कागज के टुकड़े की चोरी – भाग 5

सैंट्रल पार्क के उत्तरपश्चिमी कोने में हलका अंधेरा छाया हुआ था. आसपास फैली गगनचुंबी इमारतों की खिड़कियों से निकलता मद्धिममद्धिम प्रकाश वहां पहुंच रहा था, मगर फिर भी घने पेड़ों के नीचे अंधेरा था. ठीक 10 बजे निक ने पार्क में कदम रखा और सावधानीपूर्वक उत्तरपश्चिमी कोने की ओर बढ़ा. उस की तेज नजरें चारों ओर का जायजा ले रही थीं. पेड़ों के अंधेरे में पहुंच कर वह रुका और हौले से नारमन को आवाज दी.

यकायक उसे हलकी आहट सुनाई दी. वह आवाज की दिशा में मुड़ने का इरादा कर ही रहा था कि उसे अपनी कमर में कोई ठोस चीज चुभती हुई महसूस हुई. वह पत्थर की तरह अपनी जगह पर जम गया.

‘‘कोई हरकत मत करना.’’ किसी ने उस के कान में धीमे से कहा, ‘‘तुम्हारी कमर में जो चीज चुभ रही है वह 28 बोर की साइलेंसर लगी पिस्तौल की नाल है.’’

‘‘मैं इस हरकत का मतलब नहीं समझा, मिस्टर नारमन?’’ निक ने कहा.

उसी वक्त एक आदमी निक के सामने पहुंच गया और जल्दी से उस की जेब से पर्स निकाल लिया.

‘‘हमें उलझाने की कोशिश मत करो.’’ उस व्यक्ति ने कहा, ‘‘यहां कोई नारमन नहीं है.’’

‘‘तुम कौन हो?’’

‘‘इतने अंजान मत बनो.’’ पर्स निकालने वाले ने कहा, ‘‘हमें बस माल चाहिए, इत्मिनान से खड़े रहोगे तो तुम्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचाएंगे.’’

‘‘मैं इत्मिनान से ही खड़ा हूं.’’ निक ने कहा, ‘‘अपने हाथपैर गंदे करने का मेरा कोई इरादा नहीं है.’’

‘‘इसी में समझदारी भी है. ’’ वह आदमी पर्स से कैश निकालते हुए बोला. फिर उस ने चौंक कर कहा, ‘‘अरे, तुम तो बिलकुल ही कंगले मालूम होते हो. इस में तो एक समय के खाने के पैसे भी नहीं हैं.’’

निक के होंठों पर हलकी सी मुसकराहट आ गई. घर से चलते समय उस ने पर्स से कैश और पहचान पत्र आदि निकाल दिए थे. पर्स में केवल 3 डौलर और कुछ सिक्के ही थे.

‘‘अगर बात खाने की है तो मेरे साथ चलो.’’ निक ने कहा, ‘‘मेरे फ्रिज से 2 आदमियों का खाना तो निकल ही जाएगा.’’

‘‘शटअप, हम इतने भी मूर्ख नहीं हैं. जौनी, जरा इस की जेबें भी देख लेना. पर्स में काम की कोई चीज नहीं है.’’ उस ने अपने साथी से कहा.

निक समझ गया कि उन्हें पुरानी डायरी के टुकड़े की तलाश है. मगर उस ने कोई विरोध नहीं किया. उस आदमी ने बहुत फुर्ती से उस की सारी जेबें देख डालीं और आखिरकार अंदरूनी जेब से एक तह किया हुआ कागज निकाल लिया.

‘‘यह…यह क्या कर रहे हो?’’ निक ने जल्दी से कहा, ‘‘यह कागज तुम्हारे काम का नहीं है.’’

‘‘शट अप.’’ पीछे वाले आदमी ने कहा और पिस्तौल का हत्था उस के सिर पर दे मारा. इस के साथ ही निक की आंखों के सामने नीले पीले तारे नाच गए और वह जमीन पर ढेर हो गया.

जब निक को होश आया तो एक आदमी उस के ऊपर झुका हुआ था. वह कपड़े झाड़ते हुए उठ कर खड़ा हो गया.

‘‘तुम तो ठीक हो.’’ अजनबी ने हैरानी से कहा, ‘‘मैं तो एंबुलेंस के लिए फोन करने वाला था.’’

‘‘धन्यवाद, जरा नींद का झोंका आ गया था.’’ निक ने कहा और चोट वाली जगह पर हाथ फेराते हुए गेट की ओर चल दिया. कार में बैठने के बाद उस ने जुराब हटा कर देखी तो असली कागज मौजूद था. निक की आशा के अनुरूप एक घंटे बाद नारमन का फोन आ गया.

‘‘मिस्टर वेलवेट.’’ उस ने कहा, ‘‘मेरी गाड़ी का एक्सीडेंट हो गया था इसलिए मैं नियत जगह पर नहीं पहुंच सका.’’

‘‘मेरा भी एक्सीडेंट हो गया है.’’

‘‘क्या?’’ नारमन के लहजे में हैरत थी.

‘‘मेरा मतलब है कि मेरे साथ दुर्घटना हो गई है.’’ निक ने सफाई देते हुए कहा, ‘‘मैं पार्क में तुम्हारा इंतजार कर रहा था कि 2 बदमाशों ने मुझे आ कर घेर लिया और पिस्तौल दिखा कर लूट लिया.’’

‘‘ओह, यह तो बहुत बुरा हुआ.’’

‘‘वे लोग उस कागज को भी साथ ले गए हैं जो मैं तुम्हें देने के लिए साथ ले गया था.’’

‘‘लेकिन वह तो…’’ नारमन ने कहना शुरू किया, लेकिन फौरन ही चुप हो गया. निक के लिए इतना ही काफी था. इस से यह बात पक्की हो गई थी कि दोनों गुंडे उसी के भेजे हुए थे.

‘‘मिस्टर नारमन मैं बहुत शर्मिंदा हूं.’’ निक ने कहा, ‘‘मुझे दुख है कि वह कागज का टुकड़ा तुम तक नहीं पहुंचा सका. लेकिन गलती तुम्हारी है, तुम ने मुलाकात के लिए एक असुरक्षित जगह को चुना था.’’

‘‘लेकिन मैं तुम्हें 10 हजार डौलर पेशगी दे चुका हूं.’’

‘‘तुम्हारी रकम कल सुबह तुम्हें वापस मिल जाएगी.’’

‘‘रकम की बात नहीं है, मेरे लिए वह कागज ज्यादा महत्त्वपूर्ण है.’’

‘‘मैं दोबारा कोशिश कर सकता हूं.’’ निक ने दिखावे के तौर पर बेदिली से कहा, ‘‘मैं दोनों बदमाशों में से एक की शक्ल देख चुका हूं और मुझे उम्मीद है कि मैं उसे ढूंढ़ निकालूंगा. पुलिस हेडक्वार्टर में मेरे कुछ अच्छे दोस्त हैं.’’

‘‘ठीक है, ठीक है,’’ नारमन ने थोड़े गुस्से के साथ कहा. ‘‘मुझे लंबी चौड़ी भूमिका में कोई दिलचस्पी नहीं है. आज 14 तारीख है. एग्रीमेंट के अनुसार 15 तारीख तक काम हो जाना चाहिए. मुझे हर हाल में कागज का वह टुकड़ा चाहिए.’’

‘‘ठीक है, लेकिन अब तुम्हें दोगुनी फीस अदा करनी होगी.’’

‘‘यह नामुमकिन है.’’ नारमन चिल्लाया, ‘‘तुम्हें अपने वादे पर कायम रहना चाहिए.’’

‘‘अकसर लोग वादे को भूल जाते हैं.’’ निक ने सोचने वाले लहजे में कहा, ‘‘बहरहाल, अगर तुम चाहो तो 50 हजार डौलर में सौदा कर लो. वरना अपनी रकम वापस ले लो.’’

‘‘ओह, माई गाड. ठीक है, मुझे मंजूर है.’’

‘‘बहुत खूब, मुझे यकीन था कि तुम समझदारी से काम लोगे. कल सुबह ठीक 11 बजे शेर के पिंजरे के पास 20 हजार डौलर और ले कर पहुंच जाना.’’ कह कर उस ने नारमन के कुछ बोलने से पहले ही फोन बंद कर दिया.

अगली सुबह नारमन ने अपने वादे के अनुसार 20 हजार डौलर निक को अदा कर दिए. वह अच्छी तरह जानता था कि कागज का टुकड़ा निक के पास ही है. लेकिन उस ने इस बात का कोई जिक्र नहीं किया. वह कर भी नहीं सकता था क्योंकि अगर वह ऐसा करता तो एक तरह गुंडे भेजने की स्वीकारोक्ति कर लेता.

क्या निक नारमन की असलियत जान पायेगा? कहीं वो खुद ही किसी से चक्रव्यूह में तो नहीं फंस जायेगा? इन सवालों के जवाब मिलेंगे बेस्ट हिंदी फिक्शन क्राइम स्टोरी में…

कागज के टुकड़े की चोरी – भाग 4

फोटो छपने की बात सुनते ही औरत की आंखें चमकने लगीं. ऐसा लगता था जैसे वह लंबे समय से किसी ऐसे मौके की तलाश में थी. उस ने निक के हाथ से नोट ले कर मुट्ठी में दबा लिया और दोनों को अपने पीछे आने का इशारा करती हुई किचन में पहुंच गई.

उस ने बताया कि उस का नाम मिसेज जून व्हीलर है और वह पिछले 6 महीने से अपने पति डिक व्हीलर के साथ वहां काम कर रही है. उन दोनों का वेतन ठीकठाक था और काम भी ज्यादा नहीं था. माइकल वहां अपनी दूसरी पत्नी और तलाकशुदा बेटी के साथ रहता था.

‘‘क्या यह मिस्टर माइकल का निजी मकान है?’’ निक ने पूछा.

‘‘हां, यह मकान उन्होंने हाल ही में खरीदा है. इस से पहले वह कैलिफोर्निया में रहते थे.’’

निक को इन बातों में कोई दिलचस्पी नहीं थी. वह जल्दी से अपना काम पूरा कर के वहां से निकल जाना चाहता था. लेकिन वह यह भी नहीं चाहता था कि उस औरत के दिमाग में कोई शक पैदा हो.

‘‘मिसेज व्हीलर, क्या तुम अपनी जिंदगी से संतुष्ट हो?’’ निक ने पूछा.

‘‘मैं ने कभी इस तरह की जिंदगी के बारे में सोचा भी नहीं था.’’ उस ने कहा, ‘‘यह कोई जिंदगी है. 15 साल पहले जब मैं इस शहर में आई थी तो टीवी स्टार बनना चाहती थी. मैं सुंदर थी, आकर्षक थी, एक्टिंग के बारे में बहुत कुछ जानती थी और हर तरह से फिल्म स्टार बनने की योग्यता रखती थी.’’

‘‘सुंदर और आकर्षक तो तुम अब भी हो.’’ निक ने कहा, ‘‘आखिर ऐसा क्या हुआ कि तुम्हें टीवी स्टार बनने का मौका नहीं मिला?’’

‘‘मेरी बदकिस्मती.’’ वह गहरी सांस लेती हुई बोली, ‘‘शुरू में मैं ने कुछ कमर्शियल विज्ञापन फिल्मों में काम किया भी, लेकिन 16 साल की उम्र में एक 40 साल के लेखक के चक्कर में फंस गई. वह सुनहरे सपने दिखा कर मुझे शो बिजनैस से बहुत दूर ले गया. और जब मेरा रंग फीका पड़ने लगा तो उस ने मुझे धक्का दे दिया.’’

‘‘ओह, यह तो बड़े दुख की बात है.’’ निक ने कहा, ‘‘लेकिन मुझे विश्वास है कि हमारी उतारी हुई कोई तसवीर जरूर किसी प्रोड्यूसर को आकर्षित करने में कामयाब रहेगी. हम तुम्हारे विभिन्न पोज उतारेंगे. कुछ किचन में, एक सिटिंग रूम में काम करते हुए, एक बेडरूम में और एक स्टडी में पढ़ते हुए. क्यों न पहले किचन में पोज ले लिए जाएं.’’ उस ने कैमरा फोकस किया और अलगअलग अंदाज से मिसेज व्हीलर के कुछ फोटो लिए.

‘‘उम्मीद है, तुम इन फोटो की एक कापी मुझे भी भिजवाओगे.’’

‘‘जरूर, मैगजीन की एक कापी भी भिजवाई जाएगी. अब दूसरे कमरों की कुछ फोटो हो जाएं.’’

मिसेज व्हीलर दोनों को रास्ता दिखाते हुए पहले सिटिंग रूम और फिर बैडरूम में ले गई. बैडरूम में फोटो उतारते समय निक ने ज्यादा समय लिया. इस मौके का फायदा उठाते हुए गिलोरिया ने साइड टेबल की दराज देख डालीं. फिर उस ने निक की तरफ देख कर मायूसी के साथ सिर हिलाया. दराजों से वह कागज नहीं मिला जिस की उन्हें तलाश थी.

कुछ देर बाद वे स्टडी में पहुंच गए. निक डर रहा था कि कहीं माइकल वापस न आ जाए. अचानक उसे खयाल आया तो उस ने कहा, ‘‘मिसेज व्हीलर. यहां फोटो उतरवाने से पहले थोड़ा सा मेकअप कर लो. यह वह तसवीरें होंगी जो जरूर किसी प्रोड्यूसर को अपनी तरफ आकर्षित करेंगी. उस के नीचे लिखा जाएगा कि मिसेज जून व्हीलर को स्टडी का बहुत शौक है. वह अपना बचा हुआ समय स्टडी में गुजारती हैं.’’ फिर उस ने गिलोरिया से कहा, ‘‘गिलोरिया, तुम मिसेज व्हीलर का मेकअप करने में मदद करो.’’

गिलोरिया ने सहमति में सिर हिलाया और जून व्हीलर के साथ दूसरे कमरे में चली गई. उस के जाते ही निक ने दराजों की तलाशी लेनी शुरू कर दी. खुशकिस्मती से वह कागज जो उसे चाहिए था ऊपर वाली दराज में ही मौजूद था.

उस कागज को सन 1950 की डायरी से फाड़ा गया था. पुराना होने की वजह से उस में पीलापन आ गया था. अलबत्ता उस का साइज 5 स्क्वायर इंच ही था. उस पर टूटे फूटे अक्षरों में कोई वाक्य लिखा था जो निक की समझ में नहीं आया. निक ने उसे तह कर के जेब में रखा और मिसेज व्हीलर की वापसी का इंतजार करने लगा.

उस का काम खत्म हो चुका था और अब वह जल्द से जल्द वापस जाना चाहता था. कुछ देर बाद मिसेज व्हीलर वापस आ गई, गिलोरिया भी साथ थी.

निक ने उस के हाथ में एक सुंदर जिल्द वाली किताब थमा दी और अलगअलग कोणों से कुछ फोटो लिए. फिर वह अपना कैमरा बंद करते हुए बोला, ‘‘धन्यवाद मिसेज व्हीलर, हम ने तुम्हारा बहुत समय बरबाद कर दिया है.’’

‘‘कोई बात नहीं.’’ मिसेज व्हीलर ने कहा और दोनों को दरवाजे तक छोड़ने आई.

निक दरवाजे के पास रुकता हुआ बोला, ‘‘मिसेज व्हीलर, मिस्टर माइकल से हमारा जिक्र मत करना. ये पैसे वाले लोग हमारी संस्था को पसंद नहीं करते.’’

‘‘चिंता मत करो, मैं मिस्टर माइकल को हवा भी नहीं लगने दूंगी.’’

कुछ देर बाद निक की कार हाइवे पर दौड़ रही थी.

‘‘काम हो गया है.’’ निक ने जेब से कागज निकाल कर गिलोरिया को दिखाते हुए कहा, ‘‘यह है वह कागज जिस के लिए यह सारी मुसीबत उठानी पड़ी.’’

गिलोरिया ने हैरत से कागज को देखते हुए कहा, ‘‘विश्वास नहीं होता कि कोई आदमी इस कागज के लिए 25 हजार डौलर खर्च कर सकता है.’’

अपार्टमेंट पहुंच कर निक ने नारमन को फोन किया, ‘‘मिस्टर नारमन, मैं निक वेलवेट बोल रहा हूं, तुम्हारा काम हो गया है.’’

‘‘वंडरफुल,’’ दूसरी ओर से नारमन की आवाज सुनाई दी, ‘‘रात के ठीक 10 बजे सैंट्रल पार्क में मिलो. मैं उत्तरपश्चिमी कोने में तुम्हारा इंतजार करूंगा.’’

‘‘सैंट्रल पार्क.’’ निक ने हैरानी से कहा, ‘‘क्या हम किसी बेहतर जगह पर मुलाकात नहीं कर सकते?’’

‘‘मैं ने एहतियात के तौर पर इस जगह को चुना है. मैं बाकी की रकम के साथ वहां मौजूद रहूंगा. किसी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं है. ठीक 10 बजे उत्तरीपश्चिमी कोने में.’’

निक ने फोन बंद कर दिया और जेब से कागज निकाल कर उसे गौर से देखने लगा. उस पर टूटेफूटे अक्षरों में कोई अर्थविहीन वाक्य लिखा था. उस के नीचे मकड़ी की शक्ल से मिलतीजुलती कोई तस्वीर बनी थी. यह भी संभव था कि वह किसी के हस्ताक्षर रहे हों. निक ने जेब से लैंस निकाला और कागज पर लिखे वाक्य का अर्थ समझने की कोशिश करने लगा.

जब निक वो कागज का टुकड़ा नारमन को देने जाता है तो उस पर हमला होता है. कौन था उस हमले के पीछे? जानने के लिए पढ़ें हिंदी फिक्शन क्राइम स्टोरी का अगला अंक…

कागज के टुकड़े की चोरी – भाग 3

जब वह घर पहुंचा तो गिलोरिया मौजूद नहीं थी. उस ने यह सोचते हुए जेब से कागज निकाला कि उस की उम्मीद के विपरीत जल्दी काम पूरा हो गया. लेकिन कागज खोल कर देखा तो उस की उम्मीदों पर पानी फिर गया. वह किसी पुरानी डायरी का कागज नहीं था. उस का साइज भी अलग था. निक ने मायूसी के साथ सिर को झटका और कागज को फाड़ने का इरादा किया.

तभी उस की नजर कागज पर लिखे हुए पते पर पड़ी. लिखा था : पाल गिलबर्ट, कमोडोर रेस्टोरेंट, कोस्ट रोड.

निक कुछ देर तक सोचता रहा. फिर वह कार में बैठ कर कोस्ट रोड की तरफ रवाना हो गया.

कमोडोर रेस्टोरेंट समुद्र के किनारे एक छोटा सा रेस्तरां था. काउंटर के पीछे एक मोटी सी औरत एप्रिन बांधे खड़ी थी. रेस्टोरेंट करीब करीब खाली पड़ा था. एक कोने में कुछ शिपमैन बैठे थे. निक ने काउंटर के पास पड़े एक स्टूल पर बैठ कर कौफी का आर्डर दिया. औरत ने कौफी का कप भर कर उस के सामने रख दिया और जिज्ञासा भरी नजरों से उस की ओर देखने लगी.

‘‘तुम शायद पहली बार यहां आए हो?’’ औरत ने पूछा तो निक बोला, ‘‘हां, दरअसल मेरे एक दोस्त ने बताया था कि यहां सी-फूड बहुत अच्छा मिलता है.’’

‘‘थैंक्स, क्या नाम है तुम्हारे दोस्त का?’’

निक ने थोड़ा रुक कर कहा, ‘‘माइकल गार्नर.’’

‘‘माइकल गार्नर?’’ औरत ने थोड़ा चौंकते हुए पूछा, ‘‘तुम उसे कैसे जानते हो?’’

‘‘हमारी मुलाकात एक बिजनैस फंक्शन के दौरान हुई थी.’’ निक आंख दबाते हुए बोला, ‘‘हमारी लाइन एक ही है. उम्मीद है, तुम मेरा मतलब समझ गई होगी.’’

वह औरत भौएं सिकोड़ कर निक को घूरने लगी. एक लंबी चुप्पी के बाद उस ने पूछा, ‘‘क्या तुम्हें माइकल ने भेजा है?’’

सुन कर निक चौंका, लेकिन उस ने जाहिर नहीं होने दिया. उस ने थोड़ा सा ड्रामा करने का फैसला किया. वह कौफी की चुस्कियां लेते हुए बोला, ‘‘माइकल ने पाल गिलबर्ट का नाम लिया था.’’

‘‘पाल मेरा पति है और बिलकुल बुद्धू है. मैं खुद माइकल से बात करना चाहती थी लेकिन परेशानी यह है कि वह कभी सामने नहीं आता. मैं ने आज तक उस की शक्ल नहीं देखी. वह पाल की सादगी से नाजायज फायदा उठा रहा है.’’

निक बड़ी मुश्किल से उस की बात को पचा गया. वह सोचने लग. अगर इस औरत ने माइकल की शक्ल नहीं देखी तो इस का मतलब माइकल ने कभी इस रेस्टोरेंट में कदम नहीं रखा था.

‘‘तुम माइकल के बजाय मुझ से बात कर सकती हो.’’ निक ने कहा, ‘‘मुझे निकोलस कहते हैं.’’

औरत धीमे स्वर में बोली, ‘‘माइकल से कह देना कि हम सिर्फ एक हजार डौलर के लिए इतना बड़ा खतरा मोल नहीं ले सकते.’’

‘‘मेरे ख्याल में तो एक हजार डौलर बहुत होते हैं.’’ निक ने अंधेरे में तीर चलाया. उसे इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि वह औरत किस मामले की बात कर रही है.

‘‘असल खतरा तो हम मोल लेते हैं. अगर कभी छापा पड़ गया तो माइकल का क्या नुकसान होगा? ज्यादा से ज्यादा एक पैकेज पकड़ा जाएगा. सारी मुसीबत तो हम पर आ पड़ेगी.’’

निक ने गहरी सांस ली. एक बात साफ हो गई थी कि मामला स्मगलिंग से संबंधित था.

‘‘मैं माइकल से बात करुंगा,’’ निक ने कहा, ‘‘तुम्हारे खयाल में कितने पैसे ठीक रहेंगे?’’

‘‘कम से कम 3 हजार डौलर.’’

‘‘यह तो बहुत ज्यादा हैं. बहरहाल, माइकल से बात करुंगा. मैं पैकेज के बारे में पूछना चाहता था.’’

‘‘मेरा खयाल है, यह बात माइकल को मालूम होनी चाहिए. आखिरी सूचना के अनुसार जहाज 15 तारीख को रात के किसी समय बंदरगाह पहुंचेगा. इस का मतलब डिलीवरी 16 या 17 तारीख को होगी.’’

निक ने कौफी का आखिरी घूंट लिया, पैसे निकाल कर काउंटर पर रखे और जाने के लिए खड़ा हो गया. जातेजाते उस ने कहा, ‘‘ओ.के. मिसेज गिलबर्ट. फिर मुलाकात होगी.’’

बाहर निकलकर निक अपनी कार में जा बैठा जो रेस्टोरेंट से कुछ दूरी पर सड़क के दूसरी ओर खड़ी थी. कुछ देर तक वह ड्राइविंग सीट पर बैठा परिस्थितियों पर विचार करता रहा. जाहिर था कोई चीज पानी के जहाज पर स्मगल कर के कमोडोर रेस्टोरेंट में पहुंचाई जाती थी और वहां से माइकल का कोई कारिंदा उसे वसूल कर लेता था और इस थोड़ी सी सेवा के बदले पाल गिलबर्ट एक हजार डौलर कमा लेता था. सौदा ज्यादा बुरा नहीं था.

निक ने इंजन स्टार्ट कर के कार को गियर में डाल दिया. उसी समय उस ने कमोडोर रेस्टोरेंट के सामने एक स्टेशन वैगन को रुकते हुए देखा. उस की ड्राइविंग सीट पर नारमन बैठा था. उस समय उस की आंख पर काली पट्टी के बजाय धूप का चश्मा था. निक ने अर्थपूर्ण भाव में सिर हिलाया और रुके बगैर बढ़ गया.

अगले दिन जब निक ने माइकल गार्नर के घर की कालबेल बजाई तो एक 30-32 साल की औरत ने दरवाजा खोला. वह वैलडे्रस्ड और आकर्षक औरत थी. उस ने सवालिया नजरों से निक और गिलोरिया की ओर देखा. निक के कंधे पर कैमरे लटक रहे थे. जबकि गिलोरिया एक मुस्तैद फीचर राइटर लग रही थी.

‘‘सौरी, मिस्टर माइकल घर पर नहीं हैं.’’ औरत ने उन दोनों को देखते ही कहा.

यह बात निक और गिलोरिया को पहले से ही मालूम थी. सच तो यह था कि उन्हें इस मौके के लिए डेढ़ घंटे तक इंतजार करना पड़ा था. वो औरत उस घर की हाउसकीपर थी. निक ने जेब से एक कार्ड निकाल कर उस औरत के हाथ में दिया.

उस कार्ड के अनुसार निक घरेलू नौकरों की एक संस्था का प्रतिनिधि था. विजिटिंग कार्ड उस ने फौरी तौर पर आर्डर दे कर तैयार करवाए थे.

‘‘मैं किसी संस्था की सदस्य नहीं बनना चाहती.’’ औरत ने कार्ड वापस करते हुए कहा तो निक 5 डौलर का नोट निकाल कर औरत की ओर बढ़ाते हुए बोला, ‘‘हम तुम्हें संस्था का सदस्य बनाने नहीं आए. हम घरों में काम करने वाले नौकरों के बारे में सर्वे कर रहे हैं और तुम से कुछ सवाल करना चाहते हैं.’’

औरत असमंजस की नजरों से नोट की तरफ देखने लगी.

‘‘हम तुम्हारा ज्यादा समय नहीं लेंगे. कुछ सवाल करेंगे और कुछ फोटो खींचेंगे. ज्यादा से ज्यादा 15-20 मिनट लगेंगे. ये फोटो महिलाओं की मैगजीन में प्रकाशित की जाएंगी.’’

ऐसा क्या था रहस्य छिपा था उस कागज के टुकड़े में? जानने के लिए पढ़ें इस Fiction Crime Story का अगला भाग… 

कागज के टुकड़े की चोरी – भाग 2

निक ने सोचा कि माइकल या तो उस बंगले में किराएदार है या उस ने वह बंगला हाल ही में खरीदा है. वह नेम प्लेट देखता हुआ थोड़ा आगे बढ़ गया और फिर वापस लौट आया. उसी वक्त बंगले का मुख्य दरवाजा खुला और अंदर से एक काली मर्सिडीज निकलती दिखाई दी. ड्राइविंग सीट पर एक स्वस्थ और अच्छी शक्लोसूरत का आदमी बैठा था. सफेद बाल और उम्र लगभग 60 साल.

पीछे की सीट पर उस से आधी उम्र की एक खूबसूरत औरत बैठी थी. निक अपनी कार में आ बैठा और उस ने मर्सिडीज का पीछा शुरू कर दिया. दूरी थोड़ी ज्यादा थी, जब वह गली के मोड़ पर पहुंचा तो मर्सिडीज नजरों से ओझल हो गई.

उसी रोज रात के 10 बजे निक ईस्ट हारलम के इलाके में जा पहुंचा. वह एक बदनाम इलाका था, शरीफ आदमी रात के समय वहां जाते हुए डरते थे. निक अपनी कार सबवे स्टेशन के पास खड़ी कर के पैदल ही एक ओर चल दिया. थोड़ी दूर चलने के बाद उस ने महसूस किया कि लफंगे टाइप के 2 युवक उस का पीछा कर रहे हैं.

वह जानबूझ कर एक अंधेरी गली में घुस गया. वे दोनों युवक उस के बिलकुल पास पहुंच गए. तभी एक ने उस के बाईं ओर के कंधे से कंधा टकराया. निक ने उस की ओर देखा तो दाईं ओर वाला उस के साथ रगड़ खाता हुआ आगे निकल गया. अगर निक इस ड्रामे के लिए तैयार न होता तो उसे हरगिज पता नहीं चलता कि दाईं ओर वाला युवक उस की पैंट की पिछली जेब से पर्स निकाल चुका है.

‘‘रुक जाओ.’’ निक ने जल्दी से आवाज लगाई, ‘‘पर्स खाली है, कुछ नहीं है उस में.’’

यह सुनते ही वे दोनों रुके और बाईं ओर वाले युवक ने कमानीदार चाकू निकाल लिया. हलके अंधेरे के बावजूद निक ने बड़ी फुरती से उस की बांह पकड़ कर चाकू छीन लिया. दूसरा युवक अपने साथी की मदद के लिए तेजी से आगे बढ़ा तो निक ने उस के पेट पर घुटने से जोरदार वार किया. वह तेज दर्द से कराहता हुआ दोहरा हो गया. उन दोनों को शायद यह बिलकुल उम्मीद नहीं थी कि शरीफ सा दिखने वाला वह आदमी जवाबी हमला कर देगा. इसलिए दोनों बौखला गए.

निक ने अभी तक पहले वाले युवक की बांह नहीं छोड़ी थी. उस ने चाकू की नोक उस की गरदन से लगाते हुए कहा, ‘‘मैं बिजनेस की बात करना चाहता हूं.’’

‘‘कैसा बिजनेस? हमारी जेबें बिलकुल खाली हैं, तुम्हें कुछ हासिल नहीं होगा.’’

‘‘जानता हूं, तुम दोनों कंगले हो.’’

‘‘ओह, मेरी बांह तो छोड़ो.’’

‘‘चुपचाप मेरी बात सुनो.’’ निक ने उसे डांटा, ‘‘यह बताओ, चौबीस घंटों के अंदर 5 सौ डौलर कमाने के बारे में क्या खयाल है?’’

‘‘24 घंटे के अंदर 5 सौ डौलर?’’ दोनों एकसाथ बोले, ‘‘काम क्या है?’’

‘‘काम ज्यादा मुश्किल नहीं है.’’ कहते हुए निक ने उस युवक की बांह छोड़ दी. फिर कहा, ‘‘तुम्हें एक आदमी की जेब से पर्स निकालना और वापस डालना है.’’

‘‘निकालने वाली बात तो समझ में आती है, लेकिन वापस डालने का क्या मतलब?’’

‘‘समझ लो यह तुम्हारे हुनर की परीक्षा है. 5 सै डौलर तुम्हें इसी काम के मिलेंगे.’’

‘‘तुम ने हमारा हुनर देखा ही कहां है, हम एक बार नहीं 10 बार पर्स निकाल कर डाल सकते हैं. लेकिन परेशानी यह है कि पर्स में 25-50 डौलर से ज्यादा नहीं निकलते. आजकल आमतौर पर लोगों की जेब में क्रेडिट कार्ड होते हैं. बड़े लोगों ने जेबों में कैश रखना छोड़ दिया है. वैसे हमें अपने हुनर का प्रदर्शन कब और कहां करना होगा?’’

निक ने उन्हें विस्तार से सब कुछ समझा दिया. उन के नाम बर्ट और विकी थे.

अगले दिन 11 बज कर 10 मिनट पर माइकल गार्नर ने अपनी कार पार्किंग में खड़ी की और नजदीकी शौपिंग प्लाजा की ओर बढ़ गया. निक की कार भी उस के पीछेपीछे पार्किंग में दाखिल हुई थी. बर्ट और विकी नाम के देनों युवक पिछली सीट पर बैठे थे. तीनों लगभग 2 घंटे से माइकल का पीछा कर रहे थे. अब वह मौका उन के सामने था जिस की उन्हें तलाश थी.

निक के इशारे पर बर्ट और विकी कार से निकल कर माइकल के पीछे चल दिए. निक वहां नहीं रुका. उस ने अपनी कार पार्किंग से बाहर निकाल कर शौपिंग प्लाजा की ओर मोड़ दी. वह उन के ज्यादा से ज्यादा करीब रहना चाहता था. चंद पलों के बाद उस ने अपनी कार प्लाजा के सामने रोक दी.

बर्ट और विकी निक की उम्मीद से ज्यादा तेज साबित हुए. उन्होंने उस समय माइकल का पर्स पार कर लिया, जब वह स्टोर के अंदर दाखिल हो रहा था. विकी उस के पीछे ही रहा जबकि बर्ट पर्स ले कर निक के पास पहुंच गया. पर्स के अंदर लगभग डेढ़ सौ डौलर, क्रेडिट कार्ड, आइडिंटी कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, तीन विजिटिंग कार्ड और एक मुड़ा हुआ कागज था. निक ने कागज निकाल कर पर्स यह कह कर बर्ट को वापस दे दिया कि उसे फिर से उसी की जेब में डाल दे.

बर्ट पर्स लेते हुए बोला, ‘‘तुम ने केवल इस कागज के लिए 5 सौ डौलर खर्च किए हैं?’’

‘‘तुम अपने काम से मतलब रखो.’’ निक ने कहा, ‘‘पर्स से बिना कोई चीज निकाले इसे वापस माइकल की जेब में डाल देना.’’

‘‘और हमारा मेहनताना?’’ बर्ट ने कहा तो निक ने जेब से 2 सौ डौलर निकाल कर उस के हाथ पर रख दिए. बोला, ‘‘3 सौ डौलर काम पूरा होने पर. और हां, जरा जल्दी करो. कहीं वह वापस न चला जाए. मैं भी तुम्हारे पीछे ही आ रहा हूं.’’

बर्ट 2 सौ डौलर जेब में रख कर वापस चल दिया. निक कार से बाहर निकला और थोड़े फासले से उस के पीछे चलने लगा. स्टोर के दरवाजे पर पहुंच कर बर्ट ने पर्स की नकदी अपनी जेब में डाल ली लेकिन निक से उस की यह हरकत नहीं छुप सकी. माइमल अभी तक स्टोर के अंदर ही था. बर्ट ने विकी को इशारा किया और माइकल के पीछे पहुंच गया.

चंद पलों तक वह उस के पीछे चलता रहा. फिर मौका देख कर उस ने पर्स उस की जेब में डालने की कोशिश की. तभी अचानक माइकल घूमा और उस ने बर्ट की कलाई पकड़ ली. उस ने शोर मचाया तो शौपिंग प्लाजा के कोने पर खड़ा सिक्योरिटी गार्ड फौरन उस की मदद के लिए पहुंच गया. यह देख कर विकी ने वहां से खिसक जाने में ही भलाई समझी. निक भी तुरंत मुड़ गया क्योंकि अब वहां रुकना खतरनाक था.

निक कार के पास पहुंचा तो विकी वहां खड़ा उस का इंतजार कर रहा था. उस ने निक को देखते ही कहा, ‘‘बर्ट पकड़ लिया गया है.’’

‘‘मुझे मालूम है. उस ने मेरे मना करने के बावजूद भी पर्स से पैसे निकाल लिए. यह बात मुझे पसंद नहीं आई.’’

‘‘अब हमारे मेहनताने का क्या होगा?’’

‘‘उसूली तौर पर तो तुम्हें कोई मेहनताना नहीं मिलना चाहिए. क्योंकि तुम लोगों ने वादे के मुताबिक काम नहीं किया.’’ इस के साथ ही उस ने सौ डौलर निकाल कर विकी के हाथ पर रखते हुए कहा, ‘‘2 सौ डौलर बर्ट को दे चुका हूं. ये सौ डालर तुम्हारे हैं.’’

‘‘लेकिन बात 5 सौ डौलर की हुई थी.’’

‘‘हां, लेकिन काम पूरा होने की स्थिति में. इन्हें रखो और चलते बनो. वरना पुलिस तुम तक भी पहुंच सकती है.’’

विकी ने सौ डौलर ले कर जेब में डाले और बड़बड़ाते हुए एक ओर चल दिया. निक कार में बैठा और इंजन स्टार्ट कर के गाड़ी आगे बढ़ा दी.

क्या पुलिस निक तक पहुंच जाएगी या वो अपने मनसूबे में कामयाब हो जायेगा? इन सभी सवालों के जवाब मिलेंगे इस बेस्ट फिक्शन क्राइम स्टोरी के अगले अंक में..

कागज के टुकड़े की चोरी – भाग 1

उस की बाईं आंख काली पट्टी से ढकी हुई थी. लेकिन निक वेलवेट को इस बात पर यकीन नहीं था कि उस की एक आंख नहीं है. शायद  उस ने वह पट्टी अपनी शख्सियत को रहस्यमय बनाने के लिए बांध रखी थी. वह औसत कद, आकर्षक शरीर का अधेड़ उम्र का आदमी था. उस का माथा ऊंचा और बाल भूरे थे. वह शेरों के पिंजरे के पास खड़ा लापरवाही से च्युंगम चबा रहा था. निक उस के पास जा कर खड़ा हो गया और पिंजरे में बंद शेर की ओर देखने लगा.

चंद पलों तक दोनों में से कोई नहीं बोला. आखिरकार निक को ही पहल करनी पड़ी, ‘‘मिस्टर नारमन आज सुबह हमारी फोन पर बात हुई थी.’’

नारमन ने हां में सिर हिलाया और निक की ओर देखे बिना बोला, ‘‘मिस्टर वेलवेट, तुम 5 मिनट देर से पहुंचे.’’

‘‘सौरी, मैं ट्रैफिक जाम में फंस गया था.’’

‘‘कोई बात नहीं, मैं बोर नहीं हुआ. जानते हो मैं ने तुम्हें शेरों के पिंजरे के पास मिलने के लिए क्यों कहा था?’’

निक इनकार में सिर हिलाते हुए बोला, ‘‘अगर तुम शेरों का जोड़ा चोरी करवाने के बारे में सोच रहे तो बात खत्म समझो. मैं कीमती चीजें चोरी नहीं करता.’’

‘‘मुझे मालूम है, असल में शेर मेरा आइडियल जानवर है. शेरों को देख कर मेरे अंदर हिम्मत और हौसला पैदा होता है.’’

‘‘हम यहां कुछ और बात करने के लिए मिले हैं.’’ निक ने उसे याद दिलाया.

‘‘ठीक है, हम मुद्दे की बात करते हैं. मैं तुम से एक कागज का टुकड़ा चोरी करवाना चाहता हूं.’’

निक को आश्चर्य नहीं हुआ. क्योंकि वह इस से भी साधारण चीजें चोरी कर चुका था. फिरभी उस ने बात को और साफ करने के लिए पूछा, ‘‘किस तरह का कागज? मेरा मतलब कोई डाक्युमेंट, वसीयतनामा या कानूनी कागज?’’

‘‘महज एक कागज का टुकड़ा.’’ नारमन ने दोहराया, ‘‘जिस का साइज करीब 5 स्क्वायर इंच है और उसे एक पुरानी डायरी से फाड़ा गया है. पुराना होने की वजह से कागज पीला पड़ गया है.’’

‘‘क्या किसी खजाने का नक्शा है?’’ निक ने हलके व्यंग्य में पूछा, तो नारमन की नजर आने वाली इकलौती आंख में गुस्सा झलकने लगा. वह बोला, ‘‘जिस आदमी ने तुम्हारा परिचय कराया था, उस ने कहा था कि तुम ज्यादा सवाल नहीं करते.’’

‘‘उस ने ठीक कहा था.’’ निक बोला, ‘‘फिर भी मैं कोई काम हाथ में लेने से पहले इस बात की तसल्ली करना जरूरी समझता हूं कि जिस चीज को चोरी किए जाने के लिए कहा जा रहा है वह कीमती तो नहीं है.’’

‘‘जब तुम कागज के उस टुकड़े को देखोगे तो खुद समझ जाओगे कि वह कीमती नहीं है न ही उस पर किसी खजाने का नक्शा बना है. उसे एक पुरानी डायरी से फाड़ा गया है और उस के ऊपर तारीख और सन वगैरह छपा हुआ है. जैसे कि आमतौर पर डायरी के पन्नों पर छपा होता है.’’

‘‘ओ.के., तुम्हें यह तो मालूम होगा कि मेरी फीस 25 हजार डौलर है.’’

‘‘हां मुझे मालूम है.’’ नारमन ने कहा और जेब से एक लिफाफा निकाल कर निक के हाथ पर रख दिया, ‘‘इस में पेशगी के 10 हजार डौलर हैं. बाकी रकम काम पूरा होने के बाद. और हां, एक जरूरी बात. आज महीने की 10 तारीख है, 15 तारीख तक कागज का वह टुकड़ा मेरे हाथ में होना चाहिए.’’

‘‘कागज कहां है?’’

नारमन ने जेब से एक तसवीर निकाल कर निक को देते हुए कहा, ‘‘यह उस मकान की तसवीर है जिस के अंदर से तुम्हें वह कागज का टुकड़ा चोरी करना है. यह मकान शहर के बाहरी इलाके में है. तसवीर के पीछे मकान का पता लिखा हुआ है.’’

निक ने तसवीर ले कर उस का मुआयना किया. वह एक बड़ा और मार्डन शैली का मकान था. चारों तरफ हरेभरे पेड़ और फूलों से लदे पौधे खड़े थे. निक की आंखें सोचने के अंदाज में सिकुड़ गईं. इतने बड़े मकान में कागज का एक छोटा सा टुकड़ा तलाश करना वाकई बहुत मुश्किल काम था.

‘‘इस इमारत के अंदर 3 लोग रहते हैं और उन के साथ उन के 2 नौकर हैं. मकान मालिक का नाम माइकल गार्नर है. जिस कागज के टुकड़े का मैं जिक्र कर रहा हूं उस के बारे में माइकल के अलावा कोई और नहीं जानता. यह मालूम करना तुम्हारा काम है कि कागज का वह टुकड़ा माइकल के पर्स में रखा हुआ है या घर के अदंर किसी जगह पर. वैसे मेरे अंदाजे के मुताबिक वह कागज का टुकड़ा 2 जगह पर हो सकता है, माइकल की जेब में या उस के स्टडी रूम में.’’

‘‘काफी मुश्किल काम मालूम होता है.’’ निक ने कहा.

‘‘एक बात और बता दूं कि रात के ठीक 11 बजे इमारत के दरवाजे और खिड़कियों पर लगा हुआ सिक्योरिटी अलार्म औन कर दिया जाता है. इस अलार्म का संपर्क पुलिस हेडक्वार्टर से है.’’

निक ने लिफाफा खोल कर अंदर नजर डाली. उस में 100 डौलर वाले नोटों की पूरी गड्डी थी. निक ने स्वीकारोक्ति में सिर हिलाया. लिफाफा जेब में डाला और नारमन को बाय कह कर चला गया. पार्किंग में गिलोरिया कार के अंदर उस का इंतजार कर रही थी. निक दरवाजा खोल कर ड्राइविंग सीट पर जा बैठा और इंजन स्टार्ट करने लगा.

‘‘क्या बात है निक?’’ गिलोरिया ने पूछा, ‘‘तुम कुछ खोए खोए से लग रहे हो. चिडि़याघर के अंदर कोई विचित्र जानवर तो नहीं देख लिया?’’

‘‘कुछ ऐसा ही समझ लो.’’ निक कार को गियर में डालते हुए बोला, ‘‘इंसान से बढ़ कर विचित्र जानवर कोई नहीं है.’’

थोड़ी देर बाद कार हाइवे पर दौड़ने लगी. गिलोरिया ने उस से पूछा, ‘‘हम कहां जा रहे हैं?’’

‘‘कुछ पल खुली हवा में सांस लेना चाहता हूं.’’ निक ने कहा, ‘‘शहर की हवा बड़ी दूषित है.’’

गिलोरिया ने कोई और सवाल नहीं किया. वह समझ गई कि निक ने कोई काम हाथ में लिया है. 25 मिनट के बाद उन की कार एक सफेद रंग की मार्डन इमारत के सामने पहुंच गई. निक ने जेब से तसवीर निकाल कर देखी और संतुष्टि के भाव से सिर हिलाते हुए तसवीर जेब में रख ली. वह बिलकुल ठीक जगह पहुंचा था. उस ने कार को इमारत से 50 मीटर दूर पार्क किया और इंजन बंद कर के बाहर निकल गया.

‘‘मैं अभी आता हूं.’’ उस ने गिलोरिया से कहा और लापरवाही से गली में घुस गया. वह साफसुथरा पौश इलाका था. वहां सारे बंगले लाइन में बने हुए थे. गली काफी चौड़ी और सुनसान थी. जिस बंगले की तसवीर उस की जेब में थी उस का मुख्य दरवाजा मजबूत लोहे की सलाखों का बना हुआ था. दरवाजे के साइड में 2 नाम लिखे हुए थे. उन में एक संगमरमर के स्तंभ पर लिखा हुआ था और दूसरा नाम उस के नीचे लगी नेम प्लेट पर. नेम प्लेट पर लिखा नाम माइकल गार्नर था.

क्या निक पता लगा पायेगा कागज के टुकड़े के बारे में? कैसे पहुंचेगा वो इस कागज तक? जानने के लिए पढ़ें इस दिलचस्प क्राइम स्टोरी का अगला भाग…