जुर्म की दुनिया में दहशत फैलाने वाली Lady Don

शक्लसूरत से भले ही वह बहुत ज्यादा खूबसूरत नहीं है लेकिन वह है बहुत आकर्षक. कंधे तक झूलते बाल उसके सांवले लंबे चेहरे पर खूब फबते हैं. उस की नाजुक कलाइयों में शायद ही कभी किसी ने चूडि़यां देखी हों, लेकिन एके 47 को वह खिलौना गन की तरह चलाती थी. नाम है उस का अनुराधा सिंह चौधरी. वह अकसर लोगों को पैंटशर्ट या टीशर्ट जींस जैसे वेस्टर्न लुक में नजर आई. साड़ी सरीखा कोई परंपरागत भारतीय परिधान पहने भी उसे किसी ने शायद नहीं देखा.

लंबी, दुबलीपतली, छरहरी 36 वर्षीय इस महिला के चेहरे से दुनिया भर की मासूमियत टपकती थी. लेकिन वह थी कितनी खूंखार, इस का अंदाजा उस के गुनाहों की लिस्ट देख कर लगाया जा सकता है. राजस्थान के सीकर के गांव अलफसर के एक मध्यमवर्गीय जाट परिवार में जन्मी अनुराधा का घर का नाम मिंटू रखा गया था. जब वह बहुत छोटी थी तभी उस की मां चल बसी. पिता रामदेव की कमाई बहुत ज्यादा नहीं थी, इसलिए वह दिल्ली आ गए. मिंटू जैसेजैसे बड़ी और समझदार होती गई, उसे यह एहसास होता गया कि जिंदगी में अगर कुछ बनना है तो पढ़ाईलिखाई बहुत जरूरी है. लिहाजा उस ने दिल लगा कर पढ़ाई की और वक्त रहते बीसीए और फिर एमबीए की भी डिग्री ले ली.

पढ़ाई पूरी करने के बाद जब वह स्थाई रूप से सीकर वापस आई तो वही हुआ जो इस उम्र में लड़कियों के साथ होना आम बात है. अनुराधा को फैलिक्स दीपक मिंज नाम के युवक से प्यार हो गया और उस ने घर और समाज वालों के विरोध और ऐतराज की कोई परवाह नहीं की और दीपक से लवमैरिज कर ली. यहां तक अनुराधा ने कुछ गलत नहीं किया था. दीपक के साथ वह खुश थी और आने वाली जिंदगी के सपने आम लड़कियों की तरह देखने लगी थी. दीपक सीकर में ही शेयर ट्रेडिंग का कारोबार करता था. अब पढ़ीलिखी अनुराधा भी उस के काम में हाथ बंटाने लगी, लेकिन शेयर मार्किट में खुद के लाखों और अपने क्लाइंट्स के करोड़ों रुपए इन दोनों ने तगड़े मुनाफे की उम्मीद में लगवा दिए थे, जो नातुजर्बेकारी और जोश के चलते एक झटके में डूब गए.

लेनदारों के बढ़ते दबाव से निबटने के लिए अनुराधा ने जुर्म का रास्ता चुना, जिस ने उस की जिंदगी बदल डाली. अनुराधा की मुलाकात राजस्थान के हिस्ट्रीशीटर बलबीर बानूड़ा से हुई, जिस ने उस की मुलाकात आनंदपाल सिंह से करवा दी. दोनों ने एकदूसरे को देखापरखा और देखते ही देखते अनुराधा की सारी परेशानियां दूर हो गईं. आनंदपाल सिंह की दहशत राजस्थान में किसी सबूत या पहचान की मोहताज कभी नहीं रही. जिस के रसूख से सियासी गलियारे भी कांपते थे.

आनंद ने अनुराधा को जुर्म की दुनिया के गुर और उसूल सिखाए. अनुराधा ने देखा और महसूस किया कि आनंद अपने रुतबे और दहशत को कैश नहीं करा पाता और थोड़े से में ही संतुष्ट हो जाता है तो उस ने आनंद को बदलना शुरू कर दिया. देखते ही देखते आनंद का हुलिया, आदतें, रहनसहन सब बदल गया. उधर जैसे ही दीपक को पत्नी के एक जरायमपेशा गिरोह में शामिल होने की बात पता चली तो उस ने उस से नाता तोड़ लिया. अनुराधा अब न केवल बिनब्याही पत्नी की हैसियत से बल्कि तेजतर्रार आला दिमाग की मालकिन होने की वजह से भी आनंद के गिरोह में नंबर 2 की हैसियत रखने लगी थी, जिस ने जरूरत से कम समय में हथियार चलाना सीख लिया था. गैंग और अपराध की दुनिया से जुड़े लोग उसे मैडम मिंज भी कहने लगे थे.

अनुराधा ने सीखे अपराध के गुर

अब अनुराधा ही किए जाने वाले अपराधों की प्लानिंग करने लगी थी. आनंद एक बात अनुराधा को और अच्छे से सिखा चुका था कि अपराध की दुनिया उस कार सरीखी होती है, जिस में रिवर्स गियर नहीं होता. अनुराधा जल्द ही पेशेवर मुजरिम बन गई थी और उस का नाम भी चलने लगा था. वह जहां से गुजरती थी वहां लोगों के सर अदब से झुकें न झुकें, खौफ से जरूर झुक जाते थे. अब वह धड़ल्ले से वारदातों को अंजाम देने लगी थी.

वह चर्चा और सुर्खियों में साल 2013 में तब आई थी, जब उस पर रंगदारी का पहला मामला दर्ज हुआ था. जिस पर पुलिस ने उस पर पहली दफा 10 हजार रुपए का ईनाम भी रखा था.

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राजस्थान में बवंडर उस वक्त खड़ा हुआ, जब एक चर्चित हत्याकांड के गवाह का अपहरण हो गया. दरअसल, 27 जून, 2006 को जीवनराम गोदारा नाम के शख्स की हत्या आनंद ने दिनदहाड़े कर दी थी, जिस से पूरा राज्य हिल उठा था. जीवनराम का भाई इंद्रचंद्र गोदारा इस हत्याकांड का गवाह था, जिस की गवाही आनंद को लंबा नपवा देती. अपने आशिक को बचाने के लिए अनुराधा ने साल 2014 में इंद्रचंद्र को अगवा कर लिया और पुणे ले गई. जहां एक फ्लैट में उसे बंधक बना कर रखा गया था.

एक दिन मौका पा कर इंद्रचंद्र ने एक परची खिड़की से नीचे फेंक दी, जिस पर लिखा था, ‘मैं किडनैप हो गया हूं और मुझे यहां पर मदद की जरूरत है.’ परची जिस ने भी पढ़ी, उस ने औरों को बताया तो फ्लैट के बाहर भीड़ इकट्ठा हो गई और फ्लैट को घेर लिया. तब अनुराधा और उस के गुर्गे बमुश्किल वहां से भागने में कामयाब हो पाए थे. जैसेतैसे बचतेबचाते वह राजस्थान वापस आ गई और आनंद के जेल में होने के चलते खुद उस का गैंग चलाने लगी. इस दौरान उस ने कारोबारियों को अगवा कर फिरौती से खूब पैसा कमाया.

लेकिन उसे झटका तब लगा जब पुलिस ने साल 2017 में एनकाउंटर में नाटकीय तरीके से आनंद पाल सिंह को मार गिराया. जिस के बाद डरीसहमी अनुराधा फरार हो गई. जान बचाने के खौफ और गैंग के टूट जाने से अनुराधा इधरउधर भागती रही. इसी फरारी के दौरान सहारा ढूंढती अनुराधा लारेंस बिश्नोई गैंग में शामिल हो गई. मकसद था, जैसे भी हो पुलिस से बचना. हालांकि जुर्म की दुनिया में भी उस के खासे चर्चे और किस्से फैल चुके थे. इस नए गिरोह से उस की पटरी ज्यादा नहीं बैठी और जल्द ही वह काला जठेड़ी उर्फ संदीप के संपर्क में आई.

आनंद की मौत से आया खालीपन उसे काला जठेड़ी से भरता नजर आया तो इस की वजहें भी थीं. अनुराधा बगैर किसी एंट्रेंस एग्जाम के जठेड़ी गैंग में न केवल शामिल हो गई, बल्कि देखते ही देखते इस गैंग में भी उस ने वही जगह और रुतबा हासिल कर लिए, जो उसे आनंद के गैंग में हासिल था. दोनों ने हरिद्वार के एक मंदिर में विधिविधान से शादी भी कर ली. किशोरावस्था से ही जुर्म की दुनिया में दाखिल हो चुके काला पर हत्या, अपहरण लूटपाट, जमीनों पर जायजनाजायज कब्जे और फिरौती वगैरह के कोई 3 दरजन मामले दर्ज हो चुके थे. अनुराधा की आपराधिक जन्मपत्री से पूरे 36 गुण उस से मिले थे.

काला भी उस के व्यक्तित्व से प्रभावित हुआ था और उस के आला खुराफाती दिमाग का कायल हो गया था. काला की दहशत अपने इलाकों में ठीक वैसी ही थी, जैसी राजस्थान में आनंद की थी. दोनों को एकदूसरे की जरूरत थी, कारोबारी भी जिस्मानी भी और जज्बाती भी. काला के गिरोह के मेंबर भी अनुराधा के एके 47 चलाने की स्टाइल से इतने इंप्रैस थे कि उन्होंने उसे रिवौल्वर रानी का खिताब दे दिया था.

फिर जैसे ही सागर धनखड़ हत्याकांड में नामी पहलवान सुशील कुमार का नाम आया तो दिल्ली गरमा उठी, क्योंकि इस वारदात में गैंगस्टर नीरज बवाना और काला जठेड़ी का नाम भी आया. जेल में बंद सुशील पहलवान ने उस से अपनी जान को खतरा जताया था.

काला जठेड़ी की तलाश में जुटी स्पैशल सेल

अब पुलिस की स्पैशल सैल ने काला की तलाश को मुहिम की शक्ल दे दी तो वह अनुराधा के साथ भागता रहा. काला की तलाश में पुलिस की स्पैशल सैल जुटी तो अनुराधा फिर चिंतित हो उठी.

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क्योंकि अगर आनंद की तरह काला भी किसी एनकाउंटर में मारा जाता तो वह फिर बेसहारा हो जाती. दूसरे गिरफ्तारी की तलवार अब उस के सिर पर भी लटकने लगी थी. पुलिस को अंदेशा इन दोनों के नेपाल में होने का था, जबकि हकीकत में दोनों भारत भ्रमण करते आंध्र प्रदेश के अलावा पंजाब और मुंबई भी गए थे और बिहार के पूर्णिया में भी रुके थे. मध्य प्रदेश के इंदौर और देवास में भी इन्होंने फरारी काटी थी. हर जगह इन्होंने खुद को पतिपत्नी बताया और लिखाया था.

काला को घिरता देख अनुराधा ने 70-80 के दशक के मशहूर जासूसी उपन्यासकार सुरेंद्र मोहन पाठक के एक किरदार विमल का सहारा लिया, जिस ने पुलिस से बचने के लिए सरदार का हुलिया अपना लिया था. अपनी नई पत्नी के कहने पर काला जठेड़ी विमल की तर्ज पर सरदार बन गया. उस ने अपना नया नाम पुनीत भल्ला और अनुराधा का नाम पूजा भल्ला रखा. सोशल मीडिया पर भी दोनों ने नए नामों से आईडी बना ली थी. अनुराधा ने जठेड़ी गैंग के गुर्गों को यह हिदायत भी दी थी कि अगर उन में से कोई कभी पुलिस के हत्थे चढ़ जाए तो काला के बारे में यही बताए कि वह इन दिनों नेपाल में है और वहीं से गैंग चला रहा है. इस हिदायत का मकसद पुलिस को भटकाए और उलझाए रखना था.

आनंदपाल के गिरोह में रहते अनुराधा कई बार नेपाल भी गई थी और वहां के अड्डों से भी वाकिफ थी, इसलिए वह काला को भी 2 बार नेपाल ले गई थी. मकसद था विदेश भागने की संभावनाएं टटोलना और जमा पैसों की ट्रोल को रोकना. अनुराधा के खुराफाती दिमाग का आनंद भी कायल था और अब काला भी हो गया था, जिसे अनुराधा ने सख्त हिदायत यह दे रखी थी कि वह भारत में फोन पर किसी से बात न करे जोकि आजकल पुलिस को मुजरिम तक पहुंचने का सब से आसान और सहूलियत भरा जरिया और रास्ता होता है.

अब काला को जिस से भी बात करनी होती थी तो वह विदेश में बैठे अपने किसी गुर्गें की मदद से करता था. काला और अनुराधा तक पहुंचने के लिए पुलिस की स्पैशल सेल ने लारेंस बिश्नोई को मोहरा बनाया जो जेल में बंद था. पुलिस ने अपने मुखबिरों के जरिए बिश्नोई तक एक फोन पहुंचाया, जिस से वह अपने गुर्गों से बात करता रहा और पुलिस खामोशी से तमाशा देखती रही. एक बार वही हुआ जो पुलिस चाहती थी कि बिश्नोई ने काला से भी बात कर डाली. उस का फोन सर्विलांस पर तो था ही जिस से उस के सहारनपुर के अमानत ढाबे पर होने की लोकेशन मिली. पुलिस तुरंत हरकत में आई और आसानी से काला और अनुराधा को गिरफ्तार कर लिया. दोनों हतप्रभ थे. उन्हें यकीन ही नहीं हो रहा था कि वे चूहेदानी में फंस चुके हैं.

बिलाशक पुलिस की स्पैशल सेल ने दिमाग से काम लिया, जिसे उम्मीद थी कि आज नहीं तो कल बिश्नोई काला से जरूर बात करेगा और ऐसा हुआ भी.

किडनैपिंग क्वीन अर्चना शर्मा

अनुराधा जुर्म की दुनिया की छोटी मछली थी, जिस का हल्ला मीडिया ने ज्यादा मचाया क्योंकि आमतौर पर औरतों के बहुत ज्यादा क्रूर होने की उम्मीद कोई नहीं करता. लेकिन वक्तवक्त पर महिलाएं जुर्म की दुनिया में आ कर लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींचती रही हैं. ऐसा ही एक नाम अर्चना शर्मा का है, जिसे किडनैपिंग क्वीन के खिताब से नवाज दिया गया. अर्चना की कहानी एकदम फिल्मों सरीखी है. उज्जैन में एक मामूली पुलिस कांस्टेबल बालमुकुंद शर्मा के यहां जन्मी अर्चना भी अनुराधा की तरह पढ़ाईलिखाई में तेज थी, इसलिए सैंट्रल स्कूल के स्टाफ की चहेती भी थी.

4 भाईबहनों में सब से बड़ी अर्चना पेंटिंग की शौकीन थी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी बढ़चढ़ कर हिस्सा लेती थी. रामलीला में सीता का रोल निभाना उसे बहुत भाता था. सभी लोगों को उम्मीद थी कि महत्त्वाकांक्षी और बहुमुखी प्रतिभा की धनी यह लड़की एक दिन नाम करेगी. अर्चना ने नाम किया, लेकिन जुर्म की दुनिया में. जिसे जान कर हर कोई दांतों तले अंगुली दबा लेता है. एक दिन अचानक उस ने पढ़ाई छोड़ देने का ऐलान कर दिया, जिस से घर वाले हैरान रह गए, उन्होंने उसे समझाया लेकिन वह टस से मस नहीं हुई.

असल में वह पिता की तरह पुलिस विभाग में नौकरी करना चाहती थी, जो उस ने कर भी ली. लेकिन जल्द ही वह इस नौकरी से ऊब गई और नौकरी छोड़ भी दी, जिस से गुस्साए घर वालों ने उस से नाता तोड़ लिया. पुलिस की छोटे ओहदे की नौकरी में मेहनत के मुकाबले पगार कम मिलती थी, जबकि अर्चना का सोचना था कि वह इस से ज्यादा डिजर्व करती है. कुछ कर गुजरने की चाह लिए वह उज्जैन से भोपाल आ गई और वहां एक छोटी नौकरी कर ली.

यहीं से उस के जुर्म की दुनिया में दाखिले के द्वार खुले. अब अर्चना घरेलू बंदिशों से आजाद थी. लिहाजा बेरोकटोक अपनी जिंदगी खुद जीने लगी और उसे एक छोटे नेता से प्यार हो गया. लेकिन यह परवान नहीं चढ़ पाया, क्योंकि इस नेता की मंशा केवल एक खूबसूरत लड़की के साथ टाइम पास करने की थी. पहले ही प्यार में धोखा खाई अर्चना को समझ आ गया कि न तो छोटी नौकरी से उस के सपने पूरे होने वाले और न ही रोमांटिक ख्वावों से जिंदगी का मकसद पूरा होने वाला. लिहाजा वह भोपाल छोड़ कर मुंबई चली गई.

लेकिन जिंदगी का मकसद क्या है, यह वह खुद भी तय नहीं कर पा रही थी. मुंबई में उस ने बाबा सहगल का आर्केस्ट्रा ग्रुप जौइन कर लिया और प्रोग्राम देने खाड़ी देशों तक गई और जल्द ही ऐक्ट्रेस बनने के सपने देखने लगी. लेकिन उसे यह भी समझ आ गया कि मुंबई में जम पाना कोई हंसीखेल नहीं है. इसी दौरान अर्चना को अहमदाबाद के एक कारोबारी से प्यार हो गया, लेकिन यहां भी उसे नाकामी मिली. उस कारोबारी ने प्यार नहीं, बल्कि कारोबार ही किया था और खुद अर्चना की भी मंशा किसी पैसे वाले को फांस कर सेटल हो जाने की थी, जोकि पूरी नहीं हुई.

देखा जाए तो अर्चना एक भटकाव का शिकार हो चुकी थी. एक दिन यही भटकाव उसे यूं ही दुबई ले गया, जहां उस की मुलाकात अंडरवर्ल्ड के सरगनाओं से हुई, इन में से एक नाम अपने दौर के चर्चित अपराधी बबलू श्रीवास्तव का भी था. बहुत जल्द अर्चना को तीसरी बार प्यार हुआ. बबलू श्रीवास्तव भी उस पर जान छिड़कने लगा था. लेकिन कुख्यात बबलू को यह पसंद नहीं था कि अर्चना किसी से हंसेबोले इस को ले कर अपने ही साथियों से कई बार उस का झगड़ा भी हुआ. आजाद जिंदगी जीने की आदी हो चली अर्चना को प्यार का यह तरीका और बबलू का पजेसिव नेचर नागवार गुजरने लगा. कुछ दिनों बाद बबलू उसे ले कर नेपाल चला आया. यहां अर्चना को चौथी बार प्यार हुआ राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी के नेता दिलशाद बेग से.

अब तक अर्चना किस्मकिस्म के मर्दों से मिल चुकी थी और उन की कमजोरियां भी समझने लगी थी. दिलशाद पर उस ने अपने हुस्न और प्यार का जादू चलाया तो वह भी बबलू की तरह उस पर मरने लगा. असल में अर्चना की मंशा दिलशाद को मोहरा बना कर बबलू से छुटकारा पाने की थी. दोनों को वह मैनेज करती रही. साल 1994 में बबलू गिरफ्तार हुआ तो अर्चना भारत वापस चली आई और बबलू का गिरोह संभालने लगी. अब वह एक पेशेवर मुजरिम बन चुकी थी और जुर्म की दुनिया में लेडी डौन का खिताब हासिल कर चुकी थी. कई उद्योगपतियों को अगवा कर उस ने मोटी फिरौती वसूली. इस काम की वह स्पैशलिस्ट हो गई थी.

धीरेधीरे बबलू और उस का साथ छूट गया और अर्चना देश के कई गिरोहों के संपर्क में आई, जिन में गैंगस्टर हिंदू सिंह यादव का नाम भी शामिल था. आए दिन अर्चना पुलिस से आंखमिचौली खेलने लगी और मध्य प्रदेश को अपना गढ़ बनाने की कोशिश करने लगी, पर बना नहीं पाई. क्योंकि पुलिस उस के पीछे थी. अब अर्चना कहां है, यह किसी को नहीं मालूम क्योंकि उस की गतिविधियां बंद हैं और अफवाह यह भी उड़ी थी कि वह तो साल 2010 में बांग्लादेश में मारी गई. अर्चना को ले कर पुलिस कितनी परेशान थी, इस का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक वक्त में पुलिस ने उस की बाबत 40 देशों को अलर्ट जारी किया था.

जेनाबाई, जिस के इशारे पर अंडरवर्ल्ड डौन भी नाचते थे

अनुराधा और अर्चना तो अभी सुर्खियों में हैं, क्योंकि उन के मामले ताजेताजे हैं लेकिन देश में लेडी डौन की लिस्ट काफी लंबी है, जिन के कारनामे भी हैरतंगेज हैं और दिलचस्प भी. इस लिस्ट को देख कर लगता है कि औरतों का अंडरवर्ल्ड से पुराना नाता है और वे समयसमय पर जुर्म की दुनिया में अपनी हाजिरी दर्ज कराती रही हैं. माफिया क्वीन जेनाबाई दारू वाली आज जिंदा होती तो उस की उम्र 100 साल होती, जिस का नाम आज भी एक मिसाल के तौर पर लिया जाता है. जेनाबाई दूसरी महिला डौनों की तरह किसी जरायमपेशा के इशारों पर कभी नहीं नाची, बल्कि उस ने कई नामी अपराधियों को इशारों पर नचाते लंबे वक्त तक राज किया.

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सांप्रदायिक हिंसा और दीगर अपराधों के लिए जाने जाने वाले मुंबई के बदनाम डोंगरी इलाके, जहां की एक चाल में उस का परिवार रहता था, से शराब की तसकरी करने वाली यह लेडी डौन आला दिमाग की मालकिन और चालाक थी. दाऊद इब्राहिम, हाजी मस्तान और करीम लाला जैसे मुंबइया डौन जिन के नाम और खौफ के सिक्के चलते थे. वे महारथी अगर किसी के इशारे पर नाचते थे तो वह जेनाबाई दारू वाली थी, जिस के दरबार में मुंबई क्राइम ब्रांच के छोटेबड़े अफसर भी सिर नवा कर दाखिल होते थे.

जेना थी तो एक दुस्साहसी और असाधारण महिला, जो आजादी की लड़ाई में भी शरीक हुई थी. उस का पति उसे छोड़ कर पाकिस्तान चला गया था, लेकिन 5 बच्चों की जिम्मेदारी जेना पर छोड़ गया था. गरीब जेना ने पहले चावल और फिर शराब की तसकरी शुरू कर दी. कई बार वह पकड़ी गई, लेकिन छूट भी गई. इस परेशानी से बचने के लिए जेना पुलिस की मुखबिर बन गई. उस का एक बेटा गैंगवार में मारा गया तो जुर्म से उस का जी उचट गया और वह धर्मकर्म करने लगी और 1994 में उस की मौत हो गई.

संतोकबेन जडेजा जिस की जिंदगी पर बनी फिल्म ‘गौडमदर’

गौडमदर संतोक बेन जडेजा ने 90 के दशक में फिल्मी स्टाइल में अपने पति सरमन जडेजा की हत्या का बदला लेने के लिए जुर्म का रास्ता अख्तियार किया था, लेकिन जल्द ही वह दहशत का दूसरा नाम बन गई थी. एक वक्त में पूरा गुजरात उस के नाम से खौफ खाता था. संतोक ने बाकायदा अपना गिरोह बना लिया था, जिस में सैकड़ों छोटेबड़े बदमाश काम करते थे. ये लोग रियल एस्टेट, फिरौती, तसकरी और जबरिया वसूली करते थे.

संतोक का खौफ इतना था कि कोई उस के गुर्गों के लिए न कहने की हिम्मत नहीं कर पाता था और जो करता था वह अगली सुबह का सूरज नहीं देख पाता था. पोरबंदर इलाके में तो उस की हुकूमत चलती थी. वह इतनी निर्दयी और खूंखार हो गई थी कि उस के खिलाफ हत्या के 14 मामले दर्ज हुए थे और उस के गैंग के सदस्यों के खिलाफ 550 के लगभग मामले विभिन्न अपराधों के दर्ज थे. लेकिन अपने चाहने वालों और गरीबों पर वह मेहरबान रही, जिस से उसे गौडमदर का खिताब मिल गया.

संतोक बेन देश की पहली लेडी डौन थी जिस की जिंदगी पर विनय शुक्ला ने फिल्म ‘गौडमदर’ साल 1999 में बनाई थी, जिस में उस का रोल शबाना आजमी ने निभाया था. यह फिल्म जबरदस्त हिट साबित हुई थी, जिसे 6 नैशनल अवार्ड सहित एक फिल्मफेयर अवार्ड भी मिला था. अपने खौफ और रसूख को संतोक ने राजनीति में भी इस्तेमाल किया और साल 1990 में वह जनता दल के टिकट पर कुतियाना सीट से 35 हजार वोटों से जीत कर विधायक भी चुनी गई थी. उस का एक बेटा कांधल जडेजा कुतियाना सीट से ही एनसीपी के टिकट पर जीत कर विधायक बना. साल 2011 की होली के पहले संतोक की हार्ट अटैक से मौत हो गई थी.

खतरनाक सायनाइड किलर केमपंमा

सायनाइड मल्लिका के.डी. केमपंमा बेंगलुरु के नजदीक कमालीपुरा गांव की रहने वाली सीरियल किलर थी, जिस ने कितनों को सायनाइड दे कर मौत की नींद सुलाया. इस की सही गिनती किसी के पास नहीं. के.डी. केमपंमा ने हत्या करने का नायाब लेकिन पुराना तरीका चुन रखा था. वह अपने शिकार को एकांत में बुलाती थी और वहां उस की हत्या कर उसे लूट लेती थी. जुर्म करने के लिए वह उन महिलाओं को चुनती थी, जो पारिवारिक या दूसरे कारणों से परेशान रहती थीं और मन्नतें मांगने व पूजापाठ करने मंदिर जाया करती थीं.

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के.डी. इन के सामने खुद को एक जानकार तांत्रिक की तरह पेश करती थी और पूजापाठ कर परेशानी दूर करने का झांसा दे कर शिकार को किसी वीरान मंदिर बुलाती थी और वहीं सायनाइड खिला कर हमेशा के लिए परेशान जिंदगी से ही छुटकारा दिला देती थी. गिरफ्तार होने के बाद उसे मौत की सजा सुनाई गई थी. लेकिन बाद में उसे आजीवन कारावास में बदल दिया गया था. बेहद गरीब घर की केमपंमा ने एक दरजी से शादी की थी और खुद चिटफंड कंपनी चलाती थी. पर रातोंरात अमीर बनने के लालच में साल 1999 में उस ने पहली हत्या की थी और फिर मुड़ कर नहीं देखा. साल 2008 में गिरफ्तार होने तक उस का खासा खौफ बेंगलुरु में रहा.

कोठों की बादशाहत वाली सायरा बेगम

सायरा बेगम कोठे वाली के नाम से इसलिए मशहूर हुई थी कि उस ने देह व्यापार के धंधे में तकरीबन 5 हजार लड़कियों को धकेला. हैदराबाद की रहने वाली इस मौसी सायरा बेगम की दिल्ली के बदनाम रेडलाइड इलाके जीबी रोड पर बादशाहत लंबे समय तक कायम रही. उस पर दरजनों आपराधिक मामले भी दर्ज हुए थे. देह व्यापार के धंधे से सायरा ने करोड़ों रुपए कमाए. साल 2016 में जब वह गिरफ्तार हुई तो पता चला कि 6 कोठे तो उस के जीबी रोड पर ही हैं और दिल्ली में ही आलीशान फार्महाउस के अलावा बेंगलुरु में भी उस के बेशकीमती 3 फ्लैट हैं. उस के बैंक खातों में ही करोड़ों रुपए जमा थे. सायरा का पति अफाक हुसैन इस धंधे में उस का साथ देता था.

ये लोग पूर्वोत्तर भारत और नेपाल से लड़कियां ला कर उन से धंधा कराते थे. जिस सायरा ने कोई 5 हजार लड़कियों को देह धंधे के दलदल में धकेला, खुद उस की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं. मांबाप की मौत के बाद वह साल 1990 में दिल्ली रोजगार की तलाश में आई थी, लेकिन वह नहीं मिला तो वह कालगर्ल बन गई. बेरोजगारी और दुश्वारियां झेल चुकी सायरा को कभी मजबूर गरीब लड़कियों की हालत पर तरस नहीं आया, जो कम उम्र लड़कियों को जल्द जवान बनाने के लिए हारमोंस के इंजेक्शन भी देती थी. लड़कियों को इस धंधे में लाने के लिए उस ने गिरोह भी बना लिया था, जिस की वह डौन थी.

इन का भी बजता था डंका

इसी तरह खूबसूरती की वजह से रूबीना सिराज सैय्यद ने अपराध की दुनिया में हीरोइन नाम से पहचान बनाई. कभी जानीमानी ब्यूटीशियन रही रूबीना ने पैसों के लालच में छोटा राजन से हाथ मिला लिया. उस ने अपनी खूबसूरती से कइयों को काबू किया. पुलिस वाले भी उस की खूबसूरती पर लट्टू हो जाते थे. इसी का फायदा उठा कर 70 के दशक में वह जेल में बंद छोटा शकील के गुर्गों तक हथियार और नशे का सामान पहुंचाती थी. महाराष्ट्र सरकार ने उस की आपराधिक गतिविधियों की वजह से उस पर मकोका भी लगाया था. दूध बेचने वाली शशिकला ने पैसों के लालच में ड्रग्स की तसकरी शुरू की और जल्द ही मुंबई में कुख्यात हो गई. अपराध की दुनिया में उसे बेबी नाम से जाना जाने लगा.

वर्ष 2015 में मुंबई पुलिस ने जब उसे गिरफ्तार किया, तब तक ड्रग्स की तसकरी से वह 100 करोड़ रुपए की संपत्ति खड़ी कर चुकी थी. शशिकला उर्फ बेबी को मुंबई का सब से बड़ा ड्रग्स माफिया माना जाता है. बेला आंटी को तो मुंबई की सब से बड़ी शराब माफिया के रूप में जाना जाता था. 70 के दशक में जब अवैध शराब के खिलाफ सख्ती बढ़ी, तब भी बेला आंटी ने ट्रकों में भर कर पूरी मुंबई में अवैध शराब की तसकरी की. अधिकारियों का मुंह बंद कराने के लिए बेला ने उन्हें मोटी रिश्वत दी. उस ने शराब की तसकरी जारी रखने के लिए तब के गैंगस्टरों, अधिकारियों और राजनेताओं सब को डरा रखा था.

किसी में हिम्मत नहीं थी कि अवैध शराब की तसकरी में लगी उस की गाडि़यों को कोई रोक सके. यहां तक कि उस वक्त का अंडरवर्ल्ड डौन वर्धाभाई भी उसे अपने एरिया धारावी में शराब की तसकरी करने से नहीं रोक सका था. भारत के मोस्टवांटेड दाऊद इब्राहिम की बहन हसीना पारकर वो नाम है, जो किसी परिचय का मोहताज नहीं. दाऊद इब्राहिम के भारत से भागने के बाद मुंबई में उस के अवैध धंधों की बागडोर बहन हसीना पारकर ने ही संभाली. अपराध की दुनिया में उस की पहचान गौडमदर औफ नागपाड़ा और अप्पा मतलब बड़ी बहन के तौर पर रही है.

इस में कोई संदेह नहीं कि उस में मुंबई के अपराध जगत में एकछत्र राज किया है. वर्ष 2014 में हार्ट अटैक से उस की मौत हो गई.

अफ्रीकन ब्यूटी Facebook पर लड़को को फंसाती

बिजनैसमैन संजय दिल्ली में रह रही तंजानिया मूल की युवती ग्लोरी से मिल कर फूला नहीं समा रहा था. बाद में इसी ब्लैक ब्यूटी ने संजय को ब्लैकमेल कर लाखों रुपए ऐंठ लिए. जब पुलिस ने इस मामले की जांच की तो यह एक ऐसा गैंग निकला कि…

23 मार्च, 2018 की बात है. इंदौर साइबर सेल के एसपी जितेंद्र सिंह अपने औफिस में बैठे थे. तभी उन के औफिस में एक युवक आया. चारों तरफ शकभरी निगाहों से देख रहे उस युवक को देख वहां मौजूद पुलिस वालों को इस बात का एहसास हो गया कि वह युवक किसी बड़ी मुसीबत में है. युवक ने एसपी जितेंद्र सिंह से तत्काल मिलने की इच्छा जाहिर की. वहां मौजूद एएसआई ने एसपी से पूछ कर उस युवक को अंदर भेज दिया.

जितेंद्र सिंह ने युवक को बैठने का इशारा कर के उस के आने का कारण पूछा. उस युवक का नाम संजय था, उस ने बताया कि कुछ दिन पहले उस की मुलाकात दिल्ली में रह रही तंजानिया निवासी युवती ग्लोरी से हुई थी. दोनों में दोस्ती हो गई. मुलाकात के समय ग्लोरी ने मदद के नाम पर उस से 2-3 हजार रुपए मांगे, जो उसे दे दिए. यहां तक तो ठीक था. लेकिन जल्दी ही उस की मांग लगातार बढ़ गई. यहां तक कि वह धमकी और ब्लैकमेलिंग पर उतर आई. बाद में उस की मांग लाखों तक पहुंच गई. संजय ने इस बात का खुलासा भी किया कि अब तक वह उसे करीब 15 लाख रुपए दे चुका है.

संजय ने आगे बताया कि ग्लोरी ने उस से कहा कि वह गर्भवती हो गई. उस ने गर्भ गिराने की कोशिश की, जिस से उस की तबीयत खराब हो गई और कुछ दिन पहले उस की मौत हो गई. ग्लोरी की मौत के बाद उस की बहन और उस का एक साथी पैसा मांगने लगे. ग्लोरी के एक फ्रैंड का आज ही फोन आया था. उस ने उसे धमकी दी कि कल दोपहर तक उस के बैंक एकाउंट में 5 लाख रुपए जमा नहीं किए तो वह मेरा वीडियो वायरल कर देगा. संजय ने एसपी जितेंद्र सिंह को बताया कि वह बुरी तरह परेशान हो चुका है. अब उस के पास 2 ही रास्ते थे, या तो वह आत्महत्या कर ले या पुलिस की मदद ले. यही सोच कर वह यहां आया है. एसपी जितेंद्र सिंह ने उसे रिपोर्ट लिखाने को कहा ताकि आगे की काररवाई की जा सके.

संजय जाने लगा तो जितेंद्र सिंह ने उस से पूछा, ‘‘आप एक ही बार ग्लोरी से मिले थे?’’

‘‘जी सर.’’

‘‘आप ने उसे गर्भावस्था में देखा.’’

‘‘जी नहीं, सर.’’ संजय ने जवाब दिया तो एसपी साहब ने अगला सवाल पूछा, ‘‘उस की शवयात्रा में शामिल हुए?’’

‘‘नहीं, मैं एक बार के बाद कभी नहीं मिला, शवयात्रा में शामिल होने का तो कोई सवाल ही नहीं था.’’

‘‘उस की बहन और भाई से कभी मिले?’’

‘‘नहीं, बस फोन पर ही बातें होती हैं.’’

‘‘ठीक है, रिपोर्ट लिखा दीजिए. हम देखेंगे सच क्या है.’’ कह कर जितेंद्र सिंह ने बात खत्म कर दी.

संजय ने एसपी साहब की बात मान कर 23 मार्च, 2018 को तंजानिया निवासी ग्लोरी के खिलाफ धोखाधड़ी और ब्लैकमेलिंग की रिपोर्ट लिखवा दी. उस ने यह भी बता दिया कि ग्लोरी छतरपुर, दिल्ली में रहती है. साथ ही उस का और उस के तथाकथित रिश्तेदारों के फोन नंबर भी पुलिस को दे दिए. संजय ने उस बैंक एकाउंट के नंबर भी दे दिए, जिन में उस ने पैसा डाला था. रिपोर्ट दर्ज होने के दूसरे ही दिन एसपी जितेंद्र सिंह ने इंसपेक्टर राशिद अहमद के साथ इस मामले को ले कर लंबी मीटिंग की. इस मीटिंग में जांच की रूपरेखा तय की गई. इस के साथ ही उन्होंने राशिद अहमद के नेतृत्व में काम करने के लिए एक पुलिस टीम बना दी.

इस टीम में एसआई पूजा मुवैल, आमोद, विनोद, एएसआई धीरज, हेडकांस्टेबल रामप्रकाश, रामपाल, प्रभाकर, गजेंद्र, राकेश, रमेश, करिश्मा और रजनी को शामिल किया गया. पुलिस की इस टीम के सदस्यों को अलगअलग जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं. उसी दिन से यह टीम अपने काम पर लग गई. एसपी जितेंद्र सिंह टीम की हर गतिविधि पर नजर रखे हुए थे और सब को गाइड कर रहे थे. छानबीन में जल्दी ही यह बात साफ हो गई कि संजय ने पुलिस को जो फोन नंबर दिए थे, वे सभी छतरपुर एक्सटेंशन, दिल्ली में चल रहे थे. साथ ही पुलिस ने उन खातों का भी पता लगा लिया जिन में संजय पैसा डालता रहा था.

ये खाते संदीप और सुमित प्रजापति निवासी दिल्ली और रीता काटजू के नाम पर थे. ग्लोरी ने जिस नंबर से फेसबुक मैसेंजर पर मैसेज और बाद में वाट्सऐप पर चैटिंग कर के संजय से दोस्ती की थी, उसी के आधार पर साइबर टीम ने कुछ ही दिनों में ग्लोरी के दिल्ली के ठिकाने और उस की गतिविधियों की जानकारी जुटा ली. चूंकि यह मामला एक विदेशी युवती से जुड़ा था, इसलिए साइबर सेल की टीम फूंकफूंक कर कदम रख रही थी. क्योंकि जरा सी गलती भी इंदौर पुलिस को भारी पड़ सकती थी. लेकिन एसपी यह बात अच्छी तरह जानते थे कि गलती के डर से कुछ न करने से अच्छा है कि कुछ किया जाए.

पूरी तैयारी के साथ इंदौर से दिल्ली गई टीम ने 4 रातें और 5 दिन की मेहनत के बाद महरौली पुलिस की मदद से सुमित प्रजापति और साउमी एलियास ग्लोरी, निवासी तंजानिया जो दिल्ली के छतरपुर एक्सटेंशन में रह रही थी, को गिरफ्तार कर लिया. जैसी कि पुलिस को पहले आशंका थी, गिरफ्तारी के बाद थाना महरौली जा कर ग्लोरी ने आसमान सिर पर उठा लिया. विदेशी नागरिक होने के नाम पर वह पुलिस को सबक सिखाने की धमकी देने लगी. लेकिन पुलिस टीम उस की धमकियों में नहीं आई और सुमित और ग्लोरी को इंदौर ले गई.

यह बात पहले ही स्पष्ट थी कि विदेश में बैठी जो लड़की लोगों के साथ धोखाधड़ी और ब्लैकमेलिंग कर रही हो, वह सीधीसादी नहीं बल्कि शातिर होगी. इंदौर में ग्लोरी को महिला थाने में रखा गया, लेकिन वहां के हवालात की दीवारें 2 दिन तक ग्लोरी के आतंक से कांपती रहीं. स्टेट साइबर सेल ने ग्लोरी को अदालत से रिमांड पर ले कर पूछताछ की. शुरू में ग्लोरी ने पुलिस को बिलकुल सहयोग नहीं किया, लेकिन जब उस ने देखा कि एसपी जितेंद्र सिंह ने उस के गिरोह को कानून के जाल में फंसाने के लिए काफी मेहनत से मोहरे चले हैं तो उस ने अपने साथी तंजानिया निवासी एडवर्ड किंग्सले का नाम भी बता दिया था.

एडवर्ड को पुलिस की इसी टीम ने 4 दिन बाद दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया. दोनों से पूछताछ के बाद ब्लैकमेलर ब्लैक ब्यूटी की पूरी कहानी सामने आ गई, जो इस प्रकार निकली—

करीब 7-8 महीने पहले की बात है. इंदौर के तुकोगंज निवासी 27 वर्षीय फरनीचर व्यवसाई संजय को अपने फेसबुक मैसेंजर पर ग्लोरी नाम की ब्लैक ब्यूटी और हौट लगने वाली लड़की का मैसेज मिला था. सोशल मीडिया पर डीपी में खूबसूरत लड़कियों की फोटो लगा कर मजे लेने वाले लड़कों की कमी नहीं है. यह बात संजय भी जानता था, इसलिए उस ने उस मैसेज पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया. डेढ़ 2 महीने बाद एक दिन फुरसत में फेसबुक देखते वक्त संजय की नजर फिर से गलोरी के पुराने मैसेज पर पड़ी तो उस ने भी जवाब में उसे हाय लिख दिया. 2-4 दिन बाद ग्लोरी की तरफ से जवाब आ गया. ग्लोरी ने इस बार डीपी पर पहले से भी ज्यादा सैक्सी फोटो लगा रखी थी.

चूंकि पुरानी और नई डीपी में एक ही लड़की की फोटो थी, इसलिए संजय को भरोसा हो गया कि मैसेज भेजने वाली लड़की ही है. सोचविचार कर संजय ने भी बातचीत शुरू कर दी. बात बढ़ी तो दोनों ने एकदूसरे को अपना परिचय दे दिया. फिर दोनों फेसबुक मैसेंजर से निकल कर वाट्सऐप पर मैसेज भेजने लगे. इसी दौरान ग्लोरी ने संजय को अपने ऐसे फोटो भी शेयर किए, जिन्हें देख कर संजय फैंटेसी की दुनिया में डूबने लगा. उस ने ग्लोरी से मिलने का निश्चय किया. बिजनैस के सिलसिले में संजय दिल्ली जाता रहता था.

ग्लोरी से बात होने के बाद संजय दिल्ली के एक होटल में ग्लोरी से मिला. दोनों के बीच बातें हुईं तो उस ने कुछ परेशानी बता कर संजय से मदद मांगी. नतीजतन संजय ने उस के बताए एकाउंट में 2 हजार रुपए ट्रांसफर कर दिए. तंजानिया अफ्रीकी महाद्वीप के प्रमुख देशों में से एक है. संजय को अफ्रीकन ब्लैक ब्यूटी ग्लोरी काफी पसंद आई. डार्क कलर के बावजूद वह काफी सैक्सी और सुंदर लग रही थी. 2 हजार रुपए मिलने के अगले 10 दिनों में ग्लोरी ने संजय से एक बार 6 हजार और एक बार 12 सौ रुपए मांगे. चूंकि संजय के लिए यह कोई बड़ी रकम नहीं थी. इसलिए उस ने बिना सोचेसमझे 6 हजार और 12 सौ रुपए ग्लोरी के एकाउंट में ट्रांसफर कर दिए.

लेकिन हकीकत यह थी कि ग्लोरी छोटीछोटी रकम लेने के बहाने हांडी में चावल टटोलने का काम कर रही थी. जब उस ने देखा कि संजय जाल में फंस चुका है तो 10 दिनों बाद ग्लोरी ने उस से सीधे सवा लाख रुपए की मांग की. उस ने संजय को बताया कि वह एक मुसीबत में फंस गई है, इसलिए अपनी मां के पास तंजानिया जाना चाहती है.

‘‘ऐसी क्या मुसीबत आ गई?’’ संजय ने सवा लाख देने से बचने की कोशिश करते हुए पूछा.

‘‘तुम नहीं समझोगे संजय, मुझे बस पैसा दे दो.’’ ग्लोरी ने बिना कुछ बताए पैसे मांगे तो संजय ने असमर्थता जाहिर करते हुए कहा, ‘‘सौरी, इतना पैसा मेरे पास नहीं है.’’ संजय का इनकार सुनते ही ग्लोरी के तेवर बदल गए. उस ने संजय से कहा, ‘‘सुनो संजय उस दिन तुम ने मेरे साथ जो रेप किया था, उस से मुझे गर्भ ठहर गया है. यह गर्भ साफ कराने के लिए मैं तंजानिया जाना चाहती हूं. मेरे पास तुम्हारे द्वारा किए गए रेप का वीडियो है. अगर तुम ने मेरी मदद नहीं की तो मैं इसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दूंगी.’’

ग्लोरी के मुंह से रेप की बात सुन कर संजय पागल हो गया. उस का गर्भवती हो जाना सचमुच बड़ा संकट था, इसलिए उस ने चुपचाप ग्लोरी द्वारा बताए गए खाते में एक लाख 20 हजार रुपए डाल दिए. इस के बाद कुछ दिनों तक ग्लोरी की कोई खबर नहीं मिली तो संजय ने राहत की सांस ली. उसे लगा कि ग्लोरी तंजानिया चली गई होगी और उस ने वहां जा कर गर्भपात करवा लिया होगा. लेकिन कहानी अभी बाकी थी.

कुछ दिनों बाद एक युवती ने संजय को फोन किया. उस ने बताया कि वह तंजानिया से ग्लोरी की बड़ी बहन बोल रही है. ग्लोरी के गर्भपात के दौरान गड़बड़ हो जाने से ग्लोरी की हालत काफी खराब है. हम ने उसे अस्पताल में भरती करवा दिया है, इसलिए तुम इलाज के लिए तुरंत एक लाख रुपए एकाउंट में डाल दो. संजय की समझ में कुछ नहीं आ रहा था. उसे नहीं मालूम था कि ब्लैक ब्यूटी का शौक उसे इतना भारी पड़ेगा. वह बुरी तरह फंस चुका था. मजबूरी में उसे ग्लोरी की बहन की बात माननी पड़ी. इस के बाद तो तंजानिया से उस के पास कभी ग्लोरी की बहन का तो कभी अस्पताल के डाक्टर के फोन आने लगे. मजबूरी में चुपचाप उन के बताए खाते में पैसे डालता रहा.

मार्च के दूसरे सप्ताह में संजय को खबर मिली कि ग्लोरी की मृत्यु हो गई है. जिस ग्लोरी को संजय अब तक दुनिया की सब से अधिक हौट और कौपरेटिव पार्टनर मान कर याद करता था, उस की मौत की खबर सुन कर दुखी होने के बजाए उस ने राहत की सांस ली. उसे लगा कि चलो पीछा छूटा. इसलिए मौत के बाद मांगी गई रकम भी उस की बहन के बतए गए खाते में ट्रांसफर कर दी. लेकिन इस के हफ्ते भर बाद ही ग्लोरी के साथ उस के नग्न वीडियो वायरल कर देने की धमकी दे कर एक युवक ने उस से 2 लाख रुपए की मांग की तो संजय समझ गया कि ग्लोरी का भूत जिंदगी भर उस का पीछा नहीं छोड़ेगा. इसलिए सोचविचार के बाद उस ने कानून की मदद लेने का फैसला किया.

उस ने इंदौर की साइबर सेल के एसपी जितेंद्र सिंह से मिल कर उन्हें पूरा किस्सा सुना दिया. इस के बाद अजय की रिपोर्ट के आधार पर जितेंद्र सिंह की टीम ने महीने भर में ग्लोरी और उस के पूरे गिरोह को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया. ग्लोरी के बारे में पुलिस की जांच में जो जानकारी सामने आई, उस के अनुसार ग्लोरी 3 साल पहले अपनी मां का इलाज करवाने मैडिकल वीजा पर भारत आई थी. इलाज के बाद मां तो वापस चली गई, लेकिन ग्लोरी दिल्ली में ही रह गई. यहां वह छतरपुर एक्सटेंशन के पौश इलाके में एक अन्य लड़की के साथ किराए के फ्लैट में रहती थी.

दिल्ली में रहते हुए ग्लोरी जल्द ही देह व्यापार से जुड़ गई. किसी भी ग्राहक से वह फोन पर बात नहीं करती थी. संजय ने जितना अपने दोस्तों के बारे में सुना था, उस के अनुसार वह जानता था कि अफ्रीकी मूल की लड़की काफी कौपरेटिव होती हैं. आमतौर पर अफ्रीकन लड़की किसी दूसरे महाद्वीप के व्यक्ति को वक्त नहीं देती और अगर वक्त देती है तो खुद भी ऐसे मौके को पूरा एंजौय करती है. ग्लोरी जिस खुले लहजे में संजय से दोस्ती बढ़ा रही थी, उस से संजय को लगने लगा था कि ब्लैक ब्यूटी के साथ वक्त बिताने की उन की फैंटेसी सच होने वाली है. हुआ भी ऐसा ही.

व्यापार के सिलसिले में एक रोज संजय दिल्ली गया तो काम से फ्री हो कर उस ने ग्लोरी से बात कर के खुद के दिल्ली में होने की बात कही. इस पर ग्लोरी ने उसे अपने फ्लैट का पता दे कर छतरपुर एक्सटेंशन में आने को कहा. संजय के लिए यह सुनहरा मौका था. वह पंख लगा कर ग्लोरी के फ्लैट पर जा पहुंचा. ग्लोरी से मुलाकात के पहले संजय ने जैसा सोचा था, ग्लोरी उस से भी अधिक हौट थी. भरापूरा जिस्म 5 फुट 7 इंच लंबी ग्लोरी ने संजय के स्वागत में जाली जैसे कपड़े की स्लीवलेस कुरती और जींस का काफी तंग और छोटा सा शौर्ट पहन रखा था. कुछ देर बाद कातिल अदा से मुसकराते हुए ग्लोरी ने संजय को ड्रिंक्स औफर किया. 2 ढाई घंटे चली पहली मुलाकात के बाद जब संजय उस के फ्लैट से बाहर निकला मारे खुशी के उस के पैर जमीन पर नहीं पड़ रहे थे.

वह नहीं जानता था कि ग्लोरी के साथ उस की इस ग्लोरियस मीटिंग का सुखद अध्याय इस मुलाकात के साथ ही खत्म हो जाएगा. दिल्ली से वापस लौट कर संजय जल्द ही एक बार फिर दिल्ली जाने की योजना बनाने लगा था. लेकिन 2-4 दिन बाद ही ग्लोरी ने उस से वाट्सऐप पर चैटिंग करते हुए कहा कि उसे 2 हजार रुपए की जरूरत है. संजय ने पेटीएम के जरिए भेज दिए. ग्लोरी वाट्सऐप पर अपनी फोटो भेजती, रेट तय करती और फिर सौदा पट जाने पर या तो ग्राहक को अपने फ्लैट पर बुला लेती थी या उस के साथ चली जाती थी. अकेले दिल्ली शहर में अफ्रीकी मूल के लगभग 20 हजार युवकयुवती रहते हैं. इन में से कई विभिन्न तरह की आपराधिक गतिविधियों में शामिल होते हैं, ग्लोरी भी दूसरे शहरों के रईस युवकों को फंसा कर उन्हें ब्लैकमेल करने लगी थी.

इस दौरान तंजानिया का एडवर्ड किंग्सले 3 महीने के वीजा पर भारत आने के बाद लंबे समय से गैर कानूनी रूप से यहां रह रहा था. ग्लोरी उस की गर्लफैंड थी. वह ब्लैकमेलिंग के काम में अपनी प्रेमिका की मदद करने लगा था. ग्लोरी के साथ पकड़ा गया सुमित प्रजापति ग्लोरी को बैंक खाते उपलब्ध कराता था. सुमित अपने 3 भाइयों के साथ छतरपुर एक्सटेंशन इलाके में डिपार्टमेंटल स्टोर चलाता था. उस के स्टोर में एक काउंटर बायवा नाम की लड़की का भी था. ग्लोरी अकसर बायवा के काउंटर पर खरीदारी करने आती थी.

सुमित ने ग्लोरी को पहली बार वहीं देखा था और उस का दीवाना हो गया था. बाद में बायवा ने सुमित की ग्लोरी से दोस्ती करवा दी थी. जिस से सुमित भी ब्लैक ब्यूटी के शौक में ग्लोरी के फ्लैट पर आनेजाने लगा था. लेकिन ग्लोरी ने सुमित को ब्लैकमेल नहीं किया. हां, वह उस से बैंक खाते का उपयोग लोगों से ठगी का पैसा जमा करवाने में करने लगी थी. ग्लोरी के कहने पर सुमित ने अपने एक भाई के खाते का नंबर भी उसे दे दिया था.

ग्लोरी ने काफी पैसा रीटा काटजू नाम की महिला के खाते में भी जमा करवाया था. 65 वर्षीय रीटा काटजू की बेटी हांगकांग में नौकरी करती है. जबकि इंडियन एयरलाइंस की नौकरी से रिटायर होने के बाद रीटा दिल्ली में अपने प्रेमी के साथ लिवइन रिलेशन में रहती हैं.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित. कथा में संजय नाम बदला हुआ है.