एक 'हाय’ से शुरू हुई बातचीत कब दोस्ती में बदली, दोस्ती कब प्यार के अहसास तक पहुंची और भरोसे का यही रिश्ता कब ठगी तथा ब्लैकमेलिंग के जाल में बदल गया, पता ही नहीं चला. डिजिटल दुनिया में किसी अनजान शख्स से जुडऩा जितना आसान है, उस की असली पहचान जानना उतना ही मुश्किल. यहां आकर्षक तसवीरों, मीठी बातों और सुनहरे भविष्य के वादों के पीछे ऐसा चेहरा छिपा हो सकता है, जो आप की भावनाओं को ही कमाई का जरिया बना ले...
उत्तर प्रदेश के जिला प्रयागराज का रहने वाला राहुल रात के करीब साढ़े 10 बजे अपने कमरे में बैठा मोबाइल चला रहा था. रोज की तरह वह सोशल मीडिया पर लोगों की प्रोफाइल देख रहा था. तभी एक डेटिंग ऐप पर उसे एक लड़की की प्रोफाइल दिखाई दी. तसवीर में वह लड़की बेहद आकर्षक लग रही थी. प्रोफाइल में लिखा था, 'दोस्ती पर भरोसा हो तो बात कीजिए.’ राहुल उस लड़की की फोटो देखते हुए उसी के बारे में सोचता रहा, फिर 'हाय’ लिख कर संदेश भेज दिया.
कुछ मिनट बाद जवाब आ गया, ''हैलो, आप कहां रहते हैं?’’
बस, यहीं से वह बातचीत शुरू हुई, जो आगे चल कर दोस्ती, फिर प्यार, जो होटल के कमरे तक पहुंच गया.
लड़की का नाम पल्लवी सिंह राजपूत था. वह भी उसी शहर यानी प्रयागराज में रहती थी. प्रयागराज वह पढऩे आई थी. इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से एमए करने के बाद वह प्रशासनिक नौकरी की तैयारी करना चाहती थी, लेकिन उसी बीच उस पर कुछ ऐसी परेशानी आई कि नौकरी के लिए पढ़ाई करने के बजाय वह लोगों को ठग कर पैसे कमाने के चक्कर में पड़ गई.






