UP News: प्यार में खत्म हुई ‘सीमा’

UP News: नाबालिग सीमा अपने प्रेमी प्रभु के साथ भाग गई थी. पुलिस ने सीमा को बरामद कर के प्रभु को गिरफ्तार भी कर लिया. इस के बावजूद जब सीमा की हत्या हो गई तो पुलिस को संदेह उस के घर वालों पर ही हुआ. पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बरेली जनपद के थाना विशारतगंज के मोहल्ला वार्ड नंबर 11 में भूरे खां अपने परिवार के साथ रहता था. भूरे के परिवार में पत्नी नसीम, 6 बेटियां और 2 बेटे थे. इन में केवल सब से बड़ी सकीना का विवाह हुआ था, बाकी सभी अविवाहित थे.

इश्तियाक दिल्ली में किसी फैक्ट्री में नौकरी करता था. मुश्ताक भी कुछ दिनों तक दिल्ली में रहा था, लेकिन इधर वह घर पर ही रह रहा था. पूरा परिवार जरी का काम करता था, जिस से होने वाली कमाई से उन के घर का खर्च आसानी से चल रहा था. भूरे की 15 साल की बेटी सीमा किशोरावस्था की सीमा पार कर के जवानी की दहलीज पर कदम रख रही थी. जवानी की चमक से उस का रूपरंग दमकने लगा था. वह ज्यादा पढ़ीलिखी नहीं थी, इस के बावजूद उसे फिल्मों का जबरदस्त शौक था. उस की सहेलियां भी उसी जैसी सोच की थीं. इसलिए उन में जब भी बातें होतीं, फिल्मों और उन में दिखाए जाने वाले प्रेमसंबंधों को ले कर होतीं.

यह उम्र का ही तकाजा था कि सीमा को उन बातों में खूब मजा आता था. उस के दिल में भी उमंगें थीं, उस के ख्यालों में भी अपने चाहने वाले की तस्वीर थी. लेकिन यह तस्वीर कुछ धुंधली सी थी. उस की आंखें ख्यालों की तस्वीर के चाहने वाले की तलाश किया करती थीं. लेकिन काफी कोशिशों के बाद भी वह धुंधली तस्वीर साफ हो रही थी और न वह कहीं नजर आ रहा था. उस के आगेपीछे चक्कर लगाने वाले लड़के कम नहीं थे, लेकिन उन में से एक भी ऐसा नहीं था, जो उस के ख्यालों की तस्वीर में फिट बैठता.

2 साल पहले सीमा पिता भूरे के साथ एक रिश्तेदारी में बरेली के ही एक गांव रेवती गई. यह गांव उस के गांव से ज्यादा दूर नहीं था. लौटते समय वह रेवती रेलवे स्टेशन पर खड़ी ट्रेन का इंतजार कर रही थी, तभी एक वेंडर युवक पानी की बोतल बेचते हुए उस के पास से गुजरा. उस लड़के में सीमा ने न जाने क्या देखा कि उस का दिल एकदम से धड़क उठा. उस की निगाहें उस पर टिक कर रह गई. उस के दिल से आवाज आई, ‘सीमा यही है तेरा चाहने वाला.’

उस युवक का चेहरा आंखों के रास्ते दिल में पहुंचा तो उस के ख्यालों में बनी धुंधली तस्वीर, बिलकुल साफ हो गई. वह युवक जब तक उस की नजरों के सामने रहा, सीमा उसे एकटक निहारती रही. उसे अपनी ओर इस तरह निहारते देख वह युवक भी बारबार उसी को देखने लगा. जब उन की निगाहें आपस में मिल जातीं तो दोनों के होंठों पर मुसकराहट तैर उठती. ट्रेन आई तो सीमा पिता के साथ ट्रेन में बैठ गई. पूरे रास्ते उस की आंखें के सामने उसी युवक का चेहरा घूमता रहा.

वह विशारतगंज रेलवे स्टेशन पर ट्रेन से उतर कर स्टेशन से बाहर आई तो उस नवयुवक को एक अंडे की दुकान पर देखा. वह ग्राहकों को अंडे बेच रहा था. इस का मतलब वह दुकान उसी की थी. इस का मतलब युवक विशारतगंज का रहने वाला था. यह जान कर सीमा को काफी खुशी हुई. उस ने सोचा कि वह जब भी चाहेगी, उस युवक के बारे में पता कर के उस से मिल सकेगी. यह बात दिमाग में आते ही उसे काफी सुकून मिला. वह पिता के साथ घर आ गई.

सीमा ने जल्दी ही उस युवक के बारे में पता कर लिया. उस का नाम था प्रभु गोस्वामी. वह वार्ड नंबर 6 में रहता था. उस के पिता महेश की मौत हो चुकी थी. परिवार में मां और 2 छोटे भाई थे. घर प्रभु की ही कमाई से चल रहा था. रेलवे स्टेशन के पास वह अंडे की दुकान लगाता था, साथ ही स्टेशन और ट्रेन में पानी की बोतलें बेच लेता था. एक दिन सुबह प्रभु छत पर बैठा मौसम का आनंद ले रहा था, तभी अचानक उस के मोबाइल की घंटी बज उठी. इतनी सुबह फोन करने वाला उस का कोई दोस्त ही होगा, यह सोच कर वह मोबाइल स्क्रीन पर नंबर देखे बगैर ही बोला, ‘‘हां बोल?’’

‘‘जी, आप कोन बोल रहे हैं?’’ दूसरी ओर से किसी लड़की की मधुर आवाज आई तो प्रभु चौंका. उसे अपनी गलती का अहसास हुआ तो उस ने तुरंत ‘सौरी’ कहते हुए कहा, ‘‘माफ करना, दरअसल मैं ने सोचा कि इतनी सुबहसुबह कोई दोस्त ही फोन कर सकता है, इसीलिए… वैसे आप को किस से बात करनी है, आप कौन बोल रही हैं?’’

‘‘मैं सीमा बोल रही हूं. मुझे भी अपनी दोस्त से बात करनी थी. लेकिन लगता है नंबर गलत डायल हो गया है.’’

‘‘कोई बात नहीं, आप को अपनी दोस्त का नंबर सेव कर के रखना चाहिए. ऐसा करेंगी तो गलती नहीं होगी.’’

‘‘आप पुलिस में हैं क्या?’’

‘‘नहीं तो, क्यों?’’

‘‘बात तो पुलिस वालों की ही तरह कर रहे हो. सवाल के साथ सलाह भी.’’ कह कर सीमा जोर से हंसी.

‘‘अरे नहीं, मैं ने तो वैसे ही कह दिया. दोस्त आप की, फोन भी आप का. आप चाहें नंबर सेव करें या न करें.’’

‘‘आप बुजुर्ग हैं?’’ सीमा ने फिर छेड़ा.

‘‘जी नहीं, अभी मैं नौजवान हूं.’’

‘‘तब तो किसी न किसी के खास होंगे?’’

‘‘आप बहुत बातें करती हैं.’’

‘‘अच्छी या बुरी?’’

‘‘अच्छी.’’

‘‘क्या अच्छा है मेरी बातों में?’’

अब हंसने की बारी प्रभु की थी. वह जोर से हंसा फिर बोला, ‘‘माफ करना, मैं आप से नहीं जीत सकता.’’

‘‘और मैं माफ न करूं तो?’’

‘‘तो आप ही बताएं, मैं क्या करूं?’’ प्रभु ने हथियार डाल दिए.

‘‘अच्छा जाओ, माफ किया.’’

दरअसल, सीमा ने किसी तरह प्रभु का मोबाइल नंबर हासिल कर लिया था. सीमा के पास खुद का मोबाइल नहीं था. इसलिए उस ने अपनी सहेली का मोबाइल ले कर बात की थी. पहली ही बातचीत में दोनों काफी घुलमिल गए. उन के बीच कुछ ऐसी बातें हुईं कि दोनों ही एकदूसरे के लिए अपनापन महसूस करने लगे. इस के बाद उन के बीच अक्सर बातें होने लगीं. सीमा ने प्रभु को बता दिया था कि उस दिन उस ने अनजाने में नहीं, जानबूझ कर फोन किया था और वह भी उस का नंबर हासिल कर के. इतना ही नहीं, उन की मुलाकात भी हो चुकी है.

जब प्रभु ने मुलाकात के बारे में पूछा तो सीमा ने रेवती रेलवे स्टेशन पर हुई मुलाकात के बारे में बता दिया. प्रभु यह जान कर खुश हआ, क्योंकि उस दिन सीमा का खूबसूरत चेहरा आंखों के जरिए उस के दिल में उतर चुका था. इस के बाद दोनों की मुलाकातें होने लगीं. दिनोंदिन उन का प्यार प्रगाढ़ होता गया. सीमा दीवानगी की हद तक प्रभु को चाहने लगी थी. प्रभु इस बात को बखूबी जानता था, लेकिन उस के दिमाग में जातिधर्म की बात बैठी हुई थी, इसलिए उसे हमेशा सीमा को खो देने का डर सताता रहता था. प्रेम दीवानों के प्रेम की खुशबू जब जमाने तक पहुंचती है तो लोग उन दीवानों पर तमाम बंदिशें लगाने लगते हैं. यही सीमा के घर वालों ने भी किया.

सीमा का गैरधर्म के लड़के के साथ इश्क लड़ाना घर वालों को रास नहीं आया. उन्होंने सीमा पर प्रतिबंध लगाने शुरू कर दिए. लेकिन तमाम बंदिशों के बाद भी सीमा प्रभु से मिलने का मौका निकाल ही लेती थी. इसी बीच एक मुलाकात में प्रभु को उदास देखा. सीमा ने कारण पूछा, ‘‘तुम्हारे दिल में ऐसी क्या बात है, जिस की वजह से तुम्हारे चेहरे पर उदासी छाई है?’’

‘‘कुछ नहीं, तुम्हें ऐसे ही लग रहा है.’’ प्रभु ने टालने की कोशिश की.

‘‘मुझे ऐसे ही नहीं लग रहा, कोई बात है जिस की वजह से तुम उदास हो. तुम्हें मेरी कसम, बताओ क्या बात है?’’

‘‘सीमा मुझे डर है कि मैं तुम्हें खो न दूं.’’

‘‘क्यों, तुम्हें ऐसा क्यों लगता है?’’

‘‘हम दोनों की जाति तो छोड़ो, धर्म भी अलगअलग है. ऐसे में घर समाज ही नहीं, घर वाले ही हमारी शादी के लिए नहीं राजी होंगे.’’

‘‘सच्चा प्यार ऊंचनीच और जातिधर्म का मोहताज नहीं होता. लोग कहते हैं न कि जोडि़यां ऊपर वाला बनाता है. इसलिए हम दोनों में प्यार हुआ है तो इस का मतलब है कि ऊपर वाले को हमारा प्यार मंजूर है. फिर इस में संदेह की कोई बात कहां है.’’

‘‘लेकिन तुम्हरे घर वाले तो हमें दूर करने के लिए जमीनआसमान एक किए हुए हैं.’’

‘‘चिंता मत करो, मैं अपने घर वालों को किसी न किसी तरह समझा लूंगी. अगर नहीं समझा पाई तो हमारे सामने और भी रास्ते हैं. देखो प्रभु, हमें दुनिया से जितना लड़ना पड़े, हम लड़ेंगे और जीतेंगे भी. कोई ताकत हमें जुदा नहीं कर सकती.’’

इतना कह कर सीमा प्रभु के सीने से लग गई. ऐसी विपरीत परिस्थिति में भी सीमा ने हार नहीं मानी. उस की हिम्मत उस का प्यार था, जिसे वह हर हाल में अपने से जुदा नहीं कर सकती थी. फिर कुछ देर और बात कर के दोनों अपनेअपने घरों को लौट गए. सीमा ने अपने घर वालों से बात की, लेकिन वे राजी नहीं हुए, उल्टे उस की पिटाई कर दी. बंदिशों के बाद भी उन के चोरीछिपे मिलने की भनक सीमा के घरवालों को लग ही जाती थी. उसी बीच रामलीला मेले में प्रभु पर चाकू से जानलेवा हमला किया गया. लेकिन संयोग था कि प्रभु बच गया. पुलिस में शिकायत भी की गई, लेकिन पुलिस ने कोई काररवाई नहीं की.

इस घटना ने सीमा को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि अगर वे यहां रहें तो दोनें की जान को खतरा बना रहेगा. उन दोनों को अलग करने के लिए उस के घर वाले किसी भी हद तक जा सकते हैं, इसलिए उस ने एक फैसला लिया. 18 फरवरी को सीमा रेलवे स्टेशन पहुंची और प्रभु से भाग चलने की जिद करने लगी. प्रभु तैयार नहीं हुआ तो वह वहां खड़ी सद्भावना एक्सप्रेस के आगे लेट गई और जान देने की धमकी देने लगी. हार कर प्रभु को उस की बात माननी पड़ी. वह सीमा को वहां से अपने घर ले गया और छिपा दिया. रात में दोनों रेलवे स्टेशन पहुंचे और ट्रेन से हिमाचल प्रदेश चले गए. प्रभु घर से 10 हजार रुपए ले कर गया था. वहां दोनों ने विवाह कर लिया और पतिपत्नी की तरह रहने लगे.

इधर सीमा के घर वालों को प्रभु के साथ उस के भाग जाने की खबर लगी तो उन्होंने उस की खोजबीन शुरू कर दी. काफी खोजबीन के बाद भी जब उस का कुछ पता नहीं चला तो एक मार्च को सीमा के पिता भूरे ने विशारतगंज थाने में प्रभु और उस के चाचा रमेश पर तमंचे की नोक पर सीमा का अपहरण करने का आरोप लगाते हुए तहरीर दी. थानाप्रभारी शुजाउर रहीम ने प्रभु और रमेश के विरूद्ध भादंवि की धारा 363, 366, 452, 504 के तहत मुकदमा दर्ज करा दिया. मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने प्रभु के घरवालों और रिश्तेदारों पर दबाव बनाना शुरू किया तो प्रभु ने होली के एक दिन पहले 5 मार्च को एक भाजपा नेता के माध्यम से सीमा को पुलिस के हवाले कर दिया.

पुलिस ने उसे महिला थाना भेजने के बजाय बिना मैडिकल कराए ही परिजनों के हवाले कर दिया. 9 मार्च को उस के कोर्ट में बयान होने थे. इसी बीच 8 मार्च को देर रात पुलिस ने प्रभु को भी गिरफ्तार कर लिया.  9 मार्च की सुबह साढ़े 7 बजे भूरे विशारतगंज थाने पहुंचा कि किसी नकाबपोश ने सुबह 4 बजे सीमा की हत्या कर दी है. उस समय घर का मेनगेट खुला हुआ था. सीमा की मां नसीम टौयलेट गई थी, बाकी लोग सो रहे थे. अचानक गोली चलने की आवाज सुनाई दी तो सभी उठ कर दौड़े. पास जा कर देखा तो सीमा के सिर से खून बह रहा था और उस का शरीर शिथिल पड़ चुका था. उस की मौत हो चुकी थी. उन्होंने एक नकाबपोश को वहां से भागते देखा था, वह कोई और नहीं प्रभु था.

उस का आरोप सुन कर थानाप्रभारी शुजाउर रहीम ने कहा कि प्रभु तो उन की हिरासत में है, वह कैसे खून कर सकता है? बहरहाल, शुजाउर रहीम पुलिस फोर्स के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने घटना की जानकारी उच्चाधिकारियों को दे दी और खुद सिपाहियों के साथ घटनास्थल के लिए रवाना हो गए. कुछ ही देर में एसपी (ग्रामीण) ब्रजेश श्रीवास्तव और सीओ (आंवला) धर्म सिंह मार्छाल भी घटनास्थल पर पहुंच गए. सीमा के सिर में काफी गहरा घाव था, जिस से अनुमान लगाया कि हत्यारे ने बहुत नजदीक से गोली चलाई थी. पुलिस अधिकारियों ने घर वालों से पूछताछ की तो सभी के बयान अलगअलग थे. शुरुआती जांच में और अब तक की पूछताछ में यह मामला औनर किलिंग का लग रहा था.

घटना के बाद से ही सीमा का बड़ा भाई इश्तियाक घर से गायब था. पुलिस ने आसपड़ोस में पूछताछ की तो पता चला कि देर रात तक सीमा के घरवाले जागते रहे थे. सीमा से लड़ाईझगड़ा होने की बात भी सामने आई. देर रात तक उन के घर में अफरातफरी का माहौल बना रहा था. उस के बाद कुछ समय के लिए सब शांत हो गया. सुबह 4 बजे गोली चलने की आवाज आई और फिर उस के बाद रोनेपीटने की आवाजें आने लगीं. इस के बाद सीमा की हत्या किए जाने की बात सामने आई. सीमा की हत्या में सारे हालात किसी अपने की ओर इशारा कर रहे थे. वह अपना कोई और नहीं, उस का बड़ा भाई इश्तियाक हो सकता था. वही घर से गायब था और उस का मोबाइल भी बंद था.

पूछताछ के बाद सीमा की लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी गई. इस के बाद पुलिस ने घर की तलाशी ली, लेकिन कुछ खास हाथ नहीं लगा. आगे की जांच में पता चला कि घटना की रात सीमा का मामा गुड्डू भी आया था. गुड्डू बरेली के थाना सिरौल के गांव हरदासपुर में रहता था. पुलिस ने उस के घर छापा मारा तो वह घर में ही था. लेकिन पुलिस को देखते ही वह छत के रास्ते भागने में सफल हो गया.

14 मार्च को थानाप्रभारी शुजाउर रहीम, एसआई चमन सिंह, प्रताप सिंह और अतुल दुबे की टीम ने गुड्डू को बदायूं के कुंवरगांव से गिरफ्तार कर लिया. उस के पास से हत्या में प्रयुक्त 315 बोर का तमंचा भी बरामद हो गया. दरअसल, सीमा का मामा गुड्डू पंजाब में फेरी लगा कर कबाड़ी का काम करता था. उसे फोन से सीमा के गैर धर्म के लड़के के साथ भाग जाने की जानकारी मिली तो वह क्रोध से जल उठा. जब पुलिस ने सीमा को बरामद कर घर वालों के हवाले किया तो गुड्डू ने भूरे से सीमा को समझाने को कहा. लेकिन सीमा प्रभु के पास जाने की जिद पर अड़ी थी. गुड्डू ने भी उसे समझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन वह नहीं मानी. इस के बाद गुड्डू के सामने एक ही रास्ता बचा कि वह सीमा को खत्म कर दे.

8 मार्च की सुबह वह हावड़ा-अमृतसर एक्सपे्रस टे्रन से बरेली के आंवला स्टेशन पर उतरा. वहां से वह अपने गांव हरदासपुर गया और शाम को विशारतगंज आ गया. देर रात वह भूरे के घर पहुंचा. उस ने सीमा को अपनी जिद छोड़ने के लिए काफी समझाया, जिसे ले कर काफी देर तक बहस चलती रही. सीमा का बड़ा भाई इश्तियाक भी मामा गुड्डू के सुर में सुर मिला रहा था. जब किसी तरह बात नहीं बनी तो सीमा के सो जाने पर गुड्डू ने इश्तियाक के साथ मिल कर सीमा के सिर से तमंचा सटा कर गोली मार दी. एक ही झटके में सीमा मौत की नींद सो गई. इस के बाद दोनों वहां से फरार हो गए. कुछ लोगों ने गुड्डू का पीछा भी किया, लेकिन वह किसी के हाथ नहीं आया.

शुजाउर रहीम ने गुड्डू और इश्तियाक के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करा कर गुड्डू को सीजेएम की अदालत में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. कथा लिखे जाने तक इश्तियाक फरार था. पुलिस उस की तलाश कर रही थी. गुड्डू को जरा भी कानून का ज्ञान होता तो सीमा की जान बच सकती थी. सीमा नाबालिग थी. ऐसी स्थिति में अदालत उसे उस के घर वालों को ही सौंपती न कि प्रेमी प्रभु को. UP News

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित.

Hindi Crime Story: तांत्रिक की तीसरी शादी

Hindi Crime Story: समझदार होते ही सोनू की समझ में आ गया था कि यह दुनिया मूर्खों से अटी पड़ी है, बस मूर्ख बनाने का तरीका मालूम होना चाहिए. इस के बाद उस ने तंत्रमंत्र सीखा और अंधविश्वास में डूबे लोगों को मूर्ख बनाने लगा. उस की पोल तो तब खुली, जब वह तीसरी शादी के चक्कर में पड़ा.

निशा उन दिनों कुछ ज्यादा ही परेशान थी. उस की परेशानी का आलम यह था कि उसे खानेपीने तक की सुध नहीं रहती थी. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर यह सब हो क्या रहा है? पिछले 2-3 महीने से कुछ ऐसा उलटा चक्कर चल रहा था कि उस का अच्छाखासा चल रहा घर डूबते जहाज की तरह हिचकोले लेने लगा था. पहले मां बीमार हुई, उस के बाद छोटे भाई का हाथ टूट गया. उन दोनों को संभालने के चक्कर में उस की अपनी नौकरी चली गई. मां कुछ ठीक हुई तो उस ने दौड़भाग कर छोटामोटा काम ढूंढा, लेकिन मां एक बार फिर बीमार पड़ गई.

रोज कुआं खोद कर पानी पीने वालों के घर पैसा होता ही कहां है? निशा ने जो थोड़ाबहुत जमा कर रखा था, वह सब मां और भाई के इलाज पर खर्च हो गया. अब मां का इलाज कराने की कौन कहे, खाने के भी लाले पड़ गए. वह मां का इलाज कराए या खाने का इंतजाम करे. मकान मालिक का किराया भी वह 3 महीने से नहीं दे पाई थी. निशा परेशान थी कि ऐसे में कैसे क्या होगा? वह मां के इलाज और खानेपीने का जुगाड़ करने में जूझ ही रही थी कि एक अन्य खबर ने उसे झकझोर कर रख दिया. मकान मालिक ने उसे बुला कर कहा कि वह उस का पिछला सारा किराया अदा कर के मकान खाली कर दे.

निशा ने गिड़गिड़ाते हुए कहा, ‘‘अंकलजी, आप का किराया मैं धीरेधीरे अदा कर दूंगी. रही बात मकान खाली करने की तो इस हालत में हम कहां जाएंगे? अचानक मकान खाली करना हमारे लिए आसान नहीं है अंकलजी. पहले आप अपना पिछला किराया तो अदा हो जाने दीजिए. उस के बाद हम कोई इंतजाम कर के आप का मकान खाली करेंगे. आप हमें थोड़ी मोहल्लत दीजिए.’’

‘‘भई, मोहल्लत देने का सवाल ही नहीं उठता. तुम लोगों का हर महीने का यही तमाशा है. वैसे भी अगले महीने मेरे घर बेटी की शादी है. नातेरिश्तेदार आएंगे तो उन के उठनेबैठने के लिए जगह तो चाहिए. जब अपने पास जगह है तो बाहर इंतजाम करने की क्या जरूरत है. इसलिए तुम मेरा मकान खाली कर दो.’’ मकान मालिक ने साफसाफ कह दिया. निशा के लिए मकान खाली करना इतना आसान नहीं था. क्योंकि मकान का बकाया किराया, राशन और दूध वाले को मिला कर लगभग 15 हजार रुपए होते थे. अगर वह मकान खाली करती तो नए मकान का एडवांस किराया, सामान वगैरह की ढुलाई आदि को ले कर इतने ही रुपए और चाहिए थे.

इतनी बड़ी रकम का इंतजाम वह कहां से कर सकती थी? जबकि उस के पास उस समय 20 रुपए भी नहीं थे. अपनी यह परेशानी निशा ने अपनी सहेली सुधा से बताई तो सहेली की परेशानी सुन कर वह भी सोच में पड़ गई. अगर उस के पास पैसे होते तो इस हालत में वह अवश्य ही सहेली की मदद कर देती. अचानक उसे जैसे कुछ याद आया हो तो वह बोली, ‘‘निशा, मुझे लगता है तुझे सोनू तांत्रिक से मिलना चाहिए. वह तेरी समस्या का कोई न कोई समाधान जरूर कर देगा.’’

‘‘यह सोनू तांत्रिक कौन है और वह हमारी समस्या का समाधान कैसे कर सकता है?’’

‘‘यह तो वहां चलने पर ही पता चलेगा. लेकिन जहां तक मुझे उस के बारे में जानकारी मिली है, वह हर छोटीबड़ी समस्या का समाधान चुटकी बजा कर कर देता है. बस तू तैयार हो जा, कौन हमें दूर जाना है. यहीं न्यू कंपनी बाग की गली नंबर 3 में उस की कोठी है.’’

‘‘लेकिन सुधा, मैं तंत्रमंत्र के चक्कर में नहीं पड़ना चाहती. मुझे अपने कर्म पर भरोसा है. आज नहीं तो कल हालात बदल ही जाएंगे.’’ निशा ने कहा.

निशा तांत्रिक सोनू के पास जाना नहीं चाहती थी, लेकिन सुधा की जिद के आगे उसे झुकना पड़ा. निशा सुधा के साथ जिस समय तांत्रिक सोनू की कोठी पर पहुंची, वह कमरे में पूजा कर रहा था, इसलिए उन्हें बाहर बैठ कर पूजा खत्म होने का इंतजार करना पड़ा. पूजा खत्म होते ही सोनू ने दोनों को अपने कमरे में बुलाया. तांत्रिक को देख कर निशा हैरान रह गई, क्योंकि वह तांत्रिक जैसा लग ही नहीं रहा था. सोनू तांत्रिक 32-35 साल का राजकुमार जैसा युवक था. आसमानी रंग के सफारी सूट में वह किसी प्रतिष्ठित परिवार का लड़का लग रहा था. निशा के मन में तांत्रिक की जो छवि थी, वह उस के एकदम विपरीत था. उस ने तो सोचा था कि काले से कू्रर चेहरे पर बड़ीबड़ी दाढ़ीमूंछें और गले में ढेरों रुद्राक्ष की मालाएं पहने कोई आदमी बैठा होगा. लेकिन यहां तो मामला एकदम उलटा था.

बहरहाल, तांत्रिक सोनू को प्रणाम कर के दोनों बैठ गईं. सुधा ने निशा का परिचय करा कर उस की समस्या बतानी चाही तो तांत्रिक सोनू ने अपना दायां हाथ उठा कर उसे रोकते हुए कहा, ‘‘देवी, अगर आप ही सब कुछ बता देंगी तो मेरी साधना किस काम आएगी? मुझे पता नहीं है क्या कि आजकल देवी किन हालात से गुजर रही हैं? मां की दवा के लिए भी अभी तक इंतजाम नहीं कर पाई हैं. रात के खाने की भी व्यवस्था करनी है. लेकिन अब चिंता की कोई बात नहीं है. आप मेरे यहां आ गई हैं, अब आप की सारी समस्याएं दूर हो जाएंगीं.’’

सोनू द्वारा अपने घर की स्थिति बताने से जहां निशा शरम से पानीपानी हो गई थी, वहीं वह उस की इस बात से काफी प्रभावित भी हुई. क्योंकि बिना कुछ बताए ही उस ने उस के बारे में सब कुछ जान लिया था. इस तरह पहली ही मुलाकात में वह उस की अंधभक्त बन गई. सोनू ने अंगुलियों पर कुछ गणना कर के कहा, ‘‘मैं नाम तो नहीं बताऊंगा, लेकिन तुम्हारे किसी अपने बहुत खास ने ही तुम्हारे परिवार पर ऐसा इल्म चलवाया है कि तुम दानेदाने को मोहताज हो जाओ. आज रात को मैं उस इल्म को कील दूंगा और फिर किसी दिन श्मशान पूजा कर के उस डाकिनी को भस्म कर दूंगा.’’

निशा मंत्रमुग्ध भाव से सोनू को देखती रही. उस ने होंठों ही होंठों में कुछ मंत्र पढ़े और निशा पर फूंक मारे. इस के बाद सुधा को बाहर भेज कर अपनी गद्दी के नीचे से 5 सौ रुपए का एक नोट निकाल कर निशा की ओर बढ़ाते हुए कहा, ‘‘लो मांजी के लिए दवाओं और आज के खानेपीने की व्यवस्था कर लेना. कल की कल देखी जाएगी.’’

‘‘नहीं, मैं आप के रुपए कैसे ले सकती हूं.’’

‘‘यह मेरा नहीं, मां का आदेश है. मां काली ने मुझे अभीअभी आदेश दिया है कि मैं तुरंत तुम्हारी मदद करूं. मैं मां का सेवक हूं, इसलिए मुझे उन की आज्ञा का पालन करना ही होगा. तुम नि:संकोच ये रुपए रख लो.’’ इस तरह मां के नाम पर सोनू ने निशा को 5 सौ रुपए का नोट लेने पर मजबूर कर दिया.

निशा रुपए ले कर घर आ गई. वह यह सोचसोच परेशान थी कि उस के घर की एकएक बात की जानकारी तांत्रिक सोनू को कैसे हो गई? मकान मालिक ने मकान खाली करने के लिए कहा था, यह बात भी उसे मालूम थी. अगले दिन स्वयं सोनू तांत्रिक निशा के घर आ पहुंचा. वह मां की दवाएं और कुछ सामान भी साथ लाया था. स्वयं को संस्कारी दिखाने के लिए आते ही उस ने निशा की मां के पांव छुए. न चाहते हुए भी निशा को सोनू तांत्रिक की मदद लेनी पड़ी. क्योंकि इस के अलावा उस के पास कोई उपाय भी नहीं था. इस के बाद सोनू निशा और उस के घर वालों की हर तरह से मदद करने लगा.

तंत्रमंत्र और पूजापाठ के नाम पर वह निशा को अपनी कोठी पर बुलाता. थोड़ी देर पूजापाठ कर के निशा से इधरउधर की बातें करने लगता. इस बातचीत में वह उस के घरपरिवार के प्रति चिंता व्यक्त करते हुए हमदर्दी दिखाने की कोशिश करता. निशा के मकान खाली करने की बात आई तो सोनू तांत्रिक ने मकान मालिक का बकाया अदा कर के निशा को रहने के लिए गली नंबर शून्य वाला अपना मकान दे दिया. सोनू से मिलने के बाद निशा और उस के घर वालों की मुसीबतें लगभग खत्म हो गईं. इस तरह उन की सभी समस्याओं का समाधान हो गया.

धीरेधीरे सोनू तांत्रिक ने निशा और उस के घर के हर सदस्य पर अपना वर्चस्व कायम कर लिया. घर में था ही कौन, मांबेटी और एक लड़का. निशा के उस घर में अब वही होता था, जो सोनू चाहता था. निशा के घर वालों को भी सोनू का उन के घर में दखल देना अच्छा लगता था. इस में वे अपनी शान भी समझते थे, क्योंकि सोनू तांत्रिक से उन के संबंध थे. सोनू तांत्रिक धनी तो था ही, इलाके में उस का काफी दबदबा भी था. तांत्रिक होने की वजह से लोग उस की इज्जत तो करते ही थे, डरते भी थे. लोग उस के आशीर्वाद के लिए उस के घर के चक्कर लगाते थे.

यही वजह थी कि निशा और उस के घर वाले सोनू तांत्रिक की कृपा पा कर स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहे थे. बड़ी होशियारी से सोनू तांत्रिक ने निशा के दिल में अपनी जगह बना ली थी. इस के बाद एक रात उस ने डाकिनी पूजा के नाम पर निशा को अपने घर बुलाया. निशा सोनू की कोठी पर जा पहुंची. थोड़ी देर बाद उस ने पूजा शुरू की. पूजा खत्म होने के बाद उस ने कहा कि उस ने उस डाकिनी को भस्म कर दिया है, जो उस के घर वालों को तकलीफ पहुंचाती थी. अब चिंता की कोई बात नहीं है. तथाकथित डाकिनी के खत्म हो जाने की बात पर निशा बहुत खुश हुई. पूजा खत्म होने के बाद सोनू ने निशा का हाथ अपने हाथों में ले कर कहा,

‘‘निशा, आज मैं तुम से अपने मन की एक ऐसी बात कहने जा रहा हूं, जिस का जवाब तुम्हें काफी सोचसमझ कर देना होगा.’’

हैरानी से निशा ने पूछा, ‘‘ऐसी कौन सी बात है महाराज? खैर, कोई भी बात हो, आप मुझे बताएं क्या, आदेश करें.’’

‘‘निशा, ऐसे मामलों में जोरजबरदस्ती या आदेश नहीं दिया जाता. यह सब प्रेम की भावना के अंतर्गत होता है. प्रेम में वह ताकत होती है, जो 1-2 क्या, हजारों डाकिनीशाकिनी के मुंह मोड़ सकती है. बहरहाल तुम इतना जान लो कि मैं तुम से प्रेम करता हूं और तुम से विवाह करना चाहता हूं.’’ सोनू ने निशा को फंसाने के लिए जाल फेंका.

सोनू की बात सुन कर निशा सन्न रह गई. उस के मुंह से सिर्फ इतना ही निकला, ‘‘महाराज, आप यह क्या कह रहे हैं. कहां आप और कहां मैं? आप में और मुझ में जमीन आसमान का अंतर है.’’

तंत्रमंत्र की दुकान चलाने वाले सोनू ने निशा को अपनी बाहों में ले कर कहा, ‘‘जब मेरा और तुम्हारा मिलन हो जाएगा तो सारे अंतर स्वयं ही खत्म हो जाएंगे. यह मिलन सभी भेदभाव खत्म कर देगा.’’

सम्मोहित सी निशा सोनू तांत्रिक की बातें सुनती रही. इतने बड़े तांत्रिक ने उसे इस योग्य समझा, यह जान कर वह खुद को बड़ी भाग्यशाली समझ रही थी. निशा की कमर में हाथ डाल कर सोनू उसे बैडरूम में ले गया, जहां उस ने वह सब पा लिया, जिस के लिए उस ने इतने बड़े चक्रव्यूह की रचना की थी. दरअसल, सोनू तांत्रिक न हो कर एक ऐसा धूर्त था, जो लोगों की अंधी आस्था की बदौलत उन का आर्थिक एवं शारीरिक शोषण करता था. लोगों को बेवकूफ बना कर वह दोनों हाथों से धन बटोर रहा था. इस के पीछे उस का कोई दोष नहीं था, लोग खुद ही उस के पास अपना शोषण कराने आते थे. अपनी खूनपसीने की कमाई उसे अय्याशी के लिए सौंप रहे थे. समस्या समाधान के नाम पर अपनी बहनबेटियों की इज्जत से खिलवाड़ करा रहे थे.

दुनिया कितनी भी आधुनिक क्यों न हो जाए, मंगल ग्रह पर पहुंच जाए या किसी नए ब्रह्मांड की खोज कर ले, पर इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि लोगों के मन में जो अंधविश्वास बैठा है, उसे निकालना आसान नहीं है. जब तक दुनिया में अंधविश्वास है, तब तक सोनू जैसे तथाकथित ढोंगी आम लोगों की बहूबेटियों की इज्जत से खेलते रहेंगे और तंत्रमंत्र का भय दिखा कर लूटते रहेंगे.’

सोनू तांत्रिक यानी सोनू शर्मा मूलरूप से हरियाणा के जिला जींद के रहने वाले चंद्रभान शर्मा का मंझला बेटा था. चंद्रभान धार्मिक प्रवृत्ति के शरीफ इंसान थे. वह कर्म को पूजा मानते थे. लेकिन उन के बेटे सोनू शर्मा की नीति उन के एकदम विपरीत थी. सोनू शुरू से ही अतिमहत्त्वाकांक्षी और आपराधिक प्रवृत्ति का युवक था. जल्दी ही उस की समझ में आ गया था कि दुनिया मूर्ख है. बस उसे मूर्ख बनाने वाला होना चाहिए. जो मजा लोगों को बेवकूफ बना कर कमाने में है, वह हाड़तोड़ मेहनत करने में नहीं है. उसे पता चल ही गया था कि अंधी आस्था को ले कर लोग अपना सर्वस्व तक लुटाने को तैयार रहते हैं.

और मजे की बात यह कि लुटने के बाद किसी को बताते भी नहीं. यह एक ऐसा कारोबार था, जिस में कुछ खास लगाना भी नहीं था, जबकि कमाई इतनी मोटी थी कि इस का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता. इस के अलावा लोग उसे पूजते भी भगवान की तरह हैं. यही सब देखसुन कर सोनू को इस कारोबार से अच्छा और कोई दूसरा कारोबार नहीं लगा. इस के बाद कुछ तंत्रमंत्र और टोटके सीख कर वह तांत्रिक बन गया. हरियाणा के कई शहरों में तंत्रमंत्र की छोटीमोटी ठगी करते हुए वह हिमाचल के जिला कांगड़ा जा पहुंचा. वहां उस का यह ठगी का धंधा तो चल ही निकला, वहीं उस की मुलाकात सोनिया से हुई.

सोनिया राजेश शर्मा की बेटी थी. उन का अच्छाखासा कारोबार था, लेकिन किन्हीं वजहों से उन के कारोबार में घाटा होने लगा तो उन की आर्थिक स्थिति कुछ खराब हो गई. सोनिया अपनी ऐसी ही किसी समस्या के समाधान के लिए सोनू तांत्रिक के पास गई तो पहली ही मुलाकात में वह सोनू की नजरों में ऐसी चढ़ी कि वह उसे किसी भी कीमत पर हासिल करने को तैयार हो गया. लेकिन राजेश शर्मा का परिवार एक संस्कारी परिवार था. वही संस्कार सोनिया में भी थे. इसलिए सोनू ने सोनिया को जो सब्जबाग दिखाए, उन का सोनिया पर कोई असर नहीं हुआ. तब उसे पाने के लिए सोनू ने उस से शादी का फैसला कर लिया और इस के बाद सोनिया के मातापिता की सहमति से दिसंबर, 2003 में उस ने सोनिया के साथ विवाह कर लिया.

समय के साथ दोनों 2 बच्चों के मातापिता बने, जिन में 8 साल का आदित्य और 6 साल की एलियन है. इस बीच सोनू हिमाचल के अलावा पंजाब के भी कई शहरों में अपने पांव जमाने की कोशिश करता रहा. कई शहरों के चक्कर लगाने के बाद उसे लुधियाना कुछ इस तरह पसंद आया कि वहां टिब्बा रोड पर उस ने तंत्रमंत्र की अपनी स्थाई दुकान खोल ली. यह सन् 2010 की बात है. लुधियाना का टिब्बा रोड इलाका हिंदूमुस्लिम और अमीरगरीब सभी तरह के लोगों से भरा है. जल्दी यहां सोनू का प्रभाव इस तरह बढ़ा कि लोग उस की पूजा करने लगे. यहां से कमाई दौलत से उस ने 2 मकान और एक आलीशान कोठी अपने लिए बनवा डाली.

यहां आने के बाद वह धीरेधीरे कांगड़ा में रह रही अपनी पत्नी सोनिया और बच्चों को लगभग भूल सा गया. अब वह कईकई महीनों बाद उन से मिलने कांगड़ा जाता था. लुधियाना में रहते हुए सोनू ने अपने लिए नई लड़की की तलाश शुरू कर दी, क्योंकि सोनिया अब उसे पुरानी लगने लगी थी. उसी बीच किसी शादी समारोह में उस की नजर स्टेज पर थिरकती निशा पर पड़ी तो वह उस पर मर मिटा. निशा एक आर्केस्ट्रा ग्रुप में डांस करती थी. निशा की एक ही झलक में सोनू उस का दीवाना बन गया था और हर कीमत पर उसे पा लेना चाहता था. सोनू तांत्रिक की एक आदत यह भी थी कि जो चीज उसे पसंद आ जाती थी, उसे वह हर हाल में पा लेना चाहता था.

पसंद आने के बाद उस ने निशा को हासिल करने के प्रयास शुरू किए तो सब से पहले उस ने उस के और उस के घर वालों के बारे में पता किया. सोनू को पता चला कि निशा के पिता प्रेमशाही ठाकुर की कई सालों पहले उस समय मृत्यु हो गई थी, जब बच्चे छोटेछोटे थे. निशा की मां ने मेहनतमजदूरी कर के किसी तरह बच्चों को पालपोस कर बड़ा किया था. युवा होने पर निशा ने छोटीमोटी नौकरी कर के परिवार का खर्च चलाने की कोशिश की. वह खूबसूरत थी, उस की अदाएं इतनी कातिल थीं कि कोई भी उसे देख कर पागल हो सकता था. इसीलिए जब आर्केस्ट्रा ग्रुप ने उसे अपने डांस ग्रुप में शामिल होने को कहा तो वह उस में मिलने वाली मोटी रकम के लालच में उस में शामिल होने के लिए खुशीखुशी तैयार हो गई थी.

अपनी खूबसूरती, मेहनत और अच्छे डांस की वजह से वह जल्दी ही प्रसिद्ध हो गई. आर्केस्ट्रा में डांस कर के निशा की इतनी कमाई हो जाती थी कि पूरा परिवार मजे से रह रहा था. सोनू को जब पता चला कि निशा ही अपने परिवार का एकमात्र सहारा है तो सब से पहले उस ने अपने प्रभाव से निशा को उस आर्केस्ट्रा से निकलवा दिया, जिस में वह डांस करती थी. काम छूटा तो निशा के घर की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई. अचानक राह चलते निशा के भाई को किसी मोटरसाइकिल वाले ने टक्कर मार दी, जिस से उस का एक हाथ टूट गया. मां पहले से ही बीमार रहती थी.

इस तरह निशा चारों ओर से टूट गई तो सोनू के इशारे पर ही मकान मालिक ने उस से मकान खाली करने के लिए कह दिया. इस के बाद अचानक सोनू तांत्रिक ने हीरो की भांति उस के जीवन में एंट्री मारी और अपने तंत्रमंत्र का नाटक कर के निशा और उस के घर की समस्याओं का समाधान कर दिया. इस से वह उन की नजरों में भगवान बन बैठा. बहरहाल, सोनू ने जैसा चाहा था, ठीक वैसा ही हुआ था. लगभग हर रात निशा सोनू के पहलू में होती थी. क्योंकि उसे पूरा विश्वास था कि सोनू उस से शादी करेगा. लेकिन यह उस की गलतफहमी थी. उस का यह भ्रम 13 मार्च, 2015 को बैसाखी वाले दिन तब टूटा, जब उसे पता चला कि सोनू किसी खूबसूरत लड़की के साथ चंडीगढ़ रोड स्थित मोहिनी रिसौर्ट में शादी कर रहा है.

यह जानकारी मिलने के बाद निशा के पैरों तले से जमीन खिसक गई. इस का सीधा मतलब यह था कि शादी का झांसा दे कर सोनू तांत्रिक ने 2 सालों तक उस की इज्जत से खेला था और अब मन भर जाने के बाद दूसरी लड़की से शादी कर रहा था. यह बात भला निशा कैसे बरदाश्त कर सकती थी. वह सीधे मोहिनी रिसौर्ट पहुंची, ताकि सोनू तांत्रिक की शादी रुकवा सके. लेकिन सोनू के गुर्गों ने उसे अंदर जाने नहीं दिया और बाहर से ही भगा दिया. सोनू और गीता चड्ढा का विवाह आराम से हो गया. जबकि अपने भाग्य पर आंसू बहाते हुए निशा घर लौट आई. वह घर तो लौट आई, लेकिन उसे चैन नहीं मिल रहा था. चैन मिलता भी कैसे, सोनू ने उस के साथ जो बेवफाई की थी, उसे वह भुला नहीं पा रही थी.

अगले दिन शाम को निशा को पता चला कि सोनू तांत्रिक अपनी नईनवेली दुलहन गीता के साथ गली नंबर 3 वाली कोठी में मौजूद है तो एक बार फिर हिम्मत कर के निशा उस से बात करने के लिए उस की कोठी पर जा पहुंची. इस बार सोनू से उस का सामना हो गया. उस ने हंगामा खड़ा करते हुए सोनू से पूछा, ‘‘तुम शादी का वादा कर के 2 सालों तक मेरे शरीर से खेलते रहे. जबकि अब शादी किसी और से कर ली. तुम ने यह ठीक नहीं किया. मैं ऐसा कतई नहीं होने दूंगी.’’

‘‘अब तो जो होना था, वह हो गया. मुझे जिस से शादी करनी थी, कर ली. अब तुम कर ही क्या सकती हो? मैं ने तुम से शादी का जो वादा किया था, वह वादा ही रहा. अगर मैं वादा करने वाली हर लड़की से शादी करने लगूं तो पता चला कि मैं हर साल शादी कर रहा हूं.’’ इस के बाद निशा को घूरते हुए बोला, ‘‘अच्छा यही होगा कि तुम चुपचाप यहां से चली जाओ. फिर कभी दिखाई भी मत देना, वरना मुझ से बुरा कोई नहीं होगा.’’

सोनू से अपमानित हो कर निशा घर तो आ गई, लेकिन उस के साथ जो छल हुआ था वह उसे पचा नहीं पा रही थी. काफी देर तक वह रोती रही. और जब मन का गुबार निकल गया तो उस ने तय किया कि वह सोनू जैसे ढोंगी और धोखेबाज को अवश्य सबक सिखाएगी. अगर उस ने उसे सबक न सिखाया तो वह उस जैसी न जाने कितनी लड़कियों की इसी तरह जिंदगी बरबाद करता रहेगा. दृढ़ निश्चय कर के निशा थाना बस्ती जोधेवाल पहुंची और थानाप्रभारी इंसपेक्टर हरपाल सिंह से मिल कर उन्हें अपनी आपबीती सुनाई.

हरपाल सिंह ने निशा की पूरी बात सुनने के बाद टिब्बा रोड पुलिस चौकी के इंचार्ज एएसआई हरभजन सिंह को आदेश दिया कि वह निशा के बयान के आधार पर सोनू तांत्रिक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर के तुरंत काररवाई करें. इस के बाद एएसआई हरभजन सिंह ने निशा के बयान के आधार पर 16 मार्च, 2015 को सोनू तांत्रिक के खिलाफ शादी का झांसा दे कर यौन शोषण करने और धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर के पूछताछ के लिए उसे पुलिस चौकी बुलवाया. लेकिन सफाई देने के लिए चौकी आने के बजाय सोनू गायब हो गया.

तब हरभजन सिंह ने हेडकांस्टेबल जगजीत सिंह जीता, कांस्टेबल लखविंदर सिंह, दविंदर सिंह और जसबीर सिंह की एक टीम बना कर सोनू की तलाश के लिए उस के पीछे लगा दिया. सोनू की तलाश चल ही रही थी कि अखबारों में छपी खबर पढ़ कर कांगड़ा में रह रही उस की पहली पत्नी सोनिया शर्मा भी लुधियाना आ पहुंची. उस ने पुलिस चौकी जा कर बयान ही नहीं दर्ज कराया, बल्कि सोनू से अपनी शादी और 2 बच्चे होने के प्रमाण भी दिए. सोनिया के बयान के आधार पर उस की ओर से भी सोनू के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया गया. फिर उसी दिन शाम को हेडकांस्टेबल जगजीत सिंह की टीम ने जालंधर बाईपास से सोनू तांत्रिक को उस समय गिरफ्तार कर लिया, जब वह बस से शहर छोड़ कर भागने के चक्कर में वहां पहुंचा था.

चौकी ला कर सोनू से पूछताछ की गई तो उस ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को स्वीकार कर लिया. उसे अदालत में पेश कर के साक्ष्य जुटाने के लिए एक दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया. रिमांड अवधि समाप्त होने पर 18 मार्च, 2015 को उसे पुन: मैडम प्रीतमा अरोड़ा की अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. 20 मार्च, 2015 को निशा का मैडिकल कराया गया. मैडिकल रिपोर्ट के अनुसार वह सहवास की आदी पाई गई. मैडम प्रीतमा अरोड़ा की अदालत में धारा 164 के तहत उस के बयान भी दर्ज किए गए.

निशा ने यहां भी वही बयान दिए, जो उस ने आपबीती में बताया था. उस का कहना था कि ऐसे ढोंगी अपराधियों को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए. ऐसे लोग लोगों की धार्मिक व कोमल भावनाओं को भड़का कर उन का शारीरिक और आर्थिक शोषण करते हैं. Hindi Crime Story

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित है, कथा में कुछ पात्रों के नाम बदले गए हैं.

True crime Story in Hindi : नाबालिग के यौन शोषण की कभी न खत्म होने वाली कहानी

True crime Story in Hindi : कहा जाता है- हरि अनंत हरि कथा अनंता वैसे ही समाज की आम भाषा में यह कहा जा सकता है – नाबालिक के यौन शोषण की कहानी  अनंत है. यह सच है कि इसके लिए सरकार ने नियम कायदे बना दिए हैं कानून बन चुका है. और जब बच्चों के साथ यौन शोषण करने वालों में कोई कोई पुलिस पकड़ में आता है तो चर्चा का सबब बन जाता है कि कैसा अनर्थ हो रहा है.कुल मिलाकर के यह बात दोहराई जाती है कि नाबालिग के यौन शोषण की कहानी अनंत है

आइए… आज इस रिपोर्ट में हम इस महत्वपूर्ण सामाजिक मसले पर ऐसे पक्ष उlद्घाटित कर रहे हैं जो आपको चौकाएंगे. दरअसल, बच्चों के शोषण की अनेक घटनाएं हो रही हैं ऐसे में इस महत्वपूर्ण मसले पर सामाजिक दृष्टिकोण से हर एक तरीके से रोक लगाने की आवश्यकता है. यहां यह बताना भी लाजिमी होगा कि 10 मासूम बच्चों में  सिर्फ 7 बच्चे यौन शोषण के आज भी शिकार हो रहे हैं और नाम मात्र के मामले ही सामने आ रहे हैं उसके अनुसार बच्चों के साथ दुष्कर्म करने वाले आसपास के परिजन परिवारिक इष्ट मित्र ही पाए गए हैं.

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इसलिए इसी रिपोर्ट के माध्यम से आपको सावधान करते हुए कुछ महत्वपूर्ण जानकारी दी जा रही है. जिसमें सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अगर हमारे परिवार में नन्हे बच्चे हैं तो हम जागरूक रहे, हमारी जागरूकता के बगैर बच्चों के साथ यौन शोषण संभव हो सकता है.

और नाबालिग की शादी कर दी!

ऐसे ही एक सनसनीखेज मामले में छत्तीसगढ़  के जिला रायगढ़ के थाना  लैलूंगा की पुलिस द्वारा एक बालिका को परवरिश व घरेलू काम कराने के नाम पर सुन्दरगढ़ (ओडिशा) ले जाकर उसकी जबरजस्ती युवक के साथ शादी कराने वाले आरोपी पिता-पत्र को ओडिशा से पकड़ लिया गया है. हमारे  संवाददाता को  जांच अधिकारी लक्ष्मण प्रसाद पटेल ने बताया  – बालिका की मां  दिनांक 15 मई को थाना लैलूंगा में  रिपोर्ट दर्ज कर बताई कि रोजी मजदूरी का काम कर अपने बच्चों का पालन पोषण कर ती है. करीब चार माह पहले सुन्दरगढ़, ओडिशा में रहने वाला ईश्वर महाकुल  उसकी पंद्रह वर्षीय बेटी रानी (काल्पनिक नाम)  को अपने साथ ले गया और वादा किया कि बालिका घर का काम काज करेगी, मैं उसे बेटी की तरह रख कर पढ़ाऊंगा.

भरोसा कर महिला  ने अपने परिवारवालों से सलाह लेकर जान परिचित होने के कारण उस व्यक्ति के साथ बेटी को भेज दिया. कुछ माह बाद अपने रिस्तेदारो के साथ अपनी बेटी को देखने सुंदरगढ़ ओडिशा गई तो  देखा ईश्वर महाकुल के घर में बालिका से बहुत ज्यादा काम कराया जा रहा था, यही नही नाबालिक बालिका की शादी  ईश्वर महाकुल ने अपने बेटे गणेश बारीक के साथ जबरजस्ती करा दी है.

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यह सब देख कर बालिका की मां भौचक्र रह गई. सबसे बड़ा अपराध यह की बालिका के  परिवारवालों को कथित विवाह की जानकारी भी नहीं दी गई . और जब महिला ने अपनी बेटी को अपने साथ लेकर अपने घर लैलूंगा जाऊंगी कहा तो उसे झगड़ा कर भगा दिया गया . अंततः महिला ने बेटी का शोषण किये जाने के संबंध में थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई. पुलिस के समक्ष यह मामला आया तो जिला रायगढ़ पुलिस ने मामला पंजीबद्ध कर लिया.
जांच अधिकारी लक्ष्मण प्रसाद पटेल ने बताया आरोपी पिता-पुत्र  आरोपी ईश्वर बारीक पिता चक्रधर बारीक उम्र 50 वर्ष उसके पुत्र गणेश बारीक उम्र 21 साल दोनों निवासी ग्राम कुराई महकुलपारा थाना तलसरा जिला सुन्दरगढ़ ओडिशा को हिरासत में लेकर उनके बयान लिए गए और गंभीर अपराध पाए जाने पर मामला पंजीबद्ध किया गया. प्रकरण में साक्ष्य के आधार पर आरोपियों के विरूद्ध धारा 9, 10 बालविवाह प्रतिषेध अधिनियम, 4, 8 पास्को एक्ट जोड़ी गई है. True crime Story in Hindi

Bihar Crime News : मौत का सौदागर – लालच ने बनाया हत्यारा

Bihar Crime News : 25नंवबर, 2020 को देव दिवाली का त्यौहार होने के कारण एक ओर जहां रतलाम के लोग अपने आंगन में गन्ने से बने मंडप तले शालिग्राम और तुलसी का विवाह उत्सव मना रहे थेवहीं दूसरी ओर शहर भर के बच्चे दीवाली की बची आतिशबाजी खत्म करने में लगे थे. चारों तरफ धूमधड़ाके का माहौल था. लेकिन इस से अलग औद्योगिक थाना इलाके में कब्रिस्तान के पास बसे राजीव नगर में युवक बेवजह ही सड़क पर यहां से वहां चक्कर लगाते हुए कालोनी के एक तिमंजिला मकान पर नजर लगाए हुए थे.

 

यह मकान गोविंद सेन का था. लगभग 50 वर्षीय गोविंद सेन का स्टेशन रोड पर अपना सैलून था. उन का रिश्ता ऐसे परिवार से रहा जिस के पास काफी पुश्तैनी संपत्ति थी. पारिवारिक बंटवारे में मिली बड़ी संपत्ति के कारण उन्होंने राजीव नगर में यह आलीशान मकान बनवा लिया था. इस की पहली मंजिल पर वह स्वयं 45 वर्षीय पत्नी शारदा और 21 साल की बेटी दिव्या के साथ रहते थे. जबकि बाकी मंजिलों पर किराएदार रहते थे. उन की एक बड़ी बेटी भी थीजिस की शादी हो चुकी थी.

इस परिवार के बारे में आसपास के लोग जितना जानते थेउस के हिसाब से गोविंद सिंह की पत्नी घर पर अवैध शराब बेचने का काम करती थी. जबकि उन की बेटी को खुले विचारों वाली माना जाता था. लोगों का मानना था कि दिव्या एक ऐसी लड़की है जो जवानी में ही दुनिया जीत लेना चाहती थी. उस की कई युवकों से दोस्ती की बात भी लोगों ने देखीसुनी थी. पिता के सैलून चले जाने के बाद वह दिन भर घर में अकेली रहती थी. मां शारदा और बेटी दिव्या से मिलने आने वालों की कतार लगी रहती थी. मोहल्ले वाले यह सब देख कर कानाफूसी करने के बाद हमें क्या करना’ कह कर अनदेखी करते देते थे.

25 नवंबर की रात जब चारों ओर देव दिवाली की धूम मची हुई थी. राजीव नगर की इस गली मे घूम रहे युवक कोई साढे़ बजे के आसपास गोविंद के घर के सामने से गुजरे और सीढ़ी चढ़ कर ऊपर चले गए. सामने के मकान से देख रहे युवक ने जानबूझ कर इस बात पर खास ध्यान नहीं दिया. जबकि उन का चौथा साथी गोविंद के घर जाने के बजाय कुछ दूरी पर जा कर खड़ा हो गया. रात कोई सवा बजे थकाहारा गोविंद दूध की थैली लिए घर लौटा. गोविंद सीढि़यां चढ़ कर ऊपर पहुंच गया. इस के कुछ देर बाद वे तीनों युवक उन के घर से निकल कर नीचे आ गए.

जिस पड़ोसी ने उन्हें ऊपर जाते देखा थासंयोग से उस ने तीनों को वापस उतरते भी देखा तो यह सोच कर उस के चेहरे पर मुसकराहट तैर गई कि घर लौटने पर उन युवकों को अपने घर में मौजूद देख कर गोविंद सेन की मन:स्थिति क्या रही होगी. तीनों युवकों ने नीचे खड़ी दिव्या की एक्टिवा स्कूटी में चाबी लगाने की कोशिश कीलेकिन संभवत: वे गलत चाबी ले आए थे. इसलिए उन में से एक वापस ऊपर जा कर दूसरी चाबी ले आयाजिस के बाद वे दिव्या की एक्टिवा पर बैठ कर चले गए.

26 नवंबर की सुबह के बजे रतलाम में रोज की तरह सड़कों पर आवाजाही शुरू हो गई थी. लेकिन गोविंद सेन के घर में अभी भी सन्नाटा पसरा हुआ था. कुछ देर में उन के मकान में किराए पर रहने वाली युवती ज्वालिका अपने कमरे से बाहर निकल कर दिव्या के घर की तरफ गई. दिव्या की हमउम्र ज्वालिका एक प्राइवेट अस्पताल में नौकरी करती थी. गोविंद की बेटी भी एक निजी कालेज से बीएससी की पढ़ाई के साथ नर्सिंग का कोर्स कर रही थी. महामारी के कारण आजकल क्लासेस बंद थींइसलिए वह अपनी बड़ी बहन की कंपनी में नौकरी करने लगी थी.

ज्वालिका और दिव्या एक ही एक्टिवा इस्तेमाल करती थीं. जब जिस को जरूरत होतीवही एक्टिवा ले जाती. लेकिन इस की चाबी हमेशा गोविंद के घर में रहती थी. सो काम पर जाने के लिए एक्टिवा की चाबी लेने के लिए ज्वालिका जैसे ही गोविंद के घर में दाखिल हुईचीखते हुए वापस बाहर आ गई. उस की चीख सुन कर दूसरे किराएदार भी बाहर आ गए. उन्हें पता चला कि गोविंद के घर के अंदर गोविंदउस की पत्नी और बेटी की लाशें पड़ी हैं. घबराए लोगों ने यह खबर नगर थाना टीआई रेवल सिंह बरडे को दे दी.

कुछ ही देर में वह अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंच गए और मामले की गंभीरता को देखते हुए इस तिहरे हत्याकांड की खबर तुरंत एसपी गौरव तिवारी को दी. कुछ ही देर में एसपी गौरव तिवारी एएसपी सुनील पाटीदारएफएसएल अधिकारी अतुल मित्तल एवं एसपी के निर्देश पर माणकचौक के थानाप्रभारी अयूब खान भी मौके पर पहुंच गए. तिहरे हत्याकांड की खबर पूरे रतलाम में फैल गईजिस से मौके पर जमा भारी भीड़ जमा हो गई. मौकाएवारदात की जांच में एसपी गौरव तिवारी ने पाया कि शारदा का शव बिस्तर पर पड़ा थाजिस के सिर में गोली लगी थी.

उन की बेटी दिव्या की लाश किचन के बाहर दरवाजे पर पड़ी थी. दिव्या के हाथ में आटा लगा हुआ था और आधे मांडे हुए आटे की परात किचन में पड़ी हुई थी. इस से साफ हुआ कि पहले बिस्तर पर लेटी हुई शारदा की हत्या हुई होगी. गोली की आवाज सुन कर दिव्या बाहर आई होगी तो हत्यारों ने उसे भी गोली मार दी होगी. गोविंद की लाश दरवाजे के पास पड़ी थीइस का मतलब उस की हत्या सब से बाद में हुई थी. उन के पैरों में जूते थे और हाथ में दूध की थैली.

पुलिस ने अनुमान लगाया कि हत्यारे हत्या करने के बाद भागना चाहते होंगेलेकिन भागते समय ही गोविंद घर लौट आएजिस से उन की भी हत्या कर दी गई होगी. पड़ोसियों ने गोविंद को बजे घर आते देखा था. उस के बाद लोगों को घर से बाहर जाते देखा. इस से यह साफ हो गया कि शारदा और दिव्या की हत्या बजे के पहले की गई होगी. जबकि गोविंद की हत्या बजे हुई होगी. पुलिस ने जांच शुरू की तो गोविंद सेन के परिवार के बारे में जो जानकरी निकल कर सामने आईउस से पुलिस को शक हुआ कि हत्याएं प्रेम प्रसंग या अवैध संबंध को ले कर की गई होंगी.

लेकिन गोविंद के एक रिश्तेदार ने इस बात को पूरी तरह गलत करार देते हुए बताया कि गोविंद ने कुछ ही समय पहले 30 लाख रुपए में गांव की अपनी जमीन बेची थी. दूसरा घटना के दिन ही शारदा और दिव्या ने डेढ़ लाख रुपए की ज्वैलरी की खरीदारी की थीजो घर में नहीं मिली. इस कारण पुलिस लूट के एंगल से भी जांच करने में जुट गई. चूंकि मौके पर संघर्ष के निशान नहीं थे और हत्यारे गोविंद की बेटी की एक्टिवा भी साथ ले गए थे. इस से यह साफ हो गया कि वे जो भी रहे होंगेपरिवार के परिचित रहे होंगे और उन्हें गाड़ी की चाबी रखने की जगह भी मालूम थी.

हत्यारों ने वारदात का दिन देव दिवाली का सोचसमझ कर चुना. इसलिए आतिशबाजी के शोर में किसी ने भी पड़ोस में चलने वाली गोलियों की आवाज पर ध्यान नहीं दिया था. मामला गंभीर था इसलिए आईजी राकेश गुप्ता ने मौके का निरीक्षण करने के बाद हत्यारों की गिरफ्तारी पर 30 हजार रुपए के ईनाम की घोषणा कर दी.

वहीं एसीपी गौरव तिवारी ने 10 थानों के टीआई और लगभग 60 पुलिसकर्मियों की एक टीम गठित कर दीजिस की कमान  थानाप्रभारी अयूब खान को सौंपी गई. इस टीम ने इलाके के पूरे सीसीटीवी कैमरे खंगालेइस के अलावा घटना के समय राजीव नगर में स्थित मोबाइल टावर के क्षेत्र में सक्रिय 70 हजार से अधिक फोन नंबरों की जांच शुरू की.

दिव्या को एक बोल्ड लड़की के रूप में जाना जाता था. उस की कई लड़कों से दोस्ती थी. कुछ दिन पहले उस ने एक अलबम मैनूं छोड़ के…’ में काम किया था. इस अलबम में भी उस की एक दुर्घटना में मौत हो जाती है. पुलिस ने उस के साथ काम करने वाले युवक अभिजीत बैरागी से भी पूछताछ की लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला. घटना वाले दिन से ले कर चंद रोज पहले तक दिव्या ने जिन युवकों से फोन पर बात की थीउन सभी से पुलिस ने पूछताछ की. गोविंद सेन की एक्टिवा देवनारायण नगर में लावारिस खड़ी मिली. तब पुलिस ने वहां भी चारों ओर लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज जमा कर हत्यारों का पता लगाने की कोशिश शुरू की.

जिस में दोनों जगहों के फुटेज से संदिग्ध युवकों की पहचान कर ली गईजिन्हें घटना से पहले इलाके में पैदल घूमते देखा गया था. और बाद में वही युवक दिव्या की एक्टिवा पर जाते हुए सीसीटीवी कैमरे में कैद हुए. जाहिर है हर बड़ी घटना के आरोपी भले ही कितनी भी दूर क्यों न भाग जाएंवे घटना वाले शहर में पुलिस क्या कर रही है. इस बात की जानकारी जरूर रखते हैंयह बात एसपी गौरव तिवारी जानते थे. इसलिए उन्होंने जानबूझ कर जांच के दौरान मिले महत्त्वपूर्ण सुराग को मीडिया के सामने नहीं रखा था.

दरअसलजब पुलिस सीसीटीवी के माध्यम से हत्यारों के भागने के रूट का पीछा कर रही थी तभी देवनारायण नगर में आ कर दोनों संदिग्धों ने दिव्या की एक्टिवा छोड़ दी थी. वहां पहले से एक युवक स्कूटर ले कर खड़ा थाजिसे ले कर वे वहां से चले गए. जबकि स्कूटर वाला युवक पैदल ही वहां से गया था. इस से एसपी को शक था कि तीसरा युवक स्थानीय हो सकता हैजो आसपास ही रहता होगा. बात सही थीवह अनुराग परमार उर्फ बौबी थाजो विनोबा नगर में रहता था.

इंदौर से बीटेक करने के बाद भी उस के पास कोई काम नहीं था. वह इस घटना में शामिल था और पुलिस की गतिविधियों पर नजर रखे हुए था. इसलिए जब उसे पता चला कि पुलिस को उस का कोई फुटेज नहीं मिला तो वह लापरवाही से घर से बाहर घूमने लगा. जिस के चलते नजर गड़ा कर बैठी पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर पूछताछ की. उस से मिली जानकारी के दिन बाद ही पुलिस ने दाहोद (गुजरात) से लाला देवल निवासी खरेड़ी गोहदा और वहीं से रेलवे कालोनी रतलाम निवासी गोलू उर्फ गौरव को गिरफ्तार कर लिया. उन से पता चला कि पूरी घटना का मास्टरमांइड दिलीप देवले हैजो खरेड़ी गोहद का रहने वाला है.

यही नहीं पूछताछ में यह भी साफ हो गया कि जून 20 में दिलीप देवल ने ही अपने ताऊ के बेटे सुनीत उर्फ सुमीत चौहान निवासी गांधीनगररतलाम और हिम्मत सिंह देवल निवासी देवनारायण के साथ मिल कर डा. प्रेमकुंवर की हत्या की थी. जिस से पुलिस ने सुनीत और हिम्मत को भी गिरफ्तार कर लिया. इन से पता चला कि तीनों हत्याएं लूट के इरादे से की गई थीं. दिलीप के बारे में पता चला कि वह रतलाम में ही छिप कर बैठा है. पुलिस को यह भी पता चला कि वह मिडटाउन कालोनी में किराए के मकान में रह रहा है. और पुलिस तथा सीसीटीवी कैमरे से बचने के लिए पीछे की तरफ टूटी बाउंड्री से आताजाता है.

यह जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने पीछे की तरफ खाचरौद रोड पर उसे घेरने की योजना बनाईजिस के चलते दिसंबर, 2020 को वह पुलिस को दिख गया. पुलिस टीम ने उसे ललकारा तो दिलीप ने पुलिस पर गोलियां चलानी शुरू कर दींजवाबी काररवाई में पुलिस ने भी गोलियां चलाईं. कुछ ही देर में मास्टरमाइंड दिलीप मारा गया. इस प्रकार असंभव से लगने वाले तिहरे हत्याकांड के सभी आरोपियों को पुलिस ने महज दिन में सलाखों के पीछे पहुंचा दिया. इस में टीम प्रभारी अयूब खान और एसआई सहित पुलिसकर्मी भी घायल हुए.

लौकडाउन में घर में सैलून चलाना महंगा पड़ा गोविंद को गोविंद सेन पिछले 22 साल से स्टेशन रोड पर सैलून चलाते थे. लौकडाउन के दौरान वह चोरीछिपे अपने घर बुला कर लोगों की कटिंग करते रहे. दिलीप भी उन से कटिंग करवाने घर जाया करता था. जहां उस ने गोविंद की अमीरी देख कर उन्हें शिकार बनाने की योजना बनाई थी. दिलीप के साथियों ने बताया कि शारदा और दिव्या की हत्या करने की योजना तो वे पहले से ही बना कर आए थे. लेकिन अंतिम समय में गोविंद भी अपनी दुकान से लौट कर आ गए थे. इसलिए उन की भी हत्या करनी पड़ी. आरोपियों ने बताया कि उस के घर से उन्हें 30 लाख रुपए मिलने की उम्मीद थी. लेकिन उन्हें केवल 20 हजार नकद और कुछ जेवर ही मिले थे.

दिलीप अपने कारनामों का कोई सबूत नहीं छोड़ना चाहता था. इसलिए लूट के दौरान सामने वाले की सीधे हत्या कर देता था. दिलीप अब तक एक ही तरीके से हत्याएं कर चुका थाइसलिए पुलिस उसे साइकोकिलर मानती थी. दिलीप के साथियों का कहना था कि पुलिस से बचने के लिए हत्या तो करनी ही पड़ेगी मर्डर इज मस्ट. Bihar Crime News