True Crime Story.दामोदर शीतल के प्यार में इस कदर पागल हो गया था कि उसे पत्नी और बच्चे बोझ लगने लगे थे. इस बोझ को उस ने हलका तो किया लेकिन उस के हाथ लगा कुछ नहीं.
एटा-कासगंज रोड पर स्थित है एक गांव असरौली, जो कोतवाली (देहात) क्षेत्र के अंतर्गत आता है. इसी गांव के रहने वाले चोखेलाल के परिवार में पत्नी पार्वती के अलावा 3 बेटियां सावित्री, बिमला, मोहरश्री तथा 2 बेटे सत्यप्रकाश और चंद्रपाल थे. सत्यप्रकाश खेतीकिसानी में बाप की मदद करता था तो चंद्रपाल सड़क पर खोखा रख कर अंडे बेचता था.
चोखेलाल की गुजरबसर आराम से हो रही थी. उन्होंने सभी बच्चों की शादियां भी कर दी थीं. सभी अपनेअपने परिवार के साथ खुश थे. उन की छोटी बेटी मोहरश्री का विवाह कासगंज के कस्बा नदरई में प्रकाश के साथ हुआ था.
सब से छोटी होने की वजह से मोहरश्री मांबाप की ही नहीं, भाईबहनों की भी लाडली थी. शादी के लगभग डेढ़ साल बाद वह एक बेटे की मां बन गई. यह खुशी की बात थी, लेकिन बेटा पैदा होने के कुछ दिनों बाद ही उस के पति प्रकाश का दिमागी संतुलन बिगड़ गया और एक दिन वह घर से गायब हो गया. घर वालों ने उसे बहुत ढूंढ़ा, लेकिन उस का कुछ पता नहीं चला.
पति के गायब होते ही ससुराल में मोहरश्री की स्थिति गंभीर हो गई. ससुराल वालों का मानना था कि उसी की वजह से प्रकाश गायब हुआ है, इसलिए उसे दोषी मान कर सभी उसे परेशान करने लगे. चंद्रपाल मोहरश्री से मिलने उस की ससुराल गया तो उसे लगा कि बहन यहां खुश नहीं है. वह उसे अपने यहां लिवा लाया.
घर आ कर मोहरश्री ने जब मांबाप और भाइयों से ससुराल वालों के बदले व्यवहार के बारे में बताया तो सभी ने तय किया कि अब उसे ससुराल नहीं भेजा जाएगा. लेकिन ससुराल वालों ने खुद ही मोहरश्री की सुधि नहीं ली. अब घर वालों को उस की चिंता सताने लगी, क्योंकि अभी उस की उम्र कोई ज्यादा नहीं थी.
अकेली जवान औरत के लिए जीवन काटना बहुत मुश्किल होता है. अगर कोई ऊंचनीच हो जाए तो सभी उन्हीं को दोष देते हैं, इसलिए पिता और भाइयों ने तय किया कि वे मोहरश्री की शादी कहीं और कर देंगे.
मोहरश्री को जब पता चला कि घर वाले उस की दूसरी शादी करना चाहते हैं तो उस ने कहा, ‘‘आप लोगों को मेरे लिए परेशान होने की जरूरत नहीं है. मैं अपने बेटे के सहारे जी लूंगी. सभी के साथ मेहनतमजदूरी कर के जिंदगी बीत जाएगा.’’
लेकिन पिता और भाई उस की इस बात से सहमत नहीं थे. वे किसी भी तरह मोहरश्री का घर बसाना चाहते थे. वह बहुत ही सीधीसादी थी. उस के स्वभाव की वजह से गांव का हर आदमी उस की मदद और सम्मान करता था. यही वजह थी कि इस परेशानी में भी वह खुश थी.
चोखेलाल की बड़ी बेटी सावित्री एटा में ब्याही थी. मायके आने पर जब उसे पता चला कि घर वाले मोहरश्री का पुन: विवाह करना चाहते हैं तो उस ने बताया कि उस के पड़ोस में रहने वाली रानी का भाई दामोदर शादी लायक है. अगर सभी लोग तैयार हों तो वह बात चलाए.
मोहरश्री की शादी में उस के पहले पति का बेटा कृष्णा बाधा बन रहा था. घर वाले चाहते थे कि वह बेटे को मायके में छोड़ दे, लेकिन मोहरश्री इस के लिए तैयार नहीं थी. उस का कहना था कि वह उसी आदमी से शादी करेगी, जो उस के बेटे को अपनाएगा. सावित्री ने बताया कि दामोदर मोहरश्री के बेटे को अपना सकता है, इसलिए सभी को उस के फोन का इंतजार था.
सावित्री ने फोन कर के बताया कि दामोदर अपनी बहन रानी के साथ सावित्री को देखने आ रहा है तो घर वालों ने तैयारी शुरू कर दी. देखासुनी के बाद मोहरश्री और दामोदर की शादी इस शर्त पर हो गई कि वह मोहरश्री के पहले पति के बेटे कृष्णा को अपना नाम देगा.
दामोदर जिला फर्रुखाबाद के थाना पाटियाली के गांव शाहपुर का रहने वाला था. उस की 2 बहनें और 2 भाई थे. दोनों भाई पंजाब में नौकरी करते थे. शादी के बाद मोहरश्री बेटे के साथ शाहपुर आ गई.
ससुराल आने पर पता चला कि दामोदर की कमाई से घर नहीं चल सकता. इसलिए उस ने दामोदर को अपने मायके असरौली चलने को कहा.
दामोदर असरौली जाने को राजी नहीं हुआ तो मोहरश्री ने फोन द्वारा सारे हालात अपने भाई चंद्रपाल को बताए तो वह खुद शाहपुर पहुंचा और सभी को असरौली ले आया. इस तरह लगभग 10 साल पहले दामोदर परिवार के साथ ससुराल आ गया था.
ससुराल आ कर वह पूरी तरह से निश्चिंत हो गया. चंद्रपाल ने भागदौड़ कर के उसे एटा रोड पर स्थित आलोक की फैक्ट्री में चौकीदारी की नौकरी दिला दी. फैक्ट्री में उसे रहने के लिए कमरा भी मिल गया था. इस तरह एक बार फिर मोहरश्री की जिंदगी ढर्रे पर आ गई.
समय के साथ मोहरश्री दामोदर के 3 बच्चों अजय, सुमित और प्रेमपाल की मां बनी. शुरूशुरू में तो दामोदर का व्यवहार कृष्णा के प्रति ठीक रहा, लेकिन जब उस के अपने 3-3 बेटे हो गए तो उस का व्यवहार एकदम से बदल गया. अब वह बातबात में कृष्णा से मारपीट करने लगा.
मोहरश्री को यह बिलकुल अच्छा नहीं लगता था. उस ने देखा कि दामोदर बच्चों में भेदभाव कर रहा है तो उस ने उसे टोका. लेकिन दामोदर पर इस का कोई असर नहीं पड़ा. कृष्णा के प्रति उस की हिंसा बढ़ती ही जा रही थी.
मोहरश्री ने दामोदर से शादी जीवन को सुखी बनाने के लिए की थी. लेकिन दामोदर तनाव पैदा करने लगा था. परिवार बढ़ा तो घर में आर्थिक तंगी रहने लगी. बहन की परेशानी देख कर चंद्रपाल ने एक खेत पट्टे पर ले कर बहन को दे दिया. मोहरश्री मेहनत कर के खेत की कमाई से बच्चों को पालने लगी. उस ने बेटों को समझाया कि वे अपनी जिंदगी संवारना चाहते हैं तो मेहनत कर के पढ़ें.
दामोदर न तो अच्छा पति साबित हुआ और न अच्छा बाप. इसलिए मोहरश्री को उस से कोई उम्मीद नहीं थी. उस ने चौकीदारी वाली नौकरी भी छोड़ दी थी. अपना खर्च चलाने के लिए वह खेतों में चोरी से शराब बना कर बेचने लगा था.
जब इस बात का पता मोहरश्री को चला तो वह बहुत नाराज हुई. लेकिन दामोदर पर इस का कोई असर नहीं हुआ.
बगल के गांव नगला गोकुल के रहने वाले ओमप्रकाश का खेत मोहरश्री के खेत से लगा था. ओमप्रकाश भी पत्नी गुड्डी के साथ अपने खेत पर काम करता था. उस की बेटी शीतल भी मांबाप की मदद करने खेत पर आती थी. मोहरश्री ने गौर किया कि जब तक शीतल खेत में रहती है, दामोदर उस के आसपास ही मंडराता रहता है. वह अपना काम करने के बजाय ओमप्रकाश की मदद में लगा रहता है.
उसी बीच कहीं से मोहरश्री को पता चला कि दामोदर ओमप्रकाश को मुफ्त में शराब पिलाता है तो ओमप्रकाश उसे मुफ्त खाना खिलाता है. उसे लगा कि इस के पीछे भी शीतल का ही आकर्षण है. प्रकाश के गायब होने के बाद बड़ी मुश्किल से मोहरश्री ने घरपरिवार संभाला था. अगर इस बार कुछ हुआ तो दोबारा संभालने में बहुत मुश्किल हो जाएगा. इसी चिंता में वह बेचैन रहने लगी थी.
शीतल के आकर्षण में बंधे दामोदर को अब उस के अलावा कुछ और दिखाई नहीं देता था. वह यह भी भूल गया था कि वह शादीशुदा ही नहीं, 4 बच्चों का बाप भी है. सारे कामकाज छोड़ कर वह इसी फिराक में लगा रहता था कि कैसे शीतल के नजदीक पहुंचे. अब दोपहर में उस के लिए खाना आता तो वह अपना खाना ले कर ओमप्रकाश के पास पहुंच जाता. इस के बाद दोनों शराब पीते और एकसाथ खाना खाते.
ऐसे ही समय में अपनी लच्छेदार बातों से दामोदर शीतल को आकर्षित करने की कोशिश करता. वह इस कोशिश में लगा रहता कि अगर शीतल एकांत में मिल जाए वह उस से दिल की बात कह देगा.
दूसरी ओर शीतल भी अब उस के मन की बात से अनजान नहीं रह गई थी. इसलिए वह भी उसे देखती तो मुसकरा देती. दामोदर मौका ढूंढ़ ही रहा था. आखिर उसे मौका मिल ही गया. उस दिन शीतल मां के साथ खेत पर आई तो मां खेत में काम करने लगी. जबकि शीतल ट्यूबवैल के कमरे में बैठ गई. उसी बीच दामोदर वहां पहुंच गया.
हालचाल पूछ कर दामोदर शीतल से दिल की बात कहने ही जा रहा था कि मोहरश्री वहां आ गई. दामोदर को शीतल के पास देख कर उस ने कहा, ‘‘मैं तुम्हें वहां ढूंढ़ रही हूं, तुम यहां शीतल के पास बैठे क्या कर रहे हो?’’
‘‘मैं यहां पानी पीने आया था. मुझे क्या पता कि यहां शीतल बैठी है.’’
दामोदर ने सफाई तो दे दी, लेकिन मोहरश्री ने जो सुन रखा था, दोनों को इस तरह देख कर उसे बल मिला. लगा कि जो कानाफूसी हो रही है, उस में दम है. मोहरश्री ने दामोदर को समझाने की कोशिश तो की, लेकिन उस की समझ में कहां से आता. वह तो शीतल के पीछे पागल हो चुका था. इसलिए दिल की बात न कह पाने की वजह से वह मोहरश्री पर खीझ उठा था. यही वजह थी, अपना पलड़ा भारी बनाए रखने के लिए उस ने मोहरश्री को 2-4 तमाचे जड़ कर कहा, ‘‘तुम अपनी औकात में रहो, तभी ठीक है.’’
दामोदर मौके की तलाश में लगा ही था. आखिर एक दिन उसे मौका मिल ही गया. ओमप्रकाश पत्नी गुड्डी के साथ पड़ोस के गांव में किसी के यहां गया हुआ था. ओमप्रकाश के बाहर जाने वाली बात उसे पता थी, इसलिए उसे समय भी पता था. वह नगला गोकुल स्थित ओमप्रकाश के घर पहुंच गया. दरवाजा खटखटाया तो शीतल ने दरवाजा खोला. वह उसे देख कर बोली, ‘‘मम्मीपापा तो बाहर गए हैं.’’
‘‘मैं मम्मीपापा से नहीं, तुम से मिलने आया हूं.’’ दामोदर ने कहा तो शीतल का दिल धड़क उठा. वह कुछ कहती, उस के पहले ही दामोदर अंदर आ गया. घर में शीतल बिलकुल अकेली थी. उस ने शीतल का हाथ पकड़ कर कहा, ‘‘शीतल मैं तुम से प्यार करने लगा हूं. रातदिन सिर्फ तुम्हारे बारे में ही सोचता रहता हूं. लगता है, अब मैं तुम्हारे बिना नहीं जी सकता.’’
‘‘मुझे यह पहले से ही मालूम है. तुम्हारे मन में मेरे लिए क्या है, यह मैं ने तुम्हारी नजरों से जान लिया था.’’ शीतल ने नजरें नीची कर के कहा.
शीतल का इतना कहना था कि दामोदर ने खींच कर उसे बांहों में भर लिया. इस के बाद वही हुआ, जिस के लिए दामोदर न जाने कब से परेशान था. उस दिन के बाद जब भी मौका मिलता, दोनों एक हो जाते. दामोदर अब पत्नीबच्चों की ओर से पूरी तरह लापरवाह हो गया. वह अपनी सारी कमाई शीतल पर लुटाने लगा.
ओमप्रकाश और गुड्डी को दामोदर और शीतल के मिलनेजुलने में जरा भी ऐतराज नहीं था. दामोदर ओमप्रकाश को मुफ्त में शराब पिलाता ही था, जरूरत पड़ने पर गुड्डी को पैसे भी दिया करता था.
दामोदर की हरकतें मोहरश्री को बेचैन करने लगी थीं. लोग उस से कहते थे कि दामोदर को समझाती क्यों नहीं. वह पति को समझाना तो चाहती थी, लेकिन अब वह इतना आक्रामक हो गया था कि जरा भी बोलने पर मारपीट पर उतारू हो जाता था. उस की बातों और हरकतों से यही लगता था कि उसे पत्नी और बच्चे उसे बोझ लगने लगे हैं.
घर के जो हालात थे, उस से मोहरश्री परेशान रहने लगी थी. बच्चे भी सहमेसहमे रहते थे. गांव वालों से मोहरश्री की परेशानी छिपी नहीं थी, लेकिन मोहरश्री ने कभी किसी से कुछ नहीं कहा. वह बच्चों से जरूर कहती थी कि अगर उन्हें अपनी जिंदगी बनानी है तो मेहनत से पढ़ो.
मोहरश्री दामोदर को रास्ते पर लाने की कोशिश कर रही थी, जबकि दामोदर उस से पिंड छुड़ाने के बारे में सोच रहा था. अब वह शीतल के साथ अपनी गृहस्थी बसाना चाहता था. लेकिन दामोदर के लिए यह इतना आासन भी नहीं था. क्योंकि वह अपने सालों से बहुत डरता था.
दूसरी ओर मोहरश्री ने कभी अपने भाइयों से दामोदर की कोई बात नहीं बताई थी. इस के बावजूद चंद्रपाल को गांव वालों से दामोदर की हरकतों का पता चल गया था. उस ने एक दिन दामोदर को घर पर बुला कर पूछा, ‘‘पता चला है कि आजकल तुम कुछ ज्यादा ही उड़ने लगे हो?’’
साले की इस बात पर दामोदर का चेहरा सफेद पड़ गया. उस ने हकलाते हुए कहा, ‘‘भाईसाहब, ऐसी कोई बात नहीं है.’’
चंद्रपाल ने दामोदर को धमकाते हुए कहा, ‘‘एक बात याद रखना, मैं किसी भी कीमत पर यह बरदाश्त नहीं करूंगा कि तुम मेरी बहन या उस के बच्चों को परेशान करो. अगर तुम अपनी हरकतों से बाज नहीं आए तो अंजाम अच्छा नहीं होगा.’’
दामोदर खामोशी से चंद्रपाल की बातें सुनता रहा. उसे लगा कि मोहरश्री ने ही चंद्रपाल से उस की शिकायत की है. इसलिए वह घर लौटा तो शराब के नशे में धुत था. मोहरश्री खाना बना रही थी. आते ही वह मोहरश्री को गालियां देने लगा. उस ने कहा, ‘‘मेरे मन में जो आएगा, मैं वही करूंगा. कोई मेरा कुछ नहीं कर सकता. एक बात और सुन, मैं शीतल से प्यार करता हूं और अब उस से शादी भी करूंगा. जा कर कह दे अपने भाइयों से.’’
दामोदर की बातों से मोहरश्री सन्न रह गई. उस ने बच्चों को तो खाना खिला दिया, लेकिन खुद नहीं खा सकी. उस रात उसे नींद भी नहीं आई. उसे इस बात की चिंता थी कि अगर दामोदर ने सच में शीतल से शादी कर ली तो वह क्या करेगी.
उसे लगा कि अगर वह शीतल की मां से बात करे तो शायद कोई हल निकल आए. लेकिन हल निकालने की कौन कहे, गुड्डी उलटा उस पर बरस पड़ी, ‘‘शीतल तो अभी बच्ची है, उसे क्या समझ. तू ही दामोदर को क्यों नहीं समझाती. मैं दामोदर को बुलाने थोड़े ही जाती हूं, वह खुद ही यहां आता है.’’
गुड्डी की बातों से मोहरश्री दुविधा में पड़ गई. क्योंकि गुड्डी जो कह रही थी, सच वही था. दामोदर ही उस के घर आताजाता था.
दामोदर शीतल के पीछे पागल था, यही वजह थी कि एक दिन उस ने ओमप्रकाश से कहा, ‘‘मैं शीतल से शादी करना चाहता हूं.’’
‘‘तुम शीतल से कैसे शादी कर सकते हो. अगर तुम्हें उस से शादी करनी है तो पहले मोहरश्री को छोड़ो. उस के रहते मैं अपनी बेटी की शादी तुम्हारे साथ कतई नहीं करूंगा.’’ इस तरह ओमप्रकाश ने शादी से मना कर दिया.
इस से दामोदर निराश हो गया. उसे पता था कि मोहरश्री से छुटकारा पाना आसान नहीं है. दामोदर शीतल के लिए इस तरह बेचैन था कि मोहरश्री से छुटकारा पाने का आसान रास्ता न देख पाने के बारे में विचार करने लगा. जब उसे कोई राह नहीं सूझी तो उस ने उसे खत्म करने का निर्णय ले लिया.
इस के बाद वह मोहरश्री की हत्या के लिए किराए के हत्यारों की तलाश करने लगा. पैसे ले कर हत्या करने वाला कोई नहीं मिला तो वह खुद ही कुछ करने के बारे में सोचने लगा. क्योंकि उसे लगता था कि मोहरश्री उस की खुशियों की राह का रोड़ा है.
संयोग से उसी बीच मोहरश्री खेत में डालने के लिए एक शीशी कीटनाशक ले आई. आधा कीटनाशक तो उस ने खेत में डाल दिया, बाकी घर में ही रख दिया. उस कीटनाशक को देख कर दामोदर ने भयानक योजना बना डाली.
इस के बाद वह मोहरश्री की हर हरकत पर नजर रखने लगा. इस बीच उस ने मोहरश्री के प्रति अपना व्यवहार बदल लिया था.
मोहरश्री सुबह खेतों पर चली जाती तो दोपहर को बच्चों के लिए खाना बनाने आती थी. बच्चों को खाना खिला कर वह फिर खेतों पर चली जाती थी. उस दिन मोहरश्री दोपहर को खेतों से आई तो दामोदर उस के इर्दगिर्द मंडराने लगा. इधर दामोदर का व्यवहार बदल गया था, इसलिए मोहरश्री ने इस बात पर खास ध्यान नहीं दिया.
मोहरश्री को खेतों में काम करना था, इसलिए वह बच्चों को खिला कर अपना खाना ले कर चली गई. वह अपना काम कर रही थी, तभी दामोदर आ गया. उस ने कहा, ‘‘मैं काम कर रहा हूं, तुम जा कर अपना खाना खा लो.’’
मोहरश्री को भूख लगी थी, इसलिए हाथपैर धो कर वह खाना खाने बैठ गई. खाना खातेखाते ही उस की तबीयत बिगड़ने लगी तो उस ने पानी पिया. पानी पीने के बाद उस की तबीयत और बिगड़ गई. उस समय वहां दामोदर के अलावा कोई और नहीं था. उस ने दामोदर को आवाज दी. दामोदर आया तो, लेकिन मदद करने के बजाय वह खड़ा मुसकराता रहा. थोड़ी देर में तड़प कर मोहरश्री ने दम तोड़ दिया.
मोहरश्री मर गई तो दामोदर की समझ में यह नहीं आया कि वह उस की लाश का क्या करे? जब उस की समझ में कुछ नहीं आया तो वह ओमप्रकाश के पास गया.
जब उस ने ओमप्रकाश से मोहरश्री की मौत के बारे में बताया तो वह घबरा गया. उस ने कहा, ‘‘तुम ने यह क्या कर डाला, क्यों मार डाला उसे? मैं इस मामले में कुछ नहीं जानता, तुम्हें जो करना है, करो.’’
दामोदर लौटा और मोहरश्री की लाश को घसीट कर मकाई के खेत में डाल दिया. वहां से वह घर आया तो बच्चों ने मां के बारे में पूछा. उस ने कहा, ‘‘तुम्हारी मम्मी थोड़ी देर में आएंगी. तब तक तुम लोग जा कर निमंत्रण खा आओ.’’
बच्चे निमंत्रण खाने चले गए. निमंत्रण खा कर लौटे, तब भी मां नहीं आई थी. कृष्णा को चिंता हुई तो वह मामा चंद्रपाल के पास पहुंचा और उसे सारी बात बताई. इस बीच दामोदर गायब हो गया. उस का इस तरह गायब हो जाना, शक पैदा करने लगा. चंद्रपाल घर तथा गांव वालों के साथ मोहरश्री की तलाश में निकल पड़ा.
सभी खेतों पर पहुंचे तो वहां उन्हें ओमप्रकाश और उस की पत्नी गुड्डी मिली. उन से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि मोहरश्री की तबीयत खराब हो गई थी, दामोदर उसे एटा ले गया है.
इस के बाद सभी अपने घर लौट आए, जब दामोदर घर नहीं आया तो सब को चिंता हुई. सभी विचार कर रहे थे कि अब क्या किया जाए, तभी मक्की के खेत में मोहरश्री की लाश पड़ी होने की जानकारी मिली.
पुलिस को सूचना देने के साथ मोहरश्री के घर वालों के साथ पूरा गांव वहां पहुंच गया, जहां लाश पड़ी थी. सूचना मिलने के बाद कोतवाली (देहात) प्रभारी पदम सिंह सिपाहियों के साथ वहां पहुंच गए. लाश और घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद जरूरी कारर्रवाई कर के उन्होंने लाश पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दी.
कोतवाली प्रभारी द्वारा की गई पूछताछ में पता चला कि दामोदर के संबंध नगला गोकुल के रहने वाली ओमप्रकाश की बेटी शीतल से थे. इस के बाद उन्हें समझते देर नहीं कि यह हत्या दामोदर ने की है. उन्होंने चंद्रपाल की ओर से मोहरश्री की हत्या का मुकदमा दामोदर के खिलाफ दर्ज कर के उस की तलाश शुरू कर दी. पुलिस तो उस की तलाश कर ही रही थी, गांव वाले भी उस के पीछे लगे थे.
घटना के 4 दिनों बाद गांव वालों ने कासगंज के थाना पतरे के एक गांव के एक बाग से दामोदर को पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया.
दामोदर ने पहले तो हत्या से इनकार किया लेकिन जब उस के साथ सख्ती की गई तो वह टूट गया. शीतल के साथ अपने संबंधों को स्वीकार करते हुए उस ने बताया कि मोहरश्री उस की खुशियों की राह में रोड़ा बन रही थी, इसलिए उस ने उस के खाने में कीटनाशक मिला कर उसे मार डाला था. पूछताछ के बाद पुलिस ने कीटनाशक की शीशी बरामद कर उसे अदालत में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. True Crime Story
— इसके बाद अदालती कार्रवाई में क्या हुआ यह ज्ञात नहीं है.
— मनोहर कहानियां, 2014 में प्रकाशित






