Cricket Memorabilia. भारत में क्रिकेट के दीवानों की कमी नहीं है. उन्हीं में एक हैं चंडीगढ़ के धर्मवीर दुग्गल, जिन्होंने क्रिकेट से जुड़े तमाम रिकौर्ड अपने संग्रह में जुटाए हैं.  

डा. मोहम्मद जहांगीर खान पाकिस्तान के लाहौर के जमान पार्क स्थित अपने घर में बैठे चायनाश्ता कर रहे थे, तभी उन के नौकर ने आ कर कहा कि एक लड़का उन से मिलने आया है. उस समय डा. मोहम्मद जहांगीर की उम्र करीब 80 साल थी. अपने समय के वह जानेमाने क्रिकेट खिलाड़ी थे. आजादी से पहले सन 1932 में हिंदुस्तान की पहली क्रिकेट टीम जब इंग्लैंड के दौरे पर गई थी, तब इस टीम के खिलाडि़यों में वह भी शामिल थे. उस समय उन्होंने क्रिकेट में खूब नाम कमाया था.

उम्र होने पर क्रिकेट से संन्यास ले कर वह पाकिस्तान के लाहौर में बस गए थे. जैसेजैसे उम्र बढ़ती गई, मिलने आने वालों की संख्या घटती गई. अब वह खुद भी लोगों से नहीं मिलना चाहते थे. लेकिन जब उन्हें पता चला कि मिलने आने वाला लड़का भारत के शहर चंडीगढ़ से आया है तो उन्होंने तुरंत उसे बुला लिया. यह सन 1985 की बात थी. उस लड़के का नाम था धर्मवीर दुग्गल.

धर्मवीर दुग्गल चंडीगढ़ के जानेमाने सिविल कांट्रैक्टर द्वारकादास दुग्गल का सब से छोटा बेटा था. जब वह चंडीगढ़ के सेक्टर-8 स्थित जिस डी.ए.वी. हायर सेकेंड्री स्कूल में पढ़ता था, उसी समय भारत के जानेमाने क्रिकेटर कपिल देव और योगराज (युवराज के पिता) भी पढ़ते थे. धर्मवीर इन का करीबी साथी था. उसे भी क्रिकेट खेलने का शौक था.

वह भी योगराज तथा कपिल देव की तरह क्रिकेट खिलाड़ी बनना चाहता था, इसलिए वह इन के साथ जम कर क्रिकेट खेलता था. लेकिन क्रिकेटर बनने का उस का सपना पूरा नहीं हो सका. क्योंकि 1978 में पिता द्वारकादास की मौत के बाद घर की परिस्थितियां बदल गईं. क्रिकेट खिलाड़ी बनना तो दूर रहा, बीए करने के बाद धर्मवीर को पढ़ाई तक छोड़नी पड़ी.

धर्मवीर भले ही क्रिकेटर नहीं बन सका, लेकिन क्रिकेट से उस का मोह नहीं छूटा. यही वजह थी कि क्रिकेट से जुड़ी पत्रिकाएं वगैरह वह पढ़ता रहता था. 1980 में वह किसी काम से दिल्ली गया तो लाल किला के सामने वाली सड़क के किनारे फुटपाथ पर लगी पुरानी किताबों की एक दुकान से उस ने इंग्लैंड से प्रकाशित होने वाली ‘क्रिकेटर इंटरनेशनल’ पत्रिका का एक पुराना अंक खरीद लिया. वैसे तो इस पत्रिका की कीमत 70 पेंस थी, लेकिन दुकानदार ने उसे 2 रुपए में दे दी थी.

चंडीगढ़ लौट कर धर्मवीर पत्रिका पढ़ने लगे. सब से पहले उस ने संपादक के नाम छपने वाले पत्रों के पेज को पढ़ा. उस में एक क्रिकेट प्रेमी एलन जोंस का एक पत्र छपा था. उस ने लिखा था कि उस ने अपने चहेते तमाम क्रिकेट खिलाडि़यों को पत्र लिखे, लेकिन ज्यादातर खिलाडि़यों ने पत्रों का जवाब नहीं दिया. अगर किसी ने दिया भी तो पहले से छपा जवाब भिजवा दिया, वह भी महीनों बाद.

एलन जोंस ने पत्रिका के संपादक से शिकायत की थी कि प्रशंसक अपना कीमती समय निकाल कर और अच्छाखासा पैसा खर्च कर के जिन खिलाडि़यों का खेल देखने जाते हैं, उन के लिए इन खिलाडि़यों के पास पल भर का भी समय नहीं रहता.

धर्मवीर को इस पत्र ने झकझोरा तो उस ने भी इस की सच्चाई का पता लगाने के लिए अपने एक चहेते क्रिकेट खिलाड़ी को पत्र लिख कर भेज दिया कि क्या सचमुच ऐसा है.

एलन जोंस के लिखे अनुसार जैसी आशंका थी वैसा ही हुआ. धर्मवीर को उस के उस पत्र का जवाब नहीं मिला. 2 हफ्ते तक इंतजार करने के बाद उस ने उसी खिलाड़ी को अपने पिछले पत्र का हवाला दे कर फिर एक पत्र भेज दिया. इस पत्र का भी उत्तर नहीं आया.

धर्मवीर ने हार नहीं मानी. महीने, 15 दिन के अंतर पर वह उस खिलाड़ी को लगातार पत्र लिखता रहा. आखिर एक दिन उसे अपने उन पत्रों का जवाब मिल ही गया, जिसे उस खिलाड़ी ने अपने लैटर हैड पर अपने हाथों से लिखा था.

उस पत्र ने धर्मवीर को इस तरह उत्साहित किया कि वह उसी तरह तमाम क्रिकेट खिलाडि़यों को पत्र लिखने लगा. वह पत्र इस तरह लिखता था कि उस के पत्र को पढ़ कर खिलाड़ी जवाब देने को मजबूर हो जाता था. कुछ खिलाडि़यों ने तो उस के पत्र लिखने की कला से खुश हो कर पत्र के जवाब के साथ उसे इनाम भी भेजे.

धर्मवीर को यह काम इतना अच्छा लगने लगा कि वह ढूंढढूंढ कर नएपुराने क्रिकेट खिलाडि़यों को न केवल पत्र लिखने लगा, बल्कि उन से मिलने की कोशिश करने लगा. इसी कोशिश में एक दिन वह पाकिस्तान के शहर लाहौर में रहने वाले वयोवृद्ध पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी डा. मोहम्मद जहांगीर खान से मिलने उन के घर पहुंच गया था.

जहांगीर खान अपने इस भारतीय प्रशंसक से मिल कर इस तरह प्रभावित हुए कि उन्होंने न केवल उसे अपने साथ बैठा कर चायनाश्ता कराया, बल्कि एक पाकिस्तानी नोट पर अपने हस्ताक्षर कर के उसे शगुन के रूप में भी दिया.

वह दिन और आज का दिन. धर्मवीर दुग्गल दुनिया भर के क्रिकेट खिलाडि़यों को पत्र लिख कर उन से अपने रिश्ते को मजबूत कर रहे हैं. तमाम खिलाडि़यों ने उन्हें ऐसेऐसे तोहफे भेजे हैं, जो धर्मवीर के लिए एक बेशकीमती खजाना बन गए हैं. क्रिकेट के खिलाडि़यों के बारे में उन्हें इतनी जानकारी हो गई है कि लोग उन्हे क्रिकेट जगत का इंसाइक्लोपीडिया कहने लगे हैं.

आज धर्मवीर के पास हजारों नामी क्रिकेट खिलाडि़यों के हस्ताक्षर मौजूद हैं. उन के पास ऐसे सैंकड़ों पत्र हैं, जो विश्वप्रसिद्ध खिलाडि़यों ने अपने हाथों से लिख कर उन्हें भेजे हैं. खिलाडि़यों द्वारा दस्तखत किए छोटे बल्ले तो धर्मवीर के पास इतने इकट्ठा हो गए हैं कि उन की गिनती करना मुश्किल हो रहा है.

इन बल्लों पर दुनिया भर के चुनिंदा क्रिकेट टीम के कप्तानों जैसे स्टीफन फ्लेमिंग, रिकी पोंटिंग, एलन बार्डर, ग्रेग चैपल, स्टीव वॉ, एम.एस. धोनी, कोर्टनी वाल्श, इंजमाम उल हक, अत्तापत्तू, इयान स्मिथ, क्लाइव लायड, अर्जुन रणतुंगे व ग्लेन टर्नर आदि के हस्ताक्षर तो हैं ही, इन लोगों ने धर्मवीर दुग्गल के लिए विशेष रूप से अपनी टीम के अन्य खिलाडि़यों के भी हस्ताक्षर करवा कर भेजे हैं.

इन बल्लों में धर्मवीर के पास एक ऐसा भी बल्ला है, जिस पर सर गारफील्ड सोबर्स, ब्रायन लारा, लाला अमरनाथ, हनीफ मोहम्मद, सुनील गावस्कर, एम.एस. धोनी, बेरी रिचर्ड्स, विव रिचर्डस, मोहम्मद अजहरुद्दीन और सचिन तेंदुलकर जैसे महान क्रिकेट खिलाडि़यों के दस्तखत हैं. दुग्गल इसे अपना बेशकीमती खजाना मानते हुए इसे गोल्डन बैट कहते हैं.

बात यहीं पर खत्म नहीं होती, धर्मवीर के संग्रह में एक ऐसी अनूठी सफेद रंग की गेंद है, जिस पर क्रिकेट जगत के सब से तेज और खतरनाक गेंदबाजों, ब्रैट ली, जैफ थेमिसन, शोएब अख्तर, डैनिस लिली, वसीम अकरम, कपिल देव, ग्लेन मैकग्राथ, डेल स्टेन, उमर गुल व इमरान खान के हस्ताक्षर हैं. इस के अलावा धर्मवीर के पास एक अन्य गेंद है, जिस के एक तरफ टैस्ट क्रिकेट में सर्वाधिक विकेट चटखाने वाले श्रीलंकाई जादुई स्पिनर मुथैया मुरलीधरन के 3 हस्ताक्षर हैं तो दूसरी ओर आस्ट्रेलिया के खतरनाक स्पिन गेंदबाज शेनवार्न के 3 हस्ताक्षर हैं.

क्रिकेट की दुनिया के पितामह सर डोनाल्ड ब्रैडमैन, विव रिचर्डस, स्टीव वा, इमरान खान, कपिल देव और सचिन तेंदुलकर के जीवन पर लिखी किताबें भी धर्मवीर के संग्रह में शामिल हैं, जिन्हें इन महान खिलाडि़यों ने उसे अपनी शुभकामनाओं सहित हस्ताक्षर कर के भेंट की हैं.

इस संग्रह में कैरीपैकर द्वारा दुग्गल को भेंट की गई रंगदार पत्रिका ‘क्रिकेट एलाइव’ का अपना एक अलग आकर्षण है. अधिकांश क्रिकेट प्रेमी जानते हैं कि क्रिकेट जगत में कैरीपैकर की पहचान उन के द्वारा पहने जाने वाले सर्वाधिक रंगीन कपड़ों व डेनाइट क्रिकेट के जन्मदाता के रूप में है.

धर्मवीर की मुलाकात अधिकांश जानेमाने क्रिकेट खिलाडि़यों से हो चुकी है. इन में कुछ मुलाकातें उन के लिए अविस्मरणीय हैं. दुनिया के बेहतरीन आलराउंडर सर गारफील्ड सोबर्स के बारे में मशहूर था कि वह अपने फैंस से बहुत कम मिलते थे और किसी को अपने हस्ताक्षर देने से परहेज करते थे.

लेकिन जब एक मुलाकात में धर्मवीर दुग्गल ने उन्हें अपना क्रिकेट से जुड़ा कलेक्शन दिखाया तो वह हक्केबक्के रह गए. तब दुग्गल के कंधे पर हाथ रख कर उन्होंने कहा था, ‘‘तुम दुनिया के अनूठे और सर्वश्रेष्ठ क्रिकेट संग्रहकर्ता हो.’’

इसी के साथ उन्होंने क्रिकेट के एक बल्ले पर अपने हस्ताक्षर कर के दुग्गल को भेंट भी किया था.

इसी तरह पाकिस्तान के महानतम हरफन मौला खिलाड़ी इमरान खान ने एक मुलाकात के दौरान धर्मवीर दुग्गल को एक गोल्डन नाइफ भेंट की थी. भारतीय हाकी टीम के कप्तान दिलीप टर्की ने पूरी भारतीय हाकी टीम के हस्ताक्षर करवा एक विशिष्ट हाकी दुग्गल को भेंट की थी.

आस्ट्रेलिया के बल्लेबाज सर डोनाल्ड ब्रैडमैन के बेटे ने अपने पिता की सौवीं एनिवर्सरी पर दुग्गल को अनोखी गोल्ड काइन भेजी थी. इसी के साथ यह बता देना जरूरी है कि 1994 में धर्मवीर दुग्गल ने बैडमैन को जब लगातार कई पत्र लिखे थे  तो अपने हाथों से लिखे पत्र के साथ उस महान खिलाड़ी ने अपनी बायोग्राफी भेजी थी. इस के बाद तो धर्मवीर के उन के पारिवारिक संबंध हो गए थे.

युवराज ने साऊथ अफ्रीका में खेले गए वर्ल्ड कप के दौरान पहले ट्वेंटीट्वेंटी मैच में इंग्लैंड के एक बालर की एक ओवर की 6 गेंदों पर 6 छक्के मार कर एक बेहतरीन रिकौर्ड बनाया था. इस मौके को यादगार बनाने के लिए युवराज ने छोटे बल्ले पर अपने 6 हस्ताक्षर कर के धर्मवीर को भेंट किया था.

धर्मवीर दुग्गल का कहना है कि यह उन का शौक है, जिसे पूरा करने के लिए उन्हें काफी भागदौड़ करने के साथसाथ समय और पैसा भी खर्च करना पड़ा. क्योंकि किसी भी क्रिकेट खिलाड़ी से मिलना आसान नहीं है. हर खिलाड़ी जबरदस्त सुरक्षाचक्र से घिरा रहता है. इस सब के लिए न जाने कितने धक्के खाने पड़े और न जाने कितनी बार निराश होना पड़ा.

इस के बावजूद वह डटे रहे. इस में सब से ज्यादा सहायक रहा उन की पत्र लेखन की कला. उन का पत्रव्यवहार नए दौर के क्रिकेटरों के साथ भी जारी है. शायद इन का यह सिलसिला इसी तरह जारी रहेगा.  Cricket Memorabilia

—  कथा धर्मवीर दुग्गल के साक्षात्कार पर आधारित

— 2017 में प्रकाशित

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