यह घटना है उत्तर प्रदेश के फैजाबाद से लगे जिला अंबेडकर नगर की. कभी अंबेडकर नगर फैजाबाद की अकबरपुर नाम से एक तहसील थी, लेकिन मायावती ने इसे फैजाबाद से अलग कर के जिला बना दिया और नाम रख दिया अंबेडकर नगर. यहां से उन्होंने लोकसभा का चुनाव भी लड़ा है.
हां तो इसी अंबेडकरनगर में 11 जून, 2023 को थाना बेवाना के अंतर्गत आने वाले गांव भीतरीडीह से करीब 500 मीटर दूर रत्नेश पाठक का कक्षा 8 तक ए.के. पब्लिक स्कूल है, जो 2 साल से बंद है. जिस से यह स्कूल खंडहर में तब्दील होता जा रहा है.
स्कूल से करीब 100 मीटरदूर रविवार की सुबह रेस लगाने आए कुछ लडक़ों ने धुआं उठते देखा. उस बंद पड़े स्कूल से धुआं उठते देख लडक़ों को हैरानी हुई. क्योंकि ठंड का महीना तो था नहीं कि कोई आग जला कर हाथ सेंक रहा हो.
यह धुआं क्यों उठ रहा है, यह देखने के लिए वे लडक़े वहां जा पहुंचे. जब वे लडक़े वहां पहुंचे तो वहां की स्थिति देख कर सन्न रह गए. क्योंकि वह आग ऐसे ही नहीं जल रही थी. उस आग में एक मानव शरीर जल रहा था, जो अब तक इतना जल चुका था कि उसे पहचाना नहीं जा सकता था.
घटनास्थल पर मिला केवल कंडोम का पैकेट
लडक़ों ने इस बात की सूचना गांव वालों को दी तो लाश देखने के लिए लगभग पूरा गांव ही उमड़ पड़ा. लाश और घटनास्थल की स्थिति देख कर ही लग रहा था कि मामला हत्या का है, इसलिए गांव के कोटेदार अमित पांडेय ने तुरंत थाना बेवाना पुलिस को इस घटना की सूचना दे दी.
सूचना मिलते ही थाना बेवाना एसएचओ अभय मौर्य फोरैंसिक टीम के प्रभारी गौरव सिंह के साथ घटनास्थल भीतरीडीह गांव पहुंच गए. सूचना मिलने पर थोड़ी ही देर में सीओ (सिटी) सुरेश कुमार मिश्र भी वहां आ गए. सभी ने लाश और घटनास्थल का निरीक्षण शुरू किया. यह शव कमरा नंबर 7 में जलता मिला था.
लाश की स्थिति ऐसी थी कि वह पहचानी नहीं जा सकती थी. वह 90 फीसदी जल चुकी थी. इसलिए पुलिस ने आसपास की तलाशी लेनी शुरू की कि शायद ऐसी कोई चीज मिल जाए, जिससे मरने वाले की पहचान हो सके. इस तलाशी में पुलिस को वहां से खून सनी मिट्टी, कुछ बाल, जो शायद मरने वाले के थे, नशीली दवा सेंट्रोन और टाइमैक्स कंडोम का एक पैकेट मिला.
इन चीजों में ऐसी कोई चीज नहीं थी, जिससे मरने वाले की पहचान हो सकती. फोरैंसिक टीम ने अपना काम कर लिया तो एसएचओ अभय मौर्य ने घटनास्थल की औपचारिक काररवाई पूरी कर लाश को पोस्टमार्टम के लिए अंबेडकर नगर के जिला अस्पताल भिजवा दिया. इस के बाद सभी पुलिस अधिकारी और थाना पुलिस वापस चली गई.
किसी भी हत्या जैसे मामले की जांच को आगे बढ़ाने के लिए मरने वाले की पहचान बहुत जरूरी होती है. थाना बेवाना पुलिस ने मरने वाले की पहचान की कोशिश शुरू की. लाश की फोटो से पहचान हो नहीं सकती थी. जिले के ही नहीं, आसपास के जिलों के सभी थानों से भी पता किया गया कि किसी थाने में किसी की गुमशुदगी तो नहीं दर्ज है.
पता चला कि कहीं कोई गुमशुदगी दर्ज नहीं है. थाना पुलिस की समझ में नहीं आ रहा था कि इस मामले की जांच को कैसे आगे बढ़ाया जाए, क्योंकि उस के पास एक कंडोम के पैकेट के अलावा और कुछ नहीं था. एसपी अजीत कुमार सिन्हा को लगा कि शायद थाना पुलिस इस मामले में कुछ नहीं कर पाएगी तो उन्होंने इस मामले की जांच जिले की स्वाट टीम यानी स्पैशल वेपंस एंड टैक्टिक्स टीम को सौंप दी.
जांच टीम ने किया कंडोम कंपनी से संपर्क
हत्या के इस मामले की जिम्मेदारी मिलते ही स्वाट टीम के इंचार्ज वीरेंद्र बहादुर सिंह अपनी टीम एसआई अजय यादव, हैडकांस्टेबल प्रभात मौर्य, कांस्टेबल अबु हमजा, उमेश, पुनीत गुप्ता, अमरेश, विकास, सुनील, मोहित, कुलदीप और विजेंद्र यादव के साथ जांच में लग गए.
वीरेंद्र बहादुर सिंह को भी टाइमैक्स कंपनी के कंडोम का वह पैकेट सौंप दिया गया. उन के दिमाग में आया कि वह आसपास के मैडिकल स्टोरों में पता कराएं कि यह किस के यहां से खरीदा गया है. शायद इस से कोई सुराग मिल ही जाए. लेकिन उन्हें पता चला कि इस ब्रांड का कंडोम यहां मिलता ही नहीं है. तब उन्होंने टाइमैक्स कंपनी से पता किया कि उन की कंपनी का कंडोम कहां कहां बिकता है.
कंपनी से पता चला कि उन की कंपनी के ये कंडोम दिल्ली के आसपास और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अधिक बिकता है. इस के बाद वीरेंद्र बहादुर सिंह को लगा कि मरने वाले का संबंध पश्चिमी उत्तर प्रदेश या दिल्ली के आसपास से तो नहीं है? आजकल जांच में मोबाइल नंबर भी पुलिस की बहुत मदद कर रहा है. लेकिन मोबाइल नंबर तो तब मिलता, जब कोई सुराग मिलता.
इसी क्रम में स्वाट प्रभारी वीरेंद्र बहादुर सिंह ने 10 जून और 11 जून को भीतरीडीह गांव में जितने भी मोबाइल नंबर ऐक्टिव थे, सभी की डिटेल्स यानी डंप डाटा निकलवाया. इस में इतने नंबर थे कि सभी की जांच तो की नहीं जा सकती थी. इस के अलावा ऐसे भी नंबर थे, जो आ रहे थे और जा रहे थे.
चूंकि उन्हें पता चला था कि टाइमैक्स कंडोम पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ज्यादा बिकता है, इसलिए उन के दिमाग में आया कि सब से पहले यह पता किया जाए कि इन नंबरों में कोई पश्चिमी उत्तर प्रदेश का नंबर तो नहीं है. इसलिए उन्होंने इन नंबरों में से उन नंबरों के बारे में पता लगाने का निश्चय किया, जो पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हों. क्योंकि कंडोम कंपनी ने बताया था कि उस का टाइमैक्स कंडोम पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अधिक बिकता है.
12 फोन नंबर आए शक के दायरे में
प्राप्त नंबरों में से 12 नंबर ऐसे मिले, जो पश्चिमी उत्तर प्रदेश के थे. इन में 4 नंबर ऐसे थे, जो जिला सहारनपुर के थे. जिस तरह हत्या कर के लाश को जलाया गया था, उस से पुलिस को लगा था कि हत्यारे एक से अधिक थे. इसलिए जब सहारनपुर के 4 नंबर एक साथ मिले तो पुलिस को लगा कि कहीं हत्या का संबंध इन्हीं लोगों से न हो. इसलिए अब पुलिस का पूरा ध्यान इन्हीं नंबरों पर जम गया.
स्वाट टीम ने एक नंबर पर फोन किया तो उसे किसी महिला ने उठाया. पूछने पर उस ने बताया कि सहारनपुर से 4 लोग अंबेडकर नगर सरकस देखने गए थे. अब पुलिस ने उन 4 फोन नंबरों को रडार पर ले लिया, जो हत्या के समय भीतरीडीह में थे. इन 4 नंबरों में से एक नंबर तो बंद हो चुका था. अब बचे 3 नंबर. पुलिस को अब इन्हीं 3 नंबरों के बारे में पता करना था.
पुलिस ने नंबर देने वाली यानी ये जिन कंपनियों के सिम थे, उन कंपनियों से सभी के पते निकलवाए तो ये सभी सहारनपुर के रहने वाले थे. पता मिल जाने के बाद वीरेंद्र बहादुर सिंह इन नंबर वालों को गिरफ्तार करने के लिए अपनी टीम के साथ सहारनपुर के लिए रवाना हो गए.
सहारनपुर पहुंच कर वीरेंद्र बहादुर सिंह की टीम ने स्थानीय पुलिस की मदद से 3 लोगों को गिरफ्तार कर लिया. इन के नाम थे इमरान, फरमान और इरफान. तीनों को गिरफ्तार कर के अंबेडकर नगर लाया गया, जहां तीनों से पूछताछ शुरू हुई.
पहले तो तीनों पुलिस को चकमा देते रहे, पर पुलिस के पास तो इस बात के सबूत थे कि हत्या वाली रात ये तीनों अंबेडकर नगर में मौजूद थे. इसलिए पुलिस ने जब सख्ती से पूछा कि वे लोग सहारनपुर से इतनी दूर यहां क्या करने आए थे और आए 4 लोग थे, जबकि चौथे का फोन बंद है.
तीनों के पास पुलिस के इस सवाल का कोई जवाब नहीं था. तब मजबूर हो कर इन्हें सच्चाई उगलनी पड़ी. तीनों ने हत्या का अपना अपराध स्वीकार कर लिया. उन्होंने बताया कि मारा गया व्यक्ति इन का साथी अजब सिंह था. तीनों ने मिल कर उस की हत्या की थी और स्कूल के फरनीचर से जलाने की कोशिश की थी. इस के बाद तीनों ने हत्या की जो कहानी सुनाई, वह इस प्रकार थी.
मृतक निकला सरकस कलाकार
जिस की हत्या हुई थी, उस का नाम अजब सिंह रंगीला (25 वर्ष) था. वह सरकस का कलाकार था यानी सरकस में करतब दिखाने का काम करता था. उसी के सरकस में इमरान, फरमान और इरफान भी काम करते थे.
एक साथ काम करने की वजह से इन सभी का एकदूसरे के घर भी आनाजाना था. अजब सिंह इमरान के घर कुछ ज्यादा ही आताजाता था. इसी आनेजाने में अजब सिंह को इमरान की बहन से प्यार हो गया. इमरान की बहन को भी अजब सिंह अच्छा लगता था, इसलिए वह भी अकसर अजब सिंह से मिलने उस का सरकस देखने के बहाने जाती रहती थी.
जब आग दोनों ओर लगी हो तो मिलन होने में कहां देर लगती है. अजब सिंह और इमरान की बहन एकांत में मिलने लगे. जब इस की जानकारी इमरान को हुई तो भला यह बात वह कैसे सहन कर सकता था. उस ने बहन को भी रोका और अजब सिंह को भी, लेकिन न अजब सिंह माना और न ही उस की बहन. तब इमरान ने बहन के बाहर निकलने पर प्रतिबंध लगा दिया. अब प्रेमी से मिलना तो मुश्किल हो गया, पर फोन पर दोनों की बातें लगातार होती रहीं.
इमरान को पता था कि अजब सिंह का प्रेम प्रसंग सरकस में ही काम करने वाली एक लडक़ी से भी है, जो पहले उस के साथ सरकस में काम करती थी. वह लडक़ी कोई और नहीं, सरकस में ही काम करने वाले और हत्या में शामिल इरफान की बहन थी.
इसीलिए वह अजब सिंह से और नाराज था. क्योंकि एक ओर तो वह अंबेडकर नगर में इरफान की बहन से संबंध बनाए था, दूसरी ओर उस की बहन को भी बरगला रहा था. इमरान को जब पता चला कि उस की बहन अजब सिंह से भले नहीं मिल पा रही है, पर फोन पर उस से बातें करती रहती है तो उसे बहुत गुस्सा आया. उस ने बहन को भी रोका और अजब सिंह को भी. पर दोनों नहीं माने.
बहन से कुछ कहता तो वह कह देती कि अजब सिंह उसे फोन करता है, वह क्या करे. दूसरी ओर अजब से कुछ कहता तो वह कह देता कि वह अपनी बहन को क्यों नहीं रोकता. इन बातों से इमरान अजब सिंह बुरी तरह नाराज रहने लगा. वह मन ही मन सोच रहा था कि अजब सिंह का कुछ करना पड़ेगा. उसी बीच अजब सिंह ने एक और गलती कर दी, जिस से इमरान ही नहीं, उस के अन्य साथी फरमान और इरफान भी नाराज हो गए.
2 दोस्तों की बहनों से थे संबंध
इमरान तो ऐसे मौके की तलाश में था ही, उस ने अपने भाई फरमान को तो अजब सिंह को सबक सिखाने के लिए तैयार किया ही, साथ ही इरफान को भी तैयार कर लिया. सभी ने मिल कर योजना बनाई कि अजब सिंह को सरकस लगाने के बहाने आरती के यहां अंबेडकर नगर ले कर चला जाए और वहीं इसे सबक सिखाया जाए.
आरती की इन लोगों से जानपहचान थी. उस ने अपने भाई फरमान को तो बता दिया था कि अजब सिंह की हत्या करनी है, पर इरफान को यह पता नहीं था. वह तो सिर्फ यही जानता था कि अजब सिंह के साथ मारपीट करनी है, जिस से आगे से वह इस तरह की कोई हरकत न करे कि उन लोगों का नुकसान हो.
10 जून, 2023 की सुबह ये सभी लोग सरकस लगाने के लिए अंबेडकर नगर के थाना बेवाना के गांव भीतरीडीह आ गए और आरती के यहां रुके. क्योंकि आरती इन की परिचित थी और इन लोगों के साथ काम कर चुकी थी. पूरा दिन इन लोगों ने आराम किया. शाम को खाने में इन लोगों ने मछली बनवाई. खाना खाने के पहले इन लोगों ने शराब पीने का प्रोग्राम बनाया.
इमरान अजब सिंह की बाइक ले कर गया और 4 बोतल शराब ले आया. इस के बाद सभी ने सलाह की कि आरती के घर में बैठ कर शराब पीना ठीक नहीं होगा. उस के घर वाले बुरा मान सकते हैं, इसलिए चलो गांव के बाहर कहीं बैठ कर शराब पी जाए.
यह सलाह कर के सभी गांव के बाहर आए तो अजब सिंह ने ही कहा, “गांव के बाहर ए.के. पब्लिक स्कूल है, जो सालों से बंद पड़ा है. चलो, उसी स्कूल में बैठ कर पीते हैं. वहां कोई आएगा भी नहीं और वहां बैठने के लिए पुरानी कुरसी मेज भी हैं.”
इमरान ऐसी ही जगह चाहता था. यह तो वही हाल हुआ कि रोगी को जो भाए, वही वैद्य बताए. उस ने कहा, “चलो, वहीं बैठ कर पीते हैं.”
दोस्तों ने ही बताया हत्या का प्लान
अजब सिंह अकसर इरफान की बहन से मिलने आता रहता था, इसलिए उसे उस स्कूल के बारे में पता था. अजब सिंह सभी को स्कूल तक ले आया. सभी स्कूल के अंदर बरामदे में बैठ कर शराब पीने लगे. योजना के अनुसार सभी ने अजब सिंह को ज्यादा शराब पिलाई और खुद कम पी.
जब अजब सिंह शराब के नशे में खूब धुत हो गया यानी विरोध करने लायक नहीं रहा तो इमरान ने भाई फरमान से कहा, “पकड़ कर गला दबा दे इस का. हमेशाहमेशा के लिए छुटकारा मिल जाए इस से, वरना यह हमारी इज्जत को दाग लगा कर ही छोड़ेगा.”
“क्या… तुम लोग इसे मारना चाहते हो क्या?” इरफान ने पूछा.
“और किसलिए इसे यहां लाए हैं. अगर यह जिंदा रहा तो हमें सुकून से जीने नहीं देगा. तुम्हें तो पता ही है कि यह मेरी बहन के ही नहीं, तुम्हारी बहन के भी पीछे पड़ा है. कब से समझा रहा हूं कि मेरी बहन का पीछा छोड़ दे. पर मेरी बात इस के भेजे में उतर ही नहीं रही है. अब मैं खुद इस से बहन का पीछा छुड़वाऊंगा. जब जिंदा ही नहीं रहेगा तो पीछा कैसे करेगा.” इमरान ने कहा.
“यह ठीक नहीं है, इस की हत्या कर दी और हम सभी पकड़े गए तो पूरी जिंदगी जेल में बीतेगी.” इरफान ने समझाया.
“जेल तो हम तब जाएंगे, जब पकड़े जाएंगे. पकड़े न जाएं, इसीलिए तो इसे यहां ले आए हैं.” इमरान ने कहा.
इरफान उसे रोकता, उस के पहले ही इमरान ने एक ईंट उठा कर अजब सिंह के सिर पर दे मारी. इरफान उस का हाथ पकड़ता, तब तक उस ने दूसरा वार कर दिया. इस दूसरे वार मे अजब सिंह चल बसा.
स्कूल के फरनीचर से जलाई लाश
अजब सिंह का खेल खत्म करने के बाद जब बात आई उस की लाश को ठिकाने लगाने की तो स्कूल के कमरा नंबर 7 में लाश ले गए और जो टूटाफूटा फरनीचर पड़ा था, तीनों ने मिल कर उसे इकट्ठा किया और उसी पर लाश को रख कर आग लगा दी. घटनास्थल पर कंडोम का जो पैकेट मिला था, उसे वे लोग पुलिस को भ्रम में डालने के लिए साथ लाए थे.
उन का सोचना था कि कंडोम का पैकेट देख कर पुलिस यही समझेगी कि कोई यहां अवैध संबंध बनाने आया था और मारा गया. इन लोगों का दुर्भाग्य देखिए कि जिस कंडोम के पैकेट को ये लोग पुलिस को भ्रम में डालने के लिए लाए थे, उसी ने पुलिस को इन लोगों तक पहुंचा दिया.
अजब सिंह की हत्या करने के बाद तीनों आरती के घर गए और वहां खाना खा कर अजब सिंह की बाइक ले कर मऊ चले गए. बाइक वहां इन्होंने एक कबाड़ी के यहां 3 हजार रुपए में गिरवी रख दी और लखनऊ होते हुए सहारनपुर चले गए.
पूरी कहानी सुनने के बाद एसपी अजीत कुमार सिन्हा की मौजूदगी में तीनों हत्यारों इमरान, फरमान और इरफान को पुलिस ने पत्रकारों के सामने पेश किया तो सभी ने पत्रकारों के सामने भी अपना अपराध स्वीकार कर लिया. इस के बाद तीनों अभियुक्तों को पुलिस ने उसी दिन अदालत मे पेश किया, जहां से 2 दिन के रिमांड पर लिया गया.
रिमांड के दौरान अजब सिंह की वह बाइक मऊ से बरामद कर ली गई, जो इन्होंने कबाड़ी के यहां 3 हजार रुपए में गिरवी रख दी थी. रिमांड अवधि खत्म होने पर इन्हें दोबारा अदालत में पेश किया गया, जहां से तीनों को जेल भेज दिया गया.
जब उच्च अधिकारियों को पता चला कि अंबेडकर नगर पुलिस ने कंडोम के पैकेट से जिस तरह ब्लाइंड मर्डर का खुलासा किया है, वह काबिले तारीफ है. उन्होंने अंबेडकरनगर पुलिस की प्रशंसा करते हुए कहा कि हत्याकांड की केस स्टडी अब यूपी पुलिस के मुरादाबाद में स्थित पुलिस ट्रेनिंग कालेज भेजी जाएगी, जहां ट्रेनी अफसर और पुलिस जवान ट्रेनिंग के दौरान इस का अध्ययन करेंगे.
—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित
सैफ ने 9 साल के मासूम अरहान के साथ कुकर्म किया था. चूंकि अरहान सैफ को अच्छी तरह पहचानता था, इसलिए उसे सैफ जिंदा नहीं छोड़ सकता था. उस के साथ कुकर्म करने के बाद उस ने स्प्रिंग वाली तार से अरहान का गला घोंट दिया था.
“अरहान की लाश कहां पर है?” जसवीर सिंह ने पूछा.
“मैं ने उस की लाश को नाले में फेंक दिया था.”
यह जानकारी मिलते ही कोतवाल अरहान के पिता अफजल और पुलिस दल को साथ ले कर सैफ की निशानदेही पर उस नाले के पास आ गए, जिस में वह अरहान की लाश फेंकने की बात कह रहा था.
झाडिय़ों में मिली अरहान की लाश
उस के बताए स्थान पर अरहान का शव तलाशा गया तो वह एक कंटीली झाडिय़ों में फंसा हुआ दिखाई दे गया. अब तक मेवाती मोहल्ला औरंगाबाद में 9 साल के मासूम बच्चे के साथ कुकर्म कर के उस की हत्या करने और शव को नाले में फेंकने की खबर फैल चुकी थी. पूरा मेवाती मोहल्ला ही नाले की ओर उमड़ आया. यह नाला मोहल्ले से करीब 500 मीटर की दूरी पर स्थित था.
भारी भीड़ को देख कर कोतवाल जसवीर सिंह ने लापता बच्चे अरहान के साथ घटित शर्मसार कर देने वाली घटना की जानकारी एसएसपी शैलेष कुमार पांडेय को दे दी. उन्होंने पुलिस कप्तान को यह भी बता दिया कि इस घटना को सुन कर मोहल्ले के लोगों की भीड़ नाले पर आ गई है. भीड़ आक्रोश में है. कोई अप्रिय घटना न घट जाए, इस के लिए पुलिस बल भेजने की उन्होंने बात की.
थोड़ी ही देर में एसएसपी शैलेष कुमार पांडेय भारी पुलिस बल ले कर खुद घटनास्थल पर आ गए. भीड़ की ओर से अभी तक कोई अनुचित कदम नहीं उठाया गया था. हां, लोगों में अभियुक्त सैफ के प्रति आक्रोश बढ़ता जा रहा था. परिजनों का रोरो कर बुरा हाल था.
एसएसपी शैलेष कुमार के साथ आई पुलिस फोर्स ने भीड़ को नाले से दूर हटाना शुरू कर दिया. सैफ भारी पुलिस फोर्स के घेरे में था. बच्चे का शव निकाल लेने के बाद एसएसपी शव की बारीकी से जांच करने में जुटे थे. फोरैंसिक टीम भी वहां आ गई थी.
सैफ को उस जगह लाया गया, जहां उस ने बच्चे के साथ कुकर्म कर के उस की हत्या कर दी थी. फोरैंसिक टीम ने वहां से महत्त्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र किए. वह स्प्रिंग तार भी वहीं पड़ी मिल गई, जिस से सैफ ने बच्चे का गला घोंटा था. आवश्यक काररवाई निपटा लेने के बाद अरहान का शव पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया गया. सैफ को थाने लाने के बाद एसएसपी शैलेष कुमार के सामने उस से पूछताछ की गई.
पहचानने की वजह से किया अरहान का मर्डर
सैफ ने बताया कि उस की नीयत कई दिनों से अरहान पर थी. वह अरहान को अपने करीब लाने के लिए टौफी, बिसकुट और अन्य चीजें खिलाता रहता था. 9 वर्षीय अरहान नासमझ था, वह रोज अपने ताऊ की दुकान पर चला जाता था. सैफ उसी दुकान पर ही रहता था, वहीं वह अरहान को खिलातापिलाता था.
अरहान उस के ऊपर आंख बंद कर के विश्वास करने लगा तो सैफ ने 8 अप्रैल, 2023 को अपने मालिक से शाम को बहाना बना कर छुट्टी ली और अफजल के घर की तरफ चला गया. उसे मालूम था अरहान शाम को बच्चों के साथ घर के सामने खेलता है. अरहान उसे खेलता मिल गया. उस ने इशारे से अरहान को पास बुलाया और उसे ले कर नाले की तरफ जाने लगा.
अरहान ने उस तरफ जाने का कारण पूछा तो सैफ ने झूठ बता दिया कि उस ने खाने की बहुत सारी चीजें नाले की ओर छिपा कर रखी हैं, वहां हम पार्टी करेंगे. अरहान खुशीखुशी उस के साथ नाले के पास की झाडिय़ों में आ गया. यहां सैफ ने उसे जबरन नीचे गिरा कर दबोच लिया और जबरन उस के साथ कुकर्म करने लगा. वह अरहान का मुंह बंद किए रहा, ताकि वह चीख न सके. अरहान दर्द से तड़प कर बेहोशी की हालत में आ गया.
कामपिपासा शांत होने के बाद सैफ डर गया कि यदि घर पहुंच कर अरहान ने अपनी अम्मी और अब्बू को यह सब बता दिया तो वे लोग उसे जिंदा दफन कर देंगे. भयभीत हो कर उस ने अरहान का गला साथ लाई स्प्रिंग तार से घोंट दिया, फिर शव को नाले में फेंक कर घर चला गया. उस ने एसएसपी के सामने भी अरहान के साथ कुकर्म करने और उस की हत्या करने का जुर्म कुबूल कर लिया.
मोहम्मद सैफ द्वारा जुर्म कुबूल करने के बाद कोतवाल ने उस के खिलाफ चार्जशीट बना कर उसे न्यायालय में पेश की. बाद में यह जघन्य हत्या का मामला पोक्सो कोर्ट में चला और मात्र 15 दिन में इसे निपटा कर माननीय जज राम किशोर यादव ने त्वरित न्याय करने की मिसाल कायम कर दी.
इस केस में अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी करने वाली एडवोकेट अलका उपमन्यु की पूरे मथुरा शहर में चर्चा है. सभी उन की तारीफ में कसीदे पढ़ रहे हैं. क्योंकि उन्हीं की वजह से मोहम्मद सैफ को फांसी की सजा मिली.
कोर्ट द्वारा मोहम्मद सैफ को सजा सुनाए जाने के बाद पुलिस ने मुजरिम को कस्टडी में ले लिया. फिर उसे जेल भेज दिया गया.
—कथा इस केस के वकीलों से की गई बातचीत पर आधारित
अफजल का इकलौता बेटा था अरहान
आखिर यह पूरा मामला क्या था? आइए, इस पर एक नजर डालते हैं. उत्तर प्रदेश के जनपद मथुरा के मेवाती मोहल्ला औरंगाबाद थाना सदर बाजार में रहते थे अफजल. परिवार में उन की पत्नी नाजिस और एक 9 साल का बेटा अरहान था.
अरहान अफजल का इकलौता बेटा था, इसलिए दोनों मियांबीवी उसे बहुत प्यार करते थे. उसे लाड़प्यार से पाल रहे थे. अफजल को उम्मीद थी कि पढ़लिख कर एक दिन अरहान बहुत बड़ा आदमी बनेगा और उन के दिन संवर जाएंगे. अरहान को लिखानेपढ़ाने में अफजल मियां कोई कोरकसर नहीं छोड़ रहे थे. वह दिन भर कड़ी मेहनत कर के रुपया कमाते और अरहान की स्कूल की जरूरत का सारा सामान दिलवाते.
दिन हंसीखुशी से बीत रहे थे कि 8 अप्रैल, 2023 की शाम को अरहान लापता हो गया. न वह गलीमोहल्ले में कहीं मिल रहा था न बाजारहाट में. वह गली में खेलतेखेलते गायब हुआ था. नाजिस ने उसे घर में से ही दोचार बार आवाज दी थीं, फिर उत्तर न मिलने पर वह घर से बाहर आ गई थी. अरहान गली में दिखाई नहीं दे रहा था. नाजिस ने उसे पहले आसपड़ोस में ढूंढा. वह नहीं मिला तो उस के पिता अफजल को बताया.
अफजल ने बेटे को हर संभावित जगह पर तलाश किया. वह अपने बड़े भाई की दुकान पर भी अरहान को देखने गए, क्योंकि अरहान अकसर अपने ताऊ की दुकान पर चला जाया करता था. उस दिन वह ताऊ की दुकान पर नहीं गया था. हर जगह तलाश करने के बाद अफजल परेशान हो कर मोहल्ले के 2-3 पहचान वालों को साथ ले कर कोतवाली सदर बाजार पहुंच गए.
कोतवाल जसवीर सिंह के सामने पहुंच कर अफजल ने अपने 9 वर्षीय बेटे के लापता होने के बारे में बताया, “सर, मुझे बहुत घबराहट हो रही है. मेरा बेटा शाम से गली में खेलते हुए गायब हो गया है. आप उस की तलाश करवाइए.”
एसएचओ जसवीर सिंह ने इस मामले को बहुत गंभीरता से लिया. बच्चा मासूम था, उस के साथ कुछ भी अनहोनी होने का अंदेशा था.
“आप बच्चे का हुलिया, उम्र आदि दर्ज करवा दीजिए. उस की कोई फोटो हो तो वह भी दे दीजिए. मैं आप के बच्चे की तलाश करने की कोशिश करता हूं. आप अपने स्तर पर भी उसे ढूंढिए.” अफजल ने अपने बेटे अरहान की गुमशुदगी दर्ज करवा कर उस का एक फोटो भी कोतवाल साहब को दे दिया.
सीसीटीवी कैमरे से मिला सुराग
पुलिस ने पहले इस मामले की गुमशुदगी दर्ज की, लेकिन जब उस के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली तो अज्ञात के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज कर लिया. इस मामले को स्वयं कोतवाल जसवीर सिंह ने अपने हाथ में लिया और इस की विवेचना शुरू कर दी.
उन्होंने एसएसपी शैलेष कुमार पांडेय को इस बच्चे की गुमशुदगी की जानकारी दे कर दिशानिर्देश मांगे. एसएसपी के दिशानिर्देश पर कोतवाल जसवीर सिंह ने जांच की शुरुआत अरहान के घर के आसपास से की. गली में उस के साथ खेलने वाले बच्चों से पूछताछ की तो उन से मालूम हुआ कि शाम को अरहान उन के साथ खेल रहा था, फिर वह अपने ताऊ की दुकान की ओर किसी के साथ जाता दिखाई दिया था. वह व्यक्ति कौन था, वे उसे नहीं पहचानते.
इस जानकारी से कोतवाल को यह पता चल गया कि अरहान किसी ऐसे शख्स को जानता है, जो उस के बहुत करीब रहा है. उसी के साथ वह ताऊ की दुकान की तरफ गया था. जसवीर सिंह ने उस शख्स के बारे में मालूम करने के लिए सीसीटीवी फुटेज देखने का मन बना लिया. जहां पर अरहान के ताऊ की दुकान थी, उस रास्ते में 3-4 सीसीटीवी कैमरे लगे हुए थे. पुलिस ने उन कैमरों की फुटेज निकलवा कर देखी तो उन्हें अरहान एक पतलेदुबले युवक के साथ जाता हुआ नजर आ गया.
उस युवक की पहचान करने के लिए अरहान के पिता अफजल को थाने में बुलवाया गया. अफजल को सीसीटीवी कैमरे की वह फुटेज दिखाई गई.
“क्या आप इस युवक को पहचानते हैं?” कोतवाल ने अफजल से पूछा.
“यह तो मोहम्मद सैफ है. मेरे बड़े भाई की दुकान पर काम करता है.” अफजल ने हैरान हो कर कहा, “इस के साथ अरहान कई बार घूमने जाता रहा है, यह अच्छा व्यक्ति है.”
“हूं.” कोतवाल ने सिर हिलाया, “मैं इस से मिलना चाहूंगा.”
“यह दुकान पर होगा. आप मेरे साथ चलिए.”
कोतवाल जसवीर सिंह 2 पुलिसकर्मियों को साथ ले कर अफजल के साथ उस के भाई की दुकान पर आ गए. उन्हें वहां सीसीटीवी में नजर आने वाला युवक सैफ मिल गया.
पुलिस की बंदरघुडक़ी आई काम
पुलिस को दुकान पर देख कर उस के चेहरे का रंग उड़ गया. जसवीर सिंह की पैनी नजरों से यह छिप नहीं पाया. उन्होंने पुलिसकर्मियों को इशारा किया, “मोहम्मद सैफ को हिरासत में ले लो.”
उन का आदेश मिलते ही पुलिसकर्मियों ने सैफ को पकड़ लिया. उसे पुलिस वैन में बिठा कर थाने में लाया गया. अफजल भी उन के साथ आए थे.
सैफ को सामने बिठा कर कोतवाल ने उस से सख्ती से पूछा, “अरहान कहां पर है सैफ?”
“मैं क्या बताऊं साहब… वो अपने घर में ही होना चाहिए.” सैफ नजरें झुका कर बोला.
“कल शाम को वह तुम्हारे साथ था. मेरे पास इस का ठोस सबूत है, तुम ठीकठीक बता दो वरना पुलिस वाले तुम्हारी चमड़ी उधेडऩे के लिए डंडा ले कर खड़े हैं.”
“मैं सही कह रहा हूं साहब, मैं नहीं जानता.”
जसवीर सिंह ने उस के गाल पर करारा थप्पड़ जड़ दिया, वह कुरसी से दूर जा गिरा. जसवीर सिंह के पास में खड़ा पुलिस कांस्टेबल उसे उठा कर दूसरे कमरे में ले गया. तभी बेंत ले कर 2 पुलिस वाले वहां और आ गए. एक पुलिस वाले ने सैफ के दोनों हाथ पीछे कर के बांध दिए.
इस से सैफ डर गया. वह समझ गया कि अब उस के साथ ये पुलिस वाले क्या करेंगे. इस से पहले कि वह पुलिस वाले कोई काररवाई करते, सैफ डर कर बोला, “सर, आप मुझे मारना मत, मैं सब बताता हूं.”
तभी एक पुलिसकर्मी कोतवाल को बुला लाया.
कोतवाल ने कडक़ स्वर में पूछा, “बता अरहान कहां है?”
“साहब, मैं ने उसे मार दिया है…” सैफ ने जैसे ही यह कहा, बराबर के कमरे में बैठे अफजल के कानों में भी यह आवाज आ गई. वह अपनी जगह गश खा कर गिर पड़े. वहां मौजूद कांस्टेबल उन्हें उठा कर बाहर बेंच पर ले गया और उन्हें होश में लाने की कोशिश में लग गया. कोतवाल जसवीर सिंह गहरी सांस ले कर रह गए. सैफ कुबूल कर रहा था कि उस ने अरहान को मार डाला है.
“तुम ने अरहान को क्यों मार दिया, उस बच्चे ने तुम्हारा क्या बिगाड़ा था?” सैफ को फाड़ खाने वाली नजरों से देखते हुए जसवीर सिंह ने पूछा.
अरहान की हत्या का जो कारण सैफ ने बताया, उसे सुन कर कोतवाल और पुलिस कांस्टेबल के सिर शर्म से झुक गए.
इस धरती पर इंसान के रूप में ऐसे हैवान भी मौजूद हैं, जो अपनी काम पिपासा शांत करने के लिए किसी भी लडक़ी अथवा लडक़े को अपना शिकार बना लेते हैं. उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले का रहने वाला सैफ नाम के दरिंदे ने तो एक ऐसे मासूम पर नुकीले दांत गड़ा दिए, जो मात्र 9 साल का था. अभी उस ने न दुनिया को ठीक से देखा था, न समझा था. हंसतेखेलते उस मासूम के साथ सैफ ने कुकर्म ही नहीं किया, बल्कि उसे मौत की नींद भी सुला दिया था.
इस कृत्य और जघन्य हत्या के लिए सैफ को पोक्सो कोर्ट के कटघरे में खड़ा किया गया. यह पोक्सो कोर्ट मथुरा में थी और इस के जज थे राम किशोर यादव. उन की कोर्ट में 28 अप्रैल, 2023 को इस केस की चार्जशीट दाखिल की गई थी. 2 मई को अभियुक्त पर चार्ज लगाया गया.
अभियुक्त सैफ की ओर से बचाव पक्ष के रूप में बार एसोसिएशन के पूर्व सचिव साहब सिंह देशकर पैरवी कर रहे थे और अभियोजन पक्ष का जिम्मा जिला शासकीय अधिवक्ता (स्पैशल) अलका उपमन्यु ने संभाला था. इस केस में 14 गवाह पेश किए गए. पहली गवाही 8 मई को हुई और अंतिम गवाह 18 मई को पेश हुआ.
आज 22 मई, 2023 का दिन था. उस दिन इस जघन्य मामले में फाइनल बहस होनी थी. सुबह से ही कोर्टरूम में मीडियाकर्मी, मथुरा बार एसोसिएशन के वकील, पुलिस के आला अधिकारी. मृतक बच्चे के घर वाले, पासपड़ोस के लोग और शहर के कई प्रतिष्ठित नागरिक जमा हो गए थे.
इस केस की शासन और प्रशासन की ओर से मौनिटरिंग हो रही थी. डीएम पुलकित खरे, एसएसपी शैलेष कुमार पांडे, संयुक्त निदेशक अभियोजन सहसेंद्र मिश्रा इस मामले पर पैनी नजर रख रहे थे. वह इस वक्त कोर्टरूम में मौजूद थे. वहीं जिला शासकीय अधिवक्ता शिवराम तरकर तथा सदर कोतवाल जसवीर सिंह (जिन्होंने इस केस की छानबीन की थी) कोर्ट रूम में उपस्थित थे.
कोर्ट रूम में बने कटघरे में इस जघन्य कांड का आरोपी सैफ खड़ा था. बीच में लंबी मेज के पास लेखाकार के साथ बचाव पक्ष के वकील साहब सिंह देशकर बैठे हुए थे. उन के सामने मेज की दूसरी ओर अभियोजन पक्ष की वकील अलका उपमन्यु बैठी हुई इस केस की फाइल को गहरी नजरों से देख रही थीं.
दिलचस्प रही वकीलों की जिरह
जैसे ही कोर्टरूम की घड़ी ने 10 बजाए, अपने चैंबर से निकल कर माननीय जज राम किशोर यादव अपनी कुरसी के पास आ गए. कोर्ट में मौजूद हर शख्स ने सम्मान में उठ कर उन का अभिवादन किया. अभिवादन स्वीकार कर के जज महोदय अपनी कुरसी पर बैठ गए.
“कोर्ट की काररवाई शुरू की जाए. बचाव पक्ष अपनी दलील पेश करें.” माननीय जज ने साहब सिंह की ओर देख कर कहा.
साहब सिंह देशकर अपने काले कोट को दुरुस्त करते हुए उठे और गंभीर आवाज में बोले, “मी लार्ड, मैं मानता हूं मेरे मुवक्किल सैफ ने जघन्य गुनाह किया है. उस के विरुद्ध पुलिस ने ठोस साक्ष्य भी एकत्र कर के कोर्ट में पेश किए हैं, लेकिन मैं यही कहूंगा कि जिस वक्त सैफ ने यह गुनाह किया, वह बहुत नशे में था. नशा करने वाला व्यक्ति नशे में यह भूल जाता है कि वह जो कर रहा है या करने जा रहा है, वह गलत है. मेरे मुवक्किल ने जो भी किया वह नशे में किया है, उसे इस का अफसोस भी है.”
“इस के अफसोस करने से क्या वह मासूम बच्चा जीवित हो कर वापस आ जाएगा, जो इस की हैवानियत की भेंट चढ़ गया.”
अभियोजन पक्ष की वकील अलका उपमन्यु तमक कर खड़ी होते हुए गुस्से से बोलीं, “मी लार्ड, इस व्यक्ति ने ऐसा गुनाह किया है, जो क्षमा करने योग्य नहीं है. ऐसे व्यक्ति को कठोर से कठोर दंड मिलना चाहिए.”
“नहीं मी लार्ड,” बचाव पक्ष के वकील देशकर विनती करते हुए बोले, “मेरा मुवक्किल शादीशुदा है इस के छोटेछोटे बच्चे हैं. यह अपने बूढ़े मांबाप का बोझ भी उठाता है. इस के जेल चले जाने से इस के परिवार पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ेगा.”
“यह सब कुछ गुनाह करने से पहले सोचना चाहिए,” अलका उपमन्यु व्यंग्य से बोलीं.
“मैं ने कहा न, यह उस समय गहरे नशे में था. नशे में ही इस से गुनाह हो गया है.”
“मी लार्ड, जिस मासूम बच्चे को इस नराधम ने मौत के घाट उतारा है, वह अपने मांबाप की इकलौती संतान था. उस के पिता उसे इस उम्मीद से पालपोस कर बड़ा कर रहे थे कि वह बड़ा हो कर उन के बुढ़ापे की लाठी बनेगा. इस ने उन की लाठी तोड़ दी. उन के बुढ़ापे का सहारा छीन लिया. इसे कठोर से कठोर दंड मिलना ही चाहिए.”
माननीय जज राम किशोर यादव ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद गंभीर स्वर में कहा, “यह सिद्ध हो गया है कि कटघरे में खड़े इस शख्स सैफ ने जघन्य गुनाह किया है. स्वयं इस के वकील मिस्टर देशकर अपने मुंह से कुबूल कर रहे हैं कि इस ने जघन्य अपराध किया है, लेकिन नशे में किया है.
“मिस्टर देशकर यह नशे में था, इस बात को पुलिस नहीं मानती. इसे गिरफ्तार किया गया, तब यह पूरी तरह होशोहवास में था और यह बात इस से भी सिद्ध होती है कि बच्चे के साथ कुकर्म करने के बाद इस का दिमाग सचेत था, तभी तो इस ने सोचा कि यदि बच्चे को जिंदा छोड़ा तो बच्चा इस की पहचान और नाम बता सकता है.
“इसी भय से इस ने बच्चे की गला घोंट कर हत्या कर दी. इसलिए नशे में अपराध करने वाली बात का कोई तर्क नहीं बनता. इस पर रहम नहीं किया जा सकता. मैं इसे दोषी मानता हूं. 26 मई, 2023 को इस पर आरोप तय होगा और सोमवार 29 मई को इसे सजा सुनाई जाएगी. कोर्ट तब तक के लिए स्थगित की जाती है.”
कोर्ट की काररवाई समाप्त कर के जज महोदय अपने चैंबर में चले गए. कोर्ट रूम में मौजूद लोग एकदूसरे से बातें करते हुए बाहर निकल गए.
मुजरिम को सजा ए मौत
26 मई, 2023 को एक बार फिर से पोक्सो कोर्ट में जज राम किशोर यादव की अदालत लगी. 22 मई को कोर्ट रूम में जितनी भीड़ थी, उस से कहीं अधिक भीड़ कोर्ट रूम में उस दिन आई. जज महोदय ने ठीक 10 बजे अपनी कुरसी पर आ कर बैठे तो सभी की निगाहें उन की ओर हो गईं कि पता नहीं जज साहब क्या आरोप तय करेंगे.
उन्होंने अभियुक्त सैफ पर आरोप तय करने के लिए कहना शुरू किया, “सैफ को बच्चे के साथ कुकर्म कर के तार से उस का गला घोंट कर मार देने का आरोप सिद्ध हो गया है. इसे भारतीय दंड विधान की धारा 302 में आजीवन कारावास और 50 हजार रुपयों का जुरमाना लगाया जाता है.
धारा 377 भादंवि में 10 वर्ष का कठोर कारावास और 20 हजार रुपए का आर्थिक दंड लगाया जाता है. धारा 363 में 5 वर्ष सश्रम दंड और 20 हजार का आर्थिक जुरमाना. धारा 201 में 7 वर्ष का कठोर कारावास और 10 हजार रुपए का जुरमाना लगाया जाता है. वसूली का 80 प्रतिशत हिस्सा प्रतिकर के रूप में मृतक के मांबाप को दिया जाएगा.”
इस के बाद कोर्ट की अगली तारीख सोमवार तय कर के कोर्ट स्थगित कर दी गई.
29 मई, 2023 को पोक्सो कोर्ट के जज राम किशोर यादव ने सैफ को सभी धाराओं में दोषी करार देते हुए कहा, “मासूम के साथ कुकर्म और उस की हत्या का दोषी मोहम्मद सैफ धारा 6 लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 (यथा संशोधित 2019) के अंतर्गत मृत्युदंड से दंडित किया जाता है. सैफ को फांसी के फंदे पर तब तक लटकाया जाए, जब तक इस के प्राण न निकल जाएं.” जज महोदय ने सजा सुनाने के बाद अपने पैन की निब तोड़ दी और उठ कर अपने चैंबर में चले गए.
पोक्सो कोर्ट ने त्वरित न्याय का उदाहरण पेश कर के मात्र 15 दिन में अपना फैसला सुनाया. इस फैसले की सभी ने भूरिभूरि प्रशंसा की. मृतक बच्चे की मां नाजिस और पिता अफजल फूटफूट कर रोने लगे. उन का कहना था कि आज हमारे बेटे अरहान को न्याय मिला है. त्वरित काररवाई से हम संतुष्ट हैं. आज न्यायाधीश ने सच्चा न्याय किया है. उन के रुदन को देख कर एडवोकेट अलका उपमन्यु की भी आंखें भर आईं. वह मुंह घुमा कर रूमाल से अपने आंसू पोंछने लगीं.