Prison Wedding. राजस्थान के इतिहास में पहली बार जेल की सलाखों के पीछे 2 हत्यारों ने सात फेरे लिए. हैरान करने वाली बात यह है कि दूल्हा मूलाराम भाटी अपने पड़ोसी का कातिल है, जबकि सीमा घड़से ने शादी के सवा महीने बाद अपने पति का कत्ल किया था. आखिर जुर्म की दुनिया से निकली यह अजीबोगरीब प्रेम कहानी जेल की चारदीवारी के बीच शादी के अंजाम तक कैसे पहुंची?
राजस्थान के जिला नागौर के अड़सिंगा गांव निवासी मूलाराम भाटी को करीब 2 साल पहले अजमेर जेल से जोधपुर की मंडोर ओपन जेल में स्थानांतरित किया गया था. वहीं पर मुंबई निवासी सीमा धड़से भी थी. सीमा की शादी घंटाघर जोधपुर में कौशलराज नामक युवक से हुई थी.
सीमा पर आरोप है कि उस ने शादी के सवा माह बाद ही पति की हत्या कर दी थी. इसी आरोप में सीमा को डेढ़ साल पहले महिला जेल से मंडोर ओपन जेल भेजा गया था.
ओपन जेल के नियमों के तहत दोनों खेतीबाड़ी और अन्य कार्यों में हिस्सा लेते थे. इसी दौरान दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई. ओपन जेल में डेढ़ साल पहले सीमा आई तो मूलाराम की नजर उस पर पड़ी. वह बेहद सुंदर थी. वह सीमा को पहली नजर में पसंद करने लगा था.
दोनों को खेतीबाड़ी का काम करने साथ में भेजा गया तो मूलाराम ने सीमा से कहा, ”आप का क्या नाम है और किस जुर्म में सजा काट रही हो?’’
यह सुन कर वह बोली, ”मेरा नाम सीमा है. मैं मूलरूप से मुंबई की रहने वाली हूं. 2016 में मेरी शादी जोधपुर के कौशलराज नामक व्यक्ति से जबरदस्ती करा दी थी. मुझे पति पसंद नहीं था. वह बावला सा था. इस कारण शादी के सवा माह भी नहीं हुआ था कि मैं ने उसे ठिकाने लगा दिया. मैं ने उस के दाएं हाथ की नस काट दी थी. मैं ने इसे सुसाइड बताने की हरसंभव कोशिश की, मगर सदर थाना पुलिस ने मुझे हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया. दोष सिद्ध होने पर उम्रकैद की सजा हुई और सेंट्रल जेल जोधपुर भेज दी गई. फिर महिला जेल से मंडोर ओपन जेल भेजी गई. अब मैं आप के सामने हूं.’’
यह सुन कर मूलाराम ने अपनी कहानी भी बता दी. वह अपने पड़ोसी की हत्या के आरोप में उम्रकैद की सजा 2017 से काट रहा है. वह अजमेर जेल से अच्छे व्यवहार के कारण मंडोर ओपन जेल भेजा गया था. इस तरह दोनों का ओपन जेल में परिचय हुआ.
खेती का काम करते हुए दोनों में दोस्ती हो गई. मूलाराम की उम्र 33 साल और सीमा की उम्र 31 साल थी. दोनों हमउम्र थे. दोनों जवान थे. ऐसे में साथ काम करते दोनों एकदूसरे को पसंद करने लगे. दोनों के बीच प्यार का इजहार हो गया. सीमा को मूलाराम पसंद था.
मूलाराम तो सीमा को देखते ही पहले दिन से चाहने लगा था. दोनों जानते थे कि जेल से उम्रकैद की सजा काट कर बाहर निकलने तक वे अधेड़ हो जाएंगे. ऐसे में उन से शादी कौन करेगा. वैसे भी उन पर हत्यारा होने का धब्बा तो लग ही चुका है.
कैदियों की लव स्टोरी
यह बात मूलाराम और सीमा दोनों जानते थे. ऐसे में मूलाराम ने एक रोज कहा, ”सीमा, हम जेल से रिहा होंगे, तब तक अधेड़ हो जाएंगे. हम पर हत्यारा होने का कलंक तो है ही, ऐसे में हम से कोई शादी नहीं करेगा. क्यों न हम दोनों लिवइन में साथ में रहें और फिर शादी कर लें.’’
सीमा ने सुना तो उसे यह बात जंच गई. सीमा अब तक मूलाराम पर अपना दिल हार चुकी थी. उस ने मूलाराम के साथ लिवइन में रहने का फैसला कर लिया.
इस के बाद सीमा और मूलाराम ओपन जेल में पतिपत्नी की तरह लिवइन में रहने लगे. दोनों को जेल में जीवनसाथी मिले तो उन का समय आराम से कटने लगा. दोनों दिन भर साथ में काम करते और शाम 6 बजे जेल के क्वार्टर में आ जाते और रजामंदी से साथ में रात बिताते.
जेल में एकदूसरे का प्यार और साथ मिला तो वे यह भूल गए कि वे बंदी हैं. लिवइन में रहते काफी वक्त गुजर गया था. अब वे शादी करना चाहते थे. तब मूलाराम ने अपने मिलने वालों से रायमशविरा किया.
इसी दौरान जून जुलाई, 2026 में सीमा को 40 दिन की पैरोल मिली. इस के बाद दोनों ने विवाह करने का निर्णय लिया और अदालत से अनुमति मांगी.
बंदी मूलाराम भाटी ने वकील कालूराम भाटी और स्वप्न चौहान के माध्यम से जोधपुर हाईकोर्ट में विवाह के लिए पैरोल (छुट्टी) की याचिका लगाई थी. जिस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने बंदियों के जीवन में सुधारात्मक बदलाव को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मंडोर ओपन जेल में ही शादी की अनुमति दी.
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता मूलाराम भाटी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कालूराम भाटी और अधिवक्ता स्वप्न चौहान ने पैरवी की थी. राज्य सरकार की ओर से सरकारी वकील (लोक अभियोजक) सी.एस. ओझा और श्रवण सिंह राठौर कोर्ट में उपस्थित रहे थे. राज्य सरकार ने भी इस विवाह पर कोई आपत्ति नहीं जताई थी.
जोधपुर के मंडोर ओपन जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे मूलाराम और सीमा को 22 जुलाई, 2026 को शादी करने की हाईकोर्ट ने अनुमति दे दी. राजस्थान के न्यायिक इतिहास में यह पहला मौका था, जब किसी ओपन जेल (खुला बंदी शिविर) परिसर के भीतर 2 मुजरिमों को शादी की अनुमति मिली थी.
यह ऐतिहासिक आदेश न्यायमूर्ति डा. पुष्पेंद्र सिंह भाटी एवं न्यायमूर्ति प्रवीर भटनागर की खंडपीठ ने जारी किया. हाईकोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में वर्ष 2022 के प्रसिद्ध ‘नंदलाल बनाम राज्य’ मामले के निर्णय का उल्लेख किया.
कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा— ‘जेल सुधार व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य अपराधियों को केवल दंडित करना या समाज से अलग करना नहीं है, बल्कि उन का पुनर्वास करना और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोडऩे के अवसर प्रदान करना भी है.’
राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने आगे कहा— ‘विवाह करना, परिवार बसाना और गरिमापूर्ण जीवन जीना भारतीय संविधान के मौलिक अधिकारों का हिस्सा है.’
वर्ष 2017 से न्यायिक अभिरक्षा में चल रहे मूलाराम भाटी की इस याचिका को स्वीकार करना राजस्थान की जेल प्रणालियों में मानवीय दृष्टिकोण का एक बड़ा उदाहरण बन कर सामने आया.
इस फैसले को भविष्य में कैदियों के संवैधानिक अधिकारों और मानवीय गरिमा से जुड़े मामलों के लिए एक बेहद महत्त्वपूर्ण न्यायिक मिसाल माना जा रहा है.
गौरतलब है कि मूलाराम को पड़ोसी की हत्या और सीमा को अपने पति की हत्या के मामले में दोषी ठहराते हुए अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी. बावजूद इस के हाईकोर्ट ने माना कि सजा का अर्थ व्यक्ति के सभी संवैधानिक अधिकारों का अंत नहीं है और उस में सुधार की संभावना न्याय व्यवस्था का अहम हिस्सा है.
कोर्ट ने मूलाराम भाटी और सीमा की शादी में 21 लोगों को शामिल करने की अनुमति दी थी. शादी मंडोर (जोधपुर) ओपन एयर कैंप परिसर में 22 जुलाई, 2026 को कड़ी निगरानी में कराने का आदेश जेल एवं पुलिस प्रशासन को दिया गया था. इस के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए.
मंडोर ओपन जेल में रहने के दौरान सीमा की दोस्ती फलोदी जिले के बाप थाना क्षेत्र के रावरा गांव के अंतर्गत आने वाले जसाणियां की ढाणी निवासी राधाकिशन वागेला की बेटी से हुई, जो उस के साथ महिला बंदी थी, जो उस की सहेली थी.
इसी सहेली बंदी के पिता राधाकिशन वागेला ने सीमा को गोद ले रखा था. उन्होंने ही सीमा का कन्यादान करने का फैसला लिया. सीमा के मायके मुंबई से उस की शादी में शामिल होने कोई नहीं आ रहा था. इस कारण सहेली बंदी के पिता राधाकिशन ने कन्यादान करने का निर्णय किया था, क्योंकि उन्होंने सीमा को धर्मबेटी मान लिया था.
राधाकिशन अकसर अपनी बेटी से मिलने मंडोर ओपन जेल जाया करते थे. वहीं पर राधाकिशन की मुलाकात सीमा से हुई थी. राधाकिशन जब भी बेटी से मिलने जेल जाते थे तो वह सीमा के लिए भी कपड़े, जूते वगैरह ले जाते थे. सीमा को अपने लिए जो सामान चाहिए होता था, वह राधाकिशन से मंगाती थी. राधाकिशन भी उसे बेटी जैसा मान कर उस की हर फरमाइश पूरी करते रहते थे.
बस, इसी कारण जब सीमा पैरोल पर 40 दिन के लिए बाहर जेल से थी तो वह राधाकिशन के घर पर ही रुकी थी. हाईकोर्ट पीठ ने जब ओपन जेल में 22 जुलाई, 2026 को सीमा और मूलाराम भाटी की शादी का निर्णय सुनाया था. शादी का पूरा खर्च याचिकाकर्ता मूलाराम भाटी को स्वयं वहन करना था.
अच्छे आचरण और नियमों का पालन करने वाले कैदियों को खुली जेलों में रखा जाता है. उन कैदियों को भी यहां रहने की अनुमति मिलती है, जो 3 बार पैरोल पर रिहा हो चुके हों. ऐसे कैदी भी यहां रहते हैं, जिन को जमानत से मिली अस्थाई रिहाई के दौरान जेल प्रशासन के पास उन के खिलाफ कोई शिकायत नहीं मिली हो. अपनी सजा का एक बड़ा हिस्सा सामान्य जेल में अच्छे व्यवहार के साथ पूरा कर लिया हो और जो आदतन अपराधी न हों.
दोनों थे हत्यारे
राजस्थान के सांगानेर (जयपुर) जैसी कुछ अन्य ओपन जेलों में कैदियों को अपने परिवार के साथ रहने तक की अनुमति होती है.
राजस्थान के नागौर जिले के गांव अड़सिंगा निवासी मूलाराम भाटी के पिता पेमाराम भाटी का अपने पड़ोसी से विवाद था. इसी विवाद के चलते मूलाराम एक दिन पड़ोसी युवक को अपनी बाइक पर बैठा कर ले गया था, जिस की लाश बाद में पानी के टांके (कुंड) में मिली थी. इसी हत्या के आरोप में मूलाराम को 2023 में उम्रकैद की सजा हुई.
इसी तरह सीमा घड़से (31 साल) मूल निवास मुंबई की साल 2016 में घर वालों ने उस की मरजी के खिलाफ शादी कराई थी. शादी के महज सवा महीने बाद ही सीमा घड़से ने सोते समय अपने पति कौशल राज अरोड़ा निवासी जोधपुर की हत्या कर दी थी.
उम्रकैद की सजा के बाद मूलाराम को अजमेर जेल वहीं सीमा घड़से को सेंट्रल जेल जोधपुर में रखा गया था. इन दोनों को अच्छे आचरण और नियमों का पालन करने के कारण मंडोर ओपन जेल में रखा गया.
जहां पर खेतीबाड़ी का कार्य करते हुए दोनों की जानपहचान हुई. इस के बाद दोनों में प्रेम हो गया तो लिवइन में रहने लगे. लिवइन में रहते काफी समय हो गया था ऐसे में पैरोल पर जेल से बाहर जा कर शादी करने का मन बनाया.
सीमा को तो 40 दिन की पैरोल मिल गई, मगर मूलाराम को पैरोल नहीं मिली. मूलाराम ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर शादी के लिए पैरोल मांगी. मगर हाईकोर्ट की खंडपीठ ने उम्रकैद की सजा काट रहे मूलाराम और सीमा की 22 जुलाई को मंडोर ओपन जेल में शादी कराने का निर्णय सुनाया.
इस के बाद सीमा को गोद लिए पिता राधाकिशन ने शादी के कार्ड छपवाए. कोर्ट ने 21 लोगों को शादी में शामिल होने की परमिशन दी थी. मूलाराम ने अपने खास मेहमानों को शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया. ओपन जेल में बंद कैदी जो मूलाराम एवं सीमा के साथ सजा काट रहे थे, उन्हें भी शादी में शरीक होने का निमंत्रण दिया.
शादी समारोह को गरिमामय और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए जेल प्रशासन ने भी विशेष व्यवस्थाएं कीं.
मंडोर ओपन जेल प्रभारी हापूराम की प्रत्यक्ष निगरानी में सुरक्षा एवं आयोजन संबंधी सभी व्यवस्थाओं का संचालन किया गया, जबकि सेंट्रल जेल जोधपुर अधीक्षक प्रमोद सिंह शेखावत ने पूरे कार्यक्रम की लगातार मौनिटरिंग की.
कोर्ट के आदेश के बाद ओपन जेल में शादी की तैयारियां शुरू हो गईं. मूलाराम ने शादी के निमंत्रण कार्ड अपने चहेतों को भेज दिए. इस के बाद दूल्हादुलहन के कपड़े, गहने, शृंगार सामग्री खरीदी गई. उम्रकैद की सजा काट रहे बंदियों की शादी करने के लिए पंडित और मांगणहारों की व्यवस्था की गई.
हिंदू रीति रिवाज से शादी होनी थी. 19 जुलाई, 2026 को हल्दी की रस्म हुई, जहां दूल्हादुलहन को बंदोला बैठाया गया. हल्दी से बने उबटन से ‘पीठी’ की रस्म की गई. शादी के गीत के बीच दुलहन सीमा घड़से को हल्दी से बने उबटन से निखारा गया. दूल्हे को भी उबटन लगाया गया.
जेल में गूंजी शहनाई
21 जुलाई को मायरा और प्रीतिभोज का आयोजन किया गया. 21 मेहमानों को शादी में कोर्ट के आदेशानुसार बुलाया गया था. जेल प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन ने चाकचौबंद व्यवस्था कर रखी थी. मेहमान शादी में शामिल होने 22 जुलाई, 2026 से मंडोर ओपन जेल स्थित मूलाराम भाटी के क्वार्टर पर जुटने शुरू हो गए थे.
22 जुलाई की सुबह सवा 9 बजे मूलाराम को सजाया गया. उस रोज मंडोर ओपन जेल में अलग ही रौनक थी. इस खुली जेल में ढोल और थाली की ध्वनि गूंज रही थी. पहली बार 2 बंदियों की यहां शादी हो रही थी. इस अनोखे विवाह में शामिल होने 21 लोगों की अनुमति मिली थी.
जोधपुरी साफा, किलंगी और सूटबूट में सजा मूलाराम… हाथों में मेहंदी, सिर पर मोड और लाल जोड़े में सजी दुलहन… मंत्रोच्चार करते पंडित… अग्नि के समक्ष सात फेरे और वरमाला के बाद आशीर्वाद देते लोग. बाहर ढोल थाली की थाप पर नाचते बाराती और शामियाने में भोजन करते मेहमान… यह किसी आम घर में होने वाली शादी का दृश्य नहीं, बल्कि मंडोर की खुली जेल का नजारा था.
हत्या के मामलों में उम्रकैद की सजा काट रहे मूलाराम और सीमा ने एकदूसरे का हाथ थाम कर जीवन भर साथ निभाने का संकल्प लिया. दोनों ने अग्नि को साक्षी मान कर सात फेरे लिए और वैवाहिक बंधन में बंध गए.
जेल की चारदीवारी के पीछे हुई यह शादी प्रेम, विश्वास और नई जिंदगी की उम्मीद की अनोखी कहानी बन गई. खुली जेल में कैदियों के लिए बने आवासों के बीच आयोजित विवाह समारोह में 22 जुलाई को उत्सव का माहौल रहा.
सीमा के पेरेंट्स शादी में शामिल नहीं हुए. ऐसे में सीमा का कन्यादान उस के गोद लिए पिता राधाकिशन ने किया. राधाकिशन की बेटी खुली जेल में सीमा के साथ सजा काट रही थी. ऐसे में सहेली के पिता ने सीमा को अपनी धर्म की बेटी बनाकर कन्यादान किया.
मूलाराम के परिवार में से भी कोई शादी में शामिल नहीं हुआ था. इस कारण जेल में सजा काट रहे जोराराम ने भाई बन कर शादी की रस्मों में हिस्सा लिया और दूल्हे के भाई के रूप में ‘सेवरा’ दिया. शादी के दौरान महिलाओं ने मंगल गीत गाए.
जेल में बंद मूलाराम और सीमा ने रीतिरिवाज से शादी कर नव जीवन में प्रवेश किया. शादी में शामिल लोगों ने नव विवाहित जोड़े को आशीर्वाद दे कर उन के सुखद भविष्य की कामना की. इस तरह जोधपुर की मंडोर ओपन जेल के 2 कैदी उम्र भर के लिए जीवनसाथी बन गए.
जेल अधिकारियों, कर्मचारियों और पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में संपन्न यह शादी जेल सुधार और पुनर्वास की अनोखी मिसाल बनी. मूलाराम ने कहा, ”कहते हैं कि जोडिय़ां ऊपर वाला बनाता है. लेकिन हमारी तो यहां आ कर बनी है. हम भी समाज की मुख्यधारा से जुडऩा चाहते हैं. अच्छा आचरण होने की वजह से उम्मीद है कि सरकार आगे हमारी सजा माफ करेगी और हम एक सामान्य जीवन जी सकेंगे.’’
जेल में शादी करने वाली सीमा ने कहा, ”हम अपने गांव जा कर पारंपरिक तरीके से शादी करना चाहते थे, लेकिन हाईकोर्ट ने जेल परिसर के अंदर ही विवाह संपन्न कराने के आदेश दिए थे. इस कारण जेल में शादी कर के हम बहुत खुश है. हमारे प्यार को मंजिल मिल गई, इस से बढ़ कर और क्या खुशी हो सकती है. हम शादी कर के बहुत खुश हैं.’’
मंडोर ओपन जेल प्रभारी हापूराम ने बताया कि दोनों का विवाह संपन्न हो गया है. दोनों जेल से निकलने के बाद समाज की मुख्य धारा में लौट सकेंगे. विवाह में शामिल होने आए हाई कोर्ट के अधिवक्ता स्वप्न चौहान ने बताया कि संविधान के आर्टिकल- 21 के तहत ऐसे फैसले लिए जा सकते हैं. कोर्ट ने उस आधार पर ही मूलाराम और सीमा को वैवाहिक जीवन के लिए अनुमति दी और उन का विवाह हो सका.
नागौर जिले के निवासी एसआई लालाराम चौधरी ने बताया कि वह भी यहां पर कभी बंदी थे. हाईकोर्ट ने उन की सजा अपास्त की थी, आज वह शादी में शामिल हुए, क्योंकि इन का नया जीवन शुरू होगा. हत्या के आरोप में उम्रकैद भुगत रहे मूलाराम और सीमा मंडोर ओपन जेल में दांपत्य सूत्र में बंध गए. इस अनोखे विवाह की पूरे राजस्थान में चर्चा है.
क्यों की थी हत्या
सीमा घड़से की मूलाराम के साथ तीसरी शादी है. इस से पहले वह 2 शादी कर चुकी है. मुंबई (महाराष्ट्र) की रहने वाली सीमा घड़से ने अपनी पसंद के युवक से शादी कर ली थी. मगर सीमा के घर वालों को उस की शादी पसंद नहीं थी. उन्होंने सीमा पर दबाव डालकर पहले पति से तलाक दिला दिया.
पहले पति से तलाक के बाद घर वालों ने 29 मार्च, 2016 को सीमा घड़से की दूसरी शादी 27 साल के कौशलराज अरोड़ा उर्फ रोहित से करा दी. सीमा की मां ने रुपए ले कर कौशलराज से सीमा को ब्याह दिया था, लेकिन सीमा जब दूसरे पति कौशलराज के साथ मुंबई से घंटाघर, जोधपुर राजस्थान अपनी ससुराल आई तो उसे पति पसंद नहीं आया. कौशल राज मंदबुद्धि था.
शादी के कुछ दिनों बाद ही सीमा ने अपनी मां से पति को छोडऩे की बात कही, लेकिन मां ने इस घर में कौशलराज के साथ रहने का दबाव बनाया. उस ने ससुराल से भागने की कोशिश भी की, लेकिन नाकाम रही. इस के बाद सीमा ने पति कौशलराज को ही रास्ते से हटाने की सोची. सीमा ने क्राइम सीरियल देख कर पति के मर्डर का प्लान बनाया.
प्लान के तहत मई, 2016 के पहले हफ्ते में सीमा घड़से ने खाना खाने के बाद कमरे का दरवाजा बंद कर लिया और पति कौशलराज से खेल खेलने को कहा. इस खेल में उस ने कौशलराज के दोनों हाथ बांध दिए. फिर उस का गला दबा दिया, जिस से वह बेहोश हो गया.
इसी बीच सीमा ने उस की दाएं हाथ की कलाई की नस काट दी. बाएं हाथ की नस भी काट दी. नस काटने के बाद उस ने दोनों हाथों से कौशलराज का मुंह दबाया, ताकि उस की मौत हो जाए.
इस के बाद उस ने फेमिली वालों को सूचना दी कि कौशलराज ने खुदकुशी कर ली. कौशलराज की खुदकुशी को ले कर शक होने पर घर वालों ने सदर थाना पुलिस को सूचना दी. सूचना पा कर एसएचओ पुष्पा कंवर पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंची.
पुलिस ने मौका देखा तो मृतक युवक की दाहिने हाथ की कलाई कटी हुई थी, जबकि खुदकुशी के समय कोई भी शख्स अपने बाएं हाथ की नस काटते हैं. इस से सीमा पर पुलिस का शक और गहरा गया. आखिरकार पुलिस की सख्ती से पूछताछ के बाद सीमा घड़से ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया.
एसएचओ पुष्पा कंवर के मुताबिक, शादी के बाद से ही सीमा अपने पति कौशलराज से कटीकटी रहती थी, वह जिस लड़के से प्यार करती थी, उसी के साथ रहना चाहती थी. इसीलिए उस ने पति कौशलराज को रास्ते से हटाने का प्लान बनाया और सीमा ने अपने पति से पूछ कर उस की हत्या कर दी.
पुलिस ने सीमा को गिरफ्तार कर लिया. बाद में पुलिस ने चार्जशीट कोर्ट में पेश की. इस के बाद कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई. मई, 2016 से सीमा घड़से न्यायिक अभिरक्षा में है.
साल 2019 में सीमा घड़से को उम्रकैद की सजा मिली. उसे सेंट्रल जेल भेज दिया गया. बाद में महिला जेल और फिर अच्छे आचरण के चलते डेढ़ साल पहले मंडोर ओपन जेल भेजा गया था.
शादी के बाद दोनों खुशीखुशी साथ रह रहे हैं. उन्हें विश्वास है कि उन के अच्छे आचरण को देख कर उन्हें जल्द रिहाई मिल जाएगी. रिहा नहीं होने तक वे मंडोर ओपन जेल में रहेंगे.
कथा लिखे जाने तक दोनों मंडोर ओपन जेल में एक साथ रह रहे थे. Prison Wedding






