आशिक पति ने ली जान

चाची का इश्किया भतीजा – भाग 1

सन 2003-04 में केंद्र और राज्य सरकारों के आपसी मतभेदों के कारण कोयले के दाम आसमान छूने लगे थे. उन दिनों कोयला  सामान्य मूल्य से दोगुने से भी अधिक दाम में बिक रहा था. उस स्थिति में सरदार परमजीत सिंह को कोयला खरीदना मुश्किल हो  गया था. पटियाला के अरनाबरना चौक पर उन का कोल डिपो था. उन का यह काफी पुराना व्यवसाय था. लेकिन कोयले की आसमान छूती कीमतों से उन के इस व्यवसाय को गहरा झटका लगा था.

कोयले के दाम तो बढ़ ही गए थे, इस के साथ एक समस्या यह भी थी कि कोयले का सौदा भी 4-6 गाडि़यों से कम का नहीं हो रहा था. धंधा करने वालों को धंधा करना ही था, इसलिए कोयला महंगा हो या सस्ता, कोयला तो मंगाना ही था. जिस भाव में माल आएगा, उसी भाव में बिकेगा भी.

कुछ अपने पास से तो कुछ ब्याज पर उधार ले कर जैसेतैसे परमजीत सिंह उर्फ सिंपल ने 6 गाड़ी कोयला मंगा लिया. संयोग देखो, परमजीत का माल आते ही केंद्र सरकार ने कोयला कंपनियों को अपने नियंत्रण में ले लिया, जिस से तुरंत कोयले की आसमान छूती कीमतें घट कर सामान्य हो गईं.

परमजीत सिंह का तो दीवाला निकल गया. महंगे भाव पर खरीदा गया कोयला उन्हें मिट्टी के भाव बेचना पड़ा. जिस की वजह से उन्हें मोटा घाटा हुआ. इस घाटे से उन्हें गहरा सदमा लगा और वह बीमार रहने लगे. घाटा हो या मुनाफा, परमजीत ने जिस के पैसे लिए थे, उस के पैसे तो देने ही थे.

इस तरह परमजीत सिंह की हालत काफी खराब हो गई. मिलनेजुलने वाले, यारदोस्त, नातेरिश्तेदार आते और सांत्वना दे कर चले जाते. कोई मदद की बात न करता. उस समय उन की इस परेशानी में उन का भतीजा प्रीत महेंद्र सिंह काम आया. उस ने चाचा की मदद ही नहीं की, हर तरह से साथ दिया. बीमारी का इलाज तो कराया ही, व्यवसाय को फिर से जमाने के लिए मोटी रकम भी दी.

जब तक सब ठीक नहीं हो गया, प्रीत महेंद्र दोनों समय परमजीत सिंह के घर आताजाता रहा. दवा आदि की ही नहीं, घर की जरूरत की अन्य चीजों का भी उस ने खयाल रखा. इसी का नतीजा था कि परमजीत सिंह ने जल्दी स्वस्थ हो कर अपना व्यवसाय फिर से संभाल लिया. परमजीत के ठीक होने के बाद भी प्रीत महेंद्र का उन के घर आनेजाने का सिलसिला उसी तरह जारी रहा.

अब इस की वजह चाचा की बीमारी नहीं, खूबसूरत चाची जसमीत कौर उर्फ गुडि़या थी. दरअसल जब से प्रीत महेंद्र ने चाची जसमीत कौर को देखा था, तभी से उस के मन में एक अजीब सी उथलपुथल मची हुई थी. चाचा से शादी के समय ही वह चाची की सुंदरता पर मर मिटा था.

इस में उस का दोष भी नहीं था. जसमीत थी ही इतनी खूबसूरत. कश्मीर के सेब की तरह गोल और गुलाबी रंग का उस का चेहरा ताजे खिले गुलाब की तरह दमकता था. उस का शरीर भी सांचे में ढला बहुत ही आकर्षक था. 2 बच्चों की मां होने के बाद भी उस की खूबसूरती में कोई कमी नहीं आई थी.

प्रीत महेंद्र ने चाचा के साथ जो किया था, वह छोटीमोटी बात नहीं थी. इसलिए परमजीत सिंह उस का बहुत एहसान मानते थे. चाची जसमीत भी उस की बहुत इज्जत करती थी. चाचीभतीजे में पटती भी खूब थी. इस की वजह यह थी कि भतीजा ही नहीं, चाची भी अभी जवान थी. जबकि परमजीत अधेड़ हो चुका था. चाचीभतीजे ने क्या गुल खिलाया, यह जानने से पहले आइए थोड़ा इन के घरपरिवार के बारे में जान लेते हैं.

सरदार सुरेंद्र सिंह पटियाला के ही रहने वाले थे. उन का कोयले का छोटामोटा व्यवसाय था. उन के परिवार में पत्नी के अलावा 2 बेटे परमजीत सिंह, हरमीत सिंह और 2 बेटियां थीं. हरमीत की शादी के पहले ही मौत हो गई थी. दोनों बेटियों की शादी कर दी तो वे अपनेअपने पतियों के साथ यूएसए चली गई थीं.

सुरेंद्र सिंह ने परमजीत सिंह की शादी सन 1995 में जसमीत कौर के साथ की थी. जसमीत कौर छोटी थी, तभी उस के पिता की मौत हो गई थी. जसमीत की 2 बहनें और थीं, भाई कोई नहीं था. विधवा मां ने किसी तरह तीनों बेटियों को पालापोसा. शादी लायक होने पर दोनों बड़ी बेटियों की शादी उन्होंने लखनऊ में कर दी थी. जसमीत की शादी परमजीत से कर के वह बेटियों के पास रहने लखनऊ चली गईं थीं.

जिस समय जसमीत कौर की शादी परमजीत सिंह से हुई थी, वह मात्र 16 साल की थी, जबकि परमजीत उस से 20 साल बड़ा यानी 36 साल का था. समय के साथ वह 2 बच्चों की मां बनी. लेकिन वह जवान हुई तो उस का पति बुढ़ापे की ओर बढ़ चला. जसमीत से हुए उस के दोनों बेटों के नाम थे गुरतीरथ और जसदीप.

शादी और बच्चे होने से परमजीत की जिम्मेदारियां बढ़ गई थीं. उस के खर्च के लिए पिता सुरेंद्र सिंह ने एक ईंट भट्टा खोलवा दिया था. लेकिन उस का वह भट्ठा चला नहीं. इस के बाद उस ने अपना कोयले का व्यवसाय संभाल लिया. उसी बीच सरदार सुरेंद्र सिंह की मौत हो गई तो घरपरिवार से ले कर कारोबार तक की जिम्मेदारी उसी पर आ गई.

सब कुछ लगभग ठीकठाक ही चल रहा था. लेकिन 2004 में हुए जबरदस्त घाटे ने परमजीत की कमर तोड़ दी थी. संयोग से मदद के लिए भतीजा प्रीत महेंद्र आगे आ गया था. इसी मदद के बहाने प्रीत महेंद्र का चाचा के घर आनाजाना हुआ तो उसे चाची से दिल लगाने का मौका मिल गया. परमजीत सुबह ही डिपो पर चले जाते थे.  उस के बाद भतीजा प्रीत महेंद्र उन के घर पहुंच जाता था. परमजीत ने पत्नी से कह रखा था कि वह प्रीत महेंद्र का हर तरह से खयाल रखे, क्योंकि उस ने उन्हें बहुत बड़े संकट से उबारा था.

एक दिन दोपहर को प्रीत महेंद्र चाचा के घर पहुंचा तो घर में जसमीत अकेली थी. उस ने डोरबेल बजाई तो जसमीत कौर ने दरवाजा खोला. एकदूसरे को देख कर दोनों मुसकराए. जसमीत बगल हट कर बोली, ‘‘आओ, अंदर आओ.’’

अंदर आ कर प्रीत महेंद्र सोफे पर बैठ गया. दरवाजा बंद कर के जसमीत कौर भी आ कर उस के बगल बैठ गई. जसमीत और प्रीत महेंद्र भले ही चाचीभतीजे थे, लेकिन दोनों हमउम्र थे. इसलिए कभीकभार हलकाफुलका मजाक भी कर लेते थे. लेकिन जब से उस की नीयत में खोट आई थी तब से वह खामोश रहने लगा था. ऐसा ही कुछ हाल जसमीत का भी था. शायद दोनों को ही इस बात का इंतजार था कि पहल कौन करे.

प्यार में जब पति ने अड़ाई टांग

3 महीने बाद खुला सिर कटी लाश का राज

नई नवेली दीपा ने सौतेले बेटे संग रची साजिश – भाग 3

दीपा को पता चल गया था कि बच्चे जयदेव सिंह से नफरत करते हैं, जबकि वह बच्चों पर अपना प्रेम लुटाती है. इस कारण ही वह उस के साथ भी गलत व्यवहार करता है. फिर भी उस ने बच्चों का खयाल रखने में कोई कमी नहीं आने दी. उन के लिए मनपसंद खाना बनाना, स्कूल को तैयार करना, उन के कपड़े धोना, घर की साफसफाई करना, उस की दिनचर्या में शामिल हो गया था. बच्चे भी दीपा से बहुत प्यार करने लगे थे.

दीपा के साथ दूसरी समस्या यह थी कि जयदेव उसे ले कर गलत धारणा रखता है. वह पत्नी पर शक करता था. वह उस पर बड़े बेटे के साथ अवैध संबंध होने का आरोप लगा चुका था. इस आरोप से दीपा और हरनाम सिंह दोनों दुखी हो गए थे. जयदेव उन की बातें सुनने को राजी नहीं था. इस कारण ही दीपा की पिटाई कर देता था. उस के दिमाग में शक का कीड़ा कुलबुलाता रहता था कि दीपा के उस के बड़े बेटे के साथ अवैध संबंध हैं.

शक होने पर लगवाए सीसीटीवी कैमरे

इस कारण ही जयदेव ने अपने घर पर सीसीटीवी कैमरे लगवा लिए थे और उन्हें अपने मोबाइल फोन से जोड़ लिया था. जब वह ड्यूटी पर होता था, तब वह बीचबीच में अपने घर की गतिविधियों पर एक नजर मार लेता था. इस की खबर दीपा के बड़े भाई नीशू सिंह को मिली, तब वह अपने बहनोई के प्रति काफी आगबबूला हो गया. उस के बाद ही उस ने बहन के बचाव के लिए कुछ करने कसम खाई.

बात इसी साल अप्रैल महीने के पहले सप्ताह की है. जयदेव अपनी कीमती जमीन बेचने की योजना बना रहा था, दीपा उस का विरोध कर रही थी. यहां तक कि बच्चे भी नहीं चाहते थे कि जमीन बिके. बच्चों को पता था कि वह सब खेती की जमीन थी. वहीं से साल भर का अनाज आता था. बाजार से चावल, गेहूं और दाल का एक दाना नहीं खरीदा जाता था. अगर जमीन बिक गई तो वह सब नहीं आएगा.

हरनाम सिंह को यह मालूम था कि उस का बाप जमीन बेच कर सारे पैसे शराब में उड़ा देगा. दीपा के भाई नीशू ने जयदेव को ऐसा करने से रोकने के लिए मिल कर एक योजना बनाई. इस में दीपा और दोनों बेटों हरनाम व हरमिंदर सिंह को भी शामिल कर लिया.

घटना से 14 दिन पहले घर के सभी लोग एकदम शांत हो कर रहने लगे. जयदेव को पता चल गया कि जब वह ड्यूटी पर होता था, तब कुछ समय के लिए कैमरे बंद रहते हैं. उसे बच्चों और दीपा ने एहसास करवा दिया कि वह नाहक ही अपने बेटे और पत्नी पर शक कर रहा है.

दीपा ने हरनाम से कहा कि क्यों न जयदेव को ही खत्म कर दिया जाए. आज नहीं तो कल यह जमीनजायदाद बेच डालेगा और वे गरीब हो जाएंगे. जयदेव के मरने के बाद उस के बदले में बेटे या दीपा को जयदेव की जगह कोई नौकरी मिल जाएगी. उस के मरने पर जो पैसा मिलेगा, वह बाकी बच्चों के भविष्य के लिए काम आएगा. छोटी बेटी जासमीन की शादी के लिए भी फिक्स्ड डिपाजिट करवा दिया जाएगा.

सौतेले बेटे के साथ की पति की हत्या

योजना के अनुसार 5 मई, 2023 की शाम 6 बजे कांठ तहसील से जयदेव सिंह रोजाना की भांति अपने घर शराब पी कर आया था. घर आते ही उस ने फिर शराब पी. दीपा को जल्द खाना लगाने के लिए बोला. दीपा ने खाना लगा दिया. खाना खा कर जयदेव सो गया, तब दीपा का भाई नीशू सिंह, हरनाम सिंह रात होने का इंतजार करने लगे.  नीशू सिंह अपने साथ एक देशी तमंचा भी ले कर आया था. हालांकि उस के कारतूस नहीं होने के कारण उस का इस्तेमाल नहीं हो सका था. चारों ने मिल कर एक मोटे डंडे का इंतजाम किया.

5 मई की रात लगभग डेढ़ बजे वे नीचे आ गए. नीशू के हाथ में डंडा था. जयदेव ग्राउंड फ्लोर पर गहरी नींद में सो रहा था. दीपा का इशारा मिलते ही नीशू सिंह ने जयदेव सिर पर डंडे से हमला कर दिया. जयदेव करवट लिए सो रहा था. डंडे के हमले से जयदेव का सिर फट गया, लेकिन वह मरा नहीं था. यह देख कर दीपा और छोटे बेटे ने जयदेव के पैर पकड़ लिए. दूसरी तरफ नीशू और हरनाम ने डंडे को गरदन पर रख कर पूरी ताकत से दबा दिया.

थोड़ी देर में ही जयदेव के प्राणपखेरू उड़ गए. पति की हत्या के बाद ही दीपा ने योजना के अनुसार बाहर आ कर शोर मचाना शुरू कर दिया था.

आरोपी दीपा कौर के बयान के आधार पर पुलिस ने दीपा के साथ भाई नीशू, दोनों बेटों हरनाम सिंह व हरमिंदर सिंह से विस्तार से पूछताछ कर दीपा व उस के भाई नीशू को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश कर दिया. उन्हें 7 मई को मुरादाबाद की जिला कारागार भेज दिया गया. नाबालिग हरनाम व हरमिंदर को बाल सुरक्षा गृह भेज दिया गया.

अपनों के खून से रंगे हाथ : ताइक्वांडो कोच को मिली सजा – भाग 3

हनुमान और उस के दोनों साथी कपिल और दीपक कमरे से बाहर निकल कर बरामदे में आए. तभी वहां सो रहे संतोष शर्मा के छोटे बेटे हैप्पी के हाथ पर हनी का पैर पड़ गया. बच्चों के जग जाने पर पकड़े जाने के डर से वे उन पर भी टूट पड़े. संतोष के बाकी दोनों छोटे बेटों हैप्पी (15 वर्ष) और अज्जू (12 वर्ष) के साथ ही उस के भतीजे निक्की (10 वर्ष) की भी गला रेत कर हत्या कर दी. हत्यारों ने उन्हें भी चाकुओं से निर्ममतापूर्वक गोद डाला.

संतोष के पति और बच्चों की हत्या करने के बाद हनुमान ने संतोष शर्मा से उस की स्कूटी की चाबी मांगी, तब संतोष शर्मा ने चाभी और 3000 हजार रुपए दिए. तीनों हत्यारे स्कूटी से ही फरार हो गए. उन्होंने अलवर रेलवे स्टेशन के पास मंडी मोड़ के निकट सुनसान जगह पर संतोष शर्मा की स्कूटी खड़ी कर दी.

रात ज्यादा हो जाने के कारण उन्हें ट्रेन नहीं मिली. वे आटो में बैठ कर राजगढ़ चले गए. जहां से बाद में हत्याकांड में शामिल उस के दोनों साथी वापस अलवर लौट गए, जबकि संतोष शर्मा का प्रेमी वहां से बांदीकुई होते हुए जयपुर चला गया. वह जयपुर से उदयपुर भाग गया.

यह हत्याकांड किसी फिल्म की तरह था. इतने भयानक हत्याकांड के बारे में जिस ने भी सुना, दांतों तले अंगुली दबा ली. 5-5 गला कटे परिवार के सदस्यों की लाशों के बीच खून भरे कमरे में संतोष शर्मा कई घंटों तक अकेले बैठी रही. तयशुदा योजना के अनुसार सुबह होने से पहले छोटी बहन के पास जा कर सो गई.

वारदात के बाद फैली सनसनी

सुबह होने पर वह भी रोनेचिल्लाने का नाटक करने लगी. मोहल्ले वाले भी आ गए. रोती हुई संतोष शर्मा ने मोहल्ले वालों पर ससुराल वालों के साथ जमीन विवाद के कारण पूरे परिवार को मार देने का आरोप लगा दिया और थोड़ी देर में बीमार बन कर अस्पताल में भरती हो गई. उस के संदिग्ध आचरण को देख कर पुलिस के शक की सुई उस पर जा कर ठहर गई.

एक ही रात में शिवाजी कालोनी के मकान में एक साथ परिवार के 5 लोगों की हत्या की खबर जंगल की आग की तरह चारों तरफ फैल गई. घटनास्थल पर शिवाजी पार्क थाने के एसएचओ विनोद कुमार सांवरिया, एसपी राहुल प्रकाश सहित अन्य आला अफसर पहुंच गए.

घटनास्थल पर पुलिस डौग्स और एफएसएल टीम के साथ फोटोग्राफर ने आ कर अलगअलग एंगल्स से मृतकों की फोटो खींचे.  मीडियाकर्मियों सहित क्षेत्रवासियों की भारी भीड़ एकत्रित हो गई. जितने मुंह उतनी बातें होने लगीं. लोग यकीन नहीं कर पा रहे थे कि क्या कोई औरत ऐसी भी हो सकती है, जो बहन, पत्नी और मां कुछ भी न बन सकी.

अलवर में गांधी जयंती की रात को घटित इस हत्याकांड से पूरा राजस्थान हिल गया था. पुलिस प्रशासन को जवाब देना भारी पड़ रहा था. इस ब्लाइंड मर्डर केस को ले कर विपक्ष ने खूब हायतौबा मचाई, वहीं मीडिया ने भी राज्य में कानूनव्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो जाने की खबरें प्रचारितप्रसारित कर पुलिस की नींद उड़ा दी.

तत्कालीन एसपी राहुल प्रकाश ने आला अफसरों की बैठक में दिशानिर्देश देने के साथ ही इस ब्लाइंड मर्डर केस की जांच की जिम्मदारी शिवाजी पार्क थाने के एसएचओ विनोद कुमार सांवरिया को सौंप दी. मामला पेंचीदा था. इसे सुलझाने के लिए टीम गठित की. मौकाएवारदात पर पहुंच कर जांचपड़ताल की. सभी लाशों को पोस्टमार्टम के लिए अलवर के सरकारी अस्पताल भेज दिया गया.

काल डिटेल्स से पुलिस पहुंची आरोपियों तक

पूछताछ के लिए संतोष शर्मा को हिरासत में ले लिया गया. उस का मोबाइल कब्जे में ले कर उस की काल डिटेल्स निकाली गई. जल्द ही सुराग मिलने शुरू हो गए. संतोष शर्मा के फोन की काल डिटेल्स में वारदात से पहले उस की हनुमान प्रसाद से कई बार बात हुई थी. सब से ज्यादा फोन पर बातचीत करने के संकेत मिलने से पुलिस को कुछ और सुराग मिले.

पुलिस ने उदयपुर पहुंच कर हनुमान प्रसाद के कमरे पर दबिश दी. उस के कमरे की तलाशी ली गई. वहां से 7 मोबाइल फोन और बैग से खून सने कपड़े बरामद हुए. हनुमान को गिरफ्तार कर लिया गया. पुलिस अहम सबूत के साथ अलवर पहुंची. उच्च अधिकारियों से आवश्यक निर्देश ले कर एसएचओ सांवरिया ने मुलजिम हनुमान से गहन पूछताछ शुरू की.

उस ने अपना जुर्म कुबूल लिया, जिस के बाद पुलिस ने उसे कोर्ट में पेश कर तथा रिमांड पर ले कर हनुमान की निशानदेही पर अलवर की तहसील राजगढ़ के रेलवे स्टेशन के पास स्थित नाले से हत्या में प्रयुक्त हथियार बरामद कर लिए. अलवर रेलवे स्टेशन के पास खड़ी संतोष शर्मा की स्कूटी भी बरामद कर ली गई. हनुमान की मदद करने वाले साथी कपिल और दीपक को भी अलवर के मालाखेड़ा गुजुकी के किराए के मकान से पकड़ लिया गया.

पुलिस की सख्त पूछताछ से अय्याशी की गर्त में डूबे हनुमान और संतोष शर्मा की कहानी का खुलासा हो गया. उस ने अपना अपराध कुबूल कर सब कुछ विस्तारपूर्वक बता दिया. यह भी बता दिया कि अलवर के मंडी मोड़ पर स्थित पानी की टंकी पर हत्याकांड को अंजाम देने के बाद तीनों ने रक्तरंजित छुरा और अपने हाथ पैर धोए थे. ट्रेन नहीं मिलने पर अलवर रेलवे स्टेशन के आगे आटो से राजगढ़ के लिए फरार हो गए थे.

हनुमान के नाबालिग साथी दीपक और कपिल वापस अलवर चले गए, जबकि खुद राजगढ़ से बांदीकुई जंक्शन चला गया. वहां से ट्रेन पर बैठ कर उदयपुर चला गया. अलवर से उदयपुर तक की लंबी यात्रा की थकान के कारण वह अपने कमरे पर जा कर सो गया था. इस कारण मोबाइल और खून से सने कपड़े को ठिकाने लगाने का उसे वक्त ही नहीं मिल पाया.

दूसरी तरफ संतोष शर्मा को बताया गया कि उस के प्रेमी हनुमान ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया है. उस के बाद संतोष शर्मा ने भी हत्याकांड में शामिल होने की बात मान ली. पुलिस ने उसे भी गिरफ्तार कर लिया. हत्याकांड में शामिल हनुमान के दोनों साथी नाबालिग ही थे. इस कारण उन्हें बाल न्यायालय में पेश कर बाल सुधार गृह भेज दिया गया.

हत्याकांड का फैसला आ जाने पर एक बार फिर हालात का जायजा लेने के लिए लेखक ने महिला ताइक्वांडो कोच के पति बनवारी लाल के गांव गारू पहुंच कर गांव वालों से बातचीत की.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित, कथा में वंदना परिवर्तित नाम हैं

नई नवेली दीपा ने सौतेले बेटे संग रची साजिश – भाग 2

पत्नी दीपा कौर पर हुआ शक

जांच करने वाली टीम को यह बात गले नहीं उतर रही थी कि 5-6 मई की रात को जयदेव की हत्या हुई थी, उस दौरान घर में लगे सीसीटीवी कैमरे क्यों बंद थे? टीम इस जांच में लग गई कि कैमरे किस ने बंद किए? उन्हें सुबह 6 बजे किस ने खोला? इस बारे में भदौरिया ने दीपा से भी सवाल किया. उस से सख्ती से पूछा कि कहीं उसी ने कैमरे तो बंद नहीं किए, इस के पीछे उस की क्या मंशा थी?

पुलिस की सख्ती के सामने दीपा कौर सकपका गई. उस का चेहरा सफेद पड़ गया. वह घबरा गई थी. उस की घबराहट को भांपते हुए भदौरिया ने सीधे लहजे में सवाल किया कि वह सब कुछ सचसच बताए, वरना उस की खैर नहीं. उस पर ही जयदेव सिंह की हत्या का आरोप लग सकता है. उसे जेल हो सकती है. कड़ी सजा मिल सकती है. इस के बाद उस से आगे की पूछताछ के लिए महिला कांस्टेबल के हवाले कर दिया.

जैसे ही महिला सिपाही ने दीपा से दोगुनी उम्र के जयदेव से शादी करने का सवाल किया तो वह और भी परेशान हो गई. शादी के सवाल के जवाब में उस ने जयदेव का सरकारी कर्मचारी होना कारण बताया. जब उस के पतिपत्नी के संबंध और बच्चों वाले परिवार में एडजस्ट करने के बारे में पूछा गया, तब वह बिफर गई. पूछताछ के क्रम में उस ने बोल दिया कि जयदेव शराब के नशे में उस की बातबात पर पिटाई करता था.

पति द्वारा दीपा को पीटे जाने की जानकारी मिलते ही एसपी (सिटी) भदौरिया दीपा से पूछताछ करने लगे. आखिरकार दीपा हत्याकांड से संबंधित पूरा मामला बताने के लिए तैयार हो गई. उस ने पति की हत्या का जुर्म स्वीकार कर लिया. उस के बाद उस ने शराबी पति की हत्या की जो कहानी सुनाई, उस में उस का भाई और सौतेले बेटों का भी नाम शामिल हो गया. उस की पूरी कहानी इस प्रकार निकली-

जयदेव सिंह मूलरूप से उत्तर प्रदेश के जिला संभल के गांव मडावली रसूलपुर का रहने वाला था. करिअर बनाने की शुरुआत उस ने मुरादाबाद के टैक्सी स्टैंड से की थी. वह साल 2006 में खन्ना ट्रेवल्स की टैक्सी चलाता था. इस के लिए उस ने एक एंबेसडर कार यूपी-21-9494 किराए पर ले रखी थी. बाद में उस की नौकरी संविदा ड्राइवर के तौर पर मुरादाबाद नगर निगम में लग गई.

बाद में वह यूपी के मुरादाबाद के जिलाधिकारी के यहां काम पर लग गया. वहां उस के आचरण को देखते हुए नौकरी स्थाई हो गई. हत्या के समय उस की पोस्टिंग मुरादाबाद की कांठ तहसील के एसडीएम प्रशासन जगमोहन गुप्ता के ड्राइवर के तौर पर थी.

जयदेव ने 23 साल छोटी दीपा कौर से की दूसरी शादी

उस की शादी 18 साल पहले पुष्पा कौर से हुई थी. उस से वह 3 बच्चों का पिता बन गया था. बड़े बेटे का नाम हरनाम सिंह 17 साल, उस से छोटा हरमिंदर सिंह 14 साल और सब से छोटी बेटी जासमीन 10 साल की है. पिछले साल पुष्पा का निधन हो गया था. दरअसल, वह बीते कुछ सालों से दिल की बीमारी से ग्रसित थी. इस के चलते हार्ट अटैक के कारण 25 जुलाई, 2022 को उस की मृत्यु हो गई थी.

अपनी मां की मौत का बच्चों पर काफी गहरा असर हुआ था. बेटा तो इस कारण अपने पिता से ही नाराज हो गया था. उस की शिकायत थी कि पिता ने मां के इलाज में अनदेखी की और वह उन की वजह से ही मर गई. पुष्पा के निधन के कुछ समय बाद ही जयदेव सिंह ने दूसरी शादी की तैयारी शुरू कर दी थी. उस ने दीपा को पसंद किया था, जिस की उम्र मात्र 22 साल थी, जबकि जयदेव सिंह 45 साल का अधेड़ था.

दीपा और उस के परिवार वाले यह जानते थे कि जयदेव सिंह अधेड़ उम्र का बालबच्चे वाला है, इस के बावजूद भी उन्होंने उस से शादी के लिए हामी भर दी. कारण उस की सरकारी नौकरी का होना था. शादी के कुछ दिनों तक तो सब कुछ ठीकठाक चला, उस के बाद दीपा को उस का असली रूप नजर आने लगा. वह एक नंबर का शराबी था और नईनवेली दुलहन को किसी गैरमर्द से बात करना उसे जरा भी पसंद नहीं था. यहां तक कि उस का जवान बेटे से बात करना भी पसंद नहीं था.

इसे ले कर वह उस से काफी नाराज हो जाता था. डांट दिया करता था. यहां तक कि जब वह शराब के नशे में होता था, तब उस की जम कर पिटाई भी कर देता था. एक दिन उस ने बच्चों के सामने ही उस की बेरहमी से पिटाई कर दी थी. वह अपने कमरे में बैठी आंसू बहा रही थी, तभी बच्चों ने आ कर उसे ढांढस बंधाया. उन से उसे हिम्मत मिली और फिर बच्चों के प्रति उस का प्रेम उमड़ आया. वह उन का विशेष खयाल रखने लगी. उन की पसंद का नाश्ता और उन की पसंद का खाना पका कर खिलाने लगी.

बच्चों से दीपा की बढ़ती नजदीकी भी जयदेव को अच्छी नहीं लगती थी. वह चाहता था कि वह जब तक घर में रहे, दीपा उस की बांहों में पड़ी रहे. जबकि दीपा बच्चों के घर में रहने और उन की जरूरतों को पूरा करने को ले कर ऐसा नहीं कर पाती थी.

सौतेले बेटे से हो गया लगाव

एक दिन किसी बात को ले कर जयदेव दीपा की पिटाई कर रहा था, तब बड़े बेटे हरनाम ने उसे आ कर बचाया और पिता को ही डांटते हुए बोला, “अब इसे भी मार डालोगे क्या, एक को तो मार ही चुके हो.”

वह दीपा को अपने पिता से छुड़ा कर कमरे में ले गया. उस के जख्मों का खून साफ कर उस पर दवाई लगाने लगा. दीपा हरनाम के इस व्यवहार से काफी प्रभावित हो गई. सौतेले बेटे से लिपट कर रोने लगी. निहाल भी मां से गले मिल कर रोने लगा.

तभी जयदेव वहां आ गया. उस ने बेटे को दीपा से गले मिलते देखा तो वह और भी आगबबूला हो गया. जयदेव ने उस की भी पिटाई कर दी. पिटने के बाद हरनाम सिंह गुस्से में रुद्रपुर चला गया. उस के जाने के बाद दीपा को दूसरे बच्चों से मालूम हुआ कि जयदीप उस की मां के साथ भी ऐसा ही बर्ताव करता था.

हरनाम सिंह के रुद्रपुर जाने के बाद दीपा ने फोन पर बात की. उस ने पुष्पा की मौत के बारे में पूछा. उस ने बताया कि घर पर ग्लूकोज चढ़ाए जाने के समय उस ने ग्लूकोज की बोतल में शराब का इंजेक्शन दे दिया था. उस के बाद उस की मां की हालत और भी खराब हो गई थी.

                                                                                                                                         क्रमशः

ज्योति ने बुझाई पति की जीवन ज्योति – भाग 4

सीसीटीवी कैमरे लग जाने से ज्योति और संजय डर गए. संजय और ज्योति का मिलन भी बंद हो गया, लेकिन ज्योति शातिरदिमाग की थी. उस ने प्रेमी से मिलन का दूसरा रास्ता निकाल लिया. वह सामान खरीदने के बहाने घर से निकलती और कस्बा के होटल में रूम बुक करा कर संजय को बुला लेती, फिर मिलन कर वापस आ जाती.

घर के बाहर जाने को ले कर ज्योति और प्रदीप में खूब बहस होती और मारपीट भी हो जाती. ज्योति कहती तुम मेरे पांव में बेडिय़ां डालना चाहते हो, लेकिन मैं स्वतंत्र जीना चाहती हूं. मैं तुम्हारा जुल्म बरदाश्त नहीं करूंगी.

घर में कलह के कारण प्रदीप परेशान रहने लगा. वह शराब भी अधिक पीने लगा. संपत्ति को ले कर वह अपने छोटे भाई संदीप चौरिहा से भी भिड़ जाता और मारपीट करता. मां को भी खरीखोटी सुनाता. जमीन के एक टुुकड़े को ले कर उस का विवाद चल रहा था. मां उस टुकड़े को संदीप को देना चाहती थी, जबकि प्रदीप उस पर अपना अधिकार जमा रहा था.

ज्योति अब तक पति की शराबखोरी, मारपीट व शक से ऊब चुकी थी. वह पति से छुटकारा पा कर प्रेमी संजय सिंह के साथ खुशहाल जीवन बिताने के सपने संजोने लगी थी. यही नहीं, वह पति को हलाल कर उस की सरकारी नौकरी तथा संपत्ति पर भी कब्जा करना चाहती थी. इस के लिए वह हर रोज तानेबाने बुनने लगी थी.

इधर ज्योति और प्रदीप में इतनी ज्यादा दरार पड़ गई थी कि उन का झगड़ा हर रोज किसी न किसी बात को ले कर होने लगा था. प्रदीप घर में खाना भी नहीं खाता था और बाजार से खाना ले कर घर आता था. वह पहले शराब पीता, ज्योति को गालियां बकता फिर खाना खाता था.

पति के मर्डर की रची साजिश

17 अप्रैल, 2023 की सुबह अवैध संबंधों को ले कर ज्योति और प्रदीप में खूब झगड़ा हुआ. मारपीट कर जब प्रदीप कालेज चला गया तो ज्योति ने संजय को फोन कर घर बुला लिया. उस ने संजय से स्पष्ट कहा कि वह यदि उसे अपनी बनाना चाहता है तो उसे उस के पति को ठिकाने लगाना होगा. उस की मौत के बाद उसे सरकारी नौकरी तथा संपत्ति मिल जाएगी. फिर वह उस से शादी कर जीवन भर ऐश करेगी.

चूंकि संजय सिंह ज्योति का दीवाना था, इसलिए वह ज्योति के पति प्रदीप चौरिहा की हत्या करने को राजी हो गया. इस के बाद दोनों ने मिल कर हत्या की योजना बनाई. संजय सिंह ने हत्या की इस योजना में अपने दोस्त राघवेंद्र सिंह को भी शामिल कर लिया. वह बांदा जिले के थाना मैलानी के रसड़ा गांव का रहने वाला था. दोस्ती और पैसों के लालच में वह उस का साथ देने को राजी हो गया.

योजना के तहत संजय सिंह ने फोन कर राघवेंद्र सिंह को अतर्रा बुला लिया. फिर दोनों ने मिल कर एक तेजधार वाला चाकू अतर्रा बाजार से खरीदा और उसे सुरक्षित रख लिया. रात 10 बजे दोनों ने शराब पी और होटल में खाना खाया. फिर वह नरैनी रोड आए और ज्योति के फोन का इंतजार करने लगे.

इधर गुस्से में आगबबूला प्रदीप चौरिहा देर शाम खाना व शराब की बोतल ले कर घर आया. कमरे में बैठ कर उस ने शराब पी और ज्योति को खूब गालियां बकीं. उस के बाद वह आधाअधूरा खाना खा कर पलंग पर पसर गया. प्रदीप जब नशे में खर्राटे भरने लगा तो ज्योति ने योजना के तहत सीसीटीवी कैमरे बंद कर दिए और डीवीआर गायब कर दिया.

इस के बाद वह दूसरे कमरे में आ कर लेट गई. उस ने दोनों बेटियों को भी सुला दिया. रात 12 बजे जब सन्नाटा पसर गया, तब ज्योति ने संजय सिंह को फोन कर घर बुलाया. संजय अपने दोस्त राघवेंद्र के साथ घर आया तो ज्योति ने चुपके से पीछे वाला दरवाजा खोल कर उन दोनों को घर के अंदर कर लिया.

रात 2 बजे के लगभग ज्योति चौरिहा, संजय सिंह और राघवेंद्र सिंह प्रदीप के कमरे में पहुंचे. ज्योति और राघवेंद्र सिंह ने गहरी नींद सो रहे प्रदीप के पैर दबोच लिए तथा संजय सिंह ने उस का गला रेत दिया. चूंकि लाश ठिकाने लगाना नामुमकिन था, अत: उन तीनों ने प्लान बी तैयार किया. इस प्लान के तहत संजय सिंह ने ज्योति को दूसरे कमरे में बंद कर दिया, फिर दोनों फरार हो गए.

प्लान के तहत ज्योति ने सुबह दरवाजा पीटना शुरू किया तथा प्रदीप को आवाज दी. उस के बाद ज्योति ने किराएदार राखी राठी को फोन कर बुलाया और बाहर से बंद दरवाजा खुलवाया. राखी के साथ ज्योति जब पति के कमरे में गई तो पलंग पर पति की लाश देख कर वह रोनेधोने का नाटक करने लगी.

21 अप्रैल, 2023 को पुलिस ने हत्यारोपी ज्योति चौरिहा, संजय सिंह तथा राघवेंद्र सिंह को बांदा कोर्ट में पेश किया, जहां से उन को जिला जेल भेज दिया गया. पिता की हत्या व मां के जेल जाने से मासूम दोनों बेटियां सहम गईं. वे दोनों दादी निर्मला देवी के संरक्षण में रह रही हैं.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

देवर के चक्कर में पति को हटाया

अपनों के खून से रंगे हाथ : ताइक्वांडो कोच को मिली सजा – भाग 2

अय्याशी के चक्कर में परिजनों से बेरुखी

उसे हनुमान काफी पसंद आता था. उसे उस ने अपने रूपजाल में फांस लिया था. वह उस के इशारे पर कुछ भी कर गुजरने को हरदम तैयार रहता था. इस के एवज में संतोष शर्मा उस पर दिल खोल कर प्रेम सुख लुटा रही थी. वह किसी न किसी स्पोट्र्स टूर्नामेंट के बहाने जबतब घूमने जाने लगी और अपनी यात्राओं को भागवत कथा या धार्मिक आयोजन बता कर घर वालों से झूठ बोल कर चली जाती थी. जबकि वह अपने आशिक के पास उदयपुर में होती थी. वहां दोनों लिवइन में रहने लगे थे. वहां वह जम कर रंगरलियां मनाने लगी थी.

उस के आचरण में एक तरह से मक्कारी और शातिरानापन आ गया था. वह एक मतलबी और अपने सुख की चाहत में रहने वाली महिला बन चुकी थी. साथ ही परिवार पर अपनी दबंगई दिखाती रहती थी. उस के गुस्सैल स्वभाव से छोटी बहन वंदना, जो उस की सगी देवरानी भी थी, डरती थी. संतोष शर्मा डांटफटकार कर उस से घर के काम करवाती रहती थी. यही नहीं, अपने बच्चों के साथ भी काफी तल्खी से पेश आती थी.

जरा सी गलती हो जाने पर उन को बेल्ट से पीट डालती थी. इसलिए बच्चे भी उस से हमेशा खौफजदा रहते थे. उस के घर से बाहर रहने पर बच्चे ज्यादा खुश रहते थे. वह ससुराल वालों को बेवकूफ बनाने में माहिर हो चुकी थी. भागवत कथा वाचक बन कर कथा सुनाने और रामलीला के किरदार निभाने का दिखावा करती थी. इसलिए घर वालों की निगाह में वह धार्मिक महिला थी. यह कहें कि संतोष शर्मा अपने घर वालों की आंख में धूल झोंक कर ऐशमौज कर रही थी.

कहते हैं न कि हर किसी की कोई न कोई कमजोरी रहती है. संतोष शर्मा की भी एक कमजोरी सोशल साइटों पर फोटो पोस्ट करने और उसे शेयर करने की थी. यही शौक उस के लिए एक दिन मुसीबत बन गया. एक बार उस के बच्चों ने सोशल मीडिया पर संतोष शर्मा की बिंदास अदाओं की तसवीरें देख लीं. वे चौंक गए.

उन्हें भरोसा ही नहीं हुआ कि उस की मां की इस तरह की अश्लील तसवीरें भी हो सकती हैं. उन्होंने पापा को भी वे तसवीरें दिखाईं. वह भी उसे देख कर सन्न रह गया. फोटो देख कर उस के 17 साल के बड़े बेटे अमन और पति बनवारी ने घर में हंगामा खड़ा कर दिया. अमन ताइक्वांडो का उभरता खिलाड़ी भी था. समझदार होने लगा था.

पति ने लगा दी पाबंदी

संतोष शर्मा उस पर पाबंदी लगाने लगी, जिस कारण उस ने नारजागी दिखाई. उस की नाराजगी हनुमान को ले कर भी हुई, जो घर भी आने लगा था. उस के साथ संतोष शर्मा के बढ़ता मेलजोल की जानकारी बापबेटों को हो गई थी. हनुमान जब भी अलवर के गुजुकी क्षेत्र में अपने दोस्त कपिल के कमरे पर आता था, तब संतोष शर्मा उस से मिलने पहुंच जाती थी.

इस तरह ढाई साल का समय कब गुजर गया, पता ही नहीं चला. इस बीच संतोष शर्मा पर पति और बेटे ने घर से बाहर जाने पर रोक लगा दी. एक दिन पति से उस की तकरार हो गई. गुस्से में आ कर बनवारी ने संतोष शर्मा की पिटाई कर दी. पति से पिटने के बाद संतोष शर्मा चोट खाई नागिन बन गई. गुस्से में फुंफकार उठी.

उस घटना के बाद प्रेमी युगल का मेलमिलाप बंद हो गया था. संतोष शर्मा मिलन को तड़प उठी थी. एक दिन मौका पा कर संतोष शर्मा हनुमान से मिली और अपनी परेशानी बताने के साथ ही पति और बेटे को रास्ते से हटाने की साजिश भी रच डाली.

दोनों ने योजना बना कर फरजी आईडी पर 2 सिम खरीद लिए. एक सिम संतोष शर्मा को दे कर दूसरी सिम अपने पास रख लिया. इसी सिम से वे साजिश के बारे में बातचीत करने लगे. एक दिन पक्की योजना बन गई. कब और कैसे वारदात को अंजाम देना है, इस का प्रारूप तैयार हो गया. यहां तक कि सबूत कैसे नष्ट करने हैं, फरार कैसे होना है, कहां रहना है, वारदात के बाद फरारी कहां काटनी है और वारदात के सबूत कैसे नष्ट करने हैं? वगैरह वगैरह…!

इसी के साथ संतोष शर्मा के प्रेमी ने 30 सितंबर, 2017 को औनलाइन शौपिंग वेबसाइट से 1,260 रुपए में जानवरों को काटने का एक बड़ा चापड़ (चाकू) भी मंगवा लिया. चापड़ 31 सेंटीमीटर लंबा और 4 सेंटीमीटर चौड़ा था. वह एक तरफ से धारदार तथा दूसरी तरफ से कांटेदार था. इस के अलावा शरीर को छलनी करने के लिए अलवर के केडलगंज से 2 और बड़े चाकू खरीद लिए थे. उन की योजना बापबेटे की एक साथ हत्या करने की थी.

वारदात की रच ली पूरी साजिश

हत्या के बाद पुलिस को कोई निशान और सुराग नहीं मिले, इस के लिए दस्ताने (ग्लव्ज) ला कर भी रख लिए थे. वारदात को अंजाम देने के लिए उन्होंने गांधी जयंती 2 अक्तूबर, 2017 की तारीख तय की थी. उस से 2 दिन पहले ही हनुमान उर्फ हनी उदयपुर से अलवर आ गया था.

संतोष शर्मा अपने प्रेमी से अकसर फरजी कागजात पर लिए गए सिम का ही इस्तेमाल करती थी. जरूरत के अनुसार उसे अपने मोबाइल में लगा लेती थी. तय योजना के मुताबिक संतोष शर्मा का आशिक अपने सीकर वाले दोस्त से नींद की गोलियां भी ले आया था. गोलियां संतोष शर्मा को सौंपते हुए शाम का खाना बनाते समय सिलबट्ïटे पर चटनी बनाते समय उस में पीस देने और रायते में डाल देने के लिए कहा था.

सब कुछ योजना के अनुसार चल रहा था. पहले संतोष शर्मा ने प्रेम से बड़े बेटे को खाना खिलाया. इसी दौरान संतोष शर्मा की बहन वंदना ने उस से कुछ पूछा तो उस ने उसे डांट कर भगा दिया. रात को पौने 10 बजे चुके थे. संतोष शर्मा का प्रेमी उस के घर पहुंच गया था. संतोष शर्मा मुसकराती हुई बोली, ‘‘क्या हनी, इतनी जल्दी कैसे आ गए?’’

हनुमान ने आशिकाना अंदाज में जवाब दिया, ‘‘तुम से दूरी बरदाश्त नहीं हो रही थी.’’

जबाव में हंसती हुई संतोष शर्मा बोली, ‘‘सब्र करो वरना जल्दबाजी में सारा खेल बिगड़ जाएगा. रास्ते के कांटे हटाने के बाद तो मैं हमेशा के लिए तुम्हारी हो जाऊंगी.’’

इसी के साथ संतोष शर्मा ने उसे रात को एक बजे वापस आने को कहा. वह फ्लाइंग किस दे कर वापस चला गया. रात को एक बजे अपने 2 साथियों कपिल और दीपक के साथ संतोष शर्मा के घर जा पहुंचा. संतोष शर्मा छत पर टहल रही थी. उस ने हनी को इशारा किया और नीचे आ कर चुपचाप घर का मेनगेट खोल कर तीनों को घर में बुला लिया. संजना ने इशारे से बता दिया कि उस का पति और बड़ा बेटा कहां सो रहे हैं. हनुमान और उस के दोनों साथी अपनेअपने हाथों में दस्ताने पहन कर उस कमरे में गए, जहां जीरो वाट के बल्ब की हल्की रौशनी थी.

प्यार में 5 जनों का कत्ल

सब से पहले हनुमान ने संतोष शर्मा के पति बनवारी लाल (42 वर्ष) के गले को धारदार बड़े चाकू से काट दिया. जबकि उस के दोनों साथियों ने बनवारी के जिस्म को चाकुओं से गोद डाला. उस की मौत हो जाने के बाद संतोष शर्मा अमन के पास गई. उस दिन उस की तबीयत खराब थी, इसलिए उस ने रायता नहीं पीया था.

आहट पा कर उस की नींद खुल गई और उस ने उठने की कोशिश की, लेकिन तभी हनी और उस के साथियों ने उसे भी दबोच लिया और हनी ने उस का गला रेत दिया. उस के दोनों साथियों ने अमन को भी चाकुओं से गोदगोद कर ठिकाने लगा दिया.