शादी के बाद कुछ महीने तो बड़े चैन से गुजरे, लेकिन बाद में आर्थिक तंगी सामने आ खड़ी हुई. वजह यह थी कि वे दोनों कैटरिंग के जिस काम से जुड़े थे, वह मौसमी शादियों और पार्टियों के बूते पर चलता था, जब शादियों का मौसम नहीं होता था तो दोनों की आय का स्रोत बंद हो जाता था. 2-4 पार्टियों के लिए काम मिल भी जाता तो उस से गुजारा नहीं होता था.
जब आर्थिक हालात बिगड़ते गए तो पूजा को फिर से डांस बार का रुख करना पड़ा. जबकि आसिफ कैटरिंग के काम से ही जुड़ा रहा. पूजा इस बार डांसबार में लौटी तो वह पहले वाली पूजा नहीं थी. शादी के बाद वह काफी बदल गई थी. इस बार डांसबार में आ कर मां की तरह पूजा के भी कदम बहक गए. फलस्वरूप वह भी अपनी मां मंदा के रास्ते पर चल निकली.
शारीरिक सुख और पैसों की चाह में पूजा के कई पुरुष मित्र बन गए. जिन के साथ वह घूमनेफिरने और पार्टियों में जाने लगी. अब वह रात को अकसर नशे में घर लौटने लगी थी. आसिफ को यह बिलकुल पसंद नहीं था. जब वह पूजा को इस सब के लिए मना करता था तो वह उलटा जवाब देती थी.
इन बातों को ले कर पूजा और आसिफ में कभीकभी झगड़ा हो जाता था और बात मारपीट तक पहुंच जाती थी. एक बार तो आसिफ ने गुस्से में पूजा को इतना पीटा कि उस ने साकी नाका पुलिस थाने जा कर उस के खिलाफ शिकायत दर्ज करवा दी. फलस्वरूप आसिफ को जेल जाना पड़ा. जब तक वह जमानत पर जेल के बाहर आया तब तक उस के प्रति पूजा का मन बदल चुका था. अब वह आसिफ के साथ नहीं रहना चाहती थी. वह उस का मोह छोड़ कर अपनी मौसी की लड़की लता के पास नागपुर चली गई.
लता भी नागपुर के बीयर बारों में आर्केस्ट्रा पर नाचने का काम करती थी. जाने से पहले पूजा ने जब लता को फोन कर के अपनी आप बीती बताई तो लता ने उसे नागपुर आने की सलाह दी. लता की सलाह पर पूजा नागपुर चली आई थी और लता के साथ बीयर बारों में काम करने लगी थी.
एक महीने बाद आसिफ ने पूजा से संपर्क कर के उस से माफी मांगी तो उस ने आसिफ को नागपुर बुला लिया. नागपुर आ कर आसिफ ने कैटरिंग का काम करना शुरू कर दिया. उस के नागपुर आने के बाद पूजा ने जाटवरोड़ी बस्ती में किराए का मकान ले लिया. आसिफ और वह उसी मकान में पतिपत्नी की तरह रहने लगे. इस के बावजूद पूजा का चालचलन वही रहा जो मुंबई में था. नागपुर में भी उस ने कई पुरुष मित्र बना लिए थे.
पूजा के पुराने रंगढंग देख कर आसिफ को बहुत दुख हुआ क्योंकि उस के लिए उस ने खुद को बिलकुल बदल लिया था. आसिफ ने पूजा को समझाने की कोशिश की लेकिन वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आई. इस से आसिफ को उस से नफरत हो गई.
27 अप्रैल 2014 की रात उस नफरत की आग में घी डालने का काम उस पार्टी ने किया था जो पूजा के मकान की छत पर आयोजित की गई थी. यह पार्टी पूजा के एक दोस्त के बर्थडे की थी. पार्टी के लिए शराब और चिकन वगैरह की पूरी व्यवस्था की गई थी.
उस पार्टी में सारे लोग शराब पी कर आर्केस्ट्रा की धुन और हलकी पीली रोशनी के बीच एकदूसरे की बाहों में झूल रहे थे. पार्टी में आसिफ भी मौजूद था, जो पूजा की हर हरकत को देख रहा था. पूजा शराब के नशे में पार्टी में एक युवक की बाहों में अश्लीलता की हदें पार करते हुए झूल रही थी.
वह युवक उस के नाजुक अंगों से छेड़खानी कर रहा था. यह सब देख कर आसिफ का खून खौल रहा था. लेकिन वह मजबूर था क्योंकि वह युवक उस इलाके का माना हुआ बदमाश था. जब आसिफ से यह सब नहीं देखा गया तो वह पार्टी छोड़ कर नीचे चला आया और अपने बिस्तर पर लेट गया.
जब पार्टी खत्म हुई तो पूजा भी नीचे कमरे में गई और आसिफ के पास लेट कर सो गई. आसिफ उस वक्त जाग रहा था. उस की आंखों से नींद कोसों दूर थी. उस की आंखों में पूजा की बेवफाई घूम रही थी. उस के दिमाग में बैठा शैतान उस की सोचनेसमझने की शक्ति को लील गया था. ऐसी विश्वासघाती बीवी से तो अच्छा है, वह बिना उस के ही रहे, यह सोच कर आसिफ बिस्तर से उठा और कमरे में रखे कटर ब्लेड से एक झटके में पूजा का गला काट दिया.
गला कटते ही पूजा लड़खड़ा कर फर्श पर गिर पड़ी. उस का गला काटने के बाद आसिफ ने मकान के बाहर आ कर दरवाजा बंद किया और ताला लगा कर मुंबई चला गया. लेकिन मुंबई आने के बाद भी उस के मन में पूजा के प्रति नफरत खत्म नहीं हुई थी. इसीलिए उस ने हत्या करने के बाद भी नागपुर में रहने वाले अपने एक दोस्त को फोन कर के पूजा के बारे में पूछा. दरअसल उसे शंका थी कि कहीं वह जीवित न रह गई हो. उस की यही गलती उसे महंगी पड़ी और वह फोन काल से पकड़ा गया.
आसिफ इस्माइल शेख से विस्तृत पूछताछ के बाद जांच अधिकारी सब इंसपेक्टर मुकुंद कवाड़े ने उस के विरुद्ध भादंवि की धारा 302, 202 के तहत मुकदमा दर्ज कर उसे अदालत में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया. कथा लिखे जाने तक वह नागपुर जेल में बंद था.
—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित


