Gold Loan Company Robbery. चंद्रशेखर भाऊ राणे ने डकैती की फुलप्रूफ योजना बनाई थी. अपनी योजना के अनुसार वह साढ़े 4 करोड़ रुपए की डकैती डालने में सफल भी रहा, लेकिन उस की नीयत खराब हो गई और उस ने अपने साथियों को उन का सही हिस्सा नहीं दिया.

पहली अक्तूबर, 2013 की बात है. नासिक के बिटको क्षेत्र, नासिक रोड की और्केड बिल्डिंग स्थित मणप्पुरम फाइनेंस कंपनी के नीचे औफिस के सामने एक टवेरा कार आ कर रुकी. कार से 6 लोग उतरे. उन में से 3 पुलिस की वरदी में थे और 2 का चेहरा काले कपड़े से ढंका हुआ था. ढंके चेहरे वालों को दाएंबाएं से 2 वरदीधारी पकड़े हुए थे. वे सब सीढि़यां चढ़ कर मणप्पुरम के औफिस में चले गए. पुलिस को आया देख औफिस के सभी लोग चौंके. अंदर पहुंचते ही एक पुलिस वाले ने पूछा, ‘‘यहां मैनेजर कौन है.’’ तब तक दूसरे पुलिस वाले ने ढंके चेहरे वाले दोनों लोगों की घुटनों के बल फर्श पर बैठा दिया था.

मैनेजर उत्तम दराडे ने अपने केबिन से बाहर आ कर कहा, ‘‘जी, मैं हूं यहां का मैनेजर, बताइए क्या बात है?’’   ‘‘ये दोनों चोर हैं,’’ एक वरदीधारी मुंह पर काला नकाब बंधे व्यक्तियों की ओर इशारा कर के बोला, ‘‘इन्होंने आप के यहां चोरी का सोना गिरवी रख कर पैसा उठाया है. पास आ कर पहचानो इन्हें.’’

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पुलिस का आदेश था. मैनेजर उत्तम दराडे ने आगे बढ़ कर उन में से एक आदमी के चेहरे से काला कपड़ा हटाना चाहा. लेकिन यह क्या, इस से पहले ही उन में से एक पुलिस वाले ने पिस्तौल निकाल कर उत्तम दराडे की पसलियों से सटाते हुए कहा, ‘‘हिलना मत, वरना जान से हाथ धो बैठोगे.’’

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