UP Double Murder Case. चंद्रभान ने कई बार पत्नी और उस के प्रेमी अरविंद को चेतावनी दी कि दोनों जो कर रहे हैं, वह ठीक नहीं है. लेकिन वे नहीं माने. इस के बाद चंद्रभान ने जो किया, उस से उसी का घर बरबाद हो गया.

दरवाजे की झिर्री से चंद्रभान ने कमरे में जो देखा, शरम से नजरें झुक गईं. उस की पत्नी निशा अरविंद के साथ आपत्तिजनक स्थिति में थी. उन्हें उस हालत में देख कर भले ही नजरें उस की झुक गई थीं, लेकिन देह में आग लग गई थी. उस ने बाहर से ही दांत पीसते हुए कहा, ‘‘हरामजादे, मेरे मना करने के बावजूद तू फिर आ गया. आज मैं तुझे जिंदा नहीं छोड़ूंगा.’’

इतना कह कर चंद्रभान ने वहीं रखी कुल्हाड़ी उठा ली. इस के बाद अरविंद जैसे ही दरवाजा खोल कर बाहर निकला, पूरी ताकत से उस ने अरविंद की गरदन पर वार कर दिया. एक ही वार में अरविंद जमीन पर गिर पड़ा. लेकिन इतने पर भी चंद्रभान नहीं रुका. वह तब तक उस पर कुल्हाड़ी के वार करता रहा, जब तक उसे विश्वास नहीं हो गया कि अरविंद खत्म हो गया है.

पति को इस तरह गुस्से में देख कर निशा अपनी जान बचाने के लिए खेतों की ओर भागी. चंद्रभान पीछे से चिल्लाया, ‘‘भाग कर कहां जाएगी चरित्रहीन औरत… मैं आज तुझे भी नहीं छोड़ूंगा.’’

इतना कह कर चंद्रभान ने निशा को दौड़ा लिया. निशा भाग कर पप्पू शर्मा के खेत तक पहुंची थी कि ठोकर लगने से गिर पड़ी. वह उठ पाती, उस के पहले ही चंद्रभान ने उस पर भी उसी कुल्हाड़ी से वार कर दिया. निशा चीखती रही, लेकिन चंद्रभान के हाथ तभी रुके, जब तब वह मर नहीं गई.

पत्नी और उस के प्रेमी की हत्या करने के बाद चंद्रभान थाना रसूलाबाद पहुंचा और थानाप्रभारी सुनील कुमार यादव के सामने पेश हो कर पत्नी और उस के प्रेमी की हत्या की बात बता दी. सुबहसुबह 2-2 हत्याओं की बात सुन कर थानाप्रभारी सुनील कुमार यादव का मूड खराब हो गया.

उन्होंने चंद्रभान को भद्दी सी गाली दे कर सिपाहियों को आवाज दी. सिपाहियों ने आ कर चंद्रभान को हिरासत में ले लिया तो उन्होंने घटना की सूचना पुलिस अधिकारियों को दी. इस के बाद कुछ सिपाहियों को ले कर वह घटनास्थल पर जा पहुंचे. वह घटनास्थल का निरीक्षण कर रहे थे कि एसपी (कानपुर देहात) डा. वीरेंद्र बहादुर सिंह और क्षेत्राधिकारी शशिशेखर दीक्षित भी पहुंच गए.

पुलिस अधिकारियों की उपस्थिति में घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया गया. पुलिस वालों ने देखा कि निशा और अरविंद की हत्या बड़ी बेरहमी से की गई थी. अरविंद की घर के अंदर और निशा की हत्या गांव के बाहर खेत में की गई थी.

निरीक्षण के बाद पुलिस अधिकारियों ने चंद्रभान की मदद से हत्या में प्रयुक्त खून से सनी कुल्हाड़ी और कपड़े बरामद कर लिए.

ये चीजें उस ने घर में ही छिपा दी थीं. इस के बाद पुलिस अधिकारियों ने दोनों लाशों का पंचनामा तैयार कर के पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल माती भिजवा दिया. डर के मारे चंद्रभान के पिता भारत सिंह उस के चारों बच्चों को ले कर फरार हो गए थे.

चंद्रभान सिंह यादव ने दोनों हत्याओं का अपना अपराध स्वीकार कर लिया था, इसलिए थानाप्रभारी सुनील कुमार ने मृतक अरविंद के भतीजे अमित की ओर से अरविंद और निशा की हत्या का मुकदमा चंद्रभान सिंह यादव पुत्र भारत सिंह यादव के खिलाफ दर्ज करा दिया.

इस के बाद चंद्रभान सिंह से विस्तार से पूछताछ की गई. इस पूछताछ में पत्नी निशा की बेवफाई की जो कहानी चंद्रभान ने सुनाई, वह इस प्रकार थी.

उत्तर प्रदेश के जिला कानपुर (देहात) के थाना रूरा का एक गांव है रायपुर, जिस में फूल सिंह यादव अपने परिवार के साथ रहता था. उस के परिवार में पत्नी ननकी के अलावा 2 बेटियां गीता और निशा थीं.

फूल सिंह गांव में रह कर खेती करता. खेती से ही उस के परिवार का भरणपोषण होता था. बेटियों के सयानी होने पर उस ने बड़ी बेटी की शादी दया का पुरवा निवासी हकीम सिंह यादव से कर दी तो निशा की शादी थाना रसूलाबाद के गांव हरचंद निवादा के रहने वाले भारत सिंह यादव के बेटे चंद्रभान से.

भारत सिंह की गांव में अच्छीखासी खेती की जमीन थी. चंद्रभान गांव में ही रह कर खेती के कामों में पिता की मदद करता था. शादी के लाल जोड़े में लिपटी निशा ससुराल पहुंची तो सभी ने उस के रूपगुण की खूब तारीफ की. सुहागरात को चंद्रभान ने उस का घूंघट पलटा तो वह उसे देखता ही रह गया. उस ने सपने में भी कल्पना नहीं की थी कि उसे इतनी सुंदर पत्नी मिलेगी.

कुछ देर तक निशा को अपलक निहारते रहने के बाद चंद्रभान ने अपने होंठ निशा के होंठों पर रख दिए. निशा ने लजा कर जलते हुए दिए को बुझा दिया. अंधेरे में निशा को आगोश में समेटते हुए चंद्रभान ने कहा, ‘‘मेरे पास तुम्हें देने के लिए प्यार के अलावा कुछ और नहीं है.’’

‘‘पति का प्यार ही तो पत्नी की अमूल्य धरोहर होता है.’’ निशा ने मुसकराते हुए कहा.

इस प्यार का परिणाम यह निकला कि शादी के 5 साल बीततेबीतते निशा 4 बच्चों की मां बन गई. उस के 4 बच्चों में 2 बेटियां और 2 बेटे थे.

दुलहन से मां बनते ही निशा की जिंदगी को दुखों की काली छाया ने घेर लिया. उसे ऐसा लगता जैसे उसे बेडि़यों से जकड़ कर नरक में डाल दिया गया हो. काम में लगी होने की वजह से न ढंग से खाने की फुरसत मिलती, न पल भर बैठने की. जरा भी इधरउधर हो जाता तो 4 बातें ऊपर से सुनने को मिलतीं. इस की वजह यह थी कि सास का रवैया उस के प्रति ठीक नहीं था. न जाने क्यों वह अकसर निशा को कोसती रहती थीं.

चंद्रभान का प्यार उसे मिलता रहता तो शायद निशा ये सारे दुख झेल लेती. लेकिन वह भी पत्नी की इच्छाओं का ध्यान नहीं रखता था. उस के अंदर अब वह जोश नहीं रह गया था, जो पत्नी को ताजगी का अहसास करा सकता. खेती में उसे कड़ी मेहनत करनी पड़ती थी, इसलिए पत्नी के लिए उस के पास समय ही नहीं होता था. ऊपर से उपेक्षा और ताने, इसलिए चंद्रभान से भी उस का जी उचट गया था.

निशा की बड़ी बहन गीता की शादी दया का पुरवा के रहने वाले हाकिम सिंह से हुई थी. दया का पुरवा निशा की ससुराल से ज्यादा दूर नहीं था, इसलिए निशा अकसर बहन के घर आतीजाती रहती थी.

बहन के घर पर ही उस की मुलाकात अरविंद उर्फ तूफानी से हुई तो पहली ही मुलाकात में अरविंद निशा के रूप का दीवाना हो गया. निशा भी उस की लच्छेदार बातों से काफी प्रभावित हुई थी. अरविंद कुंआरा था और गीता के घर के बगल में ही रहता था. जातिबिरादरी का होने की वजह से वह गीता के घर भी आताजाता रहता था.

इस के बाद निशा जब भी बहन के घर जाती, अरविंद उस के आगेपीछे घूमता रहता. निशा साली लगती थी, इसलिए दोनों में बातचीत के अलावा हंसीमजाक भी होता रहता था. इसी का फायदा उठाते हुए एक दिन अरविंद ने मजाक करते हुए कहा, ‘‘भाभी, आप को देख कर लगता नहीं कि आप 4 बच्चों की मां हैं. अगर आप सलवार सूट पहन लें तो स्कूल की लड़की लगेंगी.’’

अपनी इस तारीफ पर निशा ने खुश हो कर कहा, ‘‘क्यों झूठ बोल रहे हो. मैं इतनी भी सुंदर नहीं हूं, जितनी तुम तारीफ कर रहे हो.’’

‘‘नहीं भाभी, आप की कसम. मैं बिलकुल सच कह रहा हूं. आप सचमुच बहुत सुंदर हैं.’’

‘‘मैं बहुत सुंदर ही हूं तो क्या हुआ तूफानी भैया, जब इस सुंदरता का कोई चाहने वाला ही न हो तो यह खूबसूरती किस काम की?’’

‘‘क्यों भाभी, चंद्रभान भैया आप का खयाल नहीं रखते क्या?’’

‘‘उन्हें तो खेतीकिसानी से फुरसत नहीं है. मेरी खूबसूरती कब देखेंगे.’’

‘‘भैया भी न जाने कैसे आदमी हैं. इतनी खूबसूरत भाभी को छोड़ कर खेतों में पड़े रहते हैं. अगर उन की जगह मैं होता तो सब कुछ छोड़ कर सिर्फ तुम्हें ही देखता रहता.’’

इस तरह अरविंद उर्फ तूफानी ने निशा की दुखती रग पर हाथ रख कर उस के सोए अरमानों को जगा दिया. निशा ने सोचा, ‘अरविंद ठीक ही तो कह रहा है. वह पति कैसा, जो पत्नी के अरमानों का खयाल न रखे.’

धीरेधीरे निशा और अरविंद का प्यार पनपने लगा. अरविंद निशा की ससुराल भी आनेजाने लगा. उस ने निशा के पति चंद्रभान से दोस्ती कर ली, जिस से उसे उस के यहां आने से कोई रोकेटोके न. वह जब भी निशा के यहां आता, खाली हाथ नहीं आता था. इस से निशा और बच्चे खुश रहते थे.

अगर उसे रात में रुकना होता तो वह शराब की बोतल और गोश्त ले कर आता था. चंद्रभान के साथ बैठ कर शराब पीता और गोश्त खाता. वह निशा को पाने के लिए छटपटा रहा था, लेकिन मौका नहीं मिल रहा था. एक दिन अरविंद दोपहर को निशा के घर पहुंचा तो घर में कोई और नहीं था.

चंद्रभान खाद लेने रसूलाबाद गया था और सासससुर खेतों पर. निशा घर में अकेली थी. वह उसी समय नहा कर निकली थी, इसलिए कुछ ज्यादा ही सुंदर लग रही थी. अरविंद ने उसे एकटक निहारते हुए कहा, ‘‘भाभी, आज तो आप कयामत ढा रही हैं.’’

अपनी तारीफ सुन कर निशा पुलकित हो उठी. नारी मन सदैव अपनी तारीफ सुनने के लिए बेचैन रहता है. अरविंद यह बात अच्छी तरह जानता था. इसीलिए वह निशा की तारीफ कर रहा था. थोड़ी देर खामोश रह कर उस ने कहा, ‘‘भाभी, अगर आप बुरा न मानें तो एक बात कहूं?’’

‘‘बोलो क्या बात है, बुरा क्यों मानूंगी?’’ ‘‘जी चाहता है, आप को बांहों में भर लूं?’’

‘‘तो तुम्हें मना किस ने किया है?’’ निशा ने तिरछी नजरों से घूरते हुए कहा.

निशा का इतना कहना था कि अरविंद उर्फ तूफानी ने निशा की कमर में हाथ डाल कर सीने से चिपका लिया. अमर बेल की तरह निशा उस से लिपट गई.

जो होने जा रहा है, वह गलत है, जब इस बात की चिंता जिसे होनी चाहिए, वह नहीं कर रही थी तो अरविंद क्यों करता. उस ने निशा को उठाया और पलंग पर लिटा दिया. इस के बाद दोनों चंद्रभान की इज्जत की धज्जियां उड़ा कर ही माने.

शारीरिक संबंधों का सिलसिला एक बार शुरू हुआ तो फिर रुकने का नाम नहीं लिया. निशा और अरविंद एकदूसरे की शारीरिक भूख शांत करने लगे.

अरविंद अकसर तभी चंद्रभान के घर आता, जब वह घर में न होता. निशा और बच्चों के लिए तरहतरह की चीजें भी लाता. अरविंद को पा कर निशा अपने बहुत सारे दुख भूल गई थी. एक तरह से उस ने पति की उपेक्षा का हल निकाल लिया था.

कहते हैं, पाप का बीज जल्द ही जम कर पेड़ बन जाता है. निशा और अरविंद के साथ भी ऐसा ही हुआ. लाख छिपाने के बाद भी दोनों के संबंध उजागर हो गए. घर से निकली बात जल्द ही मोहल्ले की औरतों तक पहुंची तो चंद्रभान के कानों तक पहुंचते देर नहीं लगी.

पत्नी के अवैध संबंधों की बात सुन कर चंद्रभान ब्याकुल हो उठा. घर आ कर उस ने निशा से पूछा, ‘‘लोग तुम्हारे और अरविंद के बारे में तरहतरह की बातें कर रहे हैं?’’

‘‘लोगों का क्या, कोई अपना दामन तो देखता नहीं, दूसरे को बदनाम करने में बड़ा मजा आता है.’’ निशा तुनक कर बोली.

‘‘तो क्या लोग झूठ बोल रहे हैं?’’

‘‘और नहीं तो क्या? दिन भर घर में पड़ी रहती हूं. कभी अरविंद घर आ कर हंसीमजाक कर लेता है तो मैं भी जवाब दे देती हूं. बस इतनी सी बात है. इसी को लोग बात का बतंगड़ बना रहे हैं. तुम्हें क्या लगता है. मैं सचमुच उस के साथ सोती हूं.’’

चंद्रभान ने उस समय तो निशा से कुछ नहीं कहा, लेकिन शक तो हो ही गया था. इसलिए वह उस की निगरानी करने लगा. इस निगरानी का परिणाम भी जल्दी ही सामने आ गया.

एक दिन दोपहर को चंद्रभान ने निशा और अरविंद को आपत्तिजनक हालत में देख लिया. इस के बाद चंद्रभान ने निशा की जम कर पिटाई की और हिदायत भी दी कि आज के बाद अगर वह अरविंद के साथ दिखाई दे गई तो वह दोनों को काट कर रख देगा.

चंद्रभान की इस धमकी से निशा और अरविंद इतना डर गए कि उन्होंने चंद्रभान से माफी मांग कर वादा किया कि अब इस तरह की गलती फिर कभी नहीं करेंगे. चंद्रभान ने दोनों को माफ भी कर दिया. कुछ महीने तक तो दोनों दूरदूर रहे, लेकिन उस के बाद फिर से चोरीछिपे मिलने लगे.

काफी सावधानी बरतने के बावजूद निशा की सास जानकी ने निशा और अरविंद को घर में आपत्तिजनक स्थिति में पकड़ लिया.

इस की शिकायत उन्होंने चंद्रभान से की तो उस ने अरविंद को जम कर पीटा और अनर्थ की चेतावनी दे कर घर आने पर प्रतिबंध लगा दिया. उस ने निशा को भी मारापीटा और कहा कि अगर बच्चों का मोह न होता तो वह उस का गला दबा देता.

इस के बाद अरविंद और निशा का मिलनाजुलना तो बंद हो गया, लेकिन कभीकभार मोबाइल से बातचीत हो जाती थी. धीरेधीरे कई महीने बीत जाने पर चंद्रभान को लगा कि निशा अरविंद को भूल गई होगी. वह लापरवाह हो गया. लेकिन यह उस का वहम था.

25 अगस्त, 2014 की शाम अरविंद उर्फ तूफानी निशा से मिलने उस के घर आ पहुंचा. लेकिन निशा ने उस से बात नहीं की. निशा के व्यवहार से चंद्रभान को लगा कि शायद अब वह उस से नहीं मिलती है. चंद्रभान और अरविंद खाना खा कर आपस में बात करते हुए घर के बाहर चारपाई पर सो गए. चंद्रभान तो सो गया, लेकिन अरविंद करवटें बदलता रहा.

निशा और अरविंद को परखने के लिए चंद्रभान सुबह 4 बजे उठा और दरवाजा पीट कर निशा को बताया कि वह धान के खेत में पानी लगाने जा रहा है. इस के बाद वह घर के पिछवाड़े जा कर छिप गया. दूसरी ओर चंद्रभान के जाते ही अरविंद घर के अंदर घुस गया.

थोड़ी देर बाद चंद्रभान दरवाजे पर आया. अरविंद की चारपाई खाली देख कर वह सारा मामला समझ गया.

उस ने घर के अंदर जा कर दरवाजे की झिरी से झांका तो कमरे में निशा और अरविंद आपत्तिजनक स्थिति में दिखाई दिए.

उस ने वहीं रखी कुल्हाड़ी उठाई और आवाज दी तो अरविंद ने जैसे ही दरवाजा खोला, उस ने कुल्हाड़ी से उस पर वार कर दिया. उस का इरादा भांप कर निशा भागी, लेकिन दौड़ा कर उस ने उसे भी खत्म कर दिया. इस तरह अवैध संबंधों के परिणामस्वरूप 2 लोग मारे तो गए ही, चंद्रभान के बच्चे बिना मांबाप के हो गए.

पूछताछ के बाद 27 अगस्त, 2014 को थाना रसूलाबाद पुलिस ने चंद्रभान सिंह यादव को कानपुर (देहात) की माती कोर्ट में मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. कथा लिखे जाने तक वह जेल में ही था. UP Double Murder Case

— इसके बाद अदालती कार्रवाई में क्या हुआ यह ज्ञात नहीं है.

— 2014  में प्रकाशित

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