लगभग डेढ़ महीने बाद ताहिरा ने आ कर बताया, ‘‘वकील साहब, अजीम ने चोरी से शादी कर ली है. अब वह जल्दी ही अमेरिका जाने वाला है.’’
मुझे इसी बात का इंतजार था. मैं ने पूछा, ‘‘शादी कब हुई?’’
‘‘एक हफ्ते पहले,’’ ताहिरा ने कहा, ‘‘अब वह जल्दी ही अमेरिका चला जाएगा.’’
‘‘तुम इस की चिंता मत करो, मैं अभी पता किए लेता हूं.’’ कह कर मैं ने मकबूल के घर का नंबर मिला कर बड़ी होशियारी से लड़की से ही पता कर लिया कि वह अमेरिका कब जा रही है. उस ने बताया था कि वह तो जल्दी ही चली जाएगी, लेकिन अजीम बुखारी बाद में आएगा, क्योंकि उसे कागजात तैयार कराने होंगे.
अगले दिन मैं ने अदालत में मुकदमा दाखिल कर दिया. अदालत ने सम्मन भिजवा कर सुनवाई के लिए 15 दिन बाद की तारीख दे दी. मैं ने अजीम बुखारी का पता उस के घर के बजाय मकबूल हुसैन के घर का दिया था. मेरा मकसद था कि मकबूल हुसैन और यासमीन, दोनों को अजीम बुखारी की पहली शादी का पता चल जाए.
सम्मन ले जाने वाले चपरासी को मैं ने कुछ रुपए दे कर ताकीद कर दी थी कि वह यासमीन या मकबूल हुसैन के सामने ही सम्मन तामील कराएगा. अगर अजीम घर में न हो तो घर वालों को सम्मन के बारे में बता देगा.
दोपहर बाद चपरासी ने लौट कर बताया कि सम्मन तामील हो गया है. अजीम घर पर ही था. दरवाजा उस की बीवी यासमीन ने खोला था. तब उस ने जोर से पुकार कर कहा था, ‘‘अजीम साहब, आप की पहली बीवी ताहिरा ने आप के खिलाफ मुकदमा दायर किया है. यह उसी का सम्मन है.’’
उस की बात पर यासमीन बुरी तरह से चौंकी. चपरासी के हाथ से कागज ले कर उसे पढ़ा. फिर अजीम को खा जाने वाली नजरों से घूरते हुए बोली, ‘‘अजीम, यह तो तुम्हारे नाम है. तुम्हारे फादर का भी नाम लिखा है. इस का मतलब तुम ने मेरे साथ फ्रौड किया है.’’
‘‘प्लीज, अभी शांत रहो. मैं तुम्हें सारी बात समझा दूंगा.’’ कह कर उस ने रसीद पर दस्तखत किए और चपरासी को थमा दिया.
3 बजे मैं ने मकबूल हुसैन के घर फोन किया तो फोन यासमीन ने उठा कर तेज लहजे में ‘हैलो’ कहा. वह गुस्से में लग रही थी. शायद अजीम से जम कर लड़ाई हुई थी.
मैं ने बड़ी नरमी से कहा, ‘‘मैं ताहिरा का वकील अमजद बेग बोल रहा हूं.’’
‘‘मुझे न आप से कोई मतलब है न अजीम से.’’ उस ने कहा.
‘‘चपरासी ने बताया था कि अजीम आप के ही यहां है. अजीम चाहे तो मैं अपनी मुवक्विल से उस का समझौता करा सकता हूं,’’ मैं ने ताहिरा के बारे में विस्तार से बता कर कहा, ‘‘वह बहुत नेक औरत है. इतना सब होने के बाद भी वह समझौते के लिए तैयार है.’’
मैं ने अजीम बुखारी और यासमीन के निकाहनामे की नकल निकलवा ली. उसी दिन शाम के वक्त एक दुबलीपतली औरत मेरे औफिस में आई. उस की उम्र 30 साल के आसपास थी, बाल कटे हुए थे, गाल अंदर धंसे हुए थे, रंग गोरा था. आते ही उस ने पूछा, ‘‘आप ही मिर्जा अमजद बेग एडवोकेट हैं?’’
‘‘जी हां.’’ मैं ने कहा.
‘‘मैं यासमीन बुखारी, आप से अजीम बुखारी वाले मामले में बातचीत करने आई हूं.’’
मैं ने उसे बैठने का इशारा करते हुए कहा, ‘‘कहिए, आप क्या कहना चाहती हैं?’’
‘‘मुझे अजीम ने उस औरत के बारे में सब बता दिया है. मैं इस मामले को खत्म करना चाहती हूं,’’ उस ने बेरुखी से कहा, ‘‘आप कुछ रकम दिलवा कर उस से मेरे शौहर का पीछा छुड़वा दीजिए.’’
‘‘उस की कुल अदायगी 1 लाख 42 हजार की है, गहने अलग से.’’
‘‘1 लाख 42 हजार,’’ वह चौंकी, ‘‘गरीब लोग इसी तरह फैलते हैं.’’
‘‘गरीबों में यही तो खराबी है.’’ मैं ने कहा, ‘‘मिसेज यासमीन, आप तो कुछ दिनों में चली जाएंगी, फिर यह समझौता कैसे होगा? आप केस खत्म हुए बगैर पैसे देंगी नहीं? मुझे अपनी मुवक्किल से भी बात करनी होगी कि वह राजी है या नहीं?’’
‘‘मैं अभी नहीं जा रही हूं वकील साहब. उम्मीद है कि 40-50 हजार में मामला निपट जाएगा. अगर बात बन जाती है तो मुझे फोन कर दीजिएगा.’’
‘‘कोशिश करूंगा. आप के शौहर ने तो वकील कर ही लिया होगा? आप अपने शौहर से जवाब दाखिल करा दीजिए. इस से हमारी पोजीशन साउंड हो जाएगी.’’ मैं ने सलाह दी.
‘‘उस ने किसी वकील से बात तो की है. मैं आप का यह संदेश उसे दे दूंगी.’’ कह कर वह बाहर निकल गई.
अजीम बुखारी ने अपने वकील से जवाब दाखिल करा दिया था. मेरे सामने पड़ने पर बोला, ‘‘बेग साहब, आप तो बड़े छिपे रुस्तम निकले. लेकिन आप ने जो चाल चली, वह मेरे लिए फायदेमंद रही. शादी की बात एक न एक दिन यासमीन को मालूम होनी ही थी, आप के जरिए मालूम होने से मेरे सिर से बोझ उतर गया.’’
मैं ने हंस कर कहा, ‘‘मैं हमेशा दूसरों का ही भला चाहता हूं.’’
‘‘लेकिन मेरी बेगम से आप ने मामला सुलटाने का जो वायदा किया था, उस का क्या हुआ?’’
‘‘अभी मेरी मुवक्किल से बात नहीं हुई है. लेकिन आप ने रकम काफी कम रखी है. इतने में बात बनना मुश्किल है.’’ मैं ने कहा.
अजीम मुझे एक किनारे ले जा कर बोला, ‘‘वकील साहब, आप बात कर लें. मैं 10-20 हजार रुपए और बढ़ा सकता हूं. लेकिन यह बात मेरी बेगम को मालूम नहीं होनी चाहिए. आप किसी तरह यह मामला जल्दी निपटवा दें. अगर मुझे अमेरिका जाने की जल्दी न होती तो मैं ताहिरा को एक पैसा न देता. केस भले ही बरसों चलता.’’
अजीम के जाने के बाद मैं ने उस के वकील से कहा, ‘‘आप का मुवक्किल मामला जल्द खत्म करवाना चाहता है. इसलिए आप एक हफ्ते की तारीख ले लें.’’
आगे की कहानी जानने के लिए पढ़ें Hindi Emotional Kahani का चौथा भाग…



