Bihar Crime : पत्नी पर बेवजह शक करना ठीक नहीं

Bihar Crime : समस्तीपुर से दुबई काम करने गए उदय कुमार राय को जब पत्नी रीना राय के अवैध संबंधों की खबर मिली तो वह दुबई से घर लौट आया. फिर वह मन में बैठ चुके शक को ले कर पत्नी से रोजाना झगडऩे लगा. इसी शक के चलते घर में ऐसा खून बहा कि…

बिहार के समस्तीपुर जिले की तहसील ताजपुर के हरिपुर भिंडी गांव का रहने वाला उदय कुमार राय काम करने के लिए दुबई गया हुआ था. इसी साल वह फरवरी में होली से पहले गांव आ गया था. उस के आने से परिवार में खुशी का माहौल बना हुआ था. बच्चे खुश थे. उदय की मम्मी भी खुश थीं. पापा का निधन हो चुका था. विधवा मम्मी उस के आते ही बोलीं, ”बेटा, अब दुबई मत जाना, यहीं गांव में कुछ कामधंधा कर लो. उसी से परिवार का गुजारा हो जाएगा. ’ ’

”ठीकी कह हीं माई…अब हम एहिजे रह के कुछ करबै! ’ ’ उदय ने भी मम्मी की हां में हां मिला दी. उस वक्त उस की पत्नी रीना भी वहीं थी. वह तुरंत आंचल को दांतों तले दबाती हुई ‘हुंह! ’ कह कर से चली गई.

”हम्मे कुछ गलत कहलिया, जे तू मुंह चमका के चल गेलहू! हियां के खेतपथार कौन देखतय…अब हमरा ताकत है…बाबूजी जिंदा रहथुन हल तब कोनो बात नय हलै! उन कर पीछे में उदइये ने हय देखेभाले वाला. गोतिया खेत पर नजर लगैले है, से अलगे समस्या है. ’ ’

पत्नी के मुंह बिदका कर अचानक चले जाने पर उदय को भी बुरा लगा था. वह उस के चेहरे के भाव को देख कर उस के दिलोदिमाग में क्या है, समझने की कोशिश करने लगा था. मम्मी से बातें करते वक्त वह पत्नी को घूरता हुआ ऐसे देख रहा था, जैसे उस के मन में छिपी बात को जानना चाहता हो. शाम हुई. सालों बाद पूरे परिवार ने एक साथ बैठ कर खाना खाया. बच्चों के चेहरे खिले हुए थे. उस रोज कुछ खास पकवान खीर भी पकाई थी. खाना खाते वक्त अपने बच्चों को पुचकारते वक्त भी उस की नजर पत्नी के चेहरे पर ही जमी हुई थी. उस ने महसूस किया कि पत्नी के चेहरे पर खुशी की वह चमक नहीं है, जो उस के आने पर होनी चाहिए थी.

दरअसल, उदय के मन में भी शंका का कीड़ा कुलबुला रहा था. जब तक उसे खत्म नहीं कर लेता, तब तक उस के मन को चैन नहीं मिलने वाला था.

रात हुई. लंबे अरसे बाद वह देर रात को पत्नी के साथ बिस्तर पर था. रीना उसे परे धकेलती हुई बोली, ”दारू पी कर आए हो? ’ ’

”अरे का बताएं…विनोदवा जबरदस्ती पिला दिया. ’ ’

”दुन्हो जेल जैबा…हिंया दारू बंद है… जानत हो न कि..? ’ ’ रीना बोली.

”कोय पुलिस में बतयते तबे न! ’ ’ उदय बोला.

”हम्हीं बता देवो तब? ’ ’ मुसकराती हुई रीना बोली.

”सुबह से अब तुम्हारे चेहरे पर मुसकान दिखी है! ’ ’ चहकता हुआ उदय बोला और उसे अपनी ओर खींचने लगा.

”चलो हटो, दारूबाज से कोई समझौता नहीं! ’ ’ रीना तीखेपन के साथ बोली और वहां से बच्चों के कमरे में चली गई.

उस के जाने के बाद उदय कशमकश में आ गया. दारू का नशा कमजोर पडऩे लगा था. जब तक उस के दिमाग में कई बातें अचानक घूम गई थीं. वे बातें जो विनोद ने दारू पीते वक्त बताई थीं… और वे बातें भी जो उस के दुबई में रहते हुए उसी ने फोन पर बताई थीं… उन के तार रीना के पूरे दिन उस के साथ किए गए बरताव के साथ जोडऩे लगा… बुदबुदाया, ”…तो इस के सच का पता लगाना ही होगा? ’ ’

कब उसे नींद आ गई, इस का उसे पता ही नहीं चला. उस की नींद तब खुली, जब खिड़की से आने वाली सूरज की रोशनी उस की आंखों पर पड़ी. बच्चों ने उसे झकझोरते हुए उठाया था. उस के कानों में विनोद की भी आवाज सुनाई दी, ”का रे उदयवा…खेत पर चले के ना हव का! ’ ’

”हांहां, जाय के है कि…चल न कोय काम दिला दीहे. ’ ’

इस तरह दुबई से आने के बाद उदय की नई दिनचर्या शुरू हो गई थी. उस का हमउम्र चचेरा भाई विनोद दोस्त की तरह जो मिल गया था.

दोनों के बीच खुल कर बातें होती थीं. शराब की ललक दोनों को बनी रहती थी. ब्लैक में ही सही, लेकिन इस का इंतजाम विनोद करता था, लेकिन जेब ढीली उदय की होती थी. वह दुबई से कमा कर लाए पैसे दारू पर उड़ाने लगा था. आए दिन शराब पी कर ही घर आता था. इस पर उस की पत्नी रीना के साथ हमेशा तकरार होने लगी थी. रीना उदय को शराब पीने से रोकती थी, जबकि वह पत्नी की बात को अनसुनी कर देता था. रीना उस पर शराब में पैसे उड़ाने का आरोप लगा कर खूब खरीखोटी भी सुनाने लगी थी.

उस दिन 21 अगस्त की रात को तो हद ही हो गई थी. बरसात का मौसम था, लेकिन दिन में तेज धूप निकली थी, जिस से उस रात उमस भरी गरमी थी. रीना ने छत पर ही सोने का इंतजाम किया हुआ था. घर के नीचे बरामदे में बच्चे अपनी दादी के साथ सोए हुए थे. उसी घर के बरामदे में उदय का चाचा रामपुकार राय भी सोया हुआ था. उस की अपने बेटे विनोद राय और बहू से नहीं बनती थी, इस कारण वह उदय के परिवार के साथ ही रहता था. उदय के पापा की मृत्यु हो चुकी थी, इस कारण वह अपने चाचा को परिवार में एक सहारे के नजरिए से देखता था.

उसी के बारे में विनोद ने उदय को काफी अनापशनाप कान भर रखे थे. उस का कहना था कि उस के पापा रामपुकार के साथ उस की बीवी रीना राय के अवैध संबंध हैं. हालांकि इस में कितनी सच्चाई थी, इस का सबूत किसी के पास नहीं था, किंतु उदय के मन में इस बात का संदेह घर कर चुका था. उस रोज भी उदय नशे में जरूर था, लेकिन पूरी तरह से होशोहवास में बातें कर रहा था. रीना को प्यार से पुचकारते हुए अभद्र हरकत करने लगा था तो रीना ने उसे झिड़क दिया. फिर भी उस ने रीना की मरजी के बगैर उस से संबंध बनाए थे. इस में पत्नी ने बेमन से साथ दिया था और वह चिढ़ गई थी. चिढ़ती हुई गुस्से में बोल पड़ी, ”तुम्हारा यहां रहने से अच्छा है कि तुम फिर से दुबई ही चले जाओ. ’ ’

”हांहां, तुम तो चाहोगी ही…कि मैं यहां से चला जाऊं और तुम यहां बिना किसी रोकटोक के गुलछर्रे उड़ाओ! ’ ’

”मैं यहां गुलछर्रे उड़ाती हूं…और तुम क्या करते हो? दारू में पैसे कौन उड़ा रहा है? मैं या तुम? ’ ’

”मुझे सब पता है, तुम मेरे पीछे यहां क्या गुल खिला रही हो?…किस का बिस्तर गरम करती हो? मैं सब कुछ जान गया हूं! ’ ’ उदय बोला.

यह सुन कर रीना अवाक हो गई थी. उसे गुस्से में देखने लगी थी.

”मुझे क्या घूर रही हो…खा जाओगी? ’ ’

”तुम क्या सब गलतसलत बोले जा रहे हो नशे में…कोई सुनेगा, तब क्या कहेगा? ’ ’

दोनों के बीच बहस का दौर चलता रहा. काफी देर तक दोनों एकदूसरे पर कीचड़ उछालते रहे. थोड़े समय में उदय छत से नीचे आ कर अपने कमरे में सो गया. वैसे तो 22 अगस्त, 2025 की सुबह पिछली कुछ दिनों की सुबह जैसी ही थी. आसमान में बारिश के आसार नजर आ रहे थे, लेकिन सूर्योदय की धूप निकल चुकी थी. उदय अपने कमरे में अधूरे बिस्तर पर सोया हुआ था, लेकिन घर में रीना नजर नहीं आ रही थी. बच्चे अभी सो रहे थे, लेकिन उदय की मम्मी थारा देवी जाग चुकी थीं.

उन्होंने बहू को आवाज लगाई. उस की आवाज का कोई जवाब नहीं मिला…रीना को बच्चों को स्कूल जाने के लिए तैयारी करनी थी. वह बड़बड़ाती हुई धीरेधीरे सीढिय़ां चढ़ कर छत पर चली गईं. वहां उस ने जो देखा, उन की आंखों पर भरोसा नहीं हुआ. कुछ पल में ही उन की चीख निकल गई. तेजी से उलटे पैर नीचे चली आईं और उदय को झकझोर कर जगाया. दरअसल, छत पर उन की 25 वर्षीय बहू रीना राय मृत पड़ी थी… उस के बिस्तर पर खून ही खून था, जो सूख चुका था. उस की किसी ने गरदन रेत कर हत्या कर दी थी.

रोती हुई थारा देवी छत पर बहू रीना का गला कटा देख कर विचलित हो गईं. उलटे पैर भागीभागी उदय के पास आईं. उसे झिंझोड़ कर जगाया. छत पर मृत पड़ी रीना के बारे में बताया. हड़बड़ाता हुआ उदय छत पर दौड़ता हुआ गया. वहीं से चिल्लाने लगा, ”माई रे! विनोदवा मरिये देल को! गरदन काटिए देल को रीनवा के! ’ ’

छत से नीचे आया. चीखनेचिल्लाने लगा. घर में चीखपुकार मच गई. पड़ोसियों की भीड़ जुट गई. रक्तरंजित लाश जिस ने भी देखी, दांतों तले अंगुली दबा ली. कुछ देर में पुलिस भी आ गई. काफी संख्या में लोग वहां जुट गए. साथ ही ताजपुर, हलई, मुसरीघरारी, सरायरंजन, वैनी, सहित अन्य कई थानों की पुलिस पहुंच गई.

ताजपुर थाने के एसएचओ शंकर शरण दास ने जांच के लिए पुलिस टीम को आवश्यक निर्देश दिए. एफएसएल की टीम ने मामले की जांच में स्पष्ट किया कि रीना की गला काट कर हत्या की गई है. मौके का मुआयना करने के बाद मृतका के पति उदय और उस की सास से पूछताछ की गई. उदय ने पत्नी की हत्या का आरोप सीधेसीधे अपने चचेरे भाई विनोद राय पर लगा दिया. मृतका के पापा अखिलेश कुमार, जो वैशाली में रहते थे, खबर सुन कर वहां आ चुके थे. पुलिस ने उन से भी पूछताछ की.

उन्होंने बताया कि 2018 में उन की बेटी रीना की शादी उदय कुमार राय से हुई थी. सब कुछ ठीक चल रहा था. सुबह उन्हें जानकारी मिली कि उन की बेटी की छत पर ही किसी ने गला काट कर हत्या कर दी. उन्होंने बताया कि उदय के साथ चचेरे भाई का जमीनी विवाद चल रहा था. इसलिए हो सकता है कि इसी कारण इस घटना को अंजाम दिया गया हो. छत बिलकुल सटी होने के कारण कोई भी उस छत से इस छत पर कूद सकता है.

रीना के 4-5 साल के 2 छोटेछोटे बच्चे हैं. शक के आधार पर पुलिस ने पूछताछ के लिए चचेरे देवर विनोद राय को हिरासत में लिया. पति उदय राय ने बताया कि गरमी के चलते रीना रात में छत पर सोई हुई थी. देर रात मैं शौच के लिए नीचे आया था. मोबाइल चार्ज भी नहीं था. इस वजह से मोबाइल चार्ज लगा कर नीचे ही सो गया था. सुबह पत्नी काफी देर तक नीचे नहीं उतरी. तब उस की मम्मी रीना को उठाने के लिए छत पर गई थीं, जहां उन्होंने उसे मृत पाया था. उस का गला रेता हुआ और आसपास खून पसरा हुआ था.

पुलिस ने उदय और विनोद राय के घर का मुआयना किया. पता चला कि उदय का चचेरे भाई विनोद राय से दरवाजे पर चारदीवारी  को ले कर झगड़ा चल रहा था. एक सप्ताह पहले भी मारपीट की घटना हुई थी. विनोद की रीना के साथ भी मारपीट हुई थी. इस संबंध में थाने में शिकायत भी दी गई थी, लेकिन पुलिस ने कोई काररवाई नहीं की थी. इस आधार पर ही उदय ने दावा किया कि विनोद ने ही पत्नी को मारा है.

पुलिस को यह मालूम हुआ कि विनोद राय के पापा रामपुकार राय अपने बेटे और बहू को छोड़ कर उदय राय के साथ रहते थे. जब इस बारे में तहकीकात की गई, तब मालूम हुआ कि विनोद इस बात को ले कर भी अपने पापा से नाराज रहता था. कई बार इसे ले कर पंचायत भी हुई. इस के बाद भी रामपुकार राय अपने भतीजे उदय के साथ ही रह रहा था. पुलिस इस एंगल से भी हत्याकांड की छानबीन करने लगी. हालांकि पुलिस को कई अहम सुराग जल्द ही मिल गए थे. हत्याकांड में इस्तेमाल किया गया तेज धारदार चाकू बरामद कर लिया गया, जो लाश के पास ही बिस्तर के नीचे था.

इस मामले की रिपोर्ट रीना राय (25) के पिता अखिलेश कुमार राय द्वारा 22 अगस्त, 2025 को लिखवाई गई थी. मामले का पहला अभियुक्त विनोद राय (48) के अलावा उस के पापा रामपुकार राय (65), विनोद की पत्नी पानवती देवी (45) और उस की 18 वर्षीया बेटी सुष्मिता कुमारी को बनाया गया. उन्हें बीएनएस की धारा 103 (1) 3(5) के तहत आरोपी बनाया गया था.

रीना के शव को पोस्टमार्टम के बाद उदय को सौंप दिया गया था, जिस के अंतिम संस्कार के बाद 13 दिनों के श्रद्मद्धकर्म का अनुष्ठान किया गया था. हालांकि इस बीच पुलिस की छानबीन चलती रही. पुलिस ने विनोद को इसी शक के आधार पर हिरासत में ले रखा था कि उस का पहले उदय से विवाद हुआ था. इस संबंध में पुलिस ने विनोद से पूछताछ की. उस ने जो बयान दिया, उस से पूरी जांच की दिशा ही बदल गई. पुलिस ने खोजबीन की तो उदय पर ही शक गहरा गया.

उदय तो खुद को बेकसूर साबित करने में लगा था. लेकिन पुलिस ने रीना की तेरहवीं तक का इंतजार किया, क्योंकि वही सारे क्रियाकर्म कर रहा था. पुलिस चुपचाप घर के पास डेरा डाले रही और कर्मकांड पूरे होने का इंतजार करने लगी. जैसे ही तेरहवीं का काम पूरा हुआ, पुलिस ने उदय को गिरफ्तार कर पूछताछ की तो उदय कुमार राय ने आखिरकार अपनी पत्नी की हत्या करने का जुर्म कुबूल कर लिया और कहा कि शक और शराब के नशे में उस ने यह कर डाला.

उदय ने बताया कि 21 अगस्त की रात वह शराब पी कर घर लौटा और पत्नी को सोने के बहाने छत पर ले गया. उस ने फिर पत्नी से चाचा और उस के अवैध संबंधों के बारे में पूछा, लेकिन पत्नी से फिर वही जवाब मिला. इस के बाद उस ने पत्नी संग जबरन शारीरिक संबंध बनाए. जब पत्नी सो गई तो उस ने तकिए के नीचे से चाकू निकाला और पत्नी रीना का गला रेत दिया. रीना तड़पती रही तो उस ने उस का मुंह बंद कर दिया और हाथपैर जकड़ लिए.

हत्या को अंजाम देने के बाद वह चुपचाप छत से नीचे आ कर सो गया. सुबह जब उस की मम्मी छत पर गईं तो रीना की खून से सनी लाश दिखी. चीखपुकार सुन कर वह भी ऊपर पहुंचा और रोने का नाटक करने लगा. बाद में उस ने पत्नी के मर्डर का आरोप चचेरे भाई विनोद पर लगा दिया. वह खुद को मासूम साबित करने में लगा था, लेकिन पुलिस जांच में उस की सारी चालाकी धरी की धरी रह गई. पुलिस ने जांच पूरी कर पत्नी की हत्या के आरोपी उदय कुमार राय को मजिस्ट्रैट के सामने पेश किया. वहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. पुलिस ने विनोद राय, उस के पापा रामपुकार राय, पत्नी पानवती देवी और बेटी सुष्मिता कुमारी को बेकसूर मानते हुए छोड़ दिया था. Bihar Crime

 

 

पूरे परिवार को लील गया सूदखोरों का आतंक

समस्तीपुर जिले में विद्यापति नगर थाना क्षेत्र के मऊ धनेशपुर दक्षिण गांव में मनोज झा के परिवार में थोड़ी चहलपहल थी. कई दिनों बाद परिवार में खुशी का माहौल बना था. क्योंकि मनोज झा की 2 महीने पहले ब्याही गई बेटी निभा अपने पति आशीष के साथ मायके आई थी.

उन के लिए साधारण दिनों से अच्छा अलग खाना पकाया जाना था. शाम होने से पहले मनोज झा मछली ले कर आए थे. मछली देख कर उन की पत्नी सुंदरमणी देवी तुनकती हुई बोली, ‘‘ई मछली पकतई कैसे?’’

‘‘काहे की भेलई?’’ मनोज झा ने आश्चर्य से पूछा.

‘‘की भेलई! गैस सिलेंडर ले गेलई हरामजादा!’’ सुंदरमणी बोली.

‘‘के ले गेलई, अहां के बुझौव्वल काहे बुझाव छियय हो सत्यम के माई.’’ मनोज बोले.

‘‘अरे मनोज, हम बताव छियय. सहुकरवा के दूगो आदमी आइल छियय. खूब गोस्सा में गारीगलौज कैलकय. हम केतनो समझैलियय, लेकिन नय मानलौ औ सिलेंडर उठा के लो गेलौ.’’ मनोज झा की विधवा मां सीता देवी दुखी मन से बोलीं.

‘‘ओक्कर ई मजाल, किश्त के सूद लेवे के बाद ई हरकत कईलकय. अच्छा, कल्हे जा के ओकरा से फरिया लेव. लकड़ी पर पकावे के इंतजाम कअर्.’’ सुंदरमणी की ओर मुंह कर मनोज बोले.

अपने पिता, मां और बाबूजी की बातें निभा भी सुन रही थी. वह जानती थी कि उस के पिता पिछले 5 साल से कर्ज में डूबे हैं. कर्ज की किश्तें नहीं चुकाने के चलते घर की आर्थिक स्थिति काफी बिगड़ी हुई है. उन्होंने बड़ी दीदी किरण की शादी में जो कर्ज लिया था, वह अभी तक नहीं चुक पाया था. वह उदास मन से मछली का थैला ले कर आंगन में धोने चली गई.

निभा के दिमाग में अचानक किरण की शादी का वह दृश्य घूम गया. बारात आने वाली थी. सब कुछ ठीक से चल रहा था, लेकिन मनोज झा एक कोने में उदास बैठे थे. उन के सामने गांव का एक आदमी भी बैठा था. वह एकदम से झकाझक कुरता पायजामे में दबंग की तरह दिख रहा था.

उस ने पिता मनोज का हाथ पकड़ रखा था. निभा उन के लिए एक गिलास पानी और प्लेट में नाश्ता ले कर गई थी. दरअसल, वह संभ्रांत व्यक्ति चौधरी था. गांव का ही था और गांव में किसी की भी मदद के लिए तत्पर रहता था. राजनीति करता था. किसानों और छोटेछोटे काम करने वालों के लिए जरूरी पूंजी का कर्ज देता था.

निभा ने उसे बोलते हुए सुना, ‘‘देख मनोज, तेरा दुख मुझ से छिपा नहीं है. बाबूजी के कर्ज का तू मेरा कर्जदार है, वह आज नहीं तो कल चुका ही देगा. लेकिन शादीब्याह के मौके पर तुम्हें अकेला कैसे छोड़ सकता हूं….अरे मेरा भी फर्ज है कि नहीं. गांव की बेटी है. अच्छे से शादी संपन्न हो जानी चाहिए. बराती के स्वागत में कोई कमी नहीं रहनी चाहिए. बाजाबत्ती के लिए हम ने इंतजाम कर दिया है. गांव वालों को भी लगना चाहिए कि ब्राह्मण परिवार की शादी है.’’

‘‘बाबूजी, ई नाश्ता और पानी,’’ निभा बोली.

‘‘हांहां, लाओ बेटी.’’ चौधरी हाथ बढ़ा कर निभा के हाथ से प्लेट लेते हुए बोला, ‘‘पानी यहीं नीचे रख दे. और तू जा! मम्मी दादी की मदद कर.’’

‘‘अरे निभा इतना धीमेधीमे क्यों साफ कर रही है, जरा तेजी से हाथ चला. अंधेरा होने से पहले मछली तल लेना है. लाइट भी कट गई है.’’ मम्मी की आवाज सुन कर पुरानी यादों में खोई निभा हड़बड़ाहट में बोली, ‘‘हां मम्मी, अभी करती हूं.’’

‘‘क्या हुआ बेटी, लगता है तू कहीं खोई हुई थी,’’ मां सुंदरमणी बोली.

‘‘हां मम्मी, चौधरी का आदमी किस्त लेने आया था न?’’ निभा ने सवाल किया.

‘‘अरे बेटी तू क्यों इन बातों को याद करती हो… तू और दामादजी तो 1-2 दिन की हमारे मेहमान हो. अपने परिवार के बारे सोचो.’’ मां ने समझाया.

‘‘नहीं मां, बताओ न दीदी की शादी का कर्ज ही अभी तक चला आ रहा है न?’’ निभा ने जानने की जिद की.

‘‘क्या करोगी जान कर, वह एक कर्ज थोड़े है. कर्ज पर कर्ज लद चुका है. कोरोना में काम खत्म हो गया तो कर्ज और बढ़ गया. अब तो क्या बताऊं…’’ मां मायूस हो गई और आंचल के पल्लू से नम हो चुकी आंखें पोछती हुई चली गई.

आर्थिक तंगी से जूझते हुए एक परिवार की यह बात 5 जून, 2022 की है. उस परिवार के मुखिया 45 वर्षीय मनोज झा थे, लेकिन परिवार की सब से बड़ी सदस्या 66 वर्षीया सीता देवी थीं. उन के पति की साल भर पहले आकस्मिक मौत हो गई थी. बताते हैं कि वह भी कर्ज में डूबे थे और उन्होंने आत्महत्या कर ली थी.

परिवार के दूसरे सदस्यों में मनोज झा की 42 वर्षीया पत्नी सुंदरमणी के अलावा 2 बेटे सत्यम (8) और शिवम (7) थे. मनोज की दोनों बेटियों किरण और निभा की शादी हो चुकी थी और वे अपनीअपनी ससुराल में रह रही थीं. हालांकि दोनों बेटियां अपने मायके का हालसमाचार लेती रहती थीं और बीचबीच में उन से मिलने आतीजाती रहती थी.

इसी सिलसिले में निभा अपने पति के साथ मायके आई थी. उस के आने की सूचना मां ने फोन पर पति को देते हुए चावल और आटा लाने को भी कहा था. यह सब निभा ने भी सुन लिया था. मायके में अपने मातापिता, दादी, छोटेछोटे भाइयों की हालत देख कर उसे बहुत दुख हुआ था.

अपने घर की आर्थिक स्थिति खराब होने के बावजूद मनोज झा अपने दामाद की खातिरदारी में कोई कमी नहीं रहने देना चाहते थे. उन को स्पैशल खाना खिलाने के लिए मछली ले कर आए थे. घर के आंगन में मछली और चावल पकते हुए रात के करीब 9 बज गए थे. सीता देवी और सुंदरमणी को छोड़ कर सभी ने मछली भात खाया था. शिवम और सत्यम के लिए उस दिन का बेहद ही मजेदार खाना था, लेकिन रात को लालटेन की रोशनी में मछली खाने में उसे काफी समय लग गया था.

रात के साढ़े 10 बज चुके थे. छोटे से घर में सभी के लिए सोने का इंतजाम भी करना था. उस काम में निभा ने अपनी मां की मदद की. उस दिन गरमी अधिक थी. सोने के इंतजाम के तौर पर मनोज झा ने अपने छोटे बेटे को ले कर गेट पर अपना बिस्तर लगा लिया, जबकि सासबहू और सत्यम एक कमरे में चले गए. निभा ने अपने पति के साथ उस के ठीक बगल के कमरे में अपना बिछावन लगा ली.

अगले दिन निभा की नींद शोरगुल के साथ टूटी. सूरज निकल चुका था और बाहर गेट पर कई लोग उस के पापा को पुकार रहे थे. उन में एक आवाज उस के चचेरे भाई की भी थी. उस ने तुरंत अपने पति को जगाया और कमरे से बाहर आई. बाहर आते ही उस की नजर बगल के कमरे में खुले दरवाजे पर गई. उस के बाहर ही कुछ लोग खड़े थे. दरवाजे से उस के पिता, मां और दादी फंदे से झूलते दिख रहे थे. उन के बाद पीछे की ओर उस के दोनों भाई भी फंदे में लटके थे.

इस दृश्य को देख कर निभा वहीं धड़ाम से गिर पड़ी. उसे पति ने किसी तरह संभाला. उस समय सुबह के करीब 6 बज चुके थे. उस दृश्य को देख कर लोग तरहतरह की बातें करने लगे. किसी ने कहा उन्हें मार कर फांसी पर लटका दिया गया है. तो कोई कहने लगा मनोज ने सभी को जहर दे कर मार डाला, फिर उन्हें फांसी पर लटका दिया होगा.

इस घटना ने दिल्ली में बुराड़ी की सामूहिक आत्महत्या की घटना की याद ताजा कर दी. घर और गांव में कोहराम मच गया. एक परिवार के सामूहिक मौत की खबर जंगल में आग की तरह पूरे गांव से हो कर जिला मुख्यालय तक जा पहुंची.

घटना की सूचना पा कर दलसिंह सराय के एसडीपीओ दिनेश पांडेय समेत विद्यापति नगर थाने की पुलिस पूरे फोर्स के साथ घटनास्थल पर पहुंच गई. इसी बीच मनोज झा की बड़ी बेटी किरण और परिवार के दूसरे सदस्यों को इस की सूचना मिल गई. वे लोग भी तुरंत वहां पहुंच गए.

राजधानी पटना से फोरैंसिक विभाग की 5 सदस्यीय टीम भी पहुंच गई. सभी ने घटनास्थल का जायजा लिया. निरीक्षण के बाद टीम के सदस्यों ने शवों को फांसी के फंदे से उतार कर समस्तीपुर सदर अस्पताल पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए. इसी के साथ मनोज झा के घर को जांच के लिए सील कर दिया गया.

घटना के बाद से मऊ धनेशपुर दक्षिण गांव में मीडिया, विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं समेत गैर राजनीतिक संस्थाओं के लोगों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया, जो कई दिनों तक जारी रहा. मनोज झा के परिजनों से उस रोज की पारिवारिक गतिविधियों के बारे में जुटाई गई जानकारी के मुताबिक सीता देवी ने एक दिन पहले ही अपनी बेटी यानी मनोज की बहन रीना झा से बात की थी. उन्होंने उस से अपने घर की माली हालत का दुख सुनाया था.

यहां तक कहा था कि सूदखोर घर का गैस सिलेंडर तक ले जा चुके हैं. गांव में रहने की इच्छा अब नहीं होती है. हर दूसरे दिन साहूकार का आदमी कर्ज की किश्त मांगने आ धमकता है. उसी दिन उन की बात पोती किरण से भी उस की ससुराल में हुई थी. गांव में सीता देवी सहायता समूह का संचालन करती थी. वह ‘जीविका दीदी’ का भी काम संभालती थी. जबकि मनोज खैनी की दुकान चला कर परिवार का पेट भरता था.

मनोज झा की एकलौती बहन रीना ने भी पुलिस को बताया कि उस के भाई मनोज ने लोन पर गाड़ी ले कर काम शुरू किया था, लेकिन लोगों ने उस गाड़ी को भी सही से चलने नहीं दिया. फिर उस ने गांव में ही छोटी सी खैनी की दुकान खोली थी. वह भी गांव के दबंगों ने बंद करवा दी थी. दबंगों द्वारा भतीजे को मारने की धमकी दी जाती थी. भाई ने अपनी बड़ी बेटी किरण कुमारी की शादी के लिए गांव के साहूकार से 3 लाख रुपए कर्ज लिया था. उस की शादी 28 जून, 2017 को धूमधाम से हुई थी.

साहूकार 5 वर्ष पहले लिए गए 3 लाख रुपए कर्ज का सूद सहित 17 लाख रुपए मांग रहा था, जिस से वह परेशान था. उस की किश्त चुकाता था, जिसे वह किश्त को सूद के रूप में रख लेता था और उस का कर्ज बढ़ता ही जा रहा था. किरण के पति गोविंद झा ने बताया कि साहूकार ने कई किश्तों में 3 लाख रुपए का कर्ज दिया था, जिस में कुछ पैसा उन के ससुर ने साहूकार को कई किश्तों में लौटाया भी था. इस की जानकारी डायरी में लिखी मिली है.

इस मामले के तूल पकड़ने पर घटना के दूसरे दिन राजग सरकार के केंद्रीय गृह राज्यमंत्री एवं स्थानीय सांसद नित्यानंद राय पहुंचे. मृतक मनोज झा की बेटियों से मिले. उन्होंने उन से गुहार लगाई कि कर्ज देने वालों ने उन के जमीन के कागज ले लिए हैं. और अब उन्हें भी अपनी जान का खतरा लग रहा है.

मनोज झा की बेटी किरण ने बताया कि साहूकार के आतंक के चलते उस के दादा रतिकांत झा ने भी मौत को गले लगा लिया था. उन की मृत्यु 16 अगस्त, 2021 को हुई थी. लेकिन उस वक्त गांव वालों ने मामला सलटाने की बात कह कर चुप करा दिया था.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उन की मौत का कारण नहीं मालूम हो पाया था. सभी का मऊ गांव में ही प्रशासन की देखरेख में गंगा की सहायक नदी वाया के तट अखाड़ा घाट पर दाह संस्कार करवा दिया गया. इस मौके पर परिजनों, रिश्तेदारों व ग्रामीणों की मौजूदगी में सभी शवों की मुखाग्नि मनोज झा के छोटे दामाद पटना जिले के खुसरूपुर निवासी आशीष मिश्रा ने दी. इस मौके पर अंचलाधिकारी अजय कुमार व थानाप्रभारी प्रसुंजय कुमार सहित अन्य लोग मौजूद थे.

इस मामले को ले कर किरण ने विद्यापतिनगर थाने में एक रिपोर्ट लिखवाई, जिस में गांव के श्रवण झा, उस के बेटे मुकुंद कुमार झा और अर्जुन सिंह के बेटे बच्चा सिंह पर कर्ज का रुपया वापस करने के लिए हमेशा प्रताडि़त करने और घर में घुस कर हत्या करने का आरोप लगाया.

वहीं घटना के विभिन्न पहलुओं पर नजर रखते हुए पुलिस जांच में जुट गई थी. कथा लिखे जाने तक घटना में आरोपी बनाए गए श्रवण झा और उस के बेटे मुकुंद कुमार झा ने दलसिंहसराय कोर्ट में 14 जून को आत्मसमर्पण कर दिया था. जबकि बच्चा सिंह फरार था. थानाप्रभारी प्रसुंजय कुमार ने कहा कि पुलिस आगे की काररवाई पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर करेगी. उन्होंने मनोज झा के खानदान में बची बेटियों की सुरक्षा का भी आश्वासन दिया.