Love Crime: गर्लफ्रेंड का इंटरव्यू रोकने की साजिश – प्रेमी ने कंपनी को दी बम से उड़ाने की धमकी

Love Crime: एक ऐसा अनोखा मामला सामने आया, जो आप को भी हैरान कर देगा. जहां एक बौयफ्रेंड ने अपनी गर्लफ्रेंड का इंटरव्यू रुकवाने की ऐसी साजिश रची कि सभी हैरान रह गए. उस ने ईमेल के जरिए कंपनी को एक मैसेज भेजा और कहा कि वह बम से उड़ा देगा. चलिए जानते हैं इस लव और क्राइम की स्टोरी को विस्तार से, जो आप को होने वाले क्राइम से सचेत करेगी.

यह घटना हरियाणा के गुरुग्राम के सेक्टर 43 स्थित वन होराइजन सेंटर में एक निजी कंपनी से सामने आई है. जहां प्रेमी अनिकेत ने सुबह 9 बजे कंपनी को मेल भेज कर धमकी दी. यह मेल कंपनी के औफिशियल मेल आईडी पर भेजा गया था. आसपास इलाके में बम की धमकी से हड़कंप मच गया. पुलिस को सूचना दी गई और पुलिस मौके पर पहुंची. इसके बाद पुलिस ने स्निक डौग और मेटल डिटेक्टर की मदद से कंपनी का पूरा केबिन चेक किया.

पुलिस ने जांच की तो पता चला कि मेल फेक था और बम की सूचना भी फेक थी. एसीपी विकास कौशिक ने बताया कि डीएलएफ थाना साइबर की पूरी टीम ने कंपनी में सभी को खाली करवा कर तलाशी ली. कई घंटों तक जांच चली, लेकिन पुलिस को कोई भी संदिग्ध वस्तु नहीं मिली.

जांच में खुलासा हुआ कि प्रेमी अनिकेत ने यह साजिश अपनी पूर्व गर्लफ्रेंड से रिश्ता सुधारने के लिए रची थी. अनिकेत ने यह वारदात इसलिए की ताकि गर्लफ्रेंड का इंटरव्यू स्थगित हो जाए और वह उस से फिर से संपर्क कर सके. आरोपी अनिकेत के खिलाफ पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर ली है. Love Crime

Hindi Crime Stories: शादी से मना किया तो

Hindi Crime Stories: प्यार तो प्यार से ही होता है. किसी से जबरदस्ती प्यार नहीं किया जा सकता. अगर एकतरफा प्यार करने वाले गुरमीत सिंह की समझ में यह बात आई होती तो शायद आज वह अमनदीप की हत्या के आरोप में जेल में नहीं होता.

अमनदीप एक हाथ में दूध का पैकेट थामे सहेलियों से बातें करती हुई मोहाली के फेज-5 की मार्केट की पिछली गली से निकल कर बगल की कोठी नंबर 1869 की ओर बढ़ी. उसी में वह पेईंगगैस्ट के रूप में रहती थी. वह मार्केट से बाहर आई थी कि अचानक एक लड़के ने उस के नजदीक आ कर उस का हाथ पकड़ा और सहेलियों से अलग खींच ले गया. एक तरह से यह निहायत बेहूदगी थी, इसलिए सहेलियों ने शोर मचाना चाहा, लेकिन अमनदीप ने इशारे से उन्हें मना कर दिया. शायद लड़का उस का परिचित और घुलामिला था, वरना किस की मजाल थी कि इस तरह पैदल आ कर सरेराह चलती लड़की को पकड़ कर खींच ले जाए.

यही सोच कर अमनदीप की सहेलियां चुप हो गईं और ध्यान से उन्हें देखने लगीं कि क्या हो रहा है? उन्होंने देखा कि एक कोने में ले जा कर लड़के ने अमनदीप का हाथ छोड़ दिया और उस से बातें करने लगा. उन के हावभाव से यही लग रहा था कि वे प्यार से बातें कर रहे हैं. लड़का दोनों हाथ जोड़ कर अमनदीप से कोई गुजारिश कर रहा है. लग रहा था, वह उस से कोई बात मनवाने की कोशिश कर रहा है. इस बीच उस ने एकदो बार उस के पैर छूने की भी कोशिश की थी.

दोनों के बीच क्या बातें हो रही हैं, इस का अंदाजा अमनदीप की सहेलियों को बिलकुल नहीं हो रहा था. अलबत्ता अमनदीप के हावभाव से यह अनुमान जरूर लग रहा था कि लड़का जो भी कह रहा है, वह उसे मना करते हुए उसे समझाने की कोशिश कर रही है. एकाध बार वह नाराज होती भी लगी थी. अचानक पता नहीं क्या हुआ कि धांयधांय कर के एकसाथ कई गोलियां चलीं और अमनदीप जोर से चीख कर लहरा कर जमीन पर गिर पड़ी.

अमनदीप पर गोलियां उसी लड़के ने चलाई थीं, जो उसे पकड़ कर ले गया था और बातें कर रहा था. गोलियां चला कर हाथ में रिवौल्वर थामे वह पैदल ही भागने लगा तो पैरों से अपंग एक औरत ने लपक कर उसे पकड़ना चाहा. लेकिन लड़के ने उस का गला पकड़ कर गिरा दिया और खुद रिवौल्वर लहराते हुए चला गया. हाथ में रिवौल्वर होने की वजह से किसी भी आदमी की उसे पकड़ने की हिम्मत नहीं हुई. अमनदीप के गिरते ही उस की सहेलियां चीखते ही उस की ओर दौड़ीं. खून से लथपथ पड़ी अमनदीप को उठा कर उन्होंने किसी की गाड़ी से फेज-4 के चीमा अस्पताल पहुंचाया. डाक्टरों ने अमनदीप को मृत घोषित कर इस घटना की सूचना पुलिस को दे दी.

थोड़ी ही देर में थाना फेज-1 की पुलिस अस्पताल पहुंच गई और लाश को कब्जे में ले लिया. उस के बाद सारी औपचारिक कानूनी काररवाई निपटा कर लाश को फेज-6 के सिविल अस्पताल ले जा कर मौर्चरी में रखवा दिया. घटना को वायरलैस द्वारा फ्लैश कर दिया गया था. इसलिए मोहाली  के एसएसपी गुरप्रीत सिंह भुल्लर, एसपी सिटी-1 आशीष कपूर, डीएसपी सिटी-1 आलम विजय सिंह और थाना फेज-1 के थानाप्रभारी इंसपेक्टर सुखविंदर सिंह दलबल के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए थे. यह घटना 12 जनवरी, 2015 की रात के करीब 8 बजे की थी.

घटनास्थल पर की गई पूछताछ में पुलिस को कुछ खास जानकारी नहीं मिली. वहां मौजूद लोग तमाशबीन ही साबित हुए थे. मृतका की सहेलियों से पूछताछ की गई तो उन्होंने घटना के बारे में विस्तार से बताते हुए पुलिस को एक अहम बात यह बताई कि हमलावर सफेद रंग की वरना कार में आया था.

निरीक्षण में घटनास्थल पर उसी तरह की एक वरना कार खड़ी भी दिखाई दे गई, जिस का नंबर था पीबी 05 एक्स 2114. वह कार लौक नहीं थी, लेकिन उस की चाबी भी इग्नीशन में नहीं लगी थी. कार की सीटों पर अन्य गाडि़यों की 2 नंबर प्लेट्स, लाल रंग की एक चुनरी और मिठाई का एक डिब्बा रखा था. उस कार के पास एक अन्य वरना कार खड़ी थी, जिस का नंबर था पी.बी. 05 एफ 0069. पुलिस ने क्रेन मंगवाई और दोनों कारें उठवा कर थाने ले गई.

अमनदीप की सहेलियों में उस की चचेरी बहन नवनीत कौर भी थी. उसी से तहरीर ले कर पुलिस ने अमनदीप की हत्या का मुकदमा थाना फेज-1 में दर्ज कर लिया. इस के बाद हमलावर का हुलिया फ्लैश कर के मोहाली से बाहर जाने वाली सभी सड़कों पर नाकाबंदी कर दी गई. संदेह के आधार पर कुछ लड़कों को थाने ला कर पूछताछ भी शुरू कर दी गई. इन लड़कों में एक ऐसा लड़का पुलिस के हाथ लग गया, जो न केवल हमलावर को जानता था, बल्कि फोन द्वारा वहां हो रही काररवाई की जानकारी भी उसे दे रहा था.

पकड़े जाने के बाद पहले तो वह कुछ भी जानने से मना करता रहा, लेकिन थाने ला कर जब उस के साथ थोड़ी सख्ती की गई तो उस ने सारा रहस्य उगल दिया. उस लड़के ने जो बताया था, उस के अनुसार, हमलावर का नाम गुरमीत सिंह था. वह फिरोजपुर के थाना सदर के गांव रज्जोवाला के रहने वाले मोड़ा सिंह का बेटा था. वह मृतका अमनदीप से एकतरफा प्यार करता था और उस से शादी करने के सपने देखता था. इसलिए वह उस के पीछे हाथ धो कर पड़ा था.

जबकि अमनदीप कतई तैयार नहीं थी. कुछ दिनों पहले अमनदीप मोहाली आ कर रहने लगी तो गुरमीत उस के पीछे यहां भी पहुंच गया. यहां वह यह तय कर के आया था कि अमनदीप से वह साफसाफ बात करेगा. वह मान गई तो ठीक, वरना मामले को हमेशा के लिए खत्म कर देगा. लड़के का कहना था कि गुरमीत मार्केट में अचानक उसे मिल गया था. उस ने उसे सब कुछ बता कर कहा था कि अगर बात बढ़ जाती है तो वह उस की मदद के लिए आ जाएगा. इस के बाद गुरमीत अमनदीप को उस की सहेलियों से अलग ले जा कर बातचीत करने लगा था. उस ने शायद उस की बात मानने से मना कर दिया था, इसलिए गुरमीत उसे गोली मार कर भाग गया था. इस के बाद उस ने फोन कर के वहां की स्थिति के बारे में पूछा था. इस के बाद उस का फोन बंद हो गया तो अभी तक बंद है.

पुलिस को उस से गुरमीत का मोबाइल नंबर मिल गया था. अमनदीप की चचेरी बहन से उस के घर का पता और फोन नंबर मिल गया था. वह फिरोजपुर के गांव ढोलेवाल की रहने वाली थी. उस के पिता कुलबीर सिंह गांव के नंबरदार थे और फिरोजपुर से बीजेपी के पिछली जाति प्रकोष्ठ के प्रधान थे. अमनदीप का एक बड़ा भाई था मनप्रीत सिंह, जो शादीशुदा था. अमनदीप घर की एकलौती बेटी थी. वह पढ़नेलिखने में काफी होशियार थी. फिरोजपुर के देवसमाज कालेज से बीसीए एवं बीएड करने के बाद वह देवराज ग्रुप औफ कालेजेज से एमसीए कर रही थी.

यह उस का लास्ट सैमेस्टर चल रहा था, इसीलिए वह मोहाली इंडस्ट्रियल एरिया के एक इंस्टीट्यूट में पीएचपी प्रोग्रैमिंग कोर्स के आई थी. यह ट्रेनिंग पूरी होते ही घर वाले उस की शादी कर देना चाहते थे. लेकिन इस से पहले अमनदीप आईटी इंडस्ट्री में अच्छी नौकरी हासिल करना चाहती थी. कुलबीर सिंह को बेटी की मौत का समाचार मिला तो घर में कोहराम मच गया. परिवार के कुछ लोगों को ले कर वह रात में ही मोहाली के लिए रवाना हो गए.

अगले दिन मोहाली के सिविल अस्पताल में अमनदीप के शव का पोस्टमार्टम डा. कुलदीप सिंह और डा. विनीता नागपाल की टीम द्वारा किया गया. उसे 3 गोलियां लगी थीं. एक गोली दाहिने कंधे को चीरते हुए गाल को पार कर के दूसरी ओर जबड़े में फंस गई थी. दूसरी गोली उस के दिल को छेदते हुए फूड पाइप के पास पहुंच गई थी और तीसरी उस की बगल में लगी थी. तीनों ही गोलियां मृतका के लिए घातक सिद्ध हुई थीं. सभी गोलियां उस के शरीर में फंसी रह गई थीं. एक खूबसूरत लड़की को गोलियों से इस तरह छलनी देख कर पोस्टमार्टम करते समय एक ट्रेनी नर्स बेहोश हो गई थी.

खैर पोस्टमार्टम के बाद लाश घर वालों को सौंप दी गई थी. इस के बाद घर वाले लाश ले कर अपने गांव चले गए थे. लाश पहुंचते ही गांव का माहौल गमगीन हो गया था. मातापिता और भाई के अलावा अन्य रिश्तेदारों का भी रोरो कर बुरा हाल था. पूरा गांव लड़की के अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पउ़ा था. शाम को गांव के श्मशान घाट पर अमनदीप का अंतिम संस्कार करने के बाद गुरुद्वारा में अरदास की गई. अमनदीप पूरे गांव की लाडली बेटी थी. पढ़ाई में होशियार होने की वजह से सभी को उस पर फख्र था कि एक दिन वह पूरे गांव का नाम चमकाएगी.

शायद इसीलिए उस की इस दर्दनाक मौत से गांव का हर चेहरा उदास था. हर गांववासी को उस की इस मौत का गहरा दुख था. हत्यारे की पहचान हो गई थी. अब सिर्फ उसे गिरफ्तार करना बाकी था. मगर वह भूमिगत हो गया था. उसे गिरफ्तार करने के लिए पुलिस ने अपने मुखबिरों को सतर्क करने के साथ खुद भी उस की तलाश में जगहजगह छापामारी शुरू कर दी. इस के अलावा उस पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने के लिए उस के घर वालों की धरपकड़ शुरू कर दी. इस काररवाई से पुलिस को यह जानकारी मिली कि हत्या में फिरोजपुर के ही गांव मोहेवाल के रहने वाले बलदेव सिंह का बेटा जगरूप भी शामिल था. इस के बाद पुलिस उस की भी तलाश में लग गई.

गुरमीत के बारे में जानकारी जुटाने के लिए पुलिस ने सोशल साइट फेसबुक पर भी उस का एकाउंट चैक किया. इस से पता चला कि गुरमीत सिंह छात्र राजनीति में भी सक्रिय था. उस का संबंध सोपू (स्टूडेंट और्गेनाइजेशन औफ पंजाब यूनिवर्सिटी) पार्टी से था. अपने फेसबुक एकाउंट पर उस ने सोपू पार्टी से जुड़े तमाम फोटो शेयर कर रखे थे. पुलिस गुरमीत के साथसाथ जगरूप की भी तलाश कर रही थी. छापेमारी के अलावा पुलिस ने दोनों के बारे में फोटो सहित अखबारों में छपवा कर लोगों से अपील की कि अगर इन के बारे में कुछ पता चलता है तो पुलिस वालों को सूचना दें. लेकिन पुलिस को इस का कोई फायदा नहीं मिला. इस के बाद पुलिस ने लुकआउट सर्कुलर जारी करा दिया, जिस से अपराधी देश से बाहर न जा सके.

इस बीच पुलिस को इस बात की जानकारी मिल गई थी कि फिरोजपुर के कस्बा ममदोर के रहने वाले गुरमीत की बूआ के बेटे अंगरेज सिंह ने 32 बोर का अपना लाइसैंसी रिवौल्वर उसे दिया था. जगरूप के बारे में ताजी जानकारी यह मिली कि गुरमीत को उस ने चंडीगढ़ के सेक्टर-49 की अपनी पीजी एकौमोडेशन में अपने साथ ठहराया था. इस के बाद गुरमीत रिवौल्वर ले कर अमनदीप से मिलने गया तो वह भी अपनी गाड़ी से उस के पीछेपीछे गया था. लेकिन गोली चलने के बाद लोग जमा हो गए तो उन्हें गाडि़यां निकालना मुश्किल हो गया था. तब गुरमीत के पीछेपीछे वह भी पैदल ही भाग निकला था.

यह जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने अंगरेज सिंह को भी अमनदीप मर्डर केस का अभियुक्त बना दिया था. हत्या हुए 72 घंटे बीत गए थे, जबकि कोई भी आरोपी हाथ नहीं लगा था. उस के बाद पुलिस ने सभी बैंक खाते सीज करवा दिए थे. अभी तक पुलिस चंडीगढ़, मोहाली के अलावा पंजाब के अन्य शहरों, कस्बों व गांवों में ही छापामारी कर रही थी, लेकिन अब अभियुक्तों की तलाश में दिल्ली और उत्तर प्रदेश में भी अनेक जगहों पर छापे मारे गए.

आखिर 16 जनवरी, 2015 को गुरमीत ने फिरोजपुर के एक राजनेता के साथ मोहाली आ कर थाना फेज-1 के थानाप्रभारी इंसपेक्टर सुखविंदर सिंह के सामने आत्मसमर्पण कर दिया. वारदात में इस्तेमाल रिवौल्वर भी उस ने पुलिस के हवाले कर दी थी. पुलिस ने उसे अदालत में पेश कर के 5 दिनों के कस्टडी रिमांड पर ले कर पूछताछ की तो उस के एकतरफा प्यार की बलि चढ़ी अमनदीप कौर की निर्मम हत्या की जो कहानी सामने आई, वह इस तरह थी :

फिरोजपुर के गांव रज्जोवाला और ढोलेवाल एकदम आमनेसामने पड़ते हैं. रज्जोवाला में रहता था गुरमीत सिंह का परिवार. उस के परिवार में एक बड़ी बहन और एक छोटा भाई था. बहन की शादी हो चुकी थी, जबकि भाई पढ़ रहा था. बरसों पहले उस के पिता मोड़ा सिंह अपने साथ एक अन्य औरत को ले आए थे, जिस से पूरे गांव में बवाल हो गया था. इस के बाद शर्मिंदा हो कर मोड़ा सिंह और उन के साथ आई महिला ने आत्महत्या कर ली थी.

नरसरी क्लास से ले कर ग्यारहवीं तक गुरमीत और अमनदीप ढोलेवाल के सरकारी स्कूल में एकसाथ पढ़े थे. बारहवीं गुरमीत ने प्राइवेट की थी. इसी तरह बीए पार्ट-वन करने के बाद वह इधरउधर घूमते हुए राजनीति में जाने की कोशिश में लग गया था. अमनदीप को वह बचपन ही से पसंद करता आया था, इसीलिए उस से शादी के सपने देखा करता था.

अमनदीप पढ़ाई में होशियार थी, शायद इसीलिए अपने भविष्य के प्रति गंभीर थी. एक असफल व्यक्ति के रूप में वह गुरमीत को ज्यादा पसंद नहीं करती थी. जबकि गुरमीत ने उसे अपने दिलोदिमाग में पूरी तरह बसा लिया था. अमनदीप सफलता की सीढ़ी फलांगती हुई आखिर अपनी मंजिल के एकदम करीब पहुंच गई थी. अपने घर वालों की मरजी से उस ने शादी के लिए हामी भी भर दी थी.

इसी बात ने गुरमीत को परेशान कर दिया था. वह तुरंत अमनदीप से मिला और उसे समझाया, ‘‘हमारा जन्मजन्मांतर का साथ है अमन, बचपन से मैं ने तुम्हारे सिवाय किसी और के बारे में सोचा तक नहीं, इसलिए प्लीज मेरा दिल मत तोड़ो.’’

‘‘देखो गुरमीत, ऐसा सोच कर तुम खुद को धोखा देते रहे हो. हम दोनों पड़ोसी गांव से हैं, इसलिए भाईबहन जैसा रिश्ता है हमारा. फिर हमारी जाति भी अलग है. फालतू की बातें सोच कर क्यों अपना दिमाग खराब करते रहते हो. जिंदगी को सीरियसली लेना सीखो. मैं तुम्हारी भावनाओं की कदर करती हूं, मगर इस का मतलब यह नहीं कि मैं तुम से शादी कर लूं. ऐसा बिलकुल नहीं हो सकता.’’ अमनदीप ने भी उसे अपने तरीके से समझाने का प्रयास किया था.

गुरमीत पर उस की किसी बात का कोई असर नहीं पड़ा. वह लगातार उस का पीछा करते हुए उसे शादी के लिए राजी करने की कोशिश करता रहा. आखिर अमनदीप परेशान हो गई तो उस ने मोहाली में रहने का फैसला किया. वहां उस की चचेरी बहन अपनी सहेलियों के साथ पहले से ही फेज-5 के एक पीजी में रह रही थी. अमनदीप भी आ कर उन्हीं के साथ रहने लगी. गुरमीत को उस ने इस बारे में कुछ नहीं बताया, लेकिन उस ने पता कर ही लिया.

पता चलने पर वह काफी नाराज हुआ. अंगरेज सिंह उस की बूआ का बेटा था. उस से उस की निभती भी खूब थी. उस के पास जा कर किसी शादी में जाने का बहाना बनाते हुए उस ने उस से उस का लाइसैंसी रिवौल्वर ले लिया. इस के बाद मिठाई की दुकान से एक किलोग्राम मिठाई और किसी दुकान से लाल रंग का दुपट्टा खरीद कर वह कार से मोहाली पहुंच गया. यह वरना कार उस के मामा की थी, जिस में उस ने अन्य नंबरों की 2 प्लेट्स भी तैयार  करवा कर रख ली थीं.

गुरमीत ने तय कर लिया था कि इस बार अमनदीप से वह आरपार की बात करेगा. वह मान गई तो दुपट्टा और मिठाई का डिब्बा थमाते हुए गुरुद्वारा ले जा कर उस से शादी कर लेगा. इस के बाद गाड़ी की नंबर प्लेट बदल कर वह उसे ले कर घुमाने चला जाएगा. और अगर वह नहीं मानी तो उसे सदा के लिए मौत की नींद सुला देगा. मोहाली पहुंच कर वह बगल ही में पड़ने वाले चंडीगढ़ के सेक्टर-49 स्थित अपने परिचित युवक जगरूप सिंह की पीजी एकौमोडेशन पर चला गया. जगरूप को उस के खतरनाक इरादों के बारे में बिलकुल पता नहीं था, हालांकि अमनदीप से प्यार करने और उस से शादी करने की कोशिश वाली बात उस ने उसे बता दी थी. जगरूप ने उसे समझाया भी था कि वह इस तरह किसी लड़की को जबरन शादी के लिए मजबूर नहीं कर सकता.

गुरमीत ने जगरूप की एक नहीं सुनी और वहीं रहते हुए अमनदीप के बारे में पता लगाने लगा. 12 जनवरी को किसी ने उसे फोन पर बताया कि अमनदीप अपनी सहेलियों के साथ मोहाली के फेज-5 की मार्केट में है. वह तुरंत मोहाली की ओर चल पड़ा. उसे समझाने के लिए जगरूप भी अपनी गाड़ी से उस के पीछेपीछे चल पड़ा. लेकिन उसे पहुंचने में देर हो गई. उस के आने से पहले ही गुरमीत ने अमनदीप से बातचीत कर के अपनी जैकेट से रिवौल्वर निकाल कर उस पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दी थीं. इस के बाद वहां भगदड़ मच गई थी.

गुरमीत के अनुसार, अमनदीप जब अपनी सहेलियों के साथ फेज-5 मार्केट के पीछे की ओर आई तो वह उस का हाथ पकड़ कर एक किनारे ले गया था और दयनीय भाव से गिड़गिड़ा कर बोला था, ‘‘अमनदीप, आज मैं शायद तुम से आखिरी बार मिलने आया हूं. तुम सिर्फ इतना बता दो कि मुझ से शादी करोगी या नहीं?’’

‘‘गुरमीत, तुम समझने की कोशिश…’’

‘‘मुझे न कुछ सुनना है और न समझना. मैं तुम्हारे आगे हाथ जोड़ता हूं, पैर पड़ता हूं, मना मत करो. मेरा दिल बैठा जा रहा है, पता नहीं अभी मुझे क्या हो जाए.’’ कहते हुए गुरमीत ने अपने दोनों हाथ जोड़े और नीचे झुक कर अमनदीप के पैर छूने की भी कोशिश की.

अपनी बात मनवाने की वह लगातार कोशिश करता रहा. आखिर मैं अमनदीप ने कहा, ‘‘देखो गुरमीत, मेरे घर वालों ने मेरे लिए लड़का देख लिया है और मैं उन्हीं की मरजी से शादी करूंगी. तुम बेकार में मुझे परेशान मत करो.’’

‘‘ठीक है, लेकिन मैं भी निश्चय कर के आया हूं कि अगर तुम मेरी नहीं हो सकती तो मैं तुम्हें किसी और की भी नहीं होने दूंगा.’’ कहने के साथ ही उस ने जैकेट से रिवौल्वर निकाली और तड़ातड़ 3 गोलियां अमनदीप के जिस्म में उतार दीं.

गुरमीत के अनुसार, अमनदीप की हत्या करने के बाद वह खुद को भी गोली मार कर अपनी इहलीला खत्म कर लेना चाहता था. लेकिन हड़बड़ाहट में उस ने रिवौल्वर में भरी सभी की सभी गोलियां चला दी थीं. 19 जनवरी को गुरमीत की बूआ का बेटा 26 वर्षीय अंगरेज सिंह गिरफ्तार हुआ तो उस ने बताया कि उस के रिवौल्वर में कुल 5 गोलियां थीं. लेकिन निरीक्षण में मौके पर पुलिस को 2 अन्य गोलियों के निशान अथवा खोखे नहीं मिले थे. अंगरेज को भी 2 दिनों के कस्टडी रिमांड पर ले कर पूछताछ की गई, लेकिन उस ने कोई नई बात नहीं बताई. 21 जनवरी को गुरमीत और अंगरेज का पुलिस रिमांड खत्म होने पर उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया था.

23 जनवरी को अन्य वांछित अभियुक्त जगरूप सिंह ने भी अकेले ही थाने आ कर आत्मसमर्पण कर दिया था. पूछताछ में वह बेकसूर पाया गया, इसलिए अगले दिन यह कह कर उसे रिहा कर दिया गया कि इस वारदात में उस का कोई हाथ नहीं है. मामले की जांच करने वाले इंसपेक्टर सुखविंदर सिंह ने समय से दोनों दोषियों गुरमीत सिंह और अंगरेज सिंह के खिलाफ चालान तैयार कर के इलाका मजिस्ट्रेट के यहां पेश कर दिया, जहां से सैशन कमिट हो कर यह केस मोहाली के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सैशन जज दिलबाग सिंह जौहल की कोर्ट में चला. माननीय जज महोदय ने इस केस का फैसला महज 4 महीने में सुना दिया.

फैसला कुछ इस तरह से था. गुरमीत सिंह उर्फ गोरा को अमनदीप की हत्या के आरोप में आजीवन सश्रम कारावास और एक लाख रुपए जुरमाना तथा आर्म्स ऐक्ट 27(1) (बिना लाइसेंस का रिवौल्वर इस्तेमाल करने के लिए) 5 साल की कैद व 5 हजार रुपए जुरमाना की सजा सुनाई. अंगरेज सिंह को आर्म्स एक्ट 27बी के तहत 3 साल की कैद और 5 हजार रुपए जुरमाना की सजा सुनाई. जुरमाना की रकम से 5 हजार रुपए सरकारी खजाने में जमा करने के बाद शेष एक लाख 5 हजार रुपए की रकम अमनदीप के मातापिता को देने का आदेश दिया. Hindi Crime Stories

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

 

True Crime Story: ऊंचे ओहदे वाला रिश्ता – शक ने ली साक्षी की जान

True Crime Story: हर मातापिता की इच्छा होती है कि उन के बच्चे पढ़ाईलिखाई कर के आगे बढ़ें, उन की शादियां हों और वे अपनी दुनिया में खुश रहें. अशोक कुमार की बेटी साक्षी इंडियन आर्मी में मिलिट्री नर्सिंग सर्विसेज में लेफ्टिनेंट थी. साल 2017 में उस का सेलेक्शन हुआ था.

दिल्ली के तिलकनगर इलाके के रहने वाले अशोक कुमार को बेटी के आर्मी में सेलेक्शन के वक्त बधाइयां देने वालों का तांता लग गया था. तब वह खुशी से फूले नहीं समाए. जाहिर है यह बड़े गर्व की बात थी.

साक्षी की शादी नवनीत शर्मा के साथ हुई थी. नवनीत वायुसेना में स्क्वाड्रन लीडर थे. दोनों ही हरियाणा की अंबाला छावनी में तैनात थे. उन का 2 साल का एक बेटा भी था.

लोग अशोक कुमार को खुशनसीब इंसान मानते थे. कामयाब बेटी के पिता होने के नाते लोगों का सोचना भी ठीक था, लेकिन किसी इंसान की असल जिंदगी में क्या कुछ चल रहा होता है, इस बात को कोई नहीं जान पाता.

अशोक कुमार के साथ भी कुछ ऐसा ही था. बेटी को ले कर वह परेशान रहते थे. इस की बड़ी वजह यह थी कि बेटी का वैवाहिक जीवन उम्मीदों के विपरीत था. 20 जून, 2021 की रात का वक्त था, जब अशोक कुमार के मोबाइल पर साक्षी का फोन आया. उन्होंने बेटी से बात शुरू की.

‘‘हैलो! साक्षी बेटा कैसी हो?’’

‘‘पापा, यहां कुछ भी अच्छा नहीं चल रहा, मैं बहुत परेशान हो चुकी हूं.’’ साक्षी के लहजे में परेशानी छिपी हुई थी, जिसे अशोक कुमार ने भांप लिया था.

उन्होंने धड़कते दिल से पूछा, ‘‘क्या हुआ बेटा?’’

‘‘पापा, नवनीत मुझे लगातार परेशान करते हैं, हद इतनी हो गई है कि मेरे साथ मारपीट भी की जाती है. पता नहीं कब तक ऐसा चलेगा.’’ वह बोली.

‘‘सब्र कर बेटा. समय के साथ सब ठीक हो जाएगा. मैं समझाऊंगा उसे.’’ अशोक कुमार ने समझाया.

‘‘यह समझने वाले नहीं हैं. पता नहीं क्या होगा पापा. मैं बाद में बात करती हूं.’’ साक्षी ने सुबकते हुए फोन काट दिया.

बेटी की बातों से अशोक परेशान हो गए. उन्होंने अपने दामाद नवनीत का मोबाइल नंबर डायल किया, लेकिन कोई रिस्पांस नहीं मिला. उन्हें याद आया कि उन का नंबर दामाद ने ब्लौक किया हुआ था.

साक्षी भी यह बात अपने परिजनों को बता चुकी थी कि मायके वालों के नंबर ब्लौक लिस्ट में हैं.

इस के बाद उन्होंने साक्षी के ससुर चेतराम शर्मा को फोन किया, ‘‘भाईसाहब, आप ही बच्चों को समझाइए, काफी समय से यही सब चल रहा है. साक्षी का अभी फोन आया था और वह बता रही थी कि उस के साथ मारपीट भी की जा रही है.’’

‘‘देखिए भाईसाहब, यह उन का आपस का मामला है. नवनीत तो मेरी बात सुनता ही नहीं तो बताओ, मैं भी क्या कर सकता हूं.’’ चेतराम शर्मा बोले.

उन की बात सुन कर अशोक कुमार को बहुत निराशा हुई. इस से ज्यादा वह कर भी क्या कर सकते थे अलबत्ता वह चिंतित जरूर हो गए.

अशोक ने यह बात अपने बेटे सौरभ को बताई. उन का पूरा परिवार पूरी रात चैन की नींद नहीं सो सका. 21 जून की सुबह के करीब साढ़े 6 बजे नवनीत की मां लक्ष्मी का फोन आया और उन्होंने बताया कि साक्षी ने सुसाइड कर लिया है.

यह सुनते ही अशोक के पैरों तले से जमीन खिसक गई. उन का फोन केवल सूचनात्मक था. इस से ज्यादा उन्होंने कोई बात नहीं की. बेटी की मौत की खबर से अशोक के परिवार में कोहराम मच गया. आननफानन में पितापुत्र दिल्ली से अंबाला के लिए रवाना हो गए.

नवनीत और साक्षी रेसकोर्स स्थित आवास नंबर 115/04 में रहते थे. अशोक और सौरभ से वहां कोई बात करने को भी तैयार नहीं था. वह सीधे रेजीमेंट बाजार पुलिस चौकी पहुंचे और नवनीत व उस के परिजनों के खिलाफ बेटी को दहेज के लिए प्रताडि़त करने की तहरीर दे दी. पुलिस पहले ही इस मामले की तहकीकात में जुटी हुई थी.

दरअसल, पुलिस कंट्रोल रूम को 21 जून की सुबह इस घटना की सूचना मिली थी. कंट्रोल रूम से यह सूचना थाने को फ्लैश की गई. मामला हाईप्रोफाइल था, लिहाजा एसएसपी हमीद अख्तर ने अधीनस्थों को इस मामले में तत्काल सक्रिय होने के निर्देश दे दिए थे.

डीएसपी रामकुमार, इंसपेक्टर विजय व चौकी इंचार्ज कुशलपाल ने जांचपड़ताल शुरू की. पुलिस ने साक्षी के परिजनों की तहरीर पर दहेज उत्पीड़न की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया. साक्षी के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया. साथ ही उन के पति नवनीत को भी गिरफ्तार कर लिया गया.

ओहदे थे ऊंचे पर जिंदगी थी नीरस

पुलिस की जांचपड़ताल और परिजनों से की गई पूछताछ में ऊंचे ओहदों के पीछे की ऐसी कहानी निकल कर सामने आई, जिस ने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया. देश सेवा के लिए आर्मी जौइन करने वाली साक्षी की निजी जिंदगी में वास्तव में अंधेरा लिए हुए एक बड़ा तूफान चल रहा था.

साक्षी और नवनीत के बीच जानपहचान थी. पहले दोनों के बीच दोस्ती हुई और फिर यह दोस्ती प्यार में बदल गई. नवनीत का परिवार हरियाणा के पंचकूला जिले के पिंजोर कस्बे का रहने वाला था. नवनीत स्क्वाड्रन लीडर थे और साक्षी लेफ्टिनेंट. दोनों ही ऊंचे पद पर थे.

12 दिसंबर, 2018 को दोनों विवाह बंधन में बंध गए. साक्षी के परिजनों की आर्थिक स्थिति बहुत ज्यादा अच्छी नहीं थी. फिर भी उन्होंने अपनी हैसियत के अनुसार शादी में खर्च किया. शादी के बाद कुछ महीनों तक तो सब ठीक चलता रहा.

साक्षी ने एक बेटे को भी जन्म दिया. दोनों अच्छे पद पर थे. परिवार की खुशियों में चारचांद लगाने के लिए बेटा भी हो चुका था, लेकिन जिंदगी में कई बार पद और सुखसुविधाओं से खुशियों के मायने नहीं होते.

साक्षी और नवनीत के बीच मनमुटाव रहने लगा था. साक्षी ने शुरू में तो अपने परिवार में कुछ नहीं बताया, परंतु जब बात हद से ज्यादा बढ़ने लगी तो एक दिन उस ने अपने पिता को सारी बातें बताईं, ‘‘पापा, सोचा नहीं था कि ये लोग ऐसे होंगे.’’

बेटी की बात पर अशोक थोड़ा सकपका गए ‘‘मैं समझा नहीं बेटी?’’

‘‘पापा, ये लोग मुझे दहेज के लिए ताना मारते हैं. कभी कहते हैं कि गाड़ी नहीं दी, कभी कहते हैं कि रिश्तेदारों का मान नहीं रखा.’’ साक्षी ने बताया.

‘‘बेटी, इस से ज्यादा हम कर भी क्या सकते थे. तुम दोनों कमाते हो क्या किसी चीज की कोई कमी है. परिवार में यह सब बातें तो चलती रहती हैं. नवनीत को तुम समझाना.’’ अशोक ने कहा.

‘‘मैं ने बहुत समझाया है पापा, लाइफ को एडजस्ट तो बहुत कर रही हूं.’’ साक्षी बोली.

बेटी की बातें सुन कर अशोक कुमार को बहुत अफसोस हुआ. उन्होंने सोचा कि वक्त के साथ एक दिन सब ठीक हो जाएगा. यूं भी इंसान ऐसे मामलों में सकारात्मक ही सोचता है.

लालच ने घोली कड़वाहट

कहते हैं कि जब किसी परिवार में अनबन, शक और लालच जैसी चीजें घर कर जाएं, तो फिर कलह का वातावरण बन जाता है बिखराव बढ़ता चला जाता है. साक्षी के परिवार में भी ऐसा ही हो रहा था. साक्षी के पिता और भाई ने भी नवनीत को समझाया, लेकिन उन्होंने उन्हें परिवार के मामले में दखल  न देने की नसीहत दे डाली. साक्षी की जिंदगी में एक बार अनबन का सिलसिला शुरू हुआ, तो फिर उस ने रुकने का नाम नहीं लिया. बाद में हालात बिगड़ते देख अशोक खुद भी बेटी के घर गए और दोनों को समझा कर आए.

कुछ दिन तो सब ठीक रहा, बाद में स्थिति पहले जैसी ही हो गई. रिश्तों में दूरियां तब और भी बढ़ गईं जब नवनीत साक्षी पर शक करने लगे. शक का दायरा इतना बढ़ गया कि नवनीत ने घर के बैडरूम तक में सीसीटीवी कैमरे लगवा दिए. साक्षी के पिता और भाई फोन करते तो नवनीत झल्ला जाते. उन्होंने दोनों के नंबर तक ब्लौक कर दिए. साक्षी परिजनों को बताती थी कि उस के साथ मारपीट भी की जाने लगी है.

साक्षी के परिजनों को पूरी उम्मीद थी कि एक दिन सब ठीक जाएगा, लेकिन यह भी सच है कि इंसान सोचता कुछ है और हो कुछ और जाता है. परिवार के बिगड़े हालात के बीच आखिर साक्षी 20 जून, 2021 की रात जिंदगी की जंग हार गई. पतिपत्नी के बीच अनबन में 20 जून को एक तूफान आया. दोनों के बीच झगड़ा और मारपीट हुई. साक्षी ने यह बात अपने पिता को भी फोन पर बताई थी. नवनीत के अनुसार, उन्होंने साक्षी को देर रात कपड़े के सहारे पंखे से झूलते हुए पाया. इस के बाद उन्होंने उसे नीचे उतारा और मिलिट्री हौस्पिटल ले गए, जहां डाक्टरों ने साक्षी को मृत घोषित कर दिया.

इस के बाद हौस्पिटल से पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी गई. साक्षी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण हैंगिग आया. नवनीत के घर पर लगे कैमरों की सीसीटीवी फुटेज डिलीट हो चुकी थी. साक्षी के परिजनों का आरोप था कि सारी फुटेज को सच्चाई छिपाने के मकसद से डिलीट किया गया.

प्रताड़ना बनी मौत की वजह

साक्षी के परिजनों का साफ कहना था कि वह मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना से तंग आ चुकी थी. उन के दहेज के आरोपों में सच्चाई है तो सोचने वाली बात है कि बड़े पदों पर नौकरी करने वाले अच्छेखासे पढ़ेलिखे लोग भी दहेज के लालच में किस स्तर तक जा सकते हैं. हालांकि दूसरी तरफ नवनीत शर्मा ने जेल जाने से पहले पुलिस कस्टडी में मीडिया के सामने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों से साफ इंकार कर दिया.

साक्षी ने वास्तव में आत्महत्या की या उस की हत्या की गई, पुलिस इस पहलू की भी बारीकी से जांच कर रही थी. प्रकरण की और भी सच्चाई तो पुलिस की पूर्ण जांच के बाद ही सामने आएगी. अदालत इस मामले में सबूतों के आधार पर फैसला भी करेगी. लेकिन जब साक्षी नवनीत और उन के परिजनों की फितरत को समझ गई थी और जब उस का वहां तालमेल नहीं बैठ रहा था, तब वह वक्त रहते ऐसे रिश्ते से पीछा छुड़ा लेती तो शायद ऐसी नौबत कभी नहीं आती. True Crime Story

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

 

Crime Thriller Hindi: जन्मदिन में मिली मौत – बेकसूर को मिली सजा

Crime Thriller Hindi: शहाबुद्दीन ने अपनी होने वाली पत्नी हसमतुल निशां से कहा. ‘‘निशां अपने जन्मदिन की पार्टी पर हमें दावत नहीं दोगी क्या?’’  ‘‘क्यों नहीं, जब आप ने मांगी है तो पार्टी जरूर मिलेगी. हम कार्यक्रम तय कर के आप को बताते हैं.’’ निशा ने अपने मंगेतर को भरोसा दिलाया.

निशां घर वालों के दबाव में बेमन से शहाबुद्दीन से शादी करने के लिए तैयार हुई थी, क्योंकि वह तो शाने अली को प्यार करती थी. इसलिए मंगेतर द्वारा शादी की पार्टी मांगने वाली बात उस ने अपने प्रेमी शाने अली को बताई तो वह भड़क उठा. उस ने कहा ‘‘निशा तुम एक बात साफ समझ लो कि जन्मदिन की पार्टी में शहाबुद्दीन और मुझ में से केवल एक ही शामिल होगा. तुम जिसे चाहो बुला लो.’’

निशा को इस बात का अंदाजा पहले से था कि शाने अली को यह बुरा लगेगा. उस ने कहा, ‘‘शाने अली, तुम तो खुद जानते हो कि मुझे वह पसंद नहीं है. लेकिन अब घर वालों की बात को नहीं टाल सकती.’’

‘‘निशा, तुम यह समझ लो कि यह शादी केवल दिखावे के लिए है.’’ शाने अली ने जब यह कहा तो निशा ने साफ कह दिया कि शादी दिखावा नहीं होती. शादी के बाद उस का मुझ पर पूरा हक होगा.’’

‘‘नहीं, शादी के पहले और शादी के बाद तुम्हारे ऊपर हक मेरा ही रहेगा. जो हमारे बीच आएगा, उसे हम रास्ते से हटा देंगे.’’ यह कह कर शाने अली ने फोन रख दिया.

हसमतुल निशां ने बाद में शाने अली से बात की और उन्होंने यह तय कर लिया कि वे दोनों एक ही रहेंगे. उन को कोई जुदा नहीं कर पाएगा. दोनों के बीच जो भी आएगा, उसे राह से हटा दिया जाएगा.

शहाबुद्दीन की शादी हसमतुल निशां के साथ तय हुई थी. निशां लखनऊ स्थित पीजीआई के पास एकता नगर में रहती थी. वह अपने 2 भाइयों में सब से छोटी और लाडली थी. शहाबुद्दीन भी अपने घर में सब से छोटा था. वह निशां के घर से करीब 35 किलोमीटर दूर बंथरा में रहता था.

शहाबुद्दीन ट्रांसपोर्ट नगर में एक दुकान पर नौकरी करता था, जो दोनों के घरों के बीच थी. हसमतुल निशां ने अपने घर वालों के कहने पर शहाबुद्दीन के साथ शादी के लिए हामी तो भर दी थी पर वह अपने प्रेमी शाने अली को भूलने के लिए भी तैयार नहीं थी.

ऐसे में जैसेजैसे शहाबुद्दीन के साथ शादी का दिन करीब आ रहा था, दोनों के बीच तनाव बढ़ रहा था. हसमतुल निशां ने पहले ही फैसला ले लिया था कि वह शादी का दिखावा ही करेगी. बाकी मन से तो अपने प्रेमी शाने अली के साथ रहेगी.

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शहाबुद्दीन के साथ हसमतुल निशां की सगाई होने के बाद दोनों के बीच बातचीत होने लगी. शहाबुद्दीन अकसर उसे फोन करने लगा. मिलने के लिए भी दबाव बनाने लगा. यह बात निशां को अच्छी नहीं लग रही थी.

शाने अली भी नहीं चाहता था कि निशां अपने होने वाले पति शहाबुद्दीन से मिलने जाए. जब भी उसे यह पता चलता कि दोनों की फोन पर बातचीत होती है और वे मिलते भी हैं. इस बात को ले कर वह निशां से झगड़ता था. दोनों के बीच लड़ाईझगड़े के बाद यह तय हुआ कि अब शहाबुद्दीन को रास्ते से हटाना ही होगा.

शहाबुद्दीन को अपनी होने वाली पत्नी और उस के प्रेमी के बारे में कुछ भी पता नहीं था. वह दोनों को आपस में रिश्तेदार समझता था और उन पर भरोसा भी करता था. अपनी होने वाली पत्नी हसमतुल निशां को अच्छी तरह से जाननेसमझने के लिए वह उस के करीब आने की कोशिश कर रहा था. उसे यह नहीं पता था कि उस की यह कोशिश उसे मौत की तरफ ले जा सकती है.

शहाबुद्दीन अपनी मंगेतर के साथ संबंधों को मधुर बनाने की कोशिश कर रहा था पर प्रेमी के मायाजाल में फंसी हसमतुल निशां अपने को उस से दूर करना चाहती थी. परिवार के दबाव में वह खुल कर बोल नहीं पा रही थी.

12 मार्च, 2021 को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के मोहनलालगंज थाना क्षेत्र में स्थित कल्लू पूरब गांव के पास झाडि़यों में शहाबुद्दीन उर्फ मनीष की खून से लथपथ लाश पड़ी मिली. करीब 26 साल के शहाबुद्दीन के सीने में चाकू से कई बार किए गए थे.

गांव वालों की सूचना पर पुलिस ने शव को बरामद किया. शव मिलने वाली जगह से कुछ दूरी पर ही एक बाइक खड़ी मिली. बाइक में मिले कागजात से पुलिस को पता चला कि वह बाइक मृतक शहाबुद्दीन की ही थी. इस के आधार पर पुलिस ने उस के घर पर सूचना दी.

शहाबुद्दीन के भाई ने अनीस ने शव को पहचान भी लिया. अनीस की तहरीर पर पुलिस ने धारा 302 आईपीसी के तहत मुकदमा कायम किया.

हत्या की घटना को उजागर करने और अपराधियों को पकड़ने के लिए डीसीपी (दक्षिण लखनऊ) रवि कुमार, एडिशनल डीसीपी पुर्णेंदु सिंह, एसीपी (दक्षिण) दिलीप कुमार सिंह ने घटनास्थल पर पहुंच कर फोरैंसिक टीम व डौग स्क्वायड बुला कर मामले की पड़ताल शुरू की.

शहाबुद्दीन के शव की तलाशी लेने पर पर्स और मोबाइल गायब मिला. शव के पास 2 टूटी कलाई घडि़यां और एक चाबी का गुच्छा मिला. यह समझ आ रहा था कि हत्या के दौरान आपसी संघर्ष में यह हुआ होगा.

पुलिस के सामने शहाबुद्दीन के घर वालों ने उस की होने वाली पत्नी हसमतुल निशां के परिजनों पर हत्या का आरोप लगाया. डीसीपी रवि कुमार ने इस केस को सुलझाने के लिए एसीपी दिलीप कुमार के नेतृत्व में एक पुलिस टीम गठित की.

टीम में इंसपेक्टर दीनानाथ मिश्रा, एसआई रमेश चंद्र साहनी, राजेंद्र प्रसाद, धर्मेंद्र सिंह, महिला एसआई शशिकला सिंह, कीर्ति सिंह, हैडकांस्टेबल अश्वनी दीक्षित, कांस्टेबल संतोश मिश्रा, शिवप्रताप और विपिन मौर्य के साथ साथ सर्विलांस सेल के सिपाही सुनील कुमार और रविंद्र सिंह को शामिल किया गया. पुलिस ने सर्विलांस की मदद से जांच शुरू की.

शहाबुद्दीन बंथरा थाना क्षेत्र के बनी गांव का रहने वाला था. वह ट्रांसपोर्ट नगर में खराद की दुकान पर काम करता था. 11 मार्च, 2021 को वह अपने पिता मीर हसन की बाइक ले कर घर से जन्मदिन की पार्टी में हिस्सा लेने के लिए निकला था. शहाबुद्दीन की मंगेतर हसमतुल निशां ने उसे जन्मदिन की पार्टी में शामिल होने का न्योता दिया था.

शहाबुद्दीन ने यह बात अपने घर वालों को बताई और दुकान से सीधे पार्टी में शामिल होने चला गया था. देर रात वह घर वापस नहीं आया. अगले दिन यानी 12 मार्च की सुबह 11 बजे पुलिस ने उस की हत्या की सूचना उस के घर वालों को दी.

अनीस ने पुलिस का बताया कि 27 मई को शहाबुद्दीन और हसमतुल निशां का निकाह होने वाला था. बारात लखनऊ में पीजीआई के पास एकता नगर में नवाबशाह के घर जाने वाली थी. शहाबुद्दीन की हत्या की सूचना पा कर पिता मीर हसन, मां कमरजहां, भाई इश्तियाक, शफीक, अनीस और राजू बिलख रहे थे.

मां कमरजहां रोते हुए कह रही थी, ‘‘मेरे बेटे की किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी. वह घर का सब से सीधा लड़का था. उस ने किसी का कुछ भी नहीं बिगाड़ा था. ऐसे में उस के साथ क्या हुआ?’’

पुलिस ने जन्मदिन में बुलाए जाने और लूट की घटना को सामने रख कर छानबीन शुरू की.

शहाबुद्दीन की हत्या को ले कर परिवार के लोगों को एक वजह शादी लग रही थी. परिवार को शहाबुद्दीन की हत्या के पीछे उस की होने वाली पत्नी और उस के भाइयों पर शक था. इसलिए अनीस की तहरीर पर पुलिस ने हसमतुल निशां और उस के भाइयों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया.

पुलिस ने तीनों को हिरासत में ले कर पूछताछ शुरू कर दी. पुलिस की विवेचना में यह बात खुल कर सामने आई कि शहाबुद्दीन की हत्या में उस की होने वाली पत्नी हसमतुल निशां का हाथ था. यह भी साफ था कि हसमतुल निशां का साथ उस के भाइयों ने नहीं, बल्कि उस के प्रेमी शाने अली ने दिया था.

शहाबुद्दीन उर्फ मनीष की हत्या की साजिश उस की मंगेतर हसमतुल निशां और उस के प्रेमी शाने अली ने अपने 6 अन्य साथियों के साथ मिल कर रची थी. मोहनलालगंज कोतवाली के इंसपेक्टर दीनानाथ मिश्र के मुताबिक बंथरा कस्बे के रहने वाले शहाबुद्दीन की शादी हसमतुल निशां के साथ 27 मई को होनी थी. इस से हसमतुल खुश नहीं थी.

वह पीजीआई के पास रहने वाले शाने अली से प्यार करती थी. इस के बाद भी परिवार वालों के दबाव में शहाबुद्दीन से मिलती रही. जैसेजैसे शादी का समय पास आता जा रहा हसमतुल निशां अपने मंगेतर शहाबुद्दीन से पीछा छुड़ाने के बारे में सोचने लगी.

इस के लिए उस ने अपने प्रेमी शाने अली के साथ मिल कर योजना बनाई. हसमतुल निशां चाहती थी कि शाने अली उस के मंगेतर शहाबुद्दीन को किसी तरह रास्ते से हटा दे.

योजना को अंजाम देने के लिए शाने अली ने अपने जन्मदिन के अवसर पर 11 मार्च, 2021 को शहाबुद्दीन को मिलने के लिए बुलाया.

गुरुवार रात के करीब साढ़े 8 बजे शाने अली और उस के दोस्त बाराबंकी निवासी अरकान, मोहनलालगंज निवासी संजू गौतम, अमन कश्यप और पीजीआई निवासी समीर मोहम्मद बाबूखेड़ा में जमा हुए. जैसे ही शहाबुद्दीन वहां पहुंचा शाने अली और उस के दोस्तों ने उस पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया.

अपने ऊपर चाकू से हमला होने के बाद भी शहाबुद्दीन ने हार नहीं मानी और अपनी जान बचाने के लिए वह हमलावरों से भिड़ गया.

शाने अली और उस के हमलावर दोस्तों को जब लगा कि शहाबुद्दीन बच निकलेगा तो उन लोगों ने कुत्ते को बांधी जाने वाली जंजीर से शहाबुद्दीन का गला कस दिया, जिस से शहाबुद्दीन अपना बचाव नहीं कर पाया और अपनी जान से हाथ धो बैठा.

अगले दिन जब शहाबुद्दीन का शव मिला तो उस के भाई अनीस ने हसमतुल निशां के भाइयों पर हत्या का शक जताया. पुलिस ने संदेह के आधार पर ही उन से पूछताछ शुरू की थी. इस बीच पुलिस को हसमतुल निशां और शाने अली के प्रेम संबंधों के बारे में पता चला. पुलिस ने जब हसमतुल निशां से पूछताछ शुरू की तो वह टूट गई.

हसमतुल निशां ने पुलिस को बताया कि उस ने प्रेमी शाने अली के साथ मिल कर मंगेतर शहाबुद्दीन की हत्या कर दी. इस के बाद पुलिस ने शाने अली और उस साथियों को पकड़ने के लिए उन के घरों पर दबिशें दे कर गिरफ्तार कर लिया.

शहाबुद्दीन की हत्या के आरोप में पुलिस ने हसमतुल निशां, शाने अली, अरकान, संजू गौतम, अमन कश्यप, समीर मोहम्मद को जेल भेज दिया. पुलिस को आरोपियों के पास से एक चाकू, गला घोटने के लिए प्रयोग में लाई गई चेन, संजू की मोटरसाइकिल, 2 कलाई घडि़यां, 6 मोबाइल फोन और आधार कार्ड बरामद हुए.

सभी आरोपियों से पूछताछ के बाद उन्हें न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया. 24 घंटे के अंदर केस का खुलासा करने वाली पुलिस टीम की डीसीपी (दक्षिण) रवि कुमार ने सराहना की. Crime Thriller Hindi

UP Crime News: भोली सी दुलहन – शादी के 7 दिनों बाद पति का मर्डर

UP Crime News:  यह घटना रिश्तों पर बड़ा सवाल खड़ा करती है. शादी के महज़ 7 दिनों बाद एक नवविवाहिता ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर पति की हत्या करवा दी. सोचने वाली बात यह है कि ऐसा क्या हुआ कि नईनई शादी के बावजूद पत्नी ने इतना बड़ा कदम उठा लिया? क्या था इस पूरे मामले के पीछे छिपा सच? जानने के लिए पढ़ें पूरी कहानी.

यह शर्मनाक मामला यूपी के बस्ती जिले के परसरामपुर थाना क्षेत्र के बेदीपुर गांव का है. यहां शादी के सिर्फ 7 दिनों बाद रुखसाना ने अपने पति अनीश की हत्या अपने प्रेमी रिंकू से करवा दी. अनीश को गंभीर हालत में अयोध्या के अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. पुलिस जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए, जिन्होंने सभी को हैरान कर दिया.

आप को बता दें कि 20 नवंबर, 2025 गुरुवार शाम अनीश अपने घर के बाहर टहल रहा था. तभी रिंकू बहाने से उस के पास आया. इस के बाद वह उसे कुछ दूरी तक बातों में उलझा कर ले गया और गोली मार दी. गंभीर रूप से घायल अनीश को पहले श्रीराम चिकित्सालय अयोध्या ले जाया गया, फिर हालत गंभीर होने पर उसे मैंडिकल कालेज रेफर कर दिया गया, लेकिन डॉक्टर उसे बचा नहीं पाए.

पुलिस ने वारदात के समय आसपास मौजूद लोगों से पूछताछ के बाद आरोपी की तलाश शुरू की. पुलिस ने 20 नवंबर, 2025 की ही देर रात को आरोपी रिंकू सिंह को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस की थोड़ी सख्ती के बाद उस ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया और हत्या की पूरी कहानी बताई.

अनीश की शादी 13 नवंबर, 2025 को रुकसाना से हुई थी, लेकिन रुकसाना का पहले से ही रिंकू सिंह से अफेयर चल रहा था. शादी के बाद भी दोनों आपस में बात करते रहे. 19 नवंबर को रुकसाना ने प्रेमी रिंकू सिंह के साथ मिलकर अनीश की हत्या की साजिश रची. रिंकू ने अनीश को रास्ता पूछने के बहाने रोक लिया और माथे पर गोली मार दी. जिस से अनीश की मौके पर ही मौत हो गई.

एसपी अभिनंदन ने बताया कि पुलिस ने रुकसाना और उस के प्रेमी रिंकू सिंह को गिरफ्तार कर लिया है .रुकसाना का रिंकू के साथ कई सालों से प्रेमप्रसंग चल रहा था. उन्होंने बताया कि रुकसाना ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर पति अनीश की हत्या की साजिश रची. पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर उन्हें जेल भेज दिया है. UP Crime News

Stories in Hindi Love : प्रेम ने किया रिश्तों का अंत

Stories in Hindi Love : उत्तर प्रदेश के बदायूं शहर के सिविल लाइंस इलाके में एक स्कूल है होली चाइल्ड. निशा इसी स्कूल में पढ़ाती थी. उस का पति राजकुमार पादरी था और उस की पोस्टिंग बदायूं जिला मुख्यालय से लगभग 23 किलोमीटर दूर वजीरगंज की एक चर्च में थी. चर्च में जब ज्यादा काम रहता था तो राजकुमार रात में वहीं रुक जाता था.

निशा को स्कूल की बिल्डिंग में ही रहने के लिए कमरा मिला हुआ था, जहां पर वह पति राजकुमार और 2 बेटियों रागिनी व तमन्ना के साथ रहती थी. राजकुमार और निशा की मुलाकात लखनऊ में पादरी के काम की ट्रेनिंग के दौरान हुई थी, जोकि वीसीसीआई संस्था द्वारा अपने धर्म प्रचारकों को दी जाती है. कुछ मुलाकातों के बाद दोनों एकदूसरे को पसंद करने लगे.

निशा मूलरूप से गोरखपुर जिले की रहने वाली थी. उस के पिता दयाशंकर पादरी थे. निशा की बड़ी बहन शारदा की शादी बरेली निवासी रघुवीर मसीह के बेटे दिलीप के साथ हुई थी. इसी के चलते बहन के देवर राजकुमार से निशा की नजदीकियां बढ़ने लगीं. दोनों जानते थे कि घर वालों को इस रिश्ते से कोई ऐतराज नहीं होगा, अत: दोनों ने अपनी पसंद की बात अपने परिवार वालों को बता दी थी. राजकुमार ने लखनऊ में अपनी ट्रेनिंग पूरी कर ली लेकिन किन्हीं कारणों से निशा को ट्रेनिंग बीच में ही छोड़ देनी पड़ी. राजकुमार बरेली निवासी रघुवीर मसीह का बेटा था. रघुवीर मसीह पुलिस विभाग में वायरलैस मैसेंजर के पद पर बदायूं में तैनात था.

सन 2014 में पारिवारिक सहमति से राजकुमार और निशा का विवाह हो गया. रघुवीर मसीह के 4 बेटे और 2 बेटियां थीं. सब से बड़ा बेटा रवि था, जिस की शादी बाराबंकी निवासी अनुराधा से हुई थी. दूसरा दिलीप था, जिस की शादी निशा की बड़ी बहन शारदा से हुई थी. उस से छोटा राजकुमार था और सब से छोटा राहुल. राजकुमार की पहली पोस्टिंग कासगंज जिले के सोरों कस्बे में नवनिर्मित चर्च में हुई थी. इसी बीच राजकुमार की शादी हो गई और रघुवीर मसीह ने कोशिश कर के राजकुमार का तबादला कासगंज से वजीरगंज करवा दिया.

शादी के बाद कुछ समय तो अच्छा कटा. राजकुमार की मां आशा मसीह ने नवविवाहिता बहू निशा को हाथोंहाथ लिया, पर निशा को राजकुमार के घर का माहौल रास नहीं आया. इसलिए उस ने पति से कहा कि वह घर में बैठ कर वक्त बरबाद नहीं करना चाहती. निशा इंटरमीडिएट पास थी और उस की अंगरेजी भाषा पर अच्छी पकड़ थी. वह सोचती थी कि किसी भी इंग्लिश स्कूल में उसे नौकरी मिल सकती है. नौकरी करने वाली बात निशा ने पति और सासससुर से बताई तो उन्हें इस पर कोई ऐतराज नहीं हुआ. निशा को इजाजत मिल गई और थोड़ी कोशिश से निशा को होली चाइल्ड स्कूल में नौकरी मिल गई.

कालांतर में निशा 2 बेटियों की मां बनी, जिन के नाम रागिनी और तमन्ना रखे गए. अब उन का छोटा सा खुशहाल परिवार था. वे स्कूल परिसर में स्थित कमरे में रहते थे. राजकुमार और निशा का दांपत्य जीवन काफी सुखद था. किन्हीं खास मौकों पर वे लोग बरेली चले जाते थे. बदलने लगी निशा की सोच  सब कुछ ठीक चल रहा था, पर वक्त कब करवट ले लेगा, इस का आभास किसी को नहीं था. स्कूल की नौकरी करतेकरते निशा को लगने लगा था कि राजकुमार से शादी करना उस के जीवन की सब से बड़ी भूल थी. वह अच्छाखासा कमा लेती है. अगर उस ने शादी की जल्दबाजी न की होती तो उसे कोई पढ़ालिखा अच्छा पति मिलता और वह ऐश करती.

ऐसे विचार मन में आते ही उस का दिल बेचैन होने लगा. जितना उसे मिला था, उस से उसे संतोष नहीं था. उस की कुछ ज्यादा पाने की चाहत बढ़ रही थी.  कहते हैं, अकसर ज्यादा पाने की चाह में लोग बहुत कुछ गंवा देते हैं. निशा का भी यही हाल था. अब धीरेधीरे राजकुमार और निशा के जीवन में तल्खियां बढ़ने लगीं. निशा छोटीछोटी बातों को ले कर मीनमेख निकालती और उस से झगड़ा करने की कोशिश करती. सीधेसादे राजकुमार को हैरानी होती थी कि निशा को आखिर हो क्या गया है. एक दिन निशा ने कहा, ‘‘तुम क्या थोड़ी और पढ़ाई नहीं कर सकते थे? कम से कम मेरी तरह इंटर तो पास कर लेते. पढ़ेलिखे होते तो तुम्हारा दिमाग भी खुला होता.’’

‘‘मैं ज्यादा पढ़ालिखा न सही, पर अपने काम में तो परफैक्ट हूं. लोगों को अपने धर्म का ज्ञान बेहतर तरीके से देता हूं. हालांकि मैं केवल हाईस्कूल पास हूं लेकिन मैं ने यह ठान लिया है कि अपनी बेटियों को खूब पढ़ाऊंगा.’’ राजकुमार बोला.

‘‘बेटियों की फिक्र तुम छोड़ो. यह सब मुझे सोचना है कि उन के लिए क्या करना है.’’ निशा ने पति की बात काटते हुए कहा. राजकुमार तर्क कर के बात बढ़ाना नहीं चाहता था. इसलिए वह पत्नी के पास से उठ गया. दोनों बेटियों को साथ ले कर वह यह सोच कर घर से बाहर निकल गया कि थोड़ी देर में निशा का गुस्सा शांत हो जाएगा.

थोड़ी देर बाद जब वह घर पहुंचा तो निशा नार्मल हो चुकी थी. राजकुमार ने राहत की सांस ली. निशा ने राजकुमार का खाना लगा दिया, तभी स्कूल का चपरासी 20 वर्षीय अर्जुन आया और वह निशा को चाबियां देते हुए बोला, ‘‘मैडम, मैं ने बाकी ताले बंद कर दिए हैं. आप केवल बाहरी गेट का ताला लगा लेना, मैं घर जा रहा हूं.’’

‘‘अर्जुन, बैठो, चाय पी कर जाना.’’ निशा ने कहा.  निशा के कई बार कहने पर अर्जुन कुरसी पर बैठ गया. अर्जुन बाबा कालोनी निवासी ओमेंद्र सिंह का बेटा था. वह स्कूल में चपरासी था और उस का छोटा भाई किरनेश स्कूल के प्रिंसिपल के घर का नौकर था.

कुछ देर में निशा चाय बना कर ले आई. चाय पी कर अर्जुन चला गया. लेकिन राजकुमार के दिल में कुछ खटकने लगा. उस ने निशा से कहा, ‘‘मुझे इस अर्जुन की आदतें कुछ अच्छी नहीं लगतीं. वैसे भी ये स्कूल का चपरासी है और तुम टीचर, तुम्हें अपने स्टैंडर्ड का ध्यान रखना चाहिए.’’

निशा ने तुनक कर कहा, ‘‘मैं ने ऐसा क्या कर दिया जो तुम मेरे स्टैंडर्ड को कुरेद रहे हो.’’

राजकुमार ने कोई जवाब नहीं दिया. वह बात को बढ़ाना नहीं चाहता था. लेकिन उस दिन के बाद निशा का ध्यान अर्जुन पर टिक गया. जब वह अकेली होती तो अचानक अर्जुन उस के जेहन में आ बैठता.

निशा के दिल के दरवाजे पर दस्तक दी अर्जुन ने  कुछ दिनों बाद राजकुमार की तबीयत खराब हो गई. वह कभीकभी 2 दिन तक चर्च में ही रुक जाता और बदायूं नहीं आ पाता था. इस अकेलेपन ने निशा को गुमराह कर दिया. अर्जुन एक स्वस्थ और स्मार्ट युवक था. वैसे भी निशा के साथ वह घुलनेमिलने लगा था. अब राजकुमार की गैरमौजूदगी में वह निशा के कमरे में आ जाता और उस की बेटियों के लिए खानेपीने की चीजें ले आता था. निशा के मन में अर्जुन अपनी जगह बनाने लगा था. निशा भी अर्जुन के बारे में सोचती रहती थी. वह उस की मजबूत बांहों में समाने के लिए बेताब रहने लगी थी. उधर अर्जुन निशा को चाहता तो था लेकिन निशा के पति की वजह से पहल करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था.

कहा जाता है कि फिसलन की ओर बढ़ने वाले कदम आसानी से दलदल तक पहुंच जाते हैं. यही निशा के साथ हुआ. एक दिन शाम को निशा के पास राजकुमार का फोन आया. उस ने कहा कि वह आज रात को घर नहीं आ पाएगा. इस फोन काल ने निशा के दिल में हलचल मचा दी. उस के दिल की धड़कनें बढ़ गईं. निशा के दिमाग में अर्जुन घूम रहा था. उस ने कमरे से बाहर निकल कर देखा तो उस समय अर्जुन स्कूल के अपने काम निपटा कर घर जाने की तैयारी कर रहा था. तभी निशा ने उसे आवाज दे कर बुलाया, ‘‘अर्जुन, तुम कमरे में आओ, कुछ बात करनी है.’’

अर्जुन कमरे में आ गया. निशा उस के लिए चाय बना कर ले आई. निशा ने चाय का प्याला उस की ओर बढ़ाते हुए कहा, ‘‘अर्जुन, आज रात राजकुमार घर नहीं आएगा. अकेले में मुझे डर लगेगा, तुम आज रात यहीं रुक जाओ, जिस से मेरा भी मन लगा रहेगा.’’

अर्जुन ने गहरी नजर से निशा को देखा. उसे निशा का अंदाज कुछ अजीब सा लगा. उस की चुप्पी देख कर निशा ने पूछा, ‘‘कुछ परेशानी है क्या?’’

‘‘नहीं मैडम, ऐसी कोई बात नहीं है. मैं सोच रहा हूं कि अगर साहब को पता चला तो पता नहीं वो मेरे बारे में क्या सोचेंगे, वह तो वैसे भी मुझे पसंद नहीं करते.’’

‘‘तुम उन की चिंता मत करो. तुम्हें मैं तो पसंद करती हूं न.’’ निशा ने मुसकराते हुए कहा तो अर्जुन की भावनाओं में जैसे तूफान उठने लगा. उस ने उसी समय जेब से मोबाइल निकाला और अपने घर फोन कर के बता दिया कि स्कूल में कुछ काम होने की वजह से वह आज घर नहीं आ पाएगा. इस के बाद अर्जुन उस के कमरे में बैठ गया. निशा ने खाना बनाने की तैयारी शुरू कर दी. तब तक अर्जुन उस के दोनों बच्चों के साथ खेलने लगा. खाना बनने के बाद निशा ने बच्चों को पहले खाना खिलाया और उन्हें सुला दिया.

फिर निशा ने अपना और अर्जुन का खाना लगाया. खाना खातेखाते अर्जुन उस के खाने की तारीफ करते हुए बोला, ‘‘मैडम, आप खाना बहुत अच्छा बनाती हैं.’’

‘‘खाना बनाना ही नहीं, मैं बहुत से काम बहुत अच्छे से करती हूं.’’ कह कर निशा हंसने लगी. फिर उस ने एक प्रश्न किया, ‘‘अर्जुन, तुम ने अभी तक शादी क्यों नहीं की?’’

अर्जुन निशा को गौर से देखते हुए बोला, ‘‘रिश्ते तो कई आए थे मैडम, लेकिन जब से आप को देखा है मेरा इरादा बदल गया है.’’

‘‘क्या मतलब?’’ निशा ने चौंकते हुए पूछा.

‘‘मतलब यह कि मुझे आप जैसी स्मार्ट जीवनसाथी की जरूरत है.’’

निशा की चाहत बन गया अर्जुन  अर्जुन की बात सुन कर निशा मन ही मन खुश हुई कि इस का मतलब वह उसे पहले से ही चाहता है. निशा कुछ नहीं बोली बल्कि मुसकराने लगी. खाना खाते हुए दोनों इसी तरह की बातें करते रहे. खाना खाने के बाद निशा ने अर्जुन का बिस्तर जमीन पर लगाते हुए कहा कि वह यहां आराम कर सकता है. इस के बाद रसोई का काम खत्म कर के वह भी आ गई. उस ने चटाई बिछा कर अपना बिस्तर भी जमीन पर लगा लिया. धीरेधीरे रात गहराती जा रही थी और वहां भी कुछ ऐसा होने वाला था, जो किसी के लिए बरबादी ला सकता था.

निशा की आंखों में नींद नहीं थी. उस ने अर्जुन की तरफ देखा तो वह भी करवटें बदल रहा था. उस ने पूछा, ‘‘अर्जुन, नींद नहीं आ रही क्या?’’  ‘‘हां, नींद नहीं आ रही. पर सोच रहा हूं कि आप के पति तो अकसर वजीरगंज में ही रुक जाते हैं, फिर आप ने आज मुझे यहां क्यों रोका है?’’

निशा ने हंसते हुए कहा, ‘‘तुम क्या सचमुच अनाड़ी हो या अनजान बनने का नाटक कर रहे हो. मैं ने तुम्हारी आंखों में कुछ खास देखा था, वही पिछले कई दिनों से मुझे परेशान कर रहा है. अर्जुन भूख अकसर 2 लोगों को एकदूसरे के करीब ले आती है.’’

‘‘यह क्या कह रही हैं आप?’’ अर्जुन बोला.  ‘‘ठीक ही कह रही हूं. मैं तुम से प्यार करने लगी हूं अर्जुन.’’

अर्जुन को जैसे करंट सा लगा, पर उसे विश्वास नहीं हो रहा था. निशा ने आगे बढ़ कर अर्जुन का हाथ पकड़ा और कहा, ‘‘डरो मत अर्जुन, मैं सचमुच तुम्हें चाहती हूं और यह कोई गुनाह नहीं है. मैं अपने पति से तंग आ चुकी हूं.’’

अर्जुन फिसलन की कगार पर खड़ा था. निशा के स्पर्श से वह दलदल में जा गिरा. शादीशुदा और 2 बच्चों की मां ने उसे एक ऐसे दलदल में खींच लिया, जिस के अंदर जाना तो आसान था पर बाहर आने का कोई रास्ता नहीं था. उस दिन के बाद रिश्तों की दिशा और दशा ही बदल गई. अपनी तबाही से बेखबर राजकुमार अगले दिन घर आ गया. राजकुमार की बरबादी की नींव रखी जा चुकी थी. बीवी ने बेवफाई करने के लिए कमर कस ली थी. अब आए दिन वह पति से झगड़ने लगी. राजकुमार भी महसूस कर रहा था कि स्कूल का चपरासी अर्जुन अब पहले की तरह उस की इज्जत नहीं करता.

एक दिन वह जब वजीरगंज से लौटा तो उस ने अर्जुन को कमरे में चारपाई पर पसरा हुआ देखा. यह देख कर राजकुमार का माथा गरम हो गया. वह बोला, ‘‘अर्जुन, तुम यहां क्या कर रहे हो? लगता है, तुम अपनी औकात भूल रहे हो. मेरी गैरमौजूदगी में तुम्हें यहां आने की जरूरत नहीं है.’’

उस समय तो अर्जुन वहां से चला गया. उस ने खुद को अपमानित महसूस किया और तय किया कि राजकुमार को सबक सिखाएगा.  राजकुमार के तेवर देख कर निशा भी डर गई थी. राजकुमार ने कहा, ‘‘निशा, यह अर्जुन मुझे बिलकुल भी पसंद नहीं है. तुम इस से दूर ही रहो. देखो, मैं सोच रहा हूं कि अपना तबादला बरेली में ही करा लूं. पापा भी रिटायर हो गए हैं, अपना मकान भी उन्होंने बना लिया है. फिर तुम्हें भी बरेली में कहीं नौकरी मिल ही जाएगी.’’

‘‘देखो, अर्जुन इसी स्कूल में काम करता है. तुम्हारे जाने के बाद वह मार्केट से घर की जरूरत का सामान भी ला देता है. तुम खामख्वाह उस पर गरम हो रहे थे. देखो, हमें यहां कमरा मिला हुआ है. यहां कोई परेशानी भी नहीं है. और फिर यह बात तुम जानते हो कि मैं जौइंट फैमिली में नहीं रह सकती.’’ निशा ने पति को समझाया.

‘‘इस मामले में मैं घर वालों से बात करूंगा.’’ कह कर राजकुमार बाथरूम चला गया.

राजकुमार अनभिज्ञ था पत्नी के संबंधों से राजकुमार को अभी तक यह पता नहीं था कि अर्जुन और उस की पत्नी निशा के बीच किस तरह के संबंध हैं. पिछले 6 महीने से वह महसूस कर रहा था कि निशा बदल रही है.  कहते हैं कि इश्क और मुश्क छिपाए नहीं छिपता. निशा और अर्जुन के संबंधों की असलियत भी सामने आ ही गई. उस दिन अर्जुन घर जाने ही वाला था कि राजकुमार का पत्नी के पास फोन आ गया कि वह आज रात को घर नहीं आएगा. यह खबर सुन कर निशा खुश हुई. उस ने अर्जुन को बुला कर कहा, ‘‘आज रात फिर अपनी ही है क्योंकि राजकुमार आज भी नहीं आएगा. ऐसा करो कि तुम नहाधो कर फ्रैश हो जाओ. तब तक मैं तुम्हारे लिए चाय बनाती हूं.’’

निशा ने गैस पर चाय चढ़ा दी. अर्जुन भी फ्रैश होने के लिए बाथरूम में घुस गया. फ्रैश होने के बाद वह निशा के साथसाथ चाय पीने लगा. चाय की चुस्कियां लेते हुए वह बोला, ‘‘ऐसा आखिर कब तक चलेगा, हमें कुछ करना ही होगा.’’

‘‘हां करेंगे.’’ कहते हुए निशा ने कहा, ‘‘अभी तो इन पलों को जिओ, जो हमें मिल रहे हैं.’’  इस के बाद दोनों मौजमस्ती में लीन हो गए. अर्जुन इस बात से बेखबर था कि उस ने बाहरी गेट बंद नहीं किया था. तभी अचानक दबेपांव राजकुमार वहां आ गया. बीवी को अर्जुन की बाहों में देख कर वह आगबबूला हो गया. उस ने अर्जुन की टांग पकड़ कर खींची और उसे कई तमाचे जड़ दिए.

किसी तरह अर्जुन उस के चंगुल से निकल कर भाग गया. तभी राजकुमार ने कहा कि वह इस की शिकायत स्कूल से करेगा.

अर्जुन के चले जाने के बाद राजकुमार ने निशा को जम कर लताड़ा. निशा उस के पैरों में गिर कर अपनी गलती की माफी मांगने लगी, पर राजकुमार के तेवर सख्त थे. उस ने  कह दिया कि अब हम यहां नहीं रहेंगे. राजकुमार ने पिता को फोन पर सारी बातें बता दीं और कहा कि अब हम बरेली में नेकपुर स्थित अपने घर में रहेंगे. पति का फैसला सुन कर निशा परेशान हो गई. वह किसी भी हालत में बदायूं को छोड़ना नहीं चाहती थी. अत: उस ने तय कर लिया कि वह पति नाम के इस कांटे को अपनी जिंदगी से उखाड़ फेंकेगी.

अगले दिन राजकुमार वजीरगंज चला गया. निशा ने मौका मिलते ही अर्जुन को एकांत में बुला कर कहा, ‘‘अगर मुझे चाहते हो तो तुम्हें राजकुमार को रास्ते से हटाना होगा.’’

अर्जुन का दिल तेजी से धड़कने लगा क्योंकि ऐसा तो उस ने कभी सोचा ही नहीं था.  उसे चुप देख निशा बोली, ‘‘हां, मैं ठीक ही कह रही हूं. आज राजकुमार जब घर आएगा तो तुम घर आ कर उस से अपनी गलती की माफी मांगना और उस का विश्वास जीतना. इस के आगे क्या करना है, मैं बाद में बताऊंगी.’’

अर्जुन ने ऐसा ही किया. राजकुमार जब घर पहुंचा तो अर्जुन उस के घर चला गया. उसे देखते ही राजकुमार उस पर भड़का तो अर्जुन ने उस से अपनी गलती पर अफसोस जताते हुए माफी मांग ली. सीधेसादे राजकुमार ने उसे माफ कर दिया और कहा कि अब वैसे भी हमें यहां नहीं रहना है. माफी मांग कर काट दी जीवन की डोर  पर अर्जुन के दिल में राजकुमार के प्रति क्या था, यह बात राजकुमार नहीं जानता था. राजकुमार मौत की दस्तक को सुन ही नहीं पाया था. 15 जून, 2019 को अपनी योजना के मुताबिक अर्जुन अपनी बाइक पर आया. उस ने राजकुमार से कहा, ‘‘चलिए, मछली लेने चलते हैं.’’

राजकुमार भी माहौल का तनाव कम करना चाहता था. वह अर्जुन को माफ कर चुका था.  साजिश से अनजान राजकुमार अर्जुन के साथ बाइक पर बैठ गया. अर्जुन बाइक को इधरउधर घुमाता रहा. फिर बाइक मझिया गांव के सुनसान इलाके में ले गया और बोला, ‘‘अब बाइक आप चलाओ, मैं पीछे बैठता हूं.’’

राजकुमार ने ड्राइविंग सीट संभाली. दोनों शर्की रेलवे स्टेशन से कुछ ही दूरी पर पहुंचे थे कि बाइक पर पीछे बैठे अर्जुन ने जेब से तमंचा निकाला और राजकुमार के सिर पर गोली मार दी. राजकुमार का बैलेंस बिगड़ा और वह बाइक समेत जमीन पर गिर गया. राजकुमार खून से लथपथ था. अब योजना के मुताबिक राजकुमार को रेलवे ट्रैक पर डालना था ताकि उस की मौत ट्रेन एक्सीडेंट लगे.

अर्जुन चाहता था ट्रेन एक्सीडेंट समझा जाए  खून से लथपथ राजकुमार को अर्जुन ने रेलवे ट्रैक पर डाल दिया. उस के कपडे़ भी खून से लथपथ थे. रेलवे लाइन पर पड़ा राजकुमार तड़प रहा था. वह अभी जिंदा था पर अर्जुन ने जो सोचा था, हो नहीं सका. कासगंज से बरेली जाने वाली ट्रेन तब तक गुजर गई थी. अब सुबह 5 बजे से पहले वहां से कोई गाड़ी निकलने वाली नहीं थी. अर्जुन ने बाइक स्टार्ट की और घर आ गया. उस ने खून सने कपड़े उतारे. कपड़ों पर लगा खून देख कर घर वाले सन्न रह गए. उन्होंने अर्जुन से जब सख्ती से पूछताछ की तो पता चला कि अर्जुन ने राजकुमार का कत्ल कर दिया है.

अर्जुन ने अपने कपड़े धो डाले और घर वालों से सख्त लहजे में कहा कि कोई भी अपना मुंह नहीं खोलेगा. उस ने निशा को काम हो जाने की खबर फोन पर दे दी. रात जैसेतैसे गुजर गई. सुबह मार्निंग वाक पर निकले लोगों ने रेलवे ट्रैक पर लाश देखी तो किसी ने इस की सूचना रेलवे पुलिस को दे दी. पुलिस वहां आ गई और लोगों से लाश की शिनाख्त कराने की कोशिश की. पर उस की शिनाख्त नहीं हो पाई. सिविल लाइंस थाने की पुलिस भी वहां पहुंच गई.

उधर राजकुमार को 15 जून को बरेली जाना था, यह बात उस ने फोन पर अपने पिता रघुवीर को बता दी थी, लेकिन वह रात में घर नहीं पहुंचा तो घर वाले परेशान हो गए.  इधर थाना सिविल लाइंस के थानाप्रभारी ओ.पी. गौतम, सीओ राघवेंद्र सिंह राठौर और एसपी (सिटी) जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव भी मौके पर पहुंच गए थे. फोरैंसिक टीम भी जांच के लिए पहुंच गई थी. जांच में पुलिस को मृतक की जेब से 100 रुपए का एक नोट और एक परची मिली. पुलिस ने जरूरी काररवाई कर के लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी.  17 जून को लाश का फोटो अखबारों में छपा तो रघुवीर के एक रिश्तेदार जे.पी. मसीह ने उन्हें फोन कर के पूछा कि राजकुमार कहां है? रघुवीर ने कहा कि राजकुमार को बरेली आना था, पर आया नहीं है.

सब जगह फोन कर लिया, पर उस का कुछ पता नहीं है. तब जे.पी. मसीह अखबार ले कर रघुवीर के घर पहुंच गए और उन्हें अखबार दिखाया. अखबार में अपने बेटे की लाश का फोटो देख कर रघुवीर की आंखों से आंसू निकल आए. वह परेशान हो गए तभी उन के पास पुलिस कंट्रोल रूम से भी फोन आ गया. रघुवीर अपने रिश्तेदारों के साथ पोस्टमार्टम हाउस पहुंच गए और लाश की शिनाख्त बेटे राजकुमार के रूप में कर दी. निशा भी किसी से खबर पा कर घडि़याली आंसू बहाती हुई पोस्टमार्टम हाउस पहुंची. वह वहां इस तरह से रो रही थी, जैसे उस का सब कुछ लुट गया हो.

पोस्टमार्टम के बाद लाश बरेली ला कर उस का अंतिम संस्कार कर दिया गया. निशा के हावभाव देख कर रघुवीर की समझ में कुछकुछ आ रहा था. उन्हें शक था कि उन के बेटे की हत्या निशा ने कराई होगी. क्योंकि उसे रंगेहाथ पकड़ने पर राजकुमार ने उस की शिकायत अपने पिता से कर दी थी. रघुवीर ने जांच अधिकारी के सामने अपनी पुत्रवधू और अर्जुन के नाजायज संबंधों का खुलासा कर दिया था. पुलिस ने अर्जुन को हिरासत में ले लिया. अर्जुन ने अपने हाथ पर ब्लेड से निशा का नाम लिख रखा था.

पुलिस ने निशा और अर्जुन को आमनेसामने बैठा कर पूछताछ की तो दोनों एकदूसरे पर इलजाम लगाने लगे. उन की दीवानेपन आशिकी की हवा निकल चुकी थी. दोनों ने ही अपना जुर्म स्वीकार कर लिया. अब दोनों को जेल जाने का डर सता रहा था. पुलिस ने भादंवि की धारा 302, 201 के तहम मुकदमा दर्ज कर के उन से विस्तार से पूछताछ की और कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया.  रागिनी और तमन्ना ने मांबाप दोनों को खो दिया था. राजकुमार की मां आशा मसीह ने कहा कि उसे तो विश्वास ही नहीं हो रहा कि उन की बहू उन के सीधेसादे बेटे को मरवा सकती है. अब इस उम्र में उन्हें अपने बेटे की बच्चियों की परवरिश के लिए जीना होगा.

निशा के पिता दयाशंकर और मां गीता को बेटी के इस गुनाह पर अफसोस होता है. उन्होंने तो कभी कल्पना भी नहीं की थी कि निशा ऐसा भी कर सकती है. काश, राजकुमार मौत की दस्तक को सुन पाता तो उसे अपनी जान से हाथ न धोना पड़ता. Stories in Hindi Love