Hindi stories: चोरीडकैती करने वाली लैला को रौनी से प्यार हुआ तो वह साथियों से धोखा करने लगी. भला उस के साथी यह धोखेबाजी कैसे बरदाश्त करते, परिणामस्वरूप वह मारी गई.
सीनियर पुलिस इंसपेक्टर से मिलने का समय ले कर मैं ने फोन रखा ही था कि रौनी आ गया. उस का चेहरा उतरा हुआ था. इस का मतलब था कि वह किसी मुसीबत में था. उस ने आते ही कहा, ‘‘कौफी का वक्त है, मंगवा लो.’’
मैं ने कौफी का और्डर दे दिया. उस ने कुरसी पर करवट बदलते हुए कहा, ‘‘दोस्त, मैं तुम से कुछ कहना चाहता हूं, जिस से मेरा दिल हलका हो जाए.’’
रौनी ऊंचा, स्मार्ट और पूरा आदमी था. वह काला सूट पहने था. रौनी अपनी बात कहे, उस से पहले मैं थोड़ा अपने बारे में बता दूं. मैं एक प्राइवेट डिटैक्टिव हूं. इस इमारत की दूसरी मंजिल पर मेरा औफिस है. उसी मंजिल पर रौनी का भी औफिस है. वह एक साइकियाट्रिस्ट था. उस के पास ज्यादा लोग नहीं आते थे, पर जो आते, वे बड़े लोग होते थे. वह उन्हीं लोगों से इतनी रकम ऐंठ लेता था कि उसे पैसों की कोई तकलीफ नहीं होती थी, क्योंकि उन के सेशन काफी चलते थे.
रौनी अपने काम में परफेक्ट था, क्योंकि जो लोग उस के पास आते थे, वे कहीं और नहीं जाते थे. उस के पास समय की कमी नहीं होती थी, इसलिए दिन में 1-2 चक्कर वह मेरे औफिस के जरूर लगा लेता था. उस की बातें बड़ी दिलचस्प और असरदार होती थीं. उस के न आने पर मुझे उस की कमी महसूस होती थी. आज मैं थोड़ा मसरूफ था. मेरा दिमाग एक उलझन में फंसा था. उस समय मेरे सामने सब से बड़ा मसला गहनों की दुकानों में होने वाली डकैतियां थीं. मेरे एक ज्वैलर क्लाइंट ने अपनी दुकान पर होने वाली डकैती के बारे में पता लगाने का काम मुझे सौंप रखा था.
इसी बात को ले कर मैं ने सीनियर पुलिस इंसपेक्टर मेहता से बात की थी. उस ने आज ही मुझे थाने बुलाया था. रौनी ने मुझे सोच में डूबा देख कर कहा, ‘‘सच में मैं बहुत परेशान हूं. मेरी दोस्त लैला का कुछ पता नहीं चल रहा है, न कोई फोन, न कोई सूचना.’’
लैला काम क्या करती थी, यह मुझे पता नहीं था, लेकिन इतना जरूर पता था कि वह क्रिस्टल बौल में लोगों को उन का भविष्य बता कर बेवकूफ बनाया करती थी. वह बेहद खूबसूरत और हंसमुख लड़की थी. हां, उस की ड्रैसिंग कुछ अजीब होती थी. वह काला या सुरमई रंग का रेशमी लबादानुमा चोंगा पहनती थी. उस के बाल पौनीटेल में बंधे होते थे. हाथों में ढेर सी मोटीमोटी चांदी की चूडि़यां कानों में बड़ीबड़ी बालियां और हमेशा होंठों पर गहरी लिपस्टिक लगाए रहती थी.
मैं ने रौनी से कहा, ‘‘हो सकता है रौनी, वह किसी काम से कहीं बाहर चली गई हो और तुम्हें बता न पाई हो?’’
‘‘नहीं, मुझे ऐसा नहीं लगता. मुझे बिना बताए वह कहीं नहीं जा सकती.’’
‘‘यह भी हो सकता है कि वह किसी क्लाइंट को प्रभावित करने के लिए कुछ खास कर रही हो और उसे फुरसत न मिल रही हो.’’
मैं ने यह बात इसलिए कही थी, क्योंकि मुझे पता चला था कि वह भविष्य बता कर अच्छेभले लोगों को उल्लू बना रही थी. मेरा तो यह भी सोचना था कि वह रौनी को भी उल्लू बना रही थी. प्यार वगैरह सब ढोंग था. रौनी का प्यार तो सच्चा था, पर मुझे लैला पर जरा भी भरोसा नहीं था.
लेकिन यह सब मैं रौनी से नहीं कह सकता था. मैं ने उसे तसल्ली देते हुए कहा, ‘‘तुम परेशान बिलकुल मत हो, निश्चित वह कहीं काम में फंसी है. जल्दी ही वह तुम्हें खबर देगी.’’
‘‘नहीं, मेरा दिल बेचैन है. परसों रात हम मिलने वाले थे. मैं उस के फ्लैट पर गया, लेकिन वह वहां नहीं मिली. कल और आज मैं ने कई बार उसे फोन किया, पर उस ने फोन नहीं उठाया. पता नहीं क्या बात है? तुम प्राइवेट जासूस हो, मेरी गुमशुदा महबूबा को ढूंढने का केस ले लो प्लीज.’’
‘‘क्या तुम ने लैला की गुमशुदगी थाने में दर्ज करा दी है?’’
‘‘नहीं, क्या मुझे उस की गुमशुदगी की सूचना पुलिस को दे देनी चाहिए?’’
‘‘अगर, सच में वह गायब है तो अवश्य दे देनी चाहिए.’’ मैं ने कहा.
दरअसल, मैं उस का केस लेना नहीं चाहता था, क्योंकि मेरा खयाल था कि लैला जानबूझ कर उस से मिलना नहीं चाह रही है. नहीं तो वह जरूर खबर करती. जाहिर है, ऐसी सूरत में मेरी भागदौड़ बेकार जाती. रौनी ने कहा, ‘‘यह मत समझना कि मैं मुफ्त में काम कराऊंगा. मैं तुम्हें इस की पूरी फीस दूंगा.’’
‘‘मेरा खयाल है कि हमें जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लेना चाहिए. हो सकता है, जल्द ही वह तुम्हें सूचना दे.’’
मेरा इंसपेक्टर से मिलने का समय हो गया था, इसलिए मैं ने खड़े होते हुए कहा, ‘‘मुझे एक जरूरी काम से पुलिस स्टेशन जाना है. मैं वहां पता करूंगा कि उस के साथ कोई हादसा तो नहीं हो गया. इस बीच तुम उस के दोस्तों और रिश्तेदारों को फोन कर के पता कर लो.’’
उस ने इत्मीनान की सांस ली. हकीकत में मैं इस मामले को ले कर जरा भी परेशान नहीं था. मैं पुलिस स्टेशन चला गया. इंसपेक्टर मेहता ने मुझे बैठा कर कहा, ‘‘मि. रुस्तम, मसला यह है कि गहनों की दुकानों में लगातार होने वाली चोरियों ने हमें परेशान कर रखा है. मेरा खयाल है, ये सारी वारदातें एक ही सिलसिले की कडि़यां हैं, पर ऐसा कोई सबूत नहीं मिल रहा है, जिस से तफतीश आगे बढ़ सके.’’
‘‘यह अंदाजा आप ने कैसे लगा लिया कि ये वारदातें एक ही सिलसिले की कडि़यां हैं? यह भी तो हो सकता है कि कोई एक ही आदमी हो, जो अलगअलग जगहों पर वारदात कर रहा हो?’’
‘‘ऐसा सोचने की वजह यह है कि एक तो ये सारी वारदातें दिन में हुई हैं, दूसरे लूटे गए गहने एकदम से गायब हो गए हैं. उन्हें कहीं बेचा भी नहीं गया. हम इस पर कड़ी नजर रखे हुए हैं. इस से यही लगता है कि यह किसी एक गिरोह का या एक आदमी का काम है.’’
इंसपेक्टर मेहता होशियार और तेजतर्रार पुलिस अफसर थे. वह जरा भी घमंडी और मगरूर नहीं थे. प्राइवेट जासूसों से भी अच्छे से मिलते थे, इसलिए मेरी उन से अच्छी अंडरस्टैंडिंग थी. आज हमारी मुलाकात का यही मकसद था कि वह इस उलझे हुए केस में मेरी सलाह और मदद चाहते थे. मैं ने पूछा, ‘‘मैं आप की क्या मदद कर सकता हूं?’’
‘‘मैं ने कुछ लोगों को पकड़ रखा है. वे इन डकैतियों में शामिल हो सकते हैं, पर काफी कोशिश के बाद भी मैं उन से कुछ मालूम नहीं कर सका हूं. शायद आप उन से काम की कोई बात उगलवा सकें.
उन के औफिस से निकल कर मैं हवालात की ओर बढ़ा था कि बरामदे में पड़ी बैंच पर मुझे रौनी की महबूबा लैला बैठी दिखाई दी. 2-3 बार वह रौनी के साथ मेरे औफिस में आई थी, इसलिए मैं उसे पहचानता था. वह थोड़ी तिरछी बैठी थी, इसलिए शायद उस ने मुझे नहीं देखा. मैं ने मेहता से पूछा, ‘‘इस औरत को जानते हो?’’
‘‘नहीं, पहले कभी नहीं देखा.’’
पहले जिस आदमी को मेरे सामने लाया गया, उस का नाम नरेन था. वह ज्वैलरी की एक दुकान में काम करता था. उस दुकान में भी डकैती हो चुकी थी. उस ने वारदात के 2 दिन पहले वहां से नौकरी छोड़ दी थी. उस से पूछताछ करने पर मैं इस नतीजे पर पहुंचा कि उस का डकैती से कोई संबंध नहीं है. दूसरा आदमी सीधासादा नौजवान बब्बन था, बातचीत से ही वह बेकसूर लग रहा था. तीसरा आदमी लंबे चेहरे वाला जिमी था. उस का कहना था कि इस शहर में आए उसे बस 2 हफ्ते ही हुए हैं. वह यहां अपनी बीमार मां को देखने आया था, जो एक नर्सिंगहोम में एडमिट थी. उस ने मेरी हर बात के जवाब ठीक दिए थे, इसलिए उस पर शक की कोई गुंजाइश नहीं थी.
फिर भी मैं ने नर्सिंगहोम में भरती उस की मां से मिलने का फैसला किया. लेकिन इस से कुछ खास फायदा नहीं हुआ. उस की मां काफी बूढ़ी थी. वह व्हीलचेयर पर बैठी थी, जिसे एक नर्स धकेल रही थी. मैं ने अपना परिचय दिया तो वह मुसकराने लगी. मैं ने कहा, ‘‘मिसेज जेसिका मैं यहां सिर्फ यह पता करने आया हूं कि यहां आप की ठीक से देखभाल हो रही है या नहीं?’’
वह सिर्फ मुसकराती रही.
मैं ने आगे पूछा, ‘‘आप के कितने बच्चे हैं, क्या आप को देखने आते हैं?’’
उस ने मुसकराते हुए कहा, ‘‘हां, मेरे 6 बच्चे हैं.’’
‘‘क्या आप उन के नाम बता सकती हैं.’’
‘‘जौर्ज, साबू, सरीन, रौकी, मेरिन और पवन.’’
‘‘क्या उन में किसी का नाम जिमी भी है?’’
‘‘हां है न, वह बहुत अच्छा लड़का है.’’
‘‘लेकिन अगर जिमी को मिला लेते हैं तो आप के 7 बच्चे हो जाते हैं.’’
‘‘तो फिर 7 ही होंगे.’’
‘‘अच्छा, एक बार उन के नाम फिर से बताइए.’’
‘‘जिमी, पवन, जौन, सुरेश, बाबू, रीता, मेरिन.’’
मैं समझ गया कि बुढि़या का दिमाग ठीक नहीं है. मैं ने नर्सिंगहोम के रिसेप्शन से पता किया तो बताया गया कि जिमी के हुलिए का एक आदमी अकसर उस से मिलने आता रहता था. यह भी पता चला कि बुढि़या से मिलने तमाम लोग आते रहते थे. वह किसी को बेटा कहती थी तो किसी को बेटी.
जवान पोतेपोतियां भी उस से मिलने आते थे. इन की सारी तादाद पता नहीं थी. मेरे खयाल में जेसिका इस मामले में खुशनसीब थी. इतने लोग उस से मिलने आते थे और उस का खयाल रखते थे. शायद बुढ़ापे की वजह से उस की याददाश्त ठीक नहीं थी. कई बार तो उसे मिलने आने वाले बेटेबेटी या पोते का नाम क्या है, यही नहीं याद होता था? सब का प्यार मिलने की वजह से हर वक्त उस के होंठों पर मुसकान खिली रहती थी.
मैं रौनी से बचता हुआ अपने औफिस पहुंच गया. अगर मैं उसे यह बता देता कि मैं ने लैला को थाने में बैठी देखा था तो वह मेरी जान खा लेता. सवाल करकर के परेशान कर देता, इसलिए मैं उस से नहीं मिला.
रात को मैं अपने अपार्टमैंट में सो रहा था कि फोन की घंटी बजी. आंख खुली तो देखा रात के 2 बज रहे थे. फोन उठाना मेरी मजबूरी थी. दूसरी तरफ से रौनी की परेशान आवाज सुनाई दी, ‘‘रुस्तम, पुलिस मेरे अपार्टमैंट की तलाशी ले रही है, तुम जल्दी से आ जाओ.’’
‘‘क्यों, पुलिस तुम्हारे अपार्टमेंट की तलाशी क्यों ले रही है?’’ मैं ने हैरानी से पूछा.
‘‘पता नहीं, ये लोग कुछ बता भी नहीं रहे हैं. दोस्त तुम फौरन आ जाओ. तुम पुलिस के साथ काम करते हो, मुमकिन है तुम इस मामले में मेरी कुछ मदद कर सको. मेरी कुछ समझ में नहीं आ रहा है?’’
यह बात मेरी भी समझ में नहीं आई थी. आखिर पुलिस रौनी के फ्लैट की तलाशी क्यों ले रही थी? मैं उसे अच्छी तरह से जानता था, वह एक शरीफ आदमी था.
उस की मदद करना जरूरी था, इसलिए मैं उसी वक्त घर से निकल पड़ा. 10 मिनट में मैं उस की बिल्डिंग में पहुंच गया. उस समय इंसपेक्टर मेहता फ्लैट से निकल रहा था. मुझे देख कर बोला, ‘‘हैलो रुस्तम, आखिरकार हम ने इसे पकड़ ही लिया?’’
‘‘क्या…?’’ मैं ने हैरानी से पूछा.
‘‘हां, पूरा माल तो नहीं, फिर भी अलगअलग दुकानों से चोरी के कुछ गहने जरूर बरामद हुए हैं. समझ लो केस खुल गया. पुलिस स्टेशन आ जाओ, मैं तुम्हें सब विस्तार से बता दूंगा.’’
मैं कुछ कहना चाहता था, तभी एएसआई और सिपाही रौनी को हथकड़ी लगा कर मेरे सामने से गुजरे, उस ने नाइटसूट पर कोट पहन रखा था, पैरों में स्लीपर थे. मुझे देख कर वह दुखी हो कर बोला, ‘‘प्लीज, मेरी मदद करो, मैं बेकसूर हूं रुस्तम.’’
पुलिस वाले उसे ले कर चले गए. मैं ने इंसपेक्टर मेहता से कहा, ‘‘मुझे लगता है, आप ने गलत आदमी को पकड़ लिया है?’’
‘‘यह तुम कैसे कह सकते हो? इस के फ्लैट से चोरी का कुछ माल बरामद हुआ है.’’
‘‘एक बात मेरी समझ में यह नहीं आ रही है कि तुम्हें इस पर क्यों शक हुआ?’’
‘‘रौनी के घर में जो औरत साफसफाई का काम करती है, उस ने अखबारों में गहनों की दुकानों में होने वाली डकैतियों के बारे में पढ़ा था. आज शाम को थाने आ कर उसी ने बताया कि उस ने रौनी के घर में कई जगहों पर गहनों के डिब्बे छिपे हुए देखे हैं, जिन में गहने रखे हैं.’’
मैं ने मेहता से कहा कि रौनी इस तरह का आदमी नहीं है. वह शरीफ और कानून पसंद आदमी है. इंसपेक्टर मेहता भी मुझ से सहमत थे, पर गहने उस के घर से बरामद हुए थे. हो सकता था, इस में उस का हाथ न हो. मैं ने कहा, ‘‘मुझे लगता है, उसे किसी ने फंसाने की कोशिश की है?’’
‘‘पर वह कौन हो सकता है? उस ने ऐसा क्यों किया?’’
उसी समय मेरी जेहन में लैला का खयाल आया. उसे मैं ने थाने के बरामदे में बैठी देखा था. मैं ने यह बात मेहता से पूछी तो उस ने कहा, ‘‘हां, सुबह जब तुम ने उस के बारे में पूछा था तो मैं ने पता किया कि वह थाने क्यों आई थी? उस ने बताया कि वह जिमी का इंतजार कर रही थी. मेरा खयाल है कि वह जिमी की गर्लफ्रैंड है, क्योंकि जब जिमी पहुंचा था तो उन दोनों में बातचीत भी हुई थी. झगड़े जैसी आवाजें भी आई थीं. बाद में वह उसी के साथ चली गई थी.’’
‘‘मुझे यकीन था कि वह रौनी और इस केस के बीच की कड़ी थी. हमें सख्त पूछताछ करनी होगी.’’ मैं ने कहा.
‘‘मैं अपने आदमियों को लैला और जिमी की तलाश में भेजता हूं.’’ मेहता ने कहा.
रौनी को पुलिस से रिहा करा कर मैं घर आ गया. मैं ने मेहता से वादा किया था कि किसी भी वक्त रौनी को हाजिर करने की जिम्मेदारी मेरी है. उस ने भी कहा था कि लैला के मिलते ही वह मुझे सूचना देगा.
दूसरे दिन रौनी जब मेरे औफिस आया तो उस की हालत काफी खराब थी. उस के बाल बिखरे हुए थे, चेहरा उजड़ा हुआ था. वह दुखी हो कर बोला, ‘‘यह कितनी खराब बात थी कि पुलिस वाले मुझे मुजरिमों की तरह हथकड़ी लगा कर ले गए.’’
‘‘रौनी, तुम्हारे घर से चोरी के गहने बरामद हुए थे. उन्हें यह तो करना ही था. शुक्र करो कि तुम्हें रिहाई मिल गई, सवाल यह है कि तुम्हारे घर चोरी के गहने आए कैसे?’’
‘‘मुझे इस बारे में कुछ खबर नहीं है. तुम्हें तो पता है कि मैं ज्यादातर घर से बाहर रहता हूं. मुझे खुद हैरानी हो रही है कि मेरे घर किस ने और क्यों वे गहने रखे?’’
‘‘लैला के बारे में तुम्हारा क्या खयाल है, क्या यह मुमकिन है?’’
उस ने मेरी बात काट कर कहा, ‘‘नहीं, वह ऐसा नहीं कर सकती. उस के पास चोरी के गहने कहां से आएंगे? तुम उस पर क्यों शक कर रहे हो?’’
‘‘क्या तुम उस के अतीत के बारे में जानते हो? उस की हर गतिविधि की जानकारी तुम्हें रहती है?’’
‘‘क्यों, उस की ऐक्टीविटीज जानना जरूरी है?’’
‘‘तभी तो कोई बात तुम दावे से कह सकते हो. किसी इंसान के बारे में कुछ कहने के लिए उस का अतीत, वर्तमान और बैकग्राउंड जानना जरूरी है और उसे गहनों का शौक भी बहुत है.’’
‘‘मैं उस के बारे में बस इतना जानता हूं कि उस की बूढ़ी मां यहां के एक नर्सिंगहोम में भरती है.’’
‘‘एक मिनट, उस की मां का नाम क्या है? और वह किस नर्सिंगहोम में भरती है?’’
उस ने हिचकिचाते हुए कहा, ‘‘न तो मुझे उस की मां का नाम पता है, न नर्सिंगहोम का.’’
‘‘क्या उस के बहुत सारे भाईबहन हैं?’’
‘‘भाईबहन का उस ने जिक्र ही नहीं किया मुझ से.’’
मेरे दिमाग में अजीब सी हलचल मची हुई थी, जिस ने मुझे बेचैन कर रखा था.
दोपहर को एक संदिग्ध आदमी से पूछताछ चल रही थी. मुझे देखते ही मेहता ने कहा, ‘‘पिछली रात तुम्हारे दोस्त के फ्लैट से जो गहने हमें मिले थे, उन्हें 2-3 दुकानदारों ने पहचान लिया है. उन्हीं की दुकान के थे. बस इस के आगे तफतीश नहीं बढ़ रही है.’’
‘‘लैला का क्या हुआ? उस से कोई काम की बात पता चली?’’
‘‘नहीं, हम उसे अभी तक तलाश नहीं सके.’’
‘‘तुम ने कहा था कि कल उस ने जिमी से बात की थी और उसी के साथ गई थी तो जिमी को पकड़ कर उस से लैला के बारे में क्यों नहीं पूछते?’’
‘‘मेरे दिमाग में यह बात आई तो थी, लेकिन जिमी भी लापता है.’’ मेहता ने कहा.
मैं ने उसे जिमी की मां से मुलाकात के बारे में बता कर कहा कि रौनी बता रहा था कि लैला की मां भी किसी नर्सिंगहोम में भरती है. तभी फोन बज उठा. उस के चेहरे पर चिंता उभर आई. कुछ अच्छी खबर नहीं थी. बताया गया कि लैला की लाश एक कूड़ेदान में पड़ी मिली है, उसे पिछली रात ही मारा गया है. मैं एक ठंडी सांस भर कर रह गया. यकीनन लैला की मौत रौनी के लिए एक बड़ा सदमा थी. उस ने आगे कहा, ‘‘उस की मां का नाम जेसिका है. वह यहां एक नर्सिंगहोम में भरती है, मेरा खयाल है हमें उस से मिलना चाहिए. शायद उस से कुछ काम की बातें पता चल सकें. उसे उस की बेटी की मौत की इत्तला भी देनी है.’’
जेसिका से काम की कोई बात पता चल सकेगी, मुझे जरा भी उम्मीद नहीं थी. हो सकता है बेटी की मौत की खबर सुन कर वह कुछ कहे या नौर्मल हो जाए. जब हम नर्सिंगहोम पहुंचे, जेसिका के कमरे में ताला लगा था. हम ने नर्स से पूछा तो उस ने कहा, ‘‘वह यहीं कहीं घूम रही होगी. थोड़ी देर पहले अपनी व्हीलचेयर पर यहीं बरामदे में घूम रही थी.’’
पर हमें जेसिका कहीं नहीं मिली. हम ने उन से डुप्लीकेट चाबी ले कर कमरा खोला तो कमरे की सारी चीजें बिखरी पड़ी थीं, मेज की दराजें खुली थीं, सामान बाहर पड़ा था. 2 दिन पहले उस ने जो गाउन पहन रखा था, वह भी फर्श पर पड़ा था. बिस्तर भी अस्तव्यस्त था. हम सब हैरान थे, क्योंकि वह तो डिसएबल थी. वह ऐसा कर नहीं सकती थी. किसी की मदद के बगैर उसे कुछ करना मुमकिन नहीं था. अचानक मेरे दिमाग में एक बात कौंधी, मैं तेज कदमों से नर्सिंगहोम के सामने की तरफ बढ़ा. सीढि़यों के करीब पहुंच कर मैं ने खिड़की से बाहर झांका. उस समय हम दूसरी मंजिल पर थे.
नीचे इमारत के सामने मुझे जेसिका दिखाई दे गई. वह जल्दीजल्दी 2 सूटकेस एक टैक्सी के पिछले दरवाजे से ठूंसने की कोशिश कर रही थी. जल्दी से वह टैक्सी की पिछली सीट पर बैठ गई. इस बीच मेहता और नर्स भी मेरे करीब आ गए थे. उन दोनों ने भी जेसिका को देख लिया था.
मेहता ने पूछा, ‘‘क्या यही जेसिका है?’’
मैं ने कहा, ‘‘हां, यही जेसिका है.’’
नर्स दांत भींचते हुए गुस्से में बोली, ‘‘मैं इस कमबख्त को मजबूर समझ कर 2 महीने से इस की व्हीलचेयर धकेल रही थी. यह तो मुझ से भी तेज चल सकती है.’’
मेहता ने मोबाइल निकाल कर टैक्सी के औफिस फोन कर के पूछा कि जो टैक्सी इरोज नर्सिंगहोम से सवारी उठा रही है, वह कहां के लिए बुक की गई है?
पता चला कि वह टैक्सी एयरपोर्ट जाने के लिए बुक की गई थी. उन्होंने उसी समय थाने फोन कर के ड्यूटी औफिसर से कहा कि इस नंबर की टैक्सी का तुरंत पीछा किया जाए, साथ ही बारीकी से मिसेज जेसिका का हुलिया बता कर कहा गया कि जैसे ही यह औरत टैक्सी से उतरे, उस की निगरानी की जाए.’’
इस में कोई शक नहीं कि मेहता एक जहीन अफसर थे. उन्होंने बड़ी होशियारी से पूरी सिचुएशन को हैंडल किया और उन्होंने तुरंत एयरपोर्ट फोन कर के वहां के सिक्यूरिटी अफसर से बात की. उन्होंने जेसिका का हुलिया बता कर कहा कि इसे या इस के किसी साथी को प्लेन में सवार न होने दिया जाए. मेहता की ज्यादा दिलचस्पी उन दोनों सूटकेसों में थी, जो जेसिका ने कार में ठूंसे थे. नर्सिंगहोम से निकल कर मेहता की गाड़ी एयरपोर्ट के लिए चल पड़ी थी. मुझे उम्मीद थी कि हम टाइम पर एयरपोर्ट पहुंच जाएंगे और हमेशा मुसकराने वाली बुढि़या का ड्रौपसीन देख लेंगे, जिस की बेजान टांगे एकदम ठीक हो गई थीं.
मेहता ने वायरलैस स्विच औन कर लिया था और अपने आदमियों से मिलने वाली खबरें एयरपोर्ट के सिक्यूरिटी अफसर को देने लगा कि जेसिका की टैक्सी एयरपोर्ट पार्किंग में दाखिल हो रही है. उस का स्वागत करने को तैयार रहें. हम खुशनसीब निकले कि जब हम लोग एयरपोर्ट पहुंचे, मिसेज जेसिका टैक्सी से उतर रही थीं, साथ ही मेहता के बंदे भी पहुंच चुके थे. जेसिका दोनों हाथों से सूटकेस संभाले टिकट काउंटर की ओर बढ़ी. उस के बाद वह वेटिंग लाउंज की ओर बढ़ी. वहां भीड़ में मिसेज जेसिका की उस के बच्चों से मुलाकात हो गई. वे सब के सब जवान और अधेड़ उम्र के थे.
जैसे ही स्पीकर पर कहा गया कि मुसाफिर जहाज पर पहुंच जाएं, वे सब लाउंज के दरवाजे की तरफ बढ़े. उसी समय मेहता के सहयोगियों और एयरपोर्ट के सिक्यूरिटी अफसर ने आगे बढ़ कर उस हंसतीमुसकराती फैमिली को अपने घेरे में ले लिया. उन में से 1-2 ने भागने की कोशिश की, लेकिन वे पकड़ लिए गए. उसी समय हम सब भी वहां पहुंच गए. मैं ने उन में से कुछ को पहचान लिया. जिमी और नरेन, उस में वह आदमी भी था, जिस ने चोरी से पहले नौकरी छोड़ दी थी और बब्बन भी था. बाकी लोगों को मेहता ने पहचान लिया. ज्वैलरी डकैती के केस में वह उन से पूछताछ कर चुका था और उन्हें बेगुनाह समझ कर छोड़ दिया था.
बूढ़ी जेसिका के होंठों की मुसकराहट गायब हो चुकी थी. वह गालियां बकते हुए अपनी औलादों को डांट रही थी कि उन लोगों की लापरवाही की वजह से पुलिस उन के पीछे लग गई, यह उन की भूल थी. मेहता के सिपाहियों ने सूटकेस अपने कब्जे में ले लिए. सूटकेस जाते देख कर जेसिका गुस्से से पागल हो उठी. वह पुलिस वालों के विरोध में बोल रही थी. उन के खिलाफ कानूनी काररवाई की धमकी दे रही थी. हमें यकीन था कि शहर की दुकानों से लूटे गए गहने उन्हीं दोनों सूटकेसों में हैं. इसलिए इन सब को गिरफ्तार करने के लिए कहा गया. अंदाजा था, लैला का मर्डर भी उन्हीं लोगों ने किया था.
जब उन सब को हथकडि़यां पहनाई जाने लगीं तो वे सब खुद को बेगुनाह साबित करते हुए बुरी तरह चीखनेचिल्लाने लगे. उन की मां बचीखुची गालियां दे कर उन्हें चुप कराने लगी. पुलिस स्टेशन पहुंच कर बारीबारी से सब से अलगअलग पूछताछ की गई. पता चला कि लैला के कत्ल के बाद जिमी ने ही जेसिका और अन्य लोगों को वहां से भाग चलने के लिए मजबूर किया था. जब जेसिका सारे गहने समेट कर भाग रही थी, तभी हमारी नजर उस पर पड़ गई थी, सारे साथी एयरपोर्ट पर मिल कर फरार होने वाले थे.
अब मेरी सब से बड़ी मुश्किल यह थी कि पेपर में खबर छपने से पहले ये सारी बातें रौनी को कैसे बताऊं? यह सब जान कर उसे कितना दुख होगा और लैला की मौत की खबर तो उसे पागल कर देगी. मैं ने अपने औफिस में उसे बुला कर अच्छे तरीके से सारी बातें बताईं. यह सब सुन कर वह एकदम से शौक्ड रह गया था. उस ने अपने आप पर कंट्रोल किया, दुखी हो कर बोला, ‘‘रुस्तम, मैं ने जिंदगी में पहली बार किसी से मोहब्बत की थी, वह भी बहुत ज्यादा. उस का अंजाम कितना दुखद हुआ. मुझे पता नहीं था कि वह ऐसी होगी और इस तरह मारी जाएगी.’’
मैं जानता था कि उसे बड़ा गहरा सदमा लगेगा. इस क्राइसिस से निकलने में उसे वक्त लगेगा. फिर भी मैं ने उस का दुख कम करने के लिए कहा, ‘‘हो सकता है, उस का बचपन गरीबी में गुजरा हो, हालात से तंग आ कर उस ने चोरी के रास्ते पर कदम बढ़ाए हो, हम कह नहीं सकते. वह किन हालात में चोर बनी, अब उसे भूलने के अलावा और कोई रास्ता नहीं है.’’
रौनी ने एक ठंडी सांस भर कहा, ‘‘हां, शायद तुम ठीक कह रहे हो. वह दिल की बहुत अच्छी थी, बहुत चाहने वाली. पता नहीं किस मजबूरी ने उसे गलत राह पर डाल दिया था.’’
पर यह हकीकत अपनी जगह थी कि वह एक मुजरिम थी. मजे की बात यह थी कि उन सारे लोगों में किसी का किसी से कोई आपसी रिश्ता नहीं था. ये सभी गहनों की दुकानों को लूटने के लिए आपस में मिल बैठे थे. वे अन्य शहरों में भी इसी किस्म की वारदात कर चुके थे. उन सभी को एक गिरोह में समेटने वाली जेसिका थी. वह इस गिरोह की सरगना थी. उस की प्लानिंग और हिदायत पर ही वे वारदात करते थे. गिरोह में कुल 10 लोग थे. लैला भी इस गिरोह में शामिल थी. लेकिन यहां आने के बाद उस की नीयत बदल गई. वह अपने हिस्से के गहने नर्सिंगहोम में भरती जेसिका के पास जमा कराने के बजाय गायब करने लगी. गहने जमा करने के लिए उन्होंने कितनी सेफ जगह ढूंढी थी-नर्सिंगहोम.
लैला की इस हरकत की वजह शायद रौनी था, वह उस से सचमुच मोहब्बत करने लगी थी. वह कुछ माल जमा कर के रौनी को अपनी मोहब्बत से मजबूर कर के किसी अंजान शहर भाग जाना चाहती थी, जहां वह चैन की जिंदगी गुजार सके. चोरी के गहने बेच कर उसे अच्छीखासी रकम मिल सकती थी. लेकिन उस ने अभी तक रौनी को अपने मंसूबे से आगाह नहीं किया था. उसे यह भी नहीं बताया था कि वह चोरी किए गए गहने उस के फ्लैट में छिपा रही है. जेसिका को शक हो गया था कि लैला चोरी किए गए पूरे गहने उस के पास जमा नहीं कर रही है.
उस ने गैंग के दूसरे आदमियों को उस की निगरानी पर लगा दिया था. जिमी ने गहनों के बारे में पता लगाने के लिए सख्ती की तो लैला अपनी जान से हाथ धो बैठी. जुर्म करने के लिए ये सभी एक रिश्ते में बंधे थे. उन की सरगना जेसिका उन की मां का रोल एक अपाहिज औरत के रूप में बहुत अच्छे से कर रही थी. पकड़े जाने पर सारे रिश्ते बिखर गए. Hindi stories






