लड़की के लिए दोस्त बना दुश्मन – भाग 3

पुलिस एक महीने तक इस मामले की जांचपड़ताल में उलझी रही. लेकन नतीजा शून्य ही रहा. नितिन ने अलीगढ़ से पढ़ाई की थी. हत्या वाली रात जो युवक उस के बेड के पास देखा गया था उस ने भी खुद को अलीगढ़ का ही रहने वाला बताया था. शायद अलीगढ़ से ही कोई क्लू मिल जाए यह सोच कर एसआई संजीव कुमार शर्मा के नेतृत्व में एक पुलिस टीम अलीगढ़ भेजी गई.

पुलिस ने वहां पूछताछ भी की. लेकिन नितिन की किसी रंजिश के बारे में पता नहीं चल सका. कोई सुराग नहीं मिला तो पुलिस टीम वापस लौट आई. नितिन की हत्या पुलिस के लिए पहेली बन गई थी. हत्या का खुलासा नहीं हो सका तो नितिन के घर वालों ने डीआईजी के. सत्यनारायण से मुलाकात कर के हत्यारे को पकड़ने की मांग की. इस मामले को ले कर पुलिस की किरकिरी हो रही थी. पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे थे. डीआईजी के. सत्यनारायण और एसएसपी ओंकार सिंह इस मामले को ले कर काफी परेशान थे.

अस्पताल में हुई हत्या का यह केस पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ था. उन्होंने एसपी (सिटी) ओमप्रकाश, सीओ विकास त्रिपाठी और सर्विलांस टीम के साथ मीटिंग कर के जांच की समीक्षा की और पूरे मामले की नए सिरे से जांच के निर्देश दिए. इस बीच थाना मैडिकल प्रभारी का स्थानांतरण कर के बचन सिंह सिरोही को इंचार्ज बना दिया गया था.

नए सिरे से जांच की कड़ी में पुलिस ने नितिन के मोबाइल के इंटरनेशनल मोबाइल इक्विपमेंट आईडेंटिटी (आईएमइआई) नंबर के जरिए पता करने की कोशिश की कि क्या उस मोबाइल में और भी सिमकार्ड इस्तेमाल किए गए थे. इस से पुलिस को 2 और नंबर मिल गए. उन नंबरों का इस्तेमाल हत्या से पहले किया जाता रहा था. ये दोनों नंबर भी नितिन के ही नाम पर थे. उन नंबरों की काल डिटेल्स निकलवाई गई. पता चला कि उन में से एक नंबर ऐसा था जिस पर अकसर बातचीत और एसएमएस होते थे.

पुलिस ने उस नंबर की जानकारी जुटाई तो वह नंबर नितिन के गांव की एक लड़की पूजा (परिवर्तित नाम) का निकला. इस तरह कड़ी से कड़ी जोड़ते हुए पुलिस पूजा तक पहुंच गई. पुलिस ने पूजा के बारे में सब से पहले नितिन के पिता से पूछताछ की. उन्होंने यह तो बताया कि पूजा उन्हीं के गांव की है पर उस के नितिन से कैसे रिश्ते थे, इस बारे में रामबीर कुछ नहीं जानते थे. पुलिस ने पूजा से पूछताछ की तो पता चला उस से नितिन के गहरे दोस्ताना संबंध थे. नितिन की हत्या किस ने की, इस बारे में वह कुछ नहीं जानती थी.

नितिन के 2 नंबरों की डिटेल्स में 2 और नंबर भी मिले थे. उन नंबरों  की भी जांच की गई. उन में एक नंबर जिला मुजफ्फरनगर के थाना चरथावल क्षेत्र के गांव कुलहेड़ी निवासी अध्यापक मखदूम अली के बेटे मोहम्मद वासिफ का था और दूसरा नितिन के ही गांव के महेंद्र सिंह के बेटे सुनील कुमार का. महेंद्र कुमार सेवानिवृत्त अध्यापक थे.

यह पता चलने पर पुलिस ने एक बार फिर नितिन के पिता से पूछताछ की. उन्होंने बताया कि सुनील नितिन का दोस्त था. उस ने अलीगढ़ से बीफार्मा किया था. उसी की मदद से अलीगढ़ में नितिन का दाखिला कराया गया था. दोनों अलीगढ़ में 1 साल साथसाथ रहे थे, बाद में सुनील की नौकरी हिमाचल प्रदेश में लग गई थी और नितिन पढ़ाई के लिए मेरठ चला गया था.

रामबीर चौहान को सुनील पर कोई शक नहीं था. वह उसे नितिन का अच्छा दोस्त बता रहे थे. फिर भी पुलिस को लग रहा था कि हत्या के तार सुनील से जुड़े हो सकते हैं. इस की वजह यह थी कि अस्पताल में देखे गए संदिग्ध युवक का हुलिया सुनील से मिलताजुलता था. लेकिन पुलिस बिना किसी पुख्ता सुबूत के सुनील पर हाथ नहीं डालना चाहती थी. वैसे भी वह हिमाचल में था.

सुबूतों के चक्कर में पुलिस ने उस के मोबाइल की घटना वाले दिन की लोकेशन पता लगाई, तो उस के फोन की लोकेशन हिमाचल की ही मिली. लेकिन इस में एक पेंच यह था कि उस के मोबाइल से 24 और 25 अक्तूबर को कोई फोन नहीं किया गया था. जबकि इन 2 तारीखों के आगेपीछे मोबाइल का इस्तेमाल हुआ था.

उस के फोन की काल डिटेल्स निकलवा कर चेक की गई, तो पुलिस चौंकी. क्योंकि सुनील भी अपने गांव की लड़की पूजा के लगातार संपर्क में रहा था. नितिन की तरह वह भी पूजा से बात करता था और उसे एसएमएस भेजा करता था. इस जानकारी ने पुलिस को सोचने पर मजबूर कर दिया.

नितिन के मोबाइल से वासिफ का जो दूसरा नंबर मिला था पुलिस ने उस की भी काल डिटेल्स और लोकेशन हिस्ट्री हासिल की. इस से पुलिस को एक महत्त्वपूर्ण तथ्य मिल गया. 24 व 25 अक्तूबर को उस के नंबर की लोकेशन कैंट रेलवे स्टेशन, जहां हादसा हुआ था और मैडिकल कालेज की पाई गई. यह बात भी साफ हो गई कि इस बीच वासिफ और सुनील की लगातार बातें होती रही थीं. इस की गवाही दोनों की काल डिटेल्स दे रही थीं. इन तथ्यों के मद्देनजर पुलिस को नितिन की हत्या की कहानी सुनील, वासिफ और पूजा के इर्दगिर्द घूमती नजर आने लगी.

मेरठ पुलिस ने मुजफ्फरनगर पुलिस की मदद से वासिफ के बारे में खुफिया जानकारी जुटाई तो पता चला कि उस ने भी अलीगढ़ से बीफार्मा किया था. इतना ही नहीं उस ने कुछ महीने हिमाचल प्रदेश में नौकरी भी की थी, लेकिन फिलहाल वह मेरठ में रह कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था. इस से पुलिस को शक हुआ कि नितिन की हत्या में दोनों का हाथ है. पुलिस ने दोनों के नंबर सर्विलांस पर लगा दिए.

इस बीच नितिन की हत्या हुए एक महीना बीत गया. बहरहाल, पुलिस की मेहनत रंग लाई. दिसंबर के पहले सप्ताह में सुनील और वासिफ के फोन की लोकेशन मेरठ में मिलने लगी. इस पर सीओ विकास त्रिपाठी ने उन की गिरफ्तारी के लिए एक पुलिस टीम का गठन कर दिया. इस टीम में थानाप्रभारी बचन सिंह सिरोही, एसआई संजीव कुमार शर्मा, श्रवण कुमार, कांस्टेबल नरेश कुमार, सौरभ कुमार, बंटी कुमार और तेजपाल सिंह को शामिल किया गया.

7 दिसंबर की दोपहर पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि दोनों वांछित शास्त्रीनगर इलाके में मौजूद हैं. इस सूचना के आधार पर पुलिस ने दोनों को एल ब्लाक तिराहे से गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तारी के बाद पुलिस दोनों को थाने ले आई. दोनों से पूछताछ की गई, तो उन्होंने नितिन की हत्या में अपना हाथ होने से इनकार कर दिया. लेकिन जब तथ्यों के आधार पर उन से सख्ती से पूछताछ की गई, तो दोनों ऐसे मास्टरमाइंड कातिल निकले जिन्होंने न सिर्फ पुलिस जांच को भटका दिया था बल्कि पूरे 1 महीना 12 दिन तक इस में सफल भी रहे थे.

लड़की के लिए दोस्त बना दुश्मन – भाग 2

राहुल के अनुसार उस युवक की उम्र 20-22 साल थी और वह आसमानी रंग की कमीज पहने हुए था. पुलिस ने डा. हर्षवर्धन से भी पूछताछ की. उन्होंने बताया कि उस युवक को उन्होंने 3 बजे देखा था. उस वक्त वह बेहोश जरूर था लेकिन जीवित था. इस का मतलब उस युवक की हत्या 3 बजे के बाद की गई थी. पुलिस ने वार्ड में भरती मरीजों के अलावा  उन के तीमारदारों से भी पूछताछ की.

तीमारदार रविंद्र ने ही सब से पहले उस युवक की गरदन से खून बहते देखा था और उसी ने दूसरों को यह बात बताई थी. इसलिए वह इस मामले की महत्त्वपूर्ण कड़ी था. उस के मुताबिक युवक के बिलकुल बराबर वाले बेड नंबर-11 पर उस की मरीज बेबी सो रही थी. बेड नंबर-9 खाली था इसलिए वह उस पर जा कर लेट गया था. बीचबीच में वह देखभाल के लिए बेबी के बेड के पास चक्कर लगाने चला जाता था.

पुलिस के पूछने पर रविंद्र ने बताया कि बीती शाम उस ने एक युवक को वहां घूमते देखा था. वह युवक आधे मुंह पर चादर लपेटे हुए था. चूंकि ठंड पड़ रही थी इसलिए उस ने उस पर कोई शक नहीं किया था. रविंद्र के पूछने पर उस ने बताया था कि उस का नाम सचिन है और वह घायल की देखभाल के लिए उस के साथ है. वह खुद को अलीगढ़ का रहने वाला बता रहा था.

एंबुलेंस चालक ने संदिग्ध युवक का जो हुलिया बताया था वह रविंद्र द्वारा बताए गए हुलिए से मैच नहीं कर रहा था. इमरजेंसी में घूमने वाला वह अज्ञात युवक ही शक के दायरे में था क्योंकि घटना के बाद से वह लापता था. मैडिकल कालेज 149.48 एकड़ में फैला था. वहां 24 घंटे लोगों की आवाजाही रहती थी. परिसर में छात्रछात्राओं के छात्रावास तो थे ही साथ ही विभिन्न वार्डों में हर वक्त सैकड़ों मरीज और उन के तीमारदार भी मौजूद रहते थे. परिसर के अंदर ही मेडीकल पुलिस थाना भी था. ऐसे में कौन कब आया और कत्ल कर के कैसे चुपचाप निकल गया यह पता लगाना आसान नहीं था.

न तो मृतक की शिनाख्त हो पा रही थी और न ही पुलिस को हत्या की वजह पता चल पा रही थी. कातिल के शातिराना तरीके को ले कर पुलिस हैरत में थी. उसे लग रहा था कि हत्यारे ने पहले उस युवक को ट्रेन से गिरा कर मारने की कोशिश की होगी ताकि यह हादसा लगे. जब वह बच गया, तो कातिल उस का पीछा करता रहा और मौका मिलते ही उस ने हत्या को अंजाम दे दिया.

उस का मकसद हर हाल में उस की हत्या करना था. पुलिस ने मृतक के शव का पंचनामा भर कर लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी और हत्या का केस दर्ज कर लिया. डीआईजी के. सत्यनारायण से ले कर एसएसपी ओंकार सिंह और सीओ विकास त्रिपाठी तक इस मामले को ले कर परेशान थे.

वारदात की गंभीरता को देखते हुए सीओ विकास त्रिपाठी के नेतृत्व में एक पुलिस टीम का गठन किया गया ताकि जल्दी से जल्दी इस केस की तह तक पहुंचा जा सके.

जांच आगे बढ़ाने के लिए मृतक की शिनाख्त जरूरी थी. इस के लिए जिले के अन्य थानों से पता किया गया, लेकिन कहीं से किसी युवक के लापता होने की सूचना नहीं मिली. इसलिए पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद युवक के शव को शवगृह में सुरक्षित रखवा दिया.

इत्तफाक से अगले दिन ही मृतक की शिनाख्त हो गई. एक व्यक्ति ने कुछ लोगों के साथ अस्पताल आ कर बताया कि संभवत: मृतक उस का बेटा था. डा. सुभाष सिंह ने उसे पोस्टमार्टम हाउस ले जा कर शव दिखाया, तो वह फूटफूट कर रोने लगा. मृतक की पहचान हो गई है, यह सूचना मिलते ही पुलिस अस्पताल आ गई. पता चला मृतक जिला अमरोहा की तहसील मंडी धनौरा क्षेत्र के ग्राम जटपुरा निवासी रामबीर चौहान का बेटा नितिन चौहान था.

एसएसपी ओंकार सिंह और सीओ विकास त्रिपाठी ने मृतक के पिता रामबीर को सांत्वना दे कर उस से पूछताछ की. पुलिस के पूछने पर रामबीर सिंह ने बताया कि नितिन अपने रूम पार्टनर परमजीत के साथ मेरठ में ही रहता था. 24 अक्तूबर को वह कालेज गया था. जब वह शाम को वापस नहीं लौटा तो परमजीत ने फोन कर के यह बात उन्हें बताई. उन्होंने नितिन के नंबर पर फोन लगाया तो वह लगातार स्विच्ड औफ जाता रहा.

वह परेशान हो गए और मेरठ आ कर दिन भर उस की तलाश की. लेकिन कोई पता नहीं चला. आज जब यह खबर अखबार में छपी तो वह अस्पताल आए. अस्पताल में पता चला कि नितिन अब इस दुनिया में नहीं है. रामबीर चौहान ने इस बात से इनकार किया कि उन की या नितिन की किसी से कोई रंजिश थी. मृतक की शिनाख्त तो हो गई लेकिन पुलिस को हत्यारे तक पहुंचने के लिए कोई सूत्र नहीं मिल रहा था. मामला काफी उलझा हुआ था.

नितिन के पिता गांव के सीधेसाधे किसान थे. उन के परिवार में पत्नी पुष्पा के अलावा 3 बच्चे थे. नितिन सब से बड़ा था, उस से छोटी 2 बेटियां थीं निशी और आशू. नितिन ने सन 2012 में गांव से इंटर करने के बाद अलीगढ़ जा कर शिवदान कालेज में बीफार्मा की पढ़ाई के लिए दाखिला ले लिया था. लेकिन अलीगढ़ में नितिन का पढ़ाई में मन नहीं लगा, तो इसी साल उस ने मेरठ के मवाना रोड स्थित ट्रांसलेम इंस्टीट्यूट में दाखिला ले लिया था. रहने के लिए उस ने अपने एक सहपाठी परमजीत के साथ गंगापुरम कालोनी में किराए का एक कमरा ले लिया था.

नितिन की लगभग हर रोज अपने घर वालों से बात होती थी. 24 अक्तूबर को उस की कोई बातचीत नहीं हुई थी. इसी बीच सनसनीखेज ढंग से उस की हत्या हो गई थी. पुलिस ने नितिन के रूम पार्टनर परमजीत से पूछताछ की. उस ने बताया कि 24 तारीख को नितिन कालेज के लिए निकला तो था लेकिन अंदर न जा कर कालेज के गेट पर ही रुक गया था. जब वह क्लास में नहीं आया तो उस ने सोचा कि वह उसे बिना बताए कहीं घूमने चला गया होगा. जब वह शाम को कमरे पर नहीं लौटा तो उस ने फोन कर के यह बात उस के पिता को बता दी.

‘‘तुम ने उस का पता लगाने की कोशिश नहीं की?’’ विकास त्रिपाठी के पूछने पर उस ने बताया, ‘‘की थी. लेकिन उस का मोबाइल स्विच्ड औफ था.’’

पुलिस ने कालेज में भी पूछताछ की. परमजीत सच बोल रहा था. वह उस दिन क्लास में मौजूद था जबकि नितिन गैरहाजिर था. पुलिस ने अन्य छात्रछात्राओं से भी पूछताछ की. इस पूछताछ में पता चला कि नितिन कालेज के गेट से ही एक युवक के साथ मोटरसाइकिल पर बैठ कर चला गया था. मोटरसाइकिल वाला कौन था, इस बारे में किसी को पता नहीं था. अस्पताल में जिस युवक को नितिन के पास देखा गया था उस से भी मोटरसाइकिल वाले का हुलिया नहीं मिल रहा था जो नितिन को मोटरसाइकिल पर ले कर गया था.

इस से पुलिस को लगा कि नितिन की हत्या में एक नहीं 2 युवक शामिल रहे होंगे. हत्यारे तक पहुंचने के लिए पुलिस ने नितिन के मोबाइल फोन की काल डिटेल्स निकलवाई, लेकिन इस से भी कोई नतीजा नहीं निकला. इस से यह साफ हो गया कि हत्यारा जो भी था बेहद चालाक था. उस ने अपने पीछे कोई सुबूत नहीं छोड़ा था.

लड़की के लिए दोस्त बना दुश्मन – भाग 1

सुबह के 4 बजे थे. बाहर रात का अंधेरा अभी तक दामन फैलाए हुए था, लेकिन मेरठ के लाला लाजपतराय मैडिकल कालेज स्थित सरदार वल्लभ भाई पटेल चिकित्सालय के इमरजेंसी वार्ड में जलती ट्यूब लाइटों की रोशनी फैली थी. हल्की रोशनी के बावजूद कई मरीज नींद में थे. तभी अचानक वहां अफरातफरी मच गई. दरअसल हुआ यह कि एक मरीज का तीमारदार रविंद्र  अपनी मरीज को देखने के लिए उठा तो उस ने बेड नंबर 12 के मरीज की गरदन से खून बहते देखा. वह तड़पते हुए हाथपैर पटक रहा था.

बीते दिन जब उस मरीज को लाया गया था तो वह बेहोश था. उसे काफी चोटें लगी थीं. बाद में पता चला कि उस के पैर में फै्रक्चर है. डाक्टरों ने उस की मरहमपट्टी कर के उस के पैर पर प्लास्टर चढ़ा दिया था. उस की गरदन से खून बहता देख रविंद्र चिल्लाया, ‘‘डाक्टर साहब… डाक्टर साहब…’’

‘‘क्या हुआ, क्यों चिल्ला रहे हो?’’ वहां से कुछ दूर बैठे वार्ड बौय दीपक ने चौंक कर पूछा, तो रविंद्र ने हड़बड़ाते हुए कहा, ‘‘जल्दी आइए, किसी ने इस की गरदन काट दी है.’’ यह सुन कर दीपक सन्न रह गया. उस ने यह बात ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ को बताई. खबर मिलते ही डा. हर्षवर्धन व अन्य स्टाफ वहां आ गया. बेड पर खून से लथपथ पड़े उस युवक की हालत देख सभी सन्न रह गए. उस की गरदन को धारदार हथियार से रेता गया था. खून लगातार बह रहा था, बिस्तर खून से तरबतर हो चुका था. उस की हालत बहुत चिंताजनक थी.

डा. हर्षवर्धन ने उस की गरदन को देखने के बाद खून रोकने के लिए रुई रख कर पट्टी लपेट दी. उन्होंने कांपते हाथों से उसे कुछ इंजेक्शन भी दिए. निस्संदेह वह मौत के बेहद करीब था. उपचार के बावजूद उस ने कुछ ही देर में लंबीलंबी सांसें लेते हुए दम तोड़ दिया. तब तक वहां अन्य मरीजों के तीमारदार भी जमा हो गए थे. सभी सहमे हुए थे. जाहिर तौर पर यह हत्या का मामला था. इमरजेंसी वार्ड में एक मरीज की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी और किसी को पता तक नहीं चला था, यह हैरत की बात थी.

इमरजेंसी वार्ड में रात की ड्यूटी पर डा. हर्षवर्धन के अलावा स्टाफ नर्स महिमा सिंह और नर्सिंग छात्रा अंजलि सिंह सहित 8 लोगों का स्टाफ था. इन लोगों के अलावा वार्ड में दरजनों मरीज और उन के तीमारदार भी थे. वार्ड में एंट्री करते ही अल्युमिनियम के फ्रेम में जड़े शीशों वाला स्टाफ रूम था. जिस में आरपार दिखाई देता था. उस रूम से ही अटैच इमरजेंसी वार्ड था जिस में दोनों साइडों में 21 बेड लगे हुए थे.

यह चूंकि मेरठ का एकलौता बड़ा सरकारी अस्पताल था इसलिए वहां चौबीसों घंटे आनेजाने वालों का सिलसिला लगा रहता था. इस के अलावा स्टाफ भी ड्यूटी पर रहता था. बाहर से आने वाले सभी मरीजों को सब से पहले इमरजेंसी में ही लाया जाता था. तत्कालिक चिकित्सा के बाद में उन्हें अलगअलग वार्डों में शिफ्ट कर दिया जाता था.

जिस युवक का इमरजेंसी वार्ड में कत्ल किया गया था उसे पिछले दिन ही वहां भरती कराया गया था. हुआ यह था कि कैंट रेलवे स्टेशन के माल गोदाम के सामने लगभग साढ़े 11 बजे सफाईकर्मी रामफल व राजेंद्र ने उस युवक को 2 रेलवे ट्रैक के बीच बेहोश पड़े देखा था. उस वक्त वह बुरी तरह घायल था. कुछ ही देर पहले वहां से जालंधर एक्सप्रेस व एक अन्य टे्रन एकदूसरे को क्रौस करते हुए अलगअलग ट्रैक से गुजरी थीं.

राजेंद्र और रामफल ने घायल युवक को देखने के बाद इस की सूचना रेलवे पुलिस को दी. पुलिस ने उसे उठा कर प्यारे लाल शर्मा जिला चिकित्सालय में भरती करा दिया था. उस की हालत चूंकि गंभीर थी इसलिए प्राथमिक उपचार के बाद उसे सरकारी एंबुलेंस से मैडिकल कालेज स्थित अस्पताल में रेफर कर दिया गया था.  युवक के शरीर पर काफी चोटें थीं और उस का एक पैर रेल की चपेट में आ कर टूट चुका था. डाक्टरों का अनुमान था कि उस के साथ यह हादसा रेल से गिरने की वजह से हुआ होगा.

पुलिस ने भी उस युवक के रेल से गिरने की वजह जानने की कोशिश नहीं की थी क्योंकि प्रथम दृष्टया यह हादसा लग रहा था. इसीलिए पुलिस ने न तो इस बाबत कोई मामला दर्ज किया था और न यह जानने की कोशिश की थी कि हादसा कैसे हुआ? एक परेशानी यह भी थी कि घटना का प्रत्यक्षदर्शी कोई भी नहीं था. युवक चूंकि बेहोश था इसलिए यह भी पता नहीं लग सका था कि वह कौन है. पहचान के लिए पुलिस ने उस की तलाशी भी ली, लेकिन उस के पास कोई पहचान पत्र या मोबाइल नंबर वगैरह नहीं मिला था.

बहरहाल, डाक्टरों ने उस की मरहमपट्टी की और एक्सरे के बाद पैर पर प्लास्टर चढ़ा दिया. इस के बाद उसे इमरजेंसी वार्ड के बेड नंबर-12 पर शिफ्ट कर दिया गया. इस के बाद भी युवक की बेहोशी नहीं टूटी थी. डाक्टरों को उम्मीद थी कि उसे सुबह तक होश आ जाएगा. लेकिन वह होश में आ कर अपनी पहचान और हादसे के बारे में कुछ बता पाता इस से पहले ही अलसुबह उस की हत्या कर दी गई थी.

वार्ड में हत्या के मामले में स्टाफ के लोग फंस सकते थे इसलिए तुरंत अस्पताल अधीक्षक डा. सुभाष सिंह को इस मामले की जानकारी दी गई. खबर मिलते ही वह आ गए. जरूरी पूछताछ के बाद उन्होंने इस की सूचना पुलिस को दे दी. सूचना पा कर थाना मैडिकल प्रभारी राकेश सिसौदिया घटनास्थल पर आ गए. दिन निकलते ही इस वारदात ने सनसनी फैला दी. चौंकाने वाली बात यह थी कि वारदात अस्पताल के अंदर हुई थी. अस्पताल में हत्या की खबर मिली तो डीआईजी के. सत्यनारायण, एसएसपी ओंकार सिंह, एसपी सिटी ओमप्रकाश सिंह और सीओ सिविल लाइंस विकास त्रिपाठी भी घटनास्थल पर आ गए.

पुलिस अधिकारियों ने इस मामले की हर नजरिए से जांचपड़ताल शुरू की. पूछताछ में पता चला कि वार्ड में मरीजों के नामपते की तो एंट्री होती थी, लेकिन उन से मिलने कौन आताजाता है इस का कोई ब्यौरा नहीं रखा जाता था. वार्ड में सीसीटीवी कैमरे भी नहीं लगे थे. पुलिस अधिकारी अस्पताल कर्मियों पर इसलिए नाराज थे क्योंकि हत्या जैसा गंभीर अपराध हो गया था और उन्हें पता तक नहीं चला था.

अधीक्षक डा. सुभाष सिंह ने मरीजों और उन्हें भरती कराने वालों की सूची पुलिस को उपलब्ध करा दी. सीओ विकास त्रिपाठी ने उस एंबुलेंस चालक राहुल से पूछताछ की जिस ने उस युवक को जिला अस्पताल ला कर भरती कराया था. उस से काम की एक बात यह पता चली कि जब उस युवक को अस्पताल लाया जा रहा था तो वहां एक युवक मौजूद था जो उसे अस्पताल ले जाने के लिए कोई प्राइवेट वाहन लाने की बात कर रहा था. लेकिन जब उस से प्राइवेट वाहन लाने की वजह पूछी गई तो वह टालमटोल करने लगा.

प्रेम त्रिकोण में मारा गया ग़ालिब

रात 10 बजे उत्तर प्रदेश के जिला अलीगढ़ के थाना जवां में किसी अज्ञात व्यक्ति ने फोन कर के सूचना दी कि कासिमपुर इलाके में राख के बंधा पर एक युवक की लाश पड़ी है. मामला हत्या का था, इसलिए ड्यूटी अफसर ने यह जानकारी एसएचओ अवधेश कुमार को दे दी. इस सूचना के बाद एसएचओ मय पुलिस टीम के घटनास्थल की तरफ रवाना हो गए. कुछ ही देर में वह राख के बंधा पर पहुंच गए.

वहां एक अज्ञात 23-24 वर्षीय युवक का खून से लथपथ शव पड़ा था. खून ताजा था, जिसे देखने से पुलिस ने अंदाजा लगाया कि युवक की हत्या कुछ समय पहले ही की गई होगी. निरीक्षण के दौरान पुलिस ने देखा कि युवक की नृशंस तरीके से धारदार हथियार से हत्या की गई थी. उस का गला रेता हुआ था. उस की आंखें बाहर निकली हुई थीं. शरीर पर भी कई घाव थे.

कुछ देर में वहां काफी लोग जमा हो चुके थे, लेकिन कोई भी मृतक को नहीं पहचान सका. पुलिस ने मौके की काररवाई निपटा कर शव को मोर्चरी में रखवा दिया. अज्ञात लाश के मिलने की सूचना एसएचओ अवधेश कुमार ने जिले के सभी थानों में प्रसारित करा दी. यह बात 20 फरवरी, 2023 की है.

कुछ समय पहले क्वारसी के नगला मल्लाह मोहल्ले की गली नंबर-6 के रहने वाले युवक गालिब खान के लापता होने की सूचना युवक के भाई तालिब ने थाना क्वारसी में दी थी. थाना क्वारसी पुलिस को देर रात जब यह जानकारी मिली कि थाना जवां पुलिस को एक युवक का शव मिला है तो क्वारसी पुलिस ने हुलिया के आधार पर गालिब के घर वालों को इस बात की सूचना दी.

खबर मिलते ही गालिब का भाई तालिब, मामा इर्तजा आदि जवां थाने पहुंच गए. पुलिस ने मोर्चरी में रखे युवक के शव को उन्हें दिखाया तो तालिब ने उस की शिनाख्त अपने 23 वर्षीय भाई गालिब खान के रूप में की. लाश की शिनाख्त हो जाने के बाद पुलिस ने राहत की सांस ली. पुलिस का अगला कदम अब हत्यारों तक पहुंचना था. लिहाजा पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू कर दी.

तालिब खान ने भाई की हत्या की रिपोर्ट उस की प्रेमिका जरीन, उस के प्रेमी अयाज व जरीन के पिता के खिलाफ दर्ज करा दी. रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि जरीन ने 20 फरवरी, 2023 को दोपहर 2 बजे गालिब को फोन कर मिलने के लिए बुलाया. गालिब स्कूटी ले कर बिना बताए चला गया और काफी देर तक नहीं लौटा. तब उस ने भाई गालिब को फोन किया तो गालिब ने बताया कि जरीन व अयाज उसे जवां स्थित राख के बंधा पर ले आए हैं. ये लोग मुझे मार देंगे, मुझे बचा लो. इस के बाद फोन कट गया और स्विच्ड औफ हो गया.

जब वह भाई को तलाशता हुआ देर रात राख के बंधा पर पहुंचा तो वहां भाई गालिब की लाश मिली. तालिब की तहरीर पर पुलिस ने जरीन व अयाज के खिलाफ हत्या व जरीन के पिता के विरुद्ध धमकी देने का मुकदमा दर्ज कर लिया. एसएसपी कलानिधि नैथानी ने गालिब खान हत्या केस के अपराधियों की शीघ्र गिरफ्तारी के लिए एक पुलिस टीम बनाई.

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टीम में सीओ (तृतीय) मोहसिन खान, एसएचओ अवधेश कुमार, एएसआई योगेंद्र कुमार, कांस्टेबल मनोज कुमार, महिला कांस्टेबल शिवानी आदि को शामिल किया गया. टीम का निर्देशन एसपी (सिटी) कुलदीप गुनावत को सौंपा गया. मुकदमा दर्ज करने के दूसरे दिन पुलिस टीम ने केला नगर निवासी अयाज तथा रियाज कालोनी निवासी प्रेमिका जरीन को उन के घरों से गिरफ्तार कर लिया.

मां की बुटीक पर गालिब से हुई थी मुलाकात

पुलिस पूछताछ के दौरान 21 वर्षीय जरीन ने बताया कि गालिब खान क्वारसी थाने के नगला मल्लाह मोहल्ले में अपने भाई तालिब के साथ मामा इर्तजा खान के घर पर रहता था. उस के मातापिता की मौत हो चुकी है. गालिब अपने भाई तालिब के साथ गैस हाकर का काम करता था. जबकि जरीन की मां बुटीक चलाती है और पिताजी नौकरी करते हैं. 5 साल पहले गालिब से उस की मुलाकात हुई थी.

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गालिब उस की मां की दुकान पर आनेजाने लगा था. सुंदर जरीन को देखते ही गालिब उस का दीवाना हो गया था. दुकान पर आनेजाने के दौरान ही दोनों एकदूसरे के प्रति आकर्षित हो गए. दोनों की आंखें मिलतीं तो जरीन शरम से आंखें झुका लेती. फिर तिरछी नजरों से चोरीचोरी गालिब को देखती. गालिब भी जरीन के दिल की बात जान चुका था.

पहली मुलाकात में ही जरीन ने गालिब की आंखों में अपने प्रति उमड़ता प्यार देख लिया था. गालिब ने उसे अपने प्यार के जाल में फंसा लिया था और जरीन भी बिना कुछ सोचेसमझे उस की तरफ खिंचती चली जा रही थी. इसी के चलते दोनों में दोस्ती हो गई. दोस्ती कब प्यार में बदल गई, दोनों को ही इस का पता नहीं चला. धीरेधीरे दोनों का प्यार परवान चढऩे लगा.

इस बीच दोनों ने एकदूसरे के मोबाइल नंबर भी ले लिए. दोनों आपस में बात करने लगे. जरीन को गालिब खान अपनी स्कूटी से घुमाने भी ले जाने लगा. वह उस पर काफी खर्च करता. अब दोनों एकदूूसरे के बिना नहीं रह पाते थे. उन के बीच अवैध संबंध बन चुके थे.

गालिब आपराधिक किस्म का था. उस की जरीन से दोस्ती जरूर हो गई थी, लेकिन धीरेधीरे गालिब अपराध के रास्ते पर बढ़ता चला गया. उस के विरुद्ध हत्या, हत्या का प्रयास, बलात्कार जैसे मुकदमे दर्ज थे. भोपाल में भी उस के खिलाफ मुकदमे दर्ज थे. इसी कारण जरीन ने अपने प्रेमी गालिब से दूरी बनानी शुरू कर दी. इतना ही नहीं, जब गालिब जेल चला गया तो जरीन ने उसे छोड़ कर अपना रास्ता अलग कर लिया.

नए प्रेमी अयाज से हुआ प्यार

गालिब के जेल जाने के बाद केला नगर, पत्थर वाली गली निवासी 22 वर्षीय युवक अयाज जरीन की जिंदगी में आया. अयाज तालानगरी अलीगढ़ की एक हार्डवेयर फैक्ट्री में काम करता था. अयाज की दोस्ती जरीन से गहरी हो गई थी. दोनों एकदूसरे को प्यार करने लगे.

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कुछ महीने पहले गालिब जब जेल से छूट कर आया तो उस ने अपनी प्रेमिका जरीन से मिलने की कोशिश की, लेकिन जरीन ने अयाज से संबंधों के चलते गालिब खान से दूरी बना ली. वह जरीन को अपने साथ रहने के लिए उस पर तरहतरह के दबाव बनाने लगा, जबकि वह नए आशिक के साथ इश्क फरमा रही थी. वह अयाज को छोडऩे के लिए राजी नहीं थी.

यह बात गालिब को अखरने लगी. गालिब को यह कतई बरदाश्त नहीं हुआ कि उस की प्रेमिका उस के होते हुए किसी दूसरे की बांहों में दिखाई दे. वह सिरफिरे आशिक की तरह हो गया. जहां भी अयाज दिखाई दे जाता, वह उस के साथ मारपीट कर देता.

वीडियो वायरल की धमकी दे कर करता था दुष्कर्म

गालिब बहुत शातिर था. उस ने पहले ही अपने और जरीन के शारीरिक संबंधों की एक वीडियो बना ली थी. गालिब उस अश्लील वीडियो को वायरल करने की धमकी दे कर उस के साथ जब चाहे तब दुष्कर्म करता था. इसी ब्लैकमेलिंग से आजिज आ कर जरीन ने अपने प्रेमी गालिब से दूरी बनाई थी. लेकिन जेल से छूट कर आने के बाद वह फिर से वही काम करने लगा.

एक माह पहले जरीन ने परेशान हो कर गालिब पर मुकदमा भी दर्ज कराया था. जरीन ने कोर्ट में अरजी दे कर 11 जनवरी, 2023 को गालिब के विरुद्ध दुष्कर्म, तेजाब से हमला करने तथा घर में घुस कर मारपीट करने का आरोप लगाया था. इस पर कोर्ट ने थाना जवां को मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया था. इस में गालिब के भाई तालिब खान और मौसी शबाना पर भी सहयोग के आरोप में मुकदमा दर्ज हुआ था. जरीन ने गालिब पर कई बार बलात्कार करने का आरोप लगाया था.

चौराहे पर मारपीट व अयाज के बाल काटे

इसी खुन्नस के चलते 10 फरवरी, 2023 को गालिब ने जरीन के नए प्रेमी अयाज को केला नगर के बीच चौराहे पर पकड़ लिया और उस की पिटाई करने के बाद उस के बाल काट दिए. अयाज अपनी बेइज्जती तो जरीन गालिब की हरकतों से परेशान थी. पिटाई व बाल काटने की घटना ने आग में घी का काम किया. बस, उसी दिन प्रेमीप्रेमिका ने गालिब से बदला लेने की ठान ली. दोनों ने साथसाथ नुमाइश देखी. गालिब की हत्या के लिए उन्होंने नुमाइश से 650 रुपए में एक रामपुरी चाकू व उस्तरा भी खरीदा.

बनाया फरजी इंस्टाग्राम अकाउंट

अपने व प्रेमी अयाज के साथ 10 दिन पहले हुई घटना का बदला लेने के लिए प्रेमी युगल जरीन व अयाज ने गालिब की हत्या की पूरी योजना बेहद शातिर तरीके से फुलप्रूफ बनाई थी. गालिब को मिलने बुलाने के लिए फोन का इस्तेमाल करने पर वे फंस सकते थे, ऐसे में जरीन ने पुलिस से बचने के लिए इंस्टाग्राम पर आजाद नाम से अपना फरजी अकाउंट बनाया.

इस के बाद 20 फरवरी को फरजी अकाउंट के जरिए गालिब को जरीन ने काल किया. जरीन की आवाज सुनते ही गालिब के चेहरे की चमक दोगुनी हो गई. जरीन ने उस से प्यार भरी बातें कर अपने जाल में फांस लिया, फिर उसे मिलने के लिए बुलाया.

जरीन के प्यार में पागल गालिब उस की चाल को नहीं समझ पाया और अपनी स्कूटी ले कर उस से मिलने पहुंच गया. उस समय जरीन बुर्का पहन कर गालिब की स्कूटी पर बैठ कर शाम के समय उसे ले कर जवां क्षेत्र में स्थित राख के बंधा पर पहुंची. अयाज वहां पहले से ही छिपा बैठा था. वहां जरीन ने उस से प्यार मोहब्बत की बातें कीं.

उस ने गालिब को विश्वास में लेते हुए कहा कि वह उस के विरुद्ध दर्ज कराए मुकदमे को वापस ले लेगी. वह पहले की तरह उस से अब भी प्यार करती है. तब जरीन ने बिना देर किए अपने पर्स से नशीली रबड़ी निकाल कर गालिब को खिलाई. इस रबड़ी में जरीन ने पहले से ही नशीली गोलियां मिला दी थीं. दीवाना गालिब पूरी तरह जरीन के प्यार में मदहोश हो गया था, उस ने खुशीखुशी रबड़ी खा ली. रबड़ी खाने के कुछ देर बाद ही गालिब बेहोश हो गया.

उस समय तक रात घिर चुकी थी. गालिब के बेहोश होते ही उस ने अयाज को बुला लिया. अयाज और जरीन ने मिल कर नुमाइश से खरीदे चाकू व उस्तरा से गालिब का गला रेत कर हत्या कर दी. उस का गला रेतने के साथ ही हाथ के पंजे काटे, आंखें अंगुली डाल कर बाहर निकाल लीं. गालिब खान का मर्डर करने के बाद दोनों वहां से फरार हो गए.

मौत होने तक करते रहे वार

प्रेमी जोड़े ने जिस दरिंदगी से हत्या को अंजाम दिया, उसी अंदाज में उन्होंने खुल कर पुुलिस के सामने सच भी बयां किया. जरीन ने साफ कहा कि उस ने खुद के साथ दुष्कर्म और अयाज की पिटाई व बाल काटने का बदला लिया है. अयाज अपने साथ की गई मारपीट व बेइज्जती तथा जरीन अपने ऊपर किए गए हमलेे व सरेराह परेशान करने से आजिज आ चुकी थी. इसलिए दोनों ही गालिब को अपना जानी दुुश्मन मान बैठे थे. किसी भी तरह उस की हत्या कर अपने रास्ते से हटाने की ठान ली थी. अपने नए प्रेमी द्वारा पहले प्रेमी की हत्या करा कर जरीन के दिल को बहुत संतुष्टि मिली.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बताया गया कि मृतक पर 18 बार चाकू और उस्तरे से वार किए गए थे. शव की हालत देख पोस्टमार्टम करने वाले डाक्टरों तक ने दांतों तले अंगुली दबा ली. पुलिस ने उन से नृशंस हत्या की वजह जानी तो बताया कि उन्होंने नौसिखिए होने के चलते तब तक उस के गले, पेट और पीठ पर वार किए, जब तक वह मर नहीं गया. वहीं आंख नोचने और हाथ के पंजे काटने की वजह उस के प्रति गुस्सा बताया.

प्रभारी सीओ (तृतीय) मोहसिन खान ने बताया कि गालिब की हत्या में इस्तेमाल किए गए चाकू और उस्तरा और गालिब का टूटा हुआ मोबाइल फोन हत्यारोपी अयाज की निशानदेही पर घटनास्थल से लगभग एक किलोमीटर आगे राख के बंधा के पास स्थित सूखे नाले की दरार से अभियुक्तों की निशानदेही पर बरामद कर लिए. इस के साथ ही दोनों के खून से सने कपड़े भी बरामद कर लिए.

इन कपड़ों को जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेज दिया गया. ताकि न्यायालय में इन को साक्ष्य के रूप में प्रस्तत किया जा सके. वहीं पुलिस ने मृतक गालिब की स्कूटी को घटनास्थल से बरामद कर लिया. दोनों अलीगढ़ से भागने की फिराक में थे. गिरफ्तार प्रेमी युगल जरीन व अयाज ने पुलिस को बताया कि हत्या के बाद वे अलीगढ़ छोड़ कर भागने की फिराक में थे. इसी इरादे से वे अलीगढ़ जंक्शन पर पहुंचे थे, लेकिन मन पलटा तो दोनों ने होटल में कमरा ले लिया और वहीं खून से सने अपने कपड़ों को बदला.

फिर दोनों ने विचार किया कि अगर हम लोग इस तरह यहां से गायब हुए तो पुलिस उन पर शक करेगी. फिर उन्होंने तय किया कि वे अपनेअपने घर जाते हैं. जब आसपास के लोगों की नजरों में वे अपनेअपने घर पर ही रहने का नाटक करेंगे तो उन पर कोई शक नहीं करेगा. इस के बाद मंगलवार शाम को वे अलीगढ़ छोड़ देंगे.

हत्यारोपी जरीन का एक भाई बड़ा और 2 छोटे हैं. युवती के पिता अलीगढ़ मुसलिम यूनिवर्सिटी में संविदाकर्मी हैं. जरीन वर्तमान में अपने घर से ही पढ़ाई कर रही थी. पुलिस जरीन के पिता की तलाश कर रही है.

पुलिस ने 21 फरवरी, 2023 को ही दोनों हत्यारोपियों जरीन व उस के नए प्रेमी अयाज को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया. गालिब हत्याकांड का 24 घंटे में परदाफाश करने वाली पुलिस टीम को एसएसपी कलानिधि नैथानी ने 15 हजार रुपए का ईनाम देने की घोषणा की. इस त्रिकोणीय प्रेम में पूर्व प्रेमी को आखिर कातिल प्रेमिका ने षडयंत्र रच कर दर्दनाक मौत दे कर उस की जिंदगी का ब्रेकअप तो कर दिया. लेकिन अब उस के नए प्रेमी को केवल जेल की सलाखें ही हासिल हुईं.

 

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

तीन साल बाद खुला रहस्य

तीन साल बाद खुला रहस्य – भाग 3

जयकुमार 2 दिन घर नहीं आया तो उस की मां गंजू के घर गई. उस ने बताया कि जयकुमार 2 दिनों से घर नहीं आया है और उस का फोन भी नहीं लग रहा है तो गंजू को भी चिंता हुई. उस ने रीना से प्रीति के बारे में पूछा तो पता चला कि वह तो परीक्षा देने अलीगढ़ गई है. जब उसे पता चला कि देवेंद्र भी घर पर नहीं है तो उस ने देवेंद्र को फोन कर के कहा कि वह जयकुमार को वापस भेज दे.

गंजू के इस फोन से देवेंद्र शर्मा घबरा गया. वह क्या जवाब दे, एकदम से उस की समझ में नहीं आया. लेकिन अचानक उस के मुंह से निकल गया, ‘‘प्रीति भी घर से गायब है. लगता है, वह उसे कहीं भगा ले गया है.’’

यह सुन कर संध्या परेशान हो उठी. उसे विश्वास नहीं हुआ कि उस का बेटा ऐसा भी कर सकता है. दूसरी ओर देवेंद्र परेशान था. वह गुनाह का ऐसा जाल बुनना चाहता था, जिस में जयकुमार का परिवार इस तरह फंस जाए कि कोई काररवाई करने के बजाए वह बचने के बारे में सोचे. उस ने पड़ोस में रहने वाले चौकीदार राकेश को बताया कि जयकुमार नाम का एक लड़का उस की बेटी को भगा ले गया है.

इस के बाद वह वकील मुन्नालाल के पास पहुंचा और उसे सारी बात बता दी. वकील मुन्नालाल देवेंद्र का परिचित था. उस ने उसे सलाह दी कि वह जयकुमार के खिलाफ बेटी को भगाने का मुकदमा दर्ज करा दे.

इस के बाद देवेंद्र मुन्नालाल वकील और कुछ पड़ोसियों को साथ ले कर थाना गांधीपार्क पहुंचा और जयकुमार के खिलाफ अपनी नाबालिग बेटी प्रीति को भगा ले जाने का मुकदमा दर्ज करा दिया. यह मुकदमा 12 दिसंबर, 2013 में दर्ज हुआ था. मुकदमा दर्ज होने के बाद इस मामले की जांच एसआई अभय कुमार को सौंपी गई.

अभय कुमार ने जयकुमार को नाबालिग प्रीति को भगाने का दोषी मानते हुए जांच शुरू की तो देवेंद्र को लगा कि उस ने जो किया है, पुलिस उस बारे में जान नहीं पाएगी. लेकिन चिंता की बात यह भी थी कि प्रीति का वह क्या करे. अब उसे घर में रखना ठीक नहीं था. दूसरी ओर उसे पता भी चल गया था कि जयकुमार की हत्या हो चुकी है.

पूछताछ में प्रीति सच्चाई उगल सकती थी, इसलिए उस ने उसे धमकाया कि अगर उस ने किसी को भी यह बात बताई तो वह उस की भी हत्या कर के उस की लाश को जयकुमार की लाश की तरह रेल की पटरी पर डाल आएगा. प्रीति डर गई. उस ने पिता से वादा किया कि वह मर सकती है, लेकिन यह बात किसी को बता नहीं सकती.

अब प्रीति को छिपा कर रखना था. इस के लिए देवेंद्र ने प्रीति को थाना सादाबाद, जिला हाथरस के गांव करसोरा स्थित अपने साले प्रमोद कुमार की ससुराल भिजवा दिया. चूंकि प्रमोद उस के साथ जयकुमार की हत्या में शामिल था, इसलिए देवेंद्र जो चाहता था, उसे वैसा ही करना पड़ता था. प्रीति मामा की ससुराल पहुंच गई, जबकि पुलिस जयकुमार और प्रीति की तलाश में दरदर भटकती रही.

प्रीति से छुटकारा पाने के लिए देवेंद्र उस के लिए लड़का तलाशने लगा. थोड़ी कोशिश कर के थाना वृंदावन के मोहल्ला चंदननगर के रहने वाले पूरन शर्मा का बेटा राहुल उसे पसंद आ गया तो करसोरा से ही उस ने प्रीति की शादी राहुल से कर दी. प्रीति की यह शादी 27 फरवरी, 2014 को हुई.

इस तरह प्रीति को ससुराल भेज कर देवेंद्र निश्चिंत हो गया. मजे की बात यह थी कि वह शांत नहीं बैठा था. वह महीने, 15 दिनों में थाने पहुंच जाता और पुलिस से बेटी की तलाश के लिए गुहार लगाता. यही नहीं, वह फरीदाबाद में रहने वाले जयकुमार के घर वालों को भी धमकाता कि वे जयकुमार के बारे में पता कर के उस की बेटी को बरामद कराएं, वरना वह उन्हें शांति से जीने नहीं देगा.

भले ही जयकुमार का कत्ल हो गया था और प्रीति की शादी हो गई थी. फिर भी पुलिस का डर तो देवेंद्र को सताता ही रहता था. कहीं जयकुमार की हत्या का रहस्य खुल न जाए, इस बात से परेशान देवेंद्र एक बार फिर वकील मुन्नालाल से मिला. उस ने कहा कि अगर पुलिस को प्रीति के बारे में पता चल गया तो उस की परेशानी बढ़ सकती है. पुलिस उस पर शिकंजा कस सकती थी. अब तक प्रीति गर्भवती हो चुकी थी.

मुन्नालाल ने पूरी कहानी पर एक बार फिर नए सिरे से विचार किया. इस के बाद उस ने सलाह दी कि वह प्रीति को पुलिस के सामने पेश कर के उस से कहलवाए कि वह जयकुमार के बच्चे की मां बनने वाली है. वह उसे धोखा दे कर मथुरा रेलवे स्टेशन पर छोड़ कर कहीं भाग गया है. उस के बाद वह पिता के पास आ गई है.

प्रीति के अपहरण के मामले की जांच अब तक कई थानाप्रभारी कर चुके थे. लेकिन कोई मामले की तह तक नहीं पहुंच सका था. शायद उन्होंने कोशिश ही नहीं की थी. जबकि पुलिस ने कई बार फरीदाबाद जा कर जयकुमार की मां एवं रिश्तेदारों से पूछताछ की थी.

पूछताछ में जयकुमार की विधवा मां ने हर बार यही कहा था कि जयकुमार और प्रीति एकदूसरे को प्यार करते थे. दोनों को प्रीति के पिता देवेंद्र ने ही गायब किया है. मुकदमा दर्ज कराने के बाद देवेंद्र फरीदाबाद छोड़ कर बल्लभगढ़ में रहने लगा था. उस ने प्रीति को फोन कर के कहा कि वह सासससुर से लड़ाई कर के उस के यहां आ जाए. प्रीति पिता के हाथ की कठपुतली थी, इसलिए पिता ने जैसा कहा, उस ने वैसा ही किया.

इस की वजह यह थी कि वह नहीं चाहती थी कि उस के प्रेमसंबंधों की जानकारी उस की ससुराल वालों को हो. क्योंकि जानकारी होने के बाद वे उसे घर से निकाल सकते थे. पिता के कहने पर प्रीति ने सास से लड़ाई कर ली तो उसी दिन देवेंद्र उसे विदा कराने उस की ससुराल पहुंच गया.

वकील की सलाह के अनुसार देवेंद्र ने 1 सितंबर, 2015 को प्रीति को एसएसपी के सामने पेश कर दिया. प्रीति ने पुलिस के सामने वही सब कहा, जैसा उसे वकील ने सिखाया था. एसएसपी के आदेश पर प्रीति का मैडिकल कराया गया. जिस समय प्रीति को एसएसपी के सामने पेश किया गया था, उस समय थाना गांधीपार्क के थानाप्रभारी अमित कुमार थे. मजे की बात यह थी कि उन्होंने प्रीति से यह भी जानने की कोशिश नहीं की थी कि जयकुमार के साथ भागने के बाद वह उस के साथ कहांकहां रही.

पुलिस की देखरेख में ही प्रीति ने बच्चे को जन्म दिया. पुलिस ने अदालत में भी प्रीति के बयान करा दिए. वहां भी प्रीति ने वही कहानी सुना दी. अदालत ने प्रीति को उस के पिता को सौंप दिया. अब तक वैसा ही हो रहा था, जैसा देवेंद्र चाह रहा था. लेकिन इसी के बाद जब अलीगढ़ के एसएसपी बन कर राजेश पांडेय आए तो सब उलटा हो गया और वह पकड़ा गया.

मृतक जयकुमार के घर वालों को भी उस की हत्या की सूचना दे दी गई थी. पुलिस ने उस की मां को बुला कर जब जयकुमार के रखे सामान को दिखाया तो उस ने बेटे के जूते और कपड़ों की पहचान कर के फोटो में भी उस की शिनाख्त कर दी.

इस के बाद पुलिस ने प्रीति, देवेंद्र और प्रमोद को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. एसएसपी ने इस मामले का खुलासा करने वाली पुलिस टीम को 10 हजार रुपए का इनाम देने की घोषणा की है, साथ ही थानाप्रभारी दिनेश कुमार दुबे को शाबाशी दी.

प्रीति की ससुराल वालों को जब सच्चाई का पता चला तो वे हैरान रह गए. प्रीति ने प्रेम क्या किया, अपनी तो जिंदगी बरबाद की ही, प्रेमी को भी मरवा दिया जो विधवा मां का एकलौता सहारा था.

तीन साल बाद खुला रहस्य – भाग 2

मां ने भले ही समझाया, लेकिन जयकुमार के प्यार में डूबी प्रीति को मां की बात समझ में नहीं आई. परेशान हो कर रीना ने सारी बात पति को बता दी. बेटी की आशिकी के बारे में सुन कर देवेंद्र तिलमिला उठा. वह मकान मालिक गंजू से मिला और उन से कहा कि वह जयकुमार को घर आने से मना करें, क्योंकि वह उस की बेटी प्रीति को बरगला रहा है.

‘‘आप का कहना ठीक है, लेकिन अपने किसी रिश्तेदार को मैं घर आने से कैसे रोक सकता हूं. आप अपनी बेटी को थोड़ा संभाल कर रखिए.’’ मकान मालिक गंजू ने कहा.

गंजू की इस बात से देवेंद्र ने खुद को काफी अपमानित महसूस किया. अब वह मकान मालिक से तो कुछ नहीं कह सकता था, लेकिन जयकुमार उसे जब भी मिलता, उसे धमकाता कि वह जो कर रहा है, ठीक नहीं है. वह उस की बेटी का पीछा छोड़ दे वरना उसे पछताना पड़ सकता है. लेकिन जयकुमार भी प्रीति के प्रेम में इस तरह डूबा था कि देवेंद्र की चेतावनी का उस पर कोई असर नहीं पड़ रहा था. जबकि देवेंद्र मन ही मन बौखलाया हुआ था.

प्रीति की अर्द्धवार्षिक परीक्षा की तारीख आ गई तो वह परीक्षा देने अपने मामा प्रमोद कुमार के यहां अलीगढ़ चली गई. उस के मामा अलीगढ़ के थाना गांधीपार्क की बाबा कालोनी में रहते थे. घर वाले तो यही जानते थे कि प्रीति बस से अलीगढ़ गई है, लेकिन घर से निकलने से पहले उस ने जयकुमार को फोन कर दिया था, इसलिए वह मोटरसाइकिल ले कर उसे रास्ते में मिल गया था. उस के बाद प्रीति उस की मोटरसाइकिल से अलीगढ़ गई थी.

मामा के घर रह कर प्रीति ने परीक्षा दे दी. उसी बीच प्रीति के मामामामी अपने एक रिश्तेदार के यहां शादी में चले गए तो घर खाली देख कर उस ने जयकुमार को फोन कर के अलीगढ़ बुला लिया. प्रेमिका के बुलाने पर घर में बिना किसी को कुछ बताए जयकुमार उस से मिलने अलीगढ़ पहुंच गया. प्रेमी को देख कर प्रीति का दिल बल्लियों उछल पड़ा. वह प्रेमी के आगोश में समा गई.

जयकुमार और प्रीति को उस दिन पहली बार एकांत और आजादी मिली थी, इसलिए उन्होंने सारी सीमाएं तोड़ दीं. ऐसे में जयकुमार ने प्रीति से वादा किया कि कुछ भी हो, हर हालत में वह उसे अपना कर रहेगा. प्रीति को भी प्रेमी पर पूरा विश्वास था. लेकिन उस दिन दोनों ने एक गलती कर दी. जयकुमार को प्रेमिका से मिल कर वापस आ जाना चाहिए था, लेकिन वह तो उस दिन और पिला दे साकी वाली स्थिति में था. प्रीति भी भूल गई थी कि अगले दिन मामामामी लौट आएंगे.

दोनों एकदूसरे में इस तरह खो गए कि सब कुछ भूल गए. याद तब आया, जब दरवाजे पर दस्तक हुई. प्रीति ने दरवाजा खोला तो मामामामी को देख कर सन्न रह गई. जयकुमार घर में ही था. प्रमोद ने अपने घर में जयकुमार को देखा तो पूछा, ‘‘यह कौन है?’’

‘‘यह जयकुमार है. मेरे मकान मालिक का साला.’’ प्रीति ने बताया.

प्रमोद को जब पता चला कि जयकुमार एक दिन पहले उस के घर आया था और प्रीति के साथ रात में रुका था तो उसे इस बात की चिंता हुई कि यह लड़का यहां क्यों आया था? उसे दाल में कुछ काला लगा तो उस ने जयकुमार को एक कमरे में बंद कर दिया और अपने बहनोई देवेंद्र को फोन कर के सारी बात बता दी. देवेंद्र उस समय उत्तराखंड के रुद्रपुर में था. उस ने कहा, ‘‘जब तक मैं आ न जाऊं, तब तक उसे उसी तरह कमरे में बंद रखना.’’

प्रीति डर गई. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि प्रेमी को छुड़ाने के लिए वह क्या करे. उस ने मामामामी से बहुत विनती की कि वे जयकुमार को छोड़ दें, लेकिन प्रमोद कोई खतरा मोल नहीं लेना चाहता था, इसलिए उस ने जयकुमार को नहीं छोड़ा.

शाम को देवेंद्र अलीगढ़ पहुंचा तो उस ने पहले ही मन ही मन तय कर लिया था कि बेटी के इस प्रेमी के साथ उसे क्या करना है? उस ने रास्ते में ही शराब की बोतल खरीद ली थी और साले के यहां पहुंचने से पहले ही उस ने शराब पी कर मूड बना लिया था.

नशे में धुत्त वह साले के यहां पहुंचा तो जयकुमार को कमरे से निकाल कर बातचीत शुरू हुई. इस बातचीत में जयकुमार ने साफसाफ कह दिया कि वह प्रीति से प्यार करता है और उस से शादी करना चाहता है. यह सुन कर देवेंद्र का खून खौल उठा और वह जयकुमार की पिटाई करने लगा.

पिटाई करते हुए ही उस ने जयकुमार से कहा, ‘‘इस बार तुम ने जो किया, माफ किए देता हूं. अब दोबारा ऐसी गलती मत करना. चलो, हम तुम्हें दिल्ली जाने वाली बस में बिठा देते हैं. फरीदाबाद आऊंगा तो तुम्हारी मां से बात करूंगा.’’

प्यार में बड़ी उम्मीदें होती हैं, जयकुमार को भी लगा कि शायद प्रेमिका का बाप मां से बात कर के शादी करा देगा. लेकिन देवेंद्र के मन में तो कुछ और था. अब तक अंधेरा गहरा चुका था. देवेंद्र और प्रमोद जयकुमार को ले कर पैदल ही चलते हुए नगला मानसिंह होते हुए रेलवे लाइन की ओर नई बस्ती के अवतारनगर में रहने वाले अपने एक परिचित विनोद के घर पहुंचे.

विनोद ने चाय बनवाने के लिए कहा तो देवेंद्र ने सिर्फ पानी लाने को कहा. विनोद ने जयकुमार के बारे में पूछा तो देवेंद्र ने बताया कि यह उस के दोस्त का बेटा है. विनोद पानी ले आया तो प्रमोद और देवेंद्र ने शराब पी. नशा चढ़ा तो दोनों जयकुमार को ले कर रेलवे लाइन की ओर चल पड़े. अब तक काफी अंधेरा हो चुका था. जयकुमार कुछ समझ पाता, उस के पहले ही सुनसान पा कर दोनों ने उसे एक गड्ढे में गिरा दिया.

वह संभल भी नहीं पाया, उस के पहले ही दोनों ने उस की गला दबा कर हत्या कर दी. इस के बाद दोनों वहीं बैठ कर ट्रेन के आने का इंतजार करने लगे. थोड़ी देर बाद उन्हें ट्रेन आती दिखाई दी तो जयकुमार की लाश को उठा कर दोनों ने पटरी पर रख दिया. ट्रेन लाश के ऊपर से गुजर गई तो वह कई टुकड़ों में बंट गई.

देवेंद्र और प्रमोद ने राहत की सांस ली, क्योंकि अब कांटा निकल गया था. लेकिन अब क्या करना है, अभी देवेंद्र को इस बारे में सोचना था. उस ने जो किया था, उसे भले ही किसी ने नहीं देखा था, लेकिन उसे होशियार तो रहना ही था. सुबह प्रीति ने उस से पूछा, ‘‘पापा, जयकुमार चला गया क्या?’’

देवेंद्र ने उसे खा जाने वाली नजरों से घूरते हुए कहा, ‘‘तू अपनी पढ़ाई से मतलब रख. कौन कहां गया, इस से तुझे क्या मतलब?’’

प्रीति को शक हुआ. अगले दिन उस ने जयकुमार को फोन किया. लेकिन उस का तो फोन बंद था, इसलिए बात नहीं हो सकी. अब प्रीति की समझ में आ गया कि जयकुमार के साथ क्या हुआ है. वह बुरी तरह डर गई.

                                                                                                                                 क्रमशः

तीन साल बाद खुला रहस्य – भाग 1

पिछले साल सन 2016 के सितंबर महीने में अलीगढ़ का एसएसपी राजेश पांडेय को बनाया गया तो चार्ज लेते ही उन्होंने पुलिस अधिकारियों की एक मीटिंग बुला कर सभी थानाप्रभारियों को आदेश दिया कि जितनी भी जांचें अधूरी पड़ी हैं, उन की फाइलें उन के सामने पेश करें. जब सारी फाइलें उन के सामने आईं तो उन में एक फाइल थाना गांधीपार्क में दर्ज प्रीति अपहरण कांड की थी, जिस की जांच अब तक 10 थानाप्रभारी कर चुके थे और यह मामला 12 दिसंबर, 2013 में दर्ज हुआ था.

राजेश पांडेय को यह मामला कुछ रहस्यमय लगा. उन्होंने इस मामले की जांच सीओ अमित कुमार को सौंपते हुए जल्द से जल्द खुलासा करने को कहा. अमित कुमार ने फाइल देखी तो उन्हें काफी आश्चर्य हुआ. क्योंकि इतने थानाप्रभारियों ने मामले की जांच की थी, इस के बावजूद मामले का खुलासा नहीं हो सका था. उन्होंने थानाप्रभारी दिनेश कुमार दुबे को कुछ निर्देश दे कर फाइल सौंप दी.

मामला काफी पुराना और रहस्यमयी था, इसलिए इसे एक चुनौती के रूप में लेते हुए दिनेश कुमार दुबे ने मामले की तह तक पहुंचने के लिए अपनी एक टीम बनाई, जिस में एसएसआई अजीत सिंह, एसआई धर्मवीर सिंह, कांस्टेबल सत्यपाल सिंह, मोहरपाल सिंह और नितिन कुमार को शामिल किया.

फाइल का गंभीरता से अध्ययन करने के बाद उन्होंने मामले की जांच फरीदाबाद से शुरू की, क्योंकि प्रीति को भगाने का जिस युवक जयकुमार पर आरोप था, वह फरीदाबाद का ही रहने वाला था. दिनेश कुमार दुबे फरीदाबाद जा कर उस की मां संध्या से मिले तो उस ने बताया कि जयकुमार उस का एकलौता बेटा था. उस पर जो आरोप लगे हैं, वे झूठे हैं. उस का बेटा ऐसा कतई नहीं कर सकता. उस ने उस की गुमशुदगी भी दर्ज करा रखी थी.

संध्या से पूछताछ के बाद दिनेश कुमार दुबे को मामला कुछ और ही नजर आया. अलीगढ़ लौट कर उन्होंने 13 जनवरी, 2016 को प्रीति के पिता देवेंद्र शर्मा को थाने बुलाया, जिस ने जयकुमार पर बेटी को भगाने का मुकदमा दर्ज कराया था. पुलिस के सामने आने पर वह इस तरह घबराया हुआ था, जैसे उस ने कोई अपराध किया हो. जब सीओ अमित कुमार, एसपी (सिटी) अतुल कुमार श्रीवास्तव ने उस से जयकुमार के बारे में पूछताछ की तो पुलिस अधिकारियों को गुमराह करते हुए वह इधरउधर की बातें करता रहा.

लेकिन यह भी सच है कि आदमी को एक सच छिपाने के लिए सौ झूठ बोलने पड़ते हैं. ऐसे में ही कोई बात ऐसी मुंह से निकल जाती है कि सच सामने आ जाता है. उसी तरह देवेंद्र के मुंह से भी घबराहट में निकल गया कि कहीं जयकुमार ने घबराहट में ट्रेन के आगे कूद कर आत्महत्या तो नहीं कर ली.

देवेंद्र की इस बात ने पुलिस अधिकारियों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि इसे कैसे पता चला कि जयकुमार ने ट्रेन के आगे कूद कर आत्महत्या कर ली है. पुलिस ने दिसंबर, 2013 के ट्रेन एक्सीडेंट के रिकौर्ड खंगाले तो पता चला कि थाना सासनी गेट पुलिस को 7 दिसंबर, 2013 को ट्रेन की पटरी पर एक लावारिस लाश मिली थी.

इस के बाद पुलिस अधिकारियों ने देवेंद्र के साथ थोड़ी सख्ती की तो उस ने जयकुमार की हत्या का अपना अपराध स्वीकार कर लिया. इस के बाद उस ने जयकुमार की हत्या की जो कहानी सुनाई, उस की शातिराना कहानी सुन कर पुलिस हैरान रह गई. देवेंद्र ने बताया कि अपनी इज्जत बचाने के लिए उसी ने अपने साले प्रमोद कुमार के साथ मिल कर जयकुमार की हत्या कर दी थी. इस बात की जानकारी उस की बेटी प्रीति को भी थी.

इस के बाद पुलिस ने देवेंद्र शर्मा की बेटी प्रीति और उस के साले प्रमोद को भी गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ में प्रीति और प्रमोद ने भी अपना अपराध स्वीकार कर लिया था. तीनों की पूछताछ में जयकुमार की हत्या की जो कहानी उभर कर सामने आई, वह इस प्रकार थी—

उत्तर प्रदेश के जिला अलीगढ़ के थाना गांधीपार्क के नगला माली का रहने वाला देवेंद्र शर्मा रोजीरोटी की तलाश में हरियाणा के फरीदाबाद आ गया था. उसे वहां किसी फैक्ट्री में नौकरी मिल गई तो रहने की व्यवस्था उस ने थाना सारंग की जवाहर कालोनी के रहने वाले गंजू के मकान में कर ली. उन के मकान की पहली मंजिल पर किराए पर कमरा ले कर देवेंद्र शर्मा उसी में परिवार के साथ रहने लगा था. यह सन 2013 के शुरू की बात है.

उन दिनों देवेंद्र शर्मा की बेटी प्रीति यही कोई 17-18 साल की थी और वह अलीगढ़ के डीएवी कालेज में 12वीं में पढ़ रही थी. फरीदाबाद में सब कुछ ठीक चल रहा था. देवेंद्र शर्मा की बेटी प्रीति जवान हो चुकी थी. मकान मालिक गंजू की पत्नी गुडि़या का ममेरा भाई जयकुमार अकसर उस से मिलने उस के यहां आता रहता था. वह पढ़ाई के साथसाथ एक वकील के यहां मुंशी भी था. इस की वजह यह थी कि उस के पिता शंकरलाल की मौत हो चुकी थी, जिस से घरपरिवार की जिम्मेदारी उसी पर आ गई थी. वह अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभा भी रहा था.

जयकुमार अपनी मां संध्या के साथ जवाहर कालोनी में ही रहता था. फुफेरी बहन गुडि़या के घर आनेजाने में जयकुमार की नजर देवेंद्र शर्मा की बेटी प्रीति पर पड़ी तो वह उस के मन को ऐसी भायी कि उस से प्यार करने के लिए उस का दिल मचल उठा. अब वह जब भी बहन के घर आता, प्रीति को ही उस की नजरें ढूंढती रहतीं.

एक बार जयकुमार बहन के घर आया तो संयोग से उस दिन प्रीति गुडि़या के पास ही बैठी थी. जयकुमार उस दिन कुछ इस तरह बातें करने लगा कि प्रीति को उस में मजा आने लगा. उस की बातों से वह कुछ इस तरह प्रभावित हुई कि उस ने उस का मोबाइल नंबर ले लिया.

जयकुमार देखने में ठीकठाक तो था ही, अपनी मीठीमीठी बातों से किसी को भी आकर्षित कर सकता था. उस की बातों से ही आकर्षित हो कर प्रीति ने उस का मोबाइल नंबर लिया था. इस के बाद दोनों की बातचीत मोबाइल फोन से शुरू हुई तो जल्दी उन में प्यार हो गया. फिर खतरों की परवाह किए बिना दोनों प्यार की राह पर बेखौफ चल पड़े. दोनों घर वालों की चोरीछिपे जब भी मिलते, घंटों भविष्य के सपने बुनते रहते.

जल्दी ही प्रीति और जयकुमार प्यार की राह पर इतना आगे निकल गए कि उन्हें जुदाई का डर सताने लगा था. उन के एक होने में दिक्कत उन की जाति थी. दोनों की ही जाति अलगअलग थी. उन की आगे की राह कांटों भरी है, यह जानते हुए भी दोनों उसी राह पर आगे बढ़ते रहे.

देवेंद्र गृहस्थी की गाड़ी खींचने में व्यस्त था तो बेटी आशिकी में. लेकिन कहीं से प्रीति की मां रीना को बेटी की आशिकी की भनक लग गई. उन्होंने बेटी को डांटाफटकारा, साथ ही प्यार से समझाया भी कि जमाना बड़ा खराब है, इसलिए बाहरी लड़के से बातचीत करना अच्छी बात नहीं है. अगर किसी ने देख लिया तो बिना मतलब की बदनामी होगी.

                                                                                                                                   क्रमशः

प्यार नहीं जुनून में हुए खून

राजमिस्त्री का काम करने वाले विजयपाल ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उस की दुनिया में ऐसा भयानक तूफान आएगा कि उस में सब कुछ नष्ट हो जाएगा. विजयपाल बचपन से ही अपनी ननिहाल गांव हसनपुर नंगला, पलवल, हरियाणा में रहता था. लगभग 22 साल पहले उस की शादी उत्तर प्रदेश के जिला गौतमबुद्ध नगर के कस्बा जेवर की राधा के साथ हुई थी.

राधा दुलहन बन कर हसनपुर आ गई तो विजयपाल के जीवन में बहार आई. शादी के बाद चूंकि खर्चे बढ़ गए थे, इसलिए वह अब और ज्यादा मेहनत करने लगा था. फिर राधा ने पूनम को जन्म दिया. पिता बन चुके विजयपाल के पैर जमीन पर ही नहीं पड़ते थे. सभी कुछ अच्छा हो रहा था.

एक आम आदमी की तरह विजयपाल दिन भर मेहनत करता और रात में उसी बिल्डिंग में अपने मजदूरों के साथ सो जाता. वह दूरदराज के ठेके लेने के कारण कईकई दिनों तक घर नहीं आ पाता था. पर उसे विश्वास था कि उस की पत्नी बच्चों की परवरिश भलीभांति कर लेगी.

समय बीतता गया और पूनम के अलावा राधा 4 और बच्चों की मां बन गई. अब विजयपाल को घर के बढ़ते खर्चे और बच्चों की पढ़ाई की चिंता होने लगी. पिछले कुछ दिनों से राधा पति से जिद करने लगी थी कि हरियाणा में रहने से तो अच्छा है कि उन्हें अब अपनों के बीच रहना चाहिए, क्योंकि विजयपाल जो अपने नानानानी के यहां रहता था, वे भी चल बसे थे. पत्नी की बात विजयपाल की भी समझ में आ गई.

उस ने अपने एक दोस्त से बात की, जो अलीगढ़ जिले के गांव सालपुर में रहता था. दोस्त ने उस से कहा कि वह उस के रहने और काम की व्यवस्था कर देगा. दोस्त से बात करने के बाद विजय ने राहत की सांस ली. वह कुछ साल पहले अपनी पत्नी और बच्चों के साथ गांव सालपुर में आ कर बस गया. यह गांव अलीगढ़ जिला मुख्यालय से करीब 65 किलोमीटर दूर है. वहीं आसपास वह मकान बनाने के ठेके लेने लगा.

सालपुर से विजय की ससुराल करीब 25 किलोमीटर दूर थी. अत: विजयपाल इस बात से भी आश्वस्त था कि उस का परिवार अब अपनों के काफी करीब है. यह मानवीय सोच है कि हर कोई अपनों से सहायता और सहयोग की उम्मीद रखता है पर अपनों के बीच आने का फैसला विजयपाल को इतना महंगा पड़ेगा, उस ने कभी भी नहीं सोचा था.

विजयपाल अपने बच्चों को पढ़ालिखा कर उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करना चाहता था. उस की बड़ी बेटी पूनम पढ़ाई में काफी अच्छी थी. काम की वजह से विजयपाल कईकई दिनों बाद ही घर आ पाता था.

उस के पीछे उस के घर में क्या हो रहा था, उसे कुछ पता नहीं था. वह एकदो दिन के लिए घर आता तो उसे घर पर सब कुछ सामान्य ही दिखता था. इस से उसे लगता कि सब कुछ ठीक चल रहा है. पर घर पर उस की बड़ी बेटी पूनम का अपनी मां राधा से जो टकराव पैदा हो गया था, वह आने वाले वक्त में क्या गुल खिलाएगा, यह कोई नहीं जान सका था.

4-5 साल पहले विजय का परिवार सालपुर में आ कर बस गया था. तब से पूनम यह महसूस कर रही थी कि उस की मां जब चाहे तब अपने मायके चली जाती है. कभीकभी पूनम को अपनी मां की हरकतों पर शक होता, लेकिन अभी वह बहुत छोटी थी इसलिए मां से कुछ कहने की हिम्मत नहीं जुटा पाती थी इतना ही नहीं, वह मां के बारे में पिता को कुछ नहीं बता पाती थी. पर उस के मन में मां के प्रति नफरत के बीज अंकुरित हो चुके थे.

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पूनम ने इंटरमीडिएट की परीक्षा अच्छे नंबरों से पास करने के लिए अपना पूरा ध्यान पढ़ाई पर लगा दिया था, पर समय कब करवट ले ले, पता ही नहीं चलता. पूनम पिछले कुछ समय से गांव में पड़ोस में रहने वाले प्रवेश कुमार को पसंद करने लगी थी. वह बीए तृतीय वर्ष में पढ़ रहा था. पढ़ाई के साथसाथ वह एक कोचिंग सेंटर में नौकरी भी करता था.

पूनम की मेहनत रंग लाई. उस ने इंटरमीडिएट की परीक्षा अच्छे नंबरों से पास कर ली और उसे भी उसी कोचिंग सेंटर में काम मिल गया, जहां प्रवेश पढ़ाता था. पूनम भी एक तरह से अब एक टीचर बन गई थी.

पूनम और प्रवेश धीरेधीरे काफी करीब आने लगे थे. घर के माहौल से तंग आ कर पूनम जब प्रवेश कुमार के साथ थोड़ा समय बिता लेती तो खुद को सामान्य महसूस करती. पर प्रवेश को लगता कि पूनम किसी बात को ले कर परेशान रहती है. अभी तक पूनम और उस के बीच इतनी नजदीकियां नहीं थीं कि वह उस के मन की बात समझ पाता.

दरअसल पिछले कुछ समय से पूनम ने अपनी मां के व्यवहार में काफी बदलाव देखा. एक दिन जब वह कोचिंग सेंटर से घर लौटी तो देखा प्रताप उर्फ डिंपल और उस का भाई प्रभात उस के घर में बैठे हुए थे और उस की मां उन के साथ हंसहंस कर बातें कर रही थी. उन दोनों को देख कर पूनम सीधे अपने कमरे में चली गई तो राधा ने उस के कमरे में आ कर कहा, ‘‘क्या पढ़ाईलिखाई ने इतनी भी तमीज नहीं सिखाई कि मामा लोगों को नमस्ते भी कर लो.’’

‘‘कौन मामा?’’ पूनम ने गुस्से में कहा, ‘‘वो मेरे मामा कैसे हो सकते हैं, मैं सब कुछ जानती हूं मम्मी, तुम इन्हीं से मिलने के लिए जेवर जाती हो.’’

‘‘हां तो क्या मैं अपने मुंहबोले भाइयों से मिल भी नहीं सकती.’’

‘‘मुंहबोले भाई! मम्मी क्यों हमें धोखा दे रही हो. मैं इन्हें अच्छी तरह जानती हूं और फिर तुम्हारे क्या भाई नहीं हैं जो तुम ने इन को भाई बना लिया. देखो मम्मी, तुम जेवर जाती हो, खूब जाओ, पर इन का यहां आनाजाना मुझे पसंद नहीं है.’’ पूनम ने मन में दबी बात कह डाली. बेटी की बात सुन कर राधा हैरान रह गई और बाहर आ कर उस ने प्रताप से कहा, ‘‘पूनम काफी थकी हुई है, इसलिए मैं तुम लोगों के लिए चाय बना कर लाती हूं.’’

प्रताप उर्फ डिंपल और प्रभात सालियान निवासी खुशीराम के बेटे थे. खुशीराम बीडीओ था. प्रताप और प्रभात दोनों ही वैद्य थे, साथ ही दोनों भाई तंत्रमंत्र क्रियाओं से बीमार लोगों का इलाज करने का भी दावा करते थे. प्रभात ने तो मथुरा के गांव बाजना में किराए का मकान ले कर अपना धंधा जमा लिया था जबकि प्रताप ने सालपुर में अपनी दुकान खोल ली थी.

उस दिन के बाद दोनों भाइयों का राधा के पास आनाजाना होने लगा. वे उस की आर्थिक मदद भी करते रहते थे. राधा के उन दोनों भाइयों के साथ अवैध बन गए थे. पूनम को ये दोनों भाई फूटी आंख नहीं भाते थे. उस ने मां से कह भी दिया था कि इन का घर में आनाजाना ठीक नहीं है. पर मां ने उसे डांटते हुए कह दिया कि वह उस के जीवन में दखल न दे और केवल अपने काम से काम रखे.

मां की हरकतें पूनम के दिलोदिमाग में हलचल मचाए हुए थीं. ऐसे में वह क्या करे, यह उस की समझ में नहीं आ रहा था. पर हद तो तब हो गई जब एक दिन प्रताप ने पूनम के पास आ कर अचानक उस के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा, ‘‘हम में क्या बुराई है, जो तुम हम से दूर भागती हो?’’

प्रताप की इस हरकत पर पूनम को गुस्सा आ गया. वह अपनी मां से चिल्ला कर बोली, ‘‘मम्मी, अपने इस भाई को समझा लो वरना बहुत बुरा होगा.’’

प्रताप ने हैरानी से पूनम को देखा और बोला, ‘‘बड़ी चरित्रवान बनती है. तू क्या समझती है कि हमें तेरे बारे में कुछ पता नहीं है.’’

‘‘क्या पता है तुम्हें? और पता भी होगा तो फिर क्या कर लोगे तुम? देखो, जो तुम मेरी मां के भाई बनने का ढोंग कर रहे हो, वो सब मैं अच्छी तरह जानती हूं. तुम दोनों भाई मेरे परिवार से दूर ही रहो तो अच्छा है नहीं तो मैं अपने पापा को सब बता दूंगी.’’ पूनम गुस्से में बोली.

पूनम के तेवर देख प्रताप स्तब्ध रह गया लेकिन पूनम की बात पर उस की मां को गुस्सा आ गया. राधा ने पूनम को 2-4 तमाचे जड़ दिए. वह बोली, ‘‘तूने 2-4 किताबें क्या पढ़ लीं, अपनी औकात ही भूल गई.’’ पूनम भी कहां चुप रहने वाली थी. उस ने मां को फिर चेताया, ‘‘मम्मी, इन दोनों भाइयों से तुम दूर ही रहो तो अच्छा होगा वरना एक दिन तुम्हारे चालचलन ही हमें ले डूबेंगे.’’

उस दिन प्रताप और प्रभात तो वहां से चले गए पर जल्द ही उन्हें पता चल गया कि पूनम गांव के ही प्रवेश कुमार नाम के एक युवक से प्यार करती है. वे समझ गए कि प्रवेश ही पूनम की ताकत है. दोनों भाइयों को लगा कि राधा के साथ उन का जो खेल चल रहा है, उस में पूनम और प्रवेश कुमार सब से बड़ी बाधा हैं और वे दोनों उन के लिए खतरा हो सकते हैं. इसलिए जरूरी है कि उन दोनों को बदनामी का डर दिखा कर दूर कर दिया जाए.

एक दिन प्रवेश कुमार ने पूनम से कहा, ‘‘कल मुझे प्रताप ने रास्ते में रोक कर कहा था कि तू हमारी भांजी पूनम से मिलनाजुलना छोड़ दे वरना जिंदा नहीं छोड़ेंगे.’’

उस की बात पर मुझे गुस्सा आ गया था. तब मैं ने उस का गिरेबान पकड़ कर कह दिया था कि तुम दोनों भाई किस नीयत से राधा आंटी के पास जाते हो, इस की जानकारी मुझे है, पर पूनम को तुम दोनों ने कोई नुकसान पहुंचाने की कोशिश की तो मैं तुम दोनों को छोड़ूंगा नहीं.

‘‘मेरे तेवर देख कर प्रताप को शायद महसूस हो गया कि अगर राधा के साथ बने अवैध संबंधों की पोल खुल गई तो उन की सभी जगह बदनामी होगी. फिर उन की तंत्रमंत्र और वैद्य की दुकान भी बंद हो जाएगी. इस के बाद प्रताप मुझे देख लेने की धमकी दे कर चला गया.’’

प्रवेश ने अपनी प्रेमिका पूनम से कहा कि वह इन दोनों भाइयों से सतर्क रहे और अगर ये दोनों तुम्हें तंग करें तो तुम अपनी मां से शिकायत जरूर करना. इन से डरने की जरूरत नहीं है. पूनम जानती थी कि मां से शिकायत कर के कोई फायदा नहीं, क्योंकि वह जब मां के सामने ही उस के साथ छेड़छाड़ कर रहे थे तो उस समय भी मां ने उन से कुछ नहीं कहा था. इसलिए पूनम मां से चिढ़ती थी. पूनम ने तय कर लिया कि ऐसे माहौल में उसे खुद ही सतर्क रहना होगा.

मांबेटी दोनों के बीच काफी रस्साकशी चल रही थी. एक दिन राधा ने पूनम से कहा, ‘‘प्रवेश के साथ तेरी दोस्ती हमें पसंद नहीं है. वह अच्छा लड़का नहीं है.’’ गुस्से में भरी पूनम ने तय कर लिया कि इस बार वह अपने पापा को सब कुछ बता देगी पर काफी सोचविचार के बाद उसे लगा कि यदि मां ने उन्हें प्रवेश के साथ उस के संबंधों की बात बता दी तो पापा क्या करेंगे, इस की कल्पना करना भी मुश्किल था.

विजयपाल अपने घर से काफी दूर रह कर काम कर रहा था. उसे नहीं मालूम था कि उस के घर में क्या चल रहा है. मां और बहन की लड़ाई में छोटे बच्चे भी काफी सहमे रहते थे. इसी बीच एक रात प्रताप और प्रभात राधा के घर में ही रुक गए. तब पूनम ने राधा से कहा, ‘‘मां, ये तुम्हारे भाई लोग यहां रात में क्या कर रहे हैं?’’

राधा ने कहा, ‘‘तुझे शायद यह पता नहीं है कि जिन मामा लोगों से तू नफरत करती है न, वही हमारी जरूरतें पूरी कर रहे हैं. तेरे बाप जितने पैसे भेजते हैं, उस से घर का खर्च नहीं चल पाता.’’

‘‘मम्मी, तुम बहुत बुरी हो.’’ कह कर पूनम अपने कमरे में चली गई पर उस दिन प्रताप का इरादा कुछ दूसरा ही था. खाना खाने के बाद वह पूनम का हाथ पकड़ कर उस के साथ छेड़छाड़ करने लगा. गुस्से में भरी पूनम ने मां से कहा, ‘‘यही हैं तुम्हारे भाई. जैसा ये तुम्हारे साथ करते हैं, वही मेरे साथ करने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन मैं ऐसा नहीं होने दूंगी.’’

कह कर पूनम ने एक जोरदार थप्पड़ प्रताप के गाल पर जड़ दिया. इस के बाद उस ने अपने कमरे में जा कर अंदर से कुंडी लगा ली. वह खूब रोई. फिर उस ने अपने प्रेमी प्रवेश को फोन कर के सारी बात बता दी.

पूनम की इज्जत खतरे में है, यह सोच कर प्रवेश गुस्से में भर उठा. वह सोचने लगा कि ऐसे में उसे क्या करना चाहिए. अगले दिन प्रताप प्रवेश को रास्ते में मिल गया. उस ने प्रवेश से कहा, ‘‘तू हमारी भांजी से दूर नहीं रहा तो तेरे लिए बहुत बुरा होगा. तेरे 10 अप्रैल को होने वाले इम्तिहान से पहले ही हम तुझे ऐसी सजा देंगे कि तू याद रखेगा. याद रखना कि हम तुझे इम्तिहान में नहीं बैठने देंगे.’’

प्रवेश की समझ में यह आने लगा था कि यदि वह खामोशी से बैठा रहा तो जरूर दोनों मौका पाते ही उसे कोई बड़ा नुकसान पहुंचा सकते हैं. प्रवेश ने उसी समय तय कर लिया कि उस की प्रेमिका पर बुरी नजर रखने वालों को वह जिंदा नहीं छोड़ेगा.

इस के बाद उस ने एक देशी कट्टा और कारतूसों का इंतजाम किया. उस के सिर पर खून सवार था. वह पूनम से बहुत प्यार करता था. दोनों एक ही जाति के थे. अत: दोनों अपनी दुनिया बसाना चाहते थे. ऐसे में कोई उस की प्रेमिका के साथ छेड़छाड़ करे, यह बरदाश्त करना उस के लिए बहुत मुश्किल था.

पूनम मां और उस के मुंहबोले भाइयों से परेशान थी. चूंकि दोनों भाई उस की मां के प्रेमी थे, इसलिए वह उन के खिलाफ कुछ भी सुनना नहीं चाहती थी. प्रवेश ने जो योजना बना रखी थी, उस के बारे में किसी को कुछ पता नहीं था. उस के सिर पर तो खून सवार था.

27-28 मार्च, 2018 की रात को वह बिना किसी को कुछ बताए अपनी मोटरसाइकिल से मथुरा जिले के बाजना में पहुंच गया, जहां प्रभात उर्फ मोनू अपना क्लिनिक चलाता था और गांधी चबूतरा स्थित मुरारीलाल के मकान में किराए पर रहता था. सुबह 4 बजे के करीब प्रवेश ने प्रभात के दरवाजे पर दस्तक दी तो प्रभात ने दरवाजा खोला. सामने प्रवेश को देखते ही उसे पसीना आ गया. वह डर के मारे अंदर की ओर भागा. प्रवेश भी उस के पीछे भागा. भागते हुए ही उस ने प्रभात पर फायर कर दिया.

गोली की आवाज सुन कर सुबहसुबह टहलने के लिए जाने वाले लोग इकट्ठा हो गए. उन्हें देख कर प्रवेश वहां से भाग निकला. उसी समय किसी ने पुलिस को सूचना दे दी तो पुलिस भी वहां पहुंच गई. गोली लगने से घायल हो चुके प्रभात को वह एस.एन. मैडिकल कालेज ले गई. पुलिस ने अस्पताल में उसे भरती कर आवश्यक काररवाई शुरू कर दी.

लेकिन प्रवेश को अभी 2 खून और करने थे. वह मोटरसाइकिल से कुछ ही देर में राधा के घर पहुंच गया, जहां प्रताप उर्फ डिंपल और राधा आंगन में ही सो रहे थे. उस ने पहले गहरी नींद में सोए प्रताप को गोली मारी. गोली की आवाज से राधा की नींद खुल गई. प्रवेश को देख कर वह जान बचाने के लिए बाहर की ओर भागी पर प्रवेश ने उस के बाल पकड़ कर उस के सिर से तमंचा सटा कर उसे भी गोली मार दी.

फायरिंग की आवाज से पूरा मोहल्ला जाग गया और प्रवेश अपनी मोटरसाइकिल तेजी से चला कर कोतवाली टप्पल पहुंच गया,जहां मौजूद मुंशी से उस ने कहा कि कोतवाल साहब को बुलाओ, मुझे उन से बात करनी है. प्रवेश के हाथ में तमंचा देख कर मुंशी समझ गया कि यह कोई अपराध कर के आया है.

मुंशी ने उस का तमंचा एक तरफ रखवा कर उसे सामने की बेंच पर बैठा दिया. फिर मुंशी ने थानाप्रभारी प्रदीप कुमार सिंह को फोन कर के सारी बात बता दी. कुछ ही देर में थानाप्रभारी वहां आ गए. प्रवेश कुमार ने उन से कहा, ‘‘साहब, मैं 2 खून कर के आ रहा हूं. तीसरा मरा है या बच गया, मुझे पता नहीं.’’

उस समय प्रवेश के चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी. थानाप्रभारी ने उस से पूछताछ की तो उस ने उन्हें सारी कहानी बता दी. इस के बाद थानाप्रभारी ने उसे हिरासत में ले लिया और वाकए से अपने उच्चाधिकारियों को भी सूचित कर दिया. इस के बाद थानाप्रभारी पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए, जहां हायतौबा मची हुई थी. प्रताप उर्फ डिंपल की खून से लथपथ लाश चारपाई पर पड़ी हुई थी और राधा का शव आंगन में पड़ा हुआ था.

घटना की जानकारी मिलते ही आईजी डा. संजीव गुप्ता, एसएसपी राजेश पांडे, एसपी (देहात) यशवीर सिंह और खैर के विधायक अनूप सिंह भी मौके पर पहुंच गए.पुलिस ने जरूरी काररवाई कर के लाशें पोस्टमार्टम के लिए भेज दीं. पुलिस ने इस बारे में गांव वालों से भी पूछताछ की लेकिन गांव वाले मुंह खोलने को तैयार नहीं थे. पर मुखबिरों के जरिए पुलिस के सामने सारी कहानी आ गई.

सूचना मिलने पर घर पहुंचे विजयपाल से जब पुलिस ने पूछताछ की तो उस ने बताया कि उसे कुछ पता नहीं कि उस के घर में क्या खिचड़ी पक रही थी. घटना के 3 दिन बाद मृतक प्रताप उर्फ डिंपल के भाई राहुल ने इस हत्याकांड में राधा की बेटी पूनम की साजिश होने की बात बताई. उस ने यह भी कहा कि उस के भाइयों के राधा के साथ नाजायज संबंध होने वाली बात सरासर गलत है.  उस के भाइयों ने तो प्रवेश को पूनम से दूर रहने की चेतावनी दी थी.

एसएसपी ने बताया कि यह बात जांच के बाद ही पता चल सकेगी कि इस दोहरे हत्याकांड में पूनम की कोई भूमिका है भी या नहीं. पुलिस जांच में यह बात सामने आ चुकी थी कि प्रवेश ने मथुरा जा कर जिस प्रभात उर्फ मोनू को गोली मार कर घायल किया था, वह आपराधिक छवि वाला है. अलीगढ़ की क्राइम ब्रांच की टीम नौहझील (बाजना) की पुलिस के साथ मिल कर जांच कर रही थी.

   – कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित