जब पता चला कि रेनू की हत्या के समय अनुपम के फोन की लोकेशन उस के पास ही थी तो प्रद्युम्न सिंह को समझते देर नहीं लगी कि यह हत्या अनुपम ने ही की है.

इस के बाद उन्होंने थानाप्रभारी रविंद्र श्रीवास्तव को उसे गिरफ्तार करने का आदेश दिया. उन के आदेश का पालन करते हुए रविंद्र श्रीवास्तव ने धनियामऊ पुल के पास की एक चाय की दुकान से 5 जून को अनुपम को गिरफ्तार कर लिया गया.

अनुपम को थाने ला कर पूछताछ की गई तो पहले उस ने रेनू की हत्या करने से साफ मना कर दिया. लेकिन जब उसे बताया गया कि मोबाइल फोन के जरिए पता कर लिया गया है कि 3 जून की रात उस ने रेनू को फोन किया था. यही नहीं, यह भी पता चल गया है कि हत्या के समय उस का और रेनू का मोबाइल फोन एक साथ था. यह सुन कर वह बगलें झांकने लगा. आखिर उस ने रेनू की हत्या का अपना अपराध स्वीकार कर लिया. इस के बाद उस ने रेनू की हत्या की जो कहानी सुनाई, वह इस प्रकार थी.

रेनू शादी लायक हुई तो फौजदार ने उस के लिए घरवर की तलाश शुरू कर दी थी. किसी से उन्हें थाना बदलापुर के डोमनपुर कठार गांव के रहने वाले विश्राम गौतम के 24 वर्षीय बेटे अनुपम के बारे में पता चला तो वह उस के घर पहुंचे. अनुपम उन का दूर का रिश्तेदार भी था. इसलिए घरपरिवार जानासमझा था. फौजदार ने रेनू की शादी वहां तय कर दी. इस के बाद सगाई भी हो गई.

आजकल गांवों में भी लगभग हर हाथ में मोबाइल फोन है. खासकर नई पीढ़ी तो इस के पीछे पागल सी है. ऐसा ही अनुपम और रेनू के साथ भी था. दोनों के पास मोबाइल फोन थे, इसलिए सगाई के समय दोनों ने एकदूसरे के नंबर ही नहीं ले लिए थे, बल्कि बातचीत भी करने लगे थे. सगाई के बाद उन्हें पूरा विश्वास हो गया था कि अब उन की शादी हो जाएगी.

दोनों मोबाइल पर एकदूसरे से घंटों प्रेमभरी बातें करते थे, जिस से उन में प्रेम भी हो गया था और अपनत्व भी. वे भविष्य के सपने भी देखने लगे थे. 5-6 महीने बाद अचानक न जाने क्या हुआ कि फौजदार ने यह रिश्ता तोड़ दिया. शायद उसे अनुपम की किसी बुरी आदत का पता चल गया था.

जब अनुपम को पता चला कि उस की शादी रेनू से नहीं हो रही तो वह परेशान हो उठा. उस ने अपने पिता पर दबाव बनाया कि वह फौजदार को समझाएं. उस ने रेनू से भी कहा कि वह अपने पिता से कहे कि वह शादी उसी से करेगी. विश्राम ने ही नहीं, रेनू ने भी मना कर दिया. रेनू ने कहा कि उस में इतनी हिम्मत नहीं है कि वह मांबाप के फैसले के खिलाफ कुछ कर सके.

अनुपम से रिश्ता तोड़ कर फौजदार ने रेनू की शादी जौनपुर के ही थाना गौराबादशाहपुर के रहने वाले नंदलाल के बेटे लालूप्रसाद से तय कर दी थी. शादी की तारीख भी 5 जून, 2014 रख दी गई थी.

अनुपम और रेनू का रिश्ता भले ही टूट गया था, लेकिन फोन पर उन की बातें होती रहती थीं. इस बातचीत में अनुपम अकसर रेनू से कहता रहता था कि वह उस के साथ भाग चले. लेकिन रेनू इस के लिए तैयार नहीं थी. उस का कहना था कि वह घर से भाग कर मांबाप के मुंह पर कालिख नहीं पोतना चाहती.

लेकिन अनुपम के दिलोदिमाग पर रेनू कुछ इस तरह छाई थी कि उस के मना करने के बावजूद वह उसे भुला नहीं पा रहा था.

3 जून, 2014 को रेनू की सहेली बेबी की बारात आने वाली थी. अनुपम को भी बारात का निमंत्रण मिला था. उसे लगा कि बारात जाने पर शायद रेनू से मिलने का मौका मिल ही जाए. यही सोच कर वह बारात के साथ बढ़ौना आ गया. रेनू उसे दिखाई ही नहीं दी, बल्कि कई बार आमनासामना भी हुआ. लेकिन घर वालों और नातेरिश्तेदारों की वजह से वह उस से कोई बात नहीं कर सका.

जब सभी लोग खाना खा चुके और विवाह की रस्में शुरू हो गईं तो अनुपम ने रेनू के मोबाइल पर फोन कर के प्यार की दुहाई देते हुए उस से कहीं एकांत में मिलने की विनती की. उस ने कहा था कि अब 2 दिन बाद 5 जून को वह किसी और की हो जाएगी, इसलिए सिर्फ एक बार उस से मिल ले. अनुपम की इस विनती को रेनू ठुकरा नहीं सकी और उस से मिलने के लिए गांव के बाहर राजनाथ यादव के ईंट के भट्ठे के पास पहुंच गई.

रेनू जैसे ही वहां पहुंची, अनुपम उसे बांहों में भर कर बोला, ‘‘रेनू, तुम तो जानती हो कि मैं तुम्हें जान से ज्यादा प्यार करता हूं. मैं तुम्हारे बिना जी नहीं सकता रेनू. मैं तुम्हें अपनी दुलहन बनाना चाहता हूं, जबकि तुम पीछे हट रही हो.’’

खुद को अनुपम की बांहों से आजाद कर के रेनू ने कहा, ‘‘मैं ने तुम से पहले ही कह दिया है कि मैं अपने मांबाप की मरजी के खिलाफ कोई भी कदम नहीं उठा सकती. मेरी वजह से मांबाप की इज्जत पर दाग लगे, मैं ऐसा कोई काम नहीं कर सकती.’’

‘‘प्यार करने वाले इस सब की परवाह नहीं करते. तुम मुझ से प्यार करती हो, यह बात तुम न जाने कितनी बार कह चुकी हो. इसलिए अब तुम्हें मेरा साथ देना चाहिए.’’ अनुपम ने रेनू का हाथ पकड़ कर कातर स्वर में कहा, ‘‘हम दोनों बालिग हैं, इसलिए हम अपनी मरजी से शादी कर सकते हैं. शादी कर लेने के कुछ दिनों बाद घर वालों का गुस्सा अपने आप ठंडा पड़ जाएगा.’’

‘‘तुम कुछ भी कहो, मैं घर से भाग कर कतई शादी करने वाली नहीं.’’ रेनू ने अपना हाथ छुड़ाते हुए अपना निर्णय सुना दिया.

अनुपम काफी देर तक रेनू को भागने के लिए मनाता रहा, लेकिन वह किसी भी सूरत में उस के साथ भागने को तैयार नहीं हुई. इस के बाद उस ने एक नई चाल चली. उस ने गिड़गिड़ाते हुए कहा, ‘‘2 दिनों बाद तुम वैसे भी किसी और की हो जाओगी. उस के बाद तुम्हारे तनमन पर उस का अधिकार हो जाएगा. मैं चाहता हूं कि आज क्यों न तुम एक बार तनमन से मेरी हो जाओ.’’

‘‘मैं तुम्हारी यह इच्छा कतई पूरी नहीं कर सकती.’’ रेनू ने पीछे हटते हुए कहा.

लेकिन अनुपम कहां मानने वाला था. उस ने आगे बढ़ कर रेनू को बांहों में भर लिया और उसे मनाने की कोशिश करने लगा. रेनू ने खुद को छुड़ाने की बहुत कोशिश की, लेकिन कामयाब नहीं हुई. बदनामी के डर से वह शोर भी नहीं मचा सकी. आखिर अनुपम ने अपनी लच्छेदार बातों से धीरेधीरे रेनू को अपनी बात मानने के लिए विवश कर दिया.

रेनू को मजबूर कर के अनुपम ने अपनी इच्छा पूरी कर ली. रेनू अपने कपड़े ठीक कर के घर जाने लगी तो एक बार फिर अनुपम ने रेनू का हाथ पकड़ लिया. रेनू ने पूछा कि अब क्या है तो उस ने कहा, ‘‘रेनू, अंतिम बार कह रहा हूं कि तुम मेरे साथ भाग चलो. अब तो हमारे तुम्हारे बीच पतिपत्नी वाला संबंध भी बन चुका है.’’

अनुपम कुछ और कहता, रेनू ने गुस्से से हाथ छुड़ाते हुए कहा, ‘‘जब मैं ने कह दिया कि मैं भाग कर शादी नहीं कर सकती तो नहीं कर सकती. जब से आई हूं, एक ही बात की रट लगाए हो. इतनी छोटी सी बात तुम्हारे भेजे में नहीं उतर रही.’’

इतना कह कर जैसे ही रेनू आगे बढ़ी, पीछे से अनुपम ने साथ लाया चाकू जेब से निकाल कर उस की गरदन पर तेज वार कर के कहा, ‘‘मैं फालतू की बकवास कर रहा हूं. तुम ने क्या सोचा था कि तुम अगर मेरी दुलहन नहीं बनोगी तो मैं जीते जी तुम्हें किसी और की दुलहन बन जाने दूंगा. यह कभी नहीं होगा.’’

इस के बाद अनुपम ने रेनू की गरदन पर लगातार कई वार कर दिए. रेनू चीखी और वहीं गिर पड़ी. इस के बाद अनुपम ने 2-3 वार और किए. जब उसे लगा कि अब रेनू मर गई है तो वह वहां से थोड़ी दूरी पर स्थित ट्यूबवेल पर जा कर हाथपैर धोया और चाकू वहीं झाडि़यों में फेंक कर भाग गया. गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उस की निशानदेही पर वह चाकू बरामद कर लिया था.

पूछताछ के बाद 6 जून, 2014 को थाना बक्सा पुलिस ने अनुपम को जौनपुर की जिला अदालत में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. कथा लिखे जाने तक उस की जमानत नहीं हुई थी.  Jaunpur Love Revenge Case

— इसके बाद अदालती कार्रवाई में क्या हुआ यह ज्ञात नहीं है.

—  2014 में प्रकाशित

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