Child Trafficking Case. मोहित और आशा ने जितेंद्र को यह बता कर बच्ची गोद दी थी कि यह उन की अपनी बेटी है, जबकि वह चुराई गई बच्ची थी.
उत्तर प्रदेश के जिला फिरोजाबाद के कस्बा शिकोहाबाद के स्टेशन रोड पर नहर विभाग के डाक बंगले के सामने पटरी पर कुछ गडि़या लोहार झुग्गियां डाल कर रहते हैं. उन्हीं में एक केहरी सिंह का भी परिवार था. उस की बेटी काजल पति शेर सिंह उर्फ शेरा और 5 महीने की बेटी नंदिनी के साथ मायके आई हुई थी. उस की ससुराल फिरोजाबाद के ही थाना टुंडला के गांव उसायनी में थी.
उसे मायके आए अभी 8 दिन ही हुए थे कि 14-15 जुलाई, 2014 की रात अचानक उस की 5 महीने की बेटी नंदिनी गायब हो गई. 15 जुलाई की सुबह छह बजे के आसपास काजल की आंखें खुलीं तो उस ने देखा, बगल में सो रही उस की बेटी नंदिनी गायब है. वह हड़बड़ा कर उठी और चारपाई के नीचे तथा अगलबगल देखने लगी.
बेटी कहीं दिखाई नहीं दी तो वह परेशान हो उठी. आधी रात के बाद उस ने नंदिनी को दूध पिला कर सुलाया था. वह घबड़ा गई. उस ने बगल की चारपाई पर सो रहे पति शेरा को जगा कर बेटी के बारे में पूछा तो उस ने कहा, ‘‘मुझे क्या पता, नंदिनी तो तुम्हारे पास सो रही थी.’’
नंदिनी के इस तरह गायब होने से काजल के होश उड़ गए. वह जोरजोर से रोने लगी, जिस से घर वाले ही नहीं, उस के समाज के अन्य लोग भी जाग गए. सभी काजल को धीरज बंधाने लगे. इसी के साथ नंदिनी की तलाश भी शुरू कर दी गई. नहर का किनारा होने की वजह से सभी को लगा कि बच्ची को कोई जंगली जानवर उठा ले गया होगा. इसलिए आसपास खेतों और झाडि़यों में बच्ची की खोज की जाने लगी.
दुधमुंही बच्ची के इस तरह अचानक गायब होने की खबर आसपास फैली तो लोग इकट्ठा होने लगे. धीरेधीरे वहां अच्छीखासी भीड़ जमा हो गई. किसी ने इस बात की सूचना थाना शिकोहाबाद पुलिस को दी तो उसी सूचना पर इंसपेक्टर राजीव यादव पुलिस बल के साथ वहां पहुंच गए. उन्होंने काजल से पूछताछ की तो उस के बताए अनुसार उन्होंने नहर के आसपास काफी दूर तक बच्ची की तलाश कराई.
खेतों, नहर के किनारे उगी झाडि़यों और खंडहरों में भी बच्ची को खोजा गया कि रात को सोते समय कोई जंगली जानवर तो नहीं उठा ले गया. जब बच्ची कहीं नहीं मिली तो उन्हें लगा कि बच्ची का अपहरण हुआ है. उन्होंने तत्काल इस बात की जानकारी अपने अधिकारियों को दे दी.
बच्ची के गायब होने की सूचना पा कर क्षेत्राधिकारी जगदीश सिंह भी घटनास्थल पर आ गए थे. उन्होंने काजल, उस के मातापिता तथा बिरादरी के अन्य लोगों से इस बारे में विस्तार से जानकारी ली. उन्हें जितने मुंह, उतनी बातें सुनने को मिलीं. कोई कह रहा था कि बच्ची को रात में कोई जंगली जानवर उठा ले गया होगा तो कोई कह रहा था कि बच्चा उठाने वाला गिरोह बच्ची को ले गया होगा.
कुछ लोगों ने आशंका व्यक्त की थी कि कोई तंत्रमंत्र करने वाला बच्ची को उठा कर ले गया है. कुछ भी रहा हो, बच्ची की मां काजल का रोरो कर बुरा हाल था. सभी को हैरानी हो रही थी कि बच्ची इस तरह अचानक कैसे गायब हो गई. वहां कोई ऐसा निशान भी नजर नहीं आया, जिस से यह पता चलता कि उसे आदमी ले गया या जानवर?
जब पुलिस को लगा कि बच्ची का अपहरण हुआ है तो फिरोजाबाद से पुलिस अधीक्षक अजय मोहन शर्मा भी घटनास्थल पर आ गए. उन्होंने पुलिस वालों से भी बात की और घर वालों से भी. इस के बाद उन्होंने पुलिस की कई टीमें बना कर आसपास के क्षेत्र में ही नहीं, गांवों तक उस की तलाश कराई. लेकिन उस का कोई सुराग नहीं मिला. इस के बावजूद उन्होंने घर वालों को आश्वासन दिया कि हर हाल में वह बच्ची को खोज निकालेंगे.
काफी खोजबीन के बाद भी जब नंदिनी का कोई सुराग नहीं मिला तो उस के पिता शेरा की ओर से थाना शिकोहाबाद में उस के अपरहण का मुकदमा अज्ञात के खिलाफ दर्ज कर लिया गया. पुलिस टीमें तो बच्ची की खोज में लगी ही थीं, क्षेत्राधिकारी जगदीश सिंह ने इलाके के सारे मुखबिरों को सक्रिय कर दिया.
आखिर उन की मेहनत रंग लाई. मुखबिरों से क्षेत्राधिकारी जगदीश सिंह को जानकारी मिली कि बच्ची को जानवर नहीं ले गए, बल्कि उस का अपहरण हुआ है और इस अपहरण में थाना शिकोहाबाद के गांव नंगला हैंडल के रहने वाले अहिबरन के बेटे कुलदीप का हाथ है. मुखबिरों ने यह भी बताया कि कुलदीप शिकोहाबाद स्टेशन रोड पर औटो चलाता है.
नंदिनी के अपहरण में कुलदीप का हाथ है, यह जानकारी होते ही पुलिस नंगला हैंडल स्थित उस के घर पहुंच गई. लेकिन वह घर में नहीं मिला. घर वालों से पता चला कि वह जिला मथुरा के गांव वाजिना में ब्याही अपनी बहन के यहां गया है. पुलिस उस का इंतजार नहीं करना चाहती थी, इसलिए तुरंत मथुरा के लिए रवाना हो गई. मथुरा गई इस पुलिस टीम का नेतृत्व इंसपेक्टर राजीव यादव कर रहे थे. उन की इस टीम में सबइंसपेक्टर नरेंद्र यादव, चंपाराम वर्मा, सिपाही कमलेश सिंह और महिला सिपाही सोनी यादव शामिल थीं.
कुलदीप बहन के घर भी नहीं मिला. पुलिस टीम वापस आने की तैयारी कर रही थी कि तभी उसे मुखबिरों से जानकारी मिली कि कुलदीप बसस्टैंड पर बस के इंतजार में खड़ा है. पुलिस टीम तुरंत बसस्टैंड पहुंची और मुखबिर के निशानदेही पर उसे गिरफ्तार कर लिया.
कुलदीप को थाना शिकोहाबाद ला कर नंदिनी के बारे में पूछा गया तो वह साफ मुकर गया. लेकिन जब पुलिस ने उस के साथ थोड़ी सख्ती की तो आखिर उस ने सच्चाई उगल दी. कुलदीप ने पुलिस को जो बताया था, उस के अनुसार, वह गांव के ही रफीक का औटो चलाता था. 14-15 जुलाई की रात उस के दोस्त मोहित ने फोन कर के उसे औटो ले कर रेलवे स्टेशन के बाहर आने को कहा.
कुलदीप वहां औटो ले कर पहुंचा तो वहां उसे मोहित अपनी पत्नी आशा तथा ललित कुमार उर्फ भूरा अपनी पत्नी रानी के साथ मिले. मोहित ने उसे बताया कि एक बच्ची का अपहरण कर के दिल्ली ले जाना है. इस काम के लिए उन्हें मोटी रकम मिलेगी.
पैसों के लालच में कुलदीप इस काम के लिए राजी हो गया. इस के बाद सभी कुलदीप द्वारा लाए औटो पर बैठ गए तो वह शिकोहाबाद की ओर चल पड़ा. वहां पहुंच कर मोहित ने नहर के किनारे बने डाक बंगले के पास औटो रुकवाया. उस का औटो सड़क की दाहिनी पटरी पर खड़ा था. जहां औटो खड़ा था वहीं पर सड़क की बाईं पटरी पर गडि़या लोहार रहते थे. उन की छोटीछोटी झुग्गियां थीं, सभी बाहर ही चारपाइयों पर सो रहे थे.
उन्हीं में एक चारपाई पर अपनी मां के साथ एक बच्ची सो रही थी. मां ने उसे नीले रंग का दुपट्टा ओढ़ा रखा था. मोहित व रानी दबे पांव गए और बच्ची को चुपके से उठा लाए. औटो में बैठे अन्य लोग निगरानी कर रहे थे. बच्ची और उस की मां गहरी नींद में थी. इसलिए उन्हें बच्ची उठाने में कोई परेशानी नहीं हुई. उठाने पर भी संयोग से बच्ची नहीं रोई.
बच्ची को ले कर कुलदीप और उस के साथी उसी औटो से आसफाबाद स्थित मोहित के घर गए. उन्हें पता था कि सुबह जब बच्ची के गायब होने की जानकारी होगी तो उस की तलाश शुरू होगी. हो सकता है, पुलिस नाकेबंदी भी कर दे. इसलिए निर्णय लिया गया कि उस दिन बच्ची को मोहित के घर पर ही रखा जाए.
उस दिन सभी मोहित के घर पर ही रुके रहे. अगले दिन यानी 16 जुलाई को योजना के अनुसार मोहित अपनी पत्नी आशा के साथ बच्ची को ले कर टुंडला स्थित रानी बघेल के घर पहुंचा, जहां कुछ देर रुक कर सभी वहां से ट्रेन पकड़ कर दिल्ली के लिए रवाना हो गए. उसी बीच मोहित ने दिल्ली में रहने वाले उस आदमी से बातचीत कर ली थी, जिसे बच्ची को देना था.
पुलिस को जब पता चला कि बच्ची को दिल्ली पहुंचा दिया गया है तो बच्ची को बरामद करने के लिए पुलिस टीम कुलदीप को साथ ले कर दिल्ली के लिए रवाना हो गई. कुलदीप के बताए अनुसार, इस पुलिस टीम ने दिल्ली के थाना बुराड़ी के मोहल्ला नत्थूपुरा के रहने वाले अनिल कुमार की पत्नी अनिता सुनार उर्फ दुर्गा को पकड़ा.
अनिता से बच्ची के बारे में पूछा गया तो उस ने बताया कि बच्ची कहां है, यह राधा माता बता सकती हैं, क्योंकि उसी ने बच्ची को दिलाया है. बाद में पता चला कि राधा माता बच्चों की खरीदफरोख्त का धंधा करती थी.
राधा माता थाना स्वरूपनगर के प्रदीप विहार में रहती थी. उस पर देवी आती थीं, इसीलिए लोग उसे राधा माता कहते थे. वह काली मंदिर की पुजारिन थी, इसलिए उसे लोग काली भी कहते थे. अनिता की मदद से पुलिस ने उसे उस के घर से पकड़ लिया. पुलिस द्वारा की गई पूछताछ में उस ने बताया कि बच्ची को उस ने अपनी नौकरानी गीता उर्फ इशरत के माध्यम से थाना पंजाबी बाग के पश्चिमपुरी के रहने वाले जितेंद्र कुमार और भावना को बेचा था.
इशरत भी मादीपुर गांव में रहती थी. पुलिस टीम कुलदीप, राधा माता, अनिता को साथ ले कर मादीपुर स्थित इशरत के घर पहुंची. संयोग से वह घर पर ही मिल गई.
पूछताछ में उस ने पुलिस को बताया कि पश्चिमपुरी के रहने वाले जितेंद्र कुमार और उन की पत्नी भावना को काजल की बेटी नंदिनी को एक लाख रुपए में बेचा गया है. उन्होंने बच्ची को इसलिए खरीदा है, क्योंकि उन की अपनी कोई औलाद नहीं थी.
इशरत के बयान के आधार पर पुलिस थाना पंजाबी बाग के पश्चिमपुरी के पौकेट थर्ड में रहने वाले जितेंद्र कुमार सिंघानिया के घर पहुंची.
जितेंद्र कुमार का घर दिखा कर बाकी लोग कुछ दूरी पर खड़े हो गए. सबइंसपेक्टर नरेंद्र कुमार यादव, महिला सिपाही सोनी यादव के साथ सादे कपड़ों में जितेंद्र के घर पहुंचे. दरवाजा खटखटाने पर जितेंद्र ने दरवाजा खोला.
अनजान लोगों को दरवाजे पर देख कर जितेंद्र कुमार ने पूछा, ‘‘आप लोग कौन, बताइए क्या काम है?’’
‘‘आप ने जो बच्ची गोद ली है, उस की ठीक से लिखापढ़ी करा ली है या नहीं?’’ नरेंद्र कुमार यादव ने पूछा.
‘‘हम ने नोटरी से विधिवत गोदनामा तैयार करा कर ही बच्ची को गोद लिया है.’’ जितेंद्र ने कहा.
‘‘क्या आप वह गोदनामा हमें दिखा सकते हैं?’’ सबइंसपेक्टर नरेंद्र कुमार ने कहा.
जितेंद्र कुमार ने घर से गोदनामा ला कर उन्हें थमा दिया. गोदनामा के अनुसार जितेंद्र कुमार और भावना ने मोहित और उस की पत्नी आशा से 19 जुलाई को एक बच्ची गोद ली थी. इस के बदले उन्होंने उन्हें एक लाख रुपए भी दिए थे.
जब सबइंसपेक्टर नरेंद्र कुमार ने जितेंद्र कुमार को बताया कि जिस बच्ची को उन्होंने गोद लिया है, यह मोहित और आशा की बेटी नहीं है, बल्कि उस का शिकोहाबाद से अपहरण किया गया है तो उन की इस बात से जितेंद्र कुमार और उस की पत्नी भावना के पैरों तले से जमीन खिसक गई. दोनों परेशान हो उठे.
महिला सिपाही सोनी यादव ने नंदिनी को भावना की गोद से अपने कब्जे में लेते हुए कहा, ‘‘हम पुलिस वाले हैं. इस बच्ची को बरामद करने आए हैं.’’
इस के बाद शिकोहाबाद से आई पुलिस टीम ने काररवाई करते हुए जितेंद्र कुमार और भावना को भी हिरासत में ले लिया. पुलिस टीम दिल्ली से अनिता सुनार, राधा माता, इशरत, जितेंद्र कुमार और भावना को शिकोहाबाद ले आई.
काजल और शेरा को जैसे ही पुलिस से सूचना मिली कि नंदिनी मिल गई है, पूरे परिवार के साथ वे थाने पहुंच गए. महिला सिपाही सोनी यादव ने जैसे ही नंदिनी को काजल को सौंपा, उस ने बेटी को सीने से लगाया तो उस की आंखें खुशी से छलक उठीं.
थाने में जितेंद्र कुमार से पूछताछ की गई तो उस ने बताया कि वह कोरियर कंपनी चलाता है. उस की शादी 11 साल पहले भावना से हुई थी. इतने दिनों तक उसे कोई संतान नहीं हुई तो उसने मोहल्ले की रहने वाली इशरत से कोई बच्चा गोद दिलाने को कहा. तब उसे पता नहीं था कि संतान के मोह में इस तरह की आफत मोल लेने जा रहा है.
उसे तो यही पता था कि वह मोहित कुमार और आशा की बेटी गोद ले रहा है. उस ने यह काम कोई चोरी से भी नहीं किया था. बाकायदा नोटरी से लिखापढ़ी करा कर उस ने 2 गवाहों, ललित कुमार और जुगलकिशोर के सामने उस बच्ची को गोद लिया था.
मोहित ने जितेंद्र को बताया था कि उस की 2 बेटियां पहले से हैं, इसलिए तीसरी बेटी को वह किसी जरूरतमंद को गोद देना चाहता है. एक लाख रुपए उस ने जितेंद्र से यह कह कर लिए थे कि उसे अपनी दोनों बड़ी बेटियों को पालनेपोसने में परेशानी हो रही है.
जितेंद्र और उन की पत्नी भावना ने यह काम भले ही धोखे में किया था, लेकिन उन्होंने अपराध तो किया ही था. इसलिए अब वे अपराधी तो थे ही, इसी वजह से पुलिस ने इशरत, औटो चालक कुलदीप, राधा माता और अनिता सुनार के साथ नंदिनी को गोद लेने वाले जितेंद्र और भावना को भी अदालत में पेश किया, जहां से सभी को जेल भेज दिया गया.
मोहित, उस की पत्नी आशा, रानी बघेल और ललित अभी पकड़े नहीं जा सके हैं. पुलिस उन की तलाश कर रही है.
नंदिनी को खोज कर लाने वाली पुलिस टीम को आगरा रेंज के डीआईजी विजय सिंह मीणा ने 25 हजार रुपए का इनाम देने की घोषणा की है. Child Trafficking Case
— 2014 में प्रकाशित






