Meerut Nurse Murder Case. अस्पताल, जहां लोग मौत के मुंह से बाहर आने की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, लेकिन क्या हो जब उसी संजीवनी बांटने वाली जगह की आबोहवा में कोई इश्क के नाम पर मौत का जहर घोल दे. उत्तर प्रदेश के एक अस्पताल की नर्स नेहा के साथ उसी अस्पताल के ओटी टेक्नीशियन सुरेश ने ऐसा ही किया. सफेद लिबास वाले दोनों स्वास्थ्यकर्मी, जो कभी एकदूसरे के प्यार में गिरफ्त थे, लेकिन इस प्रेम प्रसंग का अंत किसी रूमानी कहानी में नहीं बल्कि बेहद सर्द और सोचीसमझी खौफनाक साजिश में हुआ. यह वाकया सुन कर सिहरन भी होती है कि जिस अस्पताल के कारीडोर में मरीजों की जिंदगी देने की जद्दोजेहद चल रही थी, ठीक उसी वक्त वहां मौत की खामोश स्क्रिप्ट लिखी जा रही थी. ओटी टेक्नीशियन सुरेश ने मैडिकल साइंस और रसायनों की अपनी नौलेज का इस्तेमाल किसी की जान बचाने के लिए नहीं, बल्कि अपनी प्रेमिका नर्स नेहा की सांसें छीनने के लिए किया. आखिर ऐसी क्या वजह रही कि सुरेश ने अपनी प्रेमिका को अस्पताल में मौत की नींद सुलाया?

सुरेश कई दिनों से परेशान नजर आ रहा था. लेकिन अपने दिल की पीड़ा किस के साथ शेयर करे, वह समझ नहीं पा रहा था. उसी समय उस का दोस्त फरहान उस के पास आया. उस ने उस का लटका चेहरा देखा तो उस से पूछा, ”सुरेश भाई, मैं कई दिनों से देख रहा हूं कि तुम हर वक्त खोएखोए से रहते हो. तुम्हें कोई दिक्कत है तो बताओ.

शायद मैं किसी काम आ सकूं?’’

”नहीं फरहान भाई, ऐसी कोई बात नहीं. लेकिन मैं इस समय बुरी तरह से फंसा हुआ हूं. तुम तो जानते ही हो, मेरी दोस्ती नेहा के साथ है. वह एक विधवा है, लेकिन मैं शादीशुदा और एक बच्चे का बाप हूं. मेरी उलझन वही है. वह मुझ पर शादी के लिए दबाव बना रही है. अब तू ही बता यार, ऐसी कंडीशन में मैं उस के साथ शादी कैसे कर सकता हूं. मैं ने उसे समझाने की काफी कोशिश की, लेकिन वह मेरी एक भी बात मानने को तैयार नहीं. यही बात मुझे दिनरात खाए जा रही है.

”कई बार वह मेरे घर तक भी पहुंच चुकी है, जिस को ले कर मेरी पत्नी से कई बार झड़प हो चुकी है. मेरी पत्नी उस को ले कर पहले ही शक करती थी, लेकिन जब से वह हमारे घर आई, उस दिन से तो मेरी पत्नी ने मेरा जीना हराम कर दिया है. इस नेहा के कारण तो मेरी जिंदगी डगमगा रही है.’’

”यार सुरेश, मैं नेहा के बारे में तुम्हारी बात सुनसुन कर थक चुका हूं. मैं ने तुम्हें पहले ही समझाया था कि तुम नेहा से ज्यादा करीबी रिश्ता मत रखो, लेकिन तुम ने मेरी एक न मानी. तू तो उस की खूबसूरती के पीछे पूरी तरह से पागल हो गया था. खैर, छोड़ो जो हो चुका, उसे सोच कर कर क्या अफसोस करना. अब तू बता कि तू चाहता क्या है?’’ फरहान ने उस के दिल की मंशा जानने की कोशिश की.

”यार फरहान, इस नेहा के चक्कर में मेरी बसीबसाई जिंदगी तबाह होने को है. इस के चक्कर में मेरी पत्नी हर वक्त मुझ से लड़ती रहती है. तू कोई ऐसा रास्ता खोज, जिस से नेहा से पीछा छूट जाए.’’ सुरेश ने अपने दिल की बात फरहान के सामने रखी.

”ठीक है, सुरेश भाई, इस बारे में कुछ सोचते हैं.’’

उस दिन के बाद दोनों दोस्त ऐसे रास्ते की खोज में लग गए, जिस से नेहा से आसानी से पीछा छुड़ाया जा सके.

उसी बात को ले कर दोनों ने गहन विचारविमर्श किया. उस समय नेहा से पीछा छुड़ाने के लिए सुरेश ने फरहान से साफ शब्दों में कहा कि उसे रास्ते से हटाने के लिए रुपया भी खर्च करना पड़े तो वह पीछे नहीं हटेगा.

”लेकिन किसी से पीछा छुड़ाना इतना आसान भी नहीं भाई, जैसा तुम सोच रहे हो.’’ फरहान ने जबाव दिया.

”फिर तुम्हीं बताओ कि नेहा से किस तरह से पीछा छुड़ाया जा सकता है?’’

”दोस्त, इस मामले में मेरा दिमाग तो बिलकुल नहीं चलता. लेकिन हां, मैं अपनी दोस्ती के लिए इस मामले में तुम्हारा पूरा सहयोग कर सकता हूं.’’

”ठीक है, दोस्त, नेहा से पीछा छुड़ाने का कोई उचित रास्ता खोजते हैं.’’

बनी हत्या की प्लानिंग

हौस्पिटल में सुरेश और फरहान ज्यादातर एक साथ ही रहते थे. खाली वक्त में दोनों दोस्त यूट्यूब पर क्राइम स्टोरी खोजने लगे. इस दौरान दोनों ने कई क्राइम फिल्में और सीरियल देखे. उन्हीं क्राइम सीनों से उन्हें नेहा को आसानी से हटाने का एक रास्ता भी मिल गया था. रास्ता भी ऐसा कि नेहा की आसानी से मौत भी हो जाए और उन पर किसी तरह की आंच भी न आए.

हौस्पिटल एक ऐसी ही जगह थी, जहां पर नेहा से आसानी से पीछा छुड़ाया जा सकता था. फिर इस के लिए उन्हें कहीं इधरउधर भागने की जरूरत भी नहीं थी. नेहा की मौत की रूपरेखा बनाने के बाद दोनों ही मौके की तलाश में लग गए.

18 जुलाई, 2026 को हर रोज की तरह नेहा 10 बजे अस्पताल पहुंची, लेकिन उस दिन वह बहुत ही सुस्त थी. जिस के कारण वह अस्पताल के स्टाफ वालों से ज्यादा देर तक बात नहीं कर पाई थी. दिन के करीब 3 बजे अस्पताल का एक कर्मचारी एक रूम में पहुंचा तो उस ने वहां पर नेहा के मुंह से झाग निकलते देखा.

यह जानकारी उस ने तुरंत ही अस्पताल के दूसरे कर्मचारियों को दी. इस जानकारी के मिलते ही अस्पताल में हलचल मच गई. डौक्टरों ने तुरंत ही उस का इलाज करते हुए उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन उपचार के दौरान ही नेहा ने दम तोड़ दिया.

सुसाइड की थ्यौरी

नेहा की मौत होने की बात पता चलते ही हौस्पिटल प्रशासन के हाथपांव फूल गए. आखिरकार नेहा को अचानक क्या हो गया, जो मौके पर ही उस की मौत हो गई थी. नेहा की मृत्यु की जानकारी डौक्टरों ने उस के परिवार वालों के साथ ही पुलिस को भी दे दी थी.

सूचना पाते ही लोहियानगर थाने के एसएचओ विष्णु कुमार पुलिस टीम के साथ अस्पताल पहुंचे. पुलिस ने अपनी काररवाई को आगे बढ़ाते हुए उस रूम की गहन जांचपड़ताल शुरू की.

मृतका के पास से पुलिस को एक सुसाइड नोट भी मिला, जिस में लिखा था कि मैं अपने ससुराल वालों से बुरी तरह से तंग आ चुकी हूं, जिस के कारण मैं आज जहर खा कर अपनी जीवनलीला समाप्त कर रही हूं.

मृतका के पास से मिले सुसाइड नोट से साफ जाहिर हो रहा था कि उस ने अपनी ससुराल वालों की प्रताडऩा से तंग आ कर आत्महत्या कर ली थी. पुलिस ने भी उस की मौत को सुसाइड ही मान लिया था.

नेहा के सुसाइड करने वाली बात सुनते ही उस की फेमिली वालों के साथसाथ उस की ससुराल वाले भी अस्पताल पहुंचे. अस्पताल पहुंचते ही दोनों पक्षों के लोगों ने नेहा की मौत पर बवाल खड़ा कर दिया.

उन का साफ कहना था कि नेहा अपनी ससुराल में खुश थी. उस ने कभी भी अपनी ससुराल की बुराई नहीं की थी, न ही उस के ससुराल वालों ने कभी उसे प्रताडि़त किया था. फिर ऐसे में वह सुसाइड क्यों करेगी?

मामले ने तूल पकड़ा तो पुलिस ने दोनों पक्षों के लोगों को शांत कराने की कोशिश की, लेकिन वहां पर मौजूद लोग किसी भी तरह से उस की आत्महत्या करने वाली बात से सहमत नहीं हो पा रहे थे.

अस्पताल में हंगामा होते देख एसएचओ विष्णु कुमार ने इस की सूचना सीओ संग्राम सिंह को दी. अस्पताल में हंगामे की सूचना पाते ही सीओ संग्राम सिंह पुलिस टीम के साथ अस्पताल पहुंचे.

घटनास्थल पर पहुंच कर सीओ संग्राम सिंह ने वहां पर मौजूद लोगों को अपने स्तर से समझाया. उस के तुरंत बाद ही पुलिस ने अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज चैक कराई तथा अस्पताल के कर्मचारियों के साथसाथ सभी डौक्टरों से पूछताछ की.

सीसीटीवी कैमरों की जांच के दौरान पता चला कि जिस कमरे में नेहा मृत पाई गई थी, उस कमरे में सुरेश और फरहान नेहा के साथ ओटी में गए थे. बाद में सुरेश ग्लव्स पहन कर अकेला ही आया था, जबकि उस वक्त ओटी में कोई मरीज भी नहीं था.

उस के बाद पुलिस ने उन से पूछताछ की तो उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उन का काम ही ज्यादातर उसी कमरे का था, लेकिन नेहा ने कब जहर खाया, उन्हें इस की कोई जानकारी नहीं है.

सुरेश पर कसा शिकंजा

नेहा की मौत का मामला धीरेधीरे तूल पकड़ता जा रहा था. नेहा के फेमिली वाले अस्पताल प्रबंधन पर उसे जहर दे कर मारने का आरोप लगा रहे थे. उन का कहना था कि नेहा के पास से जो सुसाइड नोट मिला है, वह उस की हैंड राइटिंग नहीं है.

इतनी जानकारी सामने आने के बाद पुलिस ने उस के सुसाइड नोट की राइटिंग की मिलान कराई तो दोनों में काफी अंतर पाया गया. मतलब साफ था कि वह सुसाइड नोट नेहा के द्वारा नहीं लिखा गया था.

तब पुलिस ने सुरेश और उस के दोस्त फरहान को पूछताछ के लिए फिर से अपनी हिरासत में लिया. दोनों के मोबाइल फोन भी जब्त कर लिए गए. मोबाइलों की जांचपड़ताल में नेहा के मोबाइल फोन से सुरेश के साथ लगातार बातचीत के साक्ष्य सामने आए, जिस से पता चला कि कई महीनों से दोनों एकदूसरे से लगातार बातचीत करते आ रहे थे.

इन सब साक्ष्यों को जुटाने के बाद पुलिस ने सुरेश से सख्ती से पूछताछ की तो वह जल्दी ही टूट गया. पुलिस के सामने उस ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया.

इस के बाद उस ने नेहा की हत्या की बात स्वीकारते हुए बताया कि नेहा और उस के बीच लगभग 7 महीने से प्रेम प्रसंग चल रहा था, लेकिन नेहा उस के साथ दोस्ती होते ही उस पर शादी करने का दबाव बनाने लगी थी. जबकि वह स्वयं शादीशुदा और एक बच्चे का बाप है.

उस ने कई बार उसे समझाने की कोशिश की, लेकिन नेहा सुरेश की एक भी बात मानने को तैयार न थी. फिर सुरेश ने तंग आ कर फरहान के साथ मिल कर नेहा को अपने रास्ते से हटाने के लिए साजिश रची और जहरीली ड्रिप लगा कर उसे मार डाला.

इस जानकारी के बाद पुलिस ने घटनास्थल वाले कमरे से कैनुला, सिरिंज, मोबाइल फोन, फरजी सुसाइड नोट, नोट पैड जहरीले कैमिकल के साथ सल्फास की गोलियां भी बरामद की थीं.

इन सब साक्ष्यों को जुटाने के बाद पुलिस ने इस केस के मुख्य आरोरी सुरेश और उस के दोस्त फरहान को साक्ष्य मिटाने और साजिश की धाराएं लगा कर जेल भेज दिया.

आरोपियों के गुनाह कुबूलने और उस के परिवार वालों के बयानों के आधार पर जो कहानी उभर कर सामने आई, वइ इस प्रकार थी.

नेहा मेरठ के खरखौदा, फफूंदा की मूल निवासी थी. लगभग ढाई साल पहले उस की शादी सामाजिक रीतिरिवाज से ब्रह्मïपुरी निवासी रवि के साथ हुई थी.

रवि कारपेंटर था. नेहा एक पढ़ीलिखी सरल स्वभाव की युवती थी. शादी से पहले उस ने भी पढ़लिख कर जिंदगी में कुछ करने का सपना देखा था, लेकिन शादी होने के बाद उस के अरमान दिल ही दिल में घुट कर रह गए थे. हालांकि रवि देखने में सांवले रंग का था. नेहा देखनेभालने में खूबसूरत थी. फिर रवि जो काम करता था, वह नेहा को बिलकुल भी पसंद नहीं था.

पति की मौत से टूटी नेहा

यही कारण रहा कि उस ने कई बार रवि से कोई और काम देखने को कहा था, लेकिन रवि अपने काम में ही मस्त रहता था. जिस के कारण नेहा के अरमान बिलकुल ही मर कर रह गए थे. लेकिन फिर भी उस ने अपने दांपत्य जीवन को खुशहाल बनाने के लिए गांव में खेतीमजदूरी भी की.

शादी के एक साल बाद ही वह एक बच्चे की मां भी बन गई थी. घर में एक बेटे के आगमन से उस के घर का आंगन गुलजार हो उठा था, लेकिन वह रवि को ले कर हमेशा की परेशान रहती थी. शादी के मात्र डेढ़ साल बाद ही उस के पति रवि की मौत हो गई. पति की मौत के बाद उस की जिंदगी में जैसे पहाड़ ही टूट पड़ा था.

घर की खुशियां मातम में बदल गईं. पति की मौत के बाद उसे अपनी रोजीरोटी चलाने के लिए कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा. पति की मौत के बाद जब बच्चे के लालनपालन में उस की आर्थिक स्थिति जवाब देने लगी तो उस ने नौकरी करने का मन बना लिया.

वह महीनों नौकरी की तलाश में इधरउधर भटकी, लेकिन कहीं भी उसे कोई काम नहीं मिल पा रहा था. काफी दौड़भाग करने के बाद उसे हापुड़ रोड लोहिया नगर स्थित एमसीसी हौस्पिटल में नर्स की नौकरी मिल गई. काम मिलने के बाद वह अपने मासूम बच्चे को घर पर ही छोड़ कर हौस्पिटल में नौकरी करने लगी थी.

उसी हौस्पिटल में मेरठ का सुरेश भी काम करता था. सुरेश हौस्पिटल में एक टेक्नीशियन था. वहीं पर नेहा की मुलाकात सुरेश से हुई. हौस्पिटल में जब कोई सर्जरी होती तो दोनों ही साथ रहते थे. नेहा देखनेभालने में खूबसूरत थी.

नेहा की खूबसूरती को देखते ही उस के दिल में लड्ïडू फूटने लगे थे. उस के बाद सुरेश की निगाहें हर वक्त नेहा का पीछा करने लगी थीं. दोनों के बीच बातों को सिलसिला शुरू हुआ तो दोनों ने अपने दिल के पन्ने एकदूसरे के सामने खोल कर रख दिए थे. फिर जल्दी ही दोनों के बीच मोबाइल पर बात करने का सिलसिला चालू हो गया और पक्की दोस्ती हो गई. दोस्ती के साथ ही दोनों के बीच प्रेम प्रसंग शुरू हुआ और फिर नेहा उस के साथ अपनी बची जिंदगी का सफर करने के सपने भी देखने लगी थी.

नेहा ने जल्दी ही सुरेश पर विश्वास कर लिया था. उसे पूरी उम्मीद थी कि वह उसे पूरा सहारा देगा और उस के बच्चे को बाप का प्यार भी मिल जाएगा.

सुरेश ने फांसा नेहा को

शुरूशुरू में सुरेश ने अपना स्वार्थ पूरा करने के लिए उसे हर तरह से अपनाने का आश्वासन दिया, लेकिन जैसे ही दोनों के बीच प्रेम प्रसंग की चर्चा होने लगी तो वह नेहा से कटने लगा. कई बार नेहा ने उस से साथ शादी करने वाली बात भी कही, लेकिन वह उसे इग्नोर करने लगा था. जब कभी भी नेहा उसे फोन कर उस से बात करना चाहती तो वह फोन उठाता ही नहीं था.

सुरेश की हरकतें देख नेहा परेशान रहने लगी थी. नेहा और सुरेश के बीच चल रहे प्रेम प्रसंग की कहानी धीरेधीरे सुरेश की पत्नी को भी पता चल गई थी. जिस के बाद सुरेश और उस की पत्नी के बीच नेहा को ले कर विवाद रहने लगा था. उसी विवाद की चलते नेहा को सुरेश की हकीकत भी पता चल गई थी.

सुरेश शादीशुदा और 5 साल के एक बच्चे का बाप भी था, लेकिन यह बात उस ने नेहा से पूरी तरह से छिपा कर

रखी थी. इस जानकारी के बाद भी नेहा उस के साथ शादी करने को तैयार थी.

नेहा को लगा कि सुरेश उस से सच्चा प्यार करता है. जिंदगी के किसी भी मोड़ पर वह उसे घोखा नहीं देगा. इसी विश्वास के साथ उस ने कुछ ही महीनों की मुलाकात के बाद ही अपना तनमन सब कुछ उस के हवाले कर दिया था. नेहा के पास अपना एक साल का बेटा था. बेटे को पापा की कमी न खले, यही सोच कर उस ने सुरेश की तरफ अपना कदम बढ़ाया था.

नेहा के लिए सब से बड़ी बात यह थी कि जिस अस्पताल में वह नर्स का काम करती थी, सुरेश भी उसी में टेक्नीशियन था. दोनों ही सारा दिन साथ रहते थे. कुछ दिन बाद दोनों शादी कर लेंगे और फिर उन की गृहस्थी पहले की तरह ही आसान हो जाएगी. यह नेहा के मन की सोच थी. यह बात उस ने कई बार सुरेश के सामने रखी थी. जिस के बाद उसे सुरेश की तरफ से हर बार शादी का आश्वासन भी मिला था.

शादीशुदा सुरेश नेहा से प्यार कर के बुरी तरह से फंस गया था. उस की सोच अलग थी. वह अपनी बीवीबच्चे को छोड़ कर उस के साथ शादी करने से कतरा रहा था. वह अपनी पत्नी को बहुत प्यार करता था और उसे नेहा के प्यार के कारण वह छोड़ नहीं सकता था. वहीं दूसरी ओर नेहा जब भी उस से मिलती, उस के साथ शादी करने की जिद करने लगती थी.

कई बार उस ने नेहा को समझाने की कोशिश की, लेकिन वह अपनी जिद पर अड़ी थी. जबकि वह उस से जल्दी ही किनारा कर लेना चाहता था. नेहा से किनारा करने के लिए ही उस ने फरहान के साथ मिल कर एक षडयंत्र रचा था, लेकिन वह अपने बुने जाल में खुद ही फंस गया था. उस के बाद उसी जाल से निकलने के लिए उस ने एक ऐसी साजिश रची कि अपनी बसीबसाई गृहस्थी बरबाद कर ली थी.

नेहा को अपनी जिंदगी से हटाने के लिए सुरेश ने फरहान के साथ कई क्राइम सीरियल देखे. गूगल पर मर्डर कई तरीके भी सर्च किए.  उसी के आधार पर सुरेश ने फरहान के साथ मिल कर नेहा को ओटी में ही जहर लगा कर मारने की योजना बनाई थी. फिर दोनों ही मौके की तलाश में लग गए.

हर रोज की तरह नेहा 18 जुलाई, 2026 को सुबह 10 बजे हौस्पिटल पहुंची. हौस्पिटल पहुंचते ही उस ने सुरेश से कहा कि पता नहीं आज मुझे क्या हो गया है, मेरा शरीर बेजान सा हो रहा है. जैसे शरीर में कोई जान ही नहीं. कोई बात नहीं मैडम, आप हौस्पिटल में हो, जहां पर हर बीमारी का इलाज है. अगर चाहो तो थोड़ी ही देर में तुम्हारी यह थकान खत्म हो जाएगी.

सुरेश की बात सुनते ही नेहा के चेहरे पर थोड़ी मुसकान उभरी, ”तुम कौन से डौक्टर हो, जो थोड़ी देर में ही सारी थकान मिटा दोगे.’’ नेहा सुरेश की बातों को मजाक में ले गई थी.

”अरे यार, तुम मुझे समझती क्या हो. तुम मेरी बातों को मजाक में ले रही हो? अगर विश्वास न हो तो मेरे साथ ओटी में चलो, तुम्हें एक ऐसी ड्रिप चढ़ाऊंगा कि तुम्हारे शरीर की सारी थकान छूमंतर हो जाएगी.’’

दोनों के बीच बातें होते देख दूर खड़ा फरहान भी पास आ गया था. फिर योजनानुसार फरहान ने भी सुरेश की हां में हां मिलाते हुए कहा, ”नेहाजी, भाईसाहब सही कह रहे हैं. एक हौस्पिटल में रहते हुए किसी स्टाफ वाले को कमजोरी कैसे महसूस हो सकती है. यहां पर सब तरह की दवाई मौजूद है.’’

फरहान की बात सुनते ही नेहा सुरेश के साथ ओटी में चली गई. फिर मौका देखते ही सुरेश और फरहान ने आईवी ड्रिप में जहरीला कैमिकल मिला कर उस को लगा दिया. जहरीला कैमिकल नसों में पास होते ही अपना असर दिखाने लगा था. पल भर की देर लगाए बिना ही नेहा बेहोश होने लगी.

उसी बेहोशी की हालत में सुरेश ने नेहा को सल्फास की गालियों भी खिला दी थीं. उस के बाद दोनों ही उस की मौत होने का इंतजार करने लगे थे. जब पूरी तरह से कंफर्म हो गया कि नेहा की मौत हो चुकी है. उस के बाद सुरेश ने नोटपैड पर उस की तरफ से एक सुसाइड नोट भी लिख दिया, जिस से उस की हत्या आत्महत्या साबित हो सके.

लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फोरैंसिक साक्ष्यों के साथसाथ सीसीटीवी फुटेजों के आगे उन की सारी चालाकी धरी की धरी रह गई.

लेकिन प्रेम, धोखा और लालच की इस साजिश ने जहां एक ओर नेहा की जान ले ली, वहीं उस के छोटे बेटे को बेसहारा कर दिया था. सुरेश ने जिस्मानी भूख के लिए अपनी नौकरी, परिवार और इज्जत सब कुछ गंवा दिया.

यह कहानी समाज के लिए एक सबक है कि प्यार में झूठे रिश्ते और लालच का अंजाम कितना भयानक हो सकता है. इस केस के खुलते ही पुलिस ने दोनों आरोपियों सुरेश और उस के साथ फरहान को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया था. Meerut Nurse Murder Case

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