Punjab News : ड्रग तस्कर पंजाब पुलिस की लेडी कांस्टेबल

Punjab News : 34 वर्षीय लेडी कांस्टेबल अमनदीप कौर पर अथाह पैसा कमाने का ऐसा जुनून चढ़ा कि वरदी की आड़ में वह ड्रग्स की तस्करी करने लगी. मोटी कमाई कर उस ने अपने थार, औडी कार, कोठी पाने के शौक पूरे किए. यह महिला कांस्टेबल जिन शातिर तरीकों से नशे की तस्करी करती थी, उन्हें भेद पाना पुलिस के लिए भी आसान न था. आखिर एक दिन वह पुलिस के शिकंजे में ऐसी फंसी कि…

‘बाप बड़ा ना भैया, सब से बड़ा रुपैया.’ यह कहावत इसलिए कही गई है क्योंकि आज के जमाने में अधिकांश लोगों की नजरों में पैसा ही सब कुछ है. आप के पास पैसे हैं तो आप की इज्जत है और यदि पैसे नहीं हैं तो उन लोगों की नजरों में आप कुछ भी नहीं हैं. हमारे समाज के अधिकतर लोगों की सब से बड़ी भूख पैसा हो चुकी है. अपनी अतृप्त भूख को मिटाने के लिए ऐसे लालची लोग कुछ भी करने, कर गुजरने में बिलकुल भी गुरेज नहीं करते. इन में से कुछ लोग अपना धर्म, ईमान और वरदी तक बेच देते हैं, क्योंकि उन का धर्म और ईमान केवल पैसा ही होता है.

पंजाब पुलिस की महिला कांस्टेबल अमनदीप कौर की सोच भी कुछ ऐसी ही थी. 34 वर्षीय अमनदीप कौर बचपन से ही अत्यधिक महत्त्वाकांक्षी, गुस्सैल और खूबसूरत होने के साथसाथ बड़े तेज दिमाग की भी थी. पंजाब पुलिस ने 2 अप्रैल, 2025 को अमनदीप कौर को 17.71 ग्राम हेरोइन ले जाने के आरोप में जब गिरफ्तार किया तो पूरे पंजाब में ही नहीं बल्कि पूरे देश में हलचल सी मच गई थी. पंजाब पुलिस ने एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) के साथ मिल कर बठिंडा में बादल फ्लाईओवर के पास पंजाब पुलिस की कांस्टेबल अमनदीप कौर की एसयूवी को पकड़ा.

वह महिला कोई और नहीं बल्कि अमनदीप कौर थी. वह पंजाब पुलिस में महिला कांस्टेबल थी. उस के साथ उस समय एसयूवी गाड़ी में जसवंत सिंह नाम का एक व्यक्ति भी था. उस वाहन की तलाशी लेने पर पंजाब पुलिस को अमनदीप कौर के कब्जे से 17.71 ग्राम हेरोइन बरामद हुई. सोशल मीडिया पर अमनदीप कौर के इंस्टाग्राम पर 30 हजार से भी अधिक फालोवर्स हैं, जहां पर वह अपनी शानदार जीवनशैली को दिखाने वाली रील्स और पोस्टें रोज पोस्ट करती थी. अमनदीप कौर ने अपनी थार एसयूवी के कई वीडियो भी अपने इंस्टाग्राम पर पोस्ट किए हैं. अपनी थार एसयूवी में उस ने पंजाब पुलिस का स्टिकर भी लगाया हुआ था, ताकि पुलिस की नाकेबंदी के दौरान जांच से बचा जा सके.

कौन है महिला पुलिस कांस्टेबल अमनदीप कौर

अमनदीप कौर की गिरफ्तारी के बाद उस की लोकप्रियता इतनी बढ़ गई है कि अब उस के इंस्टाग्राम पर 12 हजार फालोवर्स और बढ़ चुके हैं. अमनदीप के प्रोफाइल में 300 से भी अधिक रील्स हैं, जिन्हें हजारों लाइक्स और शेयर मिले हैं. उसे पंजाब की इंस्टा क्वीन के नाम से भी जाना जाता है. वह 2 लाख रुपए की घड़ी, 85 हजार रुपए का काला चश्मा यूज करती है. पंजाब पुलिस की इस महिला कांस्टेबल के पास लग्जरी थार, वरना व औडी जैसी कीमते कारें भी हैं. इस के अलावा उस की बठिंडा में करोड़ों रुपए की आलीशान कोठी भी है.

उस की भूरीभूरी आंखें और खूबसूरत चेहरा, होंठों पर मुसकान ऐसी होती कि पुलिस का बड़े से बड़ा अफसर भी प्रभावित हो जाया करता था. अपनी पोस्ट व रील्स पर वह अपने आप को निर्भीक, निडर और दिलेर दिखाया करती थी. अपनी रील्स व पोस्टों पर वह कभीकभी एके-47 राइफल ले कर खींची गई फोटो भी शेयर करती थी और अपना सीना तान कर वह खुद को पंजाब की लेडी सिंघम के नाम से प्रदर्शित किया करती थी. अमनदीप कौर का जन्म पंजाब में बठिंडा के चक फतेसिंह वाला गांव के एक दलित परिवार में हुआ था. उस के पिता एक राजमिस्त्री हैं और भाई एक निजी कंपनी में काम करता है. अमनदीप कौर की एक बड़ी बहन भी है, जोकि शादीशुदा है.

सन 2011 में अमनदीप कौर की नियुक्ति पंजाब पुलिस में बतौर कांस्टेबल हुई थी. उस का विवाह वर्ष 2015 में सुनील कुमार (परिवर्तित नाम) के साथ हुआ था. सुनील बठिंडा के अमरपुरा बस्ती का रहने वाला था. अमनदीप और सुनील की लव मैरिज हुई थी. सुनील एक फैक्ट्री में नौकरी करता था. सुनील के परिवार में उस के मम्मीपापा के अलावा 2 बहनें थीं, जिन के विवाह हो चुके थे. विवाह के बाद जब अमनदीप अपनी ससुराल आई तो उसे इस बात की राहत तो थी कि उस की ससुराल में ननद, देवर, जेठजिठानी आदि का झंझट तो बिलकुल भी नहीं था.

असल में अमनदीप को पुरानी रुढि़वादी परंपराओं से बचपन से ही नफरत थी. वह स्वच्छंद रूप में ऐशोआराम से जीना पसंद करती थी. अमनदीप कौर उन बहुओं में से थी, जो अपनी ससुराल में बूढ़े सासससुर, बुजुर्गों को आदर देना, छोटों को स्नेह व प्यार करना, अपनी मर्यादा में रहना जाहिल और अनपढ़ औरतों का काम समझती थी. इसीलिए न तो अमनदीप के दिल में अपने पति व सासससुर के लिए आदर था और न ही वह उन का सम्मान करना चाहती थी. जब कभी उस की नजर अपने बूढ़े सासससुर पर पड़ती थी तो वह उन दोनों के लिए केवल मृत्यु की कामना ही करती थी.

अमनदीप अपने पति सुनील से भी खुश नहीं थी. हर समय वह उसे उलाहना देती रहती थी कि तुम तो बस एक कुएं के मेंढक की तरह हो. अभी भी छोटीमोटी नौकरी करते हो. छोटे काम में कम आमदनी होती है, कोई बड़ा धंधा करोगे तो पैसे भी ज्यादा मिलेंगे. देखो, यदि तुम्हें पैसों की जरूरत है तो मैं तुम्हारी मदद कर सकती हूं, पर मुझे तुम्हारी यह छोटी नौकरी बिलकुल भी पसंद नहीं है. इस पर सुनील उसे समझाता कि वक्त आने पर सब कुछ बदल भी जाता है.

वह अमनदीप को समझाता कि वह अपने घर का इकलौता बेटा है, इसलिए वह अपने मम्मीपापा से बहुत प्यार करता है. उन की इज्जत करता है. वह अमनदीप से भी कहता कि तुम्हें भी मेरे मम्मीपापा के साथ इज्जत से पेश आना चाहिए, लेकिन अमनदीप को तो अपने पति और सासससुर से घोर नफरत सी होने लगी थी. इधर दूसरी ओर अमनदीप कौर अब कभीकभार फेसबुक और इंस्टाग्राम पर अपनी रील भी बनाने लगी थी. सुंदर तो वह थी ही, धीरेधीरे वह अब पब्लिक और पुलिस के उच्च अधिकारियों से भी नजदीकियां बनाने लगी थी. अब अमनदीप को ऐसा लगने लगा था कि उस की अब गरीब पति से ज्यादा निभने वाली नहीं है, इसलिए धीरेधीरे उस ने अब सुनील और उस के परिवार से दूरियां बनानी शुरू कर दी थीं.

अमनदीप कौर वक्तबेवक्त सुनील से झगडऩे भी लगी थी. लेकिन सुनील ने उस के साथ प्यार किया था और फिर प्रेम विवाह भी किया था, इसलिए वह इतनी दुश्वारियां होने के बावजूद भी अमनदीप से प्यार करता था. जब अमनदीप को लगा कि पति से उस का ऐसे पल्लू छूटने वाला नहीं है तो उस ने अब आर या पार करने की ठान ली थी. उस ने अपने चहेते उच्च पुलिस अधिकारियों को झूठी कहानी बना कर अपने पक्ष में कर लिया था. एक आईपीएस, अधिकारी जो अमनदीप कौर का काफी करीबी था, ने एक दिन सुनील को अपने औफिस में ही तलब कर लिया था.

उस ने सुनील को धमकी दी कि तुम्हारे खिलाफ पत्नी से हिंसा, प्रताडऩा के केस मुझे मिले हैं. यदि तुम खुद अमनदीप के रास्ते से नहीं हटे तो तुम्हारे खिलाफ पत्नी के विरुद्ध हिंसा, दहेज अधिनियम व प्रताडऩा की ऐसी धाराएं लग जाएंगी कि तुम सारी जिंदगी जेल में ही सड़ते रह जाओगे. इस के बाद अमनदीप ने भी सुनील को मानसिक रूप से इतना प्रताडि़त किया कि उस ने खुद ही अपना रास्ता बदल दिया और खुशीखुशी अमनदीप से तलाक ले लिया.

कोरोना काल में एंबुलेंस ड्राइवर से हुई सेटिंग

अपने पति सुनील से अलग होने के बाद कुछ समय तक अमनदीप बेचैन सी रही, परंतु फिर उस ने इस घटना को हमेशाहमेशा के लिए भुला दिया. इस के बाद अमनदीप कौर की जिंदगी मैं बलविंदर सिंह उर्फ सोनू आया. यह बात वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के दौरान की है. बलविंदर उर्फ सोनू एक एंबुलेंस ड्राइवर था. दोनों के बीच जल्द ही करीबियां और नजदीकियां बढ़ गईं और फिर पुलिस की वरदी व एंबुलेंस के भरोसेमंद चोले का फायदा उठाते हुए उन दोनों ने ड्रग्स का गैरकानूनी धंधा शुरू कर दिया.

खास बात तो उस में यह थी कि एंबुलेंस के जरिए नशीले पदार्थों की सप्लाई और तस्करी करने का यह चालाकी भरा विचार भी अमनदीप कौर का ही था. एबुलेंस ड्राइवर बलविंदर सिंह पहले से ही शादीशुदा था. उस का विवाह अक्तूबर 2014 में गुरमीत कौर के साथ हुआ था. उस की 2 बेटियां भी थीं. अब जब अमनदीप कौर और बलविंदर सिंह मिल कर ड्रग्स बेचने का धंधा करने लगे थे तो अमनदीप कौर का बलविंदर सिंह के घर पर आनाजाना काफी बढ़ गया, जिस के बाद आए दिन अमनदीप कौर के कारण बलविंदर सिंह और उस की पत्नी गुरमीत कौर के बीच झगड़ा और मारपीट होने लगी थी. जिस के बाद अमनदीप और बलविंदर सिंह ने मिल कर गुरमीत कौर और उस की दोनों बेटियों को घर से ही मारपीट पर निकाल दिया था.

गुरमीत कौर ने जब पंजाब पुलिस के अधिकारियों से अमनदीप कौर और बलविंदर के ड्रग्स के अवैध धंधे, उन के अवैध रिश्तों व खुद के साथ मारपीट कर बेटियों सहित घर से निकाल बाहर करने की शिकायत दर्ज की तो अमनदीप कौर ने पुलिस के अधिकारियों से अपने अच्छे संबधों और संपर्क का लाभ उठाया. फिर उस ने उलटे गुरमीत कौर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करवा कर उस का ही उत्पीडऩ करना शुरू कर दिया. गुरमीत कौर को जब उस के पति बलविंदर ने घर से बाहर दिया तो गुरमीत कौर ने अपना जीवनयापन करने के लिए अपनी एक सहेली के साथ मिल कर चाय का एक खोखा खोल लिया और साथ ही अपने साथ हुए अन्याय के खिलाफ आवाज उठानी भी जारी रखी.

गुरमीत कौर की आवाज को दबाने के लिए अमनदीप कौर ने अपनी चालबाजी और पुलिस के रसूख का इस्तेमाल कर पुलिस वालों को कह कर गुरमीत कौर के चाय के खोखे में आधा किलोग्राम डोडा चूरा रखवा दिया और उस के बाद खोखे में पुलिस द्वारा ही रेड डलवा दी. पुलिस ने गुरमीत कौर को गिरफ्तार भी कर लिया. जब गुरमीत कौर ने पुलिस के उच्च अधिकारियों से संपर्क कर उन्हें बताया कि वह खुद 2 दिन से बीमार होने के कारण अपने खोखे पर गई ही नहीं थी तो फिर वहां पर प्रतिबंधित डोडा चूरा भला कैसे आ सकता है. गुरमीत कौर ने पुलिस अधिकारियों को यह भी बताया कि उस ने खोखे के बाहर गुप्त रूप से सीसीटीवी भी लगवा रखा है, उस की जांच होनी चाहिए, ताकि सच का खुलासा हो सके.

जब सीसीटीवी की पुलिस टीम द्वारा जांच की गई तो खोखे में प्रतिबंधित डोडा चूरा रखते हुए पुलिस के 2 कांस्टेबल दिखाई दिए. उस के बाद ही गुरमीत कौर उस केस से बरी हो पाई थी. अमनदीप कौर का जब यह दांव फेल हो गया तो उस ने गुरमीत कौर के खिलाफ उस के ही घर से चोरी करने की रिपोर्ट दर्ज करवा डाली थी. अमनदीप कौर इतनी शातिर थी कि उस ने अपने हुस्न के जाल में डाक्टर से ले कर वकील तक को फांस लिया था. कुछ साल पहले अमनदीप को अपने जाल में फंसा कर उस से पूरे 20 लाख रुपए ठग लिए थे. अमनदीप कौर ने तो पुलिस विभाग के घोर प्रतिद्वंदी वकील तक को नहीं छोड़ा और वकील को भी ब्लैकमेल कर पूरे 5 लाख रुपए ऐंठ लिए.

सिद्धू मूसेवाला फेमिली से क्या था कनेक्शन

बठिंडा में हेरोइन तस्करी में गिरफ्तार पंजाब पुलिस की कांस्टेबल अमनदीप कौर जब मानसा में तैनात थी, तब पंजाब पुलिस द्वारा पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला परिवार की सुरक्षा में लगाया गया था. अमनदीप के सिंगर सिद्धू मूसेवाला के साथ कई फोटो भी हैं, जो उस ने अपने स्टेटस में लगा रखे थे. जब अमनदीप कौर सिंगर मूसेवाला के घर पर तैनात थी, तब उस का प्रेमी और साथी बलविंदर सिंह उर्फ सोनू उस से मिलने हर दूसरेतीसरे दिन आता रहता था. मूसेवाला परिवार के सिक्योरिटी इंचार्ज उस समय राजिंदर सिंह थे, जो अमनदीप की हर गतिविधि पर पैनी नजर रख रहे थे.

इसलिए सिक्योरिटी इंचार्ज राजिंदर सिंह ने जब अमनदीप कौर की संदिग्ध गतिविधियां नोटिस कीं तो उन्होंने इस की शिकायत उस समय मानसा के एसएसपी रहे नानक सिंह से की थी. उस के बाद एसएसपी ने ठीक तरह से ड्यूटी न निभाने के कारण अमनदीप कौर को मूसेवाला परिवार की सुरक्षा से तत्काल हटा दिया था. ड्रग तस्करी से आमदनी बढऩे के बाद अमनदीप कौर के शौक राजाओं जैसे हो गए थे. यहां तक चीन के किंग की पसंद रहे शिहत्जु नस्ल के कुत्ते को भी उस ने पाल रखा था. यह डौगी तिब्बत ओरिजिन का होता है और भारत में इस का ब्रीड 60 हजार रुपए से ले कर डेढ़ लाख रुपए के बीच मिलती है.

दरअसल, इस विशेष प्रजाति के डौगी को तिब्बत के लोग चीन के राजा को खुश करने के लिए भेंट किया करते थे. इस विशेष डौगी की देखभाल भी नियमित रूप से करनी होती है. इस के केयर के लिए लगभग 7 हजार से 10 हजार रुपए महीने का खर्च करना पड़ता है. इस विशेष डौगी के खानपान के साथसाथ इन के बालों के हेयरस्टाइल तक का विशेष ध्यान रखा जाता है. क्योंकि इस की आंखों के आसपास के बाल बहुत जल्दी बढ़ते हैं और इस की आंखों को नुकसान हो जाता है.

अमनदीप कौर की रील में अकसर उस के फालोअर्स अमनदीप के साथ उस के इस डौगी को भी देखते रहते थे. अमनदीप की बहुत सी रील्स में इस डौगी को अमनदीप कौर की बठिंडा वाली कोठी में ही देखा जाता था. फिलहाल पुलिस ने अमनदीप की इस कोठी को सील कर रखा है. डौगी अभी कहां पर है, कोठी के अंदर है, इसे रेस्क्यू किया गया है या अमनदीप ने इस डौगी को किसी को दे दिया है, इस की जानकारी अभी पुलिस विभाग को भी नहीं है. अमनदीप को रील बनाने का भी काफी शौक था. खुद को दिलेर कहलवाती, जब वह एके-47 हाथ में ले कर निकलती थी तो उस के फालोअर्स ने उसे लेडी सिंघम का नाम ही दे डाला था. यह लेडी सिंघम तो पैसे कमाने के चक्कर में नटवरलाल से भी चार कदम आगे निकल गई थी.

ऐसे आई अमनदीप पुलिस गिरफ्त में

पनी रील्स और रियल लाइफ में हेरोइन की तस्करी के जरिए उस ने करोड़ों रुपए भी कमा डाले थे. परंतु कहते हैं कि अपराधी चाहे कितना ही चुस्त और चालाक क्यों न हो, एक न एक दिन उस के उन्हीं कोमल हाथों में पुलिस ने हथकड़ी पहना ही दी. लेडी कांस्टेबल अमनदीप कौर मानसा में तैनात थी, मगर वर्तमान में वह बठिंडा पुलिस लाइन से अटैच की गई थी. पंजाब पुलिस को कुछ दिनों से शिकायत मिल रही थी कि कुछ पुलिसकर्मी नशे की तस्करी में लिप्त हैं, जिन में एक लेडी पुलिस कांस्टेबल भी शामिल है, जोकि काले रंग की थार गाड़ी से चलती है और खुद भी काफी शानोशौकत से रहती है.

इधर भूरी आंखों वाली लेडी कांस्टेबल अमनदीप कौर अपने काले रंग की थार से हेरोइन की बिक्री के लिए अपने घर से निकल पड़ी थी. पुख्ता सूचना के आधार पर वर्धमान पुलिस चौकी के इंचार्ज एएसआई मंजीत सिंह और एंटी नारकोटिक्स ब्यूरो की टीम ने साझा औपरेशन के तहत बठिंडा के बादल रोड पर पहले से ही नाकाबंदी कर ली थी. इस दौरान पुलिस टीम ने लाडली चौक की तरफ से एक काले रंग के थार गाड़ी को रुकने का इशारा किया.

रंगबाजी में शातिर लेडी कांस्टेबल अमनदीप कौर कार के रुकते ही कार से उतरी और उस ने खुद का परिचय पंजाब की लेडी सिंघम के तौर पर दिया. पुलिस द्वारा पूछताछ करने पर उस ने पहले तो पुलिस को आंखें दिखाईं, फिर धौंस भी दे डाली और उस के बाद अपने 2 लाख रुपए के फोन से अपने खासमखासों को फोन लगाने लगी और पुलिस टीम को उन की वरदी उतरवाने की धमकी देने लगी. लेकिन जब पुलिस टीम उस से विचलित नहीं हुई तो वह भागने लगी.

पुलिस टीम पहले से ही मुस्तैद थी और पुलिस ने पीछा कर अमनदीप कौर को दबोच लिया. जब टास्क फोर्स के साथ मौजूद महिला पुलिसकर्मियों ने उस की अच्छी तरह से क्लास ली और गरदन दबोची तो लेडी कांस्टेबल अमनदीप कौर हाथ जोड़ कर सौरीसौरी बोलने लगी थी. पुलिस टीम ने अमनदीप कौर की उपस्थिति में जब गाड़ी की तलाशी ली तो गाड़ी के गियरबौक्स से 17.71 ग्राम हेरोइन बरामद हुई. लेडी कांस्टेबल अमनदीप कौर पर आर्टिकल 311 के तहत काररवाई की गई. मानसा पुलिस द्वारा अमनदीप कौर को तुरंत नौकरी से डिसमिस कर दिया गया.

लेडी कांस्टेबल अमनदीप कौर की 2015 में बठिंडा के पास शादी हुई थी. इस पर यह आरोप है कि इस के पति ने एक दिन एक एसएचओ के साथ इसे संदिग्ध हालत में पकड़ लिया था तो इस ने फिर अपनी ससुराल छोड़ दी. इस के बाद अमनदीप मुक्तसर के चक्क सिंह वाला में एक युवक के साथ लिवइन रिलेशनशिप में रहने लगी. फिर वह उस का उत्पीडऩ करने लगी थी. उस युवक ने जब उस का विरोध किया तो अमनदीप कौर ने उस युवक के खिलाफ रेप का पर्चा दर्ज करवा दिया और उसे जेल भिजवा डाला था.

बलविंदर सिंह की पत्नी ने लगाए बड़े आरोप

पंजाब के बहुचर्चित हेरोइन तस्करी के आरोपी अमनदीप कौर व उस के प्रेमी बलविंदर सिंह उर्फ सोनू की पत्नी गुरमीत कौर ने मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर लाइव आ कर अमनदीप कौर व अपने पति बलविंदर सिंह उर्फ सोनू के ऊपर कई सनसनीखेज दावे और आरोप लगाए हैं. गुरमीत कौर ने दावा किया कि बठिंडा पुलिस लाइन या आसपास पंजाब पुलिस में जा कर यदि आप किसी से भी पूछेंगे कि ‘मेरी जान’ के नाम से पुलिस महकमे में कौन मशहूर है तो सभी की जुबान से केवल एक ही नाम निकलेगा और वह है अमनदीप कौर. अमनदीप के पुलिस लाइन में प्रवेश करते ही चारों तरफ से केवल एक ही आवाज सुनाई देती थी कि ‘मेरी जान’ आ गई.

गुरमीत कौर ने इस से आगे यह भी आरोप लगाया कि हेरोइन तस्करी में गिरफ्तार अमनदीप कौर अधिकतर मैडिकल लीव पर रहा करती थी. यह अपनी ड्यूटी कम ही जाया करती थी. दफ्तर से छुट्टी ले कर अमनदीप कौर मेरे पति बलविंदर सिंह के साथ हेरोइन खरीदने निकल जाया करती थी. अमनदीप हेरोइन खरीदती थी और बलविंदर का काम हेरोइन को घर में ला कर उस की पुडिय़ा बना कर बेचने का काम होता था. गुरमीत कौर ने आगे इन दोनों पर आरोप लगाते हुए कहा कि इन दोनों ने मेरे घर पर कब्जा जमा लिया था, तब मैं ने इन की शिकायत पुलिस के आला अधिकारियों से की.

इस की रिपोर्ट दर्ज कराई तो इस के बाद इन दोनों ने मिल कर मुझे ही मेरे घर से निकाल दिया था. उस के बाद मैं ने यहां पर भी काम करने की कोशिश की, लेकिन अमनदीप कौर ने मुझे यहां पर भी कोई काम नहीं करने दिया. उस के बाद मैं 2 साल के लिए दुबई नौकरी करने चली गई. मैं जब दुबई से यहां पर वापस लौटी तो इन दोनों ने हमारा घर बेच दिया और बठिंडा के विराट ग्रीन में 2 करोड़ रुपए की एक कोठी खरीद ली. गुरमीत कौर ने आगे आरोप लगाते हुए बताया कि जैसे ही उस के पति बलविंदर सिंह उर्फ सोनू को अमनदीप कौर के पुलिस द्वारा गिरफ्तार होने के बारे में खबर हुई तो वह घर से भाग गया. मेरे पति बलविंदर सिंह की सिरसा (हरियाणा) में बहुत पहचान है, क्योंकि वह वहां पर हेरोइन बेचा करता था.

गुरमीत कौर ने आगे यह भी बताया कि बलविंदर के सिरसा एक गन हाउस के मालिक के साथ से अच्छे संबंध रहे हैं, जिस के दम पर उस ने अवैध असलहा भी लिया हुआ है. उस ने आगे यह आरोप भी लगाया कि सिरसा के नानकपुर में बलविंदर सिंह फायरिंग भी कर चुका है. पंजाब की इंस्टा क्वीन को कोर्ट ने भेजा जेल पंजाब में इंस्टा क्वीन के नाम से मशहूर पंजाब पुलिस की लेडी कांस्टेबल अमनदीप कौर को ज्यूडिशियल कस्टडी में भेज दिया गया है. अमनदीप कौर को 2 अप्रैल को हेरोइन के साथ पंजाब की विशेष पुलिस टीम द्वारा गिरफ्तार किया गया था. 8 अप्रैल, 2025 मंगलवार को 5 दिन का रिमांड खत्म होने के बाद उसे बठिंडा जिला कोर्ट में पेश किया गया था.

इस दौरान टाइट सिक्योरिटी में अमनदीप कौर को कोर्ट में लाया गया. जिला जज ने सुनवाई के बाद उसे ज्यूडिशियल कस्टडी में भेज दिया. पुलिस ने ज्यूडिशियल रिमांड हासिल करने के बाद मीडिया को बताया कि अब तक की जांच में अमनदीप कौर से कुछ महत्त्वपूर्ण जानकारी हासिल हुई है. अमनदीप कौर के साथी बलविंदर सिंह उर्फ सोनू को कथा लिखे तक गिरफ्तार नहीं किया जा सका था. उस की गिरफ्तारी के लिए दबिश जारी थी. Punjab News

 

 

मुंगेर गोलीकांड : लेडी सिंघम लिपि सिंह का एक्शन रहा कहीं महीनों तक

Bihar News : पूर्व आईएएस अधिकारी मौजूदा सांसद रामचंद्र प्रसाद सिंह की बेटी आईपीएस लिपि सिंह ने एक तेजतर्रार पुलिस अफसर के रूप में अपनी पहचान बनाई थी. लोग उन्हें लेडी सिंघम के नाम से जानते थे, लेकिन मुंगेर गोलीकांड उन के गले की ऐसी हड्डी बना कि…

जयकारा लगाते हुए माता के भक्त दुर्गा मां की प्रतिमा विसर्जन के लिए दीनदयाल उपाध्याय चौक से बाटला चौक की ओर मस्ती में बढ़ते जा रहे थे. उस वक्त रात के साढ़े 11 बज रहे थे. सैकड़ों भक्तों के पीछेपीछे सीआईएसएफ के जवान और जिले के कई थानों की फोर्स मार्च करती हुए बढ़ रही थी. माता के भक्तों पर पुलिस का दबाव था कि वे जल्द से जल्द मूर्ति विसर्जित कर शहर को भीड़ से मुक्ति दें, ताकि चल रही चुनाव प्रक्रिया आसानी से कराई जा सके. हालांकि मूर्ति विसर्जन कराने के लिए पुलिस के पास 2 दिनों का पर्याप्त समय था, इस के बावजूद पुलिस जल्दबाजी में थी कि जल्द से जल्द मूर्ति विसर्जित करा कर फुरसत पा ली जाए.

दरअसल, पुलिस का भारी दबाव भक्तों पर इसलिए भी था क्योंकि शहर में चुनाव का दौर चल रहा था, दूसरे कोरोना प्रोटोकाल भी. भीड़भाड़ अधिक होने से कोरोना की महामारी फैलने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता था. इसलिए एसपी लिपि सिंह चाहती थीं कि सब कुछ शांतिपूर्वक संपन्न हो जाए. भक्त माता का जयकारा लगाते हुए आगे बढ़ते जा रहे थे. लेकिन पुलिस के भारी दबाव से अचानक माहौल गरमा गया और भक्तों की ओर से किसी ने पुलिस पर पत्थर उछाल दिया. वह पत्थर एक पुलिस वाले के सिर पर जा गिरा और वह जख्मी हो गया. एक तो पुलिस पहले से ही माता के भक्तों से नाराज थी. साथी को चोटिल देख कर पुलिस फोर्स आपे से बाहर हो गई.

गुस्साई फोर्स ने भक्तों पर लाठियां बरसानी शुरू कर दीं. अचानक लाठीचार्ज से भक्त मूर्ति को चौक के बीचोंबीच छोड़ जान बचा कर इधरउधर भागने लगे और आत्मरक्षा में पुलिस पर पत्थर फेंकने लगे. जवाबी काररवाई में पुलिस ने हवाई फायर झोंक दिए. गोलियों की तड़तड़ाहट से भक्तों की भीड़ बेकाबू हो गई और फिर इधरउधर भागने लगी. इसी भगदड़ में 21 साल के युवक अनुराग कुमार पोद्दार की गोली लगने से मौत हो गई. साथी की मौत होते ही माहौल और बिगड़ गया. शहर में अशांति की आग फैल गई. आग की लपटों पर काबू पाने के लिए रातोंरात शहर भर में चप्पेचप्पे पर भारी फोर्स लगा दी थी. जैसेतैसे रात बीती. पुलिस ने फोर्स के बल पर उपद्रवियों पर काबू तो पा लिया था, लेकिन माहौल तनावपूर्ण बना हुआ था.

बिगडे़ माहौल के लिए शहरवासी पुलिस कप्तान लिपि सिंह को दोषी मान रहे थे. उन का कहना था पुलिस फोर्स के पीछे चल रही एसपी लिपि सिंह के आदेश पर ही पुलिस ने गोली चलाई थी, जिससे एक युवक की मौत हुई थी. यह घटना बिहार के मुंगेर जिले के थाना कोतवाली क्षेत्र में 26 अक्तूबर, 2020 की रात में घटी थी. अगले दिन मृतक अनूप पोद्दार के पिता की तहरीर पर कोतवाली थाने में धारा 304 आईपीसी के साथ मुकदमा दर्ज कर लिया गया. इस के अलावा पब्लिक की ओर से 6 और मुकदमे दर्ज किए गए. मुकदमा दर्ज तो कर लिया गया, लेकिन इस काररवाई से उपजी चिंगारी अभी भी सुलग रही थी. कहने का मतलब यह है कि मुकदमा दर्ज होने के बावजूद आक्रोशित जनता एसपी लिपि सिंह को गिरफ्तार करने की अपनी मांग पर अड़ी हुई थी.

जिस का खतरनाक नतीजा 29 अक्तूबर को वीभत्स तरीके से सामने आया, जिस की कल्पना किसी ने सपने में भी नहीं की थी. पुलिसिया काररवाई से असंतुष्ट जनता ने पूरबसराय थाने को आग के हवाले कर दिया. यहां तक कि एसपी कार्यालय में काम अवरुद्ध कर दिया. जब मामले की जानकारी डीआईजी मनु महाराज को मिली तो भारी फोर्स सहित वह मुंगेर जा पहुंचे और कानूनव्यवस्था अपने हाथों में ले कर दीनदयाल उपाध्याय चौक से बाटला चौक तक पैदल फ्लैग मार्च किया. फ्लैग मार्च के दौरान नागरिकों से अपील की गई कि कानून अपने हाथों में न लें, पुलिस को अपने तरीके से काम करने दें, मृतक के साथ न्याय होगा, कानून पर विश्वास रखें.

उन की अपील का नागरिकों पर गहरा असर पड़ा और वे अपनेअपने घरों को लौट गए. इस पर पुलिस की ओर से उपद्रवियों पर कुल 9 मुकदमे दर्ज किए गए. शहर का माहौल बुरी तरह खराब हो गया था. घटना के लिए एसपी लिपि सिंह को ही दोषी ठहराया जा रहा था. यह मामला यहीं नहीं रुका, मगध के डीआईजी मनु महाराज से होते हुए बात चुनाव आयोग तक पहुंच गई थी. चुनाव आयोग ने इस पर कड़ा एक्शन लेते हुए जिलाधिकारी राजेश मीणा और एसपी लिपि सिंह को तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया और वेटिंग लिस्ट में डाल दिया. फिर दोनों पदों पर नई तैनाती कर दी गई.

नई जिलाधिकारी रचना पाटिल तो मानवजीत सिंह ढिल्लो को एसपी की कमान मिली. उधर मगध डिवीजन के कमिश्नर सुशील कुमार को डीआईजी मनु महाराज ने घटना की जांच कर एक हफ्ते में रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया. काररवाई चल ही रही थी कि पुलिस की पिटाई से घायल बड़ी दुर्गा महारानी के कार्यकर्ता शादीपुर निवासी कालू यादव उर्फ दयानंद कुमार ने मुंगेर के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी न्यायालय में परिवाद दायर किया. यह अभियोग वाद संख्या- 779/2020 पर दायर हुआ. दायर वाद में कुल 7 आरोपी बनाए गए. उन आरोपियों के नाम लिपि सिंह (एसपी), खगेशचंद्र झा (सीओ), कृष्ण कुमार और धर्मेंद्र कुमार (एसपी के अंगरक्षक), संतोष कुमार सिंह (थानाप्रभारी कोतवाली), शैलेष कुमार (थानाप्रभारी कासिम बाजार) और ब्रजेश कुमार (थानाप्रभारी मुफस्सिल) थे.

एसपी लिपि सिंह एक बार फिर चर्चाओं में आ घिरी थीं. जलियावाला बाग कांड को याद कर के लोगों ने उन्हें जनरल डायर की उपाधि दी. हालांकि एसपी लिपि सिंह ने खुद पर लगाए गए आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा, ‘‘अनुराग की मौत पुलिस की गोली से नहीं हुई थी बल्कि जुलूस में शामिल उपद्रवियों की ओर से की गई फायरिंग से हुई थी. जांचपड़ताल में घटनास्थल से 3 देशी कट्टे और 12 खोखे भी मिले थे. पुलिसिया जांच चल रही है. बहुत जल्द दूध का दूध और पानी का पानी सामने आ जाएगा.’’

इस घटना में जांच के दौरान नतीजा सामने क्या आया है, कहानी यहीं ब्रेक कर के आइए जानते हैं लिपि सिंह के बारे में. आईपीएस लिपि सिंह कौन हैं? लिपि सिंह के पिता कौन हैं? आईपीएस लिपि सिंह के सिर पर किस का ताकतवर हाथ है? लोग उन्हें ‘लेडी सिंघम’ क्यों कहते हैं? ऐसे तमाम सवाल हैं जिन्हें जानने के लिए हमें आईपीएस लिपि सिंह की जीवन की संघर्षमय कहानी को पाठकों के सामने परोसना होगा. आइए जानते हैं लेडी सिंघम कही जाने वाली आइपीएस लिपि सिंह की कहानी—

लिपि सिंह मूलरूप से बिहार के नालंदा जिले के मुस्तफापुर गांव की रहने वाली हैं. यह गांव मालती पंचायत क्षेत्र में पड़ता था. इसी गांव के रहने वाले रामचंद्र प्रसाद सिंह (आर.सी.पी. सिंह) और गिरिजा सिंह की बेटी हैं लिपि सिंह. आर.सी.पी. सिंह की 2 बेटियां हैं, जिन में लिपि सिंह बड़ी और उस से छोटी एक और बेटी है, जो दिल्ली में रह कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही है. आर.सी.पी. सिंह खुद एक आईएएस अधिकारी थे. राजनीति में आना महज उन का इत्तफाक था. दरअसल, सर्विस के दौरान यूपी काडर में लंबे समय तक उन्होंने काम किया. नीतीश कुमार जब केंद्र में मंत्री बने तो आर.सी.पी. सिंह दिल्ली में उन के प्राइवेट सेक्रेट्री थे. इस दौरान दोनों ने लंबे समय तक काम किया.

साल 2005 में जब नीतीश कुमार पहली बार बिहार में मुख्यमंत्री बने, तब आर.सी.पी. सिंह मुख्य सचिव बन कर आए. कहा जाता है कि आर.सी.पी. सिंह ने नीतीश कुमार के कहने पर नौकरी छोड़ दी और जेडीयू पार्टी जौइन कर ली थी. नीतीश कुमार ने बाद में उन्हें राज्यसभा का सांसद बनाया और फिलहाल वह पार्टी में नंबर 2 की हैसियत रखते हैं. आर.सी.पी. सिंह का परिवार शुरू से ही शिक्षा का महत्त्व जानता था. खुद भी वह एक काबिल आईएएस अफसर थे और वह चाहते थे कि बेटियां भी उन्हीं के नक्शेकदम पर चलें. बेटियों की शिक्षा पर उन्होंने पानी की तरह पैसा बहाया और उन्हें काबिल बनाया.

लिपि सिंह चाहती थी कि वह भी अपने पिता की ही तरह एक आईएएस अधिकारी बने. भविष्य संवारने के लिए उन्होंने दिल्ली का रुख किया. वहां हौस्टल में रह कर आगे की पढ़ाई जारी रखी और कंपटीशन की तैयारी में जुट गईं. इस के लिए वह दिनरात मेहनत करती थीं. उन्होंने 2015 में यूपीएससी की परीक्षा दी. परीक्षा में लिपि का 114वां रैंक आया और 2016 में आईपीएस अफसर बनीं. हालांकि इस से पहले भी लिपि का चयन इंडियन औडिट अकाउंट सर्विस में हुआ था. तब उन्होंने वाणिज्य सेवा में सफलता हासिल की थी और देहरादून में प्रशिक्षण के दौरान अवकाश ले कर दोबारा यूपीएससी की परीक्षा देनी चाही ताकि आईएएस या आईपीएस बन सकें, लेकिन लिपि को एकेडमी से छुट्टी नहीं मिली तो पक्के इरादों वाली लिपि ने इंडियन औडिट एकाउंट से इस्तीफा दे दिया और कंपटीशन की तैयारी में जुट गईं.

जिस का नतीजा बेहतर आया और अपने सपने को पूरा किया. इन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से कानून की भी शिक्षा ली थी. सपनों को पूरा करने में पिता आर.सी.पी. सिंह का काफी योगदान रहा. लिपि को बेहतर भविष्य देने वाले उन के पिता गुरु भी थे. गुरुस्वरूप पिता ने बेटी को एक ही शिक्षा दी थी कि अपनी मंजिल पाने के लिए लक्ष्य को मन की आंखों से साधो. मंजिल खुदबखुद मिल जाएगी. पिता का दिया गुरुमंत्र लिपि हमेशा याद रखती थी. लिपि सिंह एक संघर्षशील और कर्मठी युवती थी. ट्रेनिंग पूरी होने के बाद इन की पहली पोस्टिंग इन के गृह जनपद नालंदा में हुई थी. यह नालंदा जिले की पहली महिला आईपीएस अधिकारी बनी थीं. ट्रेनिंग में अच्छा काम करने के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इन्हें बिहार कैडर अलाट किया था.

कहा जाता है यह सब सांसद पिता आर.सी.पी. सिंह की बदौलत हुआ था. आईपीएस लिपि सिंह ने पुलिस फोर्स जौइन करने के बाद कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा. उन का डंडा कानून के हिसाब से पुलिस महकमा, बालू माफिया और अपराधियों के खिलाफ लगातार चलता रहा है. महज कुछ ही साल की सर्विस में इस लेडी अफसर ने ऐसा काम किया कि पुलिसकर्मी, बाहुबली से ले कर अपराधी तक खौफ खा रहे थे. जिस जिले में इन की तैनाती होती थी, अपने विभाग के सिस्टम की गंदगी को अपने तरीके से साफ करने में कोई कोताही नहीं बरतती थीं. नालंदा से लिपि सिंह का पहली बार स्थानांतरण पटना के बाढ़ सर्किल में हुआ. बाढ़ इलाके की लिपि सिंह एडिशनल एसपी थीं.

जिस क्षेत्र में इन का स्थानांतरण हुआ था, वहां बाहुबली विधायक अनंत सिंह का कानून चलता था.  इन का खौफ इतना था कि कोई इन के खिलाफ अपना मुंह तक नहीं खोलता था. दबदबा इतना कि लोग इन से डरते थे. इन के हुक्म के बिना पत्ता भी नहीं हिलता थे. एक दौर था जब अनंत सिंह नीतीश कुमार की सरकार में छोटे सरकार के नाम से जाने जाते थे. ऐसी जगह पर लिपि सिंह का स्थानांतरण होना दांतों के बीच जीभ के होने के समान था. आखिरकार जिस बात का डर था, हुआ वही. लिपि सिंह का कार्यकाल बाहुबली अनंत सिंह से टकराहट के साथ शुरू हुआ था. दरअसल, 2019 में हुए आम चुनाव के दौरान अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी ने चुनाव आयोग में शिकायत कर दी थी.

आरोप था कि लिपि सिंह अनंत सिंह के करीबियों को जानबूझ कर परेशान कर रही थीं. इस के बाद चुनाव आयोग के आदेश पर लिपि सिंह का ट्रांसफर एंटी टेरेरिज्म स्क्वायड (एटीएस) में कर दिया गया था. लेकिन चुनाव के बाद इन्हें एक बार फिर बाढ़ इलाके का सर्किल दे कर उसी पद पर यानी एडिशनल एसपी नियुक्त कर दिया गया था. लिपि सिंह को दोबारा उसी पद पर देख अनंत सिंह का लोहे का मजबूत किला हिल गया था. इस के बाद लिपि सिंह ने लोहा लिया बाहुबली कहे जाने वाले विधायक अनंत सिंह से. खुद को बब्बर शेर समझने वाले अनंत सिंह लिपि सिंह के खौफ से डर कर घर छोड़ कर फरार होने पर मजबूर हो गए थे.

आखिर बाहुबली विधायक अनंत सिंह ने ऐसा किया क्या था, जिस से उन्हें फरार होना पड़ा था. दरअसल, लिपि सिंह को मुखबिर के जरिए सूचना मिली थी कि बाहुबली विधायक अनंत सिंह ने अपने एक दुश्मन को मौत के घाट उतारने के लिए अपने गांव वाले घर नदवां में एके-47 राइफल, बड़ी मात्रा में कारतूस और देशी बम छिपा रखे हैं. इन्होंने अनंत सिंह के पैतृक गांव नदवां में उन के घर पर छापेमारी की. घर पर की गई छापेमारी के दौरान एक एके-47 राइफल, 22 जिंदा कारतूस और 2 देशी बम बरामद कर सनसनी फैला दी. उस के बाद लिपि सिंह ने अनंत सिंह के खिलाफ यूएपीए यानी अनलाफुल एक्टीविटीज प्रिवेंशन ऐक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया.

मुकदमा दर्ज होने के बाद अनंत सिंह को गिरफ्तार किया जाना था. पुलिस उन की गिरफ्तारी के लिए पटना स्थित सरकारी आवास गई, लेकिन अनंत सिंह फरार हो गए. उन पर काररवाई करने के लिए उन के दाहिने हाथ कहे जाने वाले लल्लू मुखिया के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया. पर पुलिस जब उसे गिरफ्तार करने पहुंची, तो वह भी गायब हो गया. फिर लिपि सिंह कोर्ट गईं और वहां से उन्होंने लल्लू मुखिया की संपत्ति कुर्क करने का आदेश ले लिया. उस के बाद इस की काररवाई भी शुरू कर दी. चूहे और बिल्ली के इस खेल में लिपि सिंह ने अनंत सिंह को जेल भेज कर अपना लोहा मनवा लिया. उन्होंने दिखा दिया कि एक औरत कभी कमजोर नहीं होती है.

जब वह कानूनी जामा पहनी हो तो और भी नहीं. फिर क्या था बिहार में आईपीएस लिपि सिंह अपने कारनामों से सुर्खियों में छाई रहीं. बहरहाल, लौह इरादों वाली अफसर लिपि सिंह ने चट्टान जैसे भारीभरकम अनंत सिंह को धूल चटा दी थी. अत्याधुनिक और खतरनाक असलहा एके-47, जिंदा कारतूस और बम बरामदगी के जुर्म में अब तक वह जेल की सलाखों के पीछे कैद है. इस मामले में अदालत में गवाही चल रही है. लिपि सिंह ने पहली बार अदालत में हाजिर हो कर अपना बयान दिया था. इस मामले में आगे क्या होगा, यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन मुंगेर गोलीकांड में सीआईएसएफ की ओर से की गई जांच में पुलिस की तरफ से 13 राउंड 5.56 एमएम इंसास राइफल से गोली चलाने का उल्लेख किया गया है और यह रिपोर्ट ईमेल के जरिए डीआईजी को भेज दी गई है.

फिलहाल आईपीएस लिपि सिंह और डीएम राजेश मीणा को पद से हटा कर प्रतीक्षा सूची में डाल दिया गया है. अब देखना यह है कि ये दोनों अधिकारीकब तक प्रतीक्षा सूची में बने रहेंगे.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित