पत्नी की बदचलनी से तंग आ कर जयप्रकाश ने पत्नी, उस के प्रेमी हरजीत और मां का पक्ष लेने वाले बेटे को मरवाने के लिए 4 लाख रुपए की सुपारी दी थी, लेकिन सुपारी लेने वालों ने जयप्रकाश को ही ठिकाने लगा दिया. 

सुबह खेतों की ओर जाते हुए कुछ लोगों ने एक आदमी को पड़े देखा तो उन्हें लगा, शायद कोई शराब पी कर पड़ा है. लेकिन जब उन्होंने नजदीक जा कर देखा तो पता चला कि वह तो मरा पड़ा है. वह खून से लथपथ था, इस से लोगों ने अंदाजा लगाया कि यह हत्या का मामला है.

हत्या का अंदाजा होते ही वहां मौजूद लोगों में से किसी ने इस बात की जानकारी ग्रामप्रधान निर्मल सिंह को दे दी. कुछ ही देर में वहां अच्छीखासी भीड़ लग गई. लाश जसपुर कोतवाली के अंतर्गत आने वाले गांव अहमदनगर के पास खेतों में पड़ी थी. ग्रामप्रधान निर्मल सिंह की सूचना पर जसपुर कोतवाली के एसएसआई संजीव कुमार पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए.

निरीक्षण में पुलिस ने देखा कि मृतक के शरीर पर किसी भी तरह का चोट का कोई निशान नहीं था. उस की हत्या गोली मार कर की गई थी. गोली आंख के पास लगी थी, जो छेद कर उस पार गले के पास से निकल गई थी.

मृतक की शिनाख्त के लिए पुलिस को किसी तरह की जहमत नहीं उठानी पड़ी. क्योंकि उसे वहां लगभग हर कोई जानता था. मृतक जसपुर के मोहल्ला गांगूवाला का रहने वाला जयप्रकाश था, जो घूमघूम पूरे दिन ठेले पर नीरा (खजूर के पेड़ का पानी) बेचता था. यही वजह थी कि अधिकांश लोग उसे जानतेपहचानते थे. हत्या की सूचना पा कर सीओ प्रकाशचंद आर्य भी घटनास्थल पर आ गए थे.

मृतक के कपड़ों की तलाशी में पुलिस को उस की जेब से पहचान पत्र, फोटो और 4 हजार रुपए नकद मिले थे. इस से यह साफ हो गया था कि मृतक की हत्या लूटपाट के लिए नही की गई थी.

साथ आई फोरेंसिक टीम अपना काम करने लगी तो एसएसआई संजीव कुमार ने जयप्रकाश की हत्या की सूचना उस के घर वालों को दिलवा कर वहीं बुला लिया. हत्या की सूचना पा कर घर वाले रोतेबिलखते वहां आ पहुंचे. पूछताछ में पता चला कि मृतक इधर कई दिनों से काशीपुर में रहने वाली अपनी बहन केला देवी के यहां रह रहा था. इस के बाद पुलिस के सामने यह सवाल खड़ा हो गया कि मृतक जब काशीपुर में रह रहा था तो इस की हत्या यहां कैसे हुई?

इसी पूछताछ में मृतक जयप्रकाश की पत्नी सुनीता ने बताया था कि कुछ दिनों पहले मृतक ने अपना मकान 9 लाख रुपए में बेचा था. मकान बेचने के बाद से ही वह अपनी बहन के यहां रह रहा था. 9 लाख रुपए एक मोटी रकम होती है. उस के लिए भी उस की हत्या हो सकती थी. यह सब जांच के बाद ही पता चल सकता था. पुलिस घटना की काररवाई निपटाते हुए लाश का पंचनामा तैयार कर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाने की तैयारी कर रही थी कि तभी मृतक जयप्रकाश की बहन केला देवी आ गई.

आते ही केला देवी भाई की लाश से लिपट कर जोरजोर से रोने लगी. पुलिस को जब पता चला कि यही उस की बहन केला देवी है, जिस के यहां जयप्रकाश अपने मकान के रुपए ले कर रहा था तो पुलिस ने उस से भी पूछताछ करना उचित समझा.

सांत्वना दे कर पुलिस ने केला देवी से पूछताछ की तो उस ने बताया कि 11 अक्तूबर को करवा चौथ होने की वजह से जयप्रकाश अपने घर जाने की बात कह कर उस के घर से चला आया था. इस के बाद वह कहां गया, उस के साथ क्या हुआ, उसे कोई जानकारी नहीं थी.

पुलिस केला देवी से पूछताछ कर रही थी कि तभी मृतक जयप्रकाश की मां बिरमो देवी आ गई. वह बहू की ओर इशारा कर के रोते हुए कहने लगी, ‘‘अपने यार के साथ मिल कर तू ने ही मेरे बेटे को मरवाया है. तू हत्यारिन है. मेरे बेटे को मरवा कर तेरा कलेजा ठंडा हो गया न, अब मौज कर अपने यार के साथ.’’

बिरमो देवी की बातें सुन कर पुलिस के कान खड़े हो गए. पुलिस को समझते देर नहीं लगी कि यह अवैध संबंधों में हुई हत्या का मामला है. पुलिस को लगा, अब जल्दी ही इस मामले का खुलासा हो जाएगा. इस के बाद पुलिस ने लाश को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवा दिया.

बिरमो देवी की बातों से पुलिस ने इसे अवैध संबंध में हुई हत्या का मामला माना था, इसलिए अंतिम संस्कार होने के तुरंत बाद पुलिस मृतक जयप्रकाश के घर पूछताछ के लिए पहुंच गई. मृतक की मां बिरमो देवी घर में नहीं थी, इसलिए पुलिस उस की पत्नी सुनीता और बच्चों से पूछताछ करने लगी.

सुनीता और बच्चों ने बताया कि करवा चौथ को जयप्रकाश घर नहीं आया था. उसे किस ने, कब और क्यों मारा, उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है. पत्नी और बच्चों के खिलाफ पुलिस को अब तक की जांच में कोई सुबूत नहीं मिला था, इसलिए पुलिस इस बात पर भी विचार करने लगी कि कहीं रुपयों की वजह से तो जयप्रकाश की हत्या नहीं हुई.

इस के बाद पुलिस ने मकान खरीदने वाले से पूछताछ की तो उस ने बताया कि मकान का सौदा होते ही उस ने पूरी रकम अदा कर दी थी. उस के बाद जयप्रकाश ने पैसों का क्या किया, उसे कोई जानकारी नहीं थी.

पुलिस जयप्रकाश की मां बिरमो देवी से पूछताछ करना चाहती थी, इसलिए एक बार फिर उस के घर गई. इस बार की पूछताछ में उस ने पुलिस को बताया कि उस की बहू सुनीता का चमनबाग के रहने वाले मास्टर हरजीत सिंह से प्रेमसंबंध है. जब देखो, तब वह उसी के घर में पड़ा रहता था.

जयप्रकाश ने कई बार सुनीता को समझाया था, लेकिन सुनीता मास्टर के प्यार में इस कदर पागल थी कि मास्टर के लिए वह पति से लड़ने लगती थी. सुनीता का मास्टर हरजीत सिंह से चक्कर था, इसलिए वह उस की तरफदारी करती थी. उस का बड़ा बेटा विशाल भी उस के साथ उस की तरफदारी करता था.

बिरमो देवी ने पूरे विश्वास के साथ पुलिस से कहा था कि सुनीता ने ही मास्टर हरजीत सिंह के साथ मिल कर जयप्रकाश की हत्या की है. बिरमो देवी के इसी बयान को आधार बना कर पुलिस ने उस की ओर से मास्टर हरजीत सिंह, उस के बेटे दीपक, मृतक जयप्रकाश की पत्नी सुनीता और बेटे विशाल के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया था.

नामजद मुकदमा दर्ज होने के बाद जसपुर कोतवाली पुलिस ने मृतक जयप्रकाश की पत्नी सुनीता और मास्टर हरजीत सिंह को हिरासत में ले कर पूछताछ शुरू कर दी. काफी पूछताछ के बाद भी जब दोनों ने स्वीकार नहीं किया कि उन्होंने हत्या की है तो पुलिस चक्कर में पड़ गई. क्योंकि पुलिस इस मामले को बड़े हलके में ले रही थी. जब सुनीता और हरजीत ने हत्या करने से साफ मना कर दिया और पुलिस को उन के हत्या में शामिल होने का कोई सुबूत नहीं मिला तो पुलिस के लिए परेशानी बढ़ गई.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, जयप्रकाश की हत्या रविवार की रात को हुई थी. उसे 315 बोर के तमंचे से गोली मारी गई थी. जब इस पूछताछ से पुलिस हत्यारों तक पहुंचने में नाकाम रही तो जांच को आगे बढ़ाने के लिए पुलिस ने मोबाइल को आधार बनाया.

पुलिस ने मृतक जयप्रकाश और नामजद अभियुक्तों के काल डिटेल्स और लोकेशन निकलवाई. इस काल डिटेल्स और लोकेशन से पता चला कि जिस रात जयप्रकाश की हत्या हुई थी, चारों अभियुक्तों की लोकेशन जसपुर थी. चारों में से किसी की मृतक से कोई बात भी नहीं हुई थी. जबकि जयप्रकाश के मोबाइल फोन की लोकेशन काशीपुर की थी. उस की काल डिटेल्स में 2 नंबर ऐसे मिले थे, जिन की लोकेशन काशीपुर की थी और उन नंबरों से जयप्रकाश की कई बार बात भी हुई थी. पुलिस ने उन नंबरों के बारे में पता किया तो दोनों नंबर काशीपुर के निकले.

पुलिस को पता ही था कि मृतक इधर कई दिनों से काशीपुर में अपनी बहन के घर रह रहा था. पुलिस केला देवी से पूछताछ कर ही चुकी थी. उस ने बताया था कि करवा चौथ की बात कह कर जयप्रकाश अपने घर चला गया था. लेकिन जब मृतक के फोन की लोकेशन काशीपुर की ही मिली तो पुलिस ने एक बार फिर उस से पूछताछ करने पहुंची. पुलिस ने उस से उन दोनों नंबरों के बारे में पूछा, जो जयप्रकाश की काल डिटेल्स में मिले थे.

केला देवी से पता चला कि उन दोनों नंबरों में से एक नंबर उस के भतीजे पंकज का है. पुलिस पंकज को हिरासत में ले कर पूछताछ के लिए कोतवाली जसपुर ले आई. उसे हिरासत में लेने की वजह यह थी कि उस रात उस के नंबर की लोकेशन जसपुर की पाई गई थी.

कोतवाली में पंकज से पूछताछ शुरू हुई तो पुलिस के सवालों के आगे वह ज्यादा देर तक टिक नहीं सका. दरअसल पंकज शरीर से भले ही जवान लगता था, लेकिन उम्र के हिसाब से अभी बच्चा था. इसीलिए पुलिस की सख्ती के आगे उस की हिम्मत जवाब दे गई और उस ने सच उगल दिया. पंकज ने पुलिस को बताया कि अपने 3 साथियों के साथ मिल कर उसी ने जयप्रकाश की हत्या की थी.

पूछताछ में पंकज ने जयप्रकाश की हत्या की जो कहानी पुलिस को सुनाई, वह हैरान करने वाली थी. इस की वजह यह थी कि उस ने पत्नी, बेटे और पत्नी के प्रेमी को मारने की सुपारी दी थी, लेकिन मारा गया खुद. यह पूरी कहानी कुछ इस तरह थी.

जसपुर के बीएसबी इंटर कालेज में एक चपरासी था गंगाराम. कई सालों पहले जानलेवा बीमारी की वजह से उस की मौत हो गई थी. मृतक जयप्रकाश गंगाराम का बड़ा बेटा था. जवान होने पर गंगाराम ने सुनीता से उस की शादी कर दी थी. उस का परिवार पहले शहर के बीचोबीच सब्जी मंडी के पास रहता था. युवा होते ही जयप्रकाश नीरा बेचने लगा था. उसी की आय से उस के परिवार का गुजरबसर हो रहा था.

जयप्रकाश के 4 बच्चे हो गए तो उस पुराने मकान में रहने में उसे परेशानी होने लगी. तब जयप्रकाश ने अपने उस पुराने मकान को बेच दिया और बीएसबी इंटर कालेज के पास गांगूवाला मोहल्ले में भाई के साथ जमीन खरीद कर नया मकान बना कर उसी में परिवार के साथ रहने लगा.

पिता के समय से ही जयप्रकाश के बीएसबी इंटर कालेज के कई टीचरों से अच्छे संबंध थे, जो गंगाराम के मरने के बाद भी उस के घर आतेजाते रहते थे. उन्हीं अध्यापकों में एक हरजीत सिंह भी था. आनेजाने में ही हरजीत की नजर जयप्रकाश की पत्नी सुनीता पर पड़ी तो उस का मन मचल उठा. इस की वजह यह थी कि वह थोड़ा मनचले किस्म का था. शायद इसीलिए शादीशुदा होने के बावजूद खूबसूरत सुनीता पर उस की नीयत खराब हो गई थी.

मन के मचलते ही हरजीत सुनीता के पीछे पड़ गया. वह कभी सुनीता की सुंदरता की तारीफ करता तो कभी उस के नाश्तेपानी की. सुनीता को उस की ये तारीफें अच्छी लगतीं. जब हरजीत तारीफें कुछ ज्यादा ही करने लगा तो सुनीता का ध्यान उस पर गया. इस के बाद उस की भी समझ में आ गया कि हरजीत चाहता क्या है.

सुनीता की घरगृहस्थी ठीकठाक चल रही थी. लेकिन हरजीत की चाहत के आगे वह झुक गई. उस ने नजरों से ही बता दिया कि वह जो चाहता है, उसे वह मंजूर है. इस के बाद सुनीता की नजदीकी पाने के लिए हरजीत ने उसे गर्ल्स इंटर कालेज में मिड डे मील बनाने का काम दिला दिया. उसी के सहारे सुनीता ने वहीं एक छोटी सी चाय की दुकान खोल ली. अब हरजीत और सुनीता पूरा दिन एकदूसरे की आंखों के सामने रहने लगे.

जयप्रकाश का मकान बस्ती से दूर ऐसी जगह था, जहां कौन आताजाता है, कोई देखने वाला नहीं था. जयप्रकाश नीरा बेचने सुबह ही निकल जाता था. बच्चे भी स्कूल चले जाते थे. उस के बाद घर में सुनीता अकेली रह जाती थी. ऐसे में हरजीत को सुनीता से मिलने में कोई परेशानी नहीं होती थी. हरजीत जब भी सुनीता के यहां आता था, खानेपीने की तरहतरह की चीजें ले आता था, इसलिए सुनीता के बच्चों को भी वह अच्छा लगने लगा था. बच्चे पिता से ज्यादा उसे प्रेम करने लगे थे.

संबंध बनने के बाद हरजीत सुनीता के घर ज्यादा ही आनेजाने लगा तो यह जयप्रकाश को खलने लगा. जयप्रकाश ने दोनों को किसी दिन अश्लील हरकतें करते देख लिया तो हरजीत के आने का विरोध करने लगा. सुनीता अब उस की बात मानने को तैयार नहीं थी. जिस की वजह से हरजीत को ले कर घर में कलह रहने लगी.

जयप्रकाश ने देखा कि पत्नी उस का कहना नहीं मान रही है और बच्चे भी उसी का साथ दे रहे हैं तो बीवीबच्चों से उसे नफरत हो गई. इस के बाद वह बीवीबच्चों से अलग रहने के बारे में सोचने लगा. वह अपना मकान बेच कर पत्नीबच्चों को छोड़ कर अकेला रहना चाहता था. इस के बाद छोटे भाई से सांठगांठ कर के उस ने मकान बेचने की योजना बना डाली.

दरअसल यह मकान दोनों भाई ने मिल कर बनवाया था. आखिर दोनों भाइयों ने 30 सितंबर, 2014 को सुनीता की चोरी से 17 लाख रुपए में मकान का सौदा कर डाला. इस रकम से जो 9 लाख रुपए जयप्रकाश को मिले थे, उसे ले जा कर उस ने अपनी बहन केला देवी के यहां रख दिए थे.

काशीपुर पहुंच कर जयप्रकाश ने बहन से पत्नी के बारे में बता कर कहा कि अब वह उस से किसी तरह पीछा छुड़ाना चाहता है. भाभी की बदचलनी की बात सुन कर केला देवी को बहुत गुस्सा आया. जयप्रकाश ने बहन से यह भी कहा था कि अगर इस काम के लिए उसे 2-4 लाख रुपए खर्च भी करने पड़े तो वह खर्च कर देगा. वह हरजीत, पत्नी सुनीता और बढ़े बेटे विशाल की हत्या कराना चाहता था.

केला देवी ने इस काम के लिए जयप्रकाश की मुलाकात अपने देवर के बेटे पंकज से करा दी. जयप्रकाश उस का मामा लगता था. पंकज अभी छोटा था. उस का बाप नन्हे कटरामालियान में पान की दुकान चलाता था. वह भी बाप के साथ दुकान पर बैठता था.

पंकज ने कभी हत्या जैसे काम के बारे में सोचा भी नहीं था. लेकिन जब जयप्रकाश ने 4 लाख रुपए देने की बात कही तो वह लालच में पड़ गया और हामी भर दी. इस के बाद उस ने अपने दोस्तों शिवअवतार पुत्र सोमपाल निवासी बरखेड़ा, कपिल पुत्र बाबूराम निवासी कटरामालियान, दीपक पुत्र गोपाल यादव निवासी काशीपुर को 2 लाख रुपए देने की बात कह कर 3 हत्याएं करने के लिए राजी कर लिया.

कपिल एक अस्पताल में एक्सरे टेक्नीशियन था तो शिवअवतार उर्फ बबलू एक पैथालौजी लैब में लैब टेक्नीशियन था. दीपक यादव एक मेडिकल स्टोर पर काम करता था.

इस तरह जयप्रकाश ने 4 लाख रुपए में 3 हत्याओं का सौदा कर डाला. इस के बाद उस ने 3 लाख 60 हजार रुपए दे भी दिए. बाकी रकम काम हो जाने के बाद देने को कहा.

पंकज और उस के दोस्तों ने 3-3 हत्याओं की सुपारी ले तो ली, लेकिन चारों ही इस काम के लिए एकदम नए थे. इंसान की कौन कहे, इन में से किसी ने कभी चूहा तक नहीं मारा था. जिस ने कभी चूहा तक न मारा हो, वह आदमी कैसे मार सकता था.

बहरहाल, पंकज ने अपने दोस्तों को 2 लाख रुपए दे कर इस झंझट से खुद को अलग कर लिया. लेकिन हत्या करवाने की जिम्मेदारी उसी की थी, इसलिए हत्याएं कैसे की जाएं, योजना बनवाने में वह भी साथ रहता था.

चारों हर रोज बैठ कर इस काम के लिए नईनई योजनाएं बनाते, लेकिन अंजाम न दे पाते. धीरेधीरे एक सप्ताह गुजर गया, उन की योजना सफल न हो पाई. अब तक मिली रकम से उन्होंने काफी पैसे खर्च कर डाले थे.

हत्याएं करवाने की वजह से जयप्रकाश अपना घर छोड़ कर काशीपुर में पड़ा हुआ था. उस का सोचना था कि उस के काशीपुर रहते हत्याएं होंगी तो पुलिस उस पर शक नहीं करेगी.

जब सप्ताह भर से ज्यादा का समय गुजर गया और पंकज कुछ नहीं कर पाया तो जयप्रकाश को लगा कि यह काम उस के वश का नहीं है. उस ने पंकज से अपने रुपए वापस मांगे. लेकिन पंकज और उस के साथियों ने काफी रुपए खर्च कर दिए थे, इसलिए रुपए लौटाते कहां से.

जयप्रकाश ने पंकज पर रुपए लौटाने के लिए दबाव बनाया तो वह परेशान हो उठा. इस के बाद चारों ने बैठ कर एक नई योजना बना डाली. यह योजना थी जयप्रकाश की हत्या की. उन्हें पता ही था कि जयप्रकाश का उस की पत्नीबच्चों से मनमुटाव चल ही रहा है.

ऐसे में अगर जयप्रकाश की हत्या हो जाती है तो शक उस की पत्नी पर जाएगा और वे साफ बच जाएंगे. 3 लोगों की हत्या करने के बजाय एक की हत्या करना आसान भी था. उन्हें 3 की जगह एक ही हत्या करने पर सारे पैसे मिल जाएंगे.

पंकज मामा को मरवाना तो नहीं चाहता था, लेकिन मामा से सुपारी ले कर वह बुरी तरह से फंस चुका था, क्योंकि मामा से ली गई रकम से काफी रुपए खर्च हो चुके थे. इसीलिए दोस्तों के कहने पर मजबूरन उसे मामा की हत्या के लिए हामी भरनी पड़ी.

इस के बाद जयप्रकाश की हत्या की योजना बन गई. पंकज और उस के दोस्तों को पता था कि करवा चौथ के त्यौहार पर जयप्रकाश जसपुर जाने के लिए राजी हो जाएगा. दरअसल वे जयप्रकाश को जसपुर ले जा कर मारना चाहते थे. क्योंकि वहां मारे जाने पर उस की हत्या की शंका पत्नीबच्चों और प्रेमी पर होती. वे पुलिस की गिरफ्त से दूर रहते.

योजना बनाने के बाद पंकज और उस के साथियों ने जयप्रकाश को विश्वास में ले कर जसपुर चलने के लिए राजी कर लिया. बहाना था, उस के द्वारा कही गई 3 हत्याओं को अंजाम देने का. जयप्रकाश किसी भी तरह पत्नी नामक झंझट से मुक्ति चाहता था, इसलिए वह उन के साथ जाने को राजी हो गया. चारों ने जो योजना बनाई थी, उस के अनुसार जयप्रकाश को जसपुर ले जा कर खत्म कर देना था.

12 अक्तूबर की रात शिवअवतार और कपिल ने जयप्रकाश को साथ ले जा कर काशीपुर के एक होटल में शराब पिलाई और खाना खिलाया. पत्नी की करतूतों से दुखी जयप्रकाश बातबात में ज्यादा शराब पी गया. शिवअवतार और कपिल चाहते भी यही थे, इसलिए वे उसे ज्यादा से ज्यादा शराब पीने के लिए उकसाते रहे.

जयप्रकाश नशे में होश खो बैठा तो शिवअवतार और कपिल उसे मोटरसाइकिल पर बीच में बैठा कर जसपुर की ओर चल पड़े.

संन्यासियों वाला रोड पर पहुंच कर वे ऐसी जगह की तलाश करने लगे, जहां वे उसे मार सकें. कुछ दूर चलने पर अहमदनगर गांव के पास जब उन्हें सुनसान मिला तो उन्होंने उसे मोटरसाइकिल से उतार कर गोली मार दी.

इस के बाद जयप्रकाश की लाश को वहीं छोड़ कर शिवअवतार और कपिल लौट पड़े. रास्ते से ही शिवअवतार ने पंकज को फोन कर दिया कि बाकी 40 हजार रुपए वह दीपक को दे दे. जयप्रकाश ने सुपारी तो दी थी पत्नी, बेटे और पत्नी के प्रेमी हरजीत को मारने की, लेकिन मारा गया खुद.

पंकज के बयान के आधार पर पुलिस ने शिवअवतार उर्फ बबलू, कपिल, दीपक यादव को भी गिरफ्तार कर लिया. इन में शिवअवतार और कपिल पर तो हत्या का आरोप है, जबकि पंकज पर षडयंत्र रचने का तथा दीपक यादव पर साक्ष्य छिपाने का.

पुलिस ने हत्यारों की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त 315 बोर का तमंचा, 2 जीवित कारतूस तथा 1 लाख 60 हजार रुपए नकद बरामद कर लिए हैं. सारे साक्ष्य जुटा कर पुलिस ने चारों अभियुक्तों को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया.

पहले से हिरासत में लिए गए मास्टर हरजीत और मृतक जयप्रकाश की पत्नी सुनीता को पुलिस ने पंकज के अपराध स्वीकार करते ही रिहा कर दिया. सुनीता ने भले ही पति को नहीं मरवाया था, लेकिन अगर वह गलत न होती तो आज यह नौबत न आती. उसी की वजह से आज उस के 4 बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो गया है. Contract Killing

— इसके बाद अदालती कार्रवाई में क्या हुआ यह ज्ञात नहीं है.

— 2014 में प्रकाशित

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