मृतक की वीडियो से खुला हत्या का राज़ – भाग 2

सलामत खान यह सबूत ले कर थाने पहुंचे और मोबाइल विवेचना अधिकारी को सौंप दिया. सलामत खान ने पुलिस को यह भी बताया कि कुछ दिन पहले उन के बेटे का बहू से झगड़ा भी हुआ था और दोनों परिवार परामर्श केंद्र भी गए थे, जहां उन की सुलह कराई गई थी. बहू का रवैया और उस की मां की बातचीत से सलामत खान को लग रहा था कि उस के बेटे के साथ कोई साजिश रची गई है.

उन्होंने अपनी आशंका सिविललाइंस थाना पुलिस को बताई भी, लेकिन किसी ने उन की बात नहीं सुनी, क्योंकि जब भी पुलिस पूछताछ के लिए उसे बुलाती तो शालेहा रोधो कर पुलिस को यही बताती थी कि शाहिद शराब पी कर उस के साथ मारपीट करता है. पुलिस उस की बात पर भरोसा कर शालेहा के प्रति कोई ऐक्शन लेने के बजाय सहानुभूति रखती.

थाने में लिखित शिकायत करने के बाद भी पुलिस को भरोसा नहीं हुआ. पुलिस वाले कहते रहे कि केवल शक के आधार पर कोई काररवाई नहीं की जा सकती. पुलिस मामले की जांच करेगी, बिना ठोस सबूत के किसी पर आरोप लगाना ठीक नहीं. वीडियो सामने आने के बाद 10 दिनों तक पुलिस अपने तरीके से इस वीडियो की सच्चाई जानने की कोशिश करती रही.

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पुलिस की लचर कार्यप्रणाली को ले कर सलामत खान रीवा के एसपी विवेक कुमार से मिले और उन्हें पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया. एसपी ने इस केस की जांच के लिए एडीशनल एसपी अनिल सोनकर के नेतृत्व में एक टीम का गठन कर जांच का जिम्मा एक तेजतर्रार एसआई बृजराज सिंह को सौंप दिया.

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बृजराज सिंह थाने में नए आए थे, उन्होंने पूरे केस की पड़ताल नए सिरे से शुरू की. मोबाइल में मिले वीडियो को देख कर उन्हें यकीन हो गया था कि शाहिद को जहर दे कर मारा गया है. अपनी मौत से चंद समय पहले बनाए गए इस वीडियो में शाहिद ने अपनी मौत के लिए पत्नी, उस के प्रेमी और सासससुर को जिम्मेदार बताया.

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घर पर मिले चाय के कप और पानी के गिलास में भी जहर होने का अंदेशा फोरैंसिक एक्सपर्ट ने व्यक्त किया था. एसआई बृजराज सिंह ने शाहिद के मकान मालिक और आसपास के लोगों से पूछताछ की तो पता चला कि शाहिद के घर पर बंटू खान नाम का शख्स अकसर आया करता था.

मामला पति, पत्नी और वो का

विवेचना अधिकारी एसआई बृजराज सिंह ने जब बंटू खान के बारे में जानकारी जुटाई तो पता चला कि 35 साल के बंटू खान का नाम शकील है, जो रीवा की बाणसागर कालोनी में रहता है. शकील के पिता शहर के एक मशहूर टेलर हैं और उन की रीवा में ब्लू स्टार टेलर्स के नाम से दुकान है, जिस पर कभीकभार शकील भी बैठता है.

वीडियो में मिले शाहिद के बयान के आधार पर पुलिस ने उस की पत्नी शालेहा, सास मोना परवीन और शालेहा के प्रेमी शकील उर्फ बंटू खान को हिरासत में ले कर सख्ती से पूछताछ शुरू की तो उन की बोलती बंद हो गई और पुलिस के सामने उन्होंने पूरा सच उगल दिया. पुलिस पूछताछ में जो कहानी सामने आई, वह ‘पति, पत्नी और वो’ के नाजायज रिश्तों की कहानी निकली.

जियो कंपनी में 2 साल काम करने के बाद शाहिद को टेलीकाम कंपनी ने रीवा से इलाहाबाद चाक घाट में मैनेजर बना दिया था. शाहिद का रीवा से 100 किलोमीटर दूर रोज आनाजाना रहता था. वह सुबह 7 बजे घर से निकलता और रात 9-10 बजे घर पहुंचता था.

करीब 4 साल पहले इसी दौरान शालेहा की पहली मुलाकात शकील उर्फ बंटू खान से टेलरिंग दुकान पर हुई थी, जहां वह अपना सूट सिलवाने गई थी. शालेहा जैसे ही दुकान में दाखिल हुई तो दुकान का काउंटर संभाल रहे बंटू से बोली, “मुझे सूट सिलवाना है, मेरा नाप ले लीजिए.”

“हां मैडम बैठिए, अभी आप का नाप ले लेता हूं.” बंटू गले से नापने वाला टेप निकालते हुए बोला.

“ये सूट मुझ पर ठीक जमेगा कि नहीं?” सूट का कपड़ा पौलीथिन बैग से बाहर निकालते हुए शालेहा ने कहा.

“मैडम आप इतनी खूबसूरत हैं, आप पर तो कुछ भी खूब जमेगा.” तारीफ करते हुए बंटू बोला.

अपनी खूबसूरती की तारीफ सुन कर शालेहा ने शरमा कर उसे घूरती नजरों से देखा और मुसकरा दी. बंटू देखने में तो साधारण कदकाठी का था, लेकिन उस का रहनसहन पहली मुलाकात में ही शालेहा को भा गया था. शालेहा खूबसूरत युवती थी, जो भी उसे नजर भर देख लेता, दीवाना हो जाता था. उस दिन बंटू के वालिद खाना खाने घर गए हुए थे. बंटू ने शालेहा का नामपता लिख कर उस का मोबाइल नंबर ले कर एक परची शालेहा के हाथ में थमा दी.

बंटू खान से हो गए अवैध संबंध

दिलफेंक बंटू खान अमीर बाप का बेटा था, उस के पास महंगा मोबाइल और कार थी, जिस में वह घूमा करता था. उस दिन की मुलाकात के बाद बंटू मोबाइल पर शालेहा से बात करने लगा. शाहिद की छोटी सी नौकरी शालेहा के अरमान पूरे नहीं कर पा रही थी, इसी का फायदा उठा कर शालेहा बंटू को अपना दिल दे बैठी. शालेहा को उस के साथ बात करना अच्छा लगता. एक दिन मौका पा कर बंटू दोपहर के वक्त शालेहा के घर पहुंच गया. बंटू ने जैसे ही दरवाजा खटखटाया तो अंदर से आवाज आई, “कौन?”

बंटू ने कोई जबाव नहीं दिया तो कुछ ही पल में जैसे ही शालेहा ने दरवाजा खोला तो सामने बंटू को देख कर मुसकराते हुए बोली, “वेलकम बंटू, अंदर आइए. आज मेरे गरीबखाने पर तुम्हें पा कर मुझे यकीन नहीं हो रहा.”

बंटू अंदर जा कर सोफे पर बैठ गया और शालेहा को खा जाने वाली नजरों से घूरने लगा. एक छोटे से कमरे में सोफे के सामने लगे बैड पर शालेहा बैठी थी. उस वक्त शालेहा गाउन में थी और उस के माथे पर बिखरी जुल्फें उस की खूबसूरती को और बढ़ा रही थीं. शालेहा के नाजुक अंगों के उभार बंटू को पागल बना रहे थे.

“आप को चाय बना कर लाती हूं.” शालेहा ने वहां से उठते हुए कहा.

“न.. न चायपानी की जरूरत नहीं है, हम तो कुछ और ही पीने आए हैं.” बंटू ने हाथ पकड़ कर उसे बैठाते हुए कहा.

“मैं समझी नहीं. और क्या पीने आए हो, वैसे मुझे नशा करने वालों से सख्त नफरत है.” शालेहा ने भी अपनी आंखों का जादू दिखाते हुए कहा.

बंटू अपनी भावनाओं पर नियंत्रण नहीं कर पा रहा था, उस की आंखों में लाल डोरे तैर रहे थे. उस ने शालेहा के माथे को चूमते हुए कहा, “तुम्हारी आंखों में इतना नशा है कि दूसरे नशे की जरूरत ही नहीं है.”

शालेहा उस दिन बंटू को रोक न सकी. बंटू ने उसे पलंग पर लिटा दिया और उस के हाथ शालेहा के संगमरमरी बदन पर रेंगने लगे. दोनों वासना के इस तूफान में बह गए थे. दोनों के जिस्म की प्यास बुझने के बाद ही यह तूफान थमा था.

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इस के बाद तो बंटू और शालेहा का मिलना और कार में साथ घूमना आम बात हो गई. जब कभी बंटू न आ पाता तो पति की गैरमौजूदगी में शालेहा उस से मिलने चली जाती थी. यह बात शालेहा की मां मोना परवीन भी जानती थी, मगर उस के मुंह पर बंटू ने ताला लगा दिया था.

दरअसल, जब भी बंटू शालेहा से मिलने आता था, उस की मां मोना को कुछ न कुछ जरूरी सामान ले कर आता था. कहीं आनेजाने के लिए बंटू कार भी भेज देता था. इन एहसानों के तले दबी मोना सब कुछ देख कर भी अंजान बनी रहती.

                                                                                                                                       क्रमशः

मृतक की वीडियो से खुला हत्या का राज़ – भाग 1

18 मार्च, 2023 की रात करीब साढ़े 11 बजे का वक्त था. मध्य प्रदेश के रीवा शहर की पडऱा इलाके की दुर्गा कालोनी में रहने वाली 31 साल की शालेहा परवीन बदहवास हालत में अपने पति शाहिद को ले कर अपनी मां के साथ संजय गांधी मेमोरियल जिला अस्पताल पहुंची. शालेहा आंखों में आंसू लिए ड्यूटी पर मौजूद डाक्टर से गुहार लगाते हुए बोली, “डाक्टर साहब, मेरे पति को बचा लीजिए.”

“आखिर क्या हुआ है इन को. इन की हालत तो काफी नाजुक है.” शाहिद की नब्ज पर हाथ रखते हुए डाक्टर ने पूछा.

“डाक्टर साहब, इन्होंने किसी जहरीले पदार्थ का सेवन किया है, जल्दी से इलाज कीजिए इन का.” कहते हुए शालेहा फफकफफक कर रोने लगी.

डाक्टर ने स्टेथेस्कोप को कान में लगा कर उस का चेकअप किया. कुछ ही सेकेंड बाद डाक्टर ने शालेहा की ओर मुखातिब होते हुए कहा, “आई एम सौरी, ही इज नो मोर.”

डाक्टर के इतना कहते ही शालेहा दहाड़ मार कर रोने लगी. शालेहा की मां ने उसे संभालते हुए कहा, “शालू रो मत बेटी, शायद खुदा को यही मंजूर था. अपने आप को संभाल और शाहिद के पापा को इत्तिला कर दे बेटी.”

कुछ देर बाद शालेहा ने अपने पर्स से शाहिद का मोबाइल फोन निकालते हुए अपने ससुर को यह दुखद खबर सुना दी. यूं तो

शालेहा के ससुर सलामत खान परिवार के खिलाफ जा कर शादी करने की वजह से शाहिद से नाराज थे. पिछले 7 सालों से दोनों के बीच बातचीत बंद थी. मगर बेटे की मौत की सूचना मिली तो जल्दी से अस्पताल पहुंच गए. हौस्पिटल पहुंचे तो देखा शाहिद का बदन सफेद चादर में लिपटा हुआ था. उस के पास ही बहू शालेहा और उस के अब्बूअम्मी खड़े थे.

तब तक अस्पताल प्रशासन की सूचना पर थाना सिविल लाइंस पुलिस अस्पताल आ चुकी थी. पुलिस ने आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. शालेहा ने अपने ससुर को रोतेबिलखते हुए बताया, “अब्बाजान, किसी बात से नाराज हो कर शाहिद ने जहर पी लिया था, मैं उन्हें ले कर अस्पताल आई, लेकिन उन्हें बचा नहीं सकी.”

सलामत खान को वहां पर शालेहा और उस की अम्मी का रवैया संदिग्ध लग रहा था. उन्होंने देखा कि बहू शालेहा अपने अब्बू और अम्मी से बारबार कानाफूसी कर रही थी, इसलिए बहू की बात सुन कर सलामत खान वहीं पर बुरी तरह बिफर पड़े. उन्होंने बहू पर आरोप लगाते हुए कहा, “तुम्हारी हरकतों की वजह से ही मेरे बेटे की जान गई है.”

सलामत खान ने पुलिस से कहा कि मेरे बेटे ने आत्महत्या नहीं की है. उसकी पत्नी ने ही उसे जहर दे कर मारा है. पुलिस ने सभी के बयान दर्ज कर लिए, मगर पुलिस के पास ऐसा कोई सबूत नहीं था, जिस से सलामत खान की बात को सही साबित कर सके.

लव मैरिज से नाराज थे पिता

पब्लिक वक्र्स डिपार्टमेंट (पीडब्ल्यूडी) में असिस्टेंट ड्राफ्ट्समैन के पद से रिटायर 65 साल के सलामत खान रीवा के घोघर मोहल्ले में रहते हैं. उन की 2 बेटियां और एक 37 साल का बेटा शाहिद था. शाहिद बचपन से ही होनहार था. उसे मोबाइल और नेटवर्क से जुड़े काम में काफी रुचि थी. साल 2015 में रीवा के न्यू बस स्टैंड के पास एक मोबाइल शोरूम खुला था. उस के लिए वैकेंसी निकली तो कई लडक़े व लड़कियों ने इस के लिए इंटरव्यू दिए.

इंटरव्यू में शाहिद के साथ शालेहा परवीन नाम की लडक़ी का भी चयन हुआ था. मोबाइल शोरूम में दोनों दिन भर साथ काम करते थे. इस वजह से शाहिद खान की दोस्ती शालेहा से हो गई. दोनों ड्यूटी पर साथ रहते, वहां से भी साथ में ही निकलते और खाली समय भी एकदूसरे के साथ बिताने लगे. धीरेधीरे उन की दोस्ती प्यार में बदल गई. जब उन का प्यार परवान चढऩे लगा तो दोनों के रिश्ते के बारे में घर वालों को भी पता चला.

शाहिद के पिता ने जब लडक़ी के बारे में जानकारी जुटाई तो उन के नजदीकी रिश्तेदारों ने बताया कि लडक़ी का चालचलन ठीक नहीं है. शाहिद तो शालेहा के प्यार में इस कदर दीवाना हो चुका था कि परिवार के लाख समझाने के बाद भी नहीं माना और घर वालों की मरजी के खिलाफ जा कर 2016 में शालेहा से लव मैरिज कर ली.

शाहिद के घर वाले इस बात से बहुत खफा हो गए और उन्होंने शाहिद को घर से निकाल दिया. शाहिद रीवा शहर की पडऱा इलाके की दुर्गा कालोनी में किराए के मकान में बीवी शालेहा के साथ रहने लगा. शादी के बाद शाहिद के सासससुर का उस के घर में दखल बढ़ गया था.

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शादी के 2 साल तक सब कुछ ठीक रहा, इस दौरान शालेहा ने एक बेटी को जन्म दिया. लेकिन उस के बाद दोनों के बीच छोटीछोटी बातों को ले कर विवाद होने लगा. इस बात की भनक शाहिद के वालिद सलामत खान को भी थी, मगर वह शाहिद से इतने खफा थे कि उस से कोई मतलब नहीं रखना चाहते थे. उन का मानना था कि जिस बेटे ने हमारी बात ही नहीं मानी तो हमें भी उस की फिक्र नहीं है. वह अकसर यही कहते थे कि शाहिद ने गलत कदम उठाया है तो खुद ही भुगते.

मृतक के मोबाइल में छिपा मौत का राज

शाहिद के पिता सलामत खान को यकीन नहीं हो रहा था कि शाहिद इस तरह खुदकुशी कर सकता है. मौत के तीसरे दिन 21 तारीख की बात है, उन्होंने देखा कि शाहिद की मौत का गम बहू के चेहरे पर कहीं नजर नहीं आ रहा था. शाहिद की मौत के बाद बहू दिन भर उस का मोबाइल यूज कर रही थी.

उन्होंने गुस्से में बहू को डांटते हुए उस से मोबाइल ले लिया था. सलामत खान को यह बात समझ नहीं आ रही थी कि उन के इकलौते बेटे की मौत से परिवार में मातम पसरा था, मगर बहू के चेहरे पर शिकन तक नहीं थी. उस दिन शाम को वह शाहिद का मोबाइल साथ ले कर घर लौट आए.

21 मार्च को ही शाहिद की बहन मातमपुरसी के लिए अपने मायके आई हुई थी. उस समय वह अपने भाई को याद कर उस का मोबाइल देख रही थी, तभी अचानक मोबाइल में एक वीडियो देख कर उस की बहन चौंक गई. वह दौड़ती हुई अपने अब्बू के पास आ कर बोली, “अब्बा, इस मोबाइल में भाईजान का एक वीडियो है, जिस में वो बता रहे हैं कि उन्हें जान से मारने के लिए चाय में जहर मिला कर दिया गया है.”

“बेटी, जरा मुझे भी दिखाओ कैसा वीडियो है.” अपनी बेटी के हाथ से मोबाइल लेते हुए सलामत खान बोले. जैसे ही उन्होंने वीडियो देखा तो उन का शक पुख्ता हो गया. वे बिना देर किए मोबाइल ले कर सिविल लाइंस थाने पहुंच गए. वीडियो में शाहिद बारबार अपनी मौत के लिए ससुराल वालों को जिम्मेदार बता रहा था.

                                                                                                                                         क्रमशः

एयर फोर्स सार्जेंट ने रची जर, जोरू और जमीन हथियाने की साजिश- भाग 5

डा. गौरव को मुदित और प्रियंका के बीच अवैध संबंधों का पता नहीं चला. क्योंकि उन का मिलन ऐसे समय होता था, जब डा. गौरव क्लीनिक पर होते थे. मुदित दोहरा गेम खेलने लगा था. एक ओर तो वह दोस्ती की आड़ में डाक्टर की इज्जत से खेल रहा था. दूसरी ओर वह दोस्ती कायम रख डाक्टर का विश्वास जीत रहा था.

डा. गौरव उस पर पत्नी से ज्यादा विश्वास करते थे. मुदित को जब भी पैसों की जरूरत होती थी, वह डा. गौरव से मांग लेता था. लेकिन रकम कभी लौटाता नहीं था. इस तरह उस ने लाखों रुपया डा. गौरव से ले लिया था. जब कभी डा. गौरव पैसों की डिमांड करता तो वह प्लौट बेच कर पैसा देने की बात कह देता.

डा. गौरव व उस के मातापिता ने अकूत संपत्ति अर्जित की थी. शिकोहाबाद, उन्नाव व लखनऊ में डा. गौरव के नाम लगभग 60 करोड़ की संपत्ति (मकान/प्लौट के रूप में) थे. इस संपत्ति पर मुदित की गिद्धदृष्टि थी. वह डा. गौरव की जर, जोरू और जमीन हथियाना चाहता था. इसी लालच में उस ने डा. गौरव की पत्नी को अपने प्रेमजाल में फंसा लिया था. वह हर रोज प्रियंका से एकदो घंटे फोन पर बातें करता था.

लगभग 3 महीने पहले डा. गौरव ने मुदित को प्रियंका के साथ अश्लील हरकतें करते देख लिया था. तब से उन्हें शक हो गया था कि मुदित श्रीवास्तव और प्रियंका के बीच अवैध रिश्ता है. वह अपने दर्द को कभीकभी बातों ही बातों में बयां भी कर देते थे. एक रोज उन्होंने तंज कसा, “मुदित, तुम्हें अब किस बात की चिंता, तुम ने तो मेरे निजी जीवन में भी दखल देना शुरू कर दिया है.’’

सार्जेंट मुदित को लगने लगा डा. गौरव से डर…

मुदित श्रीवास्तव ने डा. गौरव के तंज का जवाब तो नहीं दिया, लेकिन वह समझ गया कि डा. गौरव को उस पर शक हो गया है. उसे इस बात का डर सताने लगा कि डा. गौरव उस की हत्या न कर दे. इस डर ने मुदित को इतना उकसाया कि वह सोचने लगा कि यदि उस ने डा. गौरव की हत्या नहीं की तो वह उसे ही मरवा देगा. आखिर उस ने डा. गौरव की हत्या का फेसला ले लिया और उचित समय का इंतजार करने लगा.

13 मार्च, 2023 की शाम 7 बजे जब डा. गौरव अपनी क्रेटा कार से उस के सरकारी आवास पहुंचे तो उस समय मुदित श्रीवास्तव घर पर ही था. उस की पत्नी नेहा बेटी का इलाज कराने लखनऊ गई थी. डा. गौरव उस वक्त नशे में थे. उचित मौका देख कर उस ने घर पर ही डाक्टर को और शराब पिलाई. इतनी शराब पिलाई कि वह अपने पैरों पर खड़े होने की स्थिति में नहीं रहे.

उस के बाद मुदित उन की क्रेटा कार से डा. गौरव को हाइवे पर ले गया. वहां सुनसान जगह पर कार रोकी. फिर डा. गौरव को कार से बाहर निकाला. उस के बाद सडक़ किनारे लगे बड़े पत्थर से डा. गौरव का सिर पटकपटक कर मार डाला. फिर शव को हाइवे किनारे जंगल में फेंक दिया. उस के बाद क्रेटा कार ले कर वह अपने सरकारी आवास आ गया.

इधर डा. गौरव जब घर नहीं पहुंचे तो पत्नी प्रियंका सिंह ने थाना चकेरी में गुमशुदगी दर्ज कराई. गुमशुदगी दर्ज होने के बाद पुलिस को डा. गौरव के दोस्त मुदित पर शक हुआ. शक के आधार पर पुलिस ने जब उस से कड़ाई से पूछताछ की तो मुदित टूट गया और उस ने हत्या का जुर्म कुबूल कर डा. गौरव के शव को बरामद करा दिया. मृतक डा. गौरव की पत्नी प्रियंका सिंह का कहना है कि आरोपी मुदित श्रीवास्तव उसे बदनाम करने के लिए नाजायज रिश्तों की कहानी गढ़ रहा है.

प्रियंका ने प्रेम संबंधों को नकारते हुए कहा कि मुदित ने पिछले कई सालों के दौरान गौरव से 45 से 50 लाख रुपए का कर्ज ले रखा था. क्रेटा कार भी मुदित के नाम ही है. रुपया और कार न लौटाना पड़े, इसलिए उस ने पति की हत्या कर दी. उस ने ट्वीट कर इस की जानकारी मुख्यमंत्री व अन्य आला अधिकारियों को भी दी.

16 मार्च, 2023 को पुलिस ने हत्यारोपी मुदित श्रीवास्तव को कानपुर कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जिला जेल भेज दिया गया. मृतक के पिता डा. प्रबल प्रताप सिंह ने पुलिस कमिश्नर वी.पी. जोगदंड से अपनी व परिवार की सुरक्षा की गुहार लगाई है. उन्होंने अपनी जान का खतरा बताया है.

-कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

एयर फोर्स सार्जेंट ने रची जर, जोरू और जमीन हथियाने की साजिश- भाग 4

तलाक के बाद डा. रुचि बरेली में पिता के मकान में रहने लगी. वहां उन्होंने अपना क्लीनिक खोल लिया. इधर डा. गौरव पत्नी से तलाक के बाद तनहा जिंदगी बिताने लगे. उन की शराब की लत भी बढ़ गई. डा. गौरव के कई शराबी दोस्त थे. इन्हीं में एक था मुदित श्रीवास्तव. मुदित श्रीवास्तव संपन्न परिवार का था. उस के पिता मिथलेश श्रीवास्तव सिविल लाइंस उन्नाव में रहते थे.

मिथलेश के 3 बेटे मनीष, मोहित व मुदित थे. मनीष दिल्ली में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) में कार्यरत था और परिवार सहित वहीं रहता था. जबकि मोहित, अमेरिका (शिकागो) में इंजीनियर है. सब से छोटा मुदित वायुसेना में सार्जेंट पद पर लुधियाना (पंजाब) में तैनात था. घर पर मिथलेश श्रीवास्तव पत्नी के साथ रहते थे. वह फजलगंज (कानपुर) में एक फैक्ट्री में कार्यरत थे.

मुदित श्रीवास्तव से डा. गौरव की दोस्ती उन के मित्र अनिल के माध्यम से हुई थी. चूंकि मुदित खानेपीने का शौकीन था. सो जल्दी ही दोनों के बीच गहरी दोस्ती हो गई. डा. गौरव उसे अपने भाई जैसा मानने लगे और हर बात उस से साझा करने लगे. मुदित उन दिनों लुधियाना (पंजाब) में तैनात था. वह जब भी छुट्ïटी पर घर आता तो डा. गौरव के साथ ही रहता. उसी के साथ हर शाम महफिल भी जमती. महफिल का खर्च डा. गौरव ही करते थे.

एक रोज ड्रिंक्स के दौरान डा गौरव ने मुदित श्रीवास्तव से एक कार खरीदने की इच्छा जाहिर की. इस पर उस ने कहा कि यदि वह उस की एयर फोर्स कैंटीन से कार खरीदेगा तो उसे लगभग 2 लाख का फायदा होगा. डा. गौरव के राजी होने पर मुदित ने लुधियाना की एयर फोर्स कैंटीन से क्रेटा कार खरीदवा दी. यह क्रेटा कार थी तो मुदित के नाम लेकिन पैसा डा. गौरव ने दिया था और डा. गौरव ही चलाते थे. इस कार से मुदित और गौरव लद्ïदाख तक घूम आए थे.

दोस्त मुदित ने करा दी प्रियंका से शादी…

इन्हीं दिनों मुदित का ट्रांसफर लुधियाना से कानपुर एयर फोर्स चकेरी हो गया. वह सरकारी आवास एच 2/4 आकाश गंगा विहार कालोनी में अपनी पत्नी नेहा के साथ रहने लगा. नेहा लखनऊ की रहने वाली थी. उस के एक बेटी है. उस का तालू (जन्म से) कटा हुआ था. उस का इलाज लखनऊ के अस्पताल में चल रहा था.

मुदित का ट्रांसफर कानपुर हुआ तो उस का मिलनाजुलना डा. गौरव से ज्यादा हो गया. अब वह शनिवार व रविवार को अपने घर उन्नाव आता और डा. गौरव के साथ रहता. दोनों साथ घूमते और होटल पर खाना खाते. इन्हीं दिनों डा. गौरव व मुदित ने लखनऊ के दुबग्गा में अगलबगल प्लौट खरीदा. प्लौट खरीदने में 7 लाख रुपए डा. गौरव ने मुदित को दिए. उस ने यह रकम जल्द ही लौटाने का वादा किया.

मुदित श्रीवास्तव को पता था कि डा. गौरव का अपनी पत्नी से तलाक हो गया है और वह तनहा जिंदगी बिता रहा है. इसलिए उस ने एक रोज डा. गौरव को सलाह दी कि वह दूसरी शादी कर ले और आराम की जिंदगी बिताए. डा. गौरव पहले तो इंकार करते रहे, लेकिन ज्यादा जोर देने पर मान गए. इस के बाद डा. गौरव के लिए लडक़ी की तलाश शुरू हुई. यह तलाश प्रियंका पर जा कर खत्म हुई.

प्रियंका के पिता कमल सिंह कानपुर नगर के नौबस्ता थाने के राजीव विहार कालोनी में रहते थे. कमल सिंह के परिवार में पत्नी कमलेश के अलावा 2 बेटियां प्रियंका व दीपिका थीं. कमल सिंह किसान थे. उन की आर्थिक स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं थी. बड़ी बेटी प्रियंका के विवाह के लिए वह प्रयासरत थे. ऐसे में एक परिचित छुन्नू के मार्फत डा. गौरव का रिश्ता आया तो वह राजी हो गए. हालांकि डा. गौरव दुजहा थे और उम्र में भी बड़े थे.

प्रियंका बेहद खूबसूरत थी. पहली ही नजर में डा. गौरव ने उसे पसंद कर लिया था. प्रियंका को भी डा. गौरव अच्छे लगे. दोनों की पसंद के बाद जनवरी, 2018 में डा. गौरव ने आर्यसमाज में प्रियंका के साथ विवाह कर लिया. विवाह के बाद प्रियंका डा. गौरव की पत्नी बन कर ससुराल आ गई. ससुराल में सभी भौतिक सुखसुविधाएं थीं. उसे किसी चीज की कमी नहीं थी. पति भी चाहने वाला मिला था. सब कुछ ठीक चल रहा था. शादी के एक साल बाद प्रियंका ने एक बेटे को जन्म दिया. बेटे के जन्म से डा. प्रबल प्रताप सिंह को बेहद खुशी हुई. क्योंकि उन के वंश को बढ़ाने वाला आ गया था.

अब तक डा. प्रबल प्रताप सिंह व उन की पत्नी रिटायर हो चुके थे. लेकिन दोनों शिकोहाबाद में ही रहते थे. क्योंकि वहां उन का मकान प्लौट था. मुदित श्रीवास्तव ने पुलिस को बताया कि उस का डा. गौरव के घर बेरोकटोक आनाजाना था. घर आतेजाते उस की नजर प्रियंका की खूबसूरती पर पड़ी तो वह उस का दीवाना बन गया और उस से नजदीकियां बढ़ाने लगा. वह जब भी आता, प्रियंका से मीठीमीठी बातें करता तथा हंसीठिठोली करने लगता. धीरेधीरे प्रियंका को भी उस की बातें अच्छी लगने लगीं.

प्रियंका को चाहने लगा सार्जेंट मुदित श्रीवास्तव…

एक रोज प्रियंका बाथरूम से निकली और हल्का मेकअप किया. तभी मुदित आ गया. वह प्रियंका के खूबसूरत चेहरे पर नजरेंगड़ाते हुए बोला, ‘‘भाभी, तुम बहुत खूबसूरत हो. तुम ने मुझे अपने रूप का दीवाना बना दिया है. मैं ने जब से तुम्हें देखा है, चैन से जी नहीं पा रहा हूं. मैं तुम्हें जब भी डा. गौरव के साथ देखता हूं, मेरा मन कसैला हो जाता है.’’

प्रियंका ने एक नजर मुदित के चेहरे पर डाली फिर बोली, ‘‘मुदित, मैं शादीशुुदा और एक बच्चे की मां हूं. तुम भी शादीशुदा और एक बच्ची के पिता हो. फिर यह दीवानगी कैसी?’’ लेकिन मुदित ने प्रियंका की बात पर ध्यान नहीं दिया. उस ने प्रियंका को रिझाना जारी रखा.

मुदित ने आगे बताया कि इस के बाद वह अकसर प्रियंका के घर आने लगा. वह घंटों उस के घर पड़ा रहता. प्रियंका को भी उस की बातों में रस आने लगा था. आखिर एक दोपहर देवरभाभी के पवित्र रिश्ते की शालीन दीवार ढह ही गई. दोनों को जानबूझ कर की गई इस गलती का पछतावा भी नहीं हुआ. उलटे उन के बीच हया की चादर तारतार होती रही.

एयर फोर्स सार्जेंट ने रची जर, जोरू और जमीन हथियाने की साजिश- भाग 3

डा. गौरव की हत्या की खबर जब अखबारों में छपी तो कानपुर, उन्नाव में सनसनी फैल गई. सैकड़ों की संख्या में लोग पोस्टमार्टम हाउस पहुंच गए. क्षेत्रीय विधायक अभिजीत सिंह सांगा भी पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे और डाक्टर की पत्नी प्रियंका से बातचीत कर उन्हें धैर्य बंधाया तथा हरसंभव मदद का आश्वासन दिया.

हत्यारोपी मुदित श्रीवास्तव की पत्नी नेहा श्रीवास्तव को जब पति की करतूतों का पता चला तो उसे यकीन ही नहीं हुआ. नेहा की 5 साल की बेटी है, जिस का कटे हुए तालू का लखनऊ में इलाज चल रहा है. घटना के समय वह लखनऊ में ही थी. उस ने सोचा भी नहीं था कि मुदित ऐसा कर सकता है.

चूंकि मुदित ने हत्या का जुर्म कुबूल कर लिया था, अत: इंसपेक्टर रत्नेश सिंह ने मृतक के पिता डा. प्रबल प्रताप सिंह की तहरीर पर भादंवि की धारा 302/201 के तहत मुदित श्रीवास्तव के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली तथा उसे विधिसम्मत गिरफ्तार कर लिया. पुलिस जांच में दोस्ती में विश्वासघात की एक सनसनीखेज कहानी प्रकाश में आई.

परिवार की इकलौती औलाद था डा. गौरव…

उन्नाव शहर की आवास विकास कालोनी एक बड़ी आबादी वाला क्षेत्र है. इसी कालोनी के मकान नंबर सी 46 में डा. प्रबल प्रताप सिंह अपने परिवार के साथ रहते थे. उन के परिवार में पत्नी आशा सिंह के अलावा एकमात्र बेटा गौरव प्रताप सिंह था. डा. प्रबल प्रताप सिंह होम्योपैथिक डाक्टर थे. उन की पत्नी आशा सिंह भी डाक्टर थीं. पतिपत्नी दोनों शिकोहाबाद के सरकारी अस्पताल में डाक्टर थे. डा. प्रबल प्रताप सिंह प्रतिष्ठित व्यक्ति थे. उन की आर्थिक स्थिति मजबूत थी. उन्नाव के अलावा शिकोहाबाद में भी उन का निजी मकान था.

डा. प्रबल प्रताप सिंह की पत्नी डा. आशा सिंह रसूखदार राजनीतिक परिवार से थी. आशा सिंह के पिता डा. गंगाबक्श सिंह कांग्रेसी नेता थे. वह उन्नाव की हड़हा विधानसभा सीट से 4 बार विधायक और चिकित्सा शिक्षा समेत कई अन्य विभागों के मंत्री रहे. चूंकि आशा सिंह उन की होनहार और दुलारी बेटी थीं और डाक्टरी की पढ़ाई पूरी कर सरकारी डाक्टर बन गई थी, अत: उन्होंने बेटी का विवाह डा. प्रबल प्रताप सिंह के साथ कर दिया था. डा. आशा सिंह शिकोहाबाद में जिला स्वास्थ्य अधिकारी (डीएचओ) के पद पर तैनात थीं.

डा. प्रबल प्रताप सिंह अपने बेटे गौरव प्रताप सिंह को भी पढ़ालिखा कर डाक्टर बनाना चाहते थे. गौरव प्रताप सिंह कुशाग्र पढ़ाई में होशियार था, लेकिन उस की रुचि दंत चिकित्सा में थी. वह बीडीएस की पढ़ाई हासिल कर डेंटल सर्जन बनना चाहता था. गौरव की रुचि के अनुसार प्रबल प्रताप सिंह ने उस का साथ दिया और खूब पैसा खर्च किया. गौरव ने भी खूब मेहनत की और नीट की परीक्षा पास कर कानपुर मैडिकल कालेज से बीडीएस (बैचलर औफ डेंटल सर्जरी) की डिग्री हासिल कर ली.

डाक्टर की डिग्री हासिल करने के बाद डा. गौरव प्रताप सिंह ने अपने पिता प्रबल प्रताप सिंह के सहयोग से उन्नाव बस स्टैंड के पास ‘साईं डेंटल क्लीनिक’ के नाम से अस्पताल खोल लिया. शुरूशुरू में दंत रोगियों की संख्या कम रही, लेकिन जैसेजैसे समय बीतता गया, वैसेवैसे मरीजों की संख्या बढ़ती गई. 2 साल बीततेबीतते साईं क्लीनिक दंत चिकित्सा के क्षेत्र में मशहूर हो गया. अस्पताल में दंत रोगियों की संख्या बढ़ी तो अस्पताल की कमाई भी अच्छी होने लगी. उन्नाव शहर व आसपास के कस्बों में डा. गौरव का नाम अच्छे दंत चिकित्सक के रूप में मशहूर हो गया.

डा. गौरव की अभी तक शादी नहीं हुई थी. डा. प्रबल प्रताप सिंह अपने डाक्टर बेटे की शादी ऐसी लडक़ी से करना चाहते थे, जो दंत चिकित्सक हो ताकि वह बेटे के काम में सहयोग कर सके और घर अस्पताल को संभाल सके. वैसे डा. गौरव के लिए रिश्ते तो बहुत आ रहे थे, लेकिन बात बन नहीं पा रही थी.

डा. रुचि से हुई पहली शादी…

एक दिन बरेली के जनक सिंह अपनी बेटी रुचि का रिश्ता ले कर डा. प्रबल प्रताप सिंह के पास आए. उन्होंने बताया कि वह झांसी की एक कंपनी में बड़े पद पर तैनात है. उन की बेटी रुचि डेंटल सर्जन है. वह उन के बेटे डा. गौरव के रिश्ते के लिए आए हैं. चूंकि प्रबल प्रताप सिंह को ऐसी ही लडक़ी की तलाश थी, अत: उन्होंने रिश्ते के लिए हां कर दी. रुचि और गौरव ने भी एकदूसरे को देखा तथा आपस में बातचीत की. उस के बाद उन दोनों ने भी अपनी रजामंदी दे दी.

रजामंदी के बाद रुचि का विवाह धूमधाम से डा. गौरव प्रताप सिंह के साथ हो गया. यह बात वर्ष 2013 की है. शादी के बाद डा. रुचि डा. गौरव की पत्नी बन कर ससुराल आ गई. डा. रुचि खूबसूरत थी, इसलिए ससुराल में उस का खूब स्वागतसत्कार हुआ. रुचि भी डाक्टर पति पा कर खुश थी. डा. प्रबल प्रताप सिंह व उन की पत्नी डा आशा सिंह भी रुचि जैसी खूबसूरत व डेंटल सर्जन बहू पा कर खुशी से फूले नहीं समा रहे थे. वह पड़ोसियों और नातेदारों से भी बहू की तारीफ करते थे.

डा. रुचि ने ससुराल आते ही घर व अस्पताल की जिम्मेदारी संभाल ली थी. वह पति के साथ अस्पताल जाती और महिलादंत रोगियों का इलाज करती. डा. रुचि के कुशल व्यवहार व उचित इलाज से महिला रोगियों की संख्या भी बढऩे लगी थी और आमदनी भी बढ़ गई थी. हंसीखुशी से जीवन बिताते 2 वर्ष बीत गए थे. इन वर्षों में रुचि ने एक बेटी को जन्म दिया. बेटी के जन्म के बाद परिवार की खुशियां बढ़ गई थीं.

डा. गौरव सिंह बीयर पीने के शौकीन थे. वह घर आ कर बीयर पीते थे. बीयर पीने को ले कर डा. रुचि को भी ऐतराज न था. लेकिन बेटी के जन्म के कुछ दिनों बाद वह शराब भी पीने लगे थे. कभी वह दोस्तों के साथ शराब पी कर लौटते तो कभी घर में ही बोतल खोल कर पीने बैठ जाते. डा. रुचि को शराब पीना फिर बकवास करना पसंद न था. रुचि ने शराब का विरोध किया तो पतिपत्नी के बीच तकरार होने लगी. धीरेधीरे तकरार बढ़ती गई और उन के बीच दूरियां भी बढ़ती गईं. अब दोनों एक ही छत के नीचे रहते अजनबी बन गए.

आपसी कलह से हुआ अलगाव…

डा. रुचि को जब आभास हुआ कि डा. गौरव के साथ वह जीवन नहीं बिता पाएगी तो वह अपने पिता के पास बरेली चली गई. डा. प्रबल प्रताप सिंह ने बेटेबहू के बीच समझौता कराने का प्रयास किया, लेकिन बात नहीं बनी. फिर दोनों का आपसी सहमति से तलाक हो गया.

एयर फोर्स सार्जेंट ने रची जर, जोरू और जमीन हथियाने की साजिश- भाग 2

मुदित पर शक और गहराया तो रत्नेश सिंह ने मुदित और प्रियंका के फोन की काल डिटेल्स निकलवाई. इस रिपोर्ट ने पुलिस को और चौंका दिया. काल डिटेल्स से पता चला कि मुदित और प्रियंका के बीच हर रोज डेढ़दो घंटे बातचीत होती थी. पुलिस को शक हुआ कि कहीं मुदित और प्रियंका के बीच नाजायज संबंध तो नहीं हैं. कहीं इन अवैध रिश्तों के कारण डा.गौरव के साथ कोई अनहोनी तो नहीं हो गई. पर जो भी रहस्य है, इन दोनों के पेट में ही छिपा है. इस रहस्य का परदाफाश होना जरूरी था.

मुदित वायुसेना में सार्जेंट था. उस के पेट से रहस्य उगलवाना इतना आसान न था, इसलिए इंसपेक्टर रत्नेश सिंह ने मुदित पर शक होने की जानकारी पुलिस अधिकारियों को दी. कुछ ही देर बाद डीसीपी (ईस्ट) रविंद्र कुमार तथा एसीपी (चकेरी) अमरनाथ यादव थाना चकेरी आ गए. उन्होंने मुदित से पूछताछ की. 2 राउंड की पूछताछ तक मुदित यही कहता रहा कि डा. गौरव उस के घर आए थे. वह नशे में थे. कार वह चला नहीं पाते, इसलिए कार हम ने घर पर खड़ी करा दी और उन्हें रोडवेज बस में बिठा कर उन्नाव भेज दिया था. उस के बाद वह कहां लापता हो गए, उसे जानकारी नहीं.

एयर फोर्स सार्जेंट ने उगला सच…

तीसरे राउंड की पूछताछ पुलिस अधिकारियों ने मोबाइल लोकेशन व काल डिटेल्स के आधार पर सख्ती से की. उन्होंने पूछा, ‘‘मुदित, 13 मार्च की रात 10 बजे तुम कहां थे? घर पर थे या फिर कहीं बाहर गए थे?’’

“सर, मैं घर पर ही था.’’ मुदित ने बताया.

“तुम कुलगांव या रूमा की तरफ नहीं गए थे?’’ मुदित कुछ देर सोचता रहा. उस की भंगिमा भी बदली. लेकिन फिर निडर हो कर बोला, ‘‘सर, मैं रूमा नहीं गया. घर पर ही था.’’

“लेकिन तुम्हारी फोन लोकेशन तो रूमा बता रही है. तुम सरासर झूठ बोल रहे हो और हमें गुमराह कर रहे हो. सचसच बताओ, वरना…’’ अमरनाथ गुस्से से बोले. पुलिस अधिकारियों की सख्ती से मुदित का मनोबल टूट गया. वह सिर झुका कर बोला, ‘‘सर, डा. गौरव अब इस दुनिया में नही है?’’

“क्या तुम ने डा. गौरव को मार डाला है?’’ डीसीपी (पूर्वी) रविंद्र कुमार ने पूछा.

“हां सर, मैं ने उसे बेरहमी से मार डाला. मैं हत्या का जुर्म कुबूल करता हूं.’’

“डा. गौरव तो तुम्हारा जिगरी दोस्त था. फिर उसे क्यों मारा?’’

“सर, यह सच है कि डा. गौरव मेरा जिगरी दोस्त था. इसी दोस्ती की आड़ में मेरे नाजायज संबंध डा. गौरव की पत्नी प्रियंका से हो गए थे. इस अवैध रिश्ते की जानकारी डा. गौरव को हो गई थी. उस के बाद वह मुझे शक की नजरों से देखने लगा था. कभीकभी कटाक्ष भी करता था. फिर मुझे लगा कि अगर मैं ने डा. गौरव की हत्या नहीं की तो वह मेरी हत्या कर देगा. इसलिए उसे मौत की नींद सुला दिया.’’

“हत्या में तुम्हारे साथ प्रियंका या कोई और भी शामिल था?’’

“नहीं, प्रियंका को कोई जानकारी नहीं थी. हत्या में अन्य कोई भी शामिल नहीं था.’’

“डा. गौरव की लाश कहां है?’’ एसीपी अमरनाथ ने पूछा.

“सर, उस की लाश कुलगांव फ्लाईओवर (महाराजपुर) के नीचे वाले जंगल में फेंक दी थी. उस का मोबाइल फोन भी वहीं तोड़ कर फेंक दिया था.’’

अब तक रात के 12 बज चुके थे. पुलिस अधिकारी आवश्यक पुलिस बल और मुदित को साथ ले कर कुलगांव फ्लाईओवर के पास जंगल में पहुंच गए. वहां मुदित की निशानदेही पर डा. गौरव के शव को पुलिस ने बरामद कर लिया. शव से कुछ दूरी पर डा. गौरव का चकनाचूर मोबाइल फोन पड़ा था. पुलिस ने उसे भी सुरक्षित कर लिया. मुदित ने डा. गौरव की हत्या बड़ी बेरहमी से की थी. उस ने उस का सिर हाइवे किनारे लगे पत्थर पर कई बार पटका था, जिस से उस का सिर फट गया था और उस की मौत हो गई थी. जामातलाशी में उस के पास से 7 लाख की रकम बरामद नहीं हुई थी.

पुलिस ने की लाश बरामद…

डा. गौरव मर्डर केस का खुलासा होने के बाद पुलिस अधिकारियों ने हाइवे किनारे लगे उस पत्थर का भी निरीक्षण किया, जिस से मुदित ने सिर पटकपटक कर डा. गौरव की हत्या की थी. निरीक्षण के बाद पुलिस अधिकारियों ने डा. गौरव के शव को बरामद कर मौके की काररवाई पूरी की और शव को पोस्टमार्टम हेतु लाला लाजपतराय जिला अस्पताल भिजवा दिया तथा हत्या में प्रयुक्त क्रेटा कार मुदित के घर से बरामद कर ली.

अगले दिन सुबह को एसीपी (चकेरी) अमरनाथ यादव ने डा. गौरव की हत्या की खबर मृतका के पिता डा. प्रबल प्रताप सिंह तथा पत्नी प्रियंका सिंह को दे दी. डा. गौरव की हत्या की खबर सुनते ही प्रियंका के घर में कोहराम मच गया. कुछ देर बाद प्रियंका अपनी मां और बहन के साथ थाना चकेरी आ गई. वहां जब प्रियंका को पता चला कि पति की हत्या मुदित ने की है तो वह अवाक रह गई. मांबेटी मुदित से कुछ पूछना चाहती थीं, लेकिन सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस ने इजाजत नहीं दी.

अब तक सूचना पा कर डा. प्रबल प्रताप सिंह भी थाना चकेरी आ गए थे. एसीपी अमरनाथ से सामना होते ही वह फफक पड़े. बोले, ‘‘बेटे ने जिस सांप को पाला और उसे दूध पिलाया, उसी ने उसे डस लिया.’’ अमरनाथ ने किसी तरह उन्हें धैर्य बंधाया. मुदित ने हत्या का जुर्म भले ही कुबूल कर लिया था और डा. गौरव का शव भी बरामद करा दिया था, लेकिन पुलिस अधिकारियों के मन में एक फांस चुभ रही थी कि हत्या में गौरव की पत्नी प्रियंका तथा उस की मां व बहन तो शामिल नहीं थीं.

इस के लिए पुलिस ने मुदित, प्रियंका उस की मां कमलेश तथा बहन का बेंजाडीन टेस्ट कराया. टेस्ट में केवल मुदित के कपड़ों और चप्पल पर खून के निशान सामने आए. बेंजाडीन टेस्ट में अगर ब्लड स्टेन मिलते हैं तो इस से खून का डीएनए विश्लेषण किया जाता है. दिल्ली के निर्भया गैंगरेप के मामले में भी पुलिस ने बस से मिले खून के धब्बों की जांच के लिए बेंजाडीन टेस्ट कराया था.

डा. गौरव की हत्या के जुर्म में मुदित श्रीवास्तव की गिरफ्तारी की जानकारी एयर फोर्स के अधिकारियों को हुई तो वह थाना चकेरी आए और सार्जेंट मुदित से पूछताछ की. एयर मार्शल की पूछताछ में मुदित ने गुनाह कुबूल किया. उस ने कहा, ‘‘सर, गलती हो गई. मैं यह करना नहीं चाहता था.’’ पूछताछ के बाद एयर मार्शल ने घटना तथा उस से जुड़े दस्तावेज मांगे. इस पर एसएचओ रत्नेश सिंह ने पुलिस कमिश्नर वी.पी. जोगदंड से बात की. उन्होंने एयर मार्शल की भी बात कराई. इस के बाद थाना चकेरी पुलिस ने एयर मार्शल को घटना तथा उस से जुड़े दस्तावेज सौंप दिए. सार्जेंट के खिलाफ अब विभागीय काररवाई भी हो सकती है.

पति और सास की ली जान: प्यार की चाशनी में डूबी वंदना

एयर फोर्स सार्जेंट ने रची जर, जोरू और जमीन हथियाने की साजिश- भाग 1

13 मार्च, 2023 को उत्तर प्रदेश के नगर कानपुर में ऐतिहासिक गंगा मेला की धूम थी. इस मेेले का लुत्फ उठाने के लिए उन्नाव के डेंटल सर्जन गौरव प्रताप सिंह, पत्नी प्रियंका व बेटे रूद्रांश के साथ अपनी क्रेटा कार से कानपुर शहर आए. पहले उन्होंने गंगा तट पर लगे मेले का लुत्फ उठाया, फिर अपनी ससुराल राजीव विहार नौबस्ता पहुंच गए.

होली पर बेटीदामाद को घर आया देख कर कमलेश की खुशी का ठिकाना न रहा. वहीं उन की छोटी बेटी दीपिका भी दीदीजीजा के आने पर खुशी से झूम उठी. प्रियंका जहां अपनी मां कमलेश की बातों में मशगूल हो गई, वहीं डा. गौरव प्रताप सिंह अपनी युवा व खूबसूरत साली से रसभरी बातें करने लगे. चूंकि होली का माहौल था और रिश्ता भी जीजासाली का था, सो उन के बीच हंसीमजाक भी होने लगा. इस बीच डा. गौरव ड्रिंक्स का मजा भी लेते रहे.

शाम लगभग 6 बजे डा. गौरव ने पत्नी प्रियंका से कहा कि उन्हें मुदित श्रीवास्तव से मिलने उस के घर जाना है. एक प्रौपर्टी देखने उस के साथ जाएंगे. पसंद आने पर सौदा भी तय करना है. चूंकि मुदित श्रीवास्तव वायुसेना में सार्जेंट था और चकेरी में उस की तैनाती थी. गौरव से उस की गहरी दोस्ती भी थी. इसलिए प्रियंका ने पति से टोकाटाकी नहीं की. उस के बाद डा. गौरव अपनी क्रेटा कार से दोस्त के घर जाने को रवाना हो गए. उस वक्त उन के पास लगभग 7 लाख रुपए नकद भी थे. पति के जाने के बाद प्रियंका निश्चिंत हो गई.

रात लगभग 9 बजे प्रियंका के मोबाइल फोन पर काल आई. प्रियंका ने स्क्रीन पर नजर डाली तो काल मुदित की थी. प्रियंका ने जैसे ही काल रिसीव की तो मुदित बोला, ‘‘भाभीजी, भाई साहब बेहद नशे में हैं. आप ने उन्हें इस हालत में घर से निकलने ही क्यों दिया. उन के पास मोटी रकम भी है. खैर, वह कार चलाने की हालत में नहीं है, इसलिए हम ने उन्हें उन्नाव जाने वाली बस में बिठा दिया है. कुछ देर बाद वह उन्नाव पहुंच जाएंगे.’’ इस के बाद मुदित ने काल डिसकनेक्ट कर दी.

मुदित की बात सुन कर प्रियंका घबरा उठी. उस ने मां और बहन को जानकारी दी तो वे भी चिंतित हो गईं. अब तो ज्योंज्यों रात बीतती जा रही थी, त्योंत्यों प्रियंका की परेशानी भी बढ़ती जा रही थी. प्रियंका कभी मुदित को काल करती तो कभी पति के फोन पर संपर्क करने की कोशिश करती. लेकिन दोनों फोन से एक ही संदेश प्राप्त होता, ‘‘आप जिस नंबर से संपर्क करना चाहते हैं, वह अभी बंद है.’’

टूट गई धैर्य की सीमा…

प्रियंका की मां कमलेश उसे धैर्य तो बंधा रही थी, लेकिन धैर्य की भी एक सीमा होती है. प्रियंका का धैर्य भी जब टूट गया तो उस ने बहन दीपिका को साथ लिया और उसी की स्कूटी से रात 12 बजे मुदित के घर जा पहुंची. मुदित उस समय घर पर ही था. उस के कमरे में धुआं भरा था और अजीब सी दुर्गंध आ रही थी. कमरे में मुदित कुछ जला रहा था.

प्रियंका ने धुएं के बाबत पूछा तो मुदित बोला, ‘‘भाभी, हमारी पत्नी नेहा बेटी का इलाज कराने लखनऊ गई है. कई रोज से घर बंद था, सो सफाई कर रहा था. कई मरी हुई छिपकलियां व चूहे निकले हैं. उसी को जलाया है, जिस से बदबू फैली है. आप बैठो, मैं नहा कर आता हूं.’’ कह कर मुदित बाथरूम चला गया.

रात डेढ़ बजे प्रियंका मुदित के साथ थाना चकेरी पहुंची. उस ने ड्ïयूटी अफसर से पति की गुमशुदगी दर्ज करने को कहा लेकिन उस ने गुमशुदगी दर्ज करने से साफ मना कर दिया. अफसर ने कहा, ‘‘तुम्हारे पति को गुम हुए अभी चंद घंटे ही बीते हैं. नियम के मुताबिक हम 24 घंटे बाद ही गुमशुदगी दर्ज कर सकेंगे. आप रात भर इंतजार करें. अगर सुबह तक घर वापस न पहुंचे, तब आना.’’

इस के बाद मुदित श्रीवास्तव अपने घर चला गया और प्रियंका अपनी बहन दीपिका के साथ राजीव विहार स्थित मां के घर आ गई. रात भर मांबेटी परेशान रहीं. उन्होंने रात आंखों ही आंखों में काट दी. इस बीच उन्होंने दरजनों बार डा. गौरव को काल की, लेकिन संपर्क नहीं हो पाया. प्रियंका ने पति के लापता होने की जानकारी ससुर डा. प्रबल प्रताप सिंह को इसलिएनहीं दी कि कहीं उन की तबियत न बिगड़ जाए.

14 मार्च, 2023 की सुबह करीब साढ़े 9 बजे प्रियंका अपनी मां कमलेश के साथ फिर से थाना चकेरी पहुंची. उस समय एसएचओ रत्नेश सिंह थाने पर मौजूद थे. प्रियंका ने उन्हें सारी बात बताई और पति गौरव की गुमशुदगी दर्ज करने की गुहार लगाई. प्रियंका की बात सुनने के बाद इंसपेक्टर रत्नेश बोले, ‘‘डा. गौरव राजीव विहार (नौबस्ता) से गए हैं, लिहाजा रिपोर्ट थाना नौबस्ता में दर्ज होगी और काररवाई भी वहीं से होगी.’’

परेशान प्रियंका ने तब मुदित को थाने बुला लिया. फिर वह मुदित के साथ थाना नौबस्ता पहुंची. मगर वहां के इंसपेक्टर ने कहा कि डा. गौरव चकेरी गए थे, इसलिए वहीं रिपोर्ट दर्ज कराओ. 2 थानों के बीच चकरघिन्नी बनी प्रियंका मुदित के साथ एसीपी (चकेरी) अमरनाथ यादव के औफिस पहुंची और अपनी व्यथा बताई.

एसीपी के आदेश पर हुई सूचना दर्ज…

प्रियंका की व्यथा सुनने के बाद एसीपी (चकेरी) अमरनाथ यादव ने फोन पर चकेरी इंसपेक्टर रत्नेश सिंह से बात की और उन्हें तत्काल रिपोर्ट दर्ज कर काररवाई का आदेश दिया. आदेश पाते ही रत्नेश सिंह ने डा. गौरव की गुमशुदगी की सूचना दर्ज कर ली. गुमशुदगी की सूचना दर्ज होने के बाद पुलिस सक्रिय हुई. सब से पहले एसएचओ ने मुदित और प्रियंका से अलगअलग पूछताछ की और उन के बयान दर्ज किए. दोनों के बयानों में भारी विरोधाभास था.

प्रियंका का कहना था कि डा. गौरव अपनी क्रेटा कार से शाम 6 बजे घर से निकले थे, जबकि मुदित का कहना था कि डा. गौरव उस के घर पर साढ़े 5 बजे आ गए थे. इस के अलावा भी कई ऐसी बातें थीं, जो मेल नहीं खा रही थीं. शक होने पर इंसपेक्टर रत्नेश सिंह ने प्रियंका और मुदित की फोन लोकेशन ट्रेस की तो 13 मार्च, 2023 की रात 10-11 बजे के बीच मुदित की लोकेशन रूमा के पास मिल रही थी, जबकि प्रियंका की उस के राजीव विहार स्थित घर की थी.

डा. गौरव के  फोन की लोकेशन पता की गई तो उस की लोकेशन भी रात 10-11 बजे के बीच रूमा की मिल रही थी. इस से जाहिर हो रहा था कि मुदित और डा. गौरव साथसाथ थे. मुदित ने प्रियंका को रात 9 बजे फोन कर बताया था कि डा. गौरव नशे में है, गाड़ी नहीं चला सकते, इसलिए उन्होंने उसे उन्नाव जाने वाली बस में बैठा दिया है. जबकि रात 10 बजे डा. गौरव के फोन की लोकेशन रूमा में थी. जाहिर था कि मुदित झूठ बोल रहा था.

बदनामी का डर : प्रेमी बना ब्लैकमेलर – भाग 3

साहिल ने तुरंत इस घटना की सूचना अपने ससुर बृजभूषण और साले गौरव को दी. लगभग 2 घंटे बाद श्वेता के घर वाले रिश्तेदारों और परिचितों के साथ जगराओं आ पहुंचे. उन लोगों ने साहिल या उस के घर वालों की कोई बात सुने बिना ही हंगामा करना शुरू कर दिया.

थाना सिटी को भी घटना की सूचना दे दी गई थी. थाना सिटी के थानाप्रभारी दलजीत सिंह सिद्धू, एसआई मलकीत सिंह एएसआई बलदेव सिंह, हेडकांस्टेबल कुलदीप सिंह, गुरदियाल सिंह, बलजिंदर कुमार, कांस्टेबल जसविंदर सिंह के साथ अस्पताल पहुंच गए थे.

लाश कब्जे में ले कर उन्होंने आगे की काररवाई शुरू कर दी. दलजीत सिद्धू ने श्वेता की लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवानी चाही तो उस के मायके वालों ने हंगामा खड़ा कर दिया.  उन का कहना था कि श्वेता कोठी की छत से खुद नहीं कूदी, बल्कि साहिल और उस के मांबाप ने दहेज के लिए उसे छत से धकेल कर मारा है. जब तक उन लोगों को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा, तब तक वे लाश नहीं ले जाने देंगे.

श्वेता के घर वालों की मदद के लिए कुछ स्थानीय नेता और समाजसेवी भी आ गए थे. वे पुलिस वालों को धमकी दे रहे थे कि अगर दोषियों के खिलाफ काररवाई नहीं की जाती तो वे धरनाप्रदर्शन के साथ बाजार बंद करवा देंगे. हंगामा चल ही रहा था कि डीएसपी सिटी सुरेंद्र कुमार भी घटनास्थल पर आ गए.

थानाप्रभारी दलजीत सिद्धू ने मौके की नजाकत देखते हुए इस घटना को अपराध संख्या 62/2014 पर भादंवि की धारा 304बी/34 के अंतर्गत साहिल, उस के पिता अशोक कुमार सिंगला और मां कुसुम सिंगला के खिलाफ दर्ज करा दिया. यह 11 मार्च, 2014 की बात है. थानाप्रभारी दलजीत सिंह सिद्धू ने उसी दिन श्वेता की लाश का पोस्टमार्टम करा कर लाश मोर्चरी में रखवा दी. अगले दिन यानी 12 मार्च को श्वेता की लाश का एक्सरे करवाया गया.

13 मार्च को श्वेता की हत्या के आरोप में साहिल को गिरफ्तार कर लिया गया. साहिल की गिरफ्तारी के बाद श्वेता के मायके वाले कुछ शांत हुए. 14 मार्च को उसे डयूटी मजिस्ट्रेट के सामने पेश कर के 18 मार्च तक के लिए रिमांड पर लिया गया.

थानाप्रभारी दलजीत सिंह सिद्धू ने साहिल को अदालत में पेश करने से पहले 13 मार्च को ही उस की निशानदेही पर श्वेता का मोबाइल फोन और लैपटौप उस के घर से बरामद कर लिया था.  पुलिस ने श्वेता का फोन चैक किया तो पता चला कि घटना वाले दिन यानी 10 मार्च को श्वेता के नएपुराने, दोनों नंबरों पर 2 नंबरों  से 163 बार फोन आए थे तो उन्हीं नंबरों से 193 मैसेज किए गए थे.

पुलिस ने उन दोनों नंबरों के बारे में पता किया तो वे नंबर लुधियाना के हितेश जिंदल के निकले. इस के बाद जब थानाप्रभारी दलजीत सिंह सिद्धू ने श्वेता के लैपटौप को खंगाला तो उस में उन्हें श्वेता और हितेष की अनगिनत अर्धनग्न अश्लील तसवीरें भरी पड़ी मिलीं. श्वेता के मोबाइल फोन और लैपटौप को चैक करने के बाद सारा मामला साफ हो गया.

एक एसएमएस में श्वेता ने हितेश को लिखा था, ‘तुम मुझे परेशान मत करो. मैं इस दुनिया से बहुत दूर जा रही हूं, मेरे जाने के बाद तुम्हारे मन में जो आए कर लेना, जितनी मरजी हो मेरी बदनामी करा देना.’

इस एसएमएस के जवाब में हितेश ने लिखा था, ‘हिम्मत है तो मर के दिखा.’

दरअसल, घटना वाले दिन यानी 10 मार्च को 163 बार फोन कर के और 193 बार एसएमएस कर के हितेश ने श्वेता को पूरी तरह से बदनाम करने की जो धमकियां दी थीं, उस से वह बुरी तरह डर गई थी. हितेश उसे तुरंत साहिल से रिश्ता खत्म करने के लिए कह रहा था. वह यह भी कह रहा था कि अगर वह बात नहीं कर सकती तो वह स्वयं फोन कर के साहिल से बात कर लेता है.

जबकि श्वेता ऐसा करने से उसे मना कर रही थी. श्वेता के बारबार मना करने के बावजूद भी हितेश ने रात 1 बजे के करीब साहिल को फोन कर के अपने संबंधों की बात बता दी थी. यही नहीं, उस ने साहिल से गालीगलौज भी की थी. इस पर साहिल ने उस की बातों का बुरा नहीं माना और सुबह बात करने को कह कर फोन काट दिया था.

साहिल ने सोचा था कि सुबह वह कुछ बड़ेबूढ़ों को ले जा कर हितेश को समझा देगा. क्योंकि उन के बीच रिश्तेदारी भी थी. एक तरह से साहिल हितेश के बहनोई का बहनोई था. रात में साहिल ने श्वेता से भी कोई बात नहीं की थी. लेकिन श्वेता ने साहिल और हितेश के बीच होने वाली बातें सुन ली थीं. तब बदनामी के डर से उस ने आत्महत्या कर ली थी.

23 मार्च को पुलिस ने फोन और लैपटौप में मिले सुबूतों को अदालत में पेश कर के स्थानीय जज गुरबीर सिंह की अदालत में साहिल को निर्दोष बताते हुए श्वेता को आत्महत्या के लिए विवश करने के लिए हितेश जिंदल को आरोपी बनाने की अपील की.

साहिल के वकील अशोक भंडारी ने भी श्वेता के घर वालों के अलावा अन्य लोगों के दर्ज बयान, लैपटौप से मिली श्वेता और हितेश की अश्लील तसवीरें तथा फोन में मिले तमाम रिकौर्ड अदालत में पेश किए थे. अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें और सुबूत देखने के बाद साहिल को इस केस से मुक्त कर हितेश को आरोपी बना कर जल्द से जल्द उसे गिरफ्तार करने के आदेश दिए. हितेश अपनी पत्नी हिना के साथ उसी दिन घर से फरार हो गया था, जिस दिन श्वेता ने आत्महत्या की थी.

5 मई, 2014 को हितेश ने लुधियाना की सैशन जज सुरेंद्रपाल कौर की अदालत में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन किया, जिसे उन्होंने अगले दिन खारिज कर दिया था. हितेश की तलाश में पुलिस रातदिन छापे मार रही थी. लेकिन वह पुलिस के हाथ नहीं लग रहा था. श्वेता ने अपनी एक गलती से अपना घर तो बरबाद किया ही, बेटे को भी बिना मां के कर दिया.

_हरमिंदर खोजी / संजीव मल्होत्रा

बदनामी का डर : प्रेमी बना ब्लैकमेलर – भाग 2

हितेश श्वेता के भाई गौरव की पत्नी चेतना के मामा जुगल किशोर जिंदल का बेटा था. वह अपने चाचा पवन कुमार जिंदल के साथ लुधियाना की न्यू फे्रंड्स कालोनी में जिंदल प्रौपर्टी के नाम से प्रौपर्टी का व्यवसाय करता था. श्वेता की तरह वह भी शादीशुदा था. श्वेता की ही तरह वह भी पत्नी से खुश नहीं था.

हितेश की पत्नी हिना लुधियाना की ही रहने वाली थी. श्वेता भी पति से खुश नहीं थी, शायद यही वजह रही कि शादीशुदा होने के बावजूद श्वेता और हितेश पहली ही मुलाकात में एकदूसरे से इस तरह प्रभावित हुए कि एकदूसरे को दिल दे बैठे. शादी के माहौल में साहिल जहां रिश्तेदारों और अन्य कामों में व्यस्त था, वहीं श्वेता हितेश से परिचय बढ़ाने में लगी थी. रिश्तेदारी हो ही गई थी, इसलिए दोनों ने अपनेअपने मोबाइल नंबर एकदूसरे को दे दिए थे.

साहिल तो अगले दिन जगराओं वापस आ गया, पर श्वेता कुछ दिनों के लिए मायके में रुक गई. मौका मिलते ही उस ने हितेश को फोन किया. दूसरी ओर हितेश उस से मिलने के लिए उतावला बैठा था. उस ने श्वेता को मिलने के लिए एक होटल में बुला लिया.

श्वेता ने हितेश के सामने अपने मन की बात रखी तो हितेश ने भी उस से अपने मन की बात बता दी. दोनों ही एकदूसरे की बातों से सहमत थे, इसलिए सारे रिश्तेनाते और अपनीअपनी मर्यादाएं भूल कर उन्होंने होटल के उस एकांत में सारी सीमाएं तोड़ दीं. उन्होंने वहां एक ऐसा रिश्ता कायम कर लिया, जो समाज की नजरों में अवैध था.  लेकिन इस की परवाह न श्वेता को थी और न ही हितेश को. दोनों बेझिझक एकदूसरे से मिलने लगे. कभी हितेश जगराओं चला जाता तो कभी श्वेता लुधियाना आ जाती.

उन का यह खेल बिना किसी रोकटोक के चल रहा था. जब श्वेता रोजरोज लुधियाना जाने लगी तो साहिल ने पूछ लिया कि वह रोजरोज लुधियाना क्यों जाती है? तब उस ने कहा कि उस के सिर में दर्द रहता है, उसी के चैकअप और इलाज के लिए वह लुधियाना जाती है. सीधेसादे साहिल ने उस की बात पर विश्वास कर लिया और संतुष्ट हो कर चुप बैठ गया. क्योंकि उसे पूरा विश्वास था कि एक संभ्रांत परिवार की बहू कोई ऐसा काम कतई नहीं करेगी, जिस से उस की बदनामी हो.

लेकिन यह भी सच है कि पाप कितना भी छिपा कर क्यों न किया जाए, एक न एक दिन उजागर हो ही जाता है. इस का मतलब यही हुआ कि पाप का घड़ा अवश्य फूटता है. वजह चाहे जो भी हो, ऐसा ही श्वेता और हितेश के साथ भी हुआ. दोनों के संबंधों को अब तक लगभग एक साल हो चुका था.

इधर कुछ दिनों से श्वेता को लगता था कि हितेश अपनी सीमाएं लांघने लगा था. वह जरूरत से ज्यादा आगे बढ़ रहा था. वह उस पर इस तरह अधिकार जताने लगा था जैसे उस का पति हो. यही नहीं, हितेश श्वेता से कहने लगा था कि वह साहिल से उस के और अपने संबंधों के बारे में बता कर उस से तलाक ले ले और उस से शादी कर ले. लेकिन श्वेता इस के लिए कतई तैयार नहीं थी.

उस ने हितेश से संबंध अपनी इच्छापूर्ति के लिए बनाए थे. इस के लिए वह हितेश का पूरा खर्च भी उठा रही थी. लेकिन हितेश अब जो चाह रहा था, वह उसे कभी नहीं पूरा कर सकती थी. क्योंकि इस में 2 परिवारों की इज्जत तो जुड़ी ही थी, साहिल और उस की हैसियत में भी बहुत अंतर था. हितेश की हरकतों से तंग आ कर श्वेता ने उस से मिलना बंद कर दिया. तब वह उसे फोन कर के साहिल से तलाक लेने के लिए कहने लगा. अब श्वेता को लगा कि उस से बहुत बड़ी गलती हो गई है.

श्वेता को गलती का अहसास हुआ तो पछतावा भी होने लगा. अब वह उस से संबंध खत्म करना चाहती थी, लेकिन हितेश उसे मजबूर करने लगा था. वह उसे धमकी देने लगा था कि अगर उस ने उस की बात नहीं मानी तो वह साहिल से अपने और उस के संबंधों के बारे में सबकुछ बता देगा.

हितेश के डर से श्वेता अपना पुराना नंबर अकसर बंद रखने लगी. बातचीत के लिए नया नंबर ले लिया. लेकिन हितेश ने उस का नया नंबर भी पता कर लिया.

8 मार्च, 2014 को भी हितेश ने श्वेता के नए नंबर पर फोन कर के धमकी दी थी कि अगर उस ने जल्दी कोई फैसला नहीं लिया तो वह जगराओं आ कर साहिल को सब साफसाफ बता देगा. हितेश की इस धमकी से श्वेता बेचैन हो उठी थी. उस ने हितेश को न जाने कितना समझाया कि उन के बीच जो भी जिस तरह चल रहा है, उसे वैसा ही चलने दे. वह जो चाहता है, वह न ठीक है और न संभव. उस से कई घर बरबाद हो जाएंगे.

लेकिन हितेश उस की बातों को हंसी में उड़ा कर अपनी जिद पर अड़ा रहा. इस से श्वेता और अधिक परेशान रहने लगी थी. उस की परेशानी को साहिल ने ताड़ तो लिया था लेकिन वजह नहीं जान पाया था. उस ने सोचा कि वह श्वेता को समय नहीं दे पाता, शायद इसीलिए वह परेशान रहती है. तभी उस ने 10 मई को बाहर किसी होटल में चल कर डिनर लेने के लिए कहा था.

साहिल वादे के अनुसार शाम को समय से पहले घर आ गया था. श्वेता ने सासससुर के लिए खाना बना कर रख दिया था, इसलिए साहिल के आते ही वह उस के साथ निकल गई थी. साहिल उसे जगराओं के मशहूर होटल स्नेहमून में डिनर के लिए ले गया.

श्वेता साहिल के साथ होटल डिनर ले रही थी, तब भी हितेश बारबार श्वेता को फोन कर के धमकी दे रहा था. परेशान हो कर श्वेता ने अपना फोन बंद कर दिया था. रात के 12 बजे के करीब पतिपत्नी खाना खा कर लौटे. साहिल काफी थका हुआ था, इसलिए लेटते ही सो गया. जबकि चिंता और बेचैनी की वजह से श्वेता को नींद नहीं आ रही थी.

हितेश उतनी रात को भी श्वेता को फोन कर रहा था. श्वेता की समझ में नहीं आ रहा था कि अब वह इस मुसीबत से कैसे छुटकारा पाए. बातचीत से श्वेता समझ गई थी कि हितेश काफी नशे में है. नशे में ही होने की वजह से ही शायद वह उसे और ज्यादा परेशान कर रहा था. उस स्थिति में उसे रोका भी नहीं जा सकता था.

कोई उपाय नहीं सूझा तो श्वेता ने फोन का स्विच औफ कर दिया और आंखें बंद कर के बेड पर साहिल के बगल लेट गई. इस के बाद रात 1 बजे के करीब साहिल के फोन पर किसी का फोन आया. साहिल ने फोन रिसीव किया तो दूसरी ओर से जो भी कहा गया, उसे सुन कर साहिल ने सिर्फ यही कहा, ‘‘रात बहुत हो चुकी है. अभी सो जाओ. इस विषय पर कल सुबह बात करेंगे.’’

फोन रख कर साहिल ने करवट ली तो बगल में श्वेता नहीं थी. उसे लगा, सीढि़यों पर कोई जा रहा है. वह उठ कर सीढि़यों की ओर गया. वहां कोई नहीं था. उसे ऊपर का दरवाजा खुला दिखाई दिया तो वह तेजी से ऊपर की ओर बढ़ा.

छत पर पहुंच कर साहिल ने देखा श्वेता छत की मुंडेर पर चढ़ कर नीचे कूदने की तैयारी कर रही थी. वह ‘श्वेता… श्वेता’ चिल्लाते हुए उसे बचाने के लिए उस की ओर दौड़ा. वह श्वेता के पास पहुंच पाता, उस से पहले ही श्वेता ने छलांग लगा दी. एक जोरदार चीख वातावरण में गूंजी, उस के बाद सब खत्म हो गया.

साहिल जहां था, वहीं घबरा कर रुक गया. जल्दी ही उस ने स्वयं को संभाला और नीचे की ओर भागा. चीख सुन कर साहिल के मातापिता ही नहीं, पड़ोसी भी जाग गए थे. लोग निकल कर बाहर आ गए. श्वेता जमीन पर पड़ी थी. पड़ोसियों की मदद से साहिल ने उसे कल्याणी अस्पताल पहुंचाया, जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

आगे क्या हुआ? जानने के लिए पढ़ें कहानी का अगला भाग…