Hindi Crime Story: कोई बहन गलतियों का पिटारा बनने के बावजूद इतनी खुदगर्ज हो सकती है कि लालच में अपने ही एकलौते भाई की जान ले ले, सोचा भी नहीं जा सकता. लेकिन रचना तो ऐसी ही निकली. उसे क्या सजा मिलेगी, यह अलग बात है, लेकिन उस ने अपनी मां का आंचल तो सूना कर ही दिया. काले रंग की वह लेंसर कार बड़ी तेजी से लुधियानाअमृतसर मार्ग पर जालंधर बाईपास की ओर भागी चली जा रही थी. कार में करीब 60 साल की एक औरत और 26-27 साल का एक लड़का सवार थे. दोनों बहुत घबराए हुए लग रहे थे. लड़का कार चलाते हुए बारबार पीछे मुड़ कर देख रहा था. इस की वजह यह थी 3 मोटर साइकिलों पर सवार लोग कार का पीछा कर रहे थे और उसे लगातार ललकारते हुए रुकने को कह रहे थे.

जिस तरह कार भाग रही थी, उस से यही लग रहा था कि कार चलाने वाला लड़का काफी होशियार है, लेकिन जीटी रोड पर वाहनों की आवाजाही काफी थी, जिस की वजह से उसे कार भगाने में परेशानी हो रही थी. कई बार उस की कार दुर्घटनाग्रस्त होतेहोते बची थी. लेकिन उस कार चालक लड़के को संभवत: दुर्घटना की उतनी चिंता नहीं थी, जितनी पीछा करने वालों की थी. शायद इसीलिए वह किसी भी तरह उन की पकड़ से दूर निकल जाना चाहता था.

बगल वाली सीट पर बैठी औरत लड़के के कंधे पर अपना हाथ रख कर बारबार उसे सांत्वना दे रही थी. तभी कार अचानक झटका खा कर हिचकौले लेने लगी. इस से लड़के के चेहरे पर घबराहट झलकने लगी. उस ने फ्यूल गेज पर नजर डाली. सुई एकदम नीचे बैठ चुकी थी. उस ने बगल में बैठी औरत से कहा, ‘‘अब क्या होगा? कार का पैट्रोल खत्म हो गया है?’’

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