Love Affair Fraud. रश्मि ने बेटी को मोहरा बना कर अपने जेठ के दामाद से जिस तरह लाखों रुपए ठगे, ऐसी कल्पना हर कोई नहीं कर सकता. क्योंकि ऐसा करना हर किसी के वश की बात नहीं है. 

मनु खड़ा इधरउधर देख रहा था, तभी उस के सामने खड़ी महिला ने कहा, ‘‘क्या हाल है जी. लगता है, आप ने मुझे पहचाना नहीं?’’ मनु ने देखा, सामने खड़ी महिला अधेड़ उम्र की थी. लेकिन उस उम्र में भी वह काफी आकर्षक दिख रही थी. वह ताऊ ससुर के लड़के की शादी में ससुराल आया था. उस की पत्नी सुकृति घर के कामों में व्यस्त थी. गांवों में लोकलाज के भय से लड़कियां प्राय: अपने पति से दूर ही रहती हैं. उस महिला को गौर से देखते हुए मनु ने कहा, ‘‘जी, सही कहा आप ने. मैं ने वाकई आप को नहीं पहचाना.’’

‘‘अरे मैं रश्मि, आप की चचिया सास हूं.’’

‘‘ओह, नमस्ते! सौरी मैं आप को पहचान नहीं सका.’’ मनु ने खेद व्यक्त करते हुए कहा.

‘‘जब आप ने मुझे पहले देखा ही नहीं है तो भला पहचानेंगे कैसे. बताइए आप की क्या सेवा करूं? आप तो हमारे खास मेहमान हैं.’’  खुद को रश्मि बताने वाली उस महिला ने इठलाते हुए कहा.

‘‘जी बस कुछ नहीं. मैं मेहमान नहीं, घर का सदस्य हूं. अगर मेरे लायक कोई काम हो तो बताइए.’’

‘‘पहले आप चायकौफी तो पी लीजिए, काम तो होता रहेगा.’’   ‘‘कौफी?’’ मनु ने आश्चर्य से पूछा.

‘‘क्यों नहीं जमाईराजा. गांव हुआ तो क्या हुआ, हमारे यहां सब चीज का इंतजाम है. मेरे रहते भला किसी चीज की कमी हो सकती है क्या.’’ रश्मि ने गर्व से सीना फुला कर कहा.

‘‘… तो फिर एक कप कौफी प्लीज…’’

मनु के इतना कहते ही रश्मि ने आवाज लगाई, ‘‘मिंटू बेटा, जरा कौफी तो बनाना अपने जीजू के लिए.’’

रश्मि के आवाज लगाते ही 22-23 साल की एक सुंदर सी लड़की आ कर खड़ी हो गई. दोनों हाथ जोड़ कर उस ने मुसकराते हुए कहा, ‘‘नमस्ते जीजाजी, कैसे हैं आप? मैं मिंटू, आप की साली?’’

मनु उसे देखता ही रह गया. गजब का सौंदर्य पाया था उस ने. श्वेत धवल संगमरमरी बदन, घुंघराले बाल, कजरारे नयननक्श वाली मिंटू कैपरी और लाइट पिंक कलर का टौप पहने थी, जो गांव में उस के लिए थोड़ा अटपटा लग रहा था.

‘‘मैं ने आप के बारे में बहुत सुना है मनुजी.’’ चचिया सास रश्मि ने कहा.

‘‘क्या सुना है आप ने मेरे बारे में?’’ मनु ने पूछा.

‘‘यही कि आप खानदानी रईस हैं. बड़े बिजनेसमैन भी हैं. हमारी सुकृति के तो भाग्य ही खुल गए हैं, ऐसी ससुराल पा कर.’’ रश्मि ने मुसकराते हुए कहा. मनु ने कोई जवाब नहीं दिया तो रश्मि ने ही आगे कहा, ‘‘आप चुप क्यों हो गए मनुजी?’’

‘‘नहीं तो, मैं ने भी सुकृति से आप के बारे में बहुत कुछ सुना है. आप उस की फेवरेट आंटी हैं.’’ मनु ने कहा.

‘‘हां, यह बात तो सही है. सुकृति का बचपन मेरे पास ही बीता है. आप को पता नहीं होगा, उस का सुकृति नाम मैं ने ही रखा था.’’ रश्मि गर्व से बोली.

‘‘वैसे भी आप इन लोगों से थोड़ा अलग लगती हैं.’’ मनु ने कहा.

‘‘देखा नहीं आप ने, घर में जमाई आया है. लेकिन किसी को फुरसत नहीं है उस का खयाल रखने का. अगर मैं ना होती तो आप यहां गांव में बोर हो जाते.’’

मनु को लगा, आंटी बात तो सही कह रही है. सुकृति, उस के सासससुर या किसी अन्य परिजन के पास इतना समय नहीं था कि कोई उस का खयाल रखता. यह भी हो सकता था कि उन में इतनी समझ ही नहीं थी.

इतने में कौफी के 3 कप ट्रे में सजाए मुसकराती हुई मिंटू ने कमरे में प्रवेश किया. कौफी का एक कप उठा कर रश्मि बाहर निकल गई. अब कमरे में मनु और मिंटू ही रह गए. मां के जाते ही मिंटू ने कहा, ‘‘जीजाजी, कभी हमारे यहां भी आइए ना?’’

‘‘अब आप ने बुलाया है तो जरूर आऊंगा.’’ मनु ने कहा.

‘‘कौफी कैसी लगी जीजू? मैं ने आप के लिए बड़े प्यार से बनाई है.’’ मिंटू ने दिलकश अंदाज में मुसकराते हुए कहा.

‘‘प्यार से बनाई है न?’’     ‘‘और नहीं तो क्या, आप हमारे स्पैशल जीजू हैं ना इसलिए…’’

बातचीत से मिंटू बहुत ही फ्रैंक नेचर की लग रही थी. बातबात में खिलखिला कर हंसना, मनु से उलटेसीधे मजाक करना, उसे कुछ ज्यादा ही अच्छा लग रहा था. थोड़ी ही देर में उस ने मनु के बारे में सब कुछ पूछ लिया. एक विचित्र से चुंबकीय आकर्षण में मनु बंधता जा रहा था.

खाने का समय हुआ तो रश्मि मनु को अपने कमरे में बुला ले गई. उन्होंने उस के खाने की व्यवस्था अलग से अपने कमरे में कर रखी थी. जबकि अन्य रिश्तेदार बाहर दालान में बैठ कर खा रहे थे. खाने के बाद कुछ अन्य बच्चे आ गए तो मनु के साथ अंताक्षरी होने लगी. लड़कपन अभी उस में भी  था. उस के विवाह को अभी 3 साल ही तो हुए थे.

सुकृति शहर की व्यस्त लाइफ में अभी तक एडजस्ट नहीं हो पाई थी. मनु सुबह जल्दी ही शोरूम पर चला जाता था तो घर लौटने में रात के 8-9 बज जाते थे. ससुराल में ऐशोआराम की कोई कमी नहीं थी, लेकिन सुकृति को इन भौतिक सुखों से कहीं ज्यादा मनु के साथ समय बिताना अच्छा लगता था, लेकिन यह संभव नहीं था.

गांव की वह रात मनु के लिए अच्छे अनुभव वाली रही. व्यस्त जीवन में बहुत कम अवसर मिलता था, जब वइ इस तरह एंजौय कर पाता था. मनु, रश्मि, मिंटू और बच्चे देर रात तक हंसीमजाक करते रहे.

अगले दिन बारात जानी थी. मिंटू ने अपनी ड्रेस मनु को दिखाई. मनु ने मजाक करते हुए कहा, ‘‘अगर मुझे पहले से पता होता कि यहां तुम्हारी जैसी साली मिलेगी तो मैं तुम्हारे लिए नएनए डिजाइन की ड्रेस ले आता.’’

मनु का इतना कहना था कि मिंटू ने दुनिया भर की फरमाइशें कर डालीं. सुकृति दूल्हे की कार से चली गई थी. रश्मि और मिंटू एक बच्चे को ले कर मनु की कार में बैठ गईं. शादी का एकएक पल मनु के लिए यादगार बनता जा रहा था.  मिंटू जैसी फ्रैंड पा कर बर्फ सी जमी उस की भावनाओं में गर्माहट आने लगी थी. मनु कार चला रहा था. उस की बगल में बैठी मिंटू उस के मोबाइल से खेल रही थी. रश्मि ने मिंटू को मनु का मोबाइल लौटाने को कहा तो शिष्टाचारवश मनु ने कहा, ‘‘कोई बात नहीं आंटी, खेलने दो मिंटू को.’’

मिंटू ने अपना मुंह मनु के कान के पास ले कर जा कर फुसफुसा कर कहा, ‘‘थैंक्यू जीजू, आपने मेरी लाज रख ली.’’

‘‘डू यू नो… सालीजी, साली आधी घर वाली होती है. अब मेरा इतना हक तो बनता ही है ना?’’ मनु ने कहा.

वैसे तो यह सामान्य बात थी, लेकिन मनु के लिए अब सामान्य नहीं रह गई थी. उस का मिंटू के प्रति आर्कषण निर्णायक रूप लेने लगा था. फ्रैंक नेचर की होने की वजह से मिंटू खुल कर हंसीमजाक तो कर ही रही थी, स्पर्श करने का भी कोई मौका नहीं छोड़ रही थी. उस का यह बिंदासपन मनु के दिल में अलग तरह की भावना पैदा कर रहा था.

मौका मिलने पर मनु ने उस का दायां हाथ दबा दिया. कनखियों से निहारते हुए मिंटू मुसकराई तो मनु की हिम्मत बढ़ गई. उसे लगा, उस के जीवन के खालीपन को भरने वाला कोई सच्चा साथी मिल गया है.

बारात जनवासे पहुंच गई. मिंटू साए की तरह मनु के आगेपीछे घूम रही थी. सुकृति रिश्तेदारों में व्यस्त थी, इसलिए मनु को समय नहीं दे पा रही थी. उस ने देखा कि उस की चचेरी बहन उस की जिम्मेदारी निभा रही है. मनु बोर नहीं हो रहा, यही उस के लिए पर्याप्त था. मिंटू ने लहंगाओढ़नी पहना था. दुलहन सी सजी मिंटू ने मनु से पूछा, ‘‘मैं कैसी लग रही हूं जीजू?’’

‘‘माइंड ब्लोइंग रियली.’’ मनु ने मुसकराते हुए कहा.

‘‘जीजू, झूठी प्रशंसा कर के आप मुझे झाड़ पर चढ़ा रहे हैं.’’

ऐसी बात कह कर शायद मिंटू मनु को और कुरेदना चाह रही थी. अब तक मनु भी काफी खुल चुका था, इसलिए उस ने कहा, ‘‘मिंटू, अपनी लाइफ में मैं ने इतनी सुंदर लड़की पहले नहीं देखी. जी चाहता है कि…’’

मनु का वाक्य पूरा होता, उस के पहले ही मिंटू तपाक से बोली, ‘‘क्या चाहता है जीजू आप का दिल? जरा हमें भी तो पता चले.’’

मिंटू की इस बात से मनु का साहस बढ़ा. उस ने बिना कुछ सोचेसमझे कहा, ‘‘अगर सामने कोई खूबसूरत अप्सरा खड़ी हो तो पुरुष का दिल क्या चाहेगा?’’

‘‘क्या चाहेगा, आप ही बता दीजिए?’’ मिंटू ने मुसकराते हुए पूछा.

मनु ने कोई जवाब नहीं दिया तो पल भर बाद मिंटू ही बोली, ‘‘आप तो लड़कियों की तरह शरमा रहे हैं. आय एम योर फ्रैंड जीजू, प्लीज बताइए ना.’’

मनु अपने ऊपर नियंत्रण नहीं रख पाया और दिल की ख्वाहिश जाहिर करते हुए बोला, ‘‘वांट ए किस, आई मीन लव…’’

‘‘इस में इतना शरमाने की क्या बात थी जीजू? मैं ने तो सोचा था आप…’’ इस बार मिंटू ने अपनी बात अधूरी छोड़ दी. लेकिन मनु की बात उस के दिल को भेद गई थी. थोड़ा रुक कर मिंटू बोली, ‘‘मैं आप को एक गिफ्ट देना चाहती हूं जीजू.’’

‘‘क्या?’’ मनु ने आश्चर्य से पूछा.

‘‘एक ऐसा गिफ्ट, जो आप को बहुत पसंद आएगा.’’ मिंटू ने हंसते हुए कहा.

‘‘दीजिए, देखें तो क्या दे रही हैं अपने जीजू को?’’ मनु ने पूछा.

‘‘अभी नहीं. समय आने दो, फिर देखना.’’

मनु कुछ और कहता, जानवासे से बारात चल पड़ी. बारातियों में तमाम लोग डांस कर रहे थे. लेकिन जब मिंटू ने डांस शुरू किया तो उस ने तुरंत भीड़ से मनु को अपने साथ डांस करने के लिए खींच लिया. सुकृति भी अब उस के साथ डांस करने लगी.

बारात लड़की वालों के घर पहुंच गई. अचानक सुकृति को याद आया कि वह अपना सूटकेस लौक करना भूल गई थी. उस ने यह बात मनु से कही तो वह अपनी कार से जनवासे जाने लगा. वह पंडाल से बाहर आया था कि पीछे से दौड़ती हुई मिंटू आई और उस के साथसाथ चलने लगी. चलते हुए ही उस ने पूछा, ‘‘जनवासे जा रहे हैं क्या जीजू?’’

‘‘हां, तुम्हें भी कोई काम है क्या?’’

‘‘मुझे भी वहां से अपनी एक ड्रेस लानी है.’’ मिंटू ने कहा.

मनु के साथ मिंटू भी कार में बैठ गई. कार में सिर्फ वही दोनों थे. कार थोड़ी दूर ही चली होगी कि मिंटू ने मनु का हाथ दबा कर कार रुकवा ली. मनु कुछ समझ पाता, बिजली की सी फुर्ती से मिंटू ने मनु के गाल पर चुंबनों की बौछार कर दी. मनु भौचक्का रह गया. मिंटू ने कहा, ‘‘जीजू मेरी गिफ्ट कैसी लगी? बदले में अब आप मुझे गिफ्ट में क्या दे रहे हैं?’’

मनु की भी भावनाएं भड़क उठी थीं. उस ने भी आगे बढ़ कर मिंटू के होठों पर अपने होंठ रख दिए. मनु ने स्वयं को जैसेतैसे संयत किया. रिश्तों की नाजुकता ने आवेश पर ब्रेक लगाया तो कार आगे बढ़ी. जनवासा आ चुका था. मनु कार में ही बैठा रहा. मिंटू जा कर सुकृति का सूटकेस और अपनी ड्रेस ले आई.

भावावेश में यह सब जो हुआ था, मनु को पश्चाताप हो रहा था. उसे परेशान देख कर मिंटू ने कहा, ‘‘इतने टैंस क्यों हो रहे हैं जीजू? मैं आप की साली ही तो हूं. साली यानी आधी घर वाली. इतना हक तो बनता ही है आप का?’’

मनु थोड़ा संयत हुआ. मिंटू की दिलकश अदाएं उस पर भारी पड़ने लगी थीं. दोनों बारात में शामिल हो गए. लड़की वालों का घर आ गया. शादी की वह रात इसी तरह हंसीमजाक में बीत गई. सुबह दुलहन की विदाई के बाद सुकृति मनु की कार में बैठ गई थी. शादी निपट चुकी थी. मनु को अपना बिजनैस देखना था, इसलिए उसे लौटना था. वह चला आया, लेकिन सुकृति 2-4 दिनों के लिए रुक गई. रश्मि और उस की बेटी मिंटू के व्यवहार ने उस की जिंदगी में नए रंग भर दिए थे. मिंटू उस से रुकने के लिए जिद कर रही थी, लेकिन बिजनैस की वजह से उस का रुकना संभव नहीं था.

मनु रास्ते में ही था कि उस के मोबाइल फोन पर मिंटू के एसएमएस धड़ाधड़ आने लगे. मनु के पास इतना समय नही ंथा कि वह जवाब देता. 2-4 के जवाब दिए, बाकी फोन पर बात कर ली. 2-4 दिनों बाद मिंटू मां के साथ अहमदाबाद चली गई. सुकृति ने शायद उन के बीच बढ़ती प्रगाढ़ता को भांप लिया था, इसलिए मनु को सचेत किया, ‘‘आप इन लोगों से ज्यादा नजदीकी मत बढ़ाइए. आप उन लोगों को नहीं जानते, धोखा उन की रगरग में बसा है.’’

मनु पशोपेश में पड़ गया. अपनों के बारे में सुकृति के विचार जान कर उसे बड़ा अजीब लगा. इस के बाद उस ने सुकृति को उन लोगों के बारे में बताना बंद कर दिया. मिंटू बारबार मनु से अहमदाबाद आने की जिद कर रही थी. उस की डिमांड पर मनु ने कुरियर से उस के लिए एक कीमती मोबाइल सेट और कुछ शानदार ड्रेसेज भेज दी थीं. यह सब पा कर मिंटू बहुत खुश हुई थी.

मनु अकसर मिंटू के लिए कुछ न कुछ भेजने लगा था. उस के मोबाइल में पैसे डलवाना तो आम बात थी. वह थी ही इतनी बातूनी. वही क्या, उस की मम्मी यानी रश्मि भी मनु से घंटों बातें करती थी. मनु को मोबाइल के बिल की उतनी चिंता नही ंथी, लेकिन उस के पास समय नहीं होता था.

शोरूम में ग्राहकों के सामने ज्यादा देर मोबाइल पर बात नहीं कर सकता था. इधर वह मोबाइल में इतना उलझा रहने लगा था कि शोरूम का सिस्टम गड़बड़ाने लगा था. उस में आए इस बदलाव से शोरूम के कर्मचारी हैरान थे.

एक दिन बिजनैस ट्रिप की बात कह कर मनु अहमदाबाद जा पहुंचा. मनु को रिसीव करने मिंटू और रश्मि स्टेशन पर आई थीं. मिंटू के पापा वहां किसी फैक्ट्री में काम करते थे. उन की 12 घंटे की नौकरी थी. प्राइवेट नौकरी, ऊपर से महंगाई में पूरे परिवार का खर्च. मनु उन के यहां 2 दिन रुका. सुकृति जानती थी कि वह मुंबई गया है. यह अस्वाभाविक भी नहीं था, क्योंकि अकसर बिजनैस के काम से वह वहां जाता रहता था.

अहमदाबाद में किराए के छोटे से मकान में मिंटू का परिवार जैसेतैसे गुजर कर रहा था. भले ही मनु की शाही आवभगत नहीं हुई, लेकिन उसे वहां जो प्यार और अपनत्व मिला, वह उस के लिए अप्रत्याशित था. बातोंबातों में रश्मि ने मनु के सामने अपनी दिली ख्वाहिश भी जाहिर कर दी थी कि 10 लाख में एक मकान मिल रहा है, लेकिन पैसे नहीं हैं. मनु के लिए उन की हैल्प कर देना मुश्किल नहीं था.

2 दिन और 2 रात का समय कम नहीं होता. इस बीच मनु की उन लोगों से जी भर कर बातें हुईं. सब से अहम बात तो यह थी कि रश्मि ने उसे मिंटू से बातचीत करने, उस के साथ घूमनेफिरने का भरपूर मौका दिया था. वह मिंटू को सिनेमा दिखाने भी ले गया था. यहां गांव जैसी पाबंदियां तो थी नहीं, सब खुले विचारों वाले लोग थे, सो मनु को यह सब बहुत अच्छा लग रहा था.

मनु ने अपनी अहमदाबाद की 2 दिनों की यात्रा में जम कर पैसा खर्च किया. अंकलआंटी और अन्य बच्चों को बहुत से उपहार ला कर दिए. मिंटू को उस ने एक गोल्डन रिंग भी गिफ्ट की थी, जिस में डायमंड जड़े थे. शायद उस की असली कीमत का अहसास मिंटू को तो क्या, उस के मम्मीपापा को भी नहीं था.

रात में जब रश्मि और मिंटू से मनु की बातें हो रही थीं तो सुकृति का जिक्र आना स्वाभाविक था. नजदीकियां बढ़ चुकी थीं, सो मनु ने रश्मि से सुकृति के गैरजिम्मेदाराना व्यवहार के बारे में बता दिया. अपने जीवन के एकाकीपन को उस ने इन नए अपनों के सामने खुली किताब की तरह स्पष्ट कर दिया. रश्मि के अनुभव की गहराई की थाह वह नहीं ले पाया था. उस ने अभी दुनिया देखी ही कहां थी?

मौके का फायदा उठा कर रश्मि ने कहा था, ‘‘बेटा, तुम सुकृति से शादी कर के फंस गए. अगर तुम पहले मिले होते तो मिंटू की शादी मैं तुम्हीं से करती.’’

रश्मि ने यह बात मजाक में कही थी या गंभीरता से, यह मनु नहीं समझ पाया. लेकिन इस बात से मनु इतना प्रभावित हुआ कि अब वह उन्हीं का हो कर रह गया. रश्मि आंटी और मिंटू अब उस के लिए खास बन चुके थे.

मनु शब्द के पीछे छिपी विवशता के आगे मौन था, लेकिन अब हो भी क्या सकता था? मिंटू सामने बैठी अपलक उसे ही निहारे जा रही थी. मनु के दिमाग में एक अनोखा विचार चल रहा था. शायद वैसा ही विचार इस परिवार के दिलोदिमाग में कब से बैठा था, इस का मनु को अहसास भी नहीं हो पाया था. रश्मि उठी और दूसरे कमरे में चली गई. उस के जाते ही मिंटू ने कहा, ‘‘आई लव यू जीजू, मैं अब आप के बगैर नहीं रह सकती.’’

यह सब संयोगवश हुआ था अथवा इस के पीछे कोई पूर्व योजना काम कर रही थी, मनु को इस बारे में सोचने का मौका नहीं मिला. अब उसे मिंटू के अलावा दुनिया में कुछ नहीं दिखाई दे रहा था. रश्मि दूसरे कमरे में जा कर सो चुकी थी. दरवाजा भिड़ा दिया गया था. यह किस बात का संकेत था, मनु समझ नहीं पाया.

मिंटू आ कर उस के एकदम नजदीक सट कर बैठ गई. भावनाओं पर परिस्थितिजन्य असर होने लगा. मिंटू का स्पर्श पाते ही मनु उस की बांहों में समा गया. धीरेधीरे सब दीवारें ढह गईं. रश्मि गहरी नींद में सो चुकी थी. यह नींद कितनी गहरी थी, मनु को कुछ पता नहीं था.

मनु को लगा कि मिंटू में जोश और प्रेम का जो उफान है, वह सुकृति जैसी साधारण लड़की में नहीं है. वह बर्फ की मूरत जैसी थी, जो घर में अपने सासससुर और बड़ों की सेवा करना ही अपना धर्म समझती थी. पति को ऐसा विलक्षण सुख देने में शायद वह पूरी तरह असफल थी.

उस पूरी रात मनु और मिंटू एकदूसरे के हो कर जिए. उसी बीच उन्होंने संग जीने और मरने की कसमें भी खा लीं. सुबह रश्मि ने साफ कह दिया कि अगर वह सुकृति से तलाक ले लो तो वह उसे अपना दामाद बनाने को तैयार है.

तब मनु ने यह भी नहीं सोचा कि रश्मि ने सुबहसुबह यह बात कह कैसे दी? क्योंकि रात में मिंटू की अपनी मम्मी से कोई बात भी नहीं हुई थी. ऐसे में उन्हें बीती रात की घटना के बारे में कैसे अनुमान हो गया? शायद इसे ही बुद्धि कहते हैं. रश्मि ने 45 साल की उम्र तक भाड़ नहीं झोंका था. शतरंज का खिलाड़ी चाल चलने से पहले ही सब सोच लेता है.

मनु ने रश्मि की बातों को सिरआंखों से स्वीकार कर लिया. बैग से उस ने चैक बुक निकाली और 3 लाख रुपए का चैक रश्मि को थमाते हुए कहा, ‘‘लीजिए आंटीजी, आप मकान लेना चाहती हैं न, एडवांस दे कर सौदा कर लीजिए.’’

रश्मि ने चैक झपट लिया. सौदा मकान का हो रहा था या किसी और चीज का, इस पर बात करना बेकार है. 2 दिन अहमदाबाद में रह कर मनु ने जीभर कर एंजौय किया. उस का मन घर लौटने का नहीं हो रहा था, लेकिन मजबूरी थी, सो लौटना पड़ा. मिंटू ने जल्द आने का प्रौमिस करवा कर ही उसे छोड़ा था.

मनु में आए बदलाव को घर के लगभग हर आदमी ने महसूस किया, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया. मनु अब अक्सर घर से बाहर रहने लगा था. घर का कोई शख्स कहता भले कुछ नहीं था, लेकिन यह जरूर सोचने लगा था कि मसला क्या है.

गर्मियां शुरू हो चुकी थीं. कुछ दिनों बाद एक दिन मनु सूटकेस ले कर जाने लगा तो बड़े भाई ने टोका, ‘‘क्या हुआ, कहां जा रहे हो?’’

‘‘मुंबई, एक डील करनी है.’’ मनु ने संक्षिप्त सा जवाब दिया.

मां से नहीं रहा गया. उस ने सख्ती से कहा, ‘‘कोई जरूरत नहीं बाहर जाने की. पहले इस बिजनैस को संभालो, आगे की बाद में देखी जाएगी.’’

मनु को यह टोकाटाकी अच्छी नहीं लगी. उस ने नाराजगी से कहा, ‘‘45 लाख की डीलिंग है मां, नहीं जाऊंगा तो हाथ से निकल जाएगी. आप कह रही हैं तो नहीं जाता. आप दे देंगी 45 लाख रुपए.’’

मां भला बिजनैस की बात क्या समझती. सुकृति ने मनु का पक्ष लेते हुए सास को समझाया, ‘‘बड़ी डीलिंग है मम्मी, 2-4 दिन में लौट आएंगे. इन्हें जाने दीजिए ना.’’

मां लाचार हो गई. मनु आराम से चला गया. जिंदगी रोजमर्रा की तरह आगे बढ़ती रही. 2 दिनों में लौटने को कहा था, लेकिन 4 दिन बीत गए और मनु नहीं लौटा. चिंता की बात यह थी कि उस का मोबाइल फोन बंद था. सभी घबराने लगे. एक दिन और इंतजार किया गया. लेकिन मनु का कोई मेसेज नहीं आया. इस बीच एक बात जरूर पता चली कि उस ने किसी मित्र से मौरिशस जाने और एक सप्ताह बाद लौटने की बात कही थी.

एक सप्ताह बीत गया. सुकृति और मां की हालत खराब होने लगी. कोई निर्णय नहीं कर पा रहा था कि पुलिस को सूचना दी जाए या नहीं. धीरेधीरे 10 दिन बीत गए. कहीं से कोई सूचना नहीं मिली. सुकृति से पता चला कि मनु अपना क्रेडिट कार्ड साथ ले कर नहीं गया. भैया ने बैंक से पता किया तो पता चला कि जाने से एक दिन पहले मनु ने अपने एकाउंट से 20 लाख रुपए निकाले थे. इस बात ने सभी को और परेशान कर दिया.

15 दिन बीत गए. मनु का कुछ पता नहीं चल रहा था. अंत में भैया सुकृति को ले कर पुलिस स्टेशन गए. पुलिस ने गुमशुदगी लिखने से मना कर दिया. पुलिस वालों का तर्क था कि बालिग और स्वस्थ लड़का अगर अपनी इच्छा से घर से चला जाता है तो कोई अपराध नहीं होता.

मनु को गए पूरे 17 दिन हो गए थे. 17वें दिन अचानक सुबह बड़े भैया सुरेंद्र के मोबाइल पर अंजान नंबर से फोन आया. फोन करने वाले ने उसे एक नंबर दे कर कहा कि वह फौरन उस नंबर पर बात करे. भैया का माथा ठनका. किसी अनिष्ट की आशंका से शरीर सिहर उठा. उस ने वह नंबर मिलाया तो दूसरी ओर से किसी महिला का स्वर उभरा, ‘‘हैलो मि. सुरेंद्र, आप घर वालों से थोड़ा अलग हट कर बात करें.’’

घबराया सुरेंद्र कोठी के बाहर लौन में आ गया. महिला ने सिसकते हुए पूछा, ‘‘आप का छोटा भाई मनु कहां है?’’

सुरेंद्र को काटो तो खून नहीं. उस ने कहा, ‘‘बिजनैस के सिलसिले में बाहर गया है.’’

महिला ने फौरन कहा, ‘‘आप को कुछ पता भी है, मेरी बेटी घर से गायब है. आप का भाई मेरी बेटी को ले कर भाग गया है.’’

सुरेंद्र को गहरा आघात लगा. उस ने पूछा, ‘‘आप को मेरा नंबर कैसे मिला?’’

तब फोन पर बात करने वाली महिला ने कहा, ‘‘मैं सुकृति की आंटी रश्मि अहमदाबाद से बोल रही हूं.’’

सुरेंद्र को अब सारा माजरा समझ में आ गया. बात इतनी आसान नहीं थी, जितनी दिख रही थी. सुकृति की आंटी की बातों से उस ने इतना तो भांप ही लिया था कि यह सब पूर्व नियोजित था. शतरंज की गहरी चाल, जिस में न चाहते हुए भी वे सब फंस चुके थे. सुरेंद्र ने तुरंत यह बात मां को बताई. उन की समझ में नहीं आ रहा था कि इस घटना की जानकारी सुकृति को कैसे दी जाए.

अचानक इस अनहोनी से पूरा घर परेशान था. सुकृति की तो दुनिया ही बदल गई थी. उस के ऊपर विपत्ति के बादल फट पड़े थे. सब को लगा, समझदारी इसी में है कि सुकृति से कुछ न छिपाया जाए. उसे फौरन सब बता देना ही ठीक है. सच्चाई जान कर सुकृति सन्न रह गई. उस के अपनों ने ही उस की बसीबसाई गृहस्थी उजाड़ दी थी. पता नहीं कौन से जन्म का बदला लिया था उस के खून के दिरश्तेदारों ने.

सुकृति को याद आया कि शायद इस घटना के पीछे उस का पारिवारिक विवाद है. गांव में उस के चाचाताऊ में खेती की जमीन को ले कर काफी पुराना विवाद चल रहा था. उस के चाचा और आंटी पैतृक जमीन में से 4 बीघा जमीन पर अधिकार जता रहे थे. जबकि उन का उस  पर कोई हक नहीं था.

सुकृति ने तुरंत अपने पिता को फोन किया. उस के पिता ने अहमदाबाद में रह रहे अपने चचेरे भाई को फोन कर के असलियत जाननी चाही. लेकिन उन के अनुसार वहां ऐसा कुछ नहीं हुआ था. हद तो तब हो गई, जब सुरेंद्र से अपनी बेटी की गुमशुदगी की बात बताने वाली रश्मि ने उसी समय जेठ यानी सुकृति के पापा से मिंटू की बात करा कर कहा था कि वैसा कुछ नहीं है, जैसा वे कह रहे हैं. अब झूठा कौन था?

सुरेंद्र और उस की मां की कुछ समझ में नहीं आ रहा था. सुरेंद्र ने रश्मि को फोन किया तो वह फिर अपनी बेटी को भगा ले जाने का राग अलापने लगी. सुरेंद्र समझ गया कहीं न कहीं कुछ गड़बड़ जरूर है. बातोंबातों में रश्मि ने इशारा कर दिया था कि अभी वह इस बात को सब से छिपाए हुए है. अपने रिश्तेदारों से भी उस ने कुछ नहीं बताया है. अगर अभी भी मनु और मिंटू लौट आते हैं तो वह इस बात को यहीं खत्म कर देगी. दोनों घरों की इज्जत घर में ही रह जाएगी.

मनु के मोबाइल का स्विच औफ था. सुरेंद्र को लगा, मिंटू अपना मोबाइल ले कर गई होगी, जो चालू होगा. उसे लग रहा था कि मिंटू अपने मांबाप के संपर्क में है. क्योंकि उन की बातों से उसे कभी ऐसा नहीं लगा था कि उन्हें अपनी बेटी के भाग जाने का जरा भी अफसोस है. वे एकदम सामान्य लगते थे. उन्होंने पुलिस में रिपोर्ट भी नहीं दर्ज कराई थी.

सुरेंद्र ने तय किया कि वह उस औरत के निर्देशों पर नहीं चलेगा. उस ने वकीलों से बात की तो वकीलों ने बताया कि यह भी संभव है कि बरामदगी के बाद अगर लड़की ने अपने बयान में मनु के साथ उस का भी नाम ले लिया तो वह भी फंस सकता है. सुरेंद्र घबरा गया. बैठेबिठाए अपने नासमझ भाई की मूर्खता की वजह से सब बेकार के बखेड़े में फंस कर पिस रहा था. उस ने तय कर लिया कि अब वह किसी भी कीमत पर उस महिला से संपर्क नहीं करेगा.

लेकिन रश्मि इतनी आसानी से कहां छोड़ने वाली थी. उस ने कई बार उस से मिलने को कहा. उसे अहमदाबाद बुलाया. लेकिन उस की छठी इंद्री उसे अहसास करा रही थी कि यह ठीक नहीं है. हो सकता है कि उस की कोई चाल हो. उसे भी जाल में फंसाने की प्लानिंग हो, सो वह कन्नी काटता रहा. जबकि रश्मि बारबार उसे अपने यहां आ कर खास बातचीत करने की बात कर रही थी.

सुरेंद्र उस के झांसों में नहीं आ रहा था. उस ने मनु के मोबाइल पर मैसेज किए, ताकि अगर कभी वह अपना मोबाइल औन करे तो उसे उस का संदेश मिल जाए और वह सारी हकीकत बता दे कि आखिर यह कैसी साजिश है.

इसी तरह 5 दिन और बीत गए. इस बीच रश्मि ने उसे कई फोन किए, लेकिन सुरेंद्र ने उस से बात नहीं की. उस ने सुकृति से स्पष्ट कह दिया था कि वही इस घर की बहू है, इसलिए किसी भी कीमत पर इस घर में उस के अलावा कोई और लड़की नहीं आ सकती. मां भी भला इस तरह का अन्याय कैसे सहती.

दुनिया में रिश्ते भी कितने अजीबअजीब हैं. अक्सर जिन्हें हम अपना समझते हैं, वही कभीकभी ऐसा परायों जैसा व्यवहार कर बैठते हैं कि लोग मुसीबत में पड़ जाते हैं. सुरेंद्र ने रश्मि से मिंटू का नंबर पूछा तो उस ने बताने से साफ मना कर दिया. पुलिस रश्मि का काल डिटेल्स निकलवाने को तैयार नहीं थी.

अंत में वही हुआ, जिस का डर था. अचानक दोपहर को सुरेंद्र के मोबाइल पर अहमदाबाद के एक पुलिस स्टेशन से फोन आया. फोन करने वाले इंसपेक्टर ने उसे धमकाते हुए कहा था कि उस का भाई यहां की एक लड़की को भगा ले गया है. उस के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज है. वह सब कुछ सचसच बता दे, वरना मुसीबत में पड़ सकता है.

सुरेंद्र ने कहा था कि उस के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने वाले आज भी उसे नहीं पहचानते. वह उन से कभी मिला ही नहीं है. यह उस के छोटे भाई की ससुराल वालों की किसी रंजिश का मामला है, जिस में उस का भाई मोहरा बना है. अगर लड़की के मांबाप के फोन की काल डिटेल्स निकलवा कर जांच की जाए तो सारी हकीकत पता चल जाएगी.

अब तक बात और भी बिगड़ चुकी थी. रिश्तेदारी दुश्मनी में बदलने लगी थी. सुरेंद्र के घर वालों पर चारों ओर से दबाव पड़ रहा था. अच्छा था कि सुकृति साथ थी, वरना पुलिस कब का उसे अंदर कर चुकी होती.

सुरेंद्र को अपने वकील से जो पता चला, वह हैरान करने वाला था. अहमदाबाद से जो फोन सुरेंद्र को किया गया था, वह किसी पुलिस थाने से नहीं था. क्योंकि अहमदाबाद के किसी भी थाने में किसी लड़की की भगाने की कोई रिपोर्ट अभी तक दर्ज नहीं थी. यह सुरेंद्र और उस के घर वालों को डरानेधमकाने के लिए किया गया था. जिस से वह सीधेसीधे सौदेबाजी के लिए मजबूर हो जाए.

नाटकीय ढंग से एक दिन अचानक मनु और मिंटू अहमदाबाद में रश्मि के सामने प्रकट हो गए. इस के बाद रश्मि के फोन लगातार सुरेंद्र के पास आने लगे. जल्दी आओ, वरना मामला पुलिस में गया तो फिर कुछ नहीं हो सकेगा. सुरेंद्र को वकीलों ने मना किया कि कानूनी तौर पर उस का जाना ठीक नहीं है. बात उस पर भी थोपी जा सकती है.

लेकिन सुरेंद्र ने रिस्क लेना ही ज्यादा उचित समझा. फ्लाइट पकड़ कर वह मातापिता को साथ ले कर अहमदाबाद जा पहुंचा.

रश्मि ज्यादा पढ़ीलिखी नहीं थी, लेकिन थी बहुत बड़ी खिलाड़ी. उस ने बड़े प्रोफेशनली ढंग से बात को टैकल किया. एक तरफ वह केस दर्ज कराने की बात कर के डरा रही थी तो दूसरी ओर मामला रफादफा करने का लालच भी दे रही थी. बात वाकई गंभीर थी. मनु सिर झुकाए मौन खड़ा था.

कुल मिला कर बात लेनदेन पर आ गई. आंटी की ओर से एक मुश्त 20 लाख रुपए की मांग की गई. मांग भी इस ढंग से की गई कि कमज्यादा करने की कोई गुंजाइश नहीं थी. मनु जैसे मन ही मन तौबा करते हुए अपनी बातों से संकेत कर रहा था कि इस बार बचा लो, भविष्य में इन लोगों से कोई संपर्क नहीं रखेगा. मां और सुरेंद्र ने अकेले में मनु से बात की. मनु ने सारी घटना संक्षेप में बता दी. पहले भी वे लोग उस से काफी पैसे इसी तरह ऐंठ चुके थे.

घर से भागने की योजना रश्मि की थी. दरअसल उसी ने सारी व्यवस्था की थी. इस बीच फोन पर वह उन्हें वापस न लौटने की बात कहती रही. उस की योजना थी कि वह अपनी बेटी की शादी मनु से कर देगी. तलाक की भी उसे कोई जरूरत नहीं पड़ेगी. लेकिन सुकृति ने धैर्य से काम लिया, इसलिए उस की योजना फेल हो गई. उस ने सोचा था कि नाराज हो कर सुकृति मांबाप के घर चली जाएगी. लेकिन सुकृति ने ऐसा नहीं किया, यहीं बात बिगड़ गई.

मनु कब तक घर से भागता फिरता. इसलिए रश्मि के जाल से मुक्त होने के लिए एक दिन वह वापस आ गया. रश्मि एक तीर से 2 शिकार करना चाहती थी. एक तरफ ऐसा कर के वह मिंटू को मनु के साथ ब्याह देना चाहती थी. क्योंकि उसे पता था कि मनु का परिवार काफी समृद्ध है. दूसरे इस घटना से उस के जेठ का घर भी तबाह हो जाने वाला था. अनजाने में वह अपनी 4 बीघा जमीन की कीमत वसूल कर सकती थी. अगर यह सब पूरे न भी हुए तो अंत में होने वाले समझौते से उसे ही लाभ होने वाला था.

मोलभाव के बाद अंत में 15 लाख रुपए पर समझौता हो गया. सब वापस लौट गए. लेकिन इस घटना ने सभी को ऐसा सबक सिखा दिया, जिस की कल्पना करना असंभव था. दूसरी ओर पैसों के लिए खून के रिश्तों को तारतार कर दिया था. Love Affair Fraud

— 2014 में प्रकाशित

और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...