Human Trafficking Case. मैं आंखों में एक सुंदर सपना लिए औनी आंटी के साथ दिल्ली आई थी. लेकिन मेरा सपना चंद दिनों में चूरचूर हो गया. मैं बिना वेतन की नौकरानी बन कर कोठियों में काम करने लगी. थोड़ी बड़ी हुई तो शारीरिक शोषण भी शुरू हो गया. मेरे उद्धार का रास्ता निकला तो, लेकिन 10 सालों बाद...
मेरा नाम आयशा राउत है और मैं एक गरीब परिवार से हूं. 17 साल की उम्र में मेरे साथ जो घटना घटी, मैं उसे आप सब से शेयर करना चाहती हूं. मैं नहीं चाहती कि मेरे साथ जो कुछ हुआ, वह किसी और के साथ हो. फरेबी और धोखेबाज लोगों से आप सावधान रहें. फरेबी लोग आप के अपने या पड़ोसी भी हो सकते हैं, जिन पर आप आंखें बंद कर के विश्वास करते हैं.
मेरा परिवार उड़ीसा के जिला सुंदरगढ़ के एक छोटे से गांव रानी बगीचा में रहता है. परिवार में मांबाप के अलावा मैं और मेरी बड़ी बहन पिंकी थी. मांबाप बड़े किसानों के खेतों में दिन भर काम करते थे, उस के बदले में जो अनाज मिलता, उस से ही जैसेतैसे घर का गुजारा हो पाता था. जब घर में खाने तक के लाले पड़े हों तो ऐसे में पढ़ाई के बारे में सोचना हास्यास्पद था. गांव के जब कुछ बच्चे स्कूल जाते तो मैं भी सोचा करती थी कि काश मैं भी स्कूल जाती. पर मेरी यह इच्छा दबी रह गई.
मेरी मां और बाप दोनों ही शराबी थे. जब वे मजदूरी पर नहीं जाते तो चावल के मांड से बनाई शराब पी कर नशे में धुत पड़े रहते थे. हम दोनों बहनें उन्हें शराब पीने को मना भी करती थीं, पर हमारी बात माननी तो दूर, वे हमें डांट देते थे. हम लड़कियां थीं, इसलिए हमारी सही बात पर भी तवज्जो नहीं दी जाती थी.






