देवर के चक्कर में पति को हटाया – भाग 1

शनिवार, 4 फरवरी, 2023 का दिन उदय ही हुआ था. राजस्थान की राजधानी जयपुर जिले के गौरी का बास गांव के रहने वाले गिरधारी लाल ढाका (22 वर्ष) का शव रेनवाल थाने के डंूगरी खुर्द लालासर ग्रेवल सडक़ पर औंधे मुंह पड़ा था. सडक़ मार्ग से गुजर रहे लोगों ने शव पड़े होने की सूचना पुलिस कंट्रोल रूम को दे दी.

पुलिस कंट्रोल रूम से यह जानकारी रेनवाल थाने को दे दी गई क्योंकि यह क्षेत्र इसी थाने के अंतर्गत आता है. लाश पड़ी होने की सूचना मिलते ही एसएचओ उमराव सिंह थोड़ी देर में घटनास्थल पर पुलिस टीम के साथ जा पहुंचे. घटनास्थल पर सुरेंद्र करल्या नामक राहगीर भी खड़ा था, जिस ने पुलिस कंट्रोल रूम को लाश पड़ी होने की सूचना दी थी.

एसएचओ ने लाश का मुआयना किया. शव का चेहरा कुचला हुआ था व शरीर पर काफी चोटों के निशान साफ दिख रहे थे. मृतक की शिनाख्त लोगों ने कर ही ली थी. पुलिस को घटनास्थल से करीब 2 किलोमीटर दूर फोरैस्ट चौकी बावड़ी गोपीनाथ कच्चे रास्ते पर मृतक गिरधारीलाल का मोबाइल पड़ा मिला. मोबाइल के पास खून भी बिखरा हुआ था.

पुलिस टीम ने सोचा कि जहां गिरधारी का खून व मोबाइल पड़ा मिला था, वहीं पर हत्यारों ने उसे मार कर लाश 2 किलोमीटर दूर ले जा कर फेंकी होगी. लाश मिलने के स्थान व मोबाइल मिलने वाली जगह पर 4 पहियों वाली छोटी गाड़ी के टायरों के निशान भी साफ दिख रहे थे. ऐसा लग रहा था कि गाड़ी से कुचल कर गिरधारी को मारा गया था.

एसएचओ उमराव सिंह ने गिरधारी लाल ढाका की हत्या की खबर उच्चाधिकारियों को दे दी. घटना की खबर पा कर जोबनेर के डीएसपी मुकेश कुमार चौधरी, एएसपी दिनेश कुमार शर्मा घटनास्थल पर पहुंचे और मौकामुआयना किया. एफएसएल टीम ने मौके पर पहुंच कर साक्ष्य जुटाए. जयपुर (रेनवाल) में गिरधारीलाल हत्याकांड की खबर मीडिया में भी छा गई. सूचना पा कर गिरधारी के घर वाले रोतेबिलखते वहां आ गए थे.

चूंकि पुलिस को उन से पूछताछ करनी थी, इसलिए उन्हें तसल्ली दे कर चुप कराया.एसएचओ के पूछने पर मृतक के भाई मालीराम ने बताया कि शुक्रवार 3 फरवरी, 2023 की शाम साढ़े 7 बजे गिरधारी घर से 2 किलोमीटर दूर मंडा रीको फैक्ट्री जाने के लिए निकला था. वह इस फैक्ट्री में रात 9 से सुबह 9 बजे तक मशीन औपरेटर के रूप में ड्यूटी करता था. इस बीच अज्ञात लोगों ने उस की हत्या कर दी थी. अगले रोज 4 फरवरी को गिरधारी का खून सनीलाश मिली.

लोगों ने किया विरोध प्रदर्शन

पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद शव को रेनवाल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की मोर्चरी में रखवा दिया. गौरी का बास में जब लोगों को पता चला कि गिरधारी लाल की अज्ञात लोगों ने हत्या कर दी है और मृतक का शव बरामद हुआ है. इस पर आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने चौमू रेनवाल रोड जाम कर दिया. ग्रामीणों की मांग थी कि हत्यारों को जल्द पकड़ा जाए और मृतक के घर वालों को पर्याप्त मुआवजा दिया जाए.

ग्रामीणों ने कहा कि जब तक हमारी मांग पूरी नहीं होगी, तब तक हम धरने पर बैठे रहेंगे. साथ ही परिजनों ने शव भी तब तक नहीं लेने की शर्त रख दी थी. सैकड़ों लोगों द्वारा सडक़ मार्ग जाम करने की खबर पा कर चौमू विधायक रामलाल शर्मा भी वहां पहुंचे. इस के बाद पुलिस के आला अधिकारियों के आश्वासन के बाद 4 घंटे से चला आ रहा धरना व सडक़ जाम खुलवा दिया गया.

मृतक गिरधारी लाल के बड़े भाई मालीराम ने गोविंदगढ़ थाने में अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कराया. पुलिस ने मैडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करा कर गिरधारी लाल का शव उस के घर वालों को सौंपा, जिस के बाद उस का अंतिम संस्कार हुआ.

गिरधारी लाल हत्याकांड मामला एसपी (जयपुर ग्रामीण) मनीष अग्रवाल के संज्ञान में आया तो उन्होंने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष पुलिस टीम बनाई और टीम को हत्याकांड का खुलासा करने के निर्देश दिए. इस विशेष पुलिस टीम में डीएसपी (गोविंदगढ़) बालाराम, डीएसपी (जोबनेर) मुकेश चौधरी, एसएचओ (गोविंदगढ़) धर्म सिंह, एसएचओ (कालाडेरा) हरवेंद्र सिंह, एसएचओ (रेनवाल) उमराव सिंह, साइबर सेल के सरदार सिंह, लक्ष्मी, मदनलाल, सुभाष, अशोक कुमार, महेश, मोहनलाल, भींवाराम, रामस्वरूप, सीताराम, कविता, भगवती, कैलाशचंद, हरीश कुमार, महेश, मदनलाल और जयप्रकाश को शामिल किया गया.

पुलिस अधिकारियों ने घटना पर विचारविमर्श किया तो लगा कि हत्या का यह मामला भी जर, जोरू और जमीन से ही जुड़ा हुआ हो सकता है. टीम द्वारा गिरधारी लाल के चालचरित्र पर जानकारी इकट्ïठा की गई. तब पुलिस को गिरधारीलाल की पत्नी कमला उर्फ पूजा और मृतक की मौसी के बेटे रमेश कुमार ढाका का चरित्र संदेहास्पद लगा.

पत्नी पर हुआ शक

पुलिस को जानकारी मिली कि गिरधारी का मौसेरा भाई रमेश कुमार अकसर गिरधारी की गैरमौजूदगी में उस के घर पर उस की पत्नी कमला के साथ पिछले कुछ महीनों से देखा जा रहा है. पुलिस के हाथ ये सूत्र लगा तो पुलिस ने कमला उर्फ पूजा के मोबाइल की काल डिटेल्स, सोशल मीडिया मैसेज आदि की जांच की.

जांच में सामने आया कि गिरधारी की पत्नी कमला उर्फ पूजा ने मृतक के मौसेरे भाई रमेश कुमार से जनवरी 2023 महीने में 800 बार बातचीत की थी. सोशल मीडिया पर भी कई बार मैसेज का आदानप्रदान कमला और रमेश के बीच होना सामने आया. पुलिस को अब इन दोनों पर शक ही नहीं, पूरा यकीन हो गया था कि यही गिरधारी लाल हत्याकांड में शामिल हैं. बस फिर क्या था, पुलिस टीम ने मृतक की पत्नी कमला को रविवार 5 फरवरी, 2023 को पुलिस हिरासत में ले कर कड़ी पूछताछ की.

पहले तो वह थोड़ी देर तक नानुकुर करती रही, मगर जब उस के सामने यह सबूत रखा गया कि उस ने रमेश कुमार के साथ जनवरी में फोन पर 800 बार क्या बातचीत की? रमेश के साथ इतनी बातें क्यों करती थी? उस का रमेश से क्या रिश्ता है, जो रात में भी वह घंटों उस से बातें करती थी? यह सुन कर कमला अंदर तक कांप गई. वह समझ गई कि उस की पोल खुल चुकी है. सच्चाई बताने में ही भलाई है.

नौकरी के लिए सुहाग को मिटाया – भाग 3

राहुल ने सतीश के साथ बैठ कर राजीव को रास्ते से हटाने की बात कही तो उस ने हामी भर ली. राजीव को मौत की नींद सुलाने के लिए एक लाख 60 हजार रुपए में सौदा हुआ. सतीश को 60 हजार रुपए एडवांस देने थे, बाकी रकम काम पूरा होने के बाद देनी थी. राजीव की मौत का सौदा कर सतीश ने गांव अहमदाबाद निवासी अरुण तथा रवि को भी अपने साथ शामिल कर लिया.

सुपारी किलर तैयार हो जाने के बाद सीमा ने उन्हें 60 हजार रुपए एडवांस दे दिए. इस के बाद वह मौके का इंतजार करने लगे थे. राहुल जानता था कि शराब पीना राजीव की सब से बड़ी कमजोरी है. भले ही राजीव ने उसे उस की बीवी के साथ रंगेहाथ पकड़ लिया था, लेकिन राहुल फिर भी हिम्मत कर के शराब की एक बोतल ले कर राजीव के कमरे पर पहुंच गया. उस वक्त सीमा भी कमरे पर नहीं थी.

राहुल ने राजीव के सामने पड़ते ही माफी मांगी. राहुल के हाथ में शराब की बोतल देखते ही राजीव पुरानी बातों को भुला बैठा. उस दिन फिर से दोनों भाइयों ने एक साथ बैठ कर शराब पी तो सारे गिलेशिकवे मिट गए. उसी दौरान राजीव ने राहुल के सामने बात रखते हुए कहा, ‘‘भाई, मैं इस वक्त बहुत ही परेशान हूं. अगर हो सके तो किसी भी तरह से कुछ रुपयों का इंतजाम करा दे. वह जिंदगी भर उस का अहसान नहीं भूलेगा.’’

राजीव की बात सुनते ही राहुल के चेहरे पर मुसकान उभर आई. उसे जिस रास्ते की चाह थी, वह खुदबखुद राजीव ने उसे बता दिया था. राहुल ने उसे विश्वास दिलाया कि वह जल्द ही उस के लिए कहीं से पैसे का इंतजाम करा देगा. उस के बाद राहुल अपने कमरे पर चला गया.

कमरे पर जा कर उस ने सीमा को भी राजीव के पैसे मांगने वाली बात बता दी थी. साथ ही राहुल ने सीमा को भरोसा दिया कि एकदो दिन में ही उस का काम हो जाएगा. वह बाकी पैसों का इंतजाम कर ले. यह जानकारी मिलते ही सीमा खुशी के मारे फूली नहीं समा रही थी. उस दिन के बाद वह राहुल के साथ बहुत ही प्यार लड़ाने में लगी हुई थी.

योजना बनते ही राहुल ने अपने साथियों को राजीव की हत्या का 27 फरवरी, 2023 का दिन निश्चित कर दिया. योजना के मुताबिक 27 फरवरी, 2023 की शाम को राहुल ने राजीव को फोन कर पैसे दिलाने वाली बात कहते हुए बुला लिया. उस के बाद राहुल राजीव को अपनी स्कूटी नंबर यूपी एई4373 पर बिठा कर अहमदाबाद गांव ले गया.

अहमदाबाद पहुंचते ही राहुल ने राजीव को अरुण, रवि और सतीश से मिलवाया. उसी समय पांचों ने एक साथ बैठ कर अहमदाबाद गांव के जंगल में शराब भी पी. शराब पीने के दौरान ही मौका पाते ही अरुण, रवि और सतीश ने राजीव की गला दबा कर हत्या कर दी. देवर के साथ पति राजीव का मर्डर करने के बाद तीनों ने उस की लाश को पास में ही एक गड्ïढा खोद कर दफना दिया. उस के बाद उस जगह को छिपाने के इरादे से उस के ऊपर झाडिय़ां काट कर डाल दीं.

हत्या के बाद घर की रही न घाट की…

राजीव को मौत की नींद सुलाने के बाद राहुल ने सीमा को फोन कर बता दिया कि उस का काम हो गया. राहुल अहमदाबाद गांव से सीधा सीमा के कमरे पर पहुंचा. वहां पर जा कर उस ने उसे सारी बात विस्तार से बताई और रात में ही अपने कमरे पर चला गया.

अगले दिन राहुल ने सीमा को समझाते हुए कहा था कि राहुल तो अब इस दुनिया में रहा नहीं. अब तुम्हें किसी भी तरह से राजीव को मरा साबित करना है ताकि उस की नौकरी तुम्हें मिल सके. उस के लिए पहले तुम्हें पति के गुम होने की कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज करानी होगी. वह तुम्हारे हित में भी है. तुम्हारे द्वारा रिपोर्ट दर्ज कराने पर पुलिस उस की हत्या का शक तुम पर नहीं करेगी. अगर राजीव का मर्डर केस खुल भी गया तो उस में तुम्हारी ही भलाई है. तुम्हें शीघ्र ही उस की जगह पर नौकरी मिल जाएगी.

सीमा ने पति की हत्या तो करा दी थी, लेकिन वह बुरी तरह से घबरा रही थी. उसे डर था कि कहीं मुसीबत में न फंस जाए. इसी कारण वह अगले दिन कोतवाली जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही थी.

28 फरवरी, 2023 को वह सारे दिन इसी उलझन में रही कि वह कोतवाली कैसे जाए. उस ने राहुल से साथ चलने को कहा तो उस ने भी साफ मना कर दिया था. राजीव की हत्या कराने के बाद राहुल उस से ज्यादा डर रहा था, लेकिन राहुल जानता था कि अगर सीमा ने राजीव के गायब होने की रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई तो वह स्वयं भी फंस सकती है. उस के बाद उस का नंबर भी आ सकता है. इसी डर से उस ने सीमा को हिम्मत बंधाई और खुद भी हिम्मत जुटा कर देर रात कोतवाली पहुंच गया.

कोतवाली पहुंचते ही सीमा ने पुलिस को अपने पति के गायब होने की लिखित तहरीर दी. उस दौरान राहुल कोतवाली के गेट के पास ही टहलता रहा. वह पुलिस के सामने जाने से बच रहा था, लेकिन फिर भी वह कोतवाल की नजरों में चढ़ ही गया. रिपोर्ट दर्ज होते ही पुलिस राजीव की तलाश में जुट गई थी, लेकिन सीमा जल्द ही पूछताछ के दौरान पुलिस की निगाहों में आ गई थी.

इस केस के खुलते ही पुलिस ने सीमा, राहुल और सतीश को गिरफ्तार कर लिया था. पुलिस ने उसी दिन अभियुक्तों की निशानदेही पर राजीव के शव को बरामद कर लिया. साथ ही इस केस में प्रयुक्त स्कूटी भी बरामद कर ली थी. उस के बाद बाकी अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए भागदौड़ की, लेकिन दोनों पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ सके. 6 मार्च, 2023 को कोतवाली पुलिस को मुखबिर द्वारा सूचना मिली कि राजीव हत्याकांड के आरोपी अरुण और रवि वकील के माध्यम से न्यायालय में आत्मसमर्पण करने की जुगत में लगे हैं.

यह सूचना मिलते ही पुलिस ने घेराबंदी करते हुए आरोपी रवि और अरुण को अपनी हिरासत में ले लिया. उस के बाद पुलिस ने उन से भी कड़ाई से पूछताछ की तो दोनों ने अपना जुर्म कुबूलते हुए गला घोटने में प्रयुक्त रस्सी (जली हुई), राजीव का जला मोबाइल व सुपारी में मिली रकम में से बचे 27 हजार रुपए भी पुलिस ने बरामद कर लिए. इस केस में मृतक के भाई चंद्रपाल सिंह की तरफ से भादंवि की धारा 302/201/120बी/34 के अंतर्गत दर्ज कर ली. आरापियों से पूछताछ के बाद पुलिस ने उन्हें न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया.

नौकरी के लिए सुहाग को मिटाया – भाग 2

राजीव का चचेरा भाई राहुल पहले से ही रामपुर की इंद्रा कालोनी में माला टाकीज के पास किराए का कमरा ले कर रहता था. राजीव ने राहुल से एक कमरा तलाशने को कहा तो राहुल ने जल्दी ही अपने पास राजीव को एक किराए का कमरा दिला दिया. कमरा मिलते ही राजीव बीवीबच्चों को साथ ले कर वहां रहने लगा था. राजीव की ड्यूटी का कोई फिक्स टाइम नहीं था. कभीकभी उसे सारी रात बिजलीघर पर ही रहना पड़ता था. उस के बाद भी दिन में कभी भी उसे ड्ïयूटी पर बुलावा आ जाता था. काम अधिक होने के कारण राजीव अपने परिवार को पूरा समय नहीं दे पाता था. उस की शराब पीने की लत कुछ ज्यादा होती जा रही थी. जिस के कारण मियांबीवी में मनमुटाव रहने लगा था.

पति की उदासीनता से पत्नी हुई बेलगाम…

सीमा ने पति को समझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन वह उस की एक भी बात मानने को तैयार न था. राजीव ने अपनी दोनों बेटियों का एक स्कूल में दाखिला करा दिया था. बेटियों को स्कूल भेजने के बाद सीमा कमरे पर अकेली रह जाती थी. तब समय बिताने के लिए वह मोबाइल पर लगी रहती थी.

राहुल पहले से ही शहर में रह कर आर्टिफिशियल ज्वैलरी बनाने का काम कर रहा था. वह अपनी ड्यूटी से अपने कमरे पर आ जाता था. घर पर उस का मन नहीं लगता तो वह सीमा के कमरे पर चला आता था. धीरेधीरे देवरभाभी में अच्छी पटनेलगी. दोनों के बीच आपसी लगाव भी पैदा हो गया था.

उसी दौरान एक दिन बातों ही बातों में राहुल ने सीमा के सामने राजीव की पोल खोलते हुए बताया कि भाभी तुम्हें कुछ पता है. राजीव भैया पर लाखों रुपए का कर्ज है. हर रोज कई लोग उस से उन की शिकायत करते हैं. यह बात सामने आते ही सीमा समझ गई कि राजीव जरूर उस से कुछ छिपाता है. दिन भर में कई लोग राजीव को पूछने आते रहते थे. लेकिन वह समझती थी कि कोई काम कराने के लिए उस के पास लोग आते हैं. यह जानकारी मिलते ही सीमा ने कई बार इस मामले में राजीव से बात करनी चाही, लेकिन वह उसे इतना वक्त ही नहीं देता था.

सीमा जब भी उस से बात करने की कोशिश करती, वह उस की बात को बीच में ही काटते हुए कहता, ‘‘तुझे कितने पैसों की जरूरत है? तुझे जो चाहिए वह बता. मैं पैसे कहां से लाता हूं, क्या करता हूं तुझे इस बात से क्या लेनादेना. अगर मेरे पास कर्ज भी है तो तुझ से कोई नहीं मांगेगा. तू परेशान मत हो.’’

देवर की बाहों में झूलने लगी सीमा…

हालांकि राजीव की ऊपरी आमदनी अच्छी थी. लेकिन शराब की लत से उस की नौकरी पर ही फर्क नहीं पड़ा, बल्कि उस की आमदनी भी बहुत ही कम हो गई थी. अपनी आमदनी का अधिकांश हिस्सा वह शराब पीने में ही खर्च कर देता था. उसी के साथ उस में जुआ खेलने की भी लत लग गई थी. जिस के कारण वह लाखों का कर्जदार हो गया था. हालात इतने बिगड़े कि राजीव को अपनी बेटियों की पढ़ाई भी भारी लगने लगी थी. घर की आर्थिक स्थिति बिगड़ी तो सीमा को ही अपनी बेटियों की पढ़ाई और अपने खर्च के लिए नौकरी करने पर मजबूर होना पड़ा.

राहुल शहर में ही आर्टिफिशियल ज्वैलरी बनाने का काम करता था. सीमा की मजबूरी समझ कर राहुल ने उसे भी अपने यहां ही काम पर लगवा दिया. फिर दोनों देवरभाभी एक साथ काम करने लगे थे. एक साथ काम करने के दौरान ही दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ गईं. उस के बाद उन का अधिकांश समय साथ ही गुजरने लगा. समय गुजरते राजीव कुमार जितना दारू के नशे में डूबता गया, उस से कहीं ज्यादा उस की बीवी राहुल के नजदीक आती गई. राजीव अकसर शराब के नशे में धुत हो कर आता था. उस के बाद थोड़ाबहुत खाना खा कर बेसुध हो कर फैल जाता था, जिस का राहुल को भरपूर लाभ होता था.

सीमा से नजदीकियां बढऩे के बाद राहुल ने अपने कमरे पर खाना बनाना भी छोड़ दिया था. वह जो भी लाता, उसे सीमा ही बनाती और दोनों एक साथ खाना खाते. हालांकि राजीव नशे में धुत रहता था, लेकिन वह पत्नी की हकीकत जान चुका था. उस के बाद वह राहुल से सीधे मुंह बात नहीं करता था. लेकिन राहुल भी कुछ कम नहीं था, वह जब भी उस के घर आता तो राजीव के खानेपीने का इंतजाम कर के ही आता था. जिस के कारण राजीव उसे ज्यादा कुछ नहीं कहता था. फिर दोनों साथ में दारू पीते. राजीव खापी कर जल्दी ही पसर जाता. उस के बाद राहुल सीमा के साथ मौजमस्ती करने में लग जाता था, लेकिन इन दोनों का यह खेल ज्यादा दिनों तक नहीं चल पाया. सीमा राहुल के प्रसंग की पोल खुल गई.

एक दिन राजीव ने राहुल और सीमा को आपत्तिजनक स्थिति में पकड़ लिया. राहुल तो मौका पा कर वहां से भाग निकला, तब राजीव ने सीमा की अच्छी खबर ली. भद्दीभद्दी गालियां देते हुए उस ने उस की जम कर पिटाई की. पोल खुलते ही राजीव ने वहां से कमरा बदल लिया. उस के बाद राजीव ने नाहिद सिनेमा के नजदीक कमरा ले लिया. राहुल और सीमा अभी भी एक ही साथ काम कर रहे थे. राहुल भले ही सीमा के कमरे पर नहीं जा सकता था, लेकिन वह उस के साथ काम करतेकरते आगे की योजना बनाता रहा. बीचबीच में सीमा मौका देख कर राहुल को अपने कमरे पर बुला लेती थी. इस तरह देवरभाभी का प्यार चलता रहा.

राहुल तेजतर्रार युवक था. वह जानता था कि अगर किसी सरकारी कर्मचारी की रिटायर होने से पहले मृत्यु हो जाती है तो कानून के अनुसार उस की जगह पर उस की पत्नी को नौकरी मिल जाती है. यह बात राहुल ने सीमा के सामने रखते हुए कहा, ‘‘अगर हम किसी तरह से राजीव को अपने रास्ते से हटा दें तो हमारे रास्ते खुद ही खुल जाएंगे. उस के हटते ही उस की नौकरी तुम्हें मिल जाएगी और फिर हम दोनों शादी कर के एक साथ रह सकते हैं.’’

सीमा भी पति की हरकतों से तंग आ चुकी थी. वह राहुल को ही दिलोजान से चाहने लगी थी. नौकरी के लिए पति की हत्या कराने की बात जल्द ही उस के दिमाग में बैठ गई. सीमा ने फौरन हामी भर ली और हर तरह से उस का साथ देने के लिए तैयार हो गई. सीमा ने राहुल से कहा कि इस काम में जितना भी पैसा खर्च होगा, वह खर्च करेगी.

पति को ठिकाने लगाने की हुई प्लानिंग….

सीमा ने देवर राहुल के साथ पति का मर्डर करने की योजना बना ली. राजीव को मौत की नींद सुलाने की योजना बनते ही राहुल ने इस योजना को अमलीजामा पहनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी. उसी दौरान एक दिन राहुल थाना शहजादनगर के गांव अहमदाबाद निवासी अपने दोस्त सतीश से मिला.

नौकरी के लिए सुहाग को मिटाया – भाग 1

28 फरवरी, 2023 को रात के कोई साढ़े 9 बजे का वक्त रहा होगा. उस वक्त उत्तर प्रदेश के शहर रामपुर कोतवाल गजेंद्र त्यागी सहकर्मियों के साथ व्यस्त थे. उसी वक्त एक औरत कोतवाल के सामने आ कर खड़ी हुई. औरत को देखते ही कोतवाल ने उस से सवाल किया, ‘‘हां, कैसे आना हुआ?’’

“सर, मेरा नाम सीमा है. कल से मेरे पति गायब हैं. मैं ने उन्हें हर जगह तलाशा, लेकिन उन का कोई अतापता नहीं चला.’’ सीमा की बात खत्म होते ही कोतवाल गजेंद्र त्यागी ने फिर से प्रश्न किया, ‘‘आप लोग कहां रहते होï?’’ कोतवाल के पूछने पर सीमा ने बताया कि उस के पति राजीव बिजली विभाग में नौकरी करते हैं. नाहिद टाकीज के नजदीक बिजली घर के पास ही उन का किराए का कमरा है. इस वक्त उन की ड्यूटी स्वार के खोद में चल रही थी. हर रोज की तरह कल वह अपनी ड्यृटी पर निकले थे, लेकिन उस के बाद वह घर वापस नहीं आए.’’

इंसपेक्टर गजेंद्र त्यागी ने सीमा से विस्तार से जानकारी जुटाने के बाद उस की तरफ से एक लिखित तहरीर ले ली. उस के आधार पर पुलिस ने अपनी तहकीकात शुरू की. इंसपेक्टर गजेंद्र त्यागी के नेतृत्व में पुलिस टीम राजीव के कमरे पर गई. वहां पर रह रहे लोगों से जानकारी जुटाई. उस के बाद पुलिस राजीव की ड्यूटी एरिया खोद तक गई. लेकिन वहां से भी राजीव के बारे में कोई खास जानकारी नहीं मिली. पुलिस जानती थी कि ऐसे अधिकांश मामले अवैध संबंधों से जुड़े होते हैं. इसी शंका को ले कर सब से पहले पुलिस ने राजीव कुमार की पत्नी सीमा के मोबाइल नंबर को सर्विलांस पर लगा दिया.

पुलिस राजीव की तलाश में दिनरात एक किए हुए थी. उस के बावजूद भी सीमा हर वक्त थाने के चक्कर लगाने में लगी थी. पुलिस ने सीमा से कई बार पूछताछ की. अगर किसी से उन की पुरानी रंजिश हो तो वह उन व्यक्तियों के नाम बताए. लेकिन सीमा ने साफ शब्दों में बता दिया कि उन की किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी. सीमा की परेशानी को देखते हुए पुलिस की एक टीम आगापुर गांव के अशोक विहार मोहल्ले भी गई. राजीव इसी गांव का रहने वाला था. इसी कारण अधिकांश लोग उस के बारे में ठीक से जानते थे. आगापुर जाने के बाद पुलिस को जानकारी मिली कि राजीव बहुत पहले गांव छोड़ कर रामपुर में नाहिद सिनेमा हाल के पास बिजली घर के पीछे किराए के मकान में रह रहा था.

यह सब जानकारी जुटाने के बाद पुलिस टीम फिर से उस के कमरे पर पहुंची. पुलिस ने वहां पर रह रहे लोगों से पूछताछ की तो पता चला कि राजीव की गैरमौजूदगी में उन के कमरे पर एक युवक आताजाता रहता था. वह युवक कौन था, इस की जानकारी सीमा को ही होगी. यहां से यह जानकारी हासिल कर पुलिस टीम कोतवाली वापस चली आई. लेकिन इस जानकारी के बाद पुलिस एसएचओ के मन में एक गहरा शक जरूर पैदा हो गया था.

सीमा आ गई शक के दायरे में….

इसी शक की तह में जाने के लिए पुलिस ने राजीव के गायब होने वाले दिन से अगले कई दिनों तक सीमा के फोन की डिटेल्स निकाली तो उस दौरान उस के कई नंबरों पर लंबी बात होनी पाई गई. जिस के दौरान एक व्यक्ति ने उस से एक लाख रुपयों की मांग भी की थी. एक लाख रुपए की बात सामने आते ही पुलिस को यकीन हो गया कि राजीव की हत्या की जा चुकी है. इसी शक को मिटाने के लिए पुलिस ने सीमा को फोन कर कोतवाली आने को कहा. इस से पहले सीमा कोतवाली के चक्कर काट रही थी. लेकिन पुलिस के कई बार फोन करने के बाद भी वह कोतवाली नहीं आई. उस के बाद पुलिस का शक और भी गहरा गया. तब पुलिस ने सीमा को उस के घर से पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया.

कोतवाली लाने के बाद उस से सख्ती से पूछताछ की गई तो वह पुलिस के सवालों में उलझ गई. उसी वक्त पुलिस की नजर कोतवाली के प्रांगण में खड़े युवक पर पड़ी, जो सीमा के आने के तुरंत बाद ही कोतवाली आया था. वह राजीव का चचेरा भाई राहुल था. हालांकि राहुल इस से पहले भी सीमा के साथ कई बार कोतवाली आया था. लेकिन इस बार पुलिस उसे पहचान नहीं पाई थी. इस की मुख्य वजह यह थी कि उस ने अपने बाल कटा लिए थे. जबकि इस से पहले वह जब सीमा के साथ कोतवाली आया था तो उस के बड़ेबड़े बाल थे. उसे देख कर पुलिस को लगा कि उस का चचेरा भाई अभी गायब है, फिर इतनी जल्दी में उस ने अपने बाल क्यों कटवाए.

पुलिस ने सीमा को बुला कर पूछताछ की तो सीमा ने बताया कि वह और राहुल आर्टिफिशियल ज्वैलरी बनाने वाली एक कंपनी में एक साथ काम करते हैं. सीमा ने पुलिस को बताया कि राहुल रामपुर की इंद्रा कालोनी में किराए के कमरे में रहता है. यह जानकारी मिलते ही पुलिस ने राहत की सांस ली. पुलिस को जिस युवक की तलाश थी, वह स्वयं पुलिस के जाल बिछाने से पहले ही फंस गया था. उस के बाद पुलिस ने दोनों से अलगअलग पूछताछ की तो दोनों ही टूट गए. उन्होंने बिजलीकर्मी राजीव कुमार की हत्या करने की बात स्वीकार कर ली.

पूछताछ के बाद राजीव की हत्या की जो कहानी सामने आई, इस प्रकार निकली—

उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में स्थित गांव आगापुर के अशोक विहार मोहल्ले में रहता था रतनलाल का परिवार. रतनलाल के 4 बेटों में राजीव दूसरे नंबर का था. राजीव कुमार बिजली विभाग में लाइनमैन था. राजीव देखनेभालने में खूबसूरत था. लेकिन उस में शुरू से ही शराब पीने की लत थी. राजीव कुमार को ऊपरी आमदनी अच्छीखासी थी, जिस के कारण उस ने शादी के बाद से ही सीमा को खर्च के लिए किसी तरह की परेशानी नहीं आने दी थी. ठीक से पहननाओढऩा सीमा का पहले से ही शौक रहा था. राजीव शुरू से ही दारूबाज रहा था, इस के बावजूद सीमा उसे बहुत ही प्यार करती थी.

कुछ दिनों तक तो उन की गृहस्थी ठीक चली. इस दौरान वह 2 बेटियों की मां बनी. समय के साथ बच्चियां बड़ी हुईं तो उन की परवरिश को ले कर चिंता सताने लगी. सीमा चाहती थी कि बेटियां किसी अच्छे स्कूल में पढ़ेंलिखें, जिस से आगे चल कर वे अपने पैरों पर खड़ी हो सकें. गांव में राजीव अपने परिवार के साथ रहता था, जो सीमा को पसंद नहीं था. लेकिन राजीव के प्यार की खातिर वह सब कुछ झेलती आ रही थी. सीमा राजीव पर शहर में रहने के लिए दबाव बनाने लगी. वैसे तो राजीव भी शहर में ही रहना चाहता था, लेकिन घर वालों की वजह से वह गांव छोड़ कर नहीं जाना चहता था. सीमा ने बारबार उस पर शहर में कमरा लेने का दबाव बनाया तो उसे झुकना ही पड़ा.

आशिक पति ने ली जान – भाग 3

दामोदर शीतल के पीछे पागल था, यही वजह थी कि एक दिन उस ने ओमप्रकाश से कहा, ‘‘मैं शीतल से शादी करना चाहता हूं.’’

‘‘तुम शीतल से कैसे शादी कर सकते हो. अगर तुम्हें उस से शादी करनी है तो पहले मोहरश्री को छोड़ो. उस के रहते मैं अपनी बेटी की शादी तुम्हारे साथ कतई नहीं करूंगा.’’ इस तरह ओमप्रकाश ने शादी से मना कर दिया.

इस से दामोदर निराश हो गया. उसे पता था कि मोहरश्री से छुटकारा पाना आसान नहीं है. दामोदर शीतल के लिए इस तरह बेचैन था कि मोहरश्री से छुटकारा पाने का आसान रास्ता न देख पाने के बारे में विचार करने लगा. जब उसे कोई राह नहीं सूझी तो उस ने उसे खत्म करने का निर्णय ले लिया. इस के बाद वह मोहरश्री की हत्या के लिए किराए के हत्यारों की तलाश करने लगा. पैसे ले कर हत्या करने वाला कोई नहीं मिला तो वह खुद ही कुछ करने के बारे में सोचने लगा. क्योंकि उसे लगता था कि मोहरश्री उस की खुशियों की राह का रोड़ा है.

संयोग से उसी बीच मोहरश्री खेत में डालने के लिए एक शीशी कीटनाशक ले आई. आधा कीटनाशक तो उस ने खेत में डाल दिया, बाकी घर में ही रख दिया. उस कीटनाशक को देख कर दामोदर ने भयानक योजना बना डाली.  इस के बाद वह मोहरश्री की हर हरकत पर नजर रखने लगा. इस बीच उस ने मोहरश्री के प्रति अपना व्यवहार बदल लिया था.

मोहरश्री सुबह खेतों पर चली जाती तो दोपहर को बच्चों के लिए खाना बनाने आती थी. बच्चों को खाना खिला कर वह फिर खेतों पर चली जाती थी. उस दिन मोहरश्री दोपहर को खेतों से आई तो दामोदर उस के इर्दगिर्द मंडराने लगा. इधर दामोदर का व्यवहार बदल गया था, इसलिए मोहरश्री ने इस बात पर खास ध्यान नहीं दिया.   मोहरश्री को खेतों में काम करना था, इसलिए वह बच्चों को खिला कर अपना खाना ले कर चली गई. वह अपना काम कर रही थी, तभी दामोदर आ गया. उस ने कहा, ‘‘मैं काम कर रहा हूं, तुम जा कर अपना खाना खा लो.’’

मोहरश्री को भूख लगी थी, इसलिए हाथपैर धो कर वह खाना खाने बैठ गई. खाना खातेखाते ही उस की तबीयत बिगड़ने लगी तो उस ने पानी पिया. पानी पीने के बाद उस की तबीयत और बिगड़ गई. उस समय वहां दामोदर के अलावा कोई और नहीं था. उस ने दामोदर को आवाज दी. दामोदर आया तो, लेकिन मदद करने के बजाय वह खड़ा मुसकराता रहा. थोड़ी देर में तड़प कर मोहरश्री ने दम तोड़ दिया.

मोहरश्री मर गई तो दामोदर की समझ में यह नहीं आया कि वह उस की लाश का क्या करे? जब उस की समझ में कुछ नहीं आया तो वह ओमप्रकाश के पास गया.  जब उस ने ओमप्रकाश से मोहरश्री की मौत के बारे में बताया तो वह घबरा गया. उस ने कहा, ‘‘तुम ने यह क्या कर डाला, क्यों मार डाला उसे? मैं इस मामले में कुछ नहीं जानता, तुम्हें जो करना है, करो.’’

दामोदर लौटा और मोहरश्री की लाश को घसीट कर मकाई के खेत में डाल दिया. वहां से वह घर आया तो बच्चों ने मां के बारे में पूछा. उस ने कहा, ‘‘तुम्हारी मम्मी थोड़ी देर में आएंगी. तब तक तुम लोग जा कर निमंत्रण खा आओ.’’

बच्चे निमंत्रण खाने चले गए. निमंत्रण खा कर लौटे, तब भी मां नहीं आई थी. कृष्णा को चिंता हुई तो वह मामा चंद्रपाल के पास पहुंचा और उसे सारी बात बताई. इस बीच दामोदर गायब हो गया. उस का इस तरह गायब हो जाना, शक पैदा करने लगा. चंद्रपाल घर तथा गांव वालों के साथ मोहरश्री की तलाश में निकल पड़ा.

सभी खेतों पर पहुंचे तो वहां उन्हें ओमप्रकाश और उस की पत्नी गुड्डी मिली. उन से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि मोहरश्री की तबीयत खराब हो गई थी, दामोदर उसे एटा ले गया है. इस के बाद सभी अपने घर लौट आए, जब दामोदर घर नहीं आया तो सब को चिंता हुई. सभी विचार कर रहे थे कि अब क्या किया जाए, तभी मक्की के खेत में मोहरश्री की लाश पड़ी होने की जानकारी मिली.

पुलिस को सूचना देने के साथ मोहरश्री के घर वालों के साथ पूरा गांव वहां पहुंच गया, जहां लाश पड़ी थी. सूचना मिलने के बाद कोतवाली (देहात) प्रभारी पदम सिंह सिपाहियों के साथ वहां पहुंच गए. लाश और घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद जरूरी कारर्रवाई कर के उन्होंने लाश पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दी.

कोतवाली प्रभारी द्वारा की गई पूछताछ में पता चला कि दामोदर के संबंध नगला गोकुल के रहने वाली ओमप्रकाश की बेटी शीतल से थे. इस के बाद उन्हें समझते देर नहीं कि यह हत्या दामोदर ने की है. उन्होंने चंद्रपाल की ओर से मोहरश्री की हत्या का मुकदमा दामोदर के खिलाफ दर्ज कर के उस की तलाश शुरू कर दी. पुलिस तो उस की तलाश कर ही रही थी, गांव वाले भी उस के पीछे लगे थे.

घटना के 4 दिनों बाद गांव वालों ने कासगंज के थाना पतरे के एक गांव के एक बाग से दामोदर को पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया.  दामोदर ने पहले तो हत्या से इनकार किया लेकिन जब उस के साथ सख्ती की गई तो वह टूट गया. शीतल के साथ अपने संबंधों को स्वीकार करते हुए उस ने बताया कि मोहरश्री उस की खुशियों की राह में रोड़ा बन रही थी, इसलिए उस ने उस के खाने में कीटनाशक मिला कर उसे मार डाला था. पूछताछ के बाद पुलिस ने कीटनाशक की शीशी बरामद कर उसे अदालत में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

आशिक पति ने ली जान – भाग 2

बगल के गांव नगला गोकुल के रहने वाले ओमप्रकाश का खेत मोहरश्री के खेत से लगा था. ओमप्रकाश भी पत्नी गुड्डी के साथ अपने खेत पर काम करता था. उस की बेटी शीतल भी मांबाप की मदद करने खेत पर आती थी. मोहरश्री ने गौर किया कि जब तक शीतल खेत में रहती है, दामोदर उस के आसपास ही मंडराता रहता है. वह अपना काम करने के बजाय ओमप्रकाश की मदद में लगा रहता है.

उसी बीच कहीं से मोहरश्री को पता चला कि दामोदर ओमप्रकाश को मुफ्त में शराब पिलाता है तो ओमप्रकाश उसे मुफ्त खाना खिलाता है. उसे लगा कि इस के पीछे भी शीतल का ही आकर्षण है. प्रकाश के गायब होने के बाद बड़ी मुश्किल से मोहरश्री ने घरपरिवार संभाला था. अगर इस बार कुछ हुआ तो दोबारा संभालने में बहुत मुश्किल हो जाएगा. इसी चिंता में वह बेचैन रहने लगी थी.

शीतल के आकर्षण में बंधे दामोदर को अब उस के अलावा कुछ और दिखाई नहीं देता था. वह यह भी भूल गया था कि वह शादीशुदा ही नहीं, 4 बच्चों का बाप भी है. सारे कामकाज छोड़ कर वह इसी फिराक में लगा रहता था कि कैसे शीतल के नजदीक पहुंचे. अब दोपहर में उस के लिए खाना आता तो वह अपना खाना ले कर ओमप्रकाश के पास पहुंच जाता. इस के बाद दोनों शराब पीते और एकसाथ खाना खाते.

ऐसे ही समय में अपनी लच्छेदार बातों से दामोदर शीतल को आकर्षित करने की कोशिश करता. वह इस कोशिश में लगा रहता कि अगर शीतल एकांत में मिल जाए वह उस से दिल की बात कह देगा.दूसरी ओर शीतल भी अब उस के मन की बात से अनजान नहीं रह गई थी. इसलिए वह भी उसे देखती तो मुसकरा देती. दामोदर मौका ढूंढ़ ही रहा था. आखिर उसे मौका मिल ही गया. उस दिन शीतल मां के साथ खेत पर आई तो मां खेत में काम करने लगी. जबकि शीतल ट्यूबवैल के कमरे में बैठ गई. उसी बीच दामोदर वहां पहुंच गया.

हालचाल पूछ कर दामोदर शीतल से दिल की बात कहने ही जा रहा था कि मोहरश्री वहां आ गई. दामोदर को शीतल के पास देख कर उस ने कहा, ‘‘मैं तुम्हें वहां ढूंढ़ रही हूं, तुम यहां शीतल के पास बैठे क्या कर रहे हो?’’

‘‘मैं यहां पानी पीने आया था. मुझे क्या पता कि यहां शीतल बैठी है.’’

दामोदर ने सफाई तो दे दी, लेकिन मोहरश्री ने जो सुन रखा था, दोनों को इस तरह देख कर उसे बल मिला. लगा कि जो कानाफूसी हो रही है, उस में दम है. मोहरश्री ने दामोदर को समझाने की कोशिश तो की, लेकिन उस की समझ में कहां से आता. वह तो शीतल के पीछे पागल हो चुका था. इसलिए दिल की बात न कह पाने की वजह से वह मोहरश्री पर खीझ उठा था. यही वजह थी, अपना पलड़ा भारी बनाए रखने के लिए उस ने मोहरश्री को 2-4 तमाचे जड़ कर कहा, ‘‘तुम अपनी औकात में रहो, तभी ठीक है.’’

दामोदर मौके की तलाश में लगा ही था. आखिर एक दिन उसे मौका मिल ही गया. ओमप्रकाश पत्नी गुड्डी के साथ पड़ोस के गांव में किसी के यहां गया हुआ था. ओमप्रकाश के बाहर जाने वाली बात उसे पता थी, इसलिए उसे समय भी पता था. वह नगला गोकुल स्थित ओमप्रकाश के घर पहुंच गया. दरवाजा खटखटाया तो शीतल ने दरवाजा खोला. वह उसे देख कर बोली, ‘‘मम्मीपापा तो बाहर गए हैं.’’

‘‘मैं मम्मीपापा से नहीं, तुम से मिलने आया हूं.’’ दामोदर ने कहा तो शीतल का दिल धड़क उठा. वह कुछ कहती, उस के पहले ही दामोदर अंदर आ गया. घर में शीतल बिलकुल अकेली थी. उस ने शीतल का हाथ पकड़ कर कहा, ‘‘शीतल मैं तुम से प्यार करने लगा हूं. रातदिन सिर्फ तुम्हारे बारे में ही सोचता रहता हूं. लगता है, अब मैं तुम्हारे बिना नहीं जी सकता.’’

‘‘मुझे यह पहले से ही मालूम है. तुम्हारे मन में मेरे लिए क्या है, यह मैं ने तुम्हारी नजरों से जान लिया था.’’ शीतल ने नजरें नीची कर के कहा.

शीतल का इतना कहना था कि दामोदर ने खींच कर उसे बांहों में भर लिया. इस के बाद वही हुआ, जिस के लिए दामोदर न जाने कब से परेशान था. उस दिन के बाद जब भी मौका मिलता, दोनों एक हो जाते. दामोदर अब पत्नीबच्चों की ओर से पूरी तरह लापरवाह हो गया. वह अपनी सारी कमाई शीतल पर लुटाने लगा.  ओमप्रकाश और गुड्डी को दामोदर और शीतल के मिलनेजुलने में जरा भी ऐतराज नहीं था. दामोदर ओमप्रकाश को मुफ्त में शराब पिलाता ही था, जरूरत पड़ने पर गुड्डी को पैसे भी दिया करता था.

दामोदर की हरकतें मोहरश्री को बेचैन करने लगी थीं. लोग उस से कहते थे कि दामोदर को समझाती क्यों नहीं. वह पति को समझाना तो चाहती थी, लेकिन अब वह इतना आक्रामक हो गया था कि जरा भी बोलने पर मारपीट पर उतारू हो जाता था. उस की बातों और हरकतों से यही लगता था कि उसे पत्नी और बच्चे उसे बोझ लगने लगे हैं.

घर के जो हालात थे, उस से मोहरश्री परेशान रहने लगी थी. बच्चे भी सहमेसहमे रहते थे. गांव वालों से मोहरश्री की परेशानी छिपी नहीं थी, लेकिन मोहरश्री ने कभी किसी से कुछ नहीं कहा. वह बच्चों से जरूर कहती थी कि अगर उन्हें अपनी जिंदगी बनानी है तो मेहनत से पढ़ो.

मोहरश्री दामोदर को रास्ते पर लाने की कोशिश कर रही थी, जबकि दामोदर उस से पिंड छुड़ाने के बारे में सोच रहा था. अब वह शीतल के साथ अपनी गृहस्थी बसाना चाहता था. लेकिन दामोदर के लिए यह इतना आासन भी नहीं था. क्योंकि वह अपने सालों से बहुत डरता था.

दूसरी ओर मोहरश्री ने कभी अपने भाइयों से दामोदर की कोई बात नहीं बताई थी. इस के बावजूद चंद्रपाल को गांव वालों से दामोदर की हरकतों का पता चल गया था. उस ने एक दिन दामोदर को घर पर बुला कर पूछा, ‘‘पता चला है कि आजकल तुम कुछ ज्यादा ही उड़ने लगे हो?’’

साले की इस बात पर दामोदर का चेहरा सफेद पड़ गया. उस ने हकलाते हुए कहा, ‘‘भाईसाहब, ऐसी कोई बात नहीं है.’’

चंद्रपाल ने दामोदर को धमकाते हुए कहा, ‘‘एक बात याद रखना, मैं किसी भी कीमत पर यह बरदाश्त नहीं करूंगा कि तुम मेरी बहन या उस के बच्चों को परेशान करो. अगर तुम अपनी हरकतों से बाज नहीं आए तो अंजाम अच्छा नहीं होगा.’’

दामोदर खामोशी से चंद्रपाल की बातें सुनता रहा. उसे लगा कि मोहरश्री ने ही चंद्रपाल से उस की शिकायत की है. इसलिए वह घर लौटा तो शराब के नशे में धुत था. मोहरश्री खाना बना रही थी. आते ही वह मोहरश्री को गालियां देने लगा. उस ने कहा, ‘‘मेरे मन में जो आएगा, मैं वही करूंगा. कोई मेरा कुछ नहीं कर सकता. एक बात और सुन, मैं शीतल से प्यार करता हूं और अब उस से शादी भी करूंगा. जा कर कह दे अपने भाइयों से.’’

दामोदर की बातों से मोहरश्री सन्न रह गई. उस ने बच्चों को तो खाना खिला दिया, लेकिन खुद नहीं खा सकी. उस रात उसे नींद भी नहीं आई. उसे इस बात की चिंता थी कि अगर दामोदर ने सच में शीतल से शादी कर ली तो वह क्या करेगी.

उसे लगा कि अगर वह शीतल की मां से बात करे तो शायद कोई हल निकल आए. लेकिन हल निकालने की कौन कहे, गुड्डी उलटा उस पर बरस पड़ी, ‘‘शीतल तो अभी बच्ची है, उसे क्या समझ. तू ही दामोदर को क्यों नहीं समझाती. मैं दामोदर को बुलाने थोड़े ही जाती हूं, वह खुद ही यहां आता है.’’   गुड्डी की बातों से मोहरश्री दुविधा में पड़ गई. क्योंकि गुड्डी जो कह रही थी, सच वही था. दामोदर ही उस के घर आताजाता था.

जिद ने उजाड़ा आशियाना – भाग 3

इकबाल शफकत को समझाता रहता था कि वह उस से बहुत प्यार करता है और उस के बिना रह नहीं सकता. इस के बावजूद शफकत जयपुर में मकान ले कर अलग रहने की जिद पर अड़ी थी. उस का कहना था कि वह तो नौकरी कर ही रही है, अगर वह भी यहां आ जाएगा तो उसे भी बढि़या नौकरी मिल लाएगी. दोनों कमाएंगे और आराम से रहेंगे.  वैसे चाहे इकबाल जयपुर चला भी जाता, लेकिन शक की वजह से वह वहां नहीं जाना चाहता था. यही नहीं, वह यह भी नहीं चाहता था कि शफकत वहां रहे. इसीलिए वह जयपुर नहीं जा रहा था.

शफकत के जयपुर में रहने की जिद से इकबाल परेशान रहने लगा था. उसे लगने लगा था  कि शफकत बेवफा हो गई है. दोनों ही अपनीअपनी जिद पर अड़े थे. जब अब्दुल्ला को पता चला कि शफकत और इकबाल के बीच ठीक नहीं चल रहा है तो उस ने इकबाल को फोन किया. पहले तो उस ने दोस्त को समझाया. लेकिन जब वह अपनी जिद पर अड़ा रहा तो अब्दुल्ला ने कहा, ‘‘इकबाल, अगर तुम शफकत को ज्यादा परेशान करोगे और उस की बात नहीं मानोगे तो किसी दिन मैं तुम्हें गोली मार दूंगा.’’

कभी रूम पार्टनर और दोस्त रहे अब्दुल्ला ने गोली मारने की बात की तो इकबाल को भी गुस्सा आ गया. अब वह इस परेशानी से छुटकारा पाने के बारे में सोचने लगा. अब वह इस बात को ले कर काफी परेशान रहने लगा था, क्योंकि बात अब जान लेने तक पहुंच गई थी.

काफी सोचविचार कर 16 अगस्त को इकबाल ने नूंह से एक देसी कट्टा और 10 कारतूस खरीदे. 19 अगस्त को उस ने अपने गांव बिछोर से एक बोलेरो जीप किराए पर की और जयपुर पहुंच गया. बोलेरो के ड्राइवर से उस ने कहा था कि वह जयपुर अपनी बीवी को विदा कराने जा रहा है. जयपुर पहुंच कर उसने रामगंज में रैगरों की कोठी के पास बोलेरो रुकवा कर ड्राइवर से कहा, ‘‘तुम यहीं रुको, मैं दस मिनट में अपनी बीवी और बच्चे को ले कर आ रहा हूं. उस के बाद गांव चलेंगे.’’

इकबाल वहां से रैगरों की कोठी स्थित अपनी ससुराल की ओर पैदल ही चल पड़ा. उस समय दोपहर के 12 बज रहे थे. जब वह अपनी ससुराल पहुंचा तो घर में शफकत, उस के अब्बा शमशाद अहमद और अम्मी मौजूद थीं. इकबाल का 10 महीने का बेटा अथर पालने में सो रहा था.

इकबाल ने सासससुर से दुआसलाम की तो वे दामाद की खातिरदारी की तैयारी करने लगे. तभी इकबाल ने पैंट की जेब से कट्टा निकाला और वहां बैठी शफकत पर फायर कर दिया.  यह गोली शफकत के कंधे में लगी. सासससुर के आतेआते उस ने फुर्ती से एक और गोली भरी और उस पर चला दी, जो शफकत के पैर में लगी. इसी के साथ चीखपुकार मच गई.

इकबाल गोलियां चला कर भागा, लेकिन रैगरों की कोठी में गोलियां चलने की आवाज सुन कर पुलिस पौइंट पर ड्यूटी पर तैनात सिपाही उस दिशा में दौड़ पड़े, इसलिए इकबाल पकड़ा गया. रामगंज का यह इलाका जयपुर में सब से संवेदनशील माना जाता है. इसलिए गोली चलने की सूचना मिलते ही थाना रामगंज के थानाप्रभारी रामकिशन बिश्नोई तुरंत दलबल के साथ मौके पर पहुंच गए.

गोलियां चलाने वाला इकबाल पकड़ा जा चुका था. गोलियां लगने से घायल शफकत को इलाज के लिए तुरंत सवाई मानसिंह अस्पताल ले जाया गया, जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. थाने ला कर इकबाल से पूछताछ की गई. इस के बाद उसे उसी दिन अदालत में पेश कर के विस्तारपूर्वक पूछताछ के लिए 3 दिनों के पुलिस रिमांड पर ले लिया गया.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि शफकत को 5 महीने का गर्भ था. उस के पेट में पल रहा बच्चा लड़की थी. इकबाल ने गुस्से में पत्नी को गोली तो मार दी, लेकिन रिमांड के दौरान वह यही दुआ करता रहा कि उस की पत्नी की मौत न हो और वह जल्दी से जल्दी ठीक हो जाए.  लेकिन शफकत तो तुरंत मर चुकी थी. इकबाल बीवी के लिए बहुत बेचैन था, शायद इसलिए पुलिस ने उसे बताया नहीं था कि शफकत की मौत हो चुकी है.

शफकत की मौत और इकबाल के जेल चले जाने से अथर अनाथ हो गया है. अब उस की देखभाल मौसी और नानानानी कर रहे हैं. शमशाद अहमद चाहते थे कि जमाई जयपुर आ जाते, शफकत और वह नौकरी कर के अराम से अपना जीवन बिताते. लेकिन दोनों की जिद से उन का प्यार का आशियाना उजड़ गया. इस तरह दिल्ली से शुरू हुई उन की ‘लव स्टोरी’ जयपुर में खत्म हो गई. अब इकबाल भी अपने किए पर आंसू बहाते हुए पछता रहा है.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

आशिक पति ने ली जान – भाग 1

एटा-कासगंज रोड पर स्थित है एक गांव असरौली, जो कोतवाली (देहात) क्षेत्र के अंतर्गत आता है. इसी गांव के रहने वाले चोखेलाल के परिवार में पत्नी पार्वती के अलावा 3 बेटियां सावित्री, बिमला, मोहरश्री तथा 2 बेटे सत्यप्रकाश और चंद्रपाल थे. सत्यप्रकाश खेतीकिसानी में बाप की मदद करता था तो चंद्रपाल सड़क पर खोखा रख कर अंडे बेचता था. चोखेलाल की गुजरबसर आराम से हो रही थी. उन्होंने सभी बच्चों की शादियां भी कर दी थीं. सभी अपनेअपने परिवार के साथ खुश थे. उन की छोटी बेटी मोहरश्री का विवाह कासगंज के कस्बा नदरई में प्रकाश के साथ हुआ था.

सब से छोटी होने की वजह से मोहरश्री मांबाप की ही नहीं, भाईबहनों की भी लाडली थी. शादी के लगभग डेढ़ साल बाद वह एक बेटे की मां बन गई. यह खुशी की बात थी, लेकिन बेटा पैदा होने के कुछ दिनों बाद ही उस के पति प्रकाश का दिमागी संतुलन बिगड़ गया और एक दिन वह घर से गायब हो गया. घर वालों ने उसे बहुत ढूंढ़ा, लेकिन उस का कुछ पता नहीं चला.

पति के गायब होते ही ससुराल में मोहरश्री की स्थिति गंभीर हो गई. ससुराल वालों का मानना था कि उसी की वजह से प्रकाश गायब हुआ है, इसलिए उसे दोषी मान कर सभी उसे परेशान करने लगे. चंद्रपाल मोहरश्री से मिलने उस की ससुराल गया तो उसे लगा कि बहन यहां खुश नहीं है. वह उसे अपने यहां लिवा लाया.

घर आ कर मोहरश्री ने जब मांबाप और भाइयों से ससुराल वालों के बदले व्यवहार के बारे में बताया तो सभी ने तय किया कि अब उसे ससुराल नहीं भेजा जाएगा. लेकिन ससुराल वालों ने खुद ही मोहरश्री की सुधि नहीं ली. अब घर वालों को उस की चिंता सताने लगी, क्योंकि अभी उस की उम्र कोई ज्यादा नहीं थी.  अकेली जवान औरत के लिए जीवन काटना बहुत मुश्किल होता है. अगर कोई ऊंचनीच हो जाए तो सभी उन्हीं को दोष देते हैं, इसलिए पिता और भाइयों ने तय किया कि वे मोहरश्री की शादी कहीं और कर देंगे.

मोहरश्री को जब पता चला कि घर वाले उस की दूसरी शादी करना चाहते हैं तो उस ने कहा, ‘‘आप लोगों को मेरे लिए परेशान होने की जरूरत नहीं है. मैं अपने बेटे के सहारे जी लूंगी. सभी के साथ मेहनतमजदूरी कर के जिंदगी बीत जाएगा.’’  लेकिन पिता और भाई उस की इस बात से सहमत नहीं थे. वे किसी भी तरह मोहरश्री का घर बसाना चाहते थे. वह बहुत ही सीधीसादी थी. उस के स्वभाव की वजह से गांव का हर आदमी उस की मदद और सम्मान करता था. यही वजह थी कि इस परेशानी में भी वह खुश थी.

चोखेलाल की बड़ी बेटी सावित्री एटा में ब्याही थी. मायके आने पर जब उसे पता चला कि घर वाले मोहरश्री का पुन: विवाह करना चाहते हैं तो उस ने बताया कि उस के पड़ोस में रहने वाली रानी का भाई दामोदर शादी लायक है. अगर सभी लोग तैयार हों तो वह बात चलाए.

मोहरश्री की शादी में उस के पहले पति का बेटा कृष्णा बाधा बन रहा था. घर वाले चाहते थे कि वह बेटे को मायके में छोड़ दे, लेकिन मोहरश्री इस के लिए तैयार नहीं थी. उस का कहना था कि वह उसी आदमी से शादी करेगी, जो उस के बेटे को अपनाएगा. सावित्री ने बताया कि दामोदर मोहरश्री के बेटे को अपना सकता है, इसलिए सभी को उस के फोन का इंतजार था.

सावित्री ने फोन कर के बताया कि दामोदर अपनी बहन रानी के साथ सावित्री को देखने आ रहा है तो घर वालों ने तैयारी शुरू कर दी. देखासुनी के बाद मोहरश्री और दामोदर की शादी इस शर्त पर हो गई कि वह मोहरश्री के पहले पति के बेटे कृष्णा को अपना नाम देगा.

दामोदर जिला फर्रुखाबाद के थाना पाटियाली के गांव शाहपुर का रहने वाला था. उस की 2 बहनें और 2 भाई थे. दोनों भाई पंजाब में नौकरी करते थे. शादी के बाद मोहरश्री बेटे के साथ शाहपुर आ गई.  ससुराल आने पर पता चला कि दामोदर की कमाई से घर नहीं चल सकता. इसलिए उस ने दामोदर को अपने मायके असरौली चलने को कहा.

दामोदर असरौली जाने को राजी नहीं हुआ तो मोहरश्री ने फोन द्वारा सारे हालात अपने भाई चंद्रपाल को बताए तो वह खुद शाहपुर पहुंचा और सभी को असरौली ले आया. इस तरह लगभग 10 साल पहले दामोदर परिवार के साथ ससुराल आ गया था.  ससुराल आ कर वह पूरी तरह से निश्चिंत हो गया. चंद्रपाल ने भागदौड़ कर के उसे एटा रोड पर स्थित आलोक की फैक्ट्री में चौकीदारी की नौकरी दिला दी. फैक्ट्री में उसे रहने के लिए कमरा भी मिल गया था. इस तरह एक बार फिर मोहरश्री की जिंदगी ढर्रे पर आ गई.

समय के साथ मोहरश्री दामोदर के 3 बच्चों अजय, सुमित और प्रेमपाल की मां बनी. शुरूशुरू में तो दामोदर का व्यवहार कृष्णा के प्रति ठीक रहा, लेकिन जब उस के अपने 3-3 बेटे हो गए तो उस का व्यवहार एकदम से बदल गया. अब वह बातबात में कृष्णा से मारपीट करने लगा. मोहरश्री को यह बिलकुल अच्छा नहीं लगता था. उस ने देखा कि दामोदर बच्चों में भेदभाव कर रहा है तो उस ने उसे टोका. लेकिन दामोदर पर इस का कोई असर नहीं पड़ा. कृष्णा के प्रति उस की हिंसा बढ़ती ही जा रही थी.

मोहरश्री ने दामोदर से शादी जीवन को सुखी बनाने के लिए की थी. लेकिन दामोदर तनाव पैदा करने लगा था. परिवार बढ़ा तो घर में आर्थिक तंगी रहने लगी. बहन की परेशानी देख कर चंद्रपाल ने एक खेत पट्टे पर ले कर बहन को दे दिया. मोहरश्री मेहनत कर के खेत की कमाई से बच्चों को पालने लगी. उस ने बेटों को समझाया कि वे अपनी जिंदगी संवारना चाहते हैं तो मेहनत कर के पढ़ें.

दामोदर न तो अच्छा पति साबित हुआ और न अच्छा बाप. इसलिए मोहरश्री को उस से कोई उम्मीद नहीं थी. उस ने चौकीदारी वाली नौकरी भी छोड़ दी थी. अपना खर्च चलाने के लिए वह खेतों में चोरी से शराब बना कर बेचने लगा था. जब इस बात का पता मोहरश्री को चला तो वह बहुत नाराज हुई. लेकिन दामोदर पर इस का कोई असर नहीं हुआ.

भांजे के इश्क में फंसी रीना – भाग 3

नए रिश्ते से रीना को बहुत संतुष्टि मिली. मन को तृप्ति मिल गई. सूरज की बलिष्ठ बाहों से जब वह अलग हुई, तब शरमाती हुर्र्ई अपने कपड़े सहेजने लगी. वह कुछ बोलती इस से पहले ही सूरज ने उसे एक बार फिर होंठ चूम लिए. बोला, ‘‘तुम खुद को अकेला मत समझना.’’

सूरज के दिल को तसल्ली मिली कि वह कल तक जिसे प्यार भरी नजरों से देखता था, उस ने उस की भावना को समझा. उस के बाद रीना और सूरज अकसर रात के अंधेरे में भी मिलने लगे. मामीभांजे का इश्क बहुत दिनों तक छिपा नहीं रह पाया. एक रात रामहेत ने रीना को सूरज के कमरे से बाहर निकलते हुए देख लिया. उस के आते ही रामहेत ने उस के बाल खींचते हुए पिटाई कर दी. रीना की चीख सुन कर सूरज उसे बचाने आ गया. उसे भी रामहेत ने डांट कर भगा दिया. सूरज सहम गया और चुपचाप अपने कमरे में चला गया.

कुछ दिनों तक सूरज और रीना का प्यार सूना रहा, वे नहीं मिले. लेकिन मर्यादा लांघ चुकी रीना सूरज कोई उपाय निकालने के लिए बोली, जिस से वे हमेशा के लिए साथ हो जाएं. रीना को पता था कि उस के सूरज के साथ संबंध को ले कर भी रामहेत उस की पिटाई करता है. सूरज भी समझ गया था कि रामहेत उस के और रीना के संबंध के आड़े आने वाला पत्थर है. इसी समस्या से छुटकारा पाने के लिए उस ने रीना से बात की. रीना एक झटके में बोल पड़ी, ‘‘इस पत्थर को ही हटा देते हैं, बस तुम साथ देना.’’

20 जनवरी, 2023 की रात थी. जब रामहेत घर आया, तब वह नशे में मदहोश था. रीना रामहेत से कुछ नहीं बोली. उस ने अपने बेटे को आवाज लगा दी कि पापा से कहे कि खाना खा लें. इसे रामहेत ने अपनी तौहीन समझा और तिलमिला गया. उस ने रीना के साथ गालीगलौज शुरू कर दी, ‘‘हरामजादी तूने मुझ से खाने के लिए नहीं कहा, अभी तेरी खबर लेता हूं,’’ इतना कहते ही रामहेत ने रीना को धुन डाला.

इस के बाद वह गुस्से में पैर पटकते हुए कमरे में पड़ी चारपाई पर बेसुध हो कर पसर गया. इस पिटाई ने आग में घी का काम किया. रीना पति से और भी घृणा करने लगी. रीना को पहले ही सूरज की सहमति मिल गई थी और फिर इस घटना के बाद वे अपनी योजना को सफल बनाने के लिए एकजुट हो गए.

23 जनवरी की रात को भी पत्नी की भावनाओं से अनजान रामहेत शराब के नशे में चूर हो कर अपने घर आया था. भांजे के प्यार में पागल हुई रीना ने उस रोज पिता को डांट लगाई, ‘‘तुम अपनी आदत से बाज नहीं आ रहे हो, मैं तुम्हें समझा देती हूं कि अगर आज के बाद दारू पी कर आए तो मुझ से बुरा कोई नहीं होगा.’’

“क्या कर लेगी तू, तेरा दिमाग खराब हो गया है. मैं दारू पीऊं या कुछ भी करूं, तू कौन होती है मुझे रोकने वाली. खुद तो कुतिया सी बेशर्म बनी फिरती है. पता नहीं कितने मर्दों के साथ रात बिता चुुकी है. एक को तो मैं ही जानता हूं…’’

“बकवास बंद कर, मैं तुझे भी जानती हूं और तेरी औकात भी. तू एक नंबर का दारूबाज है. मुझ पर लांछन लगाता है. मैं सूरज से प्यार करती हूं. …और हां, अब उसी के साथ रहूंगी.’’ यह सुनते ही रामहेत तैश में आ गया और रीना को मारने के लिए आगे बढ़ा, लेकिन नशा अधिक होने के कारण लडख़ड़ा कर गिर पड़ा.

“निठल्ला कहीं का, तेरी इतनी हिम्मत जो दारू पी कर मुझ पर हाथ उठाए, रुक अभी तुझे मजा चखाती हूं.’’ रीना बिफरती हुई बोली और उस की जेब से मोबाइल फोन निकाल लिया. उसी से सूरज को फोन कर बोली, ‘‘अच्छा मौका है आ जाओ. आज इसे ठिकाने लगा ही देते हैं.’’

फोन सुन कर सूरज तुरंत छत के रास्ते से रामहेत के घर में आ गया. सूरज ने रामहेत को दबोच लिया और उस का गला कस कर दबा दिया. उस ने हाथपैर चलाए तो रीना ने कस कर पकड़ लिए. रामहेत ज्यादा विरोध नहीं कर पाया और उस की वहीं मौत हो गई. तब तक करीब आधी रात हो चुकी थी. भांजे के साथ पति की हत्या करने के बाद सूरज रामहेत की लाश को कंधे पर लाद कर अपने घर की छत पर ले गया, जहां से उस ने लाश को घर के पीछे फेंक दिया.

उस के बाद दोनों चुपके से रात के अंधेरे में घर से फावड़ा ले कर निकले. रामहेत की लाश को घर के पिछवाड़े से उठाया और सरसों के खेत में ले जा कर दफना दी. इस के लिए रीना और सूरज ने मिल कर करीब 3 फुट गहरा गड्ïढा खोदा था. लाश को उस में डाल कर खेत समतल बना कर पति को दफना दिया था. इस के बाद दोनों वापस घर लौट आए. उन्हें उम्मीद थी कि रामहेत की हत्या एक पहेली बन कर रह जाएगी और वे कभी पकड़े नहीं जाएंगे, लेकिन रामहेत के मोबाइल फोन से रीना द्वारा सूरज को फोन करने की गलती भारी पड़ गई.

मुरैना में रामहेत मर्डर केस की खबर क्षेत्र में फैल चुकी थी. पूछताछ के बाद पुलिस ने सूरज और रीना की निशानदेही पर पुलिस ने सरसों के खेत से रामहेत की लाश बरामद कर ली. लाश को पोस्टमार्टम के लिए ग्वालियर भिजवा दिया गया. पुलिस ने रामहेत की गुमशुदगी का मुकदमा ग्वालियर, मुरैना में पति का मर्डर के दोनों आरोपियों को पुलिस ने भादंवि की धारा 302, 201, 120बी, 34 में निरुद्ध कर उन्हें न्यायालय में पेश किया, जहां से रीना को ग्वालियर जेल की महिला सेल में उस की एक वर्षीय बेटी के साथ और सूरज को मुरैना जेल भेज दिया गया. केस की जांच एसएचओ रविंद्र कुमार कर रहे थे.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

भांजे के इश्क में फंसी रीना – भाग 2

पुलिस सूरज को भी उठा कर थाने ले आई. जब उस से सख्ती से पूछताछ की गई, तब उस ने अपना अपराध स्वीकार करते हुए रामहेत के साथ घटित मामले का सच उगल दिया. रीना और सूरज के बयानों के आधार पर रामहेत के बारे में चौंकाने वाली जो जानकारी मिली, वह इस प्रकार है—

मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के बुद्धिराम का पुरा में रहने वाले तुलाराम जाटव का छोटा परिवार था. वह अपनी गरीबी के कारण बेटे रामहेत को पढ़ा नहीं पाया था. जवान होने पर वह मेहनतमजदूरी व छोटेमोटे काम करने लगा. समय रहते उस की शादी मुरैना में ही शहनाई गार्डन निवासी रीना से हो गई थी. शादी के कुछ साल पंख लगे सपने की तरह कैसे उड़ गए, पता ही नहीं चला. उस का खर्चा तब बढ़ गया, जब वह एक बेटे और 2 बेटियों का पिता बन गया. रीना भी महत्त्वाकांक्षी थी. वह जबतब पति से पैसे मांगती रहती थी.

पैसे नहीं मिलने पर पति से झगडऩे लगती थी. कुछ समय में ही पूरा घर सिर पर उठा लेती थी. जबकि रामहेत पैसे की तंगी से परेशान रहता था. परेशानी का समाधान नहीं निकल पा रहा था. इसी दौरान तनाव में वह शराब पीने लगा था. धीरेधीरे यह आदत बन गई थी. शाम को अकसर शराब पी कर घर आने लगा था. जबकि उस की जेब खाली रहती थी. घर लौटने पर इसी बात को ले कर पत्नी से उस की कहासुनी हो जाती थी. मांबाप के बीच होने वाली कलह से बच्चे भी तंग आ गए थे. दिनप्रतिदिन उन दोनों झगड़े बढ़ गए थे. शराब के नशे में रामहेत रीना की पिटाई तक कर देता था.

एक दिन रामहेत ने रीना की इस कदर पिटाई कर दी कि उस की कलाई की चूडिय़ां टूट कर कलाई और हथेली में चुभ गई. खून निकल आया. वह भागीभागी पड़ोस में रह रहे सूरज के पास चली गई. सूरज ने उस के हाथों से खून निकलता देख तुरंत डिटौल लगा दी. जब वह वहां से चलने को हुई, तब सूरज ने उस का हाथ पकड़ लिया. बोला, ‘‘मामी, थोड़ी देर यहीं बैठो, जब उस का गुस्साशांत हो जाएगा, तब चली जाना.’’

“नहीं छोटी बेटी को दूध पिलाना है,’’ रीना बोली और अपने घर चली आई. बिछावन पर लेटी बेटी को उठा लिया और दूध पिलाने लगी.

“हरामजादी कहां गई थी? अपने यार के यहां…’’ रामहेत गालियां बकता हुआ रीना को पीटने लगा. इसी बीच उसे तुलाराम की आवाज आई. वह बोले, ‘‘आज फिर तू पी कर आया है? कमाताधमाता तो है नहीं, उल्टे बहू पर मर्दानगी दिखाता है, हरामखोर कहीं का!’’

पिता की डांटभरी आवाज सुन कर रामहेत के हाथ रुक गए थे. पास में ही उस की बिरादरी का युवक सूरज जाटव रहता था. वह रीना को मामी कह कर बुलाता था. रीना उस की एक तरह से मुंहबोली मामी थी. दोनों के बीच मिलनाजुलना होता रहता था. वह अकसर रीना को पति से पिटने से बचाता था. उस रोज भी रीना के पास आ गया था और रामहेत से झगड़ा नहीं करने को समझाने लगा. उस की सलाह सुन कर रामहेत और ज्यादा भडक़ गया. रामहेत ने उसे रीना से दूर रहने के लिए बोला,

‘‘ज्यादा रीना का हिमायती बनने की जरूरत नहीं है. देख रहा हूं कि तू उस के करीब आने की कोशिश कर रहा है.’’ अभी तक तो सूरज रीना का हमदर्द बना हुआ था, लेकिन रामहेत की बातों से उसे महसूस हुआ कि वह उसे गलत नजरिए से देख रहा है. रामहेत की यह बात उस के दिमाग में उमडऩेघुमडऩे लगी. रीना भले ही साधारण सुंदर थी, लेकिन शरीर में मादकता थी. चलने पर कमर लचकती थी.

जब मेकअप कर लेती थी तो साड़ीब्लाउज में वह बहुत ही अच्छी दिखती थी. सूरज और रीना की उम्र में वैसे तो 10 साल का अंतर था, लेकिन रीना की उम्र 20-22 की अल्हड़ युवती की तरह दिखती थी. वह सूरज से काफी घुलीमिली थी. बाजार काकाम उसी से करवाती थी. इस कारण दोनों में अच्छी पटती थी. अत: दोनों हर तरह की बातें काफी देर तक करते रहते थे. उन के बीच हंसीठिठोली भी होती रहती थी.

मजाक में सूरज को छेड़ती हुई कह देती थी कि वह शादी कब करेगा? जवाब में सूरज भी मजाक में बोल देता कि उस के रहते शादी की जरूरत नहीं है. यह सुन कर रीना शरमा जाती थी और फिर वह रीना की तारीफ के पुल बांध देता था. उस की जवानी की कसम खाता हुआ उस का हाथ चूम लेता था. यह सब रीना के दिल को भी अच्छा लगता था. धीरेधीरे कर रीना भी अपने दिल की बात सूरज से करने लगी थी.

उस ने एक दिन मजाक में बोल दिया कि अगर वह उस की बराबर उम्र की होती, वह उस से शादी कर लेती. लेकिन यह बात सच थी कि रीना पति से किसी भी तरह से खुश नहीं थी.  रीना इस बात को ले कर भी बेचैन रहती थी. उदास भी रहने लगी थी. एक बार सूरज ने उस की उदासी का कारण पूछा.रीना बात को टालती हुई सिर्फ इतना ही कह पाई थी कि वह अभी कुंवारा है, इसलिए उस की उदासी का कारण नहीं समझेगा.

जबकि सूरज इतना भी नासमझ नहीं था कि रीना की उदासी का कारण नहीं समझे. उस रोज उस ने रीना के दोनों हाथ पकड़ लिए थे और भावुकता से बोला था, ‘‘मैं तुम्हें बहुत चाहता हूं, मुझ से तुम्हारा दर्द नहीं देखा जाता.’’ यह कहना था कि रीना उस के गले लग गई. सूरज उस का पीठ सहलाते हुए उसे ले कर कमरे में चला गया. जब रीना उस से अलग हुई, तब सूरज ने उसे चूमना शुरू कर दिया. रीना ने भी इस का विरोध नहीं किया. फिर रीना के हाथ भी सूरज के अंगों पर घूमने लगे. दोनों के शरीर में वासना की आग भभक उठी थी, लिहाजा उन्होंने अपनी हसरतें पूरी कर लीं.