इस तरह 2-3 दिन और अगले सप्ताह करतेकरते 3 माह बीत गए. कभी कोरोना तो औफिस के काम की व्यस्तता बताता हुआ स्वैन उस से वादे करता रहा. इस दौरान उसे स्वैन के बारे में बहुत कुछ पता चल गया था. घर के सारे खर्च का भार उस के ऊपर ही आ गया था. नौकरानी के वेतन से ले कर दूसरे खर्चे तक वही वहन कर रही थी. अवंतिका काफी तनाव में आ गई थी. परेशान रहने लगी थी.
स्वैन से जब भी फोन पर बातें होतीं तो सौरी बोलते हुए काम की व्यस्तता का बहाना बना देता था. एक बार उस ने खुद फ्लाइट से बेंगलुरु आने की बात कही तब उस ने मना कर दिया. बोला कि वह वहां गेस्टहाउस में रहता है. अस्थाई ठिकाना है. जब अपना फ्लैट ले लेगा तब बुला लेगा.
पति की सच्चाई जानकर हो गई हैरान
इस बीच अवंतिका के दिमाग में वाइफ डाक्टर और वाइफ टीचर शब्द भी घूमते रहे. उस का संदेह गहरा गया. एक रोज नौकरानी को विश्वास में ले कर पूछ बैठी. नौकरानी ने दबी जुबान में बताया कि उस की पहले से भुवनेश्वर में 2 शादियां हो चुकी हैं. वह वहां किस इलाके में रहती हैं, उसे नहीं मालूम. यह सुन कर अवंतिका को लगा जैसे उस के पैरों तले की जमीन खिसक गई हो.
अगली बार जब स्वैन आया तब उस ने बेंगलुरु जाने की जिद पकड़ ली. साथ ही अपने मायके जबलपुर चलने के लिए जोर दिया. उस ने कहा कि वह अपने परिवार के सामने वैदिक रीति और विधिविधान से शादी की रस्में करना चाहती है. उस के परिवार वाले उसे तभी स्वीकार कर पाएंगे जब वे शादी की रस्मों में शामिल होंगे.
इस बात को ले कर उन के बीच तूतूमैंमैं होने लगी. किसी तरह से मामला शांत हुआ, लेकिन आए दिन झगड़े होने लगे. अवंतिका समझ गई थी उस के साथ धोखा हुआ है. उस ने स्वैन के बारे में और जानकारियां जुटानी शुरू कीं. संयोग से उसे आधा दरजन ऐसी महिलाओं के फोन नंबर मिल गए, जो स्वैन के मोबाइल में वाइफ बेंगलुरु, वाइफ टीचर, वाइफ दिल्ली, वाइफ आईटीबीपी आदि के नाम से सेव थे.
उस ने सभी का वाट्सऐप ग्रुप बना लिया. उन से स्वैन के बारे में बातें शेयर होने लगीं. जल्द ही स्वैन की पोल खुल गई. उस के कारनामों के बारे में मालूम हो गया कि वह कई महिलाओं को झांसा दे कर शादियां कर चुका था. सभी को केंद्र सरकार का एक बड़ा अफसर बताया था. साथ ही अवंतिका को यह भी पता चल गया कि जिसे वह डा. विधु प्रकाश स्वैन समझ रही थी, वह वास्तव में रमेश चंद्र स्वैन था. उस के अन्य नाम डा. रमानी रंजन स्वैन और डा. विजयश्री स्वैन भी था. सभी में सरनेम स्वैन ही था.
स्वैन के खिलाफ दर्ज हुई शिकायत
अवंतिका के सिर से पानी ऊपर जा चुका था. उस ने देरी किए बगैर अक्तूबर 2020 में भुवनेश्वर के एक थाने में स्वैन के खिलाफ शिकायत दर्ज करवा दी. शिकायत में उन सभी महिलाओं की भी चर्चा की, जो अलगअलग राज्यों की थीं और उस के द्वारा ठगी जा चुकी थी.
शिकायत में शादी के नाम पर उन से देहज में मोटी रकम लिए जाने की बात लिखी. शिकायत के अनुसार स्वैन ने अलगअलग बहाने बना कर भी पैसे मांगे थे. जैसे आईटीबीपी पत्नी से उस ने कुछ अर्जेंसी के बहाने से 10 लाख रुपए मांगे थे. वह अकसर अपनी पत्नी से स्टाफ को 1-2 लाख रुपए पेमेंट करने के लिए कहता था, या फिर अकाउंट में ट्रांसफर करने को बोलता था.
भुवनेश्वर पुलिस ने रमेश चंद्र स्वैन के खिलाफ आईपीसी की धारा 498 (ए), 419, 468, 471 और 494 के तहत मामला दर्ज कर लिया था. जबकि वह गिरफ्त में नहीं आ पाया था. भुवनेश्वर की पुलिस ने उस की तलाश शुरू कर दी गई थी. रमेश को शायद इस बात की भनक लग गई थी, इसलिए उस ने अपना मोबाइल नंबर बदल लिया था. वह भुवनेश्वर से फरार हो गया था.
पुलिस को तलाशी के सिलसिले में मालूम हुआ था कि वह गुवाहाटी में रहने वाली अपनी एक और पत्नी के साथ रह रहा है. 7 महीने बाद रमेश मामले के ठंडा होने की उम्मीद के साथ भुवनेश्वर वापस आ गया था.
इसी बीच दिल्ली वाली पत्नी भी सक्रिय हो चुकी थी. उस ने भुवनेश्वर में ही अपने मुखबिर लगा रखे थे. उसे जैसे ही मालूम हुआ कि रमेश अपने भुवनेश्वर के खंडगिरी वाले फ्लैट में वापस आ चुका है, तुरंत इस की सूचना भुवनेश्वर पुलिस को दे दी. उस के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाने वाली महिलाओं में मध्यप्रदेश की महिला के अलावा दिल्ली की 48 वर्षीया स्कूल टीचर भी थी.
दिल्ली की टीचर ने उस के खिलाफ मई 2021 में ओडिशा के भुवनेश्वर और कटक के कमिश्नरेट पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी. उस ने भी शिकायत में लिखा था कि स्वैन ने कई शादियां की हैं और उस से दहेज के नाम पर 13 लाख रुपए ठगे थे. उस की शादी 29 जुलाई, 2018 को दिल्ली के एक आर्य समाज मंदिर में हुई थी. भुवनेश्वर की यात्रा के दौरान उसे स्वैन की एक नौकरानी से पता चला कि उस की पहले से ही वहां 2 पत्नियां रह रही हैं.
इस शिकायत पर पुलिस ने स्वैन के फोन नंबर से पता लगाया कि उस के कई पते हैं और हर पते पर पाया गया कि उस की एक पत्नी रहती है. उस के बारे में यह भी मालूम हुआ कि वह अकसर यात्रा पर रहता था. जहां उस की पहली शादी हुई थी और जिस से उस के बच्चे थे वहां कभीकभार ही आता था. पुलिस ने उस के फोन को ट्रैक कर के उस के ठिकाने का पता लगा लिया था.
भुवनेश्वर पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए चकमा दे कर भागने वाले रमेश चंद्र स्वैन को गिरफ्तार कर लिया. बताते हैं कि उस रोज वह 19वीं शादी करने वाला था. उस की गिरफ्तारी वेलेंटाइन डे की पूर्व संध्या पर 13 फरवरी की देर रात भुवनेश्वर के केंद्रपाड़ा में सिंघला गांव से हुई. उस दिन वह भुवनेश्वर में शनि मंदिर के दर्शन करने के लिए गया था.
इस मामले की जांच के लिए एक टास्क फोर्स गठित की गई थी. उस के पास से 13 क्रेडिट कार्ड, 4 आधार कार्ड, चार पैन कार्ड, अलगअलग नामों वाले अशोक चिन्ह लोगो के साथ विजिटिंग कार्ड बरामद किए गए. अगले रोज उसे कोर्ट में पेश किया. वहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.
शादी नहीं, मौजमस्ती ही चाहता था गिरिजा शंकर
कहते हैं कि इश्क और मुश्क छिपाए नहीं छिपते, दोनों के प्रेम प्रसंग की स्टोरी की जानकारी घर वालों को हो गई. धनराज ने सोचा कि समाज में उस की बदनामी हो, इस के पहले बेटी के हाथ पीले कर देना चाहिए. यही सोच कर पूर्णिमा की शादी गांव सारद सिवनी में अशोक नाम के लडक़े से तय कर दी. 22 अप्रैल, 2023 को पूर्णिमा की शादी होने वाली थी, किंतु वह प्रेम संबंध के चलते अपनी भाभी के भाई गिरिजा शंकर पर शादी करने का दबाव बना रही थी.
उस ने गिरिजा शंकर से साफतौर पर कह दिया था कि वह शादी करेगी तो सिर्फ उसी से. और गिरिजा शंकर पूर्णिमा से शादी करने का इच्छुक नहीं था, क्योंकि उसे अपनी बहन का घर उजडऩे का डर था. गिरिजा शंकर जानता था कि समाज के कानूनकायदे पूर्णिमा से विवाह की इजाजत नहीं देंगे. गिरिजा शंकर की बहन शारदा को उस के पूर्णिमा के साथ संबंधों की जानकारी थी. उस ने भी भाई से कहा था, “भैया कोई ऐसा कदम न उठाना कि मेरा घर उजड़ जाए.”
इधर पूर्णिमा गिरिजा शंकर पर शादी का दबाव बना रही थी. उस का कहना था कि 22 तारीख के पहले हम लोग भाग कर शादी कर लेते हैं. गिरिजा शंकर के सामने एक तरफ कुआं तो दूसरी तरफ खाई थी. वह कोई निर्णय नहीं ले पा रहा था. आखिर में उसे अपनी बहन के सुखी दांपत्य जीवन का खयाल आया और उस ने पूर्णिमा को अपने रास्ते से हटाने की योजना बनाई.
पूर्णिमा लगातार गिरिजा शंकर पर जल्द शादी करने का दबाव बना रही थी. ऐसे में योजना के मुताबिक 5 अप्रैल को गिरिजा शंकर ने पूर्णिमा को फोन कर के कहा, “आज कहीं घूमने चलते हैं, वहां मिल कर शादी करने का प्लान बनाते हैं.”
“लग्न होने की वजह से घर वाले अब बाहर घूमने से मना करते हैं.” पूर्णिमा ने जवाब दिया.
“सिलाई क्लास का बहाना बना कर आ जाओ, मैं बाइक ले कर गांव के बाहर पीपल के पेड़ के पास मिलता हूं.” गिरिजा शंकर ने राह सुझाते हुए कहा.
“ओके, तुम गांव आ कर फोन करना, मैं मम्मी को मनाती हूं.” पूर्णिमा ने कह कर फोन काट दिया.
गिरिजा शंकर ने प्यार में किया विश्वासघात
दोपहर करीब एक बजे गिरिजा शंकर लिम्देवाड़ा गांव पहुंच गया और पूर्णिमा को फोन कर के बुला लिया. पूर्णिमा ने मां से सिलाई सीखने का बहाना किया और सिर और मुंह को दुपट्ïटे से ढंक कर गांव के बाहर पीपल के पेड़ के पास पहुंच गई. गिरिजा शंकर ने पूर्णिमा को बाइक पर बिठाया और गांव से निकल पड़ा.
रास्ते में प्यारमोहब्बत की बातें करते हुए वे गांगुलपरा और बंजारी गांव के बीच पडऩे वाले जंगल की पहाड़ी पर पहुंच गए. वहां पहुंच कर जब पूर्णिमा ने गिरिजा शंकर से शादी करने की बात कही तो गिरिजा शंकर ने पूर्णिमा को अपने आगोश में लेते हुए भरोसा दिलाया कि वह 22 अप्रैल के पहले उस से शादी कर लेगा. पूर्णिमा ने उस की बातों पर भरोसा कर लिया. उस के बाद उन्होंने 2 बार शारीरिक संबंध बनाए.
संबंध बनाने के बाद वे पेड़ की छांव में एक चट्ïटान पर बैठ कर आराम कर रहे थे, तभी गिरिजा शंकर ने पूर्णिमा के गले में पड़े दुपट्ïटे से उस की गला घोंट कर हत्या कर दी. इस के पहले पूर्णिमा कुछ समझ पाती, पलभर में ही उस की जुबान बाहर निकल आई और उस की मौत हो गई.
प्रेमिका का मर्डर करने के बाद कातिल प्रेमी गिरिजा शंकर ने पूर्णिमा का मोबाइल तोड़ कर दुपट्ïटे के साथ वहीं फेंक दिया. पूर्णिमा के शरीर के ऊपर सूखे पत्ते का ढेर लगा कर गिरिजा शंकर वहां से बाइक ले कर वापस किरनापुर आ गया. जब पूर्णिमा शाम तक घर नहीं लौटी तो गिरिजा शंकर की बहन शारदा ने मोबाइल पर उस से पूर्णिमा के संबंध में पूछताछ की तो उस ने साफ मना करते हुए कह दिया कि उसे पूर्णिमा के संबंध में कोई जानकारी नहीं है.
मगर पुलिस की पैनी नजर से वह ज्यादा दिनों तक नहीं बच सका और पूर्णिमा के कत्ल का जुर्म कुबूल कर लिया. आज भी समाज के ज्यादातर तबकों में यही परंपरा है कि जिस घर में लड़कियों को ब्याहा जाता है, उस घर की लडक़ी को अपने घर की बहू नहीं बनाते हैं. लेकिन कहते हैं कि इश्क और जंग में सब जायज है.
पूर्णिमा भी समाज के नियमों के विपरीत अपने भाई के साले को दिल दे बैठी और उस के साथ घर बसाने का सपना देख रही थी. गिरिजा शंकर तो केवल पूर्णिमा के शरीर का सुख भोग रहा था, उस के साथ शादी करने को वह कतई तैयार नहीं था.
पुलिस ने गिरिजा शंकर की निशानदेही पर पूर्णिमा की हत्या में प्रयुक्त बाइक और उस का मोबाइल भी घटनास्थल से बरामद किया और 17 अप्रैल को रिमांड की अवधि खत्म होने पर गिरिजा शंकर को पुलिस ने कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे बालाघाट जेल भेज दिया गया.
—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित
उदयन के पड़ोसियों की नजर में वह अजीबोगरीब यानी असामान्य व्यक्ति था, जो खुद को दुनिया से छिपा कर रखना चाहता था. दरअसल, वह अपनी बुनी एक काल्पनिक दुनिया में रहता था और उसे ही सच मान बैठा था. यानी व्यवहारिकता से उस का कोई सरोकार नहीं रह गया था. सुबहसुबह जब साकेतनगर में रहने वाले संभ्रांत और धनाढ्य लोगों के घरों से नाश्ता बनने की खुशबू आती थी, तब उदयन के घर से गांजे की गंध आ रही होती थी.
उदयन की कोई नियमित या तयशुदा दिनचर्या नहीं थी. वह अकसर शराब के नशे में धुत रहता था. पड़ोसियों के लिए वह एक रहस्य था. कभीकभार बात भी करता था तो खुद को इंटेलीजेंस ब्यूरो का अफसर बताता था. साथ ही जल्द ही अमेरिका शिफ्ट होने की बात भी करता था.
वह ऐसा शायद इसलिए करता था कि लोग उस की शाही जिंदगी के बारे में ज्यादा सिर न खपाएं. महंगी कारों का मालिक उदयन कभीकभार आटोरिक्शा में भी आताजाता दिखता था और रिक्शाचालक को 25-30 रुपए की जगह 500 रुपए थमा दिया करता था. नजदीक की दुकान से वह मैगी दूध बिस्किट जैसे आइटम लाता रहता था और दुकानदार को एकमुश्त भुगतान करता था.
पुलिस वालों ने जब उस के मांबाप के बारे में पूछा तो वह खामोश रहा. इस खामोशी में एक और तूफान छिपा हुआ था. आकांक्षा के कत्ल और लाश बरामदगी में उलझी पुलिस को इतना ही पता चला था कि उदयन के पिता का नाम बी.के. दास है और वे भोपाल के भेल के रिटायर्ड अफसर हैं और मां इंद्राणी भी सरकारी कर्मचारी रह चुकी हैं.
जब आकांक्षा की लाश बरामद हो गई और उदयन ने जुर्म कबूल लिया तो पुलिस का ध्यान उदयन से जुड़ी दूसरी बातों पर गया. काफी बवंडर मच जाने के बाद भी उस का कोई हमदर्द या दोस्त तो क्या कोई सगासंबंधी भी सामने नहीं आया, यह एक हैरानी की बात थी.
रिमांड पर लेने के बाद पुलिस ने जब सख्ती बरती तो उदयन बारबार बयान बदलता रहा. जब उस के दिल्ली आईआईटी से पढ़ने की बात भी झूठी निकली तो पुलिस वालों का माथा ठनका कि यह हत्यारा पागल ही नहीं बल्कि शातिर भी है. जब उस के मांबाप के फोन नंबर मांगे गए तो पहले तो वह मुकर गया कि उन के नंबर उस के पास नहीं हैं. लेकिन फिर दबाव पड़ने पर उस ने मां इंद्राणी का एक नंबर दिया जो बंद जा रहा था.
2 मकानों के किराए और मां की पेंशन से रईसी से जिंदगी गुजारने वाला उदयन कह रहा था कि उस की मां अमेरिका में है. लेकिन अब उस की बातें बयान और चेहरा साफसाफ चुगली कर रहे थे कि वह झूठ बोल रहा है. लिहाजा पुलिस ने उस के साथ सख्ती की, जो कामयाब रही.
उस की मां इंद्राणी दास डीएसपी नहीं थी, जैसा कि उस ने आकांक्षा और पड़ोसियों को बताया था. उस की मां भोपाल में सांख्यिकी विभाग में अधिकारी थीं और शिवाजीनगर के जी टाइप सरकारी क्वार्टर 122/43 में रहती थीं. पति के रायपुर शिफ्ट होने के बाद वह भी उन के साथ रायपुर चली गई थीं.
दरअसल, उदयन की कोशिश यह थी कि पुलिस वालों का ध्यान और काररवाई आकांक्षा के कत्ल में ही उलझ कर रह जाए. कह सकते हैं कि यह अहसास या उम्मीद इस चालाक कातिल को थी कि उसे आकांक्षा का हत्यारा साबित करना कानूनन उतना आसान काम नहीं है, जितना कि दिख रहा है.
गलत नहीं कहा जाता कि पुलिस की मार पत्थरों से भी मुंह खुलवा देती है, फिर उदयन साइको या शातिर ही सही था तो हाड़मांस का पुतला ही, जो 48 घंटे में ही टूट गया. इस के बाद सामने आई एक और कहानी, जिसे सुन कर पुलिस वालों के भी तिरपन कांप उठे. अब तक देश भर की दिलचस्पी इस साइको किलर में और बढ़ गई थी, जिस के कारनामों से अखबार भरे पड़े थे. जबकि न्यूज चैनल्स का तो वह हीरो बन गया था. 8 नवंबर को नोटबंदी के बाद यह दूसरी घटना थी, जिस पर आम लोग तरहतरह से अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे थे.
4 फरवरी को उदयन ने न केवल मान लिया बल्कि बता भी दिया कि उस ने अपने मांबाप की भी हत्या की थी और उन्हें रायपुर वाले घर के लौन में दफना दिया था. यानी रिश्तों की कब्र खोदने की उस की सनक या बीमारी काफी पुरानी थी. बहरहाल, फिर से एक नई कहानी इस तरह उभर कर सामने आई.
उदयन अपने मांबाप का एकलौता बेटा था. चूंकि मांबाप दोनों कामकाजी थे, इसलिए उसे कम ही वक्त दे पाते थे. बचपन से ही वह उद्दंड प्रवृत्ति का था. शुरुआती पढ़ाई के लिए उसे भोपाल के नामी सेंट जोसेफ को-एड स्कूल में दाखिला दिलाया गया था.
पढ़ाईलिखाई में उस का मन नहीं लगता था और वह अकसर अकेले रहना पसंद करता था. ये वे समस्याएं थीं जो आमतौर पर उन कामकाजी अभिभावकों के बच्चों के सामने पेश आती हैं, जिन्हें पैसों की कोई कमी नहीं होती. उदयन जब सातवीं कक्षा में था तब उस ने स्कूल में दीवार पर मारमार कर एक सहपाठी का सिर फोड़ दिया था, जिस की वजह से उसे स्कूल से निकाल दिया गया था.
संभ्रांत बंगाली दास परिवार जहांजहां भी रहा, लोगों से कटा ही रहा. इधर उदयन की शैतानियां इतनी बढ़ गई थीं कि मांबाप उसे पारिवारिक समारोहों में भी नहीं ले जाते थे. वे लोग उसे काबू में रखने के लिए बातबात पर डांटतेडपटते रहते थे.
मेरे मांबाप हिटलर सरीखे थे, अपनी कहानी सुनाते हुए उस ने यह बात जोर दे कर पुलिस को बताई. उदयन के हिंसक और असामान्य व्यवहार के बावजूद उस के पिता बी.के. दास की इच्छा थी कि बेटा गणित पढ़े और इंजीनियर बने. लेकिन बेटे की इस मनोदशा को वे नहीं समझ पाए थे कि वह उन से मरनेमारने की हद तक नफरत करने लगा है.
भोपाल से रिटायर होने के बाद बी.के. दास ने रायपुर में अपनी खुद की फैक्ट्री खोल ली थी. अपने सेवाकाल के दौरान दोहरी कमाई के चलते वे खासी जायदाद बना चुके थे. यानी वे एक अच्छे निवेशक जरूर थे पर अच्छे पिता नहीं बन पाए थे. रायपुर के पौश इलाके सुंदरनगर में एनसीसी औफिस के पास भी उन्होंने पत्नी के नाम से एक शानदार मकान बनवाया था और वहीं रहने लगे थे. उदयन का दाखिला भी उन्होंने वहीं के एक स्कूल में करा दिया था. जैसेतैसे 12वीं पास करने के बाद उदयन का दाखिला एक प्राइवेट कालेज में करा दिया गया.
उदयन ने कभी अपने कैरियर और जिंदगी के बारे में नहीं सोचा. उलटे कालेज में आ कर वह नशे का भी आदी हो गया था. यहां भी उस का कोई दोस्त नहीं था और मातापिता भी किसी से संपर्क नहीं रखते थे. यानी पूरा परिवार एकाकी जीवन जीने का आदी हो चला था.
पढ़ाई के बारे में पूछने पर वह मातापिता से साफ झूठ बोल जाता था. जब पढ़ाई खत्म होने का वक्त आया तो उस ने घर में झूठ बोल दिया कि उसे डिग्री मिल गई है. डिग्री मिल गई तो कहीं नौकरी करो, पिता के यह कहने पर उदयन को लगने लगा कि पढ़ाई का झूठ अब छिपने वाला नहीं है. मांबाप नहीं मानेंगे, यह सोच कर उदयन ने एक खतरनाक फैसला ले लिया. उस ने सोच लिया कि क्यों न मांबाप दोनों को ठिकाने लगा दिया जाए, फिर कोई रोकनेटोकने नहीं वाला होगा. करोड़ों की जायदाद व दौलत भी उस की हो जाएगी. उस ने ऐसा ही किया भी.
क्रमशः
दरअसल, आकांक्षा घर वालों से झूठ बोल कर उदयन के पास भोपाल आ गई थी. उदयन से उस की जानपहचान फेसबुक के जरिए 2007-08 में हुई थी. फेसबुक पर उदयन ने आकांक्षा को बताया था कि वह एक आईएफएस अधिकारी है. उस के पिता भेल भोपाल से रिटायर्ड अधिकारी हैं और इन दिनों वह रायपुर में खुद की फैक्ट्री चलाते हैं. मां रिटायर्ड डीएसपी हैं और अमेरिका में रह रही हैं. उदयन की रईसी, पद और पारिवारिक पृष्ठभूमि का आकांक्षा पर वाजिब असर पड़ा और दोनों की दोस्ती गहराने लगी.
इस के बाद दोनों दिल्ली और भोपाल में मिलने लगे. उदयन ने जो झूठ रौब झाड़ने की गरज से आकांक्षा से बोले थे, उन में से एक यह भी था कि वह भी अमेरिका में रहता है. इसलिए जब भी वे मिलते थे तो उदयन यही बताता था कि वह कुछ समय के लिए अमेरिका से आया है. इश्क में अंधी आकांक्षा उस की हर बात बच्चों की तरह मान जाती थी. इस दरम्यान दोनों के बीच क्या और कैसी बातें हुईं, यह अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं था. अलबत्ता यह जरूर था कि दोनों ही एकदूसरे का पहला प्यार नहीं थे.
बहरहाल, जून में जब आकांक्षा भोपाल आई तो उदयन ने उस से बरखेड़ा स्थित बंगाली समुदाय के मंदिर कालीबाड़ी में शादी कर ली. इस के बाद दोनों पतिपत्नी की तरह साकेतनगर में रहने लगे. आकांक्षा खुश थी, लेकिन उदयन की हिदायत पर अमल करते हुए वह पड़ोसियों से ज्यादा बातचीत नहीं करती थी. अलबत्ता एकदो धार्मिक आयोजनों में वह जरूर शामिल हुई थी.
यह बात गलत नहीं है कि एक झूठ को ढकने के लिए सौ झूठ बोलने पड़ते हैं. उदयन ने तो आकांक्षा से शायद एक भी सच नहीं बोला था. उस ने आकांक्षा को न जाने कौन सी घुट्टी पिलाई थी जो वह चाबी वाले खिलौने की तरह उस पर भरोसा किए जा रही थी. लेकिन कहते हैं कि झूठ के पांव नहीं होते. जल्द ही आकांक्षा के सामने उदयन की असलियत उजागर होने लगी.
आकांक्षा ने कभी भी उदयन को अपने मांबाप से फोन तक पर बात करते नहीं देखा था. जब भी वह उन के बारे में पूछती थी या उदयन की गुजरी जिंदगी को कुरेदती थी तो वह चालाकी से उसे टाल जाता था. लेकिन उसे यह भी समझ में आने लगा था कि यह सब बहुत ज्यादा दिनों तक चलने वाला नहीं है. उस ने आकांक्षा से कहा कि अमेरिका में उस का मन नहीं लगता, इसलिए वह उस के साथ भोपाल में ही घर बसाना चाहता है. आकांक्षा इस के लिए भी तैयार हो गई.
दोनों का अफेयर 8 साल पुराना था लेकिन शादी और गृहस्थी की मियाद महीने भर ही रही. तब तक उदयन के काफी झूठ फरेब उजागर हो चुके थे. फिर भी आकांक्षा ने समझदारी दिखाते हुए उन से समझौता कर लिया था. वह एक भावुक स्वभाव वाली युवती थी, जो अपने प्रेमी की खातिर मांबाप से झूठ बोल कर आई थी.
इसी वजह से वह ज्यादा कलह कर के न तो खुद को जोखिम में डालना चाहती थी और न ही कोई फसाद खड़ा करना चाहती थी. बावजूद इस के दोनों में खटपट तो होने ही लगी थी. लेकिन दोनों ने इस की भनक मोहल्ले वालों को नहीं लगने दी थी.
थाने ला कर पुलिस ने जब उदयन से पूछताछ की तो उस ने जो बताया, वह रोंगटे खड़े कर देने वाला था. उदयन और आकांक्षा के बीच 14 जुलाई, 2016 को जम कर कलह हुई थी, जिस की वजह थी उदयन के कई लड़कियों से जायजनाजायज संबंध.
यहां स्पष्ट कर दें कि दूध की धुली आकांक्षा भी नहीं थी. इस घटना के चंद दिन पहले आकांक्षा के एक पूर्व बौयफ्रैंड, जिस से वह अकसर फोन पर बात किया करती थी, ने उस के कुछ अश्लील फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिए थे. इसे ले कर उदयन के तनबदन में आग लग गई थी. उसे रहरह कर लग रहा था कि आकांक्षा के अपने एक्सबौयफ्रैंड से नाजायज संबंध भी थे और वह उस की आर्थिक मदद भी करती थी.
उस रात उदयन सोया नहीं, बल्कि जाग कर आकांक्षा की हत्या की साजिश रचता रहा. जबकि आकांक्षा लड़झगड़ कर सो गई थी. 15 जुलाई की सुबह लगभग 5 बजे एकाएक उदयन के सिर पर एक अजीब सा वहशीपन सवार हो गया. उस ने गहरी नींद में सो रही आकांक्षा का मुंह तकिए से दबा दिया. आकांक्षा कुछ देर छटपटाई और फिर उस का शरीर ढीला पड़ गया. हालांकि उदयन को तसल्ली हो गई थी कि वह मर चुकी है फिर भी उस ने कुछ मिनटों तक उस के चेहरे से तकिया नहीं हटाया.
कुछ देर बाद उदयन ने आकांक्षा के चेहरे से तकिया हटाया और दरिंदों की तरह उस का गला दबाने लगा, जिस से उस के गले की हड्डी टूट गई. आकांक्षा के मरने की पूरी तरह तसल्ली करने के बाद उदयन के सामने समस्या उस की लाश को ठिकाने लगाने की थी. लाश का चेहरा उस ने एक पौलीथिन से ढंक दिया था.
आकांक्षा की लाश को वह दूसरे कमरे में ले गया और उसे एक पुराने बक्से में डाल दिया. एक घंटे सुस्ताने और कुछ सोचने के बाद उदयन बाहर निकला और साकेतनगर की ही एक दुकान से शैलेष नाम के सीमेंट विक्रेता से 14 बोरी सीमेंट खरीद लाया. शैलेष ज्यादा सवाल या शक न करे, इसलिए उस ने उसे बताया था कि नईनई शादी हुई है, पत्नी के लिए बाथटब बनवाना है.
इस के बाद उदयन ने रवि नाम के मिस्त्री को बुलाया, जिस से उस की पुरानी पहचान थी. रवि को उस ने यह कह कर कमरे में चबूतरा बनाने को कहा कि वह उस के ऊपर मंदिर बनवाएगा. चबूतरा बनते समय उदयन ने आधा काम खुद किया. थोड़ी देर के लिए रवि को इधरउधर कर के उस ने लाश वाला बक्सा चबूतरे के नीचे बने गड्ढे में डाला और ऊपर से खुद चिनाई कर दी रवि को इस की भनक भी नहीं लगी. वैसे भी एक मामूली काम के एवज में उसे खासी मजदूरी मिल रही थी, इसलिए उस ने उदयन के इस विचित्र व्यवहार पर गौर नहीं किया.
चबूतरा बना कर उदयन ने उस पर पलस्तर कर दिया और खूबसूरती बढ़ाने के लिए उस पर मार्बल भी लगवा दिया. यह उस के अंदर की ग्लानि थी, डर था या आकांक्षा के प्रति नफरत कि वह अकसर इस चबूतरे पर बैठ कर सुबहसुबह ध्यान लगाता था.
आकांक्षा की लाश निकालने वाली पुलिस टीम ने चबूतरा खोदना शुरू किया तो 7 महीने पुरानी लाश को बाहर निकालने में उसे 7 घंटे पसीना बहाना पड़ा. खुदाई के लिए बाहर से मजदूर बुलाए गए, जिन्होंने सब से पहले मार्बल तोड़ा लेकिन उन के गैंती, फावड़े जैसे मामूली औजार इस चबूतरे को नहीं खोद पाए तो ड्रिल मशीन मंगानी पड़ी. चबूतरा इतना मजबूत था कि खुदाई करने के दौरान एक ड्रिल मशीन भी टूट गई. उस की जगह दूसरी ड्रिल मशीन मंगानी पड़ी.
जैसेतैसे आकांक्षा की लाश वाला बक्सा बाहर निकाला गया. जब लाश बाहर निकली तो वहां मौजूद पुलिस वाले फिर सकते में आ गए. संदूक में लाश का अस्थिपंजर मिला, जिन्हें पोस्टमार्टम और फिर डीएनए जांच के लिए भेज दिया गया. प्रतीकात्मक तौर पर आकांक्षा का अंतिम संस्कार आयुष और उस के परिजनों ने भोपाल में ही कर दिया, जिस में शामिल होने के लिए उस के मातापिता नहीं आए.
इस जघन्य हत्याकांड की खबर देश भर में फैल गई. जिस ने भी सुना, उस ने उदयन को साइको कहा. पर उस के चेहरे पर पसरी बेफिक्री और बेशरमी वे पुलिस वाले ही देख पाए जो उसे ट्रांजिट रिमांड के लिए अदालत ले गए थे. इस के बाद रिमांड अवधि में शुरू हुई 32 वर्षीय उदयन दास और उस से जुड़ी दूसरी जानकारियां जुटाने की कवायद, जिन्होंने यह साबित कर दिया कि उसे साइको किलर बेवजह नहीं कहा जा रहा.
क्रमशः
सच तो यह भी था कि उसे देख कर उस की आंखों में चमक आ गई थी. उस के दिमाग में अपनी नौकरी के लिए पैरवी की उम्मीद की किरण नजर आई थी. कारण वह स्वास्थ्य मंत्रालय से जुड़ा था. उस के दिमाग में फायदे की 2 बातें बैठ गईं.
उस ने तुरंत अपनी सहेली को फोन मिलाया. उसे भी प्रोफाइल के बारे में बताया और उस से सलाह मांगी. सहेली ने सिर्फ इतना कहा कि उस से सपंर्क कर चैक कर ले. यह बात मई 2020 की थी. उन दिनों देश में कोरोना के दूसरे फेज का माहौल भी चल रहा था.
अगले ही रोज अवंतिका ने इस बारे में अपना निर्णय ले लिया. उस प्रोफाइल के डा. स्वैन को संपर्क करने के साथसाथ अपनी डिटेल्स भी भेज दी. उधर से प्रपोजल भी आ गया और उस ने शादी की तारीख भी तय कर दी. उस ने कोरोना पर लगी पाबंदियों का हवाला देते हुए कम से कम लोगों के बीच मंदिर में शादी की बात कही.
जुलाई 2020 में भुवनेश्वर के एक मंदिर में शादी की तारीख तय हो गई. स्वैन ने शादी के बाद वहीं से बेंगलुरु चलने की बात कही. बातोंबातों में उस ने घर के रेनोवेशन के लिए 5 लाख रुपए की भी मांग कर ली. अवंतिका के बैंक खाते में दिवंगत पति के पैसे जमा थे. उस में से ही उस ने पैसे देने का वादा भी कर लिया. स्वैन ने शादी में परिवार से किसी सदस्य को आने से मना कर दिया था. अवंतिका भी घर वालों के शोरशराबे से बचना चाहती थी. वह अपने कुछ कपड़ों से भरे सूटकेस के साथ भुवनेश्वर आ गई थी.
मंदिर में साधारण तरह से हुई शादी के समय स्वैन की तरफ से केवल एक दंपति मौजूद था. उस का परिचय उस ने बहन और बहनोई के रूप में करवाया था. अवंतिका नवविवाहिता बन भुवनेश्वर स्थित स्वैन के 3 कमरे वाले एक मकान में आ गई थी. वहां केवल एक नौकरानी रहती थी. उसी से मालूम हुआ कि घर की देखभाल की जिम्मेदारी उस पर थी.
स्वैन अकसर शहर से बाहर ही रहता था. महीनों बाद शादी के लिए आया था. फिर भी अवंतिका को घर का शांत माहौल अच्छा लगा. उस से भी अच्छा लगा स्वैन का स्वभाव और मधुर बोली. वह बेहद खुश थी. लंबे समय बाद किसी पुरुष का साथ मिला था, जिसे वह अपना कह सकती थी और खास बात यह थी कि वह एक बड़े अधिकारी की पत्नी थी.
2 दिनों बाद ही स्वैन ने बेंगलुरु जाने की फ्लाइट बुक करवा ली थी. उस का टिकट साथ में नहीं लेने पर जब अवंतिका ने सवाल किया, तब उस ने बताया कि औफिस में हेल्थ रिलेटेड एक जरूरी प्रोजेक्ट जमा करवाना है. सेंटर की हेल्थ मिनिस्टरी का और्डर है. उसे निपटा कर एक सप्ताह में लौट आएगा. फिर कहीं घूमने का प्लान बनाएंगे. तब तक वह यहां का घर अपने अनुसार दुरुस्त कर ले.
वादे के मुताविक स्वैन ठीक आठवें रोज भुवनेश्वर आ गया था. आते ही उस ने 2 दिन बाद अवंतिका को आगे के टूर का प्रोग्राम बताया, जो गोवा का था. वह टूर भी उस के औफिस से रिलेटेड था. वह 2 दिनों के लिए भुवनेश्वर में ठहरा था. इस दौरान स्वैन जब सुबह के समय बाथरूम में था, तब नौकरानी भागती हुई उस के पास आई. उस के हाथ में मोबाइल था, ‘‘मैडम! देखिए आप के फोन में कौल आ रही है?’’
‘‘मेरा मोबाइल! वह तो मेरे पास है. अरे, यह साहब का है. यहीं रख दो वह बाथरूम से आएंगे तब देख लेंगे. एप्पल मोबाइल एक जैसे दिखते हैं, किस का कौन है पहचाना ही नहीं जाता.’’
अवंतिका के बोलतेबोलते काल डिस्कनेक्ट हो गई थी. कुछ सेकेंड बाद फिर कौल आया, नाम उभरा ‘वाइफ डाक्टर’. सोचा किसी डाक्टर की वाइफ का फोन होगा. कुछ सेकेंड बाद फोन फिर डिस्कनेक्ट हो गया. किंतु तुरंत एक कौल आ गई. उस में दूसरा नाम उभरा था ‘वाइफ बेंगलुरु’.
अवंतिका को स्वैन पर होने लगा शक
यह नाम देख कर अवंतिका को एक बार फिर अजीब लगा. खुद से बातें करने लगी, ‘वाइफ बेंगलुरु’ का मतलब क्या हो सकता है?
उस फोन के कटते ही अवंतिका ने स्वैन का फोन उस समय आए मिस काल को स्क्राल कर दिया. देखा, उस से पहले और 2 काल आई थी. एक में ‘वाइफ टीचर’ था, जबकि दूसरे में सिर्फ ‘डब्ल्यू भुवनेश्वर’ लिखा था. उसी वक्त स्वैन बाथरूम से निकल आया. उस के हाथ में अपना मोबाइल देख कर एक झपट्टे के साथ ले लिया. डांटते हुआ बोला, ‘‘मेरा मोबाइल क्यों देख रही हो. जरा भी मैनर नहीं है क्या? एजूकेटेड हो.’’
अवंतिका अभी अपनी सफाई देती उस से पहले ही स्वैन ने उसे खूब खरीखोटी सुना दी. अचानक स्वैन के बदले तेवर को देख कर अवंतिका सहम गई. स्वैन उस रोज नाश्ता किए बगैर चला गया.
उस के जाने के बाद अवंतिका उदास हो गई. नौकरानी ने आ कर उसे नाश्ता दिया. हाथ पकड़ कर बोली, ‘‘मेम साहब, साहब की बातों का बुरा नहीं मानना. वह ऐसे ही हैं. तुरंत नाराज हो जाते हैं, लेकिन तुरंत शांत भी हो जाते हैं. देखना अभी एक घंटे में वापस आएंगे और कोई गिफ्ट भी देंगे.’’
‘‘अच्छा?’’ अवंतिका बोली.
‘‘जी मेमसाहब!’’ नौकरानी मुसकराती हुई बोली.
‘‘और कुछ बताओ साहब के बारे में,’’ अवंतिका ने कहा.
‘‘और क्या बताऊं उन के बारे में… सब कुछ तो ठीक है, लेकिन…’’
‘‘लेकिन क्या, बताओ. हो सका तो मैं तुम्हारी मदद करूंगी,’’ अवंतिका बोली.
‘‘साहब को मत बोलना… मैं खुद बोल दूंगी. मेरा 3 महीने का पैसा बाकी है. सोचा थी आज मांगूंगी… लेकिन साहब नाराज हो गए,’’ नौकरानी मायूसी के साथ बोली.
‘‘कितना पैसा बाकी है? बताओ मैं दे देती हूं.’’
‘‘जी 9 हजार,’’ नौकरानी झिझकती हुई बोली. अवंतिका ने तुरंत अपने बैग से 10 हजार रुपए निकाले और नौकरानी के हाथ में रख दिए.
‘‘मेमसाहब आप बहुत अच्छी हैं. इस में एक हजार अधिक हैं,’’ नौकरानी बोली.
‘‘कोई बात नहीं, रख लो मेरी तरफ से गिफ्ट है.’’ अवंतिका ने कहा.
नौकरानी के कहे मुताबिक स्वैन उस रोज नहीं आ पाया. अवंतिका ने रात होने पर नौकरानी से स्वैन के नहीं आने का कारण पूछा. किंतु उस से कोई सही जवाब नहीं मिल पाया. उस ने सिर्फ आश्चर्य जताते हुए कहा कि ऐसा तो पहली बार हुआ है.
अगले रोज स्वैन शाम के वक्त आया. वह हड़बड़ी में था. फटाफट खुद सामान पैक किया और तुरंत निकल पड़ा. अवंतिका कुछ पूछती, इस से पहले ही उस ने सौरी बोलते हुए बताया कि उसे एक दिन पहले ही निकलना पड़ेगा. अगली बार बेंगलुरु ले चलने का वादा कर चला गया.
रीवा जिले में मनगांव थाने की पुलिस ने एक युवक की पेड़ से लटकी लाश को फंदे से नीचे उतार लिया था. उस के कपड़ों की तलाशी ली गई तो उस के पास से मोबाइल फोन और आधार कार्ड मिला. आधार कार्ड से उस की पहचान कैलाश यादव के रूप में हुई. वह खुरहा, रघुराजगढ़ गांव का रहने वाला था. टीआई जे.पी. पटेल ने युवक के घर वालों को खबर दे कर मौके पर बुलाया. करीब घंटे भर बाद उस के घर वाले आए. उन में उस की पत्नी भी थी.
पति की लाश देखते ही पिंकू यादव रोते हुए अचानक चिल्लाने लगी, ‘‘हाय! आखिर मार डाला हरामजादी मालती ने. पहले रेप में फंसाया और अब मरवा दिया कुतिया कमीनी ने मेरे पति को. कोई पकड़ लाओ उस हरामजादी को, ऐसे ही पेड़ से लटका दूंगी.’’ कहतेकहते वह अर्धमूर्छित हो गई. उस की हालत विक्षिप्तों जैसी हो गई थी.
प्रेमिका पर लगाया आरोप
मौके पर मौजूद एक सिपाही ने उस के चेहरे पर पानी का छींटे मारे. कुछ सेकेंड बाद उस की आंखें खुलीं, तब पीने के लिए पानी की बोतल उस के सामने कर दिया. वह 2 घूंट पानी पी कर फिर पहले की तरह मालती नाम ले ले कर गालियां देने लगी. पति की मौत का जिम्मेदार वह उसे ठहरा रही थी. गुस्से में आ कर वह लाश के चारों ओर घूमने लगी. हाथ में कभी पास पड़ा डंडा तो कभी ईंटपत्थर उठा लेती. तब तक वहां कुछ और लागों की भीड़ जमा हो गई थी.
भीड़ को देख कर वह और भी विक्षिप्त हो गई थी. कभी रोने लगती तो कभी गुस्से में बड़बड़ाने लगती. उस की इस हालत को देख कर पुलिसकर्मियों के सामने मुश्किलें आ रही थीं कि कैसे मृत युवक के संबंध में जरूरी जानकारियां जुटाए?
पत्नी के साथसाथ उस के सभी घर वालों ने एक सुर में कैलाश यादव की हत्या का आरोप लगाया, जबकि वह जबलपुर प्रयागराज नेशनल हाइवे 30 के किनारे सुबह साढ़े 6 बजे फांसी के फंदे से झूलता पाया गया था. हैंगिंग डैडबौडी देखने से तो यही लग रहा था कि उस ने सुसाइड की है1

इस घटना के अगले दिन 21 फरवरी को उस की कोर्ट में पेशी होनी थी. उस पर बलात्कार का आरोप लगा हुआ था, जो उसी के मोहल्ले की रहने वाली मालती नाम की युवती द्वारा लगाया गया था. कैलाश की पत्नी पिंकू यादव द्वारा बारबार चीख कर कहना कि उस के पति को मालती ने ही मरवाया है, एक संदेह पैदा करने जैसा था. पत्नी ने यह भी आरोप लगाते हुए सवाल किया कि जबलपुर के होटल में काम करने वाले कैलाश को कोर्ट में पेशी के लिए 21 फरवरी, 2023 को जबलपुर से रीवा आना था तो वह एक दिन पहले कैसे आ गया?
इस सवाल पर उपस्थित भीड़ भी बौखला गई और कुछ लोगों ने परिजनों के साथ मिल कर कैलाश की लाश को हाईवे पर रख कर वाहनों की जाम लगा दिया. इस सूचना को पा कर रीवा के एसपी नवनीत भसीन के आदेश पर पुलिस के दूसरे अधिकारी घटनास्थल पर पहुंच गए. उन्होंने भीड़ को हटाया और लाश का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दी.

रूपजाल में फंसाया मालती ने
जांच अधिकारी जे.पी. पटेल कैलाश की पत्नी को पूछताछ के लिए थाने ले आए. उस से मालती के बारे में पूछताछ की गई, जिस पर वह कैलाश को मरवाने का आरोप लगा रही थी. पत्नी ने दोटूक जवाब दिया कि मालती ने पहले कैलाश को अपने रूपजाल में फंसाया, फिर उसे बलात्कार के केस में फंसाने की धमकी दी. समझौते के लिए 15 लाख रुपए मांगने लगी. पैसा नहीं देने के चलते उस ने बलात्कार के केस में उसे फंसा ही दिया.
कैलाश की पत्नी के बयान से पुलिस को इतना तो पता चल ही गया था कि मृतक एक अय्याश किस्म का युवक रहा होगा. इस कारण ही वह मालती के जाल में फंस गया होगा. मालती की इस में कितनी और कैसी भूमिका थी, इस की जांचपड़ताल के लिए रीवा पुलिस ने रीवा के तरहटी मोहल्ले की रहने वाली मालती को हिरासत में ले लिया. साथ ही पुलिस कैलाश के अपराधों के बारे में जानकारी लेने के अलावा उस के मालती के संबंध के बारे में पता लगाने में जुट गई.
इस के लिए दोनों के मोबाइल फोन नंबरों की डिटेल्स निकलवाई गई. उस से पता चला कि कैलाश के जेल से बाहर आने के बाद उसे हमेशा मालती ही फोन करती रही. यहां तक कि जिस रोज कैलाश साईं मंदिर के पास फांसी पर लटका मिला था, उस रोज कुछ समय पहले मालती ने ही उसे फोन किया था. इस का पता कैलाश के मोबाइल में आई आखिरी काल के नंबर से भी चल गया था.
यही नहीं, 19 फरवरी, 2023 को भी मालती ने कैलाश को फोन किया था. उस वक्त दोनों के फोन की लोकेशन रीवा रेलवे स्टेशन की पाई गई. पुलिस के सामने बड़ा सवाल था कि मालती ने जिस कैलाश को बलात्कार के आरोप में जेल भिजवाया था, उसे बारबार क्यों फोन कर रही थी? उस ने 19 फरवरी को क्यों फोन किया होगा? आखिर मालती चाहती क्या थी?

जांच अधिकारी ने हिरासत में मालती के साथ पूछताछ में सख्ती बरती. महिला पुलिस ने उस पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाते हुए उल्टा केस बनाने और कड़ी जेल भेजने की धमकी दी. जेल में महिला कैदियों के साथ होने वाले दुव्र्यवहार और शोषण की तमाम बातें उसे बताईं. मालती पुलिस की सख्ती के आगे ज्यादा समय तक नहीं टिक पाई. सब से पहले तो उस ने स्वीकार कर लिया कि उस के कैलाश के साथ अवैध संबंध थे. कई बार वह जबलपुर से रीवा आ कर उस के घर पर ही ठहरता था. रातें रंगीन करता था. यहां तक कि अपनी पत्नी और बच्चों से मिले बिना वापस जबलपुर लौट जाता था. इस के बदले में कैलाश उसे पैसे देता था. अपनी आमदनी का बड़ा हिस्सा उस के साथ मौजमस्ती पर खर्च कर देता था.
ब्लैकमेलिंग पर उतर आई प्रेमिका
मालती ने यह भी स्वीकार किया कि उस ने कैलाश के खिलाफ बलात्कार का केस दर्ज कराया है. उसे वापस लेने के लिए उस से 15 लाख रुपए मांगे थे. इतनी बड़ी रकम देने से कैलाश ने इनकार कर दिया था. फिर मालती ने 5 लाख रुपए मांगे थे. 21 फरवरी को इसी केस में उस की कोर्ट में पेशी थी. इसी सिलसिले में मालती उसे 19 फरवरी को रीवा स्टेशन से सीधे अपने घर ले गई थी और उस पर दया करते हुए 5 लाख के बजाय 3 लाख रुपए की मांग रख दी थी. कैलाश ने यह रकम भी देने में अपनी मजबूरी बताई.
यहां तक कि मालती भी उस की मजबूरी पर थोड़ा और नरम हो गई. मालती ने पुलिस को बताया कि आखिर मांग उस ने डेढ़ लाख रुपए की रखी और कोर्ट में इस रकम पर समझौता कर अपना केस वापस लेने का वादा किया था. उस वक्त कैलाश कुछ कहे बगैर मालती के यहां से चला गया. वह कहां गया, इस बारे में वह पुलिस को कोई जानकारी नहीं दे पाई.

मालती के इस बयान पर टीआई जे.पी. पटेल ने यह निष्कर्ष निकाला कि कैलाश को मालती ने ब्लैकमेल किया है. पैसे के फायदे के लिए उस से संबंध कायम किए और उस के बदले में उस से पैसे वसूले और अब मोटी रकम वसूलने के चक्कर में लगी हुई थी. शायद इसी मानसिक उत्पीडऩ के चलते उस ने आत्महत्या कर ली होगी. इस आधार पर पुलिस ने उस के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मुकदमा दर्ज कर लिया. पुलिस ने उसे अदालत में पेश कर जेल भेज दिया. मालती और कैलाश यादव के अवैध संबंध और मौत की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार निकली—
अस्पताल में हुई थी मुलाकात
मध्य प्रदेश के रीवा जिले के मनगंवा थाना सीमा से बसे खुरहा रघुराजगढ़ गांव के रहने वाले कैलाश यादव के परिवार में कुल 5 लोग थे, पत्नी, 2 बच्चों के अलावा उस की बूढ़ी मां. वह परिवार की जिम्मेदारी उठाने वाला अकेला सदस्य था. अपने परिवार को मां के पास छोड़ कर जबलपुर के एक होटल में नौकरी करता था.
बात 2 साल पहले कोरोना काल के ठीक पहले ही है. अपने बीमार भतीजे को देखने के लिए वह रीवां के संजय गांधी अस्पताल गया था. उसी दौरान कैलाश की चचेरी बहन के पति के साथ मालती भी अस्पताल में आई हुई थी. कैलाश ने उस पर कोई ध्यान नहीं दिया, लेकिन मालती की तिरछी नजर कैलाश पर जा टिकी थी. उसे कैलाश का बांका शरीर बेहद आकर्षक लगा था. वह उस से मिलने और बात करने को वह व्याकुल हो गई थी. लेकिन अस्पताल का माहौल था, इसलिए उस से बात नहीं कर पाई, लेकिन किसी तरह से उस ने कैलाश का फोन नंबर हासिल कर लिया था.
मालती का अपने पति से तलाक हो चुका था. वह उसी मोहल्ले में अकेली रहती थी, जहां कैलाश का परिवार रहता था. उस के बच्चे भी नहीं थे. रातें करवटें बदलती बीतती थीं. यौन संबंध के लिए तड़पती रहती थी. मर्द की चाहत में कई बार बेचैन हो जाती थी. जब से उस ने कैलाश को देखा था, तब से उस की बेचैनी और बढ़ गई थी. वह उस के ख्यालों में बारबार आ रहा था. वह उस से मिलने को बेचैन हो गई थी. लेकिन कैसे? उसे इतना पता था कि वह जबलपुर जा चुका है.
एक रात उस की याद में करवटें बदलता हुआ मोबाइल पर वीडियो देखने के लिए स्क्रीन स्क्राल कर रही थी. इसी दौरान मोबाइल में कैलाश का सेव नंबर दिख गया. उस ने तुरंत काल कर दिया. यह भी नहीं देखा कि रात के डेढ़ बज रहे हैं.
कैलाश को इस तरह फांसा मालती ने
उधर आधी रात को अनजाना नंबर देख कर कैलाश भौचक रह गया. उस ने काल रिसीव किए बगैर काट दी. कुछ समय बाद फिर वही नंबर स्क्रीन पर आया. उस ने दोबारा कट कर दिया और बाथरूम के लिए चला गया. बाथरूम से लौटने पर उस ने वाट्सऐप पर मैसेज आया देखा. एक लाइन में लिखा था, ‘‘मैं तुम्हारे मोहल्ले की हूं.’’
मैसेज को क्लिक करते ही उसी नंबर से काल आ गई. इस बार कैलाश ने काल रिसीव कर ली. हैलो बोलते ही जवाब सुनने को मिला, ‘‘रांग नंबर मत बोलना…गुस्सा मत होना. मैं तुम्हारे मोहल्ले की मालती बोल रही हूं. जब से तुम्हें देखा है तभी से तुम से जरूरी बात करना चाहती थी, लेकिन तुम जबलपुर चले गए.’’
“मुझे कब देखा?’’ कैलाश ने जिज्ञासा से पूछा.
“अस्पताल में और कहां? तुम्हारी बहन के साथ गई थी, जब तुम अपने भतीजे को देखने आए थे.’’ उधर से मालती मधुरता के साथ बोली. उस की आवाज में गजब की लोच थी, एक आकर्षण था और आमंत्रण भी. कैलाश को फोन पर अपना नाम और परिचय बताने के साथसाथ प्यार करने का जाल भी फेंक दिया. उस ने रीवा आने पर मिलने की इच्छा जताई. उ
स दिन मालती कैलाश से इधरउधर की बातें करती रही और अपनी बातों से मधुरता और अपनत्व का एहसास करवाती रही. कैलाश को भी धीरेधीरे उस से बातें करते हुए अच्छा लगने लगा थी. बातें करतेकरते उस ने महसूस किया कि उस की पत्नी कभी भी इतने प्यार से बात नहीं करती है. जब भी सामने आती है या पास बैठती है, हमेशा पैसे मांगती है. घर की समस्या बताती रहती है.
मालती और कैलाश के बीच फोन पर एक बार बातचीत का जो सिलसिला शुरू हुआ, वह नियमित बन गया. उन के बीच लंबी बातें होने लगीं. इस बीच मालती अश्लील बातें भी करने लगती थी, जिस से उस की सैक्स भावना उभर जाती थी और वह कामुकता से भर जाता था.
एक दिन मालती ने अपनी मीठीमीठी बातों से कैलाश को इस कदर प्रभावित कर दिया कि वह अगले रोज ही जबलपुर से रीवा चला आया. अपने घर जाने के बजाए वह मालती के घर चला गया. वहीं रात गुजारी. मालती ने भी उस के आवभगत में कोई कसर नहीं छोड़ी. बढिय़ा मनपसंद खाना और शराब के साथ शबाब पा कर कैलाश धन्य हो गया. हफ्ते भर बाद उसे तब होश आया, जब उस की छुट्ïटी खत्म हो चुकी है. जब साथ काम करने वाले ने फोन कर उसे जल्द आने के लिए कहा.
रातें रंगीन होने लगीं कैलाश की
इस तरह से कैलाश मालती का दीवाना बन गया था. उस की आंखों में वासना और प्यार की झलक को देख कर मालती अच्छी तरह समझ गई थी कि वह उस की गिरफ्त में आ चुका है. वह जैसे चाहेगी उसे अपना बना कर रखेगी. हुआ भी ऐसा ही. कैलाश मालती के साथ यौन सुख से जितना संतुष्ट था, उतना ही उसे पाने के लिए बेचैन भी रहने लगा था. बदले में उस पर पैसे खर्च करने में कोई कमी नहीं रहने देना चाहता था. उस की आमदनी बहुत अच्छी नहीं थी, फिर भी जो कमाता था, उस का बड़ा हिस्सा मालती पर लुटा देता था.
यह सिलसिला अपनी गति से चल रहा था. मालती ने मौका देख कर उस से एकमुश्त 15 लाख रुपए की मांग कर दी. इतनी बड़ी राशि सुनते ही कैलाश चकरा गया. उस ने किसी तरह से कहा इतना पैसा तो उस के पास नहीं है. यह बात जुलाई 2022 की है.
मालती को न सुनने की आदत नहीं थी. वह शुरू से ही अपने मन की करती आई थी. कैलाश की न से नाराज हो गई. उस ने दोटूक कह दिया कि चाहे जैसे भी हो, उसे 15 लाख रुपए चाहिए. मजाक में कैलाश ने बोल दिया कि यदि नहीं दिया तो क्या होगा? इस पर बिफरती हुई मालती ने उसे मुकदमे में फंसाने की धमकी दे डाली. मुकदमे की बात सुन कर कैलाश समझ नहीं पाया कि वह किस तरह मुकदमा करेगी, उस ने जो कुछ किया उस में उस की भी सहमति थी. उस ने मालती की धमकी को गंभीरता से नहीं लिया, जबकि मालती पैसे के मामले में जिद ठान चुकी थी.
मालती 22 अगस्त, 2022 को सीधे रीवा कोतवाली गई. उस ने कैलाश के खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज करवा दिया. यह मामला दर्ज होते ही उस की गिरफ्तारी हो गई. वह 70 दिनों बाद जमानत पर छूट कर जेल से बाहर आया. जेल से छूटने के बाद अपने काम पर जबलपुर चला गया. इस की जानकारी मालती को लगी, तब वह उस से फोन पर ही पैसा मांगने लगी. मना करने पर धमकियां देने लगी.
प्रेमिका को जाना ही पड़ा जेल
इस बीच उस की रीवा के कोर्ट में पेशी होती रही. वह 10 जनवरी, 2023 को भी पेशी के लिए रीवा आया. उस रोज भी मालती ने कहा कि वह पैसे लिए बगैर उस का पीछा नहीं छोड़ेगी. जबकि वह कैलाश की चचेरी बहन की जानने वाली थी. कैलाश की पत्नी ने अपनी ननद से समझौता करवाने की बात की. समझौता भी हुआ, लेकिन मालती 5 लाख रुपए लेने पर अड़ गई.

दूसरी पेशी 24 जनवरी को होने वाली थी. उस रोज मालती 5 की जगह 3 लाख रुपए ले कर समझौता करने पर राजी हो गई थी. कैलाश ये पैसे देने में भी असमर्थ था. अगली पेशी 21 फरवरी को तय हुई थी. उस सिलसिले में ही कैलाश 19 फरवरी की रात को रीवा आ गया था. उसे मालती ने रेलवे स्टेशन पर ही अपनी गिरफ्त में ले लिया था और धमकी दी थी कि अगर उस ने पैसे नहीं दिए तो वह उसे जेल में सड़वा देगी. यह बात कैलाश को चुभ गई और उस ने पेड़ पर फंदा बना कर आत्महत्या कर ली.
प्यार और आत्महत्या की पूरी कहानी सामने आने के बाद कैलाश की पत्नी द्वारा लगाए गए आरोपों को पुलिस ने सही माना. मालती को अत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश कर दिया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.
जब पुलिस ने दोनों के मोबाइल लोकेशन बंजारी के जंगल में मिलने की बात कही और सख्ती से पूछताछ की तो पुलिस की सख्ती के आगे वह जल्दी ही टूट गया और सारी सच्चाई उस ने पुलिस के सामने बयां कर दी. गिरिजा ने बताया कि उस ने पूर्णिमा का मर्डर कर दिया है.
जंगल में मिली पूर्णिमा की लाश
14 अप्रैल, 2023 को गिरिजा शंकर ने पुलिस को बताया कि उस ने पूर्णिमा को गांगुलपरा और बंजारी के बीच जंगल की पहाड़ी में ले जा कर उस की गला घोट कर हत्या कर दी थी. टीआई अमित सिंह कुशवाह, एसआई जयदयाल पटले, रमेश इंगले, हैडकांस्टेबल रमेश उइके, गौरीशंकर को ले कर गांगुलपरा और बंजारी के बीच पहाड़ी जंगल ले कर पहुंची और गिरिजा शंकर की निशानदेही पर पूर्णिमा की लाश बरामद की.
इस दौरान पूर्णिमा बिसेन की हत्या की सूचना मिलते ही लांजी के एसडीपीओ दुर्गेश आर्मो, एसपी (सिटी) अंजुल अयंत मिश्रा, टीआई (भरवेली) रविंद्र कुमार बारिया के अलावा अन्य पुलिसकर्मी और अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और जांचपड़ताल शुरू की.
पूर्णिमा की लाश अधिक दिनों की होने से काफी खराब हो चुकी थी. मौके की काररवाई करने के बाद पूर्णिमा की लाश जिला अस्पताल लाई गई, जहां पर पूर्णिमा के मातापिता सहित परिवार के अन्य लोगों ने चप्पल और कपड़ों से लाश की पहचान की. उन्होंने बताया कि लाश पूर्णिमा की ही है. रात होने से लाश का पोस्टमार्टम नहीं हो पाया.
पोस्टमार्टम न हो पाने की वजह से लाश को बालाघाट के जिला अस्पताल के फ्रीजर में रखवा दिया, दूसरे दिन 15 अप्रैल को लाश का पोस्टमार्टम कर लाश को पूर्णिमा के घर वालों के सुपुर्द किया गया गया. जैसे ही पूर्णिमा की लाश गांव पहुंची तो पूरे गांव में मातम छा गया. परिवार के लोगों ने नम आंखों से उस का अंतिम संस्कार कर दिया.
पुलिस ने इस मामले में गिरिजा शंकर पटले के खिलाफ भादंवि की धारा 302, 201 के तहत अपराध दर्ज किया और इस अपराध में उसे गिरफ्तार कर लिया. गिरिजा शंकर पटले से पूर्णिमा की हत्या में प्रयुक्त दुपट्ïटा, बाइक और मोबाइल भी बरामद कर लिया.
15 अप्रैल को पुलिस ने गिरिजा शंकर को बालाघाट कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे 2 दिन की पुलिस रिमांड पर लिया गया. रिमांड के दौरान की गई पूछताछ में जो कहानी सामने आई, वह रिश्तों को तारतार करने वाली थी….
27 साल का गिरिजा शंकर बालाघाट जिले के किरनापुर ब्लौक के गांव मोहगांव खारा में रहने वाले खुमान सिंह पटले का बेटा था. खुमान सिंह की 2 बेटियों में से बड़ी बेटी शारदा की शादी 4 साल पहले लिम्देवाड़ा के पवन बिसेन से हुई थी.
बहन की शादी के बाद से ही गिरिजा शंकर का अपनी बहन की ननद पूर्णिमा के साथ प्रेम संबंध चल रहे थे. गिरिजा शंकर का किरनापुर में फोटो स्टूडियो है. वह शादी विवाह समारोह में फोटोग्राफी और वीडियो शूटिंग का काम करता है. ग्रैजुएट गिरिजा शंकर अपने इस हुनर से अच्छीखासी आमदनी कर लेता है. इसी आमदनी से उस के शौक भी पूरे होते हैं. गिरिजा शंकर पूर्णिमा की भी हर ख्वाहिश पूरी करता था, यही वजह थी कि पूर्णिमा उस के प्यार में दीवानी थी.
भाई के साले गिरिजा शंकर से हुआ प्यार
करीब 4 साल पहले गिरिजा शंकर की बहन शारदा का विवाह पूर्णिमा के भाई से हुआ था. शादी के बाद अपनी बहन को लिवाने जब गिरिजा शंकर अपने दोस्तों के साथ लिमदेवाड़ा गया था, तब परंपरा के अनुसार उन की खूब खातिरदारी हुई थी. पूर्णिमा भी गिरिजा शंकर के साथ बैठ कर खूब हंसीमजाक कर रही थी. पूर्णिमा उस समय 19 साल की नवयौवना थी, जिस का रूपयौवन देख कर गिरिजा शंकर मन ही मन फिदा हो गया था.
बहन शारदा की शादी के बाद उसे ससुराल से लिवाने अकसर गिरिजा शंकर बाइक से जाता था. बहन शारदा का एकलौता भाई होने की वजह से उसे सब पसंद करते थे. बहन की ससुराल में वह पूर्णिमा से हंसीमजाक करता तो रिश्ते के लिहाज से कोई कुछ नहीं कहता था. धीरेधीरे पूर्णिमा और गिरिजा शंकर के बीच हंसीमजाक से शुरू हुआ सिलसिला प्यार में तब्दील हो चुका था. पूर्णिमा का भाई और पिता खेतीबाड़ी में लगे रहते और पूर्णिमा कालेज की पढ़ाई कर रही थी, ऐसे में गिरिजा शंकर कभीकभार पूर्णिमा को कालेज भी छोड़ दिया करता था.
एक दिन कालेज ले जाते वक्त गिरिजा शंकर ने बाइक बंजारी के जंगल में रोक दी तो पूर्णिमा ने पूछा, “यहां घने जंगल में बाइक क्यों रोक दी?”
“कुछ नहीं, आज जंगल में मंगल करने का इरादा है.” गिरिजा शंकर पूर्णिमा के साथ शरारत करते हुए बोला.
“धत, यहां कोई देख लेगा तो घर तक खबर पहुंचने में देर नहीं लगेगी.” पूर्णिमा बोली.
गिरिजा शंकर ने पूर्णिमा के गले में हाथ डाला और उसे जंगल के घने पेड़ की आड़ में ले जा कर बोला, “मेरी जान, जब प्यार किया तो डरना क्या.”
पूर्णिमा के अंदर सुलग रही आग भी आज चिंगारी बन कर जल उठी थी. उस ने भी अपनी बाहों को गिरिजा शंकर के गले में डालते हुए कहा, “मैं तो तुम्हें जी जान से प्यार करती हूं, तुम्हारी बाहों में मुझे जमाने का डर नहीं.”
“तो फिर मुझे अपनी हसरत पूरी कर लेने दो.” पूर्णिमा के होंठो पर चुंबन देते हुए गिरिजा शंकर ने कहा.
“किस ने रोका है तुम्हें, मैं भी तुम्हारे प्यार में जी भर के डूब जाना चाहती हूं.” पूर्णिमा ने गिरिजा शंकर के माथे को चूमते हुए कहा. धीरेधीरे गिरिजा शंकर के हाथ पूर्णिमा के अंगों पर रेंगने लगे. जंगल के एकांत में पूर्णिमा और गिरिजा शंकर ने अपने देह की आग को शांत किया और कपड़ों को ठीक करते हुए उसे कालेज छोड़ दिया. तन की आग बुझाने का सिलसिला जो एक बार शुरू हुआ तो फिर आगे बढ़ता गया. अकसर दोनों को जब भी मौका मिलता, अपनी हसरतें पूरी करने लगे.
क्रमशः