Makeup Artist Kidnapping : 2 करोड़ के लिए मेकअप आर्टिस्ट का अपहरण

Makeup Artist Kidnapping. कुछ अपराधियों को लगता है कि अपहरण कर के फिरौती वसूलना आसान काम है, इसलिए योजना बना कर वे अपहरण तो कर लेते हैं, पर यह भूल जाते हैं कि अब पुलिस भी हाईटेक हो चुकी है.

पश्चिमी दिल्ली का रहने वाला अभिषेक खेत्रपाल भोजपुरी फिल्मों का अभिनेता ही नहीं, बल्कि एक जानामाना मेकअप आर्टिस्ट था. सन 2012 में उसे भोजपुरी फिल्म ‘छबीली’ में सैकेंड लीड रोल मिला था. इस के बाद पता नहीं उसे क्या सूझा कि उस ने अभिनय के बजाय अपने लिए दूसरा ही क्षेत्र चुना. वह अभिनय का मोह छोड़ कर मेकअप के क्षेत्र में उतर गया. वह मौडलों से ले कर तमाम मशहूर हस्तियों का मेकअप करने लगा. जल्दी ही वह फिल्मी कलाकारों का चहेता मेकअप आर्टिस्ट बन गया. इस क्षेत्र में उन का इतना नाम हुआ कि उसे सन 2015 में बेस्ट एयरब्रश मेकअप आर्टिस्ट का अवार्ड मिला. यह खिताब उसे अभिनेत्री सोहा अली खान के हाथों दिया गया था.

इस के बाद अभिषेक ने दिल्ली के जनकपुरी क्षेत्र में ‘ए.के. ब्यूटी वर्ल्ड’ के नाम से मेकअप स्टूडियो खोल लिया. अपने स्टूडियो में सहायक के रूप में उस ने 4-5 लड़कियों को रख लिया था. उस के स्टूडियो में ब्राइडल मेकअप के लिए महिलाओं का भी आना शुरू हो गया. चूंकि अभिषेक एक फेमस मेकअप आर्टिस्ट था, इसलिए अधिकतर युवतियों की यही ख्वाहिश रहती थी कि वह अपना ब्राइडल मेकअप अभिषेक से ही कराएं.

20 अक्तूबर, 2016 की बात है. अभिषेक खेत्रपाल अपने स्टूडियो में थे, तभी उन के मोबाइल पर किसी का फोन आया. अभिषेक ने मोबाइल स्क्रीन देखा तो नंबर अनजान था. उन्होंने इस अनजान नंबर से आई काल को रिसीव किया तो दूसरी ओर से आवाज आई, ‘‘मैं द्वारका से बोल रहा हूं. आज मेरी दिव्यांग बहन की शादी है. उस की इच्छा है कि वह अपना मेकअप आप से कराए.’’

‘‘देखिए, मेरा शेड्यूल बड़ा बिजी है. मेरे पास पहले से कई अपौइंटमेंट हैं. मैं पहले उन से फ्री होऊंगा, उस के बाद समय मिलेगा तो देखा जाएगा.’’ अभिषेक ने कहा. ‘‘सर, कोशिश कीजिए.’’ उस व्यक्ति ने कहा. ‘‘नहीं, मेरे पास समय नहीं है.’’ कह कर अभिषेक अपने काम में जुट गया.

करीब 2 घंटे बाद उसी व्यक्ति ने अभिषेक के मोबाइल पर फिर से फोन कर के वही रिक्वेस्ट की. अभिषेक ने उस व्यक्ति को समझा दिया कि उस के पास टाइम नहीं है. कुछ देर बाद उस व्यक्ति ने अभिषेक को फोन कर के अनुरोध करते हुए कहा, ‘‘सर, मेरी बहन ने जिद पकड़ रखी है कि वह शादी का मेकअप आप से ही कराएगी.’’

उस की बात सुन कर अभिषेक को भी लगा कि जब एक दिव्यांग युवती इतनी जिद कर रही है तो क्यों न वह उस के लिए समय निकाले. उस दिव्यांग युवती के लिए सहानुभूति दिखाते हुए अभिषेक ने उस का मेकअप करने का मन बना लिया. अभिषेक ने उस व्यक्ति से कहा, ‘‘मैं रात 10 बजे के करीब आप के यहां आ सकता हूं. आप अपना एड्रेस दे दीजिए.’’

वह व्यक्ति खुश हो कर बोला, ‘‘आप द्वारका में होटल रेडिसन ब्लू के पास पहुंच जाइए. मैं वहीं गाड़ी भेज दूंगा. मेरा ड्राइवर आप को घर ले आएगा.’’

‘‘मैं गोल्डन कलर की आई-20 कार डीएल10सी ए8261 से ठीक 10 बजे होटल के पास पहुंच जाऊंगा.’’ अभिषेक ने बता दिया.

‘‘ठीक है सर, वहीं पर मेरा ड्राइवर डीएल 1जेड ए 4314 नंबर की कार के साथ मिलेगा.’’ उस व्यक्ति ने कहा.

अपने ब्यूटी स्टूडियो से निपटने के बाद अभिषेक खेत्रपाल निर्धारित समय पर उस दिव्यांग युवती का ब्राइडल मेकअप करने के लिए निकल गए.

अभिषेक जब कभी शाम को घर नहीं लौटता था तो घर वाले समझ जाते थे कि वह काम में व्यस्त होगा. कई बार अपने व्यस्त होने की बात वह अपने घर वालों को बता भी देता था. 20 अक्तूबर को जब वह रात 12 बजे तक घर नहीं पहुंचा तो मां पूपला खेत्रपाल ने उसे फोन किया. उस का फोन स्विच्ड औफ मिला. इस से वह समझ गईं कि बेटा कहीं व्यस्त होगा, इसलिए उस ने अपना फोन बंद कर रखा है.

अभिषेक नादान तो था नहीं, जो घर वाले उस की ज्यादा चिंता करते. वह उच्चशिक्षित और बहुत समझदार था, इसलिए उस की तरफ से वे निश्चिंत रहते थे. बस उन्हें यह लगा रहता था कि उस ने समय पर खाना खाया या नहीं? अगले दिन मां ने अभिषेक को फिर फोन मिलाया. उस का फोन इस बार भी बंद मिला.

21 अक्तूबर, 2016 की रात करीब साढ़े 9 बजे पूपला खेत्रपाल अपने पति सुभाषचंद्र खेत्रपाल के साथ घरेलू बातें कर रही थीं, तभी उन के फोन पर 8506053333 नंबर से फोन आया. फोन करने वाले ने बिना कोई भूमिका बांधे सीधे कहा, ‘‘अभिषेक अब हमारे कब्जे में है. अगर उसे जिंदा देखना चाहते हो तो 2 करोड़ रुपए का इंतजाम कर लो.’’

इतना कर उस ने फोन काट दिया. जवान बेटे के अपहरण की बात सुन कर पूपला खेत्रपाल घबरा उठीं. यह बात उन्होंने अपने पति सुभाषचंद्र को बताई तो वह भी परेशान हो उठे. जिस नंबर से पत्नी के पास फिरौती की काल आई थी, उस नंबर को उन्होंने अपने फोन से मिलाया, पर वह नंबर स्विच्ड औफ मिला. वह पश्चिमी दिल्ली के जनकपुरी के ए-वन ब्लौक में रहते थे. आननफानन में सुभाषचंद्र पत्नी को ले कर थाना जनकपुरी पहुंच गए.

थानाप्रभारी रिछपाल सिंह को सुभाषचंद्र ने बेटे अभिषेक के अपहरण और 2 करोड़ रुपए फिरौती मांगे जाने की बात बताई. थानाप्रभारी को मामला गंभीर लगा. उन्होंने उन से वह फोन नंबर हासिल किया, जिस से उन के पास फिरौती की काल आई थी.

अभिषेक एक धनाढ्य परिवार से था, ऊपर से वह खुद एक जानीमानी शख्सियत था, इसलिए थानाप्रभारी ने इस की सूचना डीसीपी विजय कुमार को दे दी. तब डीसीपी ने इस मामले की रिपोर्ट दर्ज कर तुरंत काररवाई करने के निर्देश दिए.

डीसीपी के निर्देश पर थानाप्रभारी ने अज्ञात अपहर्त्ताओं के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली और केस को सुलझाने के लिए एक पुलिस टीम बनाई. इस टीम में एसीपी (विकासपुरी) सोमेंद्रपाल, एसीपी (औपरेशन) पंकज सूद, इंसपेक्टर नरेश हुडा, थानाप्रभारी (जनकपुरी) रिछपाल सिंह, एसआई लक्ष्मण कुमार चौधरी, एसआई मनोहरलाल, हैडकांस्टेबल सनेज, कांस्टेबल राजेश, भारत सिंह, मनिंदर आदि को शामिल किया गया.

पुलिस ने सब से पहले अपहर्त्ता के उक्त फोन नंबर को सर्विलांस पर लगा दिया. उस फोन की लोकेशन लखनऊ की आ रही थी. पुलिस ने यह पता लगाने की कोशिश की कि यह सिमकार्ड किस के नामपते पर खरीदा गया था. पता चला कि आइडिया कंपनी का यह सिम फरजी नामपते पर लिया गया था. इस से पुलिस समझ गई कि अपहर्त्ता बेहद शातिर हैं, उन्होंने अपने बचने का रास्ता पहले ही खोज लिया है.

पुलिस को यह जानकारी मिली कि आइडिया कंपनी का वह सिमकार्ड पश्चिमी दिल्ली के विकासपुरी के आदिनाथ एंटरप्राइजेज से डिस्ट्रीब्यूट हुआ था. वहां पूछताछ से पता चला कि वह सिम उत्तमनगर स्थित हर्षित कम्युनिकेशन को दिया गया था. हर्षित कम्युनिकेशन पर जतिन और उस का बड़ा भाई बैठता था. पुलिस ने दोनों भाइयों से पूछताछ की तो जतिन ने बताया कि उस ने इस नंबर का सिम सुमित यादव नाम के व्यक्ति को बेचा था.

पुलिस को जांच सही दिशा में जाती लग रही थी. जतिन सुमित यादव को व्यक्तिगत रूप से जानता था. वह उत्तमनगर, विकास नगर के सैनिक एनक्लेव में रहता था. जतिन के सहारे पुलिस सुमित के घर पहुंच गई. वह घर पर ही मिल गया.

सुमित ने बताया कि वह सिम उस ने मोहन गार्डन के डिफेंस एनक्लेव के रहने वाले दीपक उर्फ दीपू को दिया था. उस ने पुलिस को दीपक का घर दिखा दिया.

पुलिस दीपक के घर नहीं गई. उस ने मुखबिर के द्वारा दीपक के बारे में जानकारी जुटाई तो पता चला कि वह घर से गायब है. वह कहां गया है, इस बात का पता नहीं लग सका. मुखबिर ने पुलिस को यह बात भी बता दी कि दीपक का एक घनिष्ठ मित्र है विनोद कुमार उर्फ लंगड़ा, जो डिफेंस कालोनी की गली नंबर-1 में रहता है.

पुलिस टीम विनोद के घर पहुंची. वह घर पर नहीं मिला. घर पर उस के पिता श्रीपाल मिले. उन्होंने बताया कि वह अपने दोस्तों के साथ कहीं घूमने गया है. विनोद के गायब होने से पुलिस को विश्वास हो गया कि विनोद और दीपक साथसाथ हैं. पुलिस ने श्रीपाल से पूछताछ की तो पता चला कि वह मूलरूप से उत्तर प्रदेश के जिला हरदोई के गांव महुआ डांडा के रहने वाले हैं.

पूपला खेत्रपाल के पास फिरौती की जो काल आई थी, उस की लोकेशन लखनऊ की थी और विनोद का पैतृक गांव महुआ डांडा भी लखनऊ के नजदीक था. इस से पुलिस का माथा ठनका कि कहीं ये लोग अभिषेक का अपहरण कर के लखनऊ की ओर तो नहीं ले गए. 24 घंटे बीत चुके थे. पुलिस जल्द से जल्द अपहर्त्ताओं के पास पहुंचने की कोशिश में लगी थी. उधर पूपला खेत्रपाल और सुभाषचंद्र को बेटे की चिंता खाए जा रही थी. वह बारबार पुलिस से संपर्क कर बेटे के बारे में पूछ रहे थे. पुलिस टीम 2 गाडि़यों में सवार हो कर शाम को ही लखनऊ के लिए रवाना हो गईं.

22 अक्तूबर की रात करीब 9 बजे पूपला खेत्रपाल के मोबाइल की घंटी बजी. उत्सुकता से उन्होंने स्क्रीन पर देखा तो वह खुश हुईं, क्योंकि वह नंबर उन के बेटे का था. पर जैसे ही उन्होंने काल रिसीव की, दूसरी ओर से आवाज आई, ‘‘पैसों का इंतजाम हुआ या अभी नहीं?’’

‘‘देखिए, अभी हमारे पास 2 करोड़ तो हैं नहीं, पर हम जल्द ही इंतजाम कर लेंगे. अगर आप एक बार हमारे बेटे से बात करा दें तो बड़ी मेहरबानी होगी. हमारे दिल को तसल्ली हो जाएगी.’’

‘‘आप बात करने को कह रही हैं, हम तो उसे रिहा करना चाहते हैं. लेकिन इस से पहले जो हम ने कहा है, वह पूरा कर दो.’’ कह कर अपहर्त्ता ने फोन काट दिया.

सुभाषचंद्र ने अपहर्त्ता द्वारा किए गए इस फोन की जानकारी पुलिस को दे दी. सर्विलांस टीम ने जांच की तो पता चला कि यह काल उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर के पास से की गई थी.

2 कारों में सवार हो कर जो पुलिस टीम लखनऊ जा रही थी, वह मुरादाबाद ही पहुंची थी कि उसे थाने से जानकारी मिली कि फिरौती के लिए अपहर्त्ता का फिर से फोन आया था. उस के फोन की लोकेशन कानपुर शहर के नजदीक की है. इस से यह स्पष्ट हो गया कि अपहर्त्ता लखनऊ क्षेत्र में ही हैं.

पुलिस टीम ने सब से पहले विनोद के गांव महुआ डांडा जाने का निश्चय किया. पुलिस टीम सुबह के समय हरदोई पहुंच गई. वहां जा कर पता चला कि महुआ डांडा वहां से करीब 25 किलोमीटर दूर था. वह अतरौली थाने के अंतर्गत आता था. दिल्ली पुलिस ने थाना अतरौली पहुंच कर लोकल पुलिस से संपर्क किया. इस के बाद पुलिस टीम विनोद के गांव महुआ डांडा की तरफ चल दी.

लोकल पुलिस से दिल्ली पुलिस को पता चला कि महुआ डांडा गांव बेहद पिछड़ा हुआ है. आज भी वहां अधिकांश घर कच्चे हैं. गांव में शायद ही किसी के पास कार हो. अगर वहां कोई कार वाला पहुंचता है तो ज्यादातर लोगों को उस की जानकारी हो जाती है.

लोकल पुलिस ने किसी बहाने से उस गांव के प्रधान के बेटे को फोन कर के गांव के बाहर बुलवाया. उसे विश्वास में ले कर कहा कि तुम यह पता लगा कर आओ कि इस समय विनोद के घर में कोई बाहरी व्यक्ति तो नहीं है.

प्रधान के बेटे ने पुलिस को उसी समय बता दिया कि विनोद के घर 2 दिन से एक गाड़ी बारबार आजा रही है. इस से दिल्ली पुलिस की उम्मीद और बढ़ गई. प्रधान का बेटा किसी बहाने से गांव में विनोद के घर गया. दिल्ली पुलिस के एसआई लक्ष्मण कुमार और मनोहरलाल भी सादे कपड़ों में उस के साथ गांव तक पैदल गए, पर वे विनोद के घर नहीं गए.

कुछ देर बाद प्रधान के बेटे ने बताया कि घर में विनोद लंगड़े के अलावा 3 और लोग हैं. वे कौन हैं, वह नहीं जानता. एसआई मनोहरलाल ने फोन द्वारा यह जानकारी गांव के बाहर इंतजार कर रही पुलिस टीम को दे दी. विनोद के घर के आसपास वह गाड़ी नजर नहीं आई, जिस से वह गांव आया था.

इसलिए पुलिस ने उस के घर रेड डालनी जरूरी नहीं समझी. पुलिस ने सोचा कि ऐसा न हो कि अपहर्त्ताओं में से कोई अपहृत किए गए अभिषेक को कार से कहीं और ले गया हो. विनोद के घर में रेड डालने की खबर पा कर अपहर्त्ता अभिषेक को नुकसान पहुंचा सकते थे. यही सोच कर पुलिस ने रेड नहीं डाली, बल्कि पुलिस उस गाड़ी का विनोद के घर आने का इंतजार करने लगी.

दोपहर बाद डीएल1जेड ए 4314 नंबर की एक टैक्सी विनोद के घर आई. प्रधान के बेटे ने बताया कि यही टैक्सी यहां 2 दिनों से चक्कर लगा रही है. एसआई मनोहरलाल ने तुरंत इस की सूचना गांव के बाहर ठहरी पुलिस टीम को दे दी. 10 मिनट के अंदर पुलिस टीम गांव महुआ डांडा स्थित विनोद के घर पहुंच गई. उस के घर को चारों तरफ से घेर कर दबिश दी गई. पुलिस ने वहां से 5 युवकों को हिरासत में ले लिया, जिन में विनोद लंगड़ा भी था.

उन से पूछताछ के बाद पुलिस अंदर के तीसरे कोठे में पहुंची. वहीं पर अभिषेक एक खटिया से बंधा पड़ा था. वह हलके नशे में था, लेकिन पुलिस को देखते ही उस की जान में जान आ गई. पुलिस ने उस के रस्सी से बंधे हाथपैर खोले. हाथपैर खुलते ही वह पुलिस वालों से लिपट कर रोने लगा.

पूछताछ में उन युवकों ने अपने नाम विनोद कुमार, दीपक कुमार निवासी डिफेंस एनक्लेव, उत्तमनगर; नासिर अली, गली नंबर 7, उत्तमनगर; नीरज शर्मा निवासी निकट लक्ष्मीनारायण मंदिर, उत्तमनगर और वसीम अंसारी, निवासी हस्तसाल कालोनी, उत्तमनगर, नई दिल्ली बताया.

अभिषेक खेत्रपाल को सुरक्षित बरामद करने की सूचना डीसीपी विजय कुमार को मिली तो उन्होंने राहत की सांस ली. उन्होंने अभिषेक के मातापिता को भी यह खबर दे दी. वे मारे खुशी के फूले नहीं समा रहे थे.

पांचों अभियुक्तों को हिरासत में ले कर पुलिस टीम दिल्ली लौट आई. सभी से पूछताछ करने पर अभिषेक के अपहरण की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार थी—

सुभाषचंद्र खेत्रपाल पश्चिमी दिल्ली के जनकपुरी में अपनी पत्नी पूपला खेत्रपाल और बेटे अभिषेक के साथ रहते थे. सुभाषचंद्र सरकारी अधिकारी थे, जबकि उन की पत्नी जुपिटर नाम से बुटीक चलाती थीं. बेटे को उन्होंने दिल्ली के जानेमाने निजी स्कूल में पढ़ाया था. पढ़ाई के दौरान ही उस का रुझान फिल्मों की तरफ हो गया था. उस के रुझान को देखते हुए उन्होंने उसे नोएडा की फिल्म सिटी स्थित एशियन एकेडमी औफ फिल्म ऐंड टेलीविजन में पढ़ाई की इजाजत दे दी थी. वहां से सन 2010 में कोर्स पूरा करने के बाद वह फिल्म इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाने में जुट गया.

शुरुआत में अभिषेक को कई फिल्मों और नाटकों में छोटेछोटे रोल मिले. दूरदर्शन के कई कार्यक्रमों में भी वह शामिल हुआ. हिंदी फिल्मों के अलावा उस के पास भोजपुरी फिल्मों में काम करने के औफर आए. उसे सन 2012 में भोजपुरी फिल्म ‘छबीली’ में सैकेंड लीड रोल मिला.

अभिनय के दौरान ही उस का रुझान मेकअप की ओर हो गया. वह शूटिंग के दौरान फिल्मी कलाकारों का मेकअप करने लगा. उस का मेकअप वर्क सभी को पसंद आने लगा. इस के बाद तो वह केवल हिंदी फिल्मों के ही नहीं, बल्कि भोजपुरी फिल्म कलाकारों का भी चहेता मेकअप आर्टिस्ट बन गया. फिल्मी हस्तियों के अलावा मशहूर मौडल्स भी उस से मेकअप कराने लगीं.

अभिषेक खेत्रपाल के काम की ही बदौलत उसे सन 2015 में बेस्ट एयरब्रश मेकअप आर्टिस्ट का अवार्ड मिला. इस के बाद अभिषेक ने दिल्ली के जनकपुरी में ए.के. ब्यूटी वर्ल्ड नाम से एक मेकअप स्टूडियो खोल लिया. अपने स्टूडियो में वह ब्राइडल मेकअप स्पैशलिस्ट का काम करने लगा. ब्राइडल मेकअप के लिए उस के पास पहले से ही अपौइंटमेंट फिक्स रहते थे.

अभिषेक की मां पूपला खेत्रपाल का जो बुटीक था, उस पर वसीम अंसारी नाम का एक युवक टेलरिंग का काम करता था. वसीम उत्तमनगर की हस्तसाल कालोनी में रहता था. यह बात सन 2011-12 की है. यहां से काम छोड़ कर वसीम जनकपुरी के ही रेडरौक नाम के रेस्टोरेंट में काम करने लगा. कुछ दिनों बाद यह रेस्टोरेंट बंद हो गया तो उसे उत्तमनगर के मोहन गार्डन में बिरयानी की एक जानीमानी दुकान में नौकरी मिल गई.

वहीं पर वसीम की मुलाकात दीपक उर्फ दीपू, नीरज शर्मा और विनोद कुमार से हुई. ये दोनों मोहन गार्डन के ही डिफेंस एनक्लेव में रहते थे. विनोद की कपड़ों पर प्रैस करने की दुकान थी. इन के बीच दोस्ती बढ़ी तो अपने काम से निपटने के बाद देर शाम को सब विनोद की दुकान पर महफिल जमाने लगे.

वसीम हमेशा ज्यादा पैसे कमाने की सोचता रहता था. इसी के चलते उस ने सन 2014 में कपड़े सिलने की एक फैक्ट्री खरीदी थी. चूंकि उसे इस क्षेत्र का अनुभव था, इसलिए उस ने किसी एक्सपोर्ट फर्म से संपर्क कर के उस के और्डर पर अपनी फैक्ट्री में कपड़े सिलवाने का काम शुरू किया. पर कुछ दिनों बाद ही उस का यह धंधा बंद हो गया. मजबूरन उसे सन 2015 में अपनी फैक्ट्री बंद करनी पड़ी.

बाद में उस ने एक बुटीक खोला. पर यह भी नहीं चला, जिस से उसे बुटीक भी बंद करना पड़ा. लगातार घाटा होने से उस पर काफी कर्ज हो गया था. लोग उस के पास अपने पैसों का तकादा करने आने लगे. उस के पास देने के लिए पैसे थे नहीं, इसलिए उसे उन की बातें भी सुननी पड़ती थीं. वह काफी तनाव में रहने लगा था. कोई ऐसा धंधा भी उसे नजर नहीं आ रहा था, जहां से मोटी आमदनी हो सके.

एक दिन वह अपने दोस्तों विनोद, नीरज और दीपक के साथ अपनी समस्या को ले कर बात कर रहा था, तभी उन्होंने उसे किसी का अपहरण करने का सुझाव दिया. सुझाव तो सही था, पर यह बात समझ में नहीं आ रही थी कि अपहरण किस का किया जाए. उसी दौरान उस के दिमाग में पूपला खेत्रपाल के एकलौते बेटे अभिषेक का ध्यान आया. वह पैसे वाला था. उस का अपहरण करने पर मोटी रकम मिल सकती थी, इसलिए दोस्तों से सलाह करने के बाद वह अभिषेक के ही अपहरण की योजना बनाने लगा.

वसीम अभिषेक के स्वभाव आदि से परिचित था. उस के पास उस का मोबाइल नंबर पहले से ही था. वसीम ने अपने साथियों के साथ अभिषेक की करीब 15 दिनों तक रेकी की. भूमिका तो बंध गई, लेकिन समस्या यह आई कि अभिषेक को अपहरण के बाद रखा कहां जाए. इस समस्या का समाधान विनोद ने कर दिया.

दरअसल विनोद मूलरूप से उत्तर प्रदेश के जिला हरदोई के महुआ डांडा गांव का रहने वाला था. उस के गांव वाले घर में केवल उस की दादी रहती थी, जो कुछ दिनों पहले दिल्ली आ गई थी. अब वह मकान एकदम खाली था. वसीम और दीपक एक दिन विनोद के घर जा कर उस का गांव वाला मकान देख आए. अभिषेक को वहां रखने के लिए उन्हें वह जगह पसंद आई.

वहां से लौटने के बाद ये लोग फरजी नामपते पर 3 सिमकार्ड और एक कार की व्यवस्था में जुट गए. वसीम का एक दोस्त नासिर डीएल 1जेड ए 4314 नंबर की टैक्सी चलाता था. पैसों के लालच में नासिर भी उन की योजना में शरीक हो गया. दीपक ने इस बारे में उत्तमनगर में मोबाइल फोन की दुकान चलाने वाले जतिन से बात की. जतिन अपने बडे़ भाई के साथ हर्षित कम्युनिकेशंस नाम से मोबाइल दुकान चलाता था. हर्षित ने 500 रुपए में दीपक को आइडिया कंपनी के 3 सिमकार्ड दे दिए. वे सिम फरजी नामपते पर खरीदे गए थे.

वसीम की बुआ का एक बेटा था रिजवान, जो दिल्ली के सिविललाइंस इलाके में मंगलम मैडिकेयर सेंटर नाम के अस्पताल में नौकरी करता था. इन सब का प्लान अपहरण के बाद अभिषेक को बेहोशी की हालत में रखने का था. बेहोशी के इंजेक्शन रिजवान ठीक से लगा सकता था, इसलिए वसीम ने रिजवान को पूरी योजना समझा कर उसे भी अपने साथ ले लिया.

यह सब इंतजाम हो जाने के बाद अब अभिषेक के अपहरण की बारी थी. चूंकि वह ब्राइडल मेकअप करने अपने स्टूडियो से बाहर भी जाता था, इसलिए नासिर ने फरजी कस्टमर बन कर उस से अपनी दिव्यांग बहन का ब्राइडल मेकअप करने का अनुरोध किया. शुरू में तो अभिषेक ने खुद के व्यस्त होने की वजह से मना कर दिया, पर बाद में जब उसे उस की विकलांग बहन पर तरस आ गया तो उस ने हां कर दी.

अभिषेक अपनी गोल्डन कलर की आई-20 कार नंबर डीएल10सी ए8261 से 20 अक्तूबर, 2016 की रात करीब 10 बजे द्वारका के होटल रेडिसन ब्लू के पास पहुंचा तो वहां पर विनोद, नासिर, नीरज, दीपक और वसीम पहले से तैयार थे. वसीम को अभिषेक जानता था, इसलिए वह वहां से थोड़ा साइड में खड़ा हो गया था.

अभिषेक की कार जैसे ही उस होटल के नजदीक पहुंची, नासिर ने उसे इशारा किया. अभिषेक अपनी कार नासिर की टैक्सी के नजदीक ले गया. अभिषेक जैसे ही नासिर से बात करने के लिए कार से उतरा, नीरज और दीपक ने उसे जबरदस्ती नासिर की कार में बैठा लिया. दोनों उसे डराधमका कर पिछली सीट पर दबोचे रहे.

तभी रिजवान ने अभिषेक की बांह पर बेहोशी का इंजेक्शन लगा दिया. विनोद और वसीम अभिषेक की कार में सवार हो गए. ये सब लोग वहां से आईजीआई एयरपोर्ट पहुंचे. वहां इन्होंने अभिषेक की कार पार्किंग में खड़ी कर दी और नासिर की टैक्सी से विनोद, दीपक और रिजवान अभिषेक को ले कर हरदोई की तरफ रवाना हो गए. जब भी अभिषेक को होश आता, रिजवान उसे नशे का इंजेक्शन लगा देता. उधर वसीम और नीरज रात में ही बस से हरदोई के लिए निकल गए थे.

इन लोगों ने अभिषेक को विनोद के पैतृक घर में एक खटिया से बांध दिया. उसे वहां सुरक्षित रख कर वसीम और दीपक लखनऊ चले गए. वहीं से वसीम ने अभिषेक की मां पूपला खेत्रपाल को फोन कर के अभिषेक के अपहरण की जानकारी देते हुए 2 करोड़ रुपए की फिरौती मांगी. इस के बाद उन्होंने फिरौती की अगली काल कानपुर से अभिषेक के फोन से की. अभिषेक के घर वाले उन्हें बराबर पैसे देने का आश्वासन देते रहे. उधर अपहर्त्ताओं द्वारा फरजी आईडी पर लिए गए फोन नंबरों के सहारे पुलिस उन तक पहुंचने की कोशिश कर रही थी.

आखिर 23 अक्तूबर को पुलिस को सफलता मिल ही गई. पुलिस ने अपहृत अभिषेक को गांव महुआ डांडा से मुक्त करा कर अभियुक्त दीपक, विनोद, नासिर, नीरज और वसीम को गिरफ्तार कर लिया.

पुलिस ने पांचों अभियुक्तों को दिल्ली की द्वारका कोर्ट के महानगर दंडाधिकारी डा. जगमिंदर सिंह की अदालत में पेश कर के 3 दिनों के पुलिस रिमांड पर लिया. पुलिस ने सभी से विस्तार से पूछताछ कर जरूरी सबूत जुटाए.

इन के मुख्य साथी रिजवान की तलाश की जा रही थी. पता चला कि वह मूलरूप से उत्तर प्रदेश के सीतापुर का रहने वाला था. वसीम को साथ ले कर एसआई लक्ष्मण कुमार, हैडकांस्टेबल सनेज और कांस्टेबल परमिंदर की टीम सीतापुर उस के घर पहुंची. पर वह घर पर नहीं मिला. घर पर उस की मां मिली. उस ने उस के बारे में कुछ भी नहीं बताया.

मां कहीं रिजवान को फोन न कर दे, इसलिए पुलिस ने उस का मोबाइल फोन ले लिया. पड़ोसियों से बात करने पर पता चला कि वह यहां नहीं है तो दिल्ली में होगा या फिर लखनऊ में अपनी बहन के पास मिलेगा. उस की बहन लखनऊ में कहां रहती है, पुलिस के पास उस का पता नहीं था. इसलिए पुलिस लखनऊ कोतवाली के सामने अस्पताल के पास रेडीमेड कपड़े बेचने वाले उस के पिता शफीकुद्दीन के पास पहुंची. दिल्ली पुलिस ने शफीकुद्दीन को पूरी बात बताई. अपहरण के मामले में बेटे के शामिल होने पर शफीकुद्दीन को बहुत दुख हुआ.

पुलिस के कहने पर शफीकुद्दीन ने किसी बहाने से बेटे को अपने पास बुलवाया. आने पर पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया. रिजवान को हिरासत में ले कर पुलिस टीम दिल्ली लौट आई. पुलिस ने रिजवान से भी पूछताछ कर जानकारी हासिल की कि उस ने नशे के इंजेक्शन कहां से जुटाए थे.

फरजी आईडी पर मोबाइल सिम उपलब्ध कराने वाले सुमित यादव और जतिन (नाबालिग) को भी हिरासत में ले कर पूछताछ की गई. जतिन को बाल न्यायालय में पेश कर बालसुधार गृह भेज दिया गया, जबकि अन्य सातों अभियुक्तों को न्यायालय में पेश कर के जेल भेज दिया गया.

जल्दी अमीर बनने का लालच इन युवाओं को अपराध के रास्ते पर ले गया. जितनी उत्साह से उन्होंने इस अपराध को अंजाम दिया, उतने उत्साह से यदि ये सभी मिल कर कोई काम करते तो उस में सफलता मिल सकती थी. काश वे इस बात को समझ पाते कि अपराध चाहे कितनी भी चालाकी से क्यों न किया जाए, पुलिस अपराधियों तक पहुंच ही जाती है. बहरहाल, कथा लिखने तक सातों अभियुक्त जेल में बंद थे. मामले की तफ्तीश एसआई लक्ष्मण कुमार चौधरी कर रहे हैं.  Makeup Artist Kidnapping

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित. जतिन परिवर्तित नाम है.

Press Release : Saras Salil Bhojpuri Cine Awards 2025 शो में चमके भोजपुरी सितारे

Press Release: Saras Salil Bhojpuri Cine Awards 2025

लखनऊ : 10 अप्रैल, 2025 की शाम को लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में दिल्ली प्रेस की पत्रिका सरस सलिल द्वारा छठे सरस सलिल भोजपुरी सिने अवार्ड शो का आयोजन कराया गया, जिसमें भोजपुरी फिल्मों के कलाकारों, फिल्मकारों, निर्देशकों और टेक्नीशियनों को वर्ष 2024 में प्रदर्शित फिल्मों के आधार पर विभिन्न श्रेणियों में अवार्ड दिए गए.

दर्शकों से भरे इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में भोजपुरी कलाकारों के अलावा उत्तर प्रदेश की कई बड़ी हस्तियों ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई, जिनमें ब्रजेश पाठक, उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री, उत्तर प्रदेश, दिनेश प्रताप सिह, कृषि राज्यमंत्री, उत्तर प्रदेश, संदीप बंसल, अध्यक्ष, अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल, प्रभुनाथ राय, अध्यक्ष, अखिल भारतीय भोजपुरी समाज, मुकेश बहादुर सिंह, चेयरमैन, इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स, लखनऊ, पवन सिंह चौहान, चेयरमैन, एसआर ग्रुप ऑफ एजुकेशन और सदस्य, विधानसभा परिषद, राजेश राय, सूचना विभाग, श्वेता सिंह, क्षेत्रीय उपाध्यक्ष, भाजपा, अवध प्रांत, डाक्टर नीरज बोरा, सदस्य, विधानसभा, उत्तर प्रदेश, आनंद शेखर सिंह, चेयरमैन, बाबू सुंदर सिंह ग्रुप ऑफ एजुकेशन, लखनऊ, सुरेंद्र सिंह राजपूत, राष्ट्रीय प्रवक्ता, कांग्रेस, अनीता सहगल, एंकर एवं फिल्म अभिनेत्री, श्री पंकज त्रिपाठी, ग्रिप म्यूजिक आदि शामिल थे.

उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने सभी विजेता कलाकारों को अवार्ड जीतने की बधाई दी. उन्होंने दिल्ली प्रेस की पत्रिकाओं खासकर सरस सलिल की समाज के प्रति उस की जिम्मेदारी को सराहा.

दिल्ली प्रेस के संपादक और प्रकाशक परेश नाथ ने दिल्ली प्रेस के इतिहास पर प्रकाश डाला कि किस तरह यहां से प्रकाशित होने वाली पत्रिकाएं हर वर्ग का प्रतिनिधित्व करती हैं और सफलतापूर्वक अपनी बात सब के सामने रखती हैं.

इस अवार्ड नाइट में भोजपुरी के नामचीन कलाकार रहे विजय खरे को (मरणोपरांत) लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड दिया गया. अंजना सिंह को फिल्म बड़की दीदी के लिए बेस्ट एक्ट्रेस का अवार्ड मिला. अरविंद अकेला कल्लू को फिल्म कसमे वादे के लिए बेस्ट पॉपुलर एक्टर का अवार्ड मिला.

अनूप अरोड़ा को फिल्म सूर्यवंशम के लिए बेस्ट कैरेक्टर एक्टर क्रिटिक, आर्यन बाबू को फिल्म बड़ी मां छोटी मां के लिए बेस्ट चाइल्ड एक्टर, स्वास्तिक राय को फिल्म जया के लिए बेस्ट चाइल्ड एक्ट्रेस, विमल पांडेय को फिल्म हमार बड़की माई के लिए बेस्ट एक्टर जूरी, पल्लवी गिरि को फिल्म छठ मईया गोदिया भर दी हमार के लिए बेस्ट एक्ट्रेस जूरी, देव सिंह को फिल्म भैया मेरे राखी के बंधन को निभाना के लिए बेस्ट एक्टर फैमिली वेलयूज, संजय पांडेय को फिल्म भैया मेरे राखी के बंधन को निभाना के लिए बेस्ट एक्टर नेगेटिव रोल, के. के. गोस्वामी को फिल्म राजाराम के लिए बेस्ट कैरेक्टर एक्टर जूरी दिया गया.

Saras Salil ने भोजपुरी सिने अवार्ड्स के छठे संस्करण की घोषणा की

Saras Salil : लखनऊ, 28 मार्च 2025: भारत की सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली हिंदी पत्रिकाओं में से एक सरस सलिल, 10 अप्रैल 2025 को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में सरस सलिल भोजपुरी सिने अवार्ड्स 2025 के छठे संस्करण का आयोजन लखनऊ में करेगी। भोजपुरी सिनेमा की सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाओं को सम्मानित करने के लिए इस भव्य समारोह का आयोजन होने जा रहा है।

सरस सलिल भोजपुरी सिने अवॉर्ड्स एक ऐसा खास कार्यक्रम बन गया है, जहां फिल्म निर्माताओं, अभिनेताओं, टेक्निशियन और भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के अन्य सदस्यों के बेहतरीन काम को सराहा और सम्मानित किया जाता है। इस साल के पुरस्कार समारोह में 50 से ज़्यादा कैटेगरी में भोजपुरी सिनेमा में अवार्ड दिए जाएंगें, जिसमें एक्टिंग, डायरेक्टिंग, संगीत, सिनेमा और अन्य क्षेत्रों में उपलब्धियों को पुरूस्कृत किया जाएगा। इसके अंतर्गत सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म, सर्वश्रेष्ठ निर्देशक और सर्वश्रेष्ठ अभिनेता (पुरुष और महिला) शामिल हैं।

इस अवसर पर भोजपुरी सिनेमा के कुछ सबसे बड़े नाम शामिल होंगे, जिनमें दिनेश यादव निरहुआ, अरविंद अकेला कल्लू, आम्रपाली दुबे, अंजना सिंह, संजय पांडे, केके गोस्वामी, समर सिंह, रक्षा गुप्ता, यामिनी सिंह, देव सिंह, विमल पांडे, सीपी भट्ट, विनोद मिश्रा, शुभम तिवारी, पल्लवी गिरी, राधा सिंह, माही खान, ऋचा दीक्षित और विद्या सिंह शामिल हैं। उनकी मौजूदगी भोजपुरी सिनेमा के इस भव्य उत्सव की शोभा को बढ़ाएगी।

ये पुरस्कार न केवल भोजपुरी सिनेमा के सितारों को बल्कि पर्दे के पीछे के उन नायकों को भी पहचान दिलाने का मंच प्रदान करते हैं जो फिल्मों को सफल बनाते हैं। निर्माता और निर्देशक से लेकर टेक्निशियन, कोरियोग्राफर और साउंड इंजीनियर तक, फिल्म की सफलता में योगदान देने वाले हर व्यक्ति को पहचाना और सम्मानित किया जाता है।

परेश नाथ, दिल्ली प्रेस के एडिटर-इन-चीफ और पब्लिशर ने कहा, “सरस सलिल भोजपुरी सिने अवार्ड सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं है; यह भोजपुरी सिनेमा को आकार देने वाले जुनून और रचनात्मकता को पुरूस्कृत करता है। हमें इंडस्ट्री के विकास और सफलता में योगदान देने वाली अविश्वसनीय प्रतिभा को पहचानने और सम्मानित करने पर गर्व है। इस साल का आयोजन और भी शानदार होगा, जिसमें उन सितारों और गुमनाम नायकों को सराहा जाएगा जो सिनेमा को एक बेहतरीन कला के रूप में लोगों के सामने लेकर आते हैं।”

पुरस्कारों के लिए नामांकन प्रक्रिया बहुत ही सावधानीपूर्वक होती है। इस साल के पुरस्कारों के लिए 1 जनवरी, 2024 से 31 दिसंबर, 2024 के बीच रिलीज़ होने वाली सभी फ़िल्में शामिल हैं। इंडस्ट्री के विशेषज्ञों, आलोचकों और सिनेमा जगत की प्रमुख हस्तियों का एक पैनल नामांकितों का मूल्यांकन करेगा और प्रत्येक श्रेणी से विजेताओं का चयन करेगा।

पुरस्कार समारोह में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता और अभिनेत्री, साथ ही सहायक कलाकारों के लिए पुरस्कार दिए जाएंगे। इसके अलावा, सर्वश्रेष्ठ सिनेमेटोग्राफी और एडिटिंग जैसे तकनीकी पुरस्कार और सर्वश्रेष्ठ स्क्रीनप्ले और संगीत जैसे रचनात्मक पुरस्कार भी शामिल होंगे। इनके अलावा, लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड, उभरती प्रतिभा और साल की सर्वश्रेष्ठ भोजपुरी फिल्म जैसी खास श्रेणियां भी होंगी, जिसमें इंडस्ट्री के दिग्गजों और नए कलाकारों की उपलब्धियों को सम्मानित किया जाएगा।

सरस सलिल अवार्ड्स के बारे में अधिक जानने और नए समाचारों से अपडेट रहने के लिए, उनकी आधिकारिक वेबसाइट सरस सलिल पुरस्कार पर जाएं।

सरस सलिल के बारे में

सरस सलिल भारत की अग्रणी हिंदी पत्रिकाओं में से एक है, जिसे दिल्ली प्रेस द्वारा प्रकाशित किया जाता है। यह अपनी बेहतर लेख के लिए जानी जाती है, जिसमें सिनेमा, लाइफस्टाइल, संस्कृति और सामाजिक मुद्दों सहित कई विषयों को शामिल किया जाता है। भारत और उसके बाहर के पाठकों के साथ, सरस सलिल भोजपुरी सिनेमा पर विशेष ध्यान देने के साथ अलग-अलग रीजनल फिल्म इंडस्ट्री को बढ़ावा देने और उनका जश्न मनाने में सबसे आगे रहा है। अपने पुरस्कारों के माध्यम से, सरस सलिल प्रतिभा, कड़ी मेहनत और रचनात्मकता के लिए मान्यता का प्रतीक बना हुआ है, जो दर्शकों का मनोरंजन करने और उन्हें प्रेरित करने वाली फिल्में बनाने में जाता है।

मीडिया जानकारी के लिए

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Akshara Singh : 50 लाख दो वरना… भोजपुरी एक्‍ट्रैस अक्षरा सिंह को मिली जान से मारने की धमकी

एक्‍टर के बाद अब एक्‍ट्रैस को भी मिली धमकी. भोजपुरी फ‍िल्‍मों की मशहूर एक्‍ट्रैस अक्षरा सिंह को 50 लाख की रंगदारी नहीं देने पर जान से मारने की धमकी मिली है. इस बारे में अक्षरा सिंह ने बिहार के दानापुर थाने में अपनी शिकायत दर्ज कराई है.

रंगदारों की गिरफ्त में बौलीवुड

आजकल बौलीवुड में खुलेआम धमकियों का दौर चल पड़ा है. इस क्रम में सबसे पहला नाम सलमान खान का आता है, जिसे गैंगस्‍टर लौरेंस बिश्‍नोई बहुत दिनों से धमका रहा है. लौरेंस का कहना है कि सलमान खान ने काले हिरण का शिकार कर बिश्‍नोई समाज का दिल दुख पहुंचाया है, जिसका बदला वह लेकर रहेंगे. इस समुदाय के लोग काले हिरण को लेकर खास आस्‍था रखते हैं. इस मामले में सलमान के घर गैलेक्‍सी अपार्टमेंट पर भी हमला किया गया. हाल में यह भी खबर आई कि छत्‍तीसगढ़ के फैजान नाम के व्‍यक्ति ने शाहरुख खान को जान से मारने की धमकी दी है.

अब फैजान को पकड़ लिया गया है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार फैजान ने शाहरुख खान से 50 लाख की फ‍िरौती की मांग की थी. अब इसी काम में भोजपुरी एक्‍ट्रैस अक्षरा सिंह का नाम आ रहा है.
50 लाख दो नहीं तो मरो

खबरों के अनुसार, अक्षरा सिंह के मोबाइल फोन पर 11 नवंबर की रात को किसी अननोन नंबर से कौल आया था. उनके मोबाइल पर दो बार कौल किया गया. कौल करने वाले ने कहा कि अगर वे दो दिन के अंदर 50 लाख रुपए नहीं देंगी, तो उन्‍हें जान से मार दिया जाएगा. फोन करने वाला अपराधी यहीं नहीं रुका. उसने फोन पर ही अक्षरा सिंह से गालीगलौज भी की. इसके बाद एक्‍ट्रैस ने फोन काट दिया. बताया जा रहा है कि इस मामले में जांच शुरू कर दी गई है. आरोपी को जल्‍द से जल्‍द अरेस्‍ट करने को लेकर आदेश दे दिए गए हैं.

पहले भी अक्षरा पर हमले की कोशिश

भोजपुरी क्‍वीन के नाम से मशहूर अक्षरा सिंह ने एक बार यह खुलासा किया था कि उनके एक्‍स बौयफ्रेंड ने उन पर तेजाब फेंकने के लिए लड़के भेजे थे. अक्षरा सिंह ने अपने करियर की शुरुआत साल 2010 में एक्‍टर और पौलिटिशियन रवि किशन के साथ की थी, मूवी का नाम था सत्‍यमेव जयते. इनके बारे में कहा जाता है कि भोजपुरी एक्‍ट्रैसेस में सबसे अधिक फीस लेने वाली अदाकारा हैं. अक्षरा का नाम एक्‍टर पवन सिंह के साथ जुड़ चुका है. इन दोनों की लव स्‍टोरी जितनी पौपुलर थी, उतनी ही इनकी हेट स्‍टोरी भी चर्चा में रही. दोनों की लव स्‍टोरी 2015 में शुरू हुई.

दोनों ने चार साल तक डेटिंग भी की. इसके बाद दोनों की शादी होने की खबरें भी आती रही हालांकि यह शादी कभी हुई नहीं. पवन पहले से शादीशुदा थे लेकिन पतिपत्‍नी दोनों अलग ही रहते थे. ऐसा कहा गया कि जब अक्षरा और पवन रिलेशनशिप में थे तब पवन अक्षरा को चीट कर रहे थे. उन्‍हीं दिनों पवन का अफेयर ज्‍योति सिंह के साथ भी चल रहा था. बाद में दोनों का ब्रेकअप हो गया. अक्षरा सिंह की मशहूर

मूवीज में सौगंध गंगा मइया की, सरकार राज, मां तुझे सलाम, लव मैरिज शामिल है.
अक्षरा सिंह की राजनीति में भी रुचि है. बिहार में चुनाव के दिनों में उनको प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज के लिए भी प्रचार करते हुए देखा गया.

दिलों पर छा गया सरस सलिल भोजपुरी सिने अवार्ड

अयोध्या में आयोजित 5वां ‘सरस सलिल भोजपुरी सिने अवार्ड’ कई मायने में काफी खास रहा. इस साल भी इस का आयोजन ‘अयोध्या महोत्सव’ मंच पर 4 जनवरी, 2024 को किया गया. इस में भोजपुरी के अमिताभ बच्चन कहे जाने वाले कुणाल सिंह के साथसाथ आजमगढ़ के सांसद और जुबली स्टार दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’, आम्रपाली दुबे, संजय पांडेय, अंजना सिंह, देव सिंह सहित टौप के कलाकारों ने भाग लिया.

उत्तर प्रदेश के अयोध्या शहर में स्थित ‘फौरएवर लौन’ में रंगारंग कार्यक्रम शुरू होने के 3 घंटे पहले ही हजारों दर्शक पहुंच गए थे. दर्शकों का भोजपुरी कलाकारों के प्रति दीवानगी का यह आलम था कि कार्यक्रम स्थल पर पैर रखने की जगह नहीं बची थी. कड़ाके की ठंड भी फैंस में समारोह के प्रति उत्साह भरा हुआ था.

स्टेज पर जम कर झूमे कलाकार

अवार्ड की शुरुआत सागर शान एंड टीम ने डांस से की तो उन के ऐक्शन और स्टंट ने दर्शकों में रोमांच भर दिया. छरहरे बदन वाले अभिनेता विमल पांडेय और अभिनेत्री पल्लवी गिरि की जोड़ी ने अपने डांस से युवा दिलों की धड़कनें बढ़ा दीं.

लिटिल स्टार आर्यन बाबू की जब स्टेज पर एंट्री हुई तो दर्शकों की सीटियां रुकने का नाम नहीं ले रही थीं. भोजपुरी के पहले रैप सिंगर हितेश्वर ने अपने रैप से माहौल को पूरी तरह रंगीन बना दिया था.

इस के अलावा सूर्य प्रताप यादव ऐंड पार्टी, प्रमिला घोष, विजय यादव और राजेश गौड़ की पेशकश पर भी लोग रातभर झूमते रहे. दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ तो स्टेज पर आने के बाद खुद को रोक नहीं पाए. उन्होंने माइक संभाल कर खुद गाना गा कर आम्रपाली दुबे के साथ डांस किया. इस दौरान ‘कहरवा’ टीम के लोगों ने उन के साथ डांस किया.

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छाई रही विमल और माही की जोड़ी

अभिनेता विमल पांडेय और अभिनेत्री माही खान ने इस अवार्ड शो के होस्ट की जिम्मेदारी संभाली. इन की जोड़ी पिंक और ब्लैक ड्रैस में बेहद खूबसूरत नजर आ रही थी. इन दोनों ने भोजपुरिया बोली में बेहद खास अंदाज से शुरुआत कर पूरे समय अपने चुलबुले और फनी मोमैंट्स द्वारा लोगों को आखिर तक बांधे रखा. बीचबीच में यह हलकेफुलके अंदाज में हंसीमजाक से लोगों का मनोरंजन भी करते रहे.

सांसद और अभिनेता दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ ने बैस्ट अवार्ड लेने के बाद कहा कि ‘सरस सलिल भोजपुरी सिने अवार्ड’ में आ कर वह बेहद खुश हैं. इस से उन की दर्शकों के प्रति जिम्मेदारी और भी बड़ जाती है. वहीं अभिनेता संजय पांडेय ने कहा कि वे ‘सरस सलिल अवार्ड’ पा कर वह खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं.

ऐक्टर देव सिंह ने कहा कि उन्हें खुशी है कि जब ‘सरस सलिल अवार्ड’ की नींव रखी गई थी तो उन्हें तब भी अवार्ड मिला था और 5वें साल फिर उन्हें अवार्ड मिल रहा है. इस से उन की ऐक्टिंग के प्रति जवाबदेही और भी बढ़ जाती है. इस दौरान आम्रपाली दुबे, अंजना सिंह सहित सभी छोटेबड़े कलाकारों ने अपने विचार रखे.

खूब खिंची सैल्फी

‘सरस सलिल भोजपुरी सिने अवार्ड’ के प्रति दीवानगी केवल दर्शकों में ही नहीं, बल्कि भोजपुरी के तमाम बड़े हीरो हीरोइनों और टैक्निशियनों में भी दिखी. कलाकार अवार्ड पाने के बाद एकदूसरे के साथ खूब सैल्फी लेते दिखे.

कार्यक्रम को होस्ट कर रहे विमल पांडेय और माही खान की जोड़ी के साथ कई ऐक्टरों ने उन के शानदार अंदाज में ऐंकरिंग के लिए बधाई देते हुए सैल्फी ली. बहुत से कलाकारों ने उसे अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा भी किया.

दर्शकों को मली मनोरंजन की पूरी डोज

‘सरस सलिल भोजपुरी सिने अवार्ड’ के दौरान एक ओर दर्शक भोजपुरी के सुपर स्टार हीरो और हीरोइनों को सामने पा कर गदगद थे, वहीं दूसरी ओर उन के साथ सैल्फी लेने की होड़ मची थी. दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ के साथ दर्शक सैल्फी लेते रहे, लेकिन एक बार भी ‘निरहुआ’ के चेहरे पर गुस्सा या झल्लाहट नहीं दिखी.

कुछ यही हाल आम्रपाली दुबे, अनारा गुप्ता, रक्षा गुप्ता, सपना चौहान, पल्लवी गिरि के साथ हुआ. इन हसीनाओं ने अपने फैंस को खूब सैल्फी दीं.

आर्यन बाबू ने हीरोइनों को नचाया स्टेज पर

भोजपुरी फिल्मों में चाइल्ड ऐक्टर के तौर पर अपने हुनर और ऐक्टिंग की बदौलत मशहूर हुए आर्यन बाबू ने कड़ाके की ठंड में लोगों में एनर्जी भर दी और अपने निराले अंदाज में उन्हें खूब हंसाया. आर्यन बाबू यहीं नहीं रुके और उन्होंने माइक थाम कर जब गाना शुरू किया, तो दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ और आम्रपाली दुबे सहित सभी ऐक्टर दर्शकों के साथ तालियां बजाने लगे.

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आर्यन बाबू ने अपने डांस में तब और ज्यादा ट्विस्ट ला दिया, जब उन्होंने ‘मिस जम्मू’ और फेमस ऐक्ट्रैस अनारा गुप्ता, रक्षा गुप्ता, सपना चौहान को स्टेज पर थिरकने को मजबूर कर दिया. चाइल्ड ऐक्टर आयुषी मिश्र ने भी लोगों को खूब गुदगुदाया.

देसी नाच ‘कहरवा’ में खूब झूमे ऐक्टर

‘अयोध्या महोत्सव मंच’ पर आयोजित हुए ‘5वें सरस सलिल भोजपुरी सिने अवार्ड’ में जो सब से खास रहा, वह था ‘कहरवा’. अवधी बोली में गाए जाने वाले गीत के साथ जब अवधी कलाकार राजेश गौड़ की अगुआई में तकरीबन 3 दरजन सहकलाकारों की टीम स्टेज पर पहुंची तो लोगों की सांसें थम सी गईं. इन युवा कलाकारों ने खतरनाक स्टंट के साथ देसी अंदाज में जो डांस पेश किया, उस ने लोगों में रोमांच भर दिया.

बड़े सितारों को मिले यह अवार्ड

‘5वें सरस सलिल भोजपुरी सिने अवार्ड’ में इस बार भारी संख्या में आवेदन आए थे. लेकिन जूरी द्वारा फिल्मों में ऐक्टिंग, ऐडिटिंग, संगीत, मारधाड़, कथापटकथा इत्यादि के आधार पर जिन लोगों का चयन किया गया, उस में सब से ऊपर नाम दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ और आम्रपाली दुबे का रहा, क्योंकि इन दोनों सितारों को ऐक्टिंग की ओवरआल श्रेणी में बैस्ट ऐक्टर का अवार्ड दिया गया.

दिनेशलाल यादव ‘निरहुआ’ को जहां उन की फिल्म ‘माई प्राइड औफ भोजपुरी’ में की गई ऐक्टिंग के लिए बैस्ट ऐक्टर का अवार्ड दिया गया, वहीं आम्रपाली दुबे को फिल्म ‘दाग एगो लांछन’ के लिए बैस्ट ऐक्ट्रैस का अवार्ड मिला. रजनीश मिश्र को ‘माई प्राइड औफ भोजपुरी’ के लिए बैस्ट डायरेक्टर और बैस्ट म्यूजिक डायरेक्टर का अवार्ड मिला.

सब से ज्यादा अवार्ड निशांत उज्ज्वल को मिले. उन्हें विभिन्न कैटेगरी में कुल 3 अवार्ड मिले, जिस में ‘माई प्राइड औफ भोजपुरी’ को बैस्ट फिल्म का, ‘विवाह 3’ के लिए बैस्ट संपूर्ण मनोरंजन प्रदान करने वाली फिल्म और बैस्ट डिस्ट्रीब्यूटर के अवार्ड से नवाजा गया.

‘माई प्राइड औफ भोजपुरी’ के लिए ही जनार्दन पांडेय ‘बबलू पंडित’ को बैस्ट लाइन प्रोड्यूसर, प्यारेलाल यादव ‘कविजी’ को बैस्ट गीतकार, प्रियंका सिंह को बैस्ट सिंगर, दिलीप यादव को बैस्ट ऐक्शन, कानू मुखर्जी को बैस्ट कोरियोग्राफर, ज्योति देशपांडेय को बैस्ट फिल्म निर्माता का अवार्ड दिया गया.

‘दाग एगो लांछन’ फिल्म के लिए जितेंद्र सिंह ‘जीतू’ को बैस्ट ऐडिटर, प्रेमांशु सिंह को बैस्ट डायरेक्टर भोजपुरी फैमिली वैल्यूज मूवी, मनोज कुशवाहा को ‘दाग एगो लांछन’ के लिए बैस्ट स्टोरी, विक्रांत सिंह को बैस्ट सेकंड लीड ‘दाग एगो लांछन’ के लिए प्रदान किया गया. ‘विवाह 3’ के आधार पर महेंद्र सेरला बैस्ट डीओपी रहे, वहीं ऐक्ट्रैस पाखी हेगड़े को महिला प्रधान फिल्मों में विशिष्ट योगदान के लिए अवार्ड दिया गया.

सिनेमाघरों में लंबे समय तक चलने वाली भोजपुरी फिल्म ‘हीरा बाबू एमबीबीएस’ के अभिनेता विमल पांडेय को बैस्ट क्रिटिक ऐक्टर का अवार्ड प्रदान किया गया. इसी फिल्म से अखिलेश पांडेय को बैस्ट डायरैक्टर क्रिटिक अवार्ड से नवाजा गया.

ओवरआल कैटेगरी के खास अवार्ड

ओवरआल कैटेगरी में जिन्हें अवार्ड मिले, उन में संजय पांडेय को ‘संघर्ष 2’ में किए गए अभिनय के लिए बैस्ट विलेन का अवार्ड दिया गया, जबकि ‘सिंह साहब द राइजिंग’ के लिए बैस्ट ऐक्टर इन सपोर्टिंग रोल के लिए सुशील सिंह को अवार्ड प्रदान किया गया. विजय श्रीवास्तव को ‘डार्लिंग’ फिल्म के लिए बैस्ट आर्ट डायरेक्टर का अवार्ड मिला.

इस के अलावा राहुल शर्मा को फिल्म ‘डार्लिंग’ के लिए बैस्ट डैब्यू ऐक्टर, रंजन सिन्हा को बैस्ट पीआरओ, आनंद त्रिपाठी को बैस्ट फिल्म पत्रकार, सीपी भट्ट को फिल्म ‘पड़ोसन’ के लिए बैस्ट कौमेडियन, अनारा गुप्ता को फिल्म ‘सनक’ के लिए बैस्ट आइटम नंबर का अवार्ड, रवि तिवारी को फिल्म ‘आसरा’ के लिए बैस्ट असिस्टैंट डायरेक्टर का अवार्ड दिया गया.

इस के अलावा फिल्म ‘दादू आई लव यू’ के लिए आर्यन बाबू को बैस्ट चाइल्ड ऐक्टर (मेल), ‘अफसर बिटिया’ फिल्म के लिए आयुषी मिश्रा बैस्ट चाइल्ड ऐक्टर (फीमेल), प्रमिला घोष को बैस्ट स्टेज परफौर्मेंस, विजय यादव को बैस्ट फोक डांस ‘फरुआही’ के लिए प्रदान किया गया.

राकेश त्रिपाठी और कन्हैया विश्वकर्मा को ‘अफसर बिटिया’ के लिए बैस्ट डैब्यू डायरेक्टर का अवार्ड दिया गया, जबकि ‘आसरा’ फिल्म से बैस्ट डैब्यू ऐक्ट्रैस का अवार्ड सपना चौहान को, हितेश्वर को बैस्ट भोजपुरी रैपर का अवार्ड प्रदान किया गया.

बायोग्राफी कैटेगरी में इस फिल्म को मिला अवार्ड

बायोग्राफी कैटेगरी में ‘सिंह साहब द राइजिंग’ फिल्म का दबदबा रहा, जिसे कुल 11 अवार्ड मिले. इस में बैस्ट ऐक्टर देव सिंह, बैस्ट ऐक्ट्रैस अंजना सिंह, बैस्ट प्रोड्यूसर गीता सिंह, चंदा सिंह और नीतू सिंह, धीरज पंडित को बैस्ट डायरेक्टर, उदय भगत को बैस्ट कोप्रोड्यूसर, वीना पांडेय को बैस्ट ऐक्ट्रैस इन सपोर्टिंग रोल, शुभम सिंह को बैस्ट स्टोरी, रिया सिंह को बैस्ट ड्रैस डिजाइनर, मुसाफिर जौनपुरी को बैस्ट गीतकार के अवार्ड से नवाजा गया. संतोष पहलवान को बैस्ट सपोर्टिंग ऐक्टर जूरी इन बायोग्राफी अवार्ड फिल्म ‘सिंह साहब द राइजिंग’ के लिए प्रदान किया गया.

अन्य कैटेगिरी में भी मिले अवार्ड

‘5वें सरस सलिल भोजपुरी सिने अवार्ड’ में जिन दूसरी कैटेगरी में अवार्ड दिए गए, उन में सर्वश्रेष्ठ संदेशपरक फिल्म कैटेगरी में बैस्ट ऐक्टर कृष्णा कुमार, बैस्ट सपोर्टिंग ऐक्टर संजू सोलंकी, बैस्ट डायरेक्टर सम्राट सिंह, बैस्ट सपोर्टिंग ऐक्टर समर्थ चतुर्वेदी, डैब्यू प्लेबैक सिंगर डा. विकास चतुर्वेदी, बैस्ट कोरियोग्राफर विवेक थापा और बैस्ट म्यूजिक डायरेक्टर का अवार्ड फिल्म डैब्यू के लिए अशोक राव को दिया गया.

कार्यक्रम की होस्ट माही खान को उन की फिल्म ‘पावर औफ किन्नर’ के लिए बैस्ट ऐक्ट्रैस जूरी अवार्ड दिया गया, जबकि अंबरीश सिंह को फिल्म ‘जय मां विंध्यवासिनी’ के लिए बैस्ट राइजिंग स्टार का अवार्ड दिया गया.

चंदन उपाध्याय को बैस्ट डायरेक्टर सामाजिक मुद्ïदों पर बैस्ट फिल्म श्रेणी में ‘हरहर गंगे’ के लिए प्रदान किया गया. फिल्म ‘क्रांतिकारी 1924’ के लिए रक्षा गुप्ता को बैस्ट पौपुलर ऐक्ट्रैस, अनूप अरोरा को बैस्ट सपोर्टिंग ऐक्टर क्रिटिक, जे.सी. पांडेय को बैस्ट डायरेक्टर स्पैशल मैंशन, विद्या विष्णु मौर्य को बैस्ट कौस्ट्यूम डिजाइनर, धामा वर्मा को सपोर्टिंग ऐक्टर क्रिटिक (स्पैशल मैंशन) अवार्ड प्रदान किया गया.

फिल्म डायरेक्टर संजय श्रीवास्तव को उन की फिल्म ‘चाची नंबर 1’ के लिए बैस्ट डायरेक्टर स्पैशल जूरी अवार्ड से नवाजा गया. लाल बाबू पंडित को ‘फरिश्ता’ फिल्म के डायरेक्शन के लिए स्पैशल जूरी अवार्ड दिया गया, जबकि राजेश गौड़ को लोक कला पुरुष कहरवा विधा और रामा प्रजापति को लोक कला बाधवा विधा में अवार्ड प्रदान किया गया.

नीरज रणधीर को ‘सौरी यार’ फिल्म के डायरेक्शन के लिए जूरी अवार्ड, के.के. गोस्वामी को बैस्ट ऐवरग्रीन ऐक्टर, बैस्ट ऐक्ट्रैस भोजपुरी अलबम, सागर शान को बैस्ट कोरियोग्राफर इन अलबम, संजोली पांडेय को बैस्ट लोकगायिका, सत्या सावरकर को ‘दाग एगो लांछन’ फिल्म के लिए स्पैशल जूरी अवार्ड प्रदान किया गया.

स्वाति शर्मा को ‘डार्लिंग’ फिल्म के लिए पाश्र्व गायिका जूरी अवार्ड दिया गया, जबकि ‘डार्लिंग’ फिल्म से ही जूरी अवार्ड श्रेणी में प्रदीप के. शर्मा को बैस्ट फिल्म, रोहित सिंह मटरू को बैस्ट कौमेडी, म्यूजिक बीएवी को बैस्ट पाश्र्व संगीत का अवार्ड दिया गया. गायक और अभिनेता रितेश पांडेय को ‘दाग एगो लांछन’ के लिए बैस्ट ऐक्टर फैमिली वैल्यूज मूवी श्रेणी में अवार्ड प्रदान किया गया.

सीनियर ऐक्टर उदय श्रीवास्तव को ‘अमरप्रीत’ के लिए स्पैशल अवार्ड प्रदान किया गया. अयाज खान को बैस्ट विलेन क्रिटिक, सर्वश्रेष्ठ महिला प्रधान फिल्म श्रेणी में फिल्म ‘अफसर बिटिया’ से श्रुति राव को बैस्ट ऐक्ट्रैस, राकेश त्रिपाठी को बैस्ट कहानी व पटकथा का अवार्ड प्रदान किया गया. सर्वश्रेष्ठ मनोरंजन प्रदान करने वाली फिल्म श्रेणी में ‘आसरा’ फिल्म से कृष्णा विश्वकर्मा को बैस्ट साउंड इंजीनियर व अनंजय रघुराज को बैस्ट डायरेक्टर का अवार्ड प्रदान किया गया.

कुणाल सिंह को मिला लाइफटाइम अचीवमैंट अवार्ड

‘भोजपुरी सिनेमा के अमिताभ बच्चन’ कहे जाने वाले कुणाल सिंह को भोजपुरी सिनेमा में उन के योगदान के लिए लाइफटाइम अचीवमैंट अवार्ड से नवाजा गया. गौरतलब है कि कुणाल सिंह पिछले 4 दशक से भोजपुरी सिनेमा पर राज कर रहे हैं और उन्होंने तकरीबन 300 फिल्मों में काम किया है.

साल 1983 में आई कुणाल सिंह की भोजपुरी फिल्म ‘गंगा किनारे मोरा गांव’ ने तो इतिहास ही रच दिया था. यह फिल्म वाराणसी के एक थिएटर में लगातार एक साल 4 महीने तक चली थी. यह भोजपुरी सिनेमा के इतिहास में आज भी एक रिकौर्ड है.

इस भोजपुरी रंगारंग नाइट का आगाज ‘अयोध्या महोत्सव न्यास’ के अध्यक्ष हरीश श्रीवास्तव ने किया. वे बोले कि ‘सरस सलिल भोजपुरी सिने अवार्ड’ वर्तमान में भोजपुरी सिनेमा का सब से बड़ा अवार्ड बन चुका है. ‘सरस सलिल’ जब तक चाहे तब तक ‘अयोध्या महोत्सव न्यास’ भोजपुरी सिने अवार्ड को होस्ट करेगा.

फिल्म प्रोड्यूसर धीरेंद्र मणि त्रिपाठी की मौजूदगी रही खास

मशहूर फिल्म प्रोड्यूसर धीरेंद्र मणि त्रिपाठी भी मुंबई से इस अवार्ड शो में शरीक होने आए थे. मूलरूप रूप से उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के निवासी धीरेंद्र मणि त्रिपाठी एक कामयाब बिजनेसमैन भी हैं, लेकिन पिछले कुछ सालों से सिनेमा की दुनिया में भी उन का प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है.

‘सरस सलिल’ के शुरुआती पाठकों में से एक रहे धीरेंद्र मणि त्रिपाठी जिप्सी म्यूजिक और जिप्सी फिल्म्स के बैनर तले कई फिल्मों का निर्माण करते रहे हैं. हाल ही में उन की 2 फिल्मों की शूटिंग भी काफी चर्चा में रही है. ‘संकटमोचन हनुमान’ ऐसी पहली अवधी फिल्म होगी, जिस को पैन इंडिया रिलीज किया जाएगा.

धीरेंद्र मणि त्रिपाठी ने ‘सरस सलिल भोजपुरी सिने अवार्ड शो’ में मंच से एक वादा भी किया कि जो भी युवा कलाकार या प्रतिभाशाली डायरैक्टर उन के साथ फिल्म करना चाहते हैं तो उन का गर्मजोशी के साथ स्वागत किया जाएगा.