शर्तों वाला प्यार : प्रेमी ने किया वार – भाग 3

थानाप्रभारी विनोद कुमार सिंह ने अन्नपूर्णा हत्याकांड का खुलासा करने तथा कातिलों को पकड़ने की जानकारी एसपी (पश्चिम) संजीव सुमन को दी तो उन्होंने अपने कार्यालय में प्रैसवार्ता कर अन्नपूर्णा हत्याकांड का खुलासा कर दिया.

उत्तर प्रदेश के कानपुर महानगर से करीब 20 किलोमीटर दूर जीटी रोड पर एक कस्बा है मंधना. यह बिठूर थाने के अंतर्गत आता है. राकेश कुमार कुरील अपने परिवार के साथ इसी कस्बे के मोहल्ला नारामऊ में  रहता था. उस के परिवार में पत्नी शिवदेवी के अलावा 4 बेटियां प्रियंका, अन्नपूर्णा, विनीता, नेहा तथा बेटा अमित था. राकेश कुमार एक फैक्ट्री में नौकरी करता था. वहां से मिलने वाले वेतन से ही वह अपने परिवार का भरण पोषण करता था. वह बड़ी बेटी प्रियंका का विवाह कर चुका था.

प्रियंका से छोटी अन्नपूर्णा थी. तीखे नयननक्ख और गोरी रंगत वाली अन्नपूर्णा अपनी अन्य बहनों से अधिक सुंदर थी. समय के साथ जैसे-जैसे उस की उम्र बढ़ रही थी, वैसेवैसे उस की सुंदरता में और निखार आता जा रहा था.

बहन की जगह नौकरी मिली अन्नपूर्णा को

अन्नपूर्णा ने मंधना स्थित सरस्वती महिला इंटर कालेज से इंटरमीडिएट की परीक्षा पास कर ली थी. इस के बाद वह गूवा गार्डन निवासी ट्रांसपोर्टर हरिओम के औफिस में काम करने लगी थी. इस के पहले उस की बड़ी बहन प्रियंका हरिओम के औफिस में काम करती थी. प्रियंका की जब शादी हो गई तब उस ने छोटी बहन अन्नपूर्णा को औफिस के काम पर लगा दिया था.

खूबसूरत अन्नपूर्णा ने अपनी चंचल अदाओं से ट्रांसपोर्टर हरिओम के दिल में हलचल मचा दी थी. हरिओम उसे चाहने लगा था. इतना ही नहीं वह अन्नपूर्णा पर पैसे खर्च करने लगा था.

अन्नपूर्णा के माध्यम से हरिओम ने उस के घर में भी पैठ बना ली थी. घर वाले आनेजाने पर विरोध न करें, इस के लिए उस ने अन्नपूर्णा के पिता को कर्ज के तौर पर रुपए भी दे दिए थे. धीरेधीरे हरिओम और अन्नपूर्णा नजदीक आते गए और दोनों के बीच मधुर संबंध बन गए.

अन्नापूर्णा औफिस के लिए घर से बनसंवर कर इतरातीइठलाती निकलती थी. एक रोज औफिस जाते समय अन्नपूर्णा पर सोनू की निगाह पड़ गई. वह उसे तब तक देखता रहा, जब तक वह आंखों से ओझल नहीं हो गई. सोनू अन्नपूर्णा के पड़ोस में ही रहता था. ऐसा नहीं था कि सोनू ने अन्नपूर्णा को पहली बार देखा था. लेकिन उस दिन वह उसे बहुत खूबसूरत लगी थी. उस दिन उस के मन में चाहत की लहर उठी थी.

सोनू, दबंग युवक था. अपने क्षेत्र में वह सट्टा और जुआ खिलवाता था. इस काले धंधे से उसे मोटी कमाई होती थी. उस के कई विश्वासपात्र दोस्त थे जिन्हें वह पैसे दे कर अपने साथ मिलाए रखता था. रहता भी खूब ठाटबाट से था. अन्नपूर्णा सोनू के मन को भायी तो वह उस का दीवाना हो गया. आतेजाते जब कभी नजरें टकरा जातीं तो दोनों मुसकरा देते थे.

सोनू की आंखो में अपने प्रति चाहत देख कर अन्नपूर्णा का मन भी विचलित हो उठा. वह भी उसे चाहने लगी. चाहत जब दोनों ओर से बढ़ी तो एक रोज सोनू ने अपने प्यार का इजहार कर दिया. सोनू की बात सुन कर अन्नापूर्णा के दिल में गुदगुदी होने लगी. शरमाते हुए वह बोली, ‘‘सोनू, जो हाल तुम्हारा है वही मेरा भी है. तुम भी मुझे बहुत अच्छे लगते हो.’’

उस दिन के बाद सोनू और अन्नपूर्णा का प्यार परवान चढ़ने लगा. अन्नपूर्णा औफिस से छुट्टी के बाद सोनू के साथ सैरसपाटे के लिए निकल जाती. सोनू अन्नपूर्णा पर दिल खोल कर पैसे खर्च करने लगा. अन्नपूर्णा जिस चीज की डिमांड करती, सोनू उसे ला कर दे देता था. सोनू के मार्फत अन्नपूर्णा ने ज्वैलरी भी बनवा ली थी और बैंक बैलेंस भी बना लिया था. दोनों के दिल का रिश्ता जुड़ा तो फिर देह का रिश्ता बनने में देर नहीं लगी.

हरिओम को जब पता चला कि अन्नपूर्णा सोनू के साथ घूमती है तो उस ने अन्नपूर्णा को लताड़ा. साथ ही उस की शिकायत उस के मातापिता से भी कर दी. हरिओम ने तो यहां तक कह दिया कि अन्नपूर्णा के पैर डगमगा गए हैं बेहतर होगा कि उस की शादी कर दी जाए. शादी में लाख डेढ़ लाख का जो भी खर्च आएगा, वह दे देगा.

राकेश को बेटी के डगमगाते कदमों की जानकारी हुई तो उस के होश उड़ गए. उसे लगा कि यदि अन्नपूर्णा सोनू के साथ भाग गई तो समाज में उस की नाक कट जाएगी. पूरे समाज में उस की बदनामी होगी. अत: उस ने उस के हाथ पीले करने का फैसला कर लिया. उस ने इस बाबत पत्नी शिवदेवी से बात की. पत्नी ने भी उस की शादी करने पर सहमति जता दी. इस के बाद राकेश बेटी के लिए लड़का खोजने लगा. थोड़ी मशक्कत के बाद उसे पुनीत पसंद आ गया.

पुनीत के पिता शिवबालक कुरील बिठूर थाना क्षेत्र के गांव कुरसौली में रहते थे. वहां उन की पुश्तैनी जमीन थी. उन के 3 बच्चों में पुनीत सब से बड़ा था. वह पढ़ालिखा स्मार्ट युवक था. साथ ही एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी भी करता था. राकेश ने विनीत को देखा तो उस ने उसे अपनी बेटी अन्नपूर्णा के लिए पसंद कर लिया. इस के बाद पुनीत और अन्नपूर्णा ने एकदूसरे को देखा. फिर शादी के लिए दोनों राजी हो गए.

14 अप्रैल, 2019 को गोद भराई, तिलक तथा 18 अप्रैल को शादी की तारीख तय हुई. इस के बाद दोनों परिवार शादी की तैयारी में जुट गए.

सोनू नहीं चाहता था कि अन्नपूर्णा शादी करे

उधर सोनू को जब अन्नपूर्णा का विवाह तय हो जाने की जानकारी हुई तो उस ने अन्नपूर्णा पर शादी तोड़ देने की दबाव बनाया. लेकिन अन्नपूर्णा ने पारिवारिक मामला बता कर शादी तोड़ने से इनकार कर दिया. सोनू उस पर दबाव बनाता रहा और अन्नपूर्णा इनकार करती रही.

आगे क्या हुआ? जानें अगले भाग में…

शर्तों वाला प्यार : प्रेमी ने किया वार – भाग 2

उस की मौत अधिक खून बहने व सिर की हड्डी टूटने से हुई थी. दुष्कर्म की आशंका के चलते 2 स्लाइडें भी बनाई गईं. पुलिस को मृतका का मोबाइल फोन न तो घटनास्थल से मिला था और न ही घर वालों ने उस की जानकारी दी थी. पुलिस ने इस बारे में मृतका की मां शिवदेवी तथा उस की बेटियों से पूछताछ की.

शिवदेवी ने कहा कि अन्नपूर्णा के पास मोबाइल नहीं था. लेकिन जब उस की बेटियों से अलग से पूछताछ की गई तो उन्होंने बताया कि उस के पास मोबाइल था. अगर उस के पास मोबाइल था, तो शिवदेवी ने क्यों मना किया, यह बात पुलिस की समझ से परे थी. लिहाजा पुलिस ने जब अपने तेवर सख्त किए तो घर वालों से पुलिस ने 3 मोबाइल फोन बरामद किए.

पुलिस ने जब तीनों फोन नंबरों की काल डिटेल्स निकलवाई तो एक फोन की डिटेल्स से पता चला कि अन्नपूर्णा हरिओम के अलावा कई अन्य युवकों से भी बात करती थी. काल डिटेल्स के आधार पर पुलिस ने 3 युवकों को पूछताछ के लिए उठाया. इन में एक सोनू था, जो मृतका का पड़ोसी था. जांचपड़ताल से पता चला कि सोनू और अन्नपूर्णा के बीच प्रेमसंबंध थे. सोनू का उस के घर भी आनाजाना था.

सोनू अन्नपूर्णा पर खूब खर्चा करता था, यह पता चलते ही पुलिस ने 2 युवकों को तो छोड़ दिया पर सोनू से सख्ती से पूछताछ की. सोनू ने अन्नपूर्णा के साथ अपने प्रेमसंबंधों को तो स्वीकर किया लेकिन हत्या से साफ इनकार कर दिया. पुलिस ने उसे हिदायत दे कर थाने से भेज दिया.

पुलिस अधिकारियों को औनर किलिंग का भी शक था. उन का शक यूं ही नहीं था. उस के कई कारण थे. पहला कारण तो यह था कि परिजनों द्वारा बेटी की खोजबीन करना तो दूर पुलिस को सूचना तक नहीं दी थी. दूसरा कारण हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराने में आनाकानी करना था और तीसरा कारण मोबाइल के लिए झूठ बोलना था.

हत्या के रहस्य को उजागर करने के लिए पुलिस ने मृतका की मां शिवदेवी, बुआ सुमन तथा बहन प्रियंका, प्रगति व नेहा से अलगअलग पूछताछ की. इन सभी के बयानों में विरोधाभास तो था, लेकिन हत्या की गुत्थी फिर भी नहीं सुलझ पाई. पड़ोसियों से भी पूछताछ की गई, पर पुलिस ऐसा कोई सबूत हासिल नहीं कर सकी, जिस से हत्या की गुत्थी सुलझ पाती.

हत्याकांड का खुलासा करने के लिए पुलिस अधिकारियों ने जब बेंजीडीन टेस्ट कराने का निश्चय किया. बेंजीडीन टेस्ट से खून के उन धब्बों का पता चल जाता है, जो मिट गए हों या धोपोंछ कर मिटा दिए गए हों. इस टेस्ट में एक महीने बाद तक खून के निशान का पता चल जाता है. अन्नपूर्णा की हत्या हुए एक सप्ताह बीत गया था. अत: बेंजीडीन टेस्ट से खुलासा संभव था.

29 अप्रैल, 2019 को एसपी (पश्चिम) संजीव कुमार सुमन थाना बिठूर पहुंचे. थाने पर उन्होंने बेंजीडीन टेस्ट के लिए फोरेंसिक टीम को भी बुलवा लिया. इस के बाद थानाप्रभारी विनोद कुमार सिंह ने मृतका के घर वालों को थाने बुलवा लिया. थाने में फोरैंसिक टीम ने मृतका के मातापिता, भाई व बड़ी बहन पर टेस्ट किया तो रिपोर्ट पौजिटिव आई.

हत्या का शक परिवार वालों पर गहराया तो पुलिस अधिकारियों ने राकेश, उस की पत्नी शिवदेवी, बेटी प्रियंका तथा बेटे अमित को एक ही कमरे में आमनेसामने बिठा कर कहा कि तुम लोगों के खिलाफ हत्या का सबूत मिल गया है. बेंजीडीन टेस्ट में तुम लोगों के हाथों में मृतका के खून के रक्तकण मिले हैं. इसलिए तुम लोग सच बता दो कि तुम ने अन्नपूर्णा की हत्या क्यों की?

बेटी की हत्या के आरोप में अपने परिवार को फंसता देख राकेश हाथ जोड़ कर बोला, ‘‘साहब, मैं ने या मेरे परिवार के किसी सदस्य ने अन्नपूर्णा की हत्या नहीं की. हम सब निर्दोष हैं. रही बात बेंजीडीन टेस्ट की तो अन्नपूर्णा की लाश उठाते समय हाथों में खून लग गया होगा. मेरी पत्नी व बेटी ने भी रोते समय अन्नपूर्णा के सिर पर हाथ रखा होगा, जिस से खून लग गया होगा.’’

चुनावों की वजह से लटक गई जांच

पुलिस अधिकारियों को लगा कि राकेश जो कह रहा है, वह सच भी हो सकता है. अत: उन्होंने उन सभी को गिरफ्तार करने के बजाए थाने से घर भेज दिया. पुलिस जांच को आगे बढ़ाती उस के पहले ही लोकसभा चुनाव का आगाज हो गया. पुलिस चुनाव की वजह से व्यस्त हो गई. जिस से जांच एकदम ढीली पड़ गई. या यूं कहें कि अन्नपूर्णा हत्याकांड की जांच ठंडे बस्ते में चली गई. लगभग डेढ़ माह तक पुलिस चुनावी चक्कर में व्यस्त रही.

चुनाव निपट जाने के बाद पुलिस अधिकारियों को अन्नपूर्णा हत्याकांड की फिर से याद आई. पुलिस अधिकारियों ने एक बार फिर समूचे घटनाक्रम पर विचारविमर्श किया. साथ ही जांच रिपोर्ट का अध्ययन किया गया. इस के बाद पुलिस इस निष्कर्ष  पर पहुंची कि अन्नपूर्णा की हत्या औनर किलिंग का मामला नहीं है. उस की हत्या प्रेमसंबंधों में की गई थी.

अन्नपूर्णा के 2 युवकों से घनिष्ठ संबंध थे. एक ट्रांसपोर्टर हरिओम, जिस के दफ्तर में वह काम करती थी और दूसरा उस का पड़ोसी सोनू, जिस का उस के घर आनाजाना था. दोनों के प्यार के चर्चे भी आम थे. पुलिस अधिकारियों का मानना था कि हरिओम और सोनू में से कोई एक है जिस ने प्यार के प्रतिशोध में अन्नपूर्णा की हत्या की है.

पुलिस ने सब से पहले हरिओम को थाने बुलवाया और उस से करीब 4 घंटे तक सख्ती से पूछताछ की. लेकिन हरिओम ने हत्या का जुर्म नहीं कबूला. पुलिस को लगा कि हरिओम कातिल नहीं है तो उसे जाने दिया गया. इस के बाद पुलिस ने सोनू को थाने बुलवाया और उस से भी कई राउंड में सख्ती से पूछताछ की गई. लेकिन सोनू टस से मस नहीं हुआ. सोनू को 3 दिन तक थाने में रखा गया और हर रोज सख्ती से पूछताछ की गई. पर सोनू ने हत्या का जुर्म नहीं कबूला. मजबूरन उसे भी थाने से घर भेज दिया गया.

लाख कोशिशों के बाद भी पुलिस को सफलता नहीं मिल रही थी. अंतत: पुलिस ने खुफिया तंत्र का सहारा लिया. थानाप्रभारी विनोद कुमार सिंह ने नारामऊ, मंधना और बिठूर क्षेत्र में अपने खास मुखबिर लगा दिए और खुद भी खोजबीन में लग गए.

2 अगस्त, 2019 की सुबह करीब 10 बजे एक मुखबिर ने थानाप्रभारी को अन्नपूर्णा हत्याकांड के बारे में जो जानकारी दी उसे सुन कर उन के चेहरे पर मुसकान तैर आई. मुखबिर ने बताया कि अन्नपूर्णा के प्रेमी सोनू ने उस की हत्या अपने 2 अन्य साथियों के साथ मिल कर की थी. इन में उस का एक दोस्त नारामऊ गांव का विनीत है. जबकि दूसरे का नाम शिवम है. वह रामादेवीपुरम, पचौर रोड मंधना में रहता है.’’

मुखबिर की बात सुनने के बाद थानाप्रभारी विनोद कुमार सिंह ने सोनू के दोस्त विनीत व शुभम को गिरफ्तार कर लिया. थाने ला कर जब उन दोनों से अन्नपूर्णा की हत्या के संबंध में सख्ती से पूछताछ की गई तो दोनों ने हत्या का जुर्म कबूल कर लिया. उन दोनों ने बताया कि अन्नपूर्णा की हत्या उस के प्रेमी सोनू ने ही की थी. उन्होंने तो दोस्ती में उस का साथ दिया था.

आगे क्या हुआ? जानें अगले भाग में…

शर्तों वाला प्यार : प्रेमी ने किया वार – भाग 1

कानपुर स्थित दलहन अनुसंधान केंद्र का सुरक्षाकर्मी के.पी. सिंह सुबह 8 बजे ड्यूटी पूरी कर अपने घर जा रहा था. जब वह बैरीबागपुर जाने वाली लिंक रोड पर पहुंचा तो उस ने रोड के किनारे एक युवती का शव पड़ा देखा. के.पी. सिंह ने यह सूचना जीटी रोड से गुजर रहे राहगीरों को दी तो कुछ ही देर में वहां लोगों की भीड़ जमा हो गई. इसी बीच के.पी. सिंह ने फोन द्वारा सड़क किनारे लाश पड़ी होने की सूचना थाना बिठूर पुलिस को दे दी. यह बात 17 अप्रैल, 2019 की है.

सूचना पाते ही बिठूर थानाप्रभारी विनोद कुमार सिंह पुलिस टीम के साथ बताई गई जगह पर पहुंच गए. युवती की उम्र 20-22 साल के आसपास थी. उस के सिर और चेहरे पर ईंटपत्थर या किसी अन्य वजनी चीज से वार किया गया था. सिर से निकले खून से जमीन लाल हो गई थी. युवती के गले में दुपट्टा लिपटा था. ऐसा लग रहा था कि हत्यारे ने उस का गला भी घोंटा हो. उस के हाथों में चोट के निशान भी थे. थानाप्रभारी ने इस की सूचना वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को दे दी थी.

घटनास्थल पर सैकड़ों लोगों की भीड़ थी, लेकिन कोई भी युवती को पहचान नहीं पाया. थानाप्रभारी अभी घटनास्थल की जांच कर ही रहे थे कि इसी बीच एक युवक वहां आया. उस ने पहले युवती की लाश को गौर से देखा, फिर फफक कर रो पड़ा. वह वहां मौजूद थानाप्रभारी से बोला, ‘‘साहब, यह मेरे भाई राकेश कुरील की बेटी अन्नपूर्णा है. इस की तो कल बारात आने वाली थी, पता नहीं किस ने इस की हत्या कर दी.’’

शादी से एक दिन पहले दुलहन की हत्या की बात सुन कर थानाप्रभारी विनोद कुमार सिंह स्तब्ध रह गए. उन्होंने लाश की शिनाख्त करने वाले युवक से पूछताछ की तो उसने अपना नाम राजेश कुरील बताया. विनोद कुमार ने उस से बात कर कुछ जरूरी जानकारी हासिल की. इसी बीच सूचना पा कर एसपी (पश्चिम) संजीव सुमन तथा सीओ (कल्याणपुर) अजय कुमार सिंह भी आ गए. अधिकारियों ने मौके पर फोरैंसिक टीम को भी बुला लिया था.

राजेश ने अपनी भतीजी अन्नपूर्णा की हत्या की खबर घर वालों को दी तो घर में कोहराम मच गया. घर में चल रही शादी की तैयारियां मातम में बदल गईं. राकेश की पत्नी शिवदेवी तथा बेटियां प्रियंका, प्रगति, नेहा तथा परिवार के अन्य सदस्य रोतेबिलखते घटनास्थल पर आ गए. शिवदेवी व उस की बेटियां अन्नपूर्णा के शव को देख फूटफूट कर रोने लगीं.

मोहल्ले में किसी ने नहीं सोचा था कि जिस घर में बारात आने की तैयारी हो रही हो, वहां से अर्थी उठेगी. मृतका अन्नपूर्णा की होने वाली सास लक्ष्मी भी उस की मौत की खबर पा कर पति शिवबालक व बेटे पुनीत के साथ घटनास्थल पर आ गई थी. वह कह रही थी, हमें तो बारात ले कर बहू को लेने आना था, लेकिन अर्थी देखने को मिली. पुनीत भी होने वाली पत्नी के शव को टुकुरटुकुर देख रहा था.

घटनास्थल पर कोहराम मचा था. पुलिस अधिकारियों ने किसी तरह रोतेबिलखते घर वालों को धैर्य बंधाया. घटनास्थल की काररवाई निपटा कर पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए लाजपतराय चिकित्सालय भिजवा दिया. इस के बाद पुलिस अधिकारियों ने मृतका के पिता राकेश कुमार कुरील से कहा कि वह थाना बिठूर जा कर बेटी की हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराए.

लेकिन राकेश तथा उस के घर वाले हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराने में आनाकानी करने लगे. इस पर पुलिस अधिकारियों को संदेह हुआ कि आखिर वे लोग रिपोर्ट क्यों नहीं दर्ज कराना चाहते. उन्हें लगा कि कहीं यह मामला औनर किलिंग का तो नहीं है.

शक हुआ तो एसपी (पश्चिम) संजीव सुमन ने राकेश कुरील से पूछताछ की. राकेश ने बताया कि उस ने अन्नपूर्णा की शादी कुरसौली गांव निवासी पुनीत के साथ तय की थी. 14 अप्रैल, 2019 को उस की गोदभराई तथा तिलक का कार्यक्रम संपन्न हुआ था, 18 अप्रैल को बारात आनी थी.

16 अप्रैल की शाम वह पत्नी शिवदेवी के साथ खरीदारी करने मंधना बाजार चला गया था. रात 9 बजे जब वह घर लौटा तो पता चला अन्नपूर्णा घर में नहीं है. यह सोच कर कि वह पड़ोस में रहने वाली अपनी बुआ के घर पर रुक गई होगी, इसलिए किसी ने ध्यान नहीं दिया. सुबह उस की मौत की खबर मिली.

‘‘तुम्हें किसी पर शक है?’’ एसपी ने पूछा.

‘‘नहीं साहब, मुझे किसी पर शक नहीं है, मेरी किसी से दुश्मनी भी नहीं है.’’ राकेश ने बताया.

राकेश खुद आया शक के घेरे में

राकेश की बात सुन कर वहां खड़े सीओ अजय कुमार सिंह झल्ला पड़े, ‘‘राकेश, जब तुम्हें किसी पर शक नहीं है. कोई तुम्हारा दुश्मन भी नहीं है तो तुम्हारी बेटी की हत्या किस ने की? तुम्हीं लोगों ने उसे मौत के घाट उतार दिया होगा?’’

‘‘नहीं साहब, भला हम अपनी बेटी को क्यों और कैसे मारेेंगे?’’

‘‘इसलिए कि अन्नपूर्णा किसी दूसरे लड़के से प्यार करती होगी और उसी लड़के से शादी करने की जिद कर रही होगी, लेकिन तुम ने उस की बात न मान कर शादी दूसरी जगह तय कर दी होगी. जब उस ने तुम्हारा कहा नहीं माना तो तुम लोगों ने उसे मार डाला. इसीलिए तुम लोग उस की हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराने में आनाकानी कर रहे हो.’’ सीओ अजय कुमार ने कहा.

खुद को फंसता देख राकेश घबरा कर बोला, ‘‘साहब, हम बेटी के कातिल नहीं हैं. हम रिपोर्ट दर्ज कराने को तैयार हैं, लेकिन नामजद नहीं करा सकते.’’ इस के बाद राकेश ने थाने पहुंच कर भादंवि की धारा 302 के तहत अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी. साथ ही हत्या का शक हरिओम पर जाहिर किया.

पुलिस अधिकारियों ने राकेश से हरिओम के संबंध में पूछताछ की तो उस ने बताया कि हरिओम गूवा गार्डन कल्याणपुर में रहता है और ट्रांसपोर्टर है. पहले उस के दफ्तर में उस की बेड़ी बेटी प्रियंका काम करती थी. प्रियंका की शादी हो जाने के बाद छोटी बेटी अन्नपूर्णा वहां काम करने लगी थी. हरिओम का उस के घर आनाजाना था. अन्नपूर्णा और हरिओम के बीच दोस्ती थी.

यह पता चलते ही पुलिस ने हरिओम को हिरासत में ले लिया. थाने में जब उस से अन्नपूर्णा की हत्या के संबंध में पूछा गया तो वह साफ मुकर गया. उस ने बताया कि अन्नपूर्णा उस के औफिस में काम करती थी. दोनों के बीच दोस्ती भी थी. दोनों के बीच अकसर फोन पर बातें भी होती थीं. हत्या से पहले भी अन्नपूर्णा ने उसे फोन किया था और बाजार से कपड़े खरीदने की बात कही थी. लेकिन अपने काम में व्यस्त होने की वजह से वह उस के साथ नहीं जा सका. हरिओम ने बताया कि अन्नपूर्णा की हत्या में उस का कोई हाथ नहीं है.

पुलिस को लगा औनर किलिंग का मामला

पूछताछ के बाद पुलिस अधिकारियों को लगा कि हरिओम सच बोल रहा है तो उन्होंने उसे थाने से यह कह कर भेज दिया कि जब भी उसे बुलाया जाएगा, उसे थाने आना पडे़गा. साथ ही उसे हिदायत भी दी गई कि वह बिना पुलिस को बताए कहीं बाहर न जाए.

अब तक की जांच से पुलिस इस नतीजे पर पहुंची कि अन्नपूर्णा की हत्या या तो अवैध संबंधों की वजह से हुई है या फिर यह औनर किलिंग का मामला है. उन्होंने इन्हीं दोनों बिंदुओं पर जांच आगे बढ़ाई. अगले दिन पुलिस को पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी मिल गई.

आगे क्या हुआ? जानें अगले भाग में…

नेताजी को समझ में आया कानून सबके लिए एक है – भाग 3

जेल जाने के बाद से ही कुशवाह जमानत हासिल करने के प्रयासों में जुटे थे, लेकिन राजस्थान हाईकोर्ट ने उन की जमानत याचिका खारिज कर दी थी. बाद में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में जमानत अर्जी दाखिल की. सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2016 में आदेश दिया कि इस केस को 6 महीने में निपटाया जाए. सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद धौलपुर के अपर जिला एवं सत्र न्यायालय में 6 महीने से इस मामले की निरंतर सुनवाई चल रही थी. सर्वोच्च न्यायालय की ओर से दी गई 6 महीने की अवधि 22 अगस्त, 2016 को पूरी हो गई तो कुशवाह ने अपने वकील के मार्फत अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश धौलपुर की अदालत में जमानत अर्जी दाखिल की, जिसे 2 सितंबर, 2016 को अदालत ने खारिज कर दिया.

इस के बाद 8 दिसंबर, 2016 को इस केस में फैसला सुना दिया गया. बाद में 13 दिसंबर को राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल ने धौलपुर से बसपा विधायक बी.एल. कुशवाह की सदस्यता समाप्त कर दी. इस के साथ ही धौलपुर विधानसभा सीट खाली होने की घोषणा कर दी गई. यह संयोग ही रहा कि बी.एल. कुशवाह सन 2013 में 8 दिसंबर को पहली बार विधायक चुने गए थे और ठीक 3 साल बाद 8 दिसंबर, 2016 को उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई. बाद में विधानसभा अध्यक्ष ने उन की सदस्यता भी 8 दिसंबर, 2016 से ही समाप्त की.

नरेश हत्याकांड के अभी 3 आरोपी फरार चल रहे हैं. इन में बी.एल. कुशवाह के भाई शिवराम और जितेंद्र कुशवाह के अलावा शूटर रोबिन शामिल हैं. रोबिन उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर का रहने वाला है. पुलिस के अनुसार, रोबिन ने ही नरेश को गोली मारी थी. नरेश की हत्या के समय वह सत्येंद्र के साथ था. पुलिस की जांचपड़ताल एवं अदालत के फैसले में नरेश कुशवाह एवं सीमा उर्फ सुषमा कुशवाह के प्रेम प्रसंग की जो कहानी सामने आई है, वह इस प्रकार है—

धौलपुर के सदर थानान्तर्गत गांव झीलकापुरा के रहने वाले मेघसिंह कुशवाह के 5 बेटे थे. मेघसिंह गरीब किसान हैं. खेतीबाड़ी कर अपना गुजरबसर करते हैं. मेघसिंह का बेटा नरेश कुशवाह धौलपुर की कमला कालोनी में किराए का कमरा ले कर 12वीं की पढ़ाई कर रहा था. खर्च चलाने के लिए वह कुछ कामकाज भी करता था. इसी मकान में नरेश के ऊपर वाले कमरे में किराए पर बी.एल. कुशवाह की बहन सीमा उर्फ सुषमा अपनी बहन रिंकेश के साथ रहती थी. ये दोनों बहनें धौलपुर में गर्ल्स स्कूल में 9वीं कक्षा की छात्राएं थीं.

इसी दौरान नरेश का सीमा से प्रेम शुरू हुआ. दोनों एक साथ ही खाना बनाते और खाते थे. बाद में उन का प्यार परवान चढ़ता गया. सीमा ने तय कर लिया था कि वह शादी नरेश से ही करेगी. नरेश से वह उस के मोबाइल पर बात भी करती थी. नरेश ने उसे कई बार फोन करने को मना भी किया लेकिन वह दिल के हाथों मजबूर थी, इसलिए नहीं मानी.

नरेश उस से कहता था कि हम दोनों की शादी नहीं हो सकती, क्योंकि तुम बड़े और पैसे वाले घर की लड़की हो. इस पर सीमा नरेश से कहती कि चाहे कुछ भी हो जाए, शादी मैं तुम से ही करूंगी. मैं अपने भाइयों को तुम से शादी करने के लिए मना लूंगी. सीमा ने 2-3 बार नरेश की मां जमुनादेवी से भी बात की थी. उन्होंने उसे नरेश से बातें करने से मना किया था लेकिन सीमा ने नरेश की मां को समझाया कि इलेक्शन के बाद मैं अपने भाइयों को शादी के लिए मना लूंगी.

सीमा ने जमुनादेवी को बताया कि उस ने अपनी भाभी से भी यह बात बता दी है. जमुनादेवी ने नरेश को भी समझाया था कि सीमा पैसे वाले बड़े घर की लड़की है, जिस के साथ तेरी शादी नहीं हो सकती. तू उस से बात मत किया कर. इस पर नरेश ने कहा था कि सीमा खुद फोन करती है और कहती है कि शादी करूंगी तो तुझ से वरना मर जाऊंगी.

नरेश की हत्या से 20 दिन पहले जब दोनों बात कर रहे थे तो सीमा के छोटे भाई को पता चल गया. इस के बाद उस ने नरेश को धमकी दी कि तू उस की बहन का पीछा छोड़ दे वरना अंजाम ठीक नहीं होगा. नरेश की हत्या से 7-8 दिन पहले बनवारीलाल कुशवाह ने भी सीमा से प्रेम को ले कर नरेश को अंजाम भुगतने की धमकी दी थी.

सीमा नरेश को प्रेमपत्र भी लिखती थी. एक बार वह नरेश के साथ एक मंदिर में मनौती मांगने भी गई थी, वहां नरेश ने अपने एक चचेरे भाई को सीमा से मिलवाते हुए कहा था कि यह तेरी भाभी है. हम शादी की मन्नत मांगने आए हैं.

बाद में सीमा के लिखे प्रेमपत्र नरेश के एक बैग से मिले. यह बैग काफी दिनों तक धौलपुर में उसी मकान मालिक के पास पड़ा रहा, जिस में नरेश किराए का कमरा ले कर रहता था. पुलिस ने इन प्रेमपत्रों की लिखावट की पुष्टि के लिए सीमा की स्कूल की उत्तर पुस्तिकाओं व प्रेमपत्रों की हस्तलिपि की जयपुर में विधि विज्ञान प्रयोगशाला में जांच कराई. इस में दोनों हस्तलेख एक ही पाए गए थे.

जिस दिन नरेश की हत्या की गई थी, उस दिन सीमा जयपुर में थी. इस घटना का उसे बाद में पता चला था. नरेश की हत्या से पहले ही सीमा का रिश्ता धौलपुर के रहने वाले गोरेलाल कुशवाह के लड़के आकाश से तय कर दिया गया था.

नरेश हत्याकांड की जांच के दौरान 5 जनवरी, 2013 यानी नरेश की हत्या से करीब एक हफ्ते बाद धारा 161 सीआरपीसी के तहत दर्ज कराए अपने बयानों में सीमा ने अपने व नरेश के प्रेम संबंधों को सहज व स्वाभाविक रूप से स्वीकार किया था. हालांकि बाद में वह अपने बयान से पलट गई थी. इस पर जज साहब ने अपने फैसले में लिखा कि सीमा अभियुक्त बनवारीलाल कुशवाह की सगी छोटी बहन है. बनवारीलाल कुशवाह वर्तमान में धौलपुर से निर्वाचित विधायक हैं.

कोई लड़की जो अपने प्रेमी के साथ विवाह करना चाहती हो और इस के लिए अपने घर वालों तक से बगावत कर रही हो, वह तब तक ही अपने प्रेमी का साथ देगी, जब तक उस का अपना अंतिम उद्देश्य अर्थात प्रेमी के साथ विवाह न हो जाए. लेकिन जब उस का प्रेमी ही जीवित न हो तो उस का अपने परिवार वालों के साथ बगावत करने का कोई औचित्य नहीं रह जाता. उस लड़की की लाचारी को शब्दों में वर्णित नहीं किया जा सकता, जिसे उसी घर में रहना है, जिस घर का व्यक्ति उसी के प्रेम संबंधों के चलते उस के प्रेमी की हत्या के आरोप में जेल में बंद हो.

कथा अदालत के फैसले एवं विभिन्न रिपोर्ट्स पर आधारित

नेताजी को समझ में आया कानून सबके लिए एक है – भाग 2

इस बीच, बनवारीलाल कुशवाह ने सन 2013 के आखिर में हुए राजस्थान की 14वीं विधानसभा के चुनाव में धौलपुर सीट से बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी के रूप में नामांकन पत्र दाखिल कर दिया. कहते हैं कि चिटफंड कंपनियों से मोटा पैसा कमाने और छोटे भाई बालकिशन की ससुराल राजनीतिक परिवार में होने के कारण बनवारीलाल कुशवाह की राजनीति में आने की इच्छा थी.

बनवारीलाल कुशवाह ने अपने संपर्कों के बल पर बसपा का टिकट हासिल कर लिया. राजस्थान में उस समय जनता महंगाई जैसे कारणों को ले कर सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी की सरकार बदलना चाहती थी. इसलिए भाजपा के पक्ष में लहर चल निकली. भाजपा की लहर के बावजूद धौलपुर से बसपा के टिकट पर बनवारीलाल कुशवाह विधायक चुन लिए गए.

विधानसभा चुनाव के दौरान बनवारीलाल कुशवाह द्वारा भरे गए नामांकन पत्र के साथ 8 नवंबर, 2013 को नोटरी से सत्यापित शपथपत्र में उन्होंने खुद की वार्षिक आय 1 करोड़ 47 लाख 64 हजार 130 रुपए बताई, जबकि पत्नी शोभारानी की वार्षिक आय 38 लाख 55 हजार 750 रुपए बताई. शपथपत्र में बनवारीलाल ने खुद की ओर से 18 कंपनियों में 12 करोड़ 55 लाख रुपए एवं पत्नी शोभारानी की ओर से 15 कंपनियों में 2 करोड़ 85 लाख रुपए का निवेश बताया गया. शपथपत्र में कुशवाह ने धौलपुर के गांव जमालपुर में 3.83 एकड़ जमीन, दलेलपुर में 0.63 एकड़ जमीन और धौलपुर में 20,664 वर्गफुट गैर कृषि भूमि होना बताया. इस के अलावा उन्होंने दिल्ली एवं ग्वालियर में अपनी संपत्तियां होने की बात भी कही थी.

विधायक चुने जाने के बाद बनवारीलाल कुशवाह पर विधानसभा चुनाव में गलत शपथपत्र पेश करने के आरोप भी लगे. इस संबंध में कई लोगों की ओर से अलगअलग अधिकारियों को ज्ञापन भी दिए गए. ज्ञापन में आरोप लगाए थे कि बनवारीलाल कुशवाह मध्य प्रदेश में चिटफंड धोखाधड़ी मामले में आरोपी हैं. बनवारीलाल कुशवाह भले ही धौलपुर से विधायक चुने गए, लेकिन वे गिरफ्तारी के डर से राजस्थान विधानसभा के पहले सत्र में तय समय पर शपथ लेने नहीं पहुंचे.

बाद में 6 फरवरी, 2014 को वे शपथ लेने विधानसभा पहुंचे, उस से पहले ही पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले कर पूछताछ की. पूछताछ में पता चला कि वे अंतरिम जमानत पर हैं. बाद में पुलिस ने उन्हें छोड़ दिया. इस के बाद बनवारीलाल कुशवाह ने 7 फरवरी, 2014 को विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल के चैंबर में शपथ ली. अगर वे चुनाव के 60 दिनों के भीतर शपथ नहीं लेते तो उन की विधानसभा सदस्यता रद्द हो सकती थी.

दूसरी ओर पुलिस नरेश हत्याकांड की जांच कर रही थी. एक साल से अधिक समय से मामले की जांच एक से दूसरे पुलिस अधिकारियों के बीच घूमती रही. मृतक नरेश के परिजनों द्वारा पुलिस पर लगातार काररवाई का दबाव बनाने से मामले की जांच में तेजी आई. जांचपड़ताल के बाद पुलिस ने अप्रैल 2014 में सत्येंद्र सिंह को नरेश की हत्या के आरोप में उत्तर प्रदेश की बुलंदशहर जेल से रिमांड लिया.

बुलंदशहर जिले के शिकारपुर थानाक्षेत्र के गांव करीरा के रहने वाले सत्येंद्र सिंह ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि नरेश की हत्या की साजिश धौलपुर विधायक बी.एल. कुशवाह और उस के साथियों ने रची थी. आवश्यक जांचपड़ताल के बाद धौलपुर पुलिस ने नरेश हत्याकांड में सत्येंद्र सिंह के विरुद्ध धारा 302, 120बी एवं 201 भादंसं के तहत और बनवारीलाल कुशवाह के विरुद्ध भादंसं की धारा 302 एवं 120बी के तहत मामला दर्ज कर लिया. इन के अलावा कुछ अन्य लोगों को भी इस मामले में नामजद किया गया.

नरेश हत्याकांड में नाम आने से विधायक बनवारीलाल कुशवाह की मुश्किलें बढ़ गईं. कुशवाह के साथ उन के भाई शिवराम एवं चचेरे भाई जितेंद्र कुशवाह ने जून, 2014 में धौलपुर की अदालत में अग्रिम जमानत की अर्जी लगाई. अदालत ने 6 जून, 2014 को तीनों कुशवाह भाइयों की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी. इस अर्जी में कुशवाह बंधुओं ने कहा कि नरेश की हत्या में उन्हें गलत फंसाया जा रहा है.

इस के जवाब में लोक अभियोजक अनंतराम त्यागी ने अदालत में दलील दी कि नरेश की हत्या के अपराध में पुलिस ने सत्येंद्र नामक व्यक्ति को पकड़ा था. उस ने पुलिस को बताया कि नरेश की हत्या की योजना विधायक बी.एल. कुशवाह और उस के साथियों ने बनाई थी. नरेश की हत्या के लिए 4 लाख रुपए की सुपरी दे कर बुलंदशहर से एक शूटर को भी बुलाया गया था.

त्यागी ने अदालत को बताया कि नरेश के परिजनों ने सत्येंद्र की शिनाख्त धौलपुर जिला कारागार में की थी. इस प्रकरण की जांच भरतपुर आईजी द्वारा की जा रही है. प्रारंभिक जांच में माना गया है कि नरेश हत्याकांड में बी.एल. कुशवाह का हाथ है. विधायक कुशवाह ने बाद में दूसरी अदालतों से इस मामले में अग्रिम जमानत हासिल करने के प्रयास किए, लेकिन उन्हें किसी भी अदालत से राहत नहीं मिली. पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने की कोशिशों में जुटी थी.

इसी बीच विधायक के खिलाफ मामला होने के कारण इस प्रकरण की जांच सीबीसीआईडी को सौंप दी गई. सीबीसीआईडी ने जांच कर के विधायक कुशवाह की गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए. पुलिस के बढ़ते दबाव को देख कर आखिरकार कुशवाह ने 13 अक्तूबर, 2014 को जयपुर स्थित पुलिस मुख्यालय में आत्मसमर्पण कर दिया. आत्मसमर्पण के बाद पुलिस ने विधायक बी.एल. कुशवाह को गिरफ्तार कर लिया.

पुलिस ने इस की सूचना राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल को भी दे दी. कुशवाह के आत्मसमर्पण के मौके पर सीबीसीआईडी के डीआईजी डा. गिरराज मीणा ने बताया कि मामले की जांच के दौरान पुलिस को एक सिमकार्ड की जानकारी मिली थी. यह सिमकार्ड दिल्ली स्थित गरिमा होम्स एंड फार्म्स लिमिटेड के नाम थी, जो कंपनी के कर्मचारी सत्येंद्र सिंह को जारी हुई थी.

सत्येंद्र सिंह विधायक कुशवाह का गनमैन था. नरेश की हत्या के बाद से वह भी फरार था. उत्तर प्रदेश पुलिस ने सत्येंद्र को आर्म्स एक्ट में गिरफ्तार किया था. राजस्थान पुलिस सत्येंद्र को बुलंदशहर जेल से गिरफ्तार कर के लाई थी. डीआईजी डा. मीणा ने बताया था कि सत्येंद्र सिंह ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि उस ने अपने साथी रोबिन के साथ मिल कर नरेश की हत्या की थी.

इस हत्या की साजिश विधायक बी.एल. कुशवाह ने अपने साथियों के साथ रची थी. जांच में सामने आया कि नरेश और विधायक कुशवाह की बहन के प्रेम संबंध थे. वे दोनों शादी करना चाहते थे, इसीलिए बी.एल. कुशवाह और उन के भाई नरेश को अपनी बहन से दूर रहने की चेतावनी देते थे. बाद में बी.एल. कुशवाह और उस के साथियों ने धौलपुर के मनिया स्थित गेस्टहाउस में गनमैन सत्येंद्र के साथ मिल कर नरेश की हत्या की साजिश रची थी.

नरेश की हत्या के लिए घटना से कुछ दिन पहले शूटर रोबिन सिंह को धौलपुर लाया गया था. आत्मसमर्पण के बाद पुलिस ने बी.एल. कुशवाह को दूसरे दिन अदालत में पेश कर के रिमांड पर ले लिया. बाद में अदालत के आदेश पर उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में धौलपुर जिला जेल भेज दिया गया. आवश्यक जांचपड़ताल के बाद पुलिस ने अक्तूबर, 2014 के आखिर में धौलपुर के न्यायिक मजिस्ट्रैट (एक) की अदालत में बी.एल. कुशवाह एवं सत्येंद्र सिंह के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल कर दिया.

यह प्रकरण विधिवत सुनवाई के लिए धौलपुर के सत्र न्यायालय में पहुंचा. जहां इस केस की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायायाधीश ने शुरू की. इसी बीच कुशवाह ने अपनी मां की तबीयत खराब होने की बात कह कर मां की देखभाल के लिए अंतरिम जमानत की अर्जी लगाई. अदालत ने 27 मई, 2015 को कुशवाह को 2 लाख रुपए के मुचलके पर सशर्त अंतरिम जमानत दे दी. बाद में 10 जून को कुशवाह ने धौलपुर जिला कारागार में अपनी हाजिरी दी.

नेताजी को समझ में आया कानून सबके लिए एक है – भाग 1

उस दिन तारीख थी 8 दिसंबर. राजस्थान के शहर धौलपुर के कचहरी परिसर में उस दिन आम दिनों से कुछ ज्यादा ही भीड़ थी. सर्दी होने के बावजूद लोग 10 बजे से पहले ही कचहरी पहुंच गए थे. कारण यह था कि उस दिन बहुचर्चित नरेश कुशवाह हत्याकांड का फैसला सुनाया जाना था, जिस में अभियुक्त थे धौलपुर के बसपा विधायक बी.एल. कुशवाह. अदालत के फैसले से जहां एक तरफ विधायक बी.एल. कुशवाह के भविष्य का निर्णय होना था, वहीं दूसरी ओर राजस्थान के कई प्रमुख दलों की निगाहें भी इस फैसले पर टिकी थीं.

इस की वजह यह थी कि विधायक को सजा होने पर बसपा की एक सीट कम हो जाती, जिस के लिए उपचुनाव होना तय था, क्योंकि राजस्थान में मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल दिसंबर 2018 तक था.  अदालत ने नरेश कुशवाह हत्याकांड का फैसला सुनाने की तारीख 8 दिसंबर पहले ही तय कर दी थी. सत्र न्यायाधीश सलीम बदर निर्धारित समय पर अदालत पहुंच गए. उन्हें ही इस केस का फैसला सुनाना था. पुलिस गार्ड भी अभियुक्तों बी.एल. कुशवाह और सत्येंद्र सिंह को जेल वैन में ले कर समय पर अदालत आ गए थे.

अपर सत्र न्यायाधीश के कुरसी संभालते ही अदालत में सन्नाटा छा गया. दोनों अभियुक्त तो अदालत में थे ही, मृतक नरेश कुशवाह के घर वाले, राज्य सरकार की ओर से नियुक्त लोक अभियोजक अजय कुमार गुप्ता, विपक्ष के वकील रामकुमार शर्मा और सत्येंद्र सिंह के वकील सुरेंद्र शर्मा भी अदालत में मौजूद थे. अदालत में शांति बनाए रखने का आदेश देने के बाद न्यायाधीश महोदय ने अपना फैसला सुनाना शुरू किया,

‘‘अदालत ने दंड के रूप में दी जाने वाली सजा पर दोनों पक्षों को ध्यान से सुना. अभियुक्तों के वकीलों का तर्क है कि इस से पहले अभियुक्तों ने कोई भी अपराध नहीं किया है. उन के विरुद्ध अपराध भी पहली बार सिद्ध हुआ है, जो जघन्य से जघन्यतम नहीं है. इसलिए उन्हें दिए जाने वाले दंड में नरमी बरती जानी चाहिए. जबकि लोक अभियोजक अजय कुमार गुप्ता ने नरेश कुशवाह हत्याकांड को जघन्य अपराध बताते हुए अधिकतम दंड देने की गुजारिश की है.’’

न्यायाधीश महोदय ने अपना फैसला सुनाते हुए आगे कहा, ‘‘दोनों पक्षों के तर्कों पर मनन करने के बाद अदालत इस नतीजे पर पहुंची है कि आरोपी बनवारी लाल कुशवाह की छोटी बहन सीमा कुशवाह का प्रेम संबंध नरेश कुशवाह के साथ था और वह नरेश से प्रेम विवाह करना चाहती थी. लेकिन दोनों परिवारों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति में कोई बराबरी नहीं थी. सीमा का परिवार आर्थिक रूप से समृद्ध और रौबरुतबे वाला था. जबकि नरेश एक साधारण किसान का बेटा था.

‘‘आरोपी बनवारी लाल को यह बात बरदाश्त नहीं थी कि उस की बहन ऐसे युवक से शादी करे जिस का परिवार उस के परिवार के साथ खड़ा होने लायक ही न हो, इसलिए उस ने नरेश कुशवाह की हत्या का षडयंत्र रचा और अपने निजी सुरक्षाकर्मी सत्येंद्र सिंह और उस के करीबी रोबिन सिंह को पैसा दे कर नरेश कुशवाह की हत्या करवा दी, जो औनर किलिंग की श्रेणी में आती है. माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने ऐसी घटनाओं पर अत्यधिक कड़ा रुख अपनाते हुए दिशानिर्देश दिए हैं कि ऐसे अपराधियों को मृत्युदंड से दंडित किया जाना चाहिए.’’

न्यायाधीश श्री सलीम बदर ने इस संबंध में कुछ उदाहरण पेश करने के बाद कहा, ‘‘प्रस्तुत मामले में आरोपी बनवारीलाल कुशवाह ने अपने धनबल का प्रयोग कर के किराए के हत्यारों से नरेश कुशवाह की हत्या इसलिए कराई ताकि उस की बहन सीमा उर्फ सुषमा नरेश से प्रेम विवाह न कर सके. इस के लिए सत्येंद्र सिंह और रोबिन सिंह को पैसा दिया गया. इस केस की तमाम पत्रावलियों और साक्ष्यों पर गौर करने के बाद अदालत इस नतीजे पर पहुंची है कि इस केस की परिस्थितियां ऐसी नहीं हैं कि इसे जघन्य से जघन्यतम माना जाए.’’

न्यायाधीश महोदय ने एक नजर अदालत में मौजूद लोगों पर डाली और फिर अपना फैसला सुनाने लगे, ‘‘अदालत आरोपी सत्येंद्र सिंह जाट, निवासी जलालपुर करीरा, जिला बुलंदशहर को भादंसं की धारा 302 और धारा 120बी के तहत हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास व 10 हजार रुपए का दंड देती है.’’

कुछ देर रुक कर न्यायाधीश महोदय ने उचटती नजरों से बी.एल. कुशवाह की ओर देखा और फिर अपना फैसला सुनाने लगे, ‘‘आरोपी बनवारीलाल कुशवाह, निवासी जमालपुर, जिला धौलपुर पर भादंसं की धारा 120बी सपठित धारा 302 भादंवि के आरोप साबित हुए हैं. अत: बनवारीलाल कुशवाह को भी आजीवन कारावास और 10 हजार रुपए के अर्थदंड की सजा दी जाती है.’’

इस केस के अन्य अभियुक्तों के विरुद्ध चूंकि अभी जांच चल रही थी, इसलिए न्यायाधीश महोदय ने पुलिस को आदेश दिया कि जल्दी से जल्दी जांच और गिरफ्तारी का काम किया जाए. अदालत का फैसला सुन कर विधायक बनवारीलाल कुशवाह व सत्येंद्र सिंह के चेहरे उतर गए. जबकि मृतक नरेश कुशवाह के पिता मेघसिंह और मां जमुना देवी ने इस फैसले पर खुशी जताई.

अदालत के निर्णय के बाद पुलिस बल ने दोनों आरोपियों को अपनी कस्टडी में ले लिया. अब उन्हें आगे की जिंदगी जेल में काटनी थी. दरअसल, 27 दिसंबर, 2012 को झीलकापुरा गांव के रहने वाले थानसिंह कुशवाह ने धौलपुर के सदर पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई कि 2 युवक लाल रंग की डिसकवर मोटरसाइकिल पर उन के घर आए और उस के भाई नरेश कुशवाह को बुला कर ट्यूबवेल पर ले गए.

कुछ देर बाद उस ने गोली चलने की आवाज सुनी तो वह छोटे भाई पुष्पेंद्र और अन्य ग्रामीणों के साथ खेत में स्थित ट्यूबवेल पहुंचा. वहां वे दोनों युवक नरेश को गोली मार रहे थे और कह रहे थे कि जान से मार डालो. जब हम लोग वहां पहुंचे तो दोनों हमलावर मोटरसाइकिल पर बैठ कर भाग गए. हम नरेश को अस्पताल ले कर गए, जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

उसी दिन पुलिस ने सदर थाने में मुकदमा संख्या 316/2012 धारा 302 के तहत दर्ज कर लिया. हत्या की सूचना पर तत्कालीन पुलिस अधिकारियों में एएसपी किशन सहाय, सीओ सिटी दशरथ सिंह, थानाप्रभारी हवा सिंह आदि मौके पर पहुंचे. पुलिस ने मौका मुआयना कर के पूछताछ की लेकिन यह पता नहीं चला कि नरेश की हत्या करने वाले कौन थे और हत्या की वजह क्या थी.

पुलिस ने उसी दिन नरेश के शव का पोस्टमार्टम करा कर उस के घर वालों को सौंप दिया. पुलिस ने मामले की जांचपड़ताल शुरू की. पुलिस के सामने परेशानी यह थी कि हत्यारे अज्ञात थे. उन का कोई अतापता नहीं चल पा रहा था. पुलिस ने मृतक नरेश के घर वालों से पूछताछ की तो उन्होंने इस बात की आशंका जताई कि नरेश की हत्या प्रभावशाली लोगों के इशारे पर की जा सकती है.

इन प्रभावशाली लोगों में बनवारीलाल कुशवाह का नाम सामने आया. बनवारीलाल कुशवाह का मध्य प्रदेश व अन्य कई जगहों पर चिटफंड का लंबाचौड़ा कारोबार होने की बात भी पता चली. यह भी पता चला कि बनवारीलाल कुशवाह मध्य प्रदेश के पूर्व गृह राज्यमंत्री और मौजूदा विधायक नारायण सिंह का रिश्तेदार है. नरेश की हत्या की वजह यह पता चली कि नरेश का बनवारीलाल कुशवाह की बहन सीमा उर्फ सुषमा से प्रेम प्रसंग चल रहा था.

सीमा नरेश से विवाह करना चाहती थी. बनवारीलाल इस के खिलाफ था. इस की वजह यह थी कि नरेश बेहद गरीब परिवार से था, जबकि सीमा आर्थिक एवं राजनीतिक रूप से संपन्न परिवार की बेटी थी. बनवारीलाल ने एकदो बार दूसरों के माध्यम से नरेश को इस बात के लिए आगाह भी किया था, लेकिन सीमा नरेश से ही शादी करना चाहती थी. संभव है इसी बात को ले कर नरेश की हत्या की गई हो.