Web Series Review. अगर लाशें ठिकाने लगाना ही किसी का बिजनैस शुरू करने का मौका बन जाए तो क्या होगा? जी हां, इस सीरीज की कहानी कुछ यही दिखाती है. सारिबगंज की कहानी पर आधारित यह सीरीज ऐसे शहर की झलक दिखाती है, जहां गैंग की दुश्मनी और राजनीतिक प्रभाव लोगों की जिंदगी तय करते हैं. सीरीज में 3 दोस्त राजू, स्वपन और गोल्डी लाशों को ठिकाने लगाने का ऐसा बिजनैस शुरू करते हैं कि…

लेखक: रोहन घोष, कोणार्क मुखर्जी और रीतार्शी दत्ता, निर्माता: ज्योति देशपांडे, कार्तिक निशानदार और अर्जुन सिंघ

निर्देशक: रोहन घोष, ओटीटी: अमेजन मैक्स प्लेयर

कलाकार: रवि किशन, अजितेश गुप्ता, जिशु सेनगुप्ता, शाश्वत चटर्जी, विशाल जेठवा, अभय वाघ, साजी चौधरी, श्रवणी गोस्वामी, रेश लांबा, सियोली चट्टोपाध्याय, तुहीना दास, सौरभ शर्मा, नरेश सूरी, राजीव पांडे.

वेब सीरीज ‘क्लीन अप कंपनी’ एक डार्क क्राइम कौमेडी सीरीज है. इस की कहानी सारिबगंज नामक एक अराजक और अपराधों से घिरे शहर की है. इस की कहानी 3 दोस्तों—राजू, स्वपन और गोल्डी के इर्दगिर्द घूमती है. ये तीनों दोस्त अपनी जिंदगी में पैसों की तंगी और नाकामयाबी से काफी परेशान हैं. इसी बीच उन की मुलाकात एक लोकल गैंगस्टर से होती है, जो इन्हें एक खतरनाक काम सौंपता है. इन तीनों का यह काम होता है कि क्राइम सीन को साफ करना और लाश को ठिकाने लगाना, जिस से पुलिस को एक भी सबूत न मिल सके.

इस के बाद वे इसी मुश्किल काम को एक बिजनैस में बदल देते हैं और अपनी खुद की ‘क्लीनअप कंपनी’ शुरू कर देते हैं, लेकिन जैसेजैसे उन का बिजनैस बढ़ता है, वे सारिबगंज के ताकतवर गैंगस्टर्स के निशाने पर आ जाते हैं. इस बीच एक जांबाज आईपीएस अधिकारी भी शहर के क्रिमिनल नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है.

इस सीरीज में कुल 8 एपिसोड हैं और इसे अगस्त 2026 को अमेजन मैक्स प्लेयर पर रिलीज किया गया है.

एपिसोड नंबर 1

पहले एपिसोड का नाम ‘सारिबगंज का ला’ रखा गया है. एपिसोड की शुरुआत में हम एक व्यक्ति को देखते हैं, जो साधु के वेश में ध्यान में मग्न होता है, मगर एकाएक उस का व्यवहार एकदम बदल जाता है. वह अपने पास रखा हथियार उठा कर लोगों पर हमला कर देता है. यह आदमी कौन है? इस बात का तो पता नहीं चलता, पर इतना जरूर पता चलता है कि इस कहानी में यह व्यक्ति महत्त्वपूर्ण है.

अब कहानी कुछ दिन पीछे चली जाती है. हम एक नवयुवक गोल्डी (अजितेश गुप्ता) को देखते हैं, जिसे गाने का बहुत शौक है. उस के पिता का ईंट का एक भट्ठा है, जिसे उस का चाचा चलाता है.

गोल्डी की मां कौशल्या (श्रवणी गोस्वामी) भी चाहती है कि वह अपने कारोबार में हाथ बंटाए, लेकिन गोल्डी अपनी ही दुनिया में मस्त रहता है, इसलिए अकसर उस की अपनी मां से लड़ाई होती रहती है.

दूसरी तरफ हम अब राजू (विशाल जेठवा) को देखते हैं, जो एक गैराज में मिस्त्री का काम करता है, मगर उस की जिंदगी में भी पैसों की कमी है. गैराज में एक आदमी स्कूटर ले कर अपनी बेटी मनीषा (सिद्धी पोतदार) के साथ आता है. मनीषा और राजू जब एकदूसरे को देखते हैं तो पता चलता है कि मनीषा राजू की गर्लफ्रेंड है.

अब हमें इस टोली का तीसरा दोस्त दिखाई देता है जिस का नाम स्वपन है. यह इन तीनों दोस्तों में सब से अधिक पढ़ालिखा व समझदार है. स्वपन सिविल सर्विसेज की परीक्षा पास कर के अधिकारी बनना चाहता है, लेकिन उस की समस्या भी पैसों की है जिस के कारण वह अपनी पढ़ाई भी नहीं कर पा रहा था.

तीनों दोस्तों की समस्याएं अलगअलग हैं, लेकिन तीनों का सपना किसी भी तरह से पैसा कमाना है. स्वपन (अभय वाघ) की बातें बाकी दोनों दोस्त मानते हैं.

इसी बीच स्वपन को पता चलता है कि उस का दोस्त हलुवा, जिसे आम बोलचाल की भाषा में सब कलुआ (सलीम हुसैन मुल्ला) के नाम से पुकारते हैं, वह किसी गैंग के लिए काम करता है.

तभी एक दुकान में आग लगने की खबर मिलने पर एसपी इंद्रनाथ मलिक (शाश्वत चटर्जी) वहां पर पहुंचते हैं तो एसपी मलिक को यह मामला संदिग्ध लगता है और वह उस दुकान के मालिक को पकड़ कर थाने ला कर कड़ी पूछताछ करने लग जाते हैं. सीन बदलता है और हम धरमा (साजी चौधरी) को देखते हैं जो नदी के किनारे एक आदमी का मर्डर कर रहा था. सारिबगंज में हत्या करना एक सामान्य सी बात थी.

उधर थाने में एसपी मलिक दुकान के मालिक से मारपीट कर रहे थे कि तभी वहां पर इंसपेक्टर प्रशांत (प्रशांत पोहे) आ कर एसपी मलिक को समझाने लग जाता है, ”सर यहां तो ऐसा चलता ही रहता है. आज रीगल बार में हम सब को आमंत्रित किया गया है. चलो, वहां पर चलते हैं वहां पर आप का अच्छा मनोरंजन हो जाएगा.’’

अब हम रीगल बार को देखते हैं, जहां डौली नाम की डांसर नाच रही है. वहां पर गोल्डी, राजू और स्वपन हैं. तभी कलुआ स्वपन को बताता है कि आजकल धरमा और सुलतान के बीच में काफी तनाव चल रहा है, इन दोनों के बीच कभी भी टकराव हो सकता है. डांस बार में सभी गुंडे और पुलिस वाले जम कर डांस कर रहे हैं. तभी वहां पर सुलतान (विजय श्रीवास्तव) पहुंच जाता है और उस के गुंडे सुलतान की चौइस पर गाना और डांस करने लगते हैं.

अगले ही पल वहां पर एसपी मलिक आ जाते हैं और सभी को पकड़ कर थाने ले कर आ जाते हैं. थाने में इंसपेक्टर प्रशांत एसपी मलिक को समझाता है कि सर इन को छोड़ दो, नहीं तो हम सब परेशानी में पड़ सकते हैं. तब एएसआई शरीफुल (विक्रम भाम) एसपी मलिक को साफसाफ बता देता है कि इन सब गुंडों के पीछे बर्मन उर्फ मेजदा (जिशु सेनगुप्ता) का हाथ है, जो 4 बार से यहां का विधायक है.

अब सीन वर्तमान में आता है, जहां सुलतान के आदमी एक मर्डर चुके थे और उसे ठिकाने लगाने के लिए सुलतान एक खतरनाक चाल चलता है. जिस चाकू से हत्या हुई थी, वही चाकू सुलतान राजू के हाथ में पकड़ा कर उस में राजू के फिंगरप्रिंट ले लेता है और फिर राजू व उस के दोस्तों को उस लाश को ठिकाने लगाने के लिए विवश किया जाता है.

राजू डर जाता है कि यदि यह हथियार पुलिस तक पहुंच गया तो वह खून के केस में फंस जाएगा. इसी मजबूरी में राजू, गोल्डी और स्वपन उस लाश को ठिकाने लगाने के लिए मान जाते हैं.

राजू एक एंबुलेंस में लाश ले जाता है, जहां पर वे तीनों जंगल में लाश ठिकाने लगते हैं. तभी वहां पर स्वपन को सामने से एक गाड़ी आती दिखाई देती है, जिस से वे तीनों बहुत डर जाते हैं. यहीं पर पहला एपिसोड समाप्त हो जाता है.

पहले एपिसोड स्टोरी में बिखराव दिखाई दे रहा है. एपिसोड के आरंभ में जो व्यक्ति साधु के वेश में दिखाया गया है और कई मर्डर भी कर देता है, मगर वह आखिर कौन है, ऐसा क्यों कर रहा है, इस का बिलकुल भी जिक्र नहीं किया गया है.

स्टोरी में थाने के एसएचओ इंसपेक्टर प्रशांत को गैंगस्टरों का पक्ष लेते और उन की सहायता करते हुए दिखाया गया है, जबकि एसपी रैंक का अधिकारी उस को सस्पेंड करने की बात तो दूर, डांटता तक नहीं है. यह लेखक की अज्ञानता को साफसाफ जाहिर करता है.

एपिसोड नंबर 2

दूसरे एपिसोड का नाम ‘यह तो मर गया’ रखा गया है. एपिसोड की शुरुआत फ्लैशबैक से होती है, जहां पर अब्बास (रेश लांबा) कलुआ और एकदूसरे साथी को एक ट्रांसपोर्टर का किडनैप करने को कहता है. कलुआ और उस के साथी को गाड़ी चलती नहीं आती थी, तभी वहां पर राजू अपना ट्रक ले कर आ जाता है.

अब्बास अपने आदमियों को राजू की गाड़ी पर बैठ कर ट्रांसपोर्टर का किडनैप करने भेज देता है. राजू को रास्ते में स्वपन मिलता है तो राजू उसे भी गाड़ी में बिठा लेता है.

इधर एसपी मलिक एएसआई रफीकुल को रीगल बार के मालिक रफीकुल (राजीव पांडे) के बार की सीसीटीवी फुटेज निकालने को कहता है ताकि उस दिन बार में हुई मारपीट के मामले में बंद बदमाशों के विरुद्ध पुख्ता सबूत इकट्ठे किए जा सकें. लेकिन तभी डीआईजी (किरण पाटिल) फोन पर एसपी मलिक को कहता है कि तुम इन सभी लोगों को छोड़ दो.

एसपी मलिक जब डीआईजी से लिखित आदेश मांगता है तो डीआईजी एसपी से कहता है कि तुम पहले मुझे इन सभी की अरेस्ट रिपोर्ट सबमिट करो, साथ में यह भी लिखित रूप से लिख कर दो कि उस दिन बार में तुम्हारे कितने पुलिस अधिकारी और पुलिस कर्मचारी दारू पी कर उस बार में डांस कर रहे थे. इस के बाद एसपी मलिक को मजबूरन उन सभी बदमाशों को रिहा करना पड़ता है.

इधर रीगल बार के मालिक रफीकुल को जब लैला (तुहीना दास) अपने डांस के लटकेझटके दिखाती है तो वह एक ही बार में उस का दीवाना हो जाता है. रफीकुल अपने बार में लैला को नाचने की परमिशन दे देता है.

उधर राजू, गोल्डी और स्वपन उस ट्रांसपोर्टर की लाश को गोल्डी के ईंट के भट्ठे में जला देते हैं. उन के इस काम के बदले अब्बास राजू को इतनी सारी नोटों की गड्डियां देता है कि राजू खुश हो जाता है और वह अब्बास से कहता है कि यदि आप को भविष्य में हमारी जरूरत हो तो अवश्य बताइएगा.

राजू हौस्पिटल से एक एंबुलेंस को ड्राइव कर के ले जा रहा होता है तभी दूसरी ओर से एसपी मलिक अपनी पुलिस जीप में हौस्पिटल आ रहे होते हैं. गार्ड तभी राजू को रोक कर उस से पूछताछ करने लगता है. राजू बताता है कि वह इस एंबुलेंस को गैराज में सर्विसिंग के लिए ले जा रहा है और वह गार्ड को कागज दिखाता है. कागज देखने पर गार्ड राजू को छोड़ देता है.

इधर रीगल बार में लैला का डांस चल रहा है और वहां पर सुलतान और धरमा अलगअलग टेबल में बैठ कर डांस का लुत्फ उठा रहे हैं. वहां पर मौजूद लोग और गुंडे मस्त हो कर डांस कर रहे हैं. बार मालिक रफीकुल इतनी ज्यादा भीड़ देख कर खुश हो रहा है.

दूसरी तरफ जंगल में गोल्डी, राजू और स्वपन एंबुलेंस से लाशों के सबूत नष्ट करने में लगे हैं. एंबुलेंस से भी खून के धब्बे मिटा रहे हैं, सबूत नष्ट कर के वे लाशों को एंबुलेंस में ले कर उन्हें ठिकाने लगाने जा रहे होते हैं. तभी एक मोड़ पर उन की एंबुलेंस मेजदा की गाड़ी से टकरा जाती है और लाश एंबुलेंस से छिटक कर जमीन पर गिर जाती है. यहीं पर दूसरा एपिसोड समाप्त हो जाता है.

दूसरे एपिसोड में ट्विस्ट तो अच्छे हैं, लेकिन पाठक इस तरह की डार्क क्राइम कौमेडी पहले ही देख चुके हैं, उन के लिए इस में कुछ नया नहीं है. कहानी में मेजदा का आदमी डीआईजी है, जबकि एमपी उमानाथ का आदमी एसपी मलिक है, लेकिन दोनों खुल कर अपना काम अंजाम नहीं दे पा रहे हैं, यह कमी भी साफसाफ दिखाई दे रही है.

एपिसोड नंबर 3

तीसरे एपिसोड का नाम ‘क्लीनअप कंपनी हाजिर हो’ रखा गया है. एपिसोड की शुरुआत में आसनसोल में हाईकमान की मीटिंग में सांसद उमानाथ क्रिमिनल एलिमेंट से दूरी बनाने की बात रखता है, ताकि मेजदा को नीचा दिखाया जा सके. लेकिन मेजदा वहां पर कहता है कि उस का विधानसभा क्षेत्र सारिबगंज आज पूरी तरह से अपराधमुक्त हो चुका है. उस की इस बात पर सभी नेता तालियां बजा कर उस का समर्थन करते हैं.

अगला दृश्य वहां से शुरू होता है, जहां पर दूसरे एपिसोड का अंत हुआ था. मेजदा जमीन पर गिरी लाश देख कर गोल्डी, स्वपन और राजू से पूछताछ करता है तो वे बता देते हैं कि हम सारिबगंज के मर्डर होने के बाद सारा सबूत मिटाने का काम कर आप की ही मदद कर रहे हैं.

अब मेजदा उन से कहलाता है कि इस लाशों को ठिकाने लगाने के बाद सीधे मेरे घर पर आ जाना, तुम तीनों से कुछ बात करनी है.

उधर गोल्डी, स्वपन और राजू दोनों लाशों को ईंट के भट्ठे में जला कर मेजदा के घर पहुंचते हैं तो वहां पर जाते ही धरमा और उस के लोग इन तीनों की जम कर पिटाई करने लगते हैं.

तभी मेजदा धरमा को रोक देता है और कहता है कि हमारे इलाके में अपराध तो होते ही रहेंगे और हर अपराध के बाद किसी न किसी को सफाई का काम तो करना ही पड़ेगा, इसलिए मेजदा उन तीनों को सीधेसीधे अपने साथ काम करने का प्रस्ताव देता है.

इस बार स्वपन अपनी कीमत एकदम से दोगुनी कर देता है यानी हर एक लाश को ठिकाने लगाने के लिए 2 पेटी की शर्त रख देता है. मेजदा उन की इस मांग को स्वीकार कर लेता है.

इधर मेजदा के घर पर उस का साथी विश्वनाथ मेजदा को अपने घर में एक ग्रैंड पार्टी आयोजित कराने को कहता है, जिस से वह अपने आलाकमान को अपने पक्ष में कर सांसद उमानाथ को मात दे सके. तभी वहां पर रीगल बार का मालिक रफीकुल आ कर पैसों की भेंट मेजदा को दे कर उस से लैला के प्रोग्राम को उस के घर पर आयोजित कराने की प्रार्थना करता है.

मेजदा खुद भी लैला के बारे में जान चुका था, इसलिए वह अपनी ग्रैंड पार्टी में लैला के डांस की अनुमति दे देता है.

अब तीनों दोस्तों— राजू, गोल्डी और स्वपन के पास पैसा जम कर आने लगा था. गोल्डी अब यह सोचने लगा था कि यदि वह ऐसे ही छप्पर फाड़ कर पैसे कमाता रहा तो एक दिन कोलकाता में जा कर अपने गाने का अलबम शूट कर लेगा और पूरे देश में नाम कमा लेगा. लेकिन धरमा उन्हें एक ऐसा सबक दे डालता है, जिस की वह कल्पना भी नहीं कर सकते थे.

धरमा कलुआ के सामने उस के एक साथी सुरेश (तुषार रनगुप्ता) को उन तीनों के सामने गद्दारी करने के लिए गोली मार देता है और उस लाश को ठिकाने लगाने का काम भी इन्हें ही सौंप देता है.

सुरेश राजू के बचपन का दोस्त था. धरमा इन तीनों को यह चेतावनी भी दे डालता है कि यदि उन्होंने इस शहर सारिबगंज को छोडऩे के बारे में सोचा भी तो वह उन सब को भी ऐसे ही मार डालेगा. अब उन तीनों की समझ में यह बात आ चुकी थी कि वे तीनों अब इस गैंग के कैदी बन चुके हैं.

सांसद उमानाथ एसपी मलिक को अपने घर बुला कर कहता है कि मुझे आने वाले चुनाव से पहले मेजदा के खिलाफ काररवाई चाहिए.

एसपी मलिक उसे कहता है कि सर, हमारी पुलिस की जीप खराब हो जाती है तो उस के लिए हमारे पास फंड नहीं है, जबकि केवल 40 बैड वाले सारिबगंज के हौस्पिटल की एंबुलेंस के लिए आप ने फंड दिया हुआ है.

मेजदा के घर पर कार्यक्रम शुरू हो चुका था. लैला डांस करते हुए विशेषकर मेजदा को अपनी तरफ आकर्षित करने की पूरी कोशिश कर रही थी. असल में लैला मेजदा को मार कर उस से अपना बहुत पुराना बदला चुकाना चाहती थी. इसलिए मेजदा के कमरे के बगल के बाथरूम में लैला के आदमियों ने पहले से ही एक पिस्टल छिपा कर रखी हुई थी.

आखिरकार लैला मेजदा को अपने पीछे कमरे में ले कर आने में कामयाब हो जाती है. मेजदा उसे अपनी बाहों में लेने की कोशिश करता है तो लैला नहाने का बहाना बना कर बाथरूम में घुस जाती है. वह पिस्टल ढूंढती है तो वह ऊपर रखा होने के कारण जल्दबाजी में कमोड के अंदर गिर जाती है. इस से कुछ देर हो जाती है.

उधर मेजदा लैला को जल्दी कमरे में आने को कहता है तो इस बीच पिस्टल का रैपर खोलने और उसे धोने में लैला को देरी हो जाती है. जब वह पिस्टल हाथ में ले कर कमरे में जाती है तो वह यह देख कर हैरान रह जाती है कि कमरे में मेजदा तो था ही नहीं.

इसी के साथ तीसरा एपिसोड समाप्त हो जाता है. तीसरे एपिसोड में भी खामियां साफसाफ नजर आ रही हैं. जब हौस्पिटल के पास रिपेयर के लिए फंड ही नहीं है तो राजू वहां से सर्विसिंग के फरजी कागज बना कर कैसे एंबुलेंस ले जा सकता है?

जब लैला कमरे में पिस्टल ले कर मेजदा के कमरे में पहुंचती है तो मेजदा भूत की तरह कहां गायब हो जाता है? अभिनय की बात करें तो कोई भी कलाकार अपने अभिनय से दर्शकों को प्रभावित नहीं कर पाया है.

एपिसोड नंबर 4

चौथे एपिसोड का नाम ‘सिरफिरे हैं हम’ रखा गया है. एपिसोड की शुरुआत में अब्बास के गुट की दूसरे गुट के गुंडों से मारपीट दिखाई गई है.

दूसरे दिन मेजदा के घर मां काली की पूजा होती है तो वहां पर मेजदा की पत्नी सरला (अनिदिता राय चौधरी) को पीपल के पेड़ पर लटका एक लौकेट मिलता है, जिस में बोरदा नाम लिखा होता है. यह लौकेट देखते ही वहां पर भगदड़ मचनी शुरू हो जाती है और मेजदा पूजा का कार्यक्रम ही रद्द कर देता है.

एसपी मलिक भी वहीं पर होता है. तब एएसआई शरीफुल बताता है कि बोरदा मेजदा का बड़ा भाई था और वह मेजदा से पहले सारिबगंज का विधायक था. वह विधायक के लिए नौमिनेशन भरने जा रहा था, तभी उस की कार का एक्सीडेंट हो गया और कार नदी में जा गिरी थी.

जब तक पुलिस घटनास्थल पर पहुंची तो पोस्टमार्टम कराने से पहले ही बोरदा का अंतिम संस्कार करा दिया गया था.

वह आगे बताता है कि कई लोगों का यह मानना है कि यह साजिश मेजदा ने ही रची थी. एसपी मलिक एएसआई से सभी इस एक्सीडेंट से संबंधित फाइल मंगा कर उन की स्टडी करने लग जाता है.

एसपी अब गैराज में पहुंच कर गैराज के मालिक प्रसाद (किरण डी. पाटिल) से बोरदा के एक्सीडेंट की पूछताछ करने लगता है, क्योंकि प्रसाद भी इस केस के सिलसिले में कोर्ट में पेश हुआ था. एसपी मलिक उस से ड्राइवर के बारे में भी पूछताछ करता है. गोल्डी यह सब सुन लेता है.

उधर जब राजू अपनी गर्लफ्रेंड मनीषा से मिलने हौस्पिटल जाता है तो मनीषा उस के साथ इंटीमेट होने लग जाती है और राजू को सैक्स करने का आमंत्रण देती है. लेकिन वहां पर एक बूढ़े व्यक्ति की लाश पड़ी होने के कारण राजू डर जाता है. उस के बाद मनीषा राजू को धक्का दे कर कमरे से बाहर निकाल देती है.

इधर गोल्डी राजू को फोन कर के बताता है कि पुलिस उस के घर मेजदा के पिता से पूछताछ कर रही है. राजू तुरंत गोल्डी को साथ ले कर अपने घर पहुंच जाता है.

इधर अब राजू सीधे मेजदा के पास जा कर यह बात बताता है कि एसपी मलिक उस के पिता परिमल से बोरदा के एक्सीडेंट के बारे में पूछताछ कर रहे थे. यह सुनते ही मेजदा सीधे डीआईजी को अपनी बातों में फंसा कर उस के द्वारा सीधे एसपी मलिक के औफिस में पहुंच जाता है.

डीआईजी जब एसपी मलिक को फटकार लगाता है कि तुम एक अपाहिज इंसान से पूछताछ कर के अपना समय बरबाद कर रहे हो. तब एसपी मलिक अपने डीआईजी को बताता है कि सर, आई हैव फैक्ट एविडेंस अगेंस्ट हिम.

तब मेजदा एसपी मलिक की कुरसी पर बैठ कर बोलता है, ”तू ज्यादा अंगरेजी मत झाड़, ज्यादा रोब दिखाना है तो अपने वरदी वालों पर दिखा.’’

इस पर एसपी मलिक कहता है कि हमारे डीआईजी साहब भी तो वरदी में हैं, वह आप के लिए काम कर रहे हैं.

इस बात पर डीआईजी कहता है कि मलिक बहुत हो गया. तुम्हें एक हफ्ते के लिए सस्पेंड किया जाता है.

अब दूसरी तरफ अब्बास राजू, गोल्डी और स्वपन को यह विश्वास दिलाता है कि यदि वे तीनों उस के लिए काम करेंगे तो वह उन को काफी रकम देगा और सारिबगंज से भी आजाद करवा देगा.

तीनों मान जाते हैं. इस के बाद अब्बास अपनी ताकत बढ़ाने लगता है ताकि सुलतान और धरमा के अस्तित्व को सदासदा के लिए समाप्त कर सके.

इधर अब रीगल बार के मैनेजर को लैला के ऊपर संदेह होने लगता है. बार में उस दिन लैला का डांस प्रोग्राम चल रहा होता है, वहां पर सुलतान और उस की गैंग के साथियों के अलावा भीड़ जमा हो जाती है. इसी बीच बार का मैनेजर लैला के कमरे में जा कर उस की अलमारी और दराजों की तलाशी लेता है तो उसे वहां लैला की असली हकीकत पता चल जाती है कि वह मेजदा से बदला लेना चाहती थी.

वह सारे सबूत ले कर लैला के कमरे से बाहर निकलता है, तभी वहां पर अब्बास अपने साथियों को ले कर आता है और बार के अंदर चारों ओर गोलियां चलाने लगता है. मैनेजर को भी अब्बास बेरहमी से मार डालता है. वहां पर मौजूद लोग अब्बास के द्वारा मार डाले जाते हैं.

गोल्डी सीसीटीवी कैमरों की रिकौर्डिंग मिटाने लगता है व स्वपन और राजू दूसरे सबूतों को नष्ट कर नए सबूत छोड़ते हैं, लेकिन उन तीनों को यह बात पता नहीं चलती कि इस हमले में एक जान बच गई थी. वह थी लैला, जो गोलीबारी के दौरान स्टेज के पीछे छिप गई थी.

वह अचानक से एक टूटी हुई कांच की बोतल ले कर इन तीनों को मारने इन के सामने प्रकट हो जाती है. यहां पर चौथा एपिसोड समाप्त हो जाता है.

इस एपिसोड में लेखक तो पुलिस वालों के पीछे ही पड़ गया है, जैसे उसे पुलिस से नफरत हो. हर बार मेजदा द्वारा एसपी स्तर के पुलिस अधिकारी की बेइज्जती कराई गई है. खुद मेजदा आ कर एक एसपी की कुरसी पर बैठ जाता है. कभी एसपी से कहता है कि ”तुम मेरे बौडीगार्ड हो.’’

यह सारा बनावटी सा दिखाई दे रहा है. अस्पताल में मनीषा राजू को सैक्स का खुला आमंत्रण देती है, जिस से कहानी में फूहड़ मानसिकता साफसाफ दिखाई दे रही है. इस की जगह पर यदि दोनों को प्रेम की बातें या पारिवारिक दृश्य दिखाया जाता तो कहानी में वास्तविकता लाई जा सकती थी.

एपिसोड नंबर 5

पांचवें एपिसोड का नाम ‘शोना डोंट बी शाई’ है. एपिसोड की शुरुआत में गोल्डी, राजू और स्वपन पर लैला हमला करने वाली होती है कि तीनों उसे पकड़ लेते हैं. वे इसे मारने वाले होते हैं कि वहां पर उन्हें पुलिस की गाड़ी का सायरन सुनाई देता है तो वे तीनों लैला को पकड़ कर अपने गुप्त अड्डे पर ले जाते हैं.

अब हम मेजदा को देखते हैं, जो रात को बैडरूम में अपनी पत्नी के साथ हमबिस्तर होता है. तभी उसे विश्वनाथ (सौरभ शर्मा) फोन पर बताता है कि रीगल बार में शूटआउट में सुलतान मारा गया है. यह काम धरमा का हो सकता है, क्योंकि वहां पर धरमा के केवल 2 आदमियों की लाश मिली है, बाकी सारे सुलतान के आदमी थे. यह सुन कर मेजदा तुरंत घर से निकल जाता है.

दूसरी तरफ लैला उन तीनों को समझाने की कोशिश करती है कि अब्बास तुम तीनों का फायदा उठा कर अपना उल्लू सीधा करना चाहता है, इसलिए उस पर विश्वास मत करो.

इस दौरान राजू और गोल्डी लैला को स्वपन के हाथों में सुपुर्द कर वहां से बाइक से चले जाते हैं. इधर स्वपन लैला के जख्मों में मरहमपट्टी करने लगता है. तब लैला स्वपन को बताती है कि उस ने सुलतान के मर्डर का वीडियो अपने मोबाइल में रिकौर्ड कर लिया था, लेकिन आते समय मेरा मोबाइल वहीं पर कहीं गिर गया.

मनीषा अपनी टीम के साथ रीगल बार के अंदर लाशों की जांच कर रही होती है, तभी स्वपन मनीषा को फोन कर के बताता है कि बार के नीचे चमकीले रंग का एक मोबाइल फोन मिलेगा तो तुम उस फोन को संभाल कर अपने पास रख लेना. मनीषा पुलिस वालों की नजर छिपा कर उस फोन को चुपके से अपनी जेब में रख लेती है.

उधर राजू और गोल्डी वापस अपने अड्डे पर आ जाते हैं तो लैला फिर से उन तीनों को समझाने का प्रयास करती है तो राजू गुस्से में आ कर लैला को एक कमरे में बंद कर देता है. फिर वे तीनों आपस में बात करने लगते हैं. स्वपन बताता है कि मैं ने घटनास्थल से मनीषा को लैला का फोन दिलवा दिया है.

अब हम उस वीडियो से, जिस में अब्बास सुलतान का मर्डर कर रहा है, वह लैला के वीडियो में रिकौर्ड है. उस वीडियो से हम अब अब्बास को ब्लैकमेल कर सकते हैं. यह सुन कर लैला कमरे से फरार हो जाती है, तीनों दोस्त लैला को ढूंढने उस का पीछा करने लगते हैं.

इधर गोल्डी, स्वपन और राजू लैला को ढूंढने 3 अलगअलग दिशाओं में चले जाते हैं. स्वपन को लगता है कि लैला शायद मनीषा के पास जा सकती है, इसलिए वह हौस्पिटल निकल जाता है. लेकिन लैला स्वपन के पहुंचने से पहले ही हौस्पिटल में जा कर मनीषा से कहती है कि मुझे स्वपन ने फोन लाने भेजा है, वे तीनों पुलिस के डर से छिपे हुए हैं.

मनीषा उस की बातों में आ कर लैला को मोबाइल दे देती है और पुलिस से बचने के लिए उसे हौस्पिटल की एक सफेद साड़ी भी पहना देती है, ताकि वह पुलिस की नजरों से बच सके.

जैसे ही स्वपन हौस्पिटल में पहुंचता है, वैसे ही उसे वहां पर एसपी इंद्रनाथ मलिक पकड़ लेता है और उस से पूछता है कि स्वपनजी, आप हमें जरा यह बताने का कष्ट करेंगे कि ऐसी गोलीबारी वाली रात में आप इस वक्त यहां अस्पताल में क्यों पधारे हैं? इस बातचीत के दौरान लैला साड़ी से अपना मुंह छिपा कर चुपचाप वहां से निकल जाती है. यहीं पर पांचवां एपिसोड समाप्त हो जाता है.

पांचवें एपिसोड में भी काफी बनावटीपन लग रहा है. जब मेजदा ने धरमा को गिरफ्तार करने का आदेश पुलिस को दिया था तो फिर पुलिस धरमा को गिरफ्तार क्यों नहीं करती? अब्बास मेजदा के सामने कह रहा है कि सुलतान ने मुझ से भाभीजान की सुरक्षा करने को कहा था और मैं भाभीजान को अपने घर पर ले आया, इस पर सुलतान की पत्नी रीता चुपचाप रहती है. इस का मतलब साफ नजर आ रहा है कि वह अब्बास के साथ मिली हुई है.

ये सभी कमियां लेखक की असफलता को साफसाफ प्रदर्शित कर रही हैं.

एपिसोड नंबर 6

इस एपिसोड का नाम रखा गया है ‘भूतिया बोरदा’. एपिसोड की शुरुआत में माला (सियोली चट्टोपाध्याय) लैला को खिला रही होती है. लैला उस समय 8-10 साल की थी. तभी बोरदा (रवि किशन) गाड़ी में कहीं जाते हैं और लैला को अपने छोटे भाई मेजदा की देखरेख में छोड़ देते हैं.

लेकिन बोरदा अपनी बेटी लैला को जिस के सुपुर्द करता है, वह शेर नहीं लोमड़ी निकलता है. अब हम दूसरी तरफ वर्तमान में लैला को सफेद साड़ी में हौस्पिटल से बाहर निकलते देखते हैं.

इधर लैला हौस्पिटल से निकल कर बाहर निकलती है तो गोल्डी और राजू उसे देख कर उस का पीछा करने लगते हैं तो वह गोल्डी की कार से टकरा कर गिर जाती है तो वे दोनों उसे पकड़ कर अपने ठिकाने पर ले जाते हैं.

अचानक वहां पर स्वपन भी पहुंच जाता है. वे तीनों अब लैला को मारने और अब्बास के हाथों में सौंपने की बात करने लगते हैं तो लैला उन पर हंसने लगती है. स्वपन लैला से पूछता है, ”आखिर तुम कौन हो और हम से क्या चाहती हो?’’

लैला उन्हें कहती है कि खून के बदले खून और जान के बदले जान. उस के बाद लैला उन तीनों को बताती है कि कैसे मेजदा ने उस के पिता बोरदा का कार एक्सीडेंट करा कर मर्डर करवा दिया था और फिर संपत्ति हड़पने के लिए मुझे मारना चाहता था.

हमारी नौकरानी माला, जिसे मैं दीदी कहती थी, वह मुझे सारिबगंज से भगा कर कोलकाता ले गई. कई दिनों तक माला दीदी मुझे इधरउधर ले कर भटकती रही, उस के बाद तुबान दा ने हमें संरक्षण दिया और उन्होंने अपने थिएटर में मुझे नृत्य की शिक्षा दी.

तुबान दा ने हमारी पहचान को भी गुप्त रखा, ताकि मेजदा के आदमी हमें पकड़ न सकें. उस के बाद लंबी बीमारी से माला दीदी चल बसीं और मैं यहां सारिबगंज में लैला बन कर मेजदा से बदला लेने पहुंच गई.

लैला बताती है कि उसी ने बोरदा का लौकेट पीपल के पेड़ में रखा था, ताकि मेजदा भयभीत हो सके. यह सब सुन कर स्वपन को एक नया आइडिया आता है और वह मुसकराने लगता है.

अब्बास डीआईजी से कहता है कि यदि तुम से कुछ नहीं हो सकता तो मुझे बताओ मैं धरमा को ठोक डालूंगा. इस पर मेजदा बुरी तरह से गुस्सा हो कर उसे कमरे से बाहर निकाल देता है. मेजदा अब डीआईजी से कहता है कि तुम सिर्फ धरमा को गिरफ्तार करने का बंदोबस्त करो, सोल्यूशन हम बताएंगे.

इंसपेक्टर प्रशांत एसपी इंद्रनाथ मलिक के पास आ कर रिपोर्ट देता है कि सर, धरमा को हम पकड़ नहीं सके. इस मुठभेड़ में हमारे 4 अधिकारी डैड और 4 घायल हो गए हैं.

एसपी मलिक उस समय अपने कमरे में स्कौच पी कर मस्त हो रहा होता है. वह प्रशांत को काफी डांटता है कि उस ने अपनी मरजी से मुठभेड़ किस के कहने पर की. वह प्रशांत को जाने के लिए कहता है. प्रशांत जब चला जाता है तो एसपी मलिक अपने कमरे के शीशे से प्रशांत को जाते हुए देखते हैं.

अब्बास वीडियो देख कर हैरान रह जाता है, क्योंकि यह वह वीडियो था, जिस में वह सुलतान को गोलियों से भून रहा था. तभी प्लान बना कर गोल्डी फोन करता है तो कलुआ अब्बास से बात कहता है कि बोरदा आप से बात करना चाहते हैं. अब्बास फोन उठा कर कहता है, ”हमारे सिर पर बंदूक रख कर धंधे की बात कर रहे हो आप बोरदा.’’

उधर गोल्डी बोरदा की आवाज में कहता है, ”देखो अब्बास, ध्यान से सुनो. सुलतान को तो तुम ने मरवा दिया और धरमा अब बाहुबली रहा नहीं. ऐसे में मेजदा अब सारिबगंज के नए बाहुबली के रूप में तुम्हारा ही तिलक करेगा, लेकिन तुम्हारा अभिषेक तब होगा जब तुम्हें बर्मन परिवार का खजाना दिखाया जाएगा. वह खजाना अलाउद्ïदीन के खजाने से कम नहीं है.’’

अब्बास पूछता है, ”बोरदा, आप हम से आखिर क्या चाहते हैं?’’

बोरदा के रूप में गोल्डी कहता है, ”दोस्ती. वह भी एक शर्त पर, काम बहुत सरल है. हम मेजदा को राजा से कंगाल बनाना चाहते हैं और यह काम हमारे लिए तुम करोगे और इस के बदले में खजाने का आधा हिस्सा तुम्हारा.’’

यह सुन कर अब्बास खुश हो जाता है और यहां पर छठा एपिसोड समाप्त हो जाता है.

छठे एपिसोड में कहानी काफी भटकी हुई दिखाई दे रही है. मेजदा सुलतान से कहता है कि मैं ने तुम्हारे यहां से भेजने की व्यवस्था कर दी है. उस के बाद सुलतान के ऊपर घातक हमला हो जाता है और फिर सुलतान का मर्डर हो जाता है.

धरमा एसपी मलिक के साथ शराब पीते हुए दिखाया गया है. ये सब क्या और कैसे हो गया, इस का किसी को पता ही नहीं चलता. उस के बाद अब्बास जैसे शातिर गैंगस्टर को 3 मसखरे अपने जाल में बोरदा बन कर फंसा लेते हैं. यह कहानी बिलकुल भी हजम नहीं हो पा रही है.

एपिसोड नंबर 7

सातवें एपिसोड का नाम ‘सारिबगंज के सूरमा’ रखा गया है. एपिसोड की शुरुआत में अब्बास हलुआ की गरदन पकड़ कर बोरदा का सच उगलवाता है तो हलुआ बताता है कि लैला जिंदा है उस ने उसे देखा है, शायद उसी ने यह वीडियो बोरदा को दिया होगा.

स्वपन अपने घर पहुंचता है तो वहां पर उसे अपनी मां के साथ अब्बास मिलता है. अब्बास स्वपन को धमकी देता है कि मैं तुम्हें एक दिन का वक्त दे रहा हूं, यदि कल सुबह तक धरमा अरेस्ट नहीं हुआ तो तुम्हारी मां तुम्हें जिंदा नहीं देख पाएगी.

स्वपन अब सीधे गैराज में जा कर गोल्डी, लैला और राजू से अब्बास की धमकी की बात बताता है. वे चारों आपस में लडऩे लगते हैं, तभी उन्हें धरमा का फोन आता है. धरमा कहता है कि तुम ने तो नुरुल की लाश ही गायब कर डाली. हम तुम्हें एक दिन का टाइम देते हैं, तुम या तो नुरुल को वापस ले आओ या किसी चमत्कार से उसे जिंदा कर दो, वरना हम तुम सभी का तुम्हारे परिवार के साथ सफाया कर देंगे.

तभी वहां पर एसपी मलिक धरमा से कहता है, ”तुम पंगे मत लो, घर के अंदर ही रहो.’’

अब गोल्डी, उस के दोस्त और लैला मिल कर एक नया प्लान बनाते हैं. स्वपन हूबहू बोरदा की हैंडराइटिंग में एक चिट्ठी मेजदा के लिए लिखता है, जिसे हलुआ के माध्यम से मेजदा के घर में उस की टेबल के ऊपर रखवा दी जाती है. मेजदा जब यह लेटर पढ़ता है तो बुरी तरह से डर जाता है.

मेजदा उसे कहता है, ”अब्बास आज से भंडारे की जिम्मेदारी तेरी.’’ और उसे भंडारे की चाबी सौंप देता है.

अब अब्बास अपने साथियों के पास खुशियां मना रहा होता है. हलुआ उस से कहता है कि बोरदा के पास अभी भी वह वीडियो है, जिस में आप ने सुलतान को मारा था.

अब्बास कहता है, ”जैसे हम ने सुलतान और धरमा को निपटाया है, वैसे ही बोरदा को लेनदेन के बहाने बुला कर निपटा देंगे.’’

तभी एक पुलिसवाला एसपी मलिक को जानकारी देता है कि अब ये लड़के अब्बास के अड्डे पर पहुंच चुके हैं. गैराज से लैला और मनीषा निकल चुके हैं, अब क्या हुकूम है?

तो मलिक उसे लड़कों के पीछे जाने और फालोअप करने को कहता है.

एक पेड़ की डाली पर अब्बास ने हलुआ को लटका रखा था. हलुआ भी कहता है कि भैया, ये सच बोल रहे हैं, इन का बोरदा से कोई लेनादेना नहीं है. असल में बोरदा ने मेरे सिर पर बंदूक रख कर मुझे धमकी दी थी कि वह मुझे और मेरे पूरे परिवार को मार डालेगा. हम डर गए और मैं ने वह चिट्ठी डर के कारण मेजदा के घर पर रखी थी.

अब तक वहां पर गोल्डी और गोल्डी के पीछे पुलिस की टीम भी पहुंच जाती है. अब्बास गुस्से से चीखते हुए कहता है, ”अचानक 15 साल बाद बोरदा वापस आ गए. अच्छा, हम अब तुम्हारे पिछवाड़े में गोली मारते हैं. बुलाओ, अपने बोरदा को.’’ यह कह कर वह हलुआ को गोली मार देता है.

इधर गोल्डी भी अब्बास और उस के साथियों पर गोलीबारी कर देता है. इधर स्वपन को भी गोली लग जाती है. तभी पुलिस का आदमी एसपी को फोन कर के कहता है, ”सर ये तीनों लड़के यहां से निकल रहे हैं.’’

”तुम भी अब वहां से निकलो.’’ एसपी मलिक उस से कहता है.

”पर सर अब्बास और उस के साथियों ने हमारे सामने एक आदमी को मार डाला.’’

एसपी मलिक उसे डांटते हुए कहते हैं, ”सम्राट, अब्बास हमारे लिए प्रायोरिटी नहीं है. सम्राट, तुम तुरंत निकलो यह मेरा और्डर है. यह हमारा सीक्रेट मिशन है.’’

अब हम धरमा को देखते हैं जो अपने साथियों से कहता है, ”मेजदा के पीछे बोरदा के आने से ज्वालामुखी फूट रहा है, इसलिए अब धरमा को बुला रहा है. पर इस से पहले यह पता लगाओ कि नुरुल को किस ने मारा और हमें सुलतान के केस में किस ने फंसाया.’’

एसपी मलिक भी वहां पर होता है. तभी वहां पर गोल्डी धरमा के सामने आ कर कहता है, ”हुजूर, आप को हम ने फंसाया.’’

इसी के साथ सातवां एपिसोड समाप्त हो जाता है.

इस एपिसोड में काफी जल्दबाजी दिखाई गई है. यह पता ही नहीं चल पाता कि कौन किस का साथ दे रहा है. कहानी को समाप्ति की दिशा में ले जाने की जल्दबाजी में स्क्रीनप्ले इतनी तेज भागता है कि दर्शक किरदारों के इमोशंस से जुड़ ही नहीं पाते. सातवां एपिसोड सचमुच दर्शकों को काफी निराश करता है.

एपिसोड नंबर 8

आठवें एपिसोड का नाम ‘इकिर मिकिर छम छिकिर’ रखा गया है. एपिसोड की शुरुआत में हम देखते हैं कि धरमा इंसपेक्टर प्रशांत के घर आया है. उस के बाद हम मेजदा को देखते हैं जो विश्वनाथ के साथ राजू के पिता परिमल (यशवंत वासनिक) के सिर पर पिस्टल रख कर पूछता है कि सचसच बता कि बोरदा जिंदा है या मर गया?

तभी राजू आ जाता है और वहां पर भीड़ जमा हो जाती है. मेजदा को अब मजबूरन वहां से जाना पड़ता है. तब हमें पता चलता है कि परिमल गूंगा और अपाहिज नहीं है, बल्कि वह मेजदा के डर से यह नाटक कर रहा था.

तभी हम देखते हैं कि वहां अब्बास की टीम के सामने धरमा अपने साथियों के साथ आ जाता है. धरमा कहता है कि यह आस्तीन का सांप है. सुलतान ने इसे सड़क से उठा कर सिर पर बैठाया, मगर इस ने तो उसी को डंस लिया.

तब स्वपन आ कर सच बताता है कि अब्बास ने हम तीनों दोस्तों को मेजदा का भंडारा लूटने को कहा था, तब मैं ने यह बात सरला मामी को बताई और उन्होंने मेजदा को यह बात बताई. इस के बाद मेजदा ने अपनी तिजोरी खाली कर के पूरा पैसा और सोनाचांदी ट्रेन से अपने कोलकाता के गोदाम में भिजवा दिया.

अब वहां पर धरमा, अब्बास और मेजदा के लोग आपस में लडऩे लगते हैं, तभी एसपी मलिक उन को घेरते हैं और पूरी पुलिस टीम सभी को घेर लेती है. मेजदा एसपी मलिक से कहता है, ”एसपी तुम यहां कैसे?’’

तब राजू बताता है, ”मैं ने ही आज सुबह जा कर एसपी साहब को बताया कि कैसे सुबहसुबह मेजदा मेरे अपाहिज बाप को मारने आया था. मेरी रिपोर्ट दर्ज करने के लिए फिर वहां पर सांसद उमानाथ आए. फिर रिपोर्ट दर्ज की गई और मेरे परिवार को सुरक्षा दे कर सारिबगंज से बाहर भेजा गया.’’

वह आगे बताता है, ”वहां पर धरमा इंसपेक्टर प्रशांत के हाथ बांध कर लाया था, क्योंकि मेजदा ने प्रशांत को धरमा को मारने की सुपारी दी थी.’’

एसपी मलिक सब से पहले प्रशांत को छुड़ाता है. अब वहां सब आपस में लडऩे लगते हैं. प्रशांत धरमा को जान से मार डालता है.

उधर दूसरी ओर लैला और उस के साथी ट्रेन में मेजदा के आदमियों को मार कर पूरा खजाना लूट लेते हैं. इधर एसपी मलिक सभी को जंगल में रुक जाने को कह कर आ जाता है. सारी पुलिस फोर्स मेजदा और अब्बास व उन के आदमियों को चारों तरफ से घेर लेती है.

एसपी मलिक कहता है, ”मेजदा साहब, देखा, सारिबगंज में बनाया गया आप का ला ऐंड और्डर अब मेरी समझ में आ गया है. रिटायरमेंट से कुछ दिन पहले यदि मैं सारिबगंज में रहना चाहता हूं तो बंदूक के साथ समझौता करना पड़ेगा और यह समझौता और भी आसान हो सकता है, जब मैं खुद ही बंदूक बन जाऊं.’’

तभी वहां पर धोतीचप्पल पहने एक शख्स की एंट्री होती है.

बोरदा धीरेधीरे चल कर उन सब के पास आता है. अब्बास कहता है, ”खुदा का लाखलाख शुक्र है कि बोरदा आप जिंदा हैं.’’

बोरदा पूछता है, ”तुम कौन हो बेटा?’’

अब्बास अपना नाम ले कर कहता है, ”बोरदा, आप से मेरी फोन पर बात हुई थी.’’

”तुझे गलतफहमी हुई है, हम आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल न करते.’’ यह कहते हुए बोरदा हंसिए से अब्बास की गरदन काट देता है.

अब बोरदा अपने छोटे भाई मेजदा के पास आता है, उसे गले लगाता है तो मेजदा कहता है कांपते हुए कहता है, ”अब सारिबगंज में शांति स्थापित हो जाएगी.’’

बोरदा अब धरमा के पास आ कर कहता है, ”क्यों विश्वासघात किया, क्यों मारने की कोशिश की हमें तूने?’’ उस के बाद धरमा की गरदन काट कर उस के शरीर के टुकड़ेटुकड़े कर देता है.

तभी उस की नजर गोल्डी, स्वपन और राजू पर पड़ती है तो एसपी मलिक बताता है कि आप के भाई मेजदा की छत्रछाया में सारिबगंज में इन के क्राइम का आगाज हुआ है अभीअभी, लेकिन फिलहाल ये तीनों अपना जुर्म कुबूल कर सरकारी गवाह बनना चाहते हैं.’’

उस के बाद बोरदा यह खेल मेजदा के साथ खेलने लगता है ‘इकिर, मिकिर छम छिकिर बचपन चामेर काटा’ और यह कहतेकहते वह मेजदा को मार डालता है. यहां पर वेब सीरीज ‘क्लीन अप कंपनी’ समाप्त हो जाती है.

आठवें एपिसोड में इतने सारे कैरेक्टर्स के सबप्लौट्स को समेटने के कारण कहानी काफी बिखर गई है. दर्शक समझ ही नहीं पाता कि यहां पर क्या हुआ, क्या हो रहा है और अब क्या होने वाला है.

बोरदा के बारे में भी यह क्लियर नहीं होता कि वह भूत है या एक जिंदा इंसान. लैला कहां गई, अंत में उस का बोरदा से मिलन न हो पाना भी कहानी का एक बड़ा कमजोर पक्ष है.

यदि पूरी वेब सीरीज की बात करें तो एक नया आइडिया होने के बावजूद लेखक और निर्देशक इसे सही ढंग से प्रस्तुत करने में असफल रहे हैं. कहानी में इतने सारे क्राइम ट्रैक डाल दिए गए हैं कि मुख्य विषय ही भटक गया है.

रवि किशन

रवींद्र किशन शुक्ला, जिन्हें रवि किशन के नाम से जाना जाता है. एक अभिनेता, राजनीतिज्ञ, फिल्म निर्माता और टीवी के जानेमाने कलाकार के रूप में जाना जाता है. रवि किशन का जन्म 17 जुलाई, 1969 को मुंबई की एक बेहद छोटी 10&12 फीट की चाल में एक साधारण ब्राह्मण परिवार में हुआ था.

इस के पिता का नाम पंडित श्यामा नारायण शुक्ला और मम्मी का नाम जड़ावती देवी है. श्यामा नारायण शुक्ला एक मंदिर में पुजारी थे. रवि किशन 5 भाईबहनों में सब से छोटा है. उस ने मुंबई के बांद्रा पश्चिम स्थित रिजवी कौलेज से 12वीं तक की पढ़ाई की, बाद में उन का परिवार उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के अपने पैतृक गांव बिसुई लौट आया था.

बचपन से ही रवि किशन को अभिनय और रामलीला में भाग लेने का बहुत शौक था. वह रामलीला में अकसर सीता का रोल निभाना पसंद करता था, जो उन के पिता को बिलकुल भी पसंद नहीं था और इस के लिए उसे अपने पिता से कई बार मार भी खानी पड़ जाती थी.

लेकिन उस की मां बेटे की प्रतिभा का सम्मान करती थी, इसलिए मां ने उसे 500 दे कर मुंबई अपने सपनों को पूरा करने के लिए भेज दिया. मुंबई में अपने स्ट्रगल के शुरुआती दिनों में पैसों की तंगी के कारण उस ने वड़ापाव खा कर अपने दिन गुजारने पड़े थे.

रवि किशन ने अपने फिल्मी करिअर की शुरुआत 1992 में फिल्म ‘पीतांबर’ से की थी. इस के बाद उस ने कई फिल्मों में छोटेबड़े रोल भी किए. उसे असली पहचान साल 2003 में आई सलमान खान की ब्लौकबस्टर फिल्म ‘तेरे नाम’ से मिली, जिस में उस ने रामेश्वर पुजारी का रोल निभाया था.

हिंदी फिल्मों के बाद रवि किशन ने भोजपुरी सिनेमा का रुख किया और फिर वहां का सुपरस्टार बन कर अपनी पहचान बनाई. उस की भोजपुरी फिल्म ‘पंडितजी बताईं ना बियाह कब होई’ और ‘देवरा बड़ा सतावेला’ जैसी सैकड़ों सुपरहिट फिल्में दीं.

रवि किशन ने सिर्फ उत्तर भारत में ही नहीं, बल्कि साउथ की तेलुगु फिल्मों में भी अपने अभिनय का लोहा मनवाया है. रवि किशन ने ‘रेस गुर्रम’ जैसी फिल्म में मुख्य विलेन की शानदार भूमिका निभाई, जिसे दर्शकों द्वारा बहुत पसंद किया गया.

वर्तमान में भी रवि किशन ने ओटीटी प्लेटफार्म पर ‘मामला लीगल है’, ‘खाकी: द बिहार चैप्टर’ और बौलीवुड फिल्म ‘लापता लेडीज’ में पुलिस इंसपेक्टर श्याम मनोहर के अपने विशिष्ट किरदार से एक बार फिर दर्शकों का दिल जीत लिया है.

रवि किशन ने अपने राजनीतिक करिअर की शुरुआत वर्ष 2014 में कांग्रेस पार्टी के टिकट पर जौनपुर से चुनाव लड़ कर की थी, लेकिन इस चुनाव में उसे बुरी तरह से हार मिली. इस के बाद रवि किशन साल 2017 में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल हो गया. वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने उसे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गढ़ गोरखपुर से चुनाव मैदान में उतारा, जहां पर उस ने भारी वोटों से जीत हासिल की.

साल 2024 के लोकसभा चुनाव में भी रवि किशन को दोबारा गोरखपुर से सांसद चुना गया.

रवि किशन ने 10 दिसंबर 1993 को अपनी बचपन की दोस्त प्रीति शुक्ला से विवाह किया. दोनों के 4 बच्चे हैं—3 बेटियां (रीवा, तनिष्क, इशिता) और एक बेटा (सक्षम). बेटी रीवा किशन ने वर्ष 2020 में फिल्म ‘सब कुशल मंगल’ से बौलीवुड में डेब्यू किया था, वहीं दूसरी बेटी इशिता शुक्ला एनसीसी के जरिए भारतीय सेना में नौकरी कर रही है.

तुहीना दास

भारतीय बंगाली मौडल और अभिनेत्री तुहीना दास का जन्म 11 मार्च, 1992 को कोंटाई, पश्चिम बंगाल में हुआ था. तुहीना कोंटाई के ही एक स्थानीय स्कूल में पढ़ी थी.

तुहीना पढ़ाई में बहुत ज्यादा होशियार या अव्वल नहीं थी, लेकिन वह कभी पीछे रहने वाली बैकबेंचर छात्रा भी नहीं रही. वह हमेशा उतना ही पढ़ती थी, जिस से वह परीक्षा में अच्छे नंबर ला सके.

स्कूल के दिनों से ही तुहीना के जीवन पर सिनेमा का बहुत गहरा प्रभाव था, वह इसलिए कि उन की मां को फिल्में देखने का बहुत शौक था. स्कूल की पढ़ाई के दौरान ही तुहीना के भीतर कला और अभिनय को ले कर समझ विकसित होने लगी थी.

इसलिए वह आगे की पढ़ाई के लिए कोलकाता आ गई, जहां उस ने फैशन डिजाइनिंग और कला का कोर्स किया. कोलकाता आने के बाद तुहीना थिएटर ग्रुप्स से जुड़ी और फिर उस के प्रोफेशनल ऐक्टिंग करिअर की शुरुआत हुई.

तुहीना दास ने अपने फिल्मी करिअर की शुरुआत वर्ष 2018 में बंगाली थ्रिलर फिल्म ‘आशे अबर शबोर’ से की थी. इस के बाद उस ने ‘सिन सिस्टर’ जैसी प्रख्यात फिल्म में भी काम कर अपने अभिनय की छाप छोड़ी.

तुहीना को सिनेमा जगत में असली पहचान दिग्गज निर्देशिका अपर्णा सेन की फिल्म ‘घरे बैरे आज’ से मिली. इस फिल्म में बिमला के विशिष्ट किरदार को निभाने के लिए उसे पश्चिम बंगाल फिल्म पत्रकार संघ का सब से होनहार अभिनेत्री का पुरस्कार दिया गया.

इस फिल्म में उस ने जिशु सेनगुप्ता और अनिर्बन भट्टाचार्य जैसे बड़े कलाकारों के साथ काम किया था.

तुहीना दास ‘सिन सिस्टर’, ‘अभिजान’ और ‘अपराजिता’ जैसी प्रख्यात फिल्मों में भी काम कर चुकी है. तुहीना दास कई लोकप्रिय वेब सीरीज में भी काम कर चुकी है. होइचोई प्लेटफौर्म की एक जासूसी सीरीज में उस ने मुख्य किरदार ‘दमयंती’ (महिला जासूस) की भूमिका निभाई, जिसे दर्शकों ने काफी पसंद किया.

इस के अलावा ‘द रियूनियन’, ‘ब्रेकअप स्टोरी’ और हालिया वेब सीरीज ‘छल कपात’ व ‘लाइला’ में भी वह काम कर चुकी है. तुहीना दास अभी अविवाहित है. अभिनय के अलावा तुहीना दास को यात्रा करना और नईनई जगहों पर जाना पसंद है. Web Series Review

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