Crime Fiction Story. हत्या के एक मामले में वादी पक्ष के वकील ने जज साहब के सामने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि यह हत्या सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि एक परिवार की निष्ठा और विश्वास की है. यह हत्या पूरी तरह प्रीप्लान और ठंडे दिमाग से की गई थी. अत: अदालत से दरख्वास्त है कि आरोपियों को फांसी की सजा दी जाए. जज ने दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलें सुन कर ऐसा फैसला सुनाया कि...
''अरे आप कहां चल दिए? आप तो कह रहे थे कि आज आप कचहरी नहीं जाएंगे.’’
सौम्या अपने पति को तैयार होते हुए देख कर बोली.
''हां, जाना तो नहीं था. कोई सुनवाई भी नहीं थी, मगर एक महत्त्वपूर्ण केस का फैसला आज आने वाला है तो सोचा कि जा कर देख लूं. इस से पता चलेगा किस पक्ष के वकील ने क्या दलील दी और किस ने क्या गलती की.’’ अपने काले कोट को पहनते हुए दीप बोला.
''कौन सा महत्त्वपूर्ण केस?’’ सौम्या ने कौतूहल से पूछा.
''अरे, उसी लड़की का, जिस पर आरोप है कि उस ने हनीमून के समय अपने पति को कुछ दोस्तों के साथ मिल कर ऊंचाई से धक्का दे कर जान से मार दिया था.’’ केस के बारे में बताते हुए दीप बोला.
''उस में क्या महत्त्वपूर्ण है? लड़की ने खुद पुलिस के सामने स्वीकार कर लिया है, यहां तक कि पुलिस ने उस से सीन रीक्रिएट कर पुख्ता खात्री भी कर ली है. अब सिर्फ देखना इतना है कि उसे सजा कितनी होती है.’’ सौम्या केस को याद करते हुए बोली.
''मत भूलो कि हर सिक्के के 2 पहलू होते है. हमें सिर्फ एक पहलू ही दिखाया जाता है, जबकि बचाव पक्ष के भी कई बिंदु होते हैं, जो सिर्फ कोर्ट में ही दिखाए जाते है. और यह जज की मानसिक स्थिति पर निर्भर करता है कि वह किस बिंदु को कितना महत्त्व देता है.’’ दीप घर के बाहर कदम रखते हुए बोला.






