साधु के वेश में 23 साल बाद मिला कातिल प्रेमी – भाग 3

प्रेम प्रसंग बढ़ने लगा तो पदम अब शादी के लिए रुपए भी जोड़ने लगा था. वह रजनी को पत्नी बना कर अपने घर ओडिशा ले जाना चाहता था, लेकिन एक दिन उस का ख्वाब बिखर गया.उस ने रजनी को एक युवक के साथ हाथ में हाथ डाले शौपिंग माल में खरीदारी करते हुए देखा. पदम वहां अपने लिए शर्ट खरीदने के लिए गया था. वह रजनी को चोरीछिपे देखता रहा.

शाम को उस ने रजनी से उस युवक के बारे में पूछा तो उस ने बड़ी बेशरमी से कहा, “वह विजय साचीदार है. तुम से अच्छा कमाता है. मैं उस के साथ खुश रह सकती हूं.”

“लेकिन तुम ने मेरे साथ शादी करने का वादा किया है रजनी, मुझे तुम छोड़ कर किसी दूसरे से दिल नहीं लगा सकती.”

“दिल मेरा है पदम…” रजनी कंधे झटक कर बोली, “मैं इसे कहीं भी लगाऊं. फिर तुम्हारे पास है भी क्या? किराए का कमरा है, फुटपाथ पर भजिया तलते हो. मैं एक ठेली वाले से शादी कर के अपनी जगहंसाई नहीं करवाना चाहती. अब तुम अपना रास्ता बदल लो.”

“नहीं. मैं अपना रास्ता नहीं बदलूंगा. रास्ता तुम्हें बदलना होगा रजनी. तुम मेरी थी, मेरी ही रहोगी.”

“कोई जबरदस्ती है तुम्हारी.” रजनी गुस्से से चीखी, “मैं विजय से शादी करूंगी, समझे.”

“मैं उस हरामी विजय को काट डालूंगा.” पदम गुस्से से बोला, “देखता हूं तुम कैसे उस से शादी करती हो.”

पदम कहने के बाद गुस्से में भरा वहां से चला गया. वह रात उस ने अपने ठेले पर फुटपाथ पर बिताई. वह विजय साचीदार के विषय में सोच रहा था जो उस के प्यार की राह में कांटा बन गया था. वह कब सोया उसे पता नहीं चला

रजनी के प्रेमी विजय की मिली लाश

4 सितंबर, 2001 दिन मंगलवार को मयूर विहार सोसायटी के शांतिनगर थाने में रजनी ने विजय साचीदार के लापता हो जाने की रिपोर्ट दर्ज करवाते हुए पुलिस के सामने बयान दिया कि विजय साचीदार को जान से मारने की धमकी पदम चरण ने दी थी. पदम चरण शांतिनगर सोसायटी में तीसरी मंजिल पर किराए पर रहता है और गांधी चौक पर भजिया की ठेली लगाता है. विजय साचीदार को लापता करने में पदम चरण का हाथ हो सकता है. उसे गिरफ्तार कर के पूछताछ की जाए.

रजनी द्वारा लिखित रिपोर्ट के आधार पर पुलिस शांतिनगर सोसायटी में पदम चरण के कमरे पर पहुंची. वहां ताला बंद था. पदम चरण की तलाश में उस की भजिया की ठेली (गांधी चौक) पर पुलिस पहुंची तो ठेली पर कोई नहीं था. पदम चरण दोनों जगह से लापता था. इस से उस पर शक गहरा गया कि उस ने विजय साचीदार का अपहरण किया है और कहीं दुबक गया है.

पुलिस पदम चरण का मूल पता लगाने का प्रयास कर ही रही थी कि उसे उधना क्षेत्र (खाड़ी) में विजय साचीदास की लाश मिलने की सूचना कंट्रोल रूम द्वारा दी गई. उधना क्षेत्र की पुलिस को खाड़ी में एक युवक की लाश पड़ी मिली थी. उस युवक की तलाशी में आधार कार्ड मिला, जिस में उस का नाम विजय साचीदार, उस का फोटो और एड्रेस था.

आधार कार्ड से पता चला कि विजय साचीदार शांतिनगर थाना क्षेत्र में रहता था, इसलिए कंट्रोल रूम द्वारा इस थाने को सूचित किया गया. शांतिनगर थाने ने उधना क्षेत्र थाने से यह लाश अपने अधिकार में ले कर जांच की. विजय को गला दबा कर मारा गया था. विजय का पोस्टमार्टम करवा कर लाश उस के घर वालों को सौंप दी गई. इस मामले को भादंवि की धारा 302 में दर्ज कर के पदम चरण की तलाश शुरू कर दी गई.

पदम चरण के बारे में रजनी से बहुत कुछ मालूम हो सकता था. पुलिस ने रजनी को थाने में बुला कर पूछताछ की तो रजनी ने बताया कि पदम का ओडिशा के गंजाम जिले में बरहमपुर इलाके में घर है. इस से अधिक वह कुछ नहीं जानती. रजनी ने पदम से प्रेम करने के दौरान जो फोटो खींचे थे, वे भी उस ने पुलिस को दे दिए.

शांतिनगर थाने की पुलिस पदम की तलाश में ओडिशा गई. वहां उस के मांबाप को श्रीराम नगर में ढूंढ निकाला गया. उन्होंने बताया पदम कई दिनों बाद घर आया था, लेकिन एक रात रुक कर वह चला गया. वह कहां गया, यह उन्हें नहीं मालूम. पुलिस ओडिशा से खाली हाथ वापस आ गई. इस के बाद पदम को सालों पुलिस यहांवहां ढूंढती रही, लेकिन वह कहां छिप गया, पुलिस को पता नहीं चला.

पदम के ऊपर घोषित हुआ ईनाम

पुलिस द्वारा उस के ऊपर 45 हजार का ईनाम भी घोषित कर दिया गया, लेकिन सब व्यर्थ. हताश हो कर विजय साचीदास हत्या केस की फाइल पुलिस को ठंडे बस्ते में डालनी पड़ी. जून 2023 को पुलिस कमिश्नर अजय कुमार तोमर ने सूरत शहर के भगोड़े व मोस्टवांटेड अपराधियों को पकडऩे की लिस्ट तैयार करवाई तो उस में 23 सालों से फरार चल रहे पदम चरण उर्फ चरण पांडा का भी नाम था. उस पर 45 हजार का ईनाम भी घोषित था.

पदम को पकडऩे का जिम्मा अपराध शाखा के एएसआई सहदेव, एएसआई जनार्दन हरिचरण और हैडकांस्टेबल अशोक को सौंपा गया. इस टीम की पहली सफलता यह थी कि 23 साल से फोन बंद कर के बिल में छिपे पदम ने मोबाइल फोन से अपने परिजनों से संपर्क किया था.

ओडिशा के गंजाम जिले में श्रीराम नगर इलाके से गोपनीय जानकारी अपराध शाखा को मिली तो पदम के परिजनों से पदम का नया नंबर ले कर सर्विलांस पर लगा दिया गया. उस की लोकेशन ट्रेस की गई तो वह मथुरा के बरसाना की थी.

क्राइम ब्रांच को बनना पड़ा साधु

अपराध शाखा की टीम मथुरा के बरसाना पहुंची. वहां से टोह लेती हुई नंदगांव पहुंच गई. यहां की पुलिस चौकी के इंचार्ज सिंहराज की मदद से साधु वेश बना कर 8 दिन आश्रमों, मठों में पदम को तलाश करती रही. अपने असली नाम छिपा कर 100 से ज्यादा धार्मिक स्थलों में उसे खोजा गया, फिर कुंजकुटी आश्रम में तलाश करने पंहुचे तो उन्हें साधु वेश में रह रहे पदम चरण को पकडऩे में सफलता मिल गई.

पदम चरण को शांतिनगर थाना (सूरत) में ला कर पूछताछ की गई तो उस ने बताया कि विजय साचीदास उस के और रजनी के प्रेम में बाधा बन गया था. उसे समझाने पर भी वह नहीं माना तो उस का अपहरण कर के वह उद्यान खाड़ी क्षेत्र में ले गया और वहां गला दबा कर उस की हत्या करने के बाद वह ओडिशा भाग गया.

एक रात रुक कर वह मथुरा आया, यहां नंदगांव के कुंजकुटी में साधु वेश बना कर रहने लगा. उसे लगा कि विजय की हत्या हुए 23 साल गुजर गए हैं, पुलिस खामोश बैठ गई है तो उस ने मोबाइल खरीद कर परिजनों से बात की. इसी क्लू द्वारा पुलिस उस तक पहुंची और वह पकड़ा गया.

पुलिस ने पदम उर्फ गोरांग चरण पांडा को सक्षम न्यायालय में पेश कर के जेल भेज दिया गया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित. कथा में रजनी परिवर्तित नाम है.

सीमा हैदर : प्रेम दीवानी या पाकिस्तानी जासूस – भाग 3

सचिन के गांव में चर्चा का विषय बन गई थी खूबसूरत सीमा

अगले दिन से जब लोगों ने नेत्रपाल के घर में एक खूबसूरत महिला व 4 बच्चों को देखा तो गांव में खुसरफुसर होने लगी. मांग में सिंदूर और सिर पर साड़ी का पल्लू डाल कर रखने वाली सीमा बेहद खूबसूरत थी. लोगों ने जब नेत्रपाल व उस के परिवार वालों से घर में आई अंजान महिला के बारे में पूछा तो परिवार ने बताया कि ये उन की बहू सीमा है, जिस के साथ सचिन ने प्रेम विवाह किया है.

परिवार ने गांव वालों को बताया कि सीमा का अपने पति से तलाक हो चुका है, इसलिए वह अपने चारों बच्चों के साथ सचिन के साथ रहने आ गई है, लेकिन अचानक सामने आई इस प्रेम कहानी को ले कर गांव में रहस्यभरी बातें होने लगीं. सीमा और सचिन अपनी शादी को वैध करना चाहते थे. इसलिए उन्होंने नोएडा कोर्ट में मैरिज के लिए आवेदन किया तो पुलिस ने वैरीफिकेशन के लिए सचिन व सीमा के दस्तावेज पुलिस को सौंपे गए.

पुलिस ने गांव में जा कर जब सचिन व उस की पत्नी के बारे में पड़ताल शुरू की तो किसी ने बताया कि उसे शक है कि जिस लडक़ी से सचिन ने शादी की है वो मुसलिम है और शायद पाकिस्तानी भी. क्योंकि जिस शख्स ने पुलिस को ये जानकारी दी, उस ने सीमा को ईद के दिन घर में नमाज पढ़ते देख लिया था.

बस फिर क्या था, 4 जून को सीमा को रबूपुरा थाने की पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. नोएडा पुलिस के साथ इंटैलीजेंस के अधिकारियों ने भी सीमा से पूछताछ शुरू कर दी. सचिन मीणा के साथ रबूपुरा में अवैध रूप से रह रही पाकिस्तान की सीमा हैदर को पुलिस, स्वाट व सर्विलांस की संयुक्त टीम ने आ कर कस्बा रबूपुरा के मोहल्ला अंबेडकरनगर में 13 मई, 2023 से सचिन के साथ अवैध रूप से रहने के आरोप में धारा 14 विदेशी अधिनियम, 120 बी, 34 भादंवि एवं 3/4/5 द पासपोर्ट (एंट्री इंटू इंडिया) एक्ट 1920 के तहत गिरफ्तार कर लिया.

लेकिन अगले दिन ही उन दोनों को जमानत मिल गई. पुलिस ने सचिन और उस के पिता नेत्रपाल उर्फ नित्तर को भी महिला को संरक्षण देने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था. हालांकि नोएडा कोर्ट ने उन्हें अगले ही दिन जमानत दे दी थी, लेकिन उन की गिरफ्तारी के साथ ही इस मामले ने तूल पकड़
लिया.

सोशल मीडिया पर वायरल हो गई पाकिस्तानी बहू

जमाना सोशल मीडिया और अभिव्यक्ति की आजादी का है. वैसे भी हिंदुस्तान में पाकिस्तान से जुड़ी हर चीज को संदेह की नजर से देखा जाता है. एक दुश्मन देश की महिला अपना घरबार बेच कर एक साधारण से नौजवान से शादी करने के लिए अवैध रूप से कई देशों की सीमा लांघ कर देश में आ गई तो पूरे देश के लोगों में कौतूहल पैदा होना ही था.

एक तरफ जहां पाकिस्तान वाली भाभी कह कर दूरदूर से लोग सीमा को देखने के लिए सचिन के रबूपूरा स्थित घर पहुंचने लगे तो कुछ लोगों ने उसे पाकिस्तानी जासूस कह कर सवाल भी उठाने शुरू कर दिए.
जब बात शक और संदेह की होती है तो लोग सवाल भी पूछते हैं. लोग सीमा को विषकन्या कह कर कई तरह के सवाल पूछने लगे. सीमा अचानक भारत में अखबारों व टीवी की हैडलाइन बन गई. जाहिर है जिस मुल्क की रहने वाली थी, उस पाकिस्तान में भी उस की चर्चा शुरू होनी थी.

इधर भारत की जांच एजेंसियां सीमा के जासूस होने के शक में उस की छानबीन करने लगीं तो दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर भी सीमा को ले कर नित नए सवाल खड़े होने लगे. पुलिस ने सीमा हैदर के पास से पासपोर्ट के अलावा उस का मैरिज सर्टिफिकेट, 3 आधार कार्ड, गवर्नर औफ पाकिस्तान नैशनल डाटाबेस ऐंड रजिस्ट्रैशन अथारिटी (मिनिस्ट्री औफ इंटीरियर) की एक सूची भी बरामद की है. महिला के पास 5
वैक्सीनेशन कार्ड और काठमांडू से दिल्ली तक की यात्रा के बस टिकट भी बरामद किए गए.

सीमा और उस के बच्चों के पासपोर्ट पर नेपाल का वीजा भी मिला है. इतना ही नहीं, सीमा की पहली शादी के 2 वीडियो कैसेट भी मिले, वो अपनी शादी से जुड़े सभी दस्तावेज और सबूत ले कर भारत आई है. पबजी से शुरू हुई ये लव स्टोरी ग्रेटर नोएडा में आ कर खत्म हो गई है. पुलिस की सीमा पर शक की वजह भी थी. अकसर हनीट्रैप या ऐसे ही दूसरे मामलों में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी अपने जासूसों को भारत भेजती रही है. अब पुलिस इसी बात की जांच कर रही है कि सीमा सच में मोहब्बत की मारी है या फिर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी का कोई मोहरा.

फिलहाल उत्तर प्रदेश पुलिस की एटीएस व केंद्रीय जांच एजेंसियों को कोई भी सबूत नहीं मिला है, जिस से सीमा को पाकिस्तानी जासूस साबित किया जा सके, लेकिन उस के बयानों में इतने विरोधाभास हैं कि उस ने पुलिस को सीमा पर शक के लिए मजबूर कर दिया है.

सचिन की शुरुआती जांच के बाद ऐसा ही लगता है कि वो भी इश्क का ही शिकार है. सचिन का कोई पुराना क्रिमिनल रिकौर्ड नहीं मिला है, लेकिन बगैर वीजा और कानूनी यात्रा दस्तावेज के सीमा और उस के बच्चों के भारत आने और ये सब कुछ जानते हुए भी सचिन का उस को पनाह देना कानून की नजर में जुर्म है. जांच एजेंसियों का कहना है कि कानूनन सीमा को पाकिस्तान तो वापस जाना ही होगा.

देह की राह के राही

साधु के वेश में 23 साल बाद मिला कातिल प्रेमी – भाग 2

इन दिनों सूरत की पुलिस ने मोस्टवांटेड अपराधियों को पकडऩे की मुहिम शुरू कर रखी है. पदम उर्फ गोरांग चरण पांडा ने 3 सितंबर, 2001 को विजय साचीदास नाम के युवक की हत्या कर दी थी, वह सूरत से भाग गया था. पुलिस उसे सालों तक सूरत और उस के पैतृक गांव ओडिशा के गंजाम जिले में तलाश करती रही. वह हाथ नहीं लगा तो उस पर 45 हजार रुपए का ईनाम घोषित किया गया. निराश हो कर इस केस की फाइल बंद कर दी गई.

23 साल बाद पकड़ा गया हत्यारा

23 साल बाद विजय साचीदास हत्याकांड की फाइल फिर से खोली गई. पुलिस कमिश्नर अजय कुमार तोमर ने भगोड़े मोस्टवांटेड अपराधियों को पकडऩे की मुहिम शुरू की थी. इसी मुहिम के तहत पीसीबी (प्रिवेशन औफ क्राइम ब्रांच) के 2 एएसआई और एक हैडकांस्टेबल को विजय साचीदास हत्याकांड की फाइल सौंपी गई.

हत्यारे पदम उर्फ गोरांग चरण पांडा के बारे में पुलिस को पता चला कि वह पुलिस से बचने के लिए साधु बन गया है और इस समय उत्तर प्रदेश में रह रहा है. उसे ढूंढते हुए यह टीम मथुरा आई. साधु वेश बना कर इस टीम ने 8 दिनों में 100 से अधिक धार्मिकस्थल, आश्रम और मठों की खाक छानी. इसी दौरान एक सर्विलांस टीम ने सूचना दी कि पदम साधु बना हुआ मथुरा के नंदगांव में रह रहा है, इसलिए यह टीम साधु के वेश में कुंजकुटी आश्रम में पहुंची.

पदम उन्हें कुंजकुटी आश्रम में मिला. साधु वेश धारण कर के 23 साल से वह यहां छिपा बैठा था. तेजतर्रार अपराध शाखा की टीम ने उसे अपनी सूझबूझ से ढूंढ निकाला. पदम उर्फ चरण पांडा की कनपटी पर रिवौल्वर रख कर एएसआई सहदेव ने अपने साथियों को इशारा किया. वह तुरंत पदम के सिर पर पहुंच गए.

पदम को घेर कर हथकड़ी लगा दी गई.

आश्रम में हडक़ंप मच गया. एक साधु जो 23 साल से कुंजकुटी आश्रम में रह रहा था, उस के हाथ में हथकड़ी देख कर सभी आश्रमवासी चौंक गए.

एएसआई सहदेव ने उन्हें इस साधु पदम उर्फ गोरांग चरण पांडा की हकीकत बताई तो सभी दंग रह गए. एक हत्यारा 23 सालों से साधु बन कर वहां रह रहा था. अपराध शाखा की टीम पदम उर्फ चरण पांडा को ले कर 28 जून, 2023 को मथुरा से सूरत के लिए रवाना हो गई. जाने से पहले उन्होंने नंदगांव पुलिस चौकी के इंचार्ज सिंहराज के पास अपनी रवानगी दर्ज करवा दी थी.

पदम को रजनी से हुआ प्यार

पदम उर्फ गोरांग चरण पांडा मूलरूप से ओडिशा के गंजाम जिले के श्रीराम नगर इलाके का निवासी था. उस का मांबाप और बहनभाई का एक बड़ा परिवार था, लेकिन इस परिवार के गुजरबसर के लिए ज्यादा कमाई नहीं थी. पदम के पिता मजदूरी कर के जैसेतैसे परिवार की गाड़ी को धकेल रहे थे.

पदम जवान हुआ तो घर की गरीबी उस से देखी नहीं गई. वह काम की तलाश में ट्रेन में सवार हो कर सूरत शहर आ गया. बहुत कम पढ़ालिखा था, इसलिए कोई अच्छी नौकरी तो मिलने वाली नहीं थी, मेहनत मजदूरी पदम करना नहीं चाहता था. यही करना था तो गंजाम जिले में ऐसे कामों की कमी नहीं थी.

बहुत सोचविचार कर के पदम ने गांधी चौराहे पर थोड़ी सी जगह ढूंढ कर भजिया (पकौड़े) की रेहड़ी लगा ली. पदम का यह काम चल निकला. उस ने शांतिनगर सोसायटी में रहने के लिए एक कमरा किराए पर ले लिया. भजिया रेहड़ी से अच्छी कमाई हो रही थी. पदम बनसंवर कर रहने लगा. कमरे का किराया और अपना खर्चा निकाल कर वह अब गंजाम में अपने मांबाप के पास बचा हुआ पैसा भेजने लगा था.

शांतिनगर सोसायटी में ही किराए पर रजनी नाम की युवती रहती थी. रजनी 23 साल की साढ़े 5 फुट की नवयौवना थी. रंग गोरा, नाकनक्श तीखे, होंठ संतरे के फांक जैसे. जवानी के बोझ से लदी रजनी को देख कर कोई भी फिदा हो सकता था. पदम की नजर सीढिय़ों से उतरते हुए रजनी पर पड़ी तो वह उस के रूपयौवन का दीवाना हो गया. पहली नजर में ही उस को रजनी से प्यार हो गया.

रजनी ने भी किया प्यार का इजहार

वह रोज सीढिय़ों से चढ़ कर ऊपर तीसरी मंजिल पर अपने कमरे में जाता तो रजनी के कमरे के सामने तब तक रुकता था, जब तक रजनी दरवाजे पर नहीं आ जाती थी. रजनी यह भांप चुकी थी कि इसी सोसाइटी में रहने वाला यह युवक उस का दीवाना है. अब वह पदम के शाम को लौट कर आने के वक्त पर खुद दरवाजे पर आ कर खड़ी होने लगी थी.

उस की नजरें पदम से टकरातीं तो वह शरम से नजरें झुका लेती, ठंडी सांस भर कर आह भरता हुआ पदम सीढिय़ां चढ़ जाता था. पदम यह महसूस कर चुका था कि रजनी उसे चाहने लगी है. उस से मेलजोल बढ़ाने के इरादे से एक शाम वह भजिया मिर्च को अखबार में पैक कर के ले आया. रजनी अन्य दिनों की तरह उस दिन भी दरवाजे पर खड़ी मिली. पदम ने हिम्मत बटोर कर भजियामिर्च का पैकेट रजनी की तरफ बढ़ा दिया.

“क्या है इस में?” पहली बार उस की कोयल जैसी आवाज पदम के कानों में पड़ी.

“आप खुद देख लीजिए” पदम कह कर तेजी से सीढ़ियां चढ गया. दिन में रजनी उसे दिखाई नहीं देती थी, शायद वह कहीं काम पर जाती थी, लेकिन सुबह जब पदम सीढ़ियां उतर कर नीचे आया तो रजनी अपने दरवाजे पर खड़ी दिखाई दी.

पदम को देख कर वह मुसकराई, “भजिया स्वादिष्ट थी. कहां से लाए थे?”

“मेरे ठेले की है. मैं गांधी चौक पर भजिया का ठेला लगाता हूं, आप को भजिया स्वादिष्ट लगी है तो मैं रोज शाम को ले आया करूंगा.” पदम के स्वर में उत्साह भरा था.

“नहीं, अब तो मैं तुम्हारे पास गांधी चौक पर आ कर ही भजिया खाया करूंगी,” रजनी ने हंस कर कहा.

“मैं एक शर्त पर आप को भजिया खिलाऊंगा.”

“कैसी शर्त?”

“आप भजिया के पैसे नहीं देंगी.”

“ऐसा क्यों?” हैरानी से रजनी ने पूछा.

“अपनों से कोई पैसा नहीं लेता,” पदम ने हिम्मत बटोर कर कह डाला, “आप को दिल से प्यार करने लगा हूं मिस…”

हया से सिर झुका कर बोली रजनी, “मेरा नाम रजनी है, मैं भी आप को चाहने लगी हूं.”

पदम खुशी से उछल पड़ा. उस ने रजनी का हाथ पकड़ कर चूम लिया. रजनी शरमा कर अंदर भाग गई.

प्यार में मिला धोखा

उस दिन के बाद से रजनी शाम को उस के ठेले पर आने लगी. पदम उसे भजिया खिलाता. इस बीच दोनों प्यार भरी बातें करते. ये मुलाकातें भजिया की ठेली से हट कर सूरत के पिकनिक स्पौट, सिनेमा हाल और रेस्टोरेंट तक पहुंच गईं. पदम जो कमाता था, वह रजनी पर खर्च करने लगा. वह रजनी को सच्चे दिल से चाहने लगा था. रजनी से वह शादी करने का प्लान भी बना रहा था. रजनी से उस ने वादा भी ले लिया था कि वह उस से शादी करेगी.

सीमा हैदर : प्रेम दीवानी या पाकिस्तानी जासूस – भाग 2

बच्चों को अच्छी तालीम मिले, उस का अपना घर हो, इन्हीं सपनों को पूरा करने के लिए गुलाम हैदर कोविड बीमारी से पहले 3 साल के कौन्ट्रैक्ट पर 2019 में नौकरी का मौका मिलने पर सऊदी अरब चला गया. उस वक्त सब से छोटी बेटी सीमा के पेट में थी.

ये था सीमा की जिंदगी का वो पहलू जब वो पाकिस्तान में थी. शौहर के सऊदी अरब जाने के बाद वह बच्चों के साथ के बावजूद एकदम तन्हा हो गई. हालांकि गुलाम के सऊदी जाने के बाद सीमा और उस के बच्चों की गुजरबसर पहले से कहीं ज्यादा अच्छे ढंग से होने लगी. क्योंकि शुरू में गुलाम सीमा को वहां से 40-50 हजार रुपए भेजता था, जो कुछ महीने बाद उस ने 70-80 हजार कर दिए.

इतना ही नहीं, उस ने बैंक से लोन ले कर व कुछ उधार ले कर सीमा को 17 लाख रुपए भी भिजवाए. क्योंकि सीमा की चाहत थी कि वो अपना मकान खरीदे. इधर पाकिस्तान में सीमा की जिदंगी मजे में जरूर गुजर रही थी, लेकिन अब उस में न कोई प्रेम रस रहा न कोई ऐसा साथी जिस के साथ वक्त बिताया जा सके. ऐसे में 2 चीजें सीमा की जिंदगी का सहारा बनीं. एक सोशल मीडिया पर रील बनाना तो दूसरा मोबाइल पर पब्जी का खेल.

दोनों ही शौक कुछ समय बाद सीमा की दीवानगी बन गए. सीमा डांस करने के साथ बेहद रोमांटिक वीडियो बना कर अपने इंस्टाग्राम व फेसबुक पर डालने लगी. इस सब से उस का वक्त मजे से गुजरने लगा. इस दौरान सीमा का कनेक्शन सचिन मीणा से हो गया.

पबजी के द्वारा परवान चढ़ा प्यार

दिल्ली से सटे ग्रेटर नोएडा के कस्बा रबूपुरा में रहने वाला सचिन मीणा (25 साल) रबूपुरा के अपने पैतृक गांव में पिता नेत्रपाल, मां व भाईबहन के साथ रहता है. पिता के साथ वह उन की किराने की दुकान में उन का हाथ बंटाता है. सचिन को औनलाइन गेम खेलने का शौक है. इस की लत उसे तब लगी, जब सिंतबर 2020 में पबजी पर प्रतिबंध लगने से पहले युवा उम्र के लोगों में यह खेल एक लत बन गया था.

इसी पबजी के खेल के दौरान अकसर उस की पबजी चैट 2020 में पाकिस्तान से पबजी खेलने वाली सीमा से होने लगी. कुछ बार पबजी चैट के बाद सचिन व सीमा का एकदूसरे से वाट्सऐप मोबाइल नंबर का आदानप्रदान हुआ और जल्द ही दोनों की वाट्सऐप चैट होने लगी.

शुरुआत औपचारिक बातचीत और पारिवारिक जानकारियों के आदानप्रदान से हुई, लेकिन जल्द ही जब दोनों एकदूसरे से वीडियां चैट करने लगे और एकदूसरे को देखा तो जल्द ही एकदूसरे के प्रति आकृष्ट भी हो गए. सोशल मीडिया की ये चैट और वीडियो कालिंग कब दोनों में प्यार का अहसास जगा गई, पता ही नहीं चला.

हालांकि 2020 के सितंबर में पबजी तो भारत में बंद हो गया, लेकिन इस के कारण सचिन व सीमा के बीच जो दोस्ती बनी थी, उसे वाट्सऐप ने प्यार के मुकाम तक पहुंचा दिया. अब कोई ऐसा दिन नहीं जाता, जब दोनों एकदूसरे से वीडियो चैट पर बात न करते थे.

सीमा और सचिन की पबजी खेलने के दौरान बातचीत कोरोना काल में हुई थी. दोस्ती अब प्यार में तब्दील हो चुकी थी. उन का प्रेम प्रसंग बढ़ता जा रहा था. इंतजार था तो सिर्फ एकदूजे से मिलने का. साल 2023 आतेआते दोनों ने तय किया कि अब वह ज्यादा दिन तक अलग नहीं रह सकते हैं.

सीमा हैदर ने इस दौरान बारबार भारत का वीजा अप्लाई किया, क्योंकि वह सचिन से मिलना चाहती थी. हर बार यह वीजा की अपील खारिज होती गई, ऐसे में सीमा ने दूसरा तरीका अपनाया. वह अब सऊदी अरब के जरिए भारत आने की कोशिश करने लगी.

कुछ मुश्किलें हुईं तो उस ने दुबई के रास्ते नेपाल का रास्ता अपना लिया. सीमा और सचिन 10 मार्च, 2023 को नेपाल में मिले. दोनों करीब 7 दिनों तक फरजी नाम व पता लिखा कर न्यू विनायक होटल में साथ रहे. यहीं पर उन दोनों ने काठमांडू के पशुपतिनाथ मंदिर में शादी कर ली और हमेशा साथ रहने की कसमें खाईं.

दुबई से नेपाल फिर भारत पहुंची सीमा

लेकिन कहानी सिर्फ यहीं खत्म होने वाली नहीं थी, क्योंकि असली चिंता सीमा और उस के चारों बच्चों को सुरक्षित भारत लाने की थी. तब सचिन वहां से वापस भारत आ गया और सीमा अपने बच्चों के साथ कुछ वक्त वहीं रुकी. जब मालूम पड़ा कि नेपाल से अगर कोई भारतीय बौर्डर के जरिए आता है तो किसी वीजा की जरूरत नहीं होती है.

सचिन और सीमा की इस बारे में पहले ही बात हो गई थी कि वे दोनों नेपाल में शादी करेंगे और उस के बाद सीमा वापस पाकिस्तान जा कर अपने बच्चों के साथ भारत आएगी. इसीलिए सचिन ने पहले से ही अपनी पत्नी के रूप में सीमा का व पिता के तौर पर उस के 3 बच्चों का आधार कार्ड तैयार करा लिया था. सचिन से शादी करने के बाद सीमा पाकिस्तान चली गई और सचिन रबूपुरा अपने घर आ गया.

नेपाल टूर के दौरान ही सचिन और सीमा ने साथ रहने का मन बना लिया था. यही वजह थी कि नेपाल से वापस कराची लौटने के बाद सीमा ने सब से पहले कराची में एक ट्रैवल एजेंट से संपर्क किया. सीमा ने ट्रैवल एजेंसी से पूछा कि वह किस तरह से अपने 4 बच्चों के साथ हिंदुस्तान जा सकती है. तब उसे पता चला कि नेपाल के रास्ते वह हिंदुस्तान बड़ी आसानी से दाखिल हो सकती है.

इस के बाद शुरू हुई एक नाटकीय प्रेम कथा की शुरुआत. सीमा ने सब से पहले पाकिस्तान में अपना घर बेच कर पैसा एकत्र किया, जिसे उस ने कुछ साल पहले खरीदा था. उस ने अपने तीनों बच्चों के पासपोर्ट तैयार कराए. उस के बाद वहां से वीजा ले कर सीमा 13 मई, 2023 को अपने 4 बच्चों को ले कर पाकिस्तान से पहले दुबई पहुंची. इस के बाद वहां से टूरिस्ट बन कर नेपाल आ गई.

इस के बाद सीमा वहां से बौर्डर पार कर के भारत आ गई. फिर गुपचुप तरीके से दिल्ली पहुंच कर पहले सचिन ने उसे आईएसबीटी बस अड्डे से रिसीव किया. बाद में एक जंगल में पहले अपने पिता नेत्रपाल से सीमा व उस के बच्चों की मुलाकात कराई. पिता को सचिन की प्रेम कहानी पहले से पता थी. उसी रात सचिन सीमा को अपने घर ले आया.

जीजा के चक्रव्यूह में साली

‘‘जीजू, हम लोगों को इस तरह मिलते हुए करीब एक साल हो चुका है. आखिर इस तरह हम लोग चोरीछिपे कब तक मिलते रहेंगे. अगर घर वालों को हमारे संबंधों के बारे में पता चल गया तो क्या होगा? इस से पहले कि किसी को हमारे संबंधों के बारे में पता चले, तुम पापा से बात कर के मेरा हाथ मांग लो वरना मुझे ही कुछ करना पड़ेगा.’’ कविता ने अपने जीजा वीरेंद्र दयाल से कहा.

‘‘कविता तुम चिंता मत करो. मौका आने दो, मैं पापा से बात कर लूंगा. लेकिन मुझे नहीं लगता कि तुम्हारी बड़ी बहन के रहते वह तुम्हारा हाथ मेरे हाथ में दे देंगे. मैं खुद इसी उलझन में हूं कि इस मामले को कैसे सुलझाऊं.’’ वीरेंद्र दयाल ने कहा.

‘‘मैं कुछ नहीं जानती. तुम्हें यह बात क्लियर करनी पड़ेगी कि मेरे साथ शादी करोगे या नहीं? यह सब तुम्हें पहले सोचना चाहिए था. पहले तो बड़े लंबेचौड़े वादे करते थे. कहते थे कि तुम्हारे लिए मैं कुछ भी कर सकता हूं. वो वादे कहां गए. इस का मतलब तो यह हुआ कि तुम मेरी इज्जत से खिलवाड़ करने के लिए मुझे बहकाते रहे.’’

‘‘नहीं कविता, ऐसी बात नहीं है. तुम मुझे गलत मत समझो. मैं आज भी तुम से उतना ही प्यार करता हूं. मगर इस समय मैं दुविधा में फंसा हूं. तुम मेरे मन की स्थिति को समझने की कोशिश करो.’’

‘‘देखो जीजू, टालतेटालते कई महीने हो चुके हैं. मैं अब और ज्यादा इंतजार नहीं कर सकती. मैं तुम्हें 15 दिन का समय देती हूं. इन 15 दिनों में अगर तुम ने पापा से मेरा हाथ नहीं मांगा तो मैं खुद अपना घर हमेशा के लिए छोड़ कर तुम्हारे घर आ जाऊंगी.’’ कविता ने धमकी दी.

‘‘नहीं कविता, ऐसा मत करना. मैं कोई न कोई रास्ता निकाल लूंगा.’’ वीरेंद्र दयाल ने उसे समझाने की कोशिश की, लेकिन वह कुछ भी सुनने को तैयार नहीं थी. वीरेंद्र जानता था कि कविता बहुत जिद्दी स्वभाव की है. वह एक बार मन में जो ठान लेती थी, उसे पूरा कर के ही मानती थी. इसी वजह से वीरेंद्र उस से परेशान रहता था.  कविता ने अपने जीजा को 15 दिन के अंदर घर वालों से शादी की बात करने का अल्टीमेटम दिया था. इस से पहले कि वीरेंद्र दयाल अपने सासससुर से बात करता, कविता रहस्यमय तरीके से गायब हो गई.

दरअसल 5 फरवरी, 2014 को शाम 4 बजे के करीब कविता बाजार जाने को कह कर घर से निकली थी. जब वह 2 घंटे तक घर नहीं लौटी तो मां ने उस का फोन मिलाया, लेकिन उस का फोन बंद मिला. उन्होंने ऐसा कई बार किया. फोन हर बार बंद मिला. बेटी का मामला था. इस से वह घबरा गईं. वीरेंद्र सिंह उस समय तक अपनी ड्यूटी से नहीं लौटे थे. मां ने बेटी के अभी तक घर न लौटने वाली बात पति को फोन से बता दी.

शाम का अंधेरा घिर आया था. जवान बेटी के घर न लौटने पर वीरेंद्र सिंह को भी चिंता हो रही थी. घर पहुंचने के बाद उन्होंने अपने स्तर से उसे ढूंढना शुरू कर दिया, लेकिन उस के बारे में कोई खबर नहीं मिली. अंत में वह आदर्श नगर स्थित पुलिस चौकी पहुंचे और चौकीप्रभारी कुलदीप सिंह को बेटी के गायब होने की जानकारी दी.

चौकीप्रभारी ने कविता की गुमशुदगी दर्ज करने के बाद यह सूचना अपने अधिकारियों को दे दी और कविता के हुलिए के साथ गुमशुदगी की खबर पुलिस कंट्रोल रूम द्वारा बल्लभगढ़ जिले के सभी थानों को प्रसारित करा दी. इस के साथ ही इस मामले की जांच एएसआई लाजपत को सौंप दी.

कविता 20-22 साल की थी. वह इतनी नादान नहीं थी कि उस के कहीं खो जाने की संभावना हो. ऐसे में 2 ही बातें हो सकती थीं. एक यह कि उस का किसी ने फिरौती के लिए अपहरण किया हो, दूसरी यह कि वह अपने किसी बौयफ्रेंड के साथ कहीं चली गई हो.   पूरी रात गुजर गई, लेकिन कविता घर नहीं लौटी. उस के घर वाले उस के इंतजार में ऐसे ही बैठे रहे. इस से पहले वह बिना बताए इतनी देर तक कभी गायब नहीं रही थी. इसलिए घर वालों के दिमाग में उसे ले कर तरहतरह के खयाल आ रहे थे.

उधर पुलिस भी अपने स्तर से कविता के बारे में पता लगाने की कोशिश कर रही थी. पुलिस ने उस के मोबाइल फोन की काल डिटेल्स निकलवाई. उस में एक फोन नंबर ऐसा मिला, जिस पर कविता की काफी ज्यादा और देर तक बातें होती थीं. उस नंबर के बारे में कविता के घर वालों से पूछा गया तो पता चला वह नंबर कविता के जीजा वीरेंद्र दयाल का है.

चूंकि वीरेंद्र दयाल उन का रिश्तेदार था, इसलिए घर वालों को उन दोनों की बातों पर कोई आश्चर्य नहीं था. अलबत्ता पुलिस को उन के बीच होने वाली लंबी बातों पर शक जरूर हुआ.  चूंकि कविता के मातापिता ने अपने दामाद पर कोई शक वगैरह नहीं जताया था, इसलिए पुलिस ने उस समय वीरेंद्र दयाल से पूछताछ करना जरूरी नहीं समझा. लेकिन उस पर शक जरूर बना रहा.

देखतेदेखते कविता को रहस्यमय तरीके से गायब हुए 15 दिन बीत गए. उस के घर वालों का रोरो कर बुरा हाल था. उधर पुलिस को भी कविता के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल रही थी. अंतत: उस का पता लगाने के लिए एक पुलिस टीम बनाई गई, जिस में एसआई कुलदीप, एएसआई लाजपत, हेडकांस्टेबल संजीव सिंह आदि को शामिल किया गया.

एसआई कुलदीप ने कविता के पिता वीरेंद्र सिंह से कहा, ‘‘अब तक जो भी जांच की गई है, उस में घूमफिर कर शक आप के दामाद वीरेंद्र दयाल पर ही जा रहा है. इसलिए उन से पूछताछ करने पर आप को ऐतराज नहीं करना चाहिए.’’

‘‘ऐतराज की कोई बात नहीं है, लेकिन आप खुद सोचिए कि वह हमारे दामाद हैं, हमें नहीं लगता कि वह ऐसा कुछ कर सकते हैं, जिस से हमारे परिवार को ठेस लगे. हमारे घर के बाहर के जो लोग शक के दायरे में आ रहे हैं, आप उन से पूछताछ कीजिए.’’ वीरेंद्र सिंह बोले.

‘‘अगर वीरेंद्र दयाल से पूछताछ करने के बाद हमें कोई जानकारी नहीं मिलती तो हम उसे छोड़ देंगे.’’ चौकीप्रभारी ने कहा.

चौकीप्रभारी ने वीरेंद्र सिंह को काफी समझाया. इस का नतीजा यह हुआ कि वह अपने दामाद वीरेंद्र दयाल को 21 फरवरी, 2014 को साथ ले कर पुलिस चौकी आदर्श नगर आ गए.   कुलदीप सिंह ने वीरेंद्र दयाल से कविता के बारे में मालूमात की तो वह यही बताता रहा कि उसे कविता के बारे में कोई जानकारी नहीं है और उस के गायब होने के कई दिनों पहले से उस की उस से कोई बात नहीं हुई थी.

चौकीप्रभारी के पास कविता और वीरेंद्र दयाल के फोन नंबरों की काल डिटेल्स थी. इसलिए वीरेंद्र दयाल ने उन से जो बात बताई उस पर चौकीप्रभारी को शक हुआ. क्योंकि 4 फरवरी को शाम करीब साढ़े 5 बजे उस की कविता से बात हुई थी. उस काल की डिटेल जब वीरेंद्र दयाल को दिखाई गई तो उस के चेहरे का रंग उड़ गया. वह उस रिकौर्ड को झुठला नहीं सकता था.

उस की इस घबराहट को चौकीप्रभारी भांप गए. उन्होंने कहा, ‘‘तुम्हें कविता के बारे में सब पता है. अब बेहतर यही होगा कि तुम उस के बारे में सचसच बता दो, वरना…’’

सच्चाई यह थी कि वीरेंद्र दयाल को पता था कि कविता कहां है, इसलिए उस ने सोचा कि अगर उस ने पुलिस को नहीं बताया तो वह पिटाई कर के सच उगलवा लेगी. इसलिए इस से पहले कि पुलिस उस के साथ सख्ती करे, उस ने सच्चाई उगलते हुए कहा, ‘‘सर मैं ने कविता को मार दिया है.’’

उस की बात सुन कर चौकीप्रभारी चौंके, ‘‘यह तुम क्या कह रहे हो?’’

‘‘सर, मैं सच कह रहा हूं. उस ने मेरे सामने ऐसे हालात खड़े कर दिए थे कि उस की हत्या करने के अलावा मेरे सामने कोई दूसरा चारा नहीं था.’’ वीरेंद्र दयाल ने कहा.

‘‘उस की लाश कहां है?’’

‘‘लाश मैं ने आगरा कैनाल में डाल दी थी.’’

आगरा कैनाल यमुना नदी से निकाली गई है. यह दिल्ली के मदनपुर खादर से शुरू हो कर मथुरा, आगरा होते हुए राजस्थान के भरतपुर तक जाती है. वीरेंद्र दयाल ने पुलिस को बताया कि उस ने 5 फरवरी, 2014 को कविता की लाश आगरा कैनाल में फेंकी थी.   यानी लाश डाले हुए उसे 15 दिन हो चुके थे. पुलिस ने सोचा कि इस बीच लाश जहां भी पुलिया आदि के पास रुकी होगी, उस क्षेत्र की पुलिस ने उसे बरामद किया होगा.

इसलिए चौकीइंचार्ज कुलदीप ने आसपास के थानों में फोन कर के किसी लड़की की लाश बरामद होने के बारे में जानकारी मांगी. पता चला कि पलवल के सदर थाने के सबइंस्पेक्टर मोहम्मद इलियास ने 8 फरवरी, 2014 को रजवाहा, गोपालगढ़ की पुलिया के पास से एक अज्ञात लड़की की लाश बरामद की थी.  शिनाख्त के लिए उस लाश को रोहतक पीजीआई की मोर्चरी में रखवाया गया था. 4-5 दिनों बाद भी जब उस की शिनाख्त नहीं हो पाई तो 12 फरवरी को उस लाश का अंतिम संस्कार कर दिया गया था.

जिस लड़की की लाश सदर पुलिस ने बरामद की थी, उस के कपड़े आदि सदर थाने में रखे थे. चौकीप्रभारी कुलदीप, एएसआई लापजत, हेडकांस्टेबल संजीत सिंह कविता के पिता वीरेंद्र सिंह को ले कर थाना सदर पहुंचे. वहां एसआई मोहम्मद इलियास ने उन्हें उस अज्ञात लड़की की लाश के फोटो, कपड़े आदि दिखाए.

कपड़े देखते ही वीरेंद्र सिंह रो पड़े. क्योंकि वह कपड़े उन की बेटी कविता के थे. जिस दामाद को वीरेंद्र सिंह अपने बेटे की तरह मानते थे, उस के द्वारा बेटी की हत्या करने पर उन्हें बहुत दुख हुआ. पुलिस चौकी लौटने के बाद जब वीरेंद्र दयाल से पूछताछ की गई तो उस ने कविता की हत्या की जो कहानी बताई, वह कुछ इस तरह थी.

दिल्ली से सटे राज्य हरियाणा का एक जिला है बल्लभगढ़. इसी जिले के सुभाषनगर में बीरेंद्र सिंह अपने परिवार के साथ रहते थे. वह ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर स्थित यामाहा कंपनी में नौकरी करते थे. उन के परिवार में पत्नी के अलावा 2 बेटियां थीं. बड़ी बेटी रेनू की शादी वह 4 साल पहले फरीदाबाद के सेक्टर-8 में रहने वाले धर्मपाल दयाल के बेटे वीरेंद्र दयाल से कर चुके थे.

वीरेंद्र दयाल दिल्ली स्थित एक शिपिंग कंपनी में नौकरी करता था. वह 1 बेटी का बाप भी बन चुका था.  वीरेंद्र सिंह की छोटी बेटी कविता अच्छी नौकरी के लिए पढ़ाई में जुटी थी. वह बीसीए कर रही थी. बीसीए के बाद उस की इच्छा एमसीए करने की थी. लेकिन इस से पहले ही उस के साथ घटी एक घटना ने उस के अरमानों पर पानी फेर दिया.

पढ़ाई के समय ही हर छात्र या छात्रा अपने मन में सोच लेता है कि उसे पढ़लिख कर क्या बनना है. बाद में वह अपने सपनों को हकीकत में बदलने की कोशिश करता है. कविता ने भी कंप्यूटर के क्षेत्र में अपना भविष्य बनाने के सपने देखे थे. उसी के अनुसार वह अपनी पढ़ाई भी कर रही थी.

उसी दौरान उस के जीजा वीरेंद्र दयाल ने उसे अपने प्रेमजाल में फांस लिया. कविता के अंदर अभी दुनियादारी की इतनी समझ नहीं थी. वह तो उस की बातों में फंस कर सच में उस से मोहब्बत करने लगी थी. उसे क्या पता था कि जीजा उस की इज्जत से खिलवाड़ करने के लिए उसे अपनी मीठीमीठी बातों में फांस रहा है.

इस का नतीजा यह हुआ कि दोनों के बीच अवैध संबंध बन गए. करीब एक-डेढ़ साल पहले तक दोनों के बीच संबंध जारी रहे. दोनों फोन पर अकसर देर तक बातें करते रहते थे. वीरेंद्र दयाल ने उसे झांसा दे रखा था कि वह रेनू के रहते हुए भी उस से शादी कर लेगा. कविता इसी उम्मीद में थी कि जीजा उस के साथ शादी जरूर करेगा.

कविता जब भी वीरेंद्र दयाल से शादी के लिए कहती, वह कोई न कोई बहाना बना कर टालता रहता. कुछ दिनों तक तो वह उस पर विश्वास करती रही, लेकिन जब उस के सब्र का बांध टूटने लगा तो उस ने जीजा पर शादी का दबाव बढ़ा दिया.

वह जल्द से जल्द शादी करने की जिद करने लगी. वीरेंद्र दयाल फंस चुका था. उस की हालत ऐसी हो गई थी कि वह कविता से न तो शादी कर सकता था और न ही उस से पीछा छुड़ा सकता था. उसे यह उम्मीद नहीं थी कि कविता उस के गले की हड्डी बन जाएगी. उस ने यही सोच कर उस से संबंध बनाए थे कि मौजमस्ती करने के बाद वह उस से किनारा कर लेगा. लेकिन यहां दांव उलटा पड़ गया था.

चूंकि वीरेंद्र दयाल पहले से ही शादीशुदा और एक बेटी का बाप था. पत्नी को वह छोड़ नहीं सकता था और पत्नी के रहते वह उस की छोटी बहन कविता को रख नहीं सकता था. जबकि हालात एक म्यान में 2 तलवार रखने के बन गए थे. अब उस के सामने एक ही रास्ता था कि वह दोनों में से एक को हमेशा के लिए रास्ते से हटा दे. यही उपाय उसे ठीक लगा.

अंतत: सोचविचार कर उस ने पत्नी के बजाय साली कविता का ही काम तमाम करने का फैसला कर लिया. उस का सोचना था कि कविता को ठिकाने लगा कर उस की गृहस्थी पहले की तरह चलती रहेगी. पूरी योजना बनाने के बाद वीरेंद्र दयाल ने 4 फरवरी, 2014 को कविता को फोन कर के 5 फरवरी को बल्लभगढ़ बस स्टैंड के पास मिलने को कहा.

अगले दिन वीरेंद्र दयाल मोटरसाइकिल से निर्धारित जगह पर पहुंच गया. तय समय पर कविता भी वहां पहुंच गई. दोनों मोटरसाइकिल से इधरउधर घूमते रहे. वीरेंद्र दयाल को अपना मंसूबा पूरा करने के लिए अंधेरा होने का इंतजार था.

शाम 7 बजे के करीब वह उसे ले कर फरीदाबाद सेक्टर-18 पहुंच गया और वहां आगरा कैनाल के किनारे बैठ कर बातें करने लगा.  कविता जीजा के मंसूबे से अनजान थी. उसी दौरान मौका पा कर वीरेंद्र दयाल ने कविता की चुनरी से गला घोंट दिया. कुछ ही पलों में उस की मौत हो गई. इस के बाद आननफानन में उस ने उस की लाश आगरा कैनाल में फेंक दी.

उसे उम्मीद थी कि नहर से लाश बह कर कहीं दूर निकल जाएगी और उस पर किसी को शक भी नहीं होगा. लाश को ठिकाने लगा कर वह अपने घर लौट गया. कविता के घर वाले जब उसे ढूंढ रहे थे तो वीरेंद्र दयाल भी उन के साथ रह कर उसे ढूंढने का नाटक करता रहा.

वीरेंद्र दयाल से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने उस की मोटरसाइकिल भी बरामद कर ली. चौकीइंचार्ज कुलदीप ने उस से विस्तार से पूछताछ के बाद न्यायालय में पेश कर के उसे जेल भेज दिया. फिर तफ्तीश करने के बाद उन्होंने 11 मार्च, 2014 को इस मामले की चार्जशीट न्यायालय में पेश कर दी. कथा संकलन तक अभियुक्त वीरेंद्र दयाल की जमानत नहीं हो सकी थी.

—कथा पुलिस सूत्रों और जनचर्चा पर आधारित

साधु के वेश में 23 साल बाद मिला कातिल प्रेमी – भाग 1

उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी मथुरा के बरसाना का नंदगांव यहीं है कुंजकुटी आश्रम. तपती 25 जून, 2023 को जून की गरमी से बेहाल 3 साधुओं की टोली कुंजकुटी आश्रम के दरवाजे पर आ कर रुक गई. इन के शरीर पर लाल, पीले रंग के साधुओं वाले कपड़े थे, तीनों ने सिर पर सफेद, भगवा अंगौछे बांध रखे थे. गले में रुद्राक्ष की माला और माथे पर चंदन का लेप था. तीनों साधु पसीने से तरबतर थे.

कंधे पर लटक रही लाल रंग की झोली से भगवा रुमाल निकाल कर चेहरे का पसीना पोंछते हुए एक साधु हैरत से बोला, “दरवाजे पर क्यों रुक गए गुरुदेव, भीतर प्रवेश नहीं करेंगे क्या?”

“मछेंद्रनाथ, मैं किसी आश्रम वासी के बाहर आने की राह देख रहा हूं. बगैर इजाजत लिए किसी भी जगह प्रवेश करना उचित नहीं होता.”

“आप का कहना ठीक है गुरुदेव,” मछेंद्रनाथ विचलित हो कर बोला, “लेकिन मुझे जोरों की भूख लग रही है. हम अंदर जाते तो मैं पेट की भूख शांत कर लेता.”

उस की बात पर दोनों साधु हंसने लगे. हंसते हुए गुरुदेव, जिन का नाम हरिहरनाथ था, बोले, “देखा कालीनाथ, इस पेटू मछेंद्र को, इसे खाने के अलावा कुछ नहीं सूझता.”

फिर वह मछेंद्रनाथ की तरफ पलटे और कुछ कहना ही चाहते थे कि आश्रम के दरवाजे पर एक भगवा वस्त्र धारी दुबलापतला साधु आ गया.

“आप दरवाजे पर क्यों रुक गए?” उस साधु के स्वर में हैरानी थी, “कोई और आने वाला है क्या?”

“नहीं महाराज, हम तो अंदर आने की इजाजत की प्रतीक्षा में यहां रुक गए थे.” हरिहरनाथ ने मुसकरा कर कहा.

“यहां इजाजत कौन देगा जी, गुरुजी की ओर से इस आश्रम में हर किसी को आने की छूट है. आप लोग अंदर आ जाइए.”

हरिहरनाथ अपनी साधु टोली के साथ अंदर आ गए. आश्रम में एक ओर रहने के लिए कमरे बने हुए थे. सामने दाहिनी ओर छप्परनुमा शेड था. नीचे चबूतरा था, इस के बीच में अग्निकुंड बना हुआ था. अग्निकुंड में लकडिय़ों की धूनी सुलग रही थी. उस के आसपास कई जटाधारी साधु बैठे हुए थे. कुछ चिलम पी रहे थे. कुछ आपस में बातें कर रहे थे. एक साधु बैठा हुआ कोई धार्मिक ग्रंथ पढऩे में तल्लीन था.

तीनों साधुओं को वहां लाने वाला साधु आदर से बोला, “आप लोग चाहें तो स्नान आदि कर लीजिए. मैं आप के खाने का बंदोबस्त करता हूं, खापी कर आप आराम कर लेना. गुरुदेव अपने कक्ष में हैं, उन से आप की भेंट शाम को 5 बजे होगी.”

“ठीक है महाराज,” हरिहर मुसकरा कर बोले.

वह अपनी टोली के साथ आश्रम के कोने में लगे हैंडपंप पर आ गए. उन्होंने बाहर ही हैंडपंप पर नहानाधोना किया. फिर चबूतरे पर आ गए. उन्हें वहां भोजन परोसा गया. खापी लेने के बाद वे चटाइयों पर विश्राम करने के लिए लेट गए.

अन्य साधुओं से बढ़ाई घनिष्ठता

शाम को उन की मुलाकात इस आश्रम के गुरु महाराज से हुई. वह वयोवृद्ध थे. उन्हें हरिहरनाथ ने हाथ जोड़ कर प्रणाम करने के बाद बताया, “हम काशी विश्वनाथ होते हुए मथुरा आए थे. यहां आप के आश्रम कुंजकुटी की बहुत चर्चा सुनी तो आप के दर्शन करने आ गए. हम यहां कुछ दिन ठहरना चाहेंगे गुरुदेव.”

“आप का आश्रम है हरिहरनाथ, आप अपनी मंडली के साथ ताउम्र यहां रहिए. यह साधुसंतों का डेरा है, यहां कोई भी कभी भी आजा सकता है.”

“धन्यवाद गुरुदेव,” हरिहरनाथ ने कहा.

गुरु महाराज के पास से उठ कर हरिहरनाथ ने चबूतरे के एक कोने में अपने उठने बैठने की व्यवस्था कर ली. तीनों ने वहां चटाइयां बिछा कर बिस्तर लगा लिया.

2-3 दिनों में ही हरिहरनाथ, मछेंद्रनाथ और कालीनाथ वहां आनेजाने और रहने वाले साधुसंतों से घुलमिल गए थे. वह उन से आध्यात्मिक ज्ञान की चर्चा करते. अपना मोक्ष पाने के लिए साधु वेश धारण करने की बात बता कर यह पूछते कि वह साधु क्यों बने? यह वेश धारण कर के उन्हें कैसा अनुभव हो रहा है?

आज उन्हें कुंजकुटी आश्रम में रुके हुए 4 दिन हो गए थे. गुरु हरिहरनाथ आज सुबह से ही उस साधु के साथ चिपके हुए थे जो पहले दिन उन्हें सब से अलग बैठा कोई धार्मिक ग्रंथ पढ़ता दिखाई दिया था. यह 50 वर्ष से ऊपर का व्यक्ति था. दुबलापतला गेहुंए रंग का वह व्यक्ति लाल कुरता, पीली जैकेट और लुंगी पहनता था. उस की दाढ़ीमूंछ के बालों में सफेदी झलकने लगी थी. यह साधु पहले दिन से ही सभी से अलगथलग रहने वाला दिखाई दिया था.

हरिहरनाथ ने शाम को खाना खा लेने के बाद उस के साथ गांजे की चिलम भर कर पी. गांजे का नशा हरिहरनाथ के दिमाग पर छाने लगा तो वह सिर झटक कर बोले, “मजा आ गया आप की चिलम में महाराज, मैं ने पहली बार गांजा की चिलम पी है. यह नशा मेरा सिर घुमा रहा है.”

“मैं रोज पीता हूं हरिहरनाथ. इसे पी लेने के बाद न अपना होश रहता है, न दुनिया की फिक्र.”

“क्यों क्या आप का इस दुनिया में अपना कोई नहीं है?” हरिहरनाथ ने पूछा.

“थे. मांबाप, बहनभाई और…” बतातेबताते वह रुक गया.

“एक पत्नी.” हरिहरनाथ ने उस की बात को पूरा किया, “क्यों मैं ने ठीक कहा न?”

वह साधु हंस पड़ा, “पत्नी नहीं थी, वह मेरी प्रेमिका थी, मैं उसे बहुत प्यार करता था.”

“प्यार करते थे तो पत्नी क्यों नहीं बना सके उसे?”

“वह बेवफा निकली हरिहर,” वह साधु गहरी सांस भर कर बोला, “उस ने किसी और से दिल लगा लिया था.”

“ओह!” हरिहरनाथ ने अफसोस जाहिर किया, “ऐसी बेवफा प्रेमिका को तो सजा मिलनी चाहिए थी. मेरी प्रेमिका ऐसा करती तो मैं उस का गला काट देता.”

“नहीं हरिहर, मैं ने उस बेवफा से सच्ची मोहब्बत की थी. मैं उस के गले पर छुरी नहीं चला सकता था. मैं ने उस को नहीं, उस के प्रेमी को यमलोक पहुंचा दिया.”

“ओह! आप ने अपनी प्रेमिका के यार को ही उड़ा डाला.” हरिहर हैरानी से बोले, “फिर तो आप को कत्ल के जुर्म में सजा हुई होगी.”

गांजे के नशे में आई सच्चाई बाहर

चिलम का एक गहरा कश लगा कर धुंआ ऊपर छोड़ते हुए वह साधु हंसने लगा, “सजा किसे मिलती महाराज, कातिल तो कत्ल कर के फुर्र हो गया था. आज 23 साल हो गए उस बात को, मैं साधु बन कर यहां बैठा हूं, पुलिस वहां मेरे लिए हाथपांव पटक रही है. सुना है, मुझ पर 45 हजार रुपए का इनाम भी घोषित किया है पुलिस कमिश्नर ने.” साधु फिर हा…हा… कर के हंसने लगा.

हंसी थमी तो बोला, “हरिहर, मुझ पर पुलिस 45 हजार क्या 45 लाख का इनाम घोषित कर दे, तब भी वह मुझे नहीं पकड़ पाएगी.”

हरिहर के होंठों पर कुटिल मुसकान तैर गई. वह कमर की ओर हाथ बढ़ाते हुए बोले, “तुम ने सुन रखा होगा मिस्टर पदम, कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं. देख लो, फांसी का फंदा तुम्हारे गले तक पहुंच गया.”

“पदम,” वह साधु चौंक कर बोला, “तुम मेरा नाम कैसे जानते हो हरिहर?”

हरिहर का हाथ कमर से निकल कर बाहर आया तो उस में रिवौल्वर था. रिवौल्वर साधु की कनपटी पर सटा कर हरिहर गुर्राए, “मैं तेरा नाम भी जानता हूं और तेरा भूगोल भी. तू सूरत में विजय साचीदास की हत्या कर के फरार हो गया था. आज 23 साल बाद तू हमारी पकड़ में आया है.”

आप को बताते चलें कि साधु के वेश में यह सूरत की क्राइम ब्रांच के तेजतर्रार एएसआई सहदेव थे, इन के साथ जो 2 साधु वेशधारी मछेंद्रनाथ और कालीनाथ थे, उन के नाम जनार्दन हरिचरण और अशोक थे. ये दोनों भी सूरत की क्राइम ब्रांच में एएसआई और हैडकांस्टेबल के पद पर तैनात हैं.

सीमा हैदर : प्रेम दीवानी या पाकिस्तानी जासूस – भाग 1

ग्रेटर नोएडा में उत्तर प्रदेश की एंटी टेररिस्ट स्क्वाड यानी एटीएस के अधिकारी पिछले 2 दिनों से सीमा से लगातार एक ही जैसे सवाल घुमाफिरा कर पूछ रहे थे. शुरू में 1-2 बार सीमा ने अफसरों के सभी सवालों के जवाब बेबाकी से दिए थे. लेकिन इस के बाद उस के रोनेबिलखने का जो सिलसिला शुरू हुआ तो फिर उस ने एटीएस के अफसरों को भी विचलित कर दिया.

हर सवाल के जवाब में सीमा का अब एक ही जवाब था, ‘सर, मैं कोई जासूस नहीं हूं, खुदा के लिए आप मेरा यकीन क्यों नहीं करते. मैं ने एक इंसान से प्यार किया है, क्या प्यार करना कोई गुनाह है? क्या 2 मुल्कों की सरहद किसी इंसान से प्यार करने का हक छीन सकती है?  सर, आप चाहे तो मुझे यहीं फांसी पर लटका दीजिए, लेकिन अब मैं पाकिस्तान वापस नहीं जाऊंगी. आप लोग भी जानते हैं कि अगर मैं वापस गई तो वे लोग मुझे और मेरे बच्चों का जिंदा नहीं छोड़ेंगे.’

खुद एटीएस के एडीजी नवीन अरोड़ा सीमा हैदर से 2 बार पूछताछ कर चुके थे. सीमा के बयान जरूर विरोधाभासी थे, लेकिन अभी तक उन के पास ऐसा कोई पुख्ता सबूत नहीं था जिस के आधार पर वे कह सकें कि सीमा हैदर पाकिस्तानी जासूस है.

‘देखो सीमा ये 2 मुल्कों के बीच कानूनी दांवपेंच का मामला है. तुम बिना वीजा लिए हिंदुस्तान में अपने बच्चों के साथ आई हो, इसलिए तुम को ये मुल्क छोड़ कर जाना ही होगा.’ जब एटीएस के सब से बड़े अफसर ने सीमा से ये कहा तो वह एक बार फिर फूटफूट कर रोने लगी.

दरअसल, एटीएस के अधिकारियों के कान सीमा हैदर की प्रेम कहानी को सुनसुन कर बुरी तरह पक चुके थे. उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि सीमा हैदर मीरा जैसी कोई पागल प्रेम दीवानी है या वो पाकिस्तान से आया एक खूबसूरत छलावा है, जिसे भारत में तबाही मचाने के लिए भेजा गया है. ये शक जरूर था, लेकिन इस के पीछे कोई पुख्ता सबूत अभी तक किसी के पास नहीं था.

सीमा हैदर अपने जिस प्रेमी सचिन मीना के लिए अपना घरबार अपना मुल्क पाकिस्तान और शौहर को छोड़ कर 4 बच्चों के साथ भारत आ गई है वो एक ऐसी प्रेम कहानी है, जिस में एक तरफ जहां सरहदों के बंधन का कानून है तो दूसरी तरफ सीमा पर जासूस होने के इल्जाम भी.

इस अनोखी प्रेम कहानी का अंत क्या होगा, ये तो आने वाले वक्त में पता चलेगा, लेकिन अभी तक पुलिस की जांच मीडिया से सीमा हैदर की बातचीत के आधार पर जो जानकारियां सामने आई हैं, वे इस प्रेम कहानी को रोचक को और रहस्यमई बनाती हैं.

सीमा ने गुलाम हैदर से भी की थी लव मैरिज

सीमा हैदर 25 साल की एक ऐसी खूबसूरत महिला है, जो पिछले कुछ दिनों से पूरे देश में चर्चा में हैं. हालांकि दस्तावेज के हिसाब से उस की उम्र मात्र 21 साल है. दरअसल, सीमा ने ही बताया कि पाकिस्तान में मातापिता अपने बच्चों की उम्र सर्टिफिकेट में 3 साल कम लिखवाते हैं.

सीमा हैदर मूलरूप से पाकिस्तान के सिंध प्रांत के जैस्माबाद कस्बे में ग्राम रिंद , तालुका कोट दीजी, जिला खैरपुर के रहने वाले गुलाम रजा की बेटी है. गरीब गुलाम रजा की कई संतानें थीं. बेटी को जवानी की दहलीज पर कदम रखता देख अम्मीअब्बू को उस के निकाह की चिंता सताने लगी.

वे चाहते थे बिना दानदहेज कहीं भी उस की शादी कर दें, लेकिन सीमा के खयाल कुछ अलग थे. वह अम्मीअब्बू की इच्छा को पूरा करने के लिए यूं ही किसी से निकाह नहीं कर सकती थी. इसलिए 2014 में उस ने अपनी अम्मी व अब्बू का घर छोड़ दिया और जिला जकोबाबाद, तालुका गढ़ी खैरो के अमीर जान जखरानी के घर चली आई.

दरअसल, अमीर जान के बेटे गुलाम हैदर से कुछ समय पहले ही सीमा की सोशल मीडिया के जरिए दोस्ती हुई थी. बाद में उन का प्यार परवान चढऩे लगा और अम्मीअब्बू का घर छोड़ने से 10 दिन पहले सीमा ने गुलाम हैदर से कहा कि वे अपना घर छोड़ कर उस के पास आ कर निकाह करना चाहती है.

सीमा व गुलाम दोनों ही बलूच थे, लेकिन सीमा जहां रिंद कबीले से थी तो गुलाम जखरानी कबीले से. गुलाम हैदर तो पहले ही सीमा की खूबसूरती व मोहब्बत का गुलाम बन चुका था. लिहाजा वह इंकार नहीं कर सका. सीमा जब गुलाम हैदर के घर पहुंची तो पता चला कि वह तो पहले से शादीशुदा है. हालांकि उस की कोई संतान नहीं थी.

शादी को भी महज 3 साल ही हुए थे. वैसे तो पाकिस्तान में बहुविवाह प्रथा है, लेकिन इस के बावजूद गुलाम के मांबाप जो पुराने खयालात के थे, वे प्रेम विवाह के सख्त खिलाफ थे. इसलिए सीमा से निकाह करने की लाख मिन्नतों के बावजूद उन्होंने दोनों को निकाह की इजाजत नहीं दी.

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गुलाम सीमा के प्यार में पागल था, लिहाजा गुलाम ने सीमा के साथ घर छोड़ दिया और किराए का घर ले कर उस ने सीमा से निकाह कर लिया. बाद में उस ने अपनी शादी को कोर्ट में रजिस्टर्ड भी करवा लिया.

उन दिनों गुलाम हैदर टाइल्स लगाने की कारीगरी का काम करता था. धीरेधीरे गुजरबसर होने लगी. 2-3 महीने गुजरने के बाद गुलाम हैदर सीमा के कहने पर सिंध छोड़ कर कराची आ गया. शुरुआत में उसे वहां गुजरबसर के लिए रिक्शा चलाना पड़ा. इसी तरह जिंदगी की मुश्किलों के बीच गुलाम हैदर और सीमा की जिंदगी तेजी से आगे बढऩे लगी.

2014 में गुलाम हैदर से हुई सीमा की शादी के बाद उन के 4 बच्चे हुए, जिन में 3 बेटियां और एक बेटा है, जिन की उम्र क्रमश: 7 साल, 6 साल, 5 साल और 3 साल है.

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गुलाम हैदर कराची में कोई ऐसा कामधंधा नहीं ढूंढ पाया, जिस से परिवार की गुजरबसर ठीक से हो सके. जैसेजैसे परिवार बढ़ा तो गुलाम के सिर पर जिम्मेदारियों का बोझ व बच्चों की परिवरिश के लिए ज्यादा पैसा कमाने की चिंता भी बढी. अब सीमा भी उस पर ज्यादा पैसा कमाने व बच्चों को भविष्य संवारने का दबाव बनाने लगी थी.

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