डायरेक्टर की कपटी मोहब्बत में फंसी ईशा आलिया – भाग 1

22वर्षीया रिया कुमारी उर्फ ईशा आलिया झारखंड फिल्म इंडस्ट्री की जानीमानी एक्ट्रैस थी. उस की यूट्यूब की दुनिया में अलग पहचान थी. उस ने यह शोहरत, यह मुकाम यूं ही हासिल नहीं कर लिया था, इस के लिए उस ने अपने आप को पूरी शिद्दत से ढाला था.

टीवी पर प्रसारित होने वाले सीरियल के कलाकारों के चेहरों के हावभाव, उन की अदाएं और संवाद बोलने के अंदाज को रिया घंटों टीवी के सामने बैठ कर देखा करती थी, फिर आदमकद शीशे के सामने खड़ी हो कर वह उन के जैसा अभिनय करने की कोशिश करती.

रिया की यह कोशिश एक दिन रंग लाई. उसे एक भोजपुरी एलबम में काम करने का मौका मिल गया, उस एलबम से वह इतना मशहूर हुई कि उसे एक के बाद एक नागपुरी, भोजपुरी, खोरठा और बांग्ला भाषा की एलबमों में काम मिलता चला गया. वह झारखंड फिल्म इंडस्ट्री का जानामाना चेहरा बन गई.

रिया बचपन से ही शोख, चंचल और खूबसूरत थी. जब उस पर यौवन की बहार आई तो उस का अंगअंग गदरा उठा. रूपरंग निखर आया. रिया इंद्र की अप्सरा जैसी नजर आने लगी.

फिल्म इंडस्ट्री में नाम का भी बहुत महत्त्व होता है. बौलीवुड के मशहूर कलाकार हरीभाई नाम बदल कर संजीव कुमार तो यूसुफ खान अपना नाम बदल कर दिलीप कुमार के नाम से फेमस हुए. रिया कुमारी को अपना नाम भी अटपटा लगा, इसलिए उस ने अपना नाम रिया कुमारी से बदल कर ईशा आलिया रख लिया. झारखंड फिल्म इंडस्ट्री में वह ईशा आलिया के नाम से मशहूर हो गई.

रांची के टैगोर हिल एरिया में स्थित अपने फ्लैट में 27 दिसंबर, 2022 को ईशा आलिया बहुत खुश नजर आ रही थी. वह अपनी भोजपुरी एलबम के गाने पर नृत्य कर रही थी. उस के सामने सोफे पर बैठी उस की 2 साल की बेटी परी अपनी मां को थिरकते देख कर खिलखिलाती हुई ताली बजा रही थी. ईशा आलिया नृत्य करने में इतनी खो गई थी कि उसे पति प्रकाश अलबेला के ड्राइंगरूम में आने का पता ही नहीं चला.

प्रकाश अलबेला ईशा आलिया के थिरकते बदन की लोच और बलखाती कमर को मंत्रमुग्ध सा देख रहा था. उस की नजरें ईशा के ऊपर से हट नहीं पा रही थीं कि उस बच्ची की नजर प्रकाश पर चली गई तो वह मचल कर चिल्ला पड़ी, ‘‘पापाऽऽ…’’

बेटी की यह आवाज कान में पड़ते ही ईशा आलिया के थिरकते कदमों पर एकदम ब्रेक लग गए. उस ने चौंक कर बेटी की नजरों का पीछा किया तो चौंक पड़ी. दरवाजे के पास प्रकाश अलबेला खड़ा मुसकरा रहा था.

ईशा आलिया के चेहरे पर तनाव पैदा हो गया. उस ने भौंहें सिकोड़ीं और पैर पटकती हुई बेटी की तरफ बढ़ गई. उस ने बेटी को गोद में उठाया और दरवाजे की तरफ बढ़ी. वह दरवाजे तक पहुंचती, उस से पहले ही प्रकाश ने लपक कर उस की बाजू पकड़ ली.

‘‘मेरा हाथ छोड़ो प्रकाश,’’ ईशा तीखे स्वर में बोली.

‘‘अभी तक नाराज हो ईशा?’’ प्रकाश खुशामदी वाले लहजे में बोला, ‘‘आई एम सौरी यार, मुझे तुम्हारी बात मान लेनी चाहिए थी.’’

ईशा ने उसे घूरा. बोली कुछ नहीं.

‘‘गुस्सा थूक दो ईशा, मैं तुम्हें आज ही कोलकाता ले चलने को राजी हूं.’’

‘‘सच कह रहे हो?’’ ईशा ने उसे शक भरी नजरों से देख कर कहा.

‘‘परी की कसम.’’ प्रकाश उस नन्ही बच्ची के सिर पर हाथ रख कर बोला, ‘‘हम तीनों आज रात को ही कोलकाता चलेंगे.’’

ईशा मुसकरा पड़ी, ‘‘मुझे यकीन है कि तुम परी की झूठी कसम नहीं खा सकते.’’

प्रकाश ने परी को ईशा की गोद से ले कर उस के गाल का एक चुंबन लिया. फिर ईशा को बाजू से पकड़ कर सोफे तक ले आया, ‘‘बैठो, मैं होटल से खाना पैक करवा कर लाया हूं, साथ बैठ कर खाना खाएंगे.’’

‘‘होटल से क्यों लाए, मैं बना लेती.’’

‘‘तुम नाराज थी,’’ प्रकाश गंभीर स्वर में बोला, ‘‘तुम्हें मनाना इतना आसान नहीं होता, भूखी सो जाती तो मुझे दुख होता.’’

‘‘जब इतना सोचते हो तो मुझे बारबार नाराज क्यों करते हो. अगर तुम मेरी बात पहले ही मान जाते तो क्या बिगड़ जाता?’’

‘‘ईशा, मेरे हाथ में बड़े बजट की फिल्म है, उसे जल्द पूरा कर के परदे पर लाने की जिम्मेदारी भी मुझ पर है. मैं अभी काम से ब्रेक ले कर तुम्हें कोलकाता नहीं ले जाना चाहता था.’’

‘‘प्रकाश, काम तो तुम्हें और मुझे जिंदगी भर करना है, इस के लिए मैं या तुम अपनी निजी जिंदगी से समझौता नहीं कर सकते. तुम्हें मालूम है न, मैं कितने महीनों से अपने मम्मीपापा से मिलने नहीं गई थी. तुम्हें कोलकाता चलने को कह रही थी, तुम थे कि नाम ही नहीं ले रहे थे.’’

‘‘अब तो मान गया हूं मेरी प्यारी ईशा आलिया.’’ प्रकाश ने ईशा के दोनों गालों पर हाथ रख कर प्यार से मुसकराते हुए कहा, ‘‘चलो, अब खाना खा लो. ठंडा हो जाएगा.’’

‘‘तो हम कोलकाता चल रहे हैं न?’’ ईशा ने जैसे पूरा यकीन कर लेना चाहा.

‘‘कह तो दिया बाबा, अब क्या बच्चे की जान लोगी.’’ प्रकाश ने मासूमियत से कहा तो ईशा खिलखिला कर हंस पड़ी. प्रकाश भी हंसने लगा. थोड़ी देर बाद वह होटल से लाया हुआ खाना खा रहे थे.

28 दिसंबर, 2022 की बात है. सुबह की धूप पूरी तरह खिल चुकी थी. हावड़ा जिले के थाना बगनान के एसएचओ धूप में बैठे सुबह का अखबार पढ़ रहे थे, तभी एक कार थाने के गेट से अंदर आई. कार को थाने की बाउंड्री में प्रवेश कर के रुकते हुए एसएचओ ने देखा तो उन की उत्सुकता यह जानने के लिए पैदा हो गई कि कार से कौन शख्स सुबहसुबह यहां आया है.

कार का दरवाजा खोल कर जो व्यक्ति बाहर आया, वह प्रकाश अलबेला था. ईशा आलिया का पति. वह उसे जानते थे कि वह फिल्म डायरेक्टर है.

प्रकाश अलबेला की गोद में 2 साल की बेटी परी थी, जो प्रकाश से चिपक कर गहरी नींद में सो रही थी. प्रकाश अलबेला के चेहरे पर बदहवासी छाई हुई थी, वह बुरी तरह घबराया हुआ था. तेजतेज चलता हुआ वह एसएचओ के सामने आ गया.

उस के हावभाव तथा चेहरे की बदहवासी से ही एसएचओ ने अनुमान लगा लिया कि मामला गड़बड़ है. उन्होंने प्रकाश अलबेला की तरफ प्रश्नसूचक नजरों से देख कर पूछा, ‘‘क्या हुआ, आप इतना घबराए हुए क्यों हैं?’’

‘‘सर, आज सुबह 3 बदमाशों ने मेरी पत्नी ईशा आलिया को गोली मार दी है.’’

‘‘ओह!’’ एसएचओ चौंकते हुए बोले, ‘‘कहां हैं आप की पत्नी?’’

‘‘वह मर चुकी है सर, उस की लाश मैं कार की डिक्की में ले कर आया हूं.’’

एसएचओ कुछ पल के लिए सोच नहीं सके कि क्या करें. कुछ ही क्षणों में खुद को संभाल कर वह प्रकाश अलबेला से मुखातिब हुए, ‘‘चलिए, कार की डिक्की खोलिए.’’

संजय मिश्रा की ‘वध’ में क्यों अहम है ‘मनोहर कहानियां’ मैगजीन का रोल, जानें निर्देशक से

नौ दिसंबर को प्रदर्शित होने जा रही संजय मिश्रा व नीना गुप्ता के अभिनय से सजी थ्रिलर फिल्म ‘‘वध’’ की कहानी काफी रोचक है. इसमें अपने बेटे की वजह से परेशानियां झेल रहे बुजुर्ग शिक्षक शंभूनाथ मिश्रा (संजय मिश्रा) को हालातों के चलते मजबूरन प्रजापति पांडे (सौरभ सचदेव) का वध करना पड़ता है, उसके बाद क्या होता है, यह तो फिल्म देखने पर पता चलेगा. लेकिन इस फिल्म में शिक्षक मिश्रा ही नहीं पुलिस के अफसर भी ‘‘दिल्ली प्रेस पत्र प्रकाशन’’ की मशहूर पत्रिका ‘‘मनोहर कहानियां’’ पढ़ते हुए और इस पत्रिका को लेकर चर्चा करते नजर आएंगे.

जब इस फिल्म का टीजर, ट्रेलर के अलावा पोस्टर जारी किया गया था, तभी से सवाल उठ रहे थे कि इसमें अभिनेता संजय मिश्रा ‘मनोहर कहानियां’ पत्रिका पढ़ते हुए क्यों नजर आ रहे हैं? आज जब हमने फिल्म देखी,तो हमें काफी कुछ समझ में आ गया. लेकिन हमारे दिमाग में सवाल उठा कि आखिर इस फिल्म में किसी अन्य पत्रिका की बजाय ‘‘मनोहर कहानियां’’ को ही निर्माता निर्देशक व लेखक ने क्यों चुना?
इस सवाल का जवाब पाने के लिए हमने फिल्म के एक लेखक व निर्देशक जसपाल सिंह संधू से बात की.

लेखक, निर्देशक व अभिनेता जसपाल संधू का नाम सिनेमा जगत में नया नही है. वह इससे पहले अंग्रेज, लव पंजाब, लाहोरिया, वेख बरातन चालियां, भलवान सिंह, गोलक बुगनी बैंक ते बटुआ, अफसर जैसी पंजाबी फिल्मों का निर्माण तथा ‘अंग्रेज’ और ‘उड़ा ऐडा’ जैसी पंजाबी फिल्मों में अभिनय कर चुके हैं.

अब जसपाल सिंह संधू ने अब राजीव बरनवाल के साथ मिलकर हिंदी फिल्म ‘‘वध’’ का लेखन व निर्देशन करने के साथ साथ इसमें विधायक का अहम किरदार भी निभाया है. इस फिल्म को कोविड के ही दौर में सभी नियमों का पालन करते हुए फिल्माया गया. कुछ सीन बाद में फिल्माए गए. पहले इस फिल्म का नाम ‘ग्वालियर’ था. लेकिन ‘मनोहर कहानियां’ को इस फिल्म के साथ जोड़ने के साथ ही फिल्म का नाम बदलकर ‘‘वध’’ कर दिया गया.

हमने जसपाल सिंह संधू से सवाल किया कि उन्होने इस फिल्म में ‘मनोहर कहानियां’ पत्रिका को ही क्यो जोड़ा?

पूरी फिल्म देखने के बाद ‘मनोहर कहानियां’ पत्रिका अपने आप में एक किरदार की तरह मौजूद नजर आती है?

इस पर जसपाल सिंह संधू ने कहा-‘‘देखिए, फिक्शन में हमें एक बड़ा ब्रांड चाहिए था. हमें ‘मनोहर कहानियां’ से बड़ा ब्रांड नजर ही नहीं आया. जब पानी खरीदने जाते हैं, तो हम ‘बिसलरी’ ही खरीदते हैं. तो फिर हम अपनी इतनी बड़ी फिल्म के लिए किसी अन्य नाम पर समझौता कैसे कर सकते थे.

हमने अपनी फिल्म की शूटिंग कोविड काल में ग्वालियर में शुरू कर दी थी. उस दौरान हमने काफी शूटिंग कर ली थी. पर तब तक हमें ‘मनोहर कहानियां’ पत्रिका का नाम उपयोग करने की इजाजत नहीं मिली थी. इसलिए हमने कुछ सीन रोक रखे थे. जब हमें प्रकाशक से इजाजत मिली, तब हमने उन सीन्स को फिल्माया.

इसमें से पुलिस स्टेशन में पुलिस वाले को ‘मनोहर कहानियां’ पत्रिका देते हुए संजय मिश्रा के जो संवाद वाला लंबा पूरा सीन आपने फिल्म में देखा है,वह भी हमने बाद में फिल्माया है. हम इतना कह सकते हैं कि फिल्म में ‘मनोहर कहानियां’ जोड़ने से हम फिल्म ‘वध’ की कहानी को कहने में रोचकता पैदा करने में सफल रहे हैं.’’

‘‘लव फिल्मस’’ प्रस्तुत फिल्म ‘‘वध’’ का निर्माण लव रंजन, अंकुर गर्ग,जतिन चैधरी,मयंक जोहरी, नीरज रुहिल ने किया है. फिल्म के निर्देशक जसपाल सिंह संधू व राजीव बरनवाल हैं.
फिल्म को अभिनय से संवारने वाले कलाकार हैं- संजय मिश्रा, नीना गुप्ता, मानव विज, सौरभ सचदेव, दिवाकर कुमार, तान्या लाल, उमेश कौशिक, अभितोष सिंह राजपूत, प्रांजल पटेरिया व अन्य.

टीवी एक्ट्रेस सुसाइड केस : वैशाली की बेबसी- भाग 4

बताते हैं कि इस का राहुल पर कोई असर नहीं हुआ, उलटे उस ने दिशा को तलाक देने की बात कही. इस पर दिशा ने तत्काल अपना पाला बदल लिया. दिशा भी व्यापारी परिवार की बेटी थी, इसलिए किस रास्ते पर जाने से फायदा और किस पर नुकसान, इस का बोध करने में उस ने देर नहीं की.

पति को बचाने के लिए दिशा ने चली चाल

दिशा को हर हालत में अपना परिवार बचाना था, इसलिए यह इस रिश्ते में राहुल को बेगुनाह और वैशाली को मर्दखोर लड़की साबित करने पर उतर आई. इस के लिए उस ने कालोनी की महिलाओं में यह बात फैला दी कि राहुल के न चाहते हुए भी वैशाली उस के पीछे पड़ी है. इस से वैशाली का कालोनी में बाहर निकलना तक मुश्किल हो गया.

बेटी को परेशान देख कर बलवंत सिंह ने राहुल के पिता और अपने पुराने दोस्त नरेश से बात की जिस पर नरेश नवलानी ने बलवंत सिंह को भरोसा दिलाया कि अब राहुल उन की बेटी की खुशियों के बीच नहीं आएगा.

अवैध रिश्ते में पुरुष को सब से बड़ा डर अपनी पत्नी का होता है. लेकिन यह डर राहुल को नहीं था, क्योंकि दिशा को अपना परिवार बचाने की चिंता थी. इसलिए वह समझदारी दिखाते हुए पति को सही और वैशाली को गलत साबित करने लगी थी. पिता की चेतावनी के बाद भी राहुल वैशाली का पीछा नहीं छोड़ रहा था. इस से वैशाली काफी परेशान थी.

परेशान तो वैशाली के मातापिता भी थे, लेकिन उन्हें राहुल के पिता नरेश नवलानी की बात पर भरोसा भी था. मगर सब ठीक होने के बजाए वैशाली की जिंदगी लगातार

मुश्किल में पड़ती जा रही थी. यहां तक कि कालोनी में लोगों की चुभती निगाहों से बचने के लिए उस ने घर से निकलना तक कम कर दिया था.

इतना सब होने के बाद भी राहुल अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा था. दरअसल, पत्नी दिशा राहुल के पक्ष में थी, इसलिए वह वैशाली जैसी खूबसूरत युवती को अपने जाल से आजाद नहीं होने देना चाहता था.

वैशाली और उस का परिवार समझ चुका था कि राहुल आगे भी कोई हरकत कर सकता है. इसलिए कुछ समय पहले वैशाली की मुलाकात फिर मैट्रीमोनियल साइट पर मिले मितेश गौर से हुई. मूलरूप से अहमदाबाद निवासी मितेश कैलिफोर्निया की एक कंपनी में उच्च पद पर काम करता था.

यह मुलाकात भी रंग लाई, जिस के चलते मितेश के संग वैशाली का रिश्ता तय हो गया. राहुल फिर कोई विवाद न कर दे, इसलिए वैशाली की इस सगाई को पूरी तरह गुप्त रखा गया.

बलवंत ठक्कर परिवार ने निर्णय लिया कि पहले वैशाली और मितेश कोर्ट मैरिज करेंगे, इस के बाद इस रिश्ते को सार्वजनिक कर धूमधाम से दोनों की शादी का समारोह आयोजित कर दिया जाएगा.

20 अक्तूबर को मितेश और वैशाली की इंदौर एडीएम कोर्ट में शादी होने वाली थी, जिस के लिए मितेश हफ्ते भर पहले इंदौर आने वाला था, लेकिन वैशाली यहां एक गलती फिर कर गई.

शादी से कुछ रोज पहले वैशाली ने सोशल मीडिया पर मितेश के संग अपनी सगाई की एक फोटो स्टोरी पोस्ट कर दी, जिस की खबर लगते ही राहुल ने मितेश से संपर्क कर उसे अपने और वैशाली के रिश्ते के बारे में बताते हुए वैशाली से शादी न करने की सलाह दी.

मितेश ने इस बारे में वैशाली से बात की, जिसमें वैशाली ने अपना पक्ष रखा, जिससे संतुष्ट हो कर मितेश राहुल की धमकी के बाद भी शादी के लिए इंदौर आने पर राजी हो गया.

दूसरी तरफ जब राहुल ने देखा कि सब कुछ जानने के बाद भी मितेश वैशाली से शादी करने जा रहा है, तब उस ने वैशाली को धमकी देनी शुरू कर दी कि अगर उस ने उसे छोड़ कर मितेश से शादी की तो वह उसे समाज में मुंह दिखाने लायक नहीं छोड़ेगा.

इस धमकी से वैशाली काफी डर गई थी. दूसरे मितेश को शादी के लिए अब तक इंदौर पहुंच जाना था, लेकिन वह किसी कारण से तय तारीख पर इंदौर नहीं आया.

इस से वैशाली को लगने लगा कि अभिनंदन की तरह मितेश भी उस से शादी न करने का मन बना चुका है. इस से वह बेहद परेशान हो गई.

वैशाली जो कभी चमकदमक की दुनिया में जीती थी. सड़कों पर हजारों प्रशंसक उस की झलक देखने को बेताब रहते थे, उसे अपनी जिंदगी में ऐसे जिल्लत भरे वक्त की उम्मीद कभी नहीं रही थी. इसलिए उस ने दिशा और राहुल की जुगलबंदी से परेशान हो कर मौत का रास्ता चुन लिया.

घटना के संबंध में एसीपी मोतीउर रहमान का कहना है कि मृतका के सुसाइड नोट के आधार पर राहुल एवं उस की पत्नी दिशा को आरोपी बनाया गया है. सुसाइड नोट से साफ है कि आरोपी मृतका को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताडि़त कर रहा था.

मृतका के सुसाइड नोट के अलावा डायरी में भी ऐसे ही संकेत मिले थे. आरोपी ने अपने मोबाइल और आईपैड का डाटा डिलीट कर दिया था, जिसे पुलिस रिकवर कराने की कोशिश करेगी. इस में नए तथ्य मिलने पर उस के खिलाफ और भी धाराएं बढ़ सकती हैं. द्य

टीवी एक्ट्रेस सुसाइड केस : वैशाली की बेबसी – भाग 3

पिता का समर्पण और बेटी की मेहनत दोनों ही रंग लाई, जिस के चलते वैशाली टीवी सीरियल की दुनिया में काफी नाम कमा चुकी थी. इस से उस का ज्यादातर वक्त मुंबई में कटता था, लेकिन साल 2020 में कोरोना का प्रकोप बढ़ने के बाद वैशाली मुंबई छोड़ कर अपने घर इंदौर आ गई थी.

राहुल के घर वालों से थे पारिवारिक संबंध

बलवंत सिंह के पड़ोस में नरेश नवलानी अपनी पत्नी, बेटा राहुल और बहू दिशा के साथ रहते हैं. नरेश भी प्लाईवुड के बड़े व्यापारी हैं. रालामंडल में उन की बड़ी दुकान है. बेटा राहुल पिता की मदद करने के अलावा एक लैमिनेट्स फर्म भी चलाता था.

बलवंत सिंह और नरेश नवलानी एक ही कारोबार से जुड़े थे, इसलिए उन के बीच व्यापारिक रिश्ते के अलावा निजी तौर पर गहरी दोस्ती थी. इसलिए पड़ोसी होने के कारण दोनों परिवारों का एकदूसरे के यहां काफी आनाजाना था.

लगभग 6 फीट लंबे, गोरेचिट्टे राहुल को मौडलिंग का शौक था. वह मौडलिंग में अपना करिअर बनाना चाहता था. मगर पिता नरेश नवलानी को यह सब पसंद नहीं था, इसलिए मौडल बनने की अपनी इच्छा मार कर राहुल पिता का कारोबार संभालने लगा था.

राहुल वैशाली को बचपन से जानता था. वैशाली का उस के घर में खूब आनाजाना था. दोनों में बातचीत भी खूब होती थी, लेकिन उस समय न राहुल के मन में वैशाली के प्रति कुछ था और न वैशाली के मन में राहुल के लिए. समय आने पर पिता नरेश ने अपनी बराबरी का घर देख कर राहुल की शादी कोटा निवासी दिशा के साथ कर दी.

राहुल और दिशा की पटरी अच्छी बैठी, जिस से जल्द ही राहुल 2 बच्चों का पिता बन गया. चूंकि ठक्कर परिवार से राहुल के परिवार के बेहद पुराने और नजदीकी संबंध थे, इसलिए वैशाली राहुल की शादी में भी शामिल हुई और बच्चों के जन्म पर आयोजित उत्सवों में भी उस ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया. इस से वैशाली के साथ दिशा की भी अच्छी बनने लगी थी.

सब कुछ ठीक चल रहा था. इस घटना की नींव तो उस रोज पड़ी, जब अचानक ही वैशाली का चयन स्टार प्लस पर प्रसारित होने वाले सीरियल ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ में लीड रोल के लिए हो गया.

यह सीरियल 2015 में शुरू हुआ, जिस के चलते वैशाली ठक्कर की देशभर में पहचान बन गई. लोग उस को सुंदर और सफल टीवी अभिनेत्री के रूप में जानने लगे. वैशाली का अचानक ही छोटे परदे पर छा जाना राहुल के लिए चौंकाने वाला था. इस के बाद उसे और कई सीरियलों में अच्छे रोल मिल गए.

मौडलिंग में करिअर बनाना चाहता था राहुल

वास्तव में लंबे समय तक साथसाथ रहने के बाद भी राहुल ने कभी वैशाली की सुंदरता पर गौर नहीं किया था. वैशाली अभिनेत्री बन कर लोगों के दिलों पर राज करने लगी तो उस की आंखें खुलीं. दूसरे राहुल खुद भी मौडलिंग के क्षेत्र में अपना करिअर बनाना चाहता था, इसलिए उसे लगने लगा कि वह भी मौडल बन सकता है.

इसलिए राहुल ने अपनी दबी हुई इच्छा को फिर से जीवित कर वैशाली से मदद लेने का फैसला कर लिया, लेकिन अब वैशाली के पास पहले की तरह समय कहां था. अनेक सीरियलों में काम के चलते वह ज्यादातर समय मुंबई में ही रहने लगी थी, लेकिन वैशाली की जिंदगी का बुरा वक्त उसे इंदौर ले आया.

हुआ यह कि 2020 कोरोना महामारी के चलते सभी शूटिंग रोक दी गईं, इसलिए वैशाली परिवार के साथ समय बिताने इंदौर आ गई. लौकडाउन लंबा चला, इसलिए कई दूसरे कलाकारों की तरह वैशाली के करिअर की गाड़ी भी पटरी से उतर गई.

राहुल ने फांस लिया वैशाली को

इंदौर में रहते हुए वैशाली का राहुल के घर में आनाजाना फिर से पहले की तरह बढ़ गया था. वैशाली का इस परिवार में उस समय से ही काफी आनाजाना था, जब दिशा शादी हो कर आई भी नहीं थी, इसलिए दिशा ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया.

इसी बीच अपनी फिटनैस और सुंदरता बनाए रखने के लिए वैशाली ने जिम जाना शुरू कर दिया. इस का पता लगने पर राहुल भी उसी जिम में जाने लगा, जिस से दोनों की रोज मुलाकात होने लगी.

यहीं राहुल ने मौडल बनने का अपना सपना पूरा करने में वैशाली की मदद मांगी तो वैशाली बड़े ही आराम से उस की मदद करने को राजी हो गई. इतना ही नहीं, उस ने जल्द ही मुंबई के कुछ फोटोग्राफर से राहुल की बात भी करवा दी.

राहुल काफी शातिर था. वह जानता था कि वैशाली लगभग 27 साल की हो चुकी है, इसलिए उस से नजदीकी हासिल करना ज्यादा मुश्किल नहीं है.

उस ने धीरेधीरे वैशाली में अपनी रुचि दिखानी शुरू कर दी. इतना ही नहीं, जब कभी काम के सिलसिले में वैशाली मुंबई और दूसरे शहर जाती तो मौडलिंग में अपनी संभावनाएं तलाशने के लिए राहुल भी उस के साथ जाने लगा.

चूंकि दोनों के परिवार एकदूसरे के काफी नजदीक थे. इसलिए खुद राहुल की पत्नी दिशा को भी दोनों के यूं अकेले बाहर आनेजाने पर कोई ऐतराज नहीं था. नतीजा यह निकला की राहुल ने धीरेधीरे वैशाली की नजदीकी हासिल कर ली. वैशाली जिस ने कभी ऐसा नहीं सोचा था, वह राहुल के फैलाए जाल में फंस गई.

27 की उम्र पार कर चुकी युवती के मन में प्रेमी को ले कर उत्सुकता और रोमांच दोनों ही होना स्वभाविक है. फिर वैशाली तो ऐसी दुनिया का हिस्सा थी, जहां ऐसी नजदीकियां बहुत ही सामान्य बात मानी जाती हैं. लेकिन इस के बावजूद महिदपुर जैसे छोटे से कस्बे के संस्कार उस के खून में घुले हुए थे, इसलिए समय के साथ वैशाली शादीशुदा और 2 बच्चों के पिता राहुल को ही अपना सब कुछ समझने लगी.

राहुल के साथ अपने संबंध को वह अंतिम सांस तक निभाना चाहती थी, इसलिए वैशाली राहुल के प्रति काफी गंभीर हो चुकी थी. लेकिन कोरोना के बाद वैशाली का करिअर पटरी से उतर चुका था, इसलिए मातापिता उस के विवाह के बारे में सोचने लगे.

यह बात राहुल को पता चली तो राहुल और वैशाली दोनों ही किसी तरह आपस में शादी करने की योजना बनाने लगे. लेकिन दोनों ही यह भूल गए थे कि राहुल की पत्नी दिशा दूधपीती बच्ची नहीं है जो अपने पति की एक जवान युवती के साथ नजदीकी का मतलब न समझ सके. इसलिए धीरेधीरे दिशा ने पति के साथ वैशाली की दोस्ती का विरोध करना शुरू कर दिया.

इतना ही नहीं, जब राहुल नहीं माना तो एक रोज दिशा अपने दोनों बच्चों को ले कर अपने मायके कोटा में जा कर रहने लगी. राहुल और दिशा के इस विवाद के बारे में राहुल के पिता नरेश को जानकारी हुई तो वैशाली के साथ अपने बेटे के प्रेम संबंध की बात भी उन तक पहुंच गई.

नरेश नवलानी सुलझे हुए आदमी हैं, इसलिए उन्होंने किसी तरह दिशा को वापस बुलवाने के बाद राहुल को सीधे चेतावनी दे दी कि वह वैशाली से शादी करने की बात भूल जाए, इसी में उस की भलाई है. वरना वह उसे अपनी सारी जायजाद से बेदखल कर सारा कुछ दिशा और उस के दोनों बच्चों को सौंप देंगे.

राहुल की वजह से टूटा था वैशाली का रिश्ता

पिता की इस धमकी से राहुल डर गया. उस ने वैशाली से शादी करने में मजबूरी जाहिर की तो वैशाली ने उस से ब्रेकअप कर अपना रास्ता बदल लिया. राहुल चाहता था कि शादी नहीं हो सकती तो क्या हुआ, वैशाली बिना शादी के भी उस की बन कर रह सकती है. लेकिन वैशाली को उधार का प्यार स्वीकार नहीं था, इसलिए उस ने राहुल से पूरी तरह दूरी बना ली.

इसी दौरान वैशाली की मुलाकात मैट्रीमोनियल साइट पर केन्या में रहने वाले भारतीय मूल के डा. अभिनंदन सिंह से हुई. दोनों में बातचीत हुई और रिश्ता पसंद आने पर अप्रैल 2021 में अभिनंदन के साथ वैशाली की सगाई हो गई. लेकिन सगाई के एक महीने बाद ही वैशाली और अभिनंदन का रिश्ता टूट गया.

इस रिश्ते के टूटने के साथ ही दोनों परिवारों को खुल कर वैशाली और राहुल के बीच चल रहे प्रेम प्रसंग की जानकारी लग गई. दरअसल, हुआ यह कि जैसे ही वैशाली की सगाई की बात राहुल को पता चली, उस ने वैशाली साथ अपने नजदीकी रिश्ते की जानकारी अभिनंदन को दे दी.

इतना ही नहीं, उस ने वैशाली के संग अपने ऐसे वीडियो और फोटो अभिनंदन को भेज दिए, जिन्हें देख कर अभिनंदन क्या कोई भी युवक अपनी राय बदल सकता था.

अभिनंदन ने भी यही किया, जिस से दोनों की शादी टूट गई. दिशा को लगता था कि वैशाली की शादी के बाद सब ठीक हो जाएगा. लेकिन जब राहुल ने वैशाली की सगाई तुड़वा दी तो उस के इस कदम से पत्नी दिशा भड़क गई. उसे लगने लगा कि राहुल वैशाली को नहीं छोड़ पाएगा. इसलिए उस ने अपने पति से साफ कह दिया कि अगर वह उस का संग चाहता है तो उसे वैशाली को भूलना होगा.

टीवी एक्ट्रेस सुसाइड केस : वैशाली की बेबसी- भाग 2

लौकडाउन में वैशाली मुंबई से इंदौर आ गई थी, इसलिए 2020 में आखिरी सीरियल में काम करने के बाद नए सीरियल में मौका नहीं मिलने से वह अपने करिअर को ले कर परेशान थी.

खुद को व्यस्त रखने के लिए वैशाली ज्यादातर समय अपने भाई नीरज के साथ वीडियो गेम खेलते हुए काटती थी. लेकिन उस रोज खाना खाने के बाद कमरे में गई वैशाली काफी देर तक बाहर नहीं आई तो रात लगभग साढ़े 12 बजे जब मां और पिता दोनों किसी गंभीर मुद्दे पर चर्चा में व्यस्त थे, नीरज बहन के साथ वीडियो गेम खेलने उस के कमरे में पहुंचा तो वहां का नजारा देख कर जोरों से चीख पड़ा.

वैशाली की मौत पर पुलिस अधिकारी भी हुए हैरान

बेटे की चीख सुन कर मौके पर पहुंचे बलवंत सिंह और उन की पत्नी अनु वैशाली को फांसी पर लटका देख कर मानो पत्थर के हो गए. होश आने पर घर वालों ने आननफानन में वैशाली को फंदे से उतारा और उसे ले कर अस्पताल की तरफ भागे, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी. ठक्कर परिवार की शान समझी जाने वाली वैशाली दुनिया को अलविदा कह कर दूर जा चुकी है.

सुबह के 7 बजे थे. हमेशा की तरह सुबह होते ही अपनी ड्यूटी पर पहुंचने वाले तेजाजी नगर थाने के टीआई आर.डी. कानवा थाने जाने के लिए तैयार हो रहे थे कि तभी उन्हें साईंधाम कालोनी में रहने वाली टीवी एक्ट्रैस वैशाली ठक्कर द्वारा फांसी लगाने की खबर मिली.

मामला हाईप्रोफाइल था, इसलिए चंद पलों में ही साईंधाम कालोनी की सुबह पुलिस की गाडि़यों के सायरन से गूंज उठी. दलबल को ले कर टीआई आर.डी. कानवा के मौके पर पहुंचते ही कालोनी में वैशाली द्वारा आत्महत्या कर लेने की खबर फैल गई.

वैशाली शहर के एक उद्योगपति की बेटी और चर्चित टीवी एक्ट्रैस थी, इसलिए टीआई कानवा द्वारा मिली सूचना पर एसीपी (आजाद नगर) मोतीउर रहमान (आईपीएस) भी मौके पर पहुंच गए.

श्री रहमान के नेतृत्व में टीआई कानवा की टीम ने मौके की बारीकी से जांच की, जिस में वैशाली द्वारा अपने पीछे छोड़ा गया 8 पेज का सुसाइड नोट बरामद कर लिया गया.

कमरे में वैशाली की डायरी भी मिली, जिसे देखते ही एसीपी समझ गए कि इस के कुछ पन्ने फाड़े गए हैं इसलिए पुलिस टीम डायरी से फाड़े गए पन्नों की तलाश में जुट गई जो कुछ ही देर में वैशाली के बाथरूम में लगे कवर्ड में टुकड़ों के रूप में मिले.

उन पन्नों की इबारत मरने के बाद भी वैशाली दुनिया से छिपाना चाहती थी, इस से एसीपी मोती उर रहमान के सामने यह बात कांच की तरह साफ हो चुकी थी कि इन फटे पन्नों की इबारत में ही इस घटना की कहानी छिपी हो सकती है. इसलिए इन टुकड़ों के अलावा पुलिस ने मौके से वैशाली का मोबाइल और आईपैड भी बरामद कर लिया. इस के बाद शव का पंचनामा बना कर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया.

इस दौरान एसीपी रहमान ने न केवल वैशाली द्वारा लिखा सुसाइड नोट पढ़ डाला, बल्कि वैशाली के मातापिता और भाई से शुरुआती पूछताछ भी कर ली.

वैशाली के लंबेचौड़े सुसाइड नोट का लब्बोलुआब यह था कि उस ने अपनी मौत के लिए पड़ोस के बंगले में रहने वाले प्लाईवुड व्यापारी नरेश नवलानी के इकलौते बेटे राहुल नवलानी और उस की पत्नी दिशा नवलानी को जिम्मेदार ठहराया था.

वैशाली के घर वाले भी राहुल और दिशा को जिम्मेदार बता रहे थे. लेकिन वैशाली ने रात लगभग साढ़े 12 बजे फांसी लगाई थी, जबकि परिवार ने घटना के 7 घंटे बाद पुलिस को जानकारी दी थी. इसलिए पुलिस को अगला कदम उठाने से पहले कई तथ्यों को जांचना जरूरी था.

फिर भी बात हाथ से न निकल जाए, इसलिए टीआई कानवा अपनी टीम ले कर वैशाली के पड़ोस में रहने वाले राहुल नवलानी के घर जा पहुंचे. लेकिन तब तक राहुल का पूरा परिवार घर में ताला लगा कर फरार हो चुका था.

चोर की दाढ़ी में तिनका, इस कहावत का पूरा अर्थ एसीपी मोती उर रहमान भली प्रकार जानते थे, इसलिए सुसाइड नोट में क्या लिखा है, इस की जानकारी बाहर आने से पहले राहुल के परिवार सहित फरार हो जाने से वह समझ गए कि वैशाली के सुसाइड नोट में कुछ न कुछ सच्चाई अवश्य है.

राहुल और उस की पत्नी की तलाश में जुटी पुलिस

वैशाली ठक्कर सेलिब्रिटी थी. इसलिए मामले की गंभीरता को देखते हुए डीसीपी जोन-1 अमित तोलानी के अलावा खुद कमिश्नर इंदौर हरिनारायण चारी मिश्र भी मौके पर पहुंच गए. पुलिस पूछताछ में घर वालों ने खुल कर राहुल और उस की पत्नी दिशा पर वैशाली को प्रताडि़त करने का आरोप लगाया.

कालोनी वालों ने तभी दबे स्वर में इन आरोपों के सही होने की तरफ इशारा किया. इस से एसीपी रहमान ने टीआई कानवा को राहुल और दिशा को खोज निकालने के निर्देश दे दिए.

इन की तलाश में पुलिस की 2 टीमें मुंबई और जयपुर के लिए रवाना कर दी गईं, जबकि टीआई कानवा अपने मुखबिरों के जरिए राहुल की लोकेशन स्थानीय स्तर पर तलाश करने लगे. क्योंकि वह जानते थे कि कई बार शातिर अपराधी नाक के नीचे छिप कर पुलिस को चकमा देने की कोशिश करता है.

वास्तव में टीआई कानवा का सोचना सही साबित हुआ, जिस के चलते चौथे दिन पुलिस ने राहुल को इंदौर में ही उस के एक रिश्तेदार के घर से गिरफ्तार कर लिया.

पूछताछ में राहुल अपने ऊपर लगे आरोपों को गलत बताता रहा, लेकिन पुलिस ने उसे अदालत में पेश कर 4 दिन की रिमांड पर ले लिया. इस दौरान उस से गहराई से पूछताछ की गई, जिस में वैशाली आत्महत्या मामले की कहानी इस प्रकार सामने आई—

बलवंत सिंह ठक्कर मूलरूप से उज्जैन जिले में महिदपुर के रहने वाले हैं. इन का प्लाईवुड और सनमाइका का बड़ा कारोबार है, जिस के लिए इन्होंने अपनी एक फैक्ट्री इंदौर के पालदा में लगा रखी है.

बलवंत कई साल पहले पत्नी अनु, बेटी वैशाली और बेटे नीरज के साथ इंदौर में आ कर बस गए थे. वैशाली बचपन से ही प्रतिभाशाली थी. बेटी को अभिनय का शौक देख कर पिता ने यह शौक पूरा करने के लिए उसे हर तरह की सुविधा मुहैया करवा रखी थी.

टीवी एक्ट्रेस सुसाइड केस : वैशाली की बेबसी – भाग 1

इंदौर के तेजाजी नगर थाना इलाके में स्थित साईंधाम कालोनी के आलीशान बंगलों में एक बंगला बलवंत सिंह ठक्कर का भी है. इस कालोनी के लगभग सभी परिवार शहर के चर्चित चेहरे हैं. ऐसे में अगर बलवंत सिंह ठक्कर परिवार की चर्चा बाकी सब की चर्चाओं पर बीस साबित हो तो तय है कि ठक्कर परिवार में कुछ तो खासियत थी, जो दूसरों के पास नहीं. ऐसा ही था और वह खासियत थी बलवंत सिंह की बेटी वैशाली. वैशाली यानी स्टार प्लस के चर्चित टीवी सीरियल ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ की संजना और ‘ससुराल सिमर का’ सुपरहिट सीरियल की चर्चित खलनायिका अंजलि भारद्वाज.

लगभग 20 साल की उम्र से ही छोटे परदे पर अपनी खूबसूरती और कला की चमक बिखेरने वाली वैशाली की देश भर में पहचान बन चुकी थी. इसलिए लोग बलवंत सिंह के परिवार को विशेष तवज्जो देते थे.

इस में सब से बड़ी भूमिका वैशाली की थी, जिस के सौम्य रूप और चेहरेमोहरे में आकर्षण भरा पड़ा था. यूं तो वैशाली जहां भी रही, जब भी रही, चाहे वो उस का बचपन हो, किशोर उम्र हो या फिर जवानी, हमेशा ही अपने आसपास की भीड़ में आकर्षण का केंद्र रही है.

शायद यही कारण था कि उसे अपनी खूबसूरती का भान सही उम्र में सही वक्त पर हो गया था. खूबसूरती के साथ युवती में योग्यता और वजनदारी भी हो तो वह अपनी पर्सनैलिटी को अपनी ताकत बना लेती है.

वैशाली के पास यह गुण था, इसलिए उस ने किशोर उम्र से ही अभिनय की दुनिया में किस्मत आजमाने का फैसला कर लिया था. वैशाली की यह मेहनत रंग लाई, जिस के चलते सब से पहले 2013 में स्टार प्लस पर प्रसारित होने वाले सीरियल ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ में उसे लीड रोल के लिए चुना गया.

सीरियल में वैशाली ने संजना की भूमिका निभाई जो दर्शकों में, खासकर युवा वर्ग में बहुत पसंद की गई और देखते ही देखते वैशाली छोटे परदे की बड़ी स्टार बन गई.

पहले ही सीरियल की सफलता के बाद सीरियल निर्माताओं ने वैशाली के दरवाजे पर लाइन लगानी शुरू कर दी. उस ने एक के बाद एक कई सीरियलों में अपने दमदार अभिनय और खूबसूरती की छटा बिखेरी.

वैशाली साहसी भी कम नहीं थी. इसलिए उस ने करिअर के शुरुआती दौर में नेगेटिव रोल करने से भी परहेज नहीं किया. ‘ससुराल सिमर का’ सीरियल में उस ने अंजलि भारद्वाज की नेगेटिव भूमिका निभाई, जिस के लिए वैशाली को बेस्ट एक्ट्रैस इन नेगेटिव रोल का ‘गोल्डन पैलेट’ अवार्ड भी दिया गया. इस के अलावा वैशाली ने ‘सुपर सिस्टर्स’, ‘विष या अमृत’, ‘मनमोहिनी’, ‘लाल इश्की’, ‘रक्षाबंधन’ आदि सीरियलों में महत्त्वपूर्ण रोल अदा किए.

जाहिर सी बात है कि वैशाली जैसी एक्ट्रैस का साईंधाम कालोनी में रहना आसपास के लोगों को गर्व की बात लगती थी. इसलिए पत्नी अनु, बेटे नीरज और एक्ट्रैस बेटी वैशाली की मौजूदगी से कालोनी में बलवंत सिंह का बंगला सब के लिए उत्सुकता का विषय रहता था.

एक उद्योगपति की बेटी थी वैशाली ठक्कर

15 अक्तूबर, 2022 की शाम का समय था. बलवंत सिंह के बंगले में रोज की तरह सब कुछ अपनी गति से चल रहा था. बलवंत सिंह का सनमाइका और प्लाईवुड का काफी बड़ा कारोबार है. इसलिए पालदा स्थित अपनी फैक्ट्री से आमतौर पर वह रात में देर से ही घर वापस आ पाते थे.

लेकिन 4 दिन बाद 20 अक्तूबर को उन की लाडली वैशाली की शादी होने वाली थी. इसलिए इन दिनों वह शाम ढलते ही घर वापस आ जाते थे.

उस दिन भी शाम को बलवंत सिंह घर पहुंच कर पत्नी अनु के साथ बैठ कर बेटी की शादी की चर्चा कर रहे थे. हालांकि इस शादी के लिए उन्हें कोई ज्यादा भागदौड़ करने की जरूरत नहीं थी. क्योंकि उन का होने वाला दामाद मितेश गौर 1-2 दिन में कैलिफोर्निया से इंदौर पहुंचने वाला था.

वैशाली की 4 दिन बाद होनी थी शादी

20 अक्तूबर को वैशाली और मितेश इंदौर के एडीएम के समक्ष उपस्थित हो कर कोर्ट मैरिज करने वाले थे. इस के लिए एडीएम कोर्ट में रजिस्ट्रैशन भी करवा लिया गया था. दोस्तों, रिश्तेदारों को बेटी की शादी की दावत देने का प्रोग्राम कोर्ट मैरिज होने के बाद में तय किया जाना था.

‘‘वैशाली कहां है,’’ घर आने के बाद काफी देर रात तक बेटी के दिखाई न देने पर बलवंत सिंह ने पत्नी से पूछा.

‘‘कहां होगी, अपने कमरे में है. आजकल तो उस ने घर से निकलना ही बंद कर दिया है.’’ पत्नी ने कहा.

‘‘क्या करें, आगे बढ़ कर एक्शन लेने  पर अपनी ही बदनामी होगी. फिर नरेश ने भरोसा दिलाया है कि इस बार ऐसा कुछ नहीं होगा, जिस से हम परेशानी में पड़ें.’’ बलवंत सिंह बोले.

‘‘आप अपने दोस्त नरेश के ही भरोसे बैठे रहना. उन के बेटेबहू का मुंह देखो, कैसे चलता है. नीरज बता रहा था कि राहुल ने 1-2 दिन पहले वैशाली को फिर धमकी दी है कि वो उस की शादी नहीं होने देगा. कुछ रोज पहले उस ने वैशाली को अपने घर बुला कर उस के संग गलत करने की कोशिश भी थी.’’ पत्नी अनु ने कहा.

‘‘नीरज कहां है?’’ पत्नी के मुंह से बेटे की बात सुन कर बलवंत ने पूछा.

‘‘बाहर गया है, आता ही होगा,’’ अनु पति की बात का जवाब दे रही थी कि तभी बेटा नीरज भी आ गया. जिस ने पूछने पर पिता को वह सब बता दिया, जो राहुल की धमकी के बारे में वैशाली ने उसे बताया था.

नीरज की बात सुन कर बलवंत गंभीर हो गए. लेकिन बात बेटी की बदनामी की थी, इसलिए यह सोच कर अपने मन को समझा लिया कि सब ठीक हो जाएगा.

जिस घर में 4 दिन बाद बेटी की शादी हो, वहां खुशियां आंगन में चहकती हैं. लेकिन हालात कुछ ऐसे थे कि अपनी नामदार बेटी की शादी चोरों की तरह करना बलवंत सिंह की मजबूरी बन गई थी. इसलिए शुभ अवसर के दरवाजे पर आ कर खड़े हो जाने के बाद भी दीवारों के अंदर खामोशी लगातार पसरी हुई थी.

परिवार में 2 बहनें हों तो उन की आपस में खूब बनती है, लेकिन बहनें 2 न हों तो भाईबहन ही आपस में दोस्त बन जाते हैं. इसलिए नीरज की वैशाली से खूब बनती थी. वैशाली भी अपने मन की ऐसी हर बात जो आमतौर पर लड़कियां केवल अपनी बहन या सहेली से शेयर करती हैं, नीरज से शेयर कर लेती थी.

चकाचौंध की जिंदगी बड़ी जालिम होती है. एक बार जो इस चकाचौंध में पड़ गया वो अंधेरे में जीने की बात सोच कर भी डरता है. वैशाली इसी दौर से गुजर रही थी.

टीवी एक्ट्रेस सुरभि तिवारी : भंवर में फंसी जिंदगी – भाग 3

दिल्ली पहुंचते ही सुरभि की ननदों और सास की प्रताड़ना फिर शुरू हो गई. ननदें सुरभि को मोटी कह कर ताने मारने लगीं. पतली होने के लिए फास्टिंग करने का दबाव बनाने लगीं. जैसेतैसे कुछ महीने बीत गए. प्रवीण का 7 जनवरी, 2020 को जन्मदिन आने वाला था.

सास ने सुरभि से कहा, ‘‘अच्छी साड़ी पहन कर तैयार हो जाओ और मेरे साथ चलो. हम भाजपा दफ्तर के अलावा कुछ नेताओं के घर जाने वाले हैं.’’

किंतु सुरभि ने मना कर दिया. उस के बाद हर दिन घर के अंदर झगड़े होने लगे. अगले महीने ही 10 फरवरी, 2020 को शादी की पहली सालगिरह थी. परिवार ने इसे जश्न के तौर पर मनाने का निर्णय कर किसकिस को बुलाना है, उस की सूची बनाई जाने लगी.

सुरभि ने भी दिल्ली के अपने कुछ दोस्तों को बुलाने की सूची बनाई, मगर सास ने उसे किसी दोस्त या रिश्तेदार को बुलाने से मना कर दिया. इस बात पर सुरभि की सास के अलावा ननदों से भी काफी कहासुनी हो गई थी.

इतना ही नहीं, एक बार सुरभि बीमार हो गई थी. पैरों में काफी सूजन थी. सुरभि ने पड़ोसी से पूछ कर एक मसाज करने वाली महिला को बुलवा लिया था.

संयोग से वह मुसलिम थी. बात 16 फरवरी, 2020 की थी. वह मुसलिम महिला किचन में तेल गर्म करने गई तो ननद श्वेता ने उसे खूब डांटा कि वह उस के किचन में कैसे घुस आई. महिला सुरभि के पास जा कर रोेने लगी. उस वक्त प्रवीण घर में नहीं था.

शाम को प्रवीण के आने पर सुरभि ने दिन की घटना के बारे में शिकायत की. प्रवीण ने जब बहन से इस बारे बात की तब उस के साथ दोनों बहनें उलझ पड़ीं. यहां तक कि उसे ही डांटते हुए कहा, ‘‘मेरी मां ने जमीन बेच कर तुम्हें पायलट बनाया है. यह घर और तुम्हारी सारी प्रौपर्टी हमारी है. अभी का अभी तुम अपनी पत्नी सुरभि को ले कर घर से निकल जाओ.’’

सुरभि मजबूर हो कर चली आई मायके

यह सुरभि के लिए एक नई समस्या थी. उस वक्त सुरभि के ससुर व उन का मैडिकल सहायक हीरालाल भी मौजूद थे. उन्होंने इस पर जरा भी प्रतिक्रिया नहीं जताई. उस के बाद  16 फरवरी, 2020 को सुरभि दिल्ली से मुंबई आ गई. उस के बाद वह दोबारा दिल्ली नहीं गई.

दिल्ली से मुंबई आते समय वह अपने जेवर ले कर आई थी, जो उस ने रिश्तेदारों को दे दिए थे. जाते वक्त वह उसे वापस नहीं मिले. सुरभि के मुंबई पहुंचने पर प्रवीण उस से अकसर वीडियो काल कर हालसमाचार लेने लगा. एक महीने बाद ही कोरोना काल का दौर आया और पूरे देश में लौकडाउन लगा दिया गया. मुंबई का जीवन भी ठप हो गया. फिल्में और सीरियलों की शूटिंग बंद हो गई. इसी के साथ सुरभि की आमदनी भी रुक गई.

दूसरी तरफ पति अकसर वीडियो काल कर के पूछता था कि वह कहां है? क्या कर रही है? इत्यादि बातों से वह एकदम तंग आ चुकी थी. वह उसे न काम करने दे रहा था और न ही खर्च के लिए पैसे ही दे रहा था.

इधर मुंबई में अपने किस्त पर खरीदे फ्लैट में सुरभि के दिन मां के साथ गुजर रहे थे. सुरभि के पास कोई जमापूंजी नहीं थी. फ्लैट की ईएमआई चल रही थी. अंधेरी के लोखंडवाला में फ्लैट होने के चलते मेंटिनेंस का भी काफी खर्च था.

छोटेछोटे खर्चों का सुरभि देती थी पति को हिसाब प्रवीण उसे सिर्फ 20 हजार रुपए घर खर्च वगैरह के लिए देता था. लेकिन उस के खर्च की एकएक पाई का हिसाब लेता था. घर के राशन से ले कर आटोरिक्शा आदि तक के बिल वाट्सऐप पर मंगवाता था. आटोरिक्शा के मीटर की फोटो खींच कर प्रवीण के पास भेजनी पड़ती थी.

क्रेडिट कार्ड सुरभि के पास था, पर उस का ओटीपी प्रवीण के फोन पर ही आता था. जब भी सुरभि औनलाइन सामान मंगवाती थी, तब प्रवीण से ओटीपी मांग कर ही पेमेंट कर पाती थी.

प्रवीण हर माह लिखा कर सुरभि के हस्ताक्षर सहित कागज वाट्सऐप पर मंगाता था कि सुरभि ने कितने रुपए की सब्जी खरीदी. यहां तक कि 20 रुपए का वड़ा पाव खरीदा तो उस का भी बिल भेजना होता था. एक बार सुरभि ने पानीपूरी का पैकेट खरीद लिया था तो प्रवीण ने डांट कर कहा था कि घर में रह कर सामान्य खाना ही खाए. पानीपूरी खाना तो फिजूलखर्ची है.

इस तरह प्रवीण से मिल रहे मेंटल टार्चर से सुरभि डिप्रेशन में चली गई थी. एक तरफ कोरोना से बचाव करना था तो दूसरी तरफ पति की मानसिक प्रताड़ना की शिकार थी. एक बार वह नजदीक के कोकिलाबेन अंबानी अस्पताल में इलाज कराने गई तो प्रवीण ने वह रकम यह कह कर नहीं दी कि यह गलत है. प्रवीण ने सुरभि से कहा कि उसे हर बार चैरिटी अस्पताल में इलाज कराना चाहिए.

एक बार मिल्लत नगर, अंधेरी के चैरिटी अस्पताल में जब वह अपना इलाज कराने गई, तब उस के कुछ दोस्तों ने देख कर सुरभि को सलाह दी कि इस तरह की नरक की जिंदगी जीने के बजाय उसे अपने पति से तलाक ले लेना चाहिए.

उन की सलाह पर ही सुरभि ने मन को कड़ा करते एक दिन फोन पर प्रवीण से यह बात कह दी. प्रवीण ने कह दिया कि वह उसे तलाक नहीं देगा. पूरी जिंदगी तड़पाएगा.

आखिरकार 20 जून, 2022 को मुंबई के वर्सोवा पुलिस थाने में एपीआई युवराज दलवी के सामने पति प्रवीण कुमार सिन्हा, सास लीलावती सिन्हा, ननद श्वेता व शिल्पा सिन्हा के खिलाफ सुरभि ने एक शिकायत दी.

मामला अदालत में गया और 498ए, 377, 406 आदि भादंवि की धाराओं के तहत  मुकदमा दर्ज कर लिया गया. कथा लिखे जाने तक अदालत में इस मामले की सुनवाई शुरू हो चुकी थी.

इस तरह से ‘शगुन’, ‘कुमकुम’, ‘हरी मिर्च लाल मिर्च’, ‘कुलवधू’, ‘दीया और बाती हम’ व ‘एक रिश्ता साझेदारी का’ सहित कई सफल टीवी सीरियलों की अदाकारा सुरभि तिवारी ने महज 13 वर्ष की उम्र से अभिनय करना शुरू कर दिया था.

सीरियल ‘शगुन’ से उसे जबरदस्त सफलता मिली थी. 2009 में सुरभि तिवारी ने ‘म्हाडा’ की लौटरी से अंधेरी इलाके में मकान खरीदा, जिस के लिए स्टेट बैंक औफ इंडिया से 30 लाख रुपए का कर्ज भी लिया, जिस की ईएमआई जारी है.

वह अभिनय में इस कदर व्यस्त रही कि विवाह कर घर गृहस्थी बसाने के बारे में सोचने का मौका तक नहीं मिला था. उसे आखिरी बार ‘एक रिश्ता साझेदारी का’ सीरियल में देखा गया था.         द्य

(कथा सुरभि तिवारी से हुई बातचीत और   एफआईआर नंबर 03

टीवी एक्ट्रेस सुरभि तिवारी : भंवर में फंसी जिंदगी – भाग 2

प्रवीण ने मान लीं सुरभि की शर्तें

30 अक्तूबर, 2017 को प्रवीण और सुरभि की दूसरी मुलाकात जुहू के होटल नोवाटेल में हुई. वह डेटिंग लंबी थी. डिनर के साथसाथ करीब 2 घंटे लंबी बातचीत के दौरान प्रवीण ने शादी के बाद की जिंदगी के बारे में काफी बातें की.

प्रवीण ने कहा कि वह मुंबई में अपना मकान खरीद लेगा और अपने साथ सुरभि की मां को भी रखेगा. उस ने वादा किया कि सुरभि की इच्छा के मुताबिक उस की उम्र को देखते हुए जल्द ही परिवार भी आगे बढ़ा लेगा. वास्तव में उस वक्त तक सुरभि 39 की हो चुकी थी और शादी के बाद जल्द मां बनना चाहती थी.

प्रवीण ने इस पर भी हामी भर दी थी. उस के एक सप्ताह के भीतर ही 6 नवंबर, 2017 को प्रवीण ने एक बार फिर मुंबई पहुंच कर सांताक्रुज स्थित होटल ग्रैंड हयात में सुरभि से मुलाकात की. उन्होंने उस रोज भी मुंबई में अपना स्थायी ठिकाना बनाने का आश्वासन देते हुए बताया कि उस की  एअरलांइस कंपनी इंडिगो से ट्रांसफर की बात हो गई है. शादी के 6 महीने बाद वह दिल्ली से मुंबई शिफ्ट हो जाएगा, किंतु तब तक उसे दिल्ली में ही रहना होगा.

इस पर सुरभि तिवारी ने कुछ देर सोच कर आगे का निर्णय मां के ऊपर छोड़ दिया. किंतु अगले दिन 7 नवंबर, 2017 को ही सुरभि ने ‘सायकोरियन मैट्रीमोनी सर्विसेस’ को फोन कर दूसरे लड़के की प्रोफाइल मांगी.

इस की जानकारी प्रवीण को भी हो गई. उस ने अपनी मां लीलावती सिन्हा को आगे कर दिया. अंतत: लीलावती ने सुरभि से फोन पर बात की और बीच का रास्ता निकालते हुए शादी का माहौल बनाने लगी.

लीलावती के फैसले को सुरभि और उस की मां भी नहीं बदल पाईं. फिर भी शादी की तारीख तय नहीं हो पा रही थी. सुरभि की शूटिंग के साथसाथ प्रवीण संग डेटिंग भी चलती रही.

बदला गिरगिट जैसा रंग 

अंतत: सुरभि ने अपने विचार बदल लिए. उन्होंने 10 दिसंबर, 2018 को दिल्ली के फैमिली कोर्ट में जा कर शादी कर ली. हालांकि हिंदू विधि विधान से उन की शादी 10 फरवरी, 2019 को यारी रोड, मुंबई में संपन्न हुई.

शादी के अगले रोज ही वे 9 दिनों के लिए हनीमून पर गोवा चले गए. दोनों गोवा के होटल में ठहरे. सुरभि ने महसूस किया कि प्रवीण बदला हुआ नजर आ रहा है. उस के बातचीत करने के ढंग और व्यवहार में से नरमी गायब हो चुकी है. वह उस के साथ एक तानाशाह की तरह पेश आ रहा है.

यही नहीं, रात को बैड पर जाने से पहले ही कह दिया कि वह अभी बच्चा नहीं चाहता है. जिंदगी के मजे लेना चाहता है. देश के विभिन्न शहरों के अलावा विदेश घूमना चाहता है. उस के बाद ही बच्चे की प्लानिंग करेगा. इस पर जब सुरभि ने कहा कि बच्चा पैदा करने की उम्र काफी निकल चुकी है, तब वह उसे झिड़क दिया करता.

सुरभि ने प्रवीण में बदलाव और भी कई स्तर पर महसूस किए. बच्चे की बात पर प्रवीण का निर्णय सुन कर सन्न रह गई. उसे जोर का झटका लगा. सुरभि के विरोध पर प्रवीण ने समझा कर उसे चुप करवा दिया.

हनीमून के 9 दिन बाद सुरभि अपने पति प्रवीण सिन्हा के साथ दिल्ली में द्वारका स्थित फ्लैट पर पहुंची. उस का स्वागत सास लीलावती सिन्हा, ससुर ब्रजेंद्र सिन्हा, 2 ननदें श्वेता सिन्हा और शिल्पा सिन्हा ने किया. वहां जा कर उसे पता चला कि अगले महीने 5 मार्च, 2019 को दिल्ली में शादी के रिसैप्शन का आयोजन किया गया है.

सुरभि के आते ही प्रवीण ने उस के सामने सादा कंप्यूटर पेपर और पेन देते हुए कहा, ‘‘इस पर लिख दो कि मैं ने तुम से बगैर दहेज लिए यह शादी की है. हम इस का प्रयोग आरा और पटना की चुनावी जनसभाओं में करेंगे, जिस से मेरी मां को चुनाव में जीतने के लिए अधिक से अधिक वोट मिलेंगे.’’

इस पर सुरभि तुनकती हुई बोली, ‘‘तो आप ने दहेज इस वजह से नहीं लिया कि मेरा इस्तेमाल राजनीतिक स्वार्थ के लिए कर सकें.’’

‘‘तुम हर बात को गलत ढंग से क्यों देखती हो. जब मेरी मां यानी कि अब तुम्हारी सास विधायक बन जाएगी, तब इस का फायदा तुम्हें और हम सभी को मिलेगा.’’

सुरभि को अपनी तरह से चलाना चाहते थे ससुराल वाले

घर के लोग शादी के रिसैप्शन की तैयारियों में जुट गए थे. मेहमानों के अलावा एक अलग लिस्ट पत्रकारों की भी बनी थी, लेकिन प्रवीण और उस की मां ने सुरभि को सख्त हिदायत दी थी कि वह मीडिया के सामने अकेली नहीं आएगी. उसे यहां मुंबई की बात भूलनी होगी. सब से महत्त्वपूर्ण हिदायत यह थी कि रिसैप्शन में जो भी उपहार मिलेंगे, उस पर उस का कोई अधिकार नहीं होगा. इस के साथ ही और भी कई तरह की हिदायतें दी गईं, जिसे सुन कर वह अंदर ही अंदर आने वाली विपत्तियों की कल्पना कर सिहर गई.

रिसैप्शन में लीलावती सिन्हा ने खुद को पटना में भाजपा की सक्रिय सदस्य के रूप में कार्यरत व एक माहिर राजनेता के तौर पर पेश किया. उन्होंने मीडिया के सामने सुरभि को चांदी का मुकुट पहना कर प्रदर्शित किया और उसे दहेज के बगैर लाई बहू के रूप में प्रचारित किया.

7 मार्च के बाद जब सुरभि की मां और भाई वापस मुंबई लौट आए, तब सास लीलावती ने भी अपना पैंतरा बदलते हुए सुरभि से तीखे लहजे में कहा, ‘‘देखो, अब तुम एक बिहारी परिवार की बहू हो. हमारे समाज की मान्यताओं के अनुसार रहो. कब, किस से, किस तरह मिलनाजुलना है, वह मैं बताऊंगी. अब डेली सोप वाले टीवी सीरियल में अभिनय करने के बजाय वेब सीरीज और फिल्मों में अभिनय करो. जब शूटिंग हो तब दिल्ली से मुंबई जाओ. अन्यथा दिल्ली या पटना में ही रहो.’’

इस के अलावा सास ने यह भी कहा कि वह उस के साथ कुछ भाजपा नेताआें से मिले और जब जरूरत हो, तब मेरे साथ राजनीतिक क्षेत्र में काम करना भी शुरू करे.

हालांकि सुरभि ने इस का विनम्रता से विरोध जताया कि उस की राजनीति में रुचि नहीं है और किसी नेता से मिलने की इच्छा भी नहीं रखती है. अभिनय को नहीं छोड़ सकती है. वह सिर्फ एक्टर ही बनी रहना चाहती है.

उस के बाद तो सुरभि की सास और उन की ननदों ने कठोर तेवर अपना लिए. उन के बदले हुए तेवर का असर सुरभि की निजी जिंदगी पर भी पड़ा. आए दिन किसी न किसी बहाने से प्रवीण की बहनें और मां उसे प्रताडि़त करने लगीं.

एक तरफ सुरभि के सामने सास और ननदों के ताने थे, दूसरी तरफ पति का अमानवीय व्यवहार. सुरभि ने अपनी समस्या मां सरिता तिवारी, भाई सौरभ तिवारी, बहन सारिका शुक्ला व सारिका के पति राजीव शुक्ला को भी सुनाई. उन से इस बारे में फोन पर बातें होती रहती थीं.

उन लोगों ने भी कई बार फोन कर प्रवीण को समझाने की कोशिश की, लेकिन बात और बिगड़ गई. बच्चे के नाम पर प्रवीण ने कहा, ‘‘तुम्हें हालात समझने चाहिए. ऐसा करो, हमें अभी बच्चे की जरूरत नहीं है. तुम कुछ दिन मुंबई में ही रह कर अभिनय करिअर को संवारो. मैं यहां किसी अच्छे कारोबार की योजना बना रहा हूं.’’

पतिपत्नी के बीच बढ़ गए मतभेद

मार्च में होली के दिन सुरभि अपने मायके मुंबई चली आई. जल्द ही प्रवीण दिल्ली लौट आया. बीचबीच में वह सुरभि को बुला कर अपने साथ फ्लाइट में ले जाने लगा. उन के बीच तनाव कुछ कम हो गया था. एक दिन पति को खुश देख कर सुरभि ने कहा, ‘‘आप अभी मुंबई में ही हो. तो फ्लैट तलाश कर खरीद लो.’’

जवाब में प्रवीण ने कहा, ‘‘यह तय है कि मैं मुंबई में घर नहीं खरीद सकता. और यहां किराए का भी मकान नहीं ले सकता. क्योंकि मेरे पास पैसे नहीं है. मेरे सारे पैसे खर्च हो चुके हैं. तुम्हें मेरे साथ दिल्ली में ही आ कर रहना होगा.’’

इस बात पर सुरभि और प्रवीण के बीच काफी बहस हुई. अंतत: प्रवीण अकेले ही दिल्ली लौट आया. पतिपत्नी के बीच बढ़ते मतभेद को देख कर सुरभि की मां ने सुरभि को कुछ दिनों तक पति के साथ रहने की सलाह दी. मां के कहने पर 2-3 दिन के बाद सुरभि भी दिल्ली आ गई.