Bijnor Terrorist Case. आतंकवादी हुस्ना व रईस जैसे लालची लोगों को अपना मकसद पूरा करने के लिए अपने जाल में फंसा लेते हैं, जिन की उन्हें बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है. अगर हुस्ना और रईस ने समय पर पुलिस को सूचना दे दी होती तो उन की जगह आतंकवादी जेल में होते.
पुलिस के उस मीटिंग हौल के बाहर अत्याधुनिक हथियारों से लैस पुलिसकर्मी तैनात थे. किसी भी बाहरी व्यक्ति को अंदर जाने की इजाजत नहीं थी. हौल में खुफिया विभाग, स्पेशल टौस्क फोर्स, एंटी टेरेरिस्ट स्क्वायड और पुलिस विभाग के आला अधिकारी मौजूद थे.
उन के हाथों में जो दस्तावेज थे, आतंकवादियों से संबंधित थे. सभी लोग बारीकी से उन का अवलोकन कर रहे थे. इस के साथ ही उन के पास सवालों की एक लिस्ट भी थी, जिस के जवाब उन्हें आतंकियों की एक महिला एजेंट से लेने थे. तभी एक बुलेटपू्रफ वज्र वाहन बाहर आ कर रुका. वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों और अंदर से आए सुरक्षाकर्मियों ने उस वाहन को सुरक्षा घेरे में ले लिया.
वज्र वाहन का पिछला दरवाजा खोला गया तो कुछ महिला पुलिसकर्मी एक बुर्काधारी महिला के साथ नीचे उतरीं. उस महिला का नाम हुस्ना था. दुबलीपतली दिखने वाली हुस्ना बुरका पहने थी. चेहरे पर उस ने कुछ इस तरह हिजाब डाल रखा था कि सिर्फ आंखें ही नजर आ रही थीं. इस के बावजूद सभी की निगाहें हुस्ना पर टिकी हुई थीं. कड़ी सुरक्षा के बीच वह अंदर दाखिल हुई.
अधिकारियों ने उसे बैठने का इशारा किया. वह आहिस्ताआहिस्ता आगे बढ़ी और कुरसी पर बैठ गई. कुरसी ठीक बीच में ऐसी जगह रखी थी, जहां पूछताछ करने वाले अधिकारी हुस्ना को फोकस कर सकते थे.






