होम डिलीवरी में मिला प्यार – भाग 2

मां बनने के बाद पूजा का यौवन ताजे गुलाब की भांति खिल गया था, वह सुंदर तो थी ही, उस का रूप अब और निखर आया था. पति राकेश को टिफिन तैयार कर के ड्यूटी पर भेजने के बाद कमरे की साफसफाई और 2-4 जोड़ी कपड़े धोने का काम ही बचता था, जिसे निपटा लेने के बाद पूजा के पास आराम करने, टीवी देखने के अलावा कोई काम नहीं रह जाता था. बेटा एक साल का था, इसलिए नहलाने और पेट भर दूध पिलाने के बाद वह आराम से घंटों सोता रहता था. रोजरोज एक ही तरह का काम करना पड़े तो आदमी ऊब जाता है. पूजा अब आराम करने या टीवी देखने से ऊबने लगी थी.

फ्लैटों में आसपड़ोस से ज्यादा वास्ता रखने का चलन नहीं होता है. सभी अपने फ्लैट का दरवाजा बंद कर रखते हैं. पूजा को भी दरवाजा बंद कर के रहना पड़ता था. पड़ोसियों से अधिक बोलचाल न होने से पूजा दिन भर बोर होती रहती थी. शाम को राकेश लौटता था, तभी उस के चेहरे पर रौनक आती थी. रात राकेश की बांहों में गुजर जाती थी, दूसरा दिन फिर बोरियत भरा. वह क्या करे, क्या न करे इसी सोच में थी कि एक दिन सुबह 10 बजे उस के घर की कालबेल बजी. राकेश तो ड्यूटी पर चला गया है, इस वक्त कौन आया होगा? सोच में डूबी पूजा दरवाजे पर आ गई.

“कौन है?’’ पूजा ने दरवाजे के पीछे से ऊंची आवाज में पूछा, ‘‘जी, मैं आप की वाशिंग मशीन ले कर आया हूं, दरवाजा खोलिए.’’ बाहर से बताया गया.

“लेकिन हम ने तो वाशिंग मशीन नहीं मंगवाई है.’’ पूजा ने हैरानी से कहा.

“यह राकेश मीणा जी का ही घर है न?’’

“बेशक! यह मेरे पति राकेश मीणा का ही घर है.’’

“आप के पति राकेशजी ने हमारी कंपनी को फोन कर के वाशिंग मशीन घर में भेजने को कहा है. आप अपने पति राकेशजी से पूछ लीजिए.’’

पूजा ने तुरंत पति राकेश को फोन मिला दिया और पूछा, ‘‘क्या आप ने वाशिंग मशीन खरीदी है?’’

“ओह!’’ राकेश चौंकता हुआ बोला, ‘‘मैं तुम्हें फोन करना भूल गया था पूजा. देखो कंपनी से कोई वाशिंग मशीन ले कर आएगा, उसे अपने हिसाब से लगवा लेना.’’

“कंपनी ने वाशिंग मशीन भेज दी है, मेरे भुलक्कड़ पति.’’ पूजा मुसकरा कर बोली, ‘‘मैं उसे रिसीव कर रही हूं.’’ पूजा ने फोन काटने के बाद दरवाजा खोल दिया. दरवाजे पर 2 युवक एलजी की आटोमैटिक वाशिंग मशीन के साथ खड़े थे. दोनों पसीने से भीगे थे.

“सौरी.’’ पूजा झेंपते हुए बोली, ‘‘मेरे पति मुझे पहले ही बता देते तो मैं आप को इतनी देर इंतजार नहीं करवाती. आप तो जानते ही हैं, ऐसी जगह पर बहुत सावधानी से रहना पड़ता है.’’

“कोई बात नहीं जी.’’ उन दोनों में से एक युवक जो देखने में स्मार्ट दिखाई पड़ रहा था, हंस कर बोला, ‘‘पहले आप ठंडा पानी पिलाइए. फिर मैं आप की पसंद से मशीन सैट कर दूंगा.’’

“जी हां,’’ पूजा जल्दी से बोली, ‘‘आप दोनों अंदर आ जाइए और पंखे में पसीना सुखा लीजिए. मैं आप के लिए शरबत बना कर लाती हूं.’’ पूजा रसोई में चली गई.

वह नींबू का शरबत बना कर 2 गिलास ट्रे में ले कर आई तो दोनों युवक ड्राइंगरूम में बैठे पसीना सुखा रहे थे. “आज बहुत गरमी है.’’ पूजा ने कहा और दोनों को शरबत दे दिया.

“आप अपने लिए शरबत नहीं लाई भाभीजी.’’ उस स्मार्ट से नजर आने वाले युवक ने पूछा. भाभी का संबोधन सुन कर पूजा मुसकराने लगी, ‘‘आप ने तो रिश्ता भी जोड़ लिया जी.’’

“मेरा नाम कृष्ण कुमार मीणा है.’’ उस हैंडसम युवक ने बगैर हिचके कहा, ‘‘मीणा जाति से हूं तो आप के पति का मैं छोटा भाई बन गया और आप का देवर, इस नाते से आप मेरी भाभी लगीं.’’

“बातें बनाने में माहिर लगते हो,’’ पूजा हंसते हुए बोली, ‘‘चलो शरबत पी कर वाशिंग मशीन सैट करवा दो.’’ कृष्ण और उस के साथी ने शरबत पी लिया और पूजा के द्वारा बताई जगह पर वाशिंग मशीन लगा कर उस के प्रयोग का तरीका भी समझा दिया. पूजा ने महसूस किया कि वाशिंग मशीन लगाने के दौरान कृष्ण मीणा उसे चोर नजरों से निहार रहा था.

पूजा के दिल में इस बात से गुदगुदी होने लगी. पहली मुलाकात थी, इसलिए संकोचवश वह ज्यादा नहीं बोली. कृष्ण मीणा ने जाते समय अपना मोबाइल नंबर पूजा के मोबाइल में फीड करवा दिया और यह कह कर पूजा का मोबाइल नंबर ले लिया कि 2 दिन बाद उस से वाशिंग मशीन के विषय में पूछताछ करेगा. यदि मशीन की कोई कंप्लेन हो तो वह बेहिचक उसे फोन कर के बता सकती हैं.

दिल में बस गया कृष्ण कुमार…

कृष्ण मीणा चला गया तो पूजा उसी के विषय में दिन भर सोचती रही. शाम को राकेश लौट कर आया तो पूजा के दिमाग से कृष्ण मीणा का खयाल निकल गया. वह पति की सेवा में लग गई. पूजा कृष्ण मीणा को भूल ही गई थी. 2 दिन बाद कृष्ण मीणा ने उस का नंबर मिला दिया. पूजा ने काल रिसीव की तो कृष्ण मीणा का चहकता स्वर उभरा, ‘‘कैसी हो भाभी, पहचाना या भुला दिया अपने देवर को?’’

पूजा उसे तुरंत पहचान गई थी, वह मुसकरा कर बोली, ‘‘भूली नहीं हूं देवरजी, बताओ कैसे हो?’’

“ठीक नहीं हूं भाभी. जब से तुम्हारे घर से लौटा हूं, कुछ अच्छा नहीं लग रहा है.’’ कृष्ण ने दूसरी तरफ से आह भरते हुए बताया.

“अरे तो किसी अच्छे डाक्टर को दिखलाओ.’’

“जो रोग लग गया है, वह किसी डाक्टर से ठीक होने वाला नहीं है,’’ कृष्ण ने दूसरी ओर ठंडी सांस भरी, ‘‘उस का इलाज तुम्हारे पास है भाभी.’’

कृष्ण की बात का मतलब समझते ही पूजा के दिल की धडक़नें बढ़ गईं. वह खुद को संभालते हुए अनजान बन कर बोली, ‘‘मेरे पास भला तुम्हारी बीमारी का क्या इलाज है?’’

“मुझे नींद नहीं आ रही है भाभी. जब से तुम्हारी मोहिनी सूरत देखी है, रात भर जागता रहता हूं, तुम अपने पहलू में थपकी दे कर सुलाओगी तो नींद आ जाएगी.’’

पूजा का तनमन रोमांच से भर गया. कृष्ण उस पर दिलोजान से फिदा हो गया है, यह सोच कर ही उस के दिल में घंटियां बजने लगीं. उस ने मादक अंगड़ाई ली और इस प्रकार फुसफुसाई जैसे कोई पास में खड़ा हो और उस की बात सुन लेगा, ‘‘कल वह ड्यूटी चले जाएंगे तो आ जाना. कोशिश करूंगी कि तुम्हें मीठी नींद आ जाए.’’ कहने के बाद पूजा ने तुरंत फोन काट दिया. अपनी बात पर वह खुद शरमा गई थी. यानी डिलीवरी बौय कृष्ण कुमार मीणा से उसे प्यार हो गया था.

हो गए अवैध संबंध…

दूसरे दिन राकेश टिफिन ले कर ड्यूटी पर चला गया तो 10 मिनट बाद ही कृष्ण ने आ कर कालबेल बजा दी. पूजा ने समझा राकेश कुछ भूल गया है वही लौटा है. लेकिन दरवाजा खोलने पर कृष्ण नजर आया तो वह चौंक कर बोली, ‘‘क्या राकेश के घर से निकलने की राह ही देख रहे थे.’’

“ऐसा ही समझ लो भाभी,’’ कहने के साथ ही कृष्ण ने पूजा को बाहों मे भर लिया.

“बड़े बेसब्र हो देवरजी, तुम्हें अंगुली भी नहीं पकड़ाई, तुम ने सीधे पोंचा ही पकड़ लिया. दरवाजा तो बंद करने देते.’’ पूजा कसमसा कर बोली तो कृष्ण ने उसे छोड़ दिया. पूजा ने दरवाजा बंद कर दिया और कृष्ण की बांह पकड़ कर उसे बैडरूम में ले आई. कृष्ण ने उसे बांहों मे समेटा तो पूजा ने कृष्ण को पति के बैड पर वह सब सौंप दिया, जिस पर केवल उस के पति का अधिकार था. वह तनमन से कृष्ण की हो गई. अर्थात अवैध संबंध कथा की शुरुआत हो चुकी थी. कृष्ण से अवैध संबंध कायम हुए तो पूजा ने उसी के साथ जीनेमरने की कसमें खा लीं.

बालम की सेज पर नौकर का धमाल – भाग 3

शैलेष भी सीमा से हेमंत की तारीफों के पुल बांधता. ढाबे में काम करते हुए हेमंत की नजदीकियां सीमा से बढ़ गईं और वे दोनों एकदूसरे से प्यार करने लगे. शैलेष जब भी घर से बाहर जाता तो हेमंत और सीमा को मौका मिल जाता और वे अपनी हसरतें पूरी करने लगे.

2022 के नवंबर महीने में शैलेष ने अपने ढाबे पर काम करने वाले हेमंत बावरिया और अपनी पत्नी सीमा को आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया था. तभी से शैलेष सीमा से हेमंत को ढाबे से निकालने को बोल रहा था. लेकिन सीमा की जिद के आगे वह मजबूर था. इसी वजह से आए दिन शैलेष शराब के नशे में सीमा से विवाद करने लगा. एक दिन गुस्से में आ कर शैलेष ने सीमा से कहा,

‘‘तुम हेमंत को ढाबे से निकाल दो, नहीं तो मैं अपने घर वालों से बोल कर तुम्हारे नाजायज संबंधों का भांडा फोड़ दूंगा.’’

इस पर सीमा ने भी दोटूक कह दिया, ‘‘मैं तुम्हें छोड़ सकती हूं,मगर हेमंत को नहीं.’’

शैलेष खून का घूंट पी कर रह गया था. उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करे. समाज में बदनामी के डर से वह मौन था. उसे अपनी बेटी के भविष्य की चिंता भी खाए जा रही थी.

पति था पत्नी के प्यार में कांटा…

अवैध संबंध की जानकारी परिवार के लोगों को बताने की बात पर सीमा तथा हेमंत बावारिया ने जबरदस्ती शैलेष साकरे को नशामुक्ति केंद्र इटारसी में 6 माह के लिए भेज दिया. परिवार के लोगों के पूछने पर सीमा ने बताया कि शैलेष नशे की लत के कारण आए दिन झगड़ा करता है. कुछ माह वहां रहेगा तो उस की यह लत छूट जाएगी.

शैलेष के जाने के बाद से सीमा तथा हेमंत मिलन ढाबे के कमरे में एक साथ रहने लगे थे. शैलेष की बेटी सारणी के 9वीं क्लास में पढ़ती थी, उसे हेमंत का अपने कमरे में मम्मी के साथ रहना पसंद नहीं आ रहा था. जब वह इस बात का विरोध करती तो सीमा उसे समझाबुझा कर शांत कर देती. शैलेष की बेटी ज्यादा दिनों तक यह बरदाश्त नहीं कर सकी और आखिर वह पापा को घर लाने की जिद कर बैठी.

बेटी के जिद करने पर सीमा एवं हेमंत ने करीब 10-15 दिन बाद ही शैलेष साकरे को नशामुक्ति केंद्र से वापस रेस्टोरेंट ले आए. इस के बाद शैलेष सीमा और हेमंत पर पैनी निगाह रखने लगा था, जिस की वजह से दोनों प्रेमी मिल नहीं पा रहे थे. दोनों की तड़प बढ़ती जा रही थी और शैलेष मिलन की राह में रोड़ा बना हुआ था.

10 जनवरी, 2023 की बात है. रात 2 बजे सीमा साकरे अपने कमरे से निकल कर कंबल ले कर हेमंत बावरिया को रेस्टोरेंट में देने चली गई. काफी देर तक वापस नहीं आने के कारण शैलेष तथा उस की बेटी ने जा कर देखा तो सीमा तथा हेमंत ढाबे के एक कमरे में एक ही बिस्तर पर आपत्तिजनक हालत में मिले.

हत्या कर ढाबे में लगा दी आग…

यह देख कर शैलेष का खून खौल उठा. वह गुस्से में उसे मारने के लिए दौड़ा तो सीमा ने उस के हाथ पकड़ लिए. शैलेष ने अपनी पत्नी से कहा, ‘‘इस आस्तीन के सांप को ढाबे से निकाल दो, नहीं तो मैं तुम दोनों का मुंह काला कर के कस्बे में घुमाऊंगा.’’

सीमा ने इंकार करते हुए कहा, ‘‘अगर तुम ने हेमंत को ढाबे से निकाला तो मैं मायके चली जाऊंगी.’’ इस के बाद रोज ही शैलेष और सीमा हेमंत को ले कर झगडऩे लगे. जब शैलेष ने सीमा की इन हरकतों का विरोध करना शुरू किया तो सीमा नाराज हो कर अपने मायके बैतूल चली गई. 15 जनवरी को हेमंत भी ढाबा छोड़ कर कहीं चला गया. 2-3 दिन अपने मायके बैतूल में रहने के बाद सीमा अपनी बुआ के घर इटारसी आ गई.

इस बीच हेमंत और सीमा की मोबाइल फोन पर बातचीत लगातार होती रहती थी. शैलेष की हत्या का प्लान भी मोबाइल फोन पर बातचीत के दौरान ही बना था.सीमा पति शैलेष की हत्या करने के लिए हेमंत को बारबार बोल रही थी, लेकिन हेमंत इस के लिए तैयार नहीं हो रहा था. सीमा ने एक दिन फोन पर प्रेमी हेमंत को चेतावनी देते हुए कहा, ‘‘जब तक शैलेष हम दोनों के बीच रहेगा, हम चैन से नहीं रह सकते. तुम किसी तरह ढाबे में ही शैलेष की हत्या कर दो.’’

“ये काम इतना आसान नहीं है सीमा, मुझे कुछ वक्त दो सोचने के लिए.’’ हेमंत टालते हुए बोला.

‘‘हेमंत, तुम ने शैलेष का मर्डर नहीं किया तो मैं तुम्हें छोड़ कर किसी और मर्द से संबंध बना कर शैलेष की हत्या करवा दूंगी.’’

यह सुन कर हेमंत डर गया. उसे लगा कि सीमा उस के हाथ से न निकल जाए. हेमंत ने सोचा आइडिया अच्छा है, जब शैलेष ही नहीं रहेगा तो सीमा से शादी कर वह हमेशा के लिए मेरी हो जाएगी और ढाबे की संपत्ति पर भी उस का अधिकार रहेगा. हेमंत भी प्यार में इतना पागल हो गया था कि उस ने अपनी मां से सीमा के साथ शादी करने की बात कह दी थी.

हेमंत तथा सीमा साकरे ने मिल कर योजना बनाई और पहली फरवरी की सुबह 8 बजे वह शैलेष की हत्या के इरादे से ढाबे के पास पहुंच गया. जैसे ही शैलेष की बेटी कमरे से निकल कर स्कूल बस में बैठी, वह ढाबे के पिछले हिस्से से आशियाना ढाबे के कमरा नं. 101 में चुपके से पहुंच गया. उस समय शैलेष मोबाइल पर कुछ देख रहा था, तभी हेमंत ने उस के सिर पर लोहे के हथौड़े से 3-4 वार कर दिए. पलभर में ही शैलेष ढेर हो गया. उस के बाद हेमंत ने पैट्रोल डाल कर शैलेष के शरीर में आग लगा दी.

पुलिस बैतूल ढाबा कांड की आरोपी सीमा को पहले ही न्यायालय में पेश कर जेल भेज चुकी थी. हेमंत की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने प्रैस कौन्फ्रैंस कर इस प्रेम अपराध कहानी का खुलासा किया और हेमंत बावरिया निवासी इटारसी जिला नर्मदापुरम के खिलाफ धारा 302, 34, 120बी, 201 आईपीसी के तहत मामला कायम कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से हेमंत को बैतूल जेल भेज दिया गया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

होम डिलीवरी में मिला प्यार – भाग 1

राकेश मीणा अपने औफिस में तो आ गया था, लेकिन उस का मन काम में नहीं लग रहा था. सुबह से ही उस के सिर में दर्द था और बदन भी गरम लग रहा था. वह औफिस आना नहीं चाहता था, लेकिन एक जरूरी फाइल मालिक को कंप्लीट कर के देनी थी, इसलिए औफिस आना जरूरी हो गया था. जैसेतैसे राकेश ने फाइल का काम पूरा किया. दोपहर में लंच का टाइम हो गया था, लेकिन उस की इच्छा लंच करने की नहीं हुई. उस ने फाइल मालिक की मेज पर रख कर उन से अपनी तबीयत खराब होने की बात बता आधे दिन की छुट्ïटी ले ली.

स्कूटर से घर की ओर लौटते वक्त उस ने रास्ते में पडऩे वाले एक कैमिस्ट से सिर दर्द की दवा खरीदी और घर पहुंच गया. पत्नी पूजा भरा हुआ टिफिन देख कर नाराज होगी, यह बात राकेश मीणा अच्छी तरह जानता था. पूजा ने आज बड़े प्यार से लंच के लिए बैंगन का भरता और परांठे बना कर दिए थे, तबीयत खराब हो जाने की वजह से वह टिफिन वापस ले आया था.

“ऊंह! पूजा नाराज होगी तो वह उसे मना लेगा.’’ सोचते हुए राकेश ने स्कूटर स्टैंड पर खड़ा किया और दरवाजे की तरफ कदम बढ़ा दिए. दरवाजा अंदर से बंद था. राकेश ने कालबेल बजाई तो काफी देर बाद उस की 24 वर्षीय पत्नी पूजा ने दरवाजा खोला. सामने पति को खड़ा देख कर उस के चेहरे का रंग उड़ गया. वह आश्चर्य से बोली, ‘‘आप, इस समय?’’

पत्नी पर हुआ शक…

राकेश ने गौर से पत्नी की तरफ देखा, पूजा के बाल बिखरे हुए थे. माथे का सिंदूर फैला हुआ था. कपड़े भी अस्तव्यस्त थे. माथे पर छलका पसीना और उखड़ी हुई सांसें बयां कर रही थीं कि बंद दरवाजे के पीछे वह किसी अनैतिक कार्य में लिप्त रही है. राकेश का माथा ठनका. उस ने अपने कदम आगे बढाए ही थे कि पूजा ने खुद को संभालते हुए उस के गले में प्यार से बाहें डाल दीं और उस से सट कर कामुक स्वर में बोली, ‘‘बहुत मौके से आए हैं आप, मैं अभी नींद में आप का ही सपना देख रही थी.’’

“अंदर कौन है पूजा?’’ राकेश ने पत्नी की बाहें गले में से निकालने का प्रयास करते हुए तीखे स्वर में पूछा.

“अंदर कौन होगा जी!’’ पूजा ने चौंकने का नाटक करते हुए हैरानी से कहा, ‘‘आइए देख लीजिए, अंदर तो मैं ही थी.’’

राकेश को खुद से चिपकाए हुए पूजा उसे कमरे में ले आई. राकेश को कमरे में कोई नजर नहीं आया. उस ने पूजा को परे धकेल कर पलंग के नीचे और अलमारी के पीछे अच्छी तरह देखा, वहां भी कोई नहीं था. राकेश की नजर पलंग पर गई. पलंग की चादर बुरी तरह मसली हुई नजर आ रही थी, यह इस बात की ओर इशारा कर रही थी कि पलंग पर 2 जिस्मों ने अपनी अधूरी हसरतें पूरी करने के लिए खूब उछलकूद की है. राकेश पत्नी को जलती आंखों से घूरने लगा.

“आप मुझे इस तरह क्यों घूर रहे हैं?’’ पूजा मासूमियत से बोली, ‘‘आप ने कमरे की छान तो कर ली है.’’

“तुम्हारी हालत, तुम्हारे अस्तव्यस्त कपड़े और पलंग की यह मसली हुई चादर तो यही इशारा कर रही है कि मेरे आने से पहले तुम किसी की बाहों में कैद हो कर अनैतिक खेल खेल रही थी.’’

“छि” पूजा ने मुंह बना कर कहा, ‘‘आप को ऐसी बात कहते हुए जरा भी शरम नहीं आ रही. मैं एक बेटे की मां हूं राकेश… तुम मुझ पर ऐसी तोहमत लगा रहे हो,’’ कह कर पूजा रोने लगी.

आंसुओं से बह गया गुस्सा…

औरत के आंसू पुरुष को कमजोर करने का घातक हथियार होते हैं. पूजा को रोते देख कर राकेश का गुस्सा उड़ गया. वह पूजा के पास आ कर उस के आंसू पोंछते हुए प्यार से बोला, ‘‘मैं तुम्हें रोते हुए नहीं देख सकता पूजा, आंसू पोंछो और मेरे लिए चाय बना कर लाओ, मेरे सिर में भयंकर दर्द हो रहा है.’’

“अच्छा, कैसे?’’ पूजा जल्दी से आंसू पोंछ कर परेशान स्वर में बोली, ‘‘इसीलिए आप घर आ गए हैं. आप लेट जाइए, मैं आप के लिए चाय बना कर लाती हूं.’’ पूजा ने पलंग की चादर ठीक कर के पति राकेश को लिटा दिया और रसोई में चली गई. गैस पर चाय का पानी चढ़ा कर उस ने चोली में से मोबाइल निकाल कर एक नंबर मिला दिया. दूसरी ओर घंटी बजी, तुरंत ही किसी ने काल अटैंड कर ली.

“सब ठीक है न पूजा?’’ दूसरी ओर से पुरुष का सहमा हुआ स्वर उभरा, ‘‘तुम्हारे पति को तुम पर शक तो नहीं हुआ?’’

“आज तो वह मेरी जान ही ले लेता कृष्ण. वह अचानक ही घर आ गया, यदि तुम्हें वह कमरे में पकड़ लेता तो मेरी गरदन दबा देता.’’ पूजा ने अपने प्रेमी कृष्ण को बताया.

“तुम ने बहुत समझदारी से काम लिया पूजा. अपने पति को बाहों में इस तरह जकड़ लिया कि उस की पीठ मेरी तरफ हो गई. तुम्हारा इशारा पा कर मैं उस की पीठ के पीछे से चुपचाप निकल भागा. और लिफ्ट से नीचे उतर गया. आगे मिलन के समय हमें बहुत सावधानी बरतनी पड़ेगी कृष्ण.’’

“ठीक कहती हो पूजा.’’ कृष्ण का गंभीर स्वर उभरा, ‘‘अब हम किसी होटल का कमरा बुक कर के अपनी हसरतें पूरी कर लिया करेंगे.’’

“यही मैं भी सोच रही थी,’’ पूजा ने खुश हो कर कहा, ‘‘फोन काट रही हूं, उसे चाय बना कर देनी है.’’ पूजा ने इतना कह कर फोन काट दिया. चाय उबल गई थी, चाय कप में छान कर राकेश को देने के लिए वह कमरे में आ गई. राकेश आंख बंद किए लेटा था. पूजा के होंठों पर कुटिल मुसकराहट तैर गई. उस ने राकेश को त्रियाचरित्र के जाल में फंसा कर खुद और प्रेमी कृष्ण को साफ बचा लिया था.

डिलीवरी बौय कृष्ण कुमार से लड़े नैना…

राकेश मीणा शिवदासपुर की वसुंधरा कुटुंब सोसायटी के सी-24 नंबर के फ्लैट में चौथे माले पर अपनी पत्नी पूजा उर्फ फूला और 2 वर्षीय बेटे के साथ किराए पर रहता था. पूजा के साथ राकेश की शादी 3 साल पहले गांव झुंझनूं, थाना वौली, जिला सवाई माधोपुर के अपने पैतृक घर से हुई थी.

चूंकि राकेश मीणा शिवदासपुर (जयपुर दक्षिण) की एक कंपनी में अधिकारी के पद पर नियुक्त था, इसलिए शादी के 10 दिन बाद ही वह झुंझनूं से शिवदासपुर लौट आया था. यहां शादी से पहले ही राकेश ने एक सोसायटी में फ्लैट किराए पर ले लिया था. पूजा के साथ उस ने अपनी गृहस्थी की शुरुआत इसी किराए के फ्लैट से की. शादी के एक साल बाद ही पूजा ने बेटे को जन्म दिया, दोनों पतिपत्नी अपने बेटे को बहुत प्यार करते थे. उन की जिंदगी के दिन खुशहाली से बीत रहे थे कि पूजा के कदम बहक गए और इस खुशहाल जिंदगी में स्याह रंग घुलना शुरू हो गया.

बालम की सेज पर नौकर का धमाल – भाग 2

पुलिस की टीम जब सीमा की तलाश में उस की बुआ के घर इटारसी पहुंची तो वह वहीं मिल गई. पुलिस सीमा को वहां से सारणी पुलिस स्टेशन ले कर आई. पुलिस ने जब उस से सख्ती से पूछताछ की तो उस ने डर की वजह से बड़ी आसानी से अपने प्रेमी हेमंत से पति की हत्या करवाने का जुर्म कुबूल कर लिया.

पुलिस जांच में यह सब स्पष्ट हुआ कि साक्ष्य छिपाने के लिए सीमा ने अपने मोबाइल से काल डिटेल्स डिलीट कर दी थीं.इतना ही नहीं, प्रेमी हेमंत ने हत्या करने के बाद सीमा को फोन कर के बताया था कि उस ने शैलेष को मार दिया है. तब सीमा ने उसे याद दिलाया, ‘‘हेमंत, तुम भूल गए क्या, शैलेष कहता था कि हम दोनों का मुंह काला कर के शहर में घुमाएगा.’’

“अब हमारे प्यार के बीच कोई नहीं आएगा सीमा,’’ हेमंत ने उसे भरोसा दिलाते हुए कहा.

“नहीं हेमंत, तुम अभी शैलेष का मुंह काला कर दो. तभी मुझे अच्छा लगेगा.’’ सीमा की इसी बात पर हेमंत ने मृत पड़े शैलेष के शरीर पर अपने साथ बोतल में छिपा कर लाए हुए पैट्रोल को छिडक़ कर आग लगा दी और वहां से भाग खड़ा हुआ.

पुराने प्यार ने ली अंगड़ाई…

पुलिस हिरासत में सीमा ने अपने पति की हत्या प्रेमी हेमंत बावरिया से करवाने की बात कुबूल कर ली थी, तभी से सारणी और पाथाखेड़ा पुलिस थाने की टीमें हेमंत की तलाश में जुट गई थीं. एसडीपीओ रोशन जैन ने आरोपी हेमंत की गिरफ्तारी के लिए टीआई रत्नाकर हिंग्वे के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया.

पुलिस टीम ने हेमंत की तलाश में इटारसी, खैरवानी, चोपना समेत अन्य संभावित स्थानों पर दबिश दी, लेकिन उस का कोई सुराग नहीं मिल सका. हेमंत ने भागने के बाद अपना मोबाइल बंद कर लिया था. पुलिस टीम उस की तलाश में इटारसी गई तो वहां उस के मातापिता और भाईबहन भी थे. उन्होंने बताया कि हेमंत इटारसी में भी छोटेमोटे अपराध करता रहता था और घर से महीनों तक गायब रहता था.

पुलिस घर पर आ कर मातापिता से पूछताछ करती थी, तब उस के मातापिता हेमंत को यह कहते हुए डांटते, ‘‘तेरी वजह से हमें समाज में नीचा देखना पड़ रहा है.’’ इसी बात को ले कर वह घर से चला गया और पिछले 2 सालों से घर भी नहीं आया. पुलिस इटारसी से खाली हाथ वापस लौट आई. पुलिस ने हेमंत के मोबाइल को सर्विलांस पर लगा रखा था. 6 फरवरी, 2023 को हेमंत ने कुछ समय के लिए मोबाइल औन किया तो पुलिस ने उस की लोकेशन ट्रेस की. वह सारणी से करीब 15 किलोमीटर दूर राऊनदेव इलाके की थी.

पुलिस टीम ने मुस्तैदी के साथ घेराबंदी की तो जंगल में एक खंडहरनुमा मकान में वह पुलिस के हत्थे चढ़ गया. उसे 6 फरवरी, 2023 को सुबह करीब साढ़े 10 बजे राउनदेव के जंगल से घेराबंदी कर के पकड़ लिया गया. हत्या करने के बाद से आरोपी हेमंत बावरिया जंगलजंगल छिपता फिर रहा था. खास बात यह थी कि हत्या जैसी संगीन वारदात को अंजाम देने के बावजूद आरोपी शहरी क्षेत्र के आसपास ही जंगल में छिपता रहा, जिसे पकडऩे में 6 दिन बाद पुलिस को सफलता मिल गई.

सीमा और हेमंत बावरिया की मुलाकात भले ही पुरानी थी, मगर उन का प्यार नवंबर 2021 से परवान चढ़ा था. दोनों को इश्क का खुमार इस कदर चढ़ गया कि प्यार में सब कुछ कुरबान करने को तैयार हो गए. पति की हत्या की साजिश रचने वाली सीमा ने पुलिस पूछताछ में बड़े आत्मविश्वास के साथ कहा था, ‘‘मेरे जेल जाने की खबर मिलते ही हेमंत भी मिल जाएगा.’’ हकीकत में यही हुआ. सीमा को 2 दिन पहले ही पुलिस ने न्यायालय में पेश किया था, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. इस के बाद हेमंत भी पुलिस के हत्थे चढ़ गया.

पुलिस पूछताछ में हेमंत ने बताया कि हत्या से 3 दिन पहले उस ने मिलन ढाबे का सीसीटीवी कैमरा निकालने का प्रयास किया था. लेकिन अपने मंसूबे में वह कामयाब नहीं हो सका. इतना ही नहीं, हत्या करने के बाद उस ने ढाबे के काउंटर तक आने वाले पिछले दरवाजे पर लगे ताले को तोड़ दिया था.

दरअसल, काउंटर में सीसीटीवी कैमरे का डिजिटल वीडियो रिकौर्डर रखा था. उस रिकौर्डर को वहां से हटाने की योजना उस ने बनाई थी, लेकिन वारदात वाले कमरे से धुंआ उठते ही ढाबे के बाहर बड़ी तादाद में लोग इकट्ïठा हो गए थे, जिस के चलते वह रिकौर्डर तक नहीं पहुंच सका और वहां से भाग निकला. हेमंत अगर इस रिकौर्डर को ले जाता तो इस हत्याकांड का खुलासा बमुश्किल ही हो पाता, लेकिन हेमंत के ढाबे में प्रवेश करते और भागते सीसीटीवी कैमरे में कैद होने से वारदात से परदा उठ गया.

बैतूल जिले के सारणी कस्बे में रहने वाले 45 साल के शैलेष साकरे की शादी करीब 18 साल पहले बैतूल की सीमा से हुई थी. एक बेटी के जन्म के बाद से ही शैलेष मिलन ढाबा चला रहा था.

इटारसी में हुई थी मुलाकात…

38 साल की सीमा की बुआ इटारसी में रहती हैं, वहां अकसर सीमा का आनाजाना होता रहता था. एक साल पहले की बात है जब सीमा अपनी बुआ के यहां इटारसी गई हुई थी तो उस की मुलाकात हेमंत बावरिया से हो गई. हेमंत से उस की जानपहचान बरसों पहले उस समय से थी, जब वह अपनी बुआ के पास इटारसी आया करती थी, लेकिन शादी हो जाने के बाद उस का इटारसी आना कम हो गया था. हेमंत उस का दोस्त था. हेमंत सीमा को देख कर बोला, ‘‘यार, तुम तो बहुत बदल गई हो, अब तो हमें भाव ही नहीं देती.’’

“जनाब, अब हम किसी और के हो चुके हैं, अब भला तुम्हें क्यों भाव देंगे?’’ सीमा इठलाती हुई बोली. सीमा के इस जबाब से वह झेंप गया. सीमा ने उस की झेंप दूर करते हुए कहा, ‘‘अच्छा डियर, ये बताओ तुम ने शादी की या नहीं.’’

“जानू, हमारा दिल तो अभी भी तुम्हारे लिए धडक़ता है, भला हम क्यों शादी करेंगे.’’ हेमंत ने भी बेधडक़ हो कर कहा. 28 साल का हेमंत गोरे रंग का हट्ïटाकट्ïटा स्मार्ट नौजवान था. सीमा यह जान कर बहुत खुश हुई कि हेमंत की अभी तक शादी नहीं हुई है. सीमा ने हेमंत में इंटरेस्ट लेते हुए पूछा, ‘‘कुछ कामधंधा कर रहे हो कि नहीं?’’

“पहले इटारसी के एक होटल में नौकरी करता था. लौकडाउन के बाद वह नौकरी भी हाथ से निकल गई. कहीं तुम्हारी जुगाड़ हो तो मुझे नौकरी दिलवा दो न. घर वाले भी ताना देने लगे हैं कि मुफ्त की रोटियां तोड़ते हो.’’ हेमंत बोला.

“नौकरी तो दिलवा दूंगी, पर सारणी चलना पड़ेगा. घर से इतनी दूर रह कर नौकरी कर पाओगे?’’ सीमा ने हेमंत का मन टटोलते हुए पूछा.

“नौकरी के लिए तो मैं दुनिया जहान में कहीं भी रह सकता हूं और फिर सारणी में तो तुम्हारा दीदार भी होता रहेगा,’’ हेमंत भी शरारती अंदाज में बोला.

सीमा ने हेमंत को सारणी आने की पेशकश की तो वह नवंबर 2021 में बैतूल जिले के सारणी कस्बा चला गया. वहां पर सीमा ने अपने पति से उस की जानपहचान करा कर अपने ‘मिलन ढाबे’ पर काम के लिए रख लिया.अब हेमंत ढाबे पर बड़ी लगन से काम करने लगा. अपने काम से उस ने शैलेष का दिल जीत लिया. हेमंत ढाबे में रहने लगा था. ढाबे में ही शैलेष अपनी पत्नी और बेटी के साथ रहता था. ऐसे में हेमंत का मिलनाजुलना सीमा से होता रहता था.

इंटरनेट ने दिया पति को पत्नी की हत्या का तरीका – भाग 3

पुलिस को समझते देर नहीं लगी कि पत्नी सोनिया, प्रेमिका अमीषा की मोहब्बत के आड़े रही थी, इसलिए जरूर उन्होंने मिल कर उस की हत्या करवा दी होगी. सोनिया की लाश की जांच करने पर यह भी पाया गया कि उस के शरीर पर मारपीट के किसी तरह की खरोंच तक नहीं थी, बल्कि उस के गले में गहरा लाल निशान जरूर बन गया था. ऐसा लग रहा था, जैसे उस का गला किसी पतले तार या रस्सी से घोटा गया हो.

सोनिया को विकास और अमीषा के संबंधों के बारे में पता चल गया था. वह इस का विरोध कर रही थी. इसे ले कर दोनों में कई बार झगड़ा हो चुका था. विकास अमीषा के साथ रहना चाहता था. अमीषा भी उस पर पत्नी को छोड़ने का दबाव बना रही थी. इस पर दोनों ने सोनिया की हत्या करने की योजना बना ली थी.

अमीषा भी विकास के साथ राजस्थान के भिवाड़ी स्थित अरविंदा फार्मा कंपनी में काम करती है. पुलिस ने विकास के मोबाइल की काल डिटेल्स निकलवाई तो उस में हत्या से ठीक पहले अमीषा से उस की बातचीत मिल गई. इस आधार पर विकास से पूछताछ की जाने लगी. पुलिस की सख्ती के आगे विकास अधिक समय तक टिक नहीं पाया. उस ने स्वीकार कर लिया कि अमीषा की मदद से सोनिया की हत्या कर दी गई और उसे लूटपाट में बाइकर द्वारा हत्याकांड की कहानी बना कर पुलिस को वारदात की सूचना दी थी.

पूछताछ में विकास ने अमीषा से प्रेम संबंध को स्वीकरते हुए पत्नी की हत्या करने की कहानी बताई. उस ने बताया कि अमीषा के प्यार में बाधा बनी सोनिया को हटाने के लिए उस ने गूगल से तरकीब ढूंढी. इस काम में उसे 2 महीने लग गए. तरहतरह की हत्या की प्लानिंग करता रहा. यूट्यूब पर मर्डर और बचाव के कई वीडियो देखे. कभी जहर दे कर मारने के तो कभी हत्या को दूसरा रूप देने के उपाय गूगल पर खोजे.

उस ने गूगल से यह भी पूछा कि हथियार कहां से मिल सकता है? जहर औनलाइन शौपिंग ऐप से मिल सकता है या नहीं? पुलिस को उस के मोबाइल से कुछ आडियो और वीडियो भी मिले. यह भी सर्च किया कि मरने के बाद पत्नी भूत बन कर तो नहीं डराएगी? जांच में विकास के मोबाइल फोन में तलाक का एग्रीमेंट भी मिला, जिस पर उस के और सोनिया के हस्ताक्षर भी थे.

 आखिरकार उसे एक अच्छा मौका मिल ही गया, जब सोनिया को उस के मायके ले जाने का कार्यक्रम बना था. गूगल से मिली तरकीब उस ने अमीषा को भी बताई और उसे भी इस हत्याकांड में शामिल कर लिया.

हत्या की तैयार की गई साजिश के अनुसार, विकास ने 30 दिसंबर, 2022 की शाम को घर से निकलते ही अमीषा को सूचना दे दी थी. अमीषा रास्ते में कार ले कर खड़ी थी. विकास ने गाजियाबाद पहुंच कर फोन कर अमीषा को बुला लिया और अपनी कार में बिठा लिया. इस का सोनिया ने विरोध किया तब अमीषा ने उस की पिटाई कर दी.

दोनों ने सुनसान जगह देख 5 बजे के करीब डायमंड फ्लाईओवर और हापुड़ चुंगी के बीच सोनिया की गला दबा कर हत्या कर दी. इस के बाद शव को कार में ले कर 3 घंटे तक घूमते रहे. अमीषा का ड्राइवर पीछे कार ले कर चल रहा था. 8 बजे वे लोग हापुड़ के निजामपुर पहुंचे. अमीषा अपनी कार में बैठ कर चली गई. विकास ने पुलिस को लूटपाट के लिए हत्या की सूचना दी. उस ने बताया कि बाइक सवार 4 बदमाश आए थे. उस से 50 हजार रुपए लूट लिए. पत्नी ने विरोध किया तो उस की गला दबा कर हत्या कर दी.

विकास ने बताया कि उस ने अमीषा के साथ मिल कर सोनिया के सलवार के नाड़े से ही उस का गला घोट दिया था. विकास द्वारा अपराध कुबूले जाने के बाद पुलिस ने आरोपी विकास शर्मा के साथ प्रेमिका अमीषा दलाल को हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर पूछताछ की. उस ने भी उन बातों की पुष्टि कर दी जो विकास ने बताई थी. दोनों को मजिस्ट्रैट के सामने पेशी के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया.                द्य

कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

बालम की सेज पर नौकर का धमाल – भाग 1

2023 के फरवरी महीने की पहली तारीख थी, सुबह का वक्त था. मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के सारणी पुलिस स्टेशन के टीआई रत्नाकर हिंग्वे अपने घर पर पुलिस स्टेशन जाने की तैयारी कर रहे थे. तभी उन के मोबाइल की घंटी बजी. जैसे ही उन्होंने काल रिसीव की दूसरी तरफ से आवाज आई, ‘‘सर, कंट्रोलरूम से बोल रहा हूं. सारणी के बगडोना स्थित आशियाना ढाबे में आग लगने की सूचना मिली है.’’

टीआई रत्नाकर हिंग्वे ने फोन पर ही उसे निर्देश देते हुए कहा, ‘‘तुरंत फायर ब्रिगेड को फोन कर के सूचना दो, मैं जल्द ही पुलिस स्टेशन पहुंच रहा हूं.’’

5 मिनट में ही टीआई पुलिस स्टेशन पहुंचे और अधीनस्थ स्टाफ को साथ ले कर आशियाना ढाबे की ओर निकल पड़े. कुछ ही मिनटों में वे सारणी पुलिस स्टेशन से करीब 3 किलोमीटर की दूरी पर छतरपुर रोड स्थित आशियाना ढाबे की ओर रवाना हो गए. रास्ते में ही टीआई ने घटना की जानकारी बैतूल की एसपी सिमाला प्रसाद और एसडीपीओ रोशन जैन को  दी. कुछ ही समय में पुलिस बल सहित सारणी के एसडीपीओ रोशन जैन और फोरैंसिक टीम घटनास्थल पर पहुंच गई.

तब तक फायर ब्रिगेड वहां पहुंच चुकी थी और आग पर काबू पा लिया गया था. ढाबे के एक कमरे से धुआं उठता दिखाई दे रहा था. पुलिस टीम ने वहां जा कर देखा कि ढाबे की ऊपरी मंजिल पर जिस कमरा नं 101 में आग लगी थी, वहां ढाबे का मालिक शैलेष साकरे रहता था. कमरे के अंदर का नजारा दिल दहला देने वाला था. जब तक आग पर काबू पाया गया, उस से पहले ही शैलेष की मौत हो चुकी थी.

जब ढाबे पर मौजूद समीर को पुलिस ने बुलाया तो उस ने ही बताया कि यह अधजली लाश ढाबे के मालिक शैलेष साकरे की है. अधजली हालत में मिली शैलेष साकरे की लाश ढाबे के रूम से बाहर निकाली गई. फोरैंसिक टीम ने कमरा नंबर 101 का बारीकी का निरीक्षण किया और शव का परीक्षण कर के बताया कि युवक को जलाने में कैमिकल का इस्तेमाल किया गया है.

ढाबे में मिली झुलसी हुई लाश…

पूछताछ में पता चला कि कमरा नंबर 101 में रहने वाले शैलेष की पत्नी अपने मायके गई हुई थी और शैलेष सुबह उठ कर अपनी 9वीं क्लास में पढऩे वाली 16 साल की बेटी को बाइक से स्कूल छोड़ कर आया था. इस ढाबे को पहले शैलेष ही मिलन ढाबा के नाम से चलाता था. नशे का आदी होने से जब शैलेष पर कर्ज बढ़ गया तो उस ने ढाबे को किराए पर दे दिया. कुछ दिनों पहले उस ने इसे समीर मसीद को किराए पर दे दिया था, जो अब इसे आशियाना ढाबे के नाम से चला रहा था.

ढाबे में हुए शैलेष साकरे मर्डर केस की खबर से आसपास के इलाकों से काफी भीड़ जमा हो गई थी. पुलिस को आग लगने की कोई वजह समझ में नहीं आ रही थी. पुलिस ने ढाबे में लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज देखी तो एक व्यक्ति ढाबे में प्रवेश करता और कुछ समय बाद ढाबे से बाहर की तरफ जाता दिख रहा था. पुलिस का शक इसी व्यक्ति पर जा रहा था.

पुलिस का मानना था कि यही व्यक्ति शैलेष के कमरे में आग लगा कर आया होगा. पुलिस टीम ने ढाबे के संचालक समीर से पूछताछ की तो उस ने बताया कि सीसीटीवी कैमरे की फुटेज में दिखाई देने वाला शख्स हेमंत बावरिया है, जो पहले शैलेष के ढाबे पर ही काम करता था. पुलिस ने इस बीच शैलेष की बेटी को भी स्कूल से बुला लिया और लाश की शिनाख्त कर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दी.

शैलेष की बेटी ने पुलिस टीम को बताया कि कुछ दिनों पहले मम्मी नाराज हो कर मामा के घर बैतूल चली गई थीं. शैलेष के बड़े भाई शंकरलाल ने यह जरूर खुलासा किया कि शैलेष अपनी पत्नी सीमा और ढाबे में काम करने वाले हेमंत बावरिया को ले कर हमेशा टेंशन में रहता था और शराब भी पीने लगा था. कमरे की हालत देख कर पुलिस को आग लगने की वजह संदेहास्पद लग रही थी.

ढाबे के कमरा नंबर 101 में अधजली लाश के पास एक हथौड़ी मिली थी और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हो चुका था कि शैलेष के सिर पर चोटों के निशान पाए गए थे. इस से साफ जाहिर था कि जलाने से पहले उसे सिर में हथौड़ी से चोट पहुंचा कर मौत के घाट उतारा गया है. जब पतिपत्नी के बीच अनबन की जानकारी पुलिस के सामने आई तो पुलिस के शक की सुई सब से पहले सीमा की तरफ ही घूमी.

शैलेष के परिवार से मिली जानकारी से यह तो स्पष्ट हो चुका था कि शैलेष की पत्नी सीमा के प्रेम संबंध ढाबे पर काम करने वाले नौकर हेमंत बावरिया से थे और इस की जानकारी शैलेष को भी थी. इसी आधार पर सब से पहले पुलिस ने सीमा की खोज के लिए पुलिस की टीम बैतूल भेजी, जहां सीमा के मायके वालों से पता चला कि सीमा यहां 15 जनवरी को आई थी. 2- 3 दिन रुकने के बाद यहां से अपनी बुआ के घर इटारसी चली गई.

इस के बाद सीमा पर पुलिस का संदेह अब और गहराता जा रहा था. सीमा का मायका बैतूल का था. बैतूल में सीमा के पिता भी 2 पत्नियों के साथ रहते थे. सीमा अपनी मां की 3 बेटियों में सब से छोटी थी. उस की दूसरी मां से एक बेटा था. सभी बहनों की शादी भी हो चुकी थी, इस वजह से मायके में भी ज्यादा पूछपरख सीमा की नहीं थी.

पुलिस ने जब सीमा के मोबाइल की काल डिटेल्स निकाली तो पता चला कि हत्या की साजिश रचने वाली सीमा से हेमंत ने 2 दिन में मोबाइल पर 36 बार बात की थी. इतना ही नहीं, हेमंत ने सीमा को मोबाइल पर 206 बार मिस्ड काल किए थे. वारदात को अंजाम देने के बाद हेमंत ने सीमा से मोबाइल पर बात भी की थी.

इंटरनेट ने दिया पति को पत्नी की हत्या का तरीका – भाग 2

विकास ने गुस्से में यह बात बोल तो दी थी, लेकिन जब उस ने इस बारे में ठंडे दिमाग से सोचा तब डाइवोर्स और उस के बाद आजीवन बीवी को दिए जाने वाले खर्च की सोच कर हिल गया. विकास ने इस बारे में अमीषा से भी बात की कि वह कोई ऐसा तरीका निकाले, जिस से सांप भी मर जाए और लाठी भी टूटे. अमीषा ने सीधा उपाय बताया कि क्यों उन के प्रेम संबंध की राह में रोड़ा बनी सोनिया को ही ठिकाने लगा दिया जाए. मगर कैसे? यह सवाल भी उठा.

इस का जवाब दोनों अपनेअपने तरीके से तलाशने लगे. उन्हें इन दिनों बन चुकी हर मर्ज की एक दवा गूगल का खयाल आया. और फिर वे विवाहेतर संबंध को कायम रखने से ले कर उस के समाधान निकालने तक के उपाय तलाशने लगे. ऐसा करते हुए 3 महीने गुजर गए. पत्नी सोनिया के साथ की मधुरता में और कमी गई. एक दिन विकास को एक तरकीब सूझी. उस ने अमीषा को उस बारे में बताया. अमीषा उस की तरकीब सुन कर चौंक गई. साथ ही उस की आंखों में चमक गई. आंखों के इशारेइशारे में एकदूसरे को मौन स्वीकृति दे दी.

साल 2022 का अंतिम सप्ताह चल रहा था. क्रिसमस का त्यौहार खत्म हो चुका था और लोग नए साल की पूर्वसंध्या पर जश्न मनाने की तैयारी में थे. दिल्ली-गाजियाबाद हाईवे पर होटल, मौल, रेस्टोरेंट में खूब सजावट की गई थी. गहमागहमी बढ़ी हुई थी. इसी के साथ उत्तर प्रदेश पुलिस की मुस्तैदी भी बढ़ा दी गई थी. उन्हीं दिनों विकास शर्मा को सूचना मिली कि उस का छोटा साला बीमार चल रहा है. वह बारबार अपनी बड़ी बहन सोनिया से मिलने की रट लगा रहा है.

दरअसल, विकास शर्मा जनपद गाजियाबाद के मोदीनगर कस्बे के आनंद विहार मोहल्ले में पत्नी सोनिया शर्मा और 3 बच्चों के साथ रहता था. उस की ससुराल हापुड़ के आर्यनगर में है. यह कहें कि सोनिया के मायके में भरापूराखुशहाल परिवार है. मातापिता के अलावा भाईबहन हैं. करीब 12 साल पहले सोनिया की शादी विकास शर्मा के साथ हुई थी. उन की जिंदगी भी मजे में गुजर रही थी, किंतु कोरोना काल में वे भी कई समस्यों से घिर गए थे. हालांकि उन्होंने समय रहते हुए सामान्य जीवन की राह पकड़ ली थी, फिर भी उस में थोड़ी सी खलल विकास और अमीषा के प्रेम संबंध को ले कर पड़ने लगी थी. व्यक्तिगत तौर पर सोनिया इस कारण तनाव में रहने लगी थी. इस बात की जानकारी उस के मायके में खासकर पिता त्रिलोकचंद शर्मा को हो चुकी थी.

एक बार इस संबंध में सोनिया के पिता त्रिलोकचंद शर्मा ने अपने 38 वर्षीय दामाद विकास को समझाने की भी तब कोशिश की थी, जब उन्हें मालूम हुआ था कि वह उन की बेटी सोनिया को तलाक देने के कागजात बनवा रहा है. जब त्रिलोकचंद के बेटे की तबीयत खराब चल रही थी, तब उन्होंने सोनिया को अपने घर बुलवाया था. वह चाहते थे कि इसी बहाने विकास भी सोनिया के साथ आएगा, तब वह उसे सामने बैठा कर समझा देंगे.

पहले से निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 30 दिसंबर, 2022 की शाम को सोनिया अपने बीमार भाई को देखने के लिए ससुराल मोदीनगर से मायके हापुड़ के लिए निकली थी. बच्चे मोदीनगर में ही रुक गए थे. विकास अपनी गाड़ी खुद ड्राइव कर रहा था. इस की जानकारी त्रिलोकचंद शर्मा को भी थी. उन्होंने बेटी दामाद की खातिरदारी का इंतजाम कर लिया था. तय कार्यक्रम के मुताबिक उन्हें अगले दिन रुक कर शाम को मोदीनगर लौटना था.

रात के 9 बजे गए तब त्रिलोकचंद ने अपनी बेटी को फोन मिलाया. वह बंद मिला. फिर उन्होंने दामाद विकास को काल किया. विकास से बात हुई. वह घबराया हुआ था. हांफते हुए परेशान हालत में उस ने जो कुछ बताया, उसे सुन कर त्रिलोकचंद का दिमाग कुछ पल के लिए सुन्न हो गया. सिर पकड़ कर वह कुरसी पर बैठ गए. परिवार के सदस्यों के पूछने पर सिर्फ इतना ही बोल पाए, ‘‘जिस बात का डर था, वही हुआ…’’ और फिर रोने लगे.

विकास ने उन्हें फोन पर सोनिया की डेथ हो जाने की सूचना दी थी और वह उस वक्त पुलिस स्टेशन में था. रात के 8 बजे विकास ने यूपी-112 को सूचना दी थी कि हापुड़ जिले में निजामपुर कट के पास अज्ञात बाइक सवार बदमाशों ने उन के साथ लूटपाट की है. उस दरम्यान लुटेरों ने हापुड़ के निजामपुर में पत्नी सोनिया की हत्या कर दी. लूट के दौरान हत्या जैसी सनसनीखेज वारदात सुनते ही एसपी दीपक भूकर समेत कई अधिकारी मौके पर पहुंच गए. इस मामले की तहकीकात के लिए तुरंत हापुड़ नगर पुलिस के अलावा क्राइम ब्रांच को भी लगा दिया गया.

बेटी के बारे में मिली इस दुखभरी खबर पर त्रिलोकचंद को विश्वास नहीं हो रहा था. वह तुरंत थाने पहुंचे और उन्होंने लूटपाट की बात को गलत बताते हुए दामाद पर ही हत्या का आरोप लगा दिया. एसएचओ यह सुन कर हैरान हो गए. हापुड़ पुलिस ने लूटपाट और हत्या दोनों सिरे से जांच शुरू करवा दी. पुलिस ने विकास के मोबाइल की काल डिटेल्स निकलवाई. उस की जांच में पता चला कि घटना के करीब 3 घंटा पहले विकास की अमीषा से बातचीत हुई थी. जबकि लूटपाट की घटना का समय उस ने रात के 8 बजे बताया था.

इस अंतर को देख कर विकास को ले कर पुलिस का शक और भी गहरा गया. यहां तक कि उस के ससुर द्वारा लगाए गए आरोप के कारण भी वह संदेह के दायरे में गया था. ससुर ने कंपनी में काम करने वाली मनीषा दलाल के प्रेम संबंध के चक्कर में सोनिया की उपेक्षा करने और झगड़ने की शिकायत की थी. फिर क्या था, अमीषा की भी तलाश की जाने लगी. उस के बारे में विकास से पूछताछ की जाने लगी, जिस का वह सटीक जवाब नहीं दे पाया.

देवर के चक्कर में पति को हटाया – भाग 3

कमला ने एकांत के क्षणों में रमेश से कहा, ‘‘रमेश, ऐसा करो कि सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे. गिरधारी की मौत भी हो जाए और लगे कि एक्सीडेंट में मौत हुई है.’’

“ऐसी बात है तो मैं गिरधारी की गाड़ी से कुचल हत्या कर डालता हूं और फिर नाता प्रथा के तहत तुम से शादी कर के अपनी गृहस्थी बसा कर मौज से रहेंगे,’’ रमेश ने कहा. सुन कर कमला बोली, ‘‘जल्दी से उस का काम तमाम करो. उसे मैं अब फूटी आंख नहीं देखना चाहती.’’

कमला और रमेश के प्यार में गिरधारी अब बाधा बनने लगा था. वह अपनी पत्नी कमला को रमेश के साथ हंसनेबोलने पर एवं मिलने पर डांटडपट करने लगा था. कमला ने रमेश से कहा कि जल्दी से जल्दी गिरधारी का काम तमाम सावधानी से करो, ताकि गिरधारी की हत्या एक्सीडेंट लगे.

रमेश का एक दोस्त था सुनील गढ़वाल. वह चौमूं के एक प्राइवेट अस्पताल में नौकरी करता था. इसी दोस्ती की कसम दे कर रमेश ने सुनील से मदद मांगी. रमेश ने कहा, ‘‘सुनील, मैं कमला से प्यार करता हूं और कमला भी मुझ से प्यार करती है. हम दोनों शादी करना चाहते हैं. मगर प्यार में उस का पति गिरधारी बाधा बना है. गिरधारी को हम गाड़ी से टक्कर मार कर मार डालते हैं. यह हत्या नहीं पुलिस के लिए एक एक्सीडेंट होगा. बाद में हम दोनों गिरधारी के न रहने पर शादी कर लेंगे.’’

सुनील अपने दोस्त को नाराज नहीं करना चाहता था. उस ने सोचा कि गिरधारी लाल को एक्सीडेंट में मार डालेंगे तो लगेगा ही नहीं कि उस की हत्या की गई है. योजनानुसार सुनील ने अपने परिचित हितेश से कार कुछ समय के लिए जरूरी काम का बहाना कर मांग ली थी. सुनील ने कार का जुगाड़ किया तो रमेश ने 3 फरवरी, 2023 की शाम साढ़े 7 बजे घर से ड्यूटी पर जा रहे गिरधारी लाल को सुनसान सडक़ पर रोक लिया और शराब पीने की इच्छा बताई.

गिरधारी और रमेश मंडा रीको एरिया में बैठ क र शराब पीने लगे. गिरधारी को जानबूझ कर रमेश ने ज्यादा शराब पिलाई. इस के बाद रमेश ने फोन कर सुनील से कहा कि आ जाओ. इशारा मिलते ही सुनील कार ले कर रीको एरिया में पहुंच गया और उस ने गाड़ी गिरधारीलाल पर चढ़ा दी. लेकिन वह मरा नहीं. गिरधारी के दोनों पैर टूट गए. अंधेरे की वजह से गिरधारी का मोबाइल वहीं गिर गया.

घायल गिरधारी लाल को दोनों गाड़ी में डाल कर 2 किलोमीटर दूर रेनवाल थाना क्षेत्र के लालासर गांव के पास ले गए, जहां उस को सडक़ के किनारे पटक दिया और कई बार गाड़ी चढ़ा कर कुचला और फरार हो गए.

हत्यारिन पत्नी और प्रेमी पहुंचे जेल

दोनों अपनेअपने घर चले गए. रमेश ने कमला उर्फ पूजा को यह खबर दे दी कि उन्होंने गिरधारी लाल की हत्या को एक्सीडेंट का रूप दे दिया है. यह खबर सुन कर कमला खुश हो गई. प्रेमी रमेश से पति गिरधारी को मरवा कर कमला को लगा कि उस के रास्ते का पत्थर हट गया है. वह रमेश के संग शादी के सपने जागती आंखों से देखने लगी. मगर जब अगले रोज 4 फरवरी, 2023 को गिरधारी लाल का शव मिला तो पुलिस ने मौकामुआयना किया.

मौका देखने से लग रहा था कि गिरधारी का एक्सीडेंट नहीं हुआ था. उस की गाड़ी से कुचल कर हत्या की गई है. शव मिलने के स्थान से 2 किलोमीटर दूर गिरधारी के मोबाइल का मिलना यह एक और सबूत था कि गिरधारी की यहां हत्या कर के लाश 2 किलोमीटर दूर फेंकी गई है. इस के बाद पुलिस ने जांच की तो सारी कहानी खुल गई.

गोविंदगढ़ थाने की पुलिस टीम ने सुनील की निशानदेही पर वह कार जब्त कर ली, जिस से कुचल कर गिरधारी लाल कीहत्या की गई थी. एफएसएल टीम ने कार की जांच की तथा सबूत जुटाए गए. गिरधारीलाल मर्डर केस का परदाफाश होने एवं तीनों हत्यारोपियों की गिरफ्तारी के बाद एसपी (ग्रामीण) मनीष अग्रवाल ने 5 फरवरी, 2023 को प्रैसवात्र्ता कर गिरधारी लाल हत्याकांड का खुलासा कर दिया.

तीनों गिरफ्तार आरोपियों रमेश कुमार जाट, सुनील कुमार गढ़वाल एवं मृतक की पत्नी कमला उर्फ पूजा देवी को 6 फरवरी, 2023 को गोविंदगढ़ थाना पुलिस ने मजिस्ट्रैट के समक्ष पेश किया. जिस पर गौरी का बास निवासी रमेश जाट एवं सुनील गढ़वाल को मजिस्ट्रैट ने पुलिस रिमांड पर सौंप दिया, जबकि कमला उर्फ पूजा को जेल भेज दिया गया. रिमांड अवधि पूरी होने पर पुलिस ने रमेश जाट एवं सुनील गढ़वाल को भी मजिस्ट्रैट के आदेश पर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया था.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित है

देवर के चक्कर में पति को हटाया – भाग 2

कमला ने खुलासा कर दिया कि उस का रमेश से पिछले एक साल से प्रेम प्रसंग चल रहा है. उस ने बताया कि वह अपने पति गिरधारी लाल को पसंद नहीं करती थी. वह रमेश से प्यार करती थी. रमेश भी उस से प्यार करता था. गिरधारी लाल की हत्या दुर्घटना लगे, इस कारण एक्सीडेंट करा कर गिरधारीलाल को मारना चाहते थे, ताकि हत्या न लग कर मौत मात्र दुर्घटना लगे.

कमला और रमेश की योजना थी कि गिरधारी लाल की मौत के बाद उन दोनों की शादी हो जाती. उन दोनों को प्यार मिल जाता और उन के प्यार में रोड़ा बना पति गिरधारी भी नहीं रहता. कमला के गिरधारी लाल हत्याकांड का जुर्म कुबूल करते ही पुलिस ने हत्यारोपी रमेश कुमार ढाका निवासी गौरी का बास, जयपुर (ग्रामीण) और हत्या में सहयोग करने वाले दूसरे आरोपी सुनील गढ़वाल निवासी गौरी का बास, जिला जयपुर (ग्रामीण) को गिरफ्तार कर लिया.

रमेश व सुनील गढ़वाल थाने में पुलिस अधिकारियों ने पूछताछ की. पूछताछ में गिरधारी लाल की हत्या करने का जुर्म रमेश व सुनील ने कुबूल कर लिया. रमेश कुमार, सुनील गढ़वाल एवं कमला उर्फ पूजा ने पुलिस पूछताछ में जो कहानी बताई, वह एक बीवी के हवस में अंधी हो कर पति के प्राण लेने की खून सनी कहानी है—

देवरभाभी के अवैध संबंध

जयपुर ग्रामीण में थाना गोविंदगढ़ के अंतर्गत एक गांव गौरी का बास आता है. इसी गांव में जीवणराम ढाका का परिवार रहता था. जीवणराम का छोटा बेटा गिरधारी लाल सुंदर व स्मार्ट युवक था. गिरधारी से बड़े भाई मालीराम की शादी होने के बाद जीवणराम जल्द से जल्द छोटे बेटे गिरधारी का विवाह कर अपनी जिम्मेदारी से मुक्त होना चाहते थे. जीवणराम ने गिरधारी के लिए योग्य वधू की खोज की. उन्हें एक रिश्तेदार ने कमला उर्फ पूजा के बारे में बताया.

वह रिश्तेदारी जानीपहचानी थी ही. सन 2019 में गिरधारी लाल की शादी कमला से कर दी. पतिपत्नी एकदूसरे से खूब प्यार करते थे. गिरधारी गांव से 2 किलोमीटर दूर मंडा रीको फैक्ट्री में मशीन औपरेटर के पद पर कार्यरत था. उस की 12 घंटे की ड्यूटी थी. कभी दिन में तो कभी रात में ड्यूटी लगती थी.

गिरधारी लाल पैदल ही गांव से 2 किलोमीटर दूर फैक्ट्री ड्यूटी पर जाता था. कमला और गिरधारी का दांपत्य जीवन खुशहाल बीत रहा था. पिछले साल गिरधारी की मौसी का बेटा रमेश कुमार एक दिन उस के घर आया. गिरधारी ने उस का स्वागत किया. रमेश उसी गांव का रहने वाला था. रमेश कंपिटिशन एग्जाम की तैयारी कर रहा था. इस कारण वह गांव कम ही आता था.

इस अवैध संबंध कथा की बुनियाद तब धरी गई, जब जनवरी 2022 में रमेश गांव आया और मौसी के घर गया, तब उस ने गिरधारी की पत्नी कमला को देखा. वह रिश्ते में रमेश की भाभी लगती थी. गिरधारी ने कमला की मुलाकात रमेश से कराते हुए कहा, ‘‘कमला, यह तेरा लाडला देवर है. मेरी मौसी का बेटा. इस की खातिरदारी में कमी मत रखना. यह प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में लगा रहता है.’’

पति के मुंह से यह सुन कर कमला ने एक निगाह रमेश पर डाली. रमेश उसी को ताके जा रहा था. कमला चाय बना लाई. चाय के दौरान गपशप होती रही. देवर होने के नाते रमेश ने कमला को छेड़ा भी. कमला भी रमेश को छेडऩे लगी. रमेश उस दिन कमला के घर से गया जरूर, मगर वह अपना दिल कमला भाभी के पास छोड़ गया. ऐसा ही कुछ हाल कमला का भी था. कमला को भी रमेश की बातें व उस की मस्त हंसी उस का दीवाना कर गई थी.

रमेश 2 दिन तक कमला को भुलाने की कोशिश करता रहा, मगर वह भुला नहीं पाया. तब रमेश 2 दिन बाद गिरधारी के ड्यूटी जाने के बाद उस के घर पर आया. उस समय कमला अकेली घर पर थी. कमला ने कहा, ‘‘आइए देवरजी.’’

“गिरधारी भैया नहीं दिख रहे. ड्यूटी पर चले गए क्या?’’ रमेश बोला.

“हां, वे तो ड्यूटी पर चले गए. कहिए उन से कोई काम था क्या?’’ कमला आंखें टेढ़ी कर के बोली.

“ना भाभी, कोई काम नहीं था. वैसे दिख नहीं रहे तब कह रहा हूं.’’

“अच्छा, कहिए क्या लेंगे? चाय या कौफी?’’ कमला ने मनुहार की.

रमेश बोला, ‘‘कुछ नहीं, चाय पी कर आया हूं. आप बैठिए, आप से कुछ बातें करते हैं.’’ इस के बाद दोनों इधरउधर की बातें करने लगे. बातों के दौरान रमेश ने कई बार कमला की सुंदरता की तारीफ की. कहते हैं महिला को अपनी तारीफ बहुत अच्छी लगती हैं. अपनी सुंदरता की तारीफ सुन कर कमला बोली, ‘‘रमेशजी, आप भी तो गबरू जवान हो. कोई सुंदर सी लडक़ी देख कर शादी कर लो.’’

“मुझे तो सुंदर आप लगी हैं और आप ने शादी कर ली. क्या भैया को छोड़ कर आप मेरी बन सकती हो?’’ रमेश ने कहा. सुन कर कमला बोली, ‘‘मैं आप की भाभी हूं. भाभी से प्रेम निवेदन सही नहीं है. अगर मैं चाहूं, तब भी आप से विवाह नहीं कर सकती.’’

“आप एक बार हां कहो तो सही. उस के बाद मैं सारे रास्ते खोल दूंगा. मैं ने जब से आप को देखा है, तब से कुछ भी अच्छा नहीं लगता.’’ रमेश ने कहा. थोड़ी देर तक चुप रहने के बाद कमला व रमेश ने एक होने की कसम खा ली. रमेश ने कमला को बाहुपाश में भर लिया और उस पर चुंबनों की बौछार कर दी. कमला भी रमेश के बाहुपाश में बंध गई.

दोनों के तन पर एकदूसरे के हाथों का स्पर्श बढ़ा तो उन के तन में वासना की आग भडक़ उठी. इस के बाद दोनों ने अपनी हसरतें पूरी कर लीं. तब जा कर वासना की आग शांत हुई. उस दिन के बाद से कमला उर्फ पूजा और रमेश के अवैध संबंध इस पवित्र रिश्ते की आड़ में पनपते रहे. एक बार देवरभाभी के अवैध संबंध बने तो उसे अकसर दोहराने लगे.

पत्नी ने कराई हत्या

देवरभाभी का प्यार अमरबेल की तरह बढ़ता रहा. शारीरिक संबंध बनाने के बाद भी उन्हें इस की प्यास बनी रहती. रमेश और कमला ने एक साल में तय कर लिया कि वे अब शादी कर के साथ रहेंगे. लेकिन जब तक कमला उर्फ पूजा का पति गिरधारी लाल जीवित था, तब तक उन के लिए शादी करना सपने जैसा था.

इंटरनेट ने दिया पति को पत्नी की हत्या का तरीका – भाग 1

हरियाणा के भिवाड़ी में अरविंदा फार्मा कंपनी में क्वालिटी मैनेजर विकास शर्मा अपना काम खत्म कर घर जाने की तैयारी कर रहा था.  तभी वहीं साथ काम करने वाली अमीषा दलाल उस के पास कर बोली, ‘‘विकास, चलो आज मैं तुम्हें कौफी पिलाऊंगी.’’

‘‘क्यों कोई खास बात है?’’ विकास चहकता हुआ बोला.

‘‘खास ही समझोहमारी जानपहचान के आज 2 माह हो चुके हैं. इसी खुशी में मेरी तरफ से छोटी सी ट्रीट.’’

‘‘ओके. उस में थोड़ी सी भागीदारी मेरी भी रहेगी. वैसे भी आज मुझे सैलरी इन्क्रीमेंट का लेटर मिला है.’’ विकास खुश होता हुआ बोला.

‘‘अरे वाह! तब तो बीयर पार्टी होनी चाहिए,’’ अमीषा खुशी से बोल पड़ी.

‘‘आज नहीं, फिर कभी.’’ विकास बोला और अपने बैग में लंच बौक्स रखने लगा. यह बात करीब 2 साल पहले की है. विकास शर्मा और अमीषा एक ही कंपनी में काम करते थे. अच्छी जिम्मेदारी वाले पद पर थे. कोरोना काल के दौरान अमीषा वर्क फ्रौम होम थी, जबकि विकास सप्ताह में 2 दिन औफिस जाता था. बाकी दिनों में वह भी घर से काम संभालता था.

करीब 2 महीना पहले अमीषा भी औफिस आने लगी थी. पहली बार उसे देखते ही विकास के दिल में हलचल मच गई थी. उसे देखा तो देखता ही रह गया. वह उस की सहकर्मी थी.चेहरे पर मास्क लगा होने के बावजूद वह लंबे कद, चमकीले खुले बाल और सुडौल काया से गजब की खूबसूरत दिखती थी. पहली बार उसे जब देखा तो देखता ही रह गया. विश्वास ही नहीं हो रहा था कि उस के सामने मौडल की तरह दिख रही खड़ी वही लड़की है, जिस से वह महीनों से फोन पर काम के सिलसिले में बातें किया करता था.

एक हफ्ते में ही दोनों आपस में काफी घुलमिल गए थे. इस का कुछ कारण उन के काम की एकरूपता थी तो कई बातें दोनों के विचार मिलने की भी थी. दोनों साथसाथ लंच करते थे और साथ ही चाय, कौफी या फिर कोल्डड्रिंक पीते थे. अमीषा अकसर उस के घर से लाए लंच की तारीफ करती थी. अमीषा की सिर्फ एक बात विकास को पसंद नहीं थी, वह थी उस का सिगरेट पीना. इसे ले कर वह उसे बारबार टोक दिया करता था. वैसे उन के बीच की दोस्ती और उस से निकलने वाली आत्मीयता के प्रेम भाव ने कब उन्हें प्रेमी युगल बना दिया, पता ही नहीं चला.

दोनों एकदूसरे की अच्छाइयों और कमजोरियों को अच्छी तरह जानपहचान गए थे. यह उन के बीच आकर्षण की एक खास वजह भी थी कि उन्होंने अपने प्यार में तकरार को आने नहीं दिया था. हर गिलेशिकवे का तुरंत समाधान निकाल लिया करते थे. और इस तरह से हंसीखुशी में उन के दिन निकलते जा रहे थे.

एक रोज विकास ने अपना लंच बौक्स जब अमीषा के सामने खोला तब वह गुमसुम था. अमीषा ने इस का कारण पूछा, तब उस ने बताया कि वह उस से एक जरूरी बात कहना चाहता है. अमीषा चहकती हुई बोली कि उसे मालूम है कि वह कौन सी जरूरी बात कहना चाहता है. विकास को हैरानी हुई. वह कुछ बोलता, इस से पहले ही अमीषा बोल पड़ी, ‘‘सोनिया से इन दिनों तुम्हारी नहीं बन रही है न?’’

‘‘तुम? तुम सोनिया को कैसे जानती हो?’’ विकास चौंकता हुआ बोला.

‘‘उस से हमारी बीते शनिवार को मुलाकात हुई थी. मैं ने तुम्हें नहीं बताया था. यह जान कर कि तुम्हें तकलीफ होगी. धीरेधीरे मैं बात को संभाल लूंगी.’’ अमीषा बोलने लगी.

‘‘…इस का मतलब तुम्हें हमारे शादीशुदा होने के बारे में पता है, फिर भी तुम मुझ से प्रेम कर बैठी,’’ विकास ने कहा.

‘‘क्यों, तुम मुझ से प्रेम नहीं करते हो? क्या तुम्हें वह सब कुछ नजर नहीं आता है, जो सोनिया से नहीं मिल पाता है? क्या मुझ से मिल कर, मेरे साथ लंच शेयर कर, साथसाथ कौफी, कोल्डड्रिंक पी कर खुशी नहीं मिलती है? मैं ने तुम्हारे कहने पर ही तो सिगरेट पीनी छोड़ दी है.’’ अमीषा बोलती जा रही थी. विकास उसे अचरज भरी निगाहों से देखे जा रहा था.

सच्चाई तो यह थी कि विकास सोनिया की जलीभुनी बातों से तंग चुका था. लौकडाउन में उस के खर्च बढ़ गए थे. कंपनी ने 30 प्रतिशत वेतन में कटौती कर दी थी. वह घरेलू सामानों की ईएमआई समय पर नहीं भर पा रहा था. कर्ज कम होने का नाम ही नहीं ले रहा था. ऐसे में अमीषा के साथ मिलनाजुलना और उस की बातों से दिल को सुकून मिलता था.

यह कहें कि विकास को अमीषा दलाल बहुत पसंद आने लगी थी. दूसरी तरफ पत्नी सोनिया उसे हर समस्या पर ताने दे कर बातें करती थी. तूतूमैंमैं तो आम बात हो गई थी. इस में मिर्च की छौंक तब लग गई, जब उसे मालूम हो गया कि उस का अमीषा से चक्कर चल रहा है. यह जान कर वह एकदम से उबल पड़ी थी. कंपनी से नौकरी छोड़ने की बात तक कह डाली थी. बात उस के मायके तक जा पहुंची थी और फिर विकास परेशान रहने लगा था.

 अमीषा से सोनिया का नाम सुन कर विकास और भी परेशान हो गया था. हालांकि उस के दिल को थोड़ी सी तसल्ली इस बात की मिल गई थी कि अमीषा ने उस के प्रति प्यार भरी हमदर्दी दिखाई थी. उस ने उस के विवाहित होने की बात को छिपाने पर जरा भी शिकायत नहीं की थी. उल्टे उसी ने उसे बेइंतहा प्रेम का हवाला दिया था. किंतु इस से उन के बीच बनी अंतरंगता को बचाने से ले कर छिपाने का कोई समाधान नहीं निकल पाया था. एक दिन तो सोनिया ने घर पर अमीषा को ले कर काफी हंगामा खड़ा कर दिया था. उस पर पैसा लुटाने का आरोप लगाते हुए थाना पुलिस तक की धमकी दे डाली थी. मामला अदालत तक जाने की नौबत गई थी. कारण गुस्से में एक दिन विकास ने कह दिया था, ‘‘रोज की चिकचिक से तो अच्छा है कि तुम डाइवोर्स ले लो.’’