Extra Marital Affair Case. हसरतें पूरी करने के लिए शादीशुदा रंजना ने अपने दूर के रिश्ते के भांजे बीरबल वले को प्यार के जाल में फांस लिया. ताउम्र साथ रहने के उन दोनों ने ऐसी खतरनाक साजिश रची कि…
23 जून, 2014 की सुबह यही कोई 9 बजे मुंबई के पुलिस कंट्रोल रूम को खबर मिली कि बांद्रा वेस्टर्न एक्सप्रैस हाइवे ब्रिज के पास एक आदमी की लाश पड़ी है. यह इलाका मुंबई उपनगर खार के खैरबाड़ी थाने के तहत आता था, इसलिए यह खबर पुलिस कंट्रोल रूम से थाना खैरबाड़ी को दे दी गई.
खबर मिलने के बाद खैरबाड़ी के थानाप्रभारी रविंद्र कदम पुलिस टीम के साथ घटनास्थल की तरफ रवाना हो गए.
घटनास्थल थाने से लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर था. पुलिस करीब 5 मिनट में वहां पहुंच गई. वहां काफी भीड़ जमा थी. पानी की पाइपलाइन के नीचे एक आदमी की लाश पड़ी थी. मरने वाले की उम्र यही कोई 32-34 साल थी. उस का सिर फटा हुआ था और पास में ही खून से सना एक बड़ा पत्थर पड़ा था. इस से यही लगा कि इसी पत्थर से उस की हत्या की गई थी.
तलाशी लेने पर मरने वाले की टीशर्ट की जेब से कुछ चने और लाई के दाने मिले. वहां मौजूद लोगों से पुलिस ने उस की शिनाख्त करानी चाही तो कोई भी उसे नहीं पहचान सका. पुलिस को उस के पास से ऐसी कोई चीज नहीं मिली, जिस से उस की शिनाख्त की जा सकती. उसी समय पुलिस की नजर मृतक की टीशर्ट पर पड़ी, जिस पर किसी टे्रडमार्क का नाम लिखा था. लेकिन उस के सहारे मृतक की शिनाख्त करना इतना आसान नहीं था.
थानाप्रभारी ने मामले की सूचना अपने आला अधिकारियों को दे दी.
खार खैरवाडी पुलिस थाने के सीनियर इंसपेक्टर रवींद्र कदम अभी अपने सहायकों के साथ मृतक और घटनास्थल का निरीक्षण कर ही रहे थे कि क्राइम ब्रांच के संयुक्त पुलिस आयुक्त सदानंद दाते, अतिरिक्त आयुक्त के.के. प्रसन्ना, सहायक आयुक्त सुनील देशमुख और क्राइम ब्रांच यूनिट-8 के सीनियर इंसपेक्टर दीपक फटांगरे भी अपनी टीम के साथ वहां पहुंच गए.
क्राइम ब्रांच के अधिकारियों ने भी घटनास्थल और लाश का बड़ी बारीकी से निरीक्षण किया. इस के बाद थानाप्रभारी रविंद्र कदम ने लाश का पंचनामा करने के बाद उसे सायन अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया.
क्राइम ब्रांच यूनिट-8 के सीनियर इंसपेक्टर दीपक फटांगरे ने घटनास्थल से लौटने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों से विचारविमर्श किया. इस के बाद वह सहायक इंसपेक्टर पंढरीनाथ वाव्हल के साथ एक बार फिर घटनास्थल पर गए.
घटनास्थल के आसपास खड़े औटोचालकों व अन्य लोगों से उन्होंने वहां से बरामद की गई अज्ञात लाश के बारे में पूछताछ की. उसी पूछताछ में उन्हें एक आदमी ने बताया कि उस ने यहां एक औटो से एक औरत और 2 मर्दों को उतरते देखा था. जिस औटो से वे तीनों उतरे थे, उस ने पुलिस को उस औटो का नंबर भी बता दिया.
क्राइम ब्रांच को औटो का नंबर मिल चुका था, इस से उसे जांच के आगे बढ़ने की उम्मीद दिखाई दी. उस नंबर के सहारे पुलिस उस औटो के ड्राइवर तक पहुंच गई. ड्राइवर ने बताया कि वह कल 3 लोगों को जिन में एक महिला भी थी, को जुहू चौपाटी से बांद्रा वैस्टर्न एक्सप्रैस हाइवे तक ले गया था. उन में से एक ज्यादा नशे में था. वे तीनों शिरुड़ के बारे में बात कर रहे थे.
उन तीनों को एक्सप्रैस हाइवे पर उतार कर वह चला आया था. उस के बाद पता नहीं वे कहां चले गए थे.
पुलिस ने मरने वाले व्यक्ति के फोटो जब उस ड्राइवर को दिखाए तो उस ने फोटो पहचान कर कहा कि यह नीली टीशर्ट पहनने वाला व्यक्ति उन के साथ था. इसी ने शराब पी रखी थी.
औटो ड्राइवर से बात करने के बाद शिरुड़ शब्द तुरंत क्राइम ब्रांच टीम के दिमाग में क्लिक कर गया. क्योंकि शिरुड़ पुणे स्थित एक जगह का नाम था. मृतक जिस ब्रांड के नाम की टीशर्ट पहने था, उस ब्रांड का एक औफिस पुणे में भी था. पुलिस ने वह पता गूगल में सर्च कर के हासिल कर लिया था.
जांच अधिकारी इंसपेक्टर पंढ़रीनाथ वाव्हल अपने साथ इंसपेक्टर राजू कसवे, असिस्टेंट इंसपेक्टर सतीशचंद्र राठौर, सबइंसपेक्टर हनुमंत जोशी. मधुकर पाटिल, अमोल काले, कांसटेबल आवरे सांवत साल्वी, परदेशी चाव्हाण, सचिन वावस्कर आदि को ले कर शिरुड़ चले गए.
पुलिस ने वहां औफिस के लोगों को मृतक के फोटो दिखाए तो औफिस के लोगों ने उस फोटो को तुरंत पहचान लिया. उन्होंने कहा कि ये फोटो मनोहर राठौर के हैं और यह यहां ड्राईवर था. यह कारेगांव शिरुड़ में अपने परिवार के साथ रहता था. मुंबई घूमने के लिए इस ने 3 दिनों की छुट्टी ले रखी थी.
औफिस से मिली यह जानकारी क्राइम ब्रांच टीम के लिए काफी अहम थी. टीम ने औफिस से मनोहर राठौर के घर का पता लिया और उस के घर पहुंच गई. लेकिन वहां उस के दरवाजे पर ताला लटका हुआ मिला. पूछने पर पड़ोसियों ने बताया कि मनोहर राठौर का तो पता नहीं, लेकिन उस की पत्नी रंजना राजन गांव में बीरबल के साथ देखी गई थी.
पुलिस टीम को रंजना और बीरबल पर शक होने लगा. वह उन की तलाश में राजन गांव पहुंची. दोनों वहां मिल गए. पुलिस को देख कर वे सकपका गए. दोनों को हिरासत में ले कर पुलिस मुंबई लौट आई. उन से पूछताछ करने पर पता चला कि मृतक मनोहर राठौर रंजना का पति था.
रंजना और बीरबल से मनोहर के बारे में सख्ती से पूछताछ की गई तो उन्होंने कुबूल कर लिया कि उन्होंने ही उस की हत्या की थी. हत्या की उन्होंने जो कहानी बताई, वह अवैध संबंधों की चाशनी से तरबतर निकली.
35 वर्षीय मनोहर नाथूराम राठौर यवतमाल के एक गांव का रहने वाला था. पिता नाथूराम राठौर गांव के एक गरीब किसान थे. उन के पास थोड़ी सी जमीन थी, उसी में खेती कर के परिवार को पाल रहे थे. मनोहर राठौर भाईबहनों में सब से बड़ा था. दसवीं पास करने के बाद कामधंधे की तलाश में वह पुणे आ गया था. वहां उस की जानपहचान के कई लोग रहते थे. उन्हीं के साथ रह कर उस ने छोटामोटा काम करना शुरू कर दिया. इस के साथ ही वह कार चलानी भी सीखने लगा. बाद में उस ने अपना ड्राइविंग लाइसेंस बनवा लिया.
कुछ दिनों बाद पुणे की एक अच्छी कंपनी में ड्राइवर की नौकरी लग गई. वह कंपनी शहरों की बड़ी फर्मों और प्रतिष्ठानों में सुरक्षा संबंधी उपकरणों की सप्लाई करती थी. नौकरी लगने के बाद पिता नाथूराम राठौर ने अपने एक रिश्तेदार की बेटी रंजना से सन 2002 में उस की शादी कर दी.
रंजना जैसी सुंदर व सुशील पत्नी पा कर मनोहर काफी खुश था. शादी के कुछ दिनों बाद ही वह पत्नी को ले कर पुणे चला गया. वहां कारेगांव में किराए का एक मकान ले कर रहने लगा. उन की गृहस्थी हंसीखुशी के साथ चल रही थी. वक्त गुजरता गया और रंजना 2 बच्चों की मां बन गई.
परिवार बढ़ा तो उन के घर का खर्च भी बढ़ गया. तब वह नौकरी के साथ कोई दूसरा काम करने की सोचने लगा, ताकि आमदनी बढ़ सके. लेकिन समस्या यह थी कि दूसरा काम करने के लिए उस के पास टाइम नहीं था. औफिस के काम की वजह से वह सुबह जल्दी ही घर से निकल जाता और देर रात को लौटता था. वह पत्नी को समय नहीं दे पाता था. इस का असर उस की गृहस्थी पर पड़ना शुरू हो गया.
पति द्वारा ध्यान न देने पर रंजना कुंठित सी रहने लगी. उस की कुंठा सामाजिक मर्यादाओं को लांघने की कुलाचें मारने लगी. वह अब ऐसे पुरुष की तलाश में थी, जो चोरीछिपे पति जैसा सुख दे सके.
रंजना की यह तलाश बीरबल वले पर जा कर ठहर गई. 22 वर्षीय बीरबल वले मनोहर राठौर की दूर की बहन का बेटा था. वह मुंबई में प्राइवेट नौकरी करता था और खार बांद्रा के निर्मलनगर में रहता था.
वह कभीकभार अपने मामा मनोहर राठौर और मामी रंजना से मिलने आता रहता था, लेकिन सन् 2013 के अक्तूबर महीने में जब वह मामा के यहां आया तो मामी रंजना का बदला व्यवहार उसे कुछ अजीब सा लगा. उस समय मामा मनोहर राठौर घर पर नहीं था. वह 2-3 दिनों के लिए बाहर गया हुआ था.
उस दिन मामी ने उस की खूब खातिरतवज्जो की. इतना ही नहीं, उस ने उस से 1-2 दिन वहीं ठहरने का आग्रह भी किया.
रंजना उस के साथ अपनी हसरतें पूरी करना चाहती थी. इसलिए वह बीरबल पर रुकने का दबाव बना रही थी. बीरबल भी कोई नासमझ नहीं था, जो मामी की बात न समझता, लेकिन झिझक की वजह से कुछ कह नहीं पा रहा था. मामा की गैरमौजूदगी में उस ने वहां रुकने को मना लिया.
खाना खा कर बच्चे सो गए. बीरबल भी सोने के लिए अपने बिस्तर पर पहुंचा तो थोड़ी देर बाद रंजना भी उस के बिस्तर पर जा कर बैठ गई. उस समय मामी का उस के पास आ कर बैठना बीरबल को ठीक नहीं लगा.
मामी का लिहाज करते हुए वह बिस्तर से उठने को हुआ तो रंजना ने उस का हाथ पकड़ कर उसे अपने पास खींच लिया और मस्ती के मूड में बोली, ‘‘डरने की कोई बात नहीं है? इस समय यहां कोई आने वाला नहीं है. बच्चे भी गहरी नींद में सो रहे हैं. मुझे तुम से प्यार हो गया है.’’ कह कर वह उस की गोदी में अपना सिर रख कर लेट गई.
गोदी से उस का सिर उठा कर एक तरफ करते हुए बीरबल बोला, ‘‘मामी कुछ तो सोचो.’’
‘‘क्या सोचूं? प्यार करना कोई गुनाह है क्या? मैं जानती हूं कि मेरे और तुम्हारे रिश्ते में मर्यादा की एक दीवार है. तुम इस रिश्ते को भूल जाओ, क्योंकि प्यार और युद्ध में सब चलता है.’’ कहते हुए उस ने बीरबल को बांहों में भर लिया.
नारी स्पर्श से जवान बीरबल का रक्त भी गरम हो उठा. खुला आमंत्रण पा कर वह खुद को संभाल नहीं सका. इस के बाद मामी और भांजे के बीच बंधी मर्यादा की सारी कडि़यां टूट कर बिखर गईं. दोनों ने अपनी हसरतें पूरी कर लीं.
इस के बाद तो बीरबल को ऐसा चस्का लगा कि मौका मिलते ही वह रंजना के पास पुणे आनेजाने लगा. धीरेधीरे उन दोनों के बीच लगाव हो गया. उन की हालत यह हो गई कि जब तक वे एकदूसरे को देख न लेते या फोन पर बात न कर लेते, तब तक उन्हें चैन नहीं मिलता था. बारबार मुंबई से पुणे आने में बीरबल को परेशानी होती थी. रंजना की खातिर वह मुंबई से पुणे आ गया और वहां के राजन गांव में किराए का मकान ले कर रहने लगा. पुणे में रहने का उसे यह फायदा हुआ कि जब भी उसे मौका मिलता वह रंजना से मिलने उस के घर पहुंच जाता.
वे भले ही चोरीछिपे मिल रहे थे, मगर पड़ोस के लोगों को इस की भनक लग ही जाती थी. बीरबल अकसर दोपहर के समय ही रंजना के यहां आता था, इस की एक वजह यह थी कि उस समय बच्चे स्कूल गए होते थे तो मनोहर अपने काम पर.
ऐसे में पासपड़ोस वालों के मन में शक पैदा होना स्वाभाविक था. इस के बाद उन के संबंधों की चर्चा मोहल्ले में होने लगी. किसी ने यह बात मनोहर को बताई तो वह भी सोचने लगा कि बीरबल उस की गैरमौजूदगी में ही क्यों आता है? इस बारे में उस ने पत्नी से पूछा तो वह उलटे उसी पर भड़क उठी, ‘‘वह तुम्हारा भांजा है. कभीकभी खैरखबर लेने यहां आ जाता है तो इस में बुराई क्या है?’’
बात भी सही थी. भांजा होने के नाते वह उस के घर आ जाता है तो क्या हर्ज है? उसे लगा कि मोहल्ले वाले बिना सिरपैर की बात करते हैं. ऐसा सोच कर भले ही वह अपने मन को समझाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन बाद में इस बात ने उस के दिमाग में शक पैदा कर दिया, जिस से वह चुपचाप पत्नी और भांजे की गतिविधियों पर नजर रखने लगा.
उधर पति के शिकायत करने के बाद रंजना ने भी बीरबल को सतर्क कर दिया था. वे अब पहले से ज्यादा चौकस हो गए थे. कहते हैं कि गलत काम करने में चाहे जितनी भी सतर्कता बरती जाए, एक न एक दिन उस की पोल खुल ही जाती है.
एक दिन मनोहर ने पत्नी से कहा कि वह 3-4 दिनों के लिए पुणे से बाहर जा रहा है. वह अपना और बच्चों का खयाल रखेगी. पति के घर से निकलने के बाद रंजना बहुत खुश हुई, क्योंकि अब उसे बीरबल के साथ मौजमस्ती करने का खुला मौका जो मिलने जा रहा था. बच्चे भी स्कूल जा चुके थे. उस समय वह घर में अकेली रह गई थी.
उसी समय उस ने बीरबल को फोन कर के बुला लिया. मौके का फायदा उठाते हुए वे रंगरलियां मनाने लगे. जल्दबाजी में वे कमरे की कुंडी लगानी भी भूल गए. कुछ देर बाद मनोहर घर लौट आया. दरवाजा बंद देख कर उस की शंका और बढ़ गई. उस ने जैसे ही किवाड़ों को धक्का दिया, दरवाजा खुल गया. शादी में मिले डबलबैड पर पत्नी और भांजे को आपत्तिजनक हालत में देख कर उस की आंखें फटी की फटी रह गईं.
उधर अचानक घर में मनोहर को देख कर रंजना और बीरबल सन्न रह गए. उन के सिर से अय्याशी का नशा उतर गया. दोनों फटाफट कपड़े पहनने लगे. रंगेहाथों पकड़े जाने पर दोनों का डर से हाल बेहाल था. मनोहर राठौर गुस्से में आगबबूला हुआ जा रहा था. उस ने भांजे पर हाथ उठाने के बजाय सख्त हिदायत दे कर वहां से भगा दिया और कहा कि आइंदा वह उस के यहां न आए और न ही उस के घरपरिवार से कोई संबंध रखे.
बीरबल के जाने के बाद मनोहर ने सारा गुस्सा बीवी पर उतार दिया. उस ने बीवी की जम कर पिटाई की और उसे खरीखोटी सुनाई. उस ने यह बात सोची भी नहीं थी कि जिस के लिए वह रातदिन मेहनत करता है, वह उस के पीठ पीछे इस तरह के गुल खिलाएगी.
पत्नी की बेवफाई का उसे काफी दुख हुआ. जिस का दर्द उसे बरदाश्त नहीं हुआ. इस के बाद वह शराब का सहारा लेने लगा. वह अकसर शराब के नशे में घर आता और पत्नी से झगड़ा कर के मारपीट करता.
पति के हाथों पिटने के बाद भी रंजना ने बीरबल से मिलना नहीं छोड़ा था. रोजरोज पिटने से रंजना की काया भी दुखने लगी थी. वह पति की कलह से आजिज आ चुकी थी. अपनी परेशानी उस ने प्रेमी बीरबल को बताई तो उस ने रंजना को धीरज देते हुए कहा कि वह घबराए नहीं. उस के लिए वह कुछ न कुछ उपाय करेगा.
बीरबल को लगा कि उस के और रंजना के बीच मामा मनोहर ही कांटा बना हुआ है और वही कांटा रंजना को कष्ट दे रहा है. उस ने उस कांटे को हमेशा के लिए दूर करने की ठान ली. उस ने एक दिन रंजना को अपनी योजना के बारे में बताया तो रंजना डर गई. रंजना इस के लिए तैयार नहीं हुई. लेकिन बीरबल ने जब उसे समझाया तो वह बीरबल की खतरनाक योजना में शामिल हो गई.
योजनानुसार घटना से एक महीने पहले बीरबल वले और रंजना ने मनोहर राठौर के पैर पकड़ कर अपने किए की माफी मांगी और दोबारा ऐसी गलती न करने की कसम खाई. मनोहर राठौर साफ दिल वाला इंसान था. उस ने दोनों को माफ कर दिया. इस के बाद रंजना और बीरबल वले ने मनोहर का विश्वास जीतने के लिए कुछ दिनों के लिए एकदूसरे से दूरी बनाए रखी.
रंजना और बीरबल वले को जब इस बात का यकीन हो गया कि अब मनोहर राठौर उन की हर बात को मानता है तो वे अपनी योजना को साकार करने का मौका तलाशने लगा. योजना के अनुसार रंजना और बीरबल ने मुंबई घूमने का प्लान बनाया, जिस के लिए उन्होंने मनोहर राठौर को भी तैयार कर लिया. मुंबई घूमने के लिए मनोहर ने अपने औफिस से छुट्टी भी ले ली.
22 जून, 2014 को तीनों मुंबई की सैर के लिए निकल पड़े. कई जगह घूमने के बाद शाम 5 बजे के करीब सांताकू्रज जूहु चौपाटी गए. तीनों ने वहां एक रेस्टोरेंट में खाना खाया. इस के बाद बीरबल ने अपने मामा को देशी शराब के एक ठेके पर ले जा कर जम कर शराब पिलाई.
मनोहर राठौर जब नशे में पूरी तरह धुत हो गया तो बीरबल वले ने एक औटोरिक्शा लिया. उस में सवार हो कर तीनों बांद्रा, खार की तरफ चल दिए. यह जगह बीरबल की जानीपहचानी थी, क्योंकि इन इलाकों में वह कई सालों तक रह चुका था.
औटोरिक्शा से जाते समय शराब के नशे में मनोहर राठौर पुणे की शिरुड़ शहर लौटने की बात कर रहा था. जबकि रंजना और बीरबल वले उसे समझाने की कोशिश कर रहे थे. औटो ड्राइवर उन की बातें सुन रहा था.
कुछ समय बाद जब औटोरिक्शा बांद्रा वेस्टर्न हाइवे पर पहुंचा तो बीरबल और रंजना मनोहर के साथ वहीं उतर गए. पैसे दे कर बीरबल ने औटो वाले को चलता कर दिया. औटोरिक्शा के जाने के बाद बीरबल वले और रंजना मनोहर राठौर को सहारा दे कर वहीं पर बने ब्रिज के पास ले गए और उसे वहां लिटा दिया.
थोड़ी देर बाद जब वहां सुनसान हो गया तो बीरबल ने मनोहर को कुछ चने और लाई खाने को दी. उठ कर बैठा मनोहर राठौर जब चने और लाई खाने लगा तो मौका देख बीरबल वले ने पास ही पड़ा एक बड़ा सा पत्थर उठा कर उस के सिर पर दे मारा.
पत्थर लगते ही मनोहर राठौर का सिर फट गया और सिर से खून बहने लगा. कुछ देर तड़पने के बाद मनोहर शांत हो गया. उस के लुढ़कते ही वे दोनों वहां से निकल कर खार आ गए. वहां से बीरबल रंजना को ले कर निर्मलनगर में अपने एक दोस्त के यहां चला गया.
सुबह उठ कर वे घटनास्थल पर यह देखने गए कि मनोहर जिंदा तो नहीं बचा है. लेकिन जब उन्होंने उसे मरा हुआ पाया तो उन्हें बड़ी खुशी हुई और चैन की सांस ली. इस के बाद वे उसी दिन पुणे के लिए निकल गए. पुणे पहुंच कर रंजना अपने दोनों बच्चों को ले कर बीरबल वले के साथ राजन गांव चली गई और वहीं रहने लगी.
उन्हें पूरा यकीन था कि पुलिस उन तक पहुंच नहीं सकेगी, लेकिन वे यह भूल गए कि अपराध चाहे कितना भी शातिर तरीके से क्यों ना किया गया हो, एक न एक दिन खुल ही जाता है.
क्राइम ब्रांच ने 24 घंटे के अंदर मामले का पर्दाफाश कर के अभियुक्त रंजना और बीरबल वले को गिरफ्तार कर खैरबाड़ी पुलिस के हवाले कर दिया. खैरबाड़ी थानापुलिस ने दोनों अभियुक्तों से विस्तार से पूछताछ करने के बाद न्यायालय में पेश कर के उन्हें आर्थर रोड जेल भेज दिया.
कथा लिखे जाने तक दोनों अभियुक्त न्यायिक हिरासत में थे. आगे की तफ्तीश सीनियर इंसपेक्टर रवींद्र कदम कर रहे थे. Extra Marital Affair Case
— इसके बाद अदालती कार्रवाई में क्या हुआ यह ज्ञात नहीं है.
— 2014 में प्रकाशित






