Hindi Stories: आदमी की किस्मत उस के पसीने से लिखी होती है, जिस ने भी यह बात कही है, गलत नहीं कही. उस घर में जो रौनक, हुस्न और खुशबू थी, वह सनोवर के पसीने की बदौलत थी.

शाम को घर पहुंचा तो 6 बज रहे थे. 7 बजे किसी पार्टी में जाना था. मैं ने ड्राइंगरूम  में कदम रखा तो वह खुशबू से महक रहा था. बैडरूम में दाखिल हुआ तो मैं ने जोहरा को सिंगार मेज के बड़े आईने के सामने खड़ी देखा. वह अभीअभी नहा कर गुसलखाने से निकली थी. उस के बालों में नमी थी. उस के बाल गरदन तक बड़ी नफासत से तराशे हुए थे. उन से भीनीभीनी खुशबू फूट रही थी. वह मेकअप करने में मसरूफ थी. उस ने मुझे आईने में देखा और रस्मी अंदाज से बोली, ‘‘हैलो डियर.’’

‘‘हैलो…’’ मैं ने अपना ब्रीफकेस पलंग पर रख दिया, ‘‘पार्टी 7 बजे है और तुम अभी से तैयार हो रही हो?’’

‘‘मैं तैयार कहां हो रही हूं?’’ उस ने कहा, ‘‘सिर्फ पाउडर लगा रही थी. अभी मैं ब्यूटीपार्लर जा रही हूं.’’

‘‘ब्यूटीपार्लर?’’ मैं ने बैड पर बैठते हुए उस की तरफ देखा, ‘‘यह जो सिंगार मेज पर मेकअप के सामान की दुकान लगी है और हर महीने जो तुम 2 हजार रुपए का सामान खरीदती हो, वह मेरी समझ में नहीं आता. जब बातबात पर ब्यूटीपार्लर जाती हो तो फिर मेकअप का सामान मत खरीदा करो.’’

‘‘जब भी किसी पार्टी में जाती हूं तो ब्यूटीपार्लर से तैयार हो कर आती हूं. घर में रहती हूं या शौपिंग के लिए जाती हूं तो घर में मेकअप कर लेती हूं. यह बात तुम भूल जाते हो.’’

‘‘तुम्हें अपनी नजरों के सामने पा कर हर बात भूल जाता हूं.’’

‘‘तुम तैयार हो जाओ, तब तक मैं ब्यूटीपार्लर से हो आऊं.’’ वह बोली, ‘‘अपनी गाड़ी की चाबी तो देना.’’

वह गाड़ी की चाबी ले कर तेजी से बाहर निकल गई. उस ने न तो चाय के लिए पूछा था और न ही नौकरानी को बुला कर कहा था कि मेरे लिए चाय वगैरह बना दे. उसे मेरा खयाल कभी नहीं रहता था. वह तो अपने आप और अपनी दुनिया में गुम रहती थी. मैं उस की खुदगरजी का जैसे आदी हो गया था. वह घर में बीवी नहीं, महबूबा बन कर रह रही थी.

मैं गुसलखाने से बाहर आया. 7 बज गए थे. जोहरा 5-7 मिनट पहले ही ब्यूटीपार्लर से तैयार हो कर आई थी. मैं ने उस की सजधज देखी तो देखता ही रह गया. वह किसी दुलहन के अंदाज में बनसंवर कर आई थी. बेहद हसीन होने के बावजूद वह अपने आप को और भी हसीन बनाने की कोशिश करती थी, ताकि महफिलों में हर किसी की नजर में छा जाए.

उस का हुस्न रोजबरोज निखरता जा रहा था. इस की एक वजह यह थी कि उसे सारा दिन सजनेसंवरने और दावतों में जाने के सिवा कोई और काम नहीं था. मैं कभीकभी सोचता था कि क्या मैं ने जोहरा से सिर्फ इसलिए शादी की थी कि मेरी बीवी हसीन औरत हो? क्या औरत महज हुस्न व शबाब का नाम है? क्या मर्द को औरत के शबाब और जिस्म ही से दिलचस्पी होती है? उसे औरत से कुछ और नहीं चाहिए क्या?

मैं ने उस के करीब पहुंच कर उसे अपने बाजुओं में कैद कर लेना चाहा तो वह एकदम तेजी से पीछे हटी, ‘‘ओह नो डियर, मेरे बाल, कपड़े और मेकअप का सत्यानाश हो जाएगा.’’

‘‘और मेरे जज्बात का…’’ मैं ने क्षुब्ध हो कर पूछा.

‘‘उन्हें वापसी तक काबू में रखो,’’ वह मुसकराई, ‘‘मैं ने 500 रुपए दिए हैं ब्यूटीपार्लर वालों को.’’

जब हम गाड़ी में बैठे तो उस ने अपने पर्स से एक चिट निकाल कर मेरी तरफ बढ़ाई, ‘‘पहले आप यहां चलें. मेरी सहेली और उस के शौहर को साथ ले कर पार्टी में चलते हैं. वे भी इत्तफाक से इस पार्टी में बुलाए गए हैं.’’

‘‘यह क्या कोई नई चीज है?’’ मैं उस के हाथ से चिट ले कर पता पढ़ने लगा.

‘‘यह सनोवर है…’’

‘‘सनोवर!’’ मेरा दिल धड़क उठा. मैं ने अनजान बन कर पूछा, ‘‘कौन सनोवर? शायद यह नाम मैं पहली बार सुन रहा हूं.’’

‘‘लो, तुम मेरी सब से प्यारी सहेली और अपनी क्लासफेलो को भूल गए?’’ उस ने हैरत से मेरी तरफ देखा.

‘‘जब तुम मिल गईं तो किसी को याद रखने की जरूरत ही क्या है?’’ मैं ने कहा, ‘‘कुछ याद तो आ रहा है कि कोई लड़की सनोवर हमारे साथ पढ़ती थी. वही सनोवर थी न, जो बहुत काली चमकीली सी थी?’’

‘‘खैर, अब बहुत ज्यादा बनिए नहीं,’’ उस ने अपनी कमर की तरफ बढ़ते मेरे हाथ को पकड़ कर कहा, ‘‘तुम्हारे साथ उस का हर वक्त उठनाबैठना था. तुम उस के साथ कुछ ज्यादा ही बातें नहीं करते थे बल्कि उसे अपने नोट्स भी देते थे.’’

‘‘इस बात को 7-8 साल का अरसा हो गया है और मैं बहुत सारी पुरानी बातें भूल चुका हूं.’’ मैं ने गाड़ी स्टार्ट करते हुए कहा, ‘‘सनोवर से तुम्हारी मुलाकात कहां हो गई? इतने अरसे तक वह कहां गायब रही?’’

‘‘उस से कल मेरी मुलाकात जौहरी बाजार में हो गई थी.’’

‘‘वह तुम्हारी सब से प्यारी सहेली थी,’’ मैं बोला, ‘‘मगर अब नहीं रही. उस ने 7-8 बरसों में भूल कर भी तुम्हारी खबर नहीं ली. ऐसी बेवफा सहेली के यहां तुम किस लिए जा रही हो?’’

‘‘वह शादी के बाद अपने शौहर के साथ लंदन चली गई थी. करीब 3 साल पहले ही वापस आई है.’’

‘‘उस की शादी शायद कदूस से हुई थी,’’ मैं ने उसे याद दिलाया, ‘‘कदूस भी हमारा हमजमात और अच्छे दोस्तों में था. उस ने एक शहर में रहते हुए कभी मिलने की कोशिश नहीं की. दोनों मियांबीवी बड़े खुदगर्ज निकले.’’

‘‘तुम उन दोनों को तो इलजाम दे रहे हो, मगर जरा खुद भी तो सोचो कि तुम या मैं कितनी बार उन के यहां गए हैं.’’

‘‘तुम सच कहती हो.’’ कह कर मैं ने बात खत्म कर दी.

मैं सरोवर का सामना नहीं करना चाहता था, इसलिए कि मैं उस की मोहब्बत का मुजरिम था. मैं सोच रहा था कि सनोवर से जब सामना होगा, नजरें मिलेंगी तो निगाहों की जुबान न जाने कितने शिकवेशिकायतें करेंगी. क्या मेरे पास कोई जवाब होगा? क्या मैं उस के किसी सवाल का जवाब दे सकूंगा? उस से नजरें मिला सकूंगा? क्या मैं इस काबिल हूं कि उस के सामने जा सकूं?

मैं ने सिगरेट खरीदने के बहाने गाड़ी अचानक पान की दुकान के सामने रोक दी, इसलिए कि मेरे खयालों में सनोवर का चेहरा बारबार लहराने लगा था. दोएक बार मुझ से एक्सीडेंट होतेहोते रह गया था. मैं ने सिगरेट खरीदते वक्त सोचा कि जोहरा से कहूंगा कि वह गाड़ी चलाए. लेकिन मुझे यह कहने की नौबत नहीं आई. वह मेरे कहने से पहले ही स्टीयरिंग पर बैठ गई थी. मैं गाड़ी में बैठा तो उस ने इंजन स्टार्ट करते हुए कहा, ‘‘तुम आज गाड़ी बहुत बेतुके ढंग से चला रहे हो. 2 बार एक्सीडेंट होतेहोते बचा है. लगता है, तुम्हारा दिमाग कहीं और है, नजरें कहीं और…’’

‘‘तुम जो मेरे पास कयामतखेज हुस्न के साथ बैठी हो, उस की वजह से मैं किसकिस को काबू में रखूं?’’

‘‘आज तुम बहुत ज्यादा खुशामदाना बातें कर रहे हो. खैरियत तो है?’’ उस ने कातिल नजरों से मेरी ओर देखा.

मैं ने उस की बात को हंस कर टाल दिया. आदमी अपनी पहली मोहब्बत को कभी भुला नहीं सकता. मैं भी वह दिन नहीं भूला, जिस दिन मैं ने सनोवर के कदमों में अपना दिल रख दिया था. हम दोनों ने अपनी मोहब्बत का राज किसी पर जाहिर नहीं किया था. एकदूसरे से चुपकेचुपके मोहब्बत करते थे और चोरीछिपे मिलते थे. फाइनल इम्तिहान के बाद एक दिन सनोवर का टेलीफोन आया, ‘‘क्या तुम आज शाम मुझ से अजीज पार्क में मिल सकते हो?’’

मैं अजीज पार्क में पहुंच गया था उसे लेने के लिए. करीब ही मेरे दोस्त का एक फ्लैट था. वह 10 दिन के लिए अपनी बीवी को ले कर सैर पर गया था. फ्लैट की चाबी मेरे पास छोड़ गया था. मैं सनोवर को साथ ले कर उस फ्लैट पर पहुंचा था. फ्लैट में कदम रखते ही वह मेरे सीने पर सिर रख कर बिलख पड़ी थी. फिर फूटफूट कर रोने लगी. मैं हैरानपरेशान हो रहा था कि बात क्या है. मैं ने उस के बालों को सहलाया. उस से पूछा तो उस ने मेरे सीने को अपने आंसुओं से भिगो दिया. बड़ी मुश्किल से उस ने अपने आंसुओं और जज्बात पर काबू पाया. मैं खामोश खड़ा उस की तरफ देखता रहा, फिर पूछा, ‘‘क्या बात है सनोवर? तुम इतनी परेशान क्यों हो?’’

‘‘हमारी मोहब्बत की आजमाइश का वक्त आ गया है,’’ उस की आवाज भर्रा सी गई, ‘‘अब क्या होगा?’’

मैं अच्छी तरह से समझ गया था कि वह क्या कहना चाहती थी. उस ने जो इशारा किया था, वह साफ था. इधर मैं और जोहरा कुछ दिनों से एकदूसरे में दिलचस्पी लेने लगे थे. मेरा दिल सनोवर से कुछ भर सा गया था. शायद इसलिए भी कि हम तनहाई में कई बार मिले थे, मोहब्बत भरी बातें भी की थीं. उस ने मुझे अपने घर वालों की कमजोर माली हालात के बारे में बहुत कुछ बता दिया था. मैं ने उसे तसल्ली दी थी, ‘‘हमारी मोहब्बत हर आजमाइश में पूरी उतरेगी.’’

‘‘कदूस का रिश्ता आया है. वह मुझ से एक महीने के अंदरअंदर शादी करना चाहता है, इसलिए कि वह लंदन जाने वाला है.’’

‘‘कदूस का रिश्ता आया है?’’ मैं हैरत और खुशी से उछल पड़ा. मुझे यकीन नहीं आया, इसलिए कि जोहरा और कदूस एकदूसरे के गहरे मित्र थे. मेरा क्या, सनोवर और तमाम हमजमातों का खयाल था कि वे दोनों मोहब्बत करते थे. जोहरा की तरफ से निराश हो कर ही मैं सनोवर की तरफ झुका था.

इधर जोहरा से मेरी मुलाकातें होने लगी थीं. मेरा खयाल था कि वह चूंकि बड़े घराने और फ्री सोसाइटी की लड़की है और मैं लौन टेनिस का मशहूर खिलाड़ी हूं, इसलिए वह मुझ से मिलती है. सनोवर ने मुझे बहुत बड़ी खुशखबरी सुनाई थी. मैं ने अपनी खुशी को हैरत के नीचे दबाते हुए कहा, ‘‘यह कैसे हो सकता है सनोवर? कदूस मोहब्बत जोहरा से करे और शादी तुम से करने के लिए अपना रिश्ता भेजे? नामुमकिन.’’

‘‘शायद जोहरा और उस के घर वालों ने कदूस का रिश्ता कबूल करने से इनकार कर दिया हो.’’ सनोवर बोली.

‘‘जोहरा अगर कदूस से मोहब्बत करती है तो इनकार का सवाल ही पैदा नहीं होता. और फिर कदूस कोई ऐरागैरा नहीं है. वह एक ऐसा नौजवान है, जिस के सामने यकीनी तौर पर उज्जवल भविष्य है. उस का खानदान भी हर लिहाज  से बड़ा है.’’

‘‘जोहरा की बात छोड़ो, मेरी बात करो.’’ वह जख्म खाए लहजे में बोली, ‘‘कदूस में इतनी खूबियां हैं तो क्या मेरे मांबाप मेरा रिश्ता देने से इनकार कर देंगे? हरगिज नहीं. वे उस के बारे में रस्मी तौर पर जांच कर रहे हैं. 4-5 दिनों में जवाब देने वाले हैं.’’

‘‘मुझे उम्मीद नहीं है कि तुम्हारा उस से रिश्ता हो जाए.’’ मैं ने अपना खयाल जाहिर किया.

‘‘क्यों?’’ उस ने मेरे सीने से अपना सिर उठा कर मेरी आंखों में झांका तो उस की आंखों में शदीद हैरानी थी, ‘‘क्यों नहीं कबूल करेंगे? एक तरह से मेरे घर वाले तैयार हो गए हैं. क्या तुम्हारे वालिद के पास 2-3 लाख रुपए हैं?’’

‘‘कदूस ने किसी चीज की मांग नहीं की है. उस ने कहा है कि उसे किसी दहेज की जरूरत नहीं है.’’

‘‘यह कदूस कब से इतने ऊंचे खयालात का मालिक हो गया?’’

‘‘मेरा खयाल है कि वह जोहरा से इंतकाम लेने के लिए मुझ से शादी कर रहा है. मैं चाहती हूं कि तुम कल ही अपने घर वालों को मेरे यहां भेजो. दहेज की शर्त न रखो तो बात बन जाएगी. मैं कदूस से शादी करने से इनकार कर दूंगी.’’

वह फिर मेरे सीने से लग गई. मैं जोहरा के बारे में सोचने लगा. जोहरा सनोवर से कहीं ज्यादा हसीन थी. उस का रंग भी दूध की तरह उजला था. सब से बढ़ कर तो यह बात थी कि वह एक दौलतमंद घराने की लड़की थी. मुझे दहेज में हर चीज मिल सकती थी और साथ ही उस के डैडी मुझे अच्छी नौकरी भी दिला सकते थे. सनोवर से मैं मोहब्बत तो कर सकता था, पर शादी नहीं.

‘‘मेरे घर वाले इतनी जल्दी मेरी शादी करने पर शायद ही तैयार हों,’’ मैं ने बहाना पेश किया, ‘‘इसलिए कि मैं अब तक रोजगार वाला नहीं हुआ हूं और फिर मेरी छोटी बहन की शादी भी होनी है. क्या तुम्हारे घर वाले

2-1 साल तक रुक नहीं सकते?’’

सनोवर फिर रोने लगी थी. वह मुझे हर कीमत पर पाना चाहती थी और मैं था कि उसे खूबसूरती से टाल देना चाहता था. मैं ने उसे अपने बाजुओं के घेरे में कैद कर के कहा, ‘‘सनोवर, अगर तुम यह समझती हो कि मेरी मोहब्बत में कोई खोट है और मुझे आजमाना चाहती हो तो आजमा सकती हो. कहो तो मैं इस फ्लैट की बालकनी से छलांग लगा कर जान दे सकता हूं. खुदकुशी कर सकता हूं. कदूस को कत्ल कर सकता हूं, मगर तुम से शादी नहीं कर सकता, इसलिए कि मजबूरियां मेरी राह में रुकावट बनी हुई हैं.’’

‘‘तुम कत्ल कर सकते हो, अपनी जान दे सकते हो, मगर मुझ से शादी नहीं कर सकते? तुम यह क्यों नहीं कहते कि तुम मुझ से शादी करना ही नहीं चाहते? तुम्हें मुझ से मोहब्बत नहीं रही है. तुम्हारा दिल मुझ से भर चुका है.’’

‘‘तुम मेरी मोहब्बत पर, मुझ पर इलजाम लगा रही हो?’’ मैं ने उसे अपने सीने से अलग करते हुए कहा, ‘‘मैं बालकनी से छलांग लगाने जा रहा हूं, ताकि तुम्हें मेरी मोहब्बत का यकीन आ जाए.’’

मैं उसे एक तरफ हटा कर बालकनी की तरफ बढ़ने लगा तो उस ने लपक कर मेरा बाजू पकड़ लिया. वह भयभीत हो कर बोली, ‘‘नहीं एयाज, नहीं. मुझे माफ कर दो. मैं जज्बात की रौ में बह कर न जाने क्या कुछ कह गई. प्लीज, मुझे माफ कर दो.’’

वह फिर रोने लगी. उस की हिचकियां बंध गईं. मैं उसे काफी देर तक समझाता रहा. एक घंटे के बाद वह फ्लैट से निकली तो कदूस से शादी के लिए तैयार हो गई थी. उस ने रुखसत होते वक्त मुझ से कहा था कि वह कभी भी इस मोहब्बत को भुला नहीं सकेगी. तीसरे दिन मुझे कदूस मिला तो उस ने बताया कि उस ने न तो जोहरा से कभी मोहब्बत की और न ही शादी के बारे में कभी सोचा. वह चूंकि एक हसीन लड़की थी, इसलिए उस का साथ उसे अच्छा लगता था. वह तो सनोवर को पहले दिन से पसंद करता रहा था, मगर कभी उस ने उस पर अपनी मोहब्बत जाहिर नहीं की थी.

कोई 20 दिनों के बाद सनोवर और कदूस की शादी हो गई. उस के एक महीने बाद जोहरा से मेरी शादी भी हो गई. जोहरा को पा कर मैं बहुत खुश था, इसलिए कि वह अपने साथ दहेज में एक मकान और गाड़ी भी लाई थी. फिर मुझे जोहरा के वालिद की सिफारिश पर एक बड़ी फर्म में आलातरीन ओहदा मिल गया था. अब मेरे पास किसी चीज की कमी नहीं थी. मैं एक हसीन और जवान दौलतमंद औरत का शौहर था.

3 साल पर लगा कर उड़ गए. फिर मैं महसूस करने लगा कि एक मर्द को महज औरत के शबाब की तलब ही नहीं होती, वह औरत से और भी बहुत कुछ चाहता है. मैं जो कुछ चाहता था, वह जोहरा मुझे न दे सकी थी. वह बीवी नहीं, महबूबा थी, दोस्त थी.

मैं ने उसे इशारों में बहुत कुछ समझाने की कोशिश की. उस ने या तो नहीं समझा, या समझा तो नजरअंदाज कर गई. मैं ज्यादती नहीं कर सकता था, इसलिए कि मुझे जो कुछ मिला था, वह सब उसी की बदौलत था. मैं ने हालात से समझौता कर लिया. फिर वह तिलिस्म टूटने लगा, जिस का मैं कैदी था. उजली और साफ रंगत, हुस्न और जिस्मानी कशिश का जोर टूटने लगा. मुझे सनोवर की याद आ जाती. मैं सनोवर से शादी कर लेता तो शायद वह सब मिल जाता, जो एक शौहर चाहता है.

कदूस के घर के सामने गाड़ी रुकी तो मैं ने उस घर की तरफ देखा. वह एक घर था, मामूली सा. जोहरा ने मुझे रास्ते में बताया था कि यूके से वापसी के बाद कदूस को बहुत अच्छा जौब नहीं मिल सका. घंटी बजाने के चंद लम्हे बाद दरवाजा खुला तो नजरों के सामने कदूस था. हम दोनों एकदूसरे से बड़ी गर्मजोशी से बगलगीर हो गए. कदूस मेरा हाथ पकड़ कर अंदर ले गया. मेरे पीछेपीछे जोहरा थी. घर में दाखिल होते ही मेरी अजीब सी कैफियत हुई. उस घर की फिजा में एक ऐसी महक थी, जो सिर्फ और सिर्फ औरत के वजूद से फूटती है. ऐसी महक मेरे घर की फिजा में क्यों नहीं है? आखिर मेरे घर में भी तो एक औरत रहती है. मेरा घर भी खुशबुओं में बसा रहता है, मगर वे खुशबुएं तो बाजार से खरीदी हुई होती हैं.

बैठक में सनोवर अपने बच्चों के साथ हमारे स्वागत के लिए खड़ी थी. हम दोनों की निगाहें चार हुईं. मेरा खयाल था कि वह मुझे देख कर शायद अपने जज्बात पर काबू न पा सके, मगर उस की आंखों में कुछ नहीं था. उस का चेहरा कोरे कागज की तरह नजर आ रहा था. वह इस तरह मिली, जैसे पहली बार मिल रही हो.

मैं यह सोचे बगैर न रह सका कि क्या उस के दिल के किसी कोने में मेरी तस्वीर नक्श नहीं है? क्या ऐसा मुमकिन है कि औरत अपनी पहली मोहब्बत को भुला दे? कहीं ऐसा तो नहीं कि वह औरों के सामने अपनी मोहब्बत का इजहार न करना चाहती हो? औरत से बड़ा अदाकार कौन हो सकता है?

‘‘क्या तुम पार्टी में नहीं चल रही हो?’’ जोहरा ने हैरत से पूछा, ‘‘तुम अभी तक तैयार नहीं हुई?’’

‘‘मैं पार्टी में चल रही हूं और तैयार हूं.’’ सनोवर ने मुसकरा कर जवाब दिया.

‘‘ऐं! इस हालत में?’’ जोहरा ने उसे नीचे से ऊपर तक हैरानी से देखा.

सनोवर गुलाबी रंग की साड़ी और उसी रंग का ब्लाउज पहने थी. उस के चेहरे पर मेकअप बिलकुल नहीं था. उस ने अपने लंबे, स्याह बालों का जूड़ा बांध रखा था. गले में मोतियों का एक हार और कानों में टौप्स थे. वह सादगी की मूरत बनी हुई थी. दूसरी तरफ जोहरा ब्यूटीपार्लर से सज कर आई थी. उस ने गहरे भूरे रंग की साड़ी और बगैर आस्तीन का नीची तराश का ब्लाउज पहना हुआ था. वह उस लिबास में अपने हुस्न और बदन की नुमाइश कर रही थी. मैं ने उन दोनों की तुलना की. मुझे जोहरा के मुकाबले सनोवर कहीं ज्यादा हसीन लगी. उस की सादगी के आगे जोहरा का हुस्न हलका पड़ गया था.

फिर सनोवर का कोई एक रूप नहीं था. उस का हर रूप अपने अंदर दिलकशी लिए हुए था. एक रूप तो ऐसी औरत का, जो घर की चारदीवारी में अपने आप को खुश और संतुष्ट महसूस करती है. दूसरा रूप एक वफादार बीवी का था. वह जब भी अपने हमसफर की तरफ देखती, उस की आंखों में मोहब्बत का नूर फैला हुआ होता था. उस की मोहब्बत और नजरें जैसे सिर्फ कदूस की अमानत हों. उस ने एक बार भी मेरी तरफ मोहब्बत भरी नजर से नहीं देखा था. उस ने जब भी मुझ से कोई बात की, या मेरी तरफ देखा तो एक अजनबी औरत की तरह. सनोवर एकदम से बदल जाएगी, मैं ने सोचा भी नहीं था.

उस का तीसरा रूप एक मां का था. उस के 2 प्यारेप्यारे बच्चे थे. उन बच्चों से उस घर में रौनक थी और वे उस गुलशन के महकते हुए फूल थे. मेरे भी दिल में बाप बनने की ख्वाहिश मौजूद थी. लेकिन जोहरा ने मुझ से कह दिया था कि वह 10 सालों तक मां बनने के बारे में सोच भी नहीं सकती. वह पहले जिंदगी के मजे लेना चाहती थी, इसलिए उसे बच्चों का झंझट पसंद नहीं था. बहरहाल, सनोवर के अनगिनत रूप थे. उस का हर रूप इतना हसीन था कि मुझे एक पछतावा सा हो रहा था और कदूस पर रश्क आ रहा था कि उसे कैसा अनमोल मोती मिल गया था.

पार्टी से वापसी पर जब हम ने उन्हें उन के घर छोड़ा तो उन्होंने रस्मी तौर पर किसी रोज घर आ कर खाना खाने की दावत दी. जोहरा बोली, ‘‘हम किसी रोज अचानक आ जाएंगे और चल कर किसी होटल में डिनर लेंगे.’’

‘‘होटल में क्यों? मैं घर पर ही खाना बना लूंगी.’’ सनोवर ने जवाब दिया.

‘‘घर पर क्या खाक लुत्फ आएगा?’’ जोहरा बोली, ‘‘होटल में तो पसंद की बहुत सारी डिशें मिल जाती हैं.’’

‘‘मैं तुम्हें तुम्हारी पसंद की सारी डिशें पका कर खिलाऊंगी.’’

एक दिन जोहरा उस का इम्तिहान लेने के लिए उस के यहां पहुंच गई. उस ने मुर्ग बिरियानी, कोरमा, शामी कबाब और पुडिंग की फरमाइश कर दी. सनोवर खाना पकाने में जुट गई. वह बावर्चीखाने में अकेली ही सारा काम कर रही थी. मैं, जोहरा और कदूस बैठक में बैठे टीवी पर सीरियल देख रहे थे और बातें भी करते जा रहे थे. जोहरा एक बार भी उठ कर बावर्चीखाने में नहीं गई. वह घर में भी बावर्चीखाने में झांकती तक नहीं थी. मेरे घर में नौकर थे, जो चाय तक बना कर देते थे. मैं चाहता था कि जोहरा बावर्चीखाने में जा कर उस का हाथ न बंटाए, मगर बातें तो करे. फिर मुझे खयाल आया कि वह जा भी कैसे सकती है? बावर्चीखाने में कदम रखेगी तो उस का मेकअप गरमी से खराब हो जाएगा और उस के लिबास पर दागधब्बे भी तो पड़ सकते हैं. उसे हर वक्त अपने मेकअप और लिबास का खयाल जो रहता है.

खाने में चूंकि देर थी, इसलिए सनोवर चाय बना कर ले आई. वह पसीने से नहाई हुई थी. पसीने के साफ व शफ्फाक कतरे उस की सुराहीदार गरदन और चेहरे पर मोतियों की तरह दमक रहे थे. वह ट्रे तिपाई पर रख कर चाय बनाने के लिए बैठ गई. उस ने चाय बनाने से पहले साड़ी के पल्लू से गरदन और चेहरे पर से पसीना पोंछा. मुझे उस का यह रूप भी बहुत भाया.

आदमी की किस्मत उस के पसीने ही से लिखी होती है—जिस ने भी यह बात कही है, गलत नहीं कही. उस घर में जो रौनक, हुस्न और खुशबू थी, वह उसी पसीने की बदौलत ही थी.

जोहरा ने सरोवर की तरफ देखते हुए कदूस से कहा, ‘‘आप मेरी सहेली पर बहुत जुल्म कर रहे हैं.’’

‘‘कैसा जुल्म?’’ कदूस ने चौंक कर जोहरा की तरफ देखा, ‘‘क्या कोई अपनी बीवी पर जुल्म भी कर सकता है?’’

‘‘यह जुल्म नहीं तो और क्या है? घर में एक भी नौकर नहीं है,’’ जोहरा कहने लगी, ‘‘सनोवर न सिर्फ सारा दिन बावर्चीखाने में अकेली काम करती है, बल्कि दूसरे तमाम कामकाज भी खुद ही करती है. वह 2 बच्चों को भी संभालती है. इसी वक्त देखिए, पसीने में किस बुरी तरह भीग गई है. आप इस गरीब के लिए दो-एक नौकर भी नहीं रख सकते? हमें देखिए. हम सिर्फ मियांबीवी हैं, पर घर में 3 नौकर हैं, एक नौकरानी भी.’’

‘‘मैं ने कभी सनोवर को नौकर रखने से मना नहीं किया, बल्कि उस से कितनी बार कहा है कि कोई नौकर रख लो. मगर यह मेरी बात सुनती ही नहीं है.’’

‘‘जिस घर में औरत हो, उस घर में नौकर का क्या काम?’’ सनोवर ने प्यालियों में चाय उड़ेलते हुए कहा, ‘‘औरत अगर घर का काम नहीं करेगी तो फिर क्या करेगी? मेरे खयाल में एक औरत को सब से ज्यादा खुशी घर के कामकाज और शौहर की खिदमत से होती है.’’

‘‘गरमी और पसीने से तुम्हारा दम नहीं घुटता?’’ जोहरा ने ताज्जुब से पूछा.

‘‘इस पसीने से तो बदन हलका हो जाता है और एक ताजगी आ जाती है.’’ सनोवर ने जवाब दिया.

‘‘हिश…’’ जोहरा बोली, ‘‘तुम क्या से क्या हो गई हो?’’

‘‘मैं औरत हो गई हूं,’’ सनोवर हंस पड़ी, ‘‘और तुम बेगम साहिबा हो गई हो. इसलिए तुम्हें यह सब कुछ अजीब लग रहा है.’’

सनोवर के यहां से निकल कर घर वापस आते समय जोहरा बोली, ‘‘सनोवर शुरू से ही कंजूस रही है और फिर उन के माली हालात भी शायद अच्छे नहीं हैं. इसलिए वह नौकर नहीं रख रही है. आजकल नौकर भी तो खूब पैसे लेते हैं.’’

‘‘कदूस की तनख्वाह बहुत अच्छी है. वह मुझे बता रहा था कि नौकरी छोड़ कर कोई कारोबार शुरू करने वाला है,’’ मैं बोला, ‘‘सनोवर दरअसल एक घरेलू औरत बन गई है. देखो न, उस ने खाना भी कितना अच्छा और लजीज पकाया था. वह एक अच्छी बावर्चिन भी है.’’

जोहरा मेरी तरफ देख कर बोली, ‘‘तुम आज भी दकियानूसी के दकियानूसी ही हो.’’

सनोवर के यहां हमारा आनाजाना कुछ ज्यादा ही बढ़ गया था. मैं किसी न किसी बहाने जोहरा को उस के यहां ले जाता था. सनोवर और कदूस मेरे यहां सिर्फ एक बार आए थे. मैं सनोवर के यहां इसलिए भी जाने लगा था कि उस के बच्चे मुझ से बहुत हिलमिल गए थे. मैं चाहता था कि जोहरा के दिल में भी बच्चों की ख्वाहिश जाग उठे.

मालूम नहीं, एक दिन मुझे क्या हुआ. मैं दफ्तर से निकल कर न चाहते हुए भी सनोवर के घर की तरफ चल पड़ा, यह जानते हुए कि घर पर कदूस नहीं होगा. मैं सनोवर से बहुत सारी बातें करना चाहता था.

सनोवर मुझे देख कर हैरान सी हुई. मुझे अंदर बिठाने में उसे दुविधा हो रही थी. फिर भी मुझे बैठक में बिठाया तो उस ने किसी अजनबी औरत की तरह मेरी तरफ सवालिया नजरों से देखा, ‘‘क्या आप को उन से कुछ काम था?’’

‘‘मैं आज तुम से कुछ बातें करना आया हूं सनोवर.’’ मैं ने कहा.

‘‘मैं आप की सनोवर नहीं, कदूस की बीवी, उन के बच्चों की मां और इस घर की मालकिन हूं.’’ उस ने तेज लहजे में जवाब दिया.

‘‘मैं तुम्हें वही समझता हूं, जो तुम ने कहा है. मैं पुराने जख्म ताजा करने नहीं आया हूं.’’

‘‘फिर किसलिए आए हो?’’

‘‘मैं तुम से वह बात कहने आया हूं, जो किसी और से कह नहीं सकता हूं,’’ मैं ने टूटे हुए लहजे में कहा, ‘‘मेरे दिल को सुकून उसी वक्त मिल सकता है, जब मैं अपनी गलती को कबूल कर लूं.’’

‘‘मगर मैं सुन कर क्या करूंगी? मेरे दिल में तो सिर्फ कदूस की तसवीर नक्श है,’’ वह बोली, ‘‘क्या आप जोहरा जैसी हसीन और अमीर औरत को पा कर खुश नहीं हैं?’’

‘‘मुझे एक औरत कहां मिली है सनोवर?’’ मैं ने एक सर्द आह भरी, ‘‘बकौल तुम्हारे एक बेगम साहिबा, महबूबा और मौडल गर्ल मिली है. मुझे तो तुम जैसी औरत की तलाश थी. मैं ने तुम्हें खो कर बहुत बड़ी सजा पाई है. उस का खामियाजा आज तक भुगत रहा हूं. क्या तुम मुझे माफ कर सकोगी कि मैं ने जोहरा को पाने के लिए तुम से झूठ बोला, तुम्हें धोखा दिया.’’

‘‘मैं ने आप को उसी रोज माफ कर दिया, जिस रोज मैं कदूस की हो गई. उस रोज से न तो मैं ने कभी पीछे पलट कर देखा और न आप को याद किया. आप आइंदा कभी मुझ से इस बारे में बात न करें.’’

मैं थोड़ी देर के बाद उस के वहां से निकला तो मेरे दिलोदिमाग फूल की तरह हलके हो गए थे. सीने पर जो बोझ था, वह हट गया था.

मैं घर पहुंचा तो कदूस की गाड़ी कोठी के अहाते में खड़ी देखी. मेरे दिल में शिकस्त की लहर ने सिर उठाया. क्या वह मेरी गैरमौजूदगी में जोहरा से मिलने आता रहता है? जोहरा ने कभी मुझ से कदूस के आनेजाने के बारे में नहीं बताया. जोहरा उस से यकीनन मिलती होगी. कदूस ने मुझ से शादी से पहले झूठ कहा था कि उसे जोहरा से कभी मोहब्बत नहीं थी. उस की किसी वजह से जोहरा से शादी न हो सकी तो उस ने सनोवर से शादी कर ली. आज उन की मोहब्बत जाग उठी है.

दोनों बैठक में मौजूद थे. मैं दूसरे रास्ते से अपने बैडरूम में गया. अलमारी से पिस्तौल निकाल कर दबे पांव बैठक की तरफ बढ़ा. मैं दरवाजे के पास पहुंच कर रुक गया. कदूस अजीब से लहजे में कह रहा था, ‘‘मैं सनोवर से शादी कर के पछता रहा हूं. वह दकियानूसी औरत है. उसे घर, शौहर और बच्चों के सिवा किसी और चीज में दिलचस्पी नहीं है. न कपड़े पहनने का, न तफरीह और पार्टियों का. वह कहती है कि औरत का बनावसिंगार उस के शौहर के लिए होता है, न कि दुनिया वालों के लिए. मुझे तो तुम दोनों पर रश्क आता है, जो बेफिक्री की जिंदगी गुजार रहे हो. न बच्चे, न झमेले. होटलों में खाना. दावतों में शिरकत करना. एयाज बड़ा खुशनसीब है कि उसे तुम जैसी बीवी मिली.’’

यह सब सुन कर मैं उलटे पांव बैडरूम में लौट गया और पिस्तौल वापस अलमारी में रख दी. फिर सामने के दरवाजे से बैठक में चला गया. अजीब बात थी कि अब मुझे जोहरा से शिकायत नहीं रह गई थी.

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