Family Conspiracy Case. अशोक कुमार जैन ने खुद की मेहनत से करोड़ों का फाइनैंस का बिजनैस तो खड़ा किया और तमाम चलअचल संपत्ति जुटाई. इस के बावजूद ऐसा क्या हुआ कि उन की पत्नी और एकलौते बेटे ने रिश्तेदारों के साथ साजिश रच कर उन्हें पागलखाने भिजवा दिया.
6 दिसंबर, 2016 को राधारमण बंसल दिल्ली के शाहदरा की अनाजमंडी स्थित अपनी दुकान पर दोपहर का खाना खा कर आराम कर रहे थे, तभी 3 बजे के करीब जगाने पर उन की आंखें खुलीं तो उन्होंने अशोक कुमार जैन को सामने खड़े पाया. वह उन के घनिष्ठ मित्र थे. वह पूर्वी दिल्ली के कड़कड़डूमा के ऋषभ विहार स्थित अपनी कई करोड़ की कोठी में एकलौते बेटे सिद्धार्थ जैन और पत्नी सुमन जैन के साथ रहते थे.
अशोक कुमार जैन का फाइनैंस का कारोबार था. उन की कई फाइनैंस कंपनियां थीं, जिन के उन्होंने कनाट प्लेस में 3 औफिस बना रखे थे. इस तरह अशोक कुमार जैन एक बड़े बिजनैसमैन थे. वह करोड़ों रुपए की चलअचल संपत्ति के मालिक थे. राधारमण बंसल से उन की 38 साल पुरानी गहरी दोस्ती थी.
अशोक कुमार जैन को देख कर राधारमण उठ बैठे. लेकिन अशोक कुमार जैन की हालत देख कर वह हैरान रह गए, क्योंकि हमेशा मुसकराते रहने वाले अशोक कुमार जैन के चेहरे पर घबराहट साफ दिख रही थी. वह जो कुर्ता पहने थे, वह गंदा और फटा हुआ था, पैरों में भी वह कुछ नहीं पहने थे. उन की दाढ़ी भी बढ़ी हुई थी. इस से पहले कि राधारमण कुछ पूछते, उन्होंने कहा, ‘‘जरा 60 रुपए दो, रिक्शे वाले को देने हैं.’’






