Hindi Fiction story. बेवफाई और धोखेबाजी न करने के एवज में जहां रूमाना को करीमभाई जैसा दौलतमंद और प्यार करने वाला पति मिला, वहीं करीमभाई को भी उन की शराफत के इनाम के एवज में रूमाना जैसी प्यार करने वाली बीवी मिल गई.

हारुन 36 साल का स्मार्ट, खूबसूरत और कसरती बदन का मालिक था. रूमाना बेहद हसीन नाजुक सी 25-26 साल की युवती थी. हारुन ने उसे एक तसवीर दिखाते हुए कहा, ‘‘रूमाना, यह एक बड़ा आसामी है. इस से काफी माल मिल सकता है. इस के बाद हम मुल्क छोड़ कर बाहर चले जाएंगे. यह मेरा वादा है.’’

रूमाना ने निर्णायक स्वर में कहा, ‘‘याद रखना, यह आखिरी बार है. अब मैं थक चुकी हूं. इस का नाम क्या है?’’

‘‘करीमभाई. उम्र 55 साल. सीधासादा शरीफ बंदा है. बहुत बड़ा बिजनैसमैन है. सब से बड़ी बात यह है कि यह एकदम अकेला है. ग्रे बालों के साथ काफी स्मार्ट और सोबर लगता है. तंदुरुस्त और चाकचौबंद रहने वाला यह आदमी अपनी उम्र से 10 साल कम लगता है.’’

‘‘ठीक है,’’ रूमाना ने कहा.

करीमभाई काफी अमीर और मशहूर बिजनैसमैन थे. 15-16 साल की उम्र में मैट्रिक कर के उन्होंने अपना कारोबार शुरू किया था. उन के पिता भी बड़े कारोबारी थे, पर उन्होंने बेटे की कोई मदद नहीं की थी. करीमभाई ने अपनी पहली डील मां से रुपए उधार ले कर की थी.

जब वह कमाने लगे थे तो उन्होंने मां के रुपए वापस कर कर दिए थे, लेकिन वह अपने वालिद के शुक्रगुजार थे कि उन्होंने अपने आप कारोबार जमाने का उन्हें आत्मविश्वास दिया. उन्होंने अपने आप अपना बिजनैस खड़ा किया था. बाद में यही सबक उन्होंने अपने बेटों को दिया. उन्होंने अपने बेटों को रकम तो दी, पर बिजनैस सेट हो जाने पर उन्हें उन का कारोबार, घर सब अलग कर दिया था. अब वे अपनाअपना कारोबार अलग चला रहे थे.

करीमभाई ने शुरू से ही उसूल बना रखा था कि औफिस में औरत को नौकरी पर नहीं रखेंगे. उन का खयाल था कि औरत घर की मलिका है, उसे औफिस के धक्के नहीं खाना चाहिए. शायद इसीलिए उन की बीवी हाजरा घर की रानी थीं. घर के सारे फैसले वही करती थीं.

उम्र में करीमभाई से 5 साल छोटी थीं, पर उम्र बढ़ने पर भी बहुत खूबूसरत थीं. 2 जवान बेटों और एक बेटी की मां थीं. सब की शादियां हो चुकी थीं. सब अपनेअपने घरों में खुश थे. हाजरा बेटों को अलग नहीं करना चाहती थीं, लेकिन करीमभाई ने समझाया था कि दूरी से मोहब्बत बढ़ेगी, आनाजाना मिलनाजुलना होता रहेगा. इस घर की मलिका सिर्फ हाजरा रहेगी, हंसीखुशी राज करेगी.

बात उन की समझ में आ गई थी. लेकिन वह ज्यादा दिनों तक राज नहीं कर सकीं. एक साल पहले कैंसर से उन की मौत हो गई. बहुत इलाज हुए, पर जान न बच सकी. तब से करीमभाई अकेले हो गए थे. अब लंच वह घर पर करते थे, जबकि रात का खाना बाहर खा कर आते थे.

उस रात भी वह होटल में डिनर करने गए थे. लौन उन की पसंदीदा जगह थी, जहां समुद्र से आने वाले नम हवा के झोंके अलग ही मजा देते थे. डिनर के बाद वह पार्किंग में आए और अपनी कार के करीब पहुंचे तो देखा एक औरत बोनट पर झुकी सिसकियां ले रही थी.

उस ने अपना बायां पैर थाम रखा था. उस ने खूबसूरत रेशमी अनारकली सूट पहन रखा था. लंबे बालों ने गोरा खूबसूरत चेहरा आधा ढंक रखा था. करीमभाई ने आगे बढ़ कर पूछा, ‘‘मैडम, कोई प्रौब्लम है क्या?’’

उस ने अपना चेहरा ऊपर उठाया. करीमभाई आंसुओं से भीगा हसीन चेहरा देखते रह गए. उस की उम्र करीब 26 साल रही होगी. उस ने बेहद सुरीली आवाज में धीरे से कहा, ‘‘मेरे पैर में मोच आ गई है, बहुत दर्द हो रहा है.’’

करीमभाई ने उस का पैर देखा. दूधिया टखने के पास सूजन नजर आ रही थी. वह बेहद नाजुक लग रही थी.

‘‘डाक्टर को दिखाना पड़ेगा. आप के साथ कोई है?’’ करीमभाई ने पूछा.

‘‘नहीं, मैं अकेली ही आई हूं. यह सामने मेरी कार है, लेकिन अब मैं ड्राइव कैसे करूं?’’ उस ने नए मौडल की कार की तरफ इशारा कर के कहा.

करीमभाई ने सकुचाते हुए कहा, ‘‘आप को ऐतराज न हो तो मैं आप को डाक्टर के पास ले चलूं? मेरा नाम करीमभाई है. मेरा छोटा सा बिजनैस है. यह रहा मेरा कार्ड?’’

‘‘मैं आप को जानती हूं. आप अकसर यहां आते हैं.’’

करीमभाई ने उसे सहारा दे कर आगे की सीट पर बिठाया. हाजरा के बाद वह पहली औरत थी, जो उन के साथ बैठी थी. उस की खुशबू और खूबसूरती से करीमभाई प्रभावित हो रहे थे. उन्होंने पूछा, ‘‘आप का नाम क्या है?’’

‘‘मैं रूमाना अनीस.’’   ‘‘अनीस आप के हसबैंड हैं?’’

‘‘नहीं, अनीस मेरे वालिद का नाम है. अब वह इस दुनिया में नहीं हैं.’’

न जाने क्यों उन्हें यह जान कर खुशी हुई कि रूमाना शादीशुदा नहीं है. वह उसे एक बड़े अस्पताल की ओपीडी में ले गए, जहां पट्टी कर के दवाएं और क्रीम दे दी गईं. दवा देते हुए डाक्टर ने कहा, ‘‘आप की मिसेज बहुत नाजुक हैं, खयाल रखा करें.’’

दोनों बुरी तरह झेंप गए.

सहारा दे कर वापस आते समय करीमभाई के दिल की धड़कन बढ़ गई थी. रूमाना का फ्लैट पहली मंजिल पर था. एक बार फिर उन्हें खुशी  हुई. वह उसे सहारा दे कर ऊपर ले गए. उस ने करीमभाई का शुक्रिया अदा किया, लेकिन अंदर आने को नहीं कहा. इस हालत में वह वैसे भी उन्हें अंदर नहीं बुला सकती थी. जाते हुए करीमभाई ने कहा, ‘‘कार्ड पर मेरा मोबाइल नंबर है. जरूरत पड़ने पर बेहिचक फोन कर दीजिएगा.’’

रूमाना ने पर्स से चाबी निकाल कर देते हुए कहा, ‘‘मेरी कार अपने ड्राइवर से भिजवा दें तो मेहरबानी होगी.’’

इसी के साथ उस ने अपना मोबाइल नंबर भी दे दिया था.

उस रात करीमभाई बहुत खुश थे. उन की तनहाई खूबसूरत खयालों और ख्वाबों से सज गई थी. उन्हें हाजरा का खयाल नहीं आया. अगली सुबह दफ्तर जाते हुए उन्होंने रूमाना को फोन किया, ‘‘आप की तबीयत कैसी है?’’

‘‘अब काफी बेहतर है. गरम पानी से काफी आराम मिला है. मुझे लग रहा था कि आप का फोन आएगा.’’ उस ने धीमे से कहा.

‘‘आप को ऐसा क्यों लग रहा था?’’

‘‘मेरे दिल ने कहा था. यह मुझे अच्छा नहीं लगा कि आप को मैंने कल बाहर से ही जाने दिया. मैं चाहती हूं कि आप मेरे घर आएं, ताकि मैं आप का शुक्रिया अदा कर सकूं.’’

करीमभाई के दिल में घंटियां बजने लगीं. उन्होंने कहा, ‘‘वैसे शुक्रिया अदा करने की जरूरत नहीं है. मैं आप को देखने कल शाम को आऊंगा.’’

अगले दिन की शाम तक का समय करीमभाई ने बड़ी बेचैनी से गुजारा. औफिस से वह सीधे होटल गए. वहां पार्किंग में अपनी गाड़ी छोड़ी और रूमाना की गाड़ी ले कर उस के फ्लैट पर पहुंचे. रास्ते से फूल और केक भी ले लिया था. रूमाना उन्हें देख कर खिल उठी. उस ने गुलाबी अनारकली जोड़ा पहन रखा था, जिस में वह गजब ढा रही थी.

घर बेहद सलीके से सजा हुआ था. सारा सामान बहुत कीमती था. केक व फूल देख कर उस ने कहा, ‘‘इस की क्या जरूरत थी.’’

उस का पैर काफी ठीक था. उस ने उन्हें इसरार कर डिनर के लिए रोक लिया. अंधा क्या चाहे, दो आंखें. उस की बातें सीधीसादी थीं. उस ने बताया कि उस की एक बार शादी हो चुकी थी, पर चली नहीं. उस की शादी उस के डैडी ने हारुन से की थी. पता नहीं वह कैसे धोखा खा गए. वह अच्छा इंसान नहीं था.

उस ने 3 साल बड़ी मुश्किल से गुजारे. इस के बाद एक दिन हारुन ने उसे नशे में तलाक दे दिया. उस के तलाक को चार साल हो चुके थे. अभी उस की उम्र 30 साल थी. एक ही रिश्तेदार डैडी थे, 4-5 साल पहले उन का भी इंतकाल हो गया. डैडी काफी कुछ छोड़ गए थे. जिंदगी आराम से गुजर रही थी. खाने के बाद उस ने ग्रीन टी बनाई, जो करीमभाई को बहुत पसंद आई. वैसे भी वह बस ग्रीन टी ही पीते थे.

खुशीखुशी घर पहुंच कर करीमभाई रूमाना के खयालों में डूबे रहे. औरत जब खुद बढ़ती है तो मर्द की हिचक खत्म हो जाती है. तीसरी मुलाकात में बात शादी तक पहुंच गई. रूमाना ने कहा कि पहले तजुर्बे के बाद उसे शादी से डर लगने लगा था. कई लोग उस की तरफ बढ़े, पर वही पीछे हट गई. उस ने स्वीकार किया कि उन्होंने उस के दिल पर दस्तक दी और उसे वह बहुत भले इंसान लगे.

रूमाना ने शादी के लिए हां कर दी. शादी बहुत साधारण तरीके से हुई. करीमभाई के बच्चे और कुछ दोस्त ही शामिल हुए. रूमाना सिर्फ हसीन ही नहीं, बल्कि बहुत समझदार और मोहब्बत करने वाली बीवी साबित हुई.

नौकरानी के साथ मिल कर खाना वगैरह खुद पकाती. करीमभाई का खयाल था कि रूमाना शादी के बाद कुछ शर्तें रखेगी या सिक्योरिटी के लिए कुछ खास रखने को कहेगी. लेकिन उस ने न कुछ मांगा, न कुछ कहा. करीमभाई ने मेहर 10 लाख रखा था, जो मुंह दिखाई से पहले दे दिया. उसे जो अंगूठी पहनाई थी, उस का हरा पत्थर ही करीब 50 लाख का था. बाकी जेवर अलग थे.

इस शादी से रूमाना बहुत खुश थी. करीम भाई की जिंदगी खुशियों से भर उठी. रूमाना घर की मलिका थी, जो चाहे कर सकती थी. शादी के बाद दोनों वर्ल्ड टुअर पर गए. एक महीने खूब घूमेफिरे, ऐश किया. उस के बाद रूटीन जिंदगी शुरू हो गई.

शुरूशुरू में करीमभाई के बच्चे जरा खिंचेखिंचे रहे, लेकिन जल्दी ही सब नौर्मल हो गए. पहले की तरह आनेजाने लगे. उन्होंने रूमाना को नई कार गिफ्ट की. करीमभाई को लगता था कि वह फिर से जवान हो गए हैं. जिंदगी बेपनाह खूबसूरत लगने लगी थी. रूमाना भी उन का खूब खयाल रखती और खूब प्यार लुटाती. दिन हंसीखुशी गुजरते रहे.

एक दिन काम के दौरान एक अजनबी नंबर से करीमभाई को फोन आया. फोन उठा कर उन्होंने कहा, ‘‘हैलो, कौन बोल रहा है?’’

‘‘हारुन.’’ दूसरी ओर से सपाट लहजे में कहा गया.

करीमभाई शौक्ड रह गए.

‘‘मुझे पहचाना करीमभाई?’’

‘‘हां, फोन क्यों किया?’’

‘‘यह बताने के लिए कि मैं तुम्हारे औफिस के बाहर खड़ा हूं. तुम से मिलने आ रहा हूं. कुछ जरूरी बातें करनी हैं.’’

करीमभाई सोच में डूब गए. उन के माथे पर पसीना चमकने लगा. उन्होंने सेक्रेटरी से कहा, ‘‘हारुन नाम का एक आदमी आ रहा है. गार्ड से चैक करवा कर उसे अंदर भेजो.’’

2 मिनट बाद एक 35-36 साल का स्मार्ट सा आदमी अंदर आया. उस की आंखों में चालाकी और कमीनापन साफ झलक रहा था. करीमभाई ने उसे बैठने को भी नहीं कहा, लेकिन वह बैठ गया.

करीमभाई ने बेरुखी से कहा, ‘‘मैं बहुत मसरूफ हूं, जो कहना है जल्दी कहो.’’

‘‘मैं अपनी बीवी के बारे में बात करने आया हूं.’’

‘‘यह क्या बकवास है? अब वह तुम्हारी बीवी कहां है?’’

‘‘जो औरत पहले से ही शादीशुदा हो, अगर वह दूसरी शादी कर लेती है, तब भी वह पहले शौहर की बीवी कहलाएगी.’’

‘‘पहले से शादीशुदा थी. लेकिन तुम तो उसे तलाक दे चुके हो.’’

‘‘अगर मैं ने रूमाना को तलाक दिया है तो इस का तुम्हारे पास कोई तो सुबूत होगा?’’

करीमभाई को खयाल आया कि ऐसी कोई चीज रूमाना ने उन्हें नहीं दिखाई थी और दूसरे निकाह के वक्त पहले निकाह का कोई जिक्र भी नहीं किया था. वैसे भी एक निकाह पर दूसरा निकाह हराम है, इसलिए दूसरे निकाह के वक्त तलाकनामा पेश करना जरूरी होता है. उन का लहजा कमजोर पड़ गया, ‘‘तुम ने रूमाना को मुंहजबानी तलाक दिया था.’’

‘‘अदालती मामलों में जबानी तलाक का कोई महत्त्व होता है क्या? यह तुम अच्छी तरह जानते हो. लगता है, रूमाना के हुस्न ने तुम्हारी अक्ल को घास चरने भेज दिया था. तुम ने उस से पूछा तक नहीं.’’ हारुन ने कहा.

‘‘रूमाना ने मुझे बताया था कि 4 साल पहले तुम ने उसे तलाक दे दिया था.’’ करीमभाई ने कहा.

‘‘…और तुम ने मान लिया. तुम इतना बड़ा बिजनैस चलाते हो, इतने जहीन आदमी हो, ऐसी गलती कैसे कर सकते हो?’’ वह बोला.

करीमभाई ने जल्दी से कहा, ‘‘तुम्हारे पास क्या सुबूत है कि रूमाना तुम्हारी बीवी है?’’

हारुन ने लिफाफे से निकाहनामे की फोटोकौपी सामने रखते हुए कहा, ‘‘यह है निकाहनामा. इस पर रूमाना के दस्तखत हैं. उस के आईडी कार्ड की कौपी भी मौजूद है. यह निकाह रजिस्ट्रार औफिस में बाकायदा रजिस्टर्ड है.

काजी ने निकाह करवाया था. निकाह औफिस के रिकौर्ड के अनुसार रूमाना आज भी मेरी बीवी है. यह तो हुआ कानूनी सुबूत. अब कहो तो बता दूं कि रूमाना के बदन पर कहां और कितने तिल हैं?’’

करीमभाई ने मुश्किल से खुद को जब्त किया. उन्हें लगा कि हार्टअटैक आ जाएगा. उन की दराज में पिस्तौल रखा था. उन का दिल कह रहा था कि उठा कर हारुन को गोली मार दें. वह उन की बीवी के बारे में ऐसी गंदी बातें कर रहा था. उन्होंने पानी पिया और बेरुखी से कहा, ‘‘कहो, चाहते क्या हो तुम?’’

‘‘मैं क्या चाहता हूं. मैं अपनी बीवी वापस चाहता हूं.’’

‘‘वह 4 साल पहले तुम्हारी बीवी थी. अब उस से तुम्हारा कोई संबंध नहीं है.’’

‘‘4 साल की जुदाई को तलाक नहीं मान लिया जाता. वह आज भी मेरी बीवी है.’’

‘‘तुम उसे तलाक दे चुके हो. तुम ने उसे जबानी तलाक दिया है. अब मैं तुम्हारा मतलब समझ गया हूं. बोलो, कितना चाहिए 10 लाख, 20 लाख, बोलो?’’

‘‘मुझे अपनी बीवी वापस चाहिए. मैं तुम्हें 2 दिन की मोहलत देता हूं. इस के बाद मैं अदालत जाऊंगा. अगर तुम नहीं जानते तो वकील से पूछ लेना, तुम पर कौनकौन से केस बनेंगे.’’ हारुन ने सपाट लहजे में कहा और कमरे से बाहर निकल गया.

करीमभाई को कुछ सालों पहले ऐनजाइमा की तकलीफ हुई थी. डाक्टर ने उन्हें जुबान के नीचे रखने वाली गोली दी थी. उन्होंने कांपते हाथों से गोली जुबान के नीचे रखी. आंखें बंद कर के गहरीगहरी सांसें लेने लगे. थोड़ी तबीयत संभली तो घर के लिए रवाना हो गए.

‘‘क्या बात है, आप कुछ परेशान से लग रहे हैं?’’ रूमाना ने उन के घर पहुंचते ही पूछा.

‘‘हां, कुछ परेशानी है. तुम बहुत खुश लग रही हो?’’

‘‘हां, खबर ही खुशी की है. लेकिन पहले आप बताइए कि क्यों परेशान हैं?’’

करीमभाई कुछ देर टहलते रहे, उस के बाद सोच कर बोले, ‘‘आज हारुन हमारे औफिस में आया था.’’

‘‘हारुन आया था?’’ रूमाना ने हैरानी से पूछा. इस के बाद बिफर कर बोली, ‘‘आप ने उसे औफिस से निकलवा क्यों नहीं दिया?’’

‘‘मैं यही करता, लेकिन रूमाना, तुम यह बताओ कि हारुन ने तुम्हें जबानी तलाक दिया था या लिख कर दिया था?’’

‘‘जबानी दिया था. मगर इस से क्या फर्क पड़ता है. तलाक तो तलाक है, जबानी दे या लिख कर दे. तलाक तो हो जाता है.’’ वह सादगी से बोली. करीमभाई ने सिर पर हाथ मार कर कहा, ‘‘तुम बड़ी मासूम हो. तुम्हें नहीं मालूम कि आजकल जमाना कितना खराब हो गया है. अगर तुम्हारे पास कोई सुबूत नहीं है तो अदालत में यही माना जाएगा कि उस ने तुम्हें तलाक नहीं दिया है.’’

रूमाना हैरान रह गई, ‘‘आप…आप का मतलब है कि वह कमीना आदमी 4 साल बाद यह दावा ले कर आया है कि तलाक नहीं हुआ है.’’

‘‘हां, उस के पास निकाहनामे की कौपी है. रजिस्ट्रार औफिस की रजिस्टर्ड कौपी है.’’ यह कह कर निकाह की कौपी रूमाना के हाथ में दे दी, जो हारुन छोड़ कर गया था.

‘‘बकवास करता है कमबख्त.’’ रूमाना ने गुस्से से निकाहनामा फाड़ कर फेंक दिया. इस के बाद गुस्से से कांपते हुए बोली, ‘‘कोई संबंध नहीं है हारुन से मेरा, मैं आप की बीवी हूं.’’ कह कर रूमाना रोने लगी.

‘‘मैं जानता हूं.’’ करीमभाई ने कहा और रोती हुई रूमाना को सीने से लगा कर चुप कराने लगे.

‘‘आज मैं आप को एक खुशखबरी सुनाने वाली थी कि यह मनहूस खबर आ गई.’’

‘‘कैसी खुशखबरी?’’ सेठ करीमभाई ने पूछा.

रूमाना ने शरमाते हुए कहा, ‘‘मैं मां बनने वाली हूं. आज ही मैं डाक्टर के पास गई थी.’’

करीमभाई खुश हो गए. उन्होंने बड़े विश्वास के साथ कहा, ‘‘अब तुम फिक्र मत करो, मैं सारा मामला निपटा लूंगा.’’

‘‘आप क्या करेंगे? पुलिस में जाएंगे?’’

‘‘नहीं, पुलिसअदालत में जाने से मामला बिगड़ जाएगा. मेरे पास एक तरीका है, मैं उस का मुंह बंद कर दूंगा.’’

बाद में हारुन ने रूमाना को फोन कर के कहा, ‘‘तुम ने अपनी भूमिका बहुत अच्छी तरह अदा की है. बच्चे के बारे में सुन कर बुड्ढा तो दीवाना हो गया होगा?’’

‘‘हां हारुन, लेकिन मुझे डर लग रहा है. उस ने कहा है कि उस के पास उस का मुंह बंद करने का एक तरीका है.’’

‘‘अरे वह रकम दे कर मुंह बंद कराने की बात कर रहा होगा.’’ हारुन ने कहा.

‘‘नहीं, सोचो वह अरबपति है. उस के पास दौलत की ताकत है. अगर उस ने इस ताकत को तुम्हारे खिलाफ इस्तेमाल किया तो..? मैं ने 2 बार पूछा कि कौन सा तरीका है तो उस ने कोई जवाब नहीं दिया. रकम की बात होती तो वह मुझ से जरूर बता देता.’’

रूमाना की इस बात से हारुन परेशान हो गया. इस से पहले उन्होंने जिन 5 लोगों को इसी तरह फांसा था, उन में से कोई भी इतना दौलतमंद नहीं था.

वैसे तो करीमभाई देखने में बहुत शरीफ था, दौलत का इस्तेमाल कर के पुलिस को मिलाने और किराए के किलर की व्यवस्था करने में उसे कोई परेशानी नहीं होगी. उस के पास कई औप्शन थे. हारुन बुनियादी तौर पर बुजदिल आदमी था. उस ने रूमाना से पूछा, ‘‘तुम क्या सोचती हो?’’

‘‘मेरी सलाह तो यही है कि अब तुम उस के सामने मत जाना. फोन पर बात करो और यह सिम बंद कर दो या जब बात करनी हो तभी चालू करो, क्योंकि यह सिम तुम्हारे नाम है. वह तुम्हें ब्लैकमेलिंग में फंसा सकता है. एक बात और याद रखना हारुन, तुम ने वादा किया था कि यह आखिरी बार है. इस के बाद हम बाहर चले जाएंगे.’’

हारुन ने एक बार फिर वही यकीन दिलाया, जो पहले भी कई बार दिला चुका था. वह चालबाज, शातिर आदमी था. उस का और रूमाना का 7 साल से ज्यादा का साथ था.

दोनों ने घर से भाग कर शादी की थी. रूमाना एक बहुत अच्छे खानदान की लड़की थी, लेकिन कमउम्र में मोहब्बत के जज्बात में आ कर उस के साथ भाग गई थी और शादी कर ली थी. रूमाना के घर वाले हारुन को बिलकुल नहीं पसंद करते थे. हारुन को घरगृहस्थी में कोई दिलचस्पी नहीं थी. उस का मकसद बस दौलत कमाना और अय्याशी करना था.

दोनों कई शहरों में रहे और हर जगह इसी तरह चक्कर चला कर कई लोगों को ब्लैकमेल किया. रूमाना मजबूर थी. वह घर भी वापस नहीं जा सकती थी. घर जाने पर उस के दोनों भाई उसे जिंदा जला देते.

हारुन ने रूमाना को जिस रास्ते पर चलाया था, वह उस पर चलने को मजबूर थी. इसी वजह से उन्होंने काफी दौलत जमा कर ली थी. इस के अलावा भी हारुन उल्टेसीधे तरीकों से पैसे कमाता रहता था.

ऐसे कामों में रूमाना उस का साथ देतेदेते तंग आ चुकी थी. यह भी कह सकते हैं कि वह थक चुकी थी. उस का कहना था कि यह आखिरी बार है, इस के बाद वे बाहर चले जाएंगे. करीमभाई लगातार कोशिश कर रहे थे, लेकिन हारुन का नंबर नहीं लग रहा था. वह लगातार बंद बता रहा था. उस ने 2 दिन का समय दिया था. एक ही दिन उन के पास था. वह सोच रहे थे कि हारुन न जाने कितनी रकम पर राजी होगा? काम में उन का मन बिलकुल नहीं लग रहा था. उन्होंने फाइलें बंद कर दीं. बारबार उन का ध्यान मोबाइल पर जा रहा था. इस के पहले वह कभी इतना परेशान नहीं हुए थे.

कहां खुशी मनाने का मौका था और वह परेशान थे. फोन की घंटी बजी तो उन्होंने लपक कर उठाया. लेकिन यह रूमाना का फोन था. उस ने पूछा, ‘‘हारुन का कोई फोन आया? मुझे डर लग रहा है.’’

‘‘तुम्हें डरने की जरूरत नहीं है, मैं सब संभाल लूंगा. अगर घी सीधी अंगुली से नहीं निकला तो मुझे अंगुली टेढ़ी करना भी आता है. मुझे पता है कि मुझे क्या करना है.’’ करीमभाई ने दृढ़ता से कहा.

रूमाना ने धीरे से कहा, ‘‘शादी के बाद मैं बहुत खुश थी. खुद को बहुत महफूज समझ रही थी, लेकिन यह बखेड़ा खड़ा हो गया.’’

‘‘तुम बिलकुल फिक्र मत करो, सब ठीक हो जाएगा.’’

करीमभाई ने जैसे ही फोन काटा. संयोग से उसी वक्त हारुन का फोन आ गया. उस ने कहा, ‘‘करीमभाई, तुम मेरे ही फोन का इंतजार कर रहे थे न?’’

‘‘काम की बात करो.’’ करीमभाई ने सख्ती से कहा.

‘‘बताइए, आप ने क्या फैसला किया?’’      ‘‘कैसा फैसला?’’

‘‘यही कि आप रूमाना को वापस कर रहे हैं या नहीं?’’

‘‘यह अब मुमकिन नहीं है. वह मेरे बच्चे की मां बनने वाली है.’’ करीमभाई ने कहा तो हारुन हंसा, ‘‘तब तो मेरा मामला और भी मजबूत हो गया. अभी तक तो आप दोनों मुकर सकते थे, लेकिन अब बच्चे की वजह से इनकार नहीं कर सकते.’’

‘‘हारुन, तुम मेरे औफिस आ जाओ. हम मिलबैठ कर मसले का हल निकाल लेंगे. अदालत जाने से बात नहीं बनेगी. मैं तो बदनाम हो ही जाऊंगा, लेकिन तुम भी मुश्किल में पड़ जाओगे. तुम्हारा मकसद भी पूरा नहीं होगा.’’ करीमभाई ने नरमी से कहा.

‘‘आप दोनों सिर्फ बदनाम ही नहीं होंगे, आप दोनों पर मुकदमा भी चलेगा, शादीशुदा औरत से शादी करने का.’’

‘‘यह बात तो तुम भूल जाओ. तुम झूठ बोल सकते हो. मेरे पास दौलत है, मैं बड़े से बड़ा गवाह खड़ा कर सकता हूं. कई झूठे गवाह गवाही को तैयार हो जाएंगे. मैं साबित कर दूंगा कि तुम ने रूमाना को तलाक दे दिया है.’’

‘‘मि. करीम, यह इतना आसान भी नहीं है. दौलत मेरे पास भी है. मैं भी बड़े से बड़ा वकील कर सकता हूं, जो तुम्हारे गवाहों की धज्जियां उड़ा देगा.’’ उस ने सपाट लहजे में कहा.

‘‘इस तरह यह मामला बरसों चलेगा.’’

‘‘यही तो मैं चाहता हूं. अगर रूमाना मुझे नहीं मिलती है तो तुम भी सुकून से नहीं बैठ सकते. यह मीडिया का दौर है, हर चैनल पर मामला उछलेगा.’’

करीमभाई सोच में पड़ गए. अगर ऐसा हुआ तो उन की साख और इज्जत का क्या होगा? उन्होंने धीमे से कहा, ‘‘तुम रूमाना की वापसी के अलावा कोई हल सोचो. जो रकम तुम कहो, मैं देने को तैयार हूं. तुम अपनी डिमांड बताओ, मैं पूरी करूंगा.’’

हारुन कुछ देर सोचता रहा. उस के बाद बोला, ‘‘2 करोड़ रुपए. अगर तुम 2 करोड़ रुपए दे दो तो मैं पीछे हट जाऊंगा.’’

‘‘यह तो बहुत बड़ी रकम है.’’

‘‘लेकिन आप की आमदनी के सामने कुछ भी नहीं है. 2-3 महीने में फिर कमा लोगे.’’

करीमभाई ने सोचते हुए कहा, ‘‘ठीक है, मैं 2 करोड़ रुपए दे दूंगा, लेकिन ऐसे नहीं. पेपर्स मैं खुद तैयार करूंगा. तुम उन पर 2 गवाहों के सामने साइन कर के तलाक दोगे. यह सारा काम मेरे औफिस में होगा.’’

‘‘नहीं, मैं सामने नहीं आऊंगा. तुम रकम और पेपर्स ले कर रूमाना को भेजोगे.’’

‘‘वह नहीं जाएगी.’’ करीमभाई ने कहा.

‘‘अगर वह नहीं आएगी तो कोई डील नहीं होगी.’’ हारुन ने सख्ती से कहा.

‘‘ठीक है, चली जाएगी वह. आगे बोलो.’’

‘‘रकम और पेपर्स ले कर रूमाना आएगी. रकम डौलर्स में होगी और वह उस बैंक में आएगी, जहां मैं बुलाऊंगा. मैं बैंक मैनेजर के सामने साइन करूंगा. वह मेरे साइन की तस्दीक करेगा, उस के बाद रूमाना पैसे मेरे एकाउंट में डाल देगी. मैं नंबर उसी वक्त बताऊंगा.’’

करीमभाई उस की बात सुन कर चिंता में पड़ गए . उन्होंने कहा, ‘‘बैंक मैनेजर तुम्हारा गवाह है तो बाद में वह तुम्हारा फेवर करेगा.’’

‘‘नहीं, वह सिर्फ साइन सर्टिफाई करेगा. वह हमारा आदमी नहीं, बैंक का मुलाजिम है.’’ हारुन ने कहा.

‘‘ठीक है, लेकिन रूमाना के साथ मैं आऊंगा.’’ करीमभाई ने कहा.

‘‘नहीं, वह अकेली आएगी. कल मैं इसी समय फोन करूंगा. अगर तुम मेरी शर्तें मानते हो तो ठीक है, नहीं तो मामला अदालत में जाएगा.’’ हारुन ने अपनी बात कह कर फोन काट दिया.

हारुन ने बड़ी चालाकी से पूरा प्लान बनाया था. वह पहले ही सोच चुका था कि उसे कैसे और क्या करना है. जैसे ही करीमभाई 2 करोड़ रुपए देने को राजी हुए, उस ने पूरा प्लान बता दिया. सारा काम बैंक में होना था. इस के बावजूद हारुन को भरोसा नहीं था. करीमभाई बेदिली से औफिस का काम करने लगे. उन का सुकून जैसे खत्म हो गया था. उन्होंने संक्षेप में रूमाना को हारुन की बात बता दी थीं.

करीमभाई घर पहुंचे तो रूमाना बेचैनी से इंतजार कर रही थी. उन्होंने सारी बात बताई. 2 करोड़ की बात सुन कर उस ने कहा, ‘‘मुझे पता था कि वह बहुत लालची आदमी है. मैं ने अब तक शादी नहीं की थी तो चुप था. शादी होते ही खुल कर सामने आ गया.’’

करीमभाई ने कहा, ‘‘मेरे लिए परेशानी यह है कि उस ने तुम्हें अकेली बुलाया है. पर मैं साथ चलूंगा, जो होगा देखा जाएगा.’’

रूमाना ने प्यार से उस के सीने पर सिर रख कर कहा, ‘‘आप परेशान न हों. मुझे कोई खतरा नहीं है. सारा काम बैंक में होगा, मैं सब संभाल लूंगी.’’

करीमभाई का दिल तो नहीं मान रहा था, लेकिन रूमाना ने अकेली जाने की बात उन से मनवा ली कि वह जा कर उस से तलाक के पेपर्स पर साइन करवा लाएगी और रकम दे देगी.

अगले दिन हारुन का फोन आया तो उन्होंने कहा कि वह तैयार हैं. 2 करोड़ रुपए डौलर में तैयार हैं. हारुन ने कहा, ‘‘कल सुबह रूमाना रुपए ले कर कार से बैंक पहुंचे. किस बैंक में आना है, यह कल बताऊंगा.’’

अगले दिन रूमाना और हारुन किसी बैंक में नहीं, एक शानदार रेस्टोरेंट में कोने की मेज पर बैठे थे. सुबह का वक्त था, लोग बहुत कम थे. हारुन ने पूछा, ‘‘रकम कहां है?’’

हारुन ने यह बात इसलिए पूछी थी, क्योंकि रूमाना के पास कोई बैग नहीं दिख रहा था. रूमाना ने तलाक के पेपर्स हारुन के सामने रखते हुए कहा, ‘‘ये रहे तलाक के पेपर्स, जो करीमभाई ने खासतौर से बैक डेट में तैयार कराए हैं.’’

हारुन ने हैरानी से कहा, ‘‘क्या तुम सचमुच तलाक..?’’

‘‘हां, तुम मुझे सच में तलाक दोगे. वैसे तुम मुझे पहले भी जबानी तलाक दे चुके हो.’’

‘‘वह तो मैं ने तुम्हारी तसल्ली के लिए दिया था. हम दोबारा शादी कर सकते हैं.’’ हारुन ने कहा.

‘‘मैं अब ऐसा नहीं चाहती.’’ रूमाना ने कहा.

हारुन ने व्यंग से कहा, ‘‘क्यों, इसलिए कि करीमभाई अरबपति है. वह आराम से करोड़ों किसी के मुंह पर मार सकता है.’’

‘‘नहीं, इसलिए कि कल दुबई जाने वाली फ्लाइट में तुम्हारी अकेले की सीट बुक है.’’ रूमाना ने तीखे लहजे में कहा.

रूमाना की बात सुन कर हारुन का चेहरा उतर गया, ‘‘तुम्हें कैसे पता चला?’’

‘‘अब यह सब पता करना कोई मुश्किल काम नहीं है. मुझे पहले से ही पता था कि यह आखिरी काम होगा और उस के बाद तुम पैसे ले कर चुपके से खिसक जाओगे. सारी रकम पहले से ही तुम्हारे पास थी. इसलिए अब मैं यह काम नहीं करना चाहती थी. तुम मुझे तनहा और बेसहारा छोड़ कर भाग जाने वाले थे न, था न तुम्हारा यही प्लान?’’ रूमाना ने कहा.

हारुन ने अपने आप को संभाल कर ढिठाई से कहा, ‘‘ओके, अब तुम बेसहारा नहीं रहोगी. तुम्हारे पास करीमभाई जैसा अमीर शौहर है.’’

‘‘हां, वह बहुत दौलतमंद है. लेकिन उन की दी हुई सब से कीमती चीज यह है.’’ रूमाना ने पेट पर हाथ रख कर कहा. हारुन को गहरा झटका लगा. उस ने हकलाते हुए पूछा, ‘‘तु…तुम सचमुच मां…?’’

‘‘हां, यह सच है. मैं मां बनने वाली हूं. इसी सच ने मुझे बदल दिया है. मुझे अपनी परवाह नहीं थी, लेकिन बच्चे के लिए तो बाप का साया चाहिए. इसी की वजह से मैं करीमभाई जैसे मासूम और शरीफ आदमी को धोखा देने से बच जाऊंगी.’’

‘‘अच्छा, वह मासूम आदमी है, तभी तुम्हारे जाल में फंस गया है.’’ हारुन ने व्यंग किया.

‘‘हां, वह मासूम है, तभी उस ने आंखें बंद कर के मुझ पर यकीन किया.’’ रूमाना ने पूरे यकीन से कहा.

‘‘अगर उसे मालूम हो गया कि तुम अतीत में क्या करती रही हो, कैसे लोगों को उल्लू बनाती रही हो? क्या तब भी वह तुम पर यकीन करेगा?’’ हारुन ने पूछा.

‘‘कर भी सकता है और नहीं भी कर सकता. मगर इस से तुम्हें कोई फायदा नहीं होगा. आज से हमारे रास्ते अलग हैं. तुम साइन करो और अंगूठे का निशान लगाओ.’’ रूमाना ने पेन और इंकपैड उस के सामने रख कर कहा.

हारुन ने मुसकराते हुए पूछा, ‘‘क्या मैं इस के लिए मजबूर हूं?’’

‘‘हां, अगर तुम्हारा इशारा रकम की ओर है तो वह मौजूद है. लेकिन इस से पहले तुम्हें मुझे बाकायदा तलाक देना होगा.’’

‘‘कहां है रकम?’’ इस बार हारुन का अंदाज बदल गया.

‘‘साइन करो, निशान लगाओ. मैं तुम्हें रकम दे कर जाऊंगी.’’

हारुन कुछ देर सोचता रहा. अचानक उस ने पेन उठाया और सभी जगहों पर साइन कर दिए. उस के बाद अंगूठे का निशान लगा कर पेपर्स रूमाना की ओर बढ़ा दिए.

गौर से सारे पेपर्स चैक कर के रूमाना खड़ी हो कर बोली, ‘‘आओ मेरे साथ.’’

रूमाना उसे बैंक में ले गई और मैनेजर से सेफ से बैग निकलवाया. उसी ने वह रकम का बैग सेफ में रखवाया था. मैनेजर उसे जानता था. उस ने बैग ले कर हारुन को दे दिया. हारुन ने बैग मेज पर खोल कर देखा और तसल्ली हो कर उसे बंद कर दिया.

‘‘इस का मतलब यह हमारी आखिरी मुलाकात है?’’

‘‘बिलकुल आखिरी. तुम्हारे लिए बेहतर यही होगा कि अब तुम इस शहर में नजर न आओ.’’  रूमाना ने कहा तो हारुन मुसकराया, ‘‘अभी तो मैं जा रहा हूं, लेकिन मुझे यहां वापस आने से कोई नहीं रोक सकता.’’

उस के जाने के बाद रूमाना घर के लिए रवाना हो गई. उस ने जानबूझ कर हारुन को डराया था कि वह करीमभाई से दूर रहे. इसीलिए वह खुद रकम देने आई थी. रूमाना को सचमुच करीमभाई से मोहब्बत हो गई थी, इसलिए अब वह उन्हीं की बीवी बन कर रहना चाहती थी.

रूमाना घर पहुंची तो करीमभाई ने उसे बांहों में भर लिया. रूमाना ने सोचा, ‘‘अब यही मेरी दुनिया और जिंदगी है.’’

करीमभाई बहुत खुश थे. उन्हें 2 करोड़ रुपए का जरा भी गम नहीं था, क्योंकि अब रूमाना को उन से कोई नहीं छीन सकता था. सुबह जब आंख खुली तो बराबर लेटी रूमाना को देख कर उन्हें उस पर बहुत प्यार आया. उस का सोया हुस्न गजब ढा रहा था.

सुबह के 8 बज रहे थे. करीमभाई को मालूम था कि दुबई के लिए अभी एक फ्लाइट उड़ने वाली है. इसी फ्लाइट में जा रहे हारुन के बैग में एयरपोर्ट पर उन की पहचान का एक औफिसर तलाशी के दौरान एक छोटा सा पैकेट रख कर उस के सामान को क्लीयर कर देगा. दुबई पहुंचने पर उस का सामान चैक होगा तो उस में से हेरोइन निकलेगी.

करीमभाई घर में सीधेसादे थे, लेकिन जब वह घर से निकलते थे तो बहुत स्मार्ट और चालाक हो जाते थे. रूमाना से शादी के बाद उन्होंने उस के बारे में पूरी छानबीन कर ली थी और वह उस के बारे में सब कुछ जान गए थे. मगर उन्होंने रूमाना को न कुछ बताया था और न व्यवहार में फर्क आने दिया था. वह उसी तरह उसे प्यार करते रहे.

वह देखना चाहते थे कि आगे क्या होता है. वह रूमाना से मोहब्बत करने लगे थे, इसलिए बिना किसी तफ्तीश के उस से शादी कर ली थी. उस के बारे में पता करने का खयाल तो उन्हें बाद में आया था. अगर रूमाना धोखा देती या बेवफाई करती तो हेरोइन की स्मगलिंग में हारुन के साथ वह भी पकड़ी जाती. अच्छा हुआ कि उस ने उन के साथ रहने का फैसला कर लिया था.

रूमाना के इस फैसले के बदले उन्होंने उस के अतीत के सारे गुनाह माफ कर दिए थे. बाथरूम की तरफ जाते हुए वह सोच रहे थे कि अतीत को भुला कर नई जिंदगी बहुत अच्छी गुजरेगी.

करीमभाई को मालूम था कि हारुन बहुत कमीना और चालबाज आदमी है. उस से हमेशा के लिए छुटकारा पाने का सब से बढि़या तरीका यही था कि उसे इस तरह फंसाया जाए कि उस के लिए निकलना मुश्किल हो जाए. अगर रूमाना भी धोखा देती तो वह भी सजा भुगतती. करीमभाई को भी उन की शराफत का इनाम मिला कि रूमाना को उन से मोहब्बत हो गई.   Hindi Fiction story

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