Rajasthan Crime Story. प्यार करना कोई गुनाह नहीं, यह गुनाह तब बन जाता है जब प्यार करने वाले अपनी राह साफ करने के लिए हिंसा पर उतर आते हैं. कमल और सुमन ने भी यही किया. हत्या जैसे अपराध के बाद उन की शादी तो क्या होती, दोनों को जेल जाना पड़ा.
बर्ष 2015 का दिसंबर माह चल रहा था. सर्दी पूरे शबाब पर थी. राजस्थान के जिला श्रीगंगानगर के उपखंड सूरतगढ़ से 20 किलोमीटर दूर गांव सरदारपुरा बीकां निवासी सुमन बिश्नोई को नेट की परीक्षा देने के लिए बीकानेर जाना था. वहां उस का परीक्षा केंद्र आर्मी स्कूल में था. सुमन की तबीयत ठीक नहीं थी, लेकिन वह एग्जाम मिस कर के एक साल बरबाद करना नहीं चाहती थी.
बस से बीकानेर पहुंचतेपहुंचते सुमन को तेज बुखार हो गया. बस अड्डे से आर्मी स्कूल पहुंचने के लिए उस ने एक शेयर आटो ले लिया. उस दिन राज्य भर के अलगअलग स्थानों से युवकयुवतियां नेट की परीक्षा देने बीकानेर आए थे. रास्ते में आटो चालक ने सुमन के अलावा 3 सवारियां और बैठा लीं. सुमन के अलावा आटो में जो 3 सवारियां थीं, वे भी छात्र थे और नेट की परीक्षा देने ही आए थे. सुमन के पास कमल शर्मा नाम का एक युवक बैठा था.
तेज बुखार होने की वजह से सुमन के बदन में कंपकंपी छूट रही थी. पास बैठे कमल शर्मा ने भांप लिया कि उसे तेज बुखार है. वह नजरें घुमा कर बोला, ‘‘आप को तेज बुखार है. आप का बदन तप रहा है. बुखार की कोई टेबलेट ले लीजिए, कुछ राहत मिल जाएगी.’’
‘‘2 दिनों से तबीयत ठीक नहीं है. हड़बड़ाहट में मेडिसिन भी घर पर ही भूल आई हूं.’’ कह कर सुमन चुप हो गई.
आटो आर्मी स्कूल के पास पहुंच कर रुक गया. कमल ने अपने किराए के साथ ही सुमन का किराया भी दे दिया. एग्जाम सेंटर के सामने ही एक मेडिकल स्टोर था. कमल सुमन से एक मिनट रुकने को कह कर मैडीकल स्टोर से बुखार की 2 टैबलेट खरीद लाया. एग्जाम में अभी समय था. कमल आग्रह कर के सुमन को चाय पीने के लिए एक रेस्टोरेंट में ले गया. वहीं कमल के कहने पर सुमन ने पानी के साथ एक टेबलेट ले ली.
‘‘मैडम…’’ कमल कुछ कहता इस से पहले ही सुमन ने बता दिया कि उस का नाम सुमन बिश्नोई है और वह एग्जाम देने सरदारपुरा बीकां से आई है. जवाब में कमल ने अपना नाम बताते हुए कहा कि वह चार्टर्ड एकाउंटैंट के सहायक का काम कर रहा है और अजमेर जिले से परीक्षा देने आया था.
इसी बीच चाय आ गई थी. सुमन और कमल ने साथसाथ चाय पी. चाय खत्म होने के बाद कमल सुमन के माथे को हथेली से छू कर बोला, ‘‘देखा, आप का बुखार काफी कम हो गया है.’’
‘‘हां, अब काफी राहत महसूस कर रही हूं. यह आप की मेहरबानी है.’’
बुखार के बहाने ही सही, सुमन को किसी युवक ने पहली बार छुआ था. कमल का यह मीठा स्पर्श सुमन को अंदर तक गुदगुदा गया था. कमल ने भी महसूस किया कि सुमन के मुंह से निकले शब्द उस के दिल की गहराइयों से निकले थे. अनायास हुए इस परिचय से वह खुश था.
‘‘सुमन जी, आप की तबीयत खराब है, आप को अकेले नहीं आना चाहिए था.’’ कमल ने कहा तो सुमन बोली, ‘‘साथ आने वाला कोई नहीं था, अगर किसी को लाती भी तो आप से कैसे मुलाकात हो पाती.’’ परीक्षा के बाद उसी रेस्टोरेंट में मिलने के वादे के साथ दोनों परीक्षा हाल में चले गए.
2 भाइयों की इकलौती बहन सुमन की पारिवारिक माली हालत अच्छी थी. उस का बड़ा भाई सेमीगवर्नमैंट नौकरी में था, जबकि छोटा अभी पढ़ रहा था. सुमन की मां राधादेवी दिमागी रूप से कुछ कमजोर थी. इसीलिए उस के पिता सुभाष की अपनी पत्नी राधा देवी से बिलकुल नहीं पटती थी. मांबेटी दोनों सुभाष से अलग रहती थीं. राधा की पूरी देखभाल सुमन ही करती थी.
हालांकि कमल का व्यक्तित्व साधारण था, पर उस की मिठास भरी बातचीत और शब्दों की प्रस्तुति मनमोहक थी. गोरीचिट्टी, सुराहीदार गर्दन वाली सुमन पहली ही मुलाकात में कमल के आकर्षण पाश में बंध गई. वैसे भी दिल का कोई ऐसा भरोसा नहीं होता कि कब किस पर आ जाए.
परीक्षा खत्म होने के बाद सुमन और कमल उसी रेस्टोरेंट में मिले. चाय की चुस्कियों के बीच हुए वार्तालाप में दोनों एकदूसरे के बारे में जानतेसमझते रहे. बातों के बीच ही दोनों ने एकदूसरे को अपने मोबाइल नंबर भी दे दिए. कमल ने तबियत खराब होने की वजह से सुमन के सामने रात को बीकानेर के किसी होटल में रुकने का प्रस्ताव भी रखा.
लेकिन सुमन ने उस का प्रस्ताव यह कह कर खारिज कर दिया कि उसे बीमार मां की देखभाल करनी होती है. फोन पर बातें करते रहने के वादे के साथ कमल और सुमन अपनेअपने घर लौट गए.
उस दिन के बाद कमल और सुमन के बीच फोन पर अक्सर बातें होने लगीं. दोनों के पास एक ही कंपनी के सिम थे, जिन पर कंपनी के प्लान के अनुसार अनलिमिटेड बातें की जा सकती थीं. रोजरोज की बातों से दोनों के बीच की दूरियां घटती गईं. बरसात की वेगवती नदी और उफनते यौवन का कोई पता नहीं होता कि किस राह चल पड़े. कमल और सुमन के साथ भी ऐसा ही हुआ. बातों बातों में दोनों के बीच प्यार के अंकुर फूट निकले. बात आगे बढ़ी तो दोनों ने शादी करने का फैसला कर लिया. इस बीच 12 महीने गुजर गए थे.
दिसंबर, 2016 का आखिरी सप्ताह चल रहा था. कमल ने सुमन से कहा, ‘‘सुमन, अब मुझ से अलगाव नहीं सहा जाता. रातों की नींद और दिन का चैन छिन गया है. क्यों न हम नए साल में शादी कर लें.’’
‘‘मेरा भी हाल कुछ ऐसा ही है. पढ़ाई भी चौपट हो गई है. रात दिन तुम्हारे बारे में सोचती रहती हूं. लेकिन मां की देखभाल मेरे पैरों की बेडि़यां बनी हुई है. अगर मां नहीं होती तो कभी की तुम्हारी बांहों में पहुंच जाती. मेरे जीवन की यही बड़ी मजबूरी है.’’ सुमन बोली.
‘‘देखो सुमन, हर मजबूरी या समस्या का समाधान संभव है. तुम कोई समाधान खोजो. ऐसे कब तक रहा जा सकता है.’’ कमल ने बेबाकी से कहा.
‘‘समाधान तो मैं ने खोज रखा है, बस तुम्हारे मंजूरी की मुहर लगाना बाकी है. तुम्हें मुझ से विवाह कर के घर जंवाई बनना होगा. मैं ही परिवार की मुखिया हूं. छोटीमोटी रोकटोक की मैं परवाह नहीं करती.’’ सुमन ने मन के उद्गार प्रकट कर दिए.
‘‘देखो सुमन, मैं घर का बड़ा बेटा हूं. घर में बूढे मांबाप और घर वाले मुझ पर आश्रित हैं. घर जंवाई बनने की सोच भी नहीं सकता.’’ कमल ने भी अपनी मजबूरी बता दी. कमल ने सुमन को कोई और विकल्प ढूंढने का आश्वासन दिया. बात वहीं खत्म हो गई.
5 जनवरी, 2017 की बात है. नियत समय पर कमल का फोन आ गया. वह बोला, ‘‘सुमन, मैं अपनी दुल्हनियां को लेने आ रहा हूं. कल रात को 3-4 बजे तक. साथ में 2-3 बाराती भी होंगे. तैयार रहना.’’ पलभर रुक कर कमल ने कहा, ‘‘बिना गाजेबाजे की यह बारात गांव के बाहर ही रुकेगी. और हां, मेरा मिस काल सुनते ही अपनी मम्मी के साथ मुख्य सड़क पर आ जाना और साथ में अपने सर्टिफिकेट्स लाना मत भूलना. मैं ने मां की समस्या का समाधान ढूंढ लिया है.’’
सुन कर सुमन खुश हो गई. एक तो उस का मिलन अपने प्रिय से होने जा रहा था और दूसरे कमल ने मां के लिए कोई समाधान ढूंढ लिया था.
6 जनवरी, 2017 को सुमन ने अपनी मां राधादेवी को अपनी सहेली की शादी का बहाना कर के साथ चलने को तैयार कर लिया. मां तैयार हो गई तो वह मन ही मन खुश हुई. दोपहर का खाना बनाने के बाद सुमन ने अपनी आने वाली बारात के लिए देशी घी का हलवा और सब्जी पूड़ी बना कर खाना डिब्बों में रख लिया. रात घिर आई तो वह खुद भी तैयार हो गई.
रात गहराई तो गांव की गलियों में सन्नाटा पसर गया. उधर सुमन कमल के फोन का इंतजार कर रही थी. उस के लिए समय काटना मुश्किल हो रहा था. रात में अपने समय पर कमल की मिस काल आई.
कमल की मिस काल के बाद सुमन मां और अपने सामान के साथ चुपके से गली में निकल आई. गांव से बाहर पहुंचते ही उसे कमल मिल गया. वह बोलेरो गाड़ी ले कर आया था. उस के साथ 3 लोग और थे.
कमल ने राधा के पांव छुए और सुमन से सामान ले कर उन्हें बोलेरो में बिठा दिया. दोनों महिलाओं सहित 6 जनों को ले कर गाड़ी वहां से रवाना हो गई. कुछ ही देर में बोलेरो 15-20 किलोमीटर दूर बिरधवाल हैड पर पहुंच गई.
‘‘अरे नारायण जरा गाड़ी रोकना, मंदिर में मां जी को मत्था टेकवाना है.’’ कमल के कहने पर चालक नारायण ने गाड़ी रोक दी. कमल के इशारा करने पर राधा व सुमन भी उस के साथ गाड़ी से उतर गईं. बिरधवाल हैड पर पुलिस चौकी की बगल में स्थापित मंदिर बंद पड़ा था. चारों ओर सन्नाटा पसरा था.
राधा, सुमन और कमल मंदिर के बरामदे में बैठ गए. वहां तीनों के बीच काफी तर्कवितर्क हुआ. इसी बीच सुमन और कमल के बीच कुछ खुसरफुसर होने लगी. कमल जो कह रहा था, सुमन उस से सहमत नहीं थी. लेकिन कमल ने पहले ही सोच रखा था कि उसे क्या करना है. इसलिए उस ने सुमन को समझाया और अपनी खुशियों व भविष्य का वास्ता दिया.
सुमन भी अपने प्रिय की बांहों के सुखद सपने देख रही थी. आखिरकार उस ने सोच लिया कि बीमार मां के लिए अपने जीवन की खुशियों की बलि नहीं चढ़ाएगी. उस ने बुझे मन से ही सही, कमल की बात मान ली.
सुमन के हां करने के बाद कमल ने सुमन के साथ मिल कर राधादेवी को दोनों हाथों से पकड़ा और इंदिरा गांधी मेन केनाल के किनारे ले गए. वहां पहुंचते ही दोनों ने उन्हें नहर में धक्का दे दिया. भोलीभाली राधा को जल समाधि दे कर सुमन और कमल गाड़ी के पास लौट आए.
‘‘मां जी, ने मंदिर में ही रुकने का मन बना लिया है.’’ कहते हुए कमल ने किसी को बोलने का मौका नहीं दिया.
7 जनवरी, 2017 की सुबह सब कुछ सही था. अलबत्ता राधा के घर में सन्नाटा पसरा हुआ था. सुमन के बाबा राजेंद्र आशंकित मन से राधा के घर में गए. सुमन और राधा घर में दिखाई नहीं दीं तो उन्होंने यह बात घर वालों को बताई. उन लोगों से सलाहमशविरा करने के बाद राजेंद्र बिश्नोई ने सूरतगढ़ के पुलिस थाना सदर जा कर राधा और सुमन की गुमशुदगी दर्ज करवा दी.
थानाप्रभारी कृष्ण कुमार बलवदा ने इस मामले की जांच के लिए सहायक सबइंसपेक्टर हनुमान प्रसाद को जांच अधिकारी नियुक्त कर दिया. किसी युवक के साथ युवती का भाग जाना तो साधारण बात थी, लेकिन इस मामले में अनोखा यह था कि युवती के साथ उस की प्रौढ़ मां भी लापता थी.
जांच अधिकारी ने सुमन की काल डिटेल्स खंगाली तो एक नंबर पुलिस की निगाहों में चढ़ गया. जांच अधिकारी हनुमान प्रसाद को लगा कि अगर मोबाइल काल्स की तह में जाया जाए तो इस मामले का जल्दी खुलासा हो सकता है. राडार पर आए मोबाइल नंबर अजमेर जिले के कल्याणीपुरा निवासी कमल किशोर शर्मा के निकले. कमल के मोबाइल नंबर की डिटेल्स खंगालने पर 3-4 संदिग्ध नंबर और मिले.
थानाप्रभारी कृष्ण कुमार के आदेश पर हनुमान प्रसाद के नेतृत्व में रीडर जयपाल सिंह, कांस्टेबल रामकुमार और महिला सिपाही शिमला सहित 4 लोगों की एक टीम गठित कर के अजमेर भेजी गई.
कमल के गांव से कमल और सुमन तो पुलिस के हत्थे नहीं चढ़े, पर संदिग्ध मोबाइल नंबर धारक नारायण रावत, उस के भतीजे बबलू और नागौर निवासी जितेंद्र सुथार को पुलिस टीम ने हिरासत में ले लिया. उन्हें साथ ले कर पुलिस टीम सूरतगढ़ लौट आई.
पूछताछ में नारायण ने पुलिस को बताया कि कमल और सुमन गाड़ी में कल्याणीपुरा तक आए थे. बिरधवाल हैड पर मंदिर के नजदीक सुमन, उस की मां राधा और कमल गाड़ी से उतर कर मंदिर में चले गए थे. लेकिन वापसी में सुमन और कमल ही लौटे. कमल ने हमें बताया कि राधा देवी मंदिर में ही रुक गई हैं. उस ने यह भी बताया कि कमल व सुमन अजमेर की तरफ निकल गए थे.
राधा की बरामदगी हेतु पुलिस ने बिरधवाल हैड क्षेत्र को खंगालना शुरू कर दिया. उस क्षेत्र के निवासियों से भी पूछताछ की गई. लेकिन सघनता से जांच के बाद भी उस समय कोई उपलब्धि हासिल नहीं हुई.
13 जनवरी, 2017 की शाम को राधा का शव इंदिरा गांधी नहर के बिरधवाल हैड के पास दिखाई दे गया. संभवत राधा देवी ने नहर में गिरने के बाद झाड़झंखाड़ में फंस कर दम तोड़ दिया था.
लाश मिलने के बाद अपहरण के मामले में नया मोड़ आ गया. 13 जनवरी को ही सुमन के पिता सुभाष बिश्नोई की तहरीर पर पुलिस ने कमल, नारायण रावत, नारायण के भतीजे बबलू व जितेंद्र सुथार के खिलाफ भादंवि की धारा 302, 201, 364 व 366 के अंतर्गत केस दर्ज कर के जांच शुरू कर दी.
राधा की मौत का रहस्य गहरा गया था. वह किसी हादसे का शिकार हुई थी या किसी ने उसे जानबूझ कर नहर में गिराया था, इस का खुलासा सुमन और कमल के सामने आने के बाद ही संभव था. कृष्ण कुमार के अनुरोध पर संभाग मुख्यालय पर स्थापित साइबर सेल का सहयोग लिया गया.
साइबर सेल यूनिट के दक्ष सदस्यों ने कमल द्वारा उपयोग में लाई जा रही अलगअलग सिमों की सैकड़ों काल डिटेल्स खंगाल डालीं. निस्संदेह कमल सुमन को साथ ले कर पुलिस से आंखमिचौली खेल रहा था.
उच्च अधिकारियों के निर्देश पर डीएसपी मोहम्मद अयूब की अगुवाई में एक विशेष टीम गठित की गई. जिस में राजियासर थाना प्रभारी गणेश कुमार, सिटी थानाप्रभारी नारायण सिंह, डीएसपी कार्यालय के उपनिरीक्षक रामप्राद व जैतसर थाना के एसआई रमेश कुमार को शामिल किया गया.
विशेष टीम और साइबर सैल कमल किशोर को पकड़ने की हरसंभव कोशिश कर रही थी. कमल के घर गई पुलिस टीम ने 14 जनवरी से 22 जनवरी तक जयपुर-टोंक, सूरत व गुजरात तक के कई शहरों को खंगालते हुए करीब 6-7 हजार किलोमीटर की दूरी नाप डाली. पर पुलिस के हाथ खाली ही रहे.
22 जनवरी को साइबर सैल के सदस्यों की आंखें खुशी से चमक उठीं. सर्विलांस पर लगा कमल का मोबाइल गुजरात के भावनगर में अपनी मौजूदगी दिखा रहा था. संदेश मिलते ही उस की तलाश में जुटी टीम आननफानन में भावनगर पहुंच गई. टीम ने भावनगर के नारी चौकड़ी बस स्टैंड पर एक बस में सवार होने जा रहे कमल व सुमन को हिरासत में ले लिया. दोनों को ले कर पुलिस दल अगले दिन सूरतगढ़ लौट आया.
25 जनवरी को पुलिस ने आरोपियों को सूरतगढ़ के एसीजेएम बलवंत भारी की अदालत में पेश कर के पूछताछ के लिए 3 दिन के पुलिस रिमांड पर ले लिया. पुलिस पूछताछ में कमल के रहस्योदघटन से पुलिस अधिकारी हैरान रह गए.
राधा के मर्डर में उस की सगी बेटी सुमन की भी बराबर की भागीदारी थी. पुलिस ने पांचवें हत्यारोपी के रूप में सुमन को भी नामजद कर लिया. सुमन ने बताया कि उस के दिलोदिमाग में कमल बसा हुआ था और वह उस के साथ विवाह कर के अपनी गृहस्थी बसाना चाहती थी.
सुमन के बताए अनुसार वह अपनी मां से बेतहाशा प्यार करती थी. मां दिमागी रूप से अस्वस्थ रहती थी. अगर वह कमल से शादी कर के उस के साथ चली जाती तो उस के पीछे उस की मां की हालत जानवरों से भी बदतर हो जाती. वह जीते जी नरक भोगने को मजबूर हो जाती. मां को संभावित नरक से मुक्ति दिलाने के लिए ही कमल और उस ने एक राय हो कर राधा को जीवन से मुक्त कर दिया था.
सुंदर सपनों का भावी दांपत्य जीवन जीने की लालसा लिए सुमन ने अपने आशिक कमल शर्मा के साथ अपनी मां के खून से अपने हाथ तो रंगे ही 3 अन्य लोगों को भी अपराध में भागीदार बना दिया था. पूछताछ में दोनों ने यह भी बताया कि वे दोनों किसी कोर्ट अथवा मंदिर में शादी करना चाहते थे. लेकिन मां की हत्या की घटना से उन के होश उडे़ हुए थे. सुमन और कमल के पास जो पैसे थे, वे खर्च हो गए थे. वे दोनों भावनगर की किसी फैक्ट्री में नौकरी करने की मंशा लिए बस से वहां जाना चाहते थे, लेकिन इस से पहले ही पुलिस के हत्थे चढ़ गए थे.
पुलिस ने पूछताछ के बाद हत्या के लिए प्रयोग में ली गई बोलेरो गाड़ी जो चालक नारायण रावत के भाई के नाम रजिस्टर्ड थी, बरामद कर ली. रिमांड अवधि की समाप्ति के बाद अदालत ने पांचों आरोपियों को जेल भेज दिया. Rajasthan Crime Story
— इसके बाद अदालती कार्रवाई में क्या हुआ यह ज्ञात नहीं है.
— 2017 में प्रकाशित






