खामोश हुआ विद्रोही तेवर – भाग 1

29 सितंबर, 2015 की रात साढ़े 9 बजे के बाद पत्रकार अजय विद्रोही खाना खाने के बाद टहलने के लिए जैसे ही घर से बाहर सडक़ पर आए, पड़ोस में रहने वाला दीपक सिंह मिल गया. सडक़ पर खड़े हो कर वह उस से बातें करने लगे. तभी उन का बेटा शुभम फोन ले कर उन के पास आ कर बोला, ‘‘कोई अशोक अंकल हैं, वह आप से बात करना चाहते हैं.’’

बेटे से फोन ले कर जैसे ही अजय विद्रोही ने हैलो कहा, दूसरी तरफ से आवाज आई, ‘‘भाई अजय, मैं अशोक सिंह…’’

‘‘हां भाई अशोक, बताएं… इतने दिनों बाद कैसे मेरी याद आई, जरूर कोई खास काम होगा तभी याद किया है?’’ अजय विद्रोही ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा.

‘‘हां, जरूरी काम है.’’ अशोक सिंह ने कहा.

‘‘बताओ, कहो तो अभी आ जाऊं?’’ अजय विद्रोही ने कहा.

‘‘नेकी और पूछपूछ. आ जाते तो काम हो जाता. हम सोच रहे हैं कि जिस मामले को ले कर हमारे बीच मतभेद चल रहे हैं, उस पर बैठ कर बातचीत कर लेें, शायद बीच का कोई रास्ता निकल ही आए.’’ अशोक सिंह ने कहा.

‘‘ठीक है, मैं आ रहा हूं. मैं भी चाहता हूं कि मामला सुलझ जाए.’’ कह कर अजय ने फोन काट दिया. इस के बाद बेटे शुभम को आवाज दे कर कहा कि वह एक आदमी से मिलने जा रहे हैं. अभी थोड़ी देर में लौट आएंगे. बेटे से कह कर वह पैदल ही चल पड़े. उन्हें मठ के पास अशोक सिंह से मिलने जाना था, जो उन के घर से थोड़ी ही दूरी पर था.

वह तेज कदमों से बेफिक्री से चले जा रहे थे. अपने घर से वह कुछ दूर ही गए होंगे कि एक मोटरसाइकिल पीछे से आ कर धीरेधीरे उन के बराबर पर चलने लगी. उस पर 2 युवक सवार थे. बराबरी पर चल रही मोटरसाइकिल देख कर अजय कुमार ठिठके और जैसे ही उन्होंने उन की ओर देखा तो पीछे बैठा युवक उन्हें देख कर मुसकराया.

उन्होंने उस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया और पहले से भी ज्यादा तेज गति से चल पड़े. मोटरसाइकिल सवार वहीं रुक गए. अजय भीड़भाड़ वाली चौक बाजार स्थित शराब की दुकान के पास पहुंचे थे कि मोटरसाइकिल सवार पीछे से आए और पीछे बैठे युवक ने अजय विद्रोही पर 2 गोलियां चला दीं. लोग कुछ समझ पाते, वे तेजी से चले गए. अजय विद्रोही गिर कर छटपटाने लगे थे.

गोलियों की आवाज सुन कर दुकानदारों ने दुकानों के शटर गिरा कर भाग लिए. पल भर में वहां गहरा सन्नाटा पसर गया. भागते हुए कुछ दुकानदारों ने देखा कि गोली किसी आदमी को मारी गई है और वह आदमी सडक़ पर पड़ा तड़प रहा है तो वे उस के पास पहुंचे.

पत्रकार अजय विद्रोही को बाजार के सभी दुकानदार जानते थे, इसलिए उन्होंने उन्हें पहचान लिया. इस के बाद अपना फर्ज समझते हुए लहूलुहान अजय कुमार को एक टैंपो में लादा और जिला चिकित्सालय ले गए. इस बीच उन के शरीर से काफी खून बह चुका था, जिस से रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया.

चूंकि अजय विद्रोही को शहर के ज्यादातर लोग जानते थे, इसलिए कुछ ही देर में पूरे शहर में उन्हें गोली मारे जाने की खबर फैल गई. अजय के घर वाले भी खबर पा कर अस्पताल पहुंच गए. वहां जब उन्हें उन की मौत की जानकारी मिली तो वे रोनेबिलखने लगे. इस के बाद जैसेजैसे शहर के लोगों को पत्रकार अजय विद्रोही की हत्या की जानकारी होती गई, लोग अस्पताल पहुंचने लगे. कुछ ही देर में अस्पताल में भीड़ लग गई.

किसी ने पुलिस को फोन द्वारा सूचना तो दे दी थी, लेकिन थाना सीतामढ़ी के थानाप्रभारी भुनेश्वर प्रसाद सिंह घंटों बाद अस्पताल पहुंचे. तब नाराज स्थानीय नेताओं और नागरिकों ने थानाप्रभारी को अस्पताल के अंदर नहीं जाने दिया. रात काफी होने के बावजूद माहौल पूरी तरह से गरम और विस्फोटक था. भुवनेश्वर प्रसाद सिंह ने इस की सूचना वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को दी तो कुछ ही देर में डीआईजी प्रदीप कुमार श्रीवास्तव, एसपी हरिप्रसाद यश, एएसपी (अभियान) संजीव कुमार, डीएसपी राजीव रंजन भी जिला अस्पताल पहुंच गए थे.

काफी देर तक नेताओं और पुलिस अधिकारियों के बीच नोकझोंक होती रही. जनता अजय विद्रोही की लाश पुलिस को सौंपने को तैयार नहीं थी. वह हत्यारों को 24 घंटे के अंदर गिरफ्तार करने की मांग कर रही थी. पुलिस अधिकारियों ने जब उन्हें आश्वासन दिया कि अजय के हत्यारे जल्द से जल्द गिरफ्तार किए जाएंगे, तब कहीं लाश पुलिस को सौंपी गई.

लाश कब्जे में ले कर पुलिस ने उसी रात आवश्यक काररवाई कर के उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. यह घटना 29 सितंबर, 2015 की थी. पुलिस ने रात में ही घटनास्थल का निरीक्षण कर के वहां से 9 एमएम पिस्टल के 2 खोखे बरामद किए.

55 वर्षीय पत्रकार अजय कुमार विद्रोही बिहार के जिला सीतामढ़ी के मोहल्ला कोर्ट बाजार में अपने परिवार के साथ रहते थे. उन के परिवार में पत्नी शोभा शर्मा के अलावा 3 बच्चे थे. वह एक खोजी पत्रकार थे और जनहित के मुद्दों पर अननी कलम चलाते थे. यही वजह थी कि अगले दिन उन की हत्या के विरोध में नेताओं ने स्थानीय लोगों के साथ विरोध प्रदर्शन करते हुए मेन रोड जाम कर दिया. दुकानदारों ने भी अपनी दुकानें बंद कर लीं. भीड़ ने कई दुपहिया वाहनों में आग भी लगा दी थी.

शहर का माहौल पूरी तरह विस्फोटक बन गया था. पुलिस ने तुरंत मृतक के बड़े बेटे शुभम शर्मा की ओर से अज्ञात हत्यारों के खिलाफ भादंवि की धारा 302/120बी/364/34 के तहत मुकदमा दर्ज कर के आगे की काररवाई शुरू कर दी थी. शहर की स्थिति को देखते हुए एसपी हरिप्रसाद यश ने शहर में आसपास के थानों की पुलिस और पीएसी बुला ली. शहर पुलिस छावनी में तब्दील हो चुका था.

एएसपी (अभियान) संजीव कुमार और डीएसपी (सदर) राजीव रंजन स्थिति पर नजर रखे हुए थे. प्रदर्शनकारी सीतामढ़ी नगर थाने के प्रभारी भुवनेश्वर प्रसाद सिंह को जिम्मेदार ठहराते हुए उन्हें तत्काल निलंबित करने की जिद पर अड़े थे. आखिरकार एसपी को उन की मांग स्वीकार करनी पड़ी. उन्होंने तत्काल प्रभाव से भुवनेश्वर प्रसाद सिंह को लाइन हाजिर कर दिया.

उन के स्थान पर आशीष कांति को थाने का चार्ज दिया गया. चार्ज मिलते ही आशीष कांति ने सब से पहले घटनास्थल की जांच की. उन्होंने आसपास के लोगों से भी पूछताछ की. इसके बाद वह मृतक अजय विद्रोही के घर वालों से मिले. अजय की पत्नी शोभा शर्मा ने किसी से दुश्मनी होने की बात से इंकार किया. उस समय उन के घर का माहौल काफी गमगीन था,

इसलिए वह ज्यादा कुछ नहीं पूछ सके. अब तक की जांच में हत्यारों के बारे में पता नहीं चला तो आशीष कांति ने अजय विद्रोही के मोबाइल फोन की काल डिटेल्स निकलवाई. एकएक नंबर की उन्होंने गहनता से जांच की तो पता चला कि उन के मोबाइल पर आखिरी फोन जिस नंबर से आया था, वह शहर में ऊंची पहुंच रखने वाले इस्टू हाऊस के मालिक अशोक सिंह का था. अशोक के फोन आने के बाद ही अजय विद्रोही उन से मिलने चौक बाजार स्थित मठ की ओर जा रहे थे. इस बात की पुष्टि उन के बेटे शुभम ने भी की थी.

अंधविश्वास में गई जान

उत्तराखंड की धार्मिक नगरी हरिद्वार में ज्वालापुर स्थित झाडान के बाजार की दुकानें बंद होने का समय हो चुका था. रात के 8 बज चुके थे. सभी दुकानदार अपनीअपनी दुकानें बंद करने लगे थे. उन्हीं में दुकानदार रवि अपने पास की दुकान से शोरशराबा सुन कर चौंक गए. उन्होंने उस ओर एक नजर देखा, फिर फटाफट अपनी दुकान बंद की और वहां तुरंत जा पहुंचे. वहां पहले से ही कुछ लोग जमा थे.

उन से ही रवि को मालूम हुआ कि स्थानीय व्यापारियों के नेता रहे स्वर्गीय अरविंद मंगल की 60 वर्षीया पत्नी सुनीता मंगल अपने घर से अचानक लापता हो गई हैं. सभी को अचरज हो रहा था कि वह कहां गई होगी? सुबह तो अपने ही घर पर ही दिखाई दी थी. कुछ लोगों ने बताया कि करीब 10 बजे के बाद वह नहीं देखी गई. लोगों से बातचीत में ही रवि को यह भी पता चला कि कुछ दिन पहले उन के घर पर मरम्मत और रंगाईपुताई का काम हुआ था.

सुनीता मंगल हुईं लापता

सुनीता मंगल एक संयुक्त परिवार की बुजुर्ग महिला थीं. उन का छोटा बेटा निखिल मंगल नोएडा में नौकरी करता था. सुनीता बड़े दिवंगत बेटे आशुतोष मंगल के 12 साल के बेटे वंश के साथ रहती थी. वंश एक स्थानीय स्कूल में पढ़ाई करता था. थोड़े समय में ही वहां और भी कई दुकानदार जमा हो गए.

सभी ने सुनीता के घर जाने का एकमत से फैसला लिया. वहां से सुनीता का घर थोड़ी दूरी पर था. कुछ समय में सभी उस के घर पर थे. वहां 12 वर्षीय वंश अकेला था. उस ने बताया कि वह सुबह स्कूल चला गया था. दोपहर को वापस घर लौटने पर पाया कि दादी नहीं हैं. फिर उस ने दादी को मोहल्ले में आसपास तलाश किया. मगर उसे दादी के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली. इस बारे में उस ने चाचा निखिल को फोन से बता दिया था, जो वह नोएडा में थे.

इसी बीच रवि ने सुनीता मंगल के लापता होने की जानकारी सीओ (ज्वालापुर) निहारिका सेमवाल को दे दी. निहारिका सेमवाल ने तुरंत इस बाबत कोतवाल ज्वालापुर कुंदन सिंह राणा और एसएसआई संतोष सेमवाल को मौके पर पहुंच कर मामले की जांच के आदेश दिए. राणा तुरंत पुलिस फोर्स के साथ सुनीता मंगल के घर जा पहुंचे.

कोतवाल राणा और एसएसआई संतोष सेमवाल ने वंश से सुनीता के बारे में पूछताछ की. वंश ने जो कुछ बताया उसे बयान के तौर पर नोट कर लिया गया. उस के बाद राणा और सेमवाल ने पड़ोसियों से सुनीता के बारे में पूछताछ की. उसी दरम्यान वहां सीओ निहारिका सेमवाल और एसपी (क्राइम) रेखा यादव भी पहुंच गईं. उन्होंने भी वंश से पूछताछ की.

इसी बीच वंश के चाचा का फोन आ गया कि वह नोएडा से निकल चुके हैं. ढाईतीन घंटे में ज्वालापुर पहुंच जाएंगे. रेखा यादव ने ज्वालापुर से सुनीता मंगल के लापता होने की जानकारी जिले के एसएसपी अजय सिंह को भी दी. अगले दिन 9 मई, 2023 को एसएसआई संतोष सेमवाल और सीआईयू के प्रभारी रणजीत तोमर ने सब से पहले लापता सुनीता मंगल के मोबाइल की काल डिटेल्स निकलवाने की काररवाई की.

पेंटर नसीम ने स्वीकारा जुर्म

इस के बाद सुनीता के घर के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच करवाई गई. सीसीटीवी फुटेज में पुलिस को एक सुराग मिला, जो सुनीता के एक व्यक्ति के साथ बैट्री रिक्शा से पथरी रोह गंगनहर की ओर जाने का पता चला. पुलिस ने उस समय उस रिक्शा में सुनीता के साथ बैठे व्यक्ति की पहचान जानने की शुरुआत की.

10 मई, 2023 को सुनीता के मोबाइल की काल डिटेल्स भी आ गई, जिस में एक नया नंबर भी था. उस नंबर की जांचपड़ताल से मालूम हुआ कि वह नंबर ज्वालापुर में ही मोहल्ला पावधोई निवासी पेंटर नसीम का है. पेंटर नसीम की तलाश शुरू की गई. निखिल से मालूम हुआ कि नसीम ने कुछ कुछ दिन पहले उस के घर की रंगाईपुताई की थी. वह अपने पिता के साथ मिल कर इस काम को करता है.

नसीम का उस के घर अकसर आनाजाना होता था. कई बार वह पैसे उधार लेने के लिए आता था. सुनीता के बेटे ने नसीम को अपने घर के सदस्य जैसा बताया. उसी दिन शाम को निहारिका सेमवाल ने नसीम को कोतवाली ज्वालापुर पूछताछ के लिए बुलवा लिया. नसीम से सुनीता के बारे में पूछताछ की जाने लगी.

निहारिका ने सीधा सवाल किया, “तुम्हारी 8 मई को मोबाइल पर सुनीता से क्या बात हुई थी? उसी रोज तुम सुनीता के साथ बैट्री रिक्शा में बैठ कर कहां गए थे?”

इस सवाल का नसीम ने कोई जवाब नहीं दिया. नसीम को शांत खड़ा देख पास खड़े कुंदन सिंह राणा ने डांटते हुए पूछा, “क्या सुनीता मंगल के लापता होने में तुम्हारा हाथ है? सचसच बताओ वह कहां है? वरना हमें मुंह खुलवाना भी आता है.”

इस डांट का नसीम पर असर हुआ. वह डर से कांपने लगा. हकलाता हुआ बोला, “जी साहबजी, सब कुछ बताऊंगा, एक गिलास पानी चाहिए.”

“सामने रखा है, पी लो…और पूरी बात बताओ वरना पानी पिलापिला कर डंडे लगाऊंगा.” राणा ने सामने टेबल पर रखे पानी भरे गिलास की ओर इशारा कर डपटते हुए बोले.

नसीम ने गटागट पानी पीने के बाद लंबी सांस ली. कुछ सेकेंड के लिए रुका, फिर बोला, “साहबजी, वह इस दुनिया में नहीं है.”

“इस दुनिया में नहीं है! क्या मतलब है तुम्हारा?” निहारिका ने चौंकते हुए पूछा.

“जी मैडम, वह गंगनहर में डूब गई है.” नसीम बोला.

“डूब गई है? तुम ने डुबाया है?” गुस्से में राणा बोले.

“जी,” नसीम का ‘जी’कहना था कि राणा और निहारिका चौंक गए. उन्होंने एक साथ पूछा, “कैसे डुबाया? क्यों किया ऐसा, पूरी बात बताओ.”

राणा उस का बयान नोट करने के लिए तख्ती पर लगा सादा कागज संभालने लगे. पेन का ढक्कन खोलते हुए बोले, “चलो, बताओ.”

नसीम ने चुरा ली थी ज्वैलरी

नसीम ने पहले अपना पूरा परिचय लिखवाया. परिचय में पिता के नाम के साथ उस ने पूरा पता दिया. उस के बाद उस ने जो बताया, वह चौंकाने वाली थी.

अरविंद मंगल के परिवार से नसीम के परिवार के अच्छे संबंध चले आ रहे थे. मंगल परिवार के तथा उन के कई परिचितों के घरों पर नसीम ही रंगरोगन और पेंट करता था. कुछ दिन पहले ही सुनीता मंगल ने अपने मकान में मरम्मत करवाया था. इस के बाद उन्होंने 15 दिन पहले मकान में पेंट करने के लिए फिर फिर नसीम को बुलवाया. उन्होंने नसीम को पेंट का सामान खरीदवा लिया.

इस के बाद नसीम ने सुनीता मंगल के घर पर पेंट करना शुरू कर दिया. एक कमरे में पेंट करते वक्त नसीम को वहां एक अलमारी की चाबी पड़ी मिली. जब उस ने चुपचाप अलमारी के लौकर में वह चाबी लगाई तो लौकर खुल गया. लौकर में उस वक्त सोने के कुंडल, अंगूठी, लौंग, पैंडल, पायल आदि आभूषण थे, जिन्हें उस ने चुरा लिया था.

इस घटना के 2 दिन बाद सुनीता ने नसीम को बुला कर कहा, “मेरे घर से लाखों रुपए के आभूषण चोरी हो गए हैं. क्या तुम्हें इस की कोई जानकारी है?”

इस के बाद नसीम ने सुनीता को इस बाबत में कोई जानकारी नहीं होने की कह कर टाल दिया, मगर अंदर ही अंदर उसे पकड़े जाने का डर भी सता रहा था.

7 मई, 2023 को उस ने सुनीता से कहा कि पथरी रोड के पास एक तांत्रिक रहता है, वह यह बात बता देगा कि तुम्हारे जेवर किस ने चुराए हैं. तांत्रिक के पास जाने के बहाने नसीम की योजना सुनीता मंगल को गंगनहर के तेज बहाव में धक्का देने की थी.

8 मई, 2023 को सुबह 8 बजे नसीम और सुनीता मंगल बैट्री रिक्शा द्वारा गंगनहर के किनारेकिनारे पथरी रोड पुल के पास पहुंचे थे. यहां पर नसीम ने तांत्रिक से मिलने से पहले सुनीता के कुंडल व अंगूठियां उतरवा ली. इस के बाद उस ने सुनीता मंगल को मां गंगा में जल चढ़ाने के बहाने गंगनहर के तेज बहाव में धक्का दे दिया. जिस से वह पानी में डूब गई.

सुनीता मंगल की हुई लाश बरामद

कोतवाल कुंदन सिंह राणा ने नसीम के ये बयान दर्ज कर लिए थे और नसीम की निशानदेही पर सुनीता मंगल के घर से चुराए हुए सभी जेवर भी बरामद कर लिए. उसी दिन शाम को ही पथरी रोड पुल के पास से ही सुनीता मंगल का शव पुलिस ने बरामद कर लिया. ज्वालापुर पुलिस ने शव का पंचनामा भर कर उसे पोस्टमार्टम हेतु हरिमिलापी अस्पताल, हरिद्वार भेज दिया.

अगले दिन पुलिस ने सुनीता की गुमशुदगी के मामले में आईपीसी की धारा 379, 411 व 302 की बढ़ोतरी कर दी थी. इस के बाद एसएसपी अजय सिंह ने अपने रोशनाबाद स्थित कार्यालय में प्रैसवार्ता के दौरान नसीम को मीडिया के सामने पेश किया और सुनीता मंगल हत्याकांड का परदाफाश कर दिया.

नसीम के लालच व विश्वासघात के कारण जहां एक ओर सुनीता मंगल को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था तो दूसरी ओर नसीम भी हरिद्वार जेल में अपने किए की सजा भुगत रहा है. अपर सत्र न्यायालय द्वारा नसीम की जमानत की याचिका खारिज कर दी थी.

सुनीता मंगल को अपने घर में हुई ज्वैलरी की चोरी का शक पहले से ही नसीम पर था, मगर सुनीता चाहती थी कि बिना शोर मचाए नसीम उन के जेवरों को वापस कर दे, मगर नसीम भी शातिरदिमाग का निकला. उस ने सुनीता मंगल के जेवर उसे वापस करने के बजाए उसे गुमराह कर के मौत के घाट उतार दिया था. 2 बच्चों का बाप नसीम अब हरिद्वार जेल में बंद है.

—पुलिस सूत्रों पर आधारित

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दगाबाज सनम : हनीट्रैप में फंसे नेताजी

प्रेमिका बनी ब्लैकमेलर – भाग 3

यह सब जानकारी मिलने के बाद उसे पहली बार पता चला कि वह बुरी तरह से फंस चुका है. शनीफ ने कई बार प्यार से सिमरन को समझाने की कोशिश की, लेकिन उस ने उस की एक न सुनी. उस का साफ कहना था कि अगर उस ने उसे पैसा नहीं दिया तो वह उसे बुरी तरह से बदनाम कर देगी.

बदनामी के डर से वह बारबार उस की मांग पूरी करता रहा. लेकिन उस की मांग खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही थी. जिस से शनीफ बुरी तरह से तंग आ चुका था. उसी दौरान शनीफ का रिश्ता महाराष्ट्र की एक युवती के साथ पक्का हो गया. हालांकि उस ने रिश्ते वाली बात पूरी तरह से उस से छिपा कर रखी थी. लेकिन पता नहीं उसे किस तरह से शनीफ के रिश्ते की बात पता चल गई. उस के बाद उस ने फिर से उसे ब्लैकमेल करना चालू कर दिया.

शनीफ ने उसे इस बार पैसा देने से साफ मना किया तो उस ने उस से कहा कि यह आखिरी बार है. तुम्हारा निकाह हो जाने के बाद तुम्हें मेरी जरूर तो होगी नहीं. उस के बाद वह उस से कोई पैसा नही मांगेगी.

सिमरन की बात सुनते ही शनीफ को लगा कि इस बार पैसा देने से उस से हमेशाहमेशा के लिए पीछा छूट जाएगा. यही सोच कर उस ने फिर से उसे मोटी रकम दे दी, लेकिन उस के बावजूद भी वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आई. उस ने कुछ ही दिनों में फिर से उस से पैसों की मांग शुरू कर दी थी. परेशान हो कर शनीफ ने उस का फोन तक अटैंड करना बंद कर दिया था.

सिमरन नहीं मानी तो रेत डाला गला

शनीफ ने पुलिस को बताया कि 3 मई, 2023 को सिमरन उस की दुकान पर आ धमकी. उस वक्त दुकान पर काफी ग्राहक खड़े थे. दुकान के सामने आते ही उस ने अपनी स्कूटी रोकी और फिर उसे इशारे से पास बुलाने लगी. उस ने उसे अनदेखा करते हुए अपने ग्राहकों को निपटाया.

उस ने उस के बुलाने पर नहीं गया तो उस ने शनीफ को मोबाइल दिखा कर इशारा किया. उस के इशारे को शनीफ भलीभांति समझता था. उस वक्त दुकान बंद करने का भी समय हो चुका था. आसपास की अधिकांश दुकानें बंद हो चुकी थीं. फिर भी वह अनचाहे मन से उस के पास पहुंचा.

शनीफ ने उस से काफी मिन्नतें की कि वह उसे माफ कर दे. इस वक्त उस के पास उसे देने के लिए कुछ भी नहीं है, लेकिन उस के बाद भी सिमरन अपनी जिद पर अड़ी रही. उस वक्त उस के पड़ोसी उसे शक की निगाहों से देख रहे थे. बारबार उस की धमकी सुन कर शनीफ बुरी तरह पक चुका था.

सिमरन ने फिर से जैसे ही उसे मोबाइल दिखाने की तो शनीफ उस के हाथ से मोबाइल छीन लिया. उस के बाद उसे सडक़ पर दे मारा. फिर वह जल्दी से दुकान की तरफ लपका. जब तक सिमरन ने अपना मोबाइल समेटा, वह दुकान से मीट काटने का छुरा ले कर उस के पास पहुंच गया. जैसे ही सिमरन ने उस के हाथ में छुरा देखा, उस ने वहां से भागने की कोशिश की. लेकिन उस की स्कूटी स्टार्ट नहीं हुई. मौका पाते ही शनीफ ने छुरे से उस का गला रेत दिया.

उस वक्त कई दुकानदार उसे देख रहे थे. लेकिन उस पर खून का भूत सवार होते देख किसी ने भी बोलने की हिम्मत नहीं की. रात के साढ़े 9 बजे के बाजार में सैंकड़ों की मौजूद भीड़ के बीच एक जवान युवती की जघन्य रूप से हत्या किए जाने से बाजार में अफरातफरी मच गई. उस की हत्या को देख कर खरीदार तो इधरउधर हुए ही, साथ ही दुकानदार भी अपनी दुकानें फटाफट बंद कर वहां से निकल लिए थे.

सिमरन को मौत की नींद सुलाने के बाद शनीफ मलिक ने वह छुरा दुकान में रख दिया और फिर वह भी वहां से फरार हो गया. फिर शनीफ ने अपना मोबाइल भी बंद कर लिया था. उस के बाद वह घर पहुंचा, अपने कपड़े चेंज किए और घर वालों को कुछ भी बताए बगैर फरार हो गया.

इस केस के खुलते ही पुलिस ने आरोपी को अदालत में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित. कथा में फातिमा, राशिद परिवर्तित नाम हैं

उज्बेक डांसर का दुखद अंत

आरजू की लाश पर सजाई सेज – भाग 4

आरजू को अपनी स्विफ्ट डिजायर कार में बिठा कर नवीन करोलबाग, धौलाकुआं, ङ्क्षरगरोड से मुनीरका होते हुए देवली गांव पहुंचा. वहां पर नवीन की बुआ रहती हैं. कार को सडक़ पर खड़ी कर के वह अकेला ही बुआ के यहां कार्ड देने गया. आरजू बारबार उस से यही कह रही थी कि तुम शादी के कार्ड बांट तो रहे हो, लेकिन मैं यह शादी होने नहीं दूंगी. नवीन ने तो कुछ और ही सोच रखा था, इसलिए उस की धमकी को उस ने गंभीरता से नहीं लिया.

साढ़े 12 बजे वह देवली से निकला. दोपहर तक उसे अपनी बहन के घर पहुंचना था. साढ़े 12 बजे उसे देवली में ही बज गए. बहन के यहां पहुंचने में उसे 2 घंटे और लगने थे, इसलिए वह कार को तेजी से चलाते हुए सैनिक फार्म, साकेत, महरौली होते हुए वसंतकुंज पहुंचा. वहां बाजार में बीकानेर की दुकान पर उस ने आरजू को गोलगप्पे खिलाए. सवा 2 बजे वह बहन के गांव के लिए निकला. इस बीच आरजू शादी की बात को ले कर उस से बहस करती रही.

नांगल देवत गांव से पहले केंद्रीय विद्यालय के पास सुनसान सडक़ पर उस ने कार रोक दी. आरजू उसे बारबार धमकी दे रही थी. नवीन बेहद गुस्से में था. उस ने आरजू के गले में पड़ी चुन्नी के दोनों सिरे पकड़ कर कस दिए. कुछ ही देर में उस की मौत हो गई. गला दबाते समय आरजू की नाक और मुंह से थोड़ा खून तो निकला ही, उस का यूरिन भी निकल गया था.

आरजू के मरते ही नवीन के हाथपैर फूल गए. नाक व मुंह से निकले खून को आरजू के बैग से पोंछा. आरजू के पास 2 मोबाइल फोन थे. उस ने दोनों के सिमकार्ड निकाल लिए. इस के बाद उस की लाश कार की डिक्की में डाल दी. कार की अगली सीट पर निकले उस के यूरिन को उस ने पहले अखबार से, फिर बोतल के पानी से साफ किया.

बहन के यहां पहुंचने में उसे देर हो चुकी थी. वह बहन के यहां पहुंचा तो बहन अपने दोनों बच्चों के साथ तैयार बैठी थी. फटाफट उन्हें गाड़ी में बिठा कर अपने घर ले आया. हत्या करने के बाद भी वह बहन से सामान्य रूप से बातें करता आया था. चूंकि कार में लाश थी, इसलिए उस ने उस की चाबी अपने पास ही रखी. उस के दिमाग में एक ही बात घूम रही थी कि वह लाश को ठिकाने कहां और कैसे लगाए.

नवीन का जो मकान बना हुआ था, उस के ग्राउंड फ्लोर पर पार्किंग है. पहली मंजिल पर वह खुद रहता है. दूसरी मंजिल पर उस के मातापिता और दादी रहती हैं और तीसरे फ्लोर पर उस का बड़ा भाई संदीप पत्नी के साथ रहता है.

2 फरवरी को नवीन की शादी का दहेज का सामान आ गया था. वह सारा सामान ग्राउंड फ्लोर पर ही रखा हुआ था. 5 फरवरी को उस की बारात जानी थी. घर वालों ने रात को दहेज का सामान के कमरे में सेट कर दिया था. इस के बाद सभी अपनेअपने कमरों में जा कर सो गए. लेकिन नवीन को नींद नहीं आ रही थी. वह लाश को ठिकाने लगाने के बारे में ही सोच रहा था.

उस के मकान की रसोई और अन्य कमरों की वेंटिलेशन के लिए कुछ जगह खाली छोड़ी गई थी. इसे वे शाफ्ट कहते थे. लाश छिपाने के लिए नवीन को वही जगह उपयुक्त लगी. सुबह करीब 5 बजे नवीन उठा और अपनी कार की डिक्की से आरजू की लाश निकाल कर शाफ्ट में डाल दी. लाश के ऊपर उस एक पौलीथिन डाल दी. शाफ्ट में एग्जास्ट फैन लगा था. उस की हवा से कहीं पौलीथिन लाश से हट न जाए, उस के ऊपर घर में पड़ा टूटा कांच डाल दिया. अपने ही घर में लाश को ठिकाने लगा कर नवीन को थोड़ी तसल्ली हुई. अगले दिन वह आरजू का पौकेट पर्स, मोबाइल फोन हैदरपुर बाईपास के नजदीक गहरे नाले में फेंक आया.

उधर आरजू के मांबाप को जब पता चला कि 2 फरवरी को उन की बेटी नवीन के ही साथ गई थी तो कविता चौहान ने नवीन के भाई संदीप से बात की. कविता के दबाव पर संदीप और उस के पिता ने नवीन से बात की तो उस ने बताया कि उस ने आरजू की हत्या कर दी है और उस की लाश को जंगल में फेंक आया है. उस ने यह नहीं बताया कि लाश घर के शाफ्ट में रखी है.

कार में हत्या का सबूत न रह जाए, इस के लिए उस की धुलाई होनी जरूरी थी. दिल्ली के पीतमपुरा गांव में नवीन के रिश्ते के मामा कृष्ण रहते थे. संदीप ने फोन कर के आरजू की हत्या करने वाली बात उन्हें बताई तो उन्होंने तसल्ली दी कि चिंता न करें, आगे का काम वह देख लेगा.

5 फरवरी को नवीन के भात भरने की रस्म पूरी करने के लिए कृष्ण राजपुरा गांव पहुंचा तो वह अपने साथ अपने गांव ही के नवीन को भी साथ लाया था, वह उन का नजदीकी था. भात भरने की रस्म के बाद कृष्ण और नवीन उस की स्विफ्ट डिजायर कार पीतमपुरा ले गए. इसी चक्कर में वे उस की बारात तक नहीं गए. पीतमपुरा में उन्होंने कार की अंदरबाहर अच्छी तरह सफाई करा दी. 6 फरवरी को कार संदीप के घर पहुंचा दी.

शाफ्ट में रखी लाश की बदबू घर में फैलने लगी तो नवीन थोड़ीथोड़ी देर में परफ्यूम छिडक़ देता था. परफ्यूम की बोतल खत्म हो गई तो वह बाजार से तेज सुगंध वाले परफ्यूम की 2 दरजन बोतलें खरीद लाया, जिन में से वह 17 बोतलें छिडक़ चुका था. मेहमान और घर वाले यही समझ रहे थे कि नवीन यह सब शादी की खुशी में कर रहा है. सच्चाई तो तब सामने आई, जब पुलिस ने घर से आरजू की लाश बरामद की.

नवीन खत्री ने अपनी नईनवेली दुलहन के साथ हनीमून के लिए गोवा जाने का प्रोग्राम बनाया था. उस की 6 फरवरी की शाम को दिल्ली से गोवा की फ्लाइट थी. लेकिन वहां पहुंचने से पहले ही उस की फ्लाइट चली गई तो निराश हो कर वह घर लौट आया. इस के बाद किसी काम से वह आजादपुर गया था. रात 10 बजे वह वहां से बस से मौडल टाउन के लिए लौट रहा था, तभी पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया.

नवीन खत्री से पूछताछ के बाद पुलिस ने 12 फरवरी को नवीन खत्री के पिता राजकुमार, भाई संदीप खत्री, रिश्ते के मामा कृष्ण और नवीन को भादंवि की धारा 201, 202, 212 के तहत गिरफ्तार कर लिया. सभी को महानगर दंडाधिकारी श्री सुनील कुमार की कोर्ट में पेश किया गया. पुलिस ने राजकुमार, संदीप खत्री, कृष्ण और नवीन पर जमानती धाराएं लगाई थीं, इसलिए इन चारों को उसी समय कोर्ट से जमानत मिल गई, जबकि नवीन खत्री को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.

नवीन खत्री के पिता राजकुमार हाल ही में जेल से पैरोल पर बाहर आया था. उस ने सन 2005 में गांव के ही अजय का मामूली बात पर कत्ल कर दिया था. हत्या के इस मामले में उस के परिवार के 6 सदस्य जेल गए थे. बहरहाल, कथा लिखने तक प्रेमिका की हत्या करने वाले नवीन खत्री की जमानत नहीं हुई थी. केस की जांच इंसपेक्टर सुधीर कुमार कर रहे हैं.

—कथा पुलिस सूत्रों और आरजू के घर वालों के बयानों पर आधारित

आरजू की लाश पर सजाई सेज – भाग 3

7 फरवरी को पुलिस ने नवीन खत्री को रोहिणी न्यायालय में ड्यूटी मेट्रोपौलिटन मजिस्ट्रेट सोनाली गुप्ता के समक्ष पेश कर के पूछताछ के लिए 3 दिनों के पुलिस रिमांड पर ले लिया. रिमांड अवधि में अभियुक्त नवीन खत्री से विस्तार से पूछताछ की गई तो आरजू चौधरी की हत्या की रोंगटे खड़े कर देने वाली प्रेम, धोखा और छुटकारे की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार निकली.

संजीव चौहान उत्तरी पश्चिमी जिले के गांव राजपुरा, गुड़मंडी में अपने परिवार के साथ रहते थे. उन के परिवार में पत्नी कविता के अलावा 2 बेटियां और एक बेटा था. आरजू उन की दूसरे नंबर की बेटी थी. बड़ी बेटी पायल पढ़लिख कर दिल्ली के ही एक निजी स्कूल में टीचर हो गई थी. दूसरी बेटी आरजू दिल्ली विश्वविद्यालय के लक्ष्मीबाई कालेज में बीए फाइनल ईयर में पढ़ रही थी. वह कालेज बस से आतीजाती थी. कभीकभी वह अपनी सहेलियों के साथ कमलानगर मार्केट घूमने चली जाती थी.

एक दिन आरजू कालेज की एक दोस्त के साथ कमलानगर मार्केट घूमने गई थी, तभी वहां उस की मुलाकात नवीन खत्री से हो गई. नवीन को वह पहले से जानती थी, क्योंकि वह उसी के मोहल्ले में रहता था. लेकिन वह उस से कभी मिली नहीं थी. नवीन भी राजपुरा गांव के राजकुमार का बेटा था. उस दिन रैस्टोरेंट में नवीन और आरजू की पहली बार बात हुई तो आरजू के खानेपीने का बिल नवीन ने ही चुकाया. उस दौरान दोनों ने एकदूसरे को अपने फोन नंबर दे दिए. यह करीब 2 साल पहले की बात है.

पहली मुलाकात में ही आरजू नवीन को भा गई थी. उस से नजदीकियां बढ़ाने के लिए वह उसे जबतब फोन करने लगा. कभीकभी आरजू जैसे ही कालेज के लिए घर से निकल कर मेनरोड तक पहुंचती, नवीन मोटरसाइकिल ले कर आ जाता. उसे अपनी मोटरसाइकिल पर बिठाने के लिए कहता कि उसे लक्ष्मीबाई कालेज के सामने से होते हुए करोलबाग जाना है. तब आरजू उस की मोटरसाइकिल पर बैठ जाती. इस तरह आरजू और नवीन के बीच दोस्ती हो गई, जो बाद में प्यार में बदल गई. इस के बाद वह अकसर नवीन की मोटरसाइकिल पर घूमने लगी. नवीन भी उस पर खूब पैसे खर्च करने लगा.

राजपुरा गांव के कुछ लोगों ने आरजू को नवीन के साथ घूमते देखा तो इस की चर्चा गांव में होने लगी. इस का नतीजा यह निकला कि दोनों के ही घर वालों को उन के प्यार की जानकारी हो गई. तब उन्होंने अपनेअपने बच्चों को समझाने की कोशिश की. लेकिन आरजू और नवीन अपनी प्यार की धुन में रमे थे, उन के बारे में लोग क्या कह रहे हैं, इस की उन्हें परवाह नहीं थी. हां, उन्होंने मिलने में अब ऐहतियात बरतनी शुरू कर दी थी.

प्यार कर लिया, साथ जीनेमरने की कसमें भी खा लीं, लेकिन इस बात पर गौर नहीं किया कि वे एक ही मोहल्ले में रहते हैं, जिस की वजह से शादी होना असंभव है. गांव के रिश्ते से एक तरह से वे भाईबहन लगते थे. अगर यह बात वे पहले सोच लेते तो उन की मोहब्बत परवान न चढ़ती.

संजीव चौहान को लगा कि नवीन ने ही उन की बेटी को बहका कर अपने जाल में फांस लिया है. इसलिए उन्होंने फोन कर के नवीन के घर वालों से शिकायत की. इस के बाद नवीन के घर वाले कुछ परिचितों को ले कर संजीव चौहान के घर पहुंचे. यह करीब 4 महीने पहले की बात है.

एक ही गांव का होने की वजह से शादी होना असंभव था, इसलिए सब ने यही कहा कि दोनों के घर वाले अपनेअपने बच्चों को समझाएं. कहा जाता है कि अपने घर वालों की इज्जत को देखते हुए आरजू ने नवीन से बात करनी बंद कर दी थी. उस ने उस से दूरियां बना ली थीं. इस के बाद उस ने अपना पूरा ध्यान पढ़ाई पर लगा दिया था. कल्पनाओं की दुनिया में नाम कमाने के लिए उस ने किंग्सवे कैंप स्थित एक इंस्टीट्यूट में एनिमेशन के कोर्स में दाखिला भी ले लिया था. कालेज से लौटने के बाद वह एनिमेशन सीखने जाती थी.

आरजू और नवीन भले ही घर वालों के दबाव में एकदूसरे से दूरी बनाए हुए थे, लेकिन पुरानी यादों को भूलना इतना आसान नहीं था. जब कभी वे घर पर एकांत में होते तो उन की पुरानी यादें दिमाग में घूमने लगतीं. वे यादें उन्हें फिर से मिलने के लिए उकसा रही थीं. नतीजा यह हुआ कि दोनों ही खुद पर नियंत्रण नहीं रख पाए और फोन पर बातें ही नहीं करने लगे, बल्कि मिलने भी लगे.

अब आरजू नवीन पर शादी का दबाव डालने लगी, मगर नवीन कोई न कोई बहाना बना कर उसे टालता रहा. पंचायत के फैसले के बाद नवीन दक्षिणी पश्चिमी दिल्ली के नागल देवत में अपनी बहन के घर रहने लगा था. वह वहीं से आरजू से फोन पर बात कर के निश्चित जगह पर उस से मिल लेता था. जबकि घर वाले सोच रहे थे कि बच्चों ने संबंध खत्म कर लिए हैं.

इस बीच नवीन के घर वालों ने दिल्ली के द्वारका सेक्टर-5 स्थित विश्वासनगर की एक लडक़ी से उस की शादी तय कर दी थी. इतना ही नहीं, 5 फरवरी, 2016 को विवाह की तारीख भी निश्चित कर दी. यह बात आरजू को पता चली तो वह नवीन पर बहुत नाराज हुई. उस ने उसे धमकी दी, “मैं किसी और से तुम्हारी शादी कतई नहीं होने दूंगी.”

आरजू की इस धमकी से नवीन डर गया. आरजू की धमकी वाली बात नवीन के घर वालों को पता चली तो वे भी परेशान हो उठे. उन की समझ में नहीं आ रहा था कि इस बला से कैसे छुटकारा पाया जाए. जैसेजैसे नवीन की शादी की तारीख नजदीक आ रही थी, उन की चिंता बढ़ती जा रही थी. नवीन को इस बात का डर था कि वह उस की शादी में पहुंच कर लडक़ी वालों के यहां कोई बवंडर न खड़ा कर दे. अब आरजू उस के लिए मुसीबत बन गई थी.

तमाम रिश्तेदारों और परिचितों को वह शादी के कार्ड दे चुका था. बाकी बचे लोगों को 2 फरवरी को उसे कार्ड बांटने और दोपहर को नांगल देवत से अपनी बहन को लाने जाना था. उसी दिन उस की आरजू से बात हुई तो उस ने उस पर शादी का दबाव ही नहीं डाला, बल्कि धमकी भी दी. उस की धमकी से परेशान नवीन ने उसी समय आरजू से हमेशा के लिए छुटकारा पाने का निर्णय ले लिया.

2 फरवरी को आरजू अपने नियत समय पर कालेज चली गई. उसी दौरान उस की नवीन से बात हुई तो उस ने 9, साढ़े 9 बजे उस से कालेज के गेट पर मिलने को कहा. पहला पीरियड अटैंड करने के बाद आरजू कालेज के गेट पर इंतजार कर रहे अपने प्रेमी नवीन के पास पहुंच गई.

लिवइन पार्टनर का खूनी खेल – भाग 3

नजलू को रुखसाना के साथ रहते एक साल हो गया था. तब तक वह रुखसाना का बहुत ख्याल रखता था. एक साल बाद नजलू को पता चला कि रुखसाना किसी और व्यक्ति से फोन पर बातें करती है. बस, उस दिन के बाद वह रुखसाना के पीछे ही पड़ गया.

वह रुखसाना से कहता, “मेरे प्यार में क्या कमी थी, जो तू गैरमर्द से बातें करने लगी है. तूने मेरे साथ धोखा क्यों किया? बता, नहीं तो तुझे जिंदा नहीं छोड़ूंगा.”

रुखसाना उस के आगे हाथ जोड़ती, पैर पड़ती और कसम खाती कि वह उस पर झूठा शक कर रहा है. मगर नजलू कहता, “तू धोखेबाज है. तूने मेरे प्यार की कद्र नहीं की. मैं ने तुझे क्या कुछ नहीं दिया, मगर तू गैरमर्द के प्यार में पड़ गई. तुझे शर्म नहीं आई.”

इस तरह से नजलू उसे प्रताडि़त करता और मारपीट करता रहता था. रुखसाना को धमकाता कि अगर उस ने उसे छोड़ा तो वह उस के बच्चों और भाइयों को मार डालेगा. नजलू की इन धमकियों से डर कर वह उस के साथ रहने को मजबूर थी.

30 अप्रैल, 2023 को नजलू ने साजिश के तहत रुखसाना को जयपुर से दूर बाइक पर घुमाने ले जाने के लिए कहा. रुखसाना मान गई. नजलू ने रुखसाना को बाइक पर बिठाया और जयपुर से निमोडिय़ा की तरफ रवाना हो गया.  बाइक पर जाते समय नजलू ने सोशल मीडिया रील भी बनाई.

रील के बैक ग्राउंड में आवाज थी, “अब मैं खुद को इतना बदल दूंगा कि तू तो क्या, मेरे अपने भी तरस जाएंगे मुझे पहले के जैसा देखने के लिए…?

इस के बाद नजलू रुखसाना को निमोडिय़ा के घने जंगल में ले गया. वहां उस ने रुखसाना को बेरहमी से पीटा. नीचे पटक कर घुटनों से उस की पसलियों पर वार किए. नजलू इतने गुस्से में था कि अपना आपा खो बैठा और रुखसाना के साथ इतनी मारपीट की कि रुखसाना की पसलियां टूट गईं.

मरणासन्न हालत में किया बलात्कार

जब रुखसाना ने नजलू से हाथ जोड़ कर माफी मांगी तो नजलू ने उसे पीटना बंद कर उस के साथ शारीरिक संबंध बनाए. रुखसाना घायलावस्था में अधमरी सी पड़ी थी और दरिंदा नजलू उस के साथ अपनी हवस शांत कर रहा था. दुष्कर्म करने के बाद रुखसाना की तबीयत जब बहुत ज्यादा बिगड़ गई तो नजलू डर गया. आननफानन में वह रुखसाना को निजी क्लीनिक में ले कर गया और बताया कि रोड एक्सीडेंट हो गया है.

हालत बिगडऩे पर रुखसाना को क्लीनिक से जयपुरिया अस्पताल रैफर कर दिया गया. जयपुरिया अस्पताल में भी नजलू ने डाक्टरों को बताया कि हाईवे पर जाते समय रिंग रोड पर एक्सीडेंट हो गया. इस के बाद डाक्टरों ने किसी महिला परिजन को बुलाने के लिए कहा. मजबूरन नजलू को रुखसाना की मां मुन्नी को फोन करना पड़ा.

फोन करने के बाद नजलू नजर बचा कर अस्पताल से फरार हो गया. अस्पताल से पुलिस को सूचना दे दी गई. रोड एक्सीडेंट की बात सुन कर मुन्नी देवी भी जैसेतैसे अस्पताल पहुंची, तब तक रुखसाना इस दुनिया से रुखसत हो चुकी थी.

बेटी की लाश देख कर उस की मां ने कहा, “आखिर मेरी बेटी को मार डाला नजलू ने.”

पुलिस ने नजलू से पूछताछ के बाद कई सबूत भी जुटाए. आरोपी नजलू खान को 4 मई, 2023 को कोर्ट में पेश कर दिया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया.

रुखसाना के चारों बेटे अब यतीम हो चुके हैं. उस की ससुराल वालों ने बच्चों को अपनाने से मना कर दिया है. वे कहते हैं कि जब रुखसाना दूसरे व्यक्ति के साथ रहने लगी तो अब इन बच्चों से हमारा क्या लेनादेना. उस के 4 बेटों में से एक नानी के पास, 2 बच्चे एक मौसी के पास तो एक बेटा दूसरी मौसी के पास रह रहा है.

बेटी रुखसाना की हत्या के बाद उस के बच्चों की परवरिश की चिंता में बुजुर्ग नानानानी बीमार रहते हैं. ऐसे में उन्हें अब सरकारी योजनाओं के लाभ की आस है. यह आस पूरी होगी या अधूरी रहेगी, यह भविष्य बताएगा.

—कथा पुलिस सूत्रों व मृतका के मातापिता से की गई बातचीत पर आधारित