जुल्मी से प्यार : सनकी प्रेमी से छुटकारा – भाग 3

किसी दिन दीपेंद्र और अंकिता को कहीं एकांत में प्रेमी-प्रेमिका की तरह सट कर बैठे अंकिता के मंगेतर विशाल ने देख लिया. उस समय तो उस ने कुछ नहीं कहा, लेकिन शाम को वह अंकिता के घर पहुंच गया. वहां भी उस ने अंकिता से कुछ कहने के बजाय अपने होने वाले ससुर राजा से कहा. ‘‘बाबूजी, आप ने अंकिता की शादी तय तो मेरे साथ की है, लेकिन यह गुलछर्रे किसी और के साथ उड़ा रही है. आप इसे रोकिए, वरना मैं यह रिश्ता तोड़ दूंगा.’’

‘‘ऐसा मत करना बेटा, मैं अंकिता को समझाऊंगा.’’ राजा ने विशाल को समझाने की कोशिश की.

विशाल के जाने के बाद राजा ने अंकिता से पूछा, ‘‘बेटी, विशाल जो कह रहा था, क्या वह सच था? कहीं वह तुम्हें बदनाम कर के यह रिश्ता तो नहीं तोड़ना चाहता? बेटी मुझे तुम पर पूरा भरोसा है, इस के बावजूद सच्चाई जानना चाहता हूं.’’

‘‘पापा, विशाल जो कह रहा था, वह सच है. उस ने मुझे दीपेंद्र के साथ देख लिया था. दीपेंद्र और मैं एकदूसरे से प्यार करते हैं, इसलिए अकसर मिलते रहते हैं.’’ अंकिता ने सच्चाई बता दी.

अंकिता ने जो बताया, उसे सुन कर राजा के पैरों तले से जमीन खिसक गई. उन्होंने कहा, ‘‘बेटी, तुम्हारी शादी विशाल से तय हो चुकी है. इसलिए तुम्हारा दीपेंद्र से एकांत में मिलना ठीक नहीं है. ठीक होते ही मैं तुम्हारी शादी उस के साथ कर दूंगा, इसलिए अब तुम दीपेंद्र से मिलनाजुलना बंद कर दो.’’

अंकिता की मां मीना ने भी प्यार से समझाया, ‘‘बेटी, तू दीपेंद्र से मिलनाजुलना बंद कर दे, इसी में हम सब की भलाई है. दीपेंद्र और हमारी जाति अलगअलग है, इसलिए उस के घर वाले कभी तेरी शादी उस के साथ नहीं करेंगे. तेरी सगाई हो चुकी है. 2 नावों पर पैर रखना ठीक नहीं है.’’

मांबाप की नसीहत अंकिता को उचित तो लगी, लेकिन वह उस पर अमल नहीं कर सकी. क्योंकि दीपेंद्र से मिलने से वह खुद को एकदम से रोक नहीं पा रही थी. लेकिन पहले से कुछ कम जरूर कर दिया था.

दीपेंद्र उसे मिलने के लिए पार्क या रेस्टोरेंट में बुलाता तो वह कोई न कोई बहाना बना कर मना कर देती. जबकि दीपेंद्र मानता ही नहीं. वह नाराज हो कर उसे जलील करने लगता. कभीकभी तो वह रास्ते में ही उस का हाथ पकड़ लेता और साथ चलने की जिद करने लगता. यही नहीं, मना करने पर वह गालीगलौज और मारपीट पर उतारू हो जाता.

दीपेंद्र की इन हरकतों से अंकिता परेशान रहने लगी. वह उस से डरने लगी. होली के त्योहार पर दीपेंद्र ने अंकिता का हाथ पकड़ा और जबरदस्ती साथ ले जाने लगा. अंकिता ने मना किया तो उस ने गालीगलौज तो की ही, उस पर हाथ भी उठा दिया. दीपेंद्र की इस हरकत से परेशान हो कर अंकिता ने अपने मंगेतर विशाल से उस की शिकायत कर दी. मामला पुलिस तक पहुंचा. तब पुलिस ने दोनों पक्षों में समझौता करा दिया.

पुलिस ने कोई काररवाई नहीं की तो दीपेंद्र और भी आक्रामक हो गया. वह अंकिता को मोबाइल फोन पर बात करने के लिए दबाव डालता, गंदे और अश्लील मैसेज भेजता. बात न करने या जवाब न देने पर गालीगलौज करता, धमकियां देता. डर के मारे वह कभी उस से प्यार की 2-4 बातें कर लेती तो कभी कोई बहाना बना देती. अब वह उस के साथ कहीं आनेजाने से भी बचने लगी थी. अगर कभी जाती तो मजबूरी में जाती.

इस तरह अंकिता प्रेमत्रिकोण में उलझ कर रह गई थी. दीपेंद्र सामने होता तो उसे उस की बांहों में झूलना पड़ता और जब मंगेतर विशाल सामने होता तो उसे उस की वफादार बनना पड़ता.

दीपेंद्र के घर वालों को भी अंकिता और उस के प्रेमसंबंधों के बारे में पता था. सब जानते थे कि वह अपनी कमाई उसी पर लुटा रहा है. लेकिन उन्होंने साफसाफ कह दिया था कि वह किसी भी हालत में यह शादी नहीं होने देेंगे. दीपेंद्र को समझाया भी गया था, लेकिन वह अंकिता से संबंध तोड़ने को तैयार नहीं था.

17 जुलाई को दीपेंद्र ने अंकिता से साथ चलने को कहा. उस ने मना कर दिया तो दीपेंद्र ने गालीगलौज करते हुए उसे खूब जलील किया. गालीगलौज में उस ने ऐसे ऐसे गंदे शब्दों का उपयोग किया कि अंकिता का कलेजा छलनी हो गया. उस ने उसी समय तय कर लिया कि अब किसी भी सूरत में इस आदमी से छुटकारा पाना है.

उस ने अपने मंगेतर विशाल से दीपेंद्र की शिकायत कर के उस से छुटकारा दिलाने की विनती की. इस के बाद विशाल ने अंकिता की मदद से दीपेंद्र को ठिकाने लगाने की योजना बना डाली.

दीपेंद्र को ठिकाने लगाना विशाल के अकेले के वश का नहीं था, इसलिए उस ने इस योजना में अपने छोटे भाई विकास से बात की. बात घर की इज्जत की थी, इसलिए वह भाई की मदद के लिए राजी हो गया.

योजना के अनुसार अंकिता ने 20 जुलाई की दोपहर को दीपेंद्र को फोन कर के घंटे वाले मंदिर पर बुलाया. दीपेंद्र तो ऐसा मौका ढूंढता ही रहता था. वह तुरंत घंटे वाले मंदिर पर पहुंच गया. अंकिता वहां उस का इंतजार कर रही थी. दोनों बातें करने लगे. योजना के अनुसार थोड़ी देर बाद विशाल भी आ गया.

उस के आते ही अंकिता चली गई तो विशाल दीपेंद्र को बातचीत करने के बहाने घंटे वाले मंदिर के पीछे नगर निगम वर्कशौप पार्क में ले आया. पार्क में बड़ीबड़ी झाडि़यां थीं. दोपहर होने की वजह से वहां सन्नाटा पसरा था.

अंकिता को ले कर दीपेंद्र और विशाल में बातचीत शुरू हुई. जल्दी ही यह बातचीत गालीगलौज और मारपीट में बदल गई. विकास पहले से ही आ कर वहां छिपा था. दीपेंद्र और भाई के बीच मारपीट होते देख उस ने वहां पड़ी ईंट उठाई और दीपेंद्र के सिर पर दे मारी. दीपेंद्र की आंखों के सामने अंधेरा छा गया और वह लड़खड़ा कर जमीन पर गिर गया.

उस के गिरते ही विकास ने दूसरा वार कर दिया. ईंट की चोटों से दीपेंद्र बिना चीखे ही बेहोश हो गया. उस के बेहोश होते ही विशाल ने चाकू निकाला और बेरहमी से उस की गरदन रेत दी. इतने से भी उस का मन नहीं भरा तो उस ने उस का एक कान काट दिया और एक आंख फोड़ दी.

इस तरह कू्ररता से हत्या करने के बाद दोनों भाइयों ने शव को घसीट कर पार्क में सूखे पड़े कुएं में फेंक दिया. घसीटते समय ही दीपेंद्र का जूता निकल गया था, जिस ने कुएं में लाश पड़ी होने की चुगली कर दी थी.

लाश कुएं में फेंक कर विशाल ने अंकिता को फोन कर के दीपेंद्र की हत्या की सूचना दे दी. इस के बाद दोनों भाई वहां से फरार हो गए.

पुलिस ने उसी दिन घटनास्थल से वह ईंट बरामद कर ली थी, जिस से दीपेंद्र के सिर पर चोट पहुंचाई गई थी. इस के बाद विशाल की निशानदेही पर चाकू और उस के कपड़े बरामद कर लिए गए थे. सारे सुबूत जुटा कर पुलिस ने 24 जुलाई को अंकिता और विशाल को अदालत में पेश किया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया.

कथा लिखे जाने तक विकास नहीं पकड़ा जा सका था. पुलिस उस की तलाश कर रही थी.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

सूटकेस में मिली लाश का रहस्य – भाग 2

आधी रात को आल्हापुर गांव के एक मकान को सीआईए प्रभारी मोहम्मद इलियास के नेतृत्व में गई टीम ने घेर लिया. मोहम्मद इलियास के साथ उन का खास मुखबिर था. उसी ने वह घर चिह्निïत किया था. एक एसआई ने आगे बढ़ कर मकान का दरवाजा खटखटाया.

अंदर से थोड़ी देर बाद किसी महिला का स्वर उभरा, “कौन है बाहर?”

“दरवाजा खोलो, गांव के एक घर में आग लग गई है.” एसआई ने घबराए हुए स्वर में कहा.

“यह बहाना काम कर गया. मकान का दरवाजा तुरंत खुला और एक महिला बाहर निकल कर बोली, “किस के मकान में आग लगी है.”

“अभी बता देंगे.” एक हैडकांस्टेबल ने उस की कनपटी पर रिवौल्वर सटाते हुए गुर्रा कर कहा. बाकी टीम धड़धड़ाती हुई अंदर घुस गई. अंदर 2 पुरुष थे. उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया.

मकान की तलाशी ली गई. वहां से काफी मात्रा में नकदी, 3 मोबाइल फोन, एक चिटफंड सोसायटी के फार्म, बैंकों की पासबुकें और लोन एप्लाई करने वाले लोगों के नाम की लिस्ट बरामद की गई. सभी सामान जब्त कर के तीनों पुरुषमहिला को सीआईए के औफिस में लाया गया.

पुलिस की गिरफ्त में आए ठग

पूछताछ में उन के नाम ललित कुमार, अजीत कुमार और भावना मालूम हुए. रात भर उन्हें लौकअप में रखा गया. तीनों को दूसरे दिन न्यायालय में पेश कर के रिमांड पर ले लिया गया.

रिमांड में जब उन से सख्ती से पूछताछ शुरू हुई तो एक ठग का नाम सामने आया हेमंत वर्मा. हेमंत वर्मा पकड़ में आए ललित कुमार का साला था. वह पलवल में कृष्णा कालोनी में रहता था. सीआईए की टीम ने कृष्णा कालोनी में हेमंत वर्मा के घर पर दबिश दी.

हेमंत वर्मा उन्हें घर में ही मिल गया. उसे गिरफ्तार कर के सीआईए के औफिस में लाया गया, वहां पहले से मौजूद अपने साथियों को देख कर हेमंत वर्मा को समझते देर नहीं लगी कि उन का ठगी के धंधे का भंडाफोड़ हो गया है. वह गहरी सांस ले कर रह गया.

उसे भी कोर्ट में पेश कर के रिमांड पर ले लिया गया. पूछताछ में सभी ने यह कुबूल लिया कि वह मध्यम वर्ग के लोगों को लोन दिलाने का झांसा दे कर फंसाते थे. बैंक से लोन पास करवाने के नाम पर उन से रुपया ऐंठा जाता. फार्म भरवाए जाते. लोन पास नहीं होता तो वह कागजों में कमी होने की बात कह कर उन्हें टरका देते. इस तरह वह सैकड़ों लोगों को फांस कर उन का पैसा डकार गए थे.

सीआईए टीम ने उन से उन के दूसरे किसी अपराध में फंसे होने की बात पूछना शुरू की तो हेमंत वर्मा ने एक ऐसा खुलासा किया, जिस ने टीम के लोगों को बुरी तरह चौंका दिया.

ठग हेमंत ने पत्नी की हत्या का जुर्म भी कुबूला

हेमंत वर्मा ने बताया कि उस ने 2021 में अपनी पत्नी रितु की गला घोंट कर हत्या की थी. लाश को उस ने अपने जीजा ललित के सहयोग से एक सूटकेस में भर कर मथुरा के छाता शहर की छाता नहर में फेंक दिया था.

उस ने पत्नी की हत्या क्यों की? इस विषय में पूछताछ की गई तो उस ने रितु के साथ अपनी प्रेम कहानी और उसे पत्नी बनाने की जो कथा बयान की, वह इस प्रकार है—

हरियाणा के शहर पलवल की कृष्णा कालोनी में रहने वाला हेमंत वर्मा आकर्षक व्यक्तित्व का स्वामी था. उसे आधुनिक फैशन के कपड़े पहनने और बनसंवर कर रहने का शौक था. वह दिलफेंक युवक था. दिल को हथेली पर ले कर घूमता था. उस की युवा जिंदगी में एक नहीं अनेक लड़कियां आईं. हेमंत उन से दिल बहलाता. उन के साथ मौजमस्ती करता.

गले में हड्डी लटकाने की उस की आदत नहीं थी. उस की सोच थी, हड्डी चूसो और उसे फंक दो. हेमंत यही करता था. जो लडक़ी उस के संपर्क में आती, उस से किसी न किसी तरह जिस्मानी संबंध बनाता. जब उस से दिल भर जाता तो उस से किनारा कर के दूसरी लडक़ी की तलाश में निकल जाता.

पिता संपन्न व्यक्ति थे. हेमंत खुद कमाताधमाता नहीं था, पिता की दौलत पर मौजमस्ती करता घूम रहा था. उस की ऐशभरी रसिक जिंदगी में तब बड़ा मोड़ आया, जब वह अपने एक दोस्त के साथ दिल्ली घूमने गया. उस का दोस्त उसे दिल्ली घुमाने के बाद शाम ढलने पर जीबी रोड पर ले गया.

जीबी रोड पर कोठा संचालिका से उन्होंने 2 युवतियों का पूरी रात का सौदा किया. हेमंत वर्मा का दोस्त अपनी पार्टनर को ले कर एक केबिन में चला गया तो हेमंत भी अपनी पार्टनर का हाथ पकड़ कर एक खाली केबिन में आ गया.

जीबी रोड की वेश्या रितु से हुआ प्यार

उस ने अपने लिए जो युवती पसंद की थी, उस का नाम रितु था. गोरे रंग, तीखे नयननक्श वाली रितु का अंगअंग सांचे में ढला था. वह कोठे पर कैसे आई, इस का उसे खुद पता नहीं. उस ने बताया कि उसे चाहने वाला एक आशिक, जिसे वह सच्चा प्यार करती थी, बहका कर दिल्ली लाया था.

एक होटल में उस की अस्मत लूट लेने के बाद उस ने नशीला पदार्थ खाने में मिला कर उसे बेहोश कर दिया था. उसी बेहोशी में वह उसे इस कोठे पर बेच कर चला गया था. जीबी रोड के कोठे पर पहुंच कर रितु ऐसे पिंजरे में आ फंसी थी, जिस में वह फडफ़ड़ा सकती थी, चीख सकती थी, लेकिन उस पिंजरे से बाहर नहीं निकल सकती थी.

शुरू में उस ने अपने जिस्म पर हाथ नहीं रखने दिया, लेकिन यह कोठा था, यहां अडिय़ल से अडिय़ल युवतियों को रूह कंपा देने वाली यातना दे कर जिस्म बेचने को मजबूर कर दिया जाता है. रितु पर भी यातना के पहाड़ तोड़े गए, घबरा कर वह जिस्म बेचने को मजबूर हो गई.

हेमंत पूरी रात रितु के जिस्म से लिपटा रहा. रितु उसे इतना पसंद आई कि वह कई रात दिल्ली में रुक कर रितु के साथ रात गुजारने के लिए कोठे पर जाता रहा. रितु भी उस की मर्दानगी की दीवानी हो चुकी थी. हेमंत ने उसे अपने साथ जिंदगी गुजारने का औफर दिया तो वह तैयार हो गई.

अब तक हेमंत अपने जीजा ललित के साथ मिल कर ठगी का धंधा करने लगा था. उस को इस धंधे में मोटा हिस्सा मिल रहा था. रितु की मालकिन से उस ने रितु को अपने लिए मोटी कीमत चुका कर हमेशा के लिए खरीद लिया.

हेमंत ने रितु से कर ली शादी

यह जनवरी, 2021 की बात है. रितु को कोठे से लाने के बाद उस ने उस से लव मैरिज कर ली और उसे दुलहन बना कर अपने घर कृष्णा कालोनी में ले आया. रितु अब हेमंत के साथ उस की पत्नी बन कर रहने लगी. वह एक सुघड़ गृहिणी की तरह हेमंत का घर संभालने लगी.

और तो सब सामान्य था, लेकिन रितु को शराब पीने की बुरी लत थी. रोज रात शुरू होने पर वह शराब के 2-4 पैग गले में उड़ेलती, फिर खाना खा कर सो जाती. हेमंत को उस ने गृह प्रवेश वाले दिन ही अपनी इस आदत के विषय में बता दिया था.

रितु की चाहत में दीवाना बने हेमंत को रितु की इस आदत पर ऐतराज नहीं था, वह शाम को घर लौटता था तो स्वयं एक अंगरेजी शराब का अद्धा खरीद कर ले आता था. रितु के साथ वह बैठ कर शराब पीता. रितु साकी बन कर उस के लिए और अपने लिए पैग बनाती थी. पीने के बाद दोनों खाना खाते फिर एकदूसरे के आगोश में लिपट कर सो जाते.

जी.बी. रोड कोठे में खून – भाग 2

कागजी काररवाई पूरी कर के खान ने राधा के शव को पोस्टमार्टम के लिए ले जाने की इजाजत दे दी. खान वहां नहीं रुके. वह थाने में लौट आए. उन्होंने अपनी रिपोर्ट एसएचओ सत्येंद्र दलाल को दे दी. राधा की मौत की खबर डीसीपी संजय कुमार सैन को दे दी गई. उन्होंने राधा की हत्या को बड़ी गंभीरता से लिया.

पुलिस टीमों का किया गठन

अज्ञात हत्यारों की तलाश करने के लिए सत्येंद्र दलाल की अगुवाई में एसआई गिरिराज, नूर हसन खान, एएसआई महेश सिंह, आदेश धामा, हैडकांस्टेबल धर्मेंद्र की एक टीम गठित की. साथ ही स्पैशल स्टाफ के अलावा क्राइम ब्रांच की औपरेशन विंग को भी उन अज्ञात हत्यारों की तलाश में लगा दिया.

तीनों टीमों ने संयुक्त काररवाई करने के लिए सब से पहले अपनी कार्यप्रणाली पर गहनता से विचार किया. सब से पहले अस्पताल में दाखिल इमरान चौधरी को बयान देने की स्थिति में आने पर उस का बयान लिया गया. इमरान चौधरी से पूछताछ भी की गई.

उस से मालूम हुआ कि तीनों युवकों की उम्र ज्यादा नहीं थी. उन में एक की भाषा में पंजाबी पुट था. शायद वह पंजाब से था. शेष दोनों यूपी की भाषा बोल रहे थे. एक का नाम काका था, पिस्टल से उसी ने राधा और उस पर (इमरान) गोलियां चलाई थीं.

गोली चलाने की वजह इमरान ने रुपयों के लेनदेन में गड़बड़ी करने पर तूतूमैंमैं होना बताया. उन की तलाशी लेने के लिए राधा ने उस से कहा तो एक लडक़े ने अपनी पैंट में सामने खोंस कर रखी पिस्टल निकाल कर काका को रखने को दी थी.

राधा ने यह देख कर पुलिस बुलाने के लिए शोर मचाया. कोठे के 2-3 लोग भी शोर सुन कर वहां आ गए. तब पिस्टल देने वाला चिल्ला कर बोला, “काके, गोली चला.” उस के यह कहते ही काका ने फायरिंग कर दी, जिस से मैं और राधा घायल हो गए. मैंने उन तीनों को सीढिय़ों से भागते देखा, मैं घायल हो गया था, गिर पड़ा. फिर पुलिस की वैन मुझे और राधा को यहां हौस्पीटल में ले आई.

इमरान ने उन लडक़ों का हुलिया भी बताया. उसी आधार पर पुलिस टीमों ने कोठा नंबर 52 के नीचे सडक़ पर सीसीटीवी ढूंढ कर उन्हें चैक किया. 2 से 3 बजे दोपहर तक की फुटेज देखी गई. उस में बहुत से चेहरे थे. शंकर और भूरे ने उन लडक़ों को पास से देखा था. उन्हें वह फुटेज दिखाई गई तो उन्होंने 3 लडक़ों को पहचान कर बता दिया कि ये वही 3 लडक़े हैं.

डंप डाटा से मिला सुराग

सीसीटीवी में उन के चेहरे स्पष्ट नहीं थे. उन को अजमेरी गेट की तरफ भाग कर जाने की बात बताई गई थी. अजमेरी गेट पर भी सीसीटीवी लगे थे. वहां की फुटेज देखी गई तो वे तीनों यहां भी अस्पष्ट नजर आए.

स्पैशल टीम और औपरेशन विंग ने यहां आधुनिक तकनीक का सहारा लिया. कोठा नंबर 52 और अजमेरी गेट के एरिया का मोबाइल डंप डाटा उठाया गया. कोठा नंबर 52 में घटी घटना के बाद वहां करीब 20 हजार फोन ऐक्टिव थे. अजमेरी गेट पर 15 हजार फोन की ऐक्टिव पोजिशन मिली.

DCP sanjay sain

इन की बड़ी बारीकी से जांच की गई तो कुछ नंबर दोनों जगह पाए गए. इसी तकनीक को आजमाते हुए परेड ग्राउंड होते हुए कश्मीरी गेट बस अड्डा पहुंच गई. हर जगह के सीसीटीवी की फुटेज खंगाली गई और डंप डाटा उठाया गया. इस जांच में पता चला कि तीनों लडक़े कश्मीरी गेट बस अड्डा आए थे, यहां से वे पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुंचे थे.

पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर भी उन लडक़ों की सीसीटीवी में फुटेज मिल गई. यहां का भी डंप डाटा उठाया गया. पुलिस का अनुमान था कि वे ट्रेन पकड़ कर दिल्ली से बाहर चले गए हैं.

अब पुलिस के पास डंप डाटा ही उन लडक़ों तक पहुंचने का जरिया था. पुलिस की टीमें मोबाइल डंप डाटा की जांच में जुट गईं. पुलिस टीम को डंप डाटा में एक नंबर ऐसा मिला, जो हर जगह मौजूद था.

उस नंबर को मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनी में दे कर यह मालूम किया गया कि यह नंबर किस का है और कहां इस्तेमाल किया जा रहा है. मोबाइल कंपनी ने बताया कि यह नंबर दिल्ली का नहीं, राजस्थान का है. वहीं जा कर इस को इस्तेमाल करने वाले का नाम पता मिल सकता है.

पुलिस के लिए यह एक नई सिरदर्दी थी, लेकिन इस का सोल्यूशन भी निकल गया. कमला मार्किट थाने के तेजतर्रार एसआई गिरिराज ने मुसकरा कर कहा, “सर, यह फोन कौन यूज कर रहा है, इस का पता मीनू मैडम निकाल सकती हैं.”

एएसआई मीनू बाला वहीं मौजूद थी. वह चौंक कर बोली, “मैं कैसे पता निकाल सकती हूं?”

“आप को बकरे के सामने चारा डालना है मैडम,” एसआई गिरीराज ने कहा. फिर गिरिराज ने एएसआई मीनू बाला को समझा दिया कि उन्हें क्या करना है.

एएसआई मीनू ने चलाया तीर

एएसआई मीनू बाला ने अपने मोबाइल डंप डाटा द्वारा हासिल किया गया नंबर मिलाया. दूसरी ओर घंटी बजी, फिर किसी ने फोन उठा लिया. मीनू बाला ने स्पीकर औन कर लिया. दूसरी ओर कुछ देर खामोशी रही फिर एक मरदाना आवाज उभरी,

“हैलो! आप को किस से बात करनी है?”

मीनू ने आवाज को सुरीला बना कर कहा, “आप बहुत भाग्यशाली हैं. आप का नंबर हमारी मोबाइल कंपनी ने लक्की ड्रा में डाला था. आप का दूसरा ईनाम निकला है. आप को 50 हजार रुपए मिलेंगे.”

“50 हजार का ईनाम.” दूसरी तरफ से खुशी से कोई बोला, “मेरी तो किस्मत खुल गई.”

“आप अपना नाम, पता बताइए ताकि 50 हजार का ईनाम आप को भेजा जा सके और हां अपनी फोटो भी भेज दीजिए.”

“ठीक है मैम. आप मेरा एड्रैस नोट करिए.”

“एक मिनट, मैं कागज पैन ले लूं.” मीनू बाला ने पास में खड़े हैडकांस्टेबल धर्मेंद्र को इशारा किया. धर्मेंद्र ने तुरंत पैन कागज मीनू बाला को दे दिया.

“बताइए,” मीनू ने कहा.

“मेरा नाम हैप्पी है, पिता का नाम गोपी उर्फ चूरामन है. मेरा मूल पता डूंगर वाला, पोस्ट थाना- शाइपू, जिला धौलपुर (राजस्थान) है. फिलहाल मैं पिता और भाई के साथ मुल्ला पियाऊ, महारानी अहिल्या बाई स्कूल आगरा में रह रहा हूं.”

“अपना फोटो मुझे वाट्सऐप पर भेज दीजिए. मेरा नंबर आप के पास आया होगा.”

“जी हां मैडम. मैं अपना फोटो भेज रहा हूं.” दूसरी तरफ से कहने के बाद बात खत्म हो गई.

थोड़ी ही देर में हैप्पी ने अपना फोटो मीनू बाला के वाट्सऐप पर भेज दिया. देखते ही मीनू बाला की आंखों में चमक आ गई.

उस ने अपनी खुशी छिपा कर कहा, “मिस्टर हैप्पी, आप को आज ही 50 हजार रुपए एमओ द्वारा भेज दिए जाएंगे.” कहने के बाद मीनू बाला ने फोन काट दिया.

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वहां एसएचओ सत्येंद्र दलाल, एसआई नूर हसन खान, गिरिराज और हैडकांस्टेबल धर्मेंद्र के अलावा औपरेशन विंग और स्पैशल स्टाफ के लोग मौजूद थे. सभी ने हैप्पी की फोटो देखी. हैप्पी वही लडक़ा था, जो अपने साथियों के साथ कोठा नंबर 52 से वारदात को अंजाम दे कर भागा था.

तुरंत उसे गिरफ्तार करने के लिए एसआई गिरिराज, नूर हसन खान, एएसआई महेश सिंह और औपरेशन विंग के 3 हट्टेकट्टे पुलिस वालों की टीम आगरा के लिए भेज दी गई.

15 दिन में सुनाया फैसला : मुजरिम को सजा ए मौत – भाग 2

अफजल का इकलौता बेटा था अरहान

आखिर यह पूरा मामला क्या था? आइए, इस पर एक नजर डालते हैं. उत्तर प्रदेश के जनपद मथुरा के मेवाती मोहल्ला औरंगाबाद थाना सदर बाजार में रहते थे अफजल. परिवार में उन की पत्नी नाजिस और एक 9 साल का बेटा अरहान था.

अरहान अफजल का इकलौता बेटा था, इसलिए दोनों मियांबीवी उसे बहुत प्यार करते थे. उसे लाड़प्यार से पाल रहे थे. अफजल को उम्मीद थी कि पढ़लिख कर एक दिन अरहान बहुत बड़ा आदमी बनेगा और उन के दिन संवर जाएंगे. अरहान को लिखानेपढ़ाने में अफजल मियां कोई कोरकसर नहीं छोड़ रहे थे. वह दिन भर कड़ी मेहनत कर के रुपया कमाते और अरहान की स्कूल की जरूरत का सारा सामान दिलवाते.

दिन हंसीखुशी से बीत रहे थे कि 8 अप्रैल, 2023 की शाम को अरहान लापता हो गया. न वह गलीमोहल्ले में कहीं मिल रहा था न बाजारहाट में. वह गली में खेलतेखेलते गायब हुआ था. नाजिस ने उसे घर में से ही दोचार बार आवाज दी थीं, फिर उत्तर न मिलने पर वह घर से बाहर आ गई थी. अरहान गली में दिखाई नहीं दे रहा था. नाजिस ने उसे पहले आसपड़ोस में ढूंढा. वह नहीं मिला तो उस के पिता अफजल को बताया.

अफजल ने बेटे को हर संभावित जगह पर तलाश किया. वह अपने बड़े भाई की दुकान पर भी अरहान को देखने गए, क्योंकि अरहान अकसर अपने ताऊ की दुकान पर चला जाया करता था. उस दिन वह ताऊ की दुकान पर नहीं गया था. हर जगह तलाश करने के बाद अफजल परेशान हो कर मोहल्ले के 2-3 पहचान वालों को साथ ले कर कोतवाली सदर बाजार पहुंच गए.

कोतवाल जसवीर सिंह के सामने पहुंच कर अफजल ने अपने 9 वर्षीय बेटे के लापता होने के बारे में बताया, “सर, मुझे बहुत घबराहट हो रही है. मेरा बेटा शाम से गली में खेलते हुए गायब हो गया है. आप उस की तलाश करवाइए.”

एसएचओ जसवीर सिंह ने इस मामले को बहुत गंभीरता से लिया. बच्चा मासूम था, उस के साथ कुछ भी अनहोनी होने का अंदेशा था.

“आप बच्चे का हुलिया, उम्र आदि दर्ज करवा दीजिए. उस की कोई फोटो हो तो वह भी दे दीजिए. मैं आप के बच्चे की तलाश करने की कोशिश करता हूं. आप अपने स्तर पर भी उसे ढूंढिए.” अफजल ने अपने बेटे अरहान की गुमशुदगी दर्ज करवा कर उस का एक फोटो भी कोतवाल साहब को दे दिया.

सीसीटीवी कैमरे से मिला सुराग

पुलिस ने पहले इस मामले की गुमशुदगी दर्ज की, लेकिन जब उस के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली तो अज्ञात के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज कर लिया. इस मामले को स्वयं कोतवाल जसवीर सिंह ने अपने हाथ में लिया और इस की विवेचना शुरू कर दी.

उन्होंने एसएसपी शैलेष कुमार पांडेय को इस बच्चे की गुमशुदगी की जानकारी दे कर दिशानिर्देश मांगे. एसएसपी के दिशानिर्देश पर कोतवाल जसवीर सिंह ने जांच की शुरुआत अरहान के घर के आसपास से की. गली में उस के साथ खेलने वाले बच्चों से पूछताछ की तो उन से मालूम हुआ कि शाम को अरहान उन के साथ खेल रहा था, फिर वह अपने ताऊ की दुकान की ओर किसी के साथ जाता दिखाई दिया था. वह व्यक्ति कौन था, वे उसे नहीं पहचानते.

इस जानकारी से कोतवाल को यह पता चल गया कि अरहान किसी ऐसे शख्स को जानता है, जो उस के बहुत करीब रहा है. उसी के साथ वह ताऊ की दुकान की तरफ गया था. जसवीर सिंह ने उस शख्स के बारे में मालूम करने के लिए सीसीटीवी फुटेज देखने का मन बना लिया. जहां पर अरहान के ताऊ की दुकान थी, उस रास्ते में 3-4 सीसीटीवी कैमरे लगे हुए थे. पुलिस ने उन कैमरों की फुटेज निकलवा कर देखी तो उन्हें अरहान एक पतलेदुबले युवक के साथ जाता हुआ नजर आ गया.

उस युवक की पहचान करने के लिए अरहान के पिता अफजल को थाने में बुलवाया गया. अफजल को सीसीटीवी कैमरे की वह फुटेज दिखाई गई.

“क्या आप इस युवक को पहचानते हैं?” कोतवाल ने अफजल से पूछा.

“यह तो मोहम्मद सैफ है. मेरे बड़े भाई की दुकान पर काम करता है.” अफजल ने हैरान हो कर कहा, “इस के साथ अरहान कई बार घूमने जाता रहा है, यह अच्छा व्यक्ति है.”

“हूं.” कोतवाल ने सिर हिलाया, “मैं इस से मिलना चाहूंगा.”

“यह दुकान पर होगा. आप मेरे साथ चलिए.”

कोतवाल जसवीर सिंह 2 पुलिसकर्मियों को साथ ले कर अफजल के साथ उस के भाई की दुकान पर आ गए. उन्हें वहां सीसीटीवी में नजर आने वाला युवक सैफ मिल गया.

पुलिस की बंदरघुडक़ी आई काम

पुलिस को दुकान पर देख कर उस के चेहरे का रंग उड़ गया. जसवीर सिंह की पैनी नजरों से यह छिप नहीं पाया. उन्होंने पुलिसकर्मियों को इशारा किया, “मोहम्मद सैफ को हिरासत में ले लो.”

उन का आदेश मिलते ही पुलिसकर्मियों ने सैफ को पकड़ लिया. उसे पुलिस वैन में बिठा कर थाने में लाया गया. अफजल भी उन के साथ आए थे.

सैफ को सामने बिठा कर कोतवाल ने उस से सख्ती से पूछा, “अरहान कहां पर है सैफ?”

“मैं क्या बताऊं साहब… वो अपने घर में ही होना चाहिए.” सैफ नजरें झुका कर बोला.

“कल शाम को वह तुम्हारे साथ था. मेरे पास इस का ठोस सबूत है, तुम ठीकठीक बता दो वरना पुलिस वाले तुम्हारी चमड़ी उधेडऩे के लिए डंडा ले कर खड़े हैं.”

“मैं सही कह रहा हूं साहब, मैं नहीं जानता.”

जसवीर सिंह ने उस के गाल पर करारा थप्पड़ जड़ दिया, वह कुरसी से दूर जा गिरा. जसवीर सिंह के पास में खड़ा पुलिस कांस्टेबल उसे उठा कर दूसरे कमरे में ले गया. तभी बेंत ले कर 2 पुलिस वाले वहां और आ गए. एक पुलिस वाले ने सैफ के दोनों हाथ पीछे कर के बांध दिए.

इस से सैफ डर गया. वह समझ गया कि अब उस के साथ ये पुलिस वाले क्या करेंगे. इस से पहले कि वह पुलिस वाले कोई काररवाई करते, सैफ डर कर बोला, “सर, आप मुझे मारना मत, मैं सब बताता हूं.”

तभी एक पुलिसकर्मी कोतवाल को बुला लाया.

कोतवाल ने कडक़ स्वर में पूछा, “बता अरहान कहां है?”

“साहब, मैं ने उसे मार दिया है…” सैफ ने जैसे ही यह कहा, बराबर के कमरे में बैठे अफजल के कानों में भी यह आवाज आ गई. वह अपनी जगह गश खा कर गिर पड़े. वहां मौजूद कांस्टेबल उन्हें उठा कर बाहर बेंच पर ले गया और उन्हें होश में लाने की कोशिश में लग गया. कोतवाल जसवीर सिंह गहरी सांस ले कर रह गए. सैफ कुबूल कर रहा था कि उस ने अरहान को मार डाला है.

“तुम ने अरहान को क्यों मार दिया, उस बच्चे ने तुम्हारा क्या बिगाड़ा था?” सैफ को फाड़ खाने वाली नजरों से देखते हुए जसवीर सिंह ने पूछा.

अरहान की हत्या का जो कारण सैफ ने बताया, उसे सुन कर कोतवाल और पुलिस कांस्टेबल के सिर शर्म से झुक गए.

जुल्मी से प्यार : सनकी प्रेमी से छुटकारा – भाग 2

घटनास्थल पर होने वाले बवाल को तो पुलिस अधिकारियों ने समझाबुझा कर टाल दिया था, लेकिन उन के मन में जो आग जल रही थी, उसे शांत करने के लिए वे दीपेंद्र की प्रेमिका अंकिता, जिस पर हत्या का शक था, के घर जा पहुंचे. दीपेंद्र की मां आशा, बहन आरती, ज्योति, बुआ बब्बन और चाची कांति अंकिता को पकड़ कर पिटाई करने लगीं. उन्होंने उस के कपड़े भी फाड़ दिए.

अंकिता के पिता राजा और मां ने उसे छुड़ाना चाहा तो साथ आए लोगों ने उन की भी पिटाई कर दी. कपड़े फट जाने से अंकिता अर्धनग्न हो गई थी. उसी हालत में उसे घर के बाहर खींच लाया गया. लोग उस का तमाशा बना रहे थे. तभी इस बात की सूचना पा कर वहां पुलिस पहुंच गई और काफी मशक्कत कर के भीड़ से निकाल कर उसे थाने ले आई.

दीपेंद्र के घर वालों ने अंकिता और उस के मंगेतर विशाल पर हत्या का आरोप लगाया था. अंकिता गिरफ्त में आ चुकी थी. अब विशाल को गिरफ्तार करना था.

पुलिस ने जब मुखबिरों से विशाल के बारे में पता किया तो जानकारी मिली कि वह बकरमंडी ढाल पर मौजूद है. थानाप्रभारी अनिल कुमार सिंह यादव पुलिसबल के साथ वहां पहुंचे और मुखबिर की निशानदेही पर विशाल को गिरफ्तार कर लिया. उसे थाना कर्नलगंज ले आया गया. इस तरह लाश मिलने वाले दिन ही यानी 23 जुलाई को दोनों अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया गया.

थाने में विशाल से दीपेंद्र की हत्या के बारे में पूछा गया तो बड़ी आसानी से उस ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया. उस ने पुलिस को बताया कि मंगेतर अंकिता और भाई विकास की मदद से उस ने दीपेंद्र की हत्या की थी. इस के बाद अंकिता से पूछताछ की गई तो उस ने बताया कि वह दीपेंद्र से प्यार करती थी. लेकिन उस की जिद, गालीगलौज और धमकियों से परेशान हो कर उस ने अपने मंगेतर विशाल से कह कर उस की हत्या करा दी थी.

विशाल और अंकिता ने दीपेंद्र की हत्या का अपना अपराध स्वीकार कर लिया था. इसलिए थाना कर्नलगंज पुलिस ने मृतक दीपेंद्र की मां आशा देवी की ओर से उस की हत्या का मुकदमा विशाल, विकास और अंकिता के खिलाफ दर्ज कर विस्तार से पूछताछ की. इस पूछताछ में प्रेमत्रिकोण में हुई हत्या की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार थी.

उत्तर प्रदेश के महानगर कानपुर के थाना कर्नलगंज का एक मोहल्ला है मकराबर्टगंज. इसी मोहल्ले में राजा अपने परिवार के साथ रहता था. उस के परिवार में पत्नी मीना के अलावा 2 बेटियां अंकिता उर्फ लाडो और सुनीता थीं. राजा प्राइवेट नौकरी करता था, जिस के वेतन से किसी तरह गुजरबसर हो रहा था.

राजा की आर्थिक स्थिति भले ही बहुत अच्छी नहीं थी, लेकिन संयोग से उस की दोनों ही बेटियां बहुत खूबसूरत थीं. बड़ी बेटी अंकिता थोड़ा आजाद खयाल की थी. उसे सहेलियों के साथ घूमनेफिरने, गप्पे लड़ाने में बड़ा मजा आता था. राजा और मीना को लगा कि अंकिता सयानी हो गई है और उस के कदम बहक सकते हैं तो वे उस की शादी के बारे में सोचने लगे. उन्होंने उस के लिए घरवर की तलाश शुरू कर दी.

उन की कोशिश का सुखद परिणाम निकला. पास के ही मोहल्ले कर्नलगंज में रहने वाला विशाल उन्हें पसंद आ गया. उस के परिवार में मातापिता के अलावा एक भाई विकास था. विशाल शरीर से हृष्टपुष्ट था ही, देखने में भी सुंदर था. लेकिन अभी वह करता धरता कुछ नहीं था. दिनभर इधरउधर घूमता रहता था. इस के बावजूद ज्यादा दानदहेज न दे पाने की वजह से राजा ने बेटी की शादी उस के साथ तय कर दी.

शादी हो पाती, उस के पहले ही राजा की तबीयत खराब हो गई. राजा की बीमारी काफी गंभीर थी. जांच में पता चला था कि उसे कैंसर है. कैंसर का इलाज काफी महंगा था. अंकिता अपनी शादी को भूल कर मां की मदद से पिता का इलाज कराने लगी. इस के लिए मीना को दूसरे के घरों में जा कर काम करना पड़ रहा था, फिर भी उस ने हिम्मत नहीं हारी.

पिता की बीमारी की वजह से अंकिता की शादी टल गई थी. मजबूरी की वजह से विशाल भी चुप था.

मकराबर्टगंज के जिस हाता नंबर 8 में अंकिता रहती थी, उसी में दीपेंद्र सैनी भी रहता था. वह सुरेंद्र मोहन सैनी का बेटा था, लेकिन उन की मौत हो चुकी थी. उस के परिवार में मां आशा देवी के अलावा एक भाई अतुल तथा 2 बहनें, अनीता और ज्योति थीं. अनीता की शादी हो चुकी थी. खातेपीते परिवार का दीपेंद्र शरीर से स्वस्थ और हंसमुख स्वभाव का था. वह मैग्ना फाइनैंस कंपनी में नौकरी करता था. आकर्षण व्यक्तित्व वाला दीपेंद्र रहता भी बनसंवर कर था.

पड़ोस में रहने की वजह से अकसर दीपेंद्र की नजर अंकिता पर पड़ जाती थी. जवानी की दहलीज पर खड़ी अंकिता धीरेधीरे उस के दिल में हलचल पैदा करने लगी. दीपेंद्र का दिल उस पर आया तो वह उस की एक झलक पाने के लिए उस के घर के चक्कर लगाने लगा. तभी उसे पता चला कि अंकिता के पिता को कैंसर हो गया है. हमदर्दी जताने के बहाने वह उस के घर आनेजाने लगा.

अंकिता ने दीपेंद्र की चाहत को भांप लिया था. इसलिए जब दीपेंद्र उस के घर आता, वह उस के आसपास ही बनी रहती और इस बात की कोशिश करती कि दीपेंद्र ज्यादा से ज्यादा देर तक उस के घर रुके. उसे रोकने के लिए ही वह उसे चाय पिए बिना नहीं जाने देती थी.

अंकिता अब दीपेंद्र की नींद हराम करने लगी थी. उसी की यादों में वह पूरी की पूरी रात करवटें बदलता रहता था. दिन में भी उस की वजह से उस का मन काम में नहीं लगता था. लगभग वही हाल अंकिता का भी था. दीपेंद्र की चाहत ने अंकिता को मंगेतर से बेवफाई के लिए मजबूर कर दिया. चाहत की आग दोनों ओर बराबर लगी थी, इसलिए दोनों को अपनेअपने दिलों की बात एकदूसरे से कहने में जरा भी झिझक नहीं हुई.

मीना पति को अस्पताल ले कर चली जाती तो अंकिता घर में अकेली रह जाती थी, क्योंकि उस की बहन भी मां की मदद के लिए उस के साथ चली जाती थी. अंकिता से मिलने का दीपेंद्र के लिए यह उचित समय होता था. जल्दी ही दोनों इस एकांत का गलत फायदा उठाने लगे. धीरेधीरे दोनों की प्रेमकहानी बढ़ती ही गई. अंकिता के शरीर पर जो हक उस के मंगेतर विशाल का होना चाहिए था, अब वह उस के प्रेमी दीपेंद्र का हो गया था.

अंकिता से प्रेमसंबंध बनने के बाद दीपेंद्र का उस के घर आनाजाना कुछ ज्यादा ही हो गया था. अंकिता से वह उस के घर में तो मिलता ही था, उसे होटल रेस्टोरेंट भी ले जाता था. कमाई का एक बड़ा हिस्सा वह अंकिता और उस के घर वालों पर खर्च करने लगा था.

वह अंकिता का पूरा खर्च तो उठाता ही था, उस के बाप के इलाज के साथसाथ घर खर्च के लिए भी पैसे देता था. उस की इस मदद से राजा और मीना भी उस के एहसानों तले दब गए थे. कहा जाता है कि जब राजा का औपरेशन हुआ था तो उस ने 50 हजार रुपए दिए थे.

सूटकेस में मिली लाश का रहस्य – भाग 1

भीकू और जयपाल बचपन के गहरे दोस्त थे. दोनों की शादी हो गई थी. इस के बाद भी उन की दोस्ती कायम रही. लोग उन्हें लंगोटिया यार कहते थे. बात 13 नवंबर, 2021 की है. सुबहसुबह भीकू ने जयपाल के दरवाजे पर दस्तक दी तो अंदर से जयपाल का अलसाया हुआ स्वर उभरा, “सुबहसुबह कौन आ गया?”

“मैं भीकू हूं जयपाल.”

“ठहरो, मैं दरवाजा खोलता हूं.” जयपाल ने कहा, फिर रजाई से निकल कर उस ने दरवाजा खोला. जयपाल अधेड़ उम्र का था. भीकू को देखते ही जयपाल बोला, “सुबहसुबह कैसे आना हुआ भीकू.. सब ठीक तो है न?”

“सब ठीक है यार. आज छुट्टी की है मैं ने, तुम कई दिनों से मछली पकडऩे चलने को कह रहे थे, सोचा आज तुम्हारी इच्छा पूरी कर देता हूं, पहले एक कप चाय पिलाओ, फिर चलने की तैयारी करो.”

“बैठो, मैं फ्रैश हो कर तुम्हारे लिए चाय बनाता हूं.”

“क्यों, क्या तुम ने चाय पीनी छोड़ दी है?” भीकू ने हैरानी से पूछा.

“नहीं दोस्त, अब तुम्हारे लिए चाय बनाऊंगा तो एक कप मैं भी पी लूंगा.”

भीकू हंस पड़ा, “मान गया तुम्हें, तुम्हारी कंजूसी की आदत कभी जाएगी नहीं.”

जयपाल मुसकराता हुआ फ्रैश होने चला गया. फ्रैश होने के बाद उस ने चाय बनाई. चाय पीने के बाद मछली पकडऩे का कांटा ले कर दोनों मछली पकडऩे के लिए छाता नहर की तरफ पैदल ही चल पड़े. जयपाल जिस कालोनी में रहता था, वहां से छाता नहर कोई एकडेढ़ किलोमीटर पर ही थी. थोड़ी ही देर में वह सडक़ रास्ते से छाता नहर पर पहुंच गए.

सडक़ छोड़ कर दोनों नहर के किनारे की कच्ची पगडंडी से होते हुए एक जगह पहुंच कर रुक गए. यहां के कुछ हिस्से पर झाडिय़ां नहीं थीं. अकसर दोनों यहां मछली पकडऩे आते रहते थे. उन्होंने नहर के किनारे फैली झाडिय़ों को इस जगह से हटा कर अपने बैठने की जगह बना ली थी. दोनों किनारे पर बैठ गए और कांटा तैयार कर के दोनों ने अपने कांटे नहर के पानी में डाल दिए. काफी देर हो गई. उन के कांटों में मछली नहीं फंसी.

“सुबहसुबह तुम्हारी मनहूस सूरत देखी है मैं ने. आज एक भी मछली कांटे में नहीं फंसेगी.” जयपाल खीझ कर बोला.

“फंसेगी यार, धीरज रख कर बैठ. देख कांटा हिल रहा है, शायद कोई मछली चारे में मुंह मार रही है.”

कांटा वाकई हिलने लगा था. जयपाल ने कांटे की डोर मजबूती से पकड़ ली. उस की नजरें कांटे पर जमी थीं. तभी उस के कान में भीकू की हैरत में डूबी आवाज पड़ी, “जयपाल वो देख सूटकेस…” जयपाल ने देखा.

नहर की धारा में बहता हुआ एक सूटकेस उन्हीं की ओर आ रहा था. वह चौंक कर बोला, “नहर में सूटकेस…”

भीकू ने सिर खुजाया, “लगता है, किसी ने चोरी का माल नहर में बहा दिया. इस सूटकेस को बाहर निकाल कर देखते हैं

जय…”

“उतर जा नहर में.”

सूटकेस देख नहर में कूद गया भीकू

भीकू तुरंत नहर में उतर गया. उस ने सूटकेस को पास आने दिया. जैसे ही सूटकेस पास आया, उस ने सूटकेस को पकड़ लिया और उसे खींच कर किनारे पर ले आया. उस ने ऊपर आ कर सूटकेस बाहर खींचा तो वह नहीं खींच पाया. जयपाल ने सूटकेस बाहर निकालने में उस की मदद की.

“बहुत भारी है यार, लगता है नोटों से भरा हुआ है.” भीकू सांसें दुरुस्त करता हुआ बोला.

“खोल कर देख.”

भीकू ने सूटकेस के लौक देखे. दोनों लौक खुले हुए थे. उस ने लौक सरका कर जैसे ही ढक्कन उठाया, उस के मुंह से चीख निकल गई. जयपाल भी उछल कर खड़ा हो गया. सूटकेस में एक जवान युवती की लाश थी.

दोनो थरथर कांपने लगे. थोड़ा संयत होने पर भीकू होंठों पर जुबान घुमा कर बोला, “पुलिस को बताना पड़ेगा.”

“क्यों मुसीबत मोल ले रहा है… चुपचाप यहां से निकल चल.”

“ऐसा करेंगे तो, हम ही फंस जाएंगे जयपाल. हमारे पांव के निशान कच्ची पगडंडी और यहां भी बन गए हैं. बस्ती वाले बहुत से लोग यह जानते हैं कि हम दोनों यहां मछली पकडऩे आते हैं. पुलिस को थोड़ा सा भी सुराग लगा तो हमें धर दबोचेगी. भलाई इसी में है कि हम खुद इस लाश के मिलने की सूचना पुलिस को दे दें.”

“ठीक है.” जयपाल ने सिर हिला कर कहा, “करो पुलिस को फोन.”

भीकू ने अपने मोबाइल से पुलिस कंट्रोल रूम का नंबर मिला कर सूटकेस में लाश मिलने की सूचना दे दी.

कंट्रोल रूम ने यह सूचना संबंधित थाना छाता कोतवाली को दे दी. वहां से एसएचओ प्रदीप कुमार पुलिस टीम को ले कर छाता नहर की ओर रवाना हो गए. जब वह छाता नहर पर पहुंचे, उन्हें भीकू और जयपाल सूटकेस के साथ वहीं बैठे मिले.

सूटकेस में जवान और खूबसूरत युवती की लाश थी. युवती के पैर घुटनों से मोड़ कर उसे जबरन सूटकेस में ठूंसा गया था. युवती के शरीर पर लाल रंग का कुरता और सलवार थी. उस के हाथों में उसी रंग की चूडिय़ां और पैरों में बिछुए थे, इस से इस युवती के शादीशुदा होने का पता चलता था.

युवती की लाश को सूटकेस से निकाल कर बारीकी से उस की पहचान के लिए सूत्र तलाशा गया, लेकिन एसएचओ को ऐसा कोई सूत्र युवती की लाश के पास से नहीं मिला, जिस से उस की पहचान हो सके. प्रदीप कुमार ने एसएसपी डा. गौरव ग्रोवर को इस लाश की जानकारी दे दी. साथ ही फोरैंसिक जांच टीम घटनास्थल पर बुलवा ली. कुछ ही देर में एसएसपी डा. गौरव ग्रोवर और फोरैंसिक जांच टीम के लोग वहां पहुंच गए.

सूटकेस में मिली लाश का किया निरीक्षण

एसएसपी डा. गौरव ग्रोवर ने लाश का निरीक्षण किया. फोरैंसिक टीम अपने काम में लग गई थी. सूटकेस पानी में भीगा हुआ था. गनीमत थी कि पानी सूटकेस में नहीं गया था, इस कारण युवती की लाश को नुकसान नहीं पहुंचा था. युवती के गले पर लाल निशान थे, इस से अनुमान लगाया गया कि उसे गला घोंट कर मारा गया है.

फोरैंसिक जांच टीम ने बारीक से बारीक साक्ष्य एकत्र किए. लाश के विभिन्न कोणों से फोटो लिए गए. डा. गौरव ग्रोवर ने एसएचओ प्रदीप कुमार की ओर देख कर कहा, “इस युवती की पहचान का कोई सूत्र नहीं मिल रहा है, आप आसपास के थानों में पता करवाइए कि इस हुलिए की किसी युवती की गुमशुदगी दर्ज करवाई गई है या नहीं. इस की पहचान के लिए इश्तहार और अन्य उपाय भी करिए. इस की पहचान होगी, तभी हत्यारे तक पहुंचा जा सकता है, आप समझ रहे हैं न?”

“जी सर,” प्रदीप कुमार ने सिर हिलाया, “मैं पूरी कोशिश करूंगा सर. इस के हत्यारे तक पहुंचने की.”

एसएसपी अन्य निर्देश दे कर वापस चले गए तो एसएचओ प्रदीप कुमार ने लाश की कागजी काररवाई पूरी कर के वह पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दी. इस युवती की शिनाख्त के लिए कोतवाली छाता के प्रभारी प्रदीप कुमार की ओर से अनेक उपाय किए गए, लेकिन युवती की पहचान नहीं हो पाई, न यह मालूम हो सका कि इस की हत्या करने वाला कौन व्यक्ति है. इस हत्या के लिए अज्ञात हत्यारे के खिलाफ केस दर्ज किया गया.

यह लाश 13 नवंबर, 2021 को छाता नहर से सूटकेस में मिली थी. जब काफी भागदौड़ के बाद भी इस के संबंध में कोई जानकारी नहीं मिली तो इस हत्या को ब्लाइंड मर्डर मान कर इस केस की फाइल बंद कर दी गई.

ठगों की गिरफ्तारी की बनाई योजना

2 साल ऐसे ही गुजर गए. 3 जुलाई, 2023 सीआईए प्रभारी मोहम्मद इलियास ने अपने कक्ष में सीआईए के 8 चुनिंदा एसआई और हैडकांस्टेबल्स की मीटिंग बुलाई. सभी उन के कक्ष में पहुंच गए तो ऐहतियात के लिए कक्ष का दरवाजा बंद कर दिया गया.

प्रभारी मोहम्मद इलियास ने सभी पर बारीबारी से नजरें डालने के बाद कहना शुरू किया, “आप सभी ने सुना होगा, कुछ लोग लोन दिलाने के नाम पर लोगों को ठग रहे हैं. कितने ही लोगों ने अपने ठगे जाने की रिपोर्ट विभिन्न थानों में दर्ज भी करवाई है. पुलिस इस मामले में जांच कर रही है, किंतु अभी तक वह उन शातिर ठगों तक नहीं पहुंच पाई है, जो यह ठगी का धंधा कर कर रहे हैं.”

कुछ क्षण रुकने के बाद मोहम्मद इलियास ने कहा, “मुझे अपने मुखबिर द्वारा यह सूचना मिली है कि वह शातिर ठग यहां आल्हापुर गांव में हैं. यहीं से वह ठगी का नेटवर्क चला रहे हैं. मैं चाहता हूं आज रात को ही हम आल्हापुर गांव में रेड डालें और उन ठगों को गिरफ्तार करें.”

“ओके सर. हम सब रेड के लिए तैयार हैं.” एक एसआई ने जोश भरे स्वर में कहा.

“हम रात के अंधेरे में आल्हापुर के लिए निकलेंगे, आप लोग तब तक रेड की पूरी तैयारी कर लें.”

“जी सर.” सभी ने एक स्वर में कहा.

सभी कक्ष से बाहर निकल गए. मोहम्मद इलियास मुखबिर को फोन लगा कर आवश्यक निर्देश देने लगे थे.

जी.बी. रोड कोठे में खून – भाग 1

7 मार्च, 2023 को दोपहर 2 बज कर 10 मिनट पर पीसीआर द्वारा थाना कमला मार्किट को सूचना दी गई कि जी.बी. रोड (श्रद्धानंद माग) पर स्थित कोठा नंबर 52 में किसी ने ताबड़तोड़ गोलियां चला दी हैं, जिस में एक महिला और एक युवक घायल हो गए हैं. जल्दी घटनास्थल पर पहुंचें.

यह काल एएसआई मीनू बाला ने अटेंड की. उस ने तुरंत इसे एसआई नूर हसन खान को बता कर उचित निर्णय लेने के लिए कह दिया. अपनी रवानगी जी.बी. रोड के लिए दर्ज करने के बाद एसआई नूर हसन खान, हैडकांस्टेबल धर्मेंद्र को साथ ले कर जी.बी. रोड के लिए रवाना हो गए.

घटनास्थल ज्यादा दूर नहीं था. 15-20 मिनट में ही एसआई नूर हसन खान कोठा नंबर 52 पर पहुंच गए. यह रेड लाइट एरिया था, यहां जिस्म का बाजार लगता है. मनचले शौकीन लोग कामना की भूख शांत करने के लिए इस बाजार की सीढिय़ां नापते हैं. दिन में तमाशबीन कोठों के छज्जों पर जिस्म की नुमाइश करने वाली देहबालाओं को ललचाई नजरों से देख कर आहें भरते रहते हैं. जिन की जेब में नोटों की गरमी होती है, वह पसंद आने वाली देह बाला को बाहों में भरने के लिए कोठे की सीढिय़ां चढऩे में संकोच नहीं करते.

पहले रात को तो यहां पूरी रौनक होती थी, घुंघरुओं की खनक और तबलों की धमक से कोठे गूंजते रहते. मुजरे महफिलें सजतीं, जाम छलकते और नर्तकी अपने नृत्य व अदा से लोगों का दिल जीतने की कोशिश करती थी, लेकिन यहां के कोठों में मुजरा तो लगभग बंद ही हो चुका है. अब तो मुख्य धंधा जिस्मफरोशी का ही रह गया है.

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एसआई नूर हसन खान और हैडकांस्टेबल सीढिय़ां चढ़ कर ऊपर आए. दरवाजे के साथ वाले कमरे में खून बिखरा हुआ था, सीढिय़ों पर और सामने वाले कमरे में भी ताजा खून पड़ा था. जो लोग गोली लगने से घायल हुए थे, वे वहां नहीं थे.

पुलिस को ऊपर आया देख कर इस कोठे की संचालिका पार्वती उन के सामने आ गई.

“घायल कहां है?” नूर हसन खान ने कोठा संचालिका को ऊपर से नीचे तक देख कर पूछा.

“उन्हें पीसीआर वैन एलएनजेपी हौस्पीटल ले गई है. मेरी बेटी राधा की हालत बहुत खराब है साहब.” पार्वती रुआंसी आवाज में बोली, “मैं वहीं जा रही थी कि आप आ गए.”

“यहां क्या लफड़ा हुआ था? गोली किस ने चलाई?” खान ने पार्वती को घूरते हुए पूछा.

“वे 3 लडक़े थे साहब, शक्लसूरत से गंवार और बदमाश नजर आ रहे थे. उन्होंने राधा की डिमांड की तो बात 1500 रुपए में तय हो गई. फिर पता नहीं क्यों उन में से एक ने पिस्टल निकाल कर गोलियां चलानी शुरू कर दीं. गोली राधा और इरफान को लगी. दोनों नीचे गिरे तो मैं दौड़ी. तब तक वे तीनों पिस्टल लहराते हुए भाग निकले. कुछ लोगों ने उन का पीछा किया, लेकिन वे हाथ नहीं आए.”

“गोलियां चलीं, उस वक्त का कोई चश्मदीद यहां मौजूद है क्या?”

“जी हां.” पार्वती ने 2-3 नाम ले कर आवाज लगाई तो 2 व्यक्ति वहां आ गए. उन में से एक का चेहरा लंबूतरा और दागदार था. उस का रंग सांवला था. दूसरे के चेहरे पर दाढ़ीमूंछ नहीं आई थी. वह पहले वाले की अपेक्षा नाटा और गोरी रंगत वाला युवक था.

“शंकर, भूरे साहब तुम से कुछ पूछना चाहते हैं.” पार्वती ने उन दोनों से कहा फिर एसआई खान से बोली, “साहब, घटना के वक्त यही दोनों यहां मौजद थे.”

“तुम दोनों यही रहते हो?” खान ने पूछा.

“जी साहब,” उन्होंने सिर हिला कर एक साथ कहा.

“राधा और इरफान पर हमला करने की वजह क्या थी?”

“साहब, यह हम नहीं जानते. राधा के साथ उन लडक़ों का किस बात पर झगड़ा हुआ, हमें नहीं मालूम. राधा और इरफान ने उन के पास पिस्टल देख कर शोर मचाया था कि पुलिस को बुलाओ. उन की तेज आवाजें सुन कर हम दोनों दौड़ कर आए तो हम ने एक लडक़े के हाथ में पिस्टल देखा.

अपने को घिरा देख कर और पुलिस बुलाने की बात सुन कर उन में से एक ने चीख कर कहा था, ‘काके गोली चला.’ बस उस लडक़े ने जिस का नाम काका था, ताबड़तोड़ फायरिंग करनी शुरू कर दी.

“गोली राधा के सीने में लगी, दूसरी इरफान के कंधे में. वे दोनों नीचे गिरे तो तीनों भाग निकले. काका नाम का लडक़ा पिस्टल लहरा कर चीख रहा था, “पीछे मत आना वरना मैं भून कर रख दूंगा.” साहब वे तीनों भागते हुए अजमेरी गेट की तरफ निकल गए और भीड़ में गायब हो गए.”

“अगर वे पकड़ में आएं तो तुम दोनों उन्हें पहचान लोगे?”

“हां साहब.”

पुलिस अधिकारियों ने किया घटनास्थल का निरीक्षण

एसआई खान ने सब से पहले यहां की घटना से एसएचओ कमला मार्किट सत्येंद्र दलाल, डीसीपी संजय कुमार सैन और एडिशनल डीसीपी, पुलिस का स्पैशल स्टाफ, फोरैंसिक टीम को अवगत करा दिया. वे सब थोड़ी देर में ही घटनास्थल पर आ गए.

घटनास्थल का उन्होंने बारीकी से निरीक्षण किया. हत्या करने वाले अज्ञात लडक़े संख्या में 3 बताए गए थे, लेकिन वे कहां से आए थे, कौन थे, सब कुछ अंधेरे में था.

डीसीपी संजय कुमार सैन ने एसएचओ सत्येंद्र दलाल को कुछ निर्देश दिए. इंसपेक्टर सत्येंद्र दलाल ने एसआई खान को एलएनजेपी हौस्पीटल के लिए रवाना कर दिया और खुद वहां की काररवाई निपटाने में व्यस्त हो गए.

एसआई नूर हसन खान जब एलएनजेपी हौस्पीटल में पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि कोठे से यहां पहुंचाते वक्त राधा ने बीच रास्ते में ही दम तोड़ दिया था. कोठे पर दलाली करने वाला इमरान चौधरी बुरी तरह जख्मी था. डाक्टर उस के कंधे में धंसी गोली निकाल कर ड्रेसिंग कर चुके थे, लेकिन अभी वह बयान देने की स्थिति में नहीं था.

एसआई नूर हसन खान ने राधा की डैडबौडी की अच्छे से जांच की. उस के सीने में गोली लगी थी, अत्यधिक गहरा जख्म और खून काफी मात्रा में बह जाने से उस की मौत हो गई थी.

राधा देखने में सुंदर, युवा सैक्स वर्कर थी. उस की उम्र 30 वर्ष थी. अब उस के ऊपर हमला करने की धारा 302 में तब्दील हो गई थी. उस के हत्यारे को पकडऩा बहुत आवश्यक हो गया था.

15 दिन में सुनाया फैसला : मुजरिम को सजा ए मौत – भाग 1

इस धरती पर इंसान के रूप में ऐसे हैवान भी मौजूद हैं, जो अपनी काम पिपासा शांत करने के लिए किसी भी लडक़ी अथवा लडक़े को अपना शिकार बना लेते हैं. उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले का रहने वाला सैफ नाम के दरिंदे ने तो एक ऐसे मासूम पर नुकीले दांत गड़ा दिए, जो मात्र 9 साल का था. अभी उस ने न दुनिया को ठीक से देखा था, न समझा था. हंसतेखेलते उस मासूम के साथ सैफ ने कुकर्म ही नहीं किया, बल्कि उसे मौत की नींद भी सुला दिया था.

इस कृत्य और जघन्य हत्या के लिए सैफ को पोक्सो कोर्ट के कटघरे में खड़ा किया गया. यह पोक्सो कोर्ट मथुरा में थी और इस के जज थे राम किशोर यादव. उन की कोर्ट में 28 अप्रैल, 2023 को इस केस की चार्जशीट दाखिल की गई थी. 2 मई को अभियुक्त पर चार्ज लगाया गया.

अभियुक्त सैफ की ओर से बचाव पक्ष के रूप में बार एसोसिएशन के पूर्व सचिव साहब सिंह देशकर पैरवी कर रहे थे और अभियोजन पक्ष का जिम्मा जिला शासकीय अधिवक्ता (स्पैशल) अलका उपमन्यु ने संभाला था. इस केस में 14 गवाह पेश किए गए. पहली गवाही 8 मई को हुई और अंतिम गवाह 18 मई को पेश हुआ.

आज 22 मई, 2023 का दिन था. उस दिन इस जघन्य मामले में फाइनल बहस होनी थी. सुबह से ही कोर्टरूम में मीडियाकर्मी, मथुरा बार एसोसिएशन के वकील, पुलिस के आला अधिकारी. मृतक बच्चे के घर वाले, पासपड़ोस के लोग और शहर के कई प्रतिष्ठित नागरिक जमा हो गए थे.

इस केस की शासन और प्रशासन की ओर से मौनिटरिंग हो रही थी. डीएम पुलकित खरे, एसएसपी शैलेष कुमार पांडे, संयुक्त निदेशक अभियोजन सहसेंद्र मिश्रा इस मामले पर पैनी नजर रख रहे थे. वह इस वक्त कोर्टरूम में मौजूद थे. वहीं जिला शासकीय अधिवक्ता शिवराम तरकर तथा सदर कोतवाल जसवीर सिंह (जिन्होंने इस केस की छानबीन की थी) कोर्ट रूम में उपस्थित थे.

कोर्ट रूम में बने कटघरे में इस जघन्य कांड का आरोपी सैफ खड़ा था. बीच में लंबी मेज के पास लेखाकार के साथ बचाव पक्ष के वकील साहब सिंह देशकर बैठे हुए थे. उन के सामने मेज की दूसरी ओर अभियोजन पक्ष की वकील अलका उपमन्यु बैठी हुई इस केस की फाइल को गहरी नजरों से देख रही थीं.

दिलचस्प रही वकीलों की जिरह

जैसे ही कोर्टरूम की घड़ी ने 10 बजाए, अपने चैंबर से निकल कर माननीय जज राम किशोर यादव अपनी कुरसी के पास आ गए. कोर्ट में मौजूद हर शख्स ने सम्मान में उठ कर उन का अभिवादन किया. अभिवादन स्वीकार कर के जज महोदय अपनी कुरसी पर बैठ गए.

“कोर्ट की काररवाई शुरू की जाए. बचाव पक्ष अपनी दलील पेश करें.” माननीय जज ने साहब सिंह की ओर देख कर कहा.

साहब सिंह देशकर अपने काले कोट को दुरुस्त करते हुए उठे और गंभीर आवाज में बोले, “मी लार्ड, मैं मानता हूं मेरे मुवक्किल सैफ ने जघन्य गुनाह किया है. उस के विरुद्ध पुलिस ने ठोस साक्ष्य भी एकत्र कर के कोर्ट में पेश किए हैं, लेकिन मैं यही कहूंगा कि जिस वक्त सैफ ने यह गुनाह किया, वह बहुत नशे में था. नशा करने वाला व्यक्ति नशे में यह भूल जाता है कि वह जो कर रहा है या करने जा रहा है, वह गलत है. मेरे मुवक्किल ने जो भी किया वह नशे में किया है, उसे इस का अफसोस भी है.”

“इस के अफसोस करने से क्या वह मासूम बच्चा जीवित हो कर वापस आ जाएगा, जो इस की हैवानियत की भेंट चढ़ गया.”

अभियोजन पक्ष की वकील अलका उपमन्यु तमक कर खड़ी होते हुए गुस्से से बोलीं, “मी लार्ड, इस व्यक्ति ने ऐसा गुनाह किया है, जो क्षमा करने योग्य नहीं है. ऐसे व्यक्ति को कठोर से कठोर दंड मिलना चाहिए.”

“नहीं मी लार्ड,” बचाव पक्ष के वकील देशकर विनती करते हुए बोले, “मेरा मुवक्किल शादीशुदा है इस के छोटेछोटे बच्चे हैं. यह अपने बूढ़े मांबाप का बोझ भी उठाता है. इस के जेल चले जाने से इस के परिवार पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ेगा.”

“यह सब कुछ गुनाह करने से पहले सोचना चाहिए,” अलका उपमन्यु व्यंग्य से बोलीं.

“मैं ने कहा न, यह उस समय गहरे नशे में था. नशे में ही इस से गुनाह हो गया है.”

“मी लार्ड, जिस मासूम बच्चे को इस नराधम ने मौत के घाट उतारा है, वह अपने मांबाप की इकलौती संतान था. उस के पिता उसे इस उम्मीद से पालपोस कर बड़ा कर रहे थे कि वह बड़ा हो कर उन के बुढ़ापे की लाठी बनेगा. इस ने उन की लाठी तोड़ दी. उन के बुढ़ापे का सहारा छीन लिया. इसे कठोर से कठोर दंड मिलना ही चाहिए.”

माननीय जज राम किशोर यादव ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद गंभीर स्वर में कहा, “यह सिद्ध हो गया है कि कटघरे में खड़े इस शख्स सैफ ने जघन्य गुनाह किया है. स्वयं इस के वकील मिस्टर देशकर अपने मुंह से कुबूल कर रहे हैं कि इस ने जघन्य अपराध किया है, लेकिन नशे में किया है.

“मिस्टर देशकर यह नशे में था, इस बात को पुलिस नहीं मानती. इसे गिरफ्तार किया गया, तब यह पूरी तरह होशोहवास में था और यह बात इस से भी सिद्ध होती है कि बच्चे के साथ कुकर्म करने के बाद इस का दिमाग सचेत था, तभी तो इस ने सोचा कि यदि बच्चे को जिंदा छोड़ा तो बच्चा इस की पहचान और नाम बता सकता है.

“इसी भय से इस ने बच्चे की गला घोंट कर हत्या कर दी. इसलिए नशे में अपराध करने वाली बात का कोई तर्क नहीं बनता. इस पर रहम नहीं किया जा सकता. मैं इसे दोषी मानता हूं. 26 मई, 2023 को इस पर आरोप तय होगा और सोमवार 29 मई को इसे सजा सुनाई जाएगी. कोर्ट तब तक के लिए स्थगित की जाती है.”

कोर्ट की काररवाई समाप्त कर के जज महोदय अपने चैंबर में चले गए. कोर्ट रूम में मौजूद लोग एकदूसरे से बातें करते हुए बाहर निकल गए.

मुजरिम को सजा ए मौत

26 मई, 2023 को एक बार फिर से पोक्सो कोर्ट में जज राम किशोर यादव की अदालत लगी. 22 मई को कोर्ट रूम में जितनी भीड़ थी, उस से कहीं अधिक भीड़ कोर्ट रूम में उस दिन आई. जज महोदय ने ठीक 10 बजे अपनी कुरसी पर आ कर बैठे तो सभी की निगाहें उन की ओर हो गईं कि पता नहीं जज साहब क्या आरोप तय करेंगे.

उन्होंने अभियुक्त सैफ पर आरोप तय करने के लिए कहना शुरू किया, “सैफ को बच्चे के साथ कुकर्म कर के तार से उस का गला घोंट कर मार देने का आरोप सिद्ध हो गया है. इसे भारतीय दंड विधान की धारा 302 में आजीवन कारावास और 50 हजार रुपयों का जुरमाना लगाया जाता है.

धारा 377 भादंवि में 10 वर्ष का कठोर कारावास और 20 हजार रुपए का आर्थिक दंड लगाया जाता है. धारा 363 में 5 वर्ष सश्रम दंड और 20 हजार का आर्थिक जुरमाना. धारा 201 में 7 वर्ष का कठोर कारावास और 10 हजार रुपए का जुरमाना लगाया जाता है. वसूली का 80 प्रतिशत हिस्सा प्रतिकर के रूप में मृतक के मांबाप को दिया जाएगा.”

इस के बाद कोर्ट की अगली तारीख सोमवार तय कर के कोर्ट स्थगित कर दी गई.

29 मई, 2023 को पोक्सो कोर्ट के जज राम किशोर यादव ने सैफ को सभी धाराओं में दोषी करार देते हुए कहा, “मासूम के साथ कुकर्म और उस की हत्या का दोषी मोहम्मद सैफ धारा 6 लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 (यथा संशोधित 2019) के अंतर्गत मृत्युदंड से दंडित किया जाता है. सैफ को फांसी के फंदे पर तब तक लटकाया जाए, जब तक इस के प्राण न निकल जाएं.” जज महोदय ने सजा सुनाने के बाद अपने पैन की निब तोड़ दी और उठ कर अपने चैंबर में चले गए.

पोक्सो कोर्ट ने त्वरित न्याय का उदाहरण पेश कर के मात्र 15 दिन में अपना फैसला सुनाया. इस फैसले की सभी ने भूरिभूरि प्रशंसा की. मृतक बच्चे की मां नाजिस और पिता अफजल फूटफूट कर रोने लगे. उन का कहना था कि आज हमारे बेटे अरहान को न्याय मिला है. त्वरित काररवाई से हम संतुष्ट हैं. आज न्यायाधीश ने सच्चा न्याय किया है. उन के रुदन को देख कर एडवोकेट अलका उपमन्यु की भी आंखें भर आईं. वह मुंह घुमा कर रूमाल से अपने आंसू पोंछने लगीं.

जुल्मी से प्यार : सनकी प्रेमी से छुटकारा – भाग 1

मोबाइल फोन की घंटी बजते ही दीपेंद्र की नजर स्क्रीन पर चली गई. अंकिता उर्फ लाडो का  नाम देख कर उस के चेहरे पर चमक सी आ गई. झट से फोन रिसीव कर के बोला, ‘‘हैलो अंकिता कैसी हो, सब ठीक तो है?’’

‘‘कुछ भी ठीक नहीं है दीपेंद्र. मैं बहुत परेशान हूं.’’ अंकिता भर्राई आवाज में बोली.

‘‘क्या बात है, साफसाफ बताओ?’’ दीपेंद्र ने परेशान हो कर पूछा.

‘‘विशाल ने मेरा जीना दूभर कर दिया है. अभीअभी धमकी दे कर गया है कि अगर मैं तुम से मिली या बात की तो वह दोनों के हाथपैर तोड़ देगा. मेरा जी बहुत घबरा रहा है. तुम जल्दी से आ जाओ, घंटे वाले मंदिर पर मैं तुम्हारा इंतजार कर रही हूं.’’ अंकिता ने रोआंसी हो कर कहा तो दीपेंद्र ने धमकाने वाले अंदाज में कहा, ‘‘उस हरामजादे की इतनी हिम्मत कि वह तुम्हें धमकी दे. तुम बिलकुल मत घबराना. मैं अभी तुम्हारे पास पहुंच रहा हूं.’’

यह कह कर दीपेंद्र ने फोन काट दिया. इस के बाद वह तैयार होने लगा तो छोटी बहन ज्योति ने पूछा, ‘‘भैया इस समय कहां जा रहे हो?’’

‘‘कहीं नहीं, बस अभी आता हूं.’’ दीपेंद्र ने कहा.

‘‘भैया जल्दी आ जाना. अकेले घर में डर लगता है.’’ ज्योति ने कहा.

‘‘तुम अंदर से दरवाजा बंद रखना. मैं एक दोस्त से मिलने जा रहा हूं. किसी भी सूरत में डेढ़-2 घंटे में आ जाऊंगा.’’ दीपेंद्र ने कहा और घर से निकल गया. यह 20 जुलाई की दोपहर की बात है.

ज्योति घर में अकेली थी, इसलिए वह बेसब्री से भाई के वापस आने का इंतजार कर रही थी. दीपेंद्र ने डेढ़-2 घंटे में आने के लिए कहा था. उतना समय तो उस ने आसानी से बिता दिया. लेकिन जब समय ज्यादा होने लगा तो उस ने दीपेंद्र को फोन किया. पता चला, उस का फोन बंद है. उस की मां आशा छोटे भाई अतुल के साथ बड़ी बहन अनीता की ससुराल गई थीं.

इसलिए दीपेंद्र का फोन बंद होने से उसे घबराहट होने लगी. वह लगातार भाई को फोन लगाने लगी. काफी कोशिश के बाद भी जब दीपेंद्र के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली तो उस ने बरेली गई मां को सारी बात बता कर तुरंत घर आने को कहा.

ज्योति को लग रहा था कि भाई के साथ कुछ गड़बड़ हो गई है, इसलिए मां को सूचना देने के बाद उस ने मौसा मुकुंद वल्लभ, चचेरे भाई सागर, ज्ञान, चाची कांति और बुआ बब्बन को भी इस बात की सूचना दे दी. दीपेंद्र के घर न लौटने की जानकारी मिलते ही सभी ज्योति के घर आ गए. सलाहमशविरा कर के सभी दीपेंद्र की खोज में जुट गए. काफी कोशिश के बाद भी दीपेंद्र का कुछ पता नहीं चला. मोबाइल बंद होने की वजह से उस से संपर्क भी नहीं हो पा रहा था.

जब दीपेंद्र का कहीं पता नहीं चला तो देर रात उस के चाचा वीरेंद्र मोहन सैनी थाना कर्नलगंज पहुंचे और थानाप्रभारी अनिल कुमार सिंह यादव  को सारी बात बता कर गुमशुदगी दर्ज करानी चाही, लेकिन बिना गुमशुदगी दर्ज किए ही थानाप्रभारी अनिल कुमार सिंह यादव ने उन्हें वापस भेज दिया.

सुबह दीपेंद्र की मां आशा देवी भी बरेली से आ गईं. आते ही वह छोटे बेटे अतुल के साथ सीधे थाने गईं और थानाप्रभारी अनिल कुमार सिंह यादव से बताया कि उन के बेटे दीपेंद्र का अपहरण हुआ है.

थानाप्रभारी अनिल कुमार सिंह यादव ने पूछा, ‘‘तुम्हें कैसे पता चला कि उस का अपहरण हुआ है? किस ने और क्यों किया है उस का अपहरण?’’

‘‘साहब, विशाल और उस की मंगेतर अंकिता उर्फ लाडो ने उस का अपहरण किया है. पहले भी वह उस के साथ मारपीट कर चुका है.’’ आशा देवी ने रोते हुए कहा.

‘‘क्यों किया था मारपीट?’’ थानाप्रभारी ने पूछा.

‘‘साहब, मेरा बेटा दीपेंद्र अंकिता से प्रेम करता था. जबकि अंकिता की शादी विशाल से तय थी. इसलिए विशाल को अंकिता और दीपेंद्र का मिलनाजुलना पसंद नहीं था. इसी बात को ले कर अकसर दोनों में तकरार होती रहती थी.’’ आशा देवी ने कहा.

‘‘ठीक है, तुम अभी जाओ. शाम को दीपेंद्र की 2 फोटो ले कर आना. उस के बाद हम तुम्हारी रिपोर्ट दर्ज कर लेंगे.’’ आश्वासन दे कर थानाप्रभारी अनिल कुमार सिंह यादव ने आशा देवी को घर भेज दिया.

दीपेंद्र के फोटो ले कर आशा देवी शाम को थाने पहुंची और थानाप्रभारी से दीपेंद्र के अपहरण की रिपोर्ट दर्ज करने को कहा. लेकिन बुलाने के बावजूद थानाप्रभारी ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की. इस तरह 22 जुलाई का भी दिन बीत गया.

23 जुलाई की सुबह वीरेंद्र मोहन सैनी अपनी पालतू कुतिया को टहलाने के लिए थाना कर्नलगंज के ठीक पीछे बने नगर निगम वर्कशौप पार्क में ले गए. पार्क में बने कुएं के पास उन्हें एक जूता दिखाई दिया. जूते पर उन्हें संदेह हुआ तो उन्होंने फोन कर के घर वालों को बुला लिया. जूता देखते ही अतुल ने कहा, ‘‘अरे यह जूता तो दीपेंद्र भइया का है.’’

इस के बाद अतुल, सागर और ज्ञान ने कुएं में झांका तो उन्हें उस में एक लाश दिखाई दी.

जूते से सब को यही लगा कि कुएं में पड़ी लाश दीपेंद्र की हो सकती है. इसलिए तुरंत इस बात की सूचना थाना कर्नलगंज पुलिस को दी गई. सूचना मिलते ही थानाप्रभारी अनिल कुमार सिंह यादव सिपाहियों के साथ वहां आ पहुंचे.

उन्होंने साथ आए सिपाहियों की मदद से लाश बाहर निकलवाई तो उसे देखते ही आशा देवी रोने लगीं. उन्हीं के साथ घर के अन्य लोग भी रोने लगे. वह लाश 2 दिनों से गायब आशा देवी के 30 वर्षीय बेटे दीपेंद्र की थी.

दीपेंद्र की हत्या और लाश बरामद होने की खबर आसपास के मोहल्लों तक पहुंची तो पार्क में अच्छीखासी भीड़ जमा हो गई. लोगों को लग रहा था कि अगर पुलिस ने समय पर काररवाई की होती तो उस की जान बच सकती थी. इसी बात को ले कर लोगों में गुस्सा था. सूचना पा कर एसपी (क्राइम) एम.पी. वर्मा और क्षेत्राधिकारी पी.के. चावला भी घटनास्थल पर आ गए थे.

भीड़ की नाराजगी को भांप कर उन्हें लगा कि यहां बवाल हो सकता है, इसलिए उन्होंने बजरिया, नवाबगंज, ग्वालटोली, स्वरूपनगर, काकादेव आदि थानों की पुलिस बुला ली. इस के बाद गुस्साई भीड़ को उचित काररवाई का आश्वासन दे कर समझाया और कोई अनहोनी हो, उस के पहले ही घटनास्थल की सारी काररवाई निबटा कर लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया.

आफरीन के प्यार में मनोहर के 8 टुकड़े

6 जून, 2023 की सुबह लगभग साढ़े 7 बजे मनोहर लाल हर रोज की तरह अपने साथ 2 खच्चर ले कर रोजीरोटी की तलाश में घर से निकला था. घर से निकलते समय उस ने बताया था कि वह अपना काम खत्म करने के बाद अपने एक परिचित से मिलने जाएगा, जिस के कारण घर आने में थोड़ा लेट भी हो सकता है.

15 दिन बाद उस की शादी की डेट फिक्स थी. उसी कारण उस के घर की कुछ मरम्मत का काम चल रहा था. शादी के कारण ही उस ने अपने परिचित से कुछ पैसों की व्यवस्था करने को कहा था. जिस के कारण वहां पर उस का जाना बहुत ही जरूरी था.

मनोहर लाल अपना काम खत्म कर अकसर 4-5 बजे तक घर पहुंच जाता था, लेकिन उस दिन वह शाम के 6 बजे तक भी घर नहीं पहुंचा तो उस के परिवार वाले चिंतित हो उठे. फिर भी उन्होंने सोचा कि कुछ देर आ जाएगा. लेकिन वह देर रात तक घर नहीं पहुंचा तो उसे ले कर घर वाले परेशान हो उठे. उन्होंने यह बात अपने पड़ोसियों के अलावा अपने कुछ रिश्तेदारों को भी बता दी थी.

उसी समय उन्होंने रिश्तेदारों के साथ मनोहर लाल की खोजबीन शुरू की. हालांकि मनोहर लाल अपने घर वालों से किसी परिचित के यहां जाने वाली बात कह कर गया था, लेेकिन वह किस के पास गया था, यह नहीं जानते थे. यही कारण रहा कि रात भर घर वाले अपने रिश्तेदारों के साथ उसे इधरउधर ढूंढते रहे, लेकिन मनोहर लाल का कहीं भी पता नहीं चला.

उस के बाद घर वालों ने 7 जून, 2023 को अपने रिश्तेदारों के साथ हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के अंतर्गत किहार थाने में जा कर उस की गुमशुदगी दर्ज करा दी. थाने में गुमशुदगी की सूचना दर्ज होते ही पुलिस प्रशासन ने उसे हर जगह खोजने की भरसक कोशिश की, किंतु उस का कहीं भी अतापता नहीं चल सका.

9 जून को सलूनी इलाके में एक नाले से वहां से गुजर रहे लोगों को बदबू आती महसूस हुई. तब स्थानीय लोगों ने इस की सूचना पुलिस के गश्ती दल को दी. इस सूचना पर गश्ती दल पुलिस नाले पर पहुंची. तब पुलिस ने वहां से 3 बोरियां निकालीं. तीनों बोरियों को खोल कर देखा तो वहां मौजूद सभी लोगों की आंखें खुली रह गईं. उन बोरियों में किसी पुरुष के शव को 8 टुकड़ों में काट कर भरा गया था. फिर तीनों ही बोरियों को नदी में डाल कर पत्थरों से दबा दिया गया था.

पुलिस ने उस शव की शिनाख्त कराने की कोशिश की तो उस की पहचान मनोहर लाल के रूप में हुई. वीभत्स तरीके से की गई हत्या की यह खबर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई. इस तरह से मनोहर लाल की हत्या की बात सामने आते ही पूरे हिमाचल प्रदेश में सनसनी सी मच गई.

मनोहर लाल की दर्दनाक और निर्मम हत्या ने आसपास के लोगों को झकझोर कर रख दिया दिया था. सभी लोग इस बात को सोच कर परेशान थे कि आखिर मनोहर लाल के साथ क्या हुआ और किस ने, क्यों उस के साथ जघन्य अपराध किया.

प्रेम प्रसंग का मामला आया सामने

उसी जांचपड़ताल के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि मनोहर लाल की एक मुसलिम लडक़ी से दोस्ती थी. जबकि इस बात की जानकारी उस के घर वालों को नहीं थी. यह बात सामने आते ही पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लिया और उस की तुरंत ही जांचपड़ताल भी शुरू कर दी.

पुलिस को लग रहा था कि मनोहर लाल की हत्या की मुख्य वजह उस की दोस्ती ही रही होगी. इसी शक के आधार पर पुलिस ने उस मुसलिम युवती के घर वालों को पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया.

चूंकि मामला दूसरे धर्म से जुड़ा था, इसलिए गैर मुसलिम लोग आरोपियों को फांसी की सजा देने की मांग करने लगे. विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं ने इस घटना के विरोध में जिला मुख्यालय से रोष मार्च निकाला और आरोपियों को फांसी की सजा देने की मांग की.

क्षेत्र में इस मामले के तूल पकड़ते ही 13 जून, 2023 चंबा जिला मुख्यालय में जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन द्वारा संयुक्त प्रैस कौन्फ्रैंस का आयोजन किया गया, जिस में चंबा एसपी अभिषेक यादव ने पत्रकारों को बताया कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए एसआईटी तेजी के साथ जांचपड़ताल कर रही है. उन्होंने बताया कि इस मामले में शब्बीर नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है. साथ ही 2 नाबालिग लड़कियों को भी पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है, जिन से लगातार पूछताछ जारी है.

उसी पूछताछ के दौरान पुलिस को पता चला कि मनोहर लाल के एक मुसलिम युवती के साथ प्रेम प्रसंग चल रहा था, जिस की जानकारी होने के बाद युवती के घर वालों ने मनोहर लाल को अपने घर बुला कर उस के साथ मारपीट भी की थी. पता चला कि मारपीट में युवती के चाचा-चाची मुसाफिर हुसैन और फरीदा बेगम भी शामिल थी. पुलिस ने पूछताछ के लिए दोनों को हिरासत में ले लिया है.

प्रैस वार्ता करते हुए डिप्टी कमिश्नर अपूर्व देवगन ने मीडिया को बताया कि इस जघन्य अपराध के खुलासे के लिए प्रशासन पूरी तरह से लगा हुआ है. इस मामले को ले कर समाज के हर वर्ग को एक साथ मिल कर खड़े होने की जरूरत है. कोई भी राजनैतिक नुमाइंदा या समाजसेवी ऐसी धार्मिक सूचनाएं न फैलाए, जिस से आपस में मनमुटाव की स्थिति पैदा हो. स्थिति पूरी तरह से जिला प्रशासन के नियंत्रण में है.

घटना के विरोध में लोग हुए बेकाबू

प्रशासन की लाख कोशिशों के बावजूद भी क्षेत्र की स्थिति बिगड़ती गई. 15 जून, 2023 को कुछ स्थानीय लोग आक्रोशित हो उठे और उन्होंने आरोपियों के घरों में आग लगा दी. यही नहीं आक्रोशित भीड़ ने किहार थाने पहुंच कर सभी आरोपियों को फांसी की सजा देने की मांग की. आक्रोशित भीड़ ने थाने के भीतर घुसने की भी कोशिश की, जिसे बमुश्किल पुलिस बल द्वारा रोका गया.

इस सब की सूचना पाते ही चंबा एसपी अभिषेक यादव और डिप्टी कमिश्नर अपूर्व देवगन भी थाने पहुंच गए. इस दौरान दोनों ही अधिकारियों ने इस मामले में संलिप्त लोगों के खिलाफ सख्त काररवाई करने का आश्वासन दिया. अपूर्व देवगन ने इस तरह के बेकाबू हुए उग्र स्वरूप को देखते हुए सलूणी में धारा 144 लागू करने की अधिसूचना जारी करा दी.

क्षेत्र में धारा 144 लगने के बावजूद भी स्थानीय लोगों का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा था. उसी दौरान 17 जून, 2023 को बीजेपी ने एक प्रैस कौन्फ्रैंस कर आरोपियों पर इलजाम लगाते हुए बताया कि आरोपी परिवार ने 100 बीघा सरकारी जमीन पर कब्जा कर रखा है. उन के बैंक अकाउंट में 2 करोड़ रुपए जमा हैं. इस के अलावा आरोपी परिवार बैंक से 2 हजार रुपए के नोट के 95 लाख रुपए की मोटी रकम अब तक बदलवा चुका है.

आरोपी परिवार के सरफराज मोहम्मद का आपराधिक रिकार्ड भी रहा है. इस के अतिरिक्त जयराम ठाकुर ने यह भी आरोप लगाया कि इस परिवार के तार 1998 में साटुंडी में सामूहिक हमले से भी जुड़े हुए थे. इस घटना में 35 बेकुसूर लोगों की जान चली गई थी.

लोगों का कहना था कि मनोहर लाल ने आखिर 6 जून की सुबह आफरीन के घर में ऐसा क्या देखा, जिसके कारण उसकी निर्मम हत्या कर दी गई? लोग उस परिवार को आतंकी माफिया मानते थे. शक इस बात का भी हो रहा है कि परिवार के अतिरित उस दिन उस घर में कोई अन्य संदिग्ध भी मौजूद थे? या फिर मनोहर लाल को कातिल परिवार के आतंकियों से संबंधों का पता चल गया थाï. तभी तो उसे निर्मम तरीके से मार दिया.

लोग कातिल परिवार के घर को आतंकी होने की बात को कैसे झुठला सकते थे, क्योंकि इन के मुखिया की आतंकी हमले में भी पूर्व में संदिग्ध भूमिका रही थी? इस के अलावा कातिल परिवार के पास इतनी अधिक मात्रा में अकूत संपत्ति होना भी कहीं न कहीं एक प्रश्नचिह्न खड़ा करता है. जिस की विस्तृत जांच एनआईए से कराए जाने की लोग मांग करने लगे.

लोगों का कहना है कि आरोपी परिवार ने अपने काले कारोबार, आतंकियों से संबंधों और मनोहर हत्याकांड से जुड़े सभी साक्ष्यों को समाप्त करने की मंशा से अपने घरों में सुनियोजित षडयंत्र के तहत खुद आग लगवाई, आक्रोशित भीड़ के वहां पर पहुॅचने से पहले ही वहां पर आग लग चुकी थी. इस बात की भी विस्तृत जांच कराने की मांग की गई.

साल 1998 में चंबा के शतकंडी कांड जिस में इस्लामिक आतंकवादियों ने गोली मार कर 35 हिंदुओं की निर्मम हत्या की थी और एक मुसलिम को छोड़ दिया था. यह भी जांच एजेंसियों के घेरे में था. आरोप है कि यह परिवार शुरू से ही राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल रहा है. अब लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर इस के ऊपर किस का वदहस्त है?

लोगों के आक्रोश को देखते हुए पुलिस ने इस मामले में आरोपी परिवार के 11 लोगों को हिरासत में ले लिया था. थाने ले जा कर उन से कड़ी पूछताछ की गई. पुलिस पूछताछ के दौरान मनोहर लाल मर्डर केस का जो खुलासा हुआ, उस की कहानी इस प्रकार निकली—

हिमाचल प्रदेश की सुरम्य चंबा घाटी में बसा सलूणी का भंडाल गांव लुभावने पहाड़ी दृश्यों, नदी किनारे बने घरों, स्टेट छत वाली घास के शेड, सुंदर रास्तों और आकर्षक जंगलों के साथ अपने आप में एक छोटा स्वर्ग माना जाता है. इस गांव में लगभग 100 घर हैं, जिन में हिंदू, मुसलिम के अलावा बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय है.

शब्बीर के घर मनोहर का था आनाजाना

ग्राम पंचायत भोदल के गांव थरोली में रहता था रामू अधवार का परिवार. रामू अधवार शुरू से ही खच्चरों के सहारे अपनी रोजीरोटी चलाते आ रहे थे. उन के पास खेती की थोड़ीबहुत जमीन भी थी. मनोहर लाल 3 बहनों में सब से बड़ा और इकलौता भाई था.

मनोहर लाल कुछ समझदार हुआ तो उस ने अपने पापा की जिम्मेदारी संभालते हुए खेती करने के अलावा खच्चरों पर सामान ढोने का काम शुरू कर दिया, जिस के सहारे उस के परिवार की रोजीरोटी ठीक से चलने लगी थी.

मनोहर लाल इस वक्त 22 साल का हो चुका था. उस की शादी की उम्र हुई तो उस के घर वालों ने उस के लिए एक लडक़ी की तलाश शुरू कर दी. उसी दौरान उन्हीं के एक रिश्तेदार के माध्यम से एक लडक़ी से उस की शादी की बात भी पक्की हो गई थी.

शादी की बात पक्की होते ही उस के घर वालों ने शादी की तैयारियां शुरू कर दी थीं. उसी तैयारी के चलते सब से पहले उन्होंने अपने घर की मरम्मत का काम भी शुरू कर दिया था. उसी मरम्मत के लिए वह 6 जून, 2023 को अपने एक परिचित से कुछ पैसे लाने की बात कह कर घर से निकला था.

पुलिस पूछताछ के दौरान जो जानकारी सामने आई, उस में पता चला कि मनोहर लाल का शब्बीर के घर आनाजाना था. शब्बीर अहमद की 2 नाबालिग बहने थीं. उन्हीं में से एक का नाम आफरीन था. उसी आनेजाने के दौरान मोहन लाल की आफरीन से दोस्ती हो गई.

दोस्ती होने के बाद दोनों ही मोबाइल पर बात करने लगे थे, जिस की जानकारी धीरेधीरेआफरीन के घर वालों को भी हो गई थी. इस जानकारी के मिलते ही आफरीन के घर वालों ने उसे समझाने की कोशिश की, लेकिन उस के बावजूद भी दोनों ही मोबाइल पर बात करने से बाज नहीं आए.

आफरीन के घर वालों ने पुलिस को बताया कि उन्होंने कई बार मनोहर लाल को अपने घर आने से मना किया था, लेकिन वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आया. उस की उन्हीं हरकतों से आजिज आ कर उन्होंने आफरीन से ही फोन करा कर उसे अपने घर बुलाया.

2 दिनों तक लाश के पास खड़े रहे खच्चर

6 जून, 2023 को मनोहर लाल अपने घर वालों से झूठ बोल कर अपने साथ दोनों खच्चरों को ले कर घर से निकला था. मनोहर लाल ने आफरीन के घर जाने से पहले ही अपने दोनों खच्चरों को सलूनी नाले के पास छोड़ दिया. फिर वह आफरीन के घर चला गया. उस के बाद उन्होंने उसे फिर से समझाने की कोशिश की. लेकिन वह उन की एक भी बात मानने को तैयार न था.

उसी से तंग आ कर उन्होंने उसे घर में ही डंडों से बुरी तरह से मारापीटा. जब मनोहर लाल बेहोश हो गया तो उन्होंने उस की हत्या कर दी. उस के बाद उस की लाश को ठिकाने लगाने के लिए लकड़ी काटने वाली आरी से उसे 8 टुकड़ों में काट डाला. फिर उस के सभी टुकड़ों को 3 बोरियों में भर कर नाले में पानी के नीचे पत्थरों से दबा दिया.

तभी मनोहर लाल के गायब होने की खबरें फैलीं. उस के गायब होते ही उसे उस के घर वालों के साथसाथ पुलिस ने भी सभी जगह ढूंढा, लेकिन उस का कहीं भी अतापता नहीं चला. उसी दौरान सलूनी इलाके में एक नाले के पास से अचानक आई बदबू से लोग परेशान हो उठे थे. उसी नाले के पास कई दिनों से 2 खच्चर लगातार खड़े हुए थे.

स्थानीय लोगों को उन खच्चरों का लगातार खड़े रहना अजीब सा लगा. वहां पर रह रहे कुछ लोग जानते भी थे कि ये खच्चर मनोहर लाल के हैं. लेकिन फिर भी किसी ने उस के बारे में गहराई से नहीं सोचा. धीरेधीरे जब मनोहर लाल के गायब होने की खबर क्षेत्र में फैली तो लोगों ने अनुमान लगाया कि इस तरह से खच्चरों के खड़े होने का मतलब मनोहर लाल के साथ कुछ अनहोनी होने की संभावना को दर्शाता है.

यही सोच कर लोगों ने वहां से गुजर रहे नाले में देखा तो वहां पर एक व्यक्ति के पैर का जूता और उस के पास ही बोरे दबे नजर आए. तब उस की सूचना पुलिस को दी गई. फिर उसी नाले से मनोहर लाल के शव के 8 टुकड़े बरामद हुए.

इस केस में जहां एक तरफ आरोपी के घर वालों ने मनोहर लाल पर एक साथ 2 युवतियों के साथ प्रेम प्रसंग का आरोप लगाया था. वहीं इंटरनेट पर मृतक मनोहर लाल के बारे में कई आधारहीन खबरें प्रसारित होने से पीडि़त परिवार के लोग बेहद दुखी और परेशान थे.

घर वालों ने प्रेम प्रसंग की बात को नकारा

इस मामले में मीडिया से बातचीत करते हुए मनोहर लाल के पिता रामू अधवार, मां जानकी, बहनें त्रिशला, सृष्ठा, सीमा और चचेरे भाई मानसिंह, उत्तम सिंह व अन्य ने बताया कि मनोहर लाल के बारे में जो प्रेम संबंधों की अफवाहें उड़ाई जा रही हैं, वे सब बेबुनियाद हैं. इस मामले को प्रेम संबंध से जोड़ कर केस को भटकाने का प्रयास किया जा रहा है.

परिजनों ने बताया कि मनोहर लाल एक शांत स्वभाव वाला सीधासादा युवक था. जो कि सभी लोगों से मुसकराते हुए प्रेम से बात करता था. वह हमेशा ही अपने काम से काम रखता था. अगर उस का किसी युवती से प्रेम प्रसंग चल रहा होता तो वह शादी की बात चलने से पहले ही अपने परिवार वालों को जरूर बता देता.

मनोहर लाल के बुजुर्ग मातापिता का कहना था कि उन के इकलौते बेटे के आरोपियों को फांसी की सजा मिलनी चाहिए. मृतक मनोहर लाल की बुजुर्ग मां जानकी का रोरो कर बुरा हाल था. मां ने रोते हुए बताया कि 15 दिन बाद ही उन के बेटे की शादी थी. शादी की पूरे घर में धूमधाम से तैयारियां चल रही थी. जैसेतैसे कर घर की मरम्मत का काम चल रहा था. लेकिन उस के बेटे के खत्म होते ही उस की सारी तैयारियां धरी की धरी रह गईं. बुजुर्ग मां का बेटे के लिए बहू लाने का सपना भी उस की अर्थी के साथ ही टूट गया.

पुलिस इस मामले में 11 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी थी. पुलिस इस मामले से जुड़े सभी आरोपियों की पृष्ठभूमि भी खंगाल रही थी. आरोपियों के व्यवसाय से ले कर कहांकहां इन लोगों को आनाजाना था. किन लोगों से ये लोग मिलते थे. इस सब की जानकारी जुटाई जा रही थी.

आरोपियों की जम्मूकश्मीर के डोडा जिले में भी रिश्तेदारी है. वहां से भी लोग इन के घर आतेजाते रहते थे. इस बात को भी गंभीरता से लेते हुए हिमाचल प्रदेश की पुलिस डोडा पुलिस के साथ संपर्क साधने में लगी हुई थी.

प्रदेश सरकार ने एसआईटी से 15 दिन के भीतर पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट मांगी थी. पुलिस प्रशासन ने शांति व्यवस्था को देखते हुए चंबा में 160 दिनों के लिए धारा 144 लगाई थी. वहीं नेताओं व अन्य लोगों को पीडि़त परिवार के सदस्यों से मिलने पर भी पाबंदी लगा दी थी. साथ ही कुछ संदिग्धों पर भी पुलिस अपनी नजर रखे हुए थी.

बहरहाल, पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ करने के बाद उन्हें कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया.

(कथा पुलिस सूत्रों व जनचर्चा पर आधारित है )