Bihar News: पटना के बहुचर्चित गल्र्स हौस्टल कांड के गुनहगारों में रेपिस्ट से ले कर पुलिस अधिकारी, 2 प्राइवेट अस्पताल और पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार करने वाले डौक्टर तक शामिल पाए गए. लेकिन गिरफ्तारी केवल हौस्टल मालिक की हुई. मृतका नाबालिग थी, मामला पोक्सो का भी बन गया. पढ़ें, पूरी कहानी. कैसे, कब, क्या हुआ और कौनकौन हैं आरोपी?

बिहार के जहानाबाद की रहने वाली गायत्री भी त्रद्गठ्र्ठं श्रेणी की ही थी. करिअर और जीवन को बेहतर बनाने के सपने उस ने भी देखे थे. पटना में रह कर मैडिकल की पढ़ाई के लिए नीट की तैयारी कर रही थी. इंटरमीडियट की परीक्षा भी सिर पर थी. निश्चित तौर पर उस के जेहन में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलौजी के अलावा और कुछ नहीं था.

वह 45 किलोमीटर की दूरी तय कर लोकल ट्रेन से 5 जनवरी, 2026 की शाम को 3 बजे के करीब अपने शंभु हौस्टल पहुंच गई थी, जो चित्रगुप्त नगर थाना क्षेत्र के मुन्नाचक में है. रात को 9 बजे अपनी मम्मी से उस की फोन पर बात भी हुई थी. उस ने ठीकठाक हौस्टल पहुंचने की जानकारी मम्मी को दे दी थी. अगले रोज 6 जनवरी, 2026 की शाम को गायत्री के फेमिली वालों को एक अनजाने फोन नंबर से कौल मिली कि उन की बेटी गायत्री की तबीयत खराब है. उसे डा. सहजानंद हौस्पिटल में भरती करवाया गया है.

फोन करने वाला न तो हौस्टल का कोई स्टाफ था और न ही उस का संचालक या मालिक ही था. इस पर गायत्री के पेरेंट्स को हैरानी हुई. वे घबरा गए. साइबर फ्रौड की आशंका से घिर गए कि किसी ने फोन गलत मकसद से तो नहीं किया है. फिर भी उस के फेमिली वालों ने पटना में रह रहे अपने एक परिचित को फोन कर हौस्पिटल भेज दिया. परिचित कुछ समय में ही हौस्पिटल पहुंच गए, जो हौस्टल के बगल में ही है. उन्होंने वहां गायत्री को एडमिट पाया, लेकिन वह बेहोश थी.

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