समस्या समाधान के नाम पर ठगी

42 वर्षीय इंदरजीत कौर अकसर बीमार रहती थी. तमाम डाक्टरों से उस का इलाज चला, लेकिन कोई खास फायदा नहीं हुआ. उस के पिता हरवंश सिंह एक सरकारी मुलाजिम थे. बेटी को ले कर वह बड़ा परेशान रहते थे. इंदरजीत कौर के अलावा उन के 2 बेटे भी थे.

हरवंश सिंह दक्षिणी दिल्ली के नेहरूनगर में परिवार के साथ रहते थे. छोटा परिवार होने के बावजूद वह हमेशा परेशान रहते थे. उन की यह परेशानी बेटी इंदरजीत कौर को ले कर थी. अब तक शादी के बाद उसे ससुराल में होना चाहिए था, लेकिन बीमारी की वजह से उस की शादी नहीं हो पाई थी. इस के अलावा दूसरी परेशानी बड़े बेटे को ले कर थी, जो शादी के 8 सालों बाद भी बाप नहीं बन पाया था. तीसरी परेशानी छोटे बेटे को ले कर थी, जो अभी तक बेरोजगार था.

इंदरजीत कौर पिता को अकसर समझाती रहती थी कि वह चिंता न करें, सब ठीक हो जाएगा. लेकिन वह ङ्क्षचता से उबर नहीं पा रहे थे. परिवार की जिम्मेदारी एक तरह से इंदरजीत ही संभाले थी. हरवंश सिंह सेवानिवृत्त हुए तो फंड के उन्हें जो 15 लाख रुपए मिले, उन में से 12 लाख रुपए उन्होंने इंद्रजीत के नाम जमा करा दिए थे. इस पर बेटों ने कोई ऐतराज नहीं किया था.

रिटायर होने के कुछ ही महीने बाद हरवंश सिंह की मौत हो गई थी. उन के मरने के 4 महीने बाद ही उन की पत्नी की भी मौत हो गई. 4 महीने में ही मांबाप दोनों की मौत हो जाने से इंदरजीत को गहरा सदमा लगा था. उन के मरने के बाद घर की पूरी जिम्मेदारी उसी पर आ पड़ी थी.

हरवंश सिंह ने अपना एक फ्लैट कुसुमा को किराए पर दे रखा था. उन के मरने के बाद इंदरजीत ने वह फ्लैट खाली कराना चाहा तो उस ने फ्लैट खाली करने से साफ मना कर दिया, जिस का मुकदमा रोहिणी कोर्ट में चल रहा है.

इंदरजीत शारीरिक रूप से तो परेशान थी ही, मानसिक तौर पर भी परेशान रहने लगी थी. उस के छोटे भाई की उम्र 36 साल हो चुकी थी, उस की अभी तक न तो नौकरी लगी थी और न ही शादी हुई थी. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि इन परेशानियों से कैसे निजात पाया जाए.

6 सितंबर को इंदरजीत के मोबाइल फोन पर एक एसएमएस आया, जिस में लिखा था, ‘जानिए कैसे होगा आप की समस्या का समाधान? नौकरी, व्यापार में घाटा, शादी, शिक्षा, स्वास्थ्य, प्यार में असफलता, शौतन से छुटकारा, मुठकरनी आदि समस्याओं के समाधान की 100 प्रतिशत गारंटी.’

इंसान तमाम तरह की परेशानियों से घिरा हो और कोशिश करने के बावजूद उस की मुश्किलें कम न हो रही हों तो इस तरह के मैसेज में उसे समस्याओं का हल दिखाई देने लगेगा. मैसेज के अंत में एक फोन नंबर भी दिया था. मैसेज पढऩे के बाद इंदरजीत ने सोचा कि क्यों न वह एक बार उस फोन नंबर पर बात कर के देखे. शायद यहां उस की समस्याएं हल ही हो जाएं. इसी उम्मीद में इंदरजीत ने अपने फोन से मैसेज में दिए नंबर 012048823333 पर फोन किया.

दूसरी ओर से फोन रिसीव किया गया तो उस ने अपनी सारी समस्याओं के बारे में विस्तार से बता दिया. उधर से बाबा त्यागी, जिस ने फोन उठाया था, भरोसा दिया कि उस की समस्या का समाधान तो हो जाएगा, लेकिन वह एक घंटे बाद दोबारा करे. बाबा त्यागी ने दोबारा बात करने के लिए दूसरा फोन नंबर दे दिया था.

इंदरजीत कौर ने एक घंटे बाद बाबा द्वारा दिए नंबर पर फोन किया तो उधर से बाबा त्यागी ने कहा, “बच्चा, हम ने अपनी गद्दी पर बैठ कर अपने ईष्ट से बात कर ली है, पता चला है कि तुम परेशानियों से घिरी पड़ी हो.”

“हां बाबा, आप बिलकुल सही कह रहे हैं.” इंदरजीत ने कहा.

“तुम्हारे ऊपर दुष्ट प्रेतात्माओं के साथ एक भयानक जिन्न कब्जा जमाए है, इसी वजह से तुम्हारी तबीयत ठीक नहीं रहती. बच्चा अगर तुम ने इन से छुटकारा पाने का कोई उपाय नहीं किया तो तुम्हारे घर में जल्दी ही 3 मौतें और हो सकती हैं.” तांत्रिक ने कहा.

“मौतेंऽऽ,” इंदरजीत कौर ने घबरा कर पूछा, “किसकिस की?”

“तुम्हारे बड़े भाईभाभी और छोटे भाई की,” बाबा ने कहा, “अगर तुम इस कहर से बचना चाहती हो तो तुम्हें तुरंत पूजा करवानी होगी.”

“पूजा में कितना खर्च आएगा बाबा?”

“यही कोई 80-90 हजार रुपए.”

घर की परेशानियों से छुटकारा के लिए इंदरजीत तैयार हो गई. उस ने कहा, “ठीक है बाबा, मैं पूजा कराने को तैयार हूं. आप तैयारी कीजिए. बताइए, पैसे ले कर कहां आना है?”

“तुम्हें मेरे पास आने की कोई जरूरत नहीं है. मैं तुम्हें आईसीआईसीआई बैंक का एक एकाउंट नंबर बता रहा हूं. तुम उसी में पैसे जमा कर के मुझे फोन कर दो. इस के बाद मैं पूजा शुरू कर दूंगा.” कह कर तांत्रिक ने आईसीआईसीआई बैंक का एकाउंट नंबर मैसेज कर दिया.

अगले दिन यानी 7 सितंबर को इंदरजीत कौर ने आईसीआईसीआई बैंक के एकाउंट में 80 हजार रुपए जमा करा कर तांत्रिक को फोन कर दिया. तांत्रिक ने बताया था कि पूजा श्मशान में होगी और पूरे 3 दिनों तक चलेगी.

पैसे जमा कराए एक महीने से ज्यादा हो गया, लेकिन इंदरजीत कौर को कोई फायदा नजर नहीं आया. उस ने बाबा को फोन किया तो फोन बाबा के बजाय उन के किसी चेले ने उठाया. उस का नाम सुनील कुमार था. उस ने कहा, “अभी तो बाबा पूजा करने उज्जैन गए हैं, वहां से एक महीने बाद लौटेंगे.”

इंदरजीत कौर ने 2 बार फोन किया तो दोनों बार फोन सुनील ने ही रिसीव किया. उस ने दोनों बार वही बताया. इस के बाद उस ने जब भी फोन किया, फोन सुनील ने ही रिसीव किया. हर बार उस ने वही बहाना बना दिया.

आखिर एक दिन बाबा ने फोन रिसीव किया. उस ने कहा, “कहो बच्चा, कैसे हो?”

“बाबा, मैं जैसी पहले थी, वैसी ही अभी भी हूं. मुझे कोई फर्क नजर नहीं आया.” इंदरजीत ने कहा.

“मैं तुम्हें फोन करने वाला था,” बाबा ने कहा, “मुझे लगा था कि दुष्ट आत्माएं काबू में आ गई होंगी, लेकिन वे इतनी दुष्ट हैं कि उन्हें काबू करने के लिए हमें बड़ी पूजा करनी पड़ेगी. अगर यह पूजा न की गई तो तुम्हारे यहां होने वाली मौतों को रोका नहीं जा सकता.”

इंदरजीत कौर बुरी तरह घबरा गई. वह अपने घर को उजड़ता नहीं देखना चाहती थी, इसलिए उस ने पूछा, “बाबा, बड़ी पूजा में कितना खर्च आएगा?”

“यही कोई एक लाख 30 हजार रुपए.” बाबा ने कहा.

इंदरजीत कौर ने अगले दिन अपने भारतीय स्टेट बैंक के खाते से एक लाख 30 हजार रुपए निकाल कर श्री शिवसेना समिति धार्मिक संस्थान के खाते में जमा करा दिए.

एक सप्ताह बीत गया, लेकिन इंदरजीत कौर की एक भी समस्या का समाधान नहीं हुआ. उस ने बाबा को फोन किया तो फोन सुनील ने रिसीव किया. उस ने बताया कि बाबा अभी श्मशान में शव साधना कर रहे हैं.

एक दिन बाद बाबा त्यागी ने खुद इंदरजीत कौर को फोन कर के कहा, “मैं ने जो शव साधना की है, उस से दुष्ट आत्माएं तो हमारी गिरफ्त में आ गई हैं, लेकिन वह जिन्न अभी काबू में नहीं आया है. उस के लिए हमें एक विशेष तरह का अनुष्ठान करना होगा, जिस के लिए कामाख्या मंदिर से गुरुजी को बुलाना होगा. गुरुजी श्मशान में 11 दिनों तक अनुष्ठान करेंगे.”

“बाबा आप को जो भी करना है, जल्दी कीजिए. इस में कितना खर्च आएगा, यह बता दीजिए.”

“इस अनुष्ठान में करीब 3 लाख रुपए खर्च हो जाएंगे.” बाबा त्यागी ने कहा.

“मैं कल ही 3 लाख रुपए आप के खाते में जमा करा दूंगी.” उस ने कहा और अगले दिन 3 लाख रुपए बाबा के बैंक खाते में जमा करा दिए.

अब तक इंदरजीत पूजा के नाम पर करीब 9 लाख रुपए बाबा के बताए बैंक खाते में जमा करा चुकी थी. पैसे जमा कराने के अगले दिन ही बाबा त्यागी ने फोन कर के कहा, “बेटा गजब हो गया, जो गुरुजी श्मशान में अनुष्ठान कर रहे थे, उन पर जिन्न ने हमला कर दिया. वह मरणासन्न हालत में हैं. उन का इलाज नहीं कराया गया तो उन की मौत हो सकती है. अगर उन की मौत हो गई तो इस का पाप तुम्हें ही लगेगा.”

“इस के लिए मुझे क्या करना होगा बाबा?”

“गुरुजी के इलाज के लिए संजीवनी बूटी मंगानी होगी, जिस पर 2 लाख रुपए का खर्च आएगा.”

इंदरजीत कौर अब तक पूजा के नाम पर 12 लाख रुपए तांत्रिक बाबा त्यागी के खाते में जमा करा चुकी थी. लेकिन फायदा कुछ नहीं हुआ था, इसलिए उसे शक होने लगा था कि कहीं वह किसी ठग के जाल में तो नहीं फंस गई है. इसलिए उस ने 2 लाख रुपए जमा करा दिए.

इंदरजीत कौर का छोटा भाई अपना कोई कारोबार शुरू करना चाहता था. उसे 8 लाख रुपए की जरूरत थी. उसी बीच उस ने बहन से ये रुपए मांगे तो उस ने रुपए बाबा त्यागी के खाते में जमा कराने की बात बता कर पैसे देने से मना कर दिया.

बहन की बात सुन कर छोटा भाई हैरान रह गया. उस ने अपना सिर पीट कर कहा, “पढ़ीलिखी होने के बावजूद दीदी तुम उस ढोंगी के जाल में कैसे फंस गईं? कम से कम मुझे तो बता देतीं. 3 साल से बाबा तुम्हें ठग रहा है और तुम ने कभी मुझ से चर्चा तक नहीं की.”

“क्या करूं भाई, उस ने मुझे इतना डरा दिया था कि मैं किसी से कुछ कह नहीं सकी.” कह कर इंदरजीत रोने लगी तो भाई ने उसे समझाते हुए कहा, “दीदी, तुम्हें अब पुलिस के पास जा कर उस ठग के खिलाफ रिपोर्ट लिखानी होगी. 12 लाख रुपए भले ही वापस न मिलें, लेकिन कम से कम उसे अपने किए की सजा तो मिलेगी.”

छोटे भाई की बात इंदरजीत कौर की समझ में आ गई. 24 नवंबर की शाम वह भाई के साथ थाना लाजपतनगर पहुंची और वहां मौजूद थानाप्रभारी रमेश कुमार कक्कड़ को पूरी बात बताई. इस के बाद इंदरजीत कौर की तहरीर पर थानाप्रभारी ने भादंवि की धारा 420/384/506134 के तहत मुकदमा दर्ज करा कर डीसीपी मंदीप सिंह रंधावा को पूरे वाकये से अवगत करा दिया.

एक पढ़ीलिखी महिला को जिस तरह से एक तांत्रिक ने ठगा था, उस से डीसीपी को लगा कि ढोंगी तांत्रिक बेहद शातिर है. उस तांत्रिक को गिरफ्तार करने के लिए उन्होंने एसीपी एस.के. केन के नेतृत्व में एक जांच टीम गठित कर दी, जिस में थानाप्रभारी रमेश कुमार कक्कड़, इंसपेक्टर मानवेंद्र सिंह, प्रवीण कुमार, एसआई अमित भाटी, हैडकांस्टेबल सुधाकर, कांस्टेबल नीरज, संतोष, सुधीर आदि को शामिल किया गया.

इंदरजीत कौर के पास बाबा त्यागी का केवल फोन नंबर था. रमेश कुमार कक्कड़ ने उस ठग तांत्रिक को इंदरजीत के माध्यम से ही घेरने की योजना बनाई. उन्होंने इंदरजीत से बाबा त्यागी को फोन कराया. बाबा ने फोन उठाया तो इंदरजीत ने कहा,

“बाबा, अभी तक मुझे कोई फायदा नहीं हुआ. आप कुछ ऐसा कीजिए कि हमारे सारे दुख मिट जाएं. मैं इस के लिए कुछ भी करने को तैयार हूं.”

“कामाख्या मंदिर वाले गुरुजी ने अनुष्ठान पूरा करने के बाद मुझे बताया था कि जिन्न और आत्माएं काबू में आ गई हैं. लेकिन जब तक तुम्हारे पिता का पिंडदान रामेश्वरम में नहीं कराया जाता, तब तक समस्याएं बनी रहेंगी.”

“तो फिर आप यह भी करवा दीजिए.”

“इस के लिए 33 ब्राह्मïणों को यज्ञ के लिए रामेश्वरम ले जाना होगा. ब्राह्मïणों का किराया, यज्ञ आदि पर कुल 1 लाख 80 हजार रुपए का खर्च आएगा.”

“ठीक है, मैं कल ही यह रकम दे दूंगी. लेकिन इस बार रकम बैंक में जमा नहीं करा सकती. क्योंकि मैं जब भी वहां पैसे जमा कराने जाती हूं, बैंक वाले पूछते हैं कि तुम इतनी बड़ीबड़ी रकम इस खाते में क्यों जमा कराती हो?” इंदरजीत कौर ने कहा.

बाबा त्यागी ने यूनियन बैंक औफ इंडिया का खाता नंबर दे कर उस में पैसे जमा कराने को कहा. इंदरजीत कौर थानाप्रभारी के कहे अनुसार काम कर रही थी. उन्होंने पैसे जमा कराने से मना किया तो शाम को बाबा त्यागी को फोन कर के इंदरजीत ने कहा, “बाबा, मैं बैंक में पैसे जमा कराने गई थी, बैंक वाले कह रहे थे कि इस खाते में 25 हजार रुपए से ज्यादा जमा नहीं कराए जा सकते. इसलिए आप कल अपना कोई आदमी भेज दीजिए, मैं उसे पूरे पैसे दे दूंगी.”

“ठीक है, कल सुबह मेरा आदमी तुम्हारे घर पहुंच जाएगा. तुम अपना पता मैसेज कर दो. लेकिन वह जिस टैक्सी से जाएगा, उस का किराया तुम्हें ही देना होगा.” बाबा त्यागी ने कहा.

“यही ठीक रहेगा. आप उन्हें भेज दीजिए. मैं उन्हें किराए के पैसे भी दे दूंगी.” कह कर इंदरजीत कौर ने फोन काट दिया.

25 नवंबर की सुबह थानाप्रभारी टीम के साथ आम कपड़ों में इंदरजीत कौर के घर के आसपास लग गए. सुबह 9 बजे के करीब एक टैक्सी इंदरजीत कौर के घर के सामने आ कर रुकी. टैक्सी से एक लडक़ा उतरा और इंदरजीत कौर के घर की डोरबैल बजा दी. इंदरजीत कौर ने दरवाजा खोला. युवक ने अपना नाम सुनील कुमार बताया.

इंदरजीत कौर उसे ड्राइंगरूम में ले आई. थानाप्रभारी अंदर ही बैठे थे. इंदरजीत ने उसे पानी पिलाया तो उस ने कहा, “मैडम, पैसे जल्दी दे दीजिए. बाबा ने मुझे जल्दी बुलाया है. अभी हमें पूजा का सामान वगैरह भी खरीदना है.”

इंदरजीत कौर ने अपने पर्स से थानाप्रभारी के हस्ताक्षर किए 5 हजार रुपए निकाल कर सुनील को देते हुए कहा, “पहले तुम टैक्सी के किराए के पैसे ले लो, बाकी के पैसे अभी दे रही हूं.”

पैसे गिन कर जैसे ही सुनील ने अपनी जेब में रखे, थानाप्रभारी ने उसे पकड़ लिया. इशारा करने पर मकान के बाहर मौजूद पुलिसकर्मी भी अंदर आ गए. सुनील को पूछताछ के लिए थाने लाया गया.

थाने में हुई पूछताछ में सुनील कुमार ने जो बताया, उस के बाद पुलिस ने उसी दिन उत्तर प्रदेश के महानगर गाजियाबाद की कालोनी राजनगर स्थित एक मकान में छापा मारा. वहां का नजारा देख कर पुलिस हैरान रह गई. वहां इस तरह के लोगों को फंसाने के लिए एक काल सेंटर चल रहा था. अलगअलग 12 केबिन बने थे, जिन में 5 लडक़े और 7 लड़कियां बैठी थीं.

पुलिस को देख कर सभी के होश उड़ गए. उन्हीं के बीच एक भव्य औफिस बना था, जिस में शेष नारायण दुबे और पवन कुमार पांडेय नाम के 2 लोग बैठे थे. सुनील की निशानदेही पर पुलिस ने उन दोनों को हिरासत में ले लिया. इस के अलावा काल सेंटर में काम करने वाले लडक़ेलड़कियों को भी पूछताछ के लिए थाने लाया गया.

थाने में हुई पूछताछ में पता चला कि ठगी का यह सारा मायाजाल शेष नारायण दुबे उर्फ बाबा त्यागी का रचा था.

32 वर्षीय शेष नारायण दुबे गाजियाबाद की इंदिरापुरम कालोनी में रहने वाले रामबहादुर दुबे का बेटा था. रामबहादुर पंडिताई करते थे. पिता की देखादेखी शेष नारायण कोई ऐसा काम करना चाहता था, जिस में कम खर्च में अच्छी आमदनी हो.

उस ने अपने करीबी रिश्तेदार पवन कुमार पांडेय और सुनील कुमार से बात की तो उन्होंने तंत्रमंत्र के नाम पर ठगी का कारोबार करने की सलाह दी. इस के बाद शेषनारायण को बाबा त्यागी बना कर कारोबार शुरू भी कर दिया गया. इन्होंने शहर के राजनगर में एक कमरा किराए पर लिया, जिस में उन्होंने दरजन भर कंप्यूटर लगा कर लड़कियों व लडक़ों को नौकरी पर रख लिया.

इस के बाद मोबाइल कंपनी से हजारों ग्राहकों के फोन नंबर और पते हासिल किए. उन में से रोजाना कुछ नंबरों पर कालसेंटर द्वारा समस्याओं के समाधान के मैसेज भेजे जाने लगे. हर कोई किसी न किसी समस्या से ग्रस्त होता ही है, इसलिए अंधविश्वासी लोग मैसेज में दिए फोन नंबर पर समस्या के समाधान के लिए फोन करने लगे. ये लोग उन्हें परिवार के सदस्यों की मौत का भय दिखा कर बैंक खाते में मोटी रकम जमा करवाने लगे.

दिल्ली के लाजपतनगर के नेहरूनगर की रहने वाली इंदरजीत कौर को भी इन्होंने उस के भाइयों व भाभी की मौत का भय दिखा कर 12 लाख रुपए ठग लिए थे. पूछताछ में पता चला कि ये लोग अब तक करीब 3 सौ लोगों को इसी तरह ठग चुके हैं.

इन के कालसेंटर पर नौकरी करने वाले लडक़ेलड़कियों को पुलिस ने हिदायत दे कर छोड़ दिया. शेष नारायण दुबे उर्फ बाबा त्यागी, पवन कुमार पांडेय और सुनील कुमार को 26 नवंबर को न्यायालय में पेश कर के जेल भेज दिया गया है.

पुलिस ने इन के कालसेंटर को सील कर दिया है. कथा लिखे जाने तक इन में से किसी की भी जमानत नहीं हुई थी.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

तंत्र मंत्र: पैसों के लिए दी इंसानी बलि

तंत्र मंत्र: पैसों के लिए दी इंसानी बलि – भाग 4

इस पर दोनों ने तय किया कि सुरेश साहू और उस के परिवार को यह विश्वास कर लेना चाहिए कि तंत्र साधना के बाद भी गड़ा हुआ धन नहीं मिल रहा है, तो फिर आगे दूसरा उपाय भी किया जा सकता है. जब यह बात सुरेश साहू को माखन ने बताई तो वह सिर पीट कर रह गया और बोला, ‘‘बड़े भैया तो मुझे घर से निकाल देंगे. उन्होंने साफसाफ कहा था कि ऐसा मत करो, मगर मैं ही नहीं माना. तुम लोगों ने तो मुझे बुरी तरह लूट लिया.’’

इस पर सुभाष ने कहा, ‘‘देखो, विश्वास में बड़ी ताकत होती है. आस्था रखो, एक दिन अगर गड़ा धन नहीं मिला है तो मैं अपनी तंत्र साधना से रुपयों की बारिश आसमान से करवा दूंगा. या फिर अगर तुम्हारा गड़ा धन किसी ने खींच लिया है, या कहीं चला गया है तो उस के लिए भी साधना कर छीन लाऊंगा. लेकिन इस में समय लगेगा. तुम्हें धैर्य रखना होगा.’’

आखिरकार सुरेश ने हाथ जोड़ कर के विवश हो तांत्रिकों के आगे घुटने टेक दिए. कई महीने के बाद एक दिन अचानक सुरेश साहू से माखन की मुलाकात हो गई. औपचारिक बातचीत करने के बाद सुरेश ने सुभाषदास का हालचाल पूछ लिया. माखन ने बताया कि वे बड़ी साधना में लगे हुए हैं.

‘‘मगर तुम्हारे गुरु ने तो हमारा बेड़ा गर्क कर दिया,’’ सुरेश ने नाराजगी दिखाई.

‘‘देखो भाई, विश्वास रखो. तंत्र साधना कोई मजाक या जादू की छड़ी नहीं है. हर किसी का इस से भला भी नहीं होता. हालांकि हमारे गुरु सुभाषदास बहुत पहुंचे हुए हैं. उस वक्त या तो तुम्हारा समय अच्छा नहीं चल रहा था या फिर तुम्हारे भाई और परिवार को विश्वास नहीं था. इस कारण भी साधना में कमी आ सकती है. मैं तो कहता हूं कि अगर तुम्हें विश्वास है तो गुरु की शरण में आ जाओ, फिर देखो कैसे तुम मालामाल हो जाते हो.’’

माखनदास की बड़ीबड़ी बातें सुन कर के सुरेश कुमार साहू को विश्वास हो गया कि घर में धन का घड़ा इसलिए नहीं मिला क्योंकि वह धन किसी ने अपने पास खींच लिया था. या फिर हो सकता है पहले ही किसी ने उसे निकाल लिया हो.

सुरेश साहू माखन की बातों से संतुष्ट हो कर बोला, ‘‘ठीक है, एक बार मुझे अपने गुरु सुभाषदास से मिलाना. मुझे भी अपने साथ जोड़ लो, ताकि मेरा भी खर्चा चलता रहे.’’

माखनदास ने सुभाषदास से सुरेश साहू की पूरी बात बताई. इस पर सुभाषदास की आंखों में चमक आ गई.

उस ने कहा, ‘‘देखो, इस बार मैं ने कुछ नई जानकारियां इकट्ठा की हैं. सोशल मीडिया पर यूट्यूब है. वहां पर तंत्रमंत्र साधनाओं को देख कर के मुझे पूरा यकीन है कि हम मालामाल हो जाएंगे. अब सुरेश साहू को कुछ मिले न मिले, तुम और मैं तो मालामाल हो सकते हैं. बताओ कैसा रहेगा?’’

‘‘ठीक है गुरु, जैसा आप कहो, आखिर हम भी कब तक गरीबी के दिन गुजारते रहेंगे.’’

‘‘तो तुम मुझे अपना पूरा साथ दोगे?’’

‘‘मैं तनमन से आप के साथ हूं.’’ माखनदास ने बड़ी श्रद्धा के साथ सुभाषदास मानिकपुरी के सामने हाथ जोड़ कर कहा.

‘‘तो सुनो, आज हम जो साधना करेंगे उस में हमें खून देना होगा. और अगर हम ने खून दे दिया तो समझो कि हम तो करोड़पति हो गए.’’

खून शब्द सुन कर माखनदास के ललाट पर पसीने की बूंदें उभर आईं. घबरा कर वह इधरउधर देखने लगा. यह देख कर सुभाषदास मानिकपुरी हंसने लगा, ‘‘देखो, तुम तो मेरे चेले हो. मुझे तुम्हारा खून नहीं चाहिए. हां, सुरेश का कैसा रहेगा.’’

‘‘हां, मुझे मंजूर है,’’ सुभाषदास की बात सुन कर माखन ने सहमति जताई.

देर शाम को सुरेश साहू तंत्रमंत्र के इंतजाम के साथ आ गया. तीनों तंत्रमंत्र साधना के सारे सामान जुटा कर मुरू पथराली खार, जो बिलासपुर के सिरगिट्टी में स्थित है, आ पहुंचे. यहां सुनसान जगह में देर रात को सुभाषदास ने अपना आसन जमाया और तंत्रमंत्र साधना करने लगा.

माखनदास और सुरेश साहू पास में बैठे हुए थे. 2 घंटे के अनुष्ठान के बाद सुभाष उठा और चलने का इशारा किया. मानिक ने वहां का सारा सामान समेटा और सुरेश की मोटरसाइकिल पर रख दिया. कुछ देर में तीनों पैदल ही पास के खंडहरनुमा वीरान पुराने मकान में थे. वहां फिर से अनुष्ठान की तैयारी की गई. सुरेश को साधना पूरी होने तक आंखें बंद रखने की हिदायत दी गई. एक घंटे तक सुरेश साहू आंखें बंद कर के बैठा रहा.

सुभाष ने अपने थैले से कुल्हाड़ी निकाली और उस का पूजन किया. उस ने दीपक की लौ से कुल्हाड़ी की धार गर्म की. फिर एक झटके में सुरेश के सिर पर दे मारी. अचानक हुए तेज वार से सुरेश तिलमिला गया. उस की चीख  निकल पड़ी. आंखें खोलीं. तब तक सुभाषदास ने उस पर 3-4 वार और कर दिए.

कुल्हाड़ी की चोट से  वह लहूलुहान हो गया. और थोड़ी देर में उस की वहीं मौत हो गई. उस के खून से सुभाषदास ने थोड़ी देर और तंत्र साधना की. माखनदास हाथ जोड़ कर खड़ा आसमान से रुपएपैसे बरसने का इंतजार करने लगा. क्योंकि सुभाषदास ने खून देने के बाद रुपएपैसे आसमान से बरसने की बात कही थी. जब कुछ देर बाद भी कोई रुपयापैसा नहीं बरसा, तब माखन ने सुभाष की तरफ सवालिया निगाहों से देखा. अब सुभाष भी घबरा गया. माखनदास बोला, ‘‘गुरु, अब क्या होगा?’’

सुभाष आकाश की तरफ देखते हुए बोला, ‘‘यार, मैं ने पढ़ा था कि खून देने के बाद मृतक की आत्मा आती है और वह सारी समस्या का समाधान कर देती है. लगता है, जरूर कोई चूक हो गई.’’

‘‘अब क्या होगा, हमें रुपए भी नहीं मिले और सुरेश की हत्या भी हो गई. अब तो जेल जाना पड़ेगा.’’

सुभाषदास ने कहा, ‘‘चलो, यहां से भाग चलते हैं.’’ उस के बाद दोनों नौ दो ग्यारह हो गए. शहर ही छोड़ दिया.

इस पूरे मामले की जांच के बाद 17 नवंबर, 2021 को एडिशनल एसपी रोहित कुमार झा, एसपी (सिटी) सुश्री गरिमा द्विवेदी और जांच अधिकारी शांत कुमार साहू ने मीडिया के सामने सुरेश साहू हत्याकांड पर से परदा हटा दिया.

पुलिस ने थाना सिरगिट्टी बिलासपुर में अपराध दर्ज कर के आरोपी सुभाषदास, माखनदास को भादंवि धारा 302, 201, 120बी के तहत गिरफ्तार कर के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी बिलासपुर के समक्ष पेश किया, उन के अपराध की गंभीरता को देखते हुए मजिस्ट्रैट ने दोनों को जेल भेजने का आदेश दिया.

   —कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

तंत्र मंत्र: पैसों के लिए दी इंसानी बलि – भाग 3

एक दिन की बात है. माखनदास मानिकपुरी ने सुभाषदास से जिज्ञासावश पूछा, ‘‘गुरु, क्या सचमुच कोई ऐसी अदृश्य ताकत है जो हमें रुपएपैसे से मालामाल कर सकती है? यह हनुमान सिक्का क्या है? इस के बारे में सुना तो मैं ने बहुत  है, मगर…’’

संशय भाव से माखनदास के पूछने पर सुभाषदास ने जवाब दिया, ‘‘अरे, अगरमगर क्या होता है, क्या तुम्हें इस बात में शक है कि भूतप्रेत और आत्मा होती है. नहीं न…’’

‘‘ नहीं, कभी नहीं. यह तो मानना पड़ेगा कि आत्मा होती है भूतप्रेत होते हैं.’’ माखनदास ने सहमति में सिर हिलाते हुए कहा.

‘‘तो फिर इस में क्या इंकार कि इन शैतानी शक्तियों को अगर प्रसन्न कर लिया जाए तो उस के जरिए कुछ भी कियाकरवाया जा सकता है. और सुनो, हनुमान सिक्का अगर किसी को मिल जाए तो आदमी लखपति क्या करोड़पति बन सकता है. ऐसी ही कितनी विधाएं और साधनाएं हैं. मैं इस दिशा में सफलता की ओर बहुत आगे बढ़ चुका हूं. मुझे विश्वास है कि शीघ्र ही मुझे इन शक्तियों का आशीर्वाद मिलने लगेगा.’’ सुभाषदास ने आंखें घुमाते हुए कहा.

‘‘गुरु, फिर तो आप मालामाल हो जाओगे, अब मुझे विश्वास हो चला है कि यह ताकत होती है. मुझे जो भी कहोगे, मैं करूंगा.’’ माखनदास खुश होते हुए बोला.

‘‘मुझे बहुत अफसोस होता है कि तुझ जैसा समझदार आदमी क्यों बारबार रास्ते से भटक जाता है. तुम ने पहले भी मेरा साथ दिया था और मैं ने इस दिशा में कई सफलताएं पाई हैं. तभी तो लोगों का हम पर भरोसा भी बना है.’’ सुभाषदास ने समझाया.

‘‘गुरु, जब सफलता नहीं मिलती तो मन टूट जाता है, कितने ही लोगों को मैं ने आप से मिलवाया और आप ने उन को हनुमान सिक्के, 21 नाखून के रास्ते बतलाए, तंत्रमंत्र भी किया… मगर लाभ कहां मिला? ऐसे में आप ही बताओ, मन कैसे नहीं विचलित होगा. फिर भी मैं मानता हूं कि तंत्रमंत्र की इस विद्या से कोई भी लखपति, करोड़पति बन सकता है. कई बार साधना में असफलता भी मिलती है. उस के कई कारण हो सकते हैं. आप में कूवत भी है.’’ माखनदास बोला.

‘‘होगा, जरूर होगा. हमें सफलता भी मिलेगी, लोगों को हमारी साधना का भी लाभ मिलेगा. बस, भरोसा रखो. एक दिन तुम भी देखना, किस तरह मैं तंत्रमंत्र की ताकत से तुम को भी मालामाल कर दूंगा. असल में हमें जैसी साधना करनी चाहिए उस में चूक हो रही है. यह मैं ने एहसास कर लिया है. कल देखना, देखते ही देखते मानो छप्पर फट जाएगा और सोनाचांदी बरसने लगेगा.’’ सुभाषदास ने अपनी लच्छेदार बातों से माखनदास को प्रभावित कर दिया था.

‘‘ऐसा है तो गुरु, कुछ जल्दी करो. क्यों हम अपना समय नष्ट कर रहे हैं.’’ माखनदास बोला.

‘‘ठीक है, तुम ने एक बार मुझे सुरेश साहू से मिलवाया था, उसे तुम फिर ले कर आओ. और सुनो, इस बार जो तंत्रमंत्र मैं करूंगा वह किसी भी हालत में खाली नहीं जाएगा. हम दोनों मालामाल हो जाएंगे.’’ सुभाषदास बोला.

‘‘ठीक है गुरु, मैं आज ही सुरेश से मिलता हूं और उसे आप के पास ले आता हूं. बेचारा कितने सालों से धन की खोज में लगा हुआ है. आप ने भी उसे आश्वासन दिया था.’’

‘‘ठीक है, उसे जितनी जल्दी हो सके लाओ, हम मुरू पथराली खार में तंत्र साधना करेंगे. यह साधना बहुत महत्त्वपूर्ण होगी और सफलता मिलने की पूरी शतप्रतिशत गारंटी है.’’

अगले ही दिन माखनदास ने सुरेश कुमार साहू की सुभाषदास से मुलाकात करवा दी. खरकेन में संतराम साहू का बड़ा बेटा सुरेश कुमार साहू सुभाषदास से मिल कर काफी प्रभावित हुआ. उस के सामने ही माखनदास ने कहा, ‘‘गुरु, यह हमारे गांव के खूब पैसे वाले हैं. पूरा परिवार सुखीसंपन्न और मानमर्यादा वाला है. अभी इन की आर्थिक स्थिति कुछ ठीक नहीं है. मगर इन्हें विश्वास है कि इन के पुश्तैनी घर में गड़ा धन रखा हुआ है. आप कृपा कर दो बड़ी मेहरबानी होगी.’’

सुभाषदास मानिकपुरी ने माखनदास की बातें सुन कर सुरेश साहू की ओर अपलक देखते हुए कहा, ‘‘मैं यहां बैठेबैठे सब ठीक कर सकता हूं. मैं देख रहा हूं कि तुम आने वाले समय में बहुत पैसे वाले बनने वाले हो, तुम्हारे मकान के नीचे खूब सोनाचांदी छिपा हुआ है, जो तुम्हारे पूर्वजों का है.’’

यह सुन कर सुरेश तांत्रिक सुभाषदास मानिकपुरी के पैरों पर गिर पड़ा और सविनय कहा, ‘‘गुरुदेव, हम पर कृपा करो. हम तो बरबाद हो गए हैं. अगर वह धन हमें मिल जाएगा तो हमारी जिंदगी संवर जाएगी. हमारे घर में खुशियां लौट आएंगी. हमारे कर्ज चुकता हो जाएंगे.’’

सुभाषदास ने सुरेश की अधीरता को भांपते हुए कहा, ‘‘मैं तुम्हारी मदद अवश्य करूंगा. इस के लिए मुझे तुम्हारे घर आ कर के एक तांत्रिक साधना करनी पड़ेगी.’’

यह सुन कर सुरेश ने हाथ जोड़ कर कहा, ‘‘गुरुदेव, हमारे घर का माहौल ठीक नहीं है. आप का वहां आना सब पसंद नहीं करेंगे, मेरा भाई और उस की पत्नी तो इस पर थोड़ा भी यकीन नहीं करते हैं.’’

इस पर हंसते हुए सुभाषदास ने मधुर वाणी में कहा, ‘‘दुनिया में ऐसे कितने ही लोग हैं, जो इस पर विश्वास नहीं करते. मगर जब वे देखेंगे कि पैसों की हांडी बाहर आ गई है, तो खुशी से नाच पड़ेंगे.’’

‘‘हां, यह बात तो सही है, मगर मैं उन्हें कैसे समझाऊं. कोई रास्ता निकालो गुरुदेव.’’ सुरेश बोला.

‘‘देखो भाई, तुम अपने घर में बात करो और उन्हें समझाओ. देखो अगर तंत्र साधना की तैयारी करोगे तो भला तो तुम्हारे परिवार का ही है. उन्हें इस साधना को घर में सुखशांति बनाए रखने वाला कह कर मना लो.’’

सुभाषदास की बातें सुन कर सुरेश समझ गया कि कैसे अपने परिवार के सदस्यों को इस साधना के बारे में आश्वस्त करना है. यही फैसला कर सुरेश साहू अपने घर पहुंचा और अपने भाई रामप्रसाद से बात की. उस ने कहा, ‘‘भैया, अगर आप बुरा न मानें तो सिर्फ एक बार घर में तांत्रिक साधना करवा लें. मुझे विश्वास है कि आप को भी यकीन हो जाएगा.’’

सुरेश साहू की बातें सुन कर बड़े भाई रामप्रसाद साहू ने कहा, ‘‘भाई, मुझे तो इस सब में कोई विश्वास ही नहीं है, मगर तुम चाहते हो तो एक बार पूजापाठ करवा कर देख लो.’’

यह सुन कर कि सुरेश साहू खुश हो गया और 2 दिन बाद ही सुभाषदास और माखनदास को तांत्रिक साधना के लिए घर बुला लिया. उन के घर पर सुभाषदास और माखनदास आए और रात भर तंत्र साधना करते रहे. उन्हें विश्वास दिलाया कि जैसे ही यह सिद्धि पूरी होगी, उन के घर में गड़ा हुआ रुपया उन्हें मिल जाएगा.

यह अनुष्ठान 3 दिन तक चला, जो रात के वक्त ही किए गए. इस के बदले में दोनों तांत्रिकों ने मोटी फीस वसूली. उस के बाद भी जब गड़ा धन नहीं निकल पाया तब दोनों तांत्रिक बगलें झांकने लगे.

सुभाषदास ने माखन से कहा, ‘‘भाई, मुझे लगता है यहां कोई गड़ा धन है ही नहीं.’’

माखनदास ने धीरे से कहा, ‘‘फिर आगे क्या होगा, सुरेश साहू तो हाथ से निकल जाएगा.’’

सुभाषदास ने कहा, ‘‘मैं ने तंत्र साधना पूरी कर ली है, अगर रुपए होते तो हमें इशारा मिल जाता. अब अगर यहां रुपए नहीं हैं तो मैं या तुम क्या कर सकते हैं. इन लोगों को गलतफहमी है कि उन के पूर्वजों ने पैसा जमीन में  गाड़ कर रखा था.

‘‘यह भी हो सकता है कि आसपास के किसी जानकार तांत्रिक ने साधना कर पहले ही यहां का गड़ा धन दूसरे की जमीन में खींच कर निकलवा लिया हो. कई बार यह भी होता है कि गड़ा हुआ धन अपने आप कहीं दूसरी जगह चला जाता है.’’

माखन ने हां में हां मिलाते हुए कहा, ‘‘हां, ऐसा हो सकता है, मैं ने भी सुना है.’’

                                                                                                                                        क्रमशः

तंत्र मंत्र: पैसों के लिए दी इंसानी बलि – भाग 2

सुरेश हत्याकांड के सिलसिले में कड़ी पूछताछ में वह टूट गया. उस ने सुरेश के साथ हुई वारदात की सारी कहानी पुलिस को बता दी. उस के बाद पुलिस के सामने नई चुनौती सुभाषदास मानिकपुरी को ढूंढ निकालने की थी.

अपने साथी सुभाषदास के बारे में माखनदास ने सिर्फ इतना बताया था कि वह जबलपुर में कहीं सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी कर रहा है. वह विवाहित है. उस की एक प्रेमिका भी है. उस की पत्नी से बहुत पहले ही संबंध टूट चुके थे. पुलिस ने जांच को आगे बढ़ाते हुए सुभाषदास की प्रेमिका का नाम मालूम कर लिया. फिर जबलपुर बिल्डिंग निर्माण वाले इलाके में गार्ड की नौकरी में लगे लोगों से पूछताछ करने लगी.

पुलिस ने पहले छत्तीसगढ़ के रहने वाले गार्ड्स के बारे में जानकारी जुटाई. इस में जबलपुर पुलिस की मदद से जांच टीम को सुभाषदास की भी जानकारी मिल गई. वह मैडिकल कालेज में बतौर गार्ड तैनात था. पुलिस उसे हिरासत में ले कर बिलासपुर आई. पहले तो उस ने नानुकुर की और गिरफ्तारी को ले कर सवालजवाब करने लगा. किंतु जब उसे सुरेश हत्याकांड और तांत्रिक अनुष्ठान के बारे में बताया, तब वह ठंडा पड़ गया.

पूछताछ के दौरान पुलिस ने उस का सामना माखनदास से करवा दिया. उसे देख कर वह समझ गया कि अब उस का बचना नामुमकिन है. वह सुरेश हत्याकांड से संबंधित सारी बातें बताने को तैयार हो गया. उस ने पुलिस के सामने अपने इकबालिया बयान में पूरे घटनाक्रम को सिलसिलेवार तरीके से बता दिया. साथ ही यह भी स्वीकार कर लिया कि सुरेश की हत्या में इस्तेमाल की गई कुल्हाड़ी भी उसी की थी, जिसे वह अपने घर ले आया था. दोनों ढोंगी तांत्रिकों की अंधविश्वास की करतूतें कुछ इस प्रकार सामने आईं—

सुभाषदास मानिकपुरी (40 साल) मूलत: छत्तीसगढ़ के सरगुजा के बुंदिया लखनपुर का रहने वाला था. बचपन से ही उसे यह विश्वास हो गया था कि तंत्रमंत्र के द्वारा सिद्धि प्राप्त होती है और खूब धन पाया जा सकता है. उस ने मात्र 8वीं तक की ही पढ़ाई की थी. जैसेजैसे बड़ा हुआ उस की तंत्रमंत्र और पराशक्ति की साधना में रुचि लेने लगा. वह वैसे लोगों से ही अधिक मिलता था, जो तंत्रमंत्र की बातें करते थे. उसे लगता था कि इस में इतनी अधिक शक्ति होती है कि इस से दुनिया का कोई भी काम चंद मिनटों में सिद्ध किया जा सकता है. यह बात उस के मनमस्तिष्क में काफी गहराई तक बैठ चुकी थी.

नतीजा यह हुआ था कि उस का मन कभी किसी काम में नहीं लगता था. वह लाखों रुपए कमाने के लिए तंत्रमंत्र सामानों हनुमान सिक्के, पीला कछुआ, रुद्राक्ष माला, पारद लिंग, अघोरपंथी, बारहसिंघा, हत्थाजोड़ी आदि को हासिल करने की कोशिश में लगा रहता था. जहां कभी कोई ऐसी बात होती या कोई इस सोच का व्यक्ति मिलता, तो वह उस के साथ हो लेता था. घंटों तंत्रमंत्र की चर्चा में लगा रहता था. उस से मिलनेजुलने वाले लोगों को हर समस्या का उपाय तांत्रिक साधन से बताता था.

जब उस के घर में लोगों ने देखा कि सुभाष हमेशा तंत्रमंत्र की दुनिया में रमा रहता है, तब उस की शादी करवा दी. मातापिता ने सोचा घरगृहस्थी की जिम्मेदारी आने पर उस में सुधार हो जाएगा. उस का विवाह सरगुजा के प्रेम नगर की एक युवती के साथ हुआ, लेकिन कुछ समय बाद ही पत्नी उस के व्यवहार और बातों से ऊब गई और उसे छोड़ कर अपने मायके चली गई.

सुभाषदास भी अपना गांव छोड़ बिलासपुर के कोरियापारा, सिरगिट्टी में जा कर रहने लगा. वहीं उस के एक महिला से प्रेम संबंध बन गए थे. अकेली रहने वाली महिला को लोग घरेलू उपचार करने वाली के रूप में जानते थे. वह उस के पास रहते हुए तंत्रमंत्र का काम भी करने लगा.

जब लोग महिला के पास किसी मर्ज को ठीक करवाने के लिए आते थे, तब वह उस से तंत्रमंत्र की बातें कर उस की ताकत के बारे में बताता था. दुख को दूर करने के लिए पूजापाठ करने की सलाह देता था. धीरेधीरे दूरदराज के लोगों के बीच वह तांत्रिक पूजापाठ करवाने वाले साधक के रूप में प्रसिद्ध हो गया था.

उसी दरम्यान उस की मुलाकात माखनदास मानिकपुरी से हो गई. वह भी उस का हमउम्र था और अमसैना, थाना सिरगिट्टी का निवासी था. उस की भी तंत्रमंत्र में गहरी रुचि थी. उस की इच्छा थी कि कोई ऐसा जादू हो जाए और कहीं से गड़ा हुआ अकूत खजाना हाथ लग जाए, ताकि उस की जिंदगी मजे में कटने लगे. उस ने भी सुभाषदास की  प्रसिद्धि और साधना के बारे में सुन रखा था. माखनदास उस के पास आनेजाने लगा. उस ने उसे एक तरह से अपना गुरु बना लिया था.

अब दोनों ही गुरुशिष्य बन कर आसपास के लोगों की हर समस्या का समाधान तंत्रमंत्र से करने का दावा करने लगे थे. यही उन के जीविकोपार्जन का जरिया बन गया था. पूजापाठ के बदले में पैसे लेते थे, लेकिन उन्हें बड़ा हाथ नहीं लगा था. दूसरों को तो धनसंपदा की बरसात का दावा करते थे, गड़े धन को ढूंढ निकालने का आश्वासन देते, लेकिन इस के लिए कोई वैसा इच्छुक व्यक्ति नहीं मिला था.

                                                                                                                                 क्रमशः

तंत्र मंत्र: पैसों के लिए दी इंसानी बलि – भाग 1

छत्तीसगढ़ के जिला बिलासपुर में थाना सिरगिट्टी के प्रभारी शांत कुमार साहू सुबह करीब 10 बजे अन्य पुलिसकर्मियों को कोरोना प्रकोप से संबंधित आवश्यक निर्देश देने में मशगूल थे. केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा एक बार फिर लौकडाउन के नए दिशानिर्देश जारी किए जा चुके थे. उसे सख्ती से पालन के लिए राज्य सरकारों को भी विशेष हिदायतें दी गई थीं.

पुलिस को एक बार फिर बड़ी जिम्मेदारी निभानी थी. छत्तीसगढ़ में भी उसी दिन से लौकडाउन लगा दिया गया था. इस के चलते पुलिस के कंधों पर कानूनव्यवस्था को दुरुस्त रखने की और भी ज्यादा जिम्मेदारी आ गई थी. इस मुद्दे को ले कर कई तरह की भ्रामक चर्चाएं भी गर्म थीं. इसे ध्यान में रखते हुए पुलिसकर्मियों को विभिन्न कार्यभार सौंपे जा रहे थे. उसी दौरान एक व्यक्ति काफी घबराया हुआ थाने में घुस आया. शांत कुमार उस के उड़े हुए चेहरे की रंगत देख कर समझ गए कि वह जरूर किसी गंभीर परेशानी में है.

उन्होंने उसे वहीं थोड़ी दूरी पर बैठने का इशारा किया. वह एक खाली कुरसी पर बैठ गया. उस के कपड़े अस्तव्यस्त थे. कुछ मिनट बाद थानाप्रभारी ने सहजता से पूछा, ‘‘क्या बात है? तुम कौन हो?’’

‘‘साहब, मेरा नाम रामप्रसाद साहू है. मैं खरकेना, कोडियापार से आया हूं. मेरे छोटे भाई सुरेश कुमार साहू की हत्या हो गई है. उस की लाश एक अनजान

वीराने घर में पड़ी हुई है…’’ कहते हुए वह सुबकने लगा.

थानाप्रभारी ने पहले उस के लिए एक गिलास पानी मंगवाया. पानी पीने के बाद थानाप्रभारी ने उस से कहा, ‘‘अब बताओ, कहां पर हत्या हुई है? उस के बारे में क्या जानते हो?’’

‘‘जी, साहबजी, कल शाम अंधेरा होने पर मेरा छोटा भाई किसी दोस्त के यहां जाने को कह कर बाइक से निकला था, उस की रात में ही किसी ने हत्या कर दी. हत्यारों ने उस का काफी बेरहमी से खून कर दिया है. आप अभी वहां पर चलिए. लाश वहीं वीरान घर में पड़ी हुई है.’’

हत्या जैसे गंभीर मामले को सुन कर थानाप्रभारी शांत कुमार साहू ने कहा, ‘‘तुम्हें कैसे मालूम कि वहां हत्या हुई है? क्या तुम भी उस में शामिल थे? सब कुछ सचसच बताओ. झूठ मत बोलना.’’

इसी के साथ थानाप्रभारी ने एक कांस्टेबल को उस की पूरी बात लिखने के लिए कहा और खुद मोबाइल में रिकौर्ड करने लगे. रामप्रसाद बताने लगा, ‘‘साहबजी, मेरा भाई घर से जब निकला था तब उस के हाथ में एक थैला था. उस में पूजापाठ और दान का कुछ सामान था. उस ने जाते हुए कहा था कि थैले में पुजारी सुभाषदास का कुछ बचा हुआ सामान है. यही सामान पुजारी को देने जा रहा है.’’

‘‘फिर क्या हुआ?’’

थानाप्रभारी के टोकने के बाद रामप्रसाद आगे बोला, ‘‘देर रात तक जब वह नहीं लौटा तब मैं उस के बताए पुजारी के पास जाने के लिए निकला. किंतु पुजारी के रहने वाले स्थान से काफी पहले ही मुझे वीरान खंडहरनुमा घर के दरवाजे के बाहर उस का थैला दिख गया. उस में वह सामान नहीं था, जो वह ले कर गया था. लेकिन मैं ने उस थैले को पहचान लिया था, क्योंकि वह मेरे घर के बरामदे में ही 2 सप्ताह से टंगा था.

‘‘वहीं मेरे भाई की एक झाड़ी में चप्पल भी दिख गई. कुछ दूरी पर मेरे भाई की मोटरसाइकिल भी नजर आ गई. मैं समझ गया कि हो न हो भाई इसी मकान में होगा.

‘‘मैं ने उस के अधखुले दरवाजे से अंदर जा कर देखा तो मेरे होश उड़ गए. वहां का दृश्य देख कर मैं डर गया और भागाभागा सीधा आप के पास आ गया. आगे का वर्णन मैं नहीं कर सकता. आप खुद ही वहीं चल कर देख लीजिए और मेरे भाई के हत्यारे को पकड़ लीजिए.’’

यह बात 13 अप्रैल, 2021 की है. रामप्रसाद के बयान के आधार पर पहले उस की तरफ से थाने में एक लिखित शिकायत दर्ज की गई. उस के बाद थानाप्रभारी तत्काल घटनास्थल के लिए कुछ पुलिसकर्मियों को ले कर निकल पड़े. साथ में रामप्रसाद साहू को भी ले लिया.

घटनास्थल ठीक वैसा ही था, जैसा रामप्रसाद साहू ने थाने में वर्णन किया था. वहां पहुंच कर घटनास्थल का मुआयना किया, जो वास्तव में काफी वीभत्स और डरावना था. वहीं सुरेश साहू की क्षतविक्षत लाश पड़ी थी. उस के चेहरे और शरीर के दूसरे कई हिस्से जख्मी थी, जिन से खून निकल कर सूख चूका था.

पास में ही खून से सनी एक कुल्हाड़ी पड़ी थी और पूजापाठ के मुख्य सामान बिखरे पड़े थे. उन्हें देख कर ऐसा लग रहा था मानो पूजापाठ के बाद उस की बलि चढ़ाई गई हो. यह घटना बीती रात 12 अप्रैल की थी, उस दिन अमावस्या की काली रात थी. शांत कुमार साहू को समझते देर नहीं लगी कि सारा घटनाक्रम तंत्रमंत्र और नरबलि से जुड़ा हुआ है.

जांचपड़ताल के अलावा रामप्रसाद के बयानों के अनुसार यह तथ्य सामने आ गया कि सुरेश साहू तंत्रमंत्र में बहुत विश्वास करता था. वह 2 तांत्रिकों के संपर्क में भी था. अब सवाल यह था कि आखिर सुरेश साहू की हत्या किस ने की? तांत्रिक पुजारियों ने या फिर किसी और ने तांत्रिकों के कहने पर उस की नरबलि दे दी? मामला गंभीर होने के बावजूद पुलिस को कोई वैसी सूचना या जानकारी नहीं मिल पा रही थी, जिस से मामले को जल्द सुलझाया जा सके.

संयोग से प्रदेश में 13 अप्रैल से लौकडाउन लगने के कारण पुलिस और प्रशासन के जिम्मे अतिरिक्त जिम्मेदारियां आ गई थीं. नतीजतन सुरेश कुमार साहू हत्या की तहकीकात का मामला टल गया. लगभग 2 महीने तक लौकडाउन लगा रहा. लौकडाउन खुलने के बाद थानाप्रभारी शांत कुमार साहू ने सुरेश साहू हत्याकांड की फाइल एक बार फिर से पलटनी शुरू की. उस की नए सिरे से जांच के लिए एक खास टीम बनाई गई.

पुलिस टीम ने अपराधियों का सुराग लगाने के लिए लगभग 70 संदिग्ध लोगों के बयान दर्ज किए. जांच में 2 तथाकथित तांत्रिक सुभाषदास मानिकपुरी और माखनदास मानिकपुरी के नाम सामने आ रहे थे. दोनों ही महीनों से लापता थे. थानाप्रभारी ने दोनों की खोज करवाई. रामप्रसाद ने भी इस की पुष्टि कर दी कि उस के भाई की उन से जानपहचान थी और घटना के दिन वह उन के पास ही गया था.

उन की तलाश के लिए पुलिस ने मुखबिर की मदद ली. तब 16 नवंबर, 2021 को माखनदास पकड़ में आ गया. उस ने अपने घर वालों को बता रखा था कि वह सतना में रेलवे का गार्ड है. पुलिस उसे सतना से पकड़ कर बिलासपुर ले आई. पूछताछ करने पर पहले तो उस ने साफ इंकार कर दिया और बताया कि वह रोजीरोटी कमाने के लिए सतना में प्राइवेट काम कर रहा रहा था. घर वालों से झूठ बोला था कि वह रेलवे में गार्ड है.

                                                                                                                                               क्रमशः