UP Double Murder Case. राकेश मिश्रा चेतराम का दोस्त था. दोस्त के घर आतेजाते उस के संबंध चेतराम की बीवी मीना से बन गए. चेतराम को पता चला तो उस ने दोनों को चेतावनी भी दी, लेकिन वे नहीं माने. आखिर अंजाम वही हुआ, जो ऐसे मामलों में होता है.  

उत्तर प्रदेश के जिला सीतापुर के गांव सुजातपुर के रहने वाले चेतराम के परिवार में पत्नी मीना के अलावा 2 बेटियां थीं और 1 बेटा. जब मीना का विवाह चेतराम से हुआ था, उस समय उस की उम्र 21 साल थी. वह खूबसूरत भी थी और यौवन से भरपूर भी. सुहागरात को चेतराम उस की खूबसूरती देख कर दंग रह गया था.

वह अपनी किस्मत पर इतराया भी, लेकिन एक अनजाना भय भी उस के दिमाग में घर कर गया कि मीना की खूबसूरती कहीं उस की जिंदगी के लिए अभिशाप न बन जाए.

इस डर को उस ने मीना पर जाहिर भी किया लेकिन उस ने पति को समझा दिया कि पतिपत्नी को एकदूसरे पर विश्वास रखना चाहिए. धीरेधीरे दोनों की जिंदगी ढर्रे पर आ गई और गृहस्थी बस गई.

पहले तो दोनों की जिंदगी मजे से कटी लेकिन बच्चों के आ जाने के बाद परिवार का खर्च बढ़ने लगा तो दिक्कतें आने लगीं. आर्थिक परेशानियों के चलते कई बार घर में तनाव की स्थिति तक बन जाती थी.

राकेश मिश्रा भी सुजातपुर गांव का ही रहने वाला था. वह खेतीबाड़ी का काम करता था. उस का भरापूरा परिवार था. 3 साल पहले जब राकेश के छोटे बेटे शुभम का जन्म हुआ था तो उस की पत्नी सरोज की हालत बिगड़ गई. उसे अस्पताल ले जाया गया लेकिन उस की मौत हो गई.

कुछ दिन तक तो राकेश बीवी के गम में डूबा रहा, लेकिन फिर उसे अपनी दैहिक आवश्यकताएं सताने लगीं.

राकेश की दोस्ती चेतराम से थी. वह कभीकभी उस के घर भी आताजाता रहता था. लेकिन पत्नी की मृत्यु के बाद राकेश के कदम आए दिन उस के घर की ओर बढ़ने लगे थे. इस का कारण था चेतराम की पत्नी मीना की खूबसूरती. उस की गुदाज काया राकेश के मन को भा गई थी. उस के रूपयौवन को देख कर उस की दबी हुई कामनाएं मचल उठी थीं. राकेश ने मीना को देखा तो उस का मन उसे पाने को मचल उठा.

राकेश की सोई इच्छाएं जागीं तो उस का तन फिर से जोश से भर उठा. मीना को अपने प्रेमजाल में फंसाने के लिए वह उस पर विशेष ध्यान देने लगा. दोस्त की बीवी होने के नाते वह उसे भाभी कहता था और उस से चुहलबाजी कर लिया करता था. गाहेबगाहे वह मीना के लिए शृंगार आदि का सामान भी ला देता था.

मीना भी उस से खूब बातें किया करती थी. 3 बच्चों की मां बनने के बाद भी उस का बदन न केवल पहले की तरह गठीला था बल्कि उस का आकर्षण भी बरकरार था. जबकि चेतराम में अब पहले वाली बात नहीं रही थी. उस के प्यार में भी कोई गरमी नहीं बची थी.

राकेश जल्दी ही मीना के मन के असंतोष को भांप गया. इसलिए वह उस की हर इच्छा पूरी करने की कोशिश करने लगा. धीरेधीरे मीना को भी एहसास हो गया कि राकेश उस पर फिदा है. उस ने राकेश की आंखों में अपने प्रति अथाह चाहत देखी तो वह भी अपना स्त्री धर्म भूलने लगी.

एक दिन दोपहर का समय था और मीना घर में अकेली थी. उस वक्त चेतराम काम पर गया हुआ था, जबकि बच्चे पड़ोस में खेलने गए थे. उसी वक्त राकेश घर पर आ गया. मीना उसे बैठाने के बाद चाय बना कर ले आई. चाय पीते हुए राकेश बोला, ‘‘क्या बात है भाभी? आजकल आप का चेहरा कुछ मुरझाया सा रहता है. चेतराम तुम्हारा खयाल नहीं रखता क्या?’’

‘‘उन के पास खयाल रखने का वक्त ही कहां है?’’ मीना का दर्द होंठों पर आ गया, ‘‘काम से थक कर आते हैं और खाना खा कर सो जाते हैं. मुझ पर क्या बीतती है, उन्हें इस से कोई लेनादेना नहीं है.’’

‘‘भाभी, शायद तुम मुझे अपना नहीं मानती, लेकिन मैं तुम्हें अपना मानता हूं.’’ कह कर राकेश ने मीना वाली चाय का कप उठा कर अपने होंठों से लगा लिया.

यह देख कर मीना चौंकी और उसे रोकते हुए बोली, ‘‘अरे..अरे… यह मेरी जूठी चाय है.’’

चाय का घूंट भरने के बाद राकेश शरारत से मुसकराया, ‘‘अगर मैं ने तुम्हारी जूठी चाय पी ली तो क्या हुआ. कहते हैं, जूठा खाने से मोहब्बत बढ़ती है. वैसे भी तुम्हारे होंठों से लग कर चाय और ज्यादा मीठी हो गई है.’’

‘‘धत.’’ कह कर मीना शरमा गई.

‘‘वैसे भाभी, एक बात है. अगर घर में सुकून न मिले तो बाहर टहल लेना चाहिए.’’ यह बात राकेश ने शरारती अंदाज में कह कर  मीना की आंखों में झांका.

वह जो मीना से कहना चाह रहा था, उसे वह बखूबी समझ रही थी. फिर भी अनजान बनते हुए बोली, ‘‘तुम जो भी कहना चाहते हो, साफसाफ कहो.’’ मीना ने भी चुलबुला अंदाज अपनाया.

राकेश मौके की तलाश में था. वह तुरंत मीना का हाथ पकड़ कर बोला, ‘‘भाभी, मेरे कहने का मतलब है कि मैं हर तरह से तुम्हारी इच्छाओं की कसौटी पर खरा उतरूंगा. मैं तुम्हें चाहता हूं, मेरे प्यार में तुम कभी किसी तरह की कमी नहीं पाओगी.’’

राकेश की बात सुन कर मीना ने उस के सामने अपने दिल की किताब खोल दी. वह राकेश के हाथ को चूम कर उस की आंखों में आंखें डाल कर बोली, ‘‘मैं तुम्हारे प्यार पर वारी जाऊं, राकेश. तुम्हारा प्यार तो मेरे लिए उस बादल की तरह है, जो सूख चुकी जमीन को फिर से हराभरा कर देगा. मैं भी तुम्हारा प्यार पाने के लिए काफी समय से तरस रही थी. आज तुम ने अपना प्यार जता कर मेरी जिंदगी खुशियों से भर दी. अब मुझे भाभी कह कर नहीं, मीना कह कर बुलाना.’’

‘‘ठीक है…और कोई आदेश मीनाजी.’’ राकेश ने झुक कर इस तरह कहा जैसे मीना उस की मालकिन हो और वह उस का नौकर. उस के इस शरारती अंदाज पर में मीना हंसते हुए उस से लिपट गई.

राकेश ने उसे अपनी बांहों में भर लिया. इस के बाद उन के बीच वह रिश्ता कायम हो गया जो दुनिया की नजर में नाजायज कहलाता है. उन की चाहतों के उफान ने मर्यादाओं के सारे बांध तोड़ दिए.

फिर तो यह सिलसिला बन गया. दूसरी तरफ चेतराम दोस्त और बीवी की गद्दारी से पूरी तरह अनजान था. लेकिन यह बात कितने दिन छिप सकती थी. पड़ोस के लोगों से चेतराम को उन दोनों की रंगरलियों के बारे में पता चला तो वह गुस्से से भर उठा. लेकिन अपने गुस्से को काबू में कर के उस ने सब से पहले खुद उन दोनों को रंगेहाथों पकड़ने का फैसला किया. अब वह मौके की ताक में रहने लगा.

एक दिन चेतराम जानबूझ कर काम से जल्दी घर लौट आया. उस ने जैसे ही घर के अंदर कदम रखा तो कमरे के अंदर मीना और राकेश आलिंगनबद्ध खड़े दिखाई दिए. यह देख कर चेतराम का खून खौल उठा. वह गुस्से से चिल्ला उठा, ‘‘मीनाऽऽ’’

चेतराम की आवाज सुन कर दोनों हड़बड़ा कर अलग हो गए. चेतराम मीना को पीटते हुए बोला, ‘‘अगर तेरे जिस्म में इतनी आग भरी है तो उसी में जल क्यों नहीं जाती? क्यों मेरी इज्जत का जुलूस निकालने पर तुली हुई है तू?’’

मीना रंगेहाथों पकड़ी गई थी. अपने बचाव के लिए उस ने त्रियाचरित्र दिखाया, ‘‘मैं बहक गई थी, मुझे माफ कर दो. अब कभी ऐसी गलती नहीं करूंगी.’’ उस ने चेतराम के पैर पकड़ लिए.

राकेश ने भी उस से हाथ जोड़ कर माफी मांगी, ‘‘दोस्त, हम बहक गए थे. हमें माफ कर दो. आइंदा ऐसा नहीं होगा. मैं अपने बच्चों की कसम खाता हूं.’’

इज्जत का सवाल था. चेतराम क्या करता? मजबूरी में ही सही, उस ने बात वहीं खत्म कर दी.

इस के बाद मीना और राकेश कुछ दिन शांत रहे. लेकिन मौका मिलते ही फिर एकदूसरे की बांहों में समाने लगे. चेतराम को फिर उन की हरकतों के बारे में पता चला तो उस ने मीना को पीटा और हिदायत दी कि राकेश से अब संबंध रखे तो अच्छा नहीं होगा.

उस ने राकेश को भी धमकाते हुए अपने घर न आने की हिदायत दी. लेकिन उन दोनों पर इन धमकियों का कोई असर नहीं हुआ. वह पहले की तरह ही मिलते और संबंध बनाते रहे. हां, अब वे सावधानी जरूर बरतने लगे थे.

13 अगस्त की रात चेतराम अपने घर के बाहर सो रहा था. राकेश मौका देख कर चुपचाप उस के घर में घुस गया. मीना को मालूम था कि वह आएगा. वह उसे कमरे के अंदर ले गई. अंदर पहुंचते ही उस ने आंगन में लेटी मीना को अपनी बांहों में भर लिया और उसे प्यार करने लगा.

उधर बाहर सो रहे चेतराम की अचानक आंख खुली तो उसे घर के अंदर से मध्यम स्वर में आवाजें आती सुनाई दीं. शक हुआ तो उस ने घर के अंदर जा कर देखा. मुख्य दरवाजा पार कर के उस ने अंदर कमरे में झांका तो मीना और राकेश को आलिंगनबद्ध पाया. वह गुस्से से भर उठा. उस ने आंगन के एक कोने में रखा बांका उठाया और दरवाजे पर दस्तक देने लगा.

मजबूरी में थोड़ी देर बाद मीना ने दरवाजा खोला. राकेश को वहां देख उस का खून खौल उठा. वह बांके से उस की गरदन व शरीर के अन्य हिस्सों पर ताबड़तोड़ वार करने लगा.

राकेश को संभलने तक का मौका नहीं मिला. बांके के अनगिनत वारों से घायल राकेश ने पलभर में दम तोड़ दिया. इस के बाद चेतराम ने मीना को भी बांके से वार कर के मार डाला.

दोनों को मौत के घाट उतारने के बाद चेतराम रक्तरंजित बांका ले कर थानगांव थाने जा पहुंचा. उसे खून से सने बांके सहित देख कर पुलिसकर्मी सहम गए. लेकिन उस ने खुद ही बता दिया कि वह 2 कत्ल कर के आया है.

उस की बात सुन कर वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने थानाप्रभारी विजय यादव को सूचना दी. उस समय वह क्षेत्र में गश्त पर थे. विजय कुमार तुरंत थाने पहुंच गए और हकीकत जानने के बाद उन्होंने इस मामले की सूचना अपने उच्चाधिकारियों को दे दी.

थानाप्रभारी विजय यादव पुलिस टीम के साथ चेतराम को ले कर सुजातपुर गांव स्थित उस के घर पहुंचे. तब तक वहां गांव के काफी लोग एकत्र हो गए थे. चेतराम के घर में 2 लाशें पड़ी हुई थीं. चेतराम ने जो बताया था, वह सही निकला. पुलिस ने उस के तीनों बच्चों को सुरक्षा की दृष्टि से अपनी देखरेख में रख लिया.

इसी बीच एसपी राजेश कृष्ण, एएसपी जगदीश सिंह, सीओ (महमूदाबाद) वी.के. राय फोरेंसिक टीम और 3 थानों रामपुर मथुरा, सदरपुर और रेउसा थानों की पुलिस के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए.

फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए. पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और मृतक राकेश के परिजनों और ग्रामीणों से पूछताछ की तो मामला अवैध संबंधों का निकला. दोनों लाशों को पोस्टमार्टम हेतु सीतापुर स्थित मोर्चरी भिजवा दिया गया.

थानाप्रभारी विजय यादव को आवश्यक दिशानिर्देश दे कर पुलिस उच्चाधिकारी वापस लौट गए. उस के बाद थानाप्रभारी यादव मृतक राकेश के भाई कोमल मिश्रा को साथ ले कर थाने लौट आए.

थाने में कोमल मिश्रा की लिखित तहरीर पर थानाप्रभारी यादव ने चेतराम व 3 अज्ञात लोगों के खिलाफ भादंवि की धारा 302 के तहत मुकदमा दर्ज करा दिया.

मुकदमा दर्ज होने के बाद चेतराम को विधिवत गिरफ्तार कर के सीजेएम के न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. जांच में इस हत्याकांड में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता नहीं पाई गई. UP Double Murder Case

— इसके बाद अदालती कार्रवाई में क्या हुआ यह ज्ञात नहीं है.

— मनोहर कहानियां, 2014 में प्रकाशित

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