प्रेमिका बनी ब्लैकमेलर – भाग 2

समय के साथसाथ जैसे सिमरन बड़ी होती गई, उस की सुंदरता में और भी निखार आता गया. जवान होतेहोते वह रूप की रानी बन गई. होश संभालते ही उस ने भी मोबाइल चलाना सीख लिया था. उसी दौरान उसने फेसबुक, वाट्सऐप व इंस्टाग्राम चलाना सीख लिया था. उस के बाद वह अपनी सुंदर फोटो खींच कर सोशल मीडिया पर अपलोड करने लगी. जिस की अदाएं देख कर फेसबुक पर उस के हजारों दोस्त बन गए.

हजारों लोगों के फालोअर बनते ही उस ने अपने रखरखाव पर और अधिक ध्यान देना शुरू कर दिया था, जिस के कारण दिनबदिन उस के फालोअर्स की संख्या में बढ़ोत्तरी होती गई. उसी दौरान उस की फूफी फातिमा का इंतकाल हो गया. फूफी के इंतकाल के बाद उस ने उस घर को छोड़ दिया और किराए का कमरा ले कर अकेली ही रहने लगी. उसे पहले से ही अपनी खूबसूरती पर नाज था. उसी खूबसूरती के कारण ही उस के आसपास में कई चाहने वाले भी बन गए थे.

उन्हीं चाहने वालों में था उस का एक पड़ोसी राशिद, जिस की शनीफ से अच्छी पटती थी. कई बार राशिद ने शनीफ के सामने सिमरन की सुंदरता की तारीफ की थी. लेकिन वह उस से कभी भी रूबरू नहीं हो पाया था. सिमरन की तारीफ सुन कर कई बार उस का उस से मिलने का मन भी करता, लेकिन समय अभाव के कारण वह मिल नहीं पाया था.

शनीफ मलिक से हुआ प्यार

अब से लगभग डेढ़ साल पहले की बात है. हर रोज की तरह उस दिन भी शनीफ अकेला ही दुकान पर बैठा हुआ था, तभी उस की दुकान के सामने एक स्कूटी आ कर रुकी. उस स्कूटी पर सवार युवती निहायत ही खूबसूरत थी. शनीफ की जैसे ही उस युवती पर नजर पड़ी तो वह उसे देखता ही रह गया. उस ने सोचा भी न था कि वह उस की दुकान से अंडे लेने आई है. लेकिन जैसे ही वह युवती उस की दुकान की ओर बढ़ी, उस के दिल की धडक़न दोगुनी हो चली थी. जैसे ही वह पास आ कर खड़ी हुई, वह उसे देखता ही रह गया.

युवती ने दुकान पर पहुंचते ही अंडे देने को कहा. तभी उस के दिमाग में आया कि कहीं यही तो सिमरन नहीं है. उस ने अंडे गिनतेगिनते कुछ हिम्मत जुटाई, “आप का नाम सिमरन तो नहीं?”

“जी हां, मैं ही सिमरन हूं. पर आप मेरा नाम कैसे जानते हो?”

“यूं ही आप के बारे मे मेरे दोस्त चर्चा करते रहते हैं.”

“कौन है, आप का दोस्त?”

“वही राशिद जो आप के पड़ोस में रहता है.”

“ओहो! तो वह आवारा यहां तक घूमता है. वैसे मैं आप का नाम जान सकती हूं.”

“हां, क्यों नहीं. मुझे शनीफ मलिक कहते है.”

“बहुत अच्छा नाम है आप का. ओके चलती हूं.”

“ठीक है, फिर आगे भी हमारी दुकान की शोभा बढ़ाने के लिए आते रहना.”

“जी जरूर, लेकिन आप के बैठने का समय क्या है? क्योंकि मैं इस से पहले भी कई बार यहां से अंडे खरीद कर ले जा चुकी हूं. लेकिन उस वक्त तो शायद आप के वालिद ही मिलते थे.”

“जी हां, दोपहर तक दुकान वही संभालते हैं. मेरी ड्यूटी शाम को शुरू होती है. आप ये मेरा नंबर रख लीजिए, जब आप को अंडे चाहिए, मुझे फोन पर ही बता देना. मैं तुम्हारे आने से पहले ही ताजे अंडे छांट कर रख लिया करूंगा.”

“तो फिर आप ने जो मुझे अंडे दिए हैं, वो बासी हैं क्या?” युवती ने मजाक के लहजे में प्रश्न किया.

“नहींनहीं, फिर भी जब आप मुझे बता कर आओगी तो मुझे सहूलियत होगी.” कह कर शनीफ ने उसे एक विजिटिंग कार्ड थमा दिया. उस के बाद सिमरन हंसती हुई वहां से चली गई.

पहली मुलाकात में ही शनीफ उस की खूबसूरती का दीवाना हो गया था. उस दिन के बाद वह जल्दी ही मोबाइल पर उस की फेसबुक और इंस्टाग्राम को खंगालने में लग गया और जल्दी ही सिमरन के साथ फेसबुक और दूसरे मीडिया प्लेटफार्म पर जुड़ गया. फिर कुछ ही दिनों में दोनों के बीच दोस्ती गहराने लगी.

शनीफ देखनेभालने में हैंडसम था. धीरेधीरे दोनों में दोस्ती इस कदर पक्की हो गई कि उन्हें एकदूसरे से मिले बिना चैन नहीं पड़ता था. दोनों के बीच प्रेम प्रसंग चालू हुआ तो दोनों ही साथ जीनेमरने की कसमें भी खाने लगे थे. उन्हीं एकांत मुलाकातों में सिमरन ने पूरी तरह से अपना शरीर उसे समर्पित कर दिया. सिमरन को पा कर शनीफ अपने आप को बहुत ही भाग्यशाली समझने लगा था. उसे घमंड इस बात का था कि एक खूबसूरत और मौडर्न लडक़ी उस के इतने करीब थी कि उस ने कभी सोचा भी नहीं था.

सिमरन का खर्च उठाने लगा शनीफ

सिमरन शेख से गहरी दोस्ती हो जाने के बाद शनीफ मलिक उसे खर्च के लिए कुछ पैसे भी देने लगा था. वह पूरी तरह से सिमरन को अपनी मानने लगा था. यही कारण रहा कि उस ने कभी भी उसे पैसे देने से मना नहीं किया. समयसमय पर वह उस के छोटेमोटे खर्च खुद ही वहन करने लगा था.

उसी दौरान कई बार दोनों के बीच शारीरिक संबंध भी बने. उन्हीं अवैध संबंधों के दौरान सिमरन अकसर दोनों की वीडियो यह कह कर बना लेती थी कि यह उस का शौक है. उस के बाद वह उन वीडियो को अन्य फोन में भी सेव कर लेती थी. लेकिन शनीफ उसे इस कदर चाहने लगा था कि उस ने कभी भी किसी भी प्रतिक्रिया पर शक नहीं किया था.

उसी दौरान शनीफ के घर वालों ने उस के निकाह करने की सोची. फिर जल्दी ही शनीफ के घर वाले उस के निकाह की चर्चा करते हुए एक लडक़ी की तलाश में जुट गए. यह बात शनीफ ने सिमरन के सामने रखी. उस ने सिमरन से साफ शब्दों में कहा कि इस से पहले मेरे घर वाले मेरा निकाह किसी और लडक़ी से करें, हम दोनों कोर्ट मैरिज कर लेते हैं.

शनीफ जानता था कि अगर उस ने अपने घर वालों के सामने उस का जिक्र किया तो वह उस के साथ निकाह करने के लिए किसी भी हाल में राजी होने वाले नहीं. लेकिन सिमरन ने उस के साथ निकाह करने से साफ मना कर दिया. सिमरन का कहना था कि अभी निकाह करने की क्या जल्दी है. वह इतनी जल्दी निकाह के बंधन में बंधना नहीं चाहती.

सिमरन की बात सुनते ही शनीफ को बहुत बड़ा झटका लगा. वह उसे किसी भी कीमत पर खोना नहीं चाहता था. उस के लिए उसे चाहे कितनी भी कीमत क्यों न चुकानी पड़े.

प्रेमिका बन गई ब्लैकमेलर

उस के बाद सिमरन ने नएनए खर्च बता कर शनीफ से मोटी रकम ऐंठनी शुरू कर दी थी. उस ने कई बार उस की मांग पूरी कर भी दी, लेकिन उस की मांग पहले से ज्यादा बढऩे लगी थी. शनीफ ने उस के सामने अपनी मजबूरी बताते हुए पैसे देने से मना किया तो उस ने उसे उस के साथ बनाई गई अश्लील वीडियो दिखा कर धमकाने की कोशिश की.

उस ने साफ शब्दों में कहा कि अगर उस ने उस की मांग पूरी न की तो वह उस की सारी वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड कर देगी, जिस के बाद वह सारी जिंदगी कुंवारा ही बैठा रहेगा. सिमरन ने उस के कई फोन काल भी रिकौर्ड कर रखे थे.

लिवइन पार्टनर का खूनी खेल – भाग 2

आज से करीब 2 साल पहले रुखसाना काकोड़ (जिला टोंक) से अपने चारों बेटों के साथ मालपुरा गेट इलाका जयपुर में आ कर रहने लगी. उस ने एक कमरा किराए पर लिया और सांगानेर की एक फैक्ट्री में नौकरी कर ली. रुखसाना की गाड़ी चलने लगी.

जयपुर आने के महीने भर बाद एक रोज किसी अंजान व्यक्ति का फोन रुखसाना के मोबाइल पर आया. रुखसाना ने काल रिसीव कर कहा, “हैलो.”

तब दूसरी तरफ से व्यक्ति बोला, “आप रुखसाना बोल रही हैं?”

“हां, मैं रुखसाना बोल रही हूं. आप कौन बोल रहे हैं? मैं ने पहचाना नहीं आप को.” रुखसाना ने कहा.

तब वह बोला, “मैं नजलू खान बोल रहा हूं. मुझे आप की आवाज बड़ी प्यारी लगती है.”

यह सुनते ही रुखसाना को गुस्सा आ गया. उस ने कहा, “बकवास मत करो और सुनो, दोबारा फोन भी मत करना.”

रुखसाना ने फोन काट दिया. सोचा कि कोई लफंगा है. एक बार डपटने के बाद दोबारा फोन नहीं करेगा. मगर यह उस की सोच तब गलत साबित हुई, जब 5 मिनट बाद उस का दोबारा फोन आ गया.

वह बोला, “मुझे तुम्हारी आवाज बहुत मीठी लगती है. मैं ने जब से तुम्हें देखा है और आवाज सुनी है. मैं तुम्हारा दीवाना हो गया हूं. लगता है मुझे तुम से प्यार हो गया है…”

सुन कर रुखसाना उस की बात बीच में काटते हुए बोली, “मैं तुम्हें जानती नहीं. फिर क्यों बारबार फोन कर रहे हो. दोबारा मुझे फोन मत करना. यही ठीक रहेगा तुम्हारे लिए.”

रुखसाना के संपर्क में आया नजलू खान

कहने के साथ ही रुखसाना ने फिर काल डिसकनेक्ट कर दी. मगर उस व्यक्ति का फोन जिस ने अपना नाम नजलू खान बताया था, दिन में कईकई बार रुखसाना के पास आने लगा. वह हमेशा उस की आवाज की तारीफ करता था. बोली बड़ी प्यारी लगती है. रुखसाना उस के दिन भर आने वाले फोन काल्स से तंग आ गई थी. मगर वह करती भी तो क्या.

नजलू खान (24 साल) निवासी गांव सूरवाल, जिला सवाई माधोपुर कामधंधे की तलाश में आज से करीब 4 साल पहले जयपुर आया था. उस ने शिकारपुरा रोड, सेक्टर-35 सांगानेर में किराए का कमरा लिया और रहने लगा. वह कुंवारा था और थोड़ा पढ़ालिखा भी. नजलू जयपुर आ कर कपड़े खरीदने और बेचने का काम करता था.

कपड़े के इस धंधे से उसे अच्छीखासी आमदनी होती थी. रुखसाना जब जयपुर आई थी, उन्हीं दिनों एक रोज नजलू की नजर रुखसाना पर पड़ी. तब वह उस की सुंदरता पर मर मिटा. नजलू ने पता किया कि यह महिला कौन है और कहां रहती है, नजलू ने उस के बारे में सारी बातें पता कर लीं.

उसे पता चला कि रुखसाना के पति की मौत हो चुकी है. उस के 4 बेटे हैं. वह अपने बच्चों के साथ मालपुरा गेट इलाके में किराए के कमरे में रहती है और सांगानेर की एक फैक्ट्री में नौकरी करती है. बस, उस के बाद नजलू ने उस फैक्ट्री से रुखसाना का मोबाइल नंबर जुटाया और उसे फोन कर उस की सुंदरता व मीठी बोली की तारीफ करने लगा.

बारबार अजनबी का फोन आने से रुखसाना को फैक्ट्री में परेशानी होने लगी. उस ने उसे डांटाफटकारा, लेकिन वह नहीं माना. आखिर में परेशान हो कर रुखसाना ने नजलू खान को पति की मौत और बच्चों के बारे में सब कुछ बता दिया, ताकि उस से पीछा छुड़ा सके. इस के बाद भी नजलू ने फोन करना बंद नहीं किया.

नजलू ने रुखसाना से कहा, “मैं तुम्हारे चारों बच्चों को अपनाऊंगा. तुम्हें और तुम्हारे बच्चों को बहुत अच्छी तरह से रखूंगा.”

रुखसाना उस की बातों में आ गई. रुखसाना ने पति की मौत के बाद जो धक्के खाए थे, उस से उसे ऐसा लगा था कि बिना सहारे के एक औरत का जीवन बहुत कठिन है. नजलू उसे अच्छा लगा था. नजलू की मीठी बातों के जाल में रुखसाना फंस गई थी.

नजलू के साथ रहने लगी लिवइन रिलेशन में

रुखसाना ने तय कर लिया था कि वह नजलू के साथ रहेगी. वह उस के कमरे पर आनेजाने लगा. लव अफेयर के बाद रुखसाना और नजलू खान के बीच अवैध संबंध बन गए तो दोनों लिवइन में साथ रहने लगे. रुखसाना ने नजलू खान को अपना तनमन सब समर्पित कर दिया. नजलू से रुखसाना उम्र में भले ही 6 साल बड़ी थी, मगर वह नजलू को शारीरिक सुख दे कर जब तृप्त कर देती तो वह उस के आगेपीछे मंडराता रहता.

रुखसाना के नजलू के साथ लिवइन रिलेशन में रहने का पता जब मुन्नी को लगा, तब वह रुखसाना को समझाने लगी, “बेटी, तू गलत आदमी के साथ रह रही है. यह रिश्ता तोड़ डाल. मैं अपनी बिरादरी में अच्छा लडक़ा देख कर तेरा निकाह कर दूंगी. अगर तू निकाह करना चाहेगी तो. मगर ये रिश्ता तोड़ दे.”

सुन कर रुखसाना बोली, “अम्मी, ये बहुत भोला है. बहुत अच्छा है. इस से निकाह करूंगी तो मेरी और बच्चों की जिंदगी सुधर जाएगी.”

यह सुन कर मुन्नी कसमसा कर रह गई. मुन्नी ने नजलू को भी बहुत समझाया. मगर मुन्नी की बात न रुखसाना ने मानी और नजलू ने. नजलू ने रुखसाना पर ऐसा जादू किया था कि उस ने मां की एक नहीं सुनी और वह उस के साथ रहने लगी.

शुरू में नजलू काफी अच्छे से रहा. बच्चों के कपड़े धोता, खाना बना देता. रुखसाना फैक्ट्री में काम करने जाती तो पीछे बच्चों का ध्यान भी रखता था. बच्चों को मोबाइल तक ला कर दिया. रुखसाना यह सब देख कर नजलू के छलावे में आ गई.

एक साल तक तो सब कुछ ठीक रहा, लेकिन उस के बाद नजलू का बरताव बदल गया. वह रुखसाना पर हाथ उठाने लगा. जब रुखसाना अपनी मां के घर जाती तो शरीर पर कई जगह नील के निशान दिखते थे. मां पूछती कि ये निशान कैसे हैं?

रुखसाना बात छिपा जाती और कुछ न कुछ बहाना कर देती. लेकिन मुन्नी पास बैठ कर रुखसाना का हाथ अपने सिर पर रखवा कर कसम दिलाती थी. तब रुखसाना सच बताती, वह रोते हुए बताती थी, “अम्मी, गलती हो गई. मैं ने नजलू को पहचानने में गलती कर दी.”

मां ने रुखसाना को नजलू से दूरी बनाने को कहा

रुखसाना ने मां को बताया कि नजलू ने एक रोज सिर पर भी वार किया था. रुखसाना का सिर फूट गया था, टांके आए थे. एक बार रुखसाना का हाथ भी फ्रैक्चर कर दिया, तब पट्टी करवानी पड़ी थी. मुन्नी ने थाने में रिपोर्ट भी कराई थी कि नजलू मेरी बेटी को मारता है. नजलू रुखसाना को धमकी भी देता था कि तेरे बच्चों और भाई को मार दूंगा. रुखसाना अब नजलू की मारपीट व बच्चों, भाई को मारने की धमकी से डरने लगी थी और चुपचाप लिवइन पार्टनर के जुल्म सहती रही.

मुन्नी ने रुखसाना से कहा कि वह नजलू को छोड़ दे. तब रुखसाना ने मां से कहा था, “मां, अगर मैं ने नजलू को छोड़ा और इस ने मेरे परिवार को कुछ कर दिया तो मैं कैसे जी पाऊंगी.”

तब मुन्नी ने नजलू को समझाया था. तेरी उम्र कम है, रुखसाना का पीछा छोड़ दे. उस के छोटेछोटे 4 बच्चे हैं. लेकिन वह पीछा छोडऩे को तैयार ही नहीं था.

जबरदस्ती का प्यार – भाग 2

पुलिस तुरंत ही उस शख्स के पास पहुंच गई. पुलिस ने नूर हसन को अपनी हिरासत में लेते ही उस की तलाशी ली तो वह मोबाइल नूर हसन के पास निकला. पुलिस ने उस से मोबाइल के बारे में जानकारी ली तो उस ने बताया कि यह मोबाइल उसे उसी रास्ते में मिला था, जहां से सावित्री की लाश मिली थी. लेकिन उसे यह नहीं मालूम था कि यह मोबाइल सावित्री का ही है.

मोबाइल को ले कर नूर हसन ने कई बहाने बनाए,लेकिन पुलिस के सामने उस की एक न चली. पुलिस ने उस से सख्ती से पूछताछ की तो उस ने सावित्री की हत्या की बात कुबूल ली. इस हत्या का राज खुलते ही पुलिस ने आरोपी नूर हसन की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त ब्लेड, मृतका के मोबाइल के साथ ही अन्य सामान भी बरामद कर लिया था.

ठेकेदार नूर हसन ने कुबुला जुर्म

सावित्री की हत्या वाली बात कुबूलते ही नूर हसन से जो कहानी पुलिस को बताई, वह एक प्रेम प्रसंग भरी, दिल को दहलाने वाली कहानी थी.

उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जिले के बाजपुर कोतवाली अंतरगत एक गांव आता है कनौरी. इसी गांव में रहता था भूप सिंह का परिवार. भूप सिंह पेशे से राजमिस्त्री था. भूप सिंह की शादी कई साल पहले सावित्री के साथ हुई थी. राजमिस्त्री के होने के नाते वह ठीकठाक ही कमा लेता था, जिस से दोनों की आजीविका ठीकठाक चलती रही.

समय के साथ सावित्री एक के बाद एक 3 बच्चों की मां बनी. बच्चों में सब से बड़ा बेटा नरेश, उस के बाद बेटी मोहिनी तथा अजय सब से छोटा था. बच्चे बड़े हुए तो घरगृहस्थी का बोझ भी बढ़ गया था. जिस के कारण परिवार आर्थिक परेशानियों से गुजरने लगा. जब भूप सिंह की कमाई से काम नहीं चला तो सावित्री को भी काम करने पर मजबूर होना पड़ा.

शुरूशुरू में तो भूप सिंह सावित्री को अपने साथ ही काम पर ले जाता था. लेकिन कुछ समय बाद भूप सिंह को शराब पीने की लत लग गई. जिस के कारण मियांबीवी में अनबन रहने लगी थी. इस के बावजूद भी दोनों ने किसी तरह से दिनरात मेहनत कर के अपने बच्चों को पालापोसा.

समय के साथ नरेश बड़ा हुआ तो वह भी अपने पापा के साथ काम पर जाने लगा था. जिस के कारण परिवार की आमदनी बढ़ी तो कुछ पैसा भी इकट्ठा हुआ. उन्हीं पैसों से भूप सिंह ने गांव में 2 कमरों का मकान भी बनवा लिया था. भूप सिंह ने जैसेतैसे कर के एक छोटा सा मकान तो बनवा लिया था, लेकिन मकान बन जाने के बाद उस के सामने आर्थिक परेशानी खड़ी हो गई थी.

उस के बाद उस के बेटे नरेश ने एक ट्रक पर हेल्परी का काम पकड़ लिया. उसी ट्रक पर चलते हुए वह ट्रक चलाना भी सीख गया था. नरेश की शादी हो जाने के बाद भूप सिंह और भी ज्यादा शराब का आदी हो गया था. जिस के व्यवहार से नरेश पूरी तरह से तंग आ चुका था.

उसी समय नरेश की शादी हो गई. शादी हो जाने के बाद वह अपनी पत्नी को साथ ले कर अलग रहने लगा था. नरेश की शादी हो जाने के बाद भूप सिंह के पास अभी 2 बच्चे शादी के लिए और बचे हुए थे. लेकिन शराब की लत के कारण उस के घर में खाने के लाले पडऩे लगे. घर की आर्थिक स्थिति बिगड़ते देख एक बार फिर से सावित्री को मजदूरी करने पर मजबूर होना पड़ा. उस के बाद वह फिर से ठेकेदार नूर हसन के साथ मजदूरी करने लगी.

आर्थिक सहयोग करने लगा ठेकेदार

नूर हसन अभी कम उम्र का था. सावित्री के साथ काम करतेकरते उसे उस से खास लगाव हो गया था. सावित्री के संपर्क में रहते हुए वह उस की पारिवारिक पृष्ठभूमि से पूरी तरह वाकिफ हो चुका था. सावित्री से लगाव होते ही वह उस की हर तरह से सहायता करने लगा था.

सावित्री का पति भूप सिंह तो पहले ही शराबी थी. इस वक्त तक उस ने काम करना भी छोड़ दिया था. उस दौरान वह कुछ मजदूरी करता भी था तो वह उसे शराब में उड़ा देता था. सावित्री ने उसे बहुत समझाने की कोशिश की, लेकिन वह उस की एक भी सुनने को तैयार न था. यही कारण रहा कि दोनों मियांबीवी के संबंधों में खटास पैदा हो गई थी.

नूर हसन के संपर्क में आते ही सावित्री उसे चाहने लगी थी. धीरेधीरे दोनों के दिलों में चाहत का सैलाब उमड़ा तो जल्दी ही दोनों के बीच अवैध संबंध भी स्थापित हो गए. सावित्री सारे दिन नूर हसन के साथ काम करती. काम खत्म होते ही नूर हसन उसे अपनी कामपिपासा शांत करने के लिए कहीं भी ले जाता था.

उस के बाद वह अपनी बाइक से ही उसे उस के घर भी छोड़ देता था. उसी आने जाने के कारण उस के परिवार से घरेलू संबंध हो गए थे. जिसके कारण सावित्री के परिवार वाले नूर हसन से खुश भी थे. लेकिन नूर हसन का भूप सिंह के घर वक्त बेवक्त आनाजाना गांव वालों को खलने लगा था.

यही कारण रहा कि शराब पीने के दौरान भूप सिंह के शुभचिंतकों ने कई बार उसे नूर हसन के बारे में चेताया, लेकिन वह जानता था कि उस की बीवी उसी के साथ रह कर पैसा कमाती है, जिस से उस के परिवार की रोटी चलती है. यही सोच कर वह काफी समय से सावित्री की तरफ से आंख बंद किए बैठा रहा.

लेकिन जब उस की बीवी और नूर हसन को ले कर गांव में चर्चा होने लगी तो उस ने उसे समझाने की कोशिश की. वह नहीं मानी तो उस ने उस के घर से निकलने पर पाबंदी लगा दी. उस के बाद आए दिन मियांबीवी के बीच घर के खर्च को ले कर विवाद बढ़ गया. उसी बीच नूर हसन भी सावित्री को बारबार फोन करता रहता था, जिस से भूप सिंह बुरी तरह से चिढऩे लगा था.

ठेकेदार करने लगा शक

सावित्री काफी समय से मजदूरी करती आ रही थी. घर पर रहते उस का टाइम नहीं कटता था. जब सावित्री को बिना काम किए घर पर रहना मुश्किल हो गया तो उस ने फिर से किसी राजमिस्त्री के साथ काम करना आरंभ कर दिया था. यह जानकारी जल्दी ही नूर हसन तक भी पहुंच गई थी.

नूर हसन को जब पता चला कि सावित्री किसी और ठेकेदार के साथ काम कर रही है तो वह बौखला उठा. उस ने कई बार सावित्री को फोन मिलाया, लेकिन उस ने उस का फोन नहीं उठाया. नूर हसन बुरी तरह से उस का दीवाना बन चुका था. जब सावित्री ने उस का फोन नहीं उठाया तो वह उस के काम पर जाने के वक्त उस के गांव के रास्ते में जा कर खड़ा होने लगा.

लिवइन पार्टनर का खूनी खेल – भाग 1

पहली मई, 2023 को जयपुर शहर (पूर्व) के मालपुरा गेट निवासी मुन्नी ने अपनी बेटी रुखसाना उर्फ अफसाना (30 वर्ष) की हत्या का मामला दर्ज कराया था. एसएचओ सतीशचंद्र चौधरी को दी रिपोर्ट में मुन्नी ने बताया था कि उस की बेटी रुखसाना गत 2 साल से सूखाल सवाई माधोपुर हाल निवास शिकारपुरा रोड, सेक्टर-35 सांगानेर निवासी नजलू खान (24 वर्ष) केसाथ रह रही थी.

30 अप्रैल, 2023 को नजलू खान ने रुखसाना से मारपीट की और उसे जयपुरिया अस्पताल जयपुर में भरती करवाया और वहां मौत होने पर सूचना दे कर भाग गया. मुन्नी की तहरीर पर पुलिस ने नजलू खान के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया. इस के बाद थाना मालपुरा गेट के एसएचओ सतीशचंद्र चौधरी मय पुलिस टीम जयपुरिया अस्पताल पहुंचे. वहां पर रुखसाना की लाश मिली.

रुखसाना का इलाज करने वाले डाक्टरों ने पुलिस को बताया कि रुखसाना को नजलू खान अस्पताल ले कर आया था.  उस ने बताया था कि एक्सीडेंट में रुखसाना घायल हो गई है. साथ में कोई लेडीज नहीं थी. इस कारण डाक्टर ने नजलू से कहा कि वह परिवार की किसी महिला को बुला लें.  नजलू ने तब रुखसाना की अम्मी मुन्नी को फोन कर कहा कि रुखसाना का एक्सीडेंट हो गया है, आप जयपुरिया अस्पताल जल्दी आ जाओ.

मुन्नी जब अस्पताल आई, तब तक रुखसाना की मृत्यु हो गई थी. इस के बाद नजलू खान भी अस्पताल से फरार हो गया था. पुलिस ने रुखसाना के शव का पहली मई, 2023 को पोस्टमार्टम मैडिकल बोर्ड से करा कर शव उस की अम्मा मुन्नी को सौंप दिया.

पता चला कि रुखसाना की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में रूह कंपा देने वाला सच सामने आया है. घुटनों से वार करने के कारण रुखसाना की दोनों तरफ की 3-3 पसलियां टूट गई थीं. लिवर फट गया था. छाती और पेट पर घुटनों से कई वार किए गए. अंदर इतनी ब्लीडिंग हुई कि पेट में 2 यूनिट से ज्यादा खून जमा हो गया. 18 से अधिक गंभीर चोटें, छोटीमोटी अनगिनत चोटें पाई गईं. लिवइन पार्टनर ने मारपीट इतनी बुरी तरह से की थी कि रुखसाना की मौत हो गई थी.

लिवइन पार्टनर के खिलाफ लिखाई रिपोर्ट

मामला हत्या का लग रहा था. अगर मामला एक्सीडेंट का होता तो नजलू खान फरार क्यों हुआ. मामले को पुलिस अधिकारियों के संज्ञान में लाया गया. डीसीपी ज्ञानचंद यादव के निर्देश पर एसएचओ सतीशचंद्र चौधरी के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई. पुलिस टीम आरोपी नजलू खान को गिरफ्तार करने के प्रयास में जुट गई.

डीसीपी ज्ञानचंद यादव के निर्देशन में पुलिस ने फरार आरोपी नजलू खान के मोबाइल को ट्रेस करना शुरू किया. सीसीटीवी फुटेज देखे. नजलू खान ने जिन लोगों से 30 अप्रैल, 2023 को बातचीत की थी, पुलिस ने उन लोगों से संपर्क किया. पता चला कि नजलू खान ने पहली मई को पुरानी सिम फेंक कर नया सिम जारी करवाया, लेकिन इस के बावजूद पुलिस से बच नहीं पाया. पुलिस ने पताठिकाना मालूम कर उसे 3 मई, 2023 को हिरासत में ले लिया.

पूछताछ में नजलू खान ने स्वीकार किया कि उस ने रुखसाना के साथ 30 अप्रैल, 2023 को बुरी तरह से मारपीट कर रुखसाना का मर्डर किया था. उस ने पुलिस को बताया कि उसे शक था कि रुखसाना किसी दूसरे आदमी से फोन पर बात करने लगी है. शक के आधार पर ही उस ने रुखसाना को पीटपीट कर मौत के घाट उतार दिया.

जुर्म कुबूल करते ही पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया आरोपी नजलू खान से कड़ी पूछताछ में रुखसाना हत्याकांड की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार से है—

राजस्थान के टोंक जिले के काकोड़ गांव के कमरुद्दीन व मुन्नी की बेटी थी रुखसाना उर्फ अफसाना. मुन्नी के 7 बेटियां हैं. रुखसाना रूपसौंदर्य की मल्लिका थी. वह करीब साढ़े 5 फीट की गोरे रंग की सुंदरी थी. उस की बड़ीबड़ी कजरारी आंखों व खनकती हंसी से जो भी रूबरू हुआ, वह उस का दीवाना हो जाता था. रुखसाना की मीठी बोली थी. जब वह जवान होने लगी तो उस का रूपसौंदर्य खिलता गया. गरीब मांबाप की बेटी को सुंदरता मिले तो कहते हैं कि वह अभिशाप बन जाती है.

टोंक जिला मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर काकोड़ गांव के युवाओं में उस वक्त रुखसाना के रूप की ही चर्चा थी. जब रुखसाना गांव में कहीं काम से निकलती तो लोग उसे मंत्रमुग्ध हो कर देखते रह जाते. बेटी के साथ कहीं कोई ऊंचनीच न हो जाए, इसलिए घर वालों ने रुखसाना की शादी मात्र 14 वर्ष की आयु में निवाई (जिला टोंक) के बबलू खान से कर दी. मात्र 14 बरस की आयु में भी रुखसाना भरेपूरे शरीर के कारण भरीपूरी जवान दिखती थी.

बबलू खान निवाई की पत्थर फैक्ट्री में काम करता था. इस से परिवार का भरणपोषण होता था. शादी के साल भर बाद ही रुखसाना एक बेटे की मां बन गई, जो इस समय 15 बरस का है. इस के बाद रुखसाना के 3 बेटे और हुए 4 बेटों के कारण घरगृहस्थी में खर्चा भी बढ़ गया. मगर कमाई वही थी. पत्थर फैक्ट्री में पत्थर कटिंग के बदले 4 सौ रुपए दैनिक की मजदूरी में. मुश्किल से गुजरबसर हो रही थी.

पत्थर की फैक्ट्री में काम करते समय पत्थर कटिंग से उड़ती धूल उस के गले में जमती गई. कफ रहने लगा. धीरेधीरे पति बबलू खान काफी बीमार रहने लगा और आज से साढ़े 3 साल पहले उस की मौत हो गई. रुखसाना विधवा हो गई. उस के चारों बेटे पिता के साए से वंचित हो गए. पति का इंतकाल होने के बाद घर में फाकाकशी की नौबत आ गई.

कुछ समय तक वह जैसेतैसे ससुराल निवाई में रही. ससुराल वाले उसे पूछते तक नहीं थे. ऐसे में पति की मौत के 6 माह बाद रुखसाना ससुराल छोड़ मायके काकोड़ आ कर मांबाप के पास रहने लगी. मातापिता गरीब थे. मगर दुखियारी बेटी को वे कैसे पनाह नहीं देते, रुखसाना अपने चारों बेटों के साथ करीब साल भर मायके में रही.

इस के बाद रुखसाना ने अपनी मां मुन्नी से कहा, “मां, मैं अब तुम लोगों पर बोझ नहीं बनना चाहती हूं. मैं जयपुर जा कर कोई काम कर लूंगी. उस से अपना और बेटों को भरणपोषण हो जाएगा.”

मां की बात नहीं मानी रुखसाना ने

बेटी के जयपुर जाने की बात सुन कर मां मुन्नी ने कहा, “इतने बड़े शहर में किस के भरोसे रहोगी. जमाना बड़ा खराब है. अकेली जवान औरत कैसे अजनबी शहर में अजनबी लोगों के साथ रह सकेगी. मुझे तो बड़ी चिंता हो रही है. तुम यहीं रहो हमारे पास, जैसेतैसे गुजारा कर लेंगे.”

मां की बात सुन कर रुखसाना बोली, “मां, जिंदगी बहुत लंबी है. कुछ न कुछ तो करना ही होगा. यहां पर मैं कब तक तुम लोगों पर बोझ बनी रहूंगी. अकेली औरतें आज हर काम कर रही हैं, वो अकेली ही रहती हैं. मेरे साथ तो 4 बेटे हैं. मैं अकेली थोड़ी हूं. आप लोग चिंता न करो. ऊपर वाला सब ठीक करेगा.”

“जैसा तू ठीक समझे बेटी. मगर मेरा दिल न जाने क्यों अनहोनी के डर से धडक़ रहा है.” मुन्नी ने शंका जाहिर की. मगर रुखसाना मां को समझाबुझा कर मनाने में कामयाब रही.

जबरदस्ती का प्यार – भाग 1

29 मई, 2023 को सुबहसुबह दोराहा चौकी इंचार्ज देवेंद्र सिंह राजपूत को सूचना मिली कि गांव कनौरा के नजदीक ईदगाह के निकट साबिर हुसैन के गन्ने के खेत में एक औरत की लाश पड़ी हुई है. यह क्षेत्र उत्तराखंड के जिला ऊधमसिंह नगर की बाजपुर कोतवाली के अंतरगत आता है, अत: लाश मिलने की सूचना मिलते ही देवेंद्र सिंह ने तुरंत ही इस की जानकारी बाजपुर कोतवाल प्रवीण सिंह कोश्यारी को दी. उक्त सूचना पर कोतवाल मय फोर्स के घटना स्थल पर पहुंचे.

उस वक्त तक घटनास्थल पर तमाम लोग जमा हो गए थे. मृतक महिला का शव अर्धनग्न अवस्था में पड़ा हुआ था. पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचते ही महिला के ऊपर एक कपड़ा डलवा दिया था. इस के बाद पुलिस ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया. महिला के सिर पर, गले पर चोट के निशान थे, जिन्हें देखते ही लग रहा था कि उस के साथ कोई जोरजबरजस्ती की गई थी. उस के बाद उस की हत्या की गई थी.

महिला के निचले हिस्से के कपड़े भी फटे हुए पाए गए. जिस के कारण उस के साथ दुष्कर्म की आशंका भी जताई जा रही थी. एक औरत की हत्या की जानकारी मिलते ही काशीपुर के एएसपी अभय सिंह, सीओ (बाजपुर) भूपेंद्र सिंह भंडारी व अन्य पुलिस अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंचे.

सावित्री की हुई हत्या

सब से पहले पुलिस ने मृतक महिला की शिनाख्त कराने की कोशिश की. कुछ ही देर में उस महिला की पहचान भी हो गई. पता चला कि महिला कनौरी निवासी भूप सिंह की पत्नी सावित्री देवी थी. पुलिस ने मृतका के बेटे नरेश को फोन कर के घटनास्थल पर बुला लिया.

पुलिस ने नरेश से जानकारी ली तो उस ने बताया कि वह सुबह ही अपनी गाड़ी ले कर काम पर निकल जाता है. उस की मां राजमिस्त्री के साथ मजदूरी करती थी. उस दिन भी वह हर रोज की तरह से काम पर निकली थी,लेकिन शाम को वह वापस नहीं आई. नरेश ने बताया कि उस ने कई बार उन के मोबाइल पर फोन लगाया, लेकिन वह लगातार बंद आ रहा था. उस के बाद देर रात तक उस ने अपने रिश्तेदारों के साथ मिल कर उसे हर जगह खोजा, लेकिन कहीं भी पता नहीं चला. पुलिस पूछताछ में नरेश ने बताया कि गांव में उस की किसी से कोई दुश्मनी भी नहीं है.

घटनास्थल पर मुआयना करने के बाद पुलिस ने फील्ड यूनिट व डौग स्क्वायड टीम को भी बुला लिया था. जिन के द्वारा घटनास्थल के आसपास निरीक्षण कर सभी सबूत इककट्ठा किए गए. खोजी कुतिया कैटी को मृतका के कपड़े सुंघा कर घटनास्थल पर छोड़ा गया. वह गन्ने के खेत में इधरउधर घूमने के बाद एक राजमिस्त्री ठेकेदार के पास जा कर रुकी. पुलिस ने ठेकेदार के बारे में जानकारी ली तो पता चला कि मृतका उसी ठेकेदार के साथ मजदूरी करती थी.

पुलिस को लगा कि एक साथ काम करने के कारण भी ऐसा हो सकता है. क्योंकि मृतका हर वक्त उसी ठेकेदार के संपर्क में रहती थी. उस के बावजूद भी पुलिस ने उस ठेकेदार को पूछताछ के लिए अपनी कस्टडी में ले लिया था. पुलिस पूछताछ में उस ठेकेदार ने इस मामले से पूरी तरह से जानकारी होने से साफ मना कर दिया था.

ठेकेदार ने बताया कि वह कई दिन से उस के पास काम पर नहीं आ रही थी. उस के बाद महिला एसआई रुचिका चौहान द्वारा संपूर्ण काररवाई को पूरा करते हुए मृतका की लाश का पंचनामा भरने के बाद उस की लाश को सील कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया था.

इस मामले में मृतका सावित्री के बड़े बेटे नरेश की ओर से लिखित तहरीर दी गई. तहरीर के आधार पर पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया, जिस की विवेचना इंसपेक्टर प्रवीण सिंह कोश्यारी को सौंपी गई.

4 पुलिस टीमें गठित

सावित्री मर्डर केस की गंभीरता को देखते हुए इस केस को खोलने के लिए 4 टीमों का गठन किया गया था. पहली टीम में सर्विलांस के लिए एसआई भुवनचंद जोशी, कांस्टेबल विनय, दीपक, कैलाश. दूसरी टीम में आसपास में नशा करने वाले संदिग्धों से पूछताछ हेतु व सीसीटीवी फुटेज की जांच करने के लिए एसआई देवेंद्र सिंह राजपूत, विजय सिंह, तीसरी टीम में एसआई भगवान गिरि तथा चौथी टीम में एसएसआई गोविंदा मेहता, एसआई प्रकाश सिंह बिष्ट व कांस्टेबल भूपाल सिंह को शामिल किया गया था.

पुलिस टीमों के गठित होते ही पुलिस ने सब से पहले मृतका के परिवार वालों से पूछताछ की. जिस के द्वारा जानकारी मिली कि मृतक सावित्री देवी पिछले 8-10 साल से सुलतानपट्टी निवासी मकान बनाने वाले ठेकेदार नूर हसन उर्फ नन्हे के साथ काम कर रही थी. दोनों के बीच काफी नजदीकी संबंध भी थे.

28 मई, 2023 को सुबह 9 बजे किसी बात को ले कर दोनों के बीच झगड़ा भी हुआ था. यह जानकारी मिलते ही पुलिस ने नूर हसन को फिर से पूछताछ के लिए हिरासत में लिया. पुलिस ने अपने स्तर से इस मामले को ले कर उस से पूछताछ की तो उस ने इस मामले में किसी भी तरह की जानकारी नहीं दी.

नूर हसन से पुलिस को बताया कि उस ने काफी समय पहले से ही उस के पास से काम छोड़ दिया था. उस के बाद न तो वह उस से कभी मिला और न ही वह उस के पास आई थी. साथ ही उस ने कहा कि वह तो घटनास्थल की तरफ कभी गया भी नहीं. जबकि पुलिस की खोजी कुतिया ने भी सब से पहले पुलिस को चेता दिया था कि मृतका का इस इंसान से नजदीकी का रिश्ता था, फिर भी पुलिस बिना किसी सबूत के नूर हसन को आरोपी साबित नहीं कर सकती थी.

उस के बाद पुलिस टीमें फिर से अपनेअपने कामों में व्यस्त हो गईं. मृतका के निचले हिस्से के कपड़े भी फटे हुए पाए गए थे, जिसे ले कर पुलिस अनुमान लगा रही थी कि कहीं महिला की रेप करने के बाद तो हत्या नहीं कर दी गई. जिस का खुलासा पोस्टमार्टम के बाद ही होना था. इस हत्याकांड के सभी तथ्यों को जोड़ कर एसओजी सहित 5 टीमें लगातार अपनी जांच में लगी हुई थीं.

मोबाइल फोन से मिला सुराग

उसी तहकीकात के दौरान पुलिस को एक खास जानकारी और मिली. पता चला कि सावित्री की हत्या के बाद उस की सहेली सरोज उस के घर वालों से मिलने पहुंची थी. सावित्री की सहेली ने उस के घर वालों को बताया था कि 29 तारीख को उस के मोबाइल पर किसी औरत ने फोन कर के बताया था कि तुम्हारी सहेली सावित्री की हत्या हो गई है. उस की लाश गन्ने के एक खेत में पड़ी हुई है.

सावित्री की हत्या की बात सुनते ही पहली बार तो उसे विश्वास ही नहीं हुआ, लेकिन जब वह तुरंत ही उस के घर पर आई तो उसे पता चला कि सावित्री की किसी ने वाकई में हत्या कर दी है. वह घटनास्थल पर उस की लाश को देखने भी गई. लेकिन वहां पर पुलिस को देख कर वह डर गई.

उस ने वह बात अपने मन ही मन में दफन कर ली थी. उस के बाद यह बात मृतका सावित्री के बेटे ने भी बताई कि उसी दिन उस के मोबाइल पर भी किसी औरत का फोन आया था. उस ने भी उस से यही बात कहीं थी कि उस की मम्मी की हत्या हो गई है. जिस फोन से औरत ने बात की थी, वह भी उस की मम्मी का फोन ही था. लेकिन फोन पर बात करने वाली औरत ने इतनी जानकारी देने के बाद ही मोबाइल बंद कर दिया था.

यह जानकारी मिलते ही पुलिस ने मृतका के मोबाइल को सर्विलांस पर लगा दिया, लेकिन उस के बाद वह मोबाइल लगातार बंद आ रहा था. इस दौरान मोबाइल कई बार खुला और बंद हुआ. उसी दौरान पुलिस को मोबाइल की लोकेशन भी मिल गई थी. मोबाइल की लोकेशन से पुलिस को उस स्थान पर पहुंचने में आसानी हो गई थी.

प्रेमिका बनी ब्लैकमेलर – भाग 1

3 मई, 2023 को रात के कोई साढ़े 9 बजे का वक्त रहा होगा. उसी दौरान पुलिस हैडक्र्वाटर से पुलिस को सूचना मिली कि मुलताई कस्बे के गांधी वार्ड के नागपुर चौक पर एक युवती की गला रेत कर हत्या कर दी गई है. युवती की लाश सडक़ पर पड़ी हुई है. मुलताई कस्बा मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के अंतर्गत आता है.

हत्या की सूचना मिलते ही मुलताई थाने की टीआई प्रज्ञा शर्मा पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गई. घटनास्थल पर पहुंचते ही टीआई प्रज्ञा शर्मा ने सब से पहले घटनास्थल का मुआयना किया. युवती की गला रेत कर बड़ी ही बेरहमी से हत्या की गई थी. घटनास्थल पर सडक़ के बीचोंबीच युवती का शव पेट के बल पड़ा हुआ था. उस के पास ही एक स्कूटी और उस का अन्य सामान भी बिखरा पड़ा था.

घटनास्थल का मुआयना करने के बाद प्रज्ञा शर्मा ने इस सब की जानकारी एसडीओपी नम्रता सोंधिया तथा बैतूल एसपी प्रतीक चौधरी को भी दे दी थी. सरेआम भीड़भाड़ वाले इलाके में बीच सडक़ पर युवती की हत्या कर दिए जाने का मामला बेहद ही गंभीर था. यही कारण था कि युवती की हत्या की सूचना पाते ही सारे पुलिस उच्चाधिकारी मौके पर पहुंच गए थे.

उस वक्त तक मार्केट की ज्यादातर दुकानें बंद हो चुकी थीं. बाकी दुकानदार पुलिस को देख कर अपने शटर गिरा कर चलते बने थे. पुलिस ने आसपास खुल रही दुकान वालों से उस युवती की हत्या के बाबत जानकारी लेनी चाही तो किसी ने अपना मुंह तक नहीं खोला, लेकिन उस की शिनाख्त जल्दी ही हो गई. युवती मुलताई के नेहरू नगर के इलाके में रहने वाली अफजल शेख की बेटी सिमरन शेख थी. जानकारी मिलते ही पुलिस ने उस की हत्या की जानकारी उस के घर वालों को देते हुए तुरंत घटनास्थल पर पहुंचने को कहा.

कैमरे में रिकौर्ड नहीं हो पाई वारदात

युवती की हत्या किस ने और क्यों की? यह बात न तो उस के घर वालों को पता था और न ही पुलिस को पता लग पा रहा था. उस वक्त तक मार्केट पूरी तरह से बंद हो चुकी थी. तब पुलिस ने अपनी अपनी काररवाई पूरी कर उस की लाश पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दी.

इस के बाद पुलिस इस केस की जांच में जुट गई. पुलिस ने घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरे चैक किए. लेकिन पुलिस को इस से भी कोई सफलता नहीं मिली, क्योंकि सीसीटीवी कैमरे के सामने एक बड़ी गाड़ी खड़ी थी. जिस के कारण वह वारदात कैमरे में रिकौर्ड नहीं हो पाई थी. उस के बाद पुलिस ने देखा कि घटनास्थल के ठीक सामने हनीफ मियां की अंडों की दुकान थी, जो हर रोज देर रात 10 बजे तक खुली रहती थी.

पुलिस को लगा कि घटना के वक्त हनीफ मियां की दुकान जरूर खुल रही होगी. शायद उन्हीं से इस मामले में कुछ जानकारी हासिल हो सके. यह सोचते ही पुलिस ने दुकान पर लिखे मोबाइल नंबर को डायल किया तो किसी ने फोन नहीं उठाया. पुलिस ने 1-2 बार नहीं कई बार उसी नंबर को रिडायल किया. लेकिन वह फोन नहीं उठा.

फोन न उठने के कारण पुलिस को उसी दुकानदार पर कुछ शक हुआ. पुलिस हनीफ मियां का पता पूछतेपूछते उस के घर पर पहुंच गई. वह घर पर ही मिल गए. पुलिस ने हनीफ मियां से उस घटना को ले कर जानकारी जुटानी चाही तो उन्होंने साफ शब्दों में कह दिया कि उन की दुकान बहुत पहले ही बंद हो गई थी. उस के बाद वहां पर कब, क्या हुआ, उन्हें कोई जानकारी नहीं.

शक के घेरे में आया शनीफ

उसी पुलिस पूछताछ के दौरान पुलिस को गुप्तरूप से जानकारी मिली कि शाम के वक्त ज्यादातर उन का बेटा शनीफ दुकान पर बैठता था. पुलिस ने हनीफ मियां से शनीफ के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि वह दुकान से आने के बाद अकसर अपने दोस्तों के पास चला जाता है. हो सकता है कि वह अपने दोस्तों के पास ही होगा. पुलिस ने हनीफ मियां से उस का मोबाइल नंबर ले कर डायल किया तो वह बंद मिला.

शनीफ का मोबाइल बंद पा कर पुलिस को पूरा शक हो गया कि इस हत्या के बारे में उसे जरूर जानकारी रही होगी. तभी उस ने अपना मोबाइल बंद कर लिया है. उसी शक के आधार पर पुलिस उस की तलाश में जुट गई, लेकिन उस का कहीं भी पता नहीं चला. उस के बाद पुलिस ने उस की गिरफ्तारी के लिए मुखबिर लगा दिए. मुखबिर की सूचना पर शनीफ जल्दी ही पकड़ में आ गया. पुलिस पकड़ में आते ही वह बुरी तरह से घबरा गया था. पुलिस उसे गिरफ्तार कर थाने ले आई.

चूंकि शनीफ ने सरेआम घटना को अंजाम दिया था, जिस को वहां मौजूद काफी लोग देख रहे थे. वह जानता था कि पुलिस के आगे उस की एक नहीं चलने वाली. यही सोच कर उस ने जल्दी ही सब कुछ साफसाफ उगल दिया. शनीफ ने अपना अपराध स्वीकार करते हुए बताया कि सिमरन शेख उसे ब्लैकमेल कर उसे बरबाद करने पर तुली थी. जिस के कारण ही उसे यह कदम उठाना पड़ा.

हत्या का अपराध स्वीकारते ही पुलिस ने उस की निशानदेही से हत्या में प्रयुक्त मीट काटने वाला छुरा भी बरामद कर लिया. साथ ही उस के द्वारा घटना के वक्त पहने कपड़े भी पुलिस ने बरामद कर लिए.

कौन थी सिमरन शेख? और उस की जानपहचान शनीफ से कैसे हुई? जानने के लिए हमें इस दिलचस्प कहानी के अतीत में जाना होगा.

सोशल मीडिया की दीवानी हुई सिमरन शेख

मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में पड़ता है एक कस्बा मुलताई. सिमरन इसी कस्बे के नेहरू नगर में रहने वाले अफजल शेख की बेटी थी. सिमरन शेख बचपन से ही चंचल थी. उस के नैननक्श उस की सुंदरता का स्वयं ही बखान करते थे. यही कारण था कि वह अपनी सुंदरता और चंचलता के कारण सभी की चहेती बन गई थी.

अफजल शेख की एक बहन थी फातिमा. फातिमा के कोई बच्चा नहीं था. सिमरन से वह बहुत ही प्रभावित थी. जब से सिमरन ने जन्म लिया था, उस की निगाहें उसी पर गड़ी रहती थीं. एक दिन मौका मिलने पर उस ने अपने भाई अफजल से उस प्यारी सी गुडिय़ा को लेने की चाहत जाहिर की. अफजल अपनी बहन की इस मांग को मना नहीं कर सके और उन्होंने सिमरन को उस के हवाले कर दिया. सिमरन की बुआ उसे ले कर अपने घर चली आई और प्यार से उस का पालनपोषण करने लगी.

भारी पड़ी प्रेमी से शादी करने की जिद – भाग 3

पति के साथ घरगृहस्थी चलने के उस ने मन में जो सपने संजोए थे, वह पारिवारिक तनाव की वजह से धूमिल होते दिख रहे थे. पति उस पर हाथ भी उठाने लगा था. निर्मला की बहन नन्हीं देवी का आरोप है कि मेहरूलाल निर्मला को दहेज के लिए प्रताडि़त करता था. 24 अगस्त, 2002 को भी इस ने निर्मला को इतनी बेरहमी से पीटा था कि उसे दिल्ली के लोकनायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल में भरती होना पड़ा था.

उस वक्त निर्मला गर्भवती थी. इस के बावजूद भी पिटाई करते समय पति का दिल नहीं पसीजा था. उस की हालत को देखते हुए डाक्टर ने उसे गर्भ गिराने और डेढ़ महीना पूरी तरह आराम करने की सलाह दी थी. अस्पताल में इलाज कराने के बाद निर्मला मायके चली गई. बाद में अपनी ड्यूटी पर जाने लगी.

ठीक होने के बाद निर्मला पति के साथ नहीं रहना चाहती थी लेकिन घरगृहस्थी न बिगड़े यही सोच कर घरवालों ने निर्मला को समझाबुझा कर पति के साथ भेज दिया लेकिन मेहरूलाल के रवैये में कोई बदलाव नहीं आया.  नन्ही के अनुसार निर्मला के ससुराल वाले पैसों के लिए उसे फिर तंग करने लगे. 5 दिसंबर, 2003 को मेहरूलाल ने निर्मला को 2 लाख रुपए के लिए फिर पीटा. मजबूरी में उसे पति को 2 लाख रुपए देने पड़े थे.

मेहरूलाल जानता ही था कि निर्मला मोटी तनख्वाह पाती है. उस के मन में लालच भरा था. उस ने 50 हजार रुपए के लिए उस की 23 मार्च, 2004 को फिर पिटाई की. निर्मला को लगा कि पति सुधरने वाला नहीं है इसलिए इस के बाद उस ने पति से दूरी बना ली. वह फिर ससुराल नहीं गई. बेटे को उस ने अपने साथ लाने की कोशिश की लेकिन पति ने बेटा उसे नहीं दिया. हालांकि इस बात को ले कर गांव में कई बार पंचायतें भी हुईं लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला.

निर्मला ने सन 2005 में पति और अन्य ससुरालजनों के खिलाफ दिल्ली के नरेला थाने में भादंवि की धारा 406, 498ए के तहत रिपोर्ट दर्ज करा दी. इस केस में मेहरूरलाल सहित 3 लोगों को जेल जाना पड़ा था. लेकिन एक महीने बाद ही वे जमानत पर बाहर आ गए.

अपना केस लड़ने के लिए निर्मला को एक वकील की जरूरत महसूस हुई तो एक जानकार ने सोनीपत के ही रहने वाले एडवोकेट विश्वबंधु से उस की मुलाकात कराई. विश्वबंधु सोनीपत और दिल्ली की तीसहजारी कोर्ट में प्रैक्टिस करता था. विश्वबंधु के मार्फत ही निर्मला ने दिल्ली के रोहिणी कोर्ट में  पति से तलाक लेने और बेटे को पति से उस की कस्टडी में दिलाने की एक अरजी दी.

केस न्यायालय में चलता रहा. कोर्ट ने और्डर दिया कि मेहरूलाल हर महीने के दूसरे इतवार को बेटे को उस की मां निर्मला से मिलवाएगा. कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए मेहरूलाल बेटे को निर्मला से मिलवाता रहा. जब भी तारीख पड़ती निर्मला वकील विश्वबंधु के साथ कोर्ट जाती थी.

पति से दूर रह कर निर्मला एकाकी जीवन बिता रही थी. कोर्ट में तारीख पर आतेजाते उस का झुकाव वकील विश्वबंधु की तरफ हो गया. फिर उन की आपस में दोस्ती हो गई. वह निर्मला के कमरे पर भी आने लगा. दोनों साथसाथ घूमतेफिरते थे. इसी बीच दोनों एकदूसरे के इतने नजदीक पहुंच गए कि उन के बीच अवैध संबंध कायम हो गए.

विश्वबंधु से हुई नजदीकी से निर्मला को एक सहारा मिल गया था. वह अपनी बाकी जिंदगी उसी के साथ गुजारने के सपने देखने लगी. वकील साहब का भी जब मन होता उस के कमरे पर मिलने के लिए पहुंच जाते थे. पिछले 7 सालों से उन के बीच इसी तरह के संबंध चलते रहे. बताया जाता है कि विश्वबंधु ने उस के साथ शादी करने का आश्वासन दिया था. निर्मला इसी भरोसे पर उसे अपना सब कुछ सौंपती रही.

विश्वबंधु के साथ शादी करने के हसीन सपने निर्मला ने अपने मन में सजा रखे थे. लेकिन पिछले साल नवंबर में निर्मला को जब पता लगा कि विश्वबंधु ने किसी और लड़की से शादी कर ली है, तो उसे बहुत बुरा लगा. उस ने विश्वबंधु से अपनी नाराजगी जाहिर की तब उस ने निर्मला को किसी तरह समझाबुझा दिया था.

निर्मला उस से शादी करने की जिद पर अड़ी थी, पर विश्वबंधु शादीशुदा था इसलिए वह उस से शादी नहीं करना चाहता था. उन दोनों के बीच इसी बात को ले कर तनाव बढ़ गया.

विश्वबंधु के सामने एक ही रास्ता था कि वह निर्मला से दूरी बना ले. यही सोच कर उस ने उस के पास आनाजाना भी कम कर दिया. तब निर्मला ने उसे धमकी दी थी कि यदि वह पहले की तरह ही उस के पास नहीं आएगा और शादी नहीं करेगा तो वह उस के खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज करा देगी. विश्वबंधु मुकदमेबाजी के चक्कर में नहीं पड़ना चाहता था इसलिए मजबूरी में उस के पास आनेजाने लगा.

जब भी वह उस के पास आता निर्मला शादी का दबाव बनाती. इस तनाव से विश्वबंधु बहुत परेशान हो गया. समस्या से निजात पाने के लिए उस ने एक खौफनाक योजना बना ली. योजना के अनुसार उस ने 17 सितंबर, 2014 को निर्मला को फोन किया कि वह रात को उस के कमरे पर आएगा.

निर्धारित समय पर विश्वबंधु लोकनायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल परिसर में स्थित निर्मला के फ्लैट नंबर 108 पर पहुंच गया. वे कई दिनों बाद मिले थे इसलिए उन्होंने पहले मौजमस्ती की. इस के बाद निर्मला कुरती और पेंटी पहने ही नहाने के लिए बाथरूम में गई. विश्वबंधु को मौके का इंतजार था. निर्मला के बाथरूम में घुसते ही उस ने उस का सिर दीवार पर दे मारा.

प्रेमी की इस हरकत पर निर्मला भी चौंक गई लेकिन वह उस समय अपना बचाव भी नहीं कर सकी. दीवार में सिर लगते ही उस की आंखों के सामने अंधेरा छा गया, वह नीचे गिर गई. तभी विश्वबंधु ने उस का सिर पानी से भरी बाल्टी में डुबो दिया. उस ने सिर को तब तक दबाए रखा, जब तक उस की मौत न हो गई. इस के बाद उस ने पानी से भरी टब उस के सिर पर रख दी और कमरे का सामान इधरउधर बिखेर दिया ताकि मामला लूट का लगे.

निर्मला को ठिकाने लगाने के बाद विश्वजीत ने राहत की सांस ली. कमरे की लाइट और कूलर चालू हालत में छोड़ कर वह जालीदार और लोहे के दरवाजों की कुंडी लगा कर अपने घर चला गया.

एडवोकेट विश्वबंधु से पूछताछ के बाद पुलिस ने उसे निर्मला देवी (45) की हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर तीस हजारी कोर्ट में महानगर दंडाधिकारी डा. जगमिंदर के समक्ष पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया. कथा लिखने तक विश्वबंधु की जमानत नहीं हो सकी थी. मामले की विवेचना इंसपेक्टर अशोक कुमार कर रहे हैं.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित. पात्र का नाटकीय रूपांतरण किया गया है.

बेटी बनी गवाह : मां को मिली सजा – भाग 3

प्रेमीप्रेमिका सहित अन्य आरोपी हुए गिरफ्तार

20 अक्तूबर, 2018 को हरदा पुलिस ने राजेश की हत्या के आरोपी प्रकाश जाट को गिरफ्तार कर लिया. प्रकाश की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त दरांती, खून से सने हुए कपड़े और जूते भी बरामद कर लिए. प्रकाश से पुलिस ने जब सख्ती से पूछताछ की तो उस ने मनीषा से अवैध संबंध होने के चलते पवन, पप्पू और छोटू उर्फ ब्रजेश की मदद से राजेश की हत्या का जुर्म कबूल कर लिया. इस आधार पर पुलिस ने मनीषा को भी हिरासत में ले ले कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया.

6 नवंबर को हरदा पुलिस ने हत्या के 3 अन्य आरोपियों गोलू शर्मा, पवन पुरी और छोटू उर्फ ब्रजेश को भी इंदौर के पास मूसाखेड़ी से गिरफ्तार कर लिया. पति की हत्या के मामले में जब मनीषा को जेल भेज दिया गया तो दोनों बच्चे अपने दादादादी के पास रहने लगे. लेकिन जेल में बंद मां ने बच्चों को वहां से बाल संरक्षण गृह भेजने के लिए आवेदन कर दिया. दोनों बच्चे करीब 6 महीने तक बाल संरक्षण गृह में रहे, इस के बाद बच्चों को दोबारा से दादादादी के पास भेज दिया गया.

अपने बड़े बेटे राजेश की हत्या और बहू के जेल जाने को ले कर पिता रामरज सिंह राजपूत काफी दुखी रहने लगे. उन्हें हरदम मासूम पोतेपोती के भविष्य की चिंता सताया करती थी. बुढ़ापे में अपनी ही बहू के द्वारा बेटे की हत्या करने के सदमे के चलते वह 6 महीने बाद ही दुनिया से चल बसे.

इस पूरे मामले में हत्या का एक कारण मकान का पतिपत्नी के नाम पर होना भी था. मनीषा और प्रकाश के बीच 2 साल से अफेयर चल रहा था. इस की जानकारी राजेश को भी थी, वह किसी भी तरह परिवार को बिखरने नहीं देना चाहता था. उस ने तो यह भी सोच रखा था कि मकान को बेच कर पत्नी और दोनों बच्चों को ले कर कहीं और जा कर बस जाएगा. मगर मनीषा इस बात के लिए राजी नहीं थी. वह तो मकान में से आधा हिस्सा ले कर अपने प्रेमी के साथ रहना चाहती थी. इस बात ने दोनों के बीच विवाद को बहुत गहरा कर दिया था.

मार्च 2022 में मनीषा जमानत पर बाहर आई थी. तब 30 अगस्त, 2022 को हरतालिका तीज के दिन उस ने अचानक घर आ कर परिवार के लोगों को धमकी दे कर कहा, “यह मेरा घर है, इसे तत्काल खाली कर दो, क्योंकि इस पर मेरा हक है. यह मेरे और राजेश के नाम पर है. यदि ऐसा नहीं किया तो एकएक को देख लूंगी.”

कोर्ट के फैसले पर घर वालों को राहत

फिलहाल राजेश के दोनों बच्चे दादी और चाचाचाची के साथ रहते हैं. बेटी 9वीं और बेटा 5वीं क्लास में पढ़ता है. अब वे समझदार हो गए हैं. जब उन्हें पता चला कि मां ने ही उन के सिर से पिता का साया छीना है, तब से वे मां से नफरत करने लगे हैं. दोनों बच्चे अपनी मां से बातचीत तो दूर, उस का चेहरा भी नहीं देखना चाहते हैं.

दोनों छोटे भाइयों ने 5 सालों तक भाई के हत्यारों को सजा दिलाने के लिए संघर्ष किया है. इस दौरान आरोपियों द्वारा तरहतरह की धमकियां दे कर समझौते के लिए दबाव बनाया गया. कोर्ट के फैसले से राजेश के परिवार को न्याय मिला है. उन का कहना है कि जिन 3 आरोपियों को बरी कर दिया गया है, उन्हें सजा दिलाने के लिए वे फिर से अपील करने का प्रयास कर रहे हैं.

तत्कालीन हरदा थानाप्रभारी सुभाष दरश्यामकर और एसआई ओ.पी. यादव ने विवेचना कर चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की. लगभग 4 साल तक न्यायालय में चले इस प्रकरण में अभियोजन पक्ष से 21 गवाहों को पेश किया गया. 19 मई, 2023 को विशेष सत्र न्यायालय के मजिस्ट्रेट अनूप कुमार त्रिपाठी ने 42 पेज के फैसले में राजेश की पत्नी मनीषा और उस के प्रेमी प्रकाश जाट को आजीवन कारावास की सजा सुनाई. सजा के बाद प्रकाश को जबलपुर जेल भेज दिया गया, जबकि मनीषा जिला जेल हरदा में है.

न्यायाधीश अनूप कुमार त्रिपाठी ने अपने जजमेंट में लिखा कि त्रुटिपूर्ण जांच के आधार पर अभियोजन अपना प्रकरण शंका से परे मामला सिद्ध नहीं कर पाया, इसलिए अन्य व्यक्तियों को दोष मुक्त किया गया है. बचाव पक्ष की ओर से एडवोकेट राजेश पाराशर, एस.एन. अग्रवाल ( खंडवा), हरिमोहन शर्मा, रमेश चंद शर्मा, अचल पाराशर ने जबकि अभियोजन पक्ष की ओर से जिला लोक अभियोजक आशाराम रोहित, सहायक लोक अभिायोजक विनोद अहिरवार और एडवोकेट अखिलेश भाटी ने पैरवी की.

कथा कोर्ट के फैसले और जिला लोक अभियोजक आशाराम रोहित से बातचीत पर आधारित. प्रियांशी परिवर्तित नाम है.

भारी पड़ी प्रेमी से शादी करने की जिद – भाग 2

निर्मला की लाश पर कुरती के अलावा केवल पैंटी थी. ऐसी हालात में महिला पति या प्रेमी के साथ ही रह सकती है. हो सकता है, दोनों में किसी बात को ले कर तकरार हुई हो. बाद में वह बाथरूम में नहाने गई होगी तभी उस के साथी ने उस की हत्या कर दी. पुलिस प्रेम प्रसंग और प्रापर्टी हड़पने के मामले को ध्यान में रखते हुए भी जांच कर रही थी.

निर्मला ने कुछ पैसे इकट्ठे कर के बाहरी दिल्ली के नरेला क्षेत्र में एक आवासीय प्लाट खरीदा था, जिस की कीमत अब काफी बढ़ चुकी है. इसलिए यह भी अनुमान लगाया जा रहा था कि किसी ने प्रापर्टी हड़पने के लिए उसे मार दिया हो. निर्मला का पति मेहरूलाल सोनीपत के गन्नौर थाने के अंतर्गत पुगथला गांव में रहता था. यह काम उस के पति ने तो नहीं कर दिया, यह जानने के लिए पुलिस ने मेहरूलाल को थाने बुला कर पूछताछ की.

मेहरूलाल ने पुलिस को बताया कि सन 2004 से उस का निर्मला से कोई वास्ता नहीं है. वह कहां रहती है, क्या करती है इस से उसे कोई मतलब नहीं. उस की हत्या के बारे में भी उसे कोई जानकारी नहीं है. निर्मला के पड़ोसियों से पुलिस ने पूछा. तो पता चला कि निर्मला के यहां एक आदमी आता था. वह आदमी कौन है यह तो पता नहीं लेकिन वह वकीलों की तरह काला कोट पहन कर आता था.

निर्मला अस्पताल में बने फ्लैट नंबर 108 में 7-8 महीने पहले ही आई थी. यहां आने से पहले वह अस्पताल के बराबर में मुस्कान हौस्टल में किराए पर रहती थी. हौस्टल में रहने वाले लोगों से बात की तो उन्होंने भी बताया कि निर्मला से मिलने एक वकील आता था. वह वकील कौन था, कहां रहता था, पुलिस को पता नहीं चला.  इस बारे में पुलिस ने एक बार फिर मृतका के भाई आनंद कुमार से बात की. बहन से मिलने कौन वकील जाता था इस की जानकारी आनंद कुमार को भी नहीं थी.

सघन तफ्तीश करते हुए 2 दिन बीत चुके थे, लेकिन पुलिस के हाथ ऐसा कोई क्लू नहीं मिल रहा था जिस से हत्यारे तक पहुंचा जा सके. पुलिस ने निर्मला के मोबाइल फोन की कालडिटेल्स निकलवाई.

काल डिटेल्स की जांच में पुलिस को एक फोन नंबर ऐसा मिला जिस पर निर्मला की काफीकाफी देर तक बातें होती थीं. जाहिर है वह शख्स निर्मला का कोई नजदीकी ही रहा होगा तभी तो वह उस से ज्यादा बातें करती थी. पुलिस ने उस फोन नंबर की छानबीन की तो पता चला कि वह हरियाणा के सोनीपत जिले के राठघना रोड निवासी विश्वबंधु का था.

पुलिस ने विश्वबंधु के बारे में गोपनीय रूप से जांच की तो पता चला कि वह एक वकील है जो हरियाणा की सोनीपत कोर्ट और दिल्ली की तीसहजारी कोर्ट में प्रैक्टिस करता है. यह जानकारी मिलते ही जांच टीम चौंक गई कि निर्मला से उस के फ्लैट पर मिलने के लिए एक वकील जाता था. कहीं वो वकील विश्वबंधु ही तो नहीं है.

चूंकि विश्वबंधु एक वकील था इसलिए पुलिस बिना कोई ठोस सुबूत के उसे गिरफ्तार करने से कतरा रही थी. पुलिस नहीं चाहती थी कि वकील के गिरफ्तार करने पर कोई हंगामा खड़ा हो.  विश्वबंधु के बारे में सोनीपत और दिल्ली में जानकारी हासिल करने के बाद पुलिस ने 25 सितंबर, 2014 को उसे हिरासत में ले लिया. थाने ला कर उस से नर्स निर्मला देवी की हत्या की बाबत बात की तो उस ने बताया कि उस की हत्या से उस का कोई लेनादेना नहीं है.

थानाप्रभारी यशपाल सिंह ने उसे निर्मला के फोन की काल डिटेल्स दिखाते हुए पूछा, ‘‘तुम्हारी निर्मला से वक्त बेवक्त क्या बातें होती थीं?’’

‘‘निर्मला मेरी क्लाइंट थी. उस ने अपने पति के खिलाफ कोर्ट में जो केस डाल रखे थे, उन्हें मैं ही देख रहा था. उन के केसों के बारे में ही उस से बातें होती थीं.’’ एडवोकेट विश्वबंधु ने कहा.

‘‘जितनी देर तक तुम्हारी निर्मला से बातें होती थीं, मुझे नहीं लगता कि वह बातें केस के बारे में होती होंगी. मान भी लें कि तुम उस से केस के सिलसिले में बातें करते थे तो निर्मला के अलावा तुम्हारे और भी क्लाइंट हैं, क्या तुम उन से भी इतनी देर बातें करते हो?’’

‘‘यह जरूरी नहीं है कि सभी क्लाइंटों की समस्या एक जैसी हो. केस को ले कर निर्मला कभीकभी ज्यादा परेशान हो जाती थी तो वह मुझे फोन कर के अपनी परेशानी बता देती थी. इंसपेक्टर साहब इस से ज्यादा मुझे निर्मला से कोई मतलब नहीं था. आप मुझे इस मामले में बेजवह घसीट रहे हैं.’’ विश्वबंधु बोला.

‘‘वकील साहब, तुम भले ही झूठ बोलो लेकिन ऐसी कोई तो खास वजह है जिस से तुम निर्मला के घर आते थे, वहां रुकते थे.’’

‘‘ये आप क्या कह रहे हैं?’’

‘‘हमें तुम्हारे बारे में काफी जानकारी मिल चुकी है. इसलिए तुम हम से सच्चाई छिपाने की कोशिश मत करो. 17 सितंबर को तुम्हारी निर्मला से फोन पर आखिरी बार बात हुई थी. उस दिन के बाद  निर्मला की फोन पर किसी से बात नहीं हुई. अब बेहतर यही होगा कि वकील साहब तुम हकीकत खुद ही बता दो.’’

इतना सुनने के बाद विश्वबंधु खामोश हो गया. इंसपेक्टर यशपाल सिंह से इजाजत ले कर वह सिगरेट पीने लगा. कुछ ही देर में उस ने कई सिगरेट पी डालीं. उस समय वह काफी तनाव में दिख रहा था. थानाप्रभारी उस की बौडी लैंग्वेज देख कर सारा माजरा समझ रहे थे. उन्होंने भी उस से कुछ नहीं कहा. कुछ देर बाद विश्वबंधु को पुलिस के सामने मजबूरन स्वीकार करना पड़ा कि निर्मला देवी की हत्या उस ने ही की थी.

एडवोकेट विश्वबंधु से पूछताछ के बाद नर्स निर्मला देवी की हत्या की जो कहानी सामने आई वह इस प्रकार निकली….

निर्मला देवी हरियाणा के सोनीपत जिले के थाना खरखौदा के गांव बरौना के रहने वाले चंदर सिंह की बेटी थी. बताया जाता है कि अपनी 7 बहनों में वह मंझली थी. 7 बहनों के बीच एक ही भाई था आनंद कुमार.  चंदर सिंह एक संपन्न किसान थे. वह गांव में रहते जरूर थे लेकिन उन की सोच अन्य गांव वालों से अलग थी. उसी सोच की बदौलत उन्होंने अपने सभी बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाई.

निर्मला ने स्टाफ नर्स की पढ़ाई की. इस के बाद 1994 में दिल्ली के लोकनायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल में उस की नौकरी लग गई. बाद में उस के भाई आनंद कुमार की भी एक बैंक में अधिकारी के पद पर नौकरी लग गई.  लोकनायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल में नौकरी लगने के बाद निर्मला अस्पताल के बराबर में ही स्थित मुस्कान हौस्टल में रहने लगी.

जैसेजैसे बच्चे सयाने होते गए, चंदर सिंह ने उन की शादी कर दी. 15 मार्च 1999 को उन्होंने निर्मला की शादी भी सोनीपत जिले के ही गन्नौर थाने के अंतर्गत स्थित गांव पुगथला के रहने वाले मेहरूलाल के साथ कर दी. शादी के कुछ दिनों बाद से ही निर्मला के पति से मतभेद शुरू हो गए. जिस की आंच उन के रिश्ते पर आनी शुरू हो गई. इस बीच निर्मला ने एक बेटे को जन्म दिया.

बेटी बनी गवाह : मां को मिली सजा – भाग 2

प्रकाश से हो गया प्यार

इसी दौरान एक दिन मनीषा की पहचान छोटी हरदा में रहने वाले 26 साल के प्रकाश जाट से हुई तो वह रोज उस की दुकान पर आने लगा. 28 साल की गठीले बदन व तीखे नाकनक्श वाली मनीषा 2 बच्चों की मां होने के बाद भी कम उम्र की दिखती थी. तभी तो प्रकाश उसे चाहने लगा था.

एक दिन मौका देख कर प्रकाश ने अपने मन की बात मनीषा से कह दी, “भाभी, तुम कौन सी चक्की का आटा खाती हो, तुम्हारी खूबसूरती देख कर मन में लालच आ ही जाता है.”

“किस बात का लालच तुम्हारे मन में आ रहा है प्रकाश?” अपने हुस्न की तारीफ सुन कर इठलाते हुए मनीषा बोली.

“यही भाभी कि तुम्हारे जैसी लडक़ी मेरे सपनों की रानी होती और मैं उस के साथ…” प्रकाश दिल खोल कर बोला.

“उस के साथ क्या करते…” मनीषा भी शरमाते हुए बोली.

“भाभी, दिल करता है तुम्हें बाहों में भर कर चूम लूं.” बिना लागलपेट के प्रकाश ने मनीषा से कहा.

“कभी तुम्हारी ये हसरत भी पूरी कर दूंगी.” मनीषा ने अपनी तरफ से इजहार करते हुए कहा.

उस के बाद दुकान पर कोई ग्राहक आ गया तो प्रकाश वहां से चला गया, लेकिन इस के बाद तो प्रकाश रातदिन मनीषा के सपनों में ही खोया रहता. बातचीत से शुरू हुआ प्यार का सिलसिला धीरेधीरे अंतरंग मुलाकात में बदल गया. राजेश के घर पर नहीं रहने पर प्रकाश का मनीषा के घर पर भी आनाजाना शुरू हो गया और उन के बीच अवैध संबंध भी बन गए.

पत्नी के किसी गैरमर्द से चल रहे प्रेम प्रसंग की जानकारी राजेश राजपूत को भी हो गई. इस बात को ले कर दोनों के बीच विवाद होने लगा. प्रकाश के प्यार में अंधी हो कर मनीषा अपने पति राजेश और दोनों बच्चों तक को छोडऩे के लिए तैयार हो गई. राजेश अपने बच्चों के भविष्य को ले कर चिंतित रहने लगा. उस ने परिवार को टूटने से बचाने के लिए प्रकाश और मनीषा को समझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन वे समझने को तैयार ही नहीं थे.

मनीषा राजेश से तलाक मांगने लगी, लेकिन राजेश बच्चों की खातिर उसे तलाक नहीं देना चाहता था. तलाक नहीं देने से नाराज प्रकाश और मनीषा ने राजेश की हत्या करने का प्लान बनाया. इस के लिए उन्होंने अपने 3 दोस्तों को इस में शामिल किया और 50 हजार रुपए में राजेश की हत्या की सुपारी दे दी.

अक्तूबर, 2018 में उन दिनों शारदीय नवरात्रि पर्व की धूम हरदा में मची हुई थी. 12 अक्तूबर, 2018 को हरदा में गरबा का कार्यक्रम था. उसी दिन शाम को मनीषा ने अपनी देवरानी आरती को फोन कर के कहा, “आरती, आज बच्चों को ले कर गरबा देखने चलना है, तुम यहीं आ जाना, हम लोगों को राजेश कार से छोड़ देंगे.”

“हां दीदी, मैं 7 बजे तक आप के घर बच्चों को ले कर पहुंच जाऊंगी.” आरती बोली.

उसी दिन शाम 7 बजे राजेश का भाई सुरेंद्र अपनी पत्नी और बच्चों को बाइक से राजेश के घर छोड़ कर खुद गरबा कार्यक्रम में चला गया. कुछ समय बाद राजेश मनीषा, आरती और बच्चों को गरबा कार्यक्रम में छोड़ कर घर लौट आया.

रात के लगभग 9 बजे मनीषा ने सुरेंद्र को बताया, “सुरेंद्र भैया मुझे घर छोड़ दीजिए, भैया का फोन आया है उन्हें घर पर अच्छा नहीं लग रहा.”

सुरेंद्र ने उसी समय अपने दोस्त सुरेंद्र चौहान के साथ भाभी मनीषा को उस के घर भेज दिया.

प्रेमी के साथ बनाई योजना

घर जा कर मनीषा प्रकाश को फोन कर के राजेश का काम तमाम करने की योजना में लग गई. इसी बीच रात के 11 बजे राजेश की बेटी प्रियांशी भी अपने चाचा के साथ गरबा कार्यक्रम से वापस घर आ गई तो मनीषा उसे ऊपर के कमरे में ले गई.

रात के करीब 12 बजे प्रकाश जाट अपने 3 दोस्तों के साथ राजेश के घर पहुंचा. यहां मनीषा ने प्लानिंग के अनुसार पहले से ही दरवाजा खुला रखा था. मनीषा अपने 6 साल के बेटे और 10 साल की बेटी को लेकर ऊपर के कमरे में चली गई थी. उस समय राजेश अपने डेली कलेक्शन का हिसाब बनाने में लगा हुआ था. प्रकाश जाट और उस के साथियों ने भीतर घुसते ही कमरे में बैठे राजेश पर हमला कर दिया. अपने साथ दरांती ले कर आए बदमाशों ने राजेश का गला रेत दिया. कुछ ही देर में तड़पतड़प कर राजेश ने दम तोड़ दिया.

राजेश का घर एकांत में होने और आधी रात होने से लोगों को मर्डर की भनक नहीं लग पाई. दोनों बच्चों ने मारपीट की आवाज सुन कर अपनी मां मनीषा को नीचे चलने को कहा. नीचे 10 साल की बेटी ने प्रकाश को घर से निकलते समय पहचान लिया.

रात करीब एक बजे मनीषा ने देवर नरेंद्र और सुरेंद्र को काल कर रोतेबिलखते हुए बताया, “भैया, जल्दी से घर आ जाओ. 4 नकाबपोश बदमाश राजेश की हत्या कर भाग गए हैं.”

राजेश के दोनों भाई नरेंद्र और सुरेंद्र यह खबर सुनते ही अपने परिवार सहित राजेश के घर पहुंचे. राजेश लहूलुहान औंधे मुंह पड़ा हुआ था. राजेश की हालत देख कर उस के पिता रामरज गश खा कर गिर पड़े. सुरेंद्र उन्हें ले कर अस्पताल चला गया. इस के बाद नरेंद्र ने घटना की सूचना पुलिस को दी.

हरदा पुलिस की टीम ने मौके पर पहुंच कर जांचपड़ताल की. पुलिस ने जब मामले की पड़ताल की तो पता चला कि मनीषा और प्रकाश के अवैध संबंध की वजह से राजेश की हत्या की गई है. 9 साल की नाबालिग बेटी प्रियांशी ने प्रकाश अंकल द्वारा पिता को पीटने की बात बताई थी. इस के बाद पुलिस ने मोबाइल रिकौर्डिंग और काल डिटेल्स निकाली, जिस में पूरी कहानी समझ आ गई.

पुलिस को मिला एक खास औडियो

पुलिस की जांचपड़ताल में यह बात सामने आई कि पिछले कुछ सालों से मनीषा और प्रकाश के बीच प्रेम प्रसंग चल रहा था. पुलिस को 8 मिनट 57 सेकंड का एक औडियो राजेश के मोबाइल फोन में मिला, जिस में राजेश ने प्रकाश को फोन कर के समझाया था. राजेश ने एक दिन प्रकाश को फोन कर के कहा, “राजेश बोल रहा हूं भाई साहब.”

“हां बोलो…” बेरुखी से जबाब देते हुए प्रकाश बोला.

“संडे के रोज आप ने मेरी मिसेज को काल किया था?”

“हां तो… मेरी मनु ( मनीषा) से बात होती है.”

“बात होती रहती है तो आखिर क्या चाहते हो आप, मेरा घर बरबाद क्यों कर रहे हो?”

“हां तो आप को सब बता दिया होगा मनु ने, मेरे पास आप के और उस लडक़ी के वीडियो हैं.” प्रकाश बोला.

“अच्छा तो मेरे वीडियो हैं तो क्या वायरल करना है उन को.”

“मैं वायरल क्यों करूंगा, करना होता तो कब का कर देता. मेरा कोई ऐसा शौक नहीं है, मैं नहीं कर सकता, मेरे पास बहुत पहले से हैं.”

“करो वायरल, मुझे भी पता चले कि मेरा सही में वीडियो है या तुम ब्लैकमल कर रहे हो.” राजेश ने कुरेदते हुए कहा.

“जिस दिन मजबूर हो जाऊंगा, उस दिन वायरल भी कर दूंगा, अभी मैं मजबूर नहीं हूं. मेरी बात मान लो और मनु मुझे दे दो.” प्रकाश ने दोटूक राजेश से कहा.

“तुम को मनु दे दूं तो मेरे बच्चों का क्या होगा, उन्हें किस के भरोसे छोड़ दूं?”

“आप ने किसी दूसरी लडक़ी से रिलेशन बनाने के पहले नहीं सोचा कि 2 बच्चे हैं, पहले सोच लेते तो ये दिन नहीं आते.”

“किस बात का सोचता, किस ने कहा मेरे किसी से रिलेशन हैं. तुम मुझे बेमतलब बदनाम करने पर तुले हुए हो.”

“तुम 5 साल से रिलेशन में हो, मनु से दूरदूर रहना. सारी रिकौर्डिंग है मेरे पास, मनु के सामने आप ने एक्सेप्ट किया था.”

“मैं ने किसी के सामने कुछ एक्सेप्ट नहीं किया, हम सब राजी और मरजी से रह रहे हैं. मेरा किसी से कोई रिलेशन नहीं है, फालतू बात मत करो, मनु को क्यों दे दूं तुम को, अपनी मिसेज को क्यों दे दूं, तुम को मेरे परिवार से क्या लेनादेना है.” गुस्से में तमतमाते हुए राजेश बोला.

“मनु कह देगी तो मान लूंगा, मेरा कोई लेनादेना नहीं है. मेरे चक्कर में तुम उसे मारते हो, मुझे नहीं पता है क्या, कबकब मारा, सब पता है मुझे. इतना लिख कर ले लेना, वो मेरे बिना जी नहीं पाएगी.” प्रकाश बोला.

“अपने परिवार में मैं क्या कर रहा हूं, तुम को आखिर लेनादेना क्या है.”

“मनु नहीं जी पाएगी, यदि उसे कुछ हो गया तो आप भी इस दुनिया में नहीं रहोगे. तू जो मेरी सुपारी दे रहा है न भाई, मुझे सब पता है, तू मुझे मरवाएगा.” प्रकाश ने इल्जाम लगाते हुए कहा.

“तू जबरन मनगढ़ंत बातें बना रहा है, मैं किसे तेरी सुपारी दे रहा हूं, जबरदस्ती की बात कर रहा है. मुझे तो आज मनीषा ने कहा प्रकाश मेरे पीछे लगा हुआ है, मेरे चक्कर काट रहा है, मैं क्या करूं.”

“अच्छा बात करवाओ उस से, करो स्पीकर चालू. मनु ऐसा बोल दे तो मैं कभी मुंह नहीं दिखाऊंगा. उस से पूछ लो, मुझ से प्यार नहीं करती है तो मैं बिलकुल अब नहीं आऊंगा.” प्रकाश ने विश्वास भरे शब्दों में कहा.

“फालतू बात मत कर, ले तू मेरी मिसेज से बात कर.” फोन मनीषा को देते हुए राजेश ने कहा.

“ये क्या बोल रहा है, मैं तेरा पीछा करता हूं? क्या करना है मुझे बता दो, आ रही है मेरे साथ?” प्रकाश ने मनीषा से पूछा.

“उस लडक़ी ने तुम को खुद ही बताया था कि नहीं, तुम्हारे पास उस के वीडियो हैं.” मनीषा फोन पर प्रकाश से बोली.

“तू अपनी बात कर, तुझे उस के साथ रहना है क्या? जमाने भर के उल्टेसीधे सवाल करने की जरूरत क्या है, जबकि ऐसा कुछ है ही नहीं.” राजेश ने झल्ला कर कहा.

“मुझे तो रहना है न तुम्हारे साथ, वो खुद मना कर देगी कि उसे तुम्हारे साथ नहीं रहना है. क्या करना है बोलो, चुप रहने से कुछ होने वाला नहीं है. क्या करना है, मेरे साथ रहना है कि उस के साथ रहना है?” प्रकाश ने मनीषा से कहा.

“मुझे जो कहना था, सब कह दिया. सब कुछ उन्हें बता दिया है कि मुझे प्रकाश के साथ रहना है. मैं तुम्हारे घर गई, वह बात भी मैं ने उन्हें बता दी. एक बात नहीं छिपाई. हमारे बीच शुरू से ले कर अब तक की हर बात बताई है मैं ने.” मनीषा बोली.

“हां, मेरे घर पर 4 बार आई. उसे कह दो हम दोनों खड़े हो जाते हैं वह दोनों को गोली मार दे. साथ में नहीं जीने देगा न तो दोनों को मार दे, हम अपनी इच्छा से मरने के लिए तैयार हैं.” प्रकाश गुस्से में बोला.

“अच्छा है न, ये लो खुद ही बात कर लो,” इतना कह कर मनीषा ने मोबाइल राजेश को दे दिया.

“हां, मुझे कंफर्म हो गया. मैं अब अपनी मिसेज से बात कर लूं, उस के बाद ही आगे की बात करूंगा. तूने मेरी मिसेज को क्यों फंसाया. मेरे घर पर तुझे ताकझांक करने की क्या जरूरत थी? मैं तेरे घर ताकझांक करने गया था क्या?” यह बोल कर राजेश ने फोन डिसकनेक्ट कर दिया.