सुख की चाह में संतोष बनी कातिल

सुख की चाह में संतोष बनी कातिल – भाग 3

गड़े धन के लालच में क्यों फंसा अजय शुक्ला

परिवार व गांव वालों ने नीरज विश्वकर्मा को ले कर अजय शुक्ला के कान भरने शुरू किए तो उस ने उस के घर आने पर पूरी तरह से रोक लगा दी. इस के बाद संतोष कुमारी ने प्रेम प्रसंग में बाधा बन रहे पति को समझाने की काफी कोशिश की, लेकिन उस ने उस की एक भी बात नहीं मानी.

संतोष कुमारी जानती थी कि उस का पति गड़े धन के लालच में कुछ भी कर सकता है. क्योंकि इस से पहले भी वह गड़े धन की लालसा में कई बार तांत्रिकों से मिल चुका था.

उस के बाद भी वह गड़ा धन पाने के लिए कुछ न कुछ हरकतें करता ही रहता था. इस के लालच में वह कहीं भी जा सकता है, जिस के सहारे उसे मौत की नींद सुलाना भी बहुत ही आसान काम था. प्रेमी को पाने के लिए उस ने उस के पति को ठिकाने लगाने का फैसला कर लिया.

इस के बाद वह एक दिन नीरज विश्वकर्मा की दुकान पर जा कर मिली और उसे अपनी योजना के बारे में बताया. नीरज विश्वकर्मा तो पूरी तरह से संतोष कुमारी का दीवाना हो चुका था. वह उसे पाने के लिए कुछ भी करने को तैयार था. संतोष कुमारी की बात सुनते ही वह उस का साथ देने को तैयार हो गया.

फिर उसी योजना के तहत एक दिन गड़े धन का लालच दे कर नीरज ने अजय शुक्ला से बात की. कहीं पर गड़े धन की जानकारी मिलते ही अजय शुक्ला उस के साथ जाने के लिए तैयार हो गया.

यह बात अजय शुक्ला ने अपनी पत्नी संतोष कुमारी को बताई तो उस ने भी उस की हां में हां कर दी. वह तो पहले से ही चाहती थी कि वह किसी तरह से उस के प्रेमी नीरज विश्वकर्मा के साथ चला जाए.

योजना बनाने के बाद नीरज विश्वकर्मा और उस की प्रेमिका संतोष ने टीवी पर क्राइम स्टोरीज के सीरियल देखने शुरू किए. क्राइम सीरियलों में हमेशा ही अपराध करना और उस से बचने के उपायों को बहुत ही अच्छे तरीके से समझाया जाता है. उन सीरियलों को देख कर संतोष कुमारी को पूरा विश्वास हो गया था कि वह भी अपने पति की हत्या करवा कर उस के जुल्म से पूरी तरह से बच जाएगी.

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10 बच्चे कैसे हुए अनाथ 

एक दिन नीरज विश्वकर्मा का फोन आते ही अजय घर से बाइक उठा कर चलने को तैयार हुआ तो संतोष कुमारी ने उस का मोबाइल घर पर ही यह कह कर रखवा लिया कि कहीं रात में गिर गया तो कहां कहां ढूंढोगे.

संतोष कुमारी जानती थी कि पुलिस मोबाइल की लोकेशन निकाल कर उस का पता कर सकती है. अगर उस के पास मोबाइल नहीं होगा तो उस के मरने के बाद पुलिस भी उस का अता पता नहीं कर पाएगी और जंगली जानवर उस की लाश को खा जाएंगे.

पत्नी के कहने पर अजय शुक्ला ने मोबाइल घर पर ही छोड़ दिया. उस के बाद वह सीधा नीरज विश्वकर्मा की दुकान पर जा कर उस से मिला. उस वक्त तक शाम हो चुकी थी. अजय शुक्ला के दुकान पर पहुंचते ही नीरज विश्वकर्मा अपनी बाइक से अजय शुक्ला के साथ चल दिया. नीरज कुमार ने अपनी बाइक रास्ते में पडऩे वाले पैट्रोल पंप पर खड़ी कर दी.

फिर वह अजय शुक्ला की बाइक पर बैठ कर उसे ले कर रामसनेही घाट कोतवाली के प्रतापपुरवा के जंगल में ले गया. वहां पर जा कर नीरज विश्वकर्मा ने अजय शुक्ला को एक जगह दिखाते हुए बताया कि गड़ा धन इसी जगह के नीचे है. इस जगह को किसी तरह से खोदना होगा.

अजय शुक्ला गड़े धन के लालच में पूरी तरह से पागल सा हो गया था. उस के मन में अमीर बनने के सपने घूमने लगे थे. जैसे ही अजय शुक्ला अपनी बाइक से उतर कर उस जगह की तरफ को जाने लगा तो पीछे से मौका पाते ही नीरज विश्वकर्मा ने उसी के हेलमेट से उस के सिर पर जोरदार वार कर दिया.

अचानक सिर पर ताबड़तोड़ हैलमेट की चोट से अजय शुक्ला बेहोश हो कर जमीन पर गिर पड़ा. उस के बाद नीरज ने चाकू से उस की हत्या कर दी.

अजय शुक्ला की हत्या करने के बाद नीरज विश्वकर्मा अपने घर चला आया. अजय शुक्ला की हत्या करने के बाद नीरज शुक्ला ने उसी के नंबर पर फोन कर उस की सूचना अपनी प्रेमिका संतोष कुमारी को दी, ताकि अगर यह भेद खुलता भी है तो पुलिस उस की बीवी पर शक न कर सके.

इस केस के खुलते ही पुलिस ने अपने पति की हत्या की साजिश रचने वाली संतोष्ज्ञ कुमारी और नीरज विश्वकर्मा को अजय शुक्ला को अगवा कर उस की हत्या करने के आरोप में कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया था.

इस मामले में मृतक अजय शुक्ला की पत्नी की तरफ से 5 लोगों के खिलाफ दर्ज कराई गई रिपोर्ट में बदलाव किया गया. उसी अभियोग में धारा 34 भादंवि को जोड़ दिया गया तथा आलाकत्ल चाकू की बरामदगी के आधार पर धारा 4/25 आम्र्स ऐक्ट व धारा 120 बी/201 भी जोड़ दी गई. भले ही अपने प्रेम प्रसंग को छिपाने और अपने प्रेम में बाधा बने अजय शुक्ला को उसी की पत्नी ने अपने प्रेमी के साथ मिल कर षडयंत्र के तहत रास्ते से हटा दिया था, लेकिन पुलिस की सतर्कता के चलते दोनों ही जेल की सलाखों के पीछे चले गए थे.

उन के जेल जाते ही 10 बच्चे पूरी तरह से अनाथ हो गए थे. आरोपी नीरज विश्वकर्मा के भी 5 बच्चे थे और संतोष कुमारी के भी 5.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

सुख की चाह में संतोष बनी कातिल – भाग 2

इस कहानी की शुरुआत होती है उत्तर प्रदेश के जिला बाराबंकी के थाना असंद्रा के एक छोटे से गांव मल्लपुर मजरे सुपामऊ से. 40 वर्षीय अजय शुक्ला इसी गांव का रहने वाला था और वह किसी तरह अपने परिवार का भरणपोषण करता था. उस की शादी कई साल पहले संतोष कुमारी के साथ हुई थी.

समय के साथसाथ संतोष कुमारी 5 बच्चों की मां बनी. घर में बच्चों के हो जाने के बाद अजय शुक्ला बहुत ही खींचतान कर बच्चों का लालनपालन कर पाता था.

घर की आर्थिक स्थिति डगमगाने से वह लगभग 15 लाख रुपयों के कर्ज के बोझ में दब गया था. नशे और जुए का आदी होने के कारण उस ने अपनी जुतासे की जमीन भी बेच डाली थी. लेकिन जमीन बेच कर उस ने पैसे जुए और शराब में उड़ा दिए. जिस के बाद उस की पत्नी हर वक्त उस से खफा रहती थी.

अब से लगभग 6 साल पहले संतोष कुमारी कुछ सामान खरीदने के लिए महमूदपुर गई थी. नीरज कुमार विश्वकर्मा महमूदपुर में ही एक घड़ी और मोबाइल की दुकान चलाता था. अपने घर का सामान खरीदने के बाद वह जैसे ही अपने घर वापस आ रही थी, उस की नजर एक मोबाइल की दुकान पर बैठे नीरज कुमार पर पड़ी.

संतोष कुमारी का चलते वक्त मोबाइल नीचे गिर गया था, जिस के कारण उस का मोबाइल का स्क्रीन गार्ड टूट गया था. वह स्क्रीन गार्ड लगवाने के लिए उस के पास पहुंची. उसी दौरान दोनों की पहली मुलाकात हुई थी. नीरज कुमार के व्यवहार से संतोष कुमारी पहली ही मुलाकात में काफी प्रभावित हुई थी.

जब तक नीरज कुमार ने उस के मोबाइल पर स्क्रीन गार्ड लगाया, तब तक उस ने नीरज से सारी जानकारी जुटा ली थी. उस के बाद वह उस का मोबाइल नंबर भी ले आई थी.

उस दिन के बाद नीरज कुमार संतोष कुमारी के दिल में बस गया. संतोष कुमारी उस से बात करने के लिए बेचैन हो उठी. उस ने कई बार उसे फोन मिलाने की कोशिश की, लेकिन वह हिम्मत नहीं जुटा पा रही थी. उस की समझ में कुछ नहीं आ रहा था कि वह किस बहाने से उसे फोन करे.

आखिरकार उस ने एक दिन हिम्मत कर के उस ने फोन मिलाया. नीरज कुमार तुरंत ही उस की आवाज पहचान गया. फिर उस दिन दोनों की काफी समय तक बात हुई. दोनों के बीच एक बार फोन पर बात हुई तो आगे यह सिलसिला बढ़ता ही गया.

दरअसल, संतोष कुमारी को नीरज कुमार से प्यार हो गया, जिस से वह अकसर उस से घंटों घंटों तक बात करने लगी थी. उस के बाद दोनों ही मिलने के लिए बेचैन रहने लगे थे. संतोष कुमारी उस से मिलने के लिए कोई न कोई बहाना बना कर घर से निकल जाती और फिर उस की दुकान पर पहुंच जाती. अजय शुक्ला तो सुबह ही रिक्शा ले कर घर से निकल जाता और देर शाम को ही घर पहुंचता था.

इस दौरान संतोष कुमारी नीरज कुमार को फोन करती. वह नीरज कुमार से अपने घर आने के लिए कहती, लेेकिन नीरज अपनी दुकान के चलते उस के पास नहीं आ पाता था. फिर उस के घर आने पर उस के अन्य परिवार वाले भी ऐतराज उठा सकते थे.

हसरतों ने इस तरह भरी उड़ान

इसी सब से बचने के लिए संतोष कुमारी के दिमाग में एक आइडिया आया. उस ने सोचा कि अगर किसी तरह से उस के पति की दोस्ती नीरज कुमार से हो जाए तो उस के घर आने की सारी बाधाएं खत्म हो जाएंगी. यही सोच कर उस ने एक दिन अपने मोबाइल का स्क्रीन गार्ड जानबूझ कर तोड़ दिया.

अगली सुबह जब उस का पति अजय शुक्ला घर से निकल रहा था तो उस ने कहा, ”तुम महमूदपुर में तो आते जाते रहते हो. मेरा मोबाइल ले जाओ.’’

उस के बाद उस ने नीरज कुमार की दुकान का हवाला देते हुए कहा, ”आप उस पर नीरज की दुकान से स्क्रीन गार्ड लगवा लाना.’’

अजय शुक्ला अपनी बीवी का मोबाइल ले कर नीरज कुमार की दुकान पर पहुंचा. उस के पहुंचने से पहले ही संतोष कुमारी ने नीरज को फोन कर समझा दिया था कि आज मेरे पति तुम्हारी दुकान पर आएंगे. किसी भी तरह से तुम उन के साथ दोस्ती गांठ लेना. अगर तुम ने उन से दोस्ती कर ली तो हमारा मिलनेजुलने का रास्ता साफ हो जाएगा.

अजय शुक्ला के दुकान पर पहुंचते ही नीरज कुमार ने उस के साथ मीठीमीठी बातें की, जिस के बाद अजय शुक्ला भी उस से काफी प्रभावित हुआ. फिर जल्दी ही दोनों के बीच दोस्ती भी हो गई. उसी दोस्ती की आड़ में नीरज कुमार उस के घर आनेजाने लगा था. जिस के बाद दोनों प्रेमियों के बीच मिलने का रास्ता साफ हो गया था.

अजय शुक्ला हमेशा ही शाम को शराब के नशे में धुत हो कर अपने घर पहुंचता था. उस के बाद नीरज कुमार भी अपनी दुकान बंद कर के अजय शुक्ला के घर आ जाता था. देखते ही देखते दोनों में दांत काटी दोस्ती हो गई, जिस के बाद वह अजय शुक्ला के हर दुखसुख में काम आने लगा था.

कभी कभार ज्यादा रात हो जाने के कारण नीरज कुमार अजय शुक्ला के घर पर ही रुक जाता था. इस दौरान जब कभी भी अजय शुक्ला को पैसे की जरूरत होती तो नीरज ही उस के काम आता था.

धीरेधीरे अजय शुक्ला नीरज कुमार का लाखों रुपयों का कर्जदार हो गया था. जिस के कारण अजय शुक्ला नीरज कुमार के अहसानों तले दबता चला गया, जिस का नीरज कुमार भरपूर लाभ ले रहा था.

जब नीरज कुमार विश्वकर्मा का उस के घर कुछ ज्यादा ही आनाजाना हो गया तो उस के परिवार वाले ऐतराज करने लगे. उन्होंने कई बार इस बात की शिकायत अजय शुक्ला से की, लेकिन उस ने हर बार उन की बातों को एक कान सुना और दूसरे से निकाल दिया.

यही बात जब घर से निकल कर गांव में फैलनी शुरू हुई तो अजय शुक्ला को थोड़ा बुरा लगने लगा. उस के बाद उसे भी अपनी पत्नी और नीरज विश्वकर्मा के बीच अवैध संबंधों का शक हो गया था. जिस के बाद अजय शुक्ला अकसर ही अपनी पत्नी से झगडऩे लगा था, जिस की जानकारी संतोष कुमारी ने नीरज विश्वकर्मा को भी दे दी थी.

अजय ने कई बार नीरज को अपने घर आने जाने से रोकना चाहा तो उस ने उस से साफ कहा कि भाई मेरा पैसा मुझे वापस कर दो. मैं तुम्हारे घर क्या तुम्हारे गांव की तरफ नहीं आऊंगा. लेकिन अजय शुक्ला को उस समय बहुत ही मजबूरी थी. न तो वह जुआ खेलना ही छोड़ सकता था और न ही वह बिना शराब के रह सकता था.

सुख की चाह में संतोष बनी कातिल – भाग 1

लाश की सूचना पाते ही पुलिस घटनास्थल पर पहुंची. पुलिस ने देखा तो वहां पर एक व्यक्ति की लाश क्षतविक्षत हालत में पड़ी हुई थी. पुलिस ने वहां पर मौजूद लोगों से उस लाश की शिनाख्त करानी चाही लेकिन किसी ने भी उसे नहीं पहचाना. उस के बाद पुलिस को ध्यान आया कि उसी दिन के अखबारों में एक व्यक्ति की गुमशुदगी की खबर छपी थी.

इस बात के सामने आते ही पुलिस ने सब से पहले असंद्रा थाने से संपर्क किया, क्योंकि वह गुमशुदगी की खबर उसी थाने की थी. असंद्रा थाने से संपर्क होते ही पुलिस ने उस फोटो से मृतक का चेहरा मिलाया तो शिनाख्त हुई कि मृतक अजय शुक्ला ही था.

पुलिस काररवाई कर रही थी कि उसी समय संतोष कुमारी नाम की महिला रोती बिलखती अपने 5 बच्चों के साथ घटनास्थल पर पहुंची.

लाश को देखते ही संतोष कुमारी अपना आपा खो बैठी. क्योंकि वह लाश उस के पति अजय शुक्ला की थी. वह पति की लाश से लिपट लिपट कर बुरी तरह से रोने चिल्लाने लगी. उस के बच्चों का भी रोरो कर बुरा हाल था. पुलिस ने किसी तरह से संतोष कुमारी को शांत कराया. उस के बाद पुलिस ने जांचपड़ताल की तो अजय शुक्ला के सिर व पेट पर चोटों के काफी निशान थे.

इस से एक दिन पहले ही संतोष कुमारी 18 दिसंबर, 2023 की शाम के वक्त बाराबंकी जिले के थाना असंद्रा पहुंची थी. उस ने एसएचओ संतोष कुमार सिंह को बताया था कि वह मल्लपुर मजरे सुपामऊ गांव की रहने वाली है. सुबह लगभग 11 बजे उस के पति अजय कुमार शुक्ला बाइक से किसी काम से मस्तान बाबा की कुटी पर जाने के लिए निकले थे. लेकिन उस के बाद वह वापस नहीं लौटे.

उस ने बताया था कि जाने से पहले वह अपना मोबाइल भी घर पर ही भूल गए थे. एसएचओ ने संतोष कुमारी से उस के पति के बारे में कुछ और जानकारी हासिल करने के बाद अजय कुमार की गुमशुदगी की सूचना दर्ज कर ली थी.

उसी जांचपड़ताल के तहत सब से पहले एसएचओ पुलिस टीम के साथ गांव मल्लपुर मजरे सुपामऊ से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर रह रहे मस्तान बाबा की कुटिया पर पहुंचे. कुटिया पर पहुंच कर उन्होंने वहां पर अजय कुमार शुक्ला के बारे में जानकारी ली तो पता चला कि अजय कुमार शुक्ला वहां पर आया ही नहीं था. उस के बाद पुलिस ने अजय कुमार शुक्ला की हर जगह तलाश की, लेकिन कहीं भी उस का अतापता नहीं चला.

इस के बाद पुलिस ने उस के गुमशुदा होने की सूचना स्थानीय अखबारों में छपवाई, लेकिन उस के बाद भी पुलिस को कोई सफलता नहीं मिली. इस सब का कारण था कि अजय शुक्ला अपने साथ मोबाइल नहीं ले गया था, जिस के कारण उसे तलाशने में पुलिस के सामने बड़ी समस्या आ खड़ी हुई थी.

उसी दौरान 19 दिसंबर, 2023 को गांव प्रताप पुरवा के पास एक व्यक्ति की लाश पड़ी होने की सूचना रामसनेही घाट कोतवाली को मिली. सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई. रामसनेही घाट पुलिस ने इस की सूचना असंद्रा थाने में भी दे दी थी, क्योंकि उस थाने के एक लापता व्यक्ति की सूचना अखबार में छपी थी.

इस जानकारी के मिलते ही सब से पहले असंद्रा पुलिस ने उस की पत्नी संतोष कुमारी को इस की जानकारी दी. उस के तुरंत बाद ही असंद्रा थाने के एसएचओ भी उस जगह पहुंच गए, जहां पर अजय शुक्ला की लाश मिली थी. संतोष कुमारी ने उस लाश की शिनाख्त अपने पति अजय शुक्ला के रूप में कर ली.

घटनास्थल से समस्त जानकारी जुटाने के बाद पुलिस ने अपनी काररवाई आगे बढ़ाई. फिर उस की लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी. उस के बाद पुलिस ने संतोष कुमारी से पूछा कि गांव में तुम्हारे पति की किसी से कोई दुश्मनी तो नहीं थी.

यह बात सुनते ही संतोष कुमारी पहले तो चुप्पी साध गई, फिर उस ने बताया कि उस के पति का गांव के ही कुछ लोगों से जमीन को ले कर विवाद चल रहा था, जिस के कारण ही उन लोगों ने उन की हत्या की होगी.

संतोष कुमारी के शक के आधार पर पुलिस ने गांव के ही 5 लोगों माताबदल, महेश, रामकुमार, बाबा सोनी व प्रदीप को हिरासत में ले लिया. पुलिस ने संतोष कुमारी की तरफ से शक के आधार पर इन पांचों पर भादंवि की धारा 302/34 के तहत मामला दर्ज कर लिया.

इन पांचों से पुलिस ने कड़ी पूछताछ की, लेकिन किसी ने भी उस की हत्या की जिम्मेदारी नहीं ली. पुलिस ने इस मामले में उन के गांव जा कर अन्य लोगों से पूछताछ की तो पता चला कि पांचों ही लोग बेहद ही शरीफ और सज्जन इंसान थे.

गांव वालों की जानकारी से पुलिस को भी लगने लगा था कि कहीं न कहीं ये पांचों निर्दोष हैं. उसी दौरान गांव वालों का संतोष कुमारी पर दबाव बना तो वह भी उन की गिरफ्तारी को ले कर कुछ ढीली नजर आई. उस के बाद वह भी उन की पैरवी पर उतर आई थी, जिस के बाद अजय शुक्ला की हत्या के शक की सूई संतोष कुमारी की ओर ही घूम गई थी.

फिर पुलिस ने उस के परिवार वालों के साथसाथ गांव वालों से भी उस के चरित्र के बारे में जानकारी हासिल की तो पता चला कि अजय शुक्ला के एक दोस्त नीरज विश्वकर्मा का उस के घर पर आनाजाना था. वह अजय शुक्ला की गैरमौजूदगी में भी उस के घर आयाजाया करता था. उस के बाद संतोष कुमारी स्वयं ही पुलिस की शक की निगाहों में चढ़ गई थी.

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पुलिस को मृतक की पत्नी पर क्यों हुआ शक

शक की सूई संतोष कुमारी की तरफ घूमते ही पुलिस ने उस के और मृतक अजय शुक्ला और उस की पत्नी के मोबाइल नंबरों को सर्विलांस पर लगाया. इस से पुलिस को एक खास जानकारी मिली.

तहकीकात के दौरान पता चला कि संतोष कुमारी काफी समय से महमूदपुर निवासी नीरज कुमार विश्वकर्मा से मोबाइल पर बात करती थी. घटना वाले दिन भी संतोष कुमारी ने नीरज कुमार से बात की थी.

इस बात की जानकारी मिलते ही सब से पहले पुलिस नीरज कुमार के घर पहुंची, लेकिन नीरज कुमार घर से लापता मिला. उस के बाद पुलिस ने उस के मोबाइल पर कई बार काल की तो पहले तो उस ने उठाया नहीं, दूसरी बार करने पर उस ने फोन स्विच्ड औफ कर दिया. इस के बावजूद भी पुलिस ने उस की लोकेशन के आधार पर उसे अपनी हिरासत में ले लिया.

पुलिस ने उस से अजय शुक्ला की हत्या के संबंध में कड़ी पूछताछ की तो उस ने हत्या करने की बात स्वीकार कर ली. फिर उस ने हत्या के पीछे की जो कहानी बताई, वह चौंकाने वाली निकली—

संतोष कुमारी भले ही पढ़ीलिखी नहीं थी, लेकिन उस का दिमाग इतना तेज था कि वह अपने पति अजय शुक्ला को कुछ भी नहीं समझती थी. अजय शुक्ला एक रिक्शाचालक था. उस के 5 बच्चे थे, जिस से परिवार की गुजरबसर ठीक से नहीं हो पा रही थी. उस के साथ ही उस में शराब पीने की लत भी थी.

यही कारण रहा कि उस ने नीरज कुमार विश्वकर्मा के साथ दोस्ती होते ही अपने पति को अपनी जिंदगी का कांटा समझ कर उसे हटाने के लिए एक सुनियोजित रास्ता चुना. लेकिन पुलिस के लंबे हाथों से वह बच नहीं पाई.